Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयईरान ने बंद किया 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज', जहाजों को दी फूंक देने की धमकी:...

ईरान ने बंद किया ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’, जहाजों को दी फूंक देने की धमकी: जानिए संघर्ष के बीच तेल आयात रुकने से कैसे बढ़ेगा आर्थिक संकट

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ये फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। यह संकीर्ण जलडमरूमध्य मात्र 21 मील चौड़ा है, लेकिन यहीं से वैश्विक तेल व्यापार का 20-21% हिस्सा गुजरता है।

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की घोषणा कर दी है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ अधिकारी इब्राहिम जबारी ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद है और कोई भी जहाज वहाँ से गुजरने की कोशिश करेगा तो उसे आग के हवाले कर दिया जाएगा।

यह ताजा घटना 3 मार्च 2026 को सामने आई है, जब ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित हत्या के बाद ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष चरम पर पहुँच गया।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के दावे को खारिज किया है, लेकिन वैश्विक चिंताएँ बढ़ गई हैं क्योंकि यह मार्ग दुनिया के तेल व्यापार का 20% हिस्सा संभालता है।

क्या हैं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मायने

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ये ईरान और ओमान के बीच स्थित है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। यह संकीर्ण जलडमरूमध्य मात्र 21 मील चौड़ा है, लेकिन यहीं से वैश्विक तेल व्यापार का 20-21% हिस्सा गुजरता है।

ईरान के इस कदम का मतलब है कि खाड़ी के तेल उत्पादक देशों जिनमें सऊदी अरब, UAE, कुवैत, इराक और कतर का निर्यात ठप हो सकता है। ईरान खुद इस मार्ग को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है, क्योंकि इसका अधिकांश हिस्सा उसके जलक्षेत्र में आता है।

ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो 1980 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान ‘टैंकर वार’ में इसी तरह की रणनीति अपनाई गई थी, लेकिन आज के ड्रोन, मिसाइल और स्वार्म तकनीक से खतरा कहीं ज्यादा घातक है।

IRGC ने अमेरिकी नौसेना को भी चेतावनी दी है कि उनके जहाजों को प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी। यह न केवल आर्थिक ब्लैकमेल है, बल्कि ईरान की सैन्य ताकत का प्रदर्शन भी है, जो उसके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद बदला लेने की कोशिश का हिस्सा लगता है।

वैश्विक स्तर पर यह युद्ध की ओर इशारा करता है, क्योंकि अमेरिका ने पहले ही नौसैनिक टुकड़ियों को तैनात कर दिया है। लंबे समय तक बंदी से वैकल्पिक रूट जैसे सउदी के पाइपलाइन या अफ्रीकी तटों का चक्कर लगाना पड़ेगा, जो शिपिंग लागत को दोगुना कर देगा। ऐसे में यह ऊर्जा बाजार को हिला देने वाली रणनीति है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी की ओर धकेल सकती है।

इंश्योरेंस कंपनियां पहले ही पीछे हट चुकीं

दुनिया के लिए यह संकट विनाशकारी साबित हो सकता है। स्ट्रेट से रोजाना 20 मिलियन बैरल (2 करोड़ बैरल) से ज्यादा कच्चा तेल और 20% LNG गुजरता है। बंदी से तेल कीमतें 100-150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं, जो पहले ही 90 डॉलर के ऊपर चढ़ चुकी हैं।

इस कड़ी में यूरोप, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे आयातक सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, जहाँ ऊर्जा महँगाई पहले से ही अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचा रही है। इस संकट को भांपते हुए इंश्योरेंस कंपनियां गल्फ और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में जहाजों का कवरेज बंद कर रही हैं, बाजार खुलने से पहले ही 48-72 घंटे के नोटिस जारी कर दिए गए हैं।

वॉर रिस्क प्रीमियम 50% तक उछल चुका है, जिससे जहाज मालिकों के लिए यात्रा घाटे में बदल रही है। एक तरह से लाल सागर संकट जैसी स्थिति दोहराई जा रही है।बिना इंश्योरेंस के यात्रा जोखिम भरी हो गई है, जिससे तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है और शिपिंग कंपनियां नई दरों पर बातचीत कर रही हैं।

शिपिंग कंपनियां वैकल्पिक रास्ते अपनाएँगी, लेकिन वे इसके लिए 10-15 दिन ज्यादा समय लेंगी और तब तक में ईंधन खपत दोगुनी हो जाएगी। इसके कारण रासायनिक उद्योग, उर्वरक और प्लास्टिक उत्पादन तक ठप हो सकता है।

भले ही अमेरिका पर इस का सीधा असर कम होगा क्योंकि वह ऊर्जा निर्यातक बन चुका है, पर फिर भी वैश्विक मंदी से वहाँ की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान तो होना तय है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि OPEC+ देश उत्पादन बढ़ाने की कोशिश करेंगे, लेकिन अब भी इसकी क्षमता सीमित है। लंबे समय में यह संघर्ष इजरायल-ईरान युद्ध को और भड़का सकता है, जिससे मिडिल ईस्ट में व्यापक अस्थिरता फैलेगी।

भारत और दुनिया पर प्रभाव

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से रोजाना लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल (विश्व की 20-21% आपूर्ति) गुजरता है, जिसमें सऊदी अरब का 38% हिस्सा, कतर की LNG और अन्य खाड़ी देशों का गैस निर्यात शामिल है।

बंद होने पर तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं, शिपिंग लागत बढ़ेगी, वैश्विक महंगाई चढ़ेगी और ऊर्जा संकट गहरा सकता है- यूरोप, चीन, जापान जैसे आयातक सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

भारत के लिए खतरा सबसे गंभीर है, क्योंकि देश 85% कच्चा तेल आयात करता है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से प्रतिदिन 2.5-2.7 मिलियन बैरल (कुल आयात का 50%) आता है।

भारत के मुख्य स्रोत इराक, जो भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, के अलावा सऊदी अरब, UAE और कुवैत हैं। इसके अलावा 90% LPG और 60% LNG भी इसी रूट से मिलता है।

इस जलडमरूमध्य की बंदी से पेट्रोल-डीजल की कीमतें 20-30% तक उछल सकती हैं, जो ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और उपभोक्ता महँगाई को बढ़ावा देगी। रिफाइनरियों के पास 10-15 दिनों का स्टॉक है, इसलिए तत्काल संकट टल सकता है, लेकिन उसके बाद रूस, अमेरिका या अफ्रीकी देशों पर निर्भरता बढ़ेगी।

रूस से डिस्काउंट तेल खरीद पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर है, लेकिन पाइपलाइन या रेल रूट भी सीमित हैं। ऐसे में रुपए पर दबाव पड़ेगा, क्योंकि तेल डॉलर में खरीदा जाता है।

इसके अलावा उद्योगों जैसे फार्मा, ऑटो और FMCG पर लागत बढ़ेगी, जिससे नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। सरकार ने रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) भंडार भरे हैं, लेकिन पूर्ण बंदी में ये भी अपर्याप्त साबित होंगे। लंबे समय में भारत को नवीकरणीय ऊर्जा और जैव ईंधन पर तेजी से स्विच करना पड़ेगा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘अब कोई भी खुद को रिपोर्टर बताता है’: जिन पत्रकारों को मुस्लिम भीड़ ने पीटा, उन्हें ही दिल्ली HC देने लगा नसीहत; आबिद अली...

दिल्ली हाई कोर्ट ने 16 जुलाई 2026 को पिछले साल सीमापुरी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की कवरेज के दौरान पत्रकारों पर हुए हमले के मामले में आरोपित आबिद अली और फुरकान को जमानत दे दी।

भारत की पहली नाइट सफारी बनेगा UP का कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट, सुप्रीम कोर्ट से मिली हरी झंडी: जानिए क्या होंगी इसकी विशेषताएँ

कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि यहाँ मगरमच्छ और घड़ियाल रहते हैं। इसके अंदर बहुत सुंदर हिरण पार्क भी बनाया गया है।
- विज्ञापन -