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नाम बदलकर भिलाई में रह रही बांग्लादेशी महिला गिरफ्तार, स्थानीय युवक से विवाह कर दे रही थी पुलिस को झाँसा

एनआरसी के विरोध में इस समय देश के कोने-कोने से आवाजें उठ रही हैं। देश का एक निश्चित तबका और एक निश्चित गिरोह चाहता है कि केंद्र सरकार इस कानून को पूरे देश में लागू न करे। जिसके लिए वे लगातार प्रदर्शन भी कर रहे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर यदि देखें तो बिना एनआरसी के आए ही देश में घुसपैठियों की पहचान कर उनपर एक्शन लेने की कवायद चल चुकी है। जिसके मद्देनजर अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ के भिलाई में पुलिस ने फर्जी तरीके से भारतीय नागरिकता पाकर भारत में रहने वाली बांग्लादेशी महिला को गिरफ्तार किया। महिला की पहचान आशा अख्तर उर्फ़ प्रिया पराडकर के रूप में हुई है। 

महिला पर आरोप है कि उसने भिलाई स्थित जामुल के एक युवक से शादी करने के बाद उसकी मदद से भारतीय पासपोर्ट और अन्य पहचान पत्र बनवा लिए थे। और अपने पति हेंमेंद्र के साथ भिलाई में रह रही थी।

आरोपित महिला के पास से पुलिस ने भारतीय पासपोर्ट के साथ ही बांग्लादेश का भी पासपोर्ट बरामद किया है। पुलिस ने दंपति के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना तथा भारतीय पासपोर्ट अधिनियम के साथ ही विदेशी विषयक अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की है।

नई दुनिया में प्रकाशित संबधित खबर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छावनी के नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) विश्वास चंद्राकर ने बताया कि 32 एकड़ हाउसिंग बोर्ड जामुल निवासी हेमेंद्र पराडकर और उसकी पत्नी आशा अख्तर उर्फ प्रिया पराडकर (24) को गिरफ्तार कर लिया गया है। बांग्लादेश की आशा यहाँ नाम बदलकर रह रही थी। उसने 5 अक्टूबर 2017 को हेमेंद्र पराडकर से रायपुर के आर्य समाज मंदिर में शादी की थी।

चंद्राकर ने बताया कि आशा के पास से टूरिस्ट वीजा भी मिला है, जिसकी वैधता 29 अक्टूबर 2019 को समाप्त हो चुकी है। प्रारंभिक जाँच में पता चला है कि आरोपित महिला देह व्यापार में लिप्त है। वो यहांँ भी यही काम करती थी। शादी के बाद पति के नाम का सहारा लेकर उसने दस्तावेज तैयार करवा लिए थे।

गौरतलब है कि बीते दिनों कई ऐसे घुसपैठियों की गिरफ्तारी की खबरें मीडिया में आई, जो अपनी पहचान छुपाकर भारत में गुजर-बसर कर रहे थे और यहाँ अपराधों को भी अंजाम दे रहे थे। इसके अलावा एनआरसी के डर से भारत छोड़ने वाले घुसपैठियों की बात को भी खुद बांग्लादेश ने स्वीकारा और इसी बीच 445 बांग्लादेशियों को भारत का बॉर्डर क्रॉस करते गिरफ्तार किया गया। महाराष्ट्र से भी करीब 12 बांग्लादेशी घुसपैठियों की गिरफ्तारी हुई है।

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मुनव्वर राना की 2 बेटियों के खिलाफ UP पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, शायर ने योगी सरकार को दी चेतावनी

लखनऊ में धारा 144 लागू होने के बाद भी घंटाघर के पास सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शन मामले में पुलिस ने मंगलवार (जनवरी 21, 2019) को 3 मामले दर्ज किए। इनमें उर्दू शायर मुनव्वर राना की दो बेटियों के ख़िलाफ़ भी मुकदमा दर्ज हुआ। जानकारी के अनुसार पुलिस ने सुमैया राना और फौज़िया राना के साथ 100 से ज्यादा महिलाओं को धारा 144 का उल्लंघन करने, लोगों को भड़काने जैसे आरोपों में हिरासत में लिया। जिसके बाद मुनव्वर राना ने मीडिया के सामने आकर सरकार को चेतावनी दी और कहा कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस का रवैया बेहद गलत है।

मुनव्वर राना ने कहा, “एक तरफ तो सरकार तीन तलाक के मामले में कहती है कि ये हमारी बेटियाँ हैं। दूसरी ओर जब वे अपना हक माँग रही हैं, प्रदर्शन कर रही हैं तो कभी उन्हें कंबल नहीं दिया जाता, खाने को छीन लिया जाता है। बच्चे दूध से बिलख रहे हैं।” मुनव्वर राना ने कहा, “मैं सरकार को चेतावनी देते हुए अपना एक शेर फिर से कहता हूँ कि एक आँसू भी हुकूमत के लिए खतरा है, तुमने देखा नहीं आँखों का समंदर होना।”

गौरतलब है कि पुलिस ने इस मामले के संबंध में जिन लोगों खिलाफ तीन मामले दर्ज किए हैं। उनमें से 24 लोग नामजद व 140 अज्ञात हैं। एडीसीपी पश्चिमी विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि धारा 144 के चलते प्रदर्शन पूरी तरह असंवैधानिक है। घंटाघर के सामने पिछले चार दिनों से महिलाएँ अपने बच्चों के साथ नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं।

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार (जनवरी 21, 2020) को ठाकुरगंज थाने में दर्ज हुई पहले एफआईआर में दारोगा सेठ पाल सिंह ने मोईनउद्दीन, रसूक अहमद, शबी फातिमा, साफिया, हफीजा और 138 अज्ञात महिलाओं के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 145, 188 और 283 के तहत रिपोर्ट दर्ज की है। साथ ही इस एफआईआर में 20 वाहनों का भी जिक्र हैं। जिनके कारण घंटाघर के आसपास जाम लगा।

इस मामले में दूसरी एफआईआर ठाकुरगंज थाने में तैनात दारोगा कैलाश नारायण त्रिवेदी ने लईस हसन और नसरीन जावेद के खिलाफ आईपीसी की धारा 188, 505 1बी के तहत दर्ज करवाई है। वहीं , तीसरी एफआईआर में थाने में तैनात महिला सिपाही ज्योति कुमारी ने शायर मुनव्वर राना की बेटी सुमैय्या राना, फौजिया राना, रुखसाना, शबी फातिमा और 10 अज्ञात महिलाओं के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 145, 188 और 352 के तहत ठाकुरगंज थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है।

Facebook पर 6000 फॉलोअर्स वाली हिंदू महिला को बियर पिला कर शौहर अयाज अहमद ने मार डाला

सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो शेयर करने के साथ ही फॉलोअर्स की बढ़ती संख्या एक महिला की मौत का कारण बनी। राजस्थान की राजधानी जयपुर के आमेर थाना इलाके में खून से सना महिला का शव मिलने के मामले में पुलिस ने महज 5 घंटों के भीतर ही खुलासा कर दिया।

पुलिस ने हत्या के आरोप में महिला के शौहर अयाज अहमद को गिरफ्तार किया है। मामले का खुलासा करते हुए एडिश्नल पुलिस कमिश्नर क्राइम अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि दिल्ली हाईवे स्थित नई माता के मंदिर के पास सड़क किनारे महिला का खून से सना शव मिला था। शव के पास खड़ी स्कूटी की जानकारी जुटाते हुए पुलिस मृतक की माँ के घर पहुँची जहाँ पर मृतका की पहचान रेशमा मंगलानी के रूप में हुई। रेशमा के फेसबुक पर 6000 फॉलोअर्स थे।

महिला की हत्या के बाद उसकी पहचान छिपाने के इरादे से पत्थर से सिर और चेहरे को कुचला गया था। पुलिस ने परिजनों से पूछताछ की तो परिजनों ने महिला के शौहर पर ही संदेह जाहिर किया। जाँच के दौरान पुलिस ने तमाम साक्ष्य जुटाते हुए महिला के शौहर अयाज अहमद को गिरफ्तार किया। 

पुलिस जाँच में सामने आया कि रेश्मा रविवार से गायब थी और शैहर के साथ ही गई थी। पुलिस ने रेश्मा की काॅल डिटेल चेक की और आस-पास के लोगों से पूछताछ की तो पति पर शक गहरा गया। पुलिस ने शौहर को ढूँढ कर कड़ाई से पूछताछ की तो उसने हत्या करना स्वीकार कर लिया और बताया कि पहचान छुपाने के लिए उसने सिर और चेहरा पत्थर से कुचल दिया था। पुलिस आरोपित से आगे पूछताछ कर रही है।

एडिशनल डीसीपी उत्तर प्रथम सुमित ने बताया कि पत्थर से महिला का चेहरा बुरी तरह कुचला गया था। उन्होंने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व दोनों का विवाह हुआ था। लेकिन शादी के बाद से ही दोनों में विवाद चल रहा था। दोनों पिछले 1 साल से अलग रह रहे थे। अयाज को रेशमा के चरित्र पर शक था। पुलिस की पूछताछ में आरोपित अयाज ने बताया कि उसने रेशमा से छुटकारा पाने की योजना बनाई।

अयाज ने अपनी योजना के मुताबिक उसने अपनी बीबी को सुलह करने के बहाने से बुलाया और फिर बियर पिलाने के बाद बातों ही बातों में आमेर की तरफ ले गया और सुनसान जगह देखकर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने पत्थर से ताबड़-तोड़ वार कर उसका चेहरा बिगाड़ दिया, जिससे उसकी पहचान नहीं हो सके। बता दें कि अयाज और रेशमा का तीन महीने की बेटी भी है। दोनों ने पहले आर्य समाज में जाकर शादी की थी और फिर अयाज के कहने पर रेशमा ने निकाह भी किया था।

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रामचंद्र गुहा रवीश से निकालना चाह रहे दुश्मनी, कहा पत्रकारिता छोड़ कर मोदी से लड़ जाओ

हाल ही में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के आगे राहुल गाँधी के औचित्य को खारिज कर सुर्खियों में आने वाले ‘उपन्यासकार’ (जिन्हें कभी-कभी इतिहासकार भी कहते हैं कुछ लोग) रामचंद्र गुहा ने एनडीटीवी चैनल पर पत्रकार निधि राजदान से बातचीत के दौरान अपने बयान पर सफाई दी। गुहा ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि उनका मानना है कि अगर नरेंद्र मोदी को चुनावों में हराना है तो कॉन्ग्रेस को किसी मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है।

इस बातचीत को आगे बढ़ाते हुए गुहा ने एनडीटीवी के पत्रकार रवीश कुमार के राजनीति में आने की सलाह दी। उनकी खूबियों को गिनवाते हुए उन्होंने कहा कि वो ऐसा इसलिए कह रहे हैं- क्योंकि रवीश कुमार स्वनिर्मित हैं, अपनी बातों को स्पष्ट रूप से रखना जानते हैं, वो बहादुर हैं और सबसे बड़ा बात ये कि वो बहुत अच्छी हिंदी बोलते हैं।

इसके बाद गुहा ने कॉन्ग्रेस की हकीकत की पोल खोलते हुए एक और लाइन कही, जिसमें उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से संदेश देने कि कोशिश की कि अगर कॉन्ग्रेस में शीर्ष नेताओं को कोई अन्य राजनेता उनकी कुर्सी के लिए खतरा लगता हैं, तो वे उसे दबा देते हैं।

गुहा ने निधि के सामने रवीश की तारीफों के पुलिंदे बाँधने के बाद कहा कि कॉन्ग्रेस में भी बहुत से अच्छे नेता हैं। जिन्हें वो बहुत अच्छे से जानते हैं। लेकिन अगर वो उनका नाम सार्वजनिक तौर पर लेंगे तो पार्टी में उन्हें दबा दिया जाएगा। बता दें कि इस दौरान गुहा ने आगे बात करते हुए कॉन्ग्रेस से अच्छे उम्मीदवारों में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और पंजाब मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का नाम लिया।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक माने जाने वाले इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने पिछले दिनों बयान दिया था कि लोकसभा चुनाव में वायनाड से राहुल गाँधी को चुनकर केरल के लोगों ने विनाशकारी काम किया। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने राहुल गाँधी का कोई भविष्य नहीं है।

केरल साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार (17 जनवरी, 2019) को ‘राष्ट्र भक्ति बनाम अंधराष्ट्रीयता’ विषय पर बोलते हुए रामचंद्र गुहा के सुर बदले-बदले थे। उन्होंने लोगों की अपेक्षा से उलट जाकर कहा कि ‘खानदान की पाँचवी पीढ़ी’ के राहुल गाँधी के पास भारतीय राजनीति में ‘कठोर परिश्रमी और खुद मुकाम बनाने वाले’ नरेंद्र मोदी के सामने कोई मौका नहीं है।

हालाँकि इस दौरान उन्होंने ये भी स्पष्ट किया था कि वे निजी तौर पर राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ नहीं हैं। क्योंकि राहुल सौम्य और सुसभ्य व्यक्ति हैं। लेकिन अगर फिर भी युवा भारत एक खानदान की पाँचवी पीढ़ी को नहीं चाहता। उन्होंने इस दौरान जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर मलयाली लोग साल 2024 में भी दोबारा राहुल गाँधी को चुनने की गलती करेंगे तो वे नरेंद्र मोदी को फायदा पहुँचाएँगे।

इस दौरान गुहा ने अपनी बात को स्पष्ट रूप से समझाते हुए कहा था कि नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वो राहुल गाँधी नहीं हैं। नरेंद्र मोदी और राहुल गाँधी के बीच अंतर समझाते हुए इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा था, “नरेंद्र मोदी ने अपनी शख्सियत खुद बनाई है। उन्होंने खुद यह मुकाम हासिल किया है। वे सेल्फमेड हैं। उन्होंने 15 वर्षों तक एक राज्य को चलाया है। उनके पास प्रशासनिक अनुभव है। वे जबर्दस्त रूप से परिश्रमी हैं और कभी यूरोप में छुट्टियाँ मनाने नहीं जाते। विश्वास करें, मैं ये बातें पूरी गंभीरता के साथ कह रहा हूँ।”

कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होने पार्टी को दयनीय पारिवारिक कंपनी करार दिया था। साथ ही बोला था, “भारत लोकतांत्रिक बन रहा है और यहाँ सामंतवाद कम हो रहा है। लेकिन गाँधी परिवार इसे अभी समझ नहीं रहा। (सोनिया गाँधी) दिल्‍ली में हो, आपका साम्राज्‍य लगातार सिकुड़ रहा है लेकिन आपके चमचे आपको अभी भी बता रहे हैं आप अभी भी बादशाह हो।”

गौरतलब है कि रामचंद्र गुहा द्वारा केरल साहित्य महोत्सव में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की खिंचाई के बाद खुद को पत्रकार कहने वाली कॉन्ग्रेस की फुलटाइम गालीबाज स्वाति चतुर्वेदी ने राहुल गाँधी का समर्थन किया। गुहा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि मीडिया सहित किसी को भी मोदी के बारे में कोई भ्रम था। मुझे अभी तक समझ में नहीं आ रहा है कि शिक्षाविद, नीति निर्माता और मीडिया किस तरह से मोदी मिथक में पड़ गए?”

‘2024 में दोबारा राहुल गाँधी को चुनने की गलती न करें’ – PM मोदी के कट्टर आलोचक ने खुद कही यह गंभीर बात

रामचंद्र गुहा पर टूट पड़ी गालीबाज ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी, राहुल गाँधी के समर्थन में धड़ाधड़ दागे ट्वीट

चुनाव से पहले AAP की छीछालेदर: फर्जी डिग्री वाले MLA का पत्ता कटा, अब बीवी लड़ेंगी चुनाव

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने त्रिनगर विधानसभा सीट से AAP उम्मीदवार जितेंद्र सिंह तोमर का टिकट काटकर उनकी पत्नी प्रीति तोमर को प्रत्याशी बनाया है। दिल्‍ली हाई कोर्ट ने हलफनामे में झूठी सूचना के आधार पर जितेंद्र सिंह तोमर की विधायकी रद्द कर दी थी, जिसके बाद आम आदमी पार्टी को यह कदम उठाना पड़ा।

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले दिनों फर्जी डिग्री के कारण जितेंद्र तोमर के 2015 के विधानसभा निर्वाचन को रद्द कर दिया था। इसके बावजूद आम आदमी पार्टी ने जितेंद्र तोमर को इस बार भी प्रत्याशी बनाया था। इसके खिलाफ सोमवार (जनवरी 20, 2019) को ही बीजेपी चुनाव आयोग पहुँची थी। बीजेपी की ओर से चुनाव आयोग में दायर की गई याचिका में कहा गया था कि दिल्ली हाई कोर्ट ने जितेंद्र सिंह तोमर की डिग्री को फर्जी पाया था, लेकिन आम आदमी पार्टी ने फिर से त्रिनगर से जितेंद्र सिंह तोमर को उम्मीदवार बना दिया।

बीजेपी ने इसको लेकर सीएम केजरीवाल पर निशाना साधते हुए ट्वीट भी किया था। बीजेपी ने Jhoothi AAP Sarkar के हैशटैग के साथ ट्वीट करते हुए लिखा, “फर्जी डिग्री के बावजूद केजरीवाल ने दिया जितेन्द्र तोमर को टिकट। वोट बैंक के लालच में कितना गिरोगे ‘आप’।” अब आम आदमी पार्टी ने जितेंद्र सिंह तोमर की जगह उनकी पत्नी प्रीति तोमर को मैदान में उतारा है।

फरवरी 2015 में जितेंद्र सिंह तोमर केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री बने थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने जून 2015 में उनको फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार कर लिया। फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तोमर को अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था। पिछले शुक्रवार (जनवरी 17, 2019) को ही हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जितेंद्र सिंह तोमर की डिग्री को फर्जी करार दिया था।

दिल्ली सरकार में कानून मंत्री रह चुके जितेंद्र सिंह तोमर को अपने खिलाफ फर्जी डिग्री देने के आरोप के बाद पद से इस्तीफा देना पड़ा था। 2017 में बिहार में टीएम भागलपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें दी गई कानून की डिग्री को रद्द कर दिया था। जाँच में यह पाया गया कि तोमर ने विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से धोखाधड़ी की थी। साथ ही दिल्ली पुलिस की जाँच में पाया गया था कि तोमर के कानून और बीएससी की डिग्री फर्जी थी। जाँच में यह बात सामने आया था कि तौमर ने डिग्री पाने के लिए कोई परीक्षा नहीं दी थी। तोमर के साथ 16 अन्य लोग भी फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने में शामिल थे।

AAP नेता जितेंद्र सिंह तोमर ने 2013 और 2015 में त्रिनगर सीट से चुनाव लड़ा था। 2013 में वह लगभग 2800 वोटों से हार गए, जबकि 2015 में उन्हें लगभग 22 हजार वोटों से जीत मिली थी। जिसके बाद तोमर को दिल्ली सरकार में कानून मंत्री बनाया गया था। लेकिन जुलाई 2015 में उन्हें दिल्ली पुलिस ने फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि बाद में तोमर जमानत पर रिहा हो गए थे।

दिल्ली में 8 फरवरी को मतदान होगा जबकि नतीजे 11 फरवरी को घोषित होंगे। इससे पहले 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीटें हासिल की थीं।

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मस्जिदों में अजान के लिए लाउडस्पीकर लगाने की इजाजत देने से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के एक गाँव की दो मस्जिदों पर अजान के लिए लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति की माँग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कोई भी धर्म पूजा या इबादत के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देता।

बता दें कि संबंधित क्षेत्र के एसडीएम ने दो समुदायों के बीच विवाद को रोकने के लिए किसी भी धार्मिक स्थल पर लाउडस्पीकर लगाने पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद याचिकाकर्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रूख किया था मगर हाईकोर्ट ने भी एसडीएम की रोक को सही ठहराते हुए इस पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कहा कि ऐसा करने पर सामाजिक असंतुलन खड़ा हो सकता है।

जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस विपिन चंद्र दीक्षित ने अपने आदेश में कहा, “कोई भी धर्म यह आदेश या उपदेश नहीं देता है कि ध्वनि विस्तारक यंत्रों के जरिए प्रार्थना की जाए या प्रार्थना के लिए ड्रम बजाए जाएँ और यदि ऐसी कोई परंपरा है, तो उससे दूसरों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए, न किसी को परेशान किया जाना चा‌हिए।”

याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि यह उनकी धार्मिक परंपरा का एक अनिवार्य हिस्सा है और बढ़ती आबादी के मद्देनजर एम्पलीफायरों और लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल कर लोगों को प्रार्थना के लिए बुलाना आवश्यक हो गया है। 

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस दलील को खारिज करते हुए कहा, “यह सच है कि जैसा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 (1)के तहत यह अधिकार देता है कि कोई भी व्यक्ति अपने धर्म का प्रचार-प्रसार कर सकता है, हालाँकि यह अधिकार निरपेक्ष अधिकार नहीं है। अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त अधिकार व्यापक स्तर पर अनुच्छेद 19 (1) (ए) के अधीन है और इस तरह दोनों को एक साथ पढ़ा जाना चाहिए और सामंजस्यपूर्ण ढंग से लागू किया जाना चाहिए।”

मामले में आचार्य महाराजश्री नरंद्रप्रसादजी आनंदप्रसादजी महाराज बनाम गुजरात राज्य, 1975 (1) एससीसी 11 के फैसले का हवाला दिया गया।

कोर्ट ने कहा कि मामले में शामिल मस्जिदें, जिस क्षेत्र में हैं, वो हिंदू और मुस्लिमों की मिश्रित आबादी का इलाका है और पूर्व में इस मसले पर हुए विवादों ने गंभीर रूप ले लिया है। इसलिए अगर किसी भी पक्ष को साउंड एम्पलीफायरों के उपयोग करने की अनुमति दी जाती है तो दो समूहों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका होगी। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने लाउडस्पीकरों के उपयोग की अनुमति न देकर ठीक ही किया, विशेष रूप से उस इलाके में जहाँ दो धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी पैदा होने की संभावना थी, जिससे कानून और व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती थी।

कोर्ट ने कहा, “किसी भी क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों की होती है और वो अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए बाध्य होते हैं। उन्हें ये सुनिश्चित करना होता है कि क्षेत्र की शांति और व्यवस्‍था भंग न हो और अगर किसी घटना के संबंध में कोई तनाव या विवाद हो तो उस पर सुलह और समझौता किया जा सकता है। उन पर तनाव कम करने और यह सुनिश्चित करने की जिम्‍मेदारी होती है कि क्षेत्र में शांति बनी रहे।”

हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि उनका स्पष्ट मत है कि कोर्ट को अपने असाधारण क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए इस मामले में किसी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है, ऐसा करने से सामाजिक असंतुलन पैदा हो सकता है।

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हमें हिंदू औरतें चाहिए… कश्मीर की हर मस्जिद से 19/1/1990 की रात आ रही थी यही आवाज

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विधानसभा में पारित… अगर परिषद में हो गया पास तो देश का पहला राज्य, जहाँ की होगी 3-3 राजधानी

आंध्र प्रदेश में तीन राजधानियाँ बनाने की योजना को आकार देने संबंधी ‘आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण और सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास विधेयक, 2020’ विधानसभा में पारित हो गया। इसमें विशाखापत्तनम को कार्यकारी राजधानी, अमरावती को विधायी राजधानी और कुर्नूल को न्यायिक राजधानी बनाए जाने का प्रस्ताव है। इस विधेयक को अब विधान परिषद में पेश किया जाएगा। हालाँकि, वहाँ इसके पारित होने में थोड़ी मुश्किल है क्योंकि सत्ताधारी वाईएसआर कॉन्ग्रेस वहाँ बहुमत में नहीं है। 58 सदस्यों वाले विधान परिषद में पार्टी के पास केवल 9 विधायक हैं।

बता दें कि विधान परिषद में यह विधेयक पास होने के बाद देश के इतिहास में यह पहला राज्य होगा, जहाँ की तीन-तीन राजधानी होगी। इससे पहले अब तक महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश की दो राजधानी होती रही है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार के इस प्रस्ताव का विपक्षी तेलुगू देशम पार्टी विरोध कर रही है। प्रस्ताव के पेश होने के दौरान तेलुगु देशम पार्टी के नेताओं ने काफी हंगामा मचाया और स्पीकर के आसन तक आ गए।

जिसके बाद तेलुगु देशम पार्टी के 17 विधायकों को एक दिन के लिए स्पीकर ने निलंबित कर दिया। टीडीपी विधायकों की माँग थी कि उनके नेता चंद्रबाबू नायडू को इस मुद्दे पर बोलने दिया जाए। टीडीपी नेताओं ने विधानसभा में ‘जय अमरावती’ के नारे भी लगाए।

वहीं प्रस्ताव पर बोलते हुए मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने सदन में कहा कि विकेंद्रीकरण पर ध्यान केंद्रित करके उनकी सरकार ऐतिहासिक भूलों और गलतियों को सुधार रही है। सीएम रेड्डी ने कहा, “हम राजधानी को बदल नहीं रहे हैं। हम सिर्फ दो और नई राजधानी जोड़ रहे हैं। अमरावती पहले जैसी ही रहेगी। हम किसी भी क्षेत्र के साथ अन्याय नहीं करेंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं लोगों को सिर्फ ग्राफिक्स दिखा करके बेवकूफ नहीं बना सकता हूँ।” उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू के अमरावती को स्व-वित्तपोषित परियोजना होने के दावे को भी खारिज कर दिया। इससे पहले विधानसभा में विपक्ष के नेता ने कहा था कि वह हाथ जोड़कर अपील करते हैं कि राजधानी को अमरावती से विशाखापत्तनम न ले जाया जाए।

टीडीपी सांसदों के निलंबन और तीन राजधानी के प्रस्ताव के विरोध में विपक्ष के नेता चंद्रबाबू नायडू ने अपने साथियों के साथ विधानसभा के प्रवेश द्वार पर धरना दिया। उन्होंने इसका विरोध करते हुए कहा, “पूरी दुनिया में कहीं भी एक राज्य की तीन राजधानी नहीं है। यह एक काला दिन है। हम अमरावती और आंध्र प्रदेश को बचाना चाहते हैं। सिर्फ मैं ही नहीं पूरे प्रदेश में लोग सड़कों पर आ रहे हैं। सरकार सबको गिरफ्तार कर रही है, यह लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।”

हालाँकि कुछ देर बाद एन चंद्रबाबू नायडू को राज्य विधानसभा के बाहर हिरासत में लिया गया था, क्योंकि वह अमरावती के गाँवों में जाना चाहते थे। पुलिस उन्हें और अन्य लोगों को एक पुलिस वैन में ले गई और फिर नायडू को हिरासत में लेकर उनके घर छोड़ा गया।

CM योगी रात में बुलाते हैं विधानसभा, हमें जाने में डर लगता है: ‘सेक्स रैकेट कांड’ से फेमस हुए सपा नेता अबरार अहमद

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले की इसौली विधानसभा से समाजवादी पार्टी के ‘बुजुर्ग’ विधायक अबरार अहमद ने सोमवार (जनवरी 20, 2020) को योगी आदित्यनाथ की नीतियों के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि सीएम योगी आदित्यनाथ रात में विधानसभा बुलाते हैं और उनको रात में जाने से डर लगता है। इसलिए वे वहाँ जाएंँगे ही नहीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सपा विधायक ने कहा, “सीएम योगी आदित्यनाथ रात में विधानसभा बुलाते हैं, हम जाएँगे ही नहीं। हमें रात में विधानसभा जाने में डर लगता है, वहाँ सीएम योगी बेईमानी करते हैं।”

बता दें कि अकसर अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहने वाले सपा नेता ने इस दौरान जिले के एक बीजेपी नेता और एक जिला पंचायत सदस्य पर गोवंश के मांस बेचने का आरोप भी लगाया। साथ ही सरकार द्वारा किए गए कार्यों पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एसपी विधायक ने बयान दिया। उन्होंने कहा “योगी सरकार आने के बाद अजीब सिस्टम बन गया है। जब चाहा विधानसभा बुला लिया। रात है कि दिन, यह इनके लिए मायने नहीं रखता।”

इसके अलावा अबरार अहमद ने शिकायतों की अपनी सूची में हाईवे न बनने और टोल टैक्स वसूली पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “हमने बहुत पहले ही टैक्स का विरोध किया था लेकिन बताया गया कि काम पूरा हो गया है जबकि यह गलत है। काम पूरा न होने से कई सड़क दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं।”

गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा नेतााओं पर आरोप लगाने का काम वैसे तो विपक्ष अक्सर करता रहता है। लेकिन अबरार अहमद सपा के वो नेता हैं, जो विपक्षी पार्टी के साथ अपने नेताओं के लिए ही बेतुके बोल बोलने के कारण सुर्खियों में रहे हैं।

दरअसल साल 2016 में उनकी सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई थी। जिसमें उन्होंने उस समय की जिला पंचायत अध्यक्षा को सेक्स रैकेट चलाने वाली बताया था। उनका कहना था कि उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्ष को सपा में शामिल कराकर बड़ी भूल की। इस ऑडियो को सुनने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष उस समय के सपा सुप्रीमो और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक ये बात पहुँचाने की तैयारी में थीं, जबकि उनके पति ने कहा था कि विधायक जी बुजुर्ग हो गए हैं, उनका मानसिक संतुलन दुरुस्त नहीं है।

‘मोदी और योगी के खिलाफ नारे लगाने वालों को जिंदा दफन कर दूँगा, संभल जाओ, वरना पटक-पटक कर मारेंगे’

‘जानवरों की तरह बच्चे पैदा करना हानिकारक… जो महिलाओं को यूज कर रहे, वो चूड़ियाँ पहन लें’

उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने सोमवार (जनवरी 21, 2019) को मीडिया से बातचीत में कई मुद्दों पर बयान दिए। रिजवी ने इस दौरान जनसंख्या नियंत्रण का मामला उठाया। कश्मीरी पंडितों को न्याय देने की बात की। कॉन्ग्रेस पर गंदी राजनीति करने के आरोप लगाए और सीएए को लेकर अपना पक्ष साफ किया।

रिजवी ने जनसंख्या कानून को देश की भलाई के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि देश की भलाई के लिए जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लागू होना चाहिए। वसीम रिजवी ने कहा कि कुछ लोगों का मानना ​​है कि बच्चों का पैदा होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन जानवरों की तरह अधिक बच्चों को जन्म देना समाज और देश के लिए हानिकारक है। जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून लागू होने पर यह देश के लिए अच्छा होगा।

इस बातचीत में रिजवी ने सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन पर बैठे लोगों की मंशा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “जो लोग CAA के खिलाफ शहीन बाग और लखनऊ में धरने पर बैठे हैं उन्होंने कश्मीरी पंडितों के लिए धरना क्यों नही किया था।” इसके अलावा उन्होंने दिल्ली के शाहीन बाग प्रदर्शन पर बैठे लोगों को कॉन्ग्रेस की गंदी राजनीति का शिकार बताया।

उन्होंने कहा कि जो लोग आज इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाकर सीएए/एनआरसी और एनपीआर का विरोध कर रहे हैं, उन्हें हम कहना चाहते हैं कि वो लोग तब कहाँ थे, जब 1990 में कश्मीरी पंडितों को जबरन निकाला जा रहा था और हजारों पंडितों को मारा जा रहा था।

रिजवी ने 1984 के नरसंहार की कड़वी यादों पर बात करते हुए कहा कि जब इंदिरा गाँधी की हत्या हुई थी, उस वक्त दिल्ली की सड़कों को सिखों का कत्ल कर लाल कर दिया गया था। उस वक्त अगर लोग जागरूक होते तो हजारों कश्मीरी पंडितों और सिखों को बचाया जा सकता। रिजवी ने प्रदर्शन में महिलाओं और बच्चों को रात भर बैठाने पर निशाना साधा और कहा कि ऐसे लोगों को चूड़ियाँ पहन लेनी चाहिए।

गौरतलब है कि अपने बयानों को लेकर चर्चा में आने वाले शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने हाल ही में नई पार्टी का गठन किया है। लेकिन नई पार्टी बनाने के मामले में मंगलवार को बाबरी मस्जिद मामले के मुद्दई इकबाल अंसारी ने उनके ख़िलाफ बयान दे दिया। अंसारी ने कहा कि बाबरी मस्जिद मामले में उनके (रिजवी) बयानों को लेकर समुदाय विशेष अब पहचान चुका है, वह वसीम रिजवी की पार्टी से नहीं जुड़ेगा और ना ही शिया कौम ही उनकी पार्टी से जुड़ेगी। इकबाल अंसारी ने वसीम रिजवी को चैलेंज करते हुए कहा कि उनकी नई पार्टी इंडियन आवामी लीग एक भी सभासद बना दें तो वे राजनीति छोड़ देंगे।

BJP की दूसरी लिस्ट जारी: CM केजरीवाल के खिलाफ सुनील यादव, हरिनगर से तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को टिकट

भारतीय जनता पार्टी ने 8 फरवरी को होने जा रहे दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी कर दी है। सोमवार (जनवरी 20, 2019) देर रात जारी इस लिस्ट में 10 उम्मीदवारों के नाम हैं। बीजेपी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नई दिल्ली सीट से सुनील यादव को उतारा है, तो वहीं बीजेपी प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को हरिनगर से उम्मीवार बनाया गया है।

बीजेपी ने नांगलोई जाट से सुमनलता शौकीन को टिकट दिया है, जबकि राजौरी गार्डन से रमेश खन्ना किस्मत आजमाएँगे। इसी तरह कस्तूरबा नगर से रविंद्र चौधरी, महरौली से कुसुम खत्री, कालकाजी से धर्मवीर सिंह, दिल्ली कैंट से मनीष सिंह, कृष्णा नगर से अनिल गोयल और शाहदरा से संजय गोयल को उम्मीदवार बनाया गया है।

इसके पहले शुक्रवार को बीजेपी ने अपने 57 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने एक संवाददाता सम्मेलन में पार्टी प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया था। तिवारी ने बताया था कि पार्टी के 57 प्रत्याशियों में 11 अनुसूचित जाति समुदाय से हैं और चार महिलाएँ थीं। अब दूसरी लिस्ट आने के बाद बीजेपी के उम्मीदवारों की संख्या 67 हो गई है।

वहीं दूसरी तरह बिहार में गठबंधन के बाद बीजेपी ने अन्य बची तीन सीटों में से दो जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और एक लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के लिए छोड़ी हैं। इनके बीच दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन की घोषणा हो चुकी है। गठबंधन के मुताबिक जदयू को संगम बिहार और बुराड़ी की सीटें दी गई हैं और लोजपा को सीमापुरी।

उल्लेखनीय है कि बीजेपी की पहली लिस्ट जारी होने पर तेजिंदर पाल सिंह बग्गा का नाम न होने पर विपक्षियों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया था, लेकिन अब बीजेपी ने दूसरी लिस्ट में उन्हें हरिनगर से उम्मीदवार बनाकर ट्रोल करने वालों का मुँह बंद करवा दिया है। लिस्ट में नाम आते ही लोगों ने बग्गा के लिए रैप सॉन्ग भी लॉन्च कर दिया है। जिसे ट्विटर पर शेयर करते हुए बग्गा ने सभी का शुक्रिया अदा किया है। 

बता दें कि भाजपा प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने मुख्यमंत्री केजरीवाल की नीतियों के खिलाफ लगातार हमलावर रहे हैं। पिछले दिनों भी उन्होंने निर्भया गैंगरेप केस के दोषियों की फाँसी की सजा में देरी होने को लेकर केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने शेम ऑफ केजरीवाल हैशटैग के साथ ट्वीट करते हुए लिखा था, “बलात्कारियों की फाँसी को रोका है, निर्भया को दिया धोखा है।”

गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने दिल्ली में विधानसभा चुनाव का ऐलान करते हुए कहा था कि चुनाव सिंगल फेज में होगा और नॉमिनेशन की अंतिम तिथि 21 जनवरी होगी। वहीं, नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 24 जनवरी रखी गई है। साल 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 70 में से 67 सीटें मिली थीं। भाजपा ने 3 सीटें जीती थीं, वहीं कॉन्ग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी।

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