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राहुल के बयानों पर जावड़ेकर का करारा जवाब, बोले- उन्‍हें ‘झूठ ऑफ द ईयर’ का अवार्ड मिलना चाहिए

नई दिल्ली के भाजपा मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी पर आज (दिसंबर 27, 2019) जमकर निशाना साधा। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए राहुल गाँधी को 2019 का सबसे बड़ा झूठ बताया। साथ ही उन्होंने राहुल गाँधी के ‘एनपीआर को गरीबों का टैक्स’ बताने वाले बयान पर कहा कि टैक्स और करप्शन तो कॉन्ग्रेस का कल्चर है। कॉन्ग्रेस हर उस चीज का विरोध करती है जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगती है या वो खत्म होता है।

उन्होंने इस सम्मेलन में राहुल गाँधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “आज उन्होंने (राहुल गाँधी) कहा कि एनपीआर गरीब पर टैक्स है। मैं सोच रहा था कि यह टैक्स कहाँ से आया, एनपीआर तो पॉपुलेशन रजिस्टर है। टैक्स कॉन्ग्रेस का कल्चर है। जैसे- जयंती टैक्स, कोयला टैक्स, टू जी टैक्स, जीजाजी टैक्स।

प्रकाश जावड़ेकर ने राहुल गाँधी पर उनके बयानों को लेकर हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष थे तब भी और नहीं है तब भी लगातार झूठ बोलते हैं। इसलिए 2019 का झूठ ऑफ द ईयर राहुल गाँधी को मिल सकता है। उन्होंने कहा पहले राहुल गाँधी के बयानों से परिवार परेशान था अब जनता और पूरी कॉन्ग्रेस परेशान है।

सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कॉन्ग्रेस से 2 माँगे करते हुए कहा, “झूठ बोलना बंद करें ताकि देश गुमराह न हो। देश ने आपको रिजेक्ट किया है। इसके अलावा कर्ज माफी जैसे झूठे वादे करना बंद करें, जो कभी पूरे नहीं किए।”

जावड़ेकर ने आगे राहुल गाँधी से कहा कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार है, जहाँ एक अस्पताल में एक महीने में 77 बच्चों की मृत्यु हुई है। अगर राहुल गाँधी को जाना है तो वहांँ जाएँ और अपनी सरकार को सुधारें। उसके बजाय ये बेतुके बयान देना बंद करें।

केंद्रीय मंत्री ने इसके बाद पूरी कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए एनपीरआर का मतलब बताया और कहा कि कॉन्ग्रेस हर उस चीज का विरोध करती है, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगती है।

उन्होंने बताया, “भ्रष्टाचार कॉन्ग्रेस की राजनीति का एक मात्र आधार है। इसलिए जिन-जिन चीजों से भ्रष्टाचार पर लगाम लगती है या जिनसे भ्रष्टाचार खत्म होती है तो कॉन्ग्रेस उसका विरोध करती है। एनपीआर से क्या होता है? इससे गरीब की पहचान होती है। 2010 में बने एनपीआर के डेटा के आधार पर तमाम राज्यों ने अपने यहाँ लाभार्थियों का चयन किया। अब वही 2020 में हो रहा है। लेटेस्ट स्थिति सामने आएगी। लाभार्थियों की पहचान में एनपीआर का बहुत बड़ा योगदान होता है। आधार की वजह से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर शुरू हुआ। सैकड़ों योजनाओं के 9 लाख करोड़ रुपए लोगों के खाते में सीधे जमा हो गए।”

मध्य प्रदेश के जीवाजी यूनिवर्सिटी ने क्रांतिकारियों को बताया ‘आतंकवादी’: बीजेपी ने की कार्रवाई की माँग

मध्यप्रदेश के ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी मे परीक्षा के दौरान राजनीति शास्त्र के प्रश्न पत्र में क्रांतिकारियों की तुलना आतंकवादियो से किए जाने का शर्मनाक वाकया सामने आया है। सोशल मीडिया पर प्रश्न पत्र की तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। जिसके बाद इसपर प्रदेश के शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने खुद संज्ञान लिया है और विश्वविद्यालय से सवाल पूछा गया है कि इसे पूछे जाने के पीछे आखिर क्या उद्देश्य था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदेश शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने इस घटना पर बयान देते हुए कहा ये व्यवस्था बेहद गोपनीय होती है। ऐसा सवाल कैसे पूछा गया? इसके पीछे किसी का षडयंत्र था और उनकी क्या व्यवस्था थी। इन सब पर जाँच की जा रही है। साथ ही शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि, क्योंकि ये मामला विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ मामला है, इसलिए इसकी बेहद सतर्कता के साथ जाँच होगी।

जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने पूरे मामले के मद्देनजर प्रमुख सचिव को अपने निवास पर बुलाया। साथ ही मामले को लेकर 3 सदस्यीय जाँच कमेटी भी गठित की गई। अब ये जाँच कमेटी 3 दिन के भीतर पूरे मामले की जाँच रिपोर्ट उन्हें सौंपेगी।

रिपोर्ट आने के बाद मामले में जो भी दोषी पाया जाएगा। उस पर कड़ी कार्रवाई होगी। जीतू पटवारी के मुताबिक ये मात्र एक चूक नहीं है, बल्कि बहुत बड़ी गलती है। इसलिए जो भी दोषी होगा उसको बख्शा नहीं जाएगा। सख्त कार्रवाई होगी ताकि आगे विश्वविद्यालयों में इस तरह की चूक ना हो।

बता दें, कि यह प्रश्न कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के निर्वाचन क्षेत्र गुना के सरकारी कॉलेज में एमए राजनीति शास्त्र की 20 दिसंबर को हुई परीक्षा के दौरान पूछा गया था। जिसके प्रकाश में आने के बाद न सिर्फ छात्र संगठन बल्कि भारतीय जनता पार्टी ने भी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करने शुरु कर दिए।

इस मामले पर मध्‍य प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर गैरजिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। शिवराज सिंह चौहान ने भी इस घटना को शर्मनाक और दुखदायी बताते हुए कहा, “जिनके बलिदान के कारण हम खुली हवा में साँस ले पा रहे हैं, उन्हें कोई कैसे आंतकवादी कह सकता है। मध्य प्रदेश सरकार से मेरी माँग है कि तुरंत ऐसे गैरजिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।”

वहीं, प्रदेश में कॉन्ग्रेस सरकार होने के बाद भी कॉन्ग्रेस के उपाध्यक्ष ने इस घटना पर कहा– “प्रदेश के शिक्षा संस्थानों में संघी मानसिकता के लोग घुस गए हैं। इसीलिए इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। जीवाजी विश्वविद्यालय में पेपर किसने सेट किया, इसकी जाँच कराएँगे और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।”

CM योगी की छवि धूमिल करने की कोशिश में कॉन्ग्रेस ने शेयर किया बिन J&K के भारत का नक्शा, हुई फजीहत

देश में एकता, अखंडता और धर्मनिर्पेक्षता बनाए रखने की बात करने वाली देश की सबसे पुरानी पार्टी कॉन्ग्रेस की महिला विंग को सोशल मीडिया पर आज एक ओछी करते पाया गया। दरअसल, सीएए के विरोध में कॉन्ग्रेस की महिला विंग ने आज ट्विटर पर एक कार्टून पोस्ट किया। जिसके कारण सोशल मीडिया पर उनकी बहुत थू-थू हुई और अब सोशल मीडिया यूजर्स उनके ट्वीट के स्क्रीनशॉट लेकर उनकी मंशा पर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। साथ ही दिल्ली पुलिस से इसपर संज्ञान लेने की गुहार लगा रहे हैं।

अब आखिर शेयर किए गए उस कार्टून में ऐसा क्या विवादस्पद था? तो बता दें, उस कार्टून में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके भगवा वस्त्र और माथे पर ‘खून की तरह बहता’ तिलक लगाए दर्शाया गया था। इसके अलावा इस कार्टून में उनके हाथ में फाँसी के फँदे को दिखाया गया था और साथ ही उस फाँसी के फँदे में भारत का नक्शा दिखाया गया था। इस आपत्तिजनक कार्टून में योगी आदित्यनाथ की छवि धूमिल करने के प्रयास के अलावा सबसे विवादस्पद था कि जिस नक्शे को कार्टून में दर्शाया गया, उससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख ही गायब था।

इस पोस्ट के साथ ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस के ट्विटर अकॉउंट पर शलभ श्रीराम सिंह कविता ‘इंकलाब चाहिए’ की निम्नलिखित पंक्तियों को भी लिखा गया था। जिसे यूजर्स की आपत्ति झेलने के बाद उन्होंने डिलीट कर दिया।

“जहाँ आवाम के खिलाफ साजिशें हो शान से
जहाँ पे बेगुनाह हाथ धो रहे हों जान से
जहाँ पे लब्जे अमन एक खौफनाक राज़ हो
जहाँ कबूतरों का सरपरस्त एक बाज़ हो
वहाँ न चुप रहेंगे हम कहेंगे हाँ कहेंगे”


शलभ श्रीराम सिंह की कविता इंकलाब चाहिए की पंक्तियाँ

लेकिन, सोशल मीडिया पर लोगों ने ऐसी मंशा रखने वालों को न बख्शने की ठानी। लोग इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट लेकर इसे सोशल मीडिया पर शेयर करने लगे। साथ ही दिल्ली पुलिस को टैग करके इस मामले पर ध्यान केंद्रित करवाने लगे कि कॉन्ग्रेस ने एक ऐसा नक्शा शेयर किया है जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का हिस्सा ही नहीं हैं। वहीं, दिल्ली में भाजपा कार्यकर्ता और आप के बागी नेता ने भी इसे लेकर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा और लिखा, “कॉन्ग्रेस, तुम बिना सिर के होगे, भारत नहीं है।”

गौरतलब है कि, ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस के ट्विटर पेज पर ये कार्टून आज सुबह यानी 27 दिसंबर को 11: 43 के करीब शेयर किया गया था। इससे पहले ये तस्वीर व्हॉट्सअप पर भी जमकर वायरल हुई थी।

राबड़ी देवी ने लौटाया दहेज़: ऐश्वर्या के परिवार ने लेने से किया इनकार, कहा- शराब या विस्फोटक भी हो सकता था

जेल में बंद राजनेता लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी ने अपनी पुत्रवधू ऐश्वर्या के परिवार को एक पैकेज (दहेज़) भेजा, लेकिन ऐश्वर्या के परिवार ने यह कहते हुए उस पैकेज को लेने से इनकार कर दिया कि इसमें विस्फोटक हो सकता था। ऐश्वर्या के पिता ने उस पैकेज को लेने से साफ़ इनकार कर दिया। सामान वापस करने का यह निर्णय राबड़ी देवी द्वारा महिला हेल्पलाइन से नोटिस मिलने के बाद लिया था।

ख़बर के अनुसार, ऐश्वर्या के पिता के हवाले से कहा गया था कि सामान भेजने की उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। उन्होंने शक़ जताया था कि लालू का परिवार अवैध तरीक़े से शराब या विस्फोटक भी भेज सकता था। इसलिए उन्होंने उस पैकेज को लेने से साफ़ इनकार कर दिया, जिससे कहीं बाद में उन्हें किसी तरह की मुसीबत का सामना न करना पड़ा जाए।

ऐश्वर्या की माँ चंद्रिका राय ने गुस्से में कहा, “क़ानून के अनुसार, दहेज़ के सामान को भेजने से पहले मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी के सामने एक सूची तैयार की जाती है। मैं उस पैकेज को कैसे स्वीकार कर सकती थी, क्योंकि उस पैकेज में शराब या विस्फोटक सामग्री भी हो सकती थी।”

ग़ौरतलब है कि ऐश्वर्या रॉय ने बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव से 2018 में शादी की थी, लेकिन जल्द ही उनके आपसी रिश्ते में खटास आ गई। इस वजह से आपसी विवाद की बात तलाक़ लेने तक पहुँच गई। हाल ही में यह ख़बर आई थी कि बहू ऐश्वर्या ने अपनी सास राबड़ी पर मारपीट करने और उनके बाल खींचने का आरोप लगाया था।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा था, “जब मुझे मोबाइल फोन के एक मैसेज से पता चला कि तेजप्रताप यादव के समर्थकों ने पटना विश्वविद्यालय परिसर में मेरे और मेरे माता-पिता के बारे में आपत्तिजनक पोस्टर चिपकाए गए हैं, तो उस समय मैं अपने कमरे के अंदर टीवी देख रही था। मैंने अपनी सास से इस बारे कहा कि सार्वजनिक रूप से मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने का काम है, मैं बस अपने माता-पिता को इन सब मामले में घसीटना नहीं चाहती थी।”

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मुंसिफ खान से प्रेम विवाह करने वाली हिन्दू युवती का अधजला शरीर बरामद: हिरासत में लेकर पूछताछ जारी

झारखंड की राजधानी राँची के खूँटी थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक 33 वर्षीय युवती का अधजला शव बरामद किया। शव की पहचान विनीता तिर्की उर्फ अंजलि के रूप में हुई। युवती राँची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र स्थिति महावीर नगर की निवासी बताई जा रही है। जो मूल रूप से सिमडेगा के सलगापुर की रहने वाली थी, लेकिन अरगोड़ा में पिछले कई सालों से अपने पति मुंसिफ खान के साथ रह रही थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विनीता अपने घर से बीते बुधवार से गायब थी, लेकिन उसके गुमशुदगी का कोई मामला दर्ज नहीं था। ऐसे में गुरुवार को उसकी तस्वीर व्हॉट्सऐप पर वायरल हुई। तस्वीर में देखा गया कि युवकी का ऊपरी शरीर और चेहरा जला हुआ था। जिसके बाद कुछ स्थानियों द्वारा सूचना देने पर पुलिस ने इस मामले पर संज्ञान लिया। वहीं, खूँटी पहुँचकर मुंसिफ खान ने शव की पहचान अपनी पत्नी विनीता तिर्की उर्फ़ अंजलि के रूप में की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खूँटी पुलिस ने मुंसिफ खान को हिरासत लेकर पूछताछ की है। साथ ही युवती के शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया गया। हालाँकि, मुंसिफ खान ने पुलिस से पूछताछ में अब तक बताया है कि उसने विनीता से प्रेम विवाह किया था। जिनके 2 बच्चे भी हैं। लेकिन बता दें जब पुलिस मुंसिफ को लेकर उनके घर पहुँची, तो वहाँ वे बच्चे दिखाई नहीं पड़े।

अब पुलिस पूरे मामले में छानबीन कर रही है। फिलहाल हत्या के कारणों का कोई खुलासा नहीं हुआ है। मगर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कहा जा रहा है कि जिस तरह विनीता की बॉडी को जलाया गया, उससे लग रहा है कि उसकी गला दबाकर पहले हत्या की गई होगी और बाद में कालामाटी में लाकर उसे जलाया गया। क्योंकि घटनास्थल पर किसी प्रकार के विरोध के कोई निशान नहीं मिले हैं।

साभाऱ: सोशल मीडिया

इसके अलावा बताया जा रहा है कि विनीता के गायब होने से पहले मुंसिफ और उसके बीच लड़ाई हुई थी। मुंसिफ ने बताया है कि वो 24 दिसंबर को जब अपने घर पहुँचा तो उसकी पत्नी अपने दोस्तों के साथ जुआ खेल रही थी। रात के 2 बजे दोनो पति-पत्नी के बीच इस मामले पर झगड़ा हुआ और करीब साढ़े 3 बजे वो घर से निकलकर मांडर चला गया। जब 25 दिसंबर को वो घर लौटा तो घर में ताला लगा हुआ था।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि इस घटना का उस समय पता चला जब सुबह ग्रामीण खेत की ओर जा रहे थे। तभी सड़क किनारे उन्हें युवती का अधजला शव दिखा। मृतिका के हाथ में टैटू के निशान बने हुए थे। प्रथम दृष्टया वह गर्भवती भी लग रही थी। ग्रामीणों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी।

सूचना मिलने पर एसडीपीओ आशीष कुमार महली और थाना प्रभारी जयदीप टोप्पो मौके पर पहुँचे। इसके बाद पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लिया और देर रात उपायुक्त के आदेश पर रिम्स में पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में युवती को जलाए जाने की बात सामने आई, लेकिन दुष्कर्म का इस रिपोर्ट में कोई खुलासा नहीं हुआ। अब इस मामले में फॉरेंसिक के अलावा डॉग स्क्वॉयड की भी मदद ली जा रही है। जाँच के लिए अलग टीमों का गठन किया गया। पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में एफएसएल जाँच कराएगी। जिसके लिए बिसरा सुरक्षित रखा गया है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, खूँटी के एसपी आशुतोष शेखर ने इस संबंध में बताया कि संभवत: युवती की हत्या कहीं और कर तिरिल टोली के जंगल में शव लाकर फेंकी गई। इसके अलावा उन्होंने बताया कि आरोपितों ने पहचान मिटाने के लिए उसे प्लास्टिक में लपेटकर जला दिया। उन्होंने दावा किया कि शुक्रवार को मामले का खुलासा कर लिया जाएगा।

CAA के विरोध में चर्च का प्रोपेगेंडा: टोपी और हिजाब पहन लड़के-लड़कियों ने गाया कैरोल, थरूर ने किया शेयर

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर मुस्लिम समुदाय को भड़काकर कॉन्ग्रेसी-वामपंथी या देश विरोधी ताकतें दंगा कराने की कोशिश में लगातार हिंसा भड़का रही हैं। पुलिस ने कई लोगों को हिंसा करने और भड़काने के आरोप में गिरफ्तार भी किया है। इसी बीच केरल के एक चर्च में क्रिसमस कैरौल गाते हुए क़रीब 14 लड़कों ने मुस्लिम टोपी पहनी और लड़कियों ने हिजाब। और हाँ, इन्होंने किसी भ्रम में ऐसा नहीं किया है। चर्च ने जानबूझकर ऐसा करवाया है, जो यह बेहद खतरनाक है।

सोशल मीडिया में यह वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। प्रोपेगेंडा से भरे वीडियो वायरल करवाए भी जाते हैं। बता दें कि यह वीडियो केरल के पठानमथिट्टा के कोजेनचेरी के सेंट थॉमस मार थोमा चर्च में क्रिसमस समारोह का है।
इस वीडियो को “क्रिसमस: शरणार्थियों का उत्सव” कैप्शन के साथ सर्कुलेट किया जा रहा है।

इस वीडियो में, युवाओं को, मप्पीला पटु (mappila pattu) की धुन में क्रिसमस कैरोल गाते हुए देखा जा सकता है, जो कि मुस्लिम समुदाय द्वारा गाए जाने वाले पारम्परिक गीत है। इस वीडियो में लड़कियों को ताली बजाते हुए देखा जा सकता है।

The News Minute की ख़बर के अनुसार, चर्च के फ़ादर डैनियल टी फिलिप, सहायक विकर, बताते हैं कि क्रिसमस के उत्सव के दौरान युवाओं द्वारा पहनी गई मुस्लिम पोशाक CAA के ख़िलाफ़ आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त करने का ज़रिया है। बेहतर होता चर्च के फादर धर्म स्थान से धर्म की बात करते राजनीति की नहीं। हालाँकि धर्म-परिवर्तन में लिप्त रहने वाले चर्च से इस तरह की आदर्श बातें बेमानी ही है!

फादर डैनियल ने यह भी बताया कि क्रिसमस का सही अर्थ लोगों के बीच शांति का संदेश देना है। उन्होंने कहा, “इस के ज़रिए हमने यही दर्शाने का प्रयास किया। समुदायों या विभिन्न व्यक्तियों के बीच भेदभाव करने का कोई मतलब नहीं है, हम सभी के बीच शांति की ज़रूरत है।”

वायरल हुए इस वीडियो के पीछे के प्रोपेगेंडा को समझना है तो इसे किन हस्तियों द्वारा कैसे शेयर किया गया, ये देखें। इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने लिखा, “ओह यस- उनके कपड़ों को देखकर आप बता सकते हैं कि वो कौन हैं।”

दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी ने देश में CAA के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए टिप्पणी की थी कि CAA के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वालों को उनके द्वारा पहनी जाने वाली पोशाक से पहचाना जा सकता है।

रवीना टंडन, भारती सिंह और फ़राह खान पर केस: एक शब्द को लेकर ईसाई संगठन की शिक़ायत

‘सोनिया खुद इटली से आकर नागरिकता ले लीं, लेकिन सताए गए हिंदू-सिख भाइयों पर सवाल उठा रहीं’

वरुण ग्रोवर की ‘कागज नहीं दिखाएँगे’ को तगड़ा तमाचा, तहजीब के शहर लखनऊ से

वरुण ग्रोवर लेखक हैं। मुंबईया फिल्मों के लिए भी कुछ लिखा है इन्होंने। लेकिन सबसे बड़ी पहचान है इनका वामपंथी होना। फिलहाल ‘कागज नहीं दिखाएँगे’ नाम की एक कविता गाकर वामपंथी हृदय सम्राट बने बैठे हैं। कुछ दिनों में जब CAA या NRC का भ्रमजाल टूटेगा तो फिर इन्हें भी अन्य वामपंथियों की तरह फेंक दिया जाएगा।

वरुण ग्रोवर की कविता ‘कागज नहीं दिखाएँगे’ को काटती कई कविताएँ आईं। कुछ बहुत अच्छी भी, कुछ औसत। इन्हीं बहुत अच्छी कविताओं में से एक कविता है ऊर्वी सिंह की। यह लखनऊ के एक कॉलेज में अंग्रेज़ी की सहायक अध्यापिका हैं। सुनिए उनकी कविता, उन्हीं की आवाज में, जो तोड़ती है छद्म लिबरलों और स्वघोषित बौद्धिकता का भाव पाले बैठे लोगों का घमंड।

ऊर्वी सिंह की इस कविता का हमने ट्रांसक्रिप्ट भी लिखा है। नीचे पढ़ सकते हैं।

वो कागज नहीं दिखाएँगे
अपने स्टैंड-अप पे आप से आईडी कार्ड मंगवाएँगे
पर खुद कागज नहीं दिखाएँगे
वो डर को चारों ओर फैलाएँगे
वो चुनी हुई सरकार को गाली देकर अपनी दुकान चलाएँगे
वो कागज नहीं दिखाएँगे

वो जनता को हिंदू एक्सट्रिमिजम और माइनॉरिटी ऑप्रेशन की कपोल-कल्पित गाथाएँ सुनाएँगे
डेमोक्रेसी की ऐसी तैसी करने वाले डेमोक्रेसी समझाएँगे
वॉयलेंस, आगजनी और सोशल बुलिंग को ये सही ठहराएँगे
जाहिर सी बात है ये कागज नहीं दिखाएँगे

क्वासी इंटेलेक्चुअलिजम के मारे कागज नहीं दिखाएँगे
ये घर में बैठे-बैठे आर्म चेयर एक्टिविस्ट बने रह जाएँगे
इनकी कविता गाते-गाते लाठियाँ आप और हम खाएँगे
फिर आपकी मेरी चोटों पे ये और कविताएँ कह जाएँगे
ब्रो… ये कागज नहीं दिखाएँगे

ये एयरपोर्ट पर जाएँगे
पासपोर्ट या बोर्डिंग पास नहीं दिखाएँगे
ये एयरपोर्ट पर जाएँगे
पासपोर्ट या बोर्डिंग पास नहीं दिखाएँगे
ये दर्जी को सिलाई की रिसीट दिए बिना ही कपड़ा घर ले आएँगे
वो मेट्रो स्टेशन पे बिना पास चढ़ जाएँगे
डू यू नो व्हाय? बिकाउज ब्रो… वो कागज नहीं दिखाएँगे

इस शहर में ताजिया पे हिंदू बालकनी से फूल गिराते हैं
इस शहर में ऋतु का फेवरिट कुर्ता सलीम मियाँ के यहाँ सिलवाते हैं
रिचर्ड, रिता और रिजवान मिलकर क्रिसमस पे ‘गंजिंग’ करके आते हैं
वहाँ ये बताएँगे कि हम कागज नहीं दिखाएँगे

खैर… इससे पहले कि आपके दिमाग की नसें लगे फटने
अमाँ मियाँ, इनसे पूछो – तुमको कागज दिखाने को कहा आखिर किसने?

ऊर्वी सिंह की कविता फेसबुक पर शेयर करने वाले शख्स ने जो इनके बारे में लिखा है, वो भी मजेदार है, पढ़ने लायक है।

यह मोहतरमा Urvi Singh जी हैं। लखनऊ की शान हैं, और नाज़ुक लखनवी तहज़ीब और अवध की बेलौस ठसक दोनों अपनी ज़बान के सिरे पर अद्भुत संतुलन के साथ एक साथ टिकाए रखती हैं। ग़ज़ब की उर्दू, शुद्ध हिन्दी और धड़ल्ले की अवधी में तो पारंगत हैं ही, लेकिन लखनऊ के मशहूर सेंट ऐग्नेस गर्ल्स कॉन्वेंट की प्रतिभाशाली छात्रा रही होने के कारण अंग्रेज़ी पर ऐसी क़ातिलाना पकड़ रखती हैं कि जब चाहती हैं हमें ईर्ष्या से भर देती हैं। फ़िलहाल लखनऊ के एक कॉलेज में अंग्रेज़ी की सहायक अध्यापिका हैं।


हमेशा फ्रंट फुट पर आकर खेलती हैं, और पहली ही बॉल पर सिक्स जड़ कर उसे ‘नो बॉल’ क़रार दिलवाती हैं, फिर दोबारा उसी बॉल को चार रन के लिए बाउंड्री पार भेजने के बाद उसे फिर से ‘वाइड बॉल’ घोषित करवाती हैं, और अंततः उसी पहली ही बॉल पर 3 रन बटोरती हैं। इस तरह हर एक बॉल पर 15 रन लेना इनका बैटिंग ऐवरेज है।

‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ वाले वरुण के शो में बिना कागज़ दिखाए एंट्री नहीं, चाहिए वैध आईडी प्रूफ

डाक्यूमेंट्स जला दो पर सरकार को मत दिखाओ, रोज़ 10 मुस्लिमों को बताओ: हिंसक प्रदर्शन में ‘ISIS का हाथ’

केरल में डिटेंशन सेंटर बनाने के लिए तलाशी जा रही है इमारत: सामाजिक न्याय विभाग को सौंपी गई है जिम्मेदारी

केरल में विदेशी क़ैदियों के लिए एक ऐसी इमारत की खोज की जा रही है जिसमें डिटेंशन सेंटर (हिरासत केंद्र) स्थापित किया जा सके। बता दें कि इस तरह के डिटेंशन सेंटर को लेकर उपजा विवाद देशव्यापी स्तर पर क़ायम है। केरल के सामाजिक न्याय विभाग (DSJ) को डिटेंशन सेंटर में सुविधा स्थापित करने का काम सौंपा गया है। फ़िलहाल, विदेशियों से जुड़ा सटीक डेटा उपलब्ध नहीं है, जिनमें ऐसे विदेशी शामिल हैं जिन्हें या तो यहाँ दोषी ठहराया गया हो या जिन्हें विभिन्न अपराधों के तहत उनके प्रत्यर्पण का इंतज़ार है।

ख़बर के अनुसार, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि विभाग आवश्यकता का अंदाजा लगाकर ही सुविधा के लिए किसी भवन (इमारत) की खोज कर सकता है। वर्तमान में विभाग के पास कोई भवन उपलब्ध नहीं है इसलिए या तो नए भवनों को किराए पर लेना होगा या उनका निर्माण करना होगा और इसके लिए क़ैदियों की संख्या का पता होना भी ज़रुरी है।

नए डिटेंशन सेंटर की सुविधाएँ: 

  • डिटेंशन सेंटर में सुविधा स्थापित करने का काम सामाजिक न्याय विभाग को सौंपा गया है।
  • इस विभाग को विदेशी क़ैदियों का विवरण राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) से माँगना होगा।
  • यह डिटेंशन सेंटर उन लोगों का आवास होगा, जिन्होंने अवैध रूप से देश में प्रवेश किया था।
  • यह उन विदेशियों का भी आवास होगा, जिनके वीज़ा और पासपोर्ट की अवधि समाप्त हो गई थी।
  • इसमें विदेशी मूल के विचाराधीन क़ैदी भी शामिल रहेंगे।

विदेशी अपराधी जो यहाँ जेल की अवधि पूरी कर चुके हैं और निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं उन्हें भी डिटेंशन सेंटर की सुविधाएँ मिलेंगी।

विभाग ने इस साल जून से राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) को असफल रूप से पत्र लिखकर विदेशियों की संख्या के लिए उपयुक्त इमारतों की पहचान करने के लिए कहा था। सरकार के सूत्रों ने कहा कि इस साल 26 नवंबर को डेटा माँगने वाले नवीनतम रिमाइंडर को SCRB को भेजा था।

असम और कुछ अन्य राज्यों में हिरासत केंद्रों की स्थापना की ख़बर ने नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) और राष्ट्रीय रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन्स (NRC) के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन के दौरान गंभीर आलोचनाओं का सामना किया था।

केंद्र ने इस साल की शुरुआत में राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को “विभिन्न राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों में नज़रबंदी/ होल्डिंग केंद्रों की स्थापना के लिए लिखा था, जो अवैध अप्रवासियों/ विदेशी नागरिकों को निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे थे।” राज्यसभा की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसने जनवरी में “एक मॉडल डिटेंशन सेंटर मैनुअल भी तैयार किया और सभी राज्य सरकारों/ केंद्रशासित प्रशासनों को उसी के अनुसार प्रसारित किया।”

गृह विभाग ने DSJ को जेल परिसर और पुलिस विभाग के बाहर उपयुक्त सुविधा स्थापित करने के लिए कहा है। यह भी बताया गया कि सुविधा के प्रबंध के लिए एक अलग डिस्पेंसेशन बनाया जाना चाहिए क्योंकि पुलिस विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी है।

यह डिटेंशन सेंटर उन लोगों के लिए आवास के रूप में होगा जिन्होंने अवैध रूप से देश में प्रवेश किया और इनमें वे विदेशी भी शामिल हैं जिनके वीज़ा और पासपोर्ट की समय-सीमा समाप्त हो गई थी। विदेशी मूल के अंडर-ट्रायल क़ैदियों और जो लोग यहाँ जेल की अवधि पूरी कर चुके हैं और निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उन्हें भी इस सुविधा में स्थानांतरित किया जा सकता है।

अधिकारी ने बताया कि गृह विभाग को डिटेंशन सेंटर स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। लेकिन, राज्य सरकार के पास उपलब्ध धन का इस्तेमाल इस उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि SCRB के उन लोगों से जब सम्पर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि इसके डोजियर में क़ैद विदेशियों का कोई डेटा उपलब्ध नहीं था।

निर्दोषों को नहीं छुएँगे, लेकिन हिंसा में शामिल ‘दंगाइयों’ को नहीं छोड़ेंगे: UP DGP

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुई हिंसा के बाद अब उत्तर प्रदेश पुलिस शुक्रवार को हाई अलर्ट पर है। उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक ओपी सिंह पुलिस मुख्यालय से हर जिले के माहौल की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। और इसी बीच उन्होंने उपद्रवियों को अल्टीमेटम देने के साथ ही निर्दोषों को आश्वासन दिया है कि वो उन्हें छुएँगे भी नहीं।

गौरतलब है कि बीते कुछ हफ्तों के हालात देखकर आज शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद उत्तरप्रदेश में विरोध प्रदर्शन की आशंका जताई जा रही थी। जिसके मद्देनजर पुलिस ने वहाँ की सुरक्षा बढ़ा दी। साथ ही प्रदेश के 21 जिलों में इंटरनेट को बंद कर दिया गया। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था बनी हुई है।

डीजीपी ओपी सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हम निर्दोषों को नहीं छू रहे हैं, लेकिन हम ऐसे लोगों को नहीं छोड़ेंगे जो हिंसा में शामिल थे। यही कारण है हमने कई संगठनों के सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है, चाहे वह पीएफआई हो या कोई अन्य राजनीतिक दल।”

डीजीपी ओपी सिंह ने प्रदेश में हिंसा के दौरान पुलिस की स्थिति बयान करते हुए बताया, “हिंसा के दौरान हमने पत्थर खाए। हमारे 263 पुलिसकर्मी घायल हैं। कानपुर में हमारे जवान पर पेट्रोल बम फेंका गया, जिसमें उसका सिर फट गया है। जो भी आरोप लग रहे हैं, उसकी जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। स्थानीय प्रशासन को मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। निर्दोष लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। वहीं दोषी बख्शे नहीं जाएँगे।”

इसके अलावा बता दें उत्तर प्रदेश प्रशासन सक्रियता से उन लोगों की पहचान करने में प्रयासरत है, जिन्होंने प्रदेश में हिंसा को भड़काया। साथ ही हिंसा में कई सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया। यूपी पुलिस उपद्रवियों की पहचान कर उनसे नुकसान की भरपाई करने में जुटी है। इसको लेकर ओपी सिंह ने कहा, “किसी भी सरकारी चीज में जनता का पैसा लगा होता है। करदाताओं के पैसे से खरीदी गई चीज के नुकसान की भरपाई के लिए अब आरोपियों से वसूली की जाएगी। इसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जिसको लोगों ने भी सराहा है।”

प्राप्त जानकारी के अनुसार उपद्रवियों को पकड़ने के लिए प्रदेश के हिंसाग्रस्त जिलों की पुलिस ने ट्विटर से लेकर चौक चौराहों तक पर दंगाईयों की तस्वीरों को टांग दिया है। पहचान बताने वालों को इनाम देने का ऐलान है। साथ ही जिनकी पहचान हो चुकी है उनके घरों पर नोटिस भेजा जाने लगा है। नोटिस में यह पूछा जा रहा है कि आप हिंसक प्रदर्शन में शामिल थे, उपद्रव और तोड़फोड़ में आप पहचाने गए हैं क्यों ना आपके खिलाफ कार्रवाई की जाए?

‘आप नंगा होके मुझे दिखाते थे… गलत-गलत किस्म की हरकतें करते थे’ – Pak के ‘झटका’ मंत्री का Video Viral

पाकिस्तान में भी टिकटॉक बहुत फेमस है। और वहाँ की टिकटॉक स्टार हैं हरीम शाह। हमेशा चर्चा में रहती हैं। एक बार फिर हैं। साथ में वहाँ के रेल मंत्री शेख रशीद को भी लपेट लिया है। दोनों का 15 सेकंड का एक वीडियो वायरल हो गया है। लोग मजे ले रहे हैं।

पाकिस्तानी टिकटॉक स्टार हरीम शाह ने दरअसल एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें वो रेल मंत्री शेख रशीद से बात कर रही हैं। वीडियो में हरीम शाह मंत्री से कहती हैं, “अच्छा मेरी बात सुनें। मैंने आज तक आपका कोई राज फाश नहीं किया। फिर आपने मुझसे बातचीत बंद क्यों कर दी?” इसके जवाब में मंत्री शेख रशीद कहते हैं, “नहीं कुछ नहीं जी, अल्लाह मालिक है।”

यहाँ तक बात बड़े रोमांटिक टोन में हो रही थी। लेकिन इसके बाद अचानक से हरीम शाह ने अपना टोन कड़ा कर लिया और रेल मंत्री को सुनाया, “क्या अल्लाह मालिक है, आप नंगा होके मुझे दिखाते थे। वीडियो पे गलत-गलत किस्म की हरकतें करते थे।” इतना सुनते ही रेल मंत्री शेख रशीद के तो जैसे तोते उड़ गए। उन्होंने तुरंत फोन डिस्कनेक्ट कर दिया।

आपको बता दें कि टिकटॉक स्टार हरीम शाह अक्टूबर में भी एक बार चर्चा में आई थीं। तब उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय में घुसकर वीडियो बनाया था। और तो और, उन्होंने उस कुर्सी पर बैठकर टिकटॉक वीडियो बनाया था, जिस पर खुद प्रधानमंत्री इमरान खान बैठते हैं। तब पाकिस्तान की इंटरनेशनल बेइज्जती हुई थी।

दूसरी ओर पाकिस्तानी रेल मंत्री शेख रशीद भी कम बड़े ‘चर्चावान’ व्यक्ति नहीं हैं। यह कभी खुद को भारत के मुस्लिमों की आवाज़ बताते हैं और सीमा पर लड़ने की धमकी देते हैं। एक बार लगभग दिमागी संतुलन खोकर परमाणु धमकी भी दे डाली। यह और बात है कि बेचारे को प्रधानमंत्री मोदी का नाम लेते हैं बिजली का झटका भी लग चुका है।

मजेदार बात यह है कि इससे पहले रशीद खान और हरीम शाह की सेल्फी काफी चर्चा में रही थी। पाकिस्तानी मीडिया की बात करें तो कुछ का यह कयास भी है कि मंत्रीजी का कोई गहरा राज हरीम के हाथ लग गया है, इसलिए वो इतने ‘अकड़’ में बात कर रही हैं।

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