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अयोध्या में 50-60 मस्जिद, मुस्लिम कहीं भी नमाज़ पढ़ सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट से बोले रामलला के 93 वर्षीय वकील

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (15 अक्टूबर 2019) को अयोध्या विवाद की 39वें दिन की सुनवाई हुई। रामलला के 93 वर्षीय वकील के पराशरण ने दलीलें रखी। उन्होंने कहा कि एक बार य​दि मंदिर बन गया तो वो हमेशा मंदिर ही रहता है। उन्होंने सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन के उस बयान पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि एक बार अगर कहीं मस्जिद बन जाए तो वहाँ मस्जिद ही रहता है। पराशरण ने कहा कि वह विशेषज्ञ नहीं हैं, इसलिए इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते।

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ रोजाना इस मामले की सुनवाई कर रही है। पीठ में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई,जस्टिस एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एसए नज़ीर शामिल हैं। सीजेआई ने कहा कि बुधवार को सुनवाई का आखिरी दिन होगा।

इससे पहले पीठ के समक्ष दलील रखते हुए पराशरण ने कहा कि अयोध्या में 50-60 मस्जिद हैं और नमाज़ कहीं भी अदा की जा सकती है, लेकिन यह राम का जन्मस्थान है, इसे बदला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी को भी भारत के इतिहास को तबाह करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। कोर्ट को इतिहास की गलती को ठीक करनी चाहिए। एक विदेशी भारत में आकर अपना कानून नहीं थोप सकता है। उन्होंने अपनी दलील की शुरुआत भारत के इतिहास के साथ की। न्यायालय के निर्देश के बाद वकील वीपी शर्मा ने लिखित दलील के साथ कुरान के अंग्रेजी अनुवाद की कॉपी रजिस्ट्री को सौंपी।

‘अतिथि देवो भव’ की भारतीय प्रवृत्ति का जिक्र करते हुए पराशरण ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हिन्दुओं ने आज तक भारत से बाहर कहीं जाकर तबाही नहीं मचाई लेकिन बाहर से आक्रांताओं ने आकर भारत में तबाही मचाई। उन्होंने कहा कि यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का समय है। उन्होंने भारत को सभ्य देश बताते हुए याद दिलाया कि कैसे सिकंदर, मुग़ल और तुर्क सहित कई आक्रांताओं ने यहाँ तबाही मचाई।

पीठ ने पराशरण से इस दौरान कई सवाल भी किए। बहस के दौरान पूरा कोर्ट रूम तब ठहाकों से गूॅंज उठा जब चीफ जस्टिस ने धवन से पूछा कि पूछ लिया कि क्या वह संतुष्ट हैं? असल में सोमवार को सुनवाई के दौरान नाराज़ धवन ने जजों से कहा था कि सिर्फ़ मुस्लिम पक्ष से ही सवाल पूछा जाता है और हिन्दू पक्ष से सवाल नहीं पूछे जाते। इस पर कल पीठ ने कुछ नहीं कहा था। हालाँकि पराशरण ने धवन के बयान को गैर-जरूरी बताते हुए आपत्ति जाहिर की थी।

सोमवार (अक्टूबर 14, 2019) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान धवन ने कहा था कि मुग़ल आक्रांता औरंगजेब उदार शासकों में से एक था। उन्होंने कहा कि राम का जन्म बाबरी मस्जिद के मुख्य गुम्बद के नीचे हुआ था, महज ऐसा मान लेने से यह सच्चाई नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि आस्था रखने भर से इस स्थल पर हिन्दुओं का स्वामित्व साबित नहीं हो जाता। हालाँकि, उनके औरंगजेब वाले बयान को लेकर उनकी सोशल मीडिया काफ़ी आलोचना हुई।

उधर, अयोध्या में धारा 144 लागू कर के सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सीजेआई रंजन गोगोई के बयान के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि बुधवार को ही इस मामले की सुनवाई का अंतिम दिन होगा और उसके बाद कोर्ट फ़ैसला लिखने में समय लेगा।

फारूक अब्दुल्ला की बहन और बेटी हिरासत में, लाल चौक पर 370 हटाने का कर रहीं थी विरोध

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला की बहन सुरैया और बेटी साफिया को हिरासत में लिया गया है। सुरैया और साफिया को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया।

बता दें कि फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला पहले से ही हिरासत में हैं। फारूक को पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत हिरासत में रखा गया है। घाटी में मंगलवार को (अक्टूबर 15, 2019) को सुरैया और साफिया के नेतृत्व में पहली बार विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। प्रदर्शन श्रीनगर के महत्वपूर्ण लाल चौक पर किया गया।

सुरैया और साफिया के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शन में शामिल महिलाएँ जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेश में बाँटने का विरोध कर रही थीं। होर्डिंग्स के साथ ये महिलाएँ लाल चौक पर प्रताप पार्क में इकट्ठा हुई थीं। इसके बाद उन्होंने प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने करीब एक दर्जन से ज्यादा महिलाओं को हिरासत में ले लिया।

इस बीच, कश्मीर घाटी में पोस्टपेड मोबाइल सेवा बहाल होने के कुछ ही घंटों बाद एहतियात के तौर पर एसएमएस सेवा बंद कर दी गई। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। बता दें कि राज्‍य में 5 अगस्‍त से बंद मोबाइल सेवा सोमवार (अक्‍टूबर 14, 2019) से बहाल की गई थी। लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर सोमवार शाम 5 बजे एसएमएस सेवा बंद कर दी गई। सोमवार को शोपियां जिले में दो आतंकवादियों ने राजस्थान के एक ट्रक ड्राइवर की गोली मारकर हत्या कर दी और एक बगीचे के मालिक पर हमला किया। बताया जा रहा है कि इस घटना में शामिल एक आतंकवादी पाकिस्तानी था।

स्कूल के बच्चों से करवाई जाती थी मदरसे की ‘इस्लामिक’ प्रार्थना, शिकायत पर प्रिंसिपल फुरकान अली सस्पेंड

उत्तरप्रदेश के पीलीभीत में हिन्दू बच्चों को जबरदस्ती इस्लामिक प्रार्थना करवाने का मामला उजागर हुआ है। हैरानी की बात ये है कि इसका इल्जाम ग्यासपुर प्राथमिक विद्यालय द्वितीय के प्रिंसिपल पर ही लगा है। प्रिंसिपल का नाम फुरकान अली है। बताया जा रहा है कुछ दिन पहले इस स्कूल में मदरसे की प्रार्थना करवाते हुए एक वीडियो वायरल हुई थी। जिसके बाद विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इसकी शिकायत तहसील के एसडीएम से की। हिन्दू संगठनों की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया। अब एसडीएम ने खंड शिक्षाअधिकारी उपेंद्र विश्वकर्मा को पूरे मामले की जाँच सौंपी हैं।

हालाँकि, फुरकान अली के अनुसार उनके ऊपर लगे सभी आरोप फर्जी हैं। उनका मत है कि उनके स्कूल में सरस्वती वंदना भी करवाई जाती है, मगर स्कूल में 90 फीसद बच्चे मुस्लिम होने की वजह से उनके आग्रह पर इस्लाम की प्रार्थना करवाई जाती है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार फुरकान अली ने अपने निलंबन पर कहा, “विद्यालय में हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के बच्चे पढ़ते हैं। इसी लिहाज से यह दुआ वर्ष 2011 से करवा रहा हूँ। परिषदीय विद्यालय की पुस्तक में भी यह दुआ छपी हुई है। मेरी बात न सुनकर एकतरफा कार्रवाई की गई है।”

उल्लेखनीय है कि फुरकान अली के उक्त बयान के बाद विभाग के अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेर में आ गई है। सवाल उठ रहे हैं कि जब आए दिन अधिकारी स्कूल का निरीक्षण करते थे, तो फिर ये मामला उजागर क्यों नहीं हुआ?

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

यहाँ बता दें कि साल 2011 से स्कूल में कराई जाने वाली मदरसे की प्रार्थना को करने में जब कुछ बच्चों को परेशानी हुई, तब उन्होंने अपने माता-पिता से इसकी शिकायत की। इसके बाद जब अभिभावकों ने स्कूल पहुँचकर इस पर आपत्ति जताई तो अधिकारियों ने उनकी शिकायत को नजरअंदाज कर दिया। इसके अलावा पूरे मामले में सबसे अचंभित करने वाली बात ये भी है कि स्कूल के नजदीक ही खंड शिक्षा अधिकारी का कार्यालय है, जहाँ वे अपने विभागीय कार्य करते हैं। फिर भी उन्हें मदरसे की प्रार्थना के संबंध में कुछ नहीं पता था।

अब जब इस पूरे मामले में प्रमाण सहित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, तो अधिकारी मामले को दबाना चाहते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी 10 दिन पूर्व ही हिन्दू वाहिनी के कार्यकर्ता तहसील के एसडीएम के पास मामले को लेकर पहुँचे और पूरे प्रकरण से उन्हें अवगत करवाया। अब इसी शिकायत के आधार पर फुरकान अली का निलंबन हुआ है।

उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस को एक और झटका, 3 बार सांसद रहीं राजकुमारी रत्ना भाजपा में शामिल

उत्तर प्रदेश में एक और बड़ी कॉन्ग्रेस नेत्री ने भाजपा का दामन थाम लिया है। कालाकांकर (लखनऊ और प्रयागराज के बीच) के राजघराने की राजकुमारी रत्ना सिंह ने भाजपा की सदस्यता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में ग्रहण की है। अपने समर्थकों सहित प्रतापगढ़ के एक चुनावी कार्यक्रम में भाजपा में आने वालीं राजकुमारी रत्ना 1996, 1999 और 2009 में संसद की सदस्य रह चुकी हैं

21 अक्टूबर को प्रतापगढ़ विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है। ऐसे में यह कॉन्ग्रेस के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। इस मौके पर राजकुमारी रत्ना के पुत्र राजकुमार भुवन्यु सिंह भी मौजूद रहे। प्रदेश भाजपा के कई बड़े नेताओं का जमघट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के अपना दल प्रत्याशी राजकुमार के लिए चुनावी जनसभा हेतु उपस्थित था। उसी जनसमूह के समक्ष राजकुमारी रत्ना के भाजपा सदस्यता ग्रहण करने की घोषणा की गई।

राजकुमारी रत्ना के पिता राजा दिनेश सिंह दो बार विदेश मंत्री भी रह चुके हैं। एक बार 1969-70 के समय इंदिरा गाँधी की सरकार में और 1993-95 में पीवी नरसिम्हा राव सरकार में।

कालाकांकर राजघराना उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस छोड़ने वाला दूसरा राजघराना है। इसके पहले अमेठी के राजा संजय सिंह ने भी इसी साल लोकसभा चुनावों के बाद पार्टी की सदस्यता और राज्यसभा से त्यागपत्र दे दिया था। यही नहीं, कॉन्ग्रेस की ‘VIP’ रायबरेली सीट की विधायक अदिति सिंह के भी तेवर बागी हैं, और उनके भाजपा में जाने की सुगबुगाहट जारी है

मुर्शिदाबाद हत्याकाण्ड: हत्यारे ने ₹24000 के लिए सबको काटा, बंगाल CID का दावा

पश्चिम बंगाल में आरएसएस कार्यकर्ता और उसके परिवार की बेहद दर्दनाक हत्या के मामले को बंगाल पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। बता दें कि 8 अक्टूबर 2019 को मुर्शिदाबाद के जियागंज इलाके में रहने वाले बंधु प्रकाश पाल, उनकी 7 माह की गर्भवती पत्नी और 8 साल के बच्चे की हत्या कर दी गई थी।

इस घटना के बाद बंगाल में लगातार होती राजनीतिक हत्याओं के कारण पूरे देश में ममता बनर्जी की आलोचना शुरू हो गई। जिस पर लगाम लगाने के लिए अब मुर्शिदाबाद में हुए ट्रिपल मर्डर केस को बंगाल पुलिस ने सुलझाने का दावा करते हुए मंगलवार को एक आरोपित को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार आरोपित का नाम उत्पल बहेरा बताया जा रहा है।

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर एक बार फिर निशाना साधा था। बंगाल भाजपा प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट भी किया, “यह क्या हो रहा है ‘दीदी’ आपके राज में।” विजयवगीर्य ने मुर्शिदाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यकर्ता बंधु प्रकाश पाल, उनकी गर्भवती पत्नी और उनके आठ वर्ष के बच्चे की क्रूर हत्या के संदर्भ में यह आरोप लगाया था।

भाजपा नेता ने आगे कहा, “इससे बुरा और क्या हो सकता है।” उन्होंने कहा कि यह घटना बताती है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस शासित राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बंगाल सीआईडी के मुताबिक, अभी तक की जाँच में उसे जो अहम सबूत मिले हैं, उससे साबित होता है कि ये ट्रिपल मर्डर निजी कारणों से ही की गई। इनका कोई राजनीतिक आधार नहीं है। सीआईडी टीम का कहना है कि जाँच के दौरान पता चला कि बंधु प्रकाश पाल गैरकानूनी तरीके से फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम चला रहा था। पुलिस ने उसके घर से कई पासबुक भी बरामद किए हैं। CID का दावा है कि इन पासबुक्स से मालूम चला कि बंधु जो फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम चला रहा था, वो काफी हद तक चिटफंड जैसा ही था, लेकिन इनमें रकम कम होती थी। ज्यादातर आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब लोग बंधु पाल के जरिए अकाउंट खोलते थे।

मीडिया रिपोर्ट में ऐसा बताया जा रहा है कि गिरफ्तार आरोपित उत्पल ने पुलिस पूछताछ में अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उत्पल का कहना है उसने बंधु प्रकाश पाल की इंशोरेंस कंपनी में पैसे लगाए हुए थे। आरोपित उत्पल ने पुलिस को बताया कि उसे बंधु प्रकाश से 24000 रुपए लेने थे। लेकिन वह उसके रुपए वापस नहीं कर रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपित उत्पल का कहना है कि वह जब भी बंधु प्रकाश पाल से अपने पैसे माँगता वह उसे गालियाँ देता था। उसने बदला लेने के लिए बंधु प्रकाश पाल के पूरे परिवार को खत्म कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपित उत्पल ने ये भी बताया कि बंधु के घर दाखिल होते वक्त पड़ोसी कृष्णा सरकार और रतन कुमार दास ने उसे देखा था। पुलिस इन दोनों से भी पूछताछ करेगी।

पहली को जलाया, दूसरी को पीट कर भगाया, तीसरी की जीभ ही काट डाली: मिलिए अयूब मंसूरी से

कुछ दिनों पहले चौंकाने वाली ख़बर आई थी कि गुजरात के अहमदाबाद में अयूब नाम के शख्स ने झगड़े के बाद अपनी पत्नी तसलीम से फ्रेंच किस माँगा। महिला को लगा कि सारे झगड़े भूल उसका शौहर समझौते के लिए तैयार है। लेकिन जैसे ही तसलीम ने अपनी जीभ बाहर निकाली, अयूब ने उसकी जीभ चाकू से काट दी। अब इस मामले में नया खुलासा हुआ है। पुलिस ने आरोपित अयूब को गिरफ़्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान उसने अजीबोगरीब बातें कही है।

अयूब ने पुलिस को बताया है कि 9 अक्टूबर को फ्रेंच किस करते समय बीवी और उसकी जीभ एक-दूसरे से चिपक गई थी और इसी वजह से उसे मजबूरन जीभ काटनी पड़ी। पुलिस को आशंका है कि वो बरगलाने के लिए ऐसा बोल रहा है। उसने बताया है कि वह बीवी से किस करने के दौरान काफ़ी उत्तेजित हो गया था और उत्तेजना के दौरान दोनों की जीभ एक-दूसरे से चिपक गई थी। बकौल आरोपित, जीभ अलग करने की कोशिश में उसकी पत्नी की जीभ कट गई।

अयूब मंसूरी ने पुलिस को बताया कि जब उसे अपनी पत्नी की जीभ कटने का एहसास हुआ, तब वह काफ़ी घबरा गया और ख़ून बहते देख उसे भागने में भलाई दिखी। उसने बीवी को कमरे में बंद किया और फरार हो गया। उधर पीड़िता तसलीम अभी तक कुछ बोल नहीं पा रही है। वह खाना भी नहीं खा पा रही है। वह अभी भी अस्पताल में भर्ती है। बता दें कि तसलीम आरोपित की तीसरी पत्नी है और अयूब उसका दूसरा पति है।

यह भी पता चला है कि अयूब ने अपनी पहली पत्नी को जला कर मार डाला था। वह अपनी तीसरी पत्नी तसलीम की भी आए दिन पिटाई करता था। उसने मुंबई की एक महिला से दूसरी शादी की थी। वह अपनी दूसरी पत्नी की अक्सर पिटाई करता था, जिसके कारण वह भाग निकली। अयूब को फ़िलहाल साबरमती जेल में रखा गया है। तसलीम का कहना है कि उसने किस के लिए जैसे ही अपनी जीभ बाहर निकाली, अयूब उसे काट कर फरार हो गया।

महाराष्ट्र चुनाव: BJP के संकल्प पत्र में वीर सावरकर को भारत रत्न और 1 करोड़ नौकरियों का वादा

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार (अक्टूबर 15, 2019) को घोषणापत्र जारी किया। इस घोषणापत्र में बीजेपी ने स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) को भारत रत्न दिलाने का वादा किया है। बीजेपी और महाराष्ट्र में उसकी सहयोगी शिवसेना लंबे समय से सावरकर को भारत रत्न देने की वकालत करते रहे हैं। घोषणापत्र में सावरकर के अलावा महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्री बाई फुले और को भी भारत रत्न दिलाने की भी बात कही गई है।

घोषणा पत्र जारी करने के मौके पर बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा, राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राज्य बीजेपी अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल समेत बीजेपी के कई बड़े नेता मौजूद थे। घोषणापत्र में पाँच साल में 1 करोड़ नौकरियों समेत कई बड़े वादे किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 2022 तक हर घर को पीने का शुद्ध पानी मुहैया कराने, किसानों को 12 घंटे बिजली देने जैसे कई वादे किए गए हैं।

इस दौरान फडणवीस ने कहा कि 1 करोड़ परिवारों को महिला बचत समूह से जोड़कर रोजगार के विशेष अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। घोषणापत्र में पार्टी ने पाँच साल में महाराष्ट्र को सूखा मुक्त करने की भी बात कही गई है। 2022 तक प्रत्येक घर को पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जाएगा। मूलभूत सुविधाओं के लिए केंद्र सरकार के सहयोग से 5 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा। 

घोषणापत्र में कहा गया है कि राज्य की सभी सड़कों की स्थायी मरम्मत और देखभाल के लिए स्वतंत्र तंत्र का निर्माण किया जाएगा और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से सभी बस्तियों को 12 महीने चलने वाली सड़कों से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही इसमें कहा गया है कि भारत नेट और महाराष्ट्र नेट के माध्यम से संपूर्ण महाराष्ट्र को इंटरनेट से जोड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना और महात्मा फुले जन आरोग्य योजना से कोई भी वंचित न रहे यह सुनिश्चित किया जाएगा।

वामपंथियों के विरोध की सजा: जब इंदिरा सरकार ने अभिजीत बनर्जी को तिहाड़ में डाला था

भारतीय मूल के इकोनॉमिस्ट अभिजीत बनर्जी को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला है। उनकी पत्नी एस्थर डुप्लो को भी अर्थशास्त्र का नोबेल मिला। दोनों पति-पत्नी को नोबेल मिलने के साथ ही अभिजीत बनर्जी के बयान सुर्खियाँ बनने लगे। वर्तमान आर्थिक मंदी से जुड़े बयानों को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा जाने लगा। यहाँ तक कि उनकी माँ के बयानों को लेकर भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया गया। कॉन्ग्रेस खेमे में एक ख़ुशी की लहर दौड़ी। पार्टी नेता कॉन्ग्रेस और बनर्जी के संबंधों को हाइलाइट करते हुए फूले नहीं समा रहे।

इसी बीच अभिजीत बनर्जी का इतिहास भी खंगाला जाने लगा और कुछ ऐसी बातें भी पता चलीं, जिसे कॉन्ग्रेस के लोग सुनना पसंद नहीं करेंगे। अभिजीत बनर्जी जेएनयू में पढ़ाई कर चुके हैं और यहाँ पढ़ते हुए वह तिहाड़ जेल भी जा चुके हैं। किस्सा कुछ यूँ है कि 1982-83 में जेएनयू में एक बड़ा फेरबदल हुआ। वामपंथ का गढ़ माने जाने वाले इस विश्वविद्यालय में पहली बार ऐसा हुआ कि चुनाव में वामपंथी समूह को बड़ी हार मिली। इससे जेएनयू प्रशासन भी ख़ुश नहीं था। वामपंथ के किले में हुई हार को कैम्पस में कई प्रभावशाली लोग पचा नहीं पा रहे थे।

उस समय एनआर मोहंती जेएनयू छात्र संगठन के अध्यक्ष चुने गए थे। मोहंती बाद में पत्रकारिता की दुनिया से जुड़े और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के साथ एक दशक तक जुड़े रहे। क़रीब 5 वर्ष उन्होंने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में अपनी सेवा दी। अभिजीत बनर्जी मोहंती के बड़े समर्थक थे। जब वामपंथी उनका विरोध कर रहे थे, तब अभिजीत बनर्जी ने मोहंती का समर्थन किया था। एनआर मोहंती को कैम्पस से निष्कासित भी कर दिया गया था। ये विवाद एक छात्र को हॉस्टल से निकाले जाने के बाद शुरू हुआ था। जेएनयू प्रशासन ने उक्त छात्र पर दुर्व्यवहार का आरोप लगा कर निकाल दिया था, जबकि छात्रों की माँग थी कि पहले जाँच की जाए।

जेएनयू प्रशासन ने उक्त छात्र के कमरे में डबल लॉक लगवा दी थी। स्टूडेंट्स ने लॉक तोड़ कर उक्त छात्र की एंट्री कराई, जिसके बाद बवाल मच गया। इसलिए मोहंती को कैम्पस से निष्कासित किया गया था। इसके विरोध में छात्रों ने कुलपति का घेराव किया। अंत में दिल्ली पुलिस को दखल देना पड़ा और क़रीब 700 छात्रों को गिरफ़्तार कर के ले जाया गया। इन छात्रों में 250 लड़कियाँ थीं। अभिनीत बनर्जी को भी इसी प्रकरण में जेल में डाला गया था। उस समय इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार चल रही थी।

अभिजीत बनर्जी को 10 दिनों तक जेल में रहना पड़ा था। उन पर ‘हत्या की कोशिश’ के आरोप लगाए गए थे। कई छात्रों सहित उनकी पिटाई भी की गई थी। शायद कॉन्ग्रेस इस प्रकरण को याद नहीं करना चाहे, क्योंकि ‘न्याय योजना’ पर बनर्जी के मार्गदर्शन पर छाती चौड़ी कर रही पार्टी अपने सरकार के दौरान हुई इस घटना से कन्नी ही काटना चाहेगी।

कर्जमाफी के बाद अब सिंधिया ने ट्रांसफर-पोस्टिंग पर कमलनाथ सरकार को घेरा

मध्य प्रदेश में 15 सालों की राजनीतिक वनवास के बाद सत्ता में आई कॉन्ग्रेस के दिग्गजों के बीच आपसी तकरार थमने का नाम नहीं ले रही है। दिग्विजय सिंह के कमलनाथ सरकार के मंत्रियों को लिखे पत्र के बाद शुरू हुई बयानबाजी अब चरम पर है। प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एक के बाद एक लगातार वार किए जा रहे हैं। हाल ही में बाढ़ राहत और कर्जमाफी को लेकर अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़े करने वाले सिंधिया ने अब राज्य सरकार की ट्रांसफर और पोस्टिंग पर सवाल उठाए हैं।

सिंधिया इन दिनों ग्वालियर-चंबल संभाग के दौरे पर हैं। इस दौरान वे चंबल संभाग क्षेत्र के मुरैना में पार्टी के कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर रहे थे। कार्यकर्ताओं ने मुलाकात के दौरान ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर शिकायत की तो सिंधिया ने कमलनाथ सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “ट्रांसफर- पोस्टिंग का क्या हाल है वो तो सब जानते ही हैं। मैं आपसे ये कहूँगा कि आप काम पर ध्यान दें।” 

ऐसा माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर सिंधिया न केवल कमलनाथ पर, बल्कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पर भी निशाना साध रहे हैं। बता दें कि दिग्विजय सिंह को प्रदेश का ‘मुख्यमंत्री’ भी माना जाता है। पिछले दिनों प्रदेश के ही वन मंत्री उमंग सिंघार ने अपनी ही सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्वियज सिंह पर्दे के पीछे से राज्य की कमलनाथ सरकार को चला रहे हैं और यह बात कार्यकर्ताओं से लेकर सभी नेताओं को पता है। साथ ही उन्होंने कहा था कि अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर मंत्रियों को दिग्विजय के पत्र आते हैं।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले ही सिंधिया ने कमलनाथ सरकार पर कर्जमाफी को लेकर निशाना साधते हुए कहा था कि सरकार ने 2 लाख रुपए तक के कर्जमाफी का वादा किया था, लेकिन अभी तक सिर्फ 50 हजार रुपए के ही कर्ज माफ हुए हैं। दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह ने किसानों की कर्जमाफी पूरी तरह से न होने पर राहुल गाँधी को जनता से माफी माँगने तक के लिए कह दिया था।

रामलीला के दौरान 6 युवकों ने महिलाओं से की छेड़खानी, अरबाज और असलम गिरफ़्तार

उत्तर प्रदेश के एटा में रामलीला के दौरान एक महिला के साथ बदसलूकी करने पर पुलिस ने दो मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान अरबाज और असलम के रूप में हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महिला अपने परिवार के साथ रामलीला ग्राउंड में रामलीला देखने गई थी। तभी वहाँ कुछ लड़कों ने उसके साथ बदसलूकी की। घटना के प्रकाश में आते ही वहाँ मौजूद लोग गुस्से से भर गए। मामले की सूचना देकर तुरंत पुलिस को बुलाया गया और दो युवकों की गिरफ्तारी हुई, जबकि 4 भागने में सफल रहे।

पत्रिका द्वारा पोस्ट की गई वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस इनमें से एक आरोपित को बाइक पर बैठाकर ले जा रही है और आगे पीछे 2 पुलिस वाले बैठे हैं। वीडियो के अंत में एक युवक आकर बताता है कि महिला के साथ बदतमीजी करने वालों में 6 लड़के शामिल थे। जिनसे परेशान होकर पुलिस को बुलाया गया।

युवक ने कहा, “कुछ 5-6 लड़के आए थे और वो छेड़खानी कर रहे थे। वे मोहम्मदन लड़के थे। 2 लोगों को पकड़ा है और चार फरार हैं।” पुलिस का कहना है कि मामले में जाँच की जा रही है और साथ ही गिरफ्तारी से पहले फरार हुए 4 युवकों की तलाश हो रही है।