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बिहार: मवेशी चोर नौशाद कुरैशी सहित 3 को लोगों ने पीटकर मार डाला, एक गंभीर

बिहार में मवेशी चोरी के आरोप में 3 लोगों की पीट-पीटकर मार डालने की ख़बर सामने आई है। घटना सारण ज़िले के बनियापुर गाँव की है। स्थानीय लोगों के मुताबिक तीनों मवेशी चोर थे। पुलिस के अनुसार, घटना शुक्रवार सुबह करीब 4:30 बजे की है। ग्रामीणों ने कथित रूप से मवेशियों को ले जा रही पिकअप वैन के साथ चार लोगों को पकड़ लिया और उनकी जमकर पिटाई की। 

पुलिस ने चारों को अस्पताल पहुँचाया। डॉक्टरों ने बताया कि दो की मौत अस्पताल लाए जाने से पहले ही हो गई थी। एक ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। एक अन्य गंभीर रूप से घायल है और फ़िलहाल उसका इलाज बनियापुर स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है। मृतकों की पहचान नौशाद क़ुरैशी, राजू नट और वीरेश नट के रूप में की गई है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, रात के करीब 1 बजे चारों मवेशी चोर अपनी पिकअप वैन से गाँव में दाखिल हुए। कथित तौर पर तस्करों ने पहले बुधु राम की चार बकरियाँ चुरा ली। फिर भैंस चुराने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान कुछ ग्रामीण जग गए। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कथित पशु तस्करों को पीछा कर पकड़ लिया और उनकी लाठी-डंडों से पिटाई शुरू कर दी।

कथित पशु तस्करों के ख़िलाफ़ ग्रामीणों ने मामला दर्ज करवाया है। वहीं, कथित पशु तस्करों के परिजनों ने भी ग्रामीणों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज कराई है। मृतकों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए हैं। पुलिस तीनों कथित पशु तस्करों के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जाँच कर रही है।

निकाह से किया इनकार… तो प्रेमी रफ़ीक ने गला घोंटकर मार डाला

पिछले दिनों मध्य प्रदेश से भाग कर राजस्थान के अजमेर आई एक महिला की हत्या की ख़बर सामने आई थी। इस मामले में पुलिस ने हत्या की गुत्थी को सुलझा ली है और फ़रार आरोपित को गिरफ़्तार कर लिया है। दरअसल, शाहिस्ता नाम की लड़की ने रफ़ीक से निकाह करने पर इनकार कर दिया था। इस बात से आहत रफ़ीक ने ही उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी थी। हत्या की इस वारदात को अंजाम देने वाली बात रफ़ीक ने अब क़बूल कर ली है।

ज़िला पुलिस कप्तान कुँवर राष्ट्रदीप के अनुसार, 15 जुलाई को गंज थाना क्षेत्र के पास स्थित होटल गुलाब पैलेस में शाहिस्ता नाम की महिला की हत्या कर दी गई थी। हत्या शाहिस्ता के ही प्रेमी रफ़ीक द्वारा किए जाने की बात सामने आई है। इस मामले की जाँच की गई और इस संदर्भ में मध्य प्रदेश की शाजापुर पुलिस को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद उन्होंने आरोपित रफ़ीक की तलाश शुरू कर दी और उसे गिरफ़्तार कर अजमेर पुलिस के हवाले कर दिया।

ख़बर के अनुसार, यह बात भी सामने आई है कि रफ़ीक के ख़िलाफ़ बलात्कार, हत्या की कोशिश, डकैती जैसे संगीन मामले भी दर्ज हैं। इन मामलों में रफ़ीक से पूछताछ जारी है। 

इससे पहले, पुलिस अधीक्षक सरिता ने सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया था कि मध्य प्रदेश की शाहिस्ता गुल, रफ़ीक के साथ घर से भागी थी। शुक्रवार (12 जुलाई 2019) को उन्होंने अजमेर के होटल में ठहरने के लिए कमरा लिया। लेकिन सोमवार (जुलाई 15, 2019) को दोनों में कहासुनी हो गई। झगड़े में बीच-बचाव करने के लिए होटल वाले भी वहाँ पहुँचे लेकिन रफ़ीक ने उन्हें निजी मामला कहकर वहाँ से जाने को कह दिया। कमरे के बाहर हुई दोनों की हाथापाई सीसीटीवी में भी कैद हुई थी।

घटना के थोड़ी देर बाद रफ़ीक मेडिकल की दुकान जाने की बात कहकर होटल से निकला और फिर फ़रार हो गया। कुछ देर बाद शक़ होने पर जब होटल कर्मचारियों ने कमरे में जाकर देखा तो महिला बेसुध बिस्तर पर पड़ी थी। उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया और बताया कि उसकी हत्या गला घोंटकर की गई है। सीसीटीवी फुटेज में आखिरी बार रफ़ीक को 10 बजे होटल में देखा गया।

गाय से दुष्कर्म के आरोपित को पकड़वाने वाले कार्यकर्त्ता गिरफ्तार, ‘धार्मिक भावना आहत करने’ का आरोप

कर्नाटक के मंगलौर में गाय के साथ दुष्कर्म करने वाला एक मामला बृहस्पतिवार (जुलाई 17, 2019) को सामने आया था, जिसमें मोहम्मद अंसारी नाम के एक शख्स को खेत में गाय के साथ अप्राकृतिक सेक्स करते हुए ग्रामीणों द्वारा देखा गया। ग्रामीणों के मुताबिक अंसारी ने पहले गाय के पाँवों को रस्सी से बाँधा और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस घटना ने अब एक नया मोड़ ले लिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मंगलौर पुलिस ने गाय के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपित मोहम्मद अंसारी को पकड़वाने वाले 3 कार्यकताओं को गिरफ्तार कर लिया है। अभि, सुशांत और प्रज्वल के खिलाफ ‘धार्मिक भावनाओं को आहत’ करने के साथ ही अन्य मामलों में केस दर्ज किया गया है। उन पर IPC की धारा 506 (आपराधिक धमकी), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना), 323 (जानबूझ कर स्वेच्छा से किसी को चोट पहुँचाना) और 153A (किसी भी जाति, समुदाय आदि के विरुद्ध भड़काने के लिए बोलना) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

अभि, सुशांत और प्रज्वल ने गाँव के लोगों के साथ मिलकर अंसारी को गाय से दुष्कर्म करते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। जबकि दूसरा केस मोहम्मद अंसारी के खिलाफ धारा 377 के अंतर्गत दर्ज किया गया है।

ऑपइंडिया ने पुलिस से सम्पर्क कर के पता लगाया कि तीनों कार्यकर्ताओं को धार्मिक भावनाओं को आहत करने के अपराध में गिरफ्तार किया गया है।

दरअसल, मोहम्मद अंसारी नाम के एक शख्स को खेत में गाय के साथ अप्राकृतिक सेक्स करते हुए ग्रामीणों द्वारा देखा गया था। ग्रामीणों के मुताबिक अंसारी ने पहले गाय के पाँवों को रस्सी से बाँधा और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया।

अंसारी को रंगे हाथों पकड़ने के बाद जब गाँव के लोग उससे पूछताछ कर रहे थे तो उसकी कमीज की जेब से नारियल तेल की बोतल भी मिली, जिसे उसने दुष्कर्म को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किया था। साथ ही जब वह पकड़ा गया, तब उसकी कमीज पर गोबर के भी निशान थे।

इस पूरी घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें स्पष्ट देखा जा सकता है कि मूलत: झारखंड का रहने वाला अंसारी किस बेशर्मी के साथ अपने कुकर्म को स्वीकार रहा है। इस वीडियो में गाँव वाले अंसारी से कहते नजर आ रहे हैं, “हम गाय को अपनी माँ की तरह पूजते हैं और तुम उसके साथ सेक्स कर रहे हो।”

इस वीडियो में गाँव वाले उससे पूछते हैं कि वो यहाँ कितनी बार आया है, जिसके जवाब में वह ‘एक बार आया हूँ’ कहता है। ग्रामीण उससे पूछते हैं कि क्या तुम ये सब अपनी बहन के साथ भी करते हो?

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि अंसारी पहले गाँव वालों से माफ़ी माँगता है और फिर उनकी सख्ती देखकर रोने लगता है।

इसके बाद गुस्साए गाँव वालों ने अंसारी से गाय के पाँव छूकर माफी माँगने को कहा, लेकिन जैसे ही अंसारी वहाँ पहुँचा, गाय उसे देखकर डर गई और वहाँ से भाग गई। गाय की व्यथा देखकर गाँव वाले मोहम्मद अंसारी पर भड़के और उससे बोले, “ये भाग रही है क्योंकि ये तुमसे डर गई है। देखो, तुमने क्या किया कि बेचारा जानवर भी भाग रहा है, उसे लग रहा है कि तुम वही सब करने दोबारा आए हो।”

इसके बाद कावोर पुलिस ने भी इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जिस समय अंसारी दुष्कर्म को अंजाम दे रहा था, उस समय गाँव वालों ने उसे रंगे हाथों पकड़ा। पुलिस ने उसके ख़िलाफ़ मामले को दर्ज कर लिया था।

सपा सांसद आजम खान भू-माफिया घोषित, UP के एंटी-भू माफिया पोर्टल पर भी जुड़ गया नाम

जमीन कब्जाने के 23 से अधिक मामलों में फँसे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व सांसद आजम खान को रामपुर प्रशासन ने भू-माफिया घोषित कर दिया है। साथ ही उनका नाम राज्य सरकार के एंटी-भू माफिया पोर्टल पर भी सूचिबद्ध कर दिया गया है।

जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह के मुताबिक भू-माफिया उन्हें घोषित किया जाता है जो दंबगई से जमीनों पर कब्जा करने के आदी हों, जो अवैध कब्जा छोड़ने के लिए तैयार न हों, और जिनके नाम अवैध तरीके से जमीन हथियाने संबंधी मामले के मद्देनजर पुलिस केस में दर्ज हो। ऐसे लोगों का नाम उत्तर प्रदेश एंटी भू-माफिया पोर्टल पर दर्ज कराया जाता है और सरकार इनकी निगरानी करती है। इस पोर्टल की शुरुआत 2017 में सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी ताकि भू-माफियों की पहचान हो सके।

खबरों की मानें तो उपजिलाधिकारी सदर प्रेम प्रकाश तिवारी का कहना है कि आजम खान का नाम भू-माफिया पोर्टल पर दर्ज करवा दिया गया है। अब आगे की कार्रवाई नियमानुसार होगी।

रामपुर के एसपी अजय पाल शर्मा के कल (जुलाई 18, 2019) दिए बयान के मुताबिक आज की तारीख़ में आजम खान के ऊपर जमीन कब्जाने के मामले में 23 प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। जिनमें किसानों ने उन पर उन्हें धमकाने और अवैध रूप से जमीन जब्त करने का आरोप लगाया है। इसकी जाँच के लिए टीम का गठन हो चुका है

बता दें कि आजम खान और उनके साथी आलेहसन पर आलियागंज के 26 किसानों की जमीन हड़पने का आरोप है। इन सभी किसानों ने जिलाधिकारी को शपथ-पत्र लिखकर शिकायत की थी कि उनकी जमीनों को आजम खान ने जबरन हथिया कर जौहर यूनिवर्सिटी में मिला दिया। जब किसानों ने इसका विरोध किया तो उनके साथी तत्कालीन सीओ सिटी आलेहसन ने उन्हें डराया धमकाया और हवालात में न केवल बंद किया बल्कि झूठे आरोप में जेल भेजने की धमकी दी। जिस कारण ये लोग आवाज उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।

कॉन्ग्रेस की कमान संभालने के लिए पर्दे के पीछे से साजिश रच रहीं हैं प्रियंका गॉंधी: रिपब्लिक TV का दावा

क्या प्रियंका वाड्रा कॉन्ग्रेस की अध्यक्ष बनना चाहती हैं, जबकि उनके भाई राहुल गॉंधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हुए साफ कर दिया था कि उनका उत्तराधिकारी गॉंधी परिवार से नहीं होगा। रिपब्लिक टीवी की माने तो भाई की इस भावना के विपरीत प्रियंका वाड्रा पार्टी की कमान संभालने के लिए पर्दे के पीछे से अपने दॉंव चल रही हैं। रिपोर्ट में शीर्ष सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अध्यक्ष पद पर अपनी दावेदारी पुख्ता करने के लिए वह अपने करीबी नेताओं के साथ काम कर रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक प्रियंका इस बात से बेहद नाराज हैं कि राहुल ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि उनका उत्तराधिकारी कोई गॉंधी न हो। लेकिन, वह फिलहाल सार्वजनिक तौर पर राहुल की बात काटते नहीं दिखना चाहतीं, इसलिए उनके वफादार पूर्व सांसद राजीव शुक्ला इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।

शुक्ला उत्तर प्रदेश के कानपुर से ताल्लुक रखते हैं। यहीं से कॉन्ग्रेस सांसद रहे श्रीप्रकाश जायसवाल भी प्रियंका को पार्टी अध्यक्ष बनाने की मॉंग कर रहे हैं। इस पर उनका कहना है कि मेरे साथ ‘कई लोगों’ का मानना है कि प्रियंका वाड्रा को पार्टी अध्यक्ष बनना चाहिए। वह गॉंधी परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उनमें पार्टी का नेतृत्व करने का दमखम भी है।

राजीव शुक्ला के इशारे पर प्रियंका को कमान देने की मॉंग करने वाले एक अन्य नेता भक्त चरण दास हैं। उनका कहना है कि राहुल के उत्तराधिकारी के तौर पर प्रियंका को जिम्मेदारी संभालनी चाहिए, क्योंकि वह सर्वमान्य नेता हैं। जायसवाल और भक्त के बयानों में समानता पर गौर कीजिए।

पर्दे के पीछे से प्रियंका को सलाह दे रहे एक अन्य व्यक्ति हैं, प्रशांत किशोर। सूत्रों के अनुसार किशोर की पार्टी जदयू आधिकारिक तौर पर भाजपा की साझेदार है, इसलिए वे खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। लेकिन, इस अभियान के वे भी महत्वपूर्ण सूत्रधार है। अध्यक्ष बनने के लिए बेहद उत्साहित प्रियंका वाड्रा ने रणनीति के ही तहत नेल्सन मंडेला के साथ अपनी तस्वीर पोस्ट करते हुए कहा कि मंडेला उन्हें राजनीति में देखना चाहते थे। यह हास्यास्पद है, क्योंकि मंडेला की मृत्यु दिसंबर 2013 में हो गई थी। जिस तस्वीर के साथ प्रियंका ने यह दावा किया है वह कम से कम 18 साल पुरानी है।

दिलचस्प यह भी है कि लोकसभा चुनाव में पराजय के बाद जब जिम्मेदारी लेते हुए कई नेताओं ने इस्तीफे दिए, प्रियंका ने ऐसा नहीं किया। जबकि, पूर्वी उत्तर प्रदेश में उनके प्रचार ने पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान पहुॅंचाया और कॉन्ग्रेस एक सीट पर सिमट गई। जाहिर है कि कॉन्ग्रेस की हार में प्रियंका अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने का मौका देख रही हैं। राहुल की जगह लेने के लिए मिल रहे व्यापक समर्थन को देख प्रियंका अब पार्टी के भीतर मजबूती से अपने पांसे चल रही हैं।

सूत्रों के हवाले से रिपब्लिक टीवी ने बताया है कि प्रियंका ने 2019 के चुनावी नतीजों को राहुल को बेदखल करने के मौके के तौर पर देखा। शुरुआत में उन्हें अपने प्रदर्शन की समीक्षा होने की उम्मीद नहीं थी। उनके प्रचार करने के तरीकों की आलोचना हुई। अमेठी में स्मृमि ईरानी के सामने वे पूरी तरह नाकाम रहीं। पूर्वी उत्तर प्रदेश, जहॉं की वह प्रभारी थीं जन समर्थन हासिल करने में असफल साबित हुईं। उनके भाषण असरदार नहीं थे। वोटरों से बात करते वक्त उनका आलोचनात्मक रवैया पार्टी को महॅंगा पड़ा।

इससे चिंतित प्रियंका ने बेहद सावधानी से खुद को चर्चा के केंद्र से हटाया। सीडब्ल्यूसी की बैठक में गॉंधी परिवार के बाहर के नेताओं की तरह ही राहुल के इस्तीफे का विरोध किया। इसी दौरान उन्होंने राजीव शुक्ला के साथ एक गुपचुप बैठक की। शुक्ला ने उन्हें एक महीने तक इंतजार करने की सलाह दी। उस वक्त प्रियंका को यह अंदाजा नहीं था कि पार्टी के भीतर से गॉंधी परिवार के बाहर के किसी युवा नेता मसलन, राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और मध्य प्रदेश के ज्योतिरादित्य सिंधिया को अध्यक्ष बनाने की चर्चा शुरू हो सकती है।

चालीस पार की उम्र वाले इन दोनों नेताओं को राहुल का मजबूत विकल्प माना जाता है। दोनों के पास मास अपील होने के साथ-साथ सक्रिय राजनीति में डेढ़ दशक से ज्यादा का अनुभव भी है। इसे देखते हुए प्रियंका के खेमे ने भी अपने अभियान को आगे बढ़ाने का फैसला किया। प्रियंका पर दबाव तब और बढ़ गया जब 6 जुलाई को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने युवा नेतृत्व जरूरत बताते हुए सचिन पायलट या ज्योतिरादित्य सिंधिया का समर्थन करने के स्पष्ट संकेत दिए।

इसके हफ्ते भर के भीतर ही प्रियंका को प्रोजेक्ट करने का अभियान लॉन्च कर दिया गया। इसके पीछे सोच यह है कि पार्टी अध्यक्ष के तौर पर गॉंधी ही गॉंधी की जगह ले। इससे पायलट और सिंधिया की दावेदारी किनारे लग जाएगी और कॉन्ग्रेसी परंपरा के अनुसार वे भी प्रियंका का समर्थन करेंगे। तो इस तरह कॉन्ग्रेस में अध्यक्ष पद हथियाने का रंगमंच सज गया है। इसमें एक तरफ प्रियंका वाड्रा हैं तो दूसरी ओर सचिन पायलट या ज्योतिरादित्य सिंधिया।

पुलिस चौकी के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ: हरियाणा के यमुनानगर में माहौल तनावग्रस्त

हरियाणा में एक अल्पसंख्यक युवती द्वारा दो हिंदू भाईयों पर छेड़छाड़ का झूठा केस दर्ज कराने का आरोप लगाते हुए युवकों के परिजनों व हिंदू संगठन के सदस्यों ने यमुनानगर की हमीदा पुलिस चौकी के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया। इन लोगों ने जय श्रीराम का नारा लगाने के साथ थाने के बाहर धरना देकर हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। इस दौरान परिजनों ने माँग की कि इन दोनों भाइयों पर लगाया गया झूठा केस रद्द किया जाए।

पुलिस ने मनाने की कोशिश की, लेकिन लोग अपनी माँग पर अड़े रहे

चौकी के बाहर होते हंगामे को देख डीएसपी हेडक्वार्टर सुभाषचंद व थाना शहर यमुनानगर प्रभारी रतन सिंह मौक़े पर पहुँचे और भड़के लोगों को समझाने का प्रयास किया। हालाँकि वे शुरुआती प्रयास में सफल नहीं रहे क्योंकि भड़के लोग पुलिस की मानने को तैयार नहीं थे। सड़क पर बैठे ये लोग इस दौरान युवकों पर दर्ज हुए केस को झूठा बताते हुए रद्द करने की माँग पर अड़े रहे।

माहौल बिगाड़ने वालों को शांति कमिटी से किया जाए बाहर

इस दौरान इन लोगों ने समुदाय विशेष के लोगों पर आरोप भी लगाया कि पुराना हमीदा में कुछ लोग हिंदूओं के खिलाफ झूठी शिकायतें देकर माहौल बिगाड़ रहे हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय की बनाई गई शांति कमिटी से उन लोगों को बाहर किया जाए, जो हिंदू लड़कियों को उनके घर से भगाने में शामिल रहे हैं।

नाबालिग के अलावा उसके बड़े भाई पर आरोप, जो घटना वाले दिन मौजूद भी नहीं था

हिंदू समुदाय के लोगों के मुताबिक अल्पसंख्यक युवती ने दो हिंदू युवकों पर झूठी शिकायत दर्ज कराई है। इसमें एक नाबालिग का नाम भी है। इसके अलावा लड़की ने नाबालिग लड़के के बड़े भाई दीपक को भी छेड़खानी का आरोपित बताया है, जबकि परिजनों का कहना है कि वह तो घटना के दिन वहाँ मौजूद ही नहीं था।

डीएसपी ने दिलाया जाँच का भरोसा

परिजनों का कहना है कि पुलिस ने मामले की जाँच किए बिना ही दोनों भाइयों को गिरफ्तार किया है। इसलिए उन्होंने डीएसपी से कहा है कि वह उसकी जाँच करें, यदि शिकायत में सच्चाई मिले तो ही मामला दर्ज हो, वरना इसे रद्द किया जाए। परिजनों का कहना है कि अगर पुलिस युवकों को झूठा फँसा रही है तो फिर वह लोग प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे। हालाँकि गुस्साए लोगों द्वारा चौकी के बाहर करीब 2 घंटे हंगामे के बाद डीएसपी ने स्वयं मामले की जाँच का भरोसा दिलाकर उन्हें मनाया।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक इंसाफ़ की खातिर गुरुवार (जुलाई 19, 2019) की शाम करीब पौने 6 बजे विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल व पुराना हमीदा क्षेत्र की महिलाएँ काफी संख्या में हमीदा चौकी के पास आकर बैठीं और फिर हनुमान चालीसा पढ़ने लगीं।

इंसाफ़ नहीं मिला तो भविष्य में भी होगा विरोध

हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं का कहना है कि दोनों भाइयों पर दर्ज हुए मामले रद्द होने चाहिए। उनके मुताबिक कुछ लोग इलाके का माहौल बिगाड़ रहे हैं। उनके मुताबिक समुदाय विशेष के लोग उनकी बहन-बेटियों पर व्यंग्य कसते हैं, जिसके कारण इलाके का माहौल बिगड़ता है। लेकिन जब वे अपनी शिकायत लेकर एसपी सहित अन्य अधिकारियों के पास जाते हैं तो सभी एक ही जवाब देते है कि ‘जाँच करेंगे’।

नबील द्वारा संघ कार्यकर्ता की लड़की भगाकर निकाह करने के कारण इलाके में पहले से तनाव का माहौल

बता दें कि अभी कुछ दिन पहले ही इस इलाके में संघ कार्यकर्ता की बेटी को समुदाय विशेष का एक युवक नबील अपने साथ भगा ले गया था और बाद में उससे निकाह कर लिया था। कहा जा रहा है कि इस घटना के बाद इलाके में समुदाय विशेष के लोगों ने आतिशबाजी करते हुए पार्टी की थी, जिसकी सूचना हिंदू संगठनों ने पुलिस को दी थी। लोगों का आरोप है कि इस घटना के बाद कई हिंदू परिवार की लड़कियों से छेड़छाड़ हुई। इस संबंध में कुछ महिलाओं ने पुलिस को शिकायत भी दी, लेकिन पुलिस ने कोई उचित कार्रवाई नहीं की।

सचिन तेंदुलकर बने ICC हॉल ऑफ़ फ़ेम में शामिल होने वाले छठे भारतीय क्रिकेटर

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले सचिन तेंदुलकर को इंटरनेशल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने बृहस्पतिवार (जुलाई 18, 2019) देर रात अपने हॉल ऑफ फेम सम्मान से नवाजा। उनके अलावा दक्षिण अफ्रीका के लेजंड क्रिकेटर एलन डॉनल्ड और ऑस्ट्रेलिया की पूर्व महिला पेसर कैथरीन फिट्जपैट्रिक को भी आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया है। लंदन में हुए एक समारोह में इन तीनों दिग्गजों को यह सम्मान दिया गया।

ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल किए जाने पर सचिन ने आईसीसी को धन्यवाद दिया है। सचिन तेंदुलकर, हॉल ऑफ फेम में शामिल होने वाले छठे भारतीय क्रिकेटर हैं। उनसे पहले आईसीसी ने क्रिकेट हॉल ऑफ फेम में पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी, वर्ल्ड कप विजेता कप्तान कपिल देव, दिग्गज सुनील गावसकर, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले को शामिल किया था।

इस उपलब्धि पर सचिन ने कहा, “आईसीसी क्रिकेट हाल ऑफ फेम में शामिल किया जाना सम्मान की बात है। आईसीसी ने इस सम्मान से जिस भी खिलाड़ी को नवाजा है, उन सभी ने इस खेल को बढ़ाने और उसकी लोकप्रियता में इजाफा करने में अपना अहम योगदान दिया है। मुझे खुशी है कि मेरा भी इसमें थोड़ा सा योगदान रहा।”

सचिन तेंदुलकर को जब यह सम्मान दिया गया उस समय उनकी पत्नी और बेटी भी उनके साथ थीं

46 साल के सचिन तेंदुलकर की गिनती दुनिया के महान बल्लेबाजों में होती है। उनके नाम अब भी कई रिकॉर्ड दर्ज हैं, जिन्हें कोई तोड़ नहीं सका है। वह वनडे और टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। उनके नाम 100 इंटरनैशनल सेंचुरी दर्ज हैं, जो कि एक रिकॉर्ड है।


‘चाचा नेहरू मदरसा’ के अंदर मंदिर निर्माण संभव नहीं, सलमा अंसारी को AMU ने पढ़ाया नियम-कानून

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी हाल ही में तब चर्चा में आईं, जब उन्होंने घोषणा की थी कि वह ‘चाचा नेहरू मदरसा’ के अंदर एक मंदिर बनाना चाहती हैं, जिसे वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय परिसर में चलाती हैं।

सलमा अंसारी ने घोषणा की थी कि उनके मदरसे में छात्र, जिनमें कथित रूप से हिंदू परिवारों के भी कई छात्र हैं, अक्सर प्रार्थना करने के लिए परिसर के बाहर जाते हैं, जो उनकी सुरक्षा के लिए ठीक नहीं रहता। अंसारी ने कहा था कि वह परिसर के अंदर एक हिंदू मंदिर और एक मस्जिद बनाने की योजना बनी रही हैं।

सलमा अंसारी की इस घोषणा पर AMU प्रशासन का ध्यान भी गया। अमर उजाला की ख़बर के अनुसार, AMU प्रशासन का कहना है कि सलमा अंसारी का मदरसा AMU से लीज पर ली गई ज़मीन पर है। पट्टा केवल 10 वर्षों के लिए था और AMU अधिकारियों की अनुमति के बिना किसी भी तरह का निर्माण संभव नहीं हो पाएगा।

AMU अधिकारियों ने यह भी कहा कि सलमा अंसारी ने AMU प्रशासन को मंदिर निर्माण के लिए अभी तक कोई आधिकारिक पत्र नहीं लिखा है।

ख़बर में कहा गया कि भले ही सलमा अंसारी ने मंदिर निर्माण के लिए कागजी कार्रवाई शुरू कर दी हो, लेकिन AMU प्रशासन द्वारा मंदिर-मस्जिद निर्माण की अनुमति संभव नहीं है। इसकी वजह यह है कि साल 2017 के बाद शिक्षण संस्थानों में धार्मिक स्थल के निर्माण पर रोक लगा दी गई थी।

हालाँकि, सलमा अंसारी ने कथित तौर पर AMU अधिकारियों को मदरसा के लिए पट्टे की अवधि 10 साल से बढ़ाकर 30 साल करने के संदर्भ में पत्र लिखा है।

सलमा अंसारी की घोषणा के बाद, सपा विधायक ज़मीर उल्लाह ख़ान ने कहा था कि यह एक बुरा क़दम है और अगर मदरसा परिसर के अंदर एक मंदिर का निर्माण किया जाता है, तो अन्य मदरसों में मंदिरों का निर्माण करने की माँग उठ जाएगी।

AMU के विद्वान और धर्मशास्त्र के प्रोफेसर मुफ्ती ज़ाहिद ने कहा था कि समुदाय विशेष को मूर्ति पूजा का प्रचार करने की अनुमति नहीं है, केवल मदरसे के अंदर मंदिर बनाने की अनुमति दी जाए।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि सलमा अंसारी की घोषणा रॉ के पूर्व अधिकारियों के दावों के संदर्भ में संडे गार्डियन के लेख के तुरंत बाद आई। इस लेख में भारतीय खुफ़िया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के एक पूर्व अधिकारी ने सनसनीखेज ख़ुलासा किया था कि पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 1990-92 के बीच ईरान में भारतीय राजदूत रहते तेहरान में रॉ के सेट-अप को उजागर कर वहाँ काम कर रहे अधिकारियों की ज़िंदगी को ख़तरे में डाल दिया था।

उन्होंने यह भी दावा किया है कि अंसारी ने आईबी के एडिशनल सेक्रेटरी रतन सहगल के साथ मिलकर 1992 बम धमाकों से पहले रॉ के गल्फ यूनिट को पंगु कर दिया था। (शायद वे 1993 के धमाकों की बात कर रहे थे, लेकिन भूल से ट्वीट में गलत साल का उल्लेख कर दिया है।)

द संडे गार्डियन में प्रकाशित ख़बर में दावा किया गया कि पूर्व रॉ अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तेहरान में राजदूत होने के दौरान, “रॉ के अभियानों को नुकसान पहुँचाने” को लेकर अंसारी के ख़िलाफ़ जाँच की माँग की थी।

पश्चिम बंगाल: विश्वजीत गांगुली समेत 12 फ़िल्म-टीवी कलाकार BJP में शामिल

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी अपना जनाधार बढ़ाने की लगातार कोशिश में है। बीजेपी की यह कोशिश रंग भी ला रही है। इसी कड़ी में गुरुवार (18 जुलाई 2019) को पश्चिम बंगाल के 12 फ़िल्म व टीवी कलाकार बीजेपी में शामिल हो गए। दिल्ली में बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष की मौजूदगी में ये सितारे पार्टी में शामिल हुए। इस दौरान बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय, राकेश सिन्हा और संबित पात्रा भी मौजूद थे। बीजेपी में शामिल होने वाले इन कलाकारों में विश्वजीत गांगुली, ऋषि कौशिक, कंचना मोइत्रा, रूपांजन मित्रा, रूपा भट्टाचार्य, मोमिता चटर्जी, सौरभ चक्रवर्ती और नमिता मित्रा के नाम प्रमुख हैं।

ख़बर के अनुसार, दिलीप घोष ने 12 अभिनेताओं का पार्टी में स्वागत किया और कहा कि राज्य के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विकास कार्यों से प्रेरित हैं। उन्होंने राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) पर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी में शामिल होने वालों को परेशान किया जा रहा है। बीजेपी का हाथ थामने वालों के लिए यह एक जोखिम भरा काम है। इसलिए पार्टी ने राज्य के बाहर इस समारोह का आयोजन किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इन सभी कलाकारों के साहस पर हम सभी को गर्व करना चाहिए।

जहाँ एक तरफ़ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी पार्टी में दल-बदल को लेकर नए नेताओं की नियुक्ति कर रही हैं, वहीं TMC के नेताओं का बीजेपी में शामिल होना उनके लिए कम दु:खद नहीं है, इसका असर 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है। फ़िलहाल तो हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि राज्य में बीजेपी पार्टी TMC की प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभर रही है। इसलिए आगामी चुनाव में बीजेपी को हराना TMC के लिए कड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

इससे पहले भी TMC और अन्य विपक्षी पार्टियों से विधायक और पार्षद बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। हाल ही में, मुकुल रॉय ने इस बात की भी जानकारी दी थी कि TMC, कॉन्ग्रेस और CPM के 107 विधायक बीजेपी में शामिल होने के लिए उनसे सम्पर्क बनाए हुए हैं। इसके अलावा कुछ दिनों पहले ही कालचीनी विधानसभा क्षेत्र के TMC विधायक विल्सन चामपारी बीजेपी में शामिल हुए थे। दक्षिण दिनाजपुर ज़िला परिषद की सभापति लिपिका राय और पूर्व ज़िला तृणमूल अध्यक्ष विपल्व मित्र समेत 10 सदस्य बीजेपी में शामिल हो गए थे।

इंदिरा जयसिंह-आनंद ग्रोवर के यहाँ CBI की छापेमारी ख़तरनाक: SC बार एसोसिएशन को वकीलों ने लिखा पत्र

वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर के कार्यालयों और आवासों पर CBI के छापों की निंदा करते हुए सुप्रीम कोर्ट के सौ से अधिक वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) को एक पत्र लिखा है। इन वकीलों ने माँग रखी है कि CBI छापों के खिलाफ एक आम सभा बुलाई और इसकी निंदा की जाए।

इस पत्र में, वकीलों ने इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर के कार्यालयों और आवासों पर CBI की छापेमारी की कड़ी निंदा की और SCBA को इस संदर्भ में एक स्पष्ट संदेश जारी करने की अपील की।

ख़बर के अनुसार, पत्र में CBI की कार्रवाई को, ‘ख़तरनाक मिसाल क़ायम करने वाला, क़ानूनी पेशे की स्वतंत्रता पर प्रहार’बताया गया है। पत्र में कहा गया है कि जाँच में वकीलों के सामूहिक सहयोग के बावजूद CBI ने अभूतपूर्व क़दम उठाया।

अधिवक्ताओं के अनुसार, इंदिरा जयसिंह और आनंद ग्रोवर ने लगातार क़ानून-व्यवस्था को बरक़रार रखा, उन्हें इस तरह दरकिनार कर देना ग़लत है। सभी अधिवक्ताओं ने एकजुटता दिखाते हुए CBI की छापेमारी को ‘राज्य मशीनरी द्वारा ताक़त का ग़लत इस्तेमाल’ बताया।

इसी संदर्भ में, दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन द्वारा एक बयान जारी करते हुए CBI की छापेमारी की निंदा करते हुए कहा गया कि एडवोकेट्स ऑफ़िस में क़ानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा तलाशी अभियान गंभीर चिंता का विषय है। एजेंसियों से कहें कि कोई ऐसा क़दम न उठाए जो पेशे की स्वतंत्रता को बाधित करता हो।

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह और उनके पति आनंद ग्रोवर के यहाँ CBI ने गुरुवार (11 जुलाई) को छापेमारी की थी। CBI ने यह छापेमारी उनके एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ के लिए विदेशी चंदा विनियमन अधिनियम (FCRA) के उल्लंघन मामले में की थी। CBI प्रवक्ता ने बताया था कि दिल्ली और मुंबई दोनों जगह छापे मारे गए।

दरअसल, यह मामला मई 2019 में सामने आया था, जब सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के एक स्वैच्छिक संगठन ‘लॉयर्स वॉइस’ द्वारा दायर जनहित याचिका के आधार पर सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह, आनंद ग्रोवर और उनके एनजीओ ‘लॉयर्स कलेक्टिव’ को एक नोटिस जारी किया था। यह नोटिस प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किया। इस याचिका में संबंधित संस्थाओं द्वारा विदेशी चंदा (नियमन) अधिनियम (FCRA) क़ानून के उल्लंघन पर केंद्र सरकार की निष्क्रियता के लिए SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) जाँच की माँग की गई है। 

FCRA उल्लंघन की ख़बर सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने ग़ैर सरकारी संगठन के FCRA लाइसेंस को रद कर दिया था, लेकिन दोषियों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इनके द्वारा जुटाए गए धन का राष्ट्र के ख़िलाफ़ गतिविधियों में उपयोग किया गया।