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CAA-NRC पर गुमराह कर रहे राजनीतिक दल, मुस्लिम संयम रखें: शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर भ्रम के कारण फैली हिंसा के बीच शिया धर्मगुरु और मजलिस-ए-उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना कल्बे जवाद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि CAA से मुस्लिमों को कोई खतरा नहीं है। इस कानून को लेकर किसी को यदि कोई भ्रम है तो जानकारों से इस सम्बन्ध में पूछना चाहिए।

मौलाना कल्बे जवाद ने कहा, “CAA और NRC दो अलग-अलग चीजें हैं। NRC अब तक केवल असम में लागू किया गया है। यह पूरे भारत में लागू नहीं किया गया है। हम अभी तक यह नहीं जानते हैं कि NRC में क्या नियम होंगे। राजनीति पार्टियाँ इस पर गुमराह कर रही हैं। मुस्लिमों से अपील है कि वे संयम बनाए रखें।”

शिया धर्मगुरु ने शुक्रवार (दिसंबर 20, 2019) की नमाज से पहले बड़ा इमामबाड़ा के असफी मस्जिद में शिया मुस्लिमों को संबोधित करते हुए संयम बरतने और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) का विरोध नहीं करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह सिर्फ असम में लागू है। यदि NRC देशव्यापी लागू किया जाता है तो शिया मुस्लिमों को नागरिकता का कोई भी प्रमाण देने से इनकार कर सविनय अवज्ञा का सहारा लेना चाहिए।

अपने 8 मिनट के संबोधन में जवाद ने कहा कि 20 करोड़ से अधिक मुस्लिम भारत में रहते हैं और अगर वे सभी सविनय अवज्ञा का सहारा लेते हैं, तो यह बहुत बड़ा प्रभाव डालेगा। उन्होंने कहा, “हम देखेंगे कि वे (सरकार) इतनी बड़ी आबादी के खिलाफ कैसे कार्रवाई करेंगे।” वहीं लखनऊ में प्रदर्शनकारियों पर तथाकथित पुलिस की कार्रवाई पर चुप रहने के लिए मुस्लिम राजनेताओं पर भड़कते हुए मौलवी ने कहा था, “एक व्यक्ति मारा गया, 50 से अधिक लोग गिरफ्तार किए गए और निर्दोष लोगों पर लाठीचार्ज किया गया, लेकिन आजम खान जैसे वरिष्ठ राजनेता चुप हैं।”

उल्लेखनीय है कि संसद से जैसे ही नागरिकता संशोधन बिल पास हुआ, वैसे ही देश के कई हिस्सों में इसका विरोध शुरू हो गया। नए नागरिकता कानून के खिलाफ सबसे पहले नॉर्थ ईस्ट से विरोध की आवाज उठी, जो धीरे-धीरे देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँच गई। 

असम, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात जैसे तमाम राज्यों में विरोध प्रदर्शन का हिंसक रूप दिखा। कुछ जगहों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के इतर मारपीट, आगजनी और पत्थरबाजी हुई। उत्तर प्रदेश में तो हिंसक विरोध-प्रदर्शन के कारण कई लोगों की जान भी चली गई। एहतियातन दिल्ली के कुछ इलाकों सहित गाजियाबाद और दूसरी कई जगहों पर प्रशासन ने इंटरनेट सेवा बंद कर दी है। प्रदर्शन अब भी जारी है।

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हैदराबाद एनकाउंटर में मारे गए आरोपितों के शवों का दोबारा होगा पोस्टमॉर्टम: हाई कोर्ट का आदेश

हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक डॉक्टर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के साथ गैंगरेप और निर्मम हत्या के चारों आरोपितों के शवों का फिर से पोस्टमॉर्टम कराने का आदेश जारी किया गया है। यह आदेश तेलंगाना हाईकोर्ट ने जारी किया है। दरअसल, हैदराबाद के गाँधी अस्पताल के वरिष्ठ मेडिकल ऑफ़िसर ने चिंता जताई थी कि शवों को लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रखा जा सकेगा। अस्पताल प्रशासन ने कोर्ट से माँग की थी कि वह शवों के संबंध में जल्द कोई निर्देश जारी करे।

कोर्ट ने इससे पहले मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि एनकाउंटर से जुड़े तथ्यों का पता लगाने के लिए दिल्ली की विशेषज्ञ टीम एक बार फिर शवों का पोस्टमॉर्टम कर सकती है। हालाँकि, उन्होंने कहा था कि इसके लिए अस्पताल के अधिकारियों से शवों की स्थिति के बारे में भी पूछा गया था। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए एनकाउंटर में मारे से चारों आरोपितों के शवों को दोबारा पोस्टमॉर्टम करने का आदेश जारी कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में चारों आरोपितों की एनकाउंटर में की गई हत्या की जाँच के लिए तीन सदस्यीय जाँच आयोग का गठन किया था। इस आयोग में बॉम्बे हाई कोर्ट की रिटायर्ड जज रेखा बलदोटा और सीबीआई के पूर्व निदेशक कार्तिकेयन शामिल हैं। 6 महीने में यह आयोग अपनी रिपोर्ट सौपेंगा।

ग़ौरतलब है कि 27 नवंबर को हैदराबाद के बाहरी इलाके शादनगर में एक युवती का अधजला शव बरामद हुआ था। उस शव की पहचान प्रीति रेड्डी के तौर पर हुई थी। प्रीति रेड्डी की गैंगरेप के बाद हत्या की गई और फिर लाश को जला दिया गया था। इस मामले में मोहम्मद पाशा, नवीन, चिंताकुंता केशावुलु और शिवा को गिरफ़्तार किया गया था।

आरोपितों की गिरफ़्तारी के बाद सोशल मीडिया पर लोग इन्हें जल्द से जल्द फाँसी की सज़ा दिलवाने की माँग कर रहे थे। घटना के 9 दिन के भीतर ही ख़बर आई थी कि हैदराबाद पुलिस ने इनका एनकाउंटर कर दिया है। आरोपितों को पुलिस घटनास्थल पर क्राइम सीन रिक्रिएट करने ले गई थी। वहाँ पुलिस का हथियार छीन आरोपितों ने भागने की कोशिश की और पुलिस कार्रवाई में वो मारे गए।

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जामिया दंगों में जो मिन्हाजुद्दीन हुआ घायल, उसे AAP विधायक अमानतुल्लाह ने दिया ₹5 लाख और सरकारी नौकरी

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा में जामिया मिलिया इस्लामिया के एक छात्र को चोट लगी। रिपोर्ट के अनुसार उसके एक आँख की रोशनी चली गई है। इसके बाद आम आदमी पार्टी के विधायक और वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान ने घायल लड़के मिन्हाजुद्दीन को 5 लाख रुपए का चेक दिया और वक्फ बोर्ड में लीगल असिसटेंट के पद पर नौकरी देने का ऐलान भी किया

दंगों में घायल हुए 26 वर्षीय छात्र का नाम मिन्हाजुद्दीन है। यह जामिया में एलएलएम के फाईनल ईयर का छात्र है। वक्फ बोर्ड के अध्यक्षऔर AAP विधायक ने खुद उससे उसके घर जाकर मुलाकात की। यहाँ अमानतुल्लाह खान ने मिन्हाजुद्दीन को आर्थिक सहायता देने के लिए 5 लाख रुपए का चेक सौंपा और साथ ही उसे जॉब का ऑफर लेटर दिया।

हालाँकि, विश्वविद्यालय की कुलपति नज्मा अख्तर पहले ही इस बात का ऐलान कर चुकी हैं कि प्रदर्शन के दौरान घायल छात्रों के इलाज का खर्चा विश्वविद्यालय उठाएगा, लेकिन उसके बाद भी अमानतुल्लाह की ओर से मिन्हाजुद्दीन को मदद पहुँचाना केजरीवाल सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा कर रहा है… सोशल मीडिया पर इस ऐलान के बाद अमानतुल्लाह समेत पूरी AAP सरकार को घेरा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर विधायक अमानतुल्लाह के इस कदम पर लोग सवाल उठ रहे हैं। लोग इसे राष्ट्रविरोधी कदम बता रहे हैं और पूछ रहे हैं कि केजरीवाल सरकार की यह कैसी नीति है?

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ऑटो में बच्ची बैठी हो या औरत… हम तो डंडे बरसाएँगे: लालू यादव की पार्टी के नेताओं की गुंडई

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ देश भर में लगातार हो रहे हिंसक-विरोधों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, कर्नाटक, असम के बाद अब बिहार में भी विरोध-प्रदर्शन काफ़ी उग्र हो गया है। बिहार में पिछले कुछ दिनों से चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच राज्य में मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने आज बंद का ऐलान किया था। सुबह से ही RJD कार्यकर्ताओं का दल सड़कों पर उतरा हुआ है। विरोध-प्रदर्शन के दौरान बसों और ट्रेनों को जबरन रुकवाया गया।

भागलपुर में RJD कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर चल रहे वाहनों तक में जमकर तोड़फोड़ की है। इसी दोरान एक ऑटो पर हमलावर होते हुए RJD कार्यकर्ताओं को इतना भी होश नहीं रहा कि वो जिस चलते ऑटोरिक्शे पर लाठी बरसाते हुए उसके शीशे तोड़ रहे थे, उसके अंदर बैठी सवारियों में एक बच्ची भी मौजूद थी।

क्या होता अगर ऑटोरिक्शे में बैठी सवारियों में से किसी को कुछ हो जाता, आख़िर कौन होता उनके जानमाल की हानि का दोषी, क्या लालू यादव की पार्टी के कार्यकर्ता इन विरोध-प्रदर्शन की आग में अपनी सारी मानवता को भी झोंक चुके हैं, जबकि RJD के नेता तेजस्वी यादव ने कहा था कि बिहार बंद शांतिपूर्ण तरीक़े से होगा। लेकिन, किसे पता था कि तेजस्वी यादव इस तरह के शांति की बात कर रहे थे!

अगर उन्हें विरोध-प्रदर्शन करना ही है तो वो सड़क पर चलते राहगीरों पर क्यों डंडा बरसाने में जुटे हैं, भला विरोध करने का यह कौन-सा तरीका हुआ, जिसका दंश आम जनता को झेलना पड़ रहा है। लगता है RJD के मुखिया और कार्यकर्ता शायद यह पूरी तरह से भुला बैठे हैं कि आज जिस जनता पर वो उतना क़हर बरसा रहे हैं, चुनाव आने पर वो उन्हीं की चौखट पर वोट की भीख माँगने पहुँच जाते हैं। इतना ही नहीं उन्होंने नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करते हुए दुकानदारों से जबरन दुकाने बंद करने को कहा, जो और भी दु:खद है।

उधर, राजधानी पटना में पुलिस ने सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए हैं और सड़कों पर भारी पुलिसबल तैनात है। हालाँकि, RJD समर्थकों ने हाथों में लाठी-डंडे लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। बस स्टैंड के पास कार्यकर्ताओं ने कुछ गाड़ियों में तोड़फोड़ की। इन सभी कार्यकर्ताओं का कहना है कि CAA और NRC ग़लत है और हम इसका विरोध करते हैं।

पटना में RJD समर्थकों ने जलाया टायर (तस्वीर साभार: नवभारत टाइम्स)

ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के कार्यकर्ता भी इस बंद का समर्थन कर रहे हैं। पटना में विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के वर्कर्स ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस के बैरिकेड को हटा दिया। इसके अलावा, नवादा ज़िले में RJD कार्यकर्ताओं ने पटना-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग पर सद्बावना चौक के पास आगज़नी की और रास्ता जाम किया। इस वजह से सड़कों पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई।

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‘सभी मूर्तियों को हटा दिया जाएगा… केवल अल्लाह का नाम रहेगा’: IIT कानपुर में हिंदू व देश विरोधी-प्रदर्शन

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-कानपुर (IIT-K) के मैकेनिकल विभाग ने संस्थान के निदेशक को एक लिखित शिक़ायत दी है। इस शिक़ायत में कैंपस में आयोजित एक कार्यक्रम ‘solidarity with Jamia students’ के दौरान भारत विरोधी नारे और साम्प्रदायिक बयानों पर आपत्ति जताई गई है।

स्वराज्य में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, इस कार्यक्रम का आयोजन 17 दिसंबर को संस्थान के ओपन एयर थिएटर (OAT) में किया गया था।

शिक़ायतकर्ता डॉ वाशी शर्मा, मैकेनिकल विभाग से हैं। उन्होंने मोबाइल पर बने विरोध-प्रदर्शन की वीडियो क्लिप को दिखाते हुए निर्देशक से दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई किए जाने की अपील की। इस वीडियो क्लिप की एक कॉपी स्वराज्य की संवाददाता और सीनियर एडिटर स्वाति गोयल के साथ भी शेयर की गई है।

इस वीडियो क्लिप में OAT में सौ से अधिक लोगों की भीड़ दिखाई दे रही है। इनमें से एक ने अपनी तख़्ती पर लिख रखा था, “तुम्हारी लाठी और गोली से तेज़ हमारी आवाज़ है।” वहीं, दूसरे ने अपनी तख़्ती पर लिखा था, “IIT कानपुर जामिया और एएमयू छात्रों पर पुलिस की बर्बरता की निंदा करता है। दिल्ली पुलिस पर शर्म करो।”

एक जगह पर, भीड़ में शामिल एक दंगाई अपने मोबाइल फ़ोन पर रिकॉर्ड की गई कुछ पंक्तियों को सुनाता है, जिसकी पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:

लाज़िम है कि हम भी देखेंगे
जब अर्ज-ए-ख़ुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जाएँगे…
सब ताज उछाले जाएँगे
सब तख़्त गिराए जाएँगे
बस नाम रहेगा अल्लाह का…

यह फैज़ अहमद फैज़ की एक कविता की पंक्तियाँ हैं।

IIT निदेशक को दी गई शिक़ायत में कहा गया है कि ये पंक्तियाँ “सभी मूर्तियों को नष्ट करने का आह्वान करती हैं” (जैसा कि मूर्ति पूजा इस्लाम में निषिद्ध है) और इस बात पर ज़ोर दिया गया है, “केवल अल्लाह की पूजा होनी चाहिए।

शिक़ायत के अनुसार, “कविता की पंक्तियाँ कश्मीर में भारत-विरोधी उग्रवाद का अभिन्न अंग हैं और आतंकवादियों और प्रदर्शनकारियों द्वारा इस्तेमाल की जाती है।” इन पंक्तियों का हिन्दी अनुवाद इस प्रकार है:

“हम गवाह हैं
यह निश्चित है कि हम भी गवाह होंगे
जब अल्लाह की जगह से
जब सभी मूर्तियों को हटा दिया जाएगा
जब मुकुट उछाले जाएँगे
जब सिंहासन लुप्त हो जाएँगे
केवल अल्लाह का नाम रहेगा…”

निदेशक के साथ शेयर किए गए एक वीडियो में एक छात्र दंगाईयों के कार्यक्रम को रोकते हुए बार-बार रोते हुए यह कहता दिखा, “ये नहीं चलेगा”। उस दौरान छात्र के साथ शिक़ायतकर्ता डॉ वाशी शर्मा भी मौजूद थे। इसके अगले कुछ मिनटों में उस छात्र और डॉ शर्मा को कविता पढ़ने के दौरान ही सुरक्षाकर्मियों ने हूटिंग करती भीड़ से अलग कर दिया। इसके बाद विरोधियों की सभा जल्द ही भंग हो गई।

डॉ शर्मा की शिक़ायत, जिस पर संस्थान के 15 छात्रों ने हस्ताक्षर किए हैं, उन्होंने कहा, “मैं हैरान था क्योंकि इन पंक्तियों का इस्तेमाल पाकिस्तान में अक्सर एक साम्प्रदायिक हिंसा फैलाने के रूप किया जाता है। इन पंक्तियों को पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान की कट्टरपंथी भारत-विरोधी पार्टी, पीटीआई द्वारा लोकप्रिय किया गया है। यह कविता ख़ान की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित होती हैं।”

उन्होंने कहा कि यह बात स्पष्ट है कि सभा में अराजक तत्व दकियानूसी हरक़तों को अंंजाम दे रहे थे। इसका उद्देश्य निर्दोष छात्रों को कट्टरपंथी बनाना, भारत के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाना, आपसी विश्वास को ख़त्म करने और संस्थान के वातावरण को साम्प्रदायिक रंग में रंगने का था।

डॉ शर्मा अपनी शिक़ायत में उन छात्रों की तत्काल सुरक्षा की माँग की, जिन्होंने अराजक तत्वों के बयानों पर आपत्ति दर्ज की थी। उन्होंने एक छात्र का सन्दर्भ लेते हुए अपनी शिक़ायत में लिखा कि जब वो छात्र अपने घर लौट रहा था तो मुस्लिम भीड़ के एक सदस्य ने उसे पहचानते हुए उस पर ऊँगली उठाते हुए कहा कि अच्छा तो ‘यह यहाँ रहता है’। ऐसा करने के पीछे उसकी मंशा छात्र को डराने-धमकाने से था, इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि अराजक तत्वों से उसकी जान को ख़तरा है।

शिक़ायतकर्ता डॉ वाशी शर्मा ने IIT प्रशासन से “नफ़रत फैलाने वाली भीड़ के ख़िलाफ तत्काल अनुशासनात्मक और क़ानूनी कार्रवाई” करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजकों और मास्टरमाइंड की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें तुरंत निष्कासित कर दिया जाना चाहिए।

वहीं, संस्थान के उप निदेशक डॉ मणींद्र अग्रवाल ने स्वराज्य की संवाददाता स्वाति गोयल को बताया कि आयोजकों को प्रशासन द्वारा एक बड़ी सभा आयोजित करने की कोई अनुमति नहीं दी गई थी।

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नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर सड़कों पर उतरी भीड़ अब दंगाईयों का रूप ले चुकी है। उत्तर प्रदेश के तो हर जिले से खबरें आ रही हैं कि प्रदर्शन के नाम पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया जा रहा है और पुलिस पर भी हमला लगातार हो रहा है। ऐसी स्थिति में यूपी में अब अधिक सतर्कता बरती जा रही है। जिसके चलते 42 जिलों में सुरक्षा लिहाज से इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गईं हैं और पूरे प्रदेश में 31 जनवरी तक धारा 144 लागू हो चुकी है। इसके अलावा प्रदेश में स्कूल-कॉलेजों को भी आज बंद किया गया है। अब की आगे की स्थिति देखते हुए कल बाकी के फैसले लिए जाने की संभावना है।

गौरतलब है कि प्रदेश में गुरुवार को भीड़ के हिंसक हो जाने से देर रात एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। जबकि एडीजी जोन, आइजी रेंज, समेत 70 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके साथ ही लखनऊ व सम्भल में रोडवेज की 4 बस, करीब 1 दर्जन कार तथा 5 दर्जन दो पहिया वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था।

इसके बाद कानपुर, फिरोजाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, गोरखपुर, बिजनौर, हापुड़, सहारनपुर, अमरोहा, बहराइच, बरेली, संभल मुजफ्फरनगर में भी काफी हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले थे। जिस कारण शहरों में मृतकों का आँकड़ा 6 से बढ़कर 13 हो गया। अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार मेरठ में 4, कानपुर, फिरोजाबाद और बिजनौर में 2-2, वाराणसी, संभल और मुजफ्फरनगर में 1-1 की मौत हुई है। वहीं, बताया जा रहा है कि सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर, सुल्तानपुर, गोंडा और बलरामपुर में भी दंगाईयों ने उपद्रव की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस की सतर्कता के कारण माहौल संभला रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शुक्रवार (दिसंबर 20, 2019) को हुई हिंसा पर यूपी के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने बताया कि शुक्रवार को नमाज के बाद सुनियोजित ढंग से प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे और पुलिस पर हमला बोला। उपद्रवियों ने कम उम्र के बच्चों को आगे किया, जिनकी सुरक्षा के दृष्टि से पुलिस ने संयम बरतते हुए त्वरित कार्रवाई की।

बता दें कि राज्य में भड़की हिंसा पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काफी नाराज हैं। उन्होंने देर रात वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारियों से बात की और प्रदेश के हालातों पर अपनी नाराजगी जाहिर की। इससे पहले इस मामले पर सख्ती दिखाते हुए वे पुलिस को उपद्रवियों के ख़िलाफ़ एक्शन लेने के लिए आदेश दे चुके हैं और उन्होंने स्पष्ट शब्दों में भी कहा है कि वे उपद्रवी दोषियों के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई करेंगे। जो भी हिंसा का दोषी होगा उसकी संपत्तियाँ सीज की जाएँगी और उसी से हिंसा में हुई क्षति की भरपाई होगी।

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‘यह टाइम दस्तावेज़ जुटाने का नहीं, सड़कों पर उतरने का है’- मालेगाँव के मौलाना का दंगाई फरमान

महाराष्ट्र के मालेगाँव में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव और दस्तूर बचाओ समिति के संस्थापक मौलाना उमरैन महफ़ूज़ रहमानी ने मजहब विशेष से नागरिकता क़ानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में सड़कों पर उतरने का फरमान जारी किया है।

मुस्लिमोंं से अपील करते हुए मौलाना ने कहा, “पिछले एक महीने से, हमने निवासियों को अपने दस्तावेज़ोंं पर ध्यान केंद्रित करने से रोक दिया है। नागरिकता विधेयक के क़ानून बनने के बाद, हम लोगों से सड़कों पर आने के लिए अपील कर रहे हैं।”

ख़बर के अनुसार, मौलाना रहमानी गुरुवार (19 दिसंबर) को हुए हिंसक विरोध के आयोजक थे। मौलाना रहमान का कहना है:

“जब असम में NRC की जा रही थी, तो हमने मुस्लिमों से कहा था कि वो अपने पास 23 आवश्यक दस्तावेज़ों की लिस्ट रख लें और उसे ध्यान से देखें कि उसमें कोई स्पेलिंग मिस्टेक तो नहीं है। यह बड़ी अजीब बात है कि केंद्र सरकार अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार हुए अल्पसंख्यकों से पहचान-पत्र माँग रही है, लेकिन अगर उनके दस्तावेज़ों में किसी तरह की कोई स्पेलिंग मिस्टेक होगी तो स्थानीय निवासियों को नागरिकता नहीं दी जाएगी।”

उन्होंने कहा असम में NRC के दौरान मालेगांव नगर निगम के बाहर के बाहर कई चिंतित मुस्लिमों की लंबी कतारें लग गईं।

वहीं, इस मुद्दे पर मालेगाँव सेंट्रल के विधायक मुफ़्ती मोहम्मद इस्माइल ने कहा, “मालेगाँव की आबादी का बड़ा हिस्सा पिछले 2 दशकों में उत्तर प्रदेश से पलायन कर यहाँ आया है। तीन पीढ़ियों से जो लोग मालेगाँव में रह गए वो अब यूपी जा रहे हैं और अपनी पहचान से जुड़े दस्तावेज़ तलाश रहे हैं… लोग सचमुच में काफी डरे हुए हैं।” इसके आगे विधायक मुफ़्ती मोहम्मद इस्माइल ने कहा:

“अगर उनके आधार कार्ड में हुई स्पेलिंग की ग़लती को उन्हें सुधरवाना है तो स्थानीय विधायक से लेटर लेना पड़ता है। मेरे विधायक चुने जाने के बाद पहले कुछ हफ्तों में, हर दिन कम से कम एक हज़ार लोग इस तरह के पत्र को हासिल करने के लिए मेरे कार्यालय पहुँचे थे।”

हालाँकि, बीजेपी के मालेगाँव इकाई के अध्यक्ष किशोर गायकवाड़ ने अल्पसंख्यकों में डर व्याप्त होने की बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि मौलवी, मुस्लिमों के बीच प्रोपगैंडा फैला रहे हैं।

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हमने पढ़ा नहीं लेकिन हमें पता है… हिंदू-मुस्लिम सबको साबित करनी होगी अपनी नागरिकता: शिवसेना नेता

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन चल रहा है। कॉन्ग्रेस समेत सभी विपक्षी दल इस कानून का विरोध कर रहे हैं। दरअसल इस नए कानून को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन बेबुनियाद और निराधार है, क्योंकि जो लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, उनमें से अधिकतर को इस कानून के बारे में जानकारी ही नहीं है, वो बस सुनी-सुनाई बात पर विरोध कर रहे हैं।

इस बीच एक वीडियो सामने आया है, जिसमें शिवसेना के एक नेता ने माना है कि उन्हें नागरिकता संशोधन कानून के बार में नहीं पता है। उन्होंने इसके बारे में अभी तक नहीं पढ़ा है। वीडियो में एक मीडियाकर्मी से बात करते हुए शिवसेना नेता कहते हैं, “CAA के बारे में हमें भी नहीं बताया जा रहा है कि इसके अंदर किसको नुकसान है और किसको फायदा है। हमें तो अभी तक ये भी बताया जा रहा है कि हिंदुओं को भी अपना प्रमाण पत्र साबित करना होगा, मुस्लिमों को भी अपना नागरिकता प्रमाण पत्र देना होगा। तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उद्धव ठाकरे का भी यही मानना है कि जो गरीब और आम जनता हैं, उनके पास कुछ डॉक्यूमेंट्स नहीं होते हैं।”

इस दौरान जब रिपोर्टर उनसे पूछता है कि क्या उन्हें भी इस कानून के बारे में नहीं पता है, तो वो कहते हैं कि उन्हें तो इस बारे में काफी अधिक जानकारी है, लेकिन सरकार ने उन्हें अभी तक नहीं बताया है। इस पर जब रिपोर्टर उनसे पूछता है कि क्या कहता है ये कानून तो वो कहते हैं, “मीडिया से हमें पता चला है कि इस कानून के अंतर्गत जितने भी हमारे देश की जनता है, उनकी जनगणना की जाएगी, उनको यहाँ पर नागरिक रखा जाएगा…” 

शिवसेना नेता की बात को बीच में ही काटते हुए रिपोर्टर कहता है कि वो NRC नहीं, बल्कि CAA के बारे में उनसे पूछ रहे हैं। तो फिर वो कहते हैं, “इस एक्ट के अंदर हमें यही बताया गया है कि हमारे जो मुस्लिम भाई हैं, उनको अपनी नागरिकता साबित करनी होगी।” रिपोर्टर ने जब पूछा कि क्या एक्ट में यही लिखा है, तो वो कहते हैं कि मीडिया के द्वारा उन्हें यही पता चला है। हालाँकि उन्होंने अभी तक इस एक्ट पढ़ा नहीं है और अंतत: वो मान लेते हैं कि उन्हें इस एक्ट के बारे में नहीं पता है।

दरअसल CAA, नागरिकता लेने की नहीं बल्कि देने का कानून है। इस कानून के अंतर्गत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक प्रताड़ना का शिकार हुए वहाँ के अल्पसंख्यकों को नागरिकता दी जाएगी और इसका सिलसिला भी शुरू हो गया है। भारत सरकार ने शुक्रवार (दिसंबर 20, 2019) को गुजरात में पाकिस्तान से आए 7 शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दी है। इससे पहले एक मुस्लिम महिला हसीना बेन को भारत की नागरिकता दी गई थी।

पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का नहीं? शशि थरूर ने भारत का ग़लत नक़्शा पोस्ट कर तो यही संदेश दिया!

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हमेशा विवादों से घिरे रहने वाले कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर एक बार फिर सुर्ख़ियों में छाए हुए हैं। दरअसल, उन्होंने ‘भारत बचाओ रैली’ की एक तस्वीर अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर की, जिसमें भारत का ग़लत नक़्शा दिख रहा था। थरूर का यह पोस्ट सात घंटे तक रहा, लेकिन उसके बाद उन्होंने अपना यह ट्वीट डिलीट कर दिया, लेकिन आज के सोशल मीडिया युग में यूज़र्स की पैनी नज़र से कहाँ कुछ बच ही पाता है, बस उन्हें घेर लिया गया।

शशि थरूर के इस पोस्ट के सोशल मीडिया पर जाते ही यूज़र्स ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया। एक ट्विटर यूज़र ने कॉन्ग्रेस पर तंज कसते हुए लिखा कि कॉन्ग्रेस पीओके को कभी भारत का हिस्सा मानती ही नहीं है और ये बात आज एक बार फिर साबित हो गई है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नवंबर में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भारत का नया नक़्शा ट्वीट किया था, जिसमें भारत की सीमाओं की सही जानकारी दी गई थी।

इससे पहले, शशि थरूर ने शुक्रवार (20 दिसंबर) को कर्नाटक के इतिहासकार रामचंद्र गुहा को हिरासत में लिए जाने की घटना पर भी भ्रामकता फैलाने की कोशिश की थी। अपने एक ट्वीट में उन्होंने लिखा था, “क्या यह पुलिसवाला अपने मुक्के से रामचंद्र गुहा को मारने की धमकी दे रहा है?” लेकिन, उन्होंने इस वीडियो को शेयर करने से पहले यह जानने की कोशिश नहीं की कि क्या रामचंद्र गुहा को सच में किसी पुलिसकर्मी ने मुक्का दिखाया था! इससे उनकी यह मंशा साफ़ दिखती है कि वो फर्ज़ी ख़बर के प्रचार-प्रसार का काम कितनी मुस्तैदी के साथ करते हैं, फिर भले ही सच्चाई से उसका कोई लेना-देना न हो।

बता दें कि भारत का ग़लत नक़्शा पोस्ट करने वाले शशि थरूर पहले शख़्स नहीं हैं, इससे पहले बॉलीवुड अभिनेता फ़रहान अख़्तर ने भी भारत का ग़लत नक़्शा पोस्ट किया था। ऐसा उन्होंने नागरिकता क़ानून का विरोध करते समय कुछ ग्राफ़िक्स का इस्तेमाल करते हुए किया था। लेकिन, जब उन्हें सही जानकारी प्राप्त हुई तो उन्होंने अपनी ग़लती के लिए माफ़ी माँग ली थी।

अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा था, “यहाँ आपको जानने की ज़रूरत है कि ये प्रदर्शन क्यों ज़रूरी हैं। आप सभी से 19 तारीख को क्रांति मैदान, मुंबई में मिलते हैं। सिर्फ़ सोशल मीडिया पर विरोध करने का समय अब ख़त्म हो चुका है।” अपनी इसी पोस्ट के साथ उन्होंने एक नागरिकता संशोधन क़ानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण की व्याख्या करने वाली इमेज शेयर की थी, जो कि ग़लत थी।

नागरिकता क़ानून को लेकर किए गए फ़रहान के ट्वीट की वजह से हिन्दू संगठन ने उनके ख़िलाफ़ शिक़ायत दर्ज कराई थी। इस शिक़ायत में कहा गया था, “बॉलिवुड ऐक्टर फ़रहान अख़्तर ने अपने ऑफिशल ट्विटर हैंडल से देशद्रोही ट्वीट किया, जिससे डर और अराजकता फैल गई।”

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CAA पर बवाल के बीच… Pak से प्रताड़ना का शिकार होकर भागे 7 शरणार्थियों को मिली नागरिकता

देश भर में नागरिकता संशोधन कानून पर मचे बवाल के बीच पाकिस्तानी शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिलने का सिलसिला शुरू हो गया है। शुक्रवार (दिसंबर 20, 2019) को गुजरात में 7 पाकिस्तानी शरणार्थियों को नागरिकता दी गई। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कच्छ में इन्हें नागरिकता का प्रमाणपत्र दिया। ये लोग पाकिस्तान से प्रताड़ना का शिकार होकर गुजरात आए हैं। इस तरह से शरणार्थियों को नागरिकता देने के मामले में गुजरात पहले नंबर पर आ गया है। 

मनसुख मांडविया ने इस बारे में ट्वीट करते हुए लिखा, “आज (दिसंबर 20, 2019) कच्छ, गुजरात में पाकिस्तान से आए शरणार्थियों से मुलाकात की और 7 शरणार्थियों को नागरिकता प्रमाणपत्र दिया। CAA को लेकर सभी में उत्साह और जश्न का माहौल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा लिया गया ये ऐतिहासिक फैसला इन लोगों के जीवन मे नया सवेरा लेकर आया है।”

2007 में पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए मेहताब सिंह ने कहा, “मैंने 2007 में पाकिस्तान छोड़ दिया था। यह एक इस्लामिक गणराज्य है। वहाँ मंदिरों को तोड़ दिया जाता है। हिंदू लड़कियों और महिलाओं को अगवा किया जाता है और उन पर अत्याचार किया जाता है। यहाँ तक कि वहाँ की पढ़ाई भी इस्लामिक है।”

उन्होंने आगे कहा, “2014 तक हमारे पास आधार कार्ड और बैंक खाते नहीं थे। भाजपा के सत्ता में आने के बाद ही हमें आधार कार्ड मिला और बैंक खाते खोले गए। मैं बहुत खुश हूँ कि अब मैं एक भारतीय नागरिक हूँ। यह हमारे लिए दिवाली की तरह है।”

इससे पहले पाकिस्तान से आई एक महिला हसीना बेन को बिना किसी तामझाम के केवल मेरिट और मानवता के आधार पर गुजरात में भारत की नागरिकता प्रदान की गई थी। बता दें कि हसीना बेन मूलरूप से भारत की ही रहने वाली थीं, लेकिन 1999 में निक़ाह हो जाने के बाद वो पाकिस्तान चली गईं थी। पाकिस्तान में उनके शौहर की मृत्यु हो जाने पर उन्होंने भारत वापस आने का फ़ैसला किया। दो साल पहले ही उन्होंने भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया था। उन्हें 18 दिसंबर 2019 को भारत सरकार की तरफ़ से भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

केंद्रीय मंत्री मंडाविया ने कहा कि गुजरात में हजारों शरणार्थी हैं, जो कि पाकिस्तान में हुए धार्मिक उत्पीड़न के कारण भाग कर यहाँ आए हैं। नागरिकता (संशोधन) कानून 2019 (CAA) आने के बाद उन्हें भारतीय नागरिकता मिल रही है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के शुक्रगुजार हैं। 

नागरिकता संशोधन कानून के अमल में आने के बाद गुजरात में बसे हजारों पाकिस्‍तानी शरणार्थियों के भारत का नागरिक बनने का मार्ग प्रशस्‍त हो गया है। वर्ष 1952 में पाकिस्‍तान के सिंध से आए सिंधी, लोहाणा, कोली, थरपाकर,बादिन थट्टा, महेश्‍वरी आदि समुदाय के हजारों लोग शरणार्थी के रूप में अहमदाबाद, गाँधीनगर, कच्‍छ, बनासकांठा, पाटण, मोरबी में आकर बस गए थे। 

उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में 19 दिसंबर को गुजरात में भी हिंसक प्रदर्शन हुआ था। अहमदाबाद के शाह आलम में भीड़ ने पुलिस पर भारी पथराव किया था। इसमें 19 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पुलिस ने कई उपद्रवियों को गिरफ्तार भी किया था।

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