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‘शायद आप मुझे आखिरी बार ज़िंदा देख रहे हैं’: अमेरिका के सामने गिड़गिड़ाए यूक्रेन के राष्ट्रपति – हमारा समर्थन कीजिए, पुतिन करवा सकते हैं मेरी हत्या

रूस के साथ जारी महायुद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोडिमिर जेलेंस्की लगातार दूसरे देशों से हस्तक्षेप करने की गुहार लगा रहे हैं। उन्हें डर है कि व्लादिमीर पुतिन उनकी हत्या करवा देंगे। इसी क्रम में उन्होंने शनिवार (5 फरवरी 2022) को जूम कॉल जरिए अमेरिकी सांसदों को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि हो सकता है वो उन्हें आखिरी बार देख रहे हों। ऐसा इसलिए क्योंकि वो लगातार अमेरिका से रूस के खिलाफ युद्ध में सपोर्ट की माँग कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, युद्धग्रस्त यूक्रेन के राष्ट्रपति ने जूम कॉल पर करीब 300 से अधिक अमेरिकी सीनेटर्स के साथ सीधी बात की। उन्होंने रूस के खिलाफ युद्ध में अमेरिका का समर्थन माँगा। ज़ेलेंस्की ने यूक्रेन को नो फ्लाई जोन भी घोषित करने को लेकर बात की। उन्होंने अमेरिकी सीनेटरों को जपोरिजिया न्यूक्लियर रिएक्टर और चेर्नोबिल रिएक्टर के बारे में बताते हुए चेताया कि यह युद्ध पूरे यूरोप को अपनी चपेट में ले सकता है। गौरतलब है कि रूस ने इन्हीं दो प्लांटों पर कब्जा कर लिया है।

पोलिटिको के अनुसार, जेलेंस्की ने ट्रांसलेटर्स के जरिए कहा कि यह यूरोप की समस्या बन जाएगी।

अमेरिकियों ने ही जेलेंस्की की सुरक्षा को खतरे में डाला

अपनी सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए व्लोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी सीनेटरों इसे पब्लिक न करने को लेकर चेताया था, बावजूद इसके दो अमेरिकी सीनेटर सेंस मार्को रुबियो (आर-एफएल) और स्टीव डाइन्स (आर-एमटी) ने जूम कॉल का स्क्रीनशॉट शेयर कर दिया। इसके बाद इन दोनों की कड़ी आलोचना हो रही है। प्रतिनिधि डीन फिलिप्स (डी-एमएन) ने दोनों सीनेटरों पर भयानक लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।

यूरोपीय यूनियन से भी कही यही बात

अमेरिकी सीनेटरों से पहले 25 फरवरी 2022 को यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने एक कॉन्फ्रेंस कॉल पर यूरोपीय नेताओं से मदद का आह्वान करते हुए कहा था कि यह ‘आखिरी बार हो सकता है कि आप मुझे जीवित देखें।’ क्योंकि रूसी सेना लगातार यूक्रेन पर ताबड़तोड़ हमले कर रही है।

इजरायल की वाल्ला न्यूज ने एक डिप्लोमैट के हवाले से रिपोर्ट किया कि स्वीडन के प्रधानमंत्री ने भी नेताओं से कहा, “यह आखिरी बार हो सकता है कि हम उन्हें देखेंगे।”

VISA-MasterCard के खतरे को PM मोदी ने पहले ही भाँप लिया था, RuPay का प्रयोग कर देशसेवा के लिए तभी किया था प्रेरित

यूक्रेन पर रूस के हमले (Russia-Ukraine War) के बाद रूस पर तरह-तरह प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, लेकिन इन सबमें महत्वपूर्ण आर्थिक प्रतिबंध है। अमेरिका और पश्चिमी देश (America and European Countries) रूस की अर्थव्यवस्था को नुकसान करने की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि रूस को घुटने पर लाया जा सके। इन प्रतिबंधों में वित्त कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई हैं। जो कंपनियाँ कल तक प्रतिस्पर्धा के नाम व्यवसाय कर रही थीं, वे अब युद्ध का हिस्सा बन गई हैं। हालाँकि, समय रहते मोदी सरकार ने कदम उठाया लिया और स्वदेशी RuPay को प्रमोट कर भारत के लिए एक वित्तीय कवच तैयार किया है।

रूस को रोकने के लिए अमेरिका से यूक्रेन के राष्ट्रपति वलादोमिर जेलेंस्की की फरियाद के बाद अमेरिका की दो दिग्गज वित्त कंपनियों- वीजा कार्ड (VISA) और मास्टरकार्ड (MasterCard) ने रूस में अपने ऑपरेशन को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। इन दोनों कंपनियों ने घोषणा की है कि रूस में जारी किए गए ये कार्ड विदेशों में और विदेशों में जारी किए गए कार्ड रूस में काम नहीं करेंगे। सीधे शब्दों में कहें तो रूसी बैंकों द्वारा लोगों को वीजा और मास्टरकार्ड के जारी किए गए डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड अब काम नहीं करेंगे।

पेमेंट कंपनियों (Payment Companies) की इस घोषणा के बाद रूस की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। इससे ना सिर्फ खुदरा लेनदेन, बल्कि रूसी कंपनियों के व्यवासायिक कामकाज पर भी प्रभाव पड़ेगा। मास्टरकार्ड रूस में पिछले 25 सालों से ऑपरेट कर रहा है, जबकि वीसा भी लगभग इतने समय से वहाँ प्रमुख पेमेंट गेटवे है। इस समय रूस में 30 करोड़ से अधिक क्रेडिट और डेबिट कार्ड प्रयोग में हैं, जिनमें लगभग 21 करोड़ 60 लाख कार्ड इन्हीं दोनों कंपनियों के हैं। ये दोनों कंपनियाँ रूस में होने वाले खुदरा लेनदेन का 30 से 60% नियंत्रित करती हैं। दोनों ही कंपनियों को अपने नेट रेवेन्यू का करीब 4% रूस से जुड़े व्यवसाय से हासिल होता है।

इन दोनों कंपनियों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में दखल और किसी देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2020 में वीजा द्वारा विश्व भर में 188 अरब लेनदेन किया गया, जबकि मास्टरकार्ड द्वारा 113 अरब बार। इस तरह ये दोनों कंपनियाँ बड़ी से बड़ी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं।

जब पीएम मोदी ने भाँप ली थी वर्तमान स्थिति

आज के उदारीकरण और खुले बाजार में वित्त को नियंत्रित करने की शक्ति और उसके प्रभाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने स्वदेशी पेमेंट सिस्टम रुपे (RuPay) को बढ़ावा देने का निर्णय लिया था। रूस में इन दोनों कंपनियों द्वारा अपनाई गई नीति को पीएम मोदी ने बहुत पहले ही भाँप लिया था। उन्होंने 2018 में RuPay के इस्तेमाल को राष्ट्रवाद से जोड़ते हुए कहा था, “हर व्यक्ति देश की रखवाली करने के लिए सीमा पर नहीं जा सकता, लेकिन हम देश की सेवा के लिए RuPay का प्रयोग कर सकते हैं।”

इसके बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि भारतीय बैंकों को सिर्फ RuPay कार्ड को ही प्रमोट करना चाहिए। उन्होंने कहा था, “जब रुपे वैश्विक हो रहा है तो मुझे नहीं लगता कि इसके अलावा आपको (बैंकों को) किसी अन्य कार्ड को जारी करने की जरूरत है।” उन्होंने कहा था कि सरकार ने भी इसे प्रमोट करने के लिए सार्वजनिक लेनदेनों में इसका प्रयोग कर शुरू कर दी है। दरअसल, RuPay को प्रमोट करना मोदी सरकार की फाइनेंशियल इन्क्लूशन का हिस्सा था।

पिछले साल दिसंबर में मोदी सरकार ने घरेलू RuPay डेबिट कार्ड और कम मूल्य वाले डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए 13 अरब रुपए की योजना को मंजूरी दी थी। इसके तहत छोटे-छोटे लेनदेन को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना शामिल था। इसमें प्रधानमंत्री द्वारा साल 2014 में शुरू की गई महत्वाकांक्षी परियोजना जनधन योजना के लाभार्थियों को भी डिजिटल पेमेंट का फायदा पहुँचाना शामिल था। इसके साथ ही इस योजना के लाभार्थियों को RuPay कार्ड ही जारी किए गए। इसके तहत अकेले 31.74 करोड़ डेबिट कार्ड जारी किए गए।

पीएम मोदी के प्रमोशन के बाद वीजा और मास्टरकार्ड के लिए चुनौती खड़ी हो गई। नवंबर 2020 तक भारत के 95.2 करोड़ डेबिट और क्रेडिट कार्ड में RuPay की हिस्सेदारी बढ़कर 63% पहुँचकर लगभग 60 करोड़ हो गई। यह 2017 से 15% की बढ़ोत्तरी थी। अब सरकार का RuPay को प्रमोट करने का प्रयास सफल होता दिख रहा है और वीजा और मास्टरकार्ड पीछे होते दिख रहे हैं। हालाँकि, डेबिट कार्ड सिगमेंट में RuPay कार्ड की हिस्सेदारी बढ़ी है, लेकिन क्रेडिट कार्ड सिगमेंट में इसकी हिस्सेदारी अभी भी बेहद कम सिर्फ 20 प्रतिशत यानी 9.7 लाख (नवंबर 2020 तक) है। आज RuPay को 200 से अधिक देशों में स्वीकार किया जाता है।

जब भारत के स्वदेशी पेमेंट गेटवे RuPay का दोनों ने किया था विरोध

भारत सरकार के इस प्रमोशन के बाद वीजा और मास्टरकार्ड ने विरोध किया था और कहा था कि इससे भारत में उनके हित प्रभावित होंगे। दोनों कंपनियों ने US Trade Representatives (USTR) के समक्ष यह मुद्दा उठाया। इनका कहना था कि पीएम मोदी स्वदेशी पेमेंट सिस्टम को प्रमोट करने के लिए राष्ट्रवाद का सहारा ले रहे हैं।

भारतीय बाजार पर अपना दबदबा कायम रखने रखने के लिए दोनों कंपनियों के कई तर्क दिए थे। यहाँ तक बाजार और प्रतिस्पर्धा का हवाला दिया था। वीजा ने कहा कि RuPay उसके लिए समस्या बन रहा है। उसने कहा था कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए होनी चाहिए। मास्टरकार्ड कुछ साल पहले कहा था, “यह बहुत अच्छा है कि सरकार बाजार खोल रही है, लेकिन बाजार को प्रतिस्पर्धा से प्रेरित होना चाहिए, न कि जनादेश से प्रेरित प्रतिस्पर्धा से। अगर प्रतियोगी नियामक बन जाता है तो यह चिंता की बात है।”

क्या है RuPay

भारत ने महसूस किया कि वैश्विक पेमेंट कंपनियाँ ना सिर्फ भारत से मुनाफा कमा रही हैं, बल्कि भारतीय यूजर का संवेदनशील डेटा भी चुरा रही हैं। वे इन डेटा का इस्तेमाल किसी भी रूप कर सकती हैं। इसलिए साल 2012 में National Payment Corporation of India (NPCI) ने भारत का स्वनिर्मित पेमेंट गेटवे RuPay कार्ड को लॉन्च किया। NPCI एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्रमोट किया था और अब कई वित्तीय संस्थाओं के स्वामित्व के अधीन है।

114/6 पर फँस गया था भारत, तब इस जोड़ी ने मचाया धूम-धड़ाका: अधूरा रह गया विश्व कप में Pak की पहली जीत का सपना

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ‘ICC महिला क्रिकेट विश्व कप 2022’ के पहले ही मैच में पाकिस्तान को बड़े अंतर से मात दे दी। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 7 विकेट पर 244 रनों का स्कोर खड़ा किया। जहाँ सलामी बल्लेबाज स्मृति मंदाना ने 75 गेंदों पर 52 रनों की पारी खेली, वहीं 7वे नबंर पर बल्लेबाजी के लिए उतरीं स्नेह राणा ने 48 गेंदों पर नाबाद 53 रन मारे। उनके साथ पूजा वस्त्रकार ने 59 गेंदों पर 67 रनों की तेज-तर्रार पारी खेली।

एक समय ऐसा आ गया था, जब 33.1 ओवर में मात्र 114 रनों पर 6 विकेट गिर गए थे। लेकिन, अपना रिकॉर्ड छठा विश्व कप खेल रहीं कप्तान मिताली राज के 9 रन पर सस्ते में आउट होने के बाद पूजा और स्नेह ने मिल कर 7वें विकेट के लिए 122 रनों की साझेदारी की। पाकिस्तान की तरफ ने नशरा संधू ने जहाँ 36 रन देकर 2 विकेट झटके, वहीं निदा दार ने 45 रन देकर 2 विकेट झटके। दोनों ने 10-10 ओवर फेंके।

वहीं पाकिस्तान की तरफ से उतरीं किसी भी महिला बल्लेबाज ने अर्धशतक तक नहीं जड़ा। पाकिस्तान की तरफ से सलामी बल्लेबाज सिदरा अमीन ने सबसे ज्यादा 30 रनों की पारी खेली। राजेश्वरी गायकवाड़ ने गेंदबाजी करते हुए भारत की तरफ से शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 10 ओवर में मात्र 31 रन देकर 4 विकेट झटके। वहीं स्टंप्स के पीछे से विकेटकीपर ऋचा घोष ने एक के बाद एक पाँच कैच पकड़े। उनके प्रदर्शन की सराहना हो रही है।

पाकिस्तान की पारी ओवर में रनों पर सिमट गई। बल्लेबाजी में अच्छी पारी खेलने के बाद स्नेह राणा ने गेंदबाजी में भी सही प्रदर्शन किया और 9 ओवरों में 27 रन देकर विकेट लिए। 39 वर्षीय वरिष्ठ गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने भी 10 ओवर में 26 रन खर्च करते हुए 2 बड़े विकेट झटके। इसके साथ ही पाकिस्तान की टीम 43 ओवरों में 137 रनों पर सिमट गई। भारत की मेघना सिंह ने अंतिम विकेट झटका। इस तरह भारत ने इस विश्व कप में अपना पहला मैच जीत लिया।

रिद्धिमान साहा को इंटरव्यू के नाम पर धमकी: सामने आए पत्रकार बोरिया मजूमदार, बताई एडिटेड स्क्रीनशॉट्स वाली कहानी

क्रिकेटर रिद्धिमान साहा को एक पत्रकार से धमकी मिली थी। कल तक वो पत्रकार बेनाम था क्योंकि रिद्धिमान ने उसका नाम नहीं लिया था, जबकि सहवाग और वेंकटेश प्रसाद जैसों ने खुल कर नाम लेने की अपील की थी। अब वो पत्रकार खुद सामने आ गया है। नाम है – बोरिया मजूमदार।

मजेदार यह कि बोरिया मजूमदार जब सामने आए तो एक अलग ही कहानी लेकर आए हैं। उनके अनुसार कहानी यह है कि रिद्धिमान साहा ने उनके साथ हुए बातचीत के स्क्रीनशॉट्स के साथ छेड़छाड़ की है। स्क्रीनशॉट्स को एडिट करके उन पर इंटरव्यू के नाम पर धमकाने का आरोप लगाया।

बोरिया मजूमदार ने 8 मिनट 36 सेकेण्ड का एक वीडियो पोस्ट कर के रिद्धिमान साहा के आरोपों पर सफाई दी है। साथ ही उन्होंने साहा द्वारा दिखाई गई चैट स्क्रीनशॉट्स को एडिटेड बताया है। अपने वीडियो में बोरिया मजूमदार ने कहा:

“रिद्धिमान साहा ने चैट के कुछ हिस्सों को ब्लर (धुंधला) कर दिया है। उन्होंने ही मुझसे इंटरव्यू के लिए कहा था। वो चैट की तारीख को छिपाना चाह रहे हैं। वो जनता को गुमराह भी कर रहे हैं। मैं BCCI से इस मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग करता हूँ। मेरे वकील साहा को मानहानि का नोटिस भी भेज रहे हैं।”

इससे पहले क्रिकेटर रिद्धिमान साहा के आरोपों की जाँच के लिए BCCI ने 3 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। रिद्धिमान ने शनिवार (5 मार्च 2022) को इस कमेटी के सामने पेश हो कर अपना बयान दर्ज करवाया है। यह कमेटी एक पत्रकार द्वारा रिद्धिमान को इंटरव्यू के लिए दी गई धमकी की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पत्रकारों से बात करते हुए रिद्धिमान साहा ने कहा, “मैंने कमेटी को वो सब कुछ बताया, जो मैं जानता था। मेरे पास जो भी जानकारी थी, वो मैंने BCCI से साझा की। मैं अभी आपको इससे अधिक कुछ भी नहीं बता सकता। BCCI ने मुझे इस मीटिंग के बारे में बाहर बात करने से मना किया है। आपके तमाम सवालों के जवाब वही देंगे।”

रिद्धिमान साहा ने 19 फरवरी 2022 को एक पत्रकार पर इंटरव्यू के लिए धमकी देने का आरोप लगाया था।

इस पूरे मामले पर वीरेंद्र सहवाग और वेंकटेश प्रसाद जैसे पूर्व खिलाडियों ने रिद्धिमान साहा से धमकी देने वाले पत्रकार का नाम सार्वजनिक करने की माँग की थी। यद्दपि साहा ने ‘पत्रकार का करियर खत्म’ होने की बात कह कर इसे टाल दिया था। हालाँकि तब भी अनुमान लगाया जा रहा था कि वह पत्रकार बोरिया मजूमदार थे।

राजीव गाँधी ने अमेठी की जनता को ऐसे ठगा था बार-बार… खुद प्रियंका ने सुनाई ‘जीप’ वाली कहानी, कॉन्ग्रेस ने शेयर किया वीडियो

कॉन्ग्रेस पार्टी का एक और सेल्फ-गोल। गोल खुद प्रियंका गाँधी ने किया है। गोल हुआ एक वीडियो से। खुद कॉन्ग्रेस ने शेयर किया है वीडियो। वीडियो में प्रियंका गाँधी ने अपने पिता राजीव गाँधी के बारे में बताया है। बात अमेठी की है, वहाँ के सड़कों-बिजली के बारे में है।

अब खबर (मजेदार है) विस्तार से। हुआ यह कि कॉन्ग्रेस ने प्रियंका गाँधी का एक वीडियो ट्वीट किया। इसमें उन्हें यह बताते हुए सुना जा सकता है कि कैसे उनके पिता राजीव गाँधी ने अमेठी के मतदाताओं को ठगा था। वो इसलिए क्योंकि लोग अक्सर उनसे उनके ही द्वारा किए गए वादों को पूरा नहीं करने के लिए सवाल करते थे, उन्हें डाँटते थे।

प्रियंका गाँधी ने ये सारी बात उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार के दौरान कही। गाजीपुर में एक चुनावी रैली में बोलते हुए उन्होंने अपने पिता को पूर्व प्रधानमंत्री के तौर पर याद किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता राजीव गाँधी उन्हें उत्तर प्रदेश के गाँवों में जीप से ले जाते थे। आपको बता दें कि राजीव गाँधी अमेठी से सांसद (4 बार) थे।

राजीव गाँधी ‘गरीब’ लोग के घर जाते थे, ‘गरीब’ लोग उनसे सवाल पूछते थे… प्रियंका गाँधी ने ‘गरीब’ लोग को अपने भाषण में बार-बार दोहराया।

दरअसल प्रियंका गाँधी ने सोचा होगा कि अमेठी के ‘गरीब’ लोग और उनके पिता राजीव गाँधी के बीच बातचीत वाली कहानी सुना कर वो सहानुभूति लूट लेंगी, लेकिन हुआ इसके उल्टा। उल्टा इसलिए क्योंकि इतने साल सत्ता में रहने के बाद भी अमेठी में लोगों को कॉन्ग्रेस बुनियादी सुविधाएँ मुहैया कराने में नाकाम रही।

उत्तर प्रदेश या अमेठी के वोटरों को लेकर प्रियंका गाँधी की सोच क्या है, यह पिछले महीने के उनके एक भाषण से समझा जा सकता है। 2019 में स्मृति ईरानी से राहुल गाँधी अमेठी सीट से ही हारे थे। इस हार के लिए प्रियंका गांधी ने अमेठी के वोटरों को दोषी ठहराया था। उन्होंने दावा किया था अमेठी के वोटरों ने 2019 में आंख मूँद कर वोट किया था और अब अपनी स्थिति के लिए वो (वोटर) खुद जिम्मेदार हैं।

‘ब्रा खुलवाया, दूसरा कपड़ा भी नहीं दिया… फिर स्तनों को छुआ’ – टैटू बनाते समय रेप/यौन शोषण करने वाला केरल से धराया

सेलिब्रिटी टैटू आर्टिस्ट सुजीश गिरफ्तार कर लिया गया है। केरल के कोच्चि निवासी सुजीश के खिलाफ एक गुमनाम पोस्ट से यौन शोषण और रेप का आरोप लगाया गया था। गिरफ्तारी के दौरान सुजीश ने ESCAPE (भागना) लिखी टी शर्ट पहन रखी थी।

सुजीश की गिरफ्तारी 4 अलग-अलग लड़कियों द्वारा शुक्रवार (4 मार्च 2022) को दी गई शिकायत के बाद हुई है। कोच्चि पुलिस ने सुजीश के खिलाफ 4 केस दर्ज किए हैं। यह गिरफ्तारी शनिवार (5 मार्च 2022) को की गई है।

सुजीश पर रेप और यौन शोषण का सबसे पहला आरोप योनि का टैटू बनवाने गई 18 वर्षीया लड़की ने लगाया। इन आरोपों के बाद अब स्वयं को पीड़िता बता रहीं 7 अन्य लड़कियाँ भी सामने आई हैं। इन सबने भी अपने साथ सुजीश द्वारा यौन शोषण किए जाने की बात कबूली है।

सभी पीड़ित लड़कियों/महिलाओं ने मिल कर सुजीश के खिलाफ पुलिस में शिकायत करने का फैसला किया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सुजीश पर धारा 354 और 376 IPC के तहत कार्रवाई की गई है। गौरतलब है कि सुजीश के टैटू स्टूडियो का नाम इंकफेक्टेड (Inkfected) है।

सोशल मीडिया पर टैटू आर्टिस्ट सुजीश के खिलाफ जिन-जिन पीड़िताओं ने अपनी आपबीती लिखी है, उनमें से एक हैं 23 वर्षीया लड़की। उन्होंने लिखा है:

“2 साल पहले मैं 21 साल की थी। मैं वहाँ टैटू बनवाने गई थी। मैंने वह टैटू अपनी रीढ़ की हड्डी के आस-पास बनवाया था। शुरुआत में टैटू बनवाने में मुझे काफी दर्द हुआ। तब उसने (सुजीश) ने मुझे ब्रा उतारने के लिए कहा था। मुझे उसके बदले में कोई दूसरा कपड़ा भी नहीं दिया गया था। कुछ देर बाद उसने मेरे स्तनों को छुआ था। आज 2 साल बाद मुझे अहसास हो रहा है कि टैटू आर्टिस्ट ने मेरा यौन शोषण किया था।”

इस पीड़िता ने हालाँकि पुलिस में शिकायत करने से मना कर दिया है।

सुजीश के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाने वाली लड़की ने कहा है – ‘अब तुम्हारा समय खत्म हुआ।’ शिकायत करने वाली एक अन्य महिला ने लिखा, “ये कोई नया सोशल मीडिया कैम्पेन नहीं है। ये यौन शोषण के खिलाफ बहादुर महिलाओं का एक अभियान है। यह अभियान उस सिस्टम के खिलाफ भी है, जो हमारी सुरक्षा करने में नाकाम रहा है। तुम्हारा समय समाप्त हुआ। तुम्हें अपनी करनी का फल मिलेगा। अब हम और सहन करने वाले नहीं हैं। आओ, हम तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं।”

11 साल की बच्ची से रेप के बाद हत्या, HC से फाँसी भी… लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी रोक: डॉक्टरों से मनोवैज्ञानिक जाँच के लिए कहा

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 11 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या के दोषी जयप्रकाश तिवारी (Jay Prakash Tiwari) की फाँसी पर रोक लगा दी है। सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने इस मामले में उत्तराखंड के जेल में बंद दोषी की मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कराने का निर्देश दिया है। आरोपित तिवारी ने अपने सहयोगी मजदूर की इस बेटी के साथ इस वारदात को अंजाम दिया था और फाँसी की सजा के खिलाफ देश की शीर्ष अदालत में अपील की थी। यह पहला मामला है जब किसी दोषी का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कराया जाएगा।

जस्टिस यूयू ललित (Justice UU Lalit) की अध्यक्षता वाली जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने ऋषिकेश एम्स (Rishikesh AIIMS) के मनोवैज्ञानिकों की एक टीम को सुद्धोवाला जेल में जाकर दोषी की जाँच करने और रिपोर्ट 25 अप्रैल तक देने के लिए कहा। इसमें जिला जेल प्रशासन को सहयोग करने का भी निर्देश दिया गया है।

कोर्ट ने इस मामले में अधिकारियों से जेल में बंद दोषी तिवारी के क्रिया-कलापों की जानकारी हासिल करने के बाद उसकी रिपोर्ट को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया। बता दें कि यह पहला मामला है, जब किसी अदालत ने किसी दोषी की अपील की सुनवाई से पहले उसकी मानसिक जाँच कराने का निर्देश दिया है। इस आधार पर कोर्ट निर्णय लेगा कि दोषी की मानसिक स्थिति क्या है और उसमें सुधार की कितनी गुंजाइश है।

बता दें कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने जयप्रकाश तिवारी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302, 201, 376 और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए फाँसी की सजा सुनाई थी। मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट में जाने के बाद कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा। इसके बाद दोषी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

क्या है मामला

उत्तर प्रदेश के फैजाबाद का 32 वर्षीय जयप्रकाश तिवारी उत्तराखंड के देहरादून में काम करता था। वह विकासनगर थाना क्षेत्र के सहसपुर में रहता था। उसके साथ ही मध्य प्रदेश का रहने वाला एक शख्स भी काम करता था। जुलाई 2018 में जब 11 साल की मृतक लड़की का पिता मजदूरी करने चला गया, तब तिवारी ने लड़की को बिस्किट खरीदने के लिए 10 रुपए का लालच देकर ले गया और उसके साथ रेप किया। उसके बाद उसकी हत्या कर शव को अपने घर में दबा दिया था।

गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में उसने पुलिस को बताया था कि वह शादीशुदा है और दो बच्चों का बाप है। छह से महीने से उसकी पत्नी उससे दूर रह रही थी। उसने बताया था कि वह कॉलगर्ल के पास जाने की सोची थी, लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे। इसलिए उसने इस बच्ची को निशाना बनाया था।

इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने अगस्त 2019 में उसे दोषी ठहराते ठहराते हुए मौत की सजा दी थी। इसके बाद उसने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ उत्तराखंड हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन उच्च न्यायालय ने जनवरी 2020 में ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

सुनवाई को दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि अपराध दुर्भलतम श्रेणी का है और इसमें उपलब्ध कराए गए तथ्यों पर संदेह नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा था, “अपीलकर्त्ता द्वारा किया गया अपराध इतना क्रूर है कि यह न केवल न्यायिक जागरूक, बल्कि समाज के प्रति जागरूक व्यक्ति को भी झकझोरता है। यह मामला ‘दुर्लभ में दुर्लभतम’ की श्रेणी में आता है। इसमें मौत के अलावा कोई सजा नहीं दी जा सकती है।”

Visa-MasterCard का रूस में ऑपरेशन बंद, जेलेंस्की ने अमेरिका से माँगी थी मदद: इजरायली PM पहुँचे मॉस्को

यूक्रेन-रूस युद्ध (Russia-Ukraine War) दिन-ब-दिन गंभीर होता जा रहा है। खबर आ है कि मानवीय मदद के लिए यूक्रेन के मारियूपोल में सीजफायर की घोषणा करने के बाद रूस ने इस शहर पर एक फिर बमबारी शुरू कर दी है। वहीं, रूस यूक्रेन के तीसरे परमाणु संयंत्र को कब्जा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री नफ्टाली बेनेट (Bennett Naftali) अचानक शनिवार (5 मार्च) को रूस पहुँच गए और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) से लगभग ढाई घंटे तक बातचीत की। इधर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) ने कहा है कि वे इस हार नहीं मानेंगे। उन्होंने अमेरिकी सीनेटर से रूस पर प्रतिबंध लगाने और वीजा और मास्टरकार्ड के रूस में उपयोग को निलंबित करने की माँग की। इसके बाद इनका रूस में उपयोग बंद हो गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति भवन ह्वाइट हाउस में ब्लूमबर्ग की पत्रकार जेनिफर जैकब्स ने ट्वीट किया है, “यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अमेरिकी सीनेटरों के साथ बातचीत में यूक्रेन को नो फ्लाई ज़ोन, घातक हथियारों की सहायता, रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया। वे यह भी चाहते हैं कि रूस में वीज़ा और मास्टरकार्ड के उपयोग को निलंबित कर दिया जाए और अधिक से अधिक अमेरिकी व्यवसायों को रोका जाए।”

अपने ट्वीट के अगले थ्रेड में उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने पूर्वी यूरोपीय देशों से उन्हें रूस निर्मित विमान उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। इन विमानों की उन्हें बहुत जरूरत है। जैकब्स ने बताया कि यूक्रेन की इन माँगों में अमेरिका नाटो सहयोगियों के परामर्श के बाद पोलैंड से फाइटर जेट और रूस में वीज़ा तथा मास्टरकार्ड सेवाओं का निलंबन जैसी माँगों को मान सकता है।

इसके बाद वीजा और मास्टरकार्ड ने शनिवार को ही घोषणा की कि वे रूस में अपने ऑपरेशन को बंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रूस में सभी लेनदेन को रोकने के लिए ग्राहकों और भागीदारों के साथ मिलकर काम करेंगे। इस कार्रवाई के बाद रूस में जारी वीज़ा कार्ड लेनदेन में अब देश के बाहर काम नहीं करेंगे और रूस के बाहर जारी किया गया कोई भी वीज़ा कार्ड अब देश के भीतर काम नहीं करेगा।

चेर्नोबिल और जपोरिजिया परमाणु संयंत्र पर नियंत्रण करने के बाद रूस अब यूक्रेन के तीसरे परमाणु संयंत्र पर भी नियंत्रण करने की दिशा में बढ़ रहा है। यूक्रेन का तीसरा संयंत्र यूजनोवक्रेनस्क परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। यह मायकोलेव से सिर्फ 120 किलोमीटर (75 मील) की दूरी पर उत्तर में स्थित है। यह उन शहरों में शामिल है, जिन पर कब्जा करने की रूसी सेना कोशिश कर रही है।

बता दें कि अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए जा रहे एक के बाद एक प्रतिबंधों को व्लादिमीर पुतिन ने ‘युद्ध का ऐलान’ बताया। उन्होंने चेताया कि जो भी देश यूक्रेन को नो फ्लाई जोन घोषित करेगा, उसे इस युद्ध में रूस के खिलाफ उतरा हुआ माना जाएगा, भले ही वो किसी भी संस्था/समूह का सदस्य हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि वो यूक्रेन को ‘न्यूट्रल’ बनाना चाह रहे हैं, ताकि वहाँ की मिलिट्री को ख़त्म किया जा सके और नाजी ताकतों को मिटाया जा सके।

अवैध तरीके से लगाई गई आंबेडकर की मूर्ति हटाने पर बवाल: SDM को ज़िंदा जलाने की कोशिश, कई घरों को फूँक डाला, सरकार जमीन पर जमा लिया था कब्ज़ा

मध्य प्रदेश के भिंड जिले का लहार कस्बा चर्चा में है। चर्चा का कारण है डॉ बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा। ये घटना लहार कसबके में स्थित एक दलित की बस्ती है। वहाँ पर सरकारी जमीन स्थित है, जहाँ रातों रात बाबा साहेब की मूर्ति किसी ने लगा दी। सुबह हुई तो किसी ने इसकी शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों से की। जब एसडीएम ने मूर्ति को हटवाने की कोशिश की तो लोगों ने उन्हें जिंदा जला डालने की कोशिश की।

गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस की टीम पर पत्थर और गोबर फेंके। मामला यहीं नहीं रुकता, बल्कि बाबा साहेब की मूर्ति हटाने की कोशिश से ये लोग इतने अधिक आक्रोशित थे कि इन्होंने अपनी ही झोपड़ियों में आग लगा दी। लोगों ने जमकर नारेबाजी की। , हालाँकि एसडीएम विवेक केवी ने काफी देर तक लोगों को समझाने की कोशिश की तब जाकर लोगों को शांत किया जा सका।

एसडीएम ने लोगों को बताया कि प्रशासन बाबा साहेब की मूर्ति के खिलाफ नहीं है। दरअसल वो मूर्ति सरकारी जमीन पर लगाई गई है। उन्होंने कहा कि कानूनी तरीके से मूर्ति को स्थापित किया जा सकता है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहा है, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि अधिकारी लोगों को समझाने की कोशिशें कर रहे हैं और आसपास झोपड़ियाँ धू-धू कर जल रही हैं।

उल्लेखनीय है कि गलत तरीके से अंबेडकर की प्रतिमा लगाने को लेकर लहार तहसील के वार्ड क्रमांक 14 के कृष्णा पत्नी स्व सीताराम राठौर ने एसडीएम प्रशिक्षु आइएएस विवेक केवी से शिकायत की थी कि उनकी जमीन पर कुछ लोगों ने डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा लगा दी है। मूर्ति हटाने की कहने पर लोग उससे मारपीट कर रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।

हाथ मिलाने की कोशिश करते रह गए Pak राजदूत, आगे बढ़ गया हक्कानी: अमेरिका ने जिस पर रखा है ₹77 करोड़ का इनाम, 15 साल से जिसकी तलाश – वो अब ‘गृह मंत्री’

अफगानिस्तान में हथियारों के बल पर कब्जा करने के बाद तालिबान की सरकार का गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी शनिवार (5 फरवरी 2022) को पहली बार दुनिया के सामने आया। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित वैश्विक आतंकी घोषित किए गए सिराजुद्दीन हक्कानी का चेहरा दुनिया के सामने दशकों के बाद सामने आया है।

दरअसल, अफगानिस्तान में मौका था इस्लामिक अमीरात के राष्ट्रीय पुलिस के स्नातक समारोह का। सिराजुद्दीन हक्कानी हाफिजुल्ला कार्यक्रम का उद्घाटन करने के लिए आया था। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब डेढ़ दशक से अमेरिका हक्कानी का पीछा कर रहा था, लेकिन वो उसे ढूँढ नहीं पाया – वो अचानक से पूरी दुनिया का सामने आ गया।

हक्कानी से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें स्पष्ट देखा जा सकता है कि हक्कानी पुलिस के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आता है। वो अपने सिर पर शॉल ओढ़े हुए रहता है। उस दौरान स्टेज पर मौजूद पाकिस्तानी राजदूत उससे मिलने की कोशिश करते हैं, लेकिन हक्कानी उन्हें नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ जाता है। जबकि, सिराजुद्दीन हक्कानी को पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई का पिट्ठू माना जाता है। यह एक कट्टरपंथी सुन्नी इस्लामिक आतंकी संगठन है, जिसे तालिबान का करीबी माना जाता है।

ये सोची समझी रणनीति का हिस्सा

पिछले साल अगस्त में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया था। उस दौरान हक्कानी को छुपाकर रखा गया था। लेकिन अचानक से उसका सामने आना एक रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।

रिसर्च एन्ड एनालिसिस विंग के एक पूर्व अधिकारी के मुताबिक, “अब जब सरकार कुछ महीने पुरानी हो गई है और दुनिया ने इसे आधिकारिक रूप से मान्यता न देने के बावजूद इसके साथ जुड़ना शुरू कर दिया है, तो तालिबान हक्कानी पर इसके साथ पानी जाँचने की कोशिश कर सकता है। इसके साथ ही जैसा कि वे दुनिया भर से राहत चाहते हैं, वे आगे आना चाहते हैं और संकेत देना चाहते हैं कि दुनिया उनके साथ खुले तौर पर जुड़ सकती है। यह एक संकेत भी हो सकता है कि वे पाकिस्तान में अपने आकाओं के साए से बाहर आना चाहते हैं।”

गौरतलब है की सिराजुद्दीन हक्कानी वो ग्लोबल टेररिस्ट है, जिस पर 1 करोड़ डॉलर (76.43 करोड़ रुपए) का इनाम है। हक्कानी नेटवर्क भारतीय हितों के खिलाफ हमले का आरोपित है।