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AAP के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन कोरोना के लक्षण के बाद अस्पताल में भर्ती, लोगों ने पूछा- घर पर क्यों नहीं रहे?

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन में कोविड-19 के लक्षण दिखने के बाद उन्हें राजीव गाँधी सुपर स्पेशेलिटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार (जून 15, 2020) को उन्हें साँस लेने में दिक्कत शुरू हुई थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वहाँ उन्हें फिलहाल ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। इसके अलावा उनका कोरोना टेस्ट भी हुआ है।

अपनी तबीयत खराब होने की सूचना स्वंय सत्येंद्र जैन ने ट्विटर पर भी दी है। उन्होंने लिखा, “तेज बुखार और साँस लेने में आ रही दिक्कत के बाद मुझे अस्पताल में भर्ती किया गया है। मैं आपको ताजा जानकारी देता रहूँगा।”

यहाँ बता दें कि पिछले दिनों दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी कोरोना जैसे कुछ लक्षणों को देखते हुए खुद को आइसोलेट कर लिया था। हालाँकि, बाद में उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। ऐसे में अब सत्येंद्र जैन के अस्पताल में भर्ती होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने उनकी जल्द रिकवरी की कामना की है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन लगातार बैठकों में हिस्सा ले रहे थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य अधिकारियों के साथ लगातार कई बैठकें कीं, तब सत्येंद्र जैन बतौर स्वास्थ्य मंत्री उस बैठक में मौजूद थे। जिसके कारण अब सोशल मीडिया पर लोग सवाल करने लगे हैं कि आखिर कोई इतना लापरवाह कैसे हो सकता है।

राहुल कौशिक नाम के यूजर ने ट्विटर पर लिखा, “गृह मंत्रालय में हुई गृह मंत्री की बैठक में सत्येंद्र जैन शामिल हुए थे। इसमें डॉ हर्षवर्धन, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया भी थे। आखिर कोई इतना लापरवाह कैसे हो सकता है? उम्मीद है सब ठीक होंगे।”

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों सत्येंद्र जैन ने कोविड-19 के मरीजों को लेकर इस बात को स्पष्ट किया था कि अगर कोरोना किसी को हो भी जाता है, तो वह अस्पताल की ओर न भागें, क्योंकि उसका इलाज घर में रखकर किया जाएगा, उसे प्रॉपर गाइड किया जाएगा, डॉक्टर उसे घर पर आकर देखेंगे। हालत बहुत बिगड़ने पर ही अस्पताल में एडमिट किया जाएगा।

सोचने वाली बात है कि आम आदमी के लिए जो आम आदमी सरकार कुछ दिनों पहले बेबस होकर ऐसे फैसले सुना रही थी। वही आम आदमी के नेता अपनी दी हुई गाइडलान्स को फॉलो करते नहीं दिख रहे। यही कारण है कि अब सोशल मीडिया पर लोग सत्येंद्र जैन की जल्दी स्वस्थ होने की कामना करते हुए सीएम केजरीवाल से पूछने लगे हैं कि उनके मंत्री उनकी बनाई गाइडलाइन क्यों नहीं फॉलो कर रहे और क्यों अस्पताल की ओर भाग रहे हैं?

लद्दाख में भारत-चीन की सेनाओं में झड़प: 3 सैनिक वीरगति को प्राप्त, चीनियों के भी मरने की खबरें

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव और ज्यादा अब बढ़ता नजर आ रहा है। खबर है कि सोमवार को गलवान घाटी में सेनाओं के पीछे हटने के दौरान दोनों देशों की सेनाओं में झड़प हो गई। जिसमें भारतीय सेना के एक अधिकारी और दो जवान वीरगति को प्राप्त हुए

खबरों के अनुसार चीन की सेना के एक अधिकारी सहित कुल 4 जवान मारे गए। बताया जा रहा है कि इस बड़ी घटना के बाद अब दोनों देशों के दिग्गज अधिकारी मुलाकात करके हालातों को संभालने में लगे हुए हैं।

गौरतलब है कि मई के शुरुआती दिनों में LAC पर चीनी सैनिकों ने आक्रामक रुख अपनाना शुरू किया था। ऐसे में खबर थी कि पूर्वी लद्दाख में 4 जगहों पर पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने घुसपैठ की। साथ ही बड़ी संख्‍या में चीनी सैनिक आर्टिलरी और बख्‍तरबंद गाड़‍ियों के साथ LAC के पास मौजूद हैं। 1975 के बाद यह पहली बार है, जब भारत-चीन सीमा पर किसी सैनिक की जान गई है। 

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बता दें कि दोंनों देशों की सेनाओं को सीमा से दूर हटाने के लिए लंबे वक्त से कदम बढ़ाए जा रहे थे। 6 जून के बाद से वहाँ कई राउंड की बात चल रही थी, CO से लेकर लेफ्टिनेंट जनरल लेवल तक के अफसरों के बीच बातचीत जारी थी।

बीच में खबर भी आई थी कि दोनों देशों की सेना 2.5-3 किमी तक पीछे हटी। लेकिन अब बताया जा रहा है कि जब ये प्रक्रिया चल रही थी, उसी दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई।

1 माह के भीतर छोटा शकील की 2 बहनों की मौत, कोरोना वायरस से संक्रमित थी बड़ी बहन हमीदा

दाऊद के करीबी माने जाने वाले अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा शकील की बड़ी बहन हमीदा (Hamida) की कोरोना वायरस के कारण मौत हो गई है। उनका इलाज मुम्बई स्थित ठाणे के मुम्ब्रा में चल रहा था।

ज्ञात हो कि गत मई माह में ही छोटा शकील की छोटी बहन फहमीदा शेख (Fahmida Shaikh) का भी हार्ट अटैक पड़ने से निधन हो गया था। यानी, एक माह के भीतर अंडरवर्ल्ड के डॉन छोटा शकील की 2 बहनों की मौत हो गई है।

पिछले महीने अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा शकील की बहन फहमीदा की मौत मीरा रोड स्थित एक हॉस्पिटल में इलाज के दौरान हुई थी। 50 वर्षीय फहमीदा को हार्ट अटैक आया था। हालाँकि, फहमीदा का कोरोना वायरस परीक्षण भी किया गया था। वह अपने परिवार के साथ मीरा रोड, मुम्बई रहती थीं। इससे पहले फहमीदा दुबई में रहती थीं। लेकिन 2006 में वह मुंबई में शिफ्ट हो गई थीं। 

छोटा शकील

छोटा शकील 1980 में वो दाऊद के गैंग में शामिल हो गया था जहाँ उसकी बड़ी भूमिका मानी जाती थी। 1993 में मुंबई में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में शकील की भूमिका भी सामने आई थी। वर्तमान में उसके पाकिस्तान में छुपे होने की खबरें सामने आती रही हैं।

हाल ही में दाऊद के भी कोरोना वायरस के संक्रमण से मौत की खबरें सामने आईं थीं, लेकिन इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

वहीं, भारत में पिछले 24 घंटे में 10,667 नए मामले सामने आए हैं और 380 लोगों की मौत हुई है। जिसके बाद देशभर में कोरोना वायरस से संक्रमित कुल मामलों की कुल संख्या 3,43,091 हो गई है, जिनमें से 1,53,178 अभी सक्रिय हैं, जबकि अब तक 9,900 लोगों की मौत हो चुकी है।

‘सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की जाँच क्यों?’ राजदीप के सवाल पर IPS अधिकारी ने याद दिलाया कानून, सुनते ही पलटे

पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की जाँच किए जाने पर नाराज़गी जताई है। अपनी ‘गिद्ध पत्रकारिता’ के लिए जाने जाने वाले राजदीप सरदेसाई ने लिखा कि मुंबई पुलिस को सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या की जाँच करने की क्या आवश्यकता है? बता दें कि सब कुछ प्रक्रिया के तहत ही हो रहा था। मृत शरीर के पोस्टमॉर्टम के बाद सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में मुंबई पुलिस ने जाँच शुरू की लेकिन राजदीप सरदेसाई को ये रास नहीं आया

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने इस बात की पुष्टि की है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या किए जाने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में प्रोफेशनल दुश्मनी के कारण उनकी जान लिए जाने के आरोप लग रहे हैं, इसीलिए पुलिस इस एंगल से भी जाँच करेगी। उन्होंने एक वीडियो सन्देश जारी कर ये बात कही। इस पर राजदीप सरदेसाई गुस्से में आ गए और उन्होंने यहाँ तक कह डाला कि जब सरकारें सोशल मीडिया कुछ ज्यादा ही देखती है तो यही सब होता है।

आईपीएस अधिकारी का राजदीप को जवाब

बकौल राजदीप सरदेसाई, पुलिस को अब जाँच नहीं करनी चाहिए और सुशांत सिंह राजपूत के परिवार को ‘चैन से शोक मनाने’ देना चाहिए और साथ ही उनकी आत्मा की शांति को भंग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्विटर और इंस्टाग्राम में हो-हल्ला के कारण ये सब हो रहा है। इसके बाद वो ‘शुभ रात्रि’ और ‘गुड नाइट’ बोल कर निकल गए। हालाँकि, लोगों ने उनके रवैये पर सवाल उठाया और जम कर खरी-खोटी सुनाई।

पुलिस अधिकारी प्रणव महाजन ने राजदीप को बताया कि इस तरह की हर मौत के बाद जाँच होना एक ऐसी प्रक्रिया है, जो आवश्यक है और यह होना ही चाहिए। उन्होंने राजदीप को समझाया कि क़ानून के अनुसार आत्महत्या से हुई हर मौत के बाद जाँच होनी ही होनी है। राजदीप सरदेसाई को ग़लतफ़हमी थी कि सोशल मीडिया में हंगामा होने के कारण जाँच हो रही है। इस पर लोगों ने कहा कि एक वरिष्ठ पत्रकार को पुलिस की प्रक्रिया के बारे में पता होना चाहिए।

आईपीएस अधिकारी अरुण बोथरा ने भी राजदीप सरदेसाई की जम कर क्लास लगाई। उन्होंने बताया कि सीआरपीसी की धारा 174 के तहत किसी भी अप्राकृतिक मृत्यु के बाद पुलिस को जाँच करनी होती है। ये मैंडेटरी है। उन्होंने पूछा कि भला क़ानून अपनी जिम्मेदारी से कैसे पीछे हट सकता है? आईपीएस अरुण ने राजदीप सरदेसाई को रिप्लाई देते हुए कहा कि सुशांत सिंह राजपूत के परिवार को यह जानने का पूरा हक़ है कि उनकी मौत क्यों और कैसे हुई।

पुलिस अधिकारी ने राजदीप को डपटा

साथ ही उन्होंने पूछा कि क्या पुलिस जाँच न करे और सुशांत सिंह राजपूत का परिवार न्यूज़ एंकरों द्वारा निकाले गए निष्कर्ष को ही मान लें? बाद में राजदीप सरदेसाई ने तुरंत यू-टर्न लिया और कहने लगे कि वो तो जाँच के पक्ष में हैं, जाँच होनी चाहिए लेकिन मंत्री द्वारा पुलिस को बॉलीवुड में दुश्मनी वाले एंगल से जाँच करने का निर्देश देना उन्हें ठीक नहीं लग रहा। इस पर बोथरा ने उन्हें डपटा कि जब सुशांत बॉलीवुड में कार्यरत थे तो स्वाभाविक है कि जाँच में बॉलीवुड का नाम आएगा।

बता दें कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद उनकी भाभी भी सदमे से चल बसीं। बताया जा रहा है कि उनकी भाभी सुशांत की मृत्यु को बर्दाश्त नहीं कर सकीं। वो पहले से ही बीमार चल रही थीं। सुधा देवी की मौत उस समय हुई, जब सुशांत का मुंबई में अंतिम संस्कार चल रहा था। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत का संयुक्त परिवार है। उनके पिता और चचेरे भाई नीरज सिंह बबलू सारी प्रक्रिया पूरी करने मुंबई पहुँचे थे।

जो है RSS कार्यकर्ता का हत्यारा, वो वामपंथी CM की बेटी की शादी में बना VVIP गेस्ट

केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की बेटी की शादी में बतौर वीआईपी गेस्ट बनकर आने वाला मोहम्मद हाशिम RSS कार्यकर्ता सुरेश बाबू की हत्या का दोषी है। कुछ दिन पहले ही हाशिम परोल पर रिहा हुआ और 15 जून को उसने सीएम की बेटी वीणा और सीपीएम नेता मो रियास की शादी अटेंड की।

गौरतलब है कि 15 जून को हुई वीणा और सीपीएम नेता मोहम्मद रियाज की शादी में कुछ खास लोग शामिल हुए थे। ऐसे में मोहम्मद हाशिम उन्हीं खास 50 लोगों की सूची में था, जिन्हें शादी के लिए आमंत्रित किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि हाशिल मोहम्मद रियाज का कजन है। मोहम्मद हाशिम को सुप्रीम कोर्ट ने त्रिशूर में आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या के आरोप में 7 साल की सजा सुनाई है और फिलहाल वह कोरोना महामारी के कारण जेल से बाहर है।

अब इसी मामले के संबंध में भाजपा ने सीएम पिनरई विजयन से जवाब माँगा है। एक फेसबुक पोस्ट में भाजपा नेता संदीप जी वरियर ने लिखा, “क्या एक हत्या का दोषी मोहम्मद हाशिम शादी में शामिल हुआ था? सीएम को जवाब देना चाहिए। क्या एक हत्या का दोषी, जो परोल पर बाहर है, वो शादी में शामिल हुआ?”

उन्होंने लिखा, “सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में इसे 7 साल जेल की सजा सुनाई थी। वह कोरोना महामारी के कारण परोल पर बाहर है। कोई अपराधी आधिकारिक सरकारी आवास पर कैसे आ सकता है और सीएम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कैसे चल सकता है। यह एक बड़ी सुरक्षा चूक है। वो भी तब जब सीएम के पास गृह विभाग भी है। मोहम्मद हाशिम ने त्रिसूर में आरएसएस कार्यकर्ता सुरेश बाबू की हत्या की थी।”

इसके अलावा, केरल भारतीय जनता पार्टी की नेता शोभा सुरेंद्रन ने भी एक हत्यारे की अपने आधिकारिक निवास पर मेहमान नवाजी करने पर CM पिनरई विजयन की आलोचना की।

यहाँ बता दें कि लॉकडाउन के समय में हुई वीणा और रियाज की शादी, दोनों की दूसरी शादी है। वीणा ने इससे पहले तिरुवनंतपुरम के एक वकील सुनीश से शादी की थी। इस दौरान दोनों को एक बेटा भी हुआ। लेकिन 2015 में किसी कारणवश उनका तलाक हो गया।

इसी प्रकार रियास ने पहली शादी कालिकट विश्वविद्यालय की सिंडिकेट सदस्य डॉ समीहा सैथलवी से की थी। इसके बाद दोनों के दो पुत्र हुए लेकिन साल 2015 में इनका तलाक हो गया। रियास की पहली पत्नी ने उनके ऊपर घरेलू हिंसा के आरोप लगाए थे।

उल्लेखनीय है कि लगभग एक दशक तक आईटी सेक्टर में काम करने वाली मुख्यमंत्री पिनरई विजयन की बेटी वीणा एक उद्यमी है। जिन्होंने हाल में EXALOGIC SOLUTION नाम की फर्म की शुरुआत की थी। लेकिन पिछले दिनों वह यूएस कंपनी Sprinklr के कारण चर्चा में रहीं।

कॉन्ग्रेस ने उन पर आरोप लगाया था कि उनके उस स्प्रिंकलर नाम की कंपनी के मैनेजमेंट के साथ करीबी संबंध थे, जिसे सीपीएम ने कोरोना रोगियों का डेटा रिकॉर्ड करने का काम सौंपा था।

कॉन्ग्रेस नेता पीटी थॉमस ने वीणा पर आरोप लगाते हुए कहा था कि Exalogic solution का एकदम से गायब हो जाना दर्शाता है कि केरल सरकार की स्प्रिंकलर के साथ क्या डील थी।

वहीं, रियास के बारे में बता दें कि वह आईपीएस अधिकारी पीएम अब्दुल खादर का बेटा है। उन्हें साल 2017 में DYFI ने बतौर अध्यक्ष नियुक्त किया था। उन्होंने साल 2009 में सीपीएम की ओर से कोझिकोड लोकसभा सीट के लिए चुनाव लड़ा था। मगर, यूडीएफ के एमके राघवन ने उन्हें 800 वोटों से हरा दिया था। इसके बाद वह बीफ कुकिंग प्रोटेस्ट के मामले में बढ़ चढ़कर एनडीए सरकार द्वारा लाए मसौदे का विरोध करते नजर आए थे।

सलमान एंड फैमिली विषधर साँप… सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या पर अभिनव कश्यप ने खोले बॉलीवुड के राज

सलमान ख़ान की फिल्म ‘दबंग’ के निर्देशक अभिनव सिंह कश्यप ने सरकार से माँग की है कि सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले की विस्तृत जाँच की जाए। उन्होंने कहा कि सुशांत भले ही चले गए लेकिन उनकी लड़ाई अभी भी जारी है। उन्होंने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने कई बड़ी समस्याओं को सामने ला दिया है, जिससे आज बॉलीवुड में कई लोग जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुशांत की मौत के पीछे कोई बड़ी वजह है, जैसे बॉलीवुड में ‘मी टू’ का इस्तेमाल किया गया।

उन्होंने ‘यशराज फिल्म्स’ पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसी ने सुशांत को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया होगा, ये जाँच का विषय है। उन्होंने कहा कि ये लोग करियर बनाते नहीं हैं बल्कि करियर और ज़िंदगी, दोनों ही बिगाड़ते हैं। उन्होंने अपने एक दशक के अनुभव की बात करते हुए कहा कि बॉलीवुड की सभी टैलेंट मैनेजमेंट एजेंसियाँ कलाकारों को मौत के एक जाल में फँसाने का काम करती हैं।

बकौल अभिनव, वो लोग ऐसे सफेदपोश हैं जिनके सभी से अच्छे सम्बन्ध हैं और इस खेल में सभी शामिल हैं। उनकी थ्योरी है- “हमाम में सब नंगे हैं, जो नहीं हैं, उनको नंगा करो क्योंकि अगर एक भी पकड़ा गया तो सभी पकड़े जाएँगे।” उन्होंने खुलासा किया कि कास्टिंग डायरेक्टर वगैरह कट/कमीशन स्ट्रेटेजी पर काम करते हैं और शिकार के रूप में ऐसे नॉन-मुम्बइया अभिनेताओं को ढूँढ़ते हैं, जिनका न कोई कनेक्शन हो और न ही ज्यादा संपत्ति हो।

अभिनव ने बताया कि इसके बाद उन कलाकारों को बॉलीवुड के बड़े सेलेब्रिटीज से परिचय कराने के नाम पर पार्टियों और रेस्टॉरेंट्स में आमंत्रित किया जाता है। लॉन्च समारोहों का हिस्सा बनाया जाता है। उन पार्टियों में जाकर नाम और पैसे कमाने की इच्छा तो तीव्र हो उठती है लेकिन नए कलाकारों को जिस तरह से वहाँ नज़रअंदाज़ किया जाता है, उनका आत्मविश्वास टूट जाता है और वो हतोत्साहित महसूस करते हैं। अभिनव ने कहा:

“इसके बाद उन कलाकारों को बॉलीवुड के ‘शिकारियों’ से बचाने के नाम पर कई सालों का कॉन्ट्रैक्ट साइन करा लिया जाता है। उनके पास हस्ताक्षर करने के अलावा शायद ही कोई विकल्प होते हों क्योंकि इसके लिए सभी तिकड़म आजमाए जाते हैं। इन कॉन्ट्रैक्ट्स को तोड़ना वित्तीय रूप से भी अभिनेताओं के लिए ठीक नहीं होता। एक बार उन्होंने साइन कर दिया तो फिर उन्हें काफ़ी कम रुपए देकर उनसे बँधुआ मजदूर की तरह काम लिया जाता है। अगर वो उनके चँगुल से किसी तरह निकल भी जाएँ तो उनका पूर्ण बायकॉट कर दिया जाता है। फिर वो ‘अच्छे कल’ की उम्मीद में कैम्प बदलते हैं लेकिन वो कल कभी नहीं आता।”

इसके बाद अभिनव ने जो बताया, वो काफ़ी शॉकिंग है। उन्होंने बताया कि दूसरे प्रोडक्शन हाउसेज भी उन कलाकारों के साथ ऐसा ही व्यवहार करते हैं। उन्होंने कहा कि अंत में कई मजबूर कलाकारों को एस्कॉर्ट सर्विस या फिर वेश्यावृत्ति के धंधों की ओर रुख करना पड़ता है। बकौल अभिनव सिंह कश्यप, बॉलीवुड में कई पुरुष एस्कॉर्ट्स भी हैं, जिनका इस्तेमाल अमीर और प्रभावशाली हस्तियों के अभिमान और यौन भूख मिटाने के लिए किया जाता है।

अभिनव सिंह कश्यप के अनुसार, वो भी धमकियों और जबरदस्ती कॉन्ट्रैक्ट साइन कराने जैसी हरकतों का सामना कर चुके हैं। उदाहरण स्वरूप उन्होंने ‘दबंग’ की शूटिंग के समय अरबाज खान द्वारा उनके साथ किए गए व्यवहार की बात की। अभिनव ने आरोप लगाया कि अरबाज खान और सलमान खान उनके करियर को अपनी मुट्ठी में रखना चाहते थे, इसलिए उन्होंने ‘दबंग 2’ का निर्देशन करने से इनकार कर दिया।

अभिनव सिंह कश्यप ने बताया अपना अनुभव

उन्होंने आरोप लगाया कि अरबाज खान अष्टविनायक फिल्म्स के मुखिया राज मेहता को कॉल कर के उनके अगले प्रोजेक्ट को रुकवा दिया। इसके बाद वो वायकम पिक्चर्स के साथ जुड़े लेकिन वहाँ सोहैल खान ने इसके सीईओ विक्रम मल्होत्रा को फोन कर के ये प्रोजेक्ट भी रुकवा दिया। बकौल अभिनव, उन्हें न सिर्फ़ 7 करोड़ रुपए का साइनिंग अमाउंट वापस करना पड़ा बल्कि 90 लाख रुपए अतिरिक्त ब्याज के रूप में भी देने पड़े।

अभिनव बताते हैं कि उन्हें रिलायंस एंटरटेनमेंट ने बचा तो लिया लेकिन ‘बेशरम’ को लेकर इतना नकारात्मक प्रचार अभियान चलाया गया कि वो फ्लॉप हो जाए। इसके बाद फिल्म के सैटेलाइट राइट्स न बिकने देने की कोशिश की गई लेकिन रिलायंस और Zee के बीच किसी तरह डील हो गई। उन्होंने बताया कि उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही हैं और उनके परिवार के महिला सदस्यों को बलात्कार की धमकी मिलती है।

उन्होंने कहा कि पुलिस ने भी जाँच करने से इनकार कर दिया और जाँच हुई भी तो निष्कर्ष नहीं निकल पाया कुछ। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ ये सब अभी भी चालू है, वो लड़ रहे हैं। बाद में कई लोगों ने अभिनव के स्वास्थ्य और स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की, जिसके बाद उन्होंने एक अन्य फेसबुक पोस्ट लिख कर बताया कि वो बिलकुल ठीक हैं। उन्होंने विवेक ओबेरॉय और कंगना रनौत का समर्थन किया।

सुशांत सिंह राजपूत के अंतिम संस्कार में भाग लेने के बाद विवेक ओबेरॉय ने कहा कि जब उन्होंने सुशांत के पिता को अपने बेटे की चिता को अग्नि देते हुए देखा तो उनकी आँखों में जो दर्द झलक रहा था वो बर्दाश्त के बाहर था। विवेक ने लिखा, “मैंने सुशांत की बहन को रोते देखा और उसे वापस आ जाने के लिए कहते देखा तो मैं बता नहीं सकता कि मुझे अपने मन में कैसा अनुभव हुआ। काश मैं सुशांत को अपने अनुभवों के बारे में बता पाता।

वहीं कंगना ने करीब दो मिनट का वीडियो जारी कर बॉलीवुड इंडस्ट्री से सवाल पूछा है कि सुशांत की मौत आत्महत्या थी या प्लान्ड मर्डर? कंगना ने लिखा, “सुशांत सिंह की मौत ने हम सबको झकझोर के रख दिया है। लेकिन वे लोग, जो इस चीज में माहिर हैं कि कैसे समानांतर नैरेटिव चलाया जाए, वो ये कहने लगे हैं कि जिनका दिमाग कमजोर होता है, वे डिप्रेशन में आते हैं और सुसाइड कर लेते हैं।

मटन के नाम पर बेचा जा रहा था बीफ: कर्नाटक से शहबाज, अफरोज और रहमान गिरफ्तार

कर्नाटक के हसन जिले के अर्सिकेरे नगर में मटन की जगह बीफ बेचने का काम न जाने कितने दिनों से जोरों पर था। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने इस संबंध में अब 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। तीनों की पहचान शहबाज, अफरोज और रहमान के तौर पर हुई है। इन पर आरोप है कि ये तीनों अर्सिकेरे में अपने मटन स्टॉल पर बीफ बेचते थे।

इन तीनों को पुलिस ने अपने ऑपरेशन के दौरान गिरफ्तार किया। इसके अलावा पुलिस ने इस मामले में कसाईखाने के मालिकों के ऊपर कर्नाटक गौहत्या और मवेशी हत्या रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक एनजीओ के संज्ञान में आने के बाद इस केस का खुलासा हुआ। साथ ही कई गौवंशों को अवैध कसाईखाने से निकाला जा सका।

बेंगलुरु मिरर के अनुसार, गौ ज्ञान फाउंडेशन की कार्यकर्ता नंदिनी मटियानी बताती हैं कि उन्हें शुक्रवार को इस बारे में सूचना मिली कि अर्सिकेरे नगर के टिप्पू रोड में कई अवैध बूचड़खाने चल रहे हैं, जहाँ सैकड़ों की तादाद में गायों को काटा जाता है और फिर उसे मटन के नाम पर बेच दिया जाता है।

इसकी जानकारी मिलते ही नंदिनी संगठन के 4 सदस्यों के साथ अर्सिकेरे के टिप्पू सड़क पर स्थित मटन बाजार गईं। इस दौरान उनके साथ पुलिस भी थी। वहाँ जाकर संगठन ने कुछ दुकानदारों को रंगे हाथ पकड़ा लेकिन कुछ लोग अपनी दुकाने बंद करके भागने में सफल हो गए।

कसाईखाने के स्थिति के बारे में बात करते हुए नंदिनी कहती है, “वहाँ बहुत गंदगी थी। हमें गायों के सिर और पैर एक कोने में पड़े मिले। कुछ बछड़े भी थे। बावजूद ऐसे सख्त नियम के कि आप एक जानवर को दूसरे जानवर के सामने नहीं मार सकते, फिर भी वहाँ एक छोर पर मृत गाये थीं और दूसरी तरफ बछड़े रो रहे थे। वहाँ हमें एक पूरा कमरा शवों व हड्डियों से भी भरा मिला।”

अपनी इस रेड में गौ ज्ञान फाउंडेशन के लोगों को कटे जानवरों की हड्डियाँ और उनके शव भी इलाके में खुले पड़े मिले। एक अन्य कार्यकर्ता रूमा जे के मुताबिक, इस रेड में उन्होंने 6 बछड़ों और 7 गायों को रेस्क्यू किया और उन्हें मांड्या के उस आश्रयगृह में भेज दिया, जहाँ पहले से ही 1300 गायों को बचाकर रखा गया है।

बता दें कि संगठन ने अब इस मामले के संबंध में अर्सिकेरे टाउन पुलिस को शिकायत दर्ज करवा दी है। पुलिस ने उपयुक्त प्रावधान Karnataka Prevention of Cow Slaughter and Cattle Prevention Act के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि इस ऑपरेशन के दौरान उन्होंने तीन लोगों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान शहबाज, अफरोज और रहमान के रूप में हुई।

…जब किया जा रहा था सुशांत सिंह राजपूत का अंतिम संस्कार, तभी सदमे में उनकी भाभी छोड़ गईं यह संसार

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद उनकी भाभी भी सदमे से चल बसीं। बताया जा रहा है कि उनकी भाभी सुशांत की मृत्यु को बर्दाश्त नहीं कर सकीं। वो पहले से ही बीमार चल रही थीं। सुधा देवी की मौत उस समय हुई, जब सुशांत का मुंबई में अंतिम संस्कार चल रहा था। बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत का संयुक्त परिवार है। उनके पिता और चचेरे भाई नीरज सिंह बबलू सारी प्रक्रिया पूरी करने मुंबई पहुँचे थे।

बता दें कि बबलू छातापुर से लगातार चौथी बार विधायक चुने गए हैं। सुधा देवी सुशांत सिंह राजपूत की चचेरी भाभी थीं। सुशांत सिंह राजपूत के पैतृक गांव पूर्णिया के मलडीहा में रह रहीं सुधा देवी ने अपने देवर की मौत की ख़बर सुनने के साथ ही भोजन-पानी त्याग दिया था। पूर्णिया में उनके गाँव और पटना के राजीव नगर से सुशांत की बचपन की यादें जुडी हुई हैं। दोनों ही क्षेत्रों के लोग उनकी मौत के बाद रोते दिखे।

सुशांत की भाभी अपने घर के बाहर जुटी लोगों की भीड़ देखते ही बार-बार बेहोश हो जा रही थीं। परिजनों ने उन्हें सांत्वना दी, जिसके बाद उन्हें डॉक्टरों से भी दिखाया गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। वह बार-बार यही पूछ रही थीं कि सुशांत ठीक है या नहीं? फिर देर शाम उनकी भी मौत हो गई, जिससे परिजनों पर गम की दोहरी मार पड़ गई। उनका कुछ दिनों से इलाज भी चल रहा था।

खगड़िया स्थित सुशांत के ननिहाल में भी मातम का माहौल है। वो जब भी बिहार आते थे तो इलाक़े के लोगों से ज़रूर मिला करते थे। सुशांत सिंह राजपूत के पिता के बारे में कहा जा रहा है कि वो भी गहरे सदमे में हैं और किसी से भी बातचीत नहीं कर रहे हैं। मुंबई में बेटे की लाश देख कर उन्हें और गहरा धक्का लगा।

वहीं सुधा देवी के पति और सुशांत के चचेरे भाई अमरेंद्र सिंह का तो रो-रो कर बुरा हाल है। उन्होंने ‘दैनिक जागरण’ से बताया कि सोमवार (जून 15, 2020) की सुबह से उनकी पत्नी की तबियत ज्यादा खराब होने लगी थी। शाम 5 बजे के क़रीब उन्होंने अंतिम साँस ली। अमरेंद्र सिंह रोते हुए बार-बार यही कह रहे थे कि पहले भाई ने साथ छोड़ा, अब पत्नी भी चली गईं। अब वे किसके सहारे जिंदा रहेंगे।

हाल ही में 8 जून को सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व-मैनेजर दिशा सालियान ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने मुंबई के मलाड स्थित इमारत में 14 मंजिल से कूद कर आत्महत्या की थी। सुशांत सिंह राजपूत के घर से हाइपरटेंशन और डिप्रेशन की दवाओं के पेपर मिले हैं। उनके मामा ने आरोप लगाया है कि ये आत्महत्या नहीं है क्योंकि सुशांत ऐसा कर ही नहीं सकते थे। वहीं मुंबई पुलिस अभिनेता के पिछले 6 माह से डिप्रेशन में होने की बातें कह रही है।

‘गाय का मीट बनाओ, हम सब खाएँगे’ – आदिवासी से ईसाई बने रमेश के घर पादरियों का खेल – VHP के साथ दर्द किया साझा

लॉकडाउन के दौरान झारंखड में ईसाई मिशनरियों के द्वारा आदिवासियों का धर्मांतरण जारी है। इस बीच एक वीडियो हमारे पास आया है, जिसमें करीब एक साल पहले आदिवासी से ईसाई बने एक परिवार के मुखिया ने अपना दर्द बयाँ करते हुए घर वापसी की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि पादरी ने उनके घर जाकर पत्नी को गाय का मांस बनाने और उन्हें उसे खाने के लिए उकसाया।

विश्व हिंदू परिषद के झारखंड-बिहार के क्षेत्रीय संगठन मंत्री केशव राजू की ओर से ऑपइंडिया को एक ऐसे व्यक्ति का वीडियो भेजा गया, जिसके परिवार का करीब एक साल पहले पादरियों ने प्रलोभन देकर धर्मांतरण करा दिया था। इस व्यक्ति की पहचान रमेश हांसदा, (संथाली जनजाति) निवासी सोपोडेरा, परसुडीह, जिला जमशेदपुर रूप में हुई है।

ऑपइंडिया के पास आए वीडियो में पीड़ित रमेश ने बताया, “इस बीच मेरा शरीर कमजोर हो गया, मैं काम धंधा नहीं कर सका। इस दौरान पादरी लोग आ गए और बोले कि हमें क्रिश्चियन धर्म में शामिल करना है। फिर लड़का लोग आया था और बोला कि पार्टी बनाएँगे। बोला- गाय माँस खाते हो? हम नहीं खाते हैं। वो लोग एक-डेढ़ किलो (गो मांस) लाया था। फिर उसने मेरी वाइफ की ओर इशारा करके बोला कि इसे सब आता है, ये बनाएगी। वाइफ ने मना कर दिया। वाइफ ने कहा कि यहाँ नहीं बनाएँगे और बनाने भी नहीं देंगे। फिर वो लोग चले गए।”

रमेश ने बताया कि पादरी हमारे पीछे करीब दो साल से पड़ा हुआ था। वह भी इसलिए कि घर की हालत ठीक नहीं है, इसको योजना करके क्रिश्चियन बनाया जाए।

जब रमेश से पूछा गया कि अभी आप क्या सोच रहे हैं? तो उन्होंने स्पष्ट बताया, “इस टाइम कुछ नहीं मिल रहा है। थोड़ा सा राशन लॉकडाउन में आया था। एक-दो बार दिया है। अभी तो कुछ नहीं आता है। हम चर्च में नहीं जाते हैं।” इसके बाद रमेश से पूछा गया कि आगे क्या इरादा है? इस सवाल पर उन्होंने बताया कि वो फिर से हिंदू धर्म यानी आदिवासी धर्म में शामिल होंगे।

दरअसल रमेश हांसदा से जमशेदपुर जिले के विहिप (विश्व हिंदू परिषद) जिलामंत्री जनार्दन पंडित ने उनके घर जाकर उस समय बात की, जब उनके पास सूचना आई थी कि रमेश ईसाई धर्म को त्याग कर वापस अपने धर्म में आना चाहते हैं।

जनार्दन पंडित ने ऑपइडिया से बातचीत में बताया, “रमेश के परिवार में उनकी पत्नी और बच्चे रहते हैं। आदिवासी समाज से आने वाले रमेश की आर्थिक स्थिति कमजोर है। इसी का फायदा उठाकर पादरियों ने इलाज के बहाने चर्च में बुलाया और प्रलोभन देकर उनका धर्मांतरण करा दिया।”

जनार्दन पंडित ने बताया कि पादरी लोग काफी समय से उनके परिवार का धर्मांतरण कराने की जुगत में लगे हुए थे, लेकिन वह कभी चर्च नहीं गए। आज उन्हें अपने धर्मांतरण पर अफसोस है और वह फिर से हिंदू धर्म में वापसी करना चाहते हैं।

आपको बता दें कि रविवार (14 जून, 2020) को विश्व हिंदू परिषद झारखंड के पदाधिकारियों ने एक पत्रकार वार्ता के दौरान दावा किया था कि लॉकडाउन के दौरान झारखंड में बड़े पैमाने पर ईसाई मिशनरियों द्वारा आदिवासियों का धर्मांतरण किया जा रहा है। इसे सफल बनाने के लिए चर्च के एजेंट गाँव-गाँव जाकर हिंदुओं के खिलाफ जहर उगल रहे हैं।

इस दौरान विहिप झारखंड-बिहार के क्षेत्रीय संगठन मंत्री केशव राजू ने बताया कि फिलहाल वो राज्य के सभी जिलों में धर्मांतरण के काम में लगे लोगों और प्रलोभन में आकर धर्म बदलने वाले लोगों का डेटा इकट्ठा कर रहे हैं। इस कार्य के पूरा होते ही इस सूची को प्रशासन को सौंपा जाएगा और प्रशासन पर इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए दबाव भी बनाया जाएगा।

हरियाणा: नूंह के जमालगढ़ गाँव में छापेमारी, घरों में बने थे गोदाम, 2572 गायों की खाल बरामद

हरियाणा के नूंह जिले में चल रहे बड़े पैमाने पर तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस ने एक तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस ने जमालगढ़ गाँव से लोगों के घरों और गोदामों से 2,572 गोवंश की खाल बरामद की। साथ ही पुलिस ने गाँव से एक टाटा 407 वाहन भी बरामद किया।

गोवंशों को रखने वालों के खिलाफ पुन्हाना पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले में शामिल सभी तस्करों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एसपी के आदेशों का पालन करते हुए, डीएसपी विवेक चौधरी ने 10 जून की सुबह 5 बजे से 7 बजे तक जमालगढ़ गाँव में तलाशी अभियान चलाया। तलाशी अभियान शुरू करने से पहले पुलिस ने गाँव को सील कर दिया था ताकि कोई भी गाँव से भाग न सके। इसके बाद हर घर, हर दरवाजे पर जाकर सर्च अभियान चलाया गया।

तलाशी के दौरान पुलिस को गाँव से बड़ी संख्या में गाय की खाल और एक वाहन मिला। पुलिस को मुखबिरों से सूचना मिली थी कि गाँव के कुछ निवासी दिल्ली और हापुड़ में गाय के मांस और उसकी खाल को बेचने के लिए गोहत्या करते हैं। मुखबिर ने पुलिस को बताया कि यदि उन्होंने गाँव में छापेमारी को तो भारी मात्रा में गोवंश बरामद होंगे।

छापेमारी के दौरान जब पुलिस आसिफ नाम के एक शख्स के घर पहुँची तो पाया कि 9 लोग टाटा 407 वाहन पर गाय की खाल लोड कर रहे थे। पुलिस को देखते ही सभी आरोपित कार को छोड़ कर भाग गए। आरोपितों की पहचान निन्ना उर्फ निज़ाम, सलामू, दीनू, अहमद हुसैन, बाबुदीन, असर, इलियास और मामन के रूप में हुई है। इन सभी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।

पुलिस ने वाहन से तकरीबन 414 गायों की खाल बरामद की। इसके बाद उन्होंने असर के घर में बने एक गोदाम पर छापा मारा जहाँ से 620 गायों की खालें मिलीं। निज़ामू, फ़ारुख, हसीम के घरों में बने गोदामों पर छापे से कुल 1060 गायों की खालें बरामद हुई।

इसके बाद दीनू, अहमद हुसैन, इलियास और मामन के घरों में बने गोदामों पर छापे मारे गए। जहाँ से कुल 478 गायों की खाल मिली। अभियुक्त निन्नह उर्फ निजाम, फारूक, हासिम, दीनू, अल्ली, आसिफ, निजाम, मुस्तकीम, नियाजू कुल 2572 गाय की खाल और एक टाटा 407 के साथ पाए गए।

गौरतलब है कि हरियाणा पशु तस्करों के लिए फलते-फूलते मैदान के रूप में उभरा है। जुलाई 2019 में गो-तस्करों का विरोध करने पर गोपाल नाम के एक युवक की हत्या कर दी गई थी। इसी तरह, हरियाणा और यूपी में पशु तस्करों द्वारा हिंसक हमलों के कई मामले सामने आए हैं। ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं, जब पशु तस्करों ने पुलिस पर गोली चलाए। हरियाणा के मेवात को पशु तस्करी और अवैध वध का केंद्र माना जाता है।