Home Blog Page 5224

राबड़ी देवी ने लौटाया दहेज़: ऐश्वर्या के परिवार ने लेने से किया इनकार, कहा- शराब या विस्फोटक भी हो सकता था

जेल में बंद राजनेता लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी ने अपनी पुत्रवधू ऐश्वर्या के परिवार को एक पैकेज (दहेज़) भेजा, लेकिन ऐश्वर्या के परिवार ने यह कहते हुए उस पैकेज को लेने से इनकार कर दिया कि इसमें विस्फोटक हो सकता था। ऐश्वर्या के पिता ने उस पैकेज को लेने से साफ़ इनकार कर दिया। सामान वापस करने का यह निर्णय राबड़ी देवी द्वारा महिला हेल्पलाइन से नोटिस मिलने के बाद लिया था।

ख़बर के अनुसार, ऐश्वर्या के पिता के हवाले से कहा गया था कि सामान भेजने की उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। उन्होंने शक़ जताया था कि लालू का परिवार अवैध तरीक़े से शराब या विस्फोटक भी भेज सकता था। इसलिए उन्होंने उस पैकेज को लेने से साफ़ इनकार कर दिया, जिससे कहीं बाद में उन्हें किसी तरह की मुसीबत का सामना न करना पड़ा जाए।

ऐश्वर्या की माँ चंद्रिका राय ने गुस्से में कहा, “क़ानून के अनुसार, दहेज़ के सामान को भेजने से पहले मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी के सामने एक सूची तैयार की जाती है। मैं उस पैकेज को कैसे स्वीकार कर सकती थी, क्योंकि उस पैकेज में शराब या विस्फोटक सामग्री भी हो सकती थी।”

ग़ौरतलब है कि ऐश्वर्या रॉय ने बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव से 2018 में शादी की थी, लेकिन जल्द ही उनके आपसी रिश्ते में खटास आ गई। इस वजह से आपसी विवाद की बात तलाक़ लेने तक पहुँच गई। हाल ही में यह ख़बर आई थी कि बहू ऐश्वर्या ने अपनी सास राबड़ी पर मारपीट करने और उनके बाल खींचने का आरोप लगाया था।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा था, “जब मुझे मोबाइल फोन के एक मैसेज से पता चला कि तेजप्रताप यादव के समर्थकों ने पटना विश्वविद्यालय परिसर में मेरे और मेरे माता-पिता के बारे में आपत्तिजनक पोस्टर चिपकाए गए हैं, तो उस समय मैं अपने कमरे के अंदर टीवी देख रही था। मैंने अपनी सास से इस बारे कहा कि सार्वजनिक रूप से मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने का काम है, मैं बस अपने माता-पिता को इन सब मामले में घसीटना नहीं चाहती थी।”

राबड़ी देवी ने मेरे बाल नोचे, पीटा, घर से निकाल दिया, सैंडल तक नहीं लेने दिया: लालू की बहू ने लगाए गंभीर आरोप

पूर्व CM राबड़ी देवी के आवास पर तैनात CRPF जवान ने की आत्महत्या

राबड़ी देवी ने पूछा, लीची कैसे खाते हैं… ‘चारा कहीं भी कैसे भी खा लीजिए’ परेश रावल ने लिए मजे


मुंसिफ खान से प्रेम विवाह करने वाली हिन्दू युवती का अधजला शरीर बरामद: हिरासत में लेकर पूछताछ जारी

झारखंड की राजधानी राँची के खूँटी थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक 33 वर्षीय युवती का अधजला शव बरामद किया। शव की पहचान विनीता तिर्की उर्फ अंजलि के रूप में हुई। युवती राँची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र स्थिति महावीर नगर की निवासी बताई जा रही है। जो मूल रूप से सिमडेगा के सलगापुर की रहने वाली थी, लेकिन अरगोड़ा में पिछले कई सालों से अपने पति मुंसिफ खान के साथ रह रही थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विनीता अपने घर से बीते बुधवार से गायब थी, लेकिन उसके गुमशुदगी का कोई मामला दर्ज नहीं था। ऐसे में गुरुवार को उसकी तस्वीर व्हॉट्सऐप पर वायरल हुई। तस्वीर में देखा गया कि युवकी का ऊपरी शरीर और चेहरा जला हुआ था। जिसके बाद कुछ स्थानियों द्वारा सूचना देने पर पुलिस ने इस मामले पर संज्ञान लिया। वहीं, खूँटी पहुँचकर मुंसिफ खान ने शव की पहचान अपनी पत्नी विनीता तिर्की उर्फ़ अंजलि के रूप में की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खूँटी पुलिस ने मुंसिफ खान को हिरासत लेकर पूछताछ की है। साथ ही युवती के शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया गया। हालाँकि, मुंसिफ खान ने पुलिस से पूछताछ में अब तक बताया है कि उसने विनीता से प्रेम विवाह किया था। जिनके 2 बच्चे भी हैं। लेकिन बता दें जब पुलिस मुंसिफ को लेकर उनके घर पहुँची, तो वहाँ वे बच्चे दिखाई नहीं पड़े।

अब पुलिस पूरे मामले में छानबीन कर रही है। फिलहाल हत्या के कारणों का कोई खुलासा नहीं हुआ है। मगर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कहा जा रहा है कि जिस तरह विनीता की बॉडी को जलाया गया, उससे लग रहा है कि उसकी गला दबाकर पहले हत्या की गई होगी और बाद में कालामाटी में लाकर उसे जलाया गया। क्योंकि घटनास्थल पर किसी प्रकार के विरोध के कोई निशान नहीं मिले हैं।

साभाऱ: सोशल मीडिया

इसके अलावा बताया जा रहा है कि विनीता के गायब होने से पहले मुंसिफ और उसके बीच लड़ाई हुई थी। मुंसिफ ने बताया है कि वो 24 दिसंबर को जब अपने घर पहुँचा तो उसकी पत्नी अपने दोस्तों के साथ जुआ खेल रही थी। रात के 2 बजे दोनो पति-पत्नी के बीच इस मामले पर झगड़ा हुआ और करीब साढ़े 3 बजे वो घर से निकलकर मांडर चला गया। जब 25 दिसंबर को वो घर लौटा तो घर में ताला लगा हुआ था।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि इस घटना का उस समय पता चला जब सुबह ग्रामीण खेत की ओर जा रहे थे। तभी सड़क किनारे उन्हें युवती का अधजला शव दिखा। मृतिका के हाथ में टैटू के निशान बने हुए थे। प्रथम दृष्टया वह गर्भवती भी लग रही थी। ग्रामीणों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी।

सूचना मिलने पर एसडीपीओ आशीष कुमार महली और थाना प्रभारी जयदीप टोप्पो मौके पर पहुँचे। इसके बाद पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लिया और देर रात उपायुक्त के आदेश पर रिम्स में पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में युवती को जलाए जाने की बात सामने आई, लेकिन दुष्कर्म का इस रिपोर्ट में कोई खुलासा नहीं हुआ। अब इस मामले में फॉरेंसिक के अलावा डॉग स्क्वॉयड की भी मदद ली जा रही है। जाँच के लिए अलग टीमों का गठन किया गया। पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में एफएसएल जाँच कराएगी। जिसके लिए बिसरा सुरक्षित रखा गया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, खूँटी के एसपी आशुतोष शेखर ने इस संबंध में बताया कि संभवत: युवती की हत्या कहीं और कर तिरिल टोली के जंगल में शव लाकर फेंकी गई। इसके अलावा उन्होंने बताया कि आरोपितों ने पहचान मिटाने के लिए उसे प्लास्टिक में लपेटकर जला दिया। उन्होंने दावा किया कि शुक्रवार को मामले का खुलासा कर लिया जाएगा।

CAA के विरोध में चर्च का प्रोपेगेंडा: टोपी और हिजाब पहन लड़के-लड़कियों ने गाया कैरोल, थरूर ने किया शेयर

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर मुस्लिम समुदाय को भड़काकर कॉन्ग्रेसी-वामपंथी या देश विरोधी ताकतें दंगा कराने की कोशिश में लगातार हिंसा भड़का रही हैं। पुलिस ने कई लोगों को हिंसा करने और भड़काने के आरोप में गिरफ्तार भी किया है। इसी बीच केरल के एक चर्च में क्रिसमस कैरौल गाते हुए क़रीब 14 लड़कों ने मुस्लिम टोपी पहनी और लड़कियों ने हिजाब। और हाँ, इन्होंने किसी भ्रम में ऐसा नहीं किया है। चर्च ने जानबूझकर ऐसा करवाया है, जो यह बेहद खतरनाक है।

सोशल मीडिया में यह वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। प्रोपेगेंडा से भरे वीडियो वायरल करवाए भी जाते हैं। बता दें कि यह वीडियो केरल के पठानमथिट्टा के कोजेनचेरी के सेंट थॉमस मार थोमा चर्च में क्रिसमस समारोह का है।
इस वीडियो को “क्रिसमस: शरणार्थियों का उत्सव” कैप्शन के साथ सर्कुलेट किया जा रहा है।

इस वीडियो में, युवाओं को, मप्पीला पटु (mappila pattu) की धुन में क्रिसमस कैरोल गाते हुए देखा जा सकता है, जो कि मुस्लिम समुदाय द्वारा गाए जाने वाले पारम्परिक गीत है। इस वीडियो में लड़कियों को ताली बजाते हुए देखा जा सकता है।

The News Minute की ख़बर के अनुसार, चर्च के फ़ादर डैनियल टी फिलिप, सहायक विकर, बताते हैं कि क्रिसमस के उत्सव के दौरान युवाओं द्वारा पहनी गई मुस्लिम पोशाक CAA के ख़िलाफ़ आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त करने का ज़रिया है। बेहतर होता चर्च के फादर धर्म स्थान से धर्म की बात करते राजनीति की नहीं। हालाँकि धर्म-परिवर्तन में लिप्त रहने वाले चर्च से इस तरह की आदर्श बातें बेमानी ही है!

फादर डैनियल ने यह भी बताया कि क्रिसमस का सही अर्थ लोगों के बीच शांति का संदेश देना है। उन्होंने कहा, “इस के ज़रिए हमने यही दर्शाने का प्रयास किया। समुदायों या विभिन्न व्यक्तियों के बीच भेदभाव करने का कोई मतलब नहीं है, हम सभी के बीच शांति की ज़रूरत है।”

वायरल हुए इस वीडियो के पीछे के प्रोपेगेंडा को समझना है तो इसे किन हस्तियों द्वारा कैसे शेयर किया गया, ये देखें। इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने लिखा, “ओह यस- उनके कपड़ों को देखकर आप बता सकते हैं कि वो कौन हैं।”

दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी ने देश में CAA के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए टिप्पणी की थी कि CAA के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वालों को उनके द्वारा पहनी जाने वाली पोशाक से पहचाना जा सकता है।

रवीना टंडन, भारती सिंह और फ़राह खान पर केस: एक शब्द को लेकर ईसाई संगठन की शिक़ायत

‘सोनिया खुद इटली से आकर नागरिकता ले लीं, लेकिन सताए गए हिंदू-सिख भाइयों पर सवाल उठा रहीं’

वरुण ग्रोवर की ‘कागज नहीं दिखाएँगे’ को तगड़ा तमाचा, तहजीब के शहर लखनऊ से

वरुण ग्रोवर लेखक हैं। मुंबईया फिल्मों के लिए भी कुछ लिखा है इन्होंने। लेकिन सबसे बड़ी पहचान है इनका वामपंथी होना। फिलहाल ‘कागज नहीं दिखाएँगे’ नाम की एक कविता गाकर वामपंथी हृदय सम्राट बने बैठे हैं। कुछ दिनों में जब CAA या NRC का भ्रमजाल टूटेगा तो फिर इन्हें भी अन्य वामपंथियों की तरह फेंक दिया जाएगा।

वरुण ग्रोवर की कविता ‘कागज नहीं दिखाएँगे’ को काटती कई कविताएँ आईं। कुछ बहुत अच्छी भी, कुछ औसत। इन्हीं बहुत अच्छी कविताओं में से एक कविता है ऊर्वी सिंह की। यह लखनऊ के एक कॉलेज में अंग्रेज़ी की सहायक अध्यापिका हैं। सुनिए उनकी कविता, उन्हीं की आवाज में, जो तोड़ती है छद्म लिबरलों और स्वघोषित बौद्धिकता का भाव पाले बैठे लोगों का घमंड।

ऊर्वी सिंह की इस कविता का हमने ट्रांसक्रिप्ट भी लिखा है। नीचे पढ़ सकते हैं।

वो कागज नहीं दिखाएँगे
अपने स्टैंड-अप पे आप से आईडी कार्ड मंगवाएँगे
पर खुद कागज नहीं दिखाएँगे
वो डर को चारों ओर फैलाएँगे
वो चुनी हुई सरकार को गाली देकर अपनी दुकान चलाएँगे
वो कागज नहीं दिखाएँगे

वो जनता को हिंदू एक्सट्रिमिजम और माइनॉरिटी ऑप्रेशन की कपोल-कल्पित गाथाएँ सुनाएँगे
डेमोक्रेसी की ऐसी तैसी करने वाले डेमोक्रेसी समझाएँगे
वॉयलेंस, आगजनी और सोशल बुलिंग को ये सही ठहराएँगे
जाहिर सी बात है ये कागज नहीं दिखाएँगे

क्वासी इंटेलेक्चुअलिजम के मारे कागज नहीं दिखाएँगे
ये घर में बैठे-बैठे आर्म चेयर एक्टिविस्ट बने रह जाएँगे
इनकी कविता गाते-गाते लाठियाँ आप और हम खाएँगे
फिर आपकी मेरी चोटों पे ये और कविताएँ कह जाएँगे
ब्रो… ये कागज नहीं दिखाएँगे

ये एयरपोर्ट पर जाएँगे
पासपोर्ट या बोर्डिंग पास नहीं दिखाएँगे
ये एयरपोर्ट पर जाएँगे
पासपोर्ट या बोर्डिंग पास नहीं दिखाएँगे
ये दर्जी को सिलाई की रिसीट दिए बिना ही कपड़ा घर ले आएँगे
वो मेट्रो स्टेशन पे बिना पास चढ़ जाएँगे
डू यू नो व्हाय? बिकाउज ब्रो… वो कागज नहीं दिखाएँगे

इस शहर में ताजिया पे हिंदू बालकनी से फूल गिराते हैं
इस शहर में ऋतु का फेवरिट कुर्ता सलीम मियाँ के यहाँ सिलवाते हैं
रिचर्ड, रिता और रिजवान मिलकर क्रिसमस पे ‘गंजिंग’ करके आते हैं
वहाँ ये बताएँगे कि हम कागज नहीं दिखाएँगे

खैर… इससे पहले कि आपके दिमाग की नसें लगे फटने
अमाँ मियाँ, इनसे पूछो – तुमको कागज दिखाने को कहा आखिर किसने?

ऊर्वी सिंह की कविता फेसबुक पर शेयर करने वाले शख्स ने जो इनके बारे में लिखा है, वो भी मजेदार है, पढ़ने लायक है।

यह मोहतरमा Urvi Singh जी हैं। लखनऊ की शान हैं, और नाज़ुक लखनवी तहज़ीब और अवध की बेलौस ठसक दोनों अपनी ज़बान के सिरे पर अद्भुत संतुलन के साथ एक साथ टिकाए रखती हैं। ग़ज़ब की उर्दू, शुद्ध हिन्दी और धड़ल्ले की अवधी में तो पारंगत हैं ही, लेकिन लखनऊ के मशहूर सेंट ऐग्नेस गर्ल्स कॉन्वेंट की प्रतिभाशाली छात्रा रही होने के कारण अंग्रेज़ी पर ऐसी क़ातिलाना पकड़ रखती हैं कि जब चाहती हैं हमें ईर्ष्या से भर देती हैं। फ़िलहाल लखनऊ के एक कॉलेज में अंग्रेज़ी की सहायक अध्यापिका हैं।


हमेशा फ्रंट फुट पर आकर खेलती हैं, और पहली ही बॉल पर सिक्स जड़ कर उसे ‘नो बॉल’ क़रार दिलवाती हैं, फिर दोबारा उसी बॉल को चार रन के लिए बाउंड्री पार भेजने के बाद उसे फिर से ‘वाइड बॉल’ घोषित करवाती हैं, और अंततः उसी पहली ही बॉल पर 3 रन बटोरती हैं। इस तरह हर एक बॉल पर 15 रन लेना इनका बैटिंग ऐवरेज है।

‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ वाले वरुण के शो में बिना कागज़ दिखाए एंट्री नहीं, चाहिए वैध आईडी प्रूफ

डाक्यूमेंट्स जला दो पर सरकार को मत दिखाओ, रोज़ 10 मुस्लिमों को बताओ: हिंसक प्रदर्शन में ‘ISIS का हाथ’

केरल में डिटेंशन सेंटर बनाने के लिए तलाशी जा रही है इमारत: सामाजिक न्याय विभाग को सौंपी गई है जिम्मेदारी

केरल में विदेशी क़ैदियों के लिए एक ऐसी इमारत की खोज की जा रही है जिसमें डिटेंशन सेंटर (हिरासत केंद्र) स्थापित किया जा सके। बता दें कि इस तरह के डिटेंशन सेंटर को लेकर उपजा विवाद देशव्यापी स्तर पर क़ायम है। केरल के सामाजिक न्याय विभाग (DSJ) को डिटेंशन सेंटर में सुविधा स्थापित करने का काम सौंपा गया है। फ़िलहाल, विदेशियों से जुड़ा सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है, जिनमें ऐसे विदेशी शामिल हैं जिन्हें या तो यहाँ दोषी ठहराया गया हो या जिन्हें विभिन्न अपराधों के तहत उनके प्रत्यर्पण का इंतज़ार है।

ख़बर के अनुसार, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि विभाग आवश्यकता का अंदाजा लगाकर ही सुविधा के लिए किसी भवन (इमारत) की खोज कर सकता है। वर्तमान में विभाग के पास कोई भवन उपलब्ध नहीं है इसलिए या तो नए भवनों को किराए पर लेना होगा या उनका निर्माण करना होगा और इसके लिए क़ैदियों की संख्या का पता होना भी ज़रुरी है।

नए डिटेंशन सेंटर की सुविधाएँ: 

  • डिटेंशन सेंटर में सुविधा स्थापित करने का काम सामाजिक न्याय विभाग को सौंपा गया है।
  • इस विभाग को विदेशी क़ैदियों का विवरण राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) से माँगना होगा।
  • यह डिटेंशन सेंटर उन लोगों का आवास होगा, जिन्होंने अवैध रूप से देश में प्रवेश किया था।
  • यह उन विदेशियों का भी आवास होगा, जिनके वीज़ा और पासपोर्ट की अवधि समाप्त हो गई थी।
  • इसमें विदेशी मूल के विचाराधीन क़ैदी भी शामिल रहेंगे।

विदेशी अपराधी जो यहाँ जेल की अवधि पूरी कर चुके हैं और निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं उन्हें भी डिटेंशन सेंटर की सुविधाएँ मिलेंगी।

विभाग ने इस साल जून से राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) को असफल रूप से पत्र लिखकर विदेशियों की संख्या के लिए उपयुक्त इमारतों की पहचान करने के लिए कहा था। सरकार के सूत्रों ने कहा कि इस साल 26 नवंबर को डेटा माँगने वाले नवीनतम रिमाइंडर को SCRB को भेजा था।

असम और कुछ अन्य राज्यों में हिरासत केंद्रों की स्थापना की ख़बर ने नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) और राष्ट्रीय रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन्स (NRC) के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन के दौरान गंभीर आलोचनाओं का सामना किया था।

केंद्र ने इस साल की शुरुआत में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को “विभिन्न राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों में नज़रबंदी/ होल्डिंग केंद्रों की स्थापना के लिए लिखा था, जो अवैध अप्रवासियों/ विदेशी नागरिकों को निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे थे।” राज्यसभा की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसने जनवरी में “एक मॉडल डिटेंशन सेंटर मैनुअल भी तैयार किया और सभी राज्य सरकारों/ केंद्रशासित प्रशासनों को उसी के अनुसार प्रसारित किया।”

गृह विभाग ने DSJ को जेल परिसर और पुलिस विभाग के बाहर उपयुक्त सुविधा स्थापित करने के लिए कहा है। यह भी बताया गया कि सुविधा के प्रबंध के लिए एक अलग डिस्पेंसेशन बनाया जाना चाहिए क्योंकि पुलिस विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी है।

यह डिटेंशन सेंटर उन लोगों के लिए आवास के रूप में होगा जिन्होंने अवैध रूप से देश में प्रवेश किया और इनमें वे विदेशी भी शामिल हैं जिनके वीज़ा और पासपोर्ट की समय-सीमा समाप्त हो गई थी। विदेशी मूल के अंडर-ट्रायल क़ैदियों और जो लोग यहाँ जेल की अवधि पूरी कर चुके हैं और निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उन्हें भी इस सुविधा में स्थानांतरित किया जा सकता है।

अधिकारी ने बताया कि गृह विभाग को डिटेंशन सेंटर स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। लेकिन, राज्य सरकार के पास उपलब्ध धन का इस्तेमाल इस उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि SCRB के उन लोगों से जब सम्पर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि इसके डोजियर में क़ैद विदेशियों का कोई डेटा उपलब्ध नहीं था।

निर्दोषों को नहीं छुएँगे, लेकिन हिंसा में शामिल ‘दंगाइयों’ को नहीं छोड़ेंगे: UP DGP

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुई हिंसा के बाद अब उत्तर प्रदेश पुलिस शुक्रवार को हाई अलर्ट पर है। उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक ओपी सिंह पुलिस मुख्यालय से हर जिले के माहौल की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। और इसी बीच उन्होंने उपद्रवियों को अल्टीमेटम देने के साथ ही निर्दोषों को आश्वासन दिया है कि वो उन्हें छुएँगे भी नहीं।

गौरतलब है कि बीते कुछ हफ्तों के हालात देखकर आज शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद उत्तरप्रदेश में विरोध प्रदर्शन की आशंका जताई जा रही थी। जिसके मद्देनजर पुलिस ने वहाँ की सुरक्षा बढ़ा दी। साथ ही प्रदेश के 21 जिलों में इंटरनेट को बंद कर दिया गया। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था बनी हुई है।

डीजीपी ओपी सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हम निर्दोषों को नहीं छू रहे हैं, लेकिन हम ऐसे लोगों को नहीं छोड़ेंगे जो हिंसा में शामिल थे। यही कारण है हमने कई संगठनों के सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है, चाहे वह पीएफआई हो या कोई अन्य राजनीतिक दल।”

डीजीपी ओपी सिंह ने प्रदेश में हिंसा के दौरान पुलिस की स्थिति बयान करते हुए बताया, “हिंसा के दौरान हमने पत्थर खाए। हमारे 263 पुलिसकर्मी घायल हैं। कानपुर में हमारे जवान पर पेट्रोल बम फेंका गया, जिसमें उसका सिर फट गया है। जो भी आरोप लग रहे हैं, उसकी जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। स्थानीय प्रशासन को मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। निर्दोष लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। वहीं दोषी बख्शे नहीं जाएँगे।”

इसके अलावा बता दें उत्तर प्रदेश प्रशासन सक्रियता से उन लोगों की पहचान करने में प्रयासरत है, जिन्होंने प्रदेश में हिंसा को भड़काया। साथ ही हिंसा में कई सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया। यूपी पुलिस उपद्रवियों की पहचान कर उनसे नुकसान की भरपाई करने में जुटी है। इसको लेकर ओपी सिंह ने कहा, “किसी भी सरकारी चीज में जनता का पैसा लगा होता है। करदाताओं के पैसे से खरीदी गई चीज के नुकसान की भरपाई के लिए अब आरोपियों से वसूली की जाएगी। इसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जिसको लोगों ने भी सराहा है।”

प्राप्त जानकारी के अनुसार उपद्रवियों को पकड़ने के लिए प्रदेश के हिंसाग्रस्त जिलों की पुलिस ने ट्विटर से लेकर चौक चौराहों तक पर दंगाईयों की तस्वीरों को टांग दिया है। पहचान बताने वालों को इनाम देने का ऐलान है। साथ ही जिनकी पहचान हो चुकी है उनके घरों पर नोटिस भेजा जाने लगा है। नोटिस में यह पूछा जा रहा है कि आप हिंसक प्रदर्शन में शामिल थे, उपद्रव और तोड़फोड़ में आप पहचाने गए हैं क्यों ना आपके खिलाफ कार्रवाई की जाए?

‘आप नंगा होके मुझे दिखाते थे… गलत-गलत किस्म की हरकतें करते थे’ – Pak के ‘झटका’ मंत्री का Video Viral

पाकिस्तान में भी टिकटॉक बहुत फेमस है। और वहाँ की टिकटॉक स्टार हैं हरीम शाह। हमेशा चर्चा में रहती हैं। एक बार फिर हैं। साथ में वहाँ के रेल मंत्री शेख रशीद को भी लपेट लिया है। दोनों का 15 सेकंड का एक वीडियो वायरल हो गया है। लोग मजे ले रहे हैं।

पाकिस्तानी टिकटॉक स्टार हरीम शाह ने दरअसल एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें वो रेल मंत्री शेख रशीद से बात कर रही हैं। वीडियो में हरीम शाह मंत्री से कहती हैं, “अच्छा मेरी बात सुनें। मैंने आज तक आपका कोई राज फाश नहीं किया। फिर आपने मुझसे बातचीत बंद क्यों कर दी?” इसके जवाब में मंत्री शेख रशीद कहते हैं, “नहीं कुछ नहीं जी, अल्लाह मालिक है।”

यहाँ तक बात बड़े रोमांटिक टोन में हो रही थी। लेकिन इसके बाद अचानक से हरीम शाह ने अपना टोन कड़ा कर लिया और रेल मंत्री को सुनाया, “क्या अल्लाह मालिक है, आप नंगा होके मुझे दिखाते थे। वीडियो पे गलत-गलत किस्म की हरकतें करते थे।” इतना सुनते ही रेल मंत्री शेख रशीद के तो जैसे तोते उड़ गए। उन्होंने तुरंत फोन डिस्कनेक्ट कर दिया।

आपको बता दें कि टिकटॉक स्टार हरीम शाह अक्टूबर में भी एक बार चर्चा में आई थीं। तब उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय में घुसकर वीडियो बनाया था। और तो और, उन्होंने उस कुर्सी पर बैठकर टिकटॉक वीडियो बनाया था, जिस पर खुद प्रधानमंत्री इमरान खान बैठते हैं। तब पाकिस्तान की इंटरनेशनल बेइज्जती हुई थी।

दूसरी ओर पाकिस्तानी रेल मंत्री शेख रशीद भी कम बड़े ‘चर्चावान’ व्यक्ति नहीं हैं। यह कभी खुद को भारत के मुस्लिमों की आवाज़ बताते हैं और सीमा पर लड़ने की धमकी देते हैं। एक बार लगभग दिमागी संतुलन खोकर परमाणु धमकी भी दे डाली। यह और बात है कि बेचारे को प्रधानमंत्री मोदी का नाम लेते हैं बिजली का झटका भी लग चुका है।

मजेदार बात यह है कि इससे पहले रशीद खान और हरीम शाह की सेल्फी काफी चर्चा में रही थी। पाकिस्तानी मीडिया की बात करें तो कुछ का यह कयास भी है कि मंत्रीजी का कोई गहरा राज हरीम के हाथ लग गया है, इसलिए वो इतने ‘अकड़’ में बात कर रही हैं।

Pak के ‘बिजली झटका’ मंत्री को कॉलर पकड़ शख्स ने माँगे अपने 22 लाख: देखें Video

‘इस बार युद्ध में 4-6 दिन तोपें नहीं चलेंगी, सीधे परमाणु जंग होगी’ – Pak के ‘झटका मंत्री’

‘मैं भारत के मुस्लिमों की आवाज़ हूँ, सीमा पर ख़ुद लड़ने जाऊँगा’

आग लगाने वाले दंगाई कट्टरपंथियों को जायज ठहराने में नाकाम राहुल को गरीबों की आई याद

एक तरफ देश जहाँ कॉन्ग्रेसी और वामपंथी इकोसिस्टम का शिकार होकर CAA के विरोध में सड़कों पर हिंसा कर रही है। जिसे जायज ठहराने के लिए वामपंथी गिरोह ने उसे NRC के विरोध से जोड़ दिया जो कि अभी चर्चा में भी नहीं है। मामला शांत होता देख अब ये पूरा इकोसिस्टम एनपीआर को लेकर भी तरह-तरह की अफवाह फ़ैलाने में सक्रीय हो गया है। ऐसे में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी पर मुस्लिमों और वामपंथी-कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम द्वारा जारी बवाल के बीच कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने छत्तीसगढ़ से सरकार पर निशाना साधा है।

राहुल गाँधी ने कहा कि सीएए और एनआरसी गरीबों पर हमला है इतना ही नहीं बल्कि इसे वह ‘नागरिकता का टैक्स’ भी बता गए। राहुल का कहना है कि देश का वक्त बर्बाद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले भारत और चीन को पूरी दुनिया एक रफ्तार से आगे बढ़ते हुए देखती है लेकिन आज भारत में सिर्फ हिंसा दिखाई दे रही है। लेकिन इस हिंसा में कौन शामिल है ये राहुल गाँधी ने नहीं बताया।

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में शामिल होने गए राहुल गाँधी ने कहा, “पहले दुनिया कहा करती थी कि भारत और चीन एक रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं लेकिन अब दुनिया भारत में हिंसा देख रही है। सड़कों पर महिलाएँ सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं और बेरोजगारी बढ़ रही है।”

राहुल गाँधी ने सीएए और एनआरसी पर बोलते हुए अचानक से गरीबी को याद किया और कहा, “एनसीआर हो या एनपीआर, दोनों गरीबों पर टैक्स हैं। नोटबंदी गरीबों पर टैक्स था। यह पूरी तरह गरीबों पर आक्रमण है। लोगों को नोटबंदी की तरह ही लाइन पर लगाया जाएगा। देश का समय बर्बाद किया जा रहा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था से ध्यान हटाने के लिए मोदी सरकार नागरिकता कानून लेकर आई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। मोदी जी का यह कानून गरीब लोगों पर हमला है, अब गरीब पूछ रहा है कि हमें नौकरी कैसे मिलेगी?

यहाँ सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे है कि जैसे पहले सभी लोग नौकरी में थे और उनकी नौकरी अचानक से छीन गई। लोगों ने राहुल को याद भी दिलाया कि आपकी ही सरकार पहले एनपीआर आदि पर पैसे खर्च कर चुकी है। राहुल गाँधी के इस बयान को सोशल मीडिया पर मुस्लिमों की हिंसा से ध्यान भटकाने और उसे जायज ठहराने के लिए एक बिना सोचे-समझे बयान के रूप में भी देखा जा रहा है।

बंगाल के बाद अब गुजरात में हुआ डॉक्टर पर हमला, रुखसार पठान के 7 परिजनों पर मामला दर्ज

अभी कुछ ही महीने बीते हैं जब पश्चिम बंगाल में मोहम्मद शाहिद नामक बुजुर्ग की मौत होने के बाद उसके परिजनों ने डॉक्टर परिबाह मुखोपाध्याय पर घातक हमला किया था और करीब 200 लोगों की भीड़ ने अस्पताल में उत्पात मचाया था। इस घटना के बाद देश भर के तमाम अस्पतालों से डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग उठी थी। जिसके कुछ दिन बाद उन्हें केवल ‘आश्वासन’ देकर शांत करवा दिया गया था। लेकिन अब 10 जून को हुई उस घटना को गुजरात में फिर दोहराया गया है। जहाँ फिर एक मुस्लिम महिला की मौत पर एक डॉक्टर को अगवा कर उसके साथ बदसलूकी करने का मामला सामने आया है।

दरअसल, गुजरात के एक निजी अस्पताल में बुधवार की रात रुखसार पठान नामक महिला की प्रसव के दौरान मौत हुई। जिसके बाद महिला के 7 परिजनों ने 35 वर्षीय डॉक्टर का अपहरण कर उसपर हमला किया। डॉक्टर का नाम कल्पेश नाकूम हैं। जो अस्पताल में बतौर एनेस्थिसियॉलॉजिस्ट मेडिकल टीम का हिस्सा हैं और जिन्हें बुधवार की रात अस्पताल में रुखसार पठान की डिलीवरी करवाने का काम दिया गया था। लेकिन डिलीवरी के दौरान अधिक खून बह जाने की वजह से उसकी मौत हो गई। जिसके बाद उसके परिजनों ने अस्पताल में आकर हड़कंप मचाया और डॉक्टर को उठाकर एक सुनसान इलाके में ले गए, जहाँ उसपर जबरन दबाव बनाया गया कि वे स्वीकारें कि उन्होंने रुखसार के ऑपरेशन के दौरान लापरवाही बरती। इसलिए उस महिला की मौत हुई।

डॉक्टर नाकूम ने महिला के परिजनों पर ये सारे आरोप लगाते हुए उनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाई। जिसमें उन्होंने अपनी सफाई देते हुए कहा “अपनी डॉक्टर प्रैक्टिस के अनुसार, मैनें मरीज को रीढ़ की हड्डी में एनेस्थेसिया दिया, जिसके बाद मुख्य सर्जन ने महिला का ऑपरेशन शुरू किया। महिला ने एक लड़की को जन्म दिया, लेकिन ऑपरेशन के बाद उसका खून ज्यादा बहने लगा। महिला की खराब हालत देखते हुए 108 नंबर पर कॉल करके एंबुलेंस बुलवाई गई और उसे वीएस अस्पताल ले जाया गया। इस बीच मैंने नवकारी अस्पताल में ठहरकर कागजी काम करने का निर्णय लिया। लेकिन करीब 9 बजे मैंने देखा कि कुछ अस्पताल के रिसेप्शन पर आकर हड़कंप मचा रहे थे।”

इसके बाद अपनी शिकायत में डॉक्टर ने बताया कि जब महिला के परिजनों ने उन्हें वहाँ देखा तो उनपर हमला कर दिया और खींचते हुए अस्पताल के बाहर मुख्य गेट पर ले गए। बाद में जमलपुर ब्रिज के पास एक सुनसान जगह ले जाया गया और दबाव बनाया गया कि वे स्वीकारें कि उन्होंने सर्जरी के दौरान लापरवाही की। जिसके कारण उस महिला की मौत हुई।

डॉक्टर के मुताबिक उन लोगों ने इस बीच उनकी 3 वीडियो बनाई और बाद में उन्हें नारोल ड्रॉप कर दिया। जिसके बाद वे शिकायत करने थाने पहुँचे और आपबीती पुलिस को बताई।

शिकायत सुनने के तुरंत बाद पुलिस ने मामले पर संज्ञान लिया और अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 323 और 325 के तहत अपहरण एवं हमले का मामला दर्ज किया।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ईलीस ब्रिज थाने की एक पुलिस अधिकारी ने इस मामले के संबंध में जानकारी देते हुए बताया है कि अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई हैं। डॉक्टर के मुताबिक 7 लोगों पूरे वाकये में शामिल थे, जिनकी पहचान होना बाकी है।

हिन्दू होने के कारण दानिश के साथ पाक में हुआ भेदभाव: इमरान को पत्र लिखकर कहा- हालत बहुत ख़राब है

पाकिस्तान के पूर्व स्पिनर दानिश कनेरिया को लेकर किए गए पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ शोएब अख़्तर के ख़ुलासे ने पाकिस्तान क्रिकेट में भूचाल ला दिया है। शोएब ने एक चैट शो में दावा किया था कि पाकिस्तान की टीम के कुछ खिलाड़ी हिन्दू खिलाड़ी दानिश कनेरिया के साथ भेदभाव करते थे और उनके साथ खाना तक नहीं खाते थे। अब इस मामले पर दानिश कनेरिया ने भी चुप्पी तोड़ दी है। उन्होंने इसे लेकर बड़ा ख़ुलासा करने का मन बना लिया है। दानिश का कहना है कि अब वो उन खिलाड़ियों के नाम बताएँगे, जिन्होंने उनके साथ हिन्दू होने की वजह से भेदभाव किया था। 

इसके अलावा, दानिश कनेरिया ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, पूर्व क्रिकेटरों समेत अन्य देशों से भी मदद की गुहार भी लगाई है। उन्होंने कहा, “मेरी हालत बहुत ख़राब है और मैंने पाकिस्तान और दुनियाभर में कई लोगों से मदद की गुहार लगाई है लेकिन अभी तक मुझे कोई मदद नहीं मिली है। हालाँकि, पाकिस्तान में कई क्रिकेटरों की समस्याओं को सुलझाया गया है। मैंने एक क्रिकेटर के नाते पाकिस्तान के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और मुझे इसका गर्व है। मुझे लगता है कि इस वक्त पाकिस्तान के लोग मेरी मदद करेंगे।”

दरअसल, इंग्लिश क्लब एसेक्स की तरफ़ से खेलने के दौरान दानिश कनेरिया पर स्पॉट फिक्सिंग का आरोप सिद्ध हुआ था। कनेरिया का कहना है कि लंबे समय से वो पाकिस्तान और दुनियाभर के लोगों से सम्पर्क कर अपनी समस्याओं का समाधान करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई मदद नहीं मिल सकी है, जबकि पाकिस्तान के अन्य कई खिलाड़ियों के मामले सुलझ गए हैं। 

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शोएब अख़्तर ने एक चैट सो के दौरान ख़ुलासा किया था कि दानिश कनेरिया हिन्दू थे इसलिए पाकिस्तानी टीम में उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता था। चैट शो में पूर्व क्रिकेटरों असीम कमाल और राशिद लतीफ के साथ शोएब अख्तर ने कई खुलासे किए।

इसी दौरान राशिद लतीफ ने यूसुफ योहाना का मामला उठाया और कहा कि यूसुफ को भी बहुत तंग किया गया, लेकिन वो भी बेमिसाल खिलाड़ी ‌थे। शोएब अख्तर ने यूसुफ के बारे में बताते हुए कहा था, “यूसुफ के नाम 12 हजार रन दर्ज हैं। मगर, हमने कभी उनका सम्मान नहीं किया। दो-तीन खिलाड़ियों से मेरी लड़ाई भी हुई। मैंने कहा कि अगर कोई हिन्दू है, तो भी वो खेलेगा और फिर उसी हिन्दू ने हमें टेस्ट सीरीज जिताई।”

एक सवाल के जवाब में शोएब अख्तर ने बताया था, “स्टीव वॉ ने एंड्रयू साइमंड्स को लगातार मौके दिए। वो दस साल तक क्रिकेट खेले। एबी डिविलियर्स ने क्विंटन डि कॉक को रिहेबिलिटेशन सेंटर भेजा, उन्हें तैयार किया और आज देखिए वो क्या कर रहे हैं? हमारे यहाँ तो ड्रेसिंग रूम में ही खिलाड़ियों को खराब कर दिया जाता है।”

‘हिंदू दानिश कनेरिया हमारे साथ क्यों खाता है?’ – Pak क्रिकेट टीम का घिनौना सवाल और अख्तर का जवाब

‘पाकिस्तान में हमने जो तकलीफें झेली हैं, अगर आप उससे गुजरे होते तो कभी प्रदर्शन नहीं करते’

‘अगर पाकिस्तान के मुस्लिम भारत आकर रहेंगे, तो विभाजन का क्या मतलब, पूरे को हिन्दुस्तान घोषित कर दो’