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उइगरों पर किया अत्याचार, इसलिए चीन का कोरोना वायरस से हुआ ये हाल: इलियास शराफुद्दीन

चीन में फैला कोरोना वायरस इस समय वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय है। करीब 132 लोग इसके कारण अपनी जान गवा चुके हैं, जबकि करीब 6000 लोग इसकी चपेट में हैं। ऐसे में इस संवेदनशील मुद्दे पर विवादास्पद मुस्लिम धर्मगुरु इलियास शराफुद्दीन ने कोरोना वायरस को लेकर बेतुका बयान दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्लामी धर्मगुरु ने कहा है कि उइगरों से क्रूरता करने के कारण अल्लाह ने चीन पर इस वायरस का कहर भरपाया है और उन्हें दंडित किया है। एक ऑडियो में धर्मगुरु को चीन से कहते सुना जा सकता है कि याद करो कैसे उन्होंने मुस्लिमों को धमकी दी थी और दो करोड़ मुस्लिमों की जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश की। उइगरों को शराब पीने के लिए मजबूर किया गया, उनकी मस्जिदों को तोड़ दिया गया और उनकी पवित्र पुस्तकों को जला दिया गया। इलियास ने कहा कि चीन ने सोचा कि कोई भी उन्हें चुनौती नहीं दे सकता, लेकिन अल्लाह सबसे शक्तिशाली है, अल्लाह ने चीन को सजा दी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार धर्मगुरु इलियास ने कहा कि रोम, फारस और रूस को याद करें, जो अहंकारी थे और इस्लाम के खिलाफ खड़े थे। मगर, अल्लाह ने सभी को नष्ट कर दिया।

शराफुद्दीन ने भारत के दक्षिणपंथी संगठनों को “गोडसे के बच्चे” और हिंदुत्व आतंकी करार देते हुए चेतावनी दी कि इससे पहले देर हो जाए, वे अल्लाह से डरें। केवल उनकी इबादत करें। लोगों को मस्जिद जाने से न रोकें। मुस्लिमों को इस्लाम का अनुसरण करने से न रोकें। वरना वे भी चीन की तरह बर्बाद हो जाएँगे।

गौरतलब है कि ये बात बिलकुल सच है कि चीन ने शिनजियांग क्षेत्र के उइगरों पर क्रूरता की हर हदें पार हो रही हैं। वहाँ एक लाख से अधिक उइगरों को नजरबंदी शिविरों में बंद कर दिया गया है। उनको प्रताड़ित किया जा रहा है। उनका यौन शोषण हो रहा है। जिसे किसी भी कीमत पर जस्टिफाई करना सही नहीं है। लेकिन ये भी ध्यान रखने वाली बात की ये सब वहाँ का प्रशासन और सरकार की देख रेख में हो रहा है और कोरोना वायरस एक गंभीर बीमारी है। जिसकी चपेट में वहाँ की जनता आ रही है। मानवता के स्तर पर जिस तरह उइगरों के साथ चीन का बर्ताव गलत है। वैसे ही इलियास का बयान भी निंदनीय है।

शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों ने लेखक और वकील से की बदसलूकी, राहुल कँवल ने कैमरा घुमा लिया

इंडिया टुडे के पत्रकार राहुल कँवल ने 29 जनवरी को अपना प्राइम टाइम शाहीन बाग से किया। राहुल ने पहले घूम-घूम कर प्रदर्शनकारियों से बात की और फिर शो के लिए बुलाए गए अतिथियों की साउंडबाइट ली। प्राइम टाइम में बतौर गेस्ट कथित पत्रकार सबा नकवी, वरिष्ठ पत्रकार जावेद मंसारी, पॉलिटिकल एनॉलिस्ट मनीषा परियम, वकील राघव अवस्थी और लेखक शांतनु गुप्ता शामिल थे।

चूँकि, राहुल कँवल लगातार प्रदर्शनकारियों का समर्थन कर रहे थे, तो वहाँ हर कोई उनसे बड़ी तहजीब से बात कर रहा था। लेकिन जब वकील राघव अवस्थी और लेखक शांतनु गुप्ता ने बोलना शुरू किया तो कुछ प्रदर्शनकारी उन पर चढ़ गए और उन्हें बोलने से रोकने लगे।

प्रदर्शनकारियों के बर्ताव से भी ज्यादा शर्मनाक बात यह थी कि राहुल कँवल ने इस दौरान अपने गेस्ट के बात सुनने से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की ओर माइक कर दिया। शांतनु गुप्ता और राघव अवस्थी को बोलने का मौका भी नहीं दिया।

29 जनवरी को हुए इस प्राइम टाइम में 15.45 सेकेंड के लेकर 18 मिनट तक के स्लॉट के बीच राहुल कँवल की इस हरकत को स्पष्ट देखा जा सकता है। हम देख सकते हैं कि किस तरह जब मनीषा परियम, सबा नकवी का पक्ष जानने के बाद राघव के बोलने का चांस आया, तो उन्होंने वहाँ प्रदर्शन पर बैठी सभी महिलाओं की सराहना की और कहा कि प्रदर्शनकारियों को शरजील जैसे लोगों को इस प्लोटफॉर्म का गलत इस्तेमाल नहीं करने देना चाहिए। यहाँ उन्होंने ये भी बताने की कोशिश की सीएए का भारतीय नागरिकों से लेना-देना नहीं है।

हालाँकि, राघव ने कैमरे पर कोई आपत्तिजनक बात नहीं कही थी। लेकिन, वीडियो को गौर से देखें तो पता चलेगा कि जैसे ही उन्होंने शरजील का नाम लिया भीड़ बदसलूकी पर उतर आई। उन्हें पीछे धकेल दिया गया और कई लोग जोर-जोर से नारे लगाने लगे। इसके बाद शांतनु गुप्ता ने वहाँ आकर उनकी बात को समझाने की कोशिश की। लेकिन राहुल कँवल तो प्रदर्शनकारियों की ओर माइक घुमा चुके थे।

राघव के अनुसार इस घटना के बाद वहाँ मौजूद लोग एक-दूसरे को उनकी पहचान करवाने लगे कि ये लंबे बाल वाला वही शख्स है जिसने शरजील का नाम लिया। उनके मुताबिक शांतनु के बीच में आने के कारण उन्हें भी वहाँ मौजूद लोग कहने लगे कि ये आदमी भी उस लंबे बाल वालों के साथ था।

राघव के मुताबिक, वहाँ कई प्रदर्शनकारियों ने उनकी ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्होंने शरजील का नाम लिया, इसलिए उन्हें पकड़ लेना चाहिए। इसके बाद राघव और शांतनु दोनों को धक्का देकर वहाँ से चले जाने को कहा गया। लेकिन राघव ने जाने से मना कर दिया। उन्हें और शांतनु दोनों को डर था कि अगर वो अकेले गए, तो पता नहीं उनके साथ क्या होगा। उन्हें आशंका थी कि प्रदर्शनकारी नुकसान पहुँचा सकते हैं।

राघव बताते हैं कि इस घटना के दौरान, वरिष्ठ पत्रकार जावेद मंसारी ने भी प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की थी कि आखिर वो क्या कहना चाह रहे हैं। लेकिन उनकी बात भी शायद किसी ने नहीं सुनी। बाद में दोनों पैनलिस्टों को स्टेज के पीछे से उतारा गया। इस दौरान पुलिस ने उनकी सुरक्षा के लिए बैरिकेड्स लगाए हुए थे।

अब, सोचिए एक लेखक और वकील के लिए वह स्थिति कितनी भयावह हो गई। वो भी तब जब वो एक मीडिया समूह के साथ थे। लेकिन, राहुल कँवल को देखकर लगता है कि उनका इन सबसे क्या लेना-देना। वो तो अपना एजेंडा साधने गए थे। अब प्रदर्शनकारी उनके पैनलिस्टों के साथ कुछ भी करें।

शर्म की बात है कि इतना सब होने के बावजूद उन्होंने अपने ट्विटर पर इस घटना का जिक्र तक नहीं किया। उन्होंने सिर्फ़ शाहीन बाग की महिलाओं से बातचीत के बारे में अपने फॉलोवर्स को बताया। इसे देख राघव अवस्थी आहत हो गए और उन्हें जवाब दिया कि अगर वे उक्त घटना के बारे में भी ट्वीट करते तो कितना अच्छा होता।

राहुल कँवल के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए राघव ने राहुल से कहा कि को अपने शो में आए अतिथियों की सुरक्षा का इंतजाम करना चाहिए था और कैमरा घुमाकर उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए था।

राघव के अलावा शांतनु ने भी इस घटना का जिक्र करते हुए ट्वीट किया और सबा नकवी समेत जावेद मंसारी को डिबेट के बीच में आकर उनकी मदद करने के लिए धन्यवाद दिया।

लेकिन, इतने के बावजूद भी इंडिया टुडे के पत्रकार राहुल कँवल ने दोनों पैनलिस्टों की शिकायत पर सफाई देने की बजाए या उनकी स्थिति के लिए माफी माँगने की जगह, उनकी प्रतिक्रिया को terrible कह दिया। बाद में कई लोगों ने इंडिया टुडे की वीडियो से क्लिप काटकर उसे शेयर किया।

बाद में शांतनु ने उनके ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि ये उनके और राघव का सिर्फ़ पक्ष सुनने की बात नहीं थी। बल्कि वहाँ उनके साथ हुए बर्ताव की बात थी। शांतनु ने शिकायत की कि जब लोग उन्हें पहचानकर पकड़ने की बात कर रहे थे, गुस्से से आगे बढ़ रहे थे, तब आखिर क्यों इंडिया टुडे का कोई शख्स भीड़ को सँभालने नहीं आया।

ऑपइंडिया से बात करते हुए राघव ने इंडिया टुडे को सलाह दी कि उन्हें कुछ पेशेवर रवैया दिखाना चाहिए और अपने पैनलिस्टों की इस तरह शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों द्वारा लिंच होने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए।

राघव ने बताया कि वे जब जर्मनी में थे तब उन्हें White Supremacist rally में शामिल होने की बहुत इच्छा थी। लेकिन जब वहाँ की रैली ने चिल्लाना शुरू किया कि ये हमारी जमीन है, तब बतौर brown man उन्हें असहज महसूस हुआ था, बिलकुल वैसे ही जैसे शाहीन बाग में हुआ।

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शरजील ‘एक प्रेम कथा’: आतंकी जाकिर मूसा की तरह शरजील इमाम को भी जानेमन ने ही करवाया गिरफ्तार

गत मई को जब कश्मीर के वांटेड आतंकी जाकिर मूसा भारतीय सेना ने मार गिराया था, तब मूसा की ही एक तत्कालीन प्रेमिका ने उसे पकड़वाने में सेना की मदद की थी। इससे पहले आतंकवादी बुरहानी वानी भी अपनी प्रेमिका की वजह से ही मारा गया था। इस बार मामला राजद्रोह के आरोप में फँसे हुए शाहीन बाग़ के मास्टर माइंड शरजील इमाम का है। शरजील इमाम की गिरफ्तारी के बाद उसके पकड़े जाने की कहानी के पीछे भी उसकी प्रेमिका का हाथ बताया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, क्राइम ब्रांच दिल्ली पुलिस शरजील को लेकर बुधवार (जनवरी 29, 2019) दोपहर नई दिल्ली पहुँची। राजद्रोह के केस होने के बाद दो दिन से बिहार में छापेमारी करने पहुँचे पाँच सदस्यों के पुलिस दल को यह बात पता चली की शरजील अपनी प्रेमिका के संपर्क में है। जिसके बाद पुलिस ने शरजील की प्रेमिका से संपर्क किया और उसकी मदद से शरजील इमाम गिरफ्तार हो पाया।

दिल्ली क्राइम ब्रांच और बिहार पुलिस ने सोमवार (जनवरी 27, 2019) को शरजील के जहानाबाद स्थित पैतृक घर पर छापा मारकर उसके छोटे भाई को हिरासत में ले लिया था। भाई से पूछताछ के दौरान पुलिस को शरजील के किसी दोस्त इमरान का पता चला था। जब इमरान को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो शरजील की प्रेमिका के बारे में जानकारी मिली।

इसके बाद पुलिस ने शरजील की प्रेमिका पर दबाव डालकर उससे शरजील को मलिक टोला स्थित इमामबाड़े में मिलने के लिये बुलाया। जैसे ही शरजील इमामबाड़े में अपनी प्रेमिका से मिलने पहुँचा, वैसे ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस द्वारा पूछताछ के बाद शरजील इमाम अपने भाषण को लेकर पछतावा ना होने की बात स्वीकार की है। साथ ही, उसने कहा कि वह अपना विरोध जारी रखेगा। दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया है कि शरजील इमाम घोर कट्टरपंथी है और उसका मानना है कि भारत को एक इस्लामी राज्य होना चाहिए। पूछताछ में उसने यह भी माना है कि उसके अलग-अलग भाषणों के वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।

ज्ञात हो कि देश के विभिन्न हिस्सों में राजद्रोह का मुकदमा दर्ज होने के तुरंत बाद से ही शरजील इमाम फरार हो गया था। शरजील ने अपने भाषणों में देश को बाँटने, असम को भारत से काट देने जैसी बातें कही थी। उसने दिल्ली, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय समेत पटना में भी भाषण दिए। ऐसे में पुलिस अब शरजील को जामिया और अलीगढ़ ले जाने की तैयारी कर रही है जिससे वीडियो में दिखाई दे रही जगहों को चिह्नित किया जा सके। 

मोतिहारी से ​हिरासत में लिए गए कन्हैया कुमार

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को ​हिरासत में ​लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उसे बिहार के बेतिया जिले के भितिहरवा आश्रम से हिरासत में लिया गया। वह यहॉं
‘जन-गण-मन यात्रा’ यात्रा की शुरुआत करने वाला था। यह यात्रा पश्चिमी चंपारण के बापूधाम से शुरू होकर 29 फरवरी को पटना के गॉंधी मैदान में खत्म होनी थी।

यात्रा की शुरुआत में सीपीआई नेता कन्हैया कुमार एक सभा को संबोधित करने वाला था। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार उसे इसकी इजाजत नहीं दी गई थी। प्रभात खबर के अनुसार एसडीओ ने कन्हैया कुमार को भाषण देने की इजाजत नहीं दी तो उसके समर्थकों ने हंगामा किया। इसके बाद कन्हैया अपने वाहन पर ही खड़े होकर लोगों को संबोधित करने लगा। फिर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। कन्हैया ने ट्वीट कर हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की है।

इससे पहले कन्हैया ने शरजील इमाम की गिरफ्तारी को लेकर केंद्र की मोदी सरकार की आलोचना की थी। उसने भारत के टुकड़े करने की बात कहने वाले इमाम पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किए जाने को लेकर सवाल उठाए थे।

जेएनयू में 2016 में हुई देश विरोधी नारेबाजी में कन्हैया के खिलाफ दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार देशद्रोह का मुकदमा जलाने की इजाजत नहीं दे रही है। दिल्ली पुलिस ने बीते दिसंबर में अदालत को यह जानकारी दी थी। इस मामले की अब 19 फरवरी को सुनवाई होनी है।

गौरतलब है कि 14 जनवरी 2019 को दिल्ली पुलिस ने करीब 1200 पन्ने का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था। इसमें जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन के सदस्य उमर खालिद को मुख्य आरोपित बनाया था। वहीं, सात अन्य आरोपितों में आकिब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उतर गुल, रईस रसूल, बसरत अली व खालिद बशीर भट का नाम शामिल है। इसके अलावा रामा नागा, आशुतोष, शहला राशीद, डी राजा की बेटी अपराजिता राजा, रुबैना सैफी, समर खान समेत 36 छात्रों को भी आरोपित बताया गया है।

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भारत को इस्लामी मुल्क बनाना चाहता है शरजील इमाम, पूछताछ में माना- वीडियो से नहीं हुई छेड़छाड़

शाहीन बाग का मास्टरमाइंड शरजील इमाम भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहता है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने यह खबर दी है। इसके मुताबिक वह कट्टरपंथ से बहुत ज्यादा प्रभावित है। उसने माना है कि उसके ​अलग-अलग भाषणों के वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।

सूत्रों ने बताया कि पुलिस इस्लामिक यूथ फेडरेशन और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के साथ उसके संपर्कों की पड़ताल कर रही है। उसने कहा है कि उसे अपनी गिरफ्तारी का कोई पछतावा नहीं है। उसके सारे वीडियो जॉंच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजे गए हैं और उसके सोशल मीडिया अकाउंट की पड़ताल हो रही है।

शरजील इमाम को 28 जनवरी को बिहार के जहानाबाद के काको से गिरफ्तार किया गया था। उससे पहले लगातार चार दिनों तक उसकी तलाश में देश के कई हिस्सों में छापेमारी की गई थी। देशद्रोह के आरोपित इमाम को गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने बुधवार को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उसे 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। सुरक्षा कारणों के चलते पुलिस ने शरजील इमाम की पेशी पटियाला हाउस कोर्ट में न करके जज के साकेत काम्प्लेक्स स्थित आवास पर की गई थी।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भड़काऊ भाषण देते हुए उसने देश को तोड़ने की बात कही थी। वायरल हुए वीडियो में शरजील ने कहा था, “अब वक्त आ गया है कि हम गैर मुस्लिमों से बोलें कि अगर हमारे हमदर्द हो तो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हो। अगर वो हमारी शर्तों पर खड़े नहीं होते तो वो हमारे हमदर्द नहीं हैं। एक चीज तो यह है और दूसरी चीज जो मैंने बिहार में देखा। मैं यहाँ पर बिहार का उदाहरण दूँगा। वहाँ पर बहुत सारी रैलियाँ हो चुकी हैं। हर रोज एक-दो बड़ी रैलियाँ होती हैं। कन्हैया वाली रैली देखी थी। 5 लाख लोग थे उस रैली में। अब मसला यहाँ पर यह है कि अगर 5 लाख लोग हमारे पास ऑर्गेनाइज्ड हों तो हम नार्थ ईस्ट और हिंदुस्तान को परमानेंटली काट कर सकते हैं। परमानेंटली नहीं तो कम से कम एक-आध महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से काट ही सकते हैं। मतलब इतना मवाद डालो पटरियों पर, रोड पर कि उनको हटाने में एक महीना लगे। जाना हो तो जाएँ एयरफोर्स से।”

उसने कहा था, “असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी ये हमारी बात सुनेंगे। असम में मुस्लिमों का क्या हाल है, आपको पता है क्या? CAA-NRC लागू हो चुका है वहाँ। डिटेंशन कैंप में लोग डाले जा रहे हैं और वहाँ तो खैर कत्ले-आम चल रहा है। 6-8 महीनों में पता चलेगा कि सारे बंगालियों को मार दिया गया वहाँ, हिंदु हो या मुस्लिम। अगर हमें असम की मदद करनी है तो हमें असम का रास्ता बंद करना होगा फौज के लिए और जो भी जितना भी सप्लाई जा रहा है बंद करो उसे। बंद कर सकते हैं हम उसे, क्योंकि चिकन नेक जो इलाका है, वह मुस्लिम बहुल इलाका है।”

वीडियो में शरजील ने चिकन नेक को बंद करने की बात कही थी। बता दें कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर को चिकन नेक कहा जाता है। इस चिकन नेक के माध्यम से ही नॉर्थ इंडिया हिंदुस्तान की मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ है। इस गलियारे की लंबाई 21 से 24 किमी है। इससे भूटान, म्यामार, बांग्लादेश और चीन जैसे देशों की सीमा जुड़ती है। यहीं से भारत में घुसपैठ सबसे अधिक होती है।

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शाहीन बाग में कहाँ से आ रहा है दाना-पानी: आसिफ तूफानी ने उगल दिए सारे राज

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के ख़िलाफ़ दिल्ली के शाहीन बाग में करीब डेढ़ महीने से प्रदर्शन चल रहा है। इस प्रदर्शन ने कई सवाल पैदा किए हैं। इनके जवाब जानने में हरेक को दिलचस्पी है। मसलन, प्रदर्शन के लिए फंडिंग कौन कर रहा है? प्रदर्शनकारियों के खाने-पीने का इंतजाम कहाँ से हो रहा है? उनका खर्च कौन उठा रहा है? जिस तरह के वीडियो सामने आए हैं उससे यह भी सवाल पैदा हुआ है कि यह किसकी साजिश है? प्रदर्शनकारी किनके हाथों की कठपुतली हैं? मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस बात की जॉंच की जा रही है।

इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के क्रम में एबीपी न्यूज ने शाहीन बाग के कुछ प्रदर्शनकारियों से बात की। इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने जो खुलासे किए वह हैरान करने वाला था। असलम तूफानी नामक इस प्रदर्शनकारी के जवाब का वीडियो वायरल भी हो रहा है।

आसिफ तूफानी से जब एबीपी के रिपोर्टर ने पूछा कि आखिर इस प्रदर्शन के लिए पैसा कहाँ से आ रहा है? आसिफ ने जवाब दिया कि उसे ये सब मालूम नहीं है। लेकिन, उनके लिए ये सब अल्लाह कर रहे हैं और उन्हें मिलने वाली सब सुविधा कुदरती मदद है। वे अल्लाह के बंदे हैं और उन्हें इंसान ने पैदा नहीं किया। सब ऊपर वाले ने किया।

एबीपी की वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि रिपोर्टर आसिफ तूफानी की बात सुनकर उन्हें समझा रहे हैं कि लोग उनकी इस बात पर यकीन नहीं करेंगे कि प्रदर्शन के लिए अल्लाह पैसे भेजते हैं। लेकिन आसिफ फिर भी अपनी वही बात दोहराता है कि उसे कुछ नहीं मालूम, बस उनके लिए सब अल्लाह कर रहे हैं।

वीडियो में आसिफ को स्पष्ट तौर पर कहते सुना जा सकता है कि उन्हें कुदरती रूप से सारा सामान सुबह एक जगह पर रखा मिलता है और वो सिर्फ़ उसे उठाकर बाँटने का काम करते हैं। जिसे सुनकर पत्रकार कहते हैं कि वो उम्मीद करते हैं कि ऐसा चमत्कारी खाना उन सब लोगों को मिले। जिन्हें खाने की जरूरत हैं।

गौरतलब है कि एबीपी द्वारा शाहीन बाग प्रदर्शन की इस रिपोर्टिंग की 1.40 मिनट की यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर शेयर हो रही है। लोग ये कहकर मजाक उड़ा रहे हैं कि शाहीन बाग पर अब चमत्कार भी होने लगे। यूजर्स का कहना है कि अब बस देखना ये है कि अल्लाह आखिर कब तक इनका खर्चा अफॉर्ड करते हैं। कुछ गृह मंत्रालय और गृह मंत्री को टैग करके बता रहे हैं कि वे लोग भी देखें कि ये कुदरती सहायता कैसे आ रही है।

देशद्रोह के आरोपित शाहीन बाग़ सरगना शरजील की कोर्ट में पेशी: 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया

मायावती के पति लगाते रहे गुहार, शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों ने एंबुलेंस को नहीं दिया रास्ता

शरजील इमाम को ‘देशद्रोही’ कहने पर चुनाव विश्लेषक के साथ शाहीन बाग़ मीडिया संयोजक ने की बदसलूकी

ऐसे कैसे चलेगा खान साहब… पुलिस का ये अंदाज देख भौंचक रह गए लोग

पुलिस वाले भी हमारी आप की तरह हाड़-मांस के ही बने होते हैं। फिर भी अमूमन उनका ह्यूमर खाकी के पीछे छिप जाता है। लेकिन, पुणे पुलिस ने अपने ह्यूमर से सोशल मीडिया यूजर्स को चौंका दिया है। वैसे पुणे पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर हमेशा कुछ न कुछ ऐसे ट्वीट आते हैं कि जिन्हें पढ़कर यूजर खुद ही रीट्वीट करने पर मजबूर हो जाए। पुणे पुलिस यूजर्स से उनकी भाषा में बात करने के लिए मशहूर है। अभी ये हालिया उदाहरण देखिए। एक ट्विटर यूजर ने ट्वीट के जरिए उनसे एक बाइक चालक की शिकायत की। यूजर ने अपने ट्वीट में लिखा कि खान साहब बिना हेलमेट के फैंसी नंबर प्लेट लगा कर गाड़ी चला रहे हैं, इन पर जरूरी कार्रवाई की जाए।

लेकिन, यहाँ इस शिकायत पर अन्य शहरों की पुलिस की तरह पुणे पुलिस ने यूजर को केवल इस मामले पर संज्ञान लेने का आश्वासन ही नहीं दिया। पुणे पुलिस ने अलग ही अंदाज में जवाब दिया। पुणे पुलिस यूजर्स की शिकायत पर लिखती है, “खान साहब को कूल भी बनना है, खान साहब को हेयर स्टाइल भी दिखाना है, खान साहब को हीरो वाली बाइक भी चलाना है, पर खान साहब को ट्रैफिक रूल्स फॉलो नहीं करना, ऐसे कैसे चलेगा खान साहब।”

देखते ही देखते पुणे पुलिस का ये पोस्ट वायरल हो गया। अभी तक पुणे पुलिस के इस ट्वीट पर 5.6k रीट्वीट्स हैं, जबकि 20.4K लाइक आ चुके हैं। पुणे सिटी के पुलिस कमिश्नर के आधिकारिक हैंडल से भी इसे रिट्वीट किया गया है।

एक यूजर लिखता है, “मेरी तो हँसी नहीं रुक रही है, वैसे कितने का चालान काटा है सर, ये भी ट्वीट करना चाहिए था। बेचारा नवाब बन रहा था पूरी नवाबी तो एक फोटो अपलोड होने से निकाल गई।”

पुणे पुलिस के इस ट्वीट के बाद लोग अन्य बाइकों की भी फोटो डालने लगे और उन लोगों को भी सबक सिखाने को कहा। कुछ इसे सीएए और एनआसी से जोड़कर चुटकी लेने लगे कि अगर खान साहब कागज़ नहीं दिखाएँगे तो कितने का जुर्माना लगेगा।

बता दें, सोशल मीडिया पर युवक की शिकायत के बाद पुलिस ने इस मामले में एक्शन ले लिया है। जिसके लिए उन्होंने यूजर को बकायादा चालान नंबर बताते हुए सूचित भी किया है।

गोरखपुर का डॉ. कफील खान मुंबई से गिरफ्तार, AMU में दिया था भड़काऊ भाषण

उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स ने बुधवार (जनवरी 29, 2020) को गोरखपुर के डॉक्टर कफील खान को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मुंबई से गिरफ्तार किया। डॉ. कफील ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ 12 दिसंबर को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में भड़काऊ भाषण दिया था। 13 दिसंबर को उसके खिलाफ अलीगढ़ के सिविल लाइन्स पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 153-A के तहत केस दर्ज किया गया और अब इसी मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई है।

कफील खान गुरुवार को एक प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मुंबई गया था। लेकिन, मुंबई पहुँचते ही उसे UPSTF ने उसे गिरफ्तार कर लिया। जानकारी के अनुसार, STF की टीम उसे लखनऊ लेकर आ चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एएमयू में 12 दिसंबर को बाब-ए-सैयद गेट पर करीब 600 छात्रों को संबोधित करने के दौरान डॉ. खान ने बिना नाम लिए कहा कि मोटाभाई’ सबको हिंदू या मुस्लिम बनना सिखा रहे हैं, लेकिन इंसान बनना नहीं। उन्होंने आगे कहा कि जब से आरएसएस का अस्तित्व हुआ है, उन्हें संविधान में भरोसा नहीं रह गया। खान ने कहा था कि CAA मुस्लिमों को सेकेंड क्लास सिटिजन बनाता है और एनआरसी लागू होने के साथ ही लोगों को परेशान किया जाएगा। उसने भीड़ को उकसाते हुए कहा था कि यह हमारे अस्तित्व की लड़ाई है। हमें लड़ना होगा।

इसके अतिरिक्त खान ने यह भी आरोप लगाया कि आरएसएस के स्कूलों में बच्चों को बताया जाता है कि दाढ़ी रखने वाले लोग आतंकवादी होते हैं। उसने कहा कि CAA लाकर सरकार यह दिखाना चाहती है कि भारत एक देश नहीं है। एफआईआर में कहा गया कि खान ने शांतिपूर्ण माहौल को भंग करने की कोशिश की।

डॉक्टर कफील खान 2017 में गोरखपुर के राजकीय बीआरडी अस्पताल में बच्चों की मौत के बाद चर्चा में आया था। इस मामले में वह सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था और करीब 7 महीने तक जेल में भी रहा। अप्रैल 2018 में हाई कोर्ट ने उसे जमानत दी थी। अपने निलंबन को लेकर चल रही जॉंच को भी उसने कोर्ट में चुनौती दी थी।

‘जंग की मशाल उठाकर करो प्रदर्शन’ – AMU में भड़काऊ स्पीच देने पर डॉ कफील खान हिरासत में

CAA और NRC पर फरहान गैंग के हर झूठ का पर्दाफाश: साज़िश का जवाब देने के लिए जानिए सच्चाई

गोडसे का डर दिखाने वालों ने हाई कोर्ट में नहीं लगने दी गाँधी की प्रतिमा, देखती रही कॉन्ग्रेस

नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मँजूरी के बाद बीते 12 दिसंबर को कानून यानी CAA बना था। लेकिन 30 जनवरी के केंद्र महात्मा गॉंधी और नाथूराम गोडसे पर सियासत गरम नवंबर के अंत में ही हो गई थी। CAA ने गॉंधी को लेकर बहस को और गरमा दिया। जहाँ समर्थकों का कहना है कि CAA के जरिए मोदी सरकार ने गॉंधी के वादे को पूरा किया है, वहीं विरोधी इसे गॉंधी के विचारों की हत्या के तौर पर पेश कर रहे हैं। हिंसक प्रदर्शनों के बाद CAA विरोधियों ने गॉंधी के पोस्टर भी थाम लिए हैं। खासकर, कट्टर मजहबी मंसूबे उजागर होने के बाद से दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी कैमरों को देखते ही गॉंधी से लेकर आंबेडकर तक के पोस्टर लहराने लगते हैं।

तो क्या इनके लिए गॉंधी प्रतीक से ज्यादा कुछ भी नहीं?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य ने ‘साहित्य अमृत’ पत्रिका के गॉंधी विशेषांक में एक लेख लिखा है। शीर्षक है ‘संघ और गॉंधीजी के संबंध’। इसमें वैद्य ने निहित स्वार्थों के लिए गॉंधी के इस्तेमाल की ओर इशारा करते हुए कहा है कि उनके नाम को भुनाने के लिए ऐसे लोग गोडसे (नाथूराम) का नाम बार-बार लेते हैं, जिन लोगों का गॉंधीजी के आचरण, विचारों और नीतियों से कोई सरोकार नहीं है।

वैसे हिंदुओं के प्रति घृणा से भरे मजहबी कट्टरपंथियों के लिए गॉंधी के प्रति नफरत नई नहीं है। इनके करतूतों को हवा देने या उस पर चुप्पी साध लेने की कॉन्ग्रेस की आदत भी पुरानी है। जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे जगमोहन ने अपनी किताब कश्मीर: समस्या और समाधान में एक घटना का विस्तार से जिक्र किया है। इससे आप इस बात को भली-भॉंति समझ सकते हैं।

जगमोहन ने लिखा है कि 1988 में 2 अक्टूबर को यानी गॉंधी जयंती पर श्रीनगर हाई कोर्ट में राष्ट्रपिता की प्रतिमा स्थापित की जानी थी। देश के मुख्य न्यायाधीश आरएस पाठक को प्रतिमा की स्थापना करनी थी। कुछ मुस्लिम वकीलों ने इसका विरोध किया। अव्यवस्था फैलाने की धमकी दी। सरकार झुक गई और कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। गौर करने वाली बात यह है कि यह वही वक्त था जब कश्मीर में कट्टरपंथ और देश विरोधी भावनाएँ गहरे पैठ रही थी। इसकी परिणति हमने 1990 में हिंदुओं के नरसंहार और उनके पलायन के रूप में देखी।

जगमोहन के अनुसार गॉंधी की प्रतिमा स्थापित करने का विरोध कर रहे वकीलों का अगुआ मुहम्मद शफी बट्ट था। शफी बट्ट नेशनल कॉन्फ्रेंस से जुड़ा था। फारूक अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस घटना के अगले ही साल 1989 में हुए आम चुनावों में शफी बट्ट को श्रीनगर से उम्मीदवार भी बनाया और वह निर्विरोध चुन भी लिया गया। हाई कोर्ट में गॉंधी की प्रतिमा लगाए जाने के विरोध पर सियासी फायदे के लिए कॉन्ग्रेस ने भी चुप्पी साध ली। उस वक्त वह सत्ता में साझेदार भी थी। इसका नतीजा क्या निकला? जैसा कि जगमोहन लिखते हैं- धर्मनिरपेक्ष देश के एक धर्मनिरपेक्ष राज्य की अदालत में गॉंधी की प्रतिमा स्थापित नहीं हो पाई।

अमेरिकी इतिहासकार ग्रेनविल ऑस्टिन ने भारतीय संविधान पर बेहद मशहूर किताब लिखी है, जिसका हिंदी अनुवाद भारतीय संविधान:राष्ट्र की आधारशिला के नाम से उपलब्ध है। ऑस्टिन ने लिखा है कि कॉन्ग्रेस कभी गॉंधीवादी थी ​ही नहीं। नेहरू के हवाले से उन्होंने लिखा है कि कॉन्ग्रेस ने समाज के गॉंधीवादी दृष्टिकोण को ‘अंगीकार’ करने की बात तो दूर उस पर ‘कभी विचार’ तक नहीं किया। ऑस्टिन लिखते हैं- गॉंधी का प्रभाव बहुत व्यापक था। उनकी यह उपलब्धि भी बहुत महती थी कि उन्होंने गॉंव और किसान को भारतीय राजनीति के केंद्र में स्थापित कर दिया था। लेकिन इन सबके बावजूद गॉंधी स्वयं अपनी पार्टी को अपने जीवन आदर्श या शासन आदर्श में दीक्षित नहीं कर सके। चूॅंकि कॉन्ग्रेस ने गॉंधी के बुनियादी आदर्श को स्वीकार ही नहीं किया था, इसलिए उससे यह उम्मीद करना शायद अनुचित था कि वह गॉंधी द्वारा विचारित संस्थाओं को गढ़ने में रुचि लेगी।

जाहिर है, गॉंधी न कभी कट्टरपंथियों के आदर्श रहे और न उनका तुष्टिकरण करने वाली कॉन्ग्रेस के लिए। गोडसे ने भले 30 जनवरी 1948 को गोली मार गॉंधी के शरीर से प्राण निकाले थे, कॉन्ग्रेस ने तो जीते-जी उनके आदर्शों का पिंडदान कर दिया था। कट्टरपंथियों ने तो ‘मेरी लाश पर देश का विभाजन होगा’ कहने वाले गॉंधी के जिंदा रहते ही मजहब के नाम पर बॅंटवारा कर लिया था।

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देशद्रोह के आरोपित शाहीन बाग़ सरगना शरजील की कोर्ट में पेशी: 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया

देशद्रोह के आरोपित शाहीन बाग़ के सरगना शरजील इमाम को गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहाँ से आरोपित शरजील को कोर्ट ने 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। इसके बाद अब पुलिस दिल्ली क्राइम ब्रांच पूछताछ करेगी।

सुरक्षा कारणों के चलते पुलिस ने शरजील इमाम की पेशी पटियाला हाउस कोर्ट में न करके जज के साकेत काम्प्लेक्स स्थित आवास पर की, यहाँ से जज ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपित को पाँच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। अब इसके बाद आरोपित शरजील से दिल्ली क्राइम ब्राँच पूछताछ करेगी। वहीं माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान कुछ नए राज सामने आ सकते हैं। जैसे कि उसके द्वारा दिए गए बयान का वास्तव में क्या अर्थ था या फिर कि उसने यह जानबूझकर दिया, या फिर किसी के कहने पर। पुलिस को पूछताछ में इन सभी सवालों के जवाबों की उम्मीद है।

बता दें कि एएमयू में भड़काऊ और देश को तोड़ने की बात कह कर पुलिस के निशाने पर आए शाहीन बाग़ के सरगना शरजील इमाम को बीते दिन पुलिस ने बिहार के जहानाबाद से गिरफ़्तार किया था। पिछले कई दिनों से पुलिस को उसकी तलाश थी। उसकी तलाश में जहानाबाद स्थित उसके पैतृक आवास पर छापेमारी भी की गई थी, लेकिन वो नहीं मिला था। शरजील के ख़िलाफ़ असम पुलिस से लेकर ईटानगर क्राइम ब्रांच और अलीगढ़ पुलिस भी पड़ी हुई थी। उसने असम को भारत से अलग करने की धमकी थी। अब उसके खिलाफ में देशद्रोह के आरोप के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। दरअसल वह नेपाल भागना चाहता था लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उसे धर दबोचा।