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‘केजरीवाल ने यौन उत्‍पीड़न आरोपित AAP नेताओं का किया बचाव, सोनी मिश्रा पर उनका बयान घृणा योग्य’

दिल्ली में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इस समय आरोप-प्रत्यारोपों का दौर जारी है। आम आदमी पार्टी प्रदेश में दोबारा से जीत हासिल करने के लिए जमकर प्रचार कर रही है। लेकिन इसी बीच भाजपा और कॉन्ग्रेस भी अपने चुनाव प्रचार के साथ केजरीवाल को सत्ता से हटाने के लिए उनके झूठों का पर्दाफाश कर रही है। इसी क्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली के सीएम केजरीवाल को घेरा। महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए जेपी नड्डा ने केजरीवाल की मंशा पर सवाल उठाए।

‘आप’ कार्यकर्ता रहीं सोनी मिश्रा के साथ आप नेता द्वारा किए यौन उत्पीड़न मामले पर दिल्ली सीएम केजरीवाल ने साक्षात्कार के दौरान पूरी तरह अनभिज्ञ होने की कोशिश की और साक्षात्कार में ये कहा कि वे किसी सोनी सिंह को नहीं जानते। उन्होंने कभी भी किसी से समझौता करने को नहीं कहा। उसी वीडियो को शेयर करते हुए नड्डा ने केजरीवाल को संवेदनहीन बताया।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, “महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान के लिए आप कभी तटस्थ नहीं रहे। आपने यौन उत्‍पीड़न के आरोपों से घिरे अपने नेताओं का बचाव किया। कल आपने ‘आप’ कार्यकर्ता रहीं सोनी मिश्रा पर जो संवेदनहीन बयान दिया, वह घृणा योग्य है।”

गौरतलब है कि इसके अलावा जेपी नड्डा ने बुधवार को ये भी कहा कि दिल्ली में ‘पोस्टरबाजी वाली सरकार नहीं, डबल इंजन की भाजपा सरकार’ चाहिए। उन्होंने आम आदमी पार्टी पर जन लोकपाल, स्वराज से मुँह फेरने और सिर्फ़ बातें करने का आरोप लगाया।

नड्डा ने ट्वीट किया, “जन लोकपाल, न स्वराज, केवल अहंकार का राज. केजरीवाल जी, कहाँ है आप का स्वराज विधेयक?’ उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने स्वराज की केवल बातें की, जिसमें मोहल्ला सभा एवं दिल्ली डायलॉग की बात की। आज तक एक भी सभा नहीं हुई।”

जेपी नड्डा ने अरविंद केजरीवाल पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि जिसने भी आपकी तानाशाही और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाया, उसे ही पार्टी से निकाल दिया। नड्डा ने कहा कि, “दिल्ली में पोस्टरबाजी वाली सरकार नहीं, डबल इंजन की भाजपा सरकार चाहिए।” भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जो अपने गुरु अन्ना हजारे का नहीं हुआ, वो किसका होगा।

बंगाल में बंद के दौरान चले देसी बम: TMC नेता तहीरुद्दीन शेख ने चलाई गोली, 2 मरे

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद स्थित जांगली क्षेत्र में नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। हिंसा इतनी ज्यादा भड़क गई कि दो लोगों की मौत हो गई। इस घटना में तीन लोगों के घायल होने की भी ख़बर है। एक मृतक की पहचान अनारुल बिस्वास के रूप में हुई है। उसके शरीर पर गोलियों के निशान मिले हैं। ये घटना बुधवार (जनवरी 29, 2020) के दिन हुई, जब इलाक़े में बंद का आयोजन किया गया था। तभी हिंसा भड़क गई। बंद का आयोजन ‘भारतीय नागरिक मंच’ ने किया था।

आरोप है कि बंद के दौरान ही तृणमूल कॉन्ग्रेस के ब्लॉक प्रमुख ताहिरुद्दीन शेख का काफिला वहाँ पहुँचा और उसमें शामिल लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी। इस गोलीबारी में 2 लोग मारे गए और 3 घायल हुए। गोलीबारी की ख़बर फैलते ही क्षेत्र में हिंसा भड़क गई और लोगों ने बवाल शुरू कर दिया। कई दोपहिया वाहनों में आग लगा दी गई और कई कारों को भी आग के हवाले कर दिया गया। हिंसा की खबरें सामने आने के बाद पुलिस की टीम को मौके पर भेजा गया ताकि स्थितियों पर नियंत्रण किया जा सके।

तृणमूल कॉन्ग्रेस के स्थानीय नेताओं ने तहीरुद्दीन शेख पर लगे आरोपों को ख़ारिज कर दिया है। टीएमसी का कहना है कि इस वारदात के पीछे सीपीएम व कॉन्ग्रेस नेताओं का हाथ है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि उसके कार्यकर्ता जब वहाँ से गुजर रहे थे, तब कॉन्ग्रेस और सीपीएम के स्थानीय नेताओं ने उन पर हमला कर दिया। वहीं पुलिस की मानें तो सीएए को लेकर जांगली में दो समूहों के बीच बहस शुरू हो गई जो झड़प में बदल गई। फ़िलहाल घायलों का इलाज मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में किया जा रहा है।

ख़बरों के अनुसार, मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा में देशी बमों का भी इस्तेमाल किया गया। फ़िलहाल तीनों पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

भारत बंद के दौरान बंगाल में रेल पटरी को उड़ाने की साजिश, बसों पर पथराव: देखें Video

ममता के बंगाल में हिंसा के ख़िलाफ़ BJP ने किया बंद का आह्वान, TMC कार्यकर्ताओं ने जमकर मचाया उत्पात

ममता के बंगाल में सरस्वती पूजा को लेकर हिन्दू छात्रों को पीटा गया, शिक्षक ने टॉयलेट में छिपकर बचाई जान

सऊदी अरब गए शख्स की पत्नी के साथ कासिम ने बनाए अवैध संबंध, ससुर को पता चलते ही काट दी नाक

उत्तरप्रदेश के अयोध्या के पटरंगा थाना क्षेत्र में खंड पिपरा गाँव में कासिम नाम के मुस्लिम युवक के दूसरे समुदाय की विवाहिता से अवैध संबंधों का खुलासा होने के बाद महिला के ससुर ने अपनी बहू और उसके प्रेमी कासिम की सच में नाक काट दी। मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने विवाहिता के ससुर समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया। इनके ख़िलाफ़ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। आरोपित ससुर का नाम मनीराम है।

न्यूज़ 18 की खबर के अनुसार, मामला 2 संप्रदायों से जुड़ा होने के कारण गाँव में तनाव की स्थिति है। इसे देखते हुए वहाँ पीएसी की तैनाती कर दी गई है। जानकारी के मुताबिक 23 वर्षीय कासिम और 30 वर्षीय महिला के बीच पिछले कई सालों से अवैध संंबंध थे। महिला के पाँच बच्चे होने के बावजूद दोनों एक दूसरे से चोरी-छिपे मिलते थे। महिला का पति रोजगार के कारण पिछले 2 साल से सऊदी अरब में है। इसलिए जब महिला के ससुरवालों को इन सबकी भनक लगी तो उन्होंने खुद ही दोनों को सबक सिखाने की ठानी।

हिंदुस्तान में प्रकाशित संबंधित खबर

धीरे-धीरे परिवारवालों ने दोनों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। एक दिन कासिम महिला से मिलने उसके घर पहुँचा तो परिवार वालों ने अचानक धाबा बोलकर घेराबंदी शुरू की और छानबीन करने लगे। मगर, कासिम को इस दौरान महिला ने भूसे में छिपा दिया। जिसकी वजह से वो उस दिन पकड़ में नहीं आया। लेकिन, सोमवार को ये नहीं हो सका।

महिला के घर से निकलकर कासिम जब अपने घर जाने लगा तो पहले से उसकी ताक में बैठे ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया और उसपर जमकर अपना गुस्सा निकाला। जब महिला ने इसका विरोध किया तो गाँव वालों ने दोनों को रस्सी से बाँध दिया और फिर पिटाई की । गाँव वालों ने इस दौरान दोनों की नाक भी काट दी। बाद में सूचना मिलने पर मौके पर पहुँची पुलिस ने उन्हें ग्रामीणों की चंगुल से छुड़ाया।

पटरंगा पुलिस ने दोनों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मवई पहुँचाया। लेकिन हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने दोनों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया और फिर स्थिति देखते हुए उन्हें लखनऊ के ट्रामा सेंटर ले जाया गया।

खबर के अनुसार,दोनों के बीच 5-6 साल से प्रेम प्रसंग और अवैध संबंध था। दोनों ने कोर्ट मैरिज करने की योजना बना रखी थी। विवाहिता का पति विदेश में था, जिसका फायदा उठाकर वे अक्सर कासिम को अपने घर बुला लेती थी और परिवार की नजरों से छिपा कर उसे वहाँ रखती थी। इस दफा भी दो दिन तक उसके घर में छिप कर रहा लेकिन पहले से नजर गड़ाए बैठे परिवार की नजरों को दोनों इस बार धोखा नहीं दे सके।

क्षेत्राधिकारी रुदौली धर्मेंद्र यादव कहना है कि पुलिस ने विवाहिता की तहरीर पर मुकदमा अपराध संख्या 9/ 2020 धारा 147 148, 323, 504, 324, 326, 506 आईपीसी के तहत उसके ससुर मनीराम समेत गाँव के जुलमे, सुखखे, भदरे, नट्टू, लल्लन, प्रदीप कुमार शमशेर और पूरन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पटरंगा पुलिस ने आरोपित ससुर को गिरफ्तार कर लिया है। यादव ने बताया कि पुलिस इस मामले में विधिक कार्रवाई कर रही है।

देश विरोधी गतिविधियों से दूर रहें: IIT बॉम्बे का सर्कुलर, यहीं से पढ़ा है शाहीन बाग का मास्टरमाइंड शरजील

आईआईटी बॉम्बे ने हॉस्टल में रह रहे छात्रों के लिए नया सर्कुलर जारी किया है। छात्रों से देश विरोधी और असमाजिक गतिविधियों से दूर रहने को कहा है। डीन आफ स्टूडेंट अफेयर्स की इजाजत के बिना कोई भी पोस्टर या पम्फलेट नहीं बॉंटा जा सकेगा। साथ ही छात्रों से ऐसी बयानबाजी से भी दूर रहने को कहा गया है जिससे अशांति पैदा हो।

उल्लेखनीय है कि शाहीन बाग का मास्टरमाइंड शरजील इमाम भी यहॉं से पढ़ा है। उसे देशद्रोह के आरोप में दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को बिहार से गिरफ्तार किया था। शरजील का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वह समुदाय विशेष को असम को भारत से काटने के लिए उकसा रहा था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 15 बिंदुओं वाली नियमावली स्टूडेंट्स अफेयर्स के असोसिएट डीन प्रफेसर जॉर्ज मैथ्यू की ओर से भेजी गई है। इसके 10वें प्वाइंट में कहा गया है कि यहॉं रहने वाले लोग किसी भी देश विरोधी, गैर सामाजिक या किसी अवांछनीय गतिविधियों का हिस्सा नहीं बनेंगे। यह सकुर्लर ऐसे वक्त में जारी किया गया है जब पिछले हफ्ते छात्रों के एक समूह ने संस्थान के निदेशक को एक खुला पत्र लिखा था। इसमें परिसर में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक को लेकर उनकी आलोचना की गई है।

नए सर्कुलर में कहा गया है कि कैंपस के सुरक्षाकर्मियों को उपद्रवियों पर कार्रवाई करने का पूरी तरह से अधिकार है। इसमें कहा गया है, “भाषण/नाटक/संगीत या अन्य गतिविधियॉं जिससे हॉस्टल का वातावरण खराब हो पूरी तरह से प्रतिबंधित है। फैकल्टी के शिरकत करने पर भी इसकी इजाजत नहीं होगी।”

IIT बॉम्बे द्वारा जारी किया गया सर्कुलर

बताया जा रहा है कि देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में हुए हिंसक पद्रर्शनों को देखते हुए यह सर्कुलर जारी किया गया है। हालॉंकि नए सर्कुलर पर छात्रों के एक वर्ग ने आपत्ति भी जताई है। खासकर इसमें इस्तेमाल किए गए ‘ऐंटी नेशनल’ शब्द को। कुछ छात्रों ने इसे आंतरिक आपातकाल बताते हुए कहा है कि संस्थान ने यह साफ नहीं किया है कि कौन सी गतिविधियाँ राष्ट्र विरोधी हैं और कौन सी नहीं। इसकी आड़ लेकर संस्थान किसी भी छात्र को फँसा सकता हैं। एक छात्र के मुताबिक दूसरे विश्वविद्यालयों में सीएए के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए यह सर्कुलर जारी किया गया है ताकि विरोध की आवाज़ को पहले ही शांत किया जा सके।

इससे पहले 9 जनवरी को भी संस्थान ने एक छात्रों और कर्मचारियों के लिए एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि कैंपस में ऐसी कोई गतिविध न हो, जिससे हमारे और सरकार के बीच किसी भी प्रकार के संबंध खराब हों। आईआईटी बॉम्बे के छात्रों ने गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले परिसर से तिरंगा यात्रा भी निकाली थी। इस यात्रा में 1000 फीट लंबे तिरंगे के साथ 1,500 से अधिक छात्रों, प्रोफेसरों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों समेत उनके परिवार के सदस्यों ने भाग लिया था। यह यात्रा लगभग साढ़े चार किलोमीटर तक कॉलेज परिसर को जोड़ने वाले रास्ते पर चली। इस मार्च का विषय ‘आईआईटी बॉम्बे फॉर नेशन-बिल्डिंग’ था।

‘सभी मूर्तियों को हटा दिया जाएगा… केवल अल्लाह का नाम रहेगा’: IIT कानपुर में हिंदू व देश विरोधी-प्रदर्शन

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‘धरना और लड़ाई-झगड़े में केजरीवाल ने काट दिए 5 साल, मोहल्ला क्लीनिकों में लगा है कूड़े का ढेर’

कॉन्ग्रेस नेता अलका लाम्बा दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस में लौट आईं। वो 2015 में आम आदमी पार्टी से विधायक बनी थीं लेकिन इस बार वो कॉन्ग्रेस से मैदान में उत्तरी हैं। अलका दिल्ली के चाँदनी चौक से चुनाव लड़ रही हैं। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी भी आजकल इसी क्षेत्र की झुग्गियों में रात्रि प्रवास कर रहे हैं। पुरानी दिल्ली का दिल कहे जाने वाले इस इलाक़े में आम आदमी पार्टी मुफ्त बिजली-पानी योजना का प्रचार करने में लगी है। भाजपा नेता विजय गोयल भी यहाँ पूरा जोर लगा रहे हैं।

चाँदनी चौक का गणित इस बार कुछ ऐसा है कि आप और कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी आपस में एक्सचेंज हो गए हैं। 2015 में कॉन्ग्रेस उम्मीदवार रहे प्रह्लाद साहनी इस बार आप से मैदान में हैं। अलका लाम्बा ने ‘दैनिक भास्कर’ को दिए गए इंटरव्यू में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली के सीएम ने लड़ाई करने और धरना देने में ही 5 साल गुजार दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली के मुखिया छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का दौरा करते रहे लेकिन अपने राज्य पर ध्यान नहीं दिया।

आम आदमी पार्टी के नारे ‘अच्छे बीते 5 साल, लगे रहो केजरीवाल’ को अलका लाम्बा ने मजाक करार दिया। लाम्बा ने कहा कि बीते 5 साल लड़ाई-झगडे और कोर्ट-कचहरी में नज़र आने वाले केजरीवाल को अब बस भी करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार तो जामा मस्जिद के पास भूमाफियाओं से ज़मीन भी खाली नहीं करा पाई। अलका लाम्बा ने दावा किया कि जहाँ मोहल्ला क्लिनिक बनाए गए, वहाँ कूड़े का ढेर लगा हुआ है।

उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र की बात करते हुए कहा कि वहाँ के 12 स्कूलों में से 9 बचे हैं। लाम्बा ने प्रदूषण के लिए भी आम आदमी पार्टी की सरकार को घेरा। अलका लम्बा ने पानी की किल्लत और ट्रैफिक जाम के लिए भी केजरीवाल सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा कि आप से व्यवस्था-परिवर्तन और स्वराज की बातें गायब हो चुकी हैं। चार बार विधायक रहे प्रह्लाद साहनी के बारे में अलका लाम्बा ने कहा कि जब वो कॉन्ग्रेस में थे, तब केजरीवाल उन्हें भ्रष्ट बताते थे। वहीं जब उन्होंने आम आदमी पार्टी ज्वाइन की, तब केजरीवाल ने उन्हें अपना उम्मीदवार बना लिया। लाम्बा ने कहा कि केजरीवाल एक इनसिक्योर और डरे हुए आदमी हैं। बकौल लाम्बा, केजरीवाल को जिससे भी चुनौती मिलती है उसे दूध में मक्खी की तरह उठा कर फेंक देते हैं।

उदाहरण के तौर पर लाम्बा ने कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और आशुतोष का नाम गिनाया। लाम्बा ने चाँदनी चौक से जीत का दावा तो किया लेकिन वयोवृद्ध प्रह्लाद सिंह साहनी और भाजपा उम्मीदवार सुनाम कुमार गुप्ता के सामने उनकी राह आसान नहीं है। गुप्ता पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे थे।

औरतें हलाला को मजबूर, मर्दों के लिए बनी रहे 4 बीवियों की आजादी: जिल्लत से मुक्ति कब

उत्तरप्रदेश के बरेली में एक मुस्लिम महिला को निकाह के 2 साल बाद तक बच्चा नहीं हुआ। पहले ससुराल वालों ने बाँझ बुलाना शुरू किया। मारपीट की। भूखा रखा । एक दिन शौहर ने तीन तलाक दे दिया। महिला के परिजनों ने दबाब डाला तो कहा तो ससुर से हलाला की शर्त रखी। महिला राज़ी नहीं हुई तो ससुराल वालों ने इंजेक्शन दे देकर हलाला कराया। करीब 10 दिन तक महिला का इस तरह रेप किया। फिर मुस्लिम युवक ने दोबारा निकाह किया। लेकिन कुछ साल बाद फिर तीन तलाक दे दिया और इस बार अपने छोटे भाई से हलाला की शर्त रखी।

झारखंड के हजारीबाग में शाहजाद अंसारी ने अपने अब्बा और अम्मी के साथ मिलकर पहले अपनी बीवी शहाना खातून को 12 साल तक प्रताड़ित किया। उसे मारा पीटा। गाली-गलौच की। दूसरा निकाह करने की धमकी दी। एक दिन उसके सामने दूसरी महिला को लाकर घर में रहने लगा। जब शहाना ने इस बारे पूछताछ की तो उसे मारा गया और तीन तलाक दकर घर से निकाल दिया ।

साल 2018 में सऊदी अरब में रह रहे युवक ने यूपी के देवरिया में रह रही अपनी बीवी को तीन तलाक दिया। महिला ने आवाज़ उठाई तो सबके सामने दुबारा कबूल कर लिया। बाद में दबाव बना कर जीजा से उसका हलाला करवाया और फिर रखने से इनकार कर दिया।

बिजनौर की एक मुस्लिम महिला को उसके शौहर ने नशे की हालात में पहले तलाक दिया और फिर उसके साथ सोया। सुबह होते ही उसे मायके छोड़ आया और कहा, ‘तेरा मेरा कोई रिश्ता नहीं, न जिस्मानी, न जुबानी।’ महिला ने अपने ससुराल और मायके में सब कुछ साफ-साफ बता दिया तो बोले ये तलाक नहीं माना जाएगा। क्योंकि दोनों दुबारा सोए थे। लेकिन काज़ी ने इसे तलाक मान लिया। मगर बाद में शौहर बोला कि एक शर्त पर वो उसे साथ रखेगा जब वो हलाला करवा ले। महिला ने अपने बच्चों की खातिर हलाला करवा लिया।

गिनती की घटनाएँ। ऐसी घटनाएँ रोज देश के किसी न किसी कोने से सामने आती ही रहती हैं। जितनी सामने आती हैं उससे कहीं ज्यादा दबा दी जाती हैं। हलाला, बहुविवाह से मुस्लिम महिलाओं को मुक्ति दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि बहुविवाह, हलाला जैसी प्रथाओं को आपराधिक श्रेणी में रखा जाए और ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ सजा तय हो। लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड नहीं चाहता की उनकी कौम की महिलाओं को इससे आज़ादी मिले। उसने याचिका का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि यह शरिया का मसला है।

बहुविवाह प्रथा मुस्लिम व्यक्ति को चार बीवियाँ रखने की इजाजत देता है जबकि ‘निकाह हलाला’ का संबंध पति द्वारा तलाक दिए जाने के बाद यदि मुस्लिम महिला उसी से दुबारा शादी करना चाहती है तो इसके लिए उसे पहले किसी अन्य व्यक्ति से निकाह करना होगा और उसके साथ वैवाहिक रिश्ता कायम करने के बाद उससे तलाक लेना होगा।

एक ओर ये इस्लामिक कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाओं को बहुविवाह और हलाला की दीवार के पार तक नहीं देखना देना चाहते। लेकिन, उन्हीं महिलाओं को सीएए विरोध की आड़ में ढाल बनाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। लगातार सामने आए वीडियो बताते हैं कि इस विरोध के पीछे जो लोग हैं उनके मंसूबे देश विरोधी हैं। शरजील इमाम के ताजा वीडियो और गिरफ्तारी इसी का एक हिस्सा है। लेकिन, कानून की नजरों से बचे रहने के लिए साजिशन महिलाओं को शाहीन बाग जैसी जगहों पर महीने भर से ज्यादा समय से इन्हीं कट्टपंथियों ने बिठा रखा है।

फिर रामचंद्र गुहा जैसे लोग हैं जो हलाला, बहु विवाह जैसी कुरीतियों से अभिशप्त इन महिलाओं को के इस्तेमाल का बचाव करते हैं। वे कहते हैं कि शाहीन बाग की महिलाएँ सांप्रदायिक कानून, पितृसत्तात्मक राजनीति और हिंसा के खिलाफ लड़ रही हैं। जिस कानून से किसी भारतीय का कोई लेना देना न हो उसका विरोध कर रही महिलाओं का इस तरह समर्थन एक तरह से कट्टरपंथ को प्रोत्साहित ही करना है। जबकि गुहा जैसे लोगों को मुस्लिम महिलाओं को हलाला, बहुविवाह जैसे सांपद्रायिक और पितृसत्तात्मक कानून से मुक्ति पाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए था।

आज मुस्लिम महिलाओं की स्थिति इतनी दयनीय है कि वो जिस मजहब की होने के कारण खुद के अस्तित्व को खतरे में बता रही हैं और पहचान की लड़ाई लड़ने का दावा कर रहीं हैं। उन्हें उसी मजहब के पैरोकारों ने इतना दबाया हुआ है कि उनके लिए इबादत करने की जगह तक सीमित है।

इस दिशा में पत्रकार जिया उस सलाम ने मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश करने और नमाज अदा करने की इजाजत देने की माँग करने वाली याचिका पर हस्तक्षेप आवेदन दाखिल किया है। पिछले साल पुणे स्थित पीरजादे दंपत्ति ने याचिका दाखिल की थी। साथ ही देश भर की मस्जिदों में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश की माँग करते हुए दावा किया था कि इस तरह का प्रतिबंध “असंवैधानिक” और जीवन के मौलिक और समानता के अधिकारों का उल्लंघन है।

ये ध्यान देने वाली बात है कि शाहीन बाग में बैठीं औरतों को ये तक नहीं मालूम होगा कि उन्हें अब तक आखिर बेवजह मस्जिदों में जाने से क्यों रोका गया और क्यों उनके लिए सीमाएँ तय की गई। वास्तविकता में तो उनका खुद का मजहब उन्हें इसकी इजाजत देता है। जिया उस सलाम ने अपनी अर्ज़ी बताया था कि भारत में महिलाओं के लिए मस्जिदों में प्रवेश करने के लिए कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है। वहाँ एक मौन प्रतिबंध है, क्योंकि महिलाओं के लिए कोई अलग प्रवेश नहीं है, उनके लिए कोई पृथक क्षेत्र नहीं है। यह प्रथा कुरान और हदीस के सिद्धांतों के खिलाफ है।

कट्टरपंथ की जकड़ से निकलने की असली पहल मुस्लिम महिलाओं को ही करनी होगी। फरहत नकवी, निदा खान जैसी महिलाएँ तीन तलाक से लेकर बहु विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ लड़ भी रही हैं। इसके लिए इस्लामिक कट्टरपंथी उन्हें निशाना भी बनाते रहे हैं। लेकिन, असल आजादी के लिए हर मुस्लिम महिला को इस मोर्चे पर लड़ना होगा।

फिलहाल तो उन पर कट्टरपंथ का नशा ज्यादा हावी दिखता है। इसलिए, वे हिंदुओं को पटक-पटक कर मारने की बात कर रही हैं।

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पाकिस्तान की तरह ही भारतीय सेना भी अपने लोगों को मारती है: CAA विरोधी कथित सामाजिक कार्यकर्ता का बयान

CAA-NRC और NPR के विरोध की आड़ में अधिकतर लोग शायद यह भी भूल चुके हैं कि शुरुआत में उनका विरोध कानून के खिलाफ था। समय के साथ अब यही विरोध कर रहे लोग अब खुदको देश, सरकार और सेना के खिलाफ अपने जहर को उगलने से नहीं रोक पा रहे हैं। नागरिकता संशोधन कानून (CAA), राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) और राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर (NPR) के विरोध में दिल्ली में शाहीन बाग़ से लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन हो रहे हैं।

जंतर-मन्तर पर प्रदर्शन के दौरान कथित सामाजिक कार्यकर्ता तपन बोस ने भारतीय सेना के बारे में विवादित बयान दिया है। तपन बोस ने कहा- “पाकिस्तान कोई दुश्मन देश नहीं है। शासक वर्ग चाहे भारत का हो या पाकिस्तान का, एक जैसा है। हमारी सेना भी पाकिस्तानी सेना जैसी है। पाकिस्तानी सेना भी अपने लोगों को मारती है और हमारी सेना भी अपने लोगों को मारती है। दोनों में कोई अंतर नहीं है। पाकिस्तान में लोग आपसे बहुत प्यार से बात करते हैं और सुलह की बात करते हैं।” ज्ञात हो कि दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर धारा 144 लागू कर रखी है।

CAA विरोध में शाहीन बाग़ सहित कई जगहों पर उसी तर्ज पर धरना प्रदर्शन हो रहे हैं। जिसमें कई देश विरोधी बातें कही जा रही हैं। ऐसे आंदोलनकारियों के देश विरोधी बयानों को देखते हुए ये साफ होने लगा है कि इनका विरोध CAA के लिए नहीं है बल्कि अब पूरा आंदोलन ही देश विरोधी गतिविधियों का केंद्र हो चुका है।

CAA विरोध के नाम पर आर्थिक जिहाद की माँग, वकील ने कहा- रामदेव गाय-गोबर खिलाकर RSS से खरीदवाता है हथियार

ऐसा लगता है मानो जैसे-जैसे समय बीत रहा है, CAA-NRC का विरोध अब शाहीन बाग़ से होते हुए अपने असली रंग में आने लगा है। देशद्रोही नारे लगाने के कारण गिरफ्तार हुए शरजील इमाम के पकड़े जाने के ठीक एक दिन बाद ही सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो शेयर होते देखा जा रहा है। इस वीडियो में CAA के विरोध प्रदर्शन के लिए जमा भीड़ को एक वकील द्वारा विशेष ब्रांड और कम्पनी के आर्थिक बहिष्कार की सलाह देते हुए देखा जा सकता है।

टाइम्स एक्सप्रेस द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो को बीजेपी नेता संबित पात्रा ने भी अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया है।

टाइम्स एक्सप्रेस के अनुसार, यह वीडियो उस वक़्त बनाया गया है जब वकील भानु प्रताप सिंह ने CAA पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद दिल्ली के मुस्तफाबाद में धरने पर बैठी जनता को संबोधित कर रहे थे।

इस वीडियो में वकील भानु प्रताप भीड़ को सम्बोधित करते हुए कह रहे हैं- “खुद को हिंदुस्तानी कहना बंद करो, हम भारतीय हैं। इस सरकार की सबसे बड़ी ताकत मीडिया है। वो मीडिया आज की तारीख में अम्बानी ने खरीद लिए हैं। ये अम्बानी ही आरएसएस और भाजपा की पैसे की तिजोरी हैं। बताओ हम टीवी देखकर किसे पैसा दे रहे हैं? अम्बानी को दे रहे हैं या नहीं? हम इनकी रीढ़ की हड्डी तोड़ देंगे। क्या ये सीरियल और पिक्चर हमारे आंदोलन से बढ़कर हैं? हम अपना पैसा दुश्मन को क्यों दें? हम अपना एक भी पैसा रिलायंस को नहीं देंगे। हम इस रिलायंस की कमर तोड़ देंगे।”

“….रवीश जी ने कहा था टीवी मत देख, हम नहीं माने। लेकिन अब तो मानो, सरकार हमें दफन करना चाहती है, मारना चाहती है। सरकार के पास पैसा, पुलिस, फ़ौज और अदालतें भी हैं। हमारे पास कुछ भी नहीं है, ना सरकार, ना फ़ौज, ना पुलिस। हमारे पास बस हमारी एकता और बुद्धि है। इसी बुद्धि का इस्तेमाल कर के आज यहाँ सब लोग निर्णय करो, हम आज से टीवी पर ताला लगा देंगे, टीवी नहीं देखेंगे। रिलायंस के जितने भी… जिओ के मोबाइल हैं, सब चेंज करो, एयरटेल के लो, चाहे आईडिया के लो, चाहे वोडाफोन के खरीदो, जिसके लो लेकिन रिलायंस की कमर तोड़नी है चाहे जो हो जाए। इसके अलावा रिलायंस का पेट्रोल पम्प, जितने भी उत्पादन हैं, कोई भी रिलायंस का उत्पादन, सबका बहिष्कार करो।”

“….इसके साथ-साथ इस रामदेव के जितने भी उत्पादन हैं सब कचरा हैं। सब गाय और गोबर ही तो खिला रहा है वो। इसको बंद करो। रामदेव का सब पैसा हमारे खिलाफ जाता है। हमारा ही पैसा, अधिकतर पैसा आरएसएस के लिए हथियार खरीदने के काम आ रहा है। हम इन दुश्मनों की कमर और रीढ़ की हड्डी तोड़ देंगे। जिसकी रीढ़ टूट जाती है, कभी सीधा खड़ा नहीं हो पाता है। ये काम हमें करना है, ये काम हम ही कर सकते हैं, कोई दूसरा नहीं करेगा।”

वकील भानू प्रताप आगे कहते हैं- “अपने दोस्त, रिश्तेदारों को समझाओ, हम लड़ाई के मैदान में हैं, हम पिकनिक नहीं कर रहे, हम सैर मनाने नहीं आए हैं, लड़ाई की रणनीति हमें अपनानी पड़ेगी और उसका इस्तेमाल करना होगा। अब बस एक जरुरी बात बताना चाहूँगा, साथियों हम सबको सबसे ज्यादा दिक्कत पुलिस से होती है। क्योंकि कानून हमें मालूम नहीं है और हमारी अज्ञानता का वो फायदा उठाते हैं। ना हम अखिलेश यादव के भरोसे हैं, ना उस दिल्ली के मुख्य्मंत्री केजरीवाल के भरोसे हैं, जो इस आंदोलन में अभी तक एक बार भी नहीं आया।”

ज्ञात हो कि आर्थिक जिहाद इस्लामिक विचारधारा का ही प्रतीक है। ऑपइंडिया पर हम पहले भी बता चुके हैं कि हलाल जैसे कार्यों के लिए भी किस प्रकार से इस्लाम के अलावा सभी धर्मों का बहिष्कार किया जाता है।

फर्जी एकाउंट्स बना कर महिलाओं को प्रताड़ित करता था ‘मोटा’ कामरा: महिला कॉमेडियन ने खोले राज

कथित कॉमेडियन कुणाल कामरा की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। फ्लाइट में पत्रकार अर्नब गोस्वामी के साथ बदसलूकी करने के बाद उसे इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइस जेट द्वारा प्रतिबंधित किया जा चुका है। अब महिला कॉमेडियन अनुभा सिन्हा ने कुणाल कामरा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अनुभा ने कहा है कि कुणाल कामरा और उत्सव चक्रवर्ती मिल कर फर्जी ट्विटर एकाउंट्स बनाते थे और महिला कॉमेडियनों को प्रताड़ित करते थे।

अनुभा ने कहा कि जब कुणाल कामरा मोटा हुआ करता था और किसी ने उसके बारे में नहीं सुना था, तब वो ऐसे जोक्स मारा करता था जिसपर किसी को हँसी नहीं आती थी। यही वो समय था जब वो फर्जी ट्विटर अकाउंट्स के जरिए महिला कॉमेडियनों को प्रताड़ित किया करता था। बकौल अनुभा, एक बार ख़ुद कामरा ने अपने और चक्रवर्ती के बारे में ये बात स्वीकार की थी चक्रवर्ती पर पहले ही ‘मी टू’ का मामला चल रहा है।

अनुभा ने बताया कि 2016 में उन्होंने कामरा से पहली बार मुलाक़ात की थी। ये मुलाक़ात मुंबई में हुई थी। उन्होंने बताया कि जब वो ग्रीन रूम में सेट के लिए तैयार हो रही थीं, तब कामरा की बातें उन्होंने सुनी थी। कामरा तब ये बातें कर रहा था कि कैसे उसने अपना वजन घटाया। कुणाल बातें कर रहा कर रहा था कि वो अधिकतर ऐसी महिला कॉमेडियनों को प्रताड़ित करता था, जिनके साथ वो काम करता था।

जब अक्टूबर 2018 में उत्सव चक्रवर्ती पर ‘मी टू’ का आरोप लगा था, तब कुणाल कामरा ने बयान जारी कर के दावा किया था कि उसे उत्सव की हरकतों के बारे में पता था और उसने इस मामले में उत्सव को डाँटा भी था। अनुभा सिन्हा ने कहा कि पहले उन्होंने इस बारे में बात नहीं की लेकिन अर्नब गोस्वामी के साथ कुणाल कामरा के दुर्व्यवहार को देखते हुए उन्हें लगा कि कामरा की सच्चाई बताने का यही सही समय है।

बता दें कि कुणाल कामरा द्वारा शेयर किए गए वीडियो में स्पष्ट दिख रहा था कि कुणाल कामरा अर्नब गोस्वामी पर लगातार तंज कसते हुए न सिर्फ़ उन्हें परेशान कर रहा है बल्कि बार-बार उन्हें ‘डरपोक’ भी बता रहा है। उसने ट्विटर पर इस वीडियो को डालते हुए गर्व के साथ लिखा कि वो रोहित वेमुला की माँ के लिए ऐसा कर रहा है। वो वीडियो में स्वीकार करता है कि वो जो कर रहा है, वो नियमानुसार सही नहीं है लेकिन फिर वो कहता है कि वो इसके लिए जेल जाने को भी तैयार है। वो अर्नब को कहता दिख रहा- ‘गेट द फकिंग टाइम और रोहित वेमुला की 10 पेज की सुसाइड नोट को पढ़ो।‘

‘भरोसे लायक नहीं है प्रशांत किशोर, हम खुश हैं कि यह कोरोना वायरस हमें छोड़ रहा है’

नागरिकता संशोधन कानून, एनआरसी और एनपीआर पर मोदी सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले जदयू नेता प्रशांत किशोर को अब अपनी ही पार्टी के नेताओं का विरोध झेलना पड़ रहा है। दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के बाद अब जदयू नेता अजय आलोक ने उनको आड़े हाथों लिया है। अजय आलोक ने उन्हें ‘कोरोना वायरस’ करार दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर भरोसे लायक आदमी नहीं हैं।

जदयू नेता अजय आलोक ने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह (प्रशांत किशोर) आदमी भरोसेमंद नहीं है। वह मोदी जी और नीतीश जी का भरोसा नहीं जीत सके। वह AAP के लिए काम करते हैं, राहुल गाँधी से बात करते हैं, ममता दीदी के साथ बैठते हैं। कौन उन पर भरोसा करेगा? हमें खुशी है कि यह कोरोना वायरस हमें छोड़ रहा है, वह जहाँ चाहे वहाँ जा सकते हैं।”

गौरतलब है कि इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर के बारे में कहा था कि यदि कोई ट्वीट कर रहा है तो करे। जब तक किसी की पार्टी में रहने की इच्छा करेगी, तब तक वह रहेगा और जाना चाहेगा तो जाए। नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को लेकर कहा कि अमित शाह के कहने पर ही उन्हें पार्टी में लिया था, अब उन्हें जाना है तो जाए।

यहाँ बता दें कि प्रशांत किशोर पिछले कुछ समय से ट्विटर के जरिए नागरिकता संशोधन एक्ट के मसले पर पार्टी के फैसले पर सवाल खड़े कर रहे थे। इसके साथ ही दिल्ली में BJP और JDU के गठबंधन पर भी प्रशांत किशोर ने निशाना साधा था। इसके मद्देनजर ही जब नीतीश से मीडिया ने सवाल किया तो उन्होंने जवाब दिया था कि जिसे जाना है वो जा सकता है।

लेकिन, नीतीश कुमार के बयान के बाद भी प्रशांत किशोर चुप नहीं रहे। उन्होंने पलटवार करते हुए लिखा था कि उनके पार्टी में शामिल होने को लेकर नीतीश कुमार ने झूठ बोला है। किशोर ने लिखा था, “मेरा रंग आपके जैसा नहीं है। अगर आप सच बोल रहे हैं तो कौन भरोसा करेगा कि आपके पास इतनी हिम्मत होगी कि आप अमित शाह की बात नहीं मानेंगे।”

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