Home Blog Page 5253

मुस्लिम लड़के से प्यार और शादी का प्लान बाप को पसंद नहीं, बेटी की हत्या कर शव के किए टुकड़े-टुकड़े

एक पिता ने अपनी बेटी की निर्मम हत्या इसलिए कर दी, क्योंकि उसकी बेटी ने अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने की इच्छा जताई थी। उसने अपनी बेटी की हत्या कर उसके शव के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। वह बेटी के शव के टुकड़ों को सूटकेस में भरकर उसे ठिकाने लगाने जा रहा था लेकिन पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस ने आरोपित अरविंद तिवारी को 22 वर्षीय बेटी प्रिंसी की निर्मम हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।

मामला मुंबई के ठाणे जिले का है। आरोपित अरविंद को अपनी बेटी की अपनी पसंद से शादी करने की बात इतनी नागवार गुजरी कि उसने बड़े ही निर्मम तरीके से उसकी हत्या कर दी। ना सिर्फ उसकी हत्या की बल्कि तीन टुकड़ों में उसके शरीर को काटा और उसे एक सूटकेस में भर कर ठिकाने लगाने का प्लान बनाया। पुलिस को हालाँकि शव का एक ही निचला हिस्सा बरामद हुआ जो सूटकेस में रखा गया था। आरोपित खुद अपनी बेटी की हत्या कर शरीर के आधे अंग को ठिकाने लगाने की फिराक में था।

बताया जा रहा है कि मृतक लड़की लगभग 6 महीने पहले यूपी के जौनपुर से शहर आई थी और भांडुप में जॉब कर रही थी। जहाँ उसे मुस्लिम समुदाय के एक सहकर्मी से प्यार हो गया और वह उससे शादी करना चाहती थी। मगर उसके पिता को यह मंजूर नहीं था। लड़की के पिता अरविंद तिवारी पर आरोप है उसने उसकी हत्या कर दी और शरीर को कई टुकड़ों में काटकर सूटकेस में भर दिया।

इसके बाद आरोपित ने अपनी बेटी प्रिंसी के शव के टुकड़ों को ठिकाने लगाने के लिए रविवार (दिसंबर 8, 2019) सुबह साढ़े पाँच बजे के करीब लाश का आधा हिस्सा बैग में भर कर आटो- रिक्शे से टिटवाला स्टेशन आया। वहाँ से उसने कल्याण रेलवे स्टेशन के लिए ट्रेन ली। कल्याण रेलवे स्टेशन आने के बाद उसने भिवंडी जाने के लिए दोबारा से रिक्शा लिया। उसने भिवंडी में लाश के टुकड़े को ठिकाना लगाने की योजना बनाई थी। लेकिन इस दौरान आटो-रिक्शा चालक ने उससे पूछ लिया कि बैग में क्या है, क्योंकि उसके बैग से बदबू आने लगी थी। जिसके बाद आरोपित बाग घबराकर बैग ऑटो-रिक्शा में ही छोड़कर फरार हो गया। 

ऑटो चालक को शक हुआ और उसने अन्य ऑटो ड्राइवर के साथ ही स्थानीय महात्मा फुले पुलिस स्टेशन को सूचित किया। जिसके बाद पुलिस की एक टीम मौके पर पहुँची और बैग खोला, जिसमें युवती के शरीर का निचला आधा हिस्सा था। इसके बाद अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था। ठाकरे और एपीआई अविराज कुराडे सहित स्थानीय क्राइम ब्रांच (यूनिट I) की टीम ने मामले में जाँच शुरू की और रेलवे स्टेशन के आसपास के सीसीटीवी कैमरों से आरोपित की तलाश करनी शुरू कर दी।

ट्रैक करते हुए पुलिस टीम ने पाया कि आरोपित कल्याण रेलवे स्टेशन से आया था। सीसीटीवी फुटेज में आगे पुलिस ने पाया कि उसने कल्याण रेलवे स्टेशन आने के लिए टिटवाला से एक ट्रेन ली थी। फिर सीसीटीवी फुटेज को खंगालने के बाद पुलिस ने पाया कि वह एक ऑटो-रिक्शा में रेलवे स्टेशन पर आया था। फिर उस ऑटो चालक को ट्रैक किया गया जिसने पुलिस को बताया कि तिवारी ने तिवाला के इंदिरा नगर इलाके से ऑटो लिया था। ऑटो चालक से कुछ पूछताछ करने के बाद पुलिस ने एक स्केच बनाया और स्थानीय लोगों से उस व्यक्ति के बार में पूछताछ की गई तो उसकी पहचान अरविंद तिवारी के रूप में हुई।

इसके बाद पुलिस तिवारी के घर गई। वहाँ पुलिस ने उससे उसकी बेटी के बारे में पूछा। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुरूआत में तो उसने बात को घुमाने और टाल-मटोल करने की कोशिश की, लेकिन फिर बाद में उसने कबूला कि उसने अपनी बेटी की हत्या की है। 

क्राइम ब्रांच पुलिस के सामने उसने कबूला कि मृतका उसकी 22 साल की बेटी थी और वह किसी अन्य समुदाय के युवक को पसंद करती थी जो उसे पसंद नहीं था। इसके चलते अक्सर बाप-बोटी में झगड़े होते रहते थे। तिवारी ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि उसने किसी अन्य समुदाय के व्यक्ति के साथ अपनी बेटी के संबंध को मंजूरी नहीं दी थी। लेकिन फिर भी वो उसके साथ शादी करने के लिए तैयार थी, जिसके बाद उसने उसे मारने का फैसला किया।

ठाणे सिटी पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर, क्राइम ब्रांच (यूनिट I) नितिन ठाकरे ने कहा, “हम अभी भी इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं है कि उसने उसे कैसे मारा। फिर बाद में तिवारी ने उसके शरीर को कई हिस्सों में काट दिया और उसे एक सूटकेस में भर दिया। उसने सूटकेस में कुछ हिस्से डाले थे जो हमें मिले हैं। हम अभी भी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि शरीर के बाकी हिस्सों को कहाँ रखा गया है।” क्राइम ब्रांच ने आरोपित को स्थानीय पुलिस स्टेशन को सौंप दिया है जो उसे रिमांड के लिए अदालत में पेश करेगा। 

जमानत पर रिहा होते ही हंसिए से रेता महिला का गला, हुई मौत: नहाते वक्त बना लिया था अश्लील वीडियो

6 साल की बच्ची से रेप, गला दबाकर हत्या: महिला जज ने सुनाई फाँसी की सज़ा, हत्यारे को पछतावा नहीं

मुस्लिम महिला ने धर्म परिवर्तन कर मंदिर में की शादी, परिजन दे रहे हैं दम्पति को ज़िंदा जलाने की धमकी

17 साल की गोद ली गई बेटी, बाप पर यौन शोषण का आरोप और प्राइवेट पार्ट कटी हुई लाश: मुंबई केस सॉल्व

BHU SVDV मामले में छात्रों की जीत, धरना समाप्त: डॉ फिरोज के इस्तीफे के साथ ही मीडिया गिरोह की खुली पोल

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म संकाय से डॉ. फिरोज खान ने इस्तीफ़ा दे दिया है। जिसकी पुष्टि प्रशासन ने कर दी है। इस प्रकार धर्म, कर्मकाण्ड और सनातन परंपरा की रक्षा के लिए पिछले 34 दिन से जारी छात्रों का आंदोलन समाप्त हो गया है। हालाँकि, प्रशासन ने कल ही यह संकेत दे दिया था कि BHU के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में गैर हिन्दू (मुस्लिम शिक्षक) की नियुक्ति पर चल रहे विवाद का अंत अब डॉ. फिरोज खान के हाथ में है। उनका चयन आयुर्वेद और कला संकाय के संस्कृत विभाग में हो गया है तो जल्द ही वह निर्णय लेंगे कि उन्हें कहाँ ज्वाइन करना है। इसी कड़ी में कल देर रात उन्होंने SVDV से इस्तीफा दे दिया।

गौरतलब है कि ऑपइंडिया ने अपने सूत्रों के हवाले से पहले ही इस फैसले की सूचना दे दी थी कि सोमवार देर रात डॉ. फिरोज खान ने अपना इस्तीफा प्रशासन को सौंप दिया है और अब वे कला संकाय के संस्कृत विभाग में आज ज्वाइन करेंगे। छात्रों के इस जीत के साथ उन मीडिया गिरोहों की भी पोल खुल गई जो हर मुद्दे को हिन्दू-मुस्लिम का मुद्दा बना कर रोटियाँ सेकना शुरू कर देते हैं। संभवतः अब उन्हें स्पष्ट हो गया होगा कि BHU में विवाद संस्कृत भाषा को लेकर था ही नहीं मुद्दा धर्म विज्ञान से जुड़ा था और आज SVDV से इस्तीफे के साथ ही उसी BHU के कला संकाय के संस्कृत विभाग में डॉ. फिरोज खान पढ़ाएँगे जिसका यही छात्र तहे-दिल से स्वागत करेंगे।


BHU की ओर से जारी किया गया आधिकारिक पत्र

आधिकारिक रूप से BHU प्रशासन द्वारा डॉ. फिरोज खान के इस्तीफे की पुष्टि करते ही छात्र इसे अपनी जीत के रूप में नहीं बल्कि इसे धर्म और सत्य की जीत बताया है। गौरतलब है कि डॉ. फिरोज ने 29 नवंबर को आयुर्वेद और और 4 दिसंबर को कला संकाय के संस्कृत विभाग में इंटरव्यू दिया था और उनका चयन कला संकाय संस्कृत विभाग के साथ ही आयुर्वेद संकाय के संस्कृत विभाग में भी हो चुका है।

कल BHU प्रशासन की तरफ से चीफ प्रॉक्टर ओपी राय छात्रों से मिलने गए थे और उन्हें फिरोज खान के चयन और उन्हें कहाँ ज्वाइन करना है ये निर्णय लेने की स्वतंत्रता के बारे में छात्रों को बताया। अब यह माना जा रहा है कि लगभग 34 दिन से चल रहे आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के बीच धर्म विज्ञान संकाय में फिरोज खान के पढ़ाने को लेकर बना संशय दूर हो गया है। ऑपइंडिया शुरू से ही इस पूरे प्रकरण पर प्रामाणिक रिपोर्ट करता आ रहा है और हमने पहले ही उनके किसी अन्‍य विभाग से जुड़ने की संभावना जाहिर कर दी थी।

चीफ प्रॉक्टर ओपी राय ने छात्रों को बताया कि बीएचयू कार्यकारिणी परिषद की बैठक के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया से जुड़ा नियुक्ति पत्र जल्द ही डा. फिरोज खान को दे दिया जाएगा। चूँकि, उनका चयन तीन विभागों में है तो वह अपनी पसंद और सुविधा के अनुसार कोई भी विभाग चुन सकते हैं। छात्रों ने इस पर हंगामा भी किया यदि वो खुद निर्णय लेंगे तो प्रशासन ने क्या किया? जिसका चीफ प्रॉक्टर ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया लेकिन उनकी बातों से उनकी मंशा जाहिर हो गई थी कि प्रशासन चाहता है कि फिरोज खान कहीं और ज्वाइन कर लें जिससे इस मामले का अंत हो।

दूसरी तरफ कल ही छात्रों ने प्रशासन को छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न करने और माँगे नहीं माने जाने पर आमरण अनशन का संकल्प व्यक्त किया था। जिस पर प्रशासन ने छात्रों से धैर्य बनाए रखने की अपील की थी।छात्रों के विरोध को देखते हुए आज 10 दिसंबर से होने वाली परीक्षा भी टाल दी गई थी। और प्रशासन ने जल्द समाधान के आश्वासन के साथ ही गेंद फिरोज खान के पाले में डाल दिया था। इसके बाद से ही उम्मीद जताई जा रही थी कि 9 दिसंबर को उन्हें नियुक्ति पत्र मिल जाएगा और वह तीनों विकल्प में से अपनी पसंद के स्थान को चुन सकते हैं।

हालाँकि, कल 9 दिसंबर को फिरोज खान को नियुक्ति पत्र मिला या नहीं इसकी भी प्रशासन ने आधिकारिक सूचना अभी नहीं दी है लेकिन ऑपइंडिया सूत्रों का कहना है कि कल BHU कोर्ट की बैठक थी और संभवतः वहीं इस प्रकरण के इस तरह से समाधान की रूपरेखा बनी। क्योंकि प्रशासन ने बेशक फिरोज खान को चयनित किसी भी विभाग में ज्वाइन करने के लिए एक महीने का समय दिया था लेकिन जब तक इस प्रकरण का निराकरण नहीं होता छात्र कक्षा और परीक्षा के बहिष्कार पर हर-संभव अटल रहने का संकल्प जाहिर कर चुके थे। ऐसे में धरना लम्बा चलने से प्रशासन की और किरकिरी तय थी।

ऑपइंडिया सूत्रों के मुताबिक डा. फिरोज आयुर्वेद संकाय के संस्कृत विभाग में नहीं जाना चाहते थे। ऐसे में उनके पास विचार करने के लिए सिर्फ दो ही विकल्प बचे थे। पहला एसवीडीवी, जहाँ छात्र उनके विरोध में एक माह से अधिक समय से आंदोलन, धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। दूसरा बीएचयू में ही कला संकाय का संस्कृत विभाग जहाँ उनके चयन की जानकारी प्रशासन द्वारा प्रामाणिक रूप से नहीं बल्कि बातचीत में छात्रों को दिया गया था।

इस प्रकार, BHU में अब डा. फिरोज खान के इस्तीफे की पुष्टि और उनके संस्कृत विभाग को ज्वाइन करने की खबर के बाद इस संपूर्ण प्रकरण का पटाक्षेप हो गया है। छात्रों ने इसे लेकर ख़ुशी जाहिर की है। आधिकारिक रूप से BHU प्रशासन द्वारा डॉ. फिरोज खान के इस्तीफे की पुष्टि करते ही छात्रों ने इसे धर्म, सत्य और मालवीय मूल्यों की जीत बताया है।

ये भी पढ़ें:

BHU के छात्रों ने किया परीक्षा का बहिष्कार, प्रशासन ने अंतिम निर्णय फिरोज पर छोड़ा, आमरण अनशन की तैयारी

BHU प्रशासन का सफ़ेद झूठ: क्या VC गैर-हिन्दुओं से जुड़े इन ‘संवैधानिक बिंदुओं’ का जवाब दे पाएँगे?

अगर वीसी ने धर्म संकाय में नियुक्ति नियमों का ध्यान रखा होता तो BHU की बदनामी नहीं होती: प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी

‘हेलो हिंदू पाकिस्तान’ – CAB पास होने के बाद स्वरा भास्कर का विवादित बयान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किए जाने के बाद स्वरा भास्कर ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी और इसे ‘शर्मनाक’ बताया। इसके बाद उन्होंने बिल पारित हो जाने पर फिर अपनी राय रखी और नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ बोलते हुए विवादित बयान दे डाला।

स्वरा भास्कर ने ट्वीट कर लिखा- “(भारत में…) धर्म नागरिकता का आधार नहीं है। धर्म भेदभाव का आधार नहीं हो सकता। राज्य धर्म के आधार पर फैसला नहीं ले सकता। नागरिकता संशोधन बिल ने मुस्लिमों को स्पष्ट रूप से बाहर रखा है। इस NRC/CAB प्रोजेक्ट में जिन्ना का पुनर्जन्म हुआ है। हिन्दू पाकिस्तान को मेरा हैलो!”

स्वरा के इस ट्वीट से सोशल मीडिया यूजर्स नाराज़ नजर आए और थोड़ी ही देर में तरह-तरह के उदाहरण देकर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा। लोगों ने उनके ‘हेलो हिंदू पाकिस्तान’ वाली टिप्पणी पर गौर करते हुए जवाब दिया कि कल को ‘मुस्लिम हिंदुस्तान’ बनने से बेहतर हैं कि हिंदू पाकिस्तान बन जाया जाए।

किसी ने उन्हें कहा कि उनके जैसे भारतीयों ने नरेंद्र मोदी जी को उनके मेनिफेस्टो के आधार पर ही मतदान किया था। जिसमें एनआरसी, कैब, आर्टिकल 370, राम मंदिर जैसे मुद्दे शामिल थे। इसलिए वे उन्हें धन्यवाद देते है कि वो अपने हर वादे को पूरा कर रहे हैं।

इस ट्वीट के बाद लोग उन्हें ‘जेहादन’ बताने से भी नहीं चूँके और कहा कि ये देश हिंदुओं का है।

उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन बिल को लेकर विपक्ष ने लोकसभा में अपना पुरजोर विरोध दर्ज कराया था। लेकिन 7 घंटे तक चली तीखी बहस के बाद आखिरकार ये पास हो गया। बिल के पक्ष में 311 और विपक्ष में 80 वोट पड़े। अब लोकसभा के बाद राज्यभा में बिल का पास होना बाकी है। नागरिकता संशोधन बिल का पास होना मोदी सरकार की बड़ी जीत मानी जा रही है।

चू#$या… 4 साल के बच्चे को यही गाली दी थी स्वरा भास्कर ने, अब बोली – ‘मैं तो मज़ाक कर रही थी’

कॉमेडी के नाम पर स्वरा भास्कर की फूहड़ता: 4 साल के बच्चे को कहा- चू**या, कमीना…

स्वरा भास्कर जिसके चुनाव प्रचार में गईं वही हार गया: कई बड़े ब्रांड्स ने किया किनारा, छलका दर्द

कॉन्ग्रेस को आधी रात में शिवसेना का झटका, CAB पर 18 सांसदों ने दिया अमित शाह का साथ

महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिहाज से एनडीए से अलग हुए शिवसेना के 18 सदस्यों ने सोमवार (दिसंबर 10, 2019) को लोकसभा में ‘कैब’ को पास कराने के लिए केंद्र सरकार को अपना समर्थन दिया। इसके साथ ही शिवसेना नेता विनायक राउत ने इस दौरान कहा कि तीनों देशों के अल्पसंख्यक शरणार्थियों को नागरिकता जरूर दी जाए मगर इसके कानूनी प्रावधान भी स्पष्ट किए जाएँ।

विधेयक पर बहस के दौरान पार्टी नेता ने अपना मत रखते हुए कहा कि कैब के अंतर्गत जिन शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान की जाएगी, उन्हें 25 वर्षों के लिए मतदान का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए। इसके अलावा ये भी कहा गया कि कैब ने नॉर्थ-ईस्ट राज्यों को छोड़ दिया है। सरकार को बताना चाहिए कि किन राज्यों में शरणार्थियों को नागरिकता मिल रही है।

हालाँकि शिवसेना के विनायक राउत ने बिल का समर्थन किया। लेकिन, साथ ही बिल पर बहस करते हुए ये भी कहा कि गृहमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से कितने लोग भारत में आए और इस विधेयक के पारित होने के बाद कितने लोगों को नागरिकता दी जाएगी। उनके अनुसार देश बहुत मुश्किलों का सामना कर रहा है। ऐसे में इन लोगों को नागरिकता देने से देश पर कितना बोझ पड़ेगा।

इस बहस के दौरान राउत ने श्रीलंका से आए शर्णार्थियों को भी नागरिकता देने की माँग उठाई है और कहा कि केंद्र को इस बात को स्पष्ट बताना चाहिए कि आर्टिकल 370 हटने के बाद दूसरे राज्य से जम्मू-कश्मीर जाकर कितने लोगों ने अपना काम शुरू किया है। क्योंकि उनके अनुसार सिर्फ़ सिर्फ़ कानून बन जाना पर्याप्त नहीं है।

उल्लेखनीय है कि इस बिल पर शिवसेना का रुख जानना इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बनाने के बाद से ही सबकी नजर उनके फैसले पर टिकी थी। एक साल पहले जब ये विधेयक लोकसभा में पेश हुआ था, तब शिवसेना ने पूरी तरह से इसका समर्थन किया था। ऐसे में पाला बदलने के बाद इसका विरोध करके पार्टी आलोचनाओं का शिकार नहीं होना चाहती थी।

‘इंदिरा ने बांग्लादेशियों को नागरिकता दी तो Pak प्रताड़ितों को क्यों नहीं?’ – 311 Vs 80 से पास हुआ बिल

भारत ने किसी ‘समुदाय विशेष’ का ठेका नहीं ले रखा NDTV के सम्पादक महोदय! अल्पसंख्यक का रोना बंद करें

शर्मनाक: ओवैसी ने फाड़ा नागरिकता बिल, कहा- गाँधी ने जो दक्षिण अफ्रीका में किया वह मैंने आज दोहराया

शाह का गणित और फ्लोर मैनेजमेंट: राज्यसभा में ऐसे पास होगा नागरिकता संसोधन विधेयक!

‘इंदिरा ने बांग्लादेशियों को नागरिकता दी तो Pak प्रताड़ितों को क्यों नहीं?’ – 311 Vs 80 से पास हुआ बिल

नागरिकता संशोधन बिल (CAB) लोकसभा से पास हो गया है। इस बिल के पक्ष में 311 वोट पड़े हैं। वहीं विपक्ष में 80 वोट पड़े। लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया और केंद्र सरकार के सामने सवाल रखे, जिसका जवाब गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में दिया। नागरिकता संशोधन बिल के लोकसभा से पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ की। इस दौरान अमित शाह ने एक बार फिर से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर जोर दिया और जल्द ही उसके आने की संभावना जताई।

लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पर करीब 14 घंटे तक बहस हुई। विपक्षी दलों ने बिल को धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला बताया। गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब में कहा कि यह बिल यातनाओं से मुक्ति का दस्तावेज है और भारतीय मुस्लिमों का इससे कोई लेना-देना नहीं है। शाह ने कहा कि यह बिल केवल 3 देशों से प्रताड़ित होकर भारत आए अल्पसंख्यकों के लिए है और इन देशों में मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं, क्योंकि वहाँ का राष्ट्रीय धर्म ही इस्लाम है। लोकसभा में पास होने का बाद अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश होगा।

बता दें कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए शरणार्थियों को इस बिल में नागरिकता देने का प्रस्ताव है। इस बिल में इन तीनों देशों से आने वाले हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के शरणार्थियों को नागरिकता का प्रस्ताव है। जेडीयू और एलजेपी जैसी सहयोगी पार्टियों ने बिल के पक्ष में वोट किया। वहीं शिवसेना, बीजेडी और वाईएसआर कॉन्ग्रेस जैसी गैर-NDA पार्टियों ने भी बिल के पक्ष में ही वोट दिया।

जेडीयू, बीजेडी और वाईएसआर कॉन्ग्रेस जैसे दलों की ओर से लोकसभा में बिल का समर्थन किए जाने के बाद अब उच्च सदन से भी इसके पास होने की उम्मीद बढ़ गई है। इससे पहले बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह विधेयक लाखों करोड़ों लोगों को यातना से मुक्ति देगा। उन्होंने कहा कि यह बिल किसी समुदाय विशेष के लिए नहीं है बल्कि अल्पसंख्यकों के लिए है। अमित शाह ने कहा कि ये बिल .001% भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है।

अमित शाह ने कहा कि 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी 23 पर्सेंट थी, लेकिन 2011 में 3.7 पर्सेंट हो गई। बांग्लादेश में 47 में 22 प्रतिशत अल्पसंख्यक आबादी थी, लेकिन 2011 में यह 7.8 पर्सेंट हो गई। आखिर ये लोग कहाँ चले गए? या तो मार दिए गए या भगा दिए गए या फिर इनका धर्मांतरण करा दिया गया। आखिर उनका क्या दोष था? हम चाहते हैं कि इन लोगों का सम्मान बना रहे। 

नागरिकता संशोधन बिल पर बहस के दौरान अमित शाह ने कॉन्ग्रेस पर जमकर हमला बोला। गृह मंत्री ने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि कॉन्ग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का बँटवारा होने दिया। उन्होंने कहा, “आखिर आज इस बिल की जरूरत क्यों है? आजादी के बाद यदि कॉन्ग्रेस धर्म के आधार पर देश का बँटवारा नहीं की होती तो इस बिल की जरूरत ही नहीं पड़ती, कॉन्ग्रेस ने धर्म के आधार पर देश को बँटने दिया।”

अमित शाह ने आगे कहा कि किसी भी तरीके से ये बिल गैर संवैधानिक नहीं है। न ही ये बिल अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है। धर्म के आधार पर ही देश का विभाजन हुआ था। देश का विभाजन धर्म के आधार पर न होता तो अच्छा होता और चूँकि पड़ोसी देशों में मुस्लिमों के खिलाफ धार्मिक प्रताड़ना नहीं होती है, इसलिए इस बिल का फायदा उन्हें नहीं मिल सकता है।

अमित शाह ने कहा कि हर किसी ने आर्टिकल 14 के बारे में बात कही है, लेकिन ये आर्टिकल कानून बनाने से नहीं रोक सकता है। ऐसा नहीं है कि पहली बार नागरिकता के लिए इसका निर्णय हो रहा है, 1971 में इंदिरा गाँधी ने निर्णय लिया कि बांग्लादेश से जितने लोग आए हैं उन्हें नागरिकता दी जाएगी, तो फिर पाकिस्तान को लेकर क्यों नहीं दी जाएगी? गृह मंत्री ने कहा कि 1971 के बाद भी आज बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जा रहा है। 

इस दौरान अमित शाह ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश के संविधान के बारे में बताया और कहा कि ये तीनों इस्लामिक देश हैं। पार्टिशन के वक्त कई लोग इधर आए गए, तब नेहरु-लियाकत समझौता हुआ, उसमें दोनों देशों ने अपने यहाँ अल्पसंख्यकों के अधिकार की बात हुई। भारत मे तो अधिकार मिले लेकिन इन तीनों जगह नहीं हुआ।

वहीं लोकसभा में नागरिकता अधिनियम (संशोधन) विधेयक पर बहस के दौरान सदन को शर्मसार करते हुए ऑल इंडिया मजलिस उल इत्तिहाद अल मुसलमीन (AIMIM) के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने सदन के पटल पर रखे गए बिल के मसौदे की कॉपी फाड़ दी। साथ ही उन्होंने इसे करोड़ों यहूदियों, समलैंगिकों, कम्युनिस्टों की हत्या का आदेश देने वाले जर्मन तानाशाह हिटलर के कानूनों से भी बदतर बताया।

भारत ने किसी ‘समुदाय विशेष’ का ठेका नहीं ले रखा NDTV के सम्पादक महोदय! अल्पसंख्यक का रोना बंद करें

शर्मनाक: ओवैसी ने फाड़ा नागरिकता बिल, कहा- गाँधी ने जो दक्षिण अफ्रीका में किया वह मैंने आज दोहराया

शाह का गणित और फ्लोर मैनेजमेंट: राज्यसभा में ऐसे पास होगा नागरिकता संसोधन विधेयक!


तू चल मैं आता हूँ: बरखा दत्त माँगे आज का ‘गाँधी’, याद आई लोमड़ी-कौव्वे की कहानी

पिछले वर्ष प्रोफ़ेसर जीडी अग्रवाल की दुखद मृत्यु के अलावा आज तक गाँधीवादी सत्याग्रह में किसी के भूखा मर जाने की बात शायद ही सामने आई है। लेकिन यह भी दिलचस्प है कि इसके इतने ‘सुरक्षित’ होने के बावजूद गाँधी के नाम पर “आमरण” अनशन का रास्ता सब दूसरों को ही दिखाते हैं।

बरखा दत्त को भी आजकल ऐसे किसी की तलाश है जिसे इस राह पर ढकेला जा सके। उन्होंने बाकायदा ट्वीट कर इसका ऐलान किया है। गाँधीवाद की विफ़लता का इससे बड़ा प्रमाण और कोई नहीं हो सकता।

बरखा दत्त की इस तलाश से मुझे बचपन में स्कूल में पढ़ी कौव्वे और लोमड़ी की दोस्ती वाली कहानी याद आ गई। मेहनती लोमड़ी जंगल में खुदाई करके खेत बनाती है और जुताई, बोवाई, सिंचाई, पहरेदारी, फ़सल की कटाई सब कुछ अकेले ही करती है। पूरे समय काँव-काँव करने वाला कौव्वा ऊपर बैठकर “तू चल मैं आता हूँ, चुपड़ी रोटी खाता हूँ, ठण्डा पानी पीता हूँ, हरी डाल पर बैठा हूँ” ही चिल्लाता रहता है।

पत्रकारिता का समुदाय विशेष न केवल ‘पक्षी विशेष’ की तरह कर्कश है, बल्कि ऐसे ही इस देश की आम जनता को बरगला भी रहा है। जैसा कि मैंने पहले भी कहा था, ‘धिम्मी’ अन्यों व कट्टरपंथियों की फ़सल काटनी इनके आकाओं को है, जिसकी राह में यह नागरिकता (संशोधन) अधिनियम आ रहा है (क्योंकि इस अधिनियम के तहत जो लोग भारतोय नागरिक और वोटर बनेंगे, वे उन पार्टियों के बहकावे में नहीं आएँगे जिनके लिए तुष्टिकरण ही सबकुछ है )। इसके लिए भूख-हड़ताल की कीमत भी यह खुद चुकाने को तैयार नहीं हैं और न ही अपने आकाओं को कष्ट देना चाहते। इसके लिए भी वे आम जनता को ही उकसा रहे हैं।

एक चीज़ जो इसी से जुड़ी याद आ रही है, वह अन्ना आंदोलन है। उसका भी नारा था- “अन्ना, तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं।” मीडिया गिरोह इसी तरह के आंदोलनों की तलाश में रहता है, जहाँ अपना कुछ दाँव पर न लगे और मलाई काटने को खूब मिले।

जिन्हें लग रहा है कि यह “गाँधी के विचारों और गाँधीवाद के साथ धोखा है”, उनके मीठे मुगालते के लिए भी कड़वी सच्चाई हाज़िर है। यह गाँधीवाद के साथ ‘धोखा’ नहीं, शुरू से गाँधीवाद की सच्चाई रही है, उसका ‘टेम्लेप्ट’ रहा है। यह बात अलग है कि गाँधीवाद के द्योता मोहनदास गाँधी अपनी ‘स्व-हिंसा’ को ‘अ-हिंसा’ इतनी कट्टरता से मान बैठे थे कि उन्हें अपने ‘टेम्लेप्ट’ का सच दिखा ही नहीं। वे जबरिया अहिंसा की गोली हिन्दुओं के गले में ठूँसते हुए खुद अनशन पर बैठे थे, और उसी समय उनका ‘अक्षर विशेष’ काट कर कॉन्ग्रेस हिन्दुओं को उनके नाम पर बरगलाने और अपनी सत्ताका जुगाड़ करने में व्यस्त थी।

प्रख्यात लेखक और जीवनीकार धनंजय कीर ने सावरकर की जीवनी के 20वें अध्याय ‘From Parity to Pakistan’ में गाँधी के संदर्भ में गोपालकृष्ण गोखले की भविष्यवाणी का ज़िक्र किया है। गोखले ने कथित तौर पर कहा था कि भले ही गाँधी अपने समय में आम आदमी के नायक, उस पर एक बड़े प्रभाव के रूप में उभरें, लेकिन जब इतिहास को एक निरपेक्ष दृष्टि से लिखा जाएगा, तो उन्हें पूर्ण रूप से विफ़ल ही माना जाएगा। यहाँ यह जान लेना आवश्यक है कि गोखले 1915 में ही मर गए थे- गाँधी को अतिवादी और कट्टर नैतिकता हिन्दुओं पर एकतरफ़ा लादते हुए दशकों तक देखने के पहले ही। उन्होंने शायद गाँधी के साथ व्यतीत किए हुए संक्षिप्त समय में उनमें कुछ ऐसा देखा, जो बाकी अधिकांश लोग लम्बे-लम्बे समय में भी नहीं देख पाए।

कुछेक अपवादों में श्री ऑरोबिन्दो, आम्बेडकर, सावरकर ने देखा भी, तो जबरिया की नैतिकता के भोंडे प्रदर्शन के आगे तर्क और बुद्धि की सुनने वाले बहुत ज़्यादा लोग उस समय थे नहीं।

बरखा का यह ट्वीट गोखले की उसी भविष्यवाणी की प्रतिध्वनि है।

आप पत्रकार नहीं, दलाल हैं… वह सवाल जिसका जवाब सुन बरखा दत्त बगले झाँकने लगी

26/11 के 11 साल: बरखा दत्त और उनके गैंग के कारण जब ख़तरे में पड़ गई सैकड़ों जिंदगी

ये रिश्ता क्या कहलाता है: बरखा दत्त के ट्वीट्स से हिन्दुस्तान को अमानवीय-हिंसक बता रहा PAK

शर्मनाक: ओवैसी ने फाड़ा नागरिकता बिल, कहा- गाँधी ने जो दक्षिण अफ्रीका में किया वह मैंने आज दोहराया

लोकसभा में नागरिकता अधिनियम (संशोधन) विधेयक पर बहस के दौरान सदन को शर्मसार करते हुए ऑल इंडिया मजलिस उल इत्तिहाद अल मुसलमीन के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने सदन के पटल पर रखे गए बिल के मसौदे की कॉपी फाड़ दी।

साथ ही उन्होंने इसे करोड़ों यहूदियों, समलैंगिकों, कम्युनिस्टों की हत्या का आदेश देने वाले जर्मन तानाशाह हिटलर के कानूनों से भी बदतर बताया।

हैदराबाद के लोकसभा सांसद ओवैसी ने कहा, “जब संविधान की प्रस्तावना बनाई जा रही थी, तो उसकी शुरुआत ईश्वर के नाम से नहीं हुई। उस समय में और अब में अंतर देखिए। अब हम एक कानून ला रहे हैं (जो, ओवैसी के त्रुटिपूर्ण/असत्य दावे के मुताबिक, नागरिकता के लिए आस्था को पैमाना बनाता है)”।

इसमें उन्होंने जोड़ा, “सीएबी (नागरिकता बिल) और एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता का रजिस्टर) को जोड़ा जा रहा है, ताकि (भारतीय) मुस्लिमों का कोई देश ही न रहे। भारत का एक तिहाई हिस्सा चीन ने ले लिया है, हमने अक्साई चिन पर से दावा छोड़ दिया है, सरकार चीन से डरी हुई क्यों है?”

ओवैसी के इस कथन में कई गलतियाँ/असत्य हैं। उनके स्टाफ़ ने शायद उन्हें यह जानकारी नहीं दी कि अक्साई चिन (चीन द्वारा हड़पा गया लद्दाख का भारतीय भू-भाग) पूरे भारत का नहीं, केवल पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य के लद्दाख क्षेत्र का एक-तिहाई हिस्सा था। साथ ही उन्हें शायद इस बात की जानकारी नहीं है कि भारत ने अक्साई चिन पर दावा छोड़ा नहीं है। ऐसी खबरें मीडिया में अकसर आती ही रहतीं हैं कि भारत-चीन के बीच कोई समग्र वार्ता केवल अक्साई चिन मुद्दे के कारण हो नहीं पा रही है, या होकर सफ़ल नहीं हो पाई।

उन्होंने अपने शर्मनाक कृत्य को गाँधी जी के चोगे में छिपाने की कोशिश करते हुए उसकी तुलना गाँधी जी द्वारा तथाकथित रूप से दक्षिण अफ़्रीका में उन्हें जारी भेदभावकारी नागरिकता कार्ड फाड़ने से की। यह तुलना भी गलत थी, क्योंकि गाँधी के साथ व्यक्तिगत तौर पर उस नागरिकता के स्तर पर क़ानूनी भेदभाव हो रहा था, लेकिन ओवैसी इस देश में एक भी ऐसा कानून नहीं गिना सकते जो मुस्लिम के तौर पर उनको (ओवैसी को) किसी हिन्दू से एक भी पायदान नीचे रखे।

भारत ने किसी ‘समुदाय विशेष’ का ठेका नहीं ले रखा NDTV के सम्पादक महोदय! अल्पसंख्यक का रोना बंद करें

हर सवाल का जवाब दूँगा, भागना मत: शाह ने पेश किया CAB, ओवैसी ने कहा- इस हिटलर से बचाओ

शाह का गणित और फ्लोर मैनेजमेंट: राज्यसभा में ऐसे पास होगा नागरिकता संसोधन विधेयक!

अमेठी की मालविका में डूबे ₹366 करोड़, मनमोहन सिंह के जमाने में जान-बूझकर किया गया था घाटे का सौदा

कॉन्ग्रेस सरकार के जमानों में सरकारी धन का किस तरह दुरुपयोग किया जाता रहा है, इसका सटीक नमूना अमेठी के मालविका स्टील का अधिग्रहण है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इसके अधिग्रहण के बाद से सार्वजनिक क्षेत्र की जानी-मानी कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) को करीब 366 करोड़ का नुकसान हो चुका है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान मालविका स्टील के अधिग्रहण के लिए सेल को मजबूर किया गया था।

उल्लेखनीय है कि अमेठी गॉंधी परिवार का गढ़ रहा। जिस जमाने में यह अधिग्रहण हुआ उस समय कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गॉंधी यहॉं से सांसद हुआ करते थे। हालॉंकि पिछले आम चुनाव में उन्हें अपने गढ़ में ही भाजपा की स्मृति ईरानी से मुॅंह की खानी पड़ी थी। मालविका स्टील में निवेश के लिए सेल को यूपीए सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल (2009-2014) में राजी किया था। उसके बाद से सेल को हुए नुकसान का खुलासा कैग की हालिया रिपोर्ट से हुआ है।

संसद में पेश भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि सेल द्वारा उत्तर प्रदेश की कंपनी मालविका स्टील का अधिग्रहण बेकार निवेश साबित हुआ है। बीमार कंपनी में जान फूँकने के लिए पीएसयू द्वारा किया गया 366 करोड़ रुपए का निवेश बेकार रहा है।

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में प्रकाशित खबर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूपीए के कार्यकाल के दौरान जब ये फैसला हुआ था, उस समय इस पर कई लोगों ने सवाल उठाया था। साथ ही मालविका स्टील में सुधार लाने के लिए सेल का इस्तेमाल करने को राजनीतिक फैसला भी कहा गया था। लेकिन उस समय इस अधिग्रहण को ऐसे पेश किया गया जैसे इससे बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे। साथ ही इससे इलाके में औद्योगिक विकास का रास्ता भी तैयार होगा।

हालाँकि, सेल हमेशा से कहती रही कि मालविका स्टील का अधिग्रहण उसके लिए व्यावहारिक नहीं है। अधिग्रहण के वक्त ही बंद पड़ी मालविका स्टील कबाड़ का रूप ले चुकी थी। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार उस समय इस संपत्ति के इस्तेमाल का अध्ययन करने के लिए एक समिति भी गठित की गई थी। इस समिति ने 2015 में बताया था कि ज्यादातर उपकरणों का 17 साल से इस्तेमाल नहीं हुआ था और वे किसी काम के नहीं थे। बताया गया था कि इससे संयंत्र का रूप देना और उसे चालू करना संभव नहीं है।

कैग की रिपोर्ट में कहा गया कि सेल ने 2009 में 44.35 करोड़ रुपए में इस प्लांट का अधिग्रहण किया था। इसके बाद 94 करोड़ रुपए का निवेश इसमें और किया गया। अब तक सेल इस प्लांट पर करीब 366 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला है। दिलचस्प यह है कि 739.65 एकड़ में फैले मा​लविका स्टील का जमीन आज तक सेल के नाम पर ट्रांसफर नहीं हुआ है।

कर्नाटक उपचुनाव: नतीजों से राजदीप सरदेसाई आहत, कहा- जनता ने दलबदलुओं को कबूला

कर्नाटक विधानसभा उपचुनावों में भाजपा की जीत मीडिया गिरोह के जाने-माने नाम राजदीप सरदेसाई आहत हैं। परिणामों की तस्वीर साफ होते-होते उन्होंने एक ट्वीट किया है और बताया है कि उनके लिए यकीन कर पाना बेहद मुश्किल है कि भाजपा सत्ता में बनी रहेगी।

राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट कर कहा है कि कर्नाटक के संदेश स्पष्ट हैं। राज्य में भाजपा नंबर वन पार्टी है। कॉन्ग्रेस और जेडीएस अभी भी गुटबाजी में फॅंसी है। मतदाता खुशी-खुशी दलबदलुओं को स्वीकार कर रही है। उन्होंने पैसे और सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल से नतीजों पर असर डाले जाने की बात भी कही है।

येदियुरप्पा की अगुवाई वाली भाजपा सरकार का भविष्य उपचुनावों के नतीजे पर टिका था। 15 सीटों में से कम से 7 पर जीत बीजेपी के लिए जरूरी थी। लेकिन, वह 12 सीटें जीतने में कामयाब रही है। इससे आहत राजदीप ने जनता को ही इशारों इशारों में कसूरवार ठहराते हुए उसे ‘दलबदलुओं’ का समर्थक बता दिया।

करारी शिकस्त के बाद कॉन्ग्रेस में भी इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है। दिनेश गुंडू राव ने कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कॉन्ग्रेस विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दिया था।

सोनिया गाँधी को झटका, सिद्धारमैया ने सौंपा इस्तीफ़ा: कर्नाटक उप चुनाव में पार्टी की हुई छीछालेदर

कर्नाटक उपचुनाव पर कुमारस्वामी का बयान- हम दुःखी थे, लेकिन हमसे ज़्यादा दुःखी 3 और लोग थे

हम भी रेले गए थे, तुम भी रेले जाओगे: उद्धव ठाकरे को मिली कुमारस्वामी की चिट्ठी

BHU के छात्रों ने किया परीक्षा का बहिष्कार, प्रशासन ने अंतिम निर्णय फिरोज पर छोड़ा, आमरण अनशन की तैयारी

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में छात्रों को डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति के विरोध में प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करते हुए आज 33 दिन बीत चुके हैं। प्रशासन द्वारा फिरोज खान की SVDV में नियुक्ति के विरोध का हल ढूँढने के लिए माँगी गई गई 10 दिन की समय सीमा भी 30 नवंबर को ही समाप्त हो गई। निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने कोई हल न देकर आधे-अधूरे जवाब दिए, जिससे असंतुष्ट छात्र फिर से अपनी माँगों को लेकर पिछले 9 दिन से धरने पर हैं। छात्रों का कहना है कि हम यहाँ पढ़ने आए हैं आंदोलन करने नहीं लेकिन प्रशासन समाधान न ढूँढकर छात्रों के धैर्य की परीक्षा लेते हुए उन्हें कोई बड़ा कदम उठाने को मजबूर कर रहा है।

बता दें कि प्रशासन द्वारा इस पूरे प्रकरण में कोई निर्णय न लेने के कारण आज भारी संख्या में छात्र SVDV में धरनास्थल पर इकट्ठे हुए। छात्रों की माँगों और अनिश्चित कालीन धरना को देखते हुए आज एक बार फिर BHU प्रशासन की तरफ से BHU के चीफ प्राक्टर ओपी राय, संकाय पहुँचे थे। जहाँ पहले तो उन्होंने SVDV के छात्रों को मनाने की कोशिश की, लेकिन जब छात्र नहीं माने और अंतिम परिणाम तक अपना विरोध-प्रदर्शन जारी रखने का संकल्प दोहराया तो चीफ प्रॉक्टर प्रशासन द्वारा अब तक उठाए गए कदमों को बताने लगे जिस पर छात्रों ने हंगामा किया कि वास्तविक तौर पर अभी कुछ नहीं किया गया है।

प्रशासन की तरफ से छात्रों को समझाते चीफ प्रॉक्टर

इस पर चीफ प्रॉक्टर ने छात्रों से बात करते हुए कहा कि संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्त डॉ. फिरोज खान को आयुर्वेद और कला संकाय के संस्कृत विभाग में भी चुन लिया गया है और उन्हें ज्वाइन करने के लिए सोमवार को नियुक्ति पत्र मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि बीएचयू प्रशासन ने फिरोज खान को स्वतः संकाय चुनने की छूट दे दी है। वहीं, आंदोलन करने वाले छात्रों का कहना है कि अगर वो खुद चुनेगे तो इसमें प्रशासन ने क्या किया?

SVDV के छात्र शशिकांत मिश्र ने ऑपइंडिया को बताया, “महामना जी द्वारा स्थापित इस संकाय में महामना की इच्छा संकल्पना एवं विधि द्वारा स्थापित परंपरा के संरक्षण हेतु छात्र आज भी धरनारत हैं काशी हिंदू विश्वविद्यालय संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के छात्रों का संकाय में चल रहे आंदोलन का आज 33वां दिन है। BHU प्रशासन द्वारा लिया गया समय भी बहुत पहले ही पूरा हो चुका है, दिल्ली में कार्यकारिणी कमेटी की बैठक पूरी हो चुकी है, लिफाफा खुल चुका है उसके बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को गुमराह कर रहा है। पहले तो जिस दिन उनकी मौखिक परीक्षा हुई थी उसके दूसरे दिन ही ज्वाइन करा दिया गया रातो रात रजिस्ट्रार के ऑफिस में ही विरोध करने के बाद भी। परंतु अब उनको 1 महीने का टाइम दिया जा रहा है।, कहीं न कहीं ये आंदोलन को ख़त्म करने की साजिश के साथ, छात्रों के सब्र का इम्तिहान भी लिया जा रहा है।”

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे चक्रपाणि ओझा ने कहा, “छात्रों का एग्जाम है, लेकिन छात्रों के भविष्य की प्रशासन को कोई चिंता नहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह से आंदोलन को नजरअंदाज कर रही है अगर प्रशासन इस प्रकरण में कोई ठोस कदम नहीं उठाता है तो छात्र आमरण अनशन के लिए बाध्य होंगे जिसका जिम्मेदार विश्वविद्यालय प्रशासन खुद ही होगा।”

बता दें कि एसवीडीवी के बाद डॉ. फिरोज खान का आयुर्वेद और कला संकाय के संस्कृत भाषा विभाग में भी चयन हुआ है। अब वह संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में ही रहते है या नए विभागों में से किसी एक को चुनते हैं, यह फैसला उन्हें एक महीने के अंदर करना होगा। नियुक्ति पत्र मिलने के साथ ही एक महीने की डेडलाइन भी शुरू हो जाएगी।

इस बीच छात्रों ने संकाय में कल 10 दिसंबर से आयोजित होने वाली परीक्षा का बहिष्कार कर दिया है जिसे देखते हुए BHU प्रशासन ने संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में होने वाली सेमेस्टर एग्जाम को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। जिसके बाबत प्रशासन द्वारा नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है।

प्रशासन द्वारा जारी नोटिस

गौरतलब है कि एसवीडीवी में 5 नवंबर को साक्षात्कार के बाद छह को जारी परिणाम में डॉ. फिरोज खान को असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्त कर दिया गया था। 6 नवम्बर को उन्हें नियुक्ति पत्र मिला और 7 नवंबर को ही वह SVDV संकाय में ज्वाइन करने वाले थे, तभी छात्रों को किसी गैर हिन्दू के संकाय में नियुक्ति की खबर लगते है छात्रों ने फिरोज की SVDV में नियुक्ति के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

बता दें कि डॉ. फिरोज खान 29 नवंबर को आयुर्वेद संकाय के संहिता एवं संस्कृत विभाग और 4 दिसंबर को कला संकाय के संस्कृत विभाग में उन्होंने साक्षात्कार दिया और वह वहाँ भी चयनित हुए। जिसका लिफाफा दिल्ली में BHU के कार्यकारिणी की बैठक में खुला। हालाँकि, फिरोज को लेकर कार्यकारिणी में क्या बात हुई इसका खुलासा प्रशासन द्वारा नहीं किया गया है। आंदोलन की अगली कड़ी में छात्र बड़े पैमाने पर आमरण अनशन करने की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन के ढुलमुल रवैये के कारण छात्रों के बीच आक्रोश बढ़ता जा रहा।

ये भी पढ़ें:

न त्वहं कामये राज्यं: ‘गीता जयंती’ में नहीं पहुँचे BHU के कुलपति, परीक्षा का बहिष्कार करेंगे ‘धर्म संकाय’ के छात्र

BHU प्रशासन का सफ़ेद झूठ: क्या VC गैर-हिन्दुओं से जुड़े इन ‘संवैधानिक बिंदुओं’ का जवाब दे पाएँगे?

BHU में अगर गैर हिन्दू कुलपति नहीं हो सकता तो ‘धर्म विज्ञान संकाय’ में ही बदलाव क्यों: छात्रों ने पूछे कई गंभीर सवाल

फिरोज खान काण्ड पर तथाकथित बुद्धिजीवियों द्वारा उठाए गए हर प्रश्न का BHU के विद्वानों ने दिया उत्तर