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BREAKING: सोमालिया की राजधानी में कार बम विस्फोट, 90 से अधिक की मौत, कई घायल

सोमालिया की राजधानी मोगादिशु के व्यस्त इलाक़े में शनिवार (28 दिसंबर) को एक कार बम विस्फोट हुआ। इस विस्फोट में 90 से अधिक लोगों के मारे जाने की ख़बर है। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इस कार बम विस्फोट की पुष्टि मोगादिशु के मेयर उमर मुहम्मद ने की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि विस्फोट में कम से कम 90 नागरिक मारे गए, जबकि अधिकतर छात्र घायल हुए। इस विस्फोट की ज़िम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है।

इसके बाद क़ानूनविद अब्दिरिजाक मोहम्मद ने भी ट्विटर के माध्यम से इस घटना की सूचना दी। उनके अनुसार, बम विस्फोट में 17 पुलिस अधिकारी, 73 नागरिक और 4 विदेशी नागरिक विस्फोट के पीड़ितों में शामिल हैं। ये बम विस्फोट शहर के टैक्स ऑफ़िस के पास हुआ है। इसमें 4 तुर्की इंजीनियरों के साथ 50 लोगों के मारे जाने की बात कही गई है। इसके अलावा अन्य लोग भी मारे गए हैं। ये भीड़भाड़ वाला इलाक़ा बताया जा रहा है।

रेडियो दलसन ने सोमाली सुरक्षा सेवाओं के हवाले से कहा कि विस्फोट में मारे गए तुर्की के इंजीनियर हमलावरों का मुख्य निशाना हो सकते हैं। बता दें कि सोमालिया 1991 के बाद से एक हिंसक संघर्ष में उलझा हुआ है और अल-क़ायदा से संबद्ध अल-शबाब समूह द्वारा किए गए बम हमलों से नियमित रूप से परेशान है। ये ग्रुप यहाँ आए दिन किसी न किसी तरह से विस्फोट करके शांति व्यवस्था को ख़राब करता रहता है। समूह यूएन-बैक सोमाली सरकार को बाहर करने की माँग कर रहा है। जबकि समूह को मोगादिशु से निष्कासित कर दिया गया है, यह राजधानी में आतंकी वारदातों को अंजाम देता है।

NDTV का नया कारनामा: दंगाइयों को बताया ‘प्रदर्शनकारी’, रिपोर्ट में बदला CM योगी का बयान

बीते दिनों देश भर में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में सड़कों पर दंगा करने उतरे उपद्रवियों को मीडिया गिरोह के लोगों ने खूब समर्थन दिया। रवीश कुमार, बरखा दत्त, राजदीप सरदेसाई जैसे चेहरों ने इन दंगाइयों को इस पूरे अंतराल में नायक/नायिका बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। द वायर, द प्रिंट, ऑल्ट न्यूज़, बीबीसी जैसे कई मीडिया संस्थानों ने अपने एजेंडे के तहत पुलिस पर हुई हिंसा का पक्ष न दिखाकर, दंगाइयों पर हो रहे पुलिस एक्शन को अत्याचार की तरह दिखाया। लेकिन इसी बीच एनडीटीवी इन सबसे दो कदम ज्यादा आगे निकल गया। NDTV ने अपनी रिपोर्टिंग में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के बयान को ही अपने प्रोपेगेंडा के अनुरूप बदलकर न्यूज तैयार कर दी।

दरअसल, यूपी में पिछले दिनों भड़की हिंसा पर कानून प्रशासन की सख्ती को लेकर कल (27 दिसंबर 2019) योगी आदित्यनाथ ऑफिस के ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट आया। इसमें उन्होंने संदेश देना चाहा कि योगी सरकार की सख्ती देख कर अब राज्य में हिंसा भड़काने वालों के मनसूबे शांत हैं। हर दंगाई हतप्रभ है। हर उपद्रवी हैरान है। अपने ट्वीट में उन्होंने दंगाइयों को चेतावनी भी दी कि हिंसक गतिविधि करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जिन्होंने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया है, उनकी संपत्ति से ही उस क्षति की क्षतिपूर्ति की जाएगी।

अब हालाँकि किसी के बोले शब्दों को अपने वाक्यों में गढ़कर खबर बना देना एक आम बात है, लेकिन उसमें समाहित संदेश के साथ छेड़छाड़ करना न केवल नैतिक रूप से गलत है बल्कि अपराध भी है। NDTV इंग्लिश वाली वेबसाइट ने योगी आदित्यनाथ ऑफिस के द्वारा ट्वीट की गई कविता का जो अनुवाद किया, उसमें दरअसल संदेश के साथ छेड़छाड़ का ही मामला है। जबकि उसका अंग्रेजी में ट्रांस्लेशन कुछ इस प्रकार होना चाहिए था।

Every rioter is stunned.
Every rowdy/troublemaker is shocked.
Watching Yogi govt’s strict ways everyone is sitting calm.
Do whatever you wish, rioters will pay for the damage, this is Yogi ji’s announcement.
Every violent act will now cry (of fear) because now UP has Yogi govt.

गौर देने वाली बात है चूँकि ट्वीट में ‘उपद्रवी’ और ‘दंगाई’ शब्द लिखा है, तो उसका अनुवाद अंग्रेजी में rioter, trouble maker, rowdy आदि होता है। लेकिन एनडीटीवी ने अपने प्रोपगेंडा फैलाने के लिए इन शब्दों की जगह ‘protester’ शब्द का प्रयोग किया। जैसा ऊपर बताया कि इन दंगाइयों को कुछ मीडिया गिरोह के लोगों ने पूरी हिंसा के बीच नायक/नायिका बनाने की कोशिश की, शायद ये उसी कड़ी का अगला भाग है – दंगाइयों को Hero/Shero बनाओ और मुख्यमंत्री चूँकि BJP का है, इसलिए उन्हें खलनायक।

सब जानते हैं कि protester शब्द सकात्मक रूप में प्रदर्शन पर बैठे लोगों के लिए इस्तेमाल होता है। लेकिन दंगाइयों के लिए इसे इस्तेमाल करने का क्या मतलब? वो भी तब जब आप अपनी खबर में किसी ऐसे व्यक्ति के बयान को आधार बना खबर लिख रहे हैं, जो भारत के सबसे बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री है। तब इस तरह की गलती का तो सवाल ही नहीं उठता। लेकिन आप तो ठहरे NDTV, आप खबर कम प्रोपेगेंडा में ज्यादा विश्वास रखते हैं इसलिए…

खैर, एनडीटीवी ने यहाँ केवल सिर्फ़ शब्दों के अनुवाद में फेरबदल की गलती नहीं की, बल्कि उसने पूरे ट्वीट के अर्थ को ही अपने मनमुताबिक बदल दिया। क्योंकि ट्वीट की जिस पंक्ति का एनडीटीवी ने मतलब बदला, उसका असलियत में अंग्रेजी अनुवाद All the rioters are shocked (to see police action) होगा। लेकिन, अपनी रिपोर्ट में NDTV जानबूझकर उल्टा लिखा। NDTV ने लिखा, ‘SHOCKED EVERY PROTESTER’ जिसका मतलब है कि ‘हर प्रदर्शनकारी को (पुलिस ने/सरकार ने) हैरान कर दिया है।’

हालाँकि, साल 2014 के बाद से ये बात सब जान चुके हैं, कि एनडीटीवी शब्दों में उलट-फेर करके, दर्शकों को मुद्दे से भटकाकर अपना नैरेटिव तैयार करने में माहिर है। लेकिन, इस बार उन्होंने अपनी कुंठा निकालने के लिए यूपी के मुख्यमंत्री के बयान के साथ जो छेड़छाड़ की है, वो न केवल निंदनीय है बल्कि शर्मनाक भी। इस हरकत के लिए सोशल मीडिया पर यूजर्स न केवल उनकी थू-थू कर रहे हैं, बल्कि एनडीटीवी के ‘मीडिया संस्थान’ होने के तमगे पर भी सवाल उठा रहे हैं।

लोगों का कहना है कि कोई एनडीटीवी वालों को अच्छी डिक्शनरी लाकर दे, तो किसी का कहना है कि अगर इस संस्थान वालों की हिंदी बेकार है तो वो गूगल ट्रांस्लेटर का प्रयोग कर सकते हैं। वहीं, एक यूजर का कहना है कि इनका बस अगर चले तो ये ‘हाफिज’ को भारत रत्न दे दें।

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BJP की बढ़त पर युवाओं को ही कोसने लगे रवीश कुमार, सीटों के साथ बदल रहा NDTV स्टूडियो का माहौल

खिसियाया रवीश ऑपइंडिया नोचे: न्यूज़लॉन्ड्री का लेख रवीश ने ही लिखवाया, एडिट किया, नहीं चला तो खुद शेयर किया

रोमिला थापर जैसे वामपंथियों ने गढ़े हिन्दू-मुस्लिम एकता की कहानी, किया इतिहास से खिलवाड़: विलियम डालरिम्पल

इतिहासकार और लेखक विलियम डालरिम्पल (William Dalrymple) ने एक कार्यक्रम के दौरान यह स्वीकार किया कि देश में वामपंथी शिक्षाविदों और नेहरूवादी इतिहासकारों ने वास्तव में इतिहास की पाठ्यपुस्तकों को अपने क़ब्ज़े में कर भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद अपने प्रोपेगेंडा को फैलाना शुरू कर दिया था।

पिछले हफ्ते दिल्ली में इंडियन एक्सप्रेस द्वारा आयोजित एक टॉक शो – ‘Express Adda’ में बोलते हुए, लेखक डालरिम्पल ने कहा कि यह सच था कि शुरुआत में नेहरूवादी पाठ्य-पुस्तकें रोमिला थापर और अन्य मार्क्सवादियों द्वारा लिखी गई थीं। उन्होंने यह भी कहा कि मार्क्सवादियों ने दिल्ली के राजनीति चश्मे से मुगलों का महिमामंडन और हिन्दू-मुस्लिम एकता के खोखले दावे करते हुए मनगढ़ंत इतिहास को गढ़ने का काम किया। इतिहास लेखन के कार्य में वामपंथियों ने दक्षिणपंथियों को बिल्कुल हाशिए पर रखा और उनके लिए कोई जगह बाक़ी नहीं छोड़ी, जबकि वो यह अच्छी तरह से जानते थे कि वास्तव में वो भारत का इतिहास था ही नहीं, जिसका प्रचार वामपंथी अपने प्रोपेगेंडा के तहत कर रहे थे।

इस कार्यक्रम के होस्ट ने डालरिम्पल से पूछा कि क्या यह सच है कि स्वतंत्रता के बाद क्या शिक्षाविदों का वामपंथियों द्वारा हरण कर लिया गया था और क्या अकादमिक हिस्से पर वामपंथियों ने लगभग कब्जा कर लिया था, जैसा दक्षिणपंथियों द्वारा आरोप लगाया जाता रहा है?

इसका जवाब देते हुए विलियम डालरिम्पल ने कहा कि विशेष रूप से 1950 के दशक में लिखी गई इतिहास की पाठ्य-पुस्तकों पर उनकी प्रामाणिकता को लेकर आज भी कई तरह के शक बरक़रार हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर के लगभग सभी नेहरूवादी इतिहासकार महान इतिहासकार थे, जबकि इसके विपरीत दक्षिणपंथी इतिहासकारों की अगली पीढ़ी में वो बात नहीं दिखी।

इस पर डालरिम्पल से पूछा गया कि क्या उनका यह मतलब है कि दक्षिणपंथी वर्ग के द्वारा वामपंथी इतिहासकारों पर जो आरोप लगाए जाते रहे हैं, वो सही हैं? तो डालरिम्पल ने जवाब देते हुए कहा, “मार्क्सवादियों द्वारा लिखी गई इतिहास की किताबों में हिन्दू-मुस्लिम एकता को चाशनी में डूबा, कुछ ज्यादा ही महिमामंडित करता हुआ दर्शाया गया, इसलिए वामंथियों द्वारा गढ़े जा रहे मनगढ़ंत इतिहास पर उन्हें आपत्ति होती थी, जिसका वो पुरज़ोर विरोध भी करते थे।

दरअसल, इस सब बातों में ग़ौर करने वाली बात यह है कि विलियम डालरिम्पल का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब इन मार्क्सवादी इतिहासकारों की विश्वसनीयता और पक्षपात को लेकर देश भर में बड़ी बहस छिड़ी हुई है। इन्होंने (वामपंथियों) अपनी विचारधारा को जनता के बीच पहुँचाने के लिए पाठ्य-पुस्तकों को अपने प्रचार करने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया। अत: अब यह बात पूरी तरह से स्पष्ट हो चुकी है कि हमने जो भारतीय इतिहास पढ़ा है, वह मनगढ़ंत है, और यह वामपंथियों की देन है।

इतिहास की ये पाठ्य-पुस्तकें कुछ और नहीं बल्कि उन नेहरूवादी शिक्षाविदों और मार्क्सवादी विद्वानों की करतूत हैं, जिनके अंदर एक हिन्दू-बहुल देश में हिन्दू धर्म के पुनरुद्धार से डर बैठा हुआ था। यही कारण है कि धीरे-धीरे एक आंदोलन पनप रहा है, जिसके तहत भारत के इतिहास की किताबों के संशोधन की माँग लगातार की जा रही है।

हिन्दुओं को अपने इतिहास का सच नहीं पता चलना चाहिए, ये ‘मॉब’ बनाने की साजिश है: The Print

अब तक सच्चाई छिपाई गई, अब सही इतिहास लिखने का समय आ गया है: RSS के मंच पर अमित शाह

इतिहास से छेड़छाड़, पुनः लिखने की जरुरत: शिवाजी, ज्ञानेश्वर, लक्ष्मीबाई, शंकराचार्य… के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं

अशोक से प्रेरित होकर सिंहासन त्यागना चाहते थे युधिष्ठिर: रोमिला थापर का ‘अद्भुत’ इतिहास ज्ञान

पाकिस्तान परस्त दंगाइयों को जब SP ने समझाया, तो NDTV ने उसे ‘मुस्लिमों को धमकाया’ कह कर दिखाया

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ विरोध की आड़ में दंगा किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में इन दंगाइयों की हिंसक भीड़ ने सबसे ज्यादा उत्पात मचाया। अंततः पुलिस को भी वो तरीके अपनाने पड़े, जिनसे अमूमन प्रशासन बचता है। उत्पाती और दंगाई भीड़ को शांत करने के लिए पुलिस को कहीं लाठियाँ तो कहीं आत्मरक्षा में गोली तक चलानी पड़ी। दंगाइयों की भ्रामक बातें और लोगों तक न पहुँचें और कम से कम लोग उनकी चाल में फँसे, इसी को लेकर मेरठ के सिटी एसपी अखिलेश नारायण सिंह संबंधित एरिया में लोगों को समझाते (उग्र होकर, गुस्से में) हैं। और उनका यह वीडियो वायरल कर दिया जाता है मीडिया गिरोह के द्वारा।

इस विडियो में कुछ गालियाँ हैं (जिसकी ऑपइंडिया निंदा करता है), लेकिन जिस तरह से NDTV ने संदर्भ हटा कर पुलिस को ‘मुस्लिमों को धमकाया’ कह कर चलाया है, उससे प्रतीत होता है कि समुदाय विशेष के लोग चाहे आग लगाएँ, सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान करें, पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाएँ, NDTV उन सारी बातों को उनके अल्पसंख्यक होने का गीत गा कर झुठला देगा।

इस विडियो में पुलिस बार-बार बता रही है कि ‘खाओगे यहाँ (भारत) का, गाओगे वहाँ (पाकिस्तान) का’ नहीं चलेगा। किस देश में वहाँ की पुलिस या वहाँ का राष्ट्रभक्त नागरिक इस बात को बर्दाश्त करेगा कि कुछ लोगों को एक दुश्मन देश ज्यादा प्रिय है? पुलिस ने तर्क के साथ दंगाइयों को सही बात समझाने की कोशिश की है। चूँकि माहौल संवेदनशील है, टेंशन वाला है तो पुलिस के मुँह से कुछ अपशब्द भी निकले जो गुस्से में हम-आप सब के मुँह से निकलते हैं। जहाँ बात जीवन और मृत्यु की हो, लोगों की जानें जा सकती हों, आगजनी और दंगे हो रहे हों, वहाँ पुलिस की भाषा पर सवाल नहीं उठाना चाहिए, फिर भी ऑपइंडिया इस भाषा का समर्थन नहीं करता।

लेकिन NDTV ने वही किया जो उसे करने में आनंद मिलता है। ये कमाल की बात है (और नहीं भी) कि NDTV ने पाकिस्तान ज़िंदाबाद का विचार रखने वाले समुदाय विशेष को कुछ नहीं कहा। क्या अब ‘विरोध’ के नाम पर दुश्मन देश के पक्ष में नारे लगेंगे क्योंकि वहाँ ‘अपनी कौम’ के मुस्लिम रहते हैं? फिर ऐसे लोगों को अगर पुलिस पाकिस्तान जाने बोल रही है तो इसमें समस्या क्या है?

अपने मतलब की चीज या प्रोपेगेंडा पर संदर्भ की बात करने वाले मीडिया गिरोह यह भूल जाते हैं कि संदर्भ तो हर एक पल, हर एक इंसान या हर एक फैसले का होता है। फैज की “हम देखेंगे… बस नाम रहेगा अल्लाह का” वाले पर इसी मीडिया गिरोह ने संदर्भ की बात करते हुए लेख पर लेख दे मारे। तो क्या दंगे-आगजनी की जगह पुलिस के निर्णय संदर्भ से परे हो जाते हैं? उसकी व्याख्या क्यों नहीं! क्योंकि ये आपके नैरेटिव को सूट नहीं करता।

फिर भी संदर्भ जानना जरूरी है। और इससे बेहतर क्या होगा जब संदर्भ वो इंसान खुद बताए, जिसने सारी बातें कहीं हैं। सुनिए मेरठ के सिटी एसपी की बात कि क्यों उन्हें उग्र भाषा में चेतावनी देनी पड़ी थी उस दिन।

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ईसा मसीह की सबसे ऊँची प्रतिमा के लिए भी जमीन घोटाला! चारागाह को कॉन्ग्रेसी नेता ने बताया बंजर भूमि

कर्नाटक के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस के विधायक डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु से 50 किमी दूर अपने कनकपुरा विधानसभा क्षेत्र के लोगों को क्रिसमस के तोहफ़े के रूप में ईसा मसीह की सबसे ऊँची प्रतिमा बनाने के लिए 10 एकड़ ज़मीन दी थी। इसकी क़ीमत उन्होंने अपने निजी कोष से 10.80 लाख रुपए देकर चुकाई थी।

ख़बर के अनुसार, येदियुरप्पा सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी द्वारा स्वीकृत भूमि की फिर से जाँच करने का फ़ैसला किया है। राजस्व मंत्री आर अशोका ने कहा कि आवंटित भूमि गोमला (चारागाह के तौर पर इस्तेमाल होने वाली सामुदायिक ज़मीन) है, न कि एक बंजर भूमि, जिसका दावा शिवकुमार ने किया था। उन्होंने कहा, “मैंने रामनगर ज़िले के डिप्टी कमिश्नर को भूमि आवंटन पर एक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है।”

दरअसल, कनकपुरा में हरोबेले के ईसाई बहुल गाँव कपालीबेट्टा में ईसा मसीह की 114 फीट ऊँची प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव है। कनकपुरा शिवकुमार का विधानसभा क्षेत्र है। शिवकुमार के कार्यालय ने बताया कि उन्होंने अपने फंड से कपालीबेट्टा में न्यास के लिए सरकार से 10 एकड़ ज़मीन ख़रीदी थी। यह न्यास ही इस प्रतिमा का निर्माण करवा रहा है। कॉन्ग्रेस नेता शिवकुमार ने दावा किया कि यह प्रतिमा दुनिया में ईसा मसीह की सबसे ऊँची प्रतिमा होगी। इसकी आधारशिला उन्होंने 25 दिसंबर को एक प्रार्थना सभा में रखी थी। 

वहीं, शिवकुमार पर तीखा हमला करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री के एस ईश्वरप्पा ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण का विरोध करने वाले कॉन्ग्रेस नेता ईसा मसीह की प्रतिमा के लिए धन दे रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अपने नेता पर प्रभाव बनाने के लिए, कॉ़न्ग्रेस के नेता, जो भारत में जन्में वह भगवान राम के लिए भव्य मंदिर के निर्माण के विरूद्ध हैं। लेकिन, अपने पैसे से ईसा मसीह की प्रतिमा बनाने जा रहे हैं। अब तो सिद्धरमैया भी उन्हें (डी शिवकुमार को) कर्नाटक कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष बनने से नहीं रोक सकते।”

ग़ौरतलब है कि कर्नाटक कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक डीके शिवकुमार वर्तमान में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ज़मानत पर बाहर हैं। उन्हें इस मामले के संबंध में चार दिनों की पूछताछ के बाद 3 सितंबर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ़्तार किया था। ईडी ने गिरफ़्तार करने के बाद उनसे 14 दिन तक लगातार पूछताछ की थी। इसके बाद, 17 सितंबर को दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें 1 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद 30 सितंबर को उनकी ज़मानत याचिका पर सुनवाई हुई, उस समय कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई 14 अक्टूबर तक के लिए टाल दी थी।

ईसा मसीह की 114 फीट ऊँची प्रतिमा का शिलान्यास: कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने सौंपे ज़मीन से जुड़े दस्तावेज़

CCD संस्थापक वीजी सिद्धार्थ की मौत का मामला गहराया, कॉन्ग्रेस नेता डीके शिवकुमार के साथ हवाला कनेक्शन

शिवकुमार के ख़िलाफ़ 200 शिकायतें, कर्नाटक महिला कॉन्ग्रेस की पूर्व अध्यक्ष को भी ED का समन

‘हाईकोर्ट के आदेश पर हमने बनवाए थे डिटेंशन कैंप और यह जरूरी है’ – 3 बार CM रहे कॉन्ग्रेसी नेता ने खोली पोल

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कहा कि गुवाहाटी हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए वर्ष 2009 में तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने पहले डिटेंशन सेंटर की स्थापना की थी। यहाँ पर घुसपैठियों (अवैध तरीके से देश में घुस आए लोग) को रखा जाता है। 

शुक्रवार (27 दिसंबर) को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स में तरुण गोगोई ने हाईकोर्ट के आदेश पर न सिर्फ डिटेंशन कैंप बनवाने की बात कही बल्कि यह क्यों जरूरी है, इस पर भी चर्चा की। बता दें कि असम में तरुण गोगोई लगातार तीन बार 15 साल तक प्रदेश में कॉन्ग्रेस सरकार का नेतृत्व कर चुके हैं। 

ख़बर के अनुसार, असम में वर्तमान में ‘अवैध विदेशियों’ को रखने के लिए छ: डिटेंशन सेंटर हैं, लेकिन ये सभी जेलों के अंदर स्थित हैं। इसके अलावा, एक नया डिटेंशन सेंटर – केवल ‘अवैध विदेशियों’ को हिरासत में रखने के लिए गोलपारा ज़िले में निर्माणाधीन है।

पूर्व मुख्मंत्री ने डिटेंशन सेंटर की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए कहा,

“डिटेंशन कैंप ज़रूरी हैं। जेलों में क़ैद विदेशियों की सज़ा पूरी होने के बाद, उन्हें कहाँ रखा जाएगा? जब तक उन्हें उनके देश में वापस नहीं भेजा जाता है, जहाँ से वे आए थे, तब तक आपको उन्हें एक डिटेंशन कैंप में ही रखना होगा।”

सरकारी सूत्रों के अनुसार भारतीय अदालतों द्वारा दोषी ठहराए गए अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को राज्य के 100 विदेशियों के न्यायाधिकरणों (FTs) द्वारा ‘अवैध विदेशी’ के रूप में ‘घोषित’ श्रेणी से अलग रखा गया है।

इसके अलावा, केरल में विदेशी क़ैदियों के लिए एक ऐसी इमारत की खोज की जा रही है, जिसमें डिटेंशन सेंटर (हिरासत केंद्र) स्थापित किया जा सके। केरल के सामाजिक न्याय विभाग (DSJ) को डिटेंशन सेंटर में सुविधा स्थापित करने का काम सौंपा गया है।

नए डिटेंशन सेंटर की सुविधाएँ: 

  • डिटेंशन सेंटर में सुविधा स्थापित करने का काम सामाजिक न्याय विभाग को सौंपा गया है।
  • इस विभाग को विदेशी क़ैदियों का विवरण राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) से माँगना होगा।
  • यह डिटेंशन सेंटर उन लोगों का आवास होगा, जिन्होंने अवैध रूप से देश में प्रवेश किया था।
  • यह उन विदेशियों का भी आवास होगा, जिनके वीज़ा और पासपोर्ट की अवधि समाप्त हो गई थी।
  • इसमें विदेशी मूल के विचाराधीन क़ैदी भी शामिल रहेंगे।

विदेशी अपराधी जो यहाँ जेल की अवधि पूरी कर चुके हैं और निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उन्हें भी डिटेंशन सेंटर की सुविधाएँ मिलेंगी।

कुल मिलाकर असम के 3 बार के CM और केरल के सामाजिक न्याय विभाग द्वारा डिटेंशन सेंटर की आवश्यकता से उस भ्रमजाल को समझा जा सकता है, जो वर्तमान में विपक्षी पार्टियाँ फैला रही हैं। तरुण गोगोई (कॉन्ग्रेसी) हैं और केरल की वामपंथी सरकार जब खुद डिटेंशन सेंटर के पक्ष में है तो फिर गृहमंत्री अमित शाह ने जो इन्टरव्यू में कहा कि ‘आखिर घुसपैठियों को कहाँ रखा जाए’ वाली बात पर बवाल क्यों? यह तो किसी भी देश की एक आम प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे किसी कॉन्ग्रेसी-BJP-वामपंथी चश्मे से देखने की जरूरत नहीं। जब तक अवैध तरीके से किसी भी देश में घुसपैठिये आते रहेंगे, उस देश में डिटेंशन सेंटर की आवश्यकता बनी रहेगी।

कॉन्ग्रेस ने 362 लोगों को डाला था डिटेंशन सेंटर में: PM ने नहीं बोला झूठ, राहुल और टेलीग्राफ का दावा झूठा

अमित शाह ने बताया किन लोगों के लिए है डिटेंशन सेंटर, कहा- NPR का NRC से कोई संबंध नहीं

केरल में डिटेंशन सेंटर बनाने के लिए तलाशी जा रही है इमारत: सामाजिक न्याय विभाग को सौंपी गई है जिम्मेदारी

RSS के मार्च पर वामपंथी गुंडों का हमला, 15 कार्यकर्ता घायल: बचाव में आए 4 पुलिसकर्मियों को भी लगी चोट

केरल के कासरगोड क्षेत्र में शुक्रवार (27 दिसंबर) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा निकाले गए रूट मार्च के दौरान डेमोक्रेटिक यूथ फेडेरेशन ऑफ़ इंडिया (DYFI) के गुंडों ने RSS कार्यकर्ताओं पर पत्थरबाजी की। हिंसा पर क़ाबू पाने के लिए केरल पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इस हिंसा में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ पुलिस मामला दर्ज करने की तैयारी में है। बता दें कि इस हिंसक झड़प में RSS के 15 कार्यकर्ता घायल हो गए हैं, जबकि इनके बचाव में आई पुलिस के 4 कर्मियों को भी चोटें आई हैं। इनमें 4 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

ख़बर के अनुसार, कासरगोड के डीएसपी ने बताया कि शुक्रवार को नीलेश्‍वरम इलाक़े में RSS ने अपना मार्च निकाला था। इस दौरान DYFI के गुंडों ने RSS के कार्यकर्ताओं पर पत्‍थरबाज़ी की। DYFI के गुंडे RSS के मार्च को रोकने का प्रयास कर रहे थे। इस वजह से RSS और DYFI के गुंडों के बीच झड़प हो गई और उन्होंने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।

घटना की सूचने मिलने पर मौक़े पर पहुँची पुलिस को वहाँ अनियंत्रित भीड़ को हटाने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी। फ़िलहाल, पुलिस इस हिंसा में शामिल उपद्रवियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने की तैयारी कर रही है। इस हिंसक झड़प में 4 पुलिसकर्मी के अलावा, 15 लोगों (RSS कार्यकर्ताओं को) को चोटें लगी हैं।

आपको बता दें कि RSS पर वामपंथी गुंडों के द्वारा हमले की यह पहली घटना नहीं है। इस महीने की 2 तारीख को पश्चिम बंगाल के मेटियाब्रुज में RSS से जुड़े वीर बहादुर सिंह पर दिन-दहाड़े गोली मारी गई थी, जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मेटियाब्रुज वही इलाक़ा है, जिसे तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक मंत्री ने ‘मिनी पाकिस्तान’ करार दिया था।

एक पाकिस्तानी पत्रकार को मेटियाब्रुज के बारे में बताते समय ममता बनर्जी के मंत्री फरहाद हाकिम ने बताया था कि गार्डन रीच वाला इलाक़ा कोलकाता का ‘मिनी पाकिस्तान’ है। उन्होंने ‘द डॉन’ के पत्रकार से कहा था- “आइए, आपको मिनी पाकिस्तान की सैर कराता हूँ।”

मुस्लिमों को घर में घुस कर मार रहे हैं RSS कार्यकर्ता और UP पुलिस: राणा अयूब का झूठ बेनकाब

CAB पर बौखलाए इमरान खान: कहा- RSS के हिंदू राष्ट्र का एजेंडा लागू कर रही फासीवादी मोदी सरकार

कोलकाता में RSS कार्यकर्ता को मारी गोली, TMC के मंत्री ने कहा था- ये मिनी पाकिस्तान है

राहुल के बयानों पर जावड़ेकर का करारा जवाब, बोले- उन्‍हें ‘झूठ ऑफ द ईयर’ का अवार्ड मिलना चाहिए

नई दिल्ली के भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी पर आज (दिसंबर 27, 2019) जमकर निशाना साधा। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गाँधी को 2019 का सबसे बड़ा झूठ बताया। साथ ही उन्होंने राहुल गाँधी के ‘एनपीआर को गरीबों का टैक्स’ बताने वाले बयान पर कहा कि टैक्स और करप्शन तो कॉन्ग्रेस का कल्चर है। कॉन्ग्रेस हर उस चीज का विरोध करती है जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगती है या वो खत्म होता है।

उन्होंने इस सम्मेलन में राहुल गाँधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “आज उन्होंने (राहुल गाँधी) कहा कि एनपीआर गरीब पर टैक्स है। मैं सोच रहा था कि यह टैक्स कहाँ से आया, एनपीआर तो पॉपुलेशन रजिस्टर है। टैक्स कॉन्ग्रेस का कल्चर है। जैसे- जयंती टैक्स, कोयला टैक्स, टू जी टैक्स, जीजाजी टैक्स।“

प्रकाश जावड़ेकर ने राहुल गाँधी पर उनके बयानों को लेकर हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष थे तब भी और नहीं है तब भी लगातार झूठ बोलते हैं। इसलिए 2019 का झूठ ऑफ द ईयर राहुल गाँधी को मिल सकता है। उन्होंने कहा पहले राहुल गाँधी के बयानों से परिवार परेशान था अब जनता और पूरी कॉन्ग्रेस परेशान है।

सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कॉन्ग्रेस से 2 माँगे करते हुए कहा, “झूठ बोलना बंद करें ताकि देश गुमराह न हो। देश ने आपको रिजेक्ट किया है। इसके अलावा कर्ज माफी जैसे झूठे वादे करना बंद करें, जो कभी पूरे नहीं किए।”

जावड़ेकर ने आगे राहुल गाँधी से कहा कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार है, जहाँ एक अस्पताल में एक महीने में 77 बच्चों की मृत्यु हुई है। अगर राहुल गाँधी को जाना है तो वहांँ जाएँ और अपनी सरकार को सुधारें। उसके बजाय ये बेतुके बयान देना बंद करें।

केंद्रीय मंत्री ने इसके बाद पूरी कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए एनपीरआर का मतलब बताया और कहा कि कॉन्ग्रेस हर उस चीज का विरोध करती है, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगती है।

उन्होंने बताया, “भ्रष्टाचार कॉन्ग्रेस की राजनीति का एक मात्र आधार है। इसलिए जिन-जिन चीजों से भ्रष्टाचार पर लगाम लगती है या जिनसे भ्रष्टाचार खत्म होती है तो कॉन्ग्रेस उसका विरोध करती है। एनपीआर से क्या होता है? इससे गरीब की पहचान होती है। 2010 में बने एनपीआर के डेटा के आधार पर तमाम राज्यों ने अपने यहाँ लाभार्थियों का चयन किया। अब वही 2020 में हो रहा है। लेटेस्ट स्थिति सामने आएगी। लाभार्थियों की पहचान में एनपीआर का बहुत बड़ा योगदान होता है। आधार की वजह से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर शुरू हुआ। सैकड़ों योजनाओं के 9 लाख करोड़ रुपए लोगों के खाते में सीधे जमा हो गए।”

मध्य प्रदेश के जीवाजी यूनिवर्सिटी ने क्रांतिकारियों को बताया ‘आतंकवादी’: बीजेपी ने की कार्रवाई की माँग

मध्यप्रदेश के ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी मे परीक्षा के दौरान राजनीति शास्त्र के प्रश्न पत्र में क्रांतिकारियों की तुलना आतंकवादियो से किए जाने का शर्मनाक वाकया सामने आया है। सोशल मीडिया पर प्रश्न पत्र की तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। जिसके बाद इसपर प्रदेश के शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने खुद संज्ञान लिया है और विश्वविद्यालय से सवाल पूछा गया है कि इसे पूछे जाने के पीछे आखिर क्या उद्देश्य था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदेश शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने इस घटना पर बयान देते हुए कहा ये व्यवस्था बेहद गोपनीय होती है। ऐसा सवाल कैसे पूछा गया? इसके पीछे किसी का षडयंत्र था और उनकी क्या व्यवस्था थी। इन सब पर जाँच की जा रही है। साथ ही शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि, क्योंकि ये मामला विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ मामला है, इसलिए इसकी बेहद सतर्कता के साथ जाँच होगी।

जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने पूरे मामले के मद्देनजर प्रमुख सचिव को अपने निवास पर बुलाया। साथ ही मामले को लेकर 3 सदस्यीय जाँच कमेटी भी गठित की गई। अब ये जाँच कमेटी 3 दिन के भीतर पूरे मामले की जाँच रिपोर्ट उन्हें सौंपेगी।

रिपोर्ट आने के बाद मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा। उस पर कड़ी कार्रवाई होगी। जीतू पटवारी के मुताबिक ये मात्र एक चूक नहीं है, बल्कि बहुत बड़ी गलती है। इसलिए जो भी दोषी होगा उसको बख्शा नहीं जाएगा। सख्त कार्रवाई होगी ताकि आगे विश्वविद्यालयों में इस तरह की चूक ना हो।

बता दें, कि यह प्रश्न कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्वाचन क्षेत्र गुना के सरकारी कॉलेज में एमए राजनीति शास्त्र की 20 दिसंबर को हुई परीक्षा के दौरान पूछा गया था। जिसके प्रकाश में आने के बाद न सिर्फ छात्र संगठन बल्कि भारतीय जनता पार्टी ने भी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करने शुरु कर दिए।

इस मामले पर मध्‍य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर गैरजिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। शिवराज सिंह चौहान ने भी इस घटना को शर्मनाक और दुखदायी बताते हुए कहा, “जिनके बलिदान के कारण हम खुली हवा में साँस ले पा रहे हैं, उन्हें कोई कैसे आंतकवादी कह सकता है। मध्य प्रदेश सरकार से मेरी माँग है कि तुरंत ऐसे गैरजिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।”

वहीं, प्रदेश में कॉन्ग्रेस सरकार होने के बाद भी कॉन्ग्रेस के उपाध्यक्ष ने इस घटना पर कहा– “प्रदेश के शिक्षा संस्थानों में संघी मानसिकता के लोग घुस गए हैं। इसीलिए इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। जीवाजी विश्वविद्यालय में पेपर किसने सेट किया, इसकी जाँच कराएँगे और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।”

CM योगी की छवि धूमिल करने की कोशिश में कॉन्ग्रेस ने शेयर किया बिन J&K के भारत का नक्शा, हुई फजीहत

देश में एकता, अखंडता और धर्मनिर्पेक्षता बनाए रखने की बात करने वाली देश की सबसे पुरानी पार्टी कॉन्ग्रेस की महिला विंग को सोशल मीडिया पर आज एक ओछी करते पाया गया। दरअसल, सीएए के विरोध में कॉन्ग्रेस की महिला विंग ने आज ट्विटर पर एक कार्टून पोस्ट किया। जिसके कारण सोशल मीडिया पर उनकी बहुत थू-थू हुई और अब सोशल मीडिया यूजर्स उनके ट्वीट के स्क्रीनशॉट लेकर उनकी मंशा पर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। साथ ही दिल्ली पुलिस से इसपर संज्ञान लेने की गुहार लगा रहे हैं।

अब आखिर शेयर किए गए उस कार्टून में ऐसा क्या विवादस्पद था? तो बता दें, उस कार्टून में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके भगवा वस्त्र और माथे पर ‘खून की तरह बहता’ तिलक लगाए दर्शाया गया था। इसके अलावा इस कार्टून में उनके हाथ में फाँसी के फँदे को दिखाया गया था और साथ ही उस फाँसी के फँदे में भारत का नक्शा दिखाया गया था। इस आपत्तिजनक कार्टून में योगी आदित्यनाथ की छवि धूमिल करने के प्रयास के अलावा सबसे विवादस्पद था कि जिस नक्शे को कार्टून में दर्शाया गया, उससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख ही गायब था।

इस पोस्ट के साथ ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस के ट्विटर अकॉउंट पर शलभ श्रीराम सिंह कविता ‘इंकलाब चाहिए’ की निम्नलिखित पंक्तियों को भी लिखा गया था। जिसे यूजर्स की आपत्ति झेलने के बाद उन्होंने डिलीट कर दिया।

“जहाँ आवाम के खिलाफ साजिशें हो शान से
जहाँ पे बेगुनाह हाथ धो रहे हों जान से
जहाँ पे लब्जे अमन एक खौफनाक राज़ हो
जहाँ कबूतरों का सरपरस्त एक बाज़ हो
वहाँ न चुप रहेंगे हम कहेंगे हाँ कहेंगे”


शलभ श्रीराम सिंह की कविता इंकलाब चाहिए की पंक्तियाँ

लेकिन, सोशल मीडिया पर लोगों ने ऐसी मंशा रखने वालों को न बख्शने की ठानी। लोग इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट लेकर इसे सोशल मीडिया पर शेयर करने लगे। साथ ही दिल्ली पुलिस को टैग करके इस मामले पर ध्यान केंद्रित करवाने लगे कि कॉन्ग्रेस ने एक ऐसा नक्शा शेयर किया है जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का हिस्सा ही नहीं हैं। वहीं, दिल्ली में भाजपा कार्यकर्ता और आप के बागी नेता ने भी इसे लेकर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा और लिखा, “कॉन्ग्रेस, तुम बिना सिर के होगे, भारत नहीं है।”

गौरतलब है कि, ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस के ट्विटर पेज पर ये कार्टून आज सुबह यानी 27 दिसंबर को 11: 43 के करीब शेयर किया गया था। इससे पहले ये तस्वीर व्हॉट्सअप पर भी जमकर वायरल हुई थी।