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मुलायम-मायावती-अखिलेश सब गए विदेश, पर नतीजा निल बट्टे सन्नाटा: CM योगी ने 1 दिन में ही ₹19877 करोड़ का निवेश जुटाया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दिनों सिंगापुर में हैं। सिर्फ दो-तीन दिन की आधिकारिक यात्रा, लेकिन पहले दिन ही राज्य को 19,877 करोड़ रुपए के बड़े-बड़े निवेश के MoU मिल गए। ये कोई कागजी वादा नहीं, बल्कि ठोस समझौते हैं, जिसमें टाउनशिप, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क, ग्रीन एनर्जी पर निवेश शामिल है।

इसमें जेवर एयरपोर्ट के पास इंटरनेशनल टाउनशिप, नोएडा में 100 मेगावाट का डेटा सेंटर, कानपुर-लखनऊ हाईवे पर लॉजिस्टिक्स पार्क… सब कुछ ग्राउंड पर उतरने वाला है। पहले दिन के इन समझौतों से ही करीब 20 हजार युवाओं को नौकरियाँ मिलने का अनुमान है।

ये दौरा सिर्फ फोटो खिंचवाने या घूमने का नहीं है। मुख्यमंत्री योगी ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग, विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन, DBS ग्रुप, GIC, टेमासेक जैसे बड़े निवेशकों से सीधे बात की। कौशल विकास पर भी ITEES के साथ MoU साइन किया। मतलब निवेश तो आ रहा है, साथ में युवाओं को ट्रेनिंग भी मिलेगी। इसके बाद वो जापान जा रहे हैं, वहाँ भी 1-on-1 मीटिंग्स में ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन जैसे सेक्टर में बड़े समझौते होने वाले हैं।

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर गढ़ रहे हैं, जहाँ कानून-व्यवस्था ठीक है, लैंड क्लियर है, सिंगल विंडो क्लियरेंस है और CM खुद निवेशकों को कॉल करके बुला रहे हैं।

पहले के मुख्यमंत्रियों ने भी किए विदेश दौरे, लेकिन नतीजे में मिले शून्य

अब तुलना करते हैं। पहले मुलायम सिंह यादव, फिर मायावती, फिर अखिलेश यादव… सबने विदेश गए, निवेश लाने की बात की, लेकिन जमीनी हकीकत क्या रही?

मुलायम सिंह यादव 1995 में ब्रिटेन गए थे। तब वे मुख्यमंत्री थे। निवेशकों को UP में बुलाने की कोशिश की। लेकिन उस समय UP में दंगे, अपराध, बिजली-पानी की समस्या, सड़कें खराब… विदेशी निवेशक डरते थे। दौरे के बाद कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं आया। कोई फैक्ट्री नहीं लगी। कोई MoU जमीन पर नहीं उतरा। सिर्फ घोषणा रह गई।

मायावती ने भी कोशिश की। 1997 में जापान और साउथ कोरिया गईं। फिर 2003 में पाँच देशों का लंबा दौरा किया, जिसमें इंग्लैंड, कनाडा, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, अमेरिका शामिल रहे। इन 15-16 दिन की यात्रा में वो NRIs और विदेशी कंपनियों से मिलीं। ताज एक्सप्रेसवे, NRI सिटी, मेडी सिटी, बायोटेक सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स में निवेश की बात की। वहाँ से वापस आकर दावा किया कि यूपी में निवेश के लिए ₹20,000 करोड़ के प्रस्ताव मिल गए।

लेकिन हकीकत? मीडिया रिपोर्ट्स साफ बताती हैं- रिस्पॉन्स ठंडा था। कोई ठोस निवेश नहीं आया। प्रोजेक्ट्स शुरू नहीं हुए। 2007-2012 के लंबे कार्यकाल में भी कोई बड़ा विदेशी निवेश दौरा नहीं हुआ। उनका फोकस राज्य के अंदर मूर्तियाँ बनाने पर ज्यादा रहा। विदेश दौरे सिर्फ एक-दो रहे, नतीजे शून्य।

अखिलेश यादव का समय तो और मजेदार रहा। उन्होंने साल 2012-2017 के बीच कई विदेश दौरे किए। जिसमें जुलाई 2012 का ऑस्ट्रेलिया दौरा पूरी तरह से पारिवारिक छुट्टी का था। वो अप्रैल 2013 में अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी गए, यहाँ खर्च भी ₹1.06 करोड़ का कर दिए, लेकिन आजम खान से हुई बदतमीजी (याद करें) के चलते उन्होंने प्रेजेंटेशन ही नहीं दिया

इसके बाद वो साल 2014 में नीदरलैंड गए, निवेश की बात करे.. फिर साल 2015 में जर्मनी के बर्लिन टूरिज्म फेयर में शामिल हुए। इसके अलावा फ्रांस और ग्रीस में भी निवेशकों से मुलाकात की। हाँ, इस बीच में वो लंदन कई बार गए, कुछ दौरे पारिवारिक रहे, तो कुछ में जन्मदिन मनाने।

लेकिन निवेश? कोई बड़ा MoU नहीं आया जो जमीन पर उतरा हो। कुछ मीटिंग्स हुईं, कुछ इंटरेस्ट दिखा, लेकिन UP की छवि अराजकता वाली थी- लॉ एंड ऑर्डर खराब, घोटाले, राजनीतिक अस्थिरता। विदेशी कंपनियाँ दूर ही रहीं। अखिलेश खुद कहते थे निवेश लाएँगे, लेकिन दौरे ज्यादातर पर्सनल या फोटो-ऑप लगते थे।

योगी का पुराना बयान और नया रिकॉर्ड

सीएम योगी ने एक बार कहा था कि कुछ लोग विदेश जाते हैं ये जानने के लिए कि उनकी प्रॉपर्टी पर कब्जा तो नहीं हो गया। ये तंज पुराने नेताओं पर था। आज खुद योगी विदेश जा रहे हैं, लेकिन निवेश लाने, रोजगार देने।

सिंगापुर के बाद बाद वो जापान प्रवास के दौरान आठ प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। कुबोटा और सुजुकी के साथ ऑटोमोबाइल निवेश, टोक्यो इलेक्ट्रॉन के साथ सेमीकंडक्टर, तोशिबा के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग तथा टोयो डेंसो, जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स और नागासे एंड कंपनी के साथ ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन सहयोग प्रमुख एजेंडा रहेंगे। कनाडेविया के साथ ग्रीन हाइड्रोजन और मारुबेनी के साथ हॉस्पिटैलिटी व रियल एस्टेट निवेश पर भी चर्चा होगी।

दौरे के दौरान आयोजित जी-टू-बी और राउंड टेबल बैठकों में मुख्यमंत्री प्रदेश की औद्योगिक नीति, भूमि बैंक, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और कौशल विकास से जुड़े पहलुओं पर निवेशकों के साथ संवाद करेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इन बैठकों से निवेश प्रस्तावों को गति मिलेगी और संयुक्त परियोजनाओं का रास्ता साफ होगा। मुख्यमंत्री की यह यात्रा न केवल निवेश आकर्षित करने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक मंच पर ‘ब्रांड यूपी’ को सशक्त रूप से स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

योगी राज में कैसे आया फर्क?

क्योंकि योगी सरकार ने पहले घरेलू मोर्चा मजबूत किया। साल 2017 से कानून-व्यवस्था सुधारी, बुलडोजर चलाया, माफिया को मिट्टी में मिलाया और अब इसका असर भी दिख रहा है। आज इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में देखेंगे तो राज्य में 6 एक्सप्रेसवे हैं। नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट बने हैं। डेटा सेंटर पॉलिसी तैयार की गई है। सेमीकंडक्टर मिशन में यूपी आगे दिख रहा है। आज ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में UP टॉप-3 में आ चुका है।

सिंगापुर दौरे का पहला दिन ही देख लें, जिसमें यूनिवर्सल सक्सेस ग्रुप ने ₹6,650 करोड़ का निवेश किया। इसमें जेवर के पास टाउनशिप (3,500 करोड़), नोएडा डेटा सेंटर (2,500 करोड़), लॉजिस्टिक्स पार्क (650 करोड़ बनेगा। इसके साथ ही गोल्डन स्टेट कैपिटल ने 8,000 करोड़ के 100 MW डेटा सेंटर के लिए निवेश किया है। PIDG ने 2,500 करोड़ रुपए ग्रीन हाइड्रोजन और एग्री-पीवी में निवेश किया है, तो AVPN ने 2,727 करोड़ रिन्यूएबल एनर्जी में। कुल 19,877 करोड़ का निवेश और इससे राज्य में 19,500+ नौकरियाँ आएँगी।

CM योगी का मॉडल- चुपचाप काम को अंजाम देना

मुलायम-मायावती-अखिलेश के दौरों में निवेश प्रस्ताव तो आए, लेकिन 90% कागजों पर रह गए। 1995, 1997, 2003, 2012-17… कोई बड़ा विदेशी प्लांट UP में नहीं लगा जो उनके दौरे का नतीजा हो। जबकि योगी के समय Foxconn, Samsung, Adani, Reliance जैसी कंपनियाँ आ रही हैं। डेटा सेंटर हब बन रहा है। जेवर एयरपोर्ट विश्व स्तरीय बन चुका है और उसके आसपास विकास की रफ्तार तेज हो चुकी है।

योगी का फोकस रिजल्ट पर होता है। वो विदेश गए हैं तो पूरे डेलिगेशन, प्रेजेंटेशन, साइट विजिट, फॉलो-अप के साथ। सिंगापुर के बाद जब वो जाना जाएँगे, तो वहाँ भी Kubota, Suzuki, Tokyo Electron, Toshiba जैसी कंपनियों से 1-on-1 मीटिंग करेंगे।

सिंगापुर-जापान दौरा साबित करता है कि मुख्यमंत्री अगर संकल्पित हो, राज्य की छवि बदले, तो विदेशी निवेशक खुद आते हैं। पुराने CMs के समय में समस्या थी अंदरूनी अस्थिरता की, लेकिन योगी सरकार ने उसे दूर कर दिया। यही वजह है कि अब UP ग्लोबल इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बन रहा है।

ये दौरा सिर्फ 20 हजार करोड़ का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के नए ब्रांड का है, जहाँ निवेशक आते हैं, प्रोजेक्ट शुरू होते हैं, युवा नौकरी पाते हैं। योगी आदित्यनाथ का ये मॉडल पूरे देश के लिए उदाहरण है।

सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी के मामले में मुख्य पुजारी को फँसा रही केरल सरकार, कोर्ट ने SIT को लताड़ते हुए दी जमानत: जानें- कैसे सनातनियों को निशाना बना रहे वामपंथी

सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी के मामले में केरल की वामपंथी सरकार जबरदस्ती तंत्री यानी प्रधान पुजारी कंदारारू राजीवरू को फँसाने में लगी हुई है। ये बात कोल्लम विजिलेंस कोर्ट के फैसले को देख कर भी कहा जा सकता है। कोर्ट ने कहा है कि सोना चोरी मामले में तंत्री राजीवरू का ‘लेश मात्र भी हाथ’ नहीं है।

41 दिनों तक जेल में रहने के बाद उन्हें विजिलेंस कोर्ट ने जमानत दे दी। एसआईटी को इससे धक्का लगा है, क्योंकि उसके ‘सबूतों’ को कोर्ट ने नकारा दिया। अब एसआईटी ऊपरी अदालत में जाने का मन बना रही है। उधर लोकल कोर्ट से रिहा होने के बाद प्रधान पुजारी राजीवरू ने पूरे मामले पर केरल सरकार को घेरा और 2018 में महिलाओं के मंदिर में प्रवेश मामले से जोड़ा।

सोना चोरी मामले में तंत्री की गिरफ्तारी का शुरू से विरोध हो रहा है। विपक्ष वामपंथी सरकार पर राजनीतिक कार्रवाई करने का आरोप लगा रही है। इनका कहना है कि वामपंथी सरकार और सीएमओ पूर्व और मौजूदा देवास्वोम मंत्रियों और टीडीबी अध्यक्ष को बचाने के लिए तंत्री को बली का बकरा बना रही है, क्योंकि इन पदों पर विराजमान लोगों को सरकार ने चुना है।

तंत्री ने बताया ‘बदले की कार्रवाई’

मुख्य पुजारी का कहना है कि उन्होंने मंदिर की परंपरा और अनुष्ठानों की रक्षा के लिए मासिक धर्म आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। उस वक्त उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं मानी थी और परंपरा से छेड़छाड़ होने पर पूजा-अर्चना नहीं करने की धमकी दी थी।

उन्होंने ये भी कहा कि मंदिर को हर दिन खोलने के भी वे खिलाफ थे। इससे ‘प्रभावशाली’ लोग नाराज हो गए और उनकी प्रतिष्ठा धुमिल करने के लिए अवैध लेन-देन के मामले में उन्हें फँसाने की कोशिश की गई। एसआईटी ने तंत्री को सोना चोरी केस के मुख्य आरोपित उन्नीकृष्णन पोट्टी से जोड़ने की कोशिश की। जबरदस्ती ये दिखाने की कोशिश की कि उन्होंने ही पोट्टी को नियुक्त किया था।

कोल्लम कोर्ट ने आरोप को नकारा

एसआईटी ने कोर्ट के सामने दलील दी कि 18 जून 2019 को मंदिर की मूर्तियों और आवरणों पर चढ़ी सोने के परत की मरम्मत का काम करने की राय तंत्री द्वारा दी गई थी। उसे खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है। यहाँ तक कि एसआईटी ने भी कोई सबूत पेश नहीं किया है, जिससे प्रधान पुजारी की अनियमितताओं में किसी तरह की संलिप्तता प्रमाणित हो।

कोर्ट ने कहा कि प्रधान पुजारी यानी तंत्नी के 20 जुलाई 2019 और 18 मई 2019 में से किसी भी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं है। अगर कोई साजिश होती , तो तंत्री का जरूर हस्ताक्षर होता। कोर्ट ने साफ कहा कि 10 जुलाई 2019 वाले प्रस्ताव पर तंत्री का हस्ताक्षर इसलिए है क्योंकि वे बोर्ड द्वारा माँगी गई राय देने के लिए बाध्य थे।

मंदिर के नियम के मुताबिक भी तंत्री का काम बोर्ड द्वारा माँगे गए मुद्दे पर अपनी राय देना और केवल पूजा और नियम अनुष्ठान तक ही सीमित है। इसलिए मंदिर की मूर्तियों और आवरणों के रखरखाव की जिम्मेदारी तंत्री की नहीं बल्कि त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड के अधिकारियों की थी।

एसआईटी केरल हाईकोर्ट का करेगी रुख

एसआईटी की किरकिरी होने के बाद बताया जा रहा है कि वह तंत्री को जमानत दिए जाने के कोल्लम विजिलेंस कोर्ट के फैसले को चुनौती देगी और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी ने तंत्री को जमानत देते समय कोल्लम विजिलेंस कोर्ट की सख्त टिप्पणियों को लेकर भी कानूनी राय माँगी है।

उधर, विपक्षी पार्टियाँ अब सवाल पूछ रही है कि जब तंत्री का कोई कसूर नहीं था तो उन्हें जबरन 41 दिन जेल में क्यों रखा गया। एसआईटी को इसका जवाब देना चाहिए। एसआईटी अब नए सिरे से सबूतों को जुटाने की कोशिश करेगी, ताकि तंत्री राजीवरू की बेल को चुनौती दी जा सके।

सीपीएम बता रही ‘महा चोर’

तंत्री राजीवरू के खिलाफ कोई सबूत नहीं है, फिर भी उन्हें सीपीएम नेता ‘चोर’ कह रहे हैं। सीपीएम केरल के स्टेट सेक्रेटरी एम वी गोविंदन ने सबरीमाला तंत्री कंदारारू राजीवारू को ‘मास्टर चोर’ कहा। उनका कहना है कि तंत्री सोने की चोरी में शामिल ‘चोरों की लिस्ट’ में था, जाँच अभी भी चल रही है। आखिर कब तक एसआईटी की जाँच करवाएगी केरल सरकार पता नहीं।

सीपीएम नेता का सवाल है कि जब ईडी दूसरे आरोपितों के खिलाफ जाँच कर रही है, तो तंत्री के खिलाफ क्यों नहीं जाँच कर रही। जब आय से अधिक का मामला तंत्री के खिलाफ सामने नहीं आया और तंत्री को कोर्ट ने भी एसआईटी को लताड़ते हुए जमानत दे दी, तो ईडी की जाँच क्यों हो।

कॉन्ग्रेस नेता वेणुगोपाल पर सीपीएम नेता ने लगाया आरोप

दरअसल सबरीमाला सोना चोरी केस में सीपीएम के पूर्व विधायक ए पद्मकुमार समेत तीन नेता और मुख्य आरोपित उन्नीकृष्णन पोट्टी को गिरफ्तार किया गया है। उन्नीकृष्णन पोट्टी को लेकर कॉन्ग्रेस और सीपीएम में तू-तू मैं-मैं जारी है।

सीपीएम नेता गोविंदन का कहना है कि कॉन्ग्रेस पहले CPI(M) और मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी के बीच सांठगांठ का आरोप लगा रही थी, लेकिन पोट्टी ने AICC के जनरल सेक्रेटरी के सी वी वेणुगोपाल के केरल विकास मंत्री के तौर पर कार्यकाल के दौरान सबरीमाला में एंट्री ली थी, ये बात सामने आई है।

त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति केरल की सत्ताधारी राज्य सरकार द्वारा की जाती है, जिसमें अक्सर राजनीतिक नियुक्तियां होती हैं। पूर्व विधायक और सीपीएम नेता पद्मकुमार टीडीबी के अध्यक्ष रहे। उससे पहले सीपीएम के ही एक और नेता एन वासु अध्यक्ष थे। जानकारों के मुताबिक, मार्च 2019 में सन्निधानम द्वार पैनल से सोना पिघलाने के पूरे काम की जानकारी वासु को थी और उनकी सहमति से ही ये काम हुआ। इस दौरान वासु टीडीबी के अध्यक्ष थे। वे टीडीबी के दो बार आयुक्त रह चुके हैं।

मुख्य आरोपित उन्नीकृष्णन पोट्टी के पुराने ईमेल से भी पता चला है कि वासु को मालूम था कि मंदिर के देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की मरम्मती के बाद सोना बच गया है। पोट्टी ने कथित तौर पर उस बचे हुए सोना का इस्तेमाल एक जरूरतमंद लड़की की शादी में लगा दिया। इससे संबंधित ईमेल 9 दिसंबर 2019 को भेजा गया था।

वासु ने ईमेल फॉरवर्ड तो कर दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद सोना गायब पाया गया। यही वजह है कि सीपीएम और कॉन्ग्रेस एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। एक तरह से कहा जाए तो तंत्री की गिरफ्तारी एसआईटी ने पूरे मामले से ध्यान भटकाने के लिए किया था, ताकि वामपंथी नेताओं के करतूतों पर पर्दा डाला जा सके।

अनुराग कश्यप, आपके लिए खिचड़ी और Beef होगा एक समान, ‘लव जिहाद पीड़िताओं’ के लिए बिलकुल नहीं है

सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म ‘द केरल स्टोरी-2 गोज बीयॉन्ड‘ का ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया है। फिल्म में लव जिहाद मामलों में पीड़ित हिंदू लड़कियों के साथ अत्याचार की सच्चाई को दर्शाया गया है, जो झकझोर देने वाले हैं। फिल्म मेकर्स ने इसे हकीकत का आईना बताया है। लेकिन इसी बीच फिल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने फिल्म में पीड़िता को जबरन ‘बीफ’ यानी गोमांस खिलाने वाले दृश्य की खिचड़ी से तुलना की है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है, जिसमें रिपोर्टर ने अनुराग कश्यप से सवाल पूछा कि आपकी केरल स्टोरी-2 पर क्या राय है? इसका जवाब देते हुए अनुराग कश्यप कहते हैं, “फिल्म ‘बुलशिट’ है। ये प्रोपेगेंडा है। ऐसे कौन ‘बीफ’ खिलाता है, ऐसे कोई खिचड़ी भी नहीं खिलाता है।”

इसके बाद रिपोर्टर एक और सवाल पूछता है कि इस फिल्म को बनाने का उद्देश्य क्या है? इस पर अनुराग कश्यप ने कहा, “वो पैसा कमाना चाहते हैं। वो बस सबको खुश करना चाहते हैं, लोगों को बाँटना चाहते हैं। फिल्ममेकर एक लालची आदमी है।”

अनुराग कश्यप की टिप्पणी पर द केरल स्टोरी-2 के डायरेक्टर की प्रतिक्रिया

फिल्म पर अनुराग कश्यप की टिप्पणी का वीडियो वायरल होते ही विवाद शुरू हो गया। फिर ‘द केरल स्टोरी-2’ के फिल्म डायरेक्टर कामाख्य नारायण ने विवाद में उतरकर दिया। उन्होंने अनुराग कश्यप की टिप्पणी पर रिएक्ट करते हुए कहा कि समाज ने उन्हें गंभीरता से लेना छोड़ दिया है, वह मानसिक रूप से दुर्बल हो चुके हैं।

वीडियो में फिल्म के डायरेक्टर कामाख्य नारायण ने कहा, “ऑडियंस उन्हें गंभीरता (सीरियसली) से नहीं लेती है। पिछले कई सालों से उनकी सारी फिल्में फ्लोप हो रही हैं। वो मानसिक रूप से दुर्बल हो चुके हैं। उनकों सच्चाई दिखती नहीं है। उनको ये नहीं दिख रहा कि हमारी बहनों को जबरन बीफ खिलाया जा रहा है, धर्म परिवर्तन करने के लिए। ये सत्य घटना है।”

नारायण आगे कहते हैं, उनको पूरी दुनिया से समस्या है। उनको नेटफ्लिक्स से समस्या है। उनको ब्राह्मणों से समस्या है। उनको फिल्म इंडस्ट्री से समस्या है। आजकल हमसे समस्या है उनको। उनको गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। हमारी फिल्म सत्य घटनाओं पर आधारित है, “हमें ये पता है। हम अनुराग जी के घर रिसर्च मैटेरियल भेज देंगे। वो तो लोगों के घर जूते-चप्पल भेजते हैं। मैं तो ये नहीं भेज सकता हूँ।”

फिल्म की रिसर्च को लेकर कामाख्य नारायण कहते हैं, “मैनें 1500 आर्टिकल पढ़े हैं। 70-80 FIR पढ़ी हैं। पीड़िताओं से मिला हूँ और उनसे मिलकर मैं पिछले 1-1.5 साल से सो नहीं पाया हूँ। कोर्ट जजमेंट पढ़े हैं। ये सभी सत्य घटनाएँ हैं। समाज में हो रहा है। हम अपनी आँखो को बंद कर सकते हैं, लेकिन उससे सत्य नहीं बदलेगा। समाज में ये बहुत बड़े पैमाने पर हो रहा है।”

हिंदू लड़कियों को ‘जबरन गोमांस’ खिलाने के असल मामले

फिल्म ‘द केरल स्टोरी-2’ ने हिंदू लड़कियों को लव जिहाद में फँसाकर गोमांस खिलाने और धर्मांतरण कराने की सच्ची घटनाओं को उजागर किया है, जो आए दिन सामने आती हैं। ऐसी कई घटनाएँ हैं, जिनमें हिंदू लड़कियों को पहले प्रेमजाल में फँसाया जाता है, फिर बहला-फुसलाकर रेप और फिर गोमांस खिलाकर जबरन इस्लाम कबूलने को मजबूर किया जाता है।

चाहे वह रायबरेली का एक बच्चे का अब्बू मोहम्मद मुकीम हो, जिसने निकाह का झाँसा देकर दो साल तक रेप किया। फिर धीरे-धीरे धर्म परिवर्तन का दबाव डालने लगा और घर ले जाकर जबरन गोमांस तक खिलाया।

या फिर उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का अहमद रजा हो, जिसने चाकू की नोक पर हिंदू लड़की से बलात्कार किया और निकाह का झाँसा देकर अम्मी-अब्बू से मिलवाया। फिर घर ले जाकर अम्मी-अब्बू के सामने गोमांस खाने और नमाज पढ़ने की धमकी दी। जब पीड़िता ने इनकार किया, तो बेरहमी से पीटा।

महाराष्ट्र के संभाजीनगर का ताहेर पठान ने भी हिंदू लड़की के साथ यही किया। समीर पटेल बनकर पीड़िता से मिला, फिर प्रेमजाल में फँसाकर रेप किया। और अंत में अपना मकसद पूरा करने के लिए पीड़िता को बुर्का पहनने और गोमांस खाने को मजबूर किया। इस काम में उसकी अम्मीजान, अब्बाजान के साथ-साथ उसकी पहली बेगम आयेशा पठान भी शामिल थी, जिसके साथ ताहेर के 4 बच्चे भी थे।

ये कुछ गिने चुने मामले हैं, लेकिन आँकड़ा सोच से कही परे है। कई मामलों में FIR होती हैं, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे होते हैं। कैसे ‘अब्दुल’ अपने जाल में फँसाकर हिंदू लड़कियों का धर्म परिवर्तन करा देते हैं। इससे कई हिंदू लड़कियों की जिंदगियाँ बर्बाद हुई हैं। ‘द केरल स्टोरी पार्ट-1’ और ‘पार्ट-2’ जैसी फिल्मों में इन्हीं पीड़ित हिंदू लड़कियों का दर्द दिखाकर ऐसे ‘अब्दुलों’ की सच्चाई को उजागर किया गया है।

हिंदू पीड़िताओं के दर्द पर अनुराग कश्यप का ‘खिचड़ी’ ह्यूमर

अब वापस आते हैं अनुराग कश्यप की टिप्पणी पर, तो बात सीधी है। अगर किसी हिंदू लड़की को उसकी मर्जी के बगैर जबरन गोमांस खिलाया गया है, तो यह सिर्फ फिल्म का एक दृश्य नहीं है, यह उन लव जिहाद की पीड़िताओं के दर्द की असलियत है। जिन मामलों का जिक्र फिल्म में है, जिन पीड़िताओं ने यह दर्द झेला है, उनके लिए यह कोई हल्का अनुभव नहीं रहा। ऐसे जख्म लंबे समय तक याद रहते हैं, और इन्हें शब्दों की चतुराई से छोटा नहीं किया जा सकता।

ऐसे में अनुराग कश्यप का यह कहना कि ‘ऐसे तो लोग खिचड़ी भी नहीं खिलाते’ आखिर क्या संदेश देता है। क्या यह टिप्पणी उन घटनाओं की गंभीरता को कम करके दिखाने की कोशिश है या फिर दर्द को एक सामान्य मजाक में बदल देने का अंदाज है। क्या जिन लड़कियों ने यह सब सहा, उनके लिए यह सिर्फ एक हल्की टिप्पणी भर है। इसका जवाब तो अनुराग कश्यप ही दे सकते हैं, जिन्हें बीफ पराठा शायद बेहद पसंद भी है।

जाहिर है खिचड़ी और गोमांस की तुलना करना कोई ह्यूमर में नहीं आता। ये दोनों एक चीज नहीं है, न ही इन्हें जबरन खिलाने के मायने एक हैं। आस्था, दर्द और जबरन जैसे शब्दों का वजन समझे बिना की गई तुलना अपने आप बहुत कुछ कह जाती है।

AI समिट में नंगई से लेकर देश भर में BJP-RSS कार्यकर्ताओं के खिलाफ गुंडई तक: पढ़ें- कॉन्ग्रेसियों की हिंसा की 5 घटनाएँ, समझें इस पार्टी का चाल और चरित्र

इंडियन नेशनल कॉन्ग्रेस एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। पार्टी के कार्यकर्ताओं पर गुंडागर्दी के आरोप लग रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि को नुकसान पहुँचा है। पिछले कुछ दिनों में कॉन्ग्रेस और उसकी युवा इकाई के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कई राज्यों में हिंसक झड़पें और राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिली हैं।

दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में हंगामे से लेकर इंदौर, पुडुचेरी और तेलंगाना में हुए हालिया हमले ने कॉन्ग्रेस की आक्रामक और हिंसक रणनीति को जगजाहिर किया है।

भारत मंडपम में ‘शर्टलेस’ प्रदर्शन

घटना की शुरुआत दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित प्रतिष्ठित AI इम्पैक्ट समिट से हुई। इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में शीर्ष टेक कंपनियों के CEO और विदेशी प्रतिनिधि शामिल हुए। इसका उद्देश्य AI के क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत को दिखाना था।

हालाँकि, इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस (IYC) के सदस्यों ने कार्यक्रम स्थल पर शर्टलेस प्रदर्शन करते हुए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी कर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में रुकावट डालने की कोशिश की।

पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को यूथ कॉन्ग्रेस के कुछ नेता ऑनलाइन पंजीकरण कर और क्यूआर कोड के माध्यम से कार्यक्रम स्थल में प्रवेश कर गए। उन्होंने अंदर टीशर्ट पहनी थी, जिस पर राजनीतिक नारे लिखे थे। इसके ऊपर से स्वेटर और जैकेट पहन रखी थी। इससे एंट्री के दौरान किसी का ध्यान नहीं गया।

हॉल नंबर 5 में पहुँचने के बाद उन्होंने अपने गर्म कपड़े और टी-शर्ट उतारकर हवा में लहराए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, जिसमें ‘PM is compromised’ जैसे नारे भी शामिल थे।

यह प्रदर्शन हाल ही में घोषित भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में आयोजित किया गया था। INC का आरोप है कि यह समझौता देशहित से खिलाफ है।

इस घटना से कई प्रतिभागी, विशेषकर विदेशी प्रतिनिधि शॉक्ड रह गए। मीडिया के जरिए जो वीडियो और तस्वीरें सामने आईं, उसमें प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के खिलाफ नारे लिखे गए थे। स्थिति तब बिगड़ गई जब धक्का-मुक्की शुरू हो गई और हालात को काबू करने की कोशिश में कम से कम तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।

दिल्ली पुलिस ने यूथ कॉन्ग्रेस के चार नेताओं कृष्ण हरि, कुंदन यादव, अजय कुमार और नरसिम्हा यादव को गिरफ्तार किया।

बाद में कोर्ट ने उन्हें पाँच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि गिरफ्तार आरोपितों की योजना नेपाल जैसी स्थिति पैदा करने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि धूमिल करने की थी।

जहाँ यूथ कॉन्ग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार बताया, वहीं बीजेपी ने इस घटना को राष्ट्रीय शर्म करार देते हुए आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस ने एक इंटरनेशनल कार्यक्रम का राजनीतिकरण करने की कोशिश की।

इंदौर में हिंसक झड़पों में कई लोग घायल

राजनीतिक तनाव जल्द ही सड़कों तक पहुँच गया। इंदौर के मच्छी बाजार स्थित कॉन्ग्रेस कार्यालय के पास शनिवार (21 फरवरी 2026) को भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ताओं और कॉन्ग्रेस समर्थकों के बीच झड़पें हुईं।

बताया गया कि BJYM कार्यकर्ता AI समिट में युवा कॉन्ग्रेस की कार्रवाई के विरोध में एकत्र हुए थे। भारी पुलिस बैरिकेडिंग के बावजूद तनाव तेजी से बढ़ गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अचानक पथराव शुरू हो गया और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हिंसा शुरू करने का आरोप लगाया।

बीजेपी की महिला कार्यकर्ता बिंदु चौहान उस समय गंभीर रूप से घायल हो गईं जब एक पत्थर उनकी आँख के पास लगा। बीजेपी ने जो तस्वीरें शेयर की हैं, उसमें उनके माथे और नाक से खून बहता दिखाई दिया। अपने बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस कार्यालय की ओर से पथराव किया गया और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया। इस झड़प में कई अन्य प्रदर्शनकारी, मीडिया कर्मी और एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर भी घायल हुए।

मामले में पंढरीनाथ पुलिस स्टेशन ने दो FIR दर्ज की। एक भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता अवेश राठौर की शिकायत पर और दूसरा कॉन्ग्रेस नेताओं की शिकायत पर। इसके अलावा पुलिस ने सरकारी काम में बाधा और सरकारी आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में एक और मामला भी दर्ज किया।

BJYM की शिकायत में करीब 20 कॉन्ग्रेस नेताओं को नामजद किया गया है, जिनमें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े शामिल हैं, साथ ही कई अज्ञात लोगों को भी आरोपित बनाया गया है। इन पर अवैध जमावड़ा, दंगा, जानबूझकर चोट पहुँचाना और आपराधिक साजिश जैसी धाराएँ लगाई गई हैं।

कॉन्ग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि BJYM कार्यकर्ताओं ने कॉन्ग्रेस कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की और बाहर खड़े वाहनों को नुकसान पहुँचाया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिम्मेदारी तय करने के लिए दोनों पक्षों के CCTV  फुटेज और वीडियो साक्ष्यों की जाँच की जा रही है। पुलिस ने कहा कि यह निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी कि हिंसा किस पक्ष ने शुरू की।

AI समिट का नतीजा देश भर में राजनीतिक तूफान बन गया

AI समिट में हुए हंगामे का असर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। अगले ही दिन यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली और चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए और एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की। दोनों शहरों में सुरक्षा कर्मियों से झड़प के बाद पुलिस को प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।

दिल्ली के कुछ इलाकों में महात्मा गाँधी की तस्वीर के साथ ‘Shirtless Congressi’ लिखे पोस्टर भी लगाए गए, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया। इस बीच भारतीय जनता युवा मोर्चा ने कई राज्यों में जवाबी प्रदर्शन आयोजित करते हुए आरोप लगाया कि INC भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचा रही है।

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि गिरफ्तार यूथ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय नेताओं और बड़ी टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों के सामने हंगामा करने की कोशिश की थी। पुलिस ने यह भी कहा कि आरोपितों के मोबाइल फोन की जाँच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं किसी बाहरी फंडिंग की भूमिका तो नहीं थी।

वहीं बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और राजनीतिक असहमति को अपराध नहीं माना जाना चाहिए।

पुडुचेरी में BJP ऑफिस के बाहर हिंसक झड़प

तनाव जल्द ही पुदुचेरी तक फैल गया, जहाँ कॉन्ग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में पाँच लोग घायल हुए, जिनमें पुलिस अधीक्षक वमसी रेड्डी भी शामिल हैं। दरअसल करीब 100 कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता विरोध करने के लिए बीजेपी कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। रास्ते में पुलिस बैरिकेड को तोड़ते हुए ये वहाँ तक पहुँचने की कोशिश की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूँका। इस दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ इनकी भिड़ंत हुई।

यह प्रदर्शन राज्य कॉन्ग्रेस अध्यक्ष वी वैथिलिंगम और पूर्व मुख्यमंत्री वी नारायणसामी के नेतृत्व में आयोजित किया गया था। बीजेपी कार्यालय के पास स्थिति को बिगड़ते देख कर पुलिस को प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान SP वामसी रेड्डी के हाथ में चोट लग गई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 100 से अधिक पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया।

कामारेड्डी में जमीन विवाद को लेकर झड़प

तेलंगाना के कामारेड्डी में कॉन्ग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं की भिड़ंत जमीन विवाद को लेकर शनिवार (21 फरवरी 2026) को हुई। झड़प की वजह राज्य के एडवाइजर मोहम्मद अली शब्बीर और बीजेपी विधायक के वेंकट रामन रेड्डी के बीच तीखी नोंकझोंक की वजह से हुई।

कॉन्ग्रेस नेता गिरी रेड्डी महेंद्र रेड्डी और उनके समर्थक बीजेपी विधायक के कैंप ऑफिस के पास जमा हुए और उनके खिलाफ प्रदर्शन किया। इनलोगों ने महेंद्र रेड्डी की कार पलट दी। पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था।

तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे राजनीतिक हिंसा करार दिया। X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने कहा, “कामारेड्डी बीजेपी विधायक के वेंकट रमना रेड्डी गारू के कैंप ऑफिस पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं का हमला बहुत निंदनीय और चौंकाने वाला है…” राव ने कहा, “ऐसी पॉलिटिकल हिंसा की लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि वह BJP कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होने और हालात का जायजा लेने के लिए वे खुद मौके पर जाएँगे।

तेलंगाना में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने BRS ऑफिस पर धावा बोला

तेलंगाना के भोंगीर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाल ही में बीआरएस के ऑफिस पर धावा बोल दिया था। आरोप लगाया कि BRS के एक नेता ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के बारे में गलत बातें कही।

चश्मदीदों के मुताबिक, कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने ऑफिस में तोड़-फोड़ की, फर्नीचर को नुकसान पहुँचाया और कुर्सियाँ ​​फेंकी, जिससे काफी नुकसान हुआ। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भीड़ को तितर-बितर किया। दोषियों की पहचान के लिए CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

BRS के वर्किंग प्रेसिडेंट के. टी. रामा राव ने इस घटना की निंदा की और राज्य में हिंसा और अराजकता के कल्चर को बढ़ावा देने के लिए कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की माँग की और ऐसे हमलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा।

जैसे-जैसे राज्यों में झड़पें और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, राजनीतिक माहौल गरमा रहा है। गुंडागर्दी, हिंसा और ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर देश को शर्मिंदा करने की कोशिशों ने पार्टियों की लक्ष्मण रेखा लाँघने की नई परिपाटी को जन्म दिया है।

(ये लेख अंग्रेजी में लिखा गया है। मूल रूप को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें)


कौन था ₹136 करोड़ का इनामी एल मैंचो? जिसकी मौत के बाद मेक्सिको में भड़की हिंसा: भारत ने अपने नागरिकों से कहा- अगले आदेश तक घर से न निकलें

मेक्सिको इस समय अपने हालिया इतिहास के सबसे गंभीर सुरक्षा संकटों में से एक से गुजर रहा है। देश के कई राज्यों में अचानक भड़की हिंसा, आगजनी, गोलीबारी, सड़क जाम और व्यापक दहशत ने आम जनजीवन को लगभग ठप कर दिया है। सार्वजनिक परिवहन से लेकर हवाई सेवाएँ तक प्रभावित हुई हैं। बाजार बंद हैं, स्कूलों में छुट्टियाँ घोषित कर दी गई हैं और लोगों को घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई है।

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में है मेक्सिको के सबसे कुख्यात ड्रग माफिया एल मेंचो की मौत। एक बड़े सैन्य ऑपरेशन में उसकी मौत के बाद उसके संगठन जालिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल (CJNG) ने पूरे देश में जवाबी हिंसा छेड़ दी। हालात इतने बिगड़ गए कि भारत, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों को भी अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी करनी पड़ी।

मेक्सिको में अचानक क्यों भड़क उठी हिंसा?

रविवार (22 फरवरी 2026) की देर रात मेक्सिको के पश्चिमी राज्य जालिस्को के छोटे से कस्बे Tapalpa में सेना और सुरक्षा बलों ने एक अत्यंत गोपनीय और बड़े स्तर का ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन का मकसद था CJNG के सरगना एल मेंचो को पकड़ना या मार गिराना।

मुठभेड़ के दौरान एल मेंचो गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत हेलीकॉप्टर से इलाज के लिए मेक्सिको सिटी ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। जैसे ही यह खबर फैली, CJNG के लड़ाकों ने बड़े पैमाने पर हिंसक जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।

कार्टेल के हथियारबंद गुर्गों ने सड़कों पर गाड़ियाँ जला दीं, हाईवे जाम कर दिए, दुकानों और पेट्रोल पंपों को आग के हवाले कर दिया और सुरक्षा बलों पर हमले किए। देखते ही देखते हालात जालिस्को से निकलकर कई अन्य राज्यों तक फैल गए।

(फोटो साभार: दैनिक जागरण)

कौन था एल मेंचो और दुनिया के सबसे खतरनाक ड्रग लॉर्ड्स में क्यों गिना जाता था?

एल मेंचो का असली नाम नेमेसियो रूबेन ओसेगुएरा सर्वेंटेस था। उसका जन्म 1966 में मेक्सिको के मिचोआकान राज्य के एक गरीब गाँव में हुआ था। बेहतर जिंदगी की तलाश में वह 1980 के दशक में अमेरिका चला गया, लेकिन वहाँ अपराध की दुनिया में फँस गया।

अमेरिका में वह हेरोइन तस्करी के मामलों में पकड़ा गया, जेल गया और बाद में मेक्सिको डिपोर्ट कर दिया गया। स्वदेश लौटने के बाद उसने कुछ समय तक स्थानीय पुलिस में नौकरी की, लेकिन जल्दी ही संगठित अपराध की ओर मुड़ गया।

उसने मिलेनियो कार्टेल के जरिए अपनी पहचान बनाई और फिर 2009 में जालिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल (CJNG) की स्थापना की। कुछ ही वर्षों में CJNG मेक्सिको का सबसे ताकतवर और हिंसक ड्रग कार्टेल बन गया। यह संगठन अमेरिका और अन्य देशों में फेंटानिल, मेथामफेटामीन, कोकीन और हेरोइन की बड़े पैमाने पर तस्करी करता था।

एल मेंचो अपने अत्यंत क्रूर तरीकों, खुलेआम सैन्य टकराव और भारी हथियारों के इस्तेमाल के लिए कुख्यात था। अमेरिका ने उसकी गिरफ्तारी पर 1.5 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा था। उस पर अमेरिका में कई गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज थे और वह दुनिया के सबसे वांछित अपराधियों में शुमार था।

कैसे ढेर हुआ एल मेंचो?

मेक्सिको की सेना, नेशनल गार्ड और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर Tapalpa में यह विशेष ऑपरेशन अंजाम दिया। खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और एल मेंचो के ठिकाने पर छापा मारा। भीषण मुठभेड़ के दौरान एल मेंचो घायल हो गया।

इस कार्रवाई में छह संदिग्ध कार्टेल सदस्य मारे गए, तीन सैनिक घायल हुए और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। सुरक्षा बलों ने बड़ी मात्रा में हथियार भी बरामद किए, जिनमें रॉकेट लॉन्चर जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल थे, जो हेलीकॉप्टर गिराने और बख्तरबंद गाड़ियों को तबाह करने में सक्षम हैं।

अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को जोआक्विन ‘एल चापो’ गुजमान और इस्माइल जाम्बादा जैसे बड़े ड्रग लॉर्ड्स की गिरफ्तारी के बाद संगठित अपराध पर सबसे बड़ी कार्रवाई बताया।

मौत के बाद बेकाबू हुई हिंसा: कई राज्यों में आगजनी और अराजकता

एल मेंचो की मौत के कुछ ही घंटों के भीतर पूरे क्षेत्र में अराजकता फैल गई। जालिस्को, मिचोआकान, गुआनाहुआतो, तमाउलीपास, गुएरेरो और न्यूवो लियोन जैसे राज्यों में हिंसा की खबरें सामने आईं। 20 से ज्यादा सड़कों पर जलती हुई गाड़ियाँ खड़ी कर हाईवे जाम कर दिए गए।

(फोटो साभार: दैनिक जागरण)

ग्वाडलहारा और पुएर्तो वायार्ता जैसे बड़े शहरों में दुकानें, फार्मेसियाँ और पेट्रोल पंप बंद कर दिए गए। कई जगहों पर आगजनी की घटनाएँ हुईं और आम लोग जान बचाकर घरों में दुबक गए। पर्यटन केंद्र पुएर्तो वायार्ता में हालात इतने खराब हो गए कि पर्यटकों ने इसे ‘युद्ध जैसे दृश्य’ बताया। हवाई अड्डों पर भगदड़ के माहौल में कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

स्कूल, खेल और उड़ानों पर असर: जनजीवन पूरी तरह ठप

हालात बिगड़ने के चलते कई राज्यों में स्कूल बंद कर दिए गए और सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। 2026 फुटबॉल वर्ल्ड कप के तहत होने वाले कुछ आयोजनों को भी स्थगित करना पड़ा। मैक्सिको की घरेलू फुटबॉल लीग के कई मैच टाल दिए गए, महिला लीग और अंतरराष्ट्रीय फ्रेंडली मुकाबले भी रद्द हुए।

अमेरिका और कनाडा की प्रमुख एयरलाइनों ने पुएर्तो वायार्ता और आसपास के इलाकों के लिए उड़ानें निलंबित कर दीं, जिससे हजारों यात्री फँस गए।

भारत की एडवाइजरी: भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत के दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की। इसमें कहा गया कि जालिस्को (पुएर्तो वायार्ता, चापाला, ग्वाडलहारा), तमाउलीपास, मिचोआकान, गुएरेरो और न्यूवो लियोन में रह रहे भारतीय नागरिक अगले आदेश तक घर के अंदर ही रहें।

दूतावास ने आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी करते हुए बतायै है कि मेक्सिको में रह रहे भारतीय नागरिक +52 55 4847 7539 इस नंबर कॉल करके संपर्क कर सकते हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

अमेरिका और कनाडा की चेतावनी: ‘शेल्टर इन प्लेस’ का आदेश

भारत के अलावा अमेरिका ने भी अपने नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि प्रभावित राज्यों में रह रहे अमेरिकी नागरिक जहाँ हैं वहीं सुरक्षित स्थान पर रुकें, गैर-जरूरी यात्रा से बचें, कानून व्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों से दूरी बनाए रखें और स्थानीय मीडिया पर नजर रखें।

कनाडा सरकार ने भी अपने नागरिकों को खासतौर पर पुएर्तो वायार्ता और ग्वाडलहारा में घरों के अंदर रहने और भीड़भाड़ से दूर रहने की सलाह दी।

अमेरिका की भूमिका और ट्रंप का बयान

एल मेंचो की मौत के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  के एक सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें उन्होंने लिखा है, वी आर वीनिंग टू मच” “ने वॉशिंगटन की भूमिका पर अटकलें तेज कर दीं। कई लोगों ने इसे इस ऑपरेशन में अमेरिका की सीधी भूमिका से जोड़कर देखा।

हालाँकि मेक्सिको स्थित अमेरिकी दूतावास ने सफाई दी कि यह ऑपरेशन पूरी तरह मेक्सिको के विशेष बलों द्वारा किया गया था और अमेरिका ने केवल खुफिया सहयोग दिया। व्हाइट हाउस ने भी यही कहा कि यह संयुक्त खुफिया समन्वय का परिणाम था, न कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई।

मेक्सिको सरकार की प्रतिक्रिया: राष्ट्रपति ने की शांति की अपील

मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम (Claudia Sheinbaum) ने देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि केंद्र सरकार सभी राज्यों के साथ मिलकर हालात को काबू में करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है और जल्द ही हालात सामान्य किए जाएँगे। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि एल मेंचो की मौत संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता है, लेकिन इसके बाद भड़की हिंसा गंभीर चिंता का विषय है।

CJNG का खौफ और आगे की चुनौती

जालिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल पिछले एक दशक में मेक्सिको का सबसे ताकतवर आपराधिक संगठन बन चुका है। भारी हथियार, सैन्य शैली के काफिले और खुलेआम हिंसा इसके प्रमुख हथकंडे रहे हैं। एल मेंचो की मौत से संगठन को बड़ा झटका लगा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हिंसा और अंदरूनी सत्ता संघर्ष बढ़ सकता है।

एल मेंचो की मौत मेक्सिको के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। यह संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता जरूर है, लेकिन इसके बाद भड़की हिंसा ने यह साफ कर दिया है कि ड्रग कार्टेल की जड़ें कितनी गहरी हैं। सड़कों पर जलती गाड़ियाँ, बंद बाजार, रद्द उड़ानें और दहशत का माहौल इस बात का संकेत हैं कि मेक्सिको को शांति बहाल करने के लिए अभी लंबा और कठिन संघर्ष करना होगा।

आँख पर छिड़का फायर एक्सटिंग्विशर, डंडे-चाकू-पत्थर लेकर की छात्रों की पिटाई: JNU में वामपंथी गुंडों के बवाल मचाने की Videos सामने आई, कई ABVP कार्यकर्ता बुरी तरह घायल

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में रविवार (22 फरवरी 2026) की देर रात हिंसक झड़प की गंभीर घटना सामने आई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आरोप लगाया है कि वामपंथी संगठनों से जुड़े तत्वों ने उनके कार्यकर्ताओं और छात्रों पर सुनियोजित हमला किया, जिसमें कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। ABVP के मुताबिक, यह हिंसा बीते एक सप्ताह से चल रही वामपंथी संगठनों की हड़ताल के बाद भड़की, जिसने पूरे कैंपस में भय और अराजकता का माहौल पैदा कर दिया।

सोशल साइंसेज स्कूल में बायोटेक छात्र पर जानलेवा हमला

ABVP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के छात्र प्रतीक भारद्वाज पर स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज परिसर के भीतर हमला किया गया। आरोप है कि पहले प्रतीक की आँख में फायर एक्सटिंग्विशर पाउडर छिड़का और फिर बेरहमी से पीटा गया।

इतना ही नहीं हमले के दौरान एक सिलेंडर खोलकर उसका भी इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है। इस बर्बर हमले में प्रतीक गंभीर रूप से घायल हो गया। प्रतीक को अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। छात्र ने खुद बताया है कि कैसे डंडे और चाकू लेकर उस पर हमला किया गया और वह बचने के लिए वॉशरुम में छिपा हुआ है।

X पर ABVP ने घायल छात्र का एक और वीडियो शेयर किया है, जिसमें उसे सहारा देकर अस्पताल ले जाया जा रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि छात्र बुरी तरह घायल है, उसे उल्टियाँ हो रही हैं और वो ठीक से चल भी नहीं पा रहा है। वीडियो को शेयर कर ABVP ने तुरंत कार्रवाई की माँग की है।

प्रतीक की ही तरह ABVP के एक कार्यकर्ता विजय जायसवाल पर भी हमला किया गया। छात्र ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर इसकी जानकारी दी। वीडियो में विजय ने दिखाया कि वामपंथी गुट किस तरह मार्च को छोड़ कर अचानक स्टूडेंट्स पर हमला करना शुरू कर दिया और जानबूझकर कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने लगे।

ABVP ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर लिखा, “वीडियो में देखिए किस प्रकार वामपंथी संगठन के लोग हाथ में पत्थर लाठी ले कर घूम रहे है और जब हम वीडियो रिकॉर्ड करने लगे तो वहाँ से भागना शुरू कर दिए। वामपंथियों का हमेशा से यही फसाना है, जब खुद से क्रांति नहीं होती है तो जबरदस्ती अपनी क्रांति छात्रों पर लादना शुरू कर देते है।”

पोस्ट में आगे लिखा, “आज जब वामपंथी संगठन के स्कूल में ताला बंद करने लगे तो वहाँ रीडिंग रूम्स में पढ़ने वाले छात्रों ने उसका विरोध किया और उन्हें मारना शुरू कर दिया जिसको लेकर हम बात करने गए तो हमारे ऊपर भी पत्थरबाजी शुरू कर दी।”

रातभर आतंक का माहौल, सैकड़ों नकाबपोशों ने फैलाई हिंसा

JNU छात्र संघ के संयुक्त सचिव और ABVP नेता वैभव मीणा ने इस पूरी घटना को ‘आतंक की रात’ करार दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 7-8 दिनों से वामपंथी संगठनों की हड़ताल चल रही थी और इसी की आड़ में सैकड़ों नकाबपोश हमलावरों ने कैंपस में बवाल मचाया।

मीणा के अनुसार, “300 से 400 नकाबपोश लोगों की भीड़ ने लाइब्रेरी और रीडिंग रूम में पढ़ रहे छात्रों को खदेड़ दिया और उनके साथ मारपीट की।” उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि विजय नाम के एक छात्र को 100 से 150 लोगों की भीड़ ने बेरहमी से पीटा। उन्होंने इस घटना को ‘मॉब लिंचिंग’ बताया।

मीणा ने दिल्ली पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि पूरी रात हिंसा होती रही, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

#LeftAttacksJNUAgain अभियान, सख्त कार्रवाई की माँग

ABVP ने इस घटना के विरोध में सोशल मीडिया पर #LeftAttacksJNUAgain अभियान शुरू किया और दिल्ली पुलिस से तत्काल कार्रवाई की माँग की। संगठन ने कहा कि यह छात्र राजनीति नहीं, बल्कि सुनियोजित और ठंडे दिमाग से की गई हिंसा है, जिसमें सिर्फ पढ़ाई कर रहे छात्रों को निशाना बनाया गया।

ABVP ने आरोप लगाया कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के परिसर को युद्धक्षेत्र में बदल दिया गया है और छात्रों की जान खतरे में डाल दी गई है। संगठन ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।

फिलहाल वामपंथी संगठनों की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं पूरे घटनाक्रम के बाद JNU परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है और छात्र सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या पहले से हो रही थी तैयारी?

बता दें कि 22 फरवरी की रात जेएनयू में जो हमला हुआ है वो कोई अचानक घटी घटना नहीं है। पिछले कुछ दिनों से JNU में लगातार ऐसा माहौल बनाया जा रहा था जिससे ये साफ था कि ऐसी कोई घटना कभी भी हो सकती है। इसी हफ्ते चेतावनी रैली में ब्राह्मणविरोधी नारेबाजी सुनी गई थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री के खिलाफ अभद्र नारे लगाए गए थे।

AI इम्पैक्ट समिट 2026 का समापन, घोषणापत्र पर 88 देशों के हस्ताक्षर: PM मोदी की मानव केंद्रित AI नीति को मिला वैश्विक समर्थन, समझें- ये क्यों है भारत की बड़ी सफलता

दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 का समापन एक ऐतिहासिक वैश्विक सहमति के साथ हुआ। इस शिखर सम्मेलन में 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ के घोषणापत्र पर साइन किया। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग, समानता और भरोसे पर आधारित एक साझा वैश्विक विजन को आगे बढ़ाती है।

अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, जर्मनी, जापान, कनाडा जैसे प्रमुख देशों की भागीदारी ने इस सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण बना दिया। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे भारत की AI नीति और वैश्विक नेतृत्व की बड़ी सफलता बताया।

मानव-केंद्रित AI और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की भावना

इस सम्मेलन का मूल आधार भारतीय दर्शन के उस सिद्धांत पर रखा गया, जिसमें कहा गया है कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे। ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की भावना से प्रेरित यह घोषणा इस बात पर जोर देती है कि AI केवल आर्थिक लाभ तक सीमित न रहे, बल्कि सामाजिक भलाई, समान अवसर और मानव कल्याण का माध्यम बने।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मानव-केंद्रित AI की सोच को वैश्विक स्तर पर व्यापक समर्थन मिला। सभी देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि AI संसाधन, सेवाएँ और तकनीक समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचें और विकास का रास्ता समावेशी बने।

सात स्तंभों पर टिका वैश्विक AI सहयोग का ढाँचा

नई दिल्ली घोषणा को सात मुख्य स्तंभों पर आधारित किया गया है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक AI सहयोग की दिशा तय करेंगे। इनमें AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण, आर्थिक विकास के साथ सामाजिक भलाई, सुरक्षित और भरोसेमंद AI, विज्ञान के लिए AI का उपयोग, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए तकनीक तक पहुँच, मानव पूँजी का विकास और लचीली व कुशल AI प्रणालियों का निर्माण शामिल है। इन स्तंभों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI का विकास संतुलित, जिम्मेदार और मानवता के हित में हो।

इस समिट में AI से जुड़े बुनियादी ढाँचे के लिए 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश को लेकर सहमति बनी, जो भविष्य में तकनीकी विकास और नवाचार को नई गति देगा। सम्मेलन में दुनिया भर से आए नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स ने भाग लिया।

करीब पाँच लाख लोगों की सहभागिता ने यह दिखाया कि भारत की AI पहल को घरेलू और वैश्विक स्तर पर जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। इस मंच से दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को बढ़ावा मिला, जिससे AI को आर्थिक विकास का एक प्रमुख इंजन बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़े।

वैश्विक सहयोग से भविष्य की दिशा तय करता भारत

घोषणा में यह स्पष्ट किया गया कि AI का विकास केवल तेजी से तकनीकी प्रगति तक सीमित न रहे, बल्कि उसमें सुरक्षा, भरोसा और सामाजिक संतुलन भी केंद्र में हों। सुरक्षित और भरोसेमंद AI सिस्टम विकसित करने, ऊर्जा-कुशल ढाँचे को बढ़ावा देने और ओपन-सोर्स व सुलभ AI इकोसिस्टम बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

साथ ही AI आधारित शिक्षा, कौशल विकास और री-स्किलिंग कार्यक्रमों के जरिए मानव संसाधन को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने पर भी सहमति बनी। AI इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत को वैश्विक AI विमर्श के केंद्र में स्थापित कर दिया है।

यह भी संदेश गया कि भारत न केवल तकनीकी नवाचार में अग्रणी बनना चाहता है, बल्कि वह AI को मानवता की भलाई, समान विकास और वैश्विक सहयोग का माध्यम भी बनाना चाहता है। 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की एकजुटता इस बात का प्रमाण है कि AI के भविष्य को लेकर दुनिया एक साझा, भरोसेमंद और समावेशी रास्ते पर आगे बढ़ने को तैयार है।

एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान-अफगानिस्तान में तनाव, क्या डूरंड लाइन पर फिर होगा कत्लेआम: समझें- तालिबान की चेतावनी के मायने

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की सीमा के अंदर 7 जगहों पर एयर स्ट्राइक किया है। इसमें 18 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है। इस पर अफगानिस्तान की तालिबान प्रशासन ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि वह वक्त आने पर जवाबी कार्रवाई करेगा। दोनों देशों के बीच अक्टूबर 2025 में सीजफायर को लेकर कई बैठकें हुई थी। हालाँकि नवंबर 2025 में शांति वार्ता टूट गई थी, लेकिन युद्धविराम जारी था। ताजा हमले से दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गई है।

पाकिस्तान का अफगानिस्तान में हमले को लेकर बयान

हमले को लेकर पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा है कि सीमा पार 7 पाकिस्तानी तालिबान यानी टीटीपी के ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान का कहना है कि यहाँ इस्लामिक स्टेट खोरासान यानी आईएसकेपी के लोग भी मौजूद थे। पाकिस्तान टीटीपी को हाल में हुए इस्लामाबाद की इमान बारगाह, बाजौर और बन्नू में हुए आत्मघाती हमलों का जिम्मेदार बताता रहा है।

रमजान में पाकिस्तानी स्टाइक पर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने कहा है कि सही समय आने पर वो इसका जवाब देंगे। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि ये राष्ट्रीय संप्रभुता, इंटरनेशनल कानून, अच्छे पड़ोसी के सिद्धांतों और इस्लामिक मूल्यों का उल्लंघन है।

स्ट्राइक रिहायशी इलाकों में किया गया और लोगों के घरों को निशाना बनाया गया। मंत्रालय ने कहा कि ये हमले पूर्वी अफगान प्रांतों नांगरहार और पक्तिका के इलाकों में हुआ। इसमें एक मदरसे को भी निशाना बनाया गया।

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान में जो हमले हुए, जिसमें आम लोगों और धार्मिक केंद्रों को निशाना बनाया गया, वह पाकिस्तानी सेना की खुफिया और सुरक्षा नाकामियों का सबूत हैं। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले हमले पाकिस्तानी जनरल की नाकामियों को ही दर्शाते हैं, जो खुद के घर को सुरक्षित नहीं कर पा रहे।

पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके पास इस्लामाबाद में हुए हमलों को लेकर ‘पक्के सबूत’ हैं। ये हमला अफगानिस्तान की शह पर टीटीपी ने करवाया है। पाकिस्तान के मुताबिक, हमले की जिम्मेदारी भी टीटीपी और आईएसकेपी ने ली थी।

पाकिस्तान को जवाब देने की तैयारी कर रहा अफगानिस्तान

नंगरहार के एक सीनियर पुलिस अधिकारी सैयद तैयब हमाद ने अफगान सरकारी टेलीविज़न पर बताया कि मारे गए 18 लोगों में औरतें और बच्चे भी शामिल हैं। सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार सुबह भी पीड़ितों की लाशें मलबे के नीचे से निकाली जा रही थीं।

अफगानिस्तान फिलहाल हमले में हुए नुकसान का आकलन कर रहा है। इसके बाद तालिबानी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि जवाबी कार्रवाई की जाएगी। तालिबान का साफ मानना है कि पाकिस्तान ने अफगानी सीमा का उल्लंघन किया है और अफगानिस्तान को जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार है। सही समय आने पर हमला किया जाएगा।

आगे की रणनीति पर लगातार काबूल और कांधार में तालिबानी आलाधिकारी चर्चा कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, तालिबान का मानना है कि पाकिस्तानी हमलों पर तुरंत में कुछ भी करना जल्दीबाजी होगी, लेकिन अफगानिस्तान जरूर बदला लेगा।

पाकिस्तान का दावा है कि ये एयरस्ट्राइक पाकिस्तान में एक महीने से चल रहे जानलेवा हमलों के बाद हुए हैं। हाल ही में पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में हिस्से में एक लेफ्टिनेंट कर्नल समेत दो फौजियों की हत्या की गई थी।

इस महीने की शुरुआत में, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद में हुए सुसाइड ब्लास्ट में दर्जनों लोग मारे गए थे।

पाकिस्तान के इन्फॉर्मेशन मिनिस्ट्री ने रविवार (22 फरवरी 2026) को कहा कि देश के पास ‘पक्के सबूत’ हैं कि फरवरी के हमले टीटीपी ने अपने अफगानिस्तान में मौजूद नेता और हैंडलर्स के कहने पर किए थे।

पिछले साल 7-8 अक्टूबर की रात पाकिस्तान ने ओकरजई क्षेत्र में कार्रवाई की थी। इस दौरान पाकिस्तान ने 19 विद्रोहियों को मार गिराने का दावा किया। इसके बाद अफगानिस्तान ने डूरंड लाइन पार कर पाकिस्तान में घुसकर चौकियों पर हमला किया था। पाकिस्तानी एयरस्टारइक के खिलाफ टीटीपी ने पाकिस्तान की कई सैन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया था। पाकिस्तानी फौजी चौकियों पर तालिबान लड़ाकों के कब्जे के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुए थे।

डूरंड रेखा और अफगानिस्तान- पाकिस्तान विवाद

डूरंड रेखा अफ़ग़निस्तान और पाकिस्तान के बीच लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा है जो 1893 में ब्रिटिश भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच स्थापित की गई थी। अंग्रेजों के बनाए इस सीमा रेखा को अफगानिस्तान नहीं मानता है। इस सीमा रेखा के एक ओर अफगानिस्तान के 12 प्रांत हैं जबकि दूसरी ओर पाकिस्तान के खैबर पखतूनख्वा, बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान। दोनों देशों के लोग इस खुली सीमा के आर-पार आते जाते हैं और परंपरागत रूप से जुड़े हुए हैं।

धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक तौर पर काफी समानताएँ हैं। यही वजह है कि खैबर पखतूनख्वा, बलूचिस्तान और गिलगित जैसे इलाकों में पाकिस्तानी फौज के खिलाफ लोग विद्रोह कर रहे हैं। यहाँ पाकिस्तानी फौज का जुर्म सुर्खियों में भी रहा है। महिलाओं- बच्चों के साथ अमानवीय हरकत, पुरुषों का लगातार गायब होने को लेकर लोग पाकिस्तान के फौज को जिम्मेदार मानते हैं।

अफगानिस्तान के लिए यह एक संवेदनशील मामला है। यहाँ कोई भी शासन में आ जाए, वह डूरंड रेखा को नहीं मानेगा, क्योंकि ये भावनाओं से जुड़ा है। अफगानिस्तान ने पश्तून प्रभाव वाले क्षेत्र खैबर पख्तूनख्वाह को पश्तूनिस्तान बनाने का भी समर्थन किया है।

पाकिस्तान ने जब पख्तूनख्वाह सीमा पर वीजा और पासपोर्ट अनिवार्य कर दिया, तो पख्तूनों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया।

ब्रिटिश विदेश सचिव सर मोर्टिमर डूरंड ने 1893 में अफगानिस्तान और भारत के बीच सीमा की स्थापना की थी और पख्तून प्रांत को अलग कर दिया था। दोनों देशों के बीच फैली हुई लंबी डूरंड रेखा पख्तून जनजातीय क्षेत्रों से होकर गुजरती है और उन्हें दो अलग-अलग मुल्कों में विभाजित करती है। पाकिस्तान बनने के बाद डूरंड रेखा उसे विरासत में मिली, लेकिन इस पर कोई औपचारिक समझौता या मान्यता नहीं है।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) के उपाध्यक्ष काशिफ पानेजई के मुताबिक, सीमा पर जो इलाका बँटा हुआ है, वह सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है, वह उनका घर है। उन्होंने कहा, “डूरंड रेखा कई गाँवों को आधे में विभाजित करती है और कई लोगों को उनके कृषि वाली भूमि से विभाजित करती है। यह जनजातियों और अन्य समूहों को बीच से बाँटता है।”

डूरंड रेखा के बावजूद कई इलाके ऐसे भी हैं, जहाँ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की रेखा अस्पष्ट है। ये दुर्गम और सुलेमान पर्वत श्रृंखला वाला इलाका है। ओरकजई, स्पिन बोल्डक से गजनी तक कई क्षेत्र ऐसे हैं। इसको लेकर भी दोनों देशों में तनाव रहता है।

1994 के प्रण से 2026 की हुंकार तक: अखंड भारत के लिए देश मनाता है ‘POJK संकल्प दिवस’, पढ़ें ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सामरिक महत्व

22 फरवरी को POJK संकल्प दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो 1994 में भारतीय संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित ऐतिहासिक संकल्प की याद दिलाता है। इस संकल्प में संसद ने स्पष्ट घोषणा की कि जम्मू-कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है, रहा है और रहेगा। पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जा किए गए क्षेत्रों को खाली करने की माँग की गई तथा किसी भी अलगाववादी प्रयास का सभी आवश्यक साधनों से विरोध करने की दृढ़ प्रतिबद्धता जताई गई।

यह संकल्प मात्र राजनीतिक दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र की प्रभुसत्ता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा का जीवंत प्रमाण है। भारत सरकार का आधिकारिक पक्ष स्पष्ट है- POJK (पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर) और गिलगित-बाल्टिस्तान भारत के अभिन्न अंग हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने 2019 में संसद में कहा था, “जब मैं जम्मू-कश्मीर की बात करता हूँ, तो इसमें POJK और अक्साई चिन शामिल हैं। इस क्षेत्र के लिए हम जीवन देने को तैयार हैं।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कई बार दोहराया कि POJK भारत का था, है और रहेगा, तथा इसके लोग जल्द भारत के साथ जुड़ना चाहेंगे। 2025-2026 में भी ये बयान दोहराए गए, जहाँ राजनाथ सिंह ने कहा कि POJK के लोग पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों से मुक्ति चाहते हैं और भारत उन्हें अपना मानता है।

यह दावा केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, कानूनी और सामरिक रूप से मजबूत है। 1947 के अधिमिलन से POJK भारत का हिस्सा है और पाकिस्तान का कब्जा अवैध है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1947 का आक्रमण और जम्मू-कश्मीर का भारत में मिलन

1947 में जम्मू-कश्मीर रियासत के महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर को भारत के साथ अधिमिलन किया। लेकिन पाकिस्तानी फौज ने अक्टूबर 1947 में बड़े पैमाने पर आक्रमण किया। भारतीय सेना ने श्रीनगर घाटी मुक्त कराई, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के युद्धविराम प्रस्ताव के कारण आगे की कार्रवाई रुक गई। परिणामस्वरूप, मीरपुर, पुंछ, मुजफ्फराबाद और गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान के अवैध कब्जे में चले गए।

यह कब्जा आज तक जारी है। यूएन ने पाकिस्तान को आक्रमणकारी माना और क्षेत्र खाली करने का आदेश दिया, लेकिन पाकिस्तान ने अनदेखा किया। भारत का पक्ष स्पष्ट है- POJK अवैध कब्जा है और इसे वापस लेना राष्ट्रीय दायित्व है।

POJK की वर्तमान स्थिति: क्षेत्रीय विभाजन और कब्जे के आँकड़े

POJK को तीन भागों में वर्गीकृत किया जाता है-

  • पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (POJK): मीरपुर-मुजफ्फराबाद क्षेत्र (13,297 वर्ग किमी)।
  • पाकिस्तान अधिक्रांत लद्दाख (POTL): गिलगित-बाल्टिस्तान (67,791 वर्ग किमी)।
  • चीन अधिक्रांत लद्दाख (COTL): अक्साईचिन और शक्सगाम घाटी (42,735 वर्ग किमी, जिसमें 1963 का सिनो-पाक समझौता शामिल)।

जम्मू-कश्मीर रियासत के मूल 2,22,236 वर्ग किमी में से 54.4% (1,21,000 वर्ग किमी) अवैध कब्जे में है। 2019 के नए मानचित्र में इन क्षेत्रों को भारत का हिस्सा दिखाया गया।

1947-48 में हिंदू-सिख समुदाय पर नरसंहार हुए: मुजफ्फराबाद में हजारों मारे गए, मीरपुर में 20,000+ हत्याएँ, महिलाओं का अपहरण। लाखों विस्थापित आज भी पीड़ित हैं। सांस्कृतिक स्थल जैसे शारदापीठ, रघुनाथ मंदिर खंडहर हैं।

सामरिक महत्व: भारत की सुरक्षा और भू-राजनीति

POJK भारत के लिए सामरिक केंद्र है। गिलगित-बाल्टिस्तान मध्य एशिया का प्रवेश द्वार है, जहाँ पाकिस्तान, चीन, अफगानिस्तान की सीमाएँ मिलती हैं। CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) इसी से गुजरता है, जो काराकोरम राजमार्ग से चीन को पाकिस्तान जोड़ता है।

यह भारत के लिए खतरा है-

दो मोर्चों की चुनौती: चीन (अक्साईचिन) और पाकिस्तान (POJK) का गठजोड़ भारत को घेरता है।
आतंकवाद का केंद्र: POJK में आतंकी शिविर भारत में घुसपैठ के लिए इस्तेमाल होते हैं।
सीमा सुरक्षा: LOC पर तनाव बढ़ता है, और CPEC से सैन्य गतिविधियाँ तेज होती हैं।

POJK वापस लेना भारत की सुरक्षा के लिए जरूरी है क्योंकि यह क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखेगा और चीन-पाक गठजोड़ को कमजोर करेगा।

जल संसाधनों का महत्व: सिंधु नदी तंत्र और पानी की सुरक्षा

POJK सिंधु नदी तंत्र का स्रोत है। इंडस, झेलम और चेनाब नदियाँ यहाँ से निकलती हैं। सिंधु जल समझौता (1960) पाकिस्तान को इन नदियों का बड़ा हिस्सा देता है, लेकिन POJK पर कब्जा पाकिस्तान को भारत पर पानी का दबाव बनाने की क्षमता देता है।

भारत के लिए: POJK वापस लेने से जल सुरक्षा मजबूत होगी, सिंचाई और बिजली उत्पादन बढ़ेगा।
पाकिस्तान के लिए: यह क्षेत्र उसकी 80% पानी आपूर्ति का आधार है।

जलवायु परिवर्तन से पानी की कमी बढ़ रही है, इसलिए POJK नियंत्रण भारत के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है।

आर्थिक महत्व: खनिज संसाधन और व्यापारिक हित

POJK दुनिया के सबसे खनिज-समृद्ध क्षेत्रों में से एक है। गिलगित-बाल्टिस्तान में-

  • 1,480+ सोने की खदानें (कई अफ्रीका से बेहतर गुणवत्ता)।
  • यूरेनियम, लौह अयस्क, उच्च गुणवत्ता वाला संगमरमर, ग्रेनाइट, रत्न (एमराल्ड, रूबी)।
  • मूल्य: अरबों डॉलर का अनुमानित भंडार।

पाकिस्तान और चीन इनका शोषण कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को लाभ नहीं। POJK वापस लेने से भारत को खनिज संपदा मिलेगी, जो अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी। व्यापारिक मार्ग (मध्य एशिया तक) खुलेंगे। CPEC जैसी परियोजनाओं पर नियंत्रण से भारत की व्यापारिक स्थिति मजबूत होगी। यह क्षेत्र भारत के ऊर्जा और औद्योगिक हितों से जुड़ा है।

भारत सरकार का स्पष्ट पक्ष और वर्तमान प्रयास

भारत का पक्ष अटल है- POJK भारत का अभिन्न अंग है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद नया मानचित्र और वक्तव्य मजबूत संकेत हैं। राजनाथ सिंह ने 2025 में कहा कि POJK के लोग पाकिस्तान से मुक्ति चाहते हैं और भारत उन्हें अपना मानता है। अमित शाह ने जीवन बलिदान की बात कही।

POJK वापस लेना जरूरी है क्योंकि यह अखंड भारत का हिस्सा पूरा करेगा। लाखों विस्थापितों की न्यायिक पुण्यभूमि लौटेगी। इससे सामरिक संतुलन बनेगा और आर्थिक संसाधन भारत के होंगे।

मुक्ति का संकल्प और जनजागरण

POJK संकल्प दिवस हमें याद दिलाता है कि 1947 का अधूरा एजेंडा पूरा होना बाकी है। संसद का 1994 संकल्प, वर्तमान सरकार के बयान और राष्ट्र की इच्छाशक्ति से मुक्ति संभव है। जनजागरण से वह दिन आएगा जब POJK भारत में शामिल होगा, अखंड भारत साकार होगा और क्षेत्रीय शांति स्थापित होगी।

PM मोदी की राह चले CM योगी, भगवा वस्त्र में विदेश दौरा कर लाएँगे UP के लिए निवेश: सांस्कृतिक कूटनीति से साधेंगे दुनिया, समझें- क्यों अहम है उनका ये कदम

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार (22 फरवरी 2026) से पाँच दिन के जापान और सिंगापुर दौरे पर जा रहे हैं। यह दौरा सिर्फ निवेश लाने का नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने गर्व से पेश करने का भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब विदेश दौरे करके राज्य के लिए अरबों डॉलर का निवेश लाते थे। ठीक उसी राह पर चलते हुए योगी आदित्यनाथ अब उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए जापान और सिंगापुर से बड़े-बड़े सौदे लाने जा रहे हैं।

सबसे खास बात ये है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान के पूरे दौरे पर अपना पारंपरिक भगवा कुर्ता-चोला पहनकर जाएँगे। यह पहला मौका होगा जब कोई संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति विदेश में सरकारी प्रतिनिधि के रूप में भगवा वस्त्र में जाएगा।

यह दौरा सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कूटनीति का भी बड़ा उदाहरण बनने वाला है। भगवा रंग हिंदुत्व और नाथ संप्रदाय की पहचान है। जापान जैसे देश में जहाँ बौद्ध धर्म की गहरी जड़ें हैं और आध्यात्मिक मूल्य बहुत महत्व रखते हैं, वहाँ भगवा वस्त्र में सीएम योगी का जाना भारतीय संस्कृति की शक्ति को नई ऊँचाई देगा। लोग कह रहे हैं कि यह ‘डेवलपमेंट प्लस हिंदुत्व’ का मॉडल है, जो विकास के साथ अपनी जड़ों को भी मजबूत रखना जानता है।

PM मोदी की राह पर CM योगी, गुजरात मॉडल को यूपी में दोहरा रहे

पीएम मोदी जब 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने विदेश दौरे को राज्य की प्रगति का हथियार बनाया था। उन्होंने जापान, सिंगापुर, चीन, अमेरिका जैसे देशों में बार-बार जाकर ‘वाइब्रेंट गुजरात’ समिट के जरिए हजारों करोड़ का निवेश लाया। उनकी कोशिशों से मारुति-सुजुकी, होंडा, टोयोटा जैसी जापानी कंपनियाँ गुजरात में आईं। सिंगापुर से शहरी विकास के मॉडल लिए गए। सीएम रहते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा था, “मैं गुजरात का चेहरा बनकर विदेश जाता हूँ, राज्य के लिए निवेश लेकर आता हूँ।”

अब योगी आदित्यनाथ ठीक वही कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश को 2027-30 तक 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब ₹83 लाख करोड़) की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है। पिछले 8 साल में यूपी ने इज ऑफ डूइंग बिजनेस में टॉप पर आने, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने का कमाल किया है। लेकिन और तेज विकास के लिए विदेशी निवेश जरूरी है। इसलिए सीएम योगी ने जापान और सिंगापुर को चुना, क्योंकि दोनों देश तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल के मामले में दुनिया के टॉप पर हैं।

दौरे का पूरा कार्यक्रम और बड़े-बड़े प्लान

योगी आदित्यनाथ रविवार (22 फरवरी 2026) की शाम सिंगापुर रवाना होंगे। वहाँ वो 24 फरवरी तक रहेंगे। सिंगापुर में वे शहरी विकास, स्मार्ट सिटी, वॉटर मैनेजमेंट, स्किल डेवलपमेंट पर फोकस करेंगे। भारतीय डायस्पोरा (खासकर यूपी के लोग) से मुलाकात करेंगे। इन्वेस्टर रोडशो होंगे जहाँ यूपी को निवेश का हब बताया जाएगा। सिंगापुर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SICCI) और FICCI के साथ एमओयू साइन हो सकते हैं।

इसके बाद वो 24 फरवरी 2026 को जापान पहुँचेंगे और 27 फरवरी 2026 तक वहाँ रहेंगे। जापान में टोक्यो, यामानाशी, ओसाका और क्योटो जाएँगे। टोक्यो के इंपीरियल होटल में ‘जापान-उत्तर प्रदेश पार्टनरशिप फॉर मैन्युफैक्चरिंग, मोबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी’ नाम से बड़ा कॉन्फ्रेंस होगा। यहाँ जापानी कंपनियों के टॉप एक्जीक्यूटिव्स से मुलाकात होगी, जिसमें ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेलवे, केमिकल, लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कंपनियों के दिग्गज मौजूद रहेंगे।

सबसे रोमांचक प्लान ये है कि सीएम योगी जापान की 600 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड वाली मैग्लेव (मैग्नेटिक लेविटेशन) ट्रेन में 100 किलोमीटर की ट्रायल राइड करेंगे। यह ट्रेन बिना ट्रैक छुए चुंबकीय शक्ति से चलती है। चूँकि सीएम योगी यूपी में हाई-स्पीड रेल और आधुनिक ट्रांसपोर्ट के लिए इस टेक्नोलॉजी को लाना चाहते हैं, ऐसे में उनकी राइड काफी अहम साबित होगी। ये एक तरह से डेमो भी होगा।

जापान सिटी और सिंगापुर सिटी, यूपी में बनेगा नया जापान और सिंगापुर

दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि बन सकती है ‘जापान सिटी’ और ‘सिंगापुर सिटी। यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) ने प्रस्ताव तैयार किया है। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 5ए में 500 एकड़ में जापान सिटी और सेक्टर 7 में 500 एकड़ में सिंगापुर सिटी बनेगी।

इन शहरों में कम से कम 70% जमीन इंडस्ट्री के लिए, 12% रेजिडेंशियल, 13% कमर्शियल और 5% इंस्टीट्यूशनल होगी। इसका विकास ईपीसी मोड में किया जाएगा। जापानी और सिंगापुरी सरकारों के विजन के हिसाब से ये शहर बनेंगे। कंपनियों को यहाँ जमीन ऑफर की जाएगी। इससे लाखों रोजगार पैदा होंगे और यूपी की इकोनॉमी को जबरदस्त बूस्ट मिलेगा।

भगवा वस्त्र का ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक असर

योगी आदित्यनाथ हमेशा भगवा कुर्ता-चोला पहनते हैं। यह उनका व्यक्तिगत और धार्मिक पहनावा है क्योंकि वे नाथ संप्रदाय के महंत हैं। लेकिन विदेश दौरे पर सरकारी प्रतिनिधि के रूप में भगवा पहनना यह पहला मौका होगा। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि इससे भारत की सांस्कृतिक गरिमा दुनिया को दिखेगी।

जापान में बौद्ध मंदिरों की भरमार है। यामानाशी प्रांत के साथ यूपी का पहले से एमओयू है। बौद्ध सर्किट, योग, आयुर्वेद पर चर्चा होगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक सीएम योगी आदित्यनाथ जापान की राजधानी टोक्यो से 45 किमी दूर एक शांत मंदिर (संभवतः हनुमान या हिंदू मंदिर) भी जाएँगे। भगवा वस्त्र में वहाँ जाना जापान के लोगों को भारत की आध्यात्मिक शक्ति याद दिलाएगा।

सांस्कृतिक कूटनीति यही है, जिसमें सिर्फ व्यापार ही नहीं, दिलों का जुड़ाव भी होता है। भगवा रंग देखकर जापानी लोग सोचेंगे कि यह भारत का सच्चा चेहरा है जो प्राचीन संस्कृति को आधुनिक विकास के साथ जोड़ता है। विपक्ष इसे ‘प्रतीकात्मक राजनीति’ कह सकता है, लेकिन समर्थक कहते हैं कि यह ‘कल्चरल सॉफ्ट पावर’ है। जैसे पीएम मोदी ने ‘नमस्ते’ और योग दिवस से दुनिया में भारतीयता का परचम लहराया, वैसे ही सीएम योगी भगवा से भारतीयता का संदेश देंगे।

यूपी की प्रगति और दौरे का मकसद

योगी सरकार ने यूपी को बदल दिया है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, डिफेंस कॉरिडोर, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी बन रही हैं। इज ऑफ डूइंग बिजनेस में यूपी टॉप-3 में है। लेकिन 23 करोड़ जनसंख्या वाले राज्य को और तेज गति चाहिए। जापान से सेमीकंडक्टर, ईवी, हाई-स्पीड रेल, क्लीन एनर्जी आएगी। सिंगापुर से स्मार्ट सिटी, वॉटर ट्रीटमेंट, लॉजिस्टिक्स पार्क आएगा।

क्या होगा सांस्कृतिक असर?

जब कोई सीएम भगवा पहनकर विदेश जाता है तो मीडिया हाइलाइट करता है। जापान के अखबारों में फोटो छपेगी – ‘भारत का भगवा सीएम जापान में’। इससे युवा पीढ़ी को गर्व होगा। स्कूलों में, सोशल मीडिया पर चर्चा होगी कि हमारी संस्कृति कितनी मजबूत है। बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए यूपी के बौद्ध स्थल (सारनाथ, कुशीनगर) और जापान के मंदिर जुड़ेंगे। टूरिज्म बढ़ेगा। योग और आयुर्वेद के सेंटर खुलेंगे। यह दौरा बताता है कि विकास और संस्कृति साथ चल सकते हैं। PM मोदीने गुजरात में यह दिखाया, CM योगी अब UP में दिखा रहे हैं।

जब योगी आदित्यनाथ भगवा वस्त्र में प्लेन में चढ़ेंगे तो पूरा यूपी और भारत देख रहा होगा। यह दौरा अगर सफल रहा तो यूपी में जापानी और सिंगापुरी कंपनियों के प्लांट लगेंगे, लाखों नौकरियाँ आएंगी, इकोनॉमी उछलेगी। साथ ही दुनिया देखेगी कि भारत अब सिर्फ सस्ता बाजार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी आत्मविश्वासी है।