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राबड़ी देवी ने मेरे बाल नोचे, पीटा, घर से निकाल दिया, सैंडल तक नहीं लेने दिया: लालू की बहू ने लगाए गंभीर आरोप

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद की बहू ऐश्वर्या रॉय ने रविवार (15 दिसंबर) को अपनी सास और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी पर उनकी पिटाई करने, उनके बाल पकड़कर घसीटने, उन्हें घर से बाहर निकालने और उनका मोबाइल फोन व अन्य सामान छीनने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। बता दें कि तेजप्रताप के साथ ऐश्वर्या की शादी 12 मई 2018 में हुई थी, लेकिन शादी के कुछ ही दिनों के बाद ही दोनों के बीच तलाक की नौबत आ गई थी। उसी साल दो नवंबर को तेज प्रताप ने अदालत में तलाक की अर्जी दे दी थी।

ख़बर के अनुसार, ऐश्वर्या के पिता और राजद विधायक चंद्रिका राय, माँ पूर्णिमा रॉय और छोटे भाई-बहन जो कुछ सौ मीटर दूर रहते हैं वो घटना की जानकारी पाते ही मौक़े पर पहुँचे। ऐश्वर्या के पिता ने कहा कि जिस तरह से लालू परिवार ने उनकी पुत्री को प्रताड़ित किया है उसका वह अब करारा जवाब देंगे। हम राजनीतिक लड़ाई तो लडेंगे ही, राबड़ी देवी को एक्सपोज भी करेंगे। जो घर की महिला को सुरक्षा नहीं दे सकती है, वह बाहर की महिलाओं को क्या सुरक्षा देगी। ऐश्वर्या की माँ पूर्णिमा राय ने आरोप लगाया कि ऐश्वर्या को घर में खाना नहीं दिया जाता था। वह अपने घर से खाना उसे भेजती थी। चंद्रिका राय ने अपने दामाद तेजप्रताप को एक पागल लड़का बताया।

ऐश्वर्या रॉय ने संवाददाताओं से कहा, “जब मुझे मोबाइल फोन के एक मैसेज से पता चला कि तेजप्रताप यादव के समर्थकों ने पटना विश्वविद्यालय परिसर में मेरे और मेरे माता-पिता के बारे में आपत्तिजनक पोस्टर चिपकाए गए हैं, तो उस समय मैं अपने कमरे के अंदर टीवी देख रही था। मैंने अपनी सास से इस बारे कहा कि सार्वजनिक रूप से मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने का काम है, मैं बस अपने माता-पिता को इन सब मामले में घसीटना नहीं चाहती थी।”

इसके आगे ऐश्वर्या ने बताया,

”वो (राबड़ी देवी) गुस्से में उठ गई और मुझे गाली देने लगी और अपनी महिला सुरक्षा गार्ड के साथ मिलकर मुझ पर शारीरिक हमला किया। इस दौरान मेरे सिर, घुटनों और पैरों में चोटें आई, मेरे बालों को खींचा और बंगले से बाहर निकालने से पहले अपनी सैंडल और शॉल तक नहीं लेने दिया।”

उन्होंने कहा, ”उन्होंने मेरा मोबाइल फोन भी छीन लिया था क्योंकि मैंने उनके दुर्व्यवहार का वीडियो बना लिया था। ऐसा उन्होंने इसलिए किया जिससे वो सबूतों को मिटा सकें।”

इसके अलावा, एश्वर्या ने अपनी सास पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो उन्हें खाना भी नहीं देती। उन्होंने बताया, ”इससे पहले सितंबर महीने में भारी बारिश के दौरान भी मुझे घर से निकाल दिया था पर अदालत के हस्तक्षेप के बाद वे अपने घर में वापस लौट पाई थीं।”  

हालाँकि, ऐश्वर्या की माँ चंद्रिका राय ने अफसोस जताते हुए कहा:

”अब हम आपसी तालमेल के लिए कोई प्रयास नहीं करेंगे और न ही हम उनकी तरफ से सुलह की कोई उम्मीद रखेंगे। हमने अपने बच्चे की शादी को पटरी पर लाने की बहुत कोशिशें की हैं, लेकिन इसका कोई फ़ायदा नहीं हुआ।”

महिला थाने की एसएचओ आरती कुमारी जायसवाल मौके पर पहुँची और उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “लड़की सदमे में है और इसलिए हम उन्हें पुलिस स्टेशन ले जा रहे हैं और जब तक वह अपने बयान को रिकॉर्ड कराने में सक्षम नहीं हो जाती तब तक आप प्रतीक्षा करें। उनकी गवाही और जाँच के आधार पर FIR दर्ज की जाएगी और आगे की कार्रवाई होगी।”

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जामिया मिलिया के बाहर ANI पत्रकारों पर हमला, हॉस्पिटल भेजे गए: अन्य रिपोर्टरों से भी हो चुकी है बदसलूकी

नागरिकता विधेयक में संशोधन के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन की नकली परतें उतर रहीं हैं, और असली चेहरा सामने आ रहा है। पहले ‘शांतिपूर्ण’ की परत उतरी, और प्रदर्शनकारियों ने पथरबाज़ी शुरू कर दी। फिर ‘सेक्युलर’ की परत उतरी, जब “हिन्दुओं से आज़ादी” के नारे लगे, और अपनी बात साबित करने के लिए (अंग्रेज़ी में कहें तो, टु ड्राइव होम ए पॉइंट) प्रदर्शन स्थल पर हुजूम ने नमाज़ पढ़ी, मुहर्रम की तरह नंगे बदन ‘मातम’ मनाने तथाकथित छात्र सड़क पर उतर पड़े।

और अब ‘लोकतान्त्रिक’ का भी नकली मुलम्मा उतर कर गिर गया है, जब ‘लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ’ बताए जाने वाले मीडिया पर हमला हो रहा है। वह भी केवल इसलिए, क्योंकि मीडिया ने वह करने की ‘जुर्रत’ की, जो उसका काम है- लोगों का, प्रदर्शनों का सच कवर करना।

समाचार एजेंसी एएनआई के दो कर्मचारियों पर आज (16 दिसंबर, 2019 को) दोपहर हमला कर दिया गया, जब वे जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रदर्शनकारी छात्रों को कवर करने गए थे।

एएनआई के पत्रकार और कैमरामैन पर हमला यूनिवर्सिटी के गेट नंबर-1 के पास हुआ।

पत्रकार उज्जवल रॉय और कैमरामैन सरबजीत सिंह को होली फैमिली हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

दिल्ली पुलिस के पब्लिक रिलेशंस अफ़सर एमएस रंधावा ने घटना के बारे में कहा है कि फ़िलहाल हमलावरों की शिनाख्त नहीं हो पाई है, लेकिन पुलिस उनकी पहचान ढूँढ़ निकलेगी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान मीडिया पर हमले की यह पहली घटना नहीं है। आज दिन में ही उनके एबीपी न्यूज़ की पत्रकार से भी बदसलूकी का भी वीडियो सामने आया था। इसके पहले भी जब 13 दिसंबर को प्रदर्शन शुरू हुए थे तो एक समूह ने पत्रकारों पर हमला कर दिया था, घेर लिया था और उनके काम में बाधा डालने की भरपूर कोशिश की थी- उनके कान पर खड़े हो कर चिल्ला रहे थे, ताकि पत्रकार न अपने फ़ोन पर बात कर पाए, न ही माइक में कुछ बोल पाए। इसके अलावा ज़ी न्यूज़ के पत्रकार राहुल सिन्हा ने दावा किया था कि अन्य दो मीडिया कर्मियों को मारने-पीटने के बाद उनके चैनल के पत्रकारों को बाकायदा निशाना बनाकर ढूँढ़ा जा रहा था

इस उन्माद, मजहबी नारों के पीछे साजिश गहरी… क्योंकि CAA से न जयंती का लेना है और न जोया का देना

विपक्षी नेताओं के जहर बुझे बयान। हिन्दुओं से आजादी के नारे। उन मजहबी और उन्मादी नारों की गूॅंज जो कश्मीर में आतंकी पाकिस्तान के समर्थन में लगाते रहे हैं। पत्थरबाजी। आगजनी। तरह-तरह की अफवाहें। उन अफवाहों को सोशल मीडिया में आग दिखाता एक वर्ग। उकसाने वाली बयानबाजी। आखिर, जिस कानून से किसी भारतीय नागरिक का कोई लेना-देना नहीं है, उस पर एक समुदाय विशेष क्यों उबाल खा रहा है? एक गिरोह क्यों उन्हें हिंसक बनाने पर आमादा है? इन सारे सवालों का जवाब तलाशने से पहले यह जानते हैं कि नागरिकता संशोधन कानून क्या है? किसी व्यक्ति को नागरिकता मिलती कैसे है। उसकी नागरिकता किन हालातों में छीनी जा सकती है।

नागरिकता संशोधन बिल यानी गुरुवार को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून यानी बना। इसके बाद से ही, खासकर जुमे की नमाज के बाद से दिल्ली, अलीगढ़, मुर्शिदाबाद, पटना से विरोध के नाम पर हिंसा करने पर अमादा समूहों की खबरें लगातार सामने आ रही है।

विरोध कर रहे लोगों का मानना है कि ये कानून देश के कथित अल्पसंख्यक वर्ग के मानवाधिकार उनसे छीन लेगा और भारत को हिंदुत्व राष्ट्र बना देगा…अब ऐसे में इस बात में कितनी सच्चाई है, इसके लिए जानना जरूरी है कि आखिर नागरिकता कानून है क्या? और आखिर क्यों मजहब वाले इसे अपने खिलाफ़ मान रहे हैं? आखिर क्यों देश की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल खड़ा किया जा रहा है? और क्यों पढ़ा-लिखा तबका भ्रम फैलाकर इसपर अपना प्रोपगेंडा चला रहा है।

क्या है नागरिकता संशोधन कानून (CAA)

9 दिसंबर को लोकसभा, 11 दिसंबर को राज्यसभा और 12 दिसंबर को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अस्तित्व में आए नागरिकता संशोधन कानून का मूल उद्देश्य केवल उन अल्पसंख्यक समुदाय (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) के लोगों नागरिकता प्रदान करना है, जिन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ्गानिस्तान में धार्मिक कारणों से प्रताड़ित किया गया। इसके अलावा इस कानून का दूसरा उद्देश्य घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें उनके मुल्क वापस भेजना भी है। इसके अलावा इस कानून का तीसरा कोई उद्देश्य नहीं है।

फिर विरोध के नाम पर हिंसा क्यों?

CAA के विरोध में सड़कों पर उतरा देश का एक निश्चित तबका मान चुका है कि ये कानून दूसरे समुदाय का भारत में अस्त है। वास्तविकता में ऐसा कुछ नहीं है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में बार-बार दोहराया था कि इससे देश के मजहब विशेष को परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं है। परेशानी की बात सिर्फ़ उन लोगों के लिए है जो अवैध रूप से देश में दाखिल हुए।

हालाँकि, इसके बाद भी कुछ लोगों का कहना है कि जब अन्य समुदाय के लोगों को नागरिकता दी जा रही है तो इसमें मुस्लिमों का नाम क्यों नहीं शामिल है? खुद सोचिए…तीन ऐसे देश, जहाँ पर पहले ही इस मजहब वाले बहुसंख्यक हैं और वहाँ उन्हें कोई दिक्कत नहीं हैं, उनके मजहब को सम्मान से स्वीकारा जाता है, उन्हें इबादत के लिए रोका नहीं जाता, उनके धार्मिक स्थलों पर किसी मजहब का खतरा नहीं मंडराता और उनकी बहन-बेटियों का जबरन धर्म परिवर्तन नहीं किया जाता, तो फिर आखिर उनको भारत में किस आधार पर जगह दी जाए। क्या सिर्फ़ इसलिए कि घुसपैठियों को भी नागरिक होने का वैधानिक दर्जा मिल जाए?

सोचिए! क्या वाकई हमारे देश का पढ़ा-लिखा तबका इतना मूढ़ हो चुका है कि उसे लगता है कि घुसपैठियों को वापस भेजने से उन पर या देश की धर्मनिरपेक्षता पर खतरा मंडराएगा। क्या वाकई ये विरोध में उतरी भीड़ चाहती है कि 1 अरब 30 करोड़ की आबादी वाले देश में ऐसे घुसपैठियों को जगह दी जाए, जो बिना मजबूरी के भारत में घुस आए हैं और जो अब शरणार्थियों के नाम पर अपराधों को अंजाम दे रहे हैं? या फिर ये मान लिया जाए कि वामपंथी गिरोह की तरह ये लोग भी केवल देश के अन्य लोगों में भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं? या ये समझा जाए कि ये भीड़ शायद इस कानून के मूल उद्देश्यों से सचेत ही नहीं है?

देश का मुस्लिम क्यों नहीं है खतरे में…

देश का हर व्यक्ति जिसके पास भारत की नागरिकता है। उसे कानून रूप से कोई भी देश से अलग नहीं भेज सकता। फिर चाहे वो मोदी सरकार हो या फिर उनका लाया नागरिकता संशोधन कानून।

कौन है देश का नागरिक?

नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत नागरिकता हासिल करने के चार तरीके हैं:

  • जन्म से नागरिकता  (धारा 3)
  • वंश द्वारा नागरिकता (धारा 4)
  • पंजीकरण द्वारा नागरिकता (धारा 5)
  • प्राकृतिकिकरण द्वारा नागरिकता। (धारा 6)

जन्म के आधार पर नागरिकता

अधिनियम की धारा 3 जन्म से संबंधित नागरिकता है। इस कानून को पहली बार 1955 में बनाया गया था। जिसके अनुसार 1 जनवरी 1950 को या उसके बाद भारत में पैदा हुए लोग भारतीय नागरिक होंगे। हालाँकि कुछ समय बाद इसमें एक संशोधन हुआ और इस प्रकार की नागरिकता को उन लोगों के लिए सीमित किया गया जो 1 जनवरी 1950 और 1 जनवरी 1987 के बीच भारत में पैदा हुए।  इसके बाद पैदा हुए लोगों के लिए अनिवार्य किया गया कि नागरिकता के लिए माता-पिता में से किसी एक का भारतीय होना जरूरी है। इसके बाद साल 2003 में इस प्रकार की नागरिकता देने वाले कानून को और कठोर किया गया और जिसमें कहा गया है कि 3 दिसंबर, 2004 के बाद पैदा हुए वो लोग, जिनके माता-पिता में से एक भारतीय हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो, वे भारतीय नागरिकता के पात्र होंगे।

वंश के आधार पर नागरिकता

भारत के बाहर पैदा हुआ ऐसे व्यक्ति जिसके माता-पिता उसके जन्म के समय भारत के नागरिक थे, तो वह वंश के आधार पर भारत का नागरिक होगा। हालाँकि इसमें एक शर्त है कि 1 वर्ष के भीतर भारतीय वाणिज्य दूतावास में उसके पंजीयन होना चाहिए, साथ ही एक घोषणा हो कि वह किसी अन्य देश का पासपोर्ट नहीं रखता है।

पंजीकरण द्वारा नागरिकता 

यह साधन उन विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय नागरिकता का द्वार खोलता है, जो विवाह या कुल के माध्यम से भारतीय नागरिक के साथ संबंध रखते हैं। आवेदक को इसके लिए भारत में रहने की निर्धारित अवधि की शर्तों को पूरा करना होता है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसी तरीके से भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। 

प्राकृतिकिकरण द्वारा नागरिकता

इस तरह से उन व्यक्तियों को भारतीय नागरिकता मिलती है- जिनका रक्त, मिट्टी या विवाह के माध्यम से भारत के साथ कोई संबंध नहीं है। अधिनियम की तीसरी अनुसूची में प्राकृतिककरण की शर्तों का उल्लेख किया गया है। गौरतलब है इसी प्रकार से दलाई लामा और अदनान सामी ने भारतीय नागरिकता हासिल की है।

यहाँ स्पष्ट कर दे कि भारत किसी भी व्यक्ति को एक साथ दोहरी नागरिकता रखन का अधिकार नहीं देता है और न ही कुछ समय पहले तक अवैध प्रावसियों को भारत में टिकने का अधिकार देते था। लेकिन कुछ दिन पहले आए संशोधन कानून के बाद गैर-मुस्लिम प्रवासियों के लिए ये शर्त समाप्त कर दी गई। जिसके बाद अब हिंदू, सिख ,जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई अवैध प्रवासी नहीं माने जाएँगे।

अब इसके बाद जिन लोगों को ऐसा लग रहा है कि केंद्र सरकार इस कानून को लाकर उनपर हमलावर है, उन्हें ये जानने की आवश्यकता है कि सरकार के दबाव में या किसी ऐसे कानून के कारण कोई भी आपसे नागरिक होने का तमगा नहीं छीनता।

नागरिकता सिर्फ़ तीन कारणों से जाती है

त्याग (सेक्शन 8): जब तक देश का नागरिक किसी निर्धारित प्राधिकरण के पास ये घोषणा-पत्र न दें कि वो भारतीय नागरिकता का त्याग कर रहा है, तब तक उससे उसकी नागरिकता आधिकारिक रूप से नहीं छीनी जा सकती।

समाप्ति (धारा 9): ऊपर बताया कि भारत दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देता हैं। इसलिए दूसरे देश की नागरिकता पाते ही उसके पास से भारत की नागरिकता समाप्त हो जाती है।

वंचन (धारा 9): पंजीकरण या प्राकृतिककरण के जरिए प्राप्त की गई नागरिकरता को ही भारत सरकार रद्द कर सकती है। वो भी केवल तब जब निम्नलिखित बिंदु परिस्थिति पर प्रभाव डालते हों। जैसे:

  • पंजीकरण या प्राकृतिककरण का प्रमाण-पत्र धोखाधड़ी, गलतबयानी या छिपाव के माध्यम से प्राप्त किया गया था।
  • नागरिकता लेने वाले शख्स ने भारत के संविधान के प्रति अरुचि या अप्रसन्नता दिखाई ।
  • व्यक्ति ने युद्ध के दौरान दुश्मन के साथ संवाद किया ।
  • उस व्यक्ति को भारत की नागरिकता प्राप्त करने के पांच साल के भीतर किसी देश में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
  • व्यक्ति 7 वर्षों की निरंतर अवधि के लिए भारत के बाहर एक साधारण निवासी रहा है (जब तक कि निवास का उद्देश्य अकादमिक या सरकारी सेवा नहीं था)

नागरिकता संशोधन बिल यानी CAB गुरुवार को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून यानी CAA बना। इसके बाद से ही, खासकर जुमे की नमाज के बाद से दिल्ली, अलीगढ़, मुर्शिदाबाद, पटना… से विरोध के नाम पर हिंसा करने पर अमादा समूहों की खबरें लगातार सामने आ रही है। विरोधियों का कहना है कि यह कानून कथित अल्पसंख्यकों का मानवाधिकार छीन लेगा। यह भारत को हिंदू राष्ट्र बना देगा। इसे आरएसएस का एजेंडा थोपने की साजिश भी बता रहे।

लेकिन, अब आप जान गए होंगे कि इस कानून का किसी भी सूरत में भारत के नागरिकों से कोई सरोकार नहीं है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। यह कानून इस्लामी मुल्क पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ना झेलने वाले अल्पसंख्यकों को शरणार्थियों की पीड़ा से छुटकारा दिलाने का एक जरिया मात्र है। बावजूद इसके यह हंगामा बताता है कि नागरिकता संशोधन कानून तो महज बहाना है, इसके पीछे की साजिशें गहरी हैं। इन साजिशों का पता लगाया जाना वक्ती जरूरत है।

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बंगाल में नागरिकता कानून लागू नहीं करूँगी, चाहे तो सरकार बर्खास्त कर दें: ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर पिछले चार दिनों से जारी हिंसा के बाद सोमवार (दिसंबर 16, 2019) को राज्‍य की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी सड़क पर उतर आईं। तृणमूल कॉन्ग्रेस की ओर से आयोजित विशाल रैली में ममता बनर्जी ने कहा, “हम सभी नागरिक हैं। सांप्रदायिक सौहार्द हमारा लक्ष्‍य है। हम एनआरसी और नागरिकता संशोधन कानून को पश्चिम बंगाल में अनुमति नहीं देंगे।” ममता ने कहा कि वो राज्‍य में नागरिकता संशोधन कानून को हरी झंडी नहीं देंगी। उन्‍होंने NRC और नागरिकता संशोधन कानून दोनों को ही असंवैधानिक बताया है।

ममता बनर्जी ने कहा, “मैं पश्चिम बंगाल में संशोधित नागरिकता कानून और एनआरसी को कभी अनुमति नहीं दूँगी। यदि आप मेरी सरकार को बर्खास्त करना चाहते हैं, तो आप कर सकते हैं।” इस दौरान ममता बनर्जी ने सभी राज्यों के सीएम को एनआरसी और सीएए को लेकर संदेश दिया है। इस दौरान उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार के सबका साथ सबका विकास नारे पर निशाना साधते हुए कहा, “केवल बीजेपी यहाँ बचे और बाकी सब चले जाएँ, यही बीजेपी की राजनीति है। यह कभी नहीं हो पाएगा। भारत सभी का है। अगर सबका साथ नहीं रहेगा तो सबका विकास कैसे होगा? नागरिकता कानून किसके लिए है?”

ममता ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध को जायज ठहराते हुए कहा, “पहले मैं अकेली इसके खिलाफ थी। आज दिल्ली के सीएम ने कहा कि वह इसे इजाजत नहीं देंगे। बिहार के सीएम ने कहा कि वह एनआरसी को अनुमति नहीं देंगे। मैं उनसे कहना चाहती हूँ कि नागरिकता संशोधन कानून को भी इजाजत न दें। एमपी के सीएम, पंजाब के सीएम, छत्तीसगढ़ के सीएम और केरल के सीएम ने भी यही कहा है। सभी को यही कहना चाहिए।”

पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध जारी है। बंगाल में तीसरे दिन भी उत्पातियों ने मुर्शिदाबाद के पास रेलवे स्टेशनों में तोड़फोड़ और आगजनी की। रेल पटरी पर टायर जलाकर ट्रेनों को रोका और पथराव किया। मौक़े पर पहुँची पुलिस के वाहन को भी फूँक दिया। एहतियातन कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया। साथ ही 6 ज़िलों में इंटरनेट सेवाएँ भी बंद कर दी गई हैं।

रविवार को बंगाल में मुर्शिदाबाद, बीरभूम और उत्तर 24 परगना में हिंसक प्रदर्शन हुए। इन विरोध-प्रदर्शनों के चलते यातायात प्रभावित रहा और लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। हावड़ा 24 परगना और मुर्शिदाबाद के विभिन्न स्टेशनों पर ट्रेनों को रेक दिया गया। इस बीच, मालदा और आसपास के ज़िलों में इंटरनेट सेवा बंद रही।

जो भारत का है उसे रजिस्टर में अंकित होने में क्या समस्या है: NRC के समर्थन में मुलायम की बहू

समाजवादी पार्टी भले ही नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप (NRC) का विरोध कर रही है, लेकिन पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव ने एक बार फिर से पार्टी लाइन से हटकर नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप का समर्थन किया है।

उन्होंने ट्वीट कर NRC का समर्थन किया और साथ ही विरोध करने वालों पर भी सवाल उठाए हैं। अपने ट्वीट में अपर्णा यादव ने जामिया मिलिया, NRC बिल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और 16 दिसंबर के हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए लिखा, “जो भारत का है उसे रजिस्टर में अंकित होने में क्या समस्या है?”

बता दें अपर्णा यादव समाजवादी पार्टी की सदस्य भी हैं और 2017 में पार्टी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुकी हैं। हालाँकि, NRC के मुद्दे पर अपर्णा यादव और सपा प्रमुख अखिलेश यादव की राय जुदा है। अखिलेश यादव ने NRC को डराने की राजनीति करार दिया है। उन्होंने कहा था कि अगर उत्तर प्रदेश में NRC की कार्रवाई की गई तो सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रदेश छोड़ना पड़ेगा।

वैसे ये पहला मौका नहीं जब अपर्णा यादव ने मोदी सरकार के फैसले का खुला समर्थन किया हो। मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा ने तीन तलाक कानून पर भी अपनी अलग राय रखी थी। सपा ने जहाँ इस कानून का विरोध किया था, वहीं अपर्णा ने इसका स्वागत किया था। तीन तलाक विधेयक पर अपर्णा ने एक ट्वीट कर अपनी सहमति जताई थी। 

अपर्णा ने ट्वीट में लिखा था, “यह स्वागत योग्य कदम है। यह महिलाओं खासकर मुस्लिम महिलाओं को और मजबूती देगा। यह उन महिलाओं की तरफ ध्यान आकृष्ट करेगा जो लंबे समय से अन्याय सहती आ रही हैं।” इससे पहले अपर्णा यादव स्वच्छता अभियान आदि पर भी केंद्र सरकार का समर्थन कर चुकी हैं। यूपी में बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के कुछ दिन बाद ही अपर्णा और उनके पति प्रतीक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस मुलाकात की राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हुई थी।

इससे पहले अपर्णा बीजेपी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ एक इफ्तार पार्टी में भी नजर आई थीं। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ली गई एक सेल्फी को शेयर करने के कारण भी अपर्णा काफी चर्चा में रही थीं।

कुछ लोग खुद को RTI एक्टिविस्ट कहते हैं, क्या यह पेशा है: प्रशांत भूषण से CJI

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एसए बोबडे का ‘पीआईएल (पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन, जनहित याचिका) कार्यकर्ताओं’ के प्रति धैर्य चुकता प्रतीत हो रहा है। पहले उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के ‘बेचारे’ छात्रों के मानवाधिकार की दुहाई देने और उन पर पुलिस की कार्रवाई की जाँच की माँग लेकर आए याचिकाकर्ताओं से कहा कि केवल छात्र होने भर से किसी को देश का कानून अपने हाथ में लेने का हक़ नहीं मिल जाता। इसके बाद उन्होंने प्रशांत भूषण को उनकी एक याचिका के लिए फटकार लगाई है

यह याचिका प्रशांत भूषण की ही एक पुरानी याचिका के बारे में थी। उस पुरानी याचिका को दायर कर प्रशांत भूषण ने आरटीआई एक्ट (सूचना के अधिकार कानून) के संबंध में राज्यों के सूचना आयुक्तों (इन्फॉर्मेशन कमिश्नरों) की नियुक्ति के बारे में सवाल उठाए थे। साथ ही उनका आरोप था कि आरटीआई एक्ट को बेवजह कमज़ोर किया जा रहा है।

इसके जवाब में एक ओर जहाँ सीजेआई ने माना कि आरटीआई को लेकर कुछ गंभीर चिंताएँ अवश्य जायज़ हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोग सूचनाएँ माँग रहे हैं, जिनका मामले से कोई लेना-देना ही नहीं है। भूषण के प्रति नाराज़गी का प्रदर्शन करते हुए कहा, “कुछ लोग खुद को ‘आरटीआई एक्टिविस्ट’ कहते हैं। मुझे बताइए, ये कोई व्यवसाय है क्या?”

मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर ज़ोर दिया कि वे सूचना के सार्वजानिक होने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसको लेकर चिंतित हैं कि जिनका विषय से कोई लेना-देना नहीं है, वे किसी मुद्दे पर जानकारी चाहते हैं। भूषण को एक बार और सुनाते हुए उन्होंने कहा, “हर रोज़ कोई जानकारी चाहता है और आप उनके पीछे होते हैं। इस पर किसी तरह की कोई रोक (फ़िल्टर) होनी चाहिए।”

जस्टिस बोबडे ने चिंता इस बात पर भी जताई कि इस जानकारी का इस्तेमाल लोगों को ब्लैकमेल करने में हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कानून का कोई दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। जवाब में प्रशांत भूषण ने कहा कि वे अपना दिमाग लगाएँगे इसके हल के लिए।

RTI से ऊपर नहीं CJI, पब्लिक अथॉरिटी बनना है तो पारदर्शिता ज़रूरी: रंजन गोगोई की पीठ का फैसला

RTI आवेदनों में कमी बताता है सरकार संतोषजनक काम कर रही है: गृहमंत्री अमित शाह

ट्विटर से निजी अदालत चलाने वाले प्रशांत भूषण ने स्वीकारी गलती, पर SC ने नहीं दी राहत

Bar Council के नियमों का उल्लंघन करते पकड़े गए प्रशांत भूषण, NGOs से दिया इस्तीफा

अयोध्या में अगले चार महीने में भव्य राम मंदिर, अपने बीच छिपे मीरजाफ़र को पहचान लें: अमित शाह

झारखंड में चौथे चरण के विधानसभा चुनाव में वोटिंग के बीच सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने साहिबगंज के बरहरवा में जनसभा को संबोधित किया। रैली को सम्बोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि अपनों के बीच छुपे हुए मीर जाफर को पहचानें। उन्‍हें ऐसा करारा जवाब दें कि वे आपको बरगलाने की जुर्रत न कर सकें। शाह ने संताल के आदिवासी सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि जैसे उन्‍होंने अंग्रेजों को खदेड़ने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी, वह आजादी की लड़ाई में सदैव याद रखा जाएगा।

गृह मंत्री अमित शाह ने यह भी कहा, “मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है, 4 माह के अंदर आसमान को छूता हुआ भव्य राम मंदिर अयोध्या में बनने जा रहा है।”

अमित शाह ने जनसभा में लोगों से जुड़ाव करते हुए कहा, “मित्रों, हेमंत कॉन्ग्रेस की गोद में बैठकर मुख्‍यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। जब झारखंड के निर्माण के लिए गोलियाँ चल रही थीं, तब शासन में कौन था। हेमंत जी आपको याद न हो तो अपने पिता गुरुजी से पूछ लेना। तब कॉन्ग्रेस और राजद के लालू यादव सरकार में थे। शर्म करो सत्‍ता के लिए इतने नीचे मत गिरो।”

गृहमंत्री शाह ने कहा कि झारखंड में जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाकर हमने अपने आदिवासियों की जिंदगी सुरक्षित की। सरकार के विकास कार्यों को गिनाते हुए शाह ने कहा कि हमने स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में एम्‍स और मेडिकल कॉलेज बनाकर गरीब आदमी की चिंता की। जबकि हेमंत राहुल बाबा के कंधे पर बैठकर सीएम बनते घूम रहे हैं।

उन्नाव केस: कुलदीप सेंगर बलात्कार और अपहरण के मामले में दोषी करार

दिल्ली की एक अदालत ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बलात्कार के आरोप में दोषी करार दिया है। उसे दुष्कर्म और अपहरण के आरोप में दोषी ठहराया गया है। तीस हजारी कोर्ट ने इस मामले में मंगलवार (दिसंबर 10, 2019) को ही फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे सोमवार को सुनाया गया। सेंगर को भाजपा ने पहले ही निष्कासित कर दिया था। उस पर 2017 में उन्नाव की एक लड़की को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप था। ढाई साल से चल रहे इस मामले में पीड़िता के परिजनों को भी काफ़ी कुछ झेलना पड़ा।

पीड़िता ख़ुद अभी दिल्ली एम्स में भर्ती है। वहीं, उसके चाचा, चाची और मौसी की मौत हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केस को लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर किया गया था। 5 अगस्त से ही नियमित सुनवाई शुरू कर दी गई थी। सुनवाई बंद कमरे में हो रही थी। इस दौरान अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों और बचाव पक्ष के 9 गवाहों के बीच जिरह हुई।

कोर्ट ने भाजपा के निष्कासित नेता कुलदीप सेंगर पर आपराधिक षड्यंत्र, अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप तय किए थे। फिलहाल, वह तिहाड़ जेल में बंद है। अदालत ने मामले में सह आरोपी शशि सिंह के खिलाफ भी आरोप तय किए थे। वह लड़की को सेंगर के पास लेकर गई थी। कोर्ट ने शशि सिंह को बरी कर दिया है। शशि ने कोर्ट में ख़ुद को पीड़ित बताया था।

पीड़िता ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिख इंसाफ की गुहार लगाई थी। पीड़ित ने इस पत्र में बताया कि विधायक सेंगर ने उसके साथ दुष्कर्म किया। विधायक की तरफ से पीड़िता और उसके परिवार के ख़िलाफ़ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया गया।

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क्या गुमराह कर रहे हैं केजरीवाल, शाह से समय माँगा नहीं लेकिन कर दिया ट्वीट?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा है कि वो दिल्ली में हो रही हिंसा से चिंतित हैं। हालाँकि, ये हिंसा कौन लोग कर रहे हैं, इस बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा। साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि उन्होंने स्थिति पर चर्चा करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने का समय माँगा है। उन्होंने कहा कि वो शाह से दिल्ली में त्वरित शांति बहाली के उपायों पर चर्चा करेंगे। शनिवर (दिसंबर 15, 2019) को जामिया नगर में 4 बसों को फूँक दिए जाने और कई अन्य वाहनों को क्षतिग्रस्त किए जाने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए लाठीचार्ज और आँसू गैस का प्रयोग किया था।

लेकिन एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केजरीवाल ने शाह से मिलने का समय तक नहीं माँगा है। एबीपी न्यूज़ के पत्रकार विकास भदोरिया ने गृह मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया है कि अभी तक केजरीवाल ने अमित शाह से मिलने का समय नहीं माँगा है। यहाँ सवाल ये उठता है कि क्या दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने ट्विटर पर लोगों से झूठ बोला कि दिल्ली में शांति-व्यवस्था की बहाली के लिए उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से मिलने का समय माँगा है?

आम आदमी पार्टी में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध-प्रदर्शन को लेकर कई विरोधाभास देखने को मिल रहे हैं। शनिवार को बसों को जलाए जाने के बाद जहाँ आप सुप्रीमो अरविन्द केजरीवाल इस घटना की निंदा करते हुए इसे अस्वीकर्य बता रहे थे, उनके उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ट्विटर पर फोटो शेयर कर दिल्ली पुलिस पर ही आग लगाने का इल्जाम लगाए जा रहे थे। इतना ही नहीं, जहाँ ये वारदात हुई, वहाँ आप विधायक अमानतुल्लाह ख़ान भी एक वीडियो में नजर आए।

अमानतुल्लाह और सिसोदिया ने इन घटनाओं को भाजपा की साज़िश करार दिया। वहीं, भाजपा ने हिंसक भीड़ का नेतृत्व करने को लेकर अमानतुल्लाह ख़ान और आम आदमी पार्टी से जवाब माँगा है। दिल्ली भाजपा ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी दिल्ली को जलाने का प्रयास कर रही है। भाजपा ने सड़क पर पथराव, बसों को जलाए जाने और उन्माद फैलाने के पीछे आप का हाथ होने का आरोप लगाया। भाजपा ने मनीष सिसोदिया पर भी निशाना साधा, जिन्होंने दिल्ली पुलिस की आग बुझाते हुए फोटो शेयर कर दावा किया कि पुलिस आग लगा रही है।

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जामिया में प्रदर्शनकारी छात्रों की गुंडागर्दी, ABP की महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी

जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी के छात्रों का प्रदर्शन अब भी आक्रामकता के दौर से गुजर रहा है। रविवार (दिसंबर 15, 2019) को छात्रों का ये प्रदर्शन अचानक से हिंसक हो उठा, जब जामिया नगर से 4 बसों को जलाए जाने की ख़बर आई। कई मेट्रो स्टेशनों को बंद करना पड़ा, कई इलाक़ों में लम्बा ट्रैफिक जाम लगा और लोगों को ख़ासी परेशानी का सामना करना पड़ा। अब छात्रों ने पत्रकारों को भी अपने चपेट में ले लिया है। यहाँ तक कि महिला रिपोर्टरों को भी नहीं बख्शा गया।

ताज़ा मामला एबीपी न्यूज़ की महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी का है। एबीपी न्यूज़ की पत्रकार लगातार छात्रों से पूछती रहीं कि क्या यही उनका शांतिपूर्ण प्रदर्शन है, लेकिन छात्रों ने महिला रिपोर्टर को घेर कर उनके साथ बदतमीजी की और नारेबाजी शुरू कर दी। वो बार-बार पूछती रहीं कि आप एक महिला के साथ गुंडागर्दी क्यों कर रहे हैं लेकिन जामिया के प्रदर्शनकारी छात्र लगातार बदसलूकी करते रहे। एबीपी न्यूज़ की पत्रकार प्रतिमा मिश्रा के साथ छात्रों ने दुर्व्यवहार किया।

प्रतिमा मिश्रा ने दावा किया कि वो सुबह 6 बजे से ही छात्रों के ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन’ को कवर कर रही थीं और उनकी आवाज़ को लोगों तक पहुँचा रही थीं, लेकिन छात्रों ने अंत में उन्हें ही घेर कर नारेबाजी शुरू कर दी। छात्रों ने कैमरामैन के साथ भी धक्का-मुक्की की और कहा कि एबीपी न्यूज़ बिका हुआ है, वो कुछ भी सही नहीं दिखा रहा। जबकि एबीपी ने दावा किया है कि वो जामिया के प्रदर्शनकारी छात्रों की आवाज़ को कोने-कोने तक पहुँचा रहा था।

एबीपी की एंकर ने प्रतिमा को अपना ख्याल रखने की सलाह दी और साथ ही आशंका जताई कि ये भीड़ फिर से उग्र हो सकती है और हिंसा पर उत्तर सकती है। छात्रों की इस हरकत को देख कर एबीपी की एक अन्य पत्रकार पिंकी राजपुरोहित ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र विरोध प्रदर्शन के नाम पर गुंडागर्दी कर रहे हैं। इससे पहले जामिया के छात्रों ने ज़ी न्यूज़ की पत्रकार के साथ बदतमीजी की थी और ‘गोदी मीडिया, गो बैक’ के नारे लगाए थे।

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