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बिहारी पत्रकारों, नीतीश कुमार की काहिली को डिफेंड कर रहे हो? इसी बाढ़ में डूब क्यों नहीं जाते?

बालिका गृह कांड किस स्तर का होगा, और उसमें किस स्तर के लोग अपराधी होंगे इसका अंदाजा आप इस बात से ही लगा सकते हैं कि मीडिया में इसकी फॉलोअप स्टोरी नहीं मिलती और सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान लेकर बिहार सरकार को लताड़ लगानी पड़ती है कि इस पर बात आगे क्यों नहीं बढ़ रही। एक ऐसा भयावह कांड जो भारत के हर जिले के हर ऐसे शेल्टर होम या बालिका गृह की कहानी हो सकती है, वो कुछ दिनों के लिए राष्ट्रीय खबर बनी, लेकिन फिर चर्चा से गायब हो गई। मैं कोई आँकड़े नहीं दूँगा क्योंकि उसकी ज़रूरत नहीं है। बच्चियों को सहारा देने के नाम पर उनका यौन शोषण व्यवस्थित तरीके से करवाने की भयावहता शायद आँकड़ों की मोहताज नहीं।

चमकी बुखार या इन्सेम्फलाइटिस से मरे हुए सौ से ज्यादा बच्चों ने भारतीय मीडिया की ड्रामेबाजी तो देख ली, लेकिन जिनसे सवाल होने थे, जो फॉलोअप किया जाना था वो नहीं किया गया। लगातार एंकर स्वयं ही सर्वज्ञ बन कर बताते रहे कि किसका इलाज होना चाहिए, किसका नहीं, लेकिन नितीश फिर बच गए। सामर्थ्यवान हमेशा ही पीछे हटते रहे और सोशल मीडिया ने अपने स्तर से बहुत कोशिश की। ये मुद्दा भी बहुत भयावह था, लेकिन नितीश को क्लीन चिट मिल गई।

शिक्षकों की सैलरी का मुद्दा तो जब से पैदा हुआ हूँ तब से चल ही रहा है। बिहार के स्कूलों में आख़िर शिक्षक किस मोटिवेशन से पढ़ाएगा अगर आप उसकी सैलरी साल और छः महीने पर देंगे? शिक्षकों के प्रति लालू भी उदासीन था, नीतीश भी कुछ अलग नहीं। अब प्रदेश के हजारों शिक्षक पटना पहुँच कर घेराव करने की बातें कर रहे हैं। शिक्षा का संकट भले ही स्वास्थ्य और बाढ़ से भयावह न हो, लेकिन कम भयावह भी नहीं। पत्रकार लोग बस इसकी रिपोर्टिंग करते हुए खानापूर्ति करके डेट बता देते हैं कि हड़ताल कब होगी। ये कभी मुद्दा बन ही नहीं पाया।

उसके बाद का मुद्दा वो मुद्दा है जो हर साल बिहार को तबाह कर जाता है, लेकिन सरकार ज्यों की त्यों बनी रहती है। विभागों से ‘सारे तटबंध सही हैं’ का लेख हर महीने फाइलों में खिसकता रहता है, लेकिन बारिश होते ही दस जगहों से वह टूटते हैं, और वही फाइल ये सूचना देती है कि टूट गई। आखिर कौन बनाता है यह रिपोर्ट? हर महीने दुरुस्त रहने वाला तटबंध अचानक से टूट कैसे जाता है? फाइलों में तो तटबंध हमेशा दुरुस्त ही रहेंगे, क्योंकि फाइल में पानी नहीं घुसता।

उसके बाद अगर आप इस बाढ़ की रिपोर्टिंग देखिएगा तो पता चलेगा कि लोग छः कॉलम में जलमग्न, जलराशि, मंजर, भयावह स्थिति आदि शब्दों का प्रयोग कर फोटो छाप देते हैं और बताते हैं कि कितना इलाका चपेट में आया हुआ है। इसके आगे की बात गायब हो जाती है। बिहारी पत्रकार, जो कि पत्रकारिता के उद्योग में रैंडमली ढेला तीन बार फेंकने पर एक बार अपने सर पर तो लेगा ही, वो ज्ञान दे रहा है कि इसमें जिम्मेदारी कलेक्टर कि है। ये वही पत्रकार हैं जो अपनी राजनैतिक विचारधारा से विपरीत विचार रखने वाले लोगों से घोड़े की टाँग टूटने पर इस्तीफा माँग लेते हैं।

ये वही पत्रकार समूह है जो गौरी लंकेश की हत्या पर दिल्ली के प्रेस क्लब में जरूर शिरकत करता है लेकिन बिहार के पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या पर चुप रहता है। यही कारण है कि नीतीश को ऐसे दिखाया जाता है जैसे उनके बिना बिहार बंद हो जाएगा या फिर वो जो कर रहे हैं वही सर्वोत्तम समाधान है। बिहार में बाढ़ का आना तय है, ये बात सबको पता है लेकिन इसका समाधान कुछ नहीं।

समाधान शायद इसलिए नहीं है क्योंकि बाढ़ सरकारी महकमे के अफसरों और नेताओं के लिए उत्सव है। ये वो समय है जब राहत पैकेज के रूप में भ्रष्टाचार का पैकेज आता है। आखिर लगभग पंद्रह साल से सत्ता में रही पार्टी इस समस्या का कोई हल ढूँढने में विफल क्यों रही है? अगर कोसी द्वारा अपने पुराने बहाव क्षेत्र में वापस आने वाले साल को छोड़ दिया जाए, तो बाकी के हर साल एक ही समस्या कैसे आ जाती है? इस पर हवाई दौरा करने से क्या होता है? या हम यह मान लें कि दुनिया के किसी इलाके में, या भारत के ही किसी भी इलाके में बाढ़ को लेकर कोई सही समाधान नहीं आया है?

पत्रकारों का शायद सबसे बड़ा प्रतिशत बिहारियों का होगा लेकिन सारे अख़बारों पर महज ‘कहाँ क्या हुआ, कितने लोग मरे, कितने बह गए, किस जिले का कितना हिस्सा डूबा और मुख्यमंत्री ने आज क्या बयान दिया’ यही चल रहा है। कौन ज़िम्मेदारी लेगा, तटबंध कैसे टूट गए, हर साल बचाव कार्य का कितना पैसा कहाँ गया, इसका ब्यौरा नहीं दिखता। आख़िर बाढ़ में राहत पैकेज का करोड़ों रूपया हर साल किस हालत में बहा दिया जाता है कि अगले साल फिर वही समस्या हो जाती है?

पता नहीं इन लोगों को नीतीश ने घुट्टी पिला रखी है या ये भूल गए कि बिहार के ही हैं और बाढ़ की भयावहता से दूर भले हैं, अनजान नहीं, इसलिए उनकी ज़िम्मेदारी बनती है कि इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाया जाए और सवाल पूछे जाएँ। लेकिन राजनैतिक उथल-पुथल के दिनों में शायद नितीश के पाला बदलने के अंदेशे में ये समझ नहीं पा रहे हैं कि विरोध करें तो किन शब्दों में करें। कई लोग जो भाजपा के मुखर विरोधी रहे हैं वो भी ‘सॉफ़्ट’ हो गए हैं और बता रहें हैं कि नेताओं को छोड़ कर बाकी सब ज़िम्मेदार हैं। संस्थानों की विचारधारा के हिसाब से चलने की बात और है, लेकिन फेसबुक पर पोस्ट तो लिखे जा सकते हैं?

हर स्तर पर सिर्फ सूचनाएँ देना लेकिन किसी भी तरीके से नेतृत्व को ज़िम्मेदार न ठहराना, बल्कि डिफेंड करने लगना अलग स्तर की धूर्तता है। इतना जोड़-घटाव तो लोग चुनाव के समय भी नहीं करते जितना हमारे बिहारी पत्रकार शायद इस आपदा के वक्त कर रहे हैं जो हर स्तर पर बिहार को शब्दशः और वैसे भी भीतर से ही काटे जा रही है।

कर्नाटक में 4-5 दिन में आ जाएगी BJP की सरकार: येदियुरप्पा का दावा

कर्नाटक में सत्ता में बने रहने के लिए जहाँ कॉन्ग्रेस-जेडीए गठबंधन संख्या बल की गणित से जूझ रहा है, वहीं बीजेपी की कर्नाटक इकाई के प्रमुख बीएस येदियुरप्पा ने सोमवार (जुलाई 15, 2019) को कहा कि उन्हें अगले 4-5 दिन में सरकार बनाने का पूरा भरोसा है। येदियुरप्पा ने पत्रकारों से कहा, “मैं इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि अगले चार से पाँच दिन में राज्य में बीजेपी की सरकार आ जाएगी। बीजेपी, कर्नाटक को अच्छा प्रशासन देगी।” साथ ही, येदियुरप्पा ने दावा किया है कि कुमारस्वामी राज्य की गठबंधन सरकार को बचाने में नाकाम रहेंगे।

आप लोगों ने मोदी को वोट दिया है, इसीलिए समस्या लेकर भी मोदी के पास जाओ

येदियुरप्पा ने यह दावा ऐसे समय में किया है, जब विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने मुख्यमंत्री कुमारस्वामी द्वारा दिए गए विश्वास मत के प्रस्ताव पर 18 जुलाई को चर्चा का वक्त दिया है। कुमारस्वामी की सरकार 16 विधायकों के इस्तीफा देने के बाद अधर में लटकी है। पिछले साल ऐसी ही परिस्थितियों में इस्तीफा देने वाले येदियुरप्पा ने कहा, “कुमारस्वामी मुख्यमंत्री के पद पर नहीं रह पाएँगे। ये बात वो भी जानते हैं। मुझे लगता है कि वो एक अच्छे भाषण के बाद इस्तीफा दे देंगे।”

गौरतलब है कि, कर्नाटक में 224 सदस्यीय विधानसभा में 105 सीटें हासिल कर के सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी भाजपा की तरफ से विश्वास मत के दौरान जरूरी आँकड़े नहीं जुटा पाने के बाद येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। वहीं, अगर इस बार 16 विधायकों का इस्तीफा स्वीकार हो जाता है, तो गठबंधन का आँकड़ा मौजूदा 116 से घटकर 100 ही रह जाएगा।

‘बाँटनी होगी कुरान’- जमानत के लिए कोर्ट के इस शर्त को मानने से ऋचा भारती ने किया इनकार

राँची की एक अदालत ने ग्रैजुएशन की छात्रा ऋचा भारती को कुरान बाँटने की शर्त पर जमानत दे दी है। ऋचा पर आरोप है कि उन्होंने फेसबुक पर सांप्रदायिक (लेकिन आपत्तिजनक) पोस्‍ट किया था। इस संबंध में अंजुमन कमिटी ने पोस्ट को आपत्तिजनक और धार्मिक भावना को आहत करने वाला बताते हुए उनके खिलाफ FIR दर्ज कराया था।

सशर्त जमानत देते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऋचा को विभिन्‍न संस्‍थाओं को कुरान की 5 प्रतियाँ बाँटनी होंगी। न्‍यायिक मैजिस्‍ट्रेट मनीष सिंह ने ऋचा को निर्देश दिया कि वह कुरान की एक कॉपी अंजुमन कमिटी और 4 अन्‍य कापियाँ विभिन्‍न स्‍कूलों और कॉलेजों को बाँटेंगी। साथ ही उसकी रशीद लेनी होगी।

कोर्ट ने इसके लिए ऋचा को 15 दिनों का समय दिया है। हालाँकि कोर्ट ने इस कार्य में (कुरान की 5 प्रतियाँ बाँटने) स्थानीय पुलिस को ऋचा की मदद करने का भी निर्देश दिया।

ऋचा भारती ने कोर्ट के आदेश को मानने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि आज कुरान बाँटने का आदेश दिया गया है, कल को इस्लाम स्वीकार करने या नमाज पढ़ने का आदेश देंगे तो वह कैसे स्वीकार किया जा सकता है। ऋचा ने अपने तर्क को आगे बढ़ाते हुए यह भी कहा कि क्या किसी समुदाय विशेष के व्यक्ति को सजा के तौर पर दुर्गा पाठ करने या हनुमान चालीसा पढ़ने का आदेश कोर्ट ने सुनाया है?

क्या है पूरा मामला

राँची के पिठोरिया से ग्रेजुएशन पार्ट थ्री में पढ़ाई करने वाली ऋचा भारती पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने फेसबुक और व्हाट्सएप के जरिए धर्म-विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इससे समुदाय विशेष के लोग आहत हो गए थे। इसकी प्रतिक्रिया में अंजुमन कमिटी पिठोरिया ने उनकी पोस्ट को आपत्तिजनक और धार्मिक भावना को आहत करने वाला बताते हुए एफआईआर दर्ज कराया था। स्थानीय पुलिस ने अंजुमन कमिटी की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 2 घंटे के भीतर ऋचा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

FB पोस्ट पर बवाल: लड़की को जेल लेकिन संप्रदाय-विशेष के लोग अब भी बाहर

पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई से स्थानीय लोग गुस्से में आ गए थे। उनका कहना था कि ऋचा को दो घंटे के अंदर जेल भेज दिया गया, जबकि उसी पोस्ट पर कई गंभीर टिप्पणी करने वाले बाहर हैं। थानेदार द्वारा बिना जाँच-पड़ताल किए ऋचा को जेल भेजने के खिलाफ शनिवार (जुलाई 13, 2019) को जनाक्रोश भड़क गया था। लोग उन्हें रिहा करने और थानेदार पर कार्वाई की माँग कर रहे थे।

ऋचा भारती के समर्थन में विश्व हिंदू परिषद, आरएसएस, बजरंग दल, हिंदू जागरण मंच के राँची जिला के पदाधिकारी भी थाना पहुँचे थे। लोगों ने थानेदार पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि अगर जिस धर्म को लेकर लड़की ने टिप्पणी की है, तो उसी धर्म के लोगों ने प्रतिक्रिया में लड़की के धर्म को लेकर भी बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की है। ऐसे में जब मामला दोनों तरफ से था तो फिर कार्रवाई एकतरफा क्यों की गई?

‘प्रदेश में कमलनाथ सरकार को हिलाने वाला कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ, मिला तो कर देंगे 3 टुकड़े’

कमलनाथ सरकार के दो मंत्रियों द्वारा भाजपा के लिए विवादस्पद बयान दिया गया है। खबरों के मुताबिक एक ओर जहाँ झाबुआ में लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह ने भाजपा की मानसिकता की तुलना ‘कुत्तों’ से की है वहीं, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ़ अकील ने भाजपा के लिए कहा है कि अगर किसी ने गड़बड़ की तो वे पार्टी के 3 तुकड़े कर देंगे।

एबीपी के अनुसार, एक दिन के दौरे पर झाबुआ पहुँचे सज्जन सिंह ने कहा, “बीजेपी कह रही है कि कुत्तों को स्थानांतरित कर दिया गया है। ये ठीक लगता अगर वे इसे ‘डॉग स्कॉड’ कहते। लेकिन, उन्होंने कहा कि ‘कुत्तों’ को स्थानांतरित कर दिया गया। उनकी मानसिकता कुत्तों जैसी है। क्या करें!”

वहीं मंत्री आरिफ़ अकील के मुताबिक, प्रदेश में उनकी सरकार को कोई खतरा नहीं है। आरिफ़ अकील ने कहा, “प्रदेश में कमलनाथ सरकार को हिलाने वाला कोई माई का लाल पैदा ही नहीं हुआ। अगर किसी ने ज्यादा गड़बड़ की तो हम बीजेपी के तीन टुकड़े कर देंगे।”

कमलनाथ ने की रीमा और जया की छुट्टी

गौरतलब है कि बीते दिनों कमलनाथ सरकार ने प्रदेश से 46 स्निफर डॉग्स का स्थानांतरण किया था। जिसके बाद भाजपा ने उन पर निशाना साधा था। बीजेपी ने कहा था कि कमलनाथ सरकार का तबादले के अलावा प्रदेश के हित के किसी भी अन्य विषय पर ‘फोकस’ नहीं है। वहीं कर्नाटक की हालिया स्थिति को देखते हुए मध्य प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों पर भी सवाल उठ रहे थे। क्योंकि मध्य प्रदेश में भी कॉन्ग्रेस पूर्ण बहुमत में न होकर सपा, बसपा एवं निर्दलीय विधायकों के समर्थन से टिकी हुई है। इन दोनों घटनाओं पर ही कमलनाथ सरकार के मंत्रियों का ये विवादस्पद बयान आया है।

पश्चिम बंगाल में फिर भड़की हिंसा: 50 देशी बम बरामद, 2 गिरफ्तार, धारा 144 लागू

लोकसभा चुनाव और उसके बाद तक कई राजनीतिक हिंसाओं का गवाह रहे पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले के भाटपाड़ा और कांकिनारा क्षेत्र में एक बार फिर से हिंसा हुई। सोमवार (जुलाई 15, 2019) सुबह 10 बजे से अपराधियों ने कांकीनाड़ा और भाटपाड़ा के एक अस्पताल समेत विभिन्न इलाकों में बमबाजी की। इसमें कई लोग घायल हो गए। अस्पताल के सामने बम फेंकने से मरीजो में दहशत है, तो वहीं स्थानीय लोग भी इस घटना से काफी डरे हुए है। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

दरअसल, ये हिंसा शुक्रवार (जुलाई 13, 2019) को उस वक्त शुरू हुई, जब कांकीनारा में 30 वर्षीय संदिग्ध अपराधी प्रभु शॉ की एक इनकाउंटर में मौत हो गई। प्रभु शॉ की मौत के बाद अगले दिन भाटपारा पुलिस स्टेशन के नजदीक बम फेंके गए, जिसमें 8 लोग घायल हो गए थे।

धमाके के बाद बैरकपुर पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के नेतृत्व में रात भर इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान पुलिस को कांटापुकुर इलाके में 50 से भी ज्यादा जिंदा बम और बम बनाने का सामान मिला। पुलिस ने बमों को खाली स्थान पर ले जाकर निष्क्रिय कर दिया। हालात को देखते हुए मौके पर जगदल थाने की पुलिस को अतिरिक्त बलों का सहारा लेना पड़ा और रैपिड एक्शन फोर्स का सहारा लेना पड़ा। वहाँ के मौजूदा हालात को देखते हुए स्थिति पर नियंत्रित करने के लिए धारा 144 लगा दी गई है।

वहीं, घटना से गुस्साए लोगों ने भाटपाड़ा नगरपालिका व अस्पताल में घुसकर जम कर हंगामा किया। लोगों ने काकिनारा रेलवे स्टेशन पर रेल मार्ग को अवरुद्ध कर विरोध प्रदर्शन किया। 2 घंटे से अधिक समय तक रेल अवरोध होने की वजह से बैरकपुर-नैहाटी डिवीजन में ट्रेन सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई। कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा, जबकि कुछ ट्रेनें देर से चलीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस के सामने ही अपराधी बम चला रहे  हैं और पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर रही। हालाँकि, बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट के डिप्टी कमिश्नर (जोन 1) अजॉय ठाकुर ने कहा, ‘‘कुछ बदमाशों ने सोमवार को तीन जगहों पर बम फेंके लेकिन स्थिति अब नियंत्रण में है।’’

जिस रफीक के साथ शादी करने को घर से भागी महिला, उसी ने होटल में गला घोंट मार डाला

राजस्थान के अजमेर स्थित गुलाब पैलेस नामक होटल में घर से भागी हुई महिला की हत्या का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक यहाँ गंज थाना क्षेत्र के होटल में उसके प्रमी ने उसकी गला घोंट कर हत्या कर दी और फिर वहाँ से फरार हो गया। दोनों मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं और शुक्रवार (जुलाई 12, 2019) को यहाँ होटल में पति-पत्नी के रूप में ठहरे थे। दोनों यहाँ शादी करने के लिए आए थे, जिसके लिए उन्होंने वकील से भी बात की थी।

खबर के अनुसार पुलिस अधीक्षक सरिता ने सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मध्य प्रदेश की शाहिस्ता गुल, रफीक के साथ घर से भागी थी। शुक्रवार को उन्होंने अजमेर के होटल में ठहरने के लिए कमरा लिया। लेकिन सोमवार (जुलाई 15, 2019) को दोनों में कहासुनी हो गई। झगड़े में बीच-बचाव करने के लिए होटल वाले भी वहाँ पहुँचे लेकिन रफीक ने उन्हें निजी मामला कहकर वहाँ से जाने को कह दिया। कमरे के बाहर हुई दोनों की हाथापाई सीसीटीवी में भी कैद हुई है।

घटना के थोड़ी देर बाद रफीक मेडिकल की दुकान जाने की बात कहकर होटल से निकला और फिर फरार हो गया। कुछ देर बाद शक होने पर जब होटल कर्मचारियों ने कमरे में जाकर देखा तो महिला बेसुध बिस्तर पर पड़ी थी। उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया और बताया कि उसकी हत्या गला घोंटकर की गई है।

सीसीटीवी फुटेज में आखिरी बार रफीक 10 बजे होटल में देखा गया। फिलहाल उसकी तस्वीर जारी करके उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस ने शाहिस्ता के परिजनों को पूरे मामले की सूचना दे दी है और कहा है कि उनकी मौजूदगी में शव का मेडिकल बोर्ड से परोस्टमार्टम करवाया जाएगा।

हीना ख़ान ने गीता बन कर पुजारी से रचाई शादी, अगले दिन भागने की कोशिश में गिरफ़्तार

मध्य प्रदेश के राजगढ़ में एक महिला और दलाल ने मिलकर धोखाधड़ी का ऐसा जाल बिछाया, जिसमें एक पुजारी फँस गए। उक्त पुजारी की शादी नहीं हो रही थी और इसको लेकर वो परेशान था। इसका फायदा उठाते हुए एक दलाल ने एक मुस्लिम महिला से उसकी शादी करा दी। सबसे बड़ी बात यह कि पुजारी को शादी से पहले यह तक नहीं बताया गया कि महिला मुस्लिम है। महिला को हिन्दू कह कर पुजारी से मिलवाया गया।

यह मामला खिलचीपुर स्थित गदिया कला गाँव का है। यहाँ एक दलाल ने न सिर्फ़ मुस्लिम महिला से पुजारी की धोखे से शादी करा दी बल्कि सवा लाख रुपए भी ऐंठ ले गया। महिला ने शादी के अगले ही दिन ससुराल से भागने का प्रयास किया, जिस पर परिजनों ने उसे रोका। इसके बाद महिला हंगामा करने लगी। स्थिति बिगड़ते देख लोगों ने पुलिस को सूचना दी।

पुलिस ने मौके पर पहुँच कर उक्त महिला को गिरफ़्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि गाँव के मंदिर का पुजारी अशोक कई दिनों से अपनी शादी के प्रयास में था। इसका फायदा उठाते हुए दलाल नारायण ने उस से सवा लाख रुपए ठग लिए और एक मुस्लिम महिला से मिलवाया। पुजारी को धोखे में रखने के लिए महिला का नाम गीता बताया गया।

इसके बाद महिला को राजगढ़ बुलाया गया और मंदिर में ही शादी की रस्म पूरी की गई। इसके बाद दलाल नारायण कोर्ट मैरिज की तैयारी करने के बहाने चंपत हो गया। शादी के बाद उक्त महिला बीमार होने का बहाना कर भाग रही थी। महिला का असली नाम हीना ख़ान है। उसने पुलिस को सारी कहानी बताई। लेकिन, अभी तक दलाल नारायण सिंह का कोई अता-पता नहीं है।

J&K में हिन्दुओं व RSS कैडर को हथियारों से लैस किया जा रहा: PDP ने केंद्र पर लगाया बड़ा आरोप

जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों ने अपने स्थानीय दस्तों को हथियार व अन्य साजोसामान सप्लाई किया है। लेकिन, कश्मीर की प्रमुख राजनीतिक पार्टी पीडीपी ने केंद्र सरकार पर हिन्दुओं को हथियारों से लैस करने का आरोप लगाया है। राज्य के कई गाँवों में ‘विलेज डिफेंस कमिटी’ गठित की गई है, जो भारतीय सुरक्षा बलों की देखरेख में काम करती है। लेकिन, पीडीपी ने सुरक्षा बलों के नाम पर भी सांप्रदायिक राजनीति खेलना शुरू कर दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सिर्फ़ स्थानीय हिन्दुओं को हथियारों से लैस किया जा रहा है।

टाइम्स नाउ की ख़बर के अनुसार, पीडीपी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय यह सब स्थानीय भाजपा नेताओं के कहने पर कर रहा है। पार्टी ने कहा कि सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों, जैसे किश्तवाड़ में स्थानीय लोगों को हथियार सप्लाई किए जा रहे हैं। पीडीपी नेता फिरदौस ने कहा कि पूर्व में हथियारों का इस्तेमाल रंगदारी, बलात्कार और लूटपाट के लिए किया जाता रहा है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार न सिर्फ़ स्थानीय जनता बल्कि आरएसएस कैडर को भी हथियारों से लैस कर रही है।

पीडीपी नेता ने दावा किया कि राज्य में संभावित विधानसभा चुनावों को देखते हुए वर्ग विशेष के वोट बैंक को अपने पक्ष में करने के लिए जम्मू को एक युद्धस्थल की तरह प्रयोग किया जा रहा है। बता दें कि डोडा और किश्तवाड़ इलाक़ों में विलेज डिफेंस कमिटियों (VDC) ने सुरक्षा बलों के आतंकरोधी ऑपरेशन में काफ़ी मदद की है। अब पीडीपी आत्मरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों को सांप्रदायिक रंग दे रही है।

सरकार ने वीडीसी को और मजबूत करने का कार्य किया है और इस दिशा में क़दम बढ़ाया जा रहा है। जम्मू कश्मीर के पूर्व उप-मुख्यमंत्री कविंदर सिंह ने कहा कि पीडीपी एंटी-नेशनल बातें कर रही है। उन्होंने वीडीसी की तारीफ़ करते हुए कहा कि उसने सुरक्षा के लिए काफ़ी अच्छा काम किया है।

कॉन्ग्रेस MLA रौशन बेग को हवाई जहाज से उतार कर लिया हिरासत में: ₹1500 करोड़ की हेराफेरी

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस विधायक रौशन बेग को आईएमए पोंज़ी स्कीम से जुड़े मामले में एसआईटी ने हिरासत में ले लिया है। बेग को बंगलौर में हिरासत में लिया गया। राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके रौशन बेग बंगलौर के ही शिवाजीनगर क्षेत्र से विधायक हैं। उन्हें एसआईटी ने तब हिरासत में लिया, जब वह केम्पेगौडा हवाई अड्डे पर फ्लाइट में बैठने जा रहे थे। एसआईटी के जाँच अधिकारी व डीसीपी गिरीश ने कहा कि फ़िलहाल उन्हें हिरासत में लिया गया है और जल्द ही एसआईटी के सामने पेश किया जाएगा।

वहीं इस पूरे मामले पर आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने दावा किया कि रौशन बेग को मुंबई भगाने में कर्णाटक भाजपा के अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा का सहयोगी संतोष उनकी मदद कर रहा था। कुमारस्वामी ने दावा किया कि संतोष भागने में सफल रहा लेकिन एसआईटी ने बेग को हिरासत में ले लिया। सीएम कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक योगेश्वर भी कार्रवाई के वक़्त वहीं पर मौजूद थे।

कुमारस्वामी ने ट्वीट कर लिखा कि रौशन बेग चार्टर्ड फ्लाइट में येदियुरप्पा के सहयोगी संतोष के साथ मुंबई जाने की फ़िराक़ में थे, तभी एसआईटी उन्हें हिरासत में लेने में कामयाब रही। उन्होंने भाजपा विधायक योगेश्वर की मौजूदगी पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यह सब राज्य सरकार को अस्थिर करने के लिए भाजपा द्वारा किए जा रहे हॉर्स ट्रेडिंग का हिस्सा है। हालाँकि, कर्णाटक भाजपा ने कुमारस्वामी पर फेक न्यूज़ फैलाने और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। भाजपा ने कहा कि उस फ्लाइट में बेग अकेले थे, कोई दूसरा यात्री नहीं था।

भाजपा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अब कॉन्ग्रेस-जेडीएस सरकार को बचाने के लिए सरकारी मशीनरी का प्रयोग करना शुरू कर दिया है। बेग को 19 जुलाई तक एसआईटी के समक्ष पेश होने का समय दिया गया था। भाजपा ने कहा कि यह दिखाता है कि राज्य सरकार आप अपने ही विधायकों को ब्लैकमेल कर रही है।

रौशन बेग 7 बार विधायक रह चुके हैं और वह कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार में मंत्रीपद न मिलने से नाराज़ चल रहे थे। हाल ही में उन्हें कॉन्ग्रेस ने पार्टी से निलंबित कर दिया था। बेग को राज्य में मुस्लिमों का चेहरा माना जाता है। आईएमए स्कैंडल लगभग 1500 करोड़ रुपए का हो चुका है और 40,000 से भी अधिक लोग इस मामले में शिकायत दर्ज करा चुके हैं। मामले का मुख्य आरोपित मंसूर ख़ान अभी भी फरार है।

25 गायों की मौत, 35 घायल: मवेशियों की तस्करी कर भाग रहा ट्रक पलटा, ओडिशा पुलिस पर सवाल

ओडिशा में एक ट्रक पलट जाने के कारण 25 गायों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। 35 अन्य गायों के घायल होने की भी ख़बर है। इस ट्रक में गायों को अवैध तरीके से ले जाया जा रहा था। अवैध ट्रांसपोर्टिंग के दौरान ही यह हादसा हुआ। यह घटना ओडिशा के बालासोर में सोमवार (जुलाई 15, 2019) को सुबह 6 बजे घटी। इन मवेशियों को अवैध तरीके से ट्रांसपोर्ट कर पश्चिम बंगाल ले जाया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग 60 पर इन मवेशियों को लेकर जा रहा वाहन अचानक से फिसल गया, जिस कारण यह दुर्घटना हुई।

इन मवेशियों को काफ़ी बुरी स्थिति में रखा गया था। अवैध ट्रांसपोर्टिंग को अंजाम देने के लिए उनके साथ बेरहमी की गई थी। सभी गायों के पाँव बाँध कर रखे गए थे। 60 गायों को लेकर जा रहे ट्रक ड्राइवर और उसका सहयोगी भाग खड़े हुए। इसी वर्ष फरवरी को स्थानीय लोगों ने 3 ऐसे ट्रकों को पकड़ा था, जिसमें मवेशियों को अवैध तरीके से ले जाया जा रहा था। ग्रामीणों ने कुछ मवेशी स्मगलरों की पिटाई भी की थी। ताज़ा मामले में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस गायों की तस्करी को लेकर निष्क्रिय है और कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। बजरंग दल ने पुलिस से मवेशी तस्करों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पर्यावरण एवं पशु कल्याण मंत्रालय ने ओडिशा सरकार को पहले से ही आगाह कर रखा है कि राज्य के 6 जिलों से मवेशियों को ट्रांसपोर्ट कर पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ले जाया जा रहा है। मंत्रालय ने ओडिशा के परिवहन विभाग को सभी प्रमुख जगहों ख़ासकर राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में चेक पोस्ट बनाने को कहा था ताकि ‘कैटल ट्रैफिकिंग’ कर रहे अपराधियों को दबोचा जा सके।

मंत्रालय ने ओडिशा सरकार से एक कण्ट्रोल रूम स्थापित करने की भी सलाह दी थी, जहाँ जनता मवेशियों की ट्रैफिकिंग और संदिग्ध ट्रांसपोर्टिंग को लेकर अपनी शिकायतें दर्ज करा सके। जानवरों पर क्रूरता के ख़िलाफ़ पहले से ही क़ानून है। करंदर ने ओडिशा सरकार को उस क़ानून के तहत कार्रवाई करने को कहा था।