विडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस कार्रवाई के बाद वहाँ मौजूद भीड़ आगे की तरफ भागती है। तभी दूसरी ओर से आई उपद्रवियों की भारी भीड़ पुलिस पर हमला कर देती है। भीड़ में शामिल बुर्का धारी महिलाएँ भी पुलिस पर हमला करते हुए नजर आती हैं।
ऐसा लगता है कि दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों की आड़ में अंकित शर्मा की जानबूझकर हत्या की गई। घटनाक्रम, प्रथम दृष्टया मिली जानकारी, कुछ बयान और डॉक्टरों की शुरुआत राय इसी ओर इशारा कर रहे हैं। उनकी हत्या के तार बांग्लादेशी आतंकियों से जुड़ रहे हैं।
"चाँदबाग चौराहे के पास ही दुर्गा फकीरी मंदिर है। पेट्रोल पंप फूँकने के बाद दंगाई तेजी से चारो तरफ आग लगा रहे थे। शाम का समय था। दहशत और शोर बढ़ता जा रहा था। जैसे ही भारी संख्या में दंगाइयों की नजर मंदिर की तरफ पड़ी तो सबसे पहले मंदिर बचाने के लिए मंदिर के पुजारी प्रार्थना करने लगे। दंगाइयों ने मंदिर पर पत्थरबाजी शुरू कर दी थी।"
सब कुछ सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। कुछ भी अचानक नहीं हुआ। हिंदुओं की संपत्ति को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया। निर्मम तरीके से हत्या की गई। रूह कॅंपाने वाली चुनिंदा कहानियॉं ताकि सनद रहे उस कथित 'डरी हुई भीड़' की बर्बरता।
दयालपुर थाने में अजय गोस्वामी ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा है कि ताहिर हुसैन के मकान से गोलियॉं चल रही थी। पत्थरबाजी और पेट्रोल बम भी फेंके जा रहे थे। पुलिस उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी करने की भी तैयारी कर रही है।
कविता ने मुश्किल वक्त में भी हौसला नहीं छोड़ा। फिर भी अपना सुहाग नहीं बचा पाई। उसके सास-ससुर तो इतने डरे हुए हैं कि श्मशान घाट से ही गॉंव लौट गए। शिव विहार के उस घर तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए जहॉं उनका लाडला रहता था।
मंदर का एक विडियो वायरल हुआ है। इसमें वे सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों को उकसाते नजर आते हैं। शीर्ष अदालत ने इसका हवाला देते हुए कहा है कि उन पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। जब तक वे सफाई नहीं देते उनकी याचिका नहीं सुनी जाएगी।
ताहिर 15 से ज्यादा लोगों के साथ अपने घर में घुसते दिख रहा है। इन सबके हाथ में पिस्टल है। उसके पीछे सैकड़ों दंगाइयों के चलने का फुटेज भी सामने आया है। इन दंगाइयों के हाथ लाठी-डंडे और तबाही के अन्य सामान हैं।
हर्ष मंदर का एक विडियो वायरल हुआ है। इसमें वह सीएए विरोधियों को उकसा रहा है। उनसे कह रहा है कि फैसला न संसद में होगा, न सुप्रीम कोर्ट में होगा, बल्कि फैसला सड़कों पर होगा।
"रवीश कुमार बेशर्मी का सबसे बड़ा उदाहरण हैं। उन्होंने मोहम्मद शाहरुख़ को अनुराग मिश्रा बताया और कहा कि वो कपिल मिश्रा का कोई सम्बन्धी हो सकता है। मोहम्मद शाहरुख़ ने उन दंगों में 8 राउंड फायरिंग की थी। फोटोशॉप कर के मेरे साथ उसकी तस्वीर वायरल की गई, जो झूठ निकली।"