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‘हम हाईकोर्ट जाएँगे’: जफरयाब जिलानी, साक्षी महाराज ने कहा- ‘आपलोग बाबर-बाबरी करते पागल हो जाओगे’

अयोध्या बाबरी विध्वंस मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने सभी 32 आरोपितों को रिहा कर दिया है, जिनमें 8 भाजपा नेता भी शामिल थे। कोर्ट ने माना कि ये साजिशन नहीं हुआ, पूर्व-नियोजित नहीं था – अचानक हुआ। इस मामले में मुस्लिम पक्ष की तरफ से पैरवी करने वाले अधिवक्ता जफरयाब जिलानी ने कहा है कि वो इसके खिलाफ हाईकोर्ट जाएँगे। उन्होंने कहा कि सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

जफरयाब जिलानी ने कहा कि उनलोगों ने मुस्लिम पक्ष की तरफ से अदालत में एप्लीकेशन डाली थी। साथ ही अयोध्या में कुछ गवाहों की तरफ से भी एप्लीकेशन डाली गई थी। जफरयाब जिलानी का दावा है कि ये ऐसे लोग थे, जिनके मकानों को उस समय जला डाला गया था। हालाँकि, इन एप्लिकेशनों को अदालत द्वारा रिजेक्ट कर दिया गया था। जफरयाब जिलानी ने कहा, “हम अपने-आप को इस मामले में विक्टिम समझते हैं।“

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय इस मामले में विक्टिम है, इसीलिए वो हाईकोर्ट जाएँगे। ‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, जब अधिकवक्ता जफरयाब जिलानी से पूछा गया कि हाईकोर्ट में पेटिशन कौन फ़ाइल करेगा, तो उन्होंने कहा कि ये सारे पहलू बाद में तय किए जाएँगे। हालाँकि, जब उनसे पूछा गया कि इस मामले में सभी आरोपित बरी कैसे हो गए, तो उन्होंने इसके जवाब में कुछ भी नहीं कहा।

उधर भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि ये स्थिति ‘खोदा पहाड़, निकली मरी हुई चुहिया’ वाली हो गई लेकिन यहाँ तो चुहिया तक नहीं निकली। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने भी झूठी एफआईआर करा के भाजपा और विहिप के नेताओं को फँसाया। जब उनसे पूछा गया कि बाबरी मस्जिद किस साजिश के तहत गिराया गया तो उन्होंने कहा, “कहाँ ढाँचा गिरा था? आपलोग बाबरी-बाबरी करते पागल हो जाओगे। वहाँ बाबरी मस्जिद नहीं, प्रभु श्रीराम का मंदिर था।“

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले में भी बाबरी पक्ष के मालिकाना हक़ के लिए जफरयाब जिलानी ही अधिवक्ता थे। राम मंदिर पर ऐतिहासिक फैसले के बाद उन्होंने शरीयत क़ानून का जिक्र करते हुए कहा था कि मस्जिद किसी को नहीं दिया जा सकता है। जिलानी ने तब कहा था कि मस्जिद की कोई क़ीमत नहीं होती और मस्जिद की मिलकियत अल्लाहताला के पास होती है। उन्होंने कहा था कि इसे न तो बेचा जा सकता है और न ही अदला-बदली की जा सकती है, इसके लिए 5 करोड़ या 500 करोड़ रुपए ही क्यों न मिले।

कोसी का ऊँट किस करवट बैठैगा इस बार? जहाँ से बनती-बिगड़ती है बिहार की सरकार… बाढ़ का मुद्दा किसके साथ?

बिहार को अगर #राजनीति_की_प्रयोगशाला कहते हैं, तो बिहार की राजनीति की दशा को कोसी के घटवार तय करते हैं। आजादी के बाद से ही बिहार का कोसी प्रमंडल तय करता रहा है कि सत्ता की बागडोर किसके हाथ में जाएगी। शुरुआती कॉन्ग्रेसी दौर में ये कोई बड़ा सवाल नहीं होता था, लेकिन 1990 आते-आते हवा बदली और जनता पार्टी ने भी बिहार की राजनीति में अपनी जगह बना ली थी।

तब से अब तक का दौर देखें तो ये भी कहा जा सकता है कि सहरसा सीट से जो दल जीता, बिहार में सरकार भी उसी दल ने बनाई। कोसी प्रमंडल को जिलों के हिसाब से देखें तो यहाँ सहरसा, सुपौल और मधेपुरा- 3 जिले होंगे। इनमें सहरसा में 4 (सहरसा, सिमरी बख्तियारपुर, महिषी और सोनवर्षा) सीटें, सुपौल में 5 (सुपौल, त्रिवेणीगंज, छातापुर, निर्मली, पिपरा) तथा मधेपुरा में 4 (मधेपुरा, सिंघेश्वर, आलमनगर, बिहारीगंज) विधानसभा सीटें होती हैं।

इस तरह कोसी प्रमंडल से कुल 13 विधायक विधानसभा पहुँचते हैं। राजनैतिक रूप से ये इलाका कितना सक्रिय है, इसका अनुमान लगाना हो तो सहरसा जिले की केवल सहरसा विधानसभा सीट से 2015 में 16 उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया, 2 की उम्मीदवारी रद्द हुई और लड़ने वाले 14 में से 12 की जमानत जब्त हो गई थी। गठबंधनों के लिहाज से राजग गठबंधन में भाजपा इस इलाके में कमजोर दिखती है तो महागठबंधन में कॉन्ग्रेस कमजोर पड़ जाती है।

बिहार में क्षेत्रीय दलों (जद-यू, राजद) और राष्ट्रीय दलों (भाजपा, कॉन्ग्रेस) का आपसी समीकरण पिछले 30 वर्षों में कैसा बना है, ये भी इससे नजर आ जाता है। एनडीए से 2010 तक भाजपा को सिर्फ 1 सीट मिलती थी, इस इलाके की बाकी सीटों पर जद-यू लड़ती थी। महागठबंधन की तरफ से सिमरी बख्तियारपुर से एक कॉन्ग्रेस के और बाकी सभी पर राजद के उम्मीदवार होते। अगर 2015 के चुनावी आँकड़ों को देखेंगे तो एक दो चीज़ें और भी देखने लायक होंगी।

राजनैतिक रूप से ये इलाका इतना सक्रिय है कि 13 सीटों पर लड़ने के लिए यहाँ कुल 176 उम्मीदवार तैयार थे। इनमें से महिलाओं की भगीदारी देखेंगे तो वो 8% से भी थोड़ी कम है। जनता कैसे सोचती है, इस विषय में समझना हो तो चुनाव लड़ने वालों और जमानत जब्त करवाने वालों की गिनती देखिए। नामांकन रद्द होने के कारण, कुछ उम्मीदवार लड़ नहीं पाईं , लेकिन जो चुनावी दंगल में उतरीं, उनमें से केवल 2 के बीच ही मुकाबला रहा।

शेष सभी जमानतें जब्त करवा बैठे! उपचुनाव (2019) में सिमरी बख्तियारपुर पर राजद का कब्ज़ा हुआ और छातापुर की सीट भाजपा के हिस्से में आ गई है। महत्व के हिसाब से देखें तो मधेपुरा सीट का नाम इसलिए जाना-पहचाना होता है क्योंकि मधेपुरा की सीट से लालू यादव और शरद यादव जैसे नेता उतरते रहे हैं। “रोटी के साथ राम” का नारा देने वाले और अयोध्या राम मंदिर का शिलान्यास करने वाले भाजपा के दलित नेता कामेश्वर चौपाल 2014 में सुपौल की लोकसभा सीट से लड़े थे।

एक दौर में पूरे देश की राजनीति में हलचल लाने के लिए जिस मंडल कमीशन को याद किया जाता है, उसके मंडल सहरसा के सबसे बड़े जमींदारों में से एक हैं। पिछले चुनावों में सबसे ज्यादा मतों से हारने वाले विधायक, सहरसा के सिटिंग भाजपा विधायक ही थे।

सहरसा और कोसी में जीत का मतलब पटना में सरकार क्यों होता है, ये देखना हो तो हमें थोड़ा सा पीछे चलना होगा। जब 1990 में यहाँ से सभी सीटें जनता दल ने जीती थीं, तो सरकार भी जनता दल की बनी थी। अगले चुनावों (1995) में एक सीट (सिमरी बख्तियारपुर) कॉन्ग्रेस ने जीत ली थी और बाकी सीटों पर फिर से जनता दल का कब्ज़ा रहा।

उसके बाद जब 2000 में राजद ने इस इलाके पर परचम फहराया तो फिर से राजद की (कॉन्ग्रेस समर्थन से) सरकार बन गई। इसके बाद से (2005 के और 2010 के चुनाव में) कोसी पर राजग गठबंधन (भाजपा और जद-यू) काबिज होने लगी। इस दौर में सरकार भी नीतीश कुमार ने बनाई।

पिछले (2015) चुनावों को देखेंगे तो इसमें एक छातापुर (सुपौल जिला) की सीट तो भाजपा जीत पाई मगर बाकी पर महागठबंधन का कब्ज़ा हो गया। इस बार भाजपा और जद(यू) साथ नहीं थे बल्कि नीतीश ने लालू से हाथ मिला लिया था। सरकार भी उन्हीं की बनी, मगर बाद में संभवतः नीतीश बाबू ने “अंतरात्मा की आवाज” सुन ली और वो फिर से भाजपा के साथ आ मिले।

कोसी क्षेत्र के चुनावों में मुकाबला सीधा दो दलों का ही होता है, इस वजह से भी राजनैतिक दलों के लिए यहाँ उम्मीदवार से लेकर रणनीति तय करने तक पर विशेष ध्यान रहता है। इस बार की चुनावी हलचल शुरू होते ही इस इलाके को 500 करोड़ से ऊपर का रेल पुल दिया गया है। भाजपा और जद-यू ने इसके साथ ही अपनी मंशा इस इलाके के लिए साफ़ कर दी है। लॉकडाउन की वजह से बाहर गए मजदूरों का एक बड़ा वर्ग इस बार घर पर ही होगा।

ध्यान रहे कि पलायन के मौसम में इस क्षेत्र से इतने मजदूर पंजाब-दिल्ली की ओर जाते हैं कि दिल्ली इत्यादि से, इस इलाके को जोड़ने वाले सहरसा जंक्शन का रेवेन्यु पटना से भी ज्यादा हो जाता है। पलायन की पीड़ा के अलावा जिस बाढ़ की वजह से हर वर्ष पलायन होता है, वो भी जनता का अघोषित मुद्दा होगा।

बाढ़ राहत के नाम पर लूट के अभियोग नेताओं-अधिकारियों पर लगातार लगते रहे हैं। अभी बिहार के कई जिले बाढ़ पीड़ित ही हैं, इसलिए भी बाढ़ से निपटने के लिए सरकारों ने क्या किया, इसका जवाब देना सत्ता पक्ष के लिए मुश्किल होगा। एंटी इनकमबेंसी फैक्टर के अलावा राजद के नेता इस बात को भी भुनाएँगे कि “सुशासन बाबू” ने उनके साथ धोखा किया है।

मतदान के वक्त तो राजद समर्थन के नाम पर वोट माँगे गए, मगर सरकार से राजद को हटाकर वो फिर भाजपा के साथ हो गए। ऐसे में सत्ता पक्ष के लिए इस बार कोसी प्रमंडल के चुनावों की डगर कठिन ही होगी। बाकी हलचल जब शुरू हो ही गई है तो देखते हैं, थोड़े ही दिन में निष्पक्ष और सापेक्ष दोनों ही पत्रकारों को समझ में आने तो लगेगा कि चुनावी ऊँट किस करवट बैठने वाला है।

मैं मुन्ना हूँ: कहानी उस बच्चे की जो कभी अंधेरी कोठरी में दाखिल होकर अपनी आँखें मूँद उजाले की कल्पना में लीन हो गया था

पुस्तक: मैं मुन्ना हूँ/Main Munna Hun
लेखक: श्री मनीष श्रीवास्तव

लेखक परिचय

‘मैं मुन्ना हूँ’ लेखक का दूसरा उपन्यास है, प्रथम उपन्यास का नाम ‘रूही – एक पहेली’ है। इनकी रचनाएँ ऑपइंडिया, मंडली, स्वराज्य, इण्डिक टुडे जैसे मंचों पर प्रकाशित होती रही हैं।ये मुख्य रूप से भावनात्मक कहानियाँ, यात्रा वृत्तांत और मार्मिक संस्मरण लिखते हैं। मनीष जी की रचनाएँ मानवीय संवेदनाओं को स्पर्श करती हुई पाठक के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती हैं।

पुस्तक परिचय

‘मैं मुन्ना हूँ’ बाल यौन शोषण जैसे गंभीर विषय पर लिखा गया उपन्यास है। लेखक विषय की गंभीरता के साथ न्याय करते हुए बीच-बीच में हल्के-फुल्के किस्सों के साथ ही प्रेम का एक शीतल झरना भी प्रस्फुटित करते हैं। वृंदावन वन की कुंज गलियों से होते हुए पशुपति नाथ जी की अविस्मरणीय यात्रा के साथ ही आगरा शहर का ताना-बाना आकर्षित करता है।

पुस्तक समीक्षा

उपन्यास के नायक मुन्ना की कहानी आरंभ होती है उसके श्रापित बचपन से जहाँ वह शारीरिक, मानसिक झंझावतों से जूझता किशोरवय के अल्हड़पन को पार कर प्रेम की अनकही गुत्थियों को सुलझाता जीवन यात्रा में आगे बढ़ता रहा।

नीरा दीदी, रमेश चाचा, वृंदा चाची, बिंदी, जया, ज़ुल्फी, बक्शी अंकल के हाथों की कठपुतली सा मुन्ना, बचपन को किसी अंधरे से कोने में दबा के आया है। किन्नू का सहारा मिलते ही वो मुरझाया सा फूल कुछ खिल सा गया। भैया के संग ने उसे जीवन की नई राहों पर पहुँचा दिया।

दोस्तों का चहेता, यारों का यार है हमारा मुन्ना। जुगाड़ु इतना कि पूछिए मत। आप चाहेंगे कि काश ये मेरी क्लास में होता तो हम भी मस्ती कर लेते। अम्मा की आंँखों का तारा, पिताजी का प्यारा भी बना परन्तु बहुत वक्त लगा दिया। ठाकुर और शेखू ने यारियांँ निभाने में कहीं कोई कसर नहीं छोड़ी है। दोस्त हो तो ऐसे!

मोरपंखी, मानसी, नैना और इन सबका एक मुन्ना….. प्रेम की कई अवस्थाएंँ परत दर परत खुलती जाती हैं और पाठक अचंभित सा, मुग्ध हो बस पढ़ता चला जाता है। केशव का आना एक बार फिर जीवन में बदलाव सा ला देता है और उसी कड़ी में अमोहा मांँ मुन्ना का हाथ थामे उसे वहांँ ले जाती हैं जहांँ वो अपने भीतर का सारा डर, सारी कड़वाहट, सारा संताप निकाल फेंकने को बेकल हो उठता है।

मुन्ना कहानी है, आपकी, मेरी और हम सभी में छुपे उस बच्चे की जो कभी ना कभी, किसी ना किसी रूप में अनजाने में ही सही, एक अंधेरी कोठरी में दाखिल हो गया और कस के आँखें मूँद उजाले की कल्पना में लीन हो गया।

उस पीड़ित बच्चे ने इधर उधर हाथ-पांँव मार खुद को उस डर से निकालने की अनवरत कोशिश जारी रखी। बालपन पर पड़े गहरे निशान भविष्य में किसी ना किसी रूप में सामने आकर व्यथित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते। कैसे मुन्ना एक विजेता बन सबके सामने आया? कैसे उसने अपनी यात्रा के हर पड़ाव पर कुछ नवेला सा किया?

जानने के लिए पढ़िए और ज़रूर पढ़िए – मैं मुन्ना हूँ

नोट: यह पुस्तक समीक्षा गरिमा द्वारा लिखी गई है

राजनीति से ग्रसित हो कॉन्ग्रेस ने करवाया था झूठा मुकदमा: बाबरी पर फैसले के बाद CM योगी का तीखा वार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज (सितंबर 30, 2020) बाबरी ध्वंस मामले पर फैसला आने के बाद जहाँ निर्णय का स्वागत किया वहीं तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार पर तीखा वार भी किया। उन्होंने सीबीआई की विशेष अदालत के निर्णय को सुनने के बाद कहा कि सत्यमेव जयते के अनुरूप सत्य की जीत हुई है।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित हो पूज्य संतों, भाजपा नेताओं, विहिप पदाधिकारियों, समाजसेवियों को झूठे मुकदमों में फँसाकर बदनाम किया गया। इस षड्यंत्र के लिए इन्हें जनता से माफी माँगनी चाहिए।”

उनके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा, “लखनऊ की विशेष अदालत द्वारा बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में श्री लालकृष्ण आडवाणी, श्री कल्याण सिंह, डा मुरली मनोहर जोशी, उमाजी समेत 32 लोगों के किसी भी षड्यंत्र में शामिल न होने के निर्णय का मैं स्वागत करता हूँ। इस निर्णय से यह साबित हुआ है कि देर से ही सही मगर न्याय की जीत हुई है।”

इसी तरह शिवराज सिंह चौहान ने भी इस निर्णय को सत्य की जीत बताया। उन्होंने कहा, “तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर जो हमारे संत, महात्मा, वरिष्ठ नेताओं पर झूठे आरोप लगाए थे, वो निर्मूल सिद्ध हुए हैं। विशेष अदालत के फैसले से दूध का दूध और पानी का पानी हो गया। हम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं!”

गौरतलब है कि इस पूरे मामले में 28 साल पहले मुकदमा दर्ज हुआ था। दिसंबर 6, 1992 को बाबरी मस्जिद ध्वंस मामले में फ़ैजाबाद पुलिस स्टेशन में दो अलग-अलग केस दर्ज किए थे। शाम के 5:15 बजे SHO प्रियंवदा नाथ शुक्ला ने एक एफआईआर दर्ज कराई थी।

इसमें डकैती, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालना, किसी धर्म के अपमान के उद्देश्य से धार्मिक स्थल को नुकसान पहुँचाना और दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने का मामला दर्ज किया गया था। इसके 10 मिनट बाद सब-इंस्पेक्टर गंगा कुमार तिवारी ने दूसरी एफआईआर दर्ज की थी।

इस मामले में कुल 49 अभियुक्त थे लेकिन उनमें से 17 की पहले ही मौत हो चुकी है। आरोपितों पर आपराधिक साजिश रचने से लेकर आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज हुए थे। ये मामला 28 वर्षों तक चला, जिनमें 351 गवाहों को पेश किया गया था।

‘अनुराग’ के साथ काम करने के लिए ‘फिजिकली फ्रेंडली’ होना जरूरी: पायल घोष ने शेयर किया 2018 में #MeToo पर किया गया पोस्ट

अभिनेत्री पायल घोष ने 2018 में किए गए कुछ पोस्टों के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं। इसमें उन्होंने 2015 में घटी घटना के बारे में बात की थी, जब निर्देशक अनुराग कश्यप ने उनका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की थी। हालाँकि, बाद में उनके मैनेजर ने ट्विट्स डिलीट कर दिए थे।

उन पोस्ट में, उसने खुले तौर पर उनका नाम नहीं लिया था, लेकिन ’प्रसिद्ध निर्देशक’ का इस्तेमाल किया। उन्होंने उन पोस्टों में आरोप लगाया था कि उनके साथ काम करने के लिए ‘फिजिकली फ्रेंडली’ होना जरूरी था। उनके साथ काम करने का ये मापदंड था।

ट्विटर पोस्ट में, उन्होंने तीन स्क्रीनशॉट शेयर किए और आरोप लगाया कि उनके मैनेजर और परिवार ने उन पोस्टों को डिलीट कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं कुछ और लोगों के लिए #metooindia का नाम बदलना सुनिश्चित करूँगी क्योंकि #metooindia नकली है और प्रभावशाली लोगों का गुलाम है।”

एक पोस्ट में, उन्होंने आरोप लगाया था कि ’प्रसिद्ध निर्देशक’ 600 से अधिक महिलाओं के साथ सोया था। एक अन्य पोस्ट में, उन्होंने कहा था, “मुझे बहुत सी बातें कहने का मन कर रहा है, लेकिन मेरा परिवार मुझे इस पर कुछ भी बात करने की अनुमति नहीं दे रहा है और मुझे सभी ट्वीट्स को हटाने के लिए कहा गया है।”

एक अन्य ट्वीट में, उन्होंने अपने मैनेजर और परिवार के बीच व्हाट्सएप चैट का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया, जिसमें वो सोशल मीडिया अकाउंट पर उनके पोस्ट को डिलीट करने पर चर्चा कर रहे थे। उन्होंने लिखा, “मेरे परिवार को मेरे मैनेजर का संदेश, क्योंकि वह बॉलीवुड के d *** e से डर गया था।”

उन्होंने इसके बारे में ट्वीट भी किया था, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी को टैग किया था और अनुराग कश्यप के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा था। बाद में उन्होंने मुंबई पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई। आरोपों के सत्य पाए जाने पर राष्ट्रीय महिला आयोग समर्थन में आया और कार्रवाई का वादा किया। वह महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से भी मिली थी। इस मुलाकात में उन्होंने अपने लिए न्याय की गुहार लगाई थी। 

बॉलीवुड अभिनेत्री पायल घोष की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मुंबई पुलिस ने फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप को समन जारी कर दिया है। अनुराग से पुलिस ने कल (1 अक्टूबर) 11 बजे से पहले थाने में हाजिर होने को कहा है।

गौरतलब है कि 19 सितंबर को अनुराग कश्यप पर अभिनेत्री ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। इसके बाद पिछले हफ्ते निर्माता के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ। केस में अनुराग पर दुष्कर्म, गलत इरादे से रोकने और महिलाओं का अपमान करने पर आईपीसी की यू /एस 376 (1), 354, 341, 342 सहित कई धाराएँ लगीं।

पायल घोष ने बीते दिनों मीडिया के साथ आपबीती साझा करते हुए बताया था कि अनुराग कश्यप ने उन्हें आपत्तिजनक वीड‍ियो दिखाए थे। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अनुराग के 200 से अधिक लड़कियों से संबंध थे और अब यह संख्या 500 से ज्यादा हो सकती है।

यादों के झरोखों से: जब कारसेवकों ने बाबरी की रक्षा के लिए बना डाली थी ‘बेंगलुरु मॉडल’ वाली ह्यूमन चेन

इस देश में धर्म निरपेक्षता और पंथ निरपेक्षता की चर्चा अक्सर होती आई है। लेकिन जब भी बाबरी की याद आती है तो मुझे उसके सामने बाकी सभी लोगों की धर्म निरपेक्षता बनावटी और आडंबर ही महसूस होती है। इसके पीछे कारण वो चंद जज्बाती लोग थे, जिन्होंने भविष्य में होने वाली बातों की परवाह ना करते हुए ‘ह्यूमन चेन’ यानी मानव श्रृंखला बनाकर बाबरी की सुरक्षा की पूरी तैयारी की थी। हालाँकि, इस चेन में कहाँ चूक हुई, वह राज भी बाबरी के साथ ही चला गया।

याद कीजिए दिसम्बर, 1992 का वो दिन, जब जो कुछ भी बिना किसी षड्यंत्र के हुआ, और उसके चारों ओर प्रहरी की तरह खड़े कारसेवकों की तस्वीरों को। ये वो लोग थे, जो बेंगलुरु में हुए दंगों में बनी ह्यूमन चेन से कई साल पहले ही ह्युमन चेन बना डाली थी।

चश्मदीदों का कहना है कि उनकी जुबान पर जो ‘एक धक्का और दो’ के नारे थे, उनका मतलब धक्का देकर इस ह्यूमन चेन की मजबूती का फैक्ट चेक करने से था। उन्होंने कहा कि इतिहास के पन्नों में आडवाणी जी को ‘ह्यूमन चेन का जनक’ कहा जाएगा।

इतिहास के पन्नों से मिली हुई एक दुर्लभ तस्वीर आप इस ट्वीट में देख सकते हैं –

कारसेवकों द्वारा यह ‘बेस्ट मानव श्रृंखला’ तब बना दी गई थी, जब मानव श्रृंखला बनाना ‘कूल’ नहीं हुआ करता था। और फिर याद कीजिए कि किस तरह कट्टरपंथी मजहबी भीड़ ने पूरे बेंगलुरु को जलाने के बाद एक मंदिर के बाहर अपने ही आतंक से मंदिर को बचाने के लिए ऐसी ही ह्यूमन चेन बनाकर सेक्युलर भारत की नींव रखी थी। लेकिन बाबरी वालों को संघी और बेंगलुरु वालों को सेक्युलर कहा जाता रहा।

पुरातत्वविदों का कहना है कि अयोध्या में एक ‘ह्यूमन चेन’ के अवशेष प्राप्त हुए हैं। खोजी पत्रकारों का दावा है कि किसी भी विरासत को बचाने के लिए बनाई गई यह अब तक की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा सेक्युलर मानव श्रृंखला है। यूनेस्को भी इस मानव श्रृंखला को बेस्ट मानव श्रृंखला घोषित करने पर विचार कर रहा है।

वहीं, कुछ गुप्त सूत्रों का कहना है कि इसी की तर्ज पर अभी एक और ह्युमन चेन काशी और मथुरा के लिए भी रवाना की जानी हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि यह ‘बेस्ट सेक्युलर मानव श्रृंखला’ भजन-कीर्तन के साथ ही सूफी संगीत और कव्वालियों का आयोजन कर पौराणिक दीवारों की सुरक्षा करेगी।

यह रिपोर्ट लिखे जाने तक मानव श्रृंखला के अवशेषों को निकालने का काम प्रगति पर था। और बाकि किसी भी सूचना के मिलते ही इस पर आगे लिखा जाएगा।

‘जय श्री राम’ के उद्घोष के साथ आडवाणी ने जताई खुशी, जोशी ने कहा- सभी को अब मंदिर निर्माण को लेकर उत्साहित होना चाहिए

अयोध्या के बाबरी ध्वंस मामले में फैसला सुनाते हुए लखनऊ की विशेष अदालत ने आज (सितंबर 30, 2020) सभी 32 आरोपितों को बरी कर दिया। इस पूरे मामले में श्री लाल कृष्ण आडवाणी का नाम प्रमुख लोगों में से था। आज उन्होंने कोर्ट का फैसला आते ही इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। साथ ही अपनी खुशी जाहिर की।

उन्होंने कहा, “स्पेशल कोर्ट का आज को जो निर्णय हुआ है वह काफी महत्वपूर्ण है। यह काफी खुशी का प्रसंग है। काफी दिनों बाद कोई खुशी का समाचार मिला है।”

उन्होंने आगे जय श्री राम का नारा लगाते हुए कहा, “फैसले ने मेरी निजी और बीजेपी की राम जन्मभूमि मूवमेंट भावना को भी सही साबित किया। मैं इस फैसले का तहेदिल से स्वागत करता हूँ।”

वहीं भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, “यह अदालत का ऐतिहासिक फैसला है। इससे साबित होता है कि अयोध्या में 6 दिसंबर की घटना के लिए कोई साजिश नहीं रची गई थी। हमारा कार्यक्रम और रैलियाँ किसी साजिश का हिस्सा नहीं थीं। हम खुश हैं, सभी को अब राम मंदिर निर्माण को लेकर उत्साहित होना चाहिए।”

गौरतलब है कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने बुधवार (सितम्बर 30, 2020) को फैसला सुनाया। 28 वर्षों में ये पहली बार हुआ, जब अयोध्या बाबरी मस्जिद ध्वंस मामले में किसी अदालत का फैसला सुनाया। हालाँकि, इस फैसले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

बता दें कि बाबरी घटना के बाद दिसंबर 6, 1992 को बाबरी मस्जिद ध्वंस मामले में फ़ैजाबाद पुलिस स्टेशन में दो अलग-अलग केस दर्ज किए गए थे। इस मामले में कुल 49 अभियुक्त थे लेकिन उनमें से 17 की पहले ही मौत हो चुकी है। आरोपितों पर आपराधिक साजिश रचने से लेकर आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज किए गए थे। ये मामला 28 वर्षों तक चला, जिनमें 351 गवाहों को पेश किया गया। अब तक 600 दस्तावेज पेश किए गए हैं। सीबीआई के स्पेशल जज सुरेंद्र कुमार यादव ने फैसला सुनाया। राज्यपाल का कार्यकाल पूरा करने के बाद कल्याण सिंह के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।

यह तो पहली झाँकी है, काशी-मथुरा बाकी है: बाबरी मस्जिद पर कोर्ट के फैसले के बाद आचार्य धर्मेंद्र

अयोध्या में 28 वर्ष पहले 6 दिसंबर, 1992 को विवादित बाबरी मस्जिद का ढाँचा ढहाए जाने के आपराधिक मामले में विशेष सीबीआई कोर्ट ने बुधवार (सितंबर 30, 2020) को अपना फैसला सुना दिया। स्पेशल जज सुरेंद्र कुमार यादव ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि बाबरी विध्वंस पूर्व नियोजित घटना नहीं थी, बल्कि आकस्मिक घटना थी।

सीबीआई ​मामले के सभी 32 आरोपितों के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने के मामले में पर्याप्त सबूत नहीं पेश कर सकी। इसलिए लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, आचार्य धर्मेंद्र और उमा भारती समेत सभी 32 आरोपितों को केस में बाइज्जत बरी किया जाता है। 

इस फैसले के बाद केस में आरोपित रहे आचार्य धर्मेंद्र ने कहा, “सत्य की जीत हुई है। इस पर मैं प्रणाम करूँगा। हम सब मिलकर जितने भी पुराने दाग हैं, उनको धोएँगे। यह तो पहली झाँकी है, काशी-मथुरा बाकी है। जहाँ-जहाँ भी दाग है, उनको धोकर साफ करेंगे।”

आचार्य धर्मेंद्र ने सुनवाई से पहले न्यूज चैनल आज तक से बात करते हुए कहा था, “मैं आरोपी नंबर वन हूँ। सजा से डरना क्या? जो किया सबके सामने चौड़े में किया। षड्यंत्र होता तो मैं सबके सामने बताता कि ये षड्यंत्र था? सौभाग्य से मौका मुझे मिला, लोग इस बात को भूल गए हैं, लेकिन मैं नहीं भूल सकता।”

बता दें कि आचार्य धर्मेन्द्र विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल में शामिल हैं। आचार्य महाराज का पूरा जीवन हिंदी, हिंदुत्व और हिन्दुस्थान के उत्कर्ष के लिए समर्पित है। उन्होंने अपने पिता महात्मा रामचन्द्र वीर महाराज के समान उन्होंने भी अपना सम्पूर्ण जीवन भारतमाता और उसकी संतानों की सेवा में, अनशनों, सत्याग्रहों, जेल यात्राओं, आंदोलनों एवं प्रवासों में संघर्षरत रहकर समर्पित किया है।

आठ वर्ष की आयु से आज तक आचार्य श्री के जीवन का प्रत्येक क्षण राष्ट्र और मानवता के अभ्युत्थान के लिए सतत तपस्या में व्यतीत हुआ है। उनकी वाणी अमोघ, लेखनी अत्यंत प्रखर और कर्म अदबुध हैं। आचार्य धर्मेन्द्र जी अपनी पैनी भाषण कला और हाजिर जवाबी के लिए जाने जाते है. वे एक ओजस्वी एवं पटु वक्ता एवं हिन्दी कवि भी हैं।

‘हिन्दू राष्ट्र में आपका स्वागत है, बाबरी मस्जिद खुद ही गिर गया था’: कोर्ट के फैसले के बाद लिबरलों का जलना जारी

सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने अयोध्या बाबरी विध्वंस मामले में फैसला सुनाते हुए सभी 32 आरोपितों को बरी कर दिया और साथ ही कहा कि ये घटना पूर्व-नियोजित नहीं थी, अचानक घट गई – इसके बाद लिबरल गैंग का ‘मेल्टडाउन’ का दौर चालू हो गया है। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और महंत नृत्यगोपालदास सहित सभी आरोपित बरी कर दिए गए। कोर्ट ने कहा कि संगठन ने रोकने की कोशिश की लेकिन ये घटना अचानक घट गई।

इधर इस मामले में फैसला आने के साथ ही सोशल मीडिया पर लिबरल गिरोह का रोना चालू हो गया है। राम मंदिर भूमिपूजन से बौखलाए लिबरल इस ताक में थे कि अयोध्या बाबरी ध्वंस मामले में भाजपा नेताओं को जेल होगी लेकिन अफ़सोस कि कोर्ट सोशल मीडिया से नहीं, गवाहों-सबूतों और संविधान के हिसाब से चलता है। यहाँ हम आपके समक्ष लिबरल गैंग के क्रंदन भरे शब्द पेश कर रहे हैं, आनंद लीजिए।

पेश है बॉलीवुड की ‘क्वीन’ और सबसे ‘बड़ी स्टार’ स्वरा भास्कर का ट्वीट:

पत्रकार अभिलाष मोहनन ने तंज कसते हुए लिखा, “बाबरी मस्जिद को किसी ने भी नहीं ध्वस्त किया। लॉन्ग लिव इंडियन जुडिशरी।” खुद को समुदाय विशेष का अख़बार बताने वाले ‘मिल्ली गैजेट’ ने लिखा, “इंसाफ हो गया ना भाई?” PFI महसचिव अनीश अहमद ने लिखा, ‘सभी आरोपितों को बरी कर कोर्ट ने साबित कर दिया है कि किसी ने भी बाबरी को ध्वस्त नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट ने न्याय को ध्वस्त किया तो सीबीआई कोर्ट ने इसे दफ़न कर डाला।‘

बता दें कि आज ये फैसला सुनाने के साथ ही जज सुरेंद्र यादव रिटायर हो रहे हैं। कोर्ट की कार्यवाही निर्बाध चलती रहे और मामला न लटके, इसीलिए उन्हें रिटायर होने के बावजूद एक्सटेंशन दिया गया था। प्रोपेगंडा पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी ने पूछा कि दंगों में 1800 लोगों को किसे मारा? उन्होंने पूछा कि भारत की आत्मा के साथ अपराध करने के लिए कौन जिम्मेदार है? उन्होंने भी कोर्ट पे सवाल उठाए।

पत्रकार हरिंदर ने दावा किया कि पहले तो सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के बाबरी विध्वंस को ‘आपराधिक कृत्य’ कहा था लेकिन अब 28 वर्षों बाद ‘अचानक हुई घटना’ बताया जा रहा है। उन्होंने ये नहीं बताया था कि सुप्रीम कोर्ट ने ये नहीं कहा था कि ‘इन्हीं आरोपितों ने बाबरी को ध्वस्त किया’। वहीं प्रोपगंडा पत्रकार राना अयूब ने लिखा, “Yee..न्याय..भारत के स्टाइल में“। साथ ही उन्होंने लिखा कि हम साँस भी नहीं ले सकते।

इसी तरह ‘एडिटरजी’ के संस्थापक विक्रम चंद्रा ने दावा किया कि सभी आरोपितों को रिहा कर दिया गया, जबकि कइयों के ऊपर लगे आरोप दूसरों से ज्यादा गंभीर थे। उन्होंने दावा किया कि कुछ ने तो अपने किरदार के बारे में सार्वजनिक रूप से बताया भी था।वहीं ‘द हिन्दू’ की पत्रकार सुहासिनी हैदर ने लिखा, “किसी ने कुछ भी नहीं किया, ये बस हो जाता है।” वकील प्रशांत भूषण ने लिखा, “वहाँ कोई मस्जिद ही नहीं था, ये नए भारत का न्याय है।”

लिबरल क्रन्दन के क्रम में मराठी पत्रकार निखिल वागले ने दावा किया कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विध्वंस भारतीय संविधान पर सबसे गंभीर हमला था। उन्होंने दावा किया कि अगर हम दोषियों को सज़ा नहीं दे सकते तो हमें खुद को सेक्युलर राष्ट्र बताना बंद कर देना चाहिए। उन्होंने लिखा, “हिन्दू राष्ट्र में आपका स्वागत है!” उन्होंने कहा कि ये किसी भी अपराध के लिए ‘ओपन लाइसेंस’ की तरह है।

वहीं खुद को एक्टिविस्ट बताने वाले तीस्ता सेतलवाड़ ने लिखा, ‘RIP भारतीय संविधान!‘ साथ ही उन्होंने लिखा कि ये सब पोस्ट-ट्रुथ है कि ये नेता लोग भीड़ को भड़का नहीं रहे थे बल्कि उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे थे।

इधर देश के क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भी पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के घर पर पहुँचे और उन्हें बधाई दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी ट्वीट कर इस फैसले पर ख़ुशी जताई।

1 अक्टूबर को 11 बजे के पहले थाने में हाजिर हो: अनुराग कश्यप को अभिनेत्री से रेप के मामले में मुंबई पुलिस का समन

बॉलीवुड अभिनेत्री पायल घोष की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए मुंबई पुलिस ने फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप को समन जारी कर दिया है। अनुराग से पुलिस ने कल (1 अक्टूबर) 11 बजे से पहले थाने में हाजिर होने को कहा है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, मुंबई पुलिस ने फिल्ममेकर को कल सुबह 11 बजे वर्सोवा पुलिस स्टेशन पूछताछ के लिए बुलाया है। इस कार्रवाई से एक दिन पहले पायल घोष ने केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के साथ महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में उन्होंने अपने लिए न्याय की गुहार लगाई थी।

रामदास अठावले ने पायल घोष से वादा किया था कि वह उनकी लड़ाई में उनका साथ देंगे। उन्होंने घोष के समर्थन में धरना देने की बात तक कही थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा था, “मुंबई पुलिस अनुराग कश्यप को गिरफ्तार करे, नहीं तो हम जल्द धरना पर बैठेंगे।”

वहीं, घोष ने भी चेतावनी देते हुए कहा था अगर उन्हें न्याय नहीं मिलता है तो वह भूख हड़ताल पर बैठेंगी। उन्होंने पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अभी तक निर्देशक की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है। 

गौरतलब है कि 19 सितंबर को अनुराग कश्यप पर अभिनेत्री ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। इसके बाद पिछले हफ्ते निर्माता के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ। केस में अनुराग पर दुष्कर्म, गलत इरादे से रोकने और महिलाओं का अपमान करने पर आईपीसी की यू /एस 376 (1), 354, 341, 342 सहित कई धाराएँ लगीं।

इसके बाद अभिनेत्री ने हाल ही में राज्यपाल से मिलने के बाद अपने लिए Y श्रेणी की सुरक्षा की माँग की थी। मीडिया से बातचीत में पायल ने कहा था, “उनके सामने हमने अपनी बात रखी है और उनके रिकॉर्ड के लिए कंप्लेंट पेपर भी उनको दिया है। हमने उनसे Y सिक्योरिटी की माँग की है और उन्होंने बहुत अच्छे से हमारे साथ कॉपरेट किया। हमें अच्छा रिस्पॉन्स उनसे मिला है।”

बता दें कि एक ओर जहाँ लगातार अनुराग कश्यप के ख़िलाफ़ दर्ज हुआ मामला गर्माता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर फिल्ममेकर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा था, “क्या बात है, इतना समय ले लिया मुझे चुप करवाने की कोशिश में। चलो कोई नहीं। मुझे चुप कराते-कराते इतना झूठ बोल गए कि औरत होते हुए दूसरी औरतों को भी संग घसीट लिया। थोड़ी तो मर्यादा रखिए मैडम। बस यही कहूँगा कि जो भी आरोप हैं आपके सब बेबुनियाद हैं। बाक़ी मुझपर आरोप लगाते-लगाते, मेरे कलाकारों और बच्चन परिवार को संग में घसीटना तो मतलब नहले पे चौका भी नहीं मार पाए।”

अनुराग ने यह भी कहा था, “मैडम दो शादियाँ की हैं, अगर वे जुर्म हैं तो मंज़ूर है और बहुत प्रेम किया है, वह भी क़बूलता हूँ। चाहे मेरी पहली पत्नी हो, या दूसरी पत्नी हो या कोई भी प्रेमिका या वे बहुत सारी अभिनेत्रियाँ जिनके साथ मैंने काम किया है, या वे पूरी लड़कियों और औरतों की टीम जो हमेशा मेरे साथ काम करती आईं हैं, या वे सारी औरतें जिनसे मैं मिला बस, अकेले में या जनता के बीच मैं इस तरह का व्यवहार न तो कभी करता हूँ न तो कभी किसी क़ीमत पर बर्दाश्त करता हूँ। बाक़ी जो भी होता है देखते हैं। आपके वीडियो में ही दिख जाता है कितना सच है कितना नहीं, बाक़ी आपको बस दुआ और प्यार। आपकी अंग्रेज़ी का जवाब हिंदी में देने के लिए माफ़ी।”