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स्वास्तिक पर लिबरल गैंग कर रहे गुमराह, हिंदू घृणा से भरे Alt News का फर्जी फैक्ट चेक

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध-प्रदर्शन अब हिन्दू-विरोधी प्रदर्शनों में तब्दील होते जा रहे हैं। दिल्ली के शाहीन बाग में विरोध-प्रदर्शन के दौरान एक पोस्टर भारी विवाद का कारण बन गया। इस पोस्टर में बुर्क़ा पहने और बिंदी लगाए हिन्दू महिलाओं को दिखाया गया। साथ ही पोस्टर के नीचे विघटित स्वरूप में हिन्दुओं का प्रतीक ‘स्वास्तिक’ भी था।

भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा समेत कई लोगों ने इस पोस्टर की व्यापक रूप से आलोचना की। इसके बाद ‘लिबरल गैंग’ ने दावा करना शुरू कर दिया कि पोस्टर में नाज़ी स्वास्तिक को दर्शाया गया है, न कि हिन्दू स्वास्तिक को।

स्व-घोषित फैक्ट-चेकिंग साइट Alt News ने इस मुद्दे पर एक ‘फ़ैक्ट चेक’ किया और दावा किया कि शाहीन बाग के विवादित पोस्टर में जो स्वास्तिक है, वो हिन्दू प्रतीक नहीं है। अपने दावे को सही ठहराने के लिए, फैक्ट चेक में कहा गया कि पोस्टर में प्रतीक यानी स्वास्तिक में चार बिंदु नहीं हैं, जो हिन्दू स्वास्तिक में मौजूद होते हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि स्वास्तिक का प्रतीक झुका हुआ है, यह नाजी प्रतीक है न कि हिन्दू स्वास्तिक।

Alt News Swastika

Alt News के लेख का स्क्रीनशॉट

बता दें कि तथाकथित फैक्ट-चैक साइट द्वारा किया गया दावा पूरी तरह से झूठा और निराधार है। ज़ाहिर तौर पर इसका उद्देश्य CAA के विरोध-प्रदर्शनों में देखे गए पोस्टर की मंशा को छिपाना है। Alt News के दावों के विपरीत, चार बिंदु स्वास्तिक का अभिन्न हिस्सा नहीं है और यह अक्सर उनके बिना खींचा जाता है। लेकिन, कभी-कभी डॉट्स (बिंदु) लगाया जाता है।

स्वास्तिक को कई हिन्दू मंदिरों के डिजाइन का हिस्सा बनाया गया है और एक सरसरी नज़र से देखने पर पता चलेगा कि स्वास्तिक में हमेशा डॉट्स मौजूद नहीं रहते। उदाहरण के लिए, नीचे दी गई इमेज को देख सकते हैं जो दिल्ली के लक्ष्मीनारायण मंदिर की है, इसे बिड़ला मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। इसमें ओम प्रतीक और दो स्वास्तिकों को उकेरा गया है, लेकिन स्वास्तिकों में कोई डॉट यानी बिन्दु नहीं है।

swastika on Birla temple
बिडला मंदिर, दिल्ली

इसी तरह, सिंधु घाटी सभ्यता से हड़प्पा में पाए गए स्वास्तिक मुहरों में भी कोई बिंदु नहीं होता था। सच्चाई यह है कि पुराने और नए हिन्दू मंदिरों पर अंकित बिंदु के बिना स्वास्तिक प्रतीक को खोजना कोई बड़ी बात नहीं है। इसके प्रमाण सरलता से मिल जाएँगे। लेकिन, Alt News ने इसके लिए थोड़ा-सी भी ज़ेहमत उठाना गवारा नहीं समझा। इसलिए, स्वास्तिक में चार बिंदु होने का Alt News का दावा झूठा है।


Indus Valley Swastika Seals

इसी तरह, स्वास्तिक के प्रतीक को अधिकतर स्थानों पर बिना बिंदुओं के सीधे चित्रित किया गया है। वहीं, कुछ हिन्दू स्थानों में 45 डिग्री झुके हुए प्रतीकों को देखना भी कोई बड़ी बात नहीं है। एक शिव मंदिर की निम्नलिखित इमेज में तीन स्वास्तिक हैं, वो भी बिना बिंदुओं के और इनमें से एक झुका हुआ भी है।

Shiv Mandir swastika
swastika

Another temple with tilted swastika

इन सबके मद्देनज़र यह बात ध्यान रखने वाली है कि स्वास्तिक प्रतीक का कोई एक सटीक आकार या रूप नहीं है। यह कई सभ्यताओं से जुड़ा एक बहुत प्राचीन प्रतीक है। इसलिए, इसका रूप हमेशा एकसमान नहीं होता। इसके अलावा, जैसे हिन्दू धर्म किसी एक पुस्तक, एक ईश्वर का धर्म नहीं है, यह भी एक प्रतीक का धर्म नहीं है। परिणामस्वरूप, स्वास्तिक को हिन्दू संस्कृति में अलग-अलग रूप से दर्शाया जा सकता है, जिसमें बिना बिंदुओं वाला स्वास्तिक और झुका हुआ स्वास्तिक भी शामिल है।

लेकिन, अगर किसी वजह से किसी स्वास्तिक में बिंदु न हों तो इसका मतलब ये कतई नहीं है कि वो हिन्दुओं का प्रतीक चिन्ह नहीं है। यह एक बड़ी विडंबना है कि जो लोग हिन्दुओं के लिए अपने मन में घृणा रखते हैं वो बताते हैं कि कौन-सा प्रतीक हिन्दुओं का है और कौन-सा नहीं।

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पुलिस पर पत्थरबाजी के लिए बच्चों को उकसाया, SIT ने 33 पर दर्ज किया मामला

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर हुई हिंसा की जाँच कर रही विशेष जाँच दल (SIT) ने 33 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि इन्होंने बच्चों को पुलिसकर्मियों पर पथराव करने के लिए उकसाया था। बता दें कि इन सभी 33 आरोपितों पर पहले भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे और उन्हें जेल भेजा गया था।

जानकारी के मुताबिक इन आरोपितों ने एंटी-सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में बच्चों को पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकने के लिए उकसाया था। जाँच एजेंसी ने आरोपितों पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धाराएँ लगाईं हैं। 

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रविकांत यादव की अदालत ने एसआईटी को 33 आरोपितों के खिलाफ अतिरिक्त आरोप लगाने की अनुमति दी। वहीं मुजफ्फरनगर में 20 दिसंबर 2019 को भड़की हिंसा के कुछ आरोपितों के खिलाफ मुकदमा लड़ रहे वकील वकार अहमद ने कहा, “एसआईटी ने हिंसा के 33 आरोपितों के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 के एक अतिरिक्त सेक्शन जोड़ा है।”

उल्लेखनीय है कि झड़प के दौरान कई बच्चों को पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकते और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाते हुए देखा गया था। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। पुलिस के अनुसार, इस तरह की हिंसक गतिविधि को लेकर नगर कोतवाली और सिविल लाइंस पुलिस स्टेशनों में 47 मामले दर्ज किए गए। जिसमें 250 से अधिक लोगों के नाम थे। बता दें कि पुलिस ने मामले में अब तक 80 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है।

एक अन्य वरिष्ठ वकील चंद्रवीर सिंह ने कहा कि आरोपितों पर जुवेनाइल एक्ट, 2015 की धाराओं को लागू किया गया, क्योंकि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में इस तरह के अपराधों के लिए मामला दर्ज करने का कोई प्रावधान नहीं है।

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केरल के गवर्नर को राजदीप सरदेसाई ने बताया ‘भाजपा एजेंट’, अपने ही टीवी शो में हो गए ज़लील

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) पारित होने के बाद से ही विवाद का मुद्दा रहा। इसके ख़िलाफ़ देशभर में जगह-जगह हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए। इस मुद्दे पर ‘लिबरल गैंग’ भी छटपटा रहा है, जो अपनी भड़ास किसी न किसी रूप में निकालता रहता है। इसी कड़ी में, फर्ज़ी ख़बरों के प्रचारक राजदीप सरदेसाई ने गुरुवार (16 जनवरी) को केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को CAA के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए अपने शो में आमंत्रित किया। इस दौरान उन्होंने केरल के राज्यपाल को ‘भाजपा का एजेंट’ और ‘रबर स्टाम्प’ तक कह डाला। जवाब में आरिफ मोहम्मद ने भी उनकी जमकर क्लास ली।

दरअसल, नागरिकता संशोधन क़ानून को लागू करने के केंद्र के फ़ैसले को लेकर कम्युनिस्ट शासित राज्य केरल में सरकार और राज्यपाल के बीच विवाद चल रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच CAA के ख़िलाफ़ केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई। राज्यपाल ख़ान ने केरल सरकार को इस बात के लिए फ़टकार लगाई थी कि CAA को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने से पहले उनकी सलाह क्यों नहीं ली गई।

राजदीप सरदेसाई ने केरल विवाद पर अपने शो का प्रीमियर करते हुए, आरिफ मोहम्मद खान को ‘रबर स्टाम्प’ कहकर उनका अपमान किया। शो के दौरान सरदेसाई ने दावा किया कि राज्य सरकार द्वारा CAA के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने से पहले उन्हें (खान) दरकिनार कर दिया गया था, इसलिए वो राज्य सरकार से नाराज़ थे।

राज्यपाल ने राजदीप सरदेसाई के दावे पर पलटवार करते हुए सम्मानपूर्वक कहा कि वो किसी से नाराज़ नहीं थे। उन्होंने कहा कि वह संवैधानिक रूप से राज्य के प्रमुख हैं और राज्य सरकार को सलाह देना उनका अधिकार है। आरिफ मोहम्मद खान ने सवालिया लहजे में पूछा, “अगर राज्य सरकार मुझे बताए बिना सुप्रीम कोर्ट में चली जाती है, तो मैं अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग कैसे करूँ?”

इसके अलावा, राज्यपाल खान ने देश की संसद द्वारा पारित क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित करने के लिए भी केरल सरकार को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि यह मसला राज्य के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। खान ने कहा, “कानून का विरोध करने के लिए राज्य सरकार ने जो समय और धन खर्च किया उसका उपयोग प्रदेश के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए न कि अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए।”

राजदीप सरदेसाई ने चिड़चिड़ाते हुए पूछा कि क्या आरिफ मोहम्मद खान केरल सरकार के ख़िलाफ़ जाकर अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे थे? खान ने इसके जवाब में कहा कि महत्वपूर्ण मुद्दे पर राज्य सरकार को सलाह देना उनका संवैधानिक अधिकार है और राज्य सरकार राज्यपाल से कोई जानकारी छिपा नहीं सकती।

शो के दैरान राजदीप सरदेसाई ने राज्यपाल खान को ‘रबर स्टाम्प’ कहकर उनका अपमान करना जारी रखा, इस पर खान ने गहरी आपत्ति जताई। सरदेसाई ने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को ‘भाजपा एजेंट’ बताया और CAA के मुद्दे पर एक अलग रुख़ अपनाने के लिए उन पर हमला किया।

राजदीप सरदेसाई की असम्मानजनक टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि पत्रकार के तौर पर उनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा अभद्र है। भाजपा का एजेंट कहे जाने पर खान ने कहा कि उनकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति ने की थी न कि भाजपा ने।

सवाल पूछने की आड़ में, सरदेसाई ने केरल के राज्यपाल का न सिर्फ़ अपमान किया बल्कि लाइव शो में उन्हें भाजपा का एजेंट कहकर उनके प्रति अपनी व्यक्तिगत घृणा भी व्यक्त की। इस लाइव शो के विषय को हिन्दू-मुस्लिम मुद्दा बनाकर देश की जनता के बीच धार्मिक विभाजन पैदा करने की कोशिश करने पर मोहम्मद आरिफ खान ने राजदीप सरदेसाई की क्लास भी लगाई।

बता दें कि आरिफ मोहम्मद खान और CAA के लिए उनके समर्थन को बदनाम करने वाले सरदेसाई ने CAA के ख़िलाफ़ हो रहे जानलेवा विरोध-प्रदर्शनों को ’शांतिपूर्ण’ बताकर फ़र्ज़ी दावे किए थे। जबकि सच्चाई यह है कि CAA के ख़िलाफ़ विरोध कर रहे मुस्लिम, संसद द्वारा कानून पारित किए जाने के बाद से ही उग्र हो गए थे। मुस्लिम मॉब ने शहरों को जला दिया और बड़े पैमाने पर हिंसा की।अप्रत्याशित रूप से, राजदीप सरदेसाई ने मुस्लिम भीड़ के कृत्यों को शांतिपूर्ण रवैया बताकर उनके अपराधों पर पर्दा डालने की कोशिश की।

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JNU के 65% छात्रों ने भर भी दी नई हॉस्टल फीस, इस मुद्दे पर महीनों से बवाल काट रहे हैं वामपंथी

जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्याल (JNU) के हॉस्टल फीस में हुई वृद्धि को लेकर पिछले कई महीनों से बवाल चल रहा है। इस बीच जेएनयू प्रशासन ने बताया कि 65% से ज्यादा स्टूडेंट्स ने नई हॉस्टल फीस भरकर विंटर सेमेस्टर के लिए रजिस्ट्रेशन करा लिया है। जेएनयू के वाइस चांसलर जगदीश कुमार ने गुरुवार (जनवरी 16, 2019) को इसकी जानकारी दी। बता दें कि छात्रों ने होस्टल फीस नई दरों के हिसाब से जमा की है।

वीसी ने बताया कि 8500 स्टूडेंट्स जेएनयू में पढ़ते हैं और इनमें से 6450 हॉस्टल में रहते हैं, बाकी डे-स्कॉलर्स हैं और 95 प्रतिशत डे स्कॉलर्स ने भी अपनी बकाया सेमेस्टर फीस जमा कर दिया है। वीसी जगदीश कुमार ने कहा, “कैंपस के हॉस्टल में रहने वाले 65% से अधिक छात्रों ने अपने बकाया शुल्क का भुगतान कर दिया है। कुछ छात्र जो इस बीच अपने घर चले गए थे वे भी वापस कैंपस में लौट रहे हैं।” यानी कि शुल्क का भुगतान करने वाले छात्रों की संख्या में और भी वृद्धि होने की संभावना है।

इसके साथ ही प्रशासन ने रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख को भी दो दिन आगे बढ़ा दिया है। जगदीश कुमार ने अपनेे बयान में कहा, “15 जनवरी को विंटर सेमेस्टर के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख थी, जिसकी वजह से फीस काउंटर्स पर छात्रों की भारी भीड़ जमा रही। कई स्टूडेंट्स तारीख बढ़ाने की गुजारिश के साथ हमारे पास पहुँचे। जिसके बाद उनकी सुविधा को देखते हुए रजिस्ट्रेशन की तारीख आखिरी बार 2 दिन के लिए बढ़ा दी गई है। अब छात्र 17 जनवरी तक रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। छात्र इस तारीख के बाद भी रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी रूल्स के अनुसार उन्हें इसके लिए लेट फीस भी भरनी पड़ेगी।”

जेएनयू प्रशासन के अनुसार सभी स्कूलों और केंद्रों ने अपना टाइम टेबल घोषित कर दिया है और वे उन छात्रों की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं जो पिछला सेमेस्टर पास नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि जेएनयू प्रशासन वह सभी कोशिशें कर रहा है जिससे कि छात्र अपनी पढ़ाई लगातार जारी रख सकें।

JNUSU के नेतृत्व में आंदोलन और बहिष्कार के बारे में बात करते हुए विश्वविद्यालय के वीसी जगदीश कुमार ने कहा कि सभी स्कूलों और केंद्रों ने अपना टाइम टेबल घोषित कर दिया है और वे उन छात्रों के लिए परीक्षा आयोजित करने पर काम कर रहे हैं, जो पिछला सेमेस्टर पास नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों के शैक्षणिक हितों को देखते हुए वह सभी कोशिशें कर रहा है जिससे कि छात्र अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।

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CAA का समर्थन करने पर जिहादी बना रहे निशाना: केरल के एक डॉक्टर ने बयाँ किया दर्द

केरल के तिरुवनंतपुरम के डॉक्टर रंजीत विजयाहरि ने दावा किया है कि नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) का समर्थन करने के कारण उन्हें इस्लामी कट्टरपंथी निशाना बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर बुधवार (15 जनवरी) को इस संबंध में उन्होंने कई ट्वीट्स किए। इनमें उन्होंने बताया है कि वे गैस्ट्रो सर्जन हैं और अपनी पत्नी के साथ हॉस्पिटल चलाते हैं। उन्होंने बताया है कि CAA का समर्थन करने के लिए ‘जिहादी तत्व’ उन्हें परेशान कर रहे हैं।

डॉ. विजयाहरि सेवा भारती के कार्यकर्ता रहे हैं और RSS से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कट्टरपंथियों का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया है। इसमें उनके और उनकी प्रैक्टिस को बदनाम करते हुए दावा किया गया कि “साम्प्रदायिक” होने के कारण वे सहानुभूति की उम्मीद नहीं रख सकते।

एक अन्य व्यक्ति को रोगियों को अवांछित सलाह देते हुए देखा जा सकता है कि जब वे डॉक्टर के दवाखाने जाएँ तो सावधान रहें। उन्होंने कुछ अन्य स्क्रीनशॉट भी शेयर किए, इनमें उन्होंने दावा किया कि चिकित्सा के पेशे से जुड़े उनके दोस्तों को भी ‘प्रतिकूल राजनीतिक विचारों’ के लिए अनैतिक प्रथाओं और ‘क्रूर उपचार’ के आरोपों के साथ निशाना बनाया गया है।

दरअसल, राज्य की वामपंथी सरकार नागरिकता संशोधन क़ानून के पारित होने बाद से ही इसके विरोध में खड़ी हुई है। यहाँ तक ​​कि इस क़ानून को रद्द करने की माँग करते हुए केरल विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पारित किया था, जिसे कॉन्ग्रेस ने भी समर्थन दिया था। केरल सरकार ने अब सर्वोच्च न्यायालय में CAA के ख़िलाफ़ मुकदमा भी दायर किया है।

केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने इस प्रस्ताव को ग़ैर-कानूनी और असंवैधानिक करार दिया था। उनका कहना था कि नागरिकता विशेष रूप से केंद्र का विषय है, इसलिए इस प्रस्ताव का वास्तव में कोई महत्व नहीं है।

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CAA समर्थकों पर हमला करने वाले 6 गिरफ्तार, कट्टरपंथी इस्लामी संगठन SDPI से है रिश्ता

कर्नाटक पुलिस ने चरमपंथी इस्लामी संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के 6 समर्थकों को गिरफ्तार किया है। इनकी गिरफ्तारी 22 दिसंबर 2019 को बीजेपी और आरएसएस समर्थकों पर हमला करने के आरोप में किया गया गया है। हमला नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में निकाली गई रैली के दौरान किया गया था।

बता दें कि इससे पहले इस चरमपंथी इस्लामी संगठन ने केरल भाजपा के सचिव एके नजीर की बेरहमी से पिटाई की थी। नजीर पर तब क्रूरतापूर्वक हमला किया गया था, जब वह इडुक्की जिले के थूकुप्पलम क्षेत्र की एक मस्जिद में नमाज़ अदा कर रहे थे। नजीर के ऊपर भी नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने को लेकर ही किया गया था। इस दौरान हमलावर एसडीपीआई कार्यकर्ताओं ने कहा था कि जो लोग नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करते हैं, उन्हें जिंदा नहीं बख्शा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि SDPI एक चरमपंथी इस्लामी राजनीतिक संगठन है, जो केरल और देश के अन्य कई हिस्सों में कई सांप्रदायिक हमलों के पीछे है। SDPI के पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का हाथ है। CAA विरोध के नाम पर देश के कई हिस्सों में भड़की हिंसा में PFI का नाम सामने आया है।

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20 साल पुराने निर्जन टापू पर रखे जाएँगे 1 लाख रोहिंग्या, चारों तरफ फैला है पानी

म्यांमार से भाग कर बांग्लादेश पहुँचे रोहिंग्याओं में से 100,000 शरणार्थियों को अब सरकार ‘भसन चार’ नाम के बांग्लादेशी द्वीप पर रखने के लिए तैयार है। अधिकारियों ने गुरुवार (जनवरी 16, 2019) को इसकी जानकारी दी। हालाँकि फिलहाल इन शरणार्थियों को द्वीप पर भेजने के तारीख की घोषणा नहीं की गई है। बता दें कि भसन चार एक छोटा सा निर्जन द्वीप है, जिस पर बाढ़ और तूफान आने का खतरा हमेशा ही बना रहता है। इस द्वीप के चारों ओर पानी ही पानी फैला है।

अधिकारियों ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में स्थित इस द्वीप में बाढ़ से बचाव के लिए मकान, अस्पताल और मस्जिदें बनाई गई हैं। बांग्लादेश शरणार्थी, राहत और प्रत्यावर्तन आयोग के प्रमुख महबूब आलम तालुकदार ने बताया, “लोगों को भसन चार में रखने की तैयारी पूरी हो चुकी है। यहाँ पर सारी व्यवस्थाएँ कर दी गईं हैं।”

इस द्वीप को केवल उन लाखों रोहिंग्याओं में से 100,000 शरणार्थियों के लिए तैयार किया गया है, जो म्यांमार से यहाँ आए हैं। बता दें कि अगस्त 2017 के बाद लगभग 700,000 रोहिंग्या म्यामांर से बांग्लादेश आए हैं। जानकारी के मुताबिक, विदेशी मीडिया को भसन चार में जाने से प्रतिबंधित किया गया है। बांग्लादेश के एक स्वतंत्र पत्रकार सालेह नोमान, जिन्होंने हाल ही में द्वीप का दौरा किया था, ने वहाँ के समुदाय के बारे में बताया।

सालेह नोमान ने कहा, “मैंने वहाँ के मार्केट में लगभग 10 किराने की दुकानों और सड़क के किनारे चाय की दुकानों को देखा। कुछ लोग मछली और सब्जियाँ भी बेच रहे थे। वहाँ पर सोलर पावर सिस्टम और वाटर सप्लाई लाइन के साथ ही सारी व्यवस्था कर दी गई है।” बता दें कि करीब 20 साल पहले बंगाल की खाड़ी में यह द्वीप सतह पर उभरकर आया था। इस निर्जन द्वीप पर मानसून में हमेशा बाढ़ का खतरा बना रहता है।

गौरतलब है कि महबूब आलम तालुकर ने अक्टूबर 2019 में कहा था कि वो अगले महीने की शुरुआत तक पुनर्वास शुरू करना चाहते हैं। न्यूज़ एजेंसी रायटर्स से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि शरणार्थियों को विभिन्न चरणों में स्थानांतरित किया जाएगा।

यह खबर ऐसे वक़्त में सामने आई है जब अंडमान निकोबार द्वीप समूह में रोहिंग्या घुसते पकड़े गए हैं। सोमवार (जनवरी 13, 2020) को पुलिस को सूचना मिली थी कि तरमुगली द्वीप पर कुछ संदिग्ध लोगों को नाव के साथ देखा गया। जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 66 लोगों को हिरासत में लिया, जो बाद में रोहिंग्या मुस्लिम निकले। हिरासत में लिए गए सभी आरोपित बांग्लादेश से आए थे।

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बांग्लादेशी या रोहिंग्या इस देश का नहीं है, उसकी पहचान कर, अलग करना समय की माँग

₹5,000 के लिए अब्दुल ने 13 साल की बच्ची से किया रेप, ₹2500 के लिए महिला से गैंगरेप

बांग्लादेश में इस साल दुष्कर्म की कुछ ऐसी घटनाएँ सामने आई है जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है। राइट्स ग्रुपों का कहना है कि बलात्कार की घटनाएँ न केवल लगातार बढ़ रही है, बल्कि पैसे के लिए महिलाओं और बच्चियों को निशाना बनाने का चलन भी दिख रहा है। राजधानी ढाका के बाहरी इलाक़े Kamrangirchar और Ashulia क्षेत्र से ऐसी ही दो चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एक मामले में 13 साल की नाबालिग बच्ची का बलात्कार इसलिए किया गया क्योंकि उसका पिता 5000 रुपए की उधारी चुकाने में सक्षम नहीं था। क़र्ज़ वसूली के नाम पर अब्दुल ने बच्ची का कई दिनों तक बलात्कार किया। दूसरे मामले में एक महिला का गैंगरेप इसलिए किया गया क्योंकि उसका पति 2500 रुपए बतौर कमरे का किराया नहीं दे पाया था।

ख़बर के अनुसार, ढाका के Kamrangirchar इलाक़े में एक बाप ने अपनी बेटी को अब्दुल हुसैन के साथ संबंध बनाने का दबाव इसलिए बनाया क्योंकि वो उसके बकाया रुपए की अदायगी में असमर्थ था। आरोपित अब्दुल हुसैन ने नाबालिग के पिता मोहम्मद लिटन की मदद से उसकी बेटी का बलात्कार किया। पीड़िता के पिता को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है।

Kamrangirchar पुलिस के उप-निरीक्षक (SI) शेख मोहम्मद मुर्शीद अली ने बताया कि 13 वर्षीय पीड़िता अपने पिता के साथ रह रही थी। उसके पिता ने अबुल हुसैन की पोल्ट्री में काम करते थे। लगभग एक साल पहले उन्होंने अब्दुल से 6,000 टका (करीब 5,009 रुपए) कर्ज़ा लिया था।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब लिटन क़र्जा चुकाने में विफल रहा, तो उसने अब्दुल को अपनी बेटी के साथ यौन संबंध बनाने का प्रस्ताव दिया। इसके लिए पहले तो लड़की को उसके पिता द्वारा समझौता करने के लिए मजबूर किया गया और जब वो नहीं मानी तो उसे पीटा गया। इसके बाद कई दिनों तक अब्दुल ने उसका बलात्कार किया।

बुधवार (15 जनवरी) को तड़के ढाका मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (DMCH) के वन-स्टॉप क्राइसिस सेंटर में पीड़िता को भर्ती कराया गया। SI ने बताया, “अस्पताल में  उसका इलाज चल रहा है। उसके ठीक होने के बाद, पीड़िता को उसके बयान के लिए अदालत में पेश किया जाएगा।”

SI ने बताया कि सोमवार (13 जनवरी) को पीड़िता ने अपने एक पड़ोसी से इस बात का खुलासा किया और मदद माँगी। इसके बाद, उस पड़ोसी ने मंगलवार (14 जनवरी) को 999 के माध्यम से पुलिस को बुलाया, कानून प्रवर्तन ने लड़की को बचाया और उसके पिता लिटन को गिरफ़्तार कर लिया। मुख्य आरोपित अब्दुल हसन को उसके ससुर के घर से गुरुवार को गिरफ्तार किया गया।

बलात्कार की दूसरी घटना में, रेडीमेंट गारमेंट की दुकान में काम करने वाली 24 वर्षीय पीड़िता का उसके मकान मालिक मोहम्मद कलाम ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर सामूहिक बलात्कार किया। सामूहिक बलात्कार के समय आरोपितों ने पीड़िता के पति को एक दूसरे कमरे में बंद कर रखा था। 

ढाका पुलिस के मुताबिक़, मोहम्मद कलाम को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस की पूछताछ के दौरान कलाम ने इस बात को स्वीकार किया कि उसने जबरन महिला के सोने के आभूषण बतौर किराए के रूप में लिए थे। लेकिन उसने सामूहिक दुष्कर्म के आरोप को ख़ारिज कर दिया। 

पीड़िता के अनुसार, मंगलवार की रात मकान माालिक मोहम्मद कलाम 4-5 लोगों के साथ उसके कमरे में आया और जनवरी माह का किराया (3000 टका) माँगने लगा। दंपति ने जब किराया देने में असमर्थता जताई तो उन्होंने महिला के उन सोने के आभूषणों की माँग की जो उस वक़्त उसने पहन रखे थे। आभूषण देने से जब महिला ने इनकार कर दिया तो उसके पति को एक दूसरे कमरे में बंद कर महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया। वहाँ से निकलते समय कलाम पीड़िता के गहने भी साथ में ले गया। फ़िलहाल, पुलिस इस मामले की जाँच में जुटी हुई है।

एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में पिछले साल 1,413 बलात्कार की घटनाएँ सामने आई थी। 2018 में यह आँकड़ा 732 और 2017 में 818 था। रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल 37 लड़कों समेत 1087 बच्चों का यौन शोषण किया गया।

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नमाज के लिए निकला ‘डॉ. बम’ लापता, परोल पर बाहर था मुंबई धमाकों का गुनहगार

साल 1993 में मुंबई में हुए सीरियल ब्लास्ट का दोषी और डॉ. बम के नाम से जाना जाने वाला कुख्यात आतंकी जलीस अंसारी गुरुवार (जनवरी 16, 2020) को मुंबई से लापता हो गया। उसे अजमेर जेल से 21 दिन के
परोल पर छोड़ा गया था। शुक्रवार (जनवरी 17, 2020) को यानी आज उसकी परोल अवधि खत्म हो रही थी और उसे अजमेर जेल पहुँचना था।

दोपहर को उसके बेटे जैद ने पिता के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के मुताबिक जलीस अंसारी तड़के उठा और घरवालों से नमाज पढ़ने की बात कहकर निकला। लेकिन वापस नहीं लौटा। जैद की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया है। मुंबई पुलिस की अपराध शाखा और महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता उसकी तलाश कर रही है।

मामले की जानकारी देते हुए अधिकारी ने बताया, परोल की अवधि के दौरान अंसारी को रोजाना सुबह साढ़े दस बजे से 12 बजे के बीच अग्रीपाडा थाने आकर हाजिरी लगाने को कहा गया था, लेकिन वह गुरुवार को निर्धारित समय पर नहीं पहुँचा। उन्होंने बताया कि दोपहर को अंसारी का 35 वर्षीय बेट जैद अंसारी पुलिस थाने पहुँचा और पिता के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई।

गौरतलब है कि अंसारी अग्रीपाडा थाने के अंतर्गत मोमिनपुर का रहने वाला है और अजमेर बम धमाके मामले में उम्र कैद की सजा काट रहा है। इसके अलावा वह देश के विभिन्न हिस्सों में हुए कई धमाकों में भी सदिंग्ध है।

अधिकारियों के मुताबिक अंसारी को राजस्थान स्थित अजमेर केंद्रीय कारागार से 21 दिनों के परोल पर रिहा किया गया था, वो भी इस शर्त पर कि उसे हर रोज 10 से 12 बजे के बीच आकर हाजिरी लगानी होगी। हालाँकि बीते बुधवार तक ये प्रक्रिया चलती रही। वो पुलिस थाने में आकर हाजिरी लगाता रहा, लेकिन गुरुवार को उसकी जगह उसका बेटा थाने पहुँचा और बताया कि जलीस लापता है। इसके बाद पुलिस ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की और जाँच में जुट गई।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्होंने जलीस को ढूँढने के लिए पुलिस लगा दी है। अब वे अजमेर से खबर आने का इंतजार कर रहे हैं। मुमकिन है जलीस वहाँ से आत्मसमर्पण करने अजमेर जाने के लिए निकल चुका हो।

उल्लेखनीय है कि देशभर में 50 से ज्यादा बम हमलों के आरोपित आतंकी जलीस को बम बनाने में महारत हासिल है। इसके कारण उसे डॉ. बम भी कहते हैं। वह सिमी और इंडियन मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी संगठनों से जुड़ा था और उन्हें बम बनाना सिखाता था।

यही कारण है कि उसके गायब होने की जानकारी मिलते ही महाराष्ट्र एटीएस, मुंबई क्राइम ब्रांच समेत अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट हो गई है। महाराष्ट्र की एटीएस, मुंबई, क्राइम ब्रांच समेत अन्य सुरक्षा एजेंसियाँ उसकी खोज पड़ताल में जुट गई हैं। उसकी तलाश में जगह-जगह छापेमारी जारी है।

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3 म​हीने पुराने फेसबुक पोस्ट पर 5 घंटे उपद्रव, विहिप कार्यकर्ता के मोहल्ले में हरवे-हथियार ले घुसे

झारखंड में करीब तीन महीने पुराने फेसबुक पोस्ट को लेकर समुदाय विशेष के लोगों ने जमकर बवाल काटा। घटना धनबाद के झरिया की है। गुरुवार (16 जनवरी 2020) को यहॉं पॉंच घंटे तक बवाल चला। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार एक समुदाय के लोग उस मोहल्ले में हरवे-हथियारों के साथ घुस गए, जहॉं आरोपित विहिप कार्यकर्ता संजीव गिरि का घर है। मोहल्ले के दुकानों और घरों में उपद्रवियों ने तोड़फोड़ की। महिलाओं के साथ बदसलूकी की गई। झरिया-सिंदरी मुख्य मार्ग जाम कर दिया। पथराव किया। यहॉं तक कि शवयात्रा में शामिल लोगों को भी पीटा गया।

इस संबंध में 7 पीड़ितों ने झरिया पुलिस से अलग-अलग लिखित शिकायतें की हैं। शिकायतों में तनवीर, सलमान, तासिम, विक्की, गुलाम इमाम, गोलू, समीर खान, छोटू, बबन मियाँ समेत अन्य पर हरवे-हथियार से लैस होकर मोहल्ले में घुसकर मारपीट करने, बाइक क्षतिग्रस्त करने, महिलाओं से अभद्र व्यवहार करने और दुकान में तोड़फोड़ करने का आरोप लगाया गया है।

दैनिक जागरण के धनबाद संस्करण में प्रकाशित खबर

ऊपर राजबाड़ी के गोपाल ने एसडीएम को बताया कि दर्जनों की संख्या में युवक उसके घर में घुस आए। गालियाँ बकीं। आपत्तिजनक नारे लगाए। घर के बाहर सीसीटीवी लगा है। युवकों की सारी कारस्तानी उसमें कैद है। एसडीएम ने सीसीटीवी फुटेज माँगे हैं। एसडीएम राज महेश्वरम ने कहा है कि तोड़-फोड़ करने वालों पर कार्रवाई होगी। उनको बख्शा नहीं जाएगा। सीसीटीवी फुटेज भी खँगाला जा रहा है।

प्रभात खबर के धनबाद संस्करण में प्रकाशित खबर

बाद में ग्रामीण एसपी के नेतृत्व में पुलिस ने फ्लैग मार्च किया। इसके बाद हालात पर काबू पाया जा सका। इस दौरान पुलिस कतरास मोड़ स्थित विहिप कार्यालय में घुस गई। जिसके बाद वहाँ मौजूद विश्व हिन्दू परिषद नेताओं के साथ नोक-झोंक भी हुई। हालाँकि वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को सँभाल लिया। बताया जा रहा है कि सड़क के जाम के दौरान एंबुलेंस व कई अन्य वाहनों के चालकों के साथ भी मारपीट की गई।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर

धनबाद के एसएसपी किशोर कौशल ने बताया कि विवादित पोस्ट को लेकर हंगामा हुआ था, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है। विवादित पोस्ट डालने वाले युवक के साथ सड़क जाम और हंगामा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि जिस पोस्ट के कारण हंगामा हुआ, उसे संजीव ने 22 अक्टूबर 2019 को शेयर किया था। हालाँकि फिलहाल युवक ने विवादित पाेस्ट काे डिलीट कर दिया है और नया पाेस्ट करते हुए लिखा है, “मैंने जाे पाेस्ट शेयर किया था, उसके लिए मैं माफी माँगता हूँ।”

गौरतलब है कि धनबाद में अभी हाल ही में वासेपुर के लोगों ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर आपत्तिजनक नारे लगाए थे। प्रशासन की इजाजत के बिना शहर में जुलूस निकाला था। इससे शहर में घंटों अराजक स्थिति रही थी। इस घटना को लेकर करीब 3000 लोगों पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया था। हालॉंकि अगले ही दिन प्रशासन का रुख इनको लेकर नरम हो गया। खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर यह जानकारी दी थी।

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