तैयार रहिए। एग्जिट पोल्स सही साबित हुए तो भाजपा की जीत के लिए तमाम ऐसे अजीबोगरीब कारण गिनाए जाएँगे, जिससे राहुल की इमेज पर आँच न आए और पीएम की लोकप्रियता की बात न हो। ठीकरा कहीं और फोड़ा जाएगा, ईवीएम को गालियाँ पड़ेंगी।
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव का कहना है कि भाजपा कॉन्ग्रेस के विधायकों को खरीदने नहीं जा रही है बल्कि बहुत से कॉन्ग्रेसी विधायक कमलनाथ से परेशान हो चुके हैं इसलिए वो भाजपा में आना चाहते हैं।
2014 और 2019 में एग्जिट पोल करने वाली कॉमन एजेंसियों और सिर्फ 2019 में एग्जिट पोल करने वाली नई एजेंसियों के आँकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर स्थिति और स्पष्ट हो जाती है। इस बार जिन नई एजेंसियों ने एग्जिट पोल किए, उनके आँकड़े...
इस बैठक में पीएम मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ ही कई दिग्गज नेता के शामिल हेने की सूचना है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री मोदी के बीच होने जा रही ये मुलाक़ात इसलिए भी अहम है, क्योंकि 4 सालों में ये पीएम मोदी का संघ मुख्यालय का पहला दौरा है।
ये वही राजभर हैं, जिन्होंने रैली में मंच से दी थी BJP नेताओं-कार्यकर्ताओं को माँ की गाली। ये वही हैं जो पहले अफसरों की सिफारिश न सुनने पर हंगामा करते हैं और बाद में अपने बेटों को पद दिलाने पर अड़ जाते हैं।
“क्या असली खेल EVM है? क्या पैसे देकर EXIT POLL कराया गया? यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली, बंगाल हर जगह BJP ही जीत रही है ये कौन यक़ीन करेगा? सभी दल EC से मिलकर VVPAT-EVM के मिलान में गड़बड़ी पर Election रद्द करने की माँग करें।”
मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू की तनातनी के बीच अब नवजोर कौर का बयान आया है। उन्होंने अमृतसर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अगर कॉन्ग्रेस राज्य की सभी सीटें नहीं जीत पाती है, तो सीएम को इस्तीफा दे देना चाहिए।
दोपहर 1 बजे तक 43.6% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। 3 बजे तक यह आँकड़ा 54.9% तक पहुँच गया। लेकिन कुल वोटिंग हुई सिर्फ़ 61.1% ही। मतलब बाकी 3 घंटों में महज 6% ही वोटिंग। TMC गुंडों की कोई चाल या भारी पड़ गई गुंडई...
शरद पवार और उनकी बेटी को लगता है कि ईवीएम मशीन के साथ छेड़छाड़ की जा रही है वहीं उनके भतीजे अजित का कहना है कि यदि ईवीएम के सााथ छेड़खानी मुमकिन होती तो भाजपा 5 राज्यों में चुनाव नहीं हारती।
'हिन्दू टेरर' के कलंक से कलंकित और कॉन्ग्रेस की तुष्टीकरण एवम् साम्प्रदायिक नीतियों का शिकार बनी साध्वी प्रज्ञा के भोपाल से प्रत्याशी बनने, कन्हैया का बेगूसराय से लड़ने और राहुल-स्मृति ईरानी की कड़ी टक्कर इस चुनाव की हेडलाइन बने।