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जॉर्ज सोरोस की फंडिंग, पक्षपाती पैनल और ‘हिंदुत्व’ विरोध का पूरा अध्याय: लीसेस्टर हिंसा में हिंदुओं को दोषी ठहराने वाली SOAS रिपोर्ट की खुली पोल, हिंदू संगठनों ने बताया भ्रामक

लंदन के लीसेस्टर (Leicester) में साल 2022 में हुई हिंसा को लेकर हाल ही में SOAS (स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज) यूनिवर्सिटी द्वारा जारी एक रिपोर्ट ‘बेटर टुगेदर’ (Better Together) ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। रिपोर्ट में 2022 की हिंसा के लिए हिंदुओं और ‘हिंदुत्व’ को जिम्मेदार ठहराया गया है, जबकि जमीनी हकीकत और पुलिस के रिकॉर्ड इसके बिल्कुल उलट हैं। इस रिपोर्ट को लीसेस्टर के हिंदू समुदाय और ‘हिंदू कम्युनिटी ऑर्गनाइजेशन ग्रुप’ (HCOG) ने सिरे से खारिज कर दिया है।

50,000 से अधिक हिंदुओं का प्रतिनिधित्व करने वाले इस समूह HCOG का आरोप है कि यह रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं है, बल्कि हिंदुओं को निशाना बनाने के उद्देश्य से लिखी गई है। जमीनी हकीकत यह थी कि लीसेस्टर में हिंदुओं के घरों, मंदिरों और व्यक्तियों पर कट्टरपंथी भीड़ ने सुनियोजित हमले किए थे, लेकिन इस रिपोर्ट ने सारा दोष हिंदू पीड़ितों पर ही मढ़ दिया है।

जॉर्ज सोरोस की फंडिंग और पक्षपाती पैनल: निष्पक्षता पर बड़ा सवाल

हिंदू संगठनों ने सबसे बड़ा हमला इस रिपोर्ट की फंडिंग और इसकी संरचना पर किया है। रिपोर्ट खुद स्वीकार करती है कि इसे ‘ओपन सोसाइटी फाउंडेशंस’ से फंडिंग मिली है। HCOG के अनुसार, इस जाँच के लिए £620,000 (लगभग 6.5 करोड़ रुपए) का अनुदान जॉर्ज सोरोस की संस्था से आया है।

जॉर्ज सोरोस को दुनिया भर में भारत और हिंदू विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। जब पैसा ही ऐसे स्रोत से आए, तो जाँच की निष्पक्षता का दावा करना अपने आप में हास्यास्पद लगता है। लीसेस्टर के हिंदू समुदाय ने इसीलिए इस ‘कमीशन’ का बहिष्कार किया था, क्योंकि इसका नतीजा पहले से तय लग रहा था।

इसके अलावा, इस जाँच के लिए जो पैनल बनाया गया, उसमें शामिल लोगों का ट्रैक रिकॉर्ड हिंदू-विरोधी गतिविधियों से भरा रहा है। सुरेश ग्रोवर और चेतन भट्ट जैसे लोग इस पैनल का हिस्सा थे, जिन्होंने जाँच शुरू होने से पहले ही सार्वजनिक तौर पर हिंदुओं को दोषी ठहरा दिया था।

सुरेश ग्रोवर ने तो हिंदू धर्म के पवित्र प्रतीक ‘ॐ’ (Aum) को नाजी चिन्ह के साथ जोड़कर अपमानित करने का प्रयास किया था। वहीं पैनल के प्रमुख जुआन मेंडेज हमेशा भारत के खिलाफ खड़े रहे हैं, लेकिन पड़ोसी देशों में हिंदुओं पर होने वाले जुल्मों पर कभी कुछ नहीं बोलते। ऐसे पूर्वाग्रही लोगों द्वारा तैयार रिपोर्ट कभी भी सच नहीं दिखा सकती।

हिंदू घरों और मंदिरों पर हमले को किया गया नजरअंदाज

SOAS की रिपोर्ट ने सबसे बड़ी चालाकी यह की है कि उसने हिंदुओं पर हुए सुनियोजित हमलों को बहुत छोटा करके दिखाया है या पूरी तरह दबा दिया है। सितंबर 2022 में लगातार तीन रातों तक लीसेस्टर में हिंदू घरों, कारों और व्यक्तियों को निशाना बनाया गया था। एक हिंदू मंदिर के ऊपर से झंडा उतारने और मंदिर में तोड़फोड़ की घटना पूरी दुनिया ने देखी थी।

हिंदू युवाओं को सड़कों पर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। लेकिन रिपोर्ट इन घटनाओं पर चुप्पी साधे हुए है और सारा दोष ‘हिंदुत्व’ के मत्थे मढ़ रही है। इसमें एक पूरा चैप्टर हिंदुत्व पर लिखा गया है ताकि यह साबित किया जा सके कि हिंदू ही आक्रामक थे।

यह रिपोर्ट उन दावों को भी हवा देती है कि लंदन से बसों में भर-भर के हिंदू लीसेस्टर आए थे। जबकि कोच ऑपरेटर ने अपने जीपीएस डेटा के साथ साबित कर दिया था कि उसकी कोई भी बस उस सप्ताहांत लीसेस्टर नहीं गई थी। रिपोर्ट ने कट्टरपंथी भीड़ द्वारा फैलाई गई हिंसा को तो ‘प्रतिक्रिया’ बताया, लेकिन हिंदुओं के शांतिपूर्ण बचाव को ‘चरमपंथ’ का नाम दे दिया। यह दोहरा मापदंड ही इस रिपोर्ट की असलियत बताता है।

झूठे दावों और मजीद फ्रीमैन का प्रोपेगेंडा

2022 की लीसेस्टर हिंसा के दौरान और उसके बाद हिंदू समुदाय को बदनाम करने के लिए कई तरह की झूठी कहानियाँ गढ़ी गईं और कैसे कट्टरपंथी तत्वों ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर हिंदुओं को अपराधी साबित करने की कोशिश की।

एक घटना क्रिकेट मैच के बाद की बताई गई, जिसमें दावा किया गया कि हिंदू क्रिकेट प्रेमियों ने मुसलमानों पर हमला किया। जबकि हकीकत यह थी कि वह एक निजी झगड़ा था जो शराब के नशे में एक भारतीय मूल के व्यक्ति और क्रिकेट प्रशंसकों के बीच हुआ था, जिसमें धर्म का कोई लेना-देना नहीं था और किसी भी मुसलमान को निशाना नहीं बनाया गया था। इसी तरह मजीद फ्रीमैन जैसे कट्टरपंथियों ने सोशल मीडिया पर चिल्ला-चिल्लाकर कहा कि ‘मुसलमानों को मौत’ के नारे लगाए गए। पुलिस ने पूरी जाँच के बाद स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी नारे का कोई सबूत नहीं मिला, फिर भी इस रिपोर्ट ने इन अफवाहों को तवज्जो दी।

एक और भयानक झूठ यह फैलाया गया कि तीन भारतीय पुरुषों ने एक 15 साल की मुस्लिम लड़की के अपहरण की कोशिश की। इस खबर ने शहर में भारी तनाव पैदा कर दिया था। पुलिस ने जब इसकी तहकीकात की, तो पता चला कि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं थी। जिस हिंदू युवक पर आरोप लगाया गया था, वह तो उस समय ब्रिटेन में था भी नहीं। इसी तरह, मस्जिदों पर हमले की खबरें फैलाई गईं, जिन्हें पुलिस ने मौके पर जाकर गलत पाया। इन सभी घटनाओं को जानबूझकर इसलिए हवा दी गई ताकि दुनिया की नजरों में हिंदुओं को ‘आक्रामक’ दिखाया जा सके और कट्टरपंथियों द्वारा की गई वास्तविक हिंसा को छुपाया जा सके। लेकिन SOAS की रिपोर्ट इन पुख्ता सबूतों को नजरअंदाज कर वही पुराना और फर्जी नैरेटिव दोबारा जिंदा करने की कोशिश कर रही है।

सुनियोजित प्रोपेगेंडा और फर्जी दावों की लंबी फेहरिस्त

हिंदुओं के खिलाफ केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर दुष्प्रचार किया गया। एक झूठा दावा यह भी किया गया कि लंदन से बसों में भरकर हिंदू गुंडे लीसेस्टर आ रहे हैं। इस खबर के कारण कई हिंदू बस ऑपरेटरों को धमकियाँ तक मिलीं। बाद में जब बस ऑपरेटरों ने अपने जीपीएस डेटा और रिकॉर्ड पेश किए, तो साबित हो गया कि उस दौरान उनकी कोई भी बस लीसेस्टर नहीं गई थी। यह केवल हिंदुओं के प्रति नफरत भड़काने की एक चाल थी।

इसके अलावा, एक ट्रैफिक वार्डन ने दावा किया कि ड्यूटी के दौरान हिंदुओं ने उस पर हमला किया। पुलिस जाँच में यह मामला पूरी तरह फर्जी निकला और वार्डन ने खुद स्वीकार किया कि उसने गलत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मजीद फ्रीमैन जैसे कट्टरपंथी लोगों ने यह तक दावा किया कि हिंदुओं ने कई मुसलमानों को चाकू मार दिया है। सच्चाई यह थी कि उस रात चाकूबाजी की कोई घटना हुई ही नहीं थी और न ही किसी हिंदू के पास हथियार होने का कोई सबूत मिला। फिर भी SOAS की रिपोर्ट ने इन पुलिस द्वारा खारिज किए गए दावों को ‘हिंदू उग्रवाद’ के अध्याय में जगह दी, जो यह बताता है कि यह रिपोर्ट केवल हिंदुओं को बदनाम करने के लिए लिखी गई थी।

मंदिरों पर हमले और असली हिंसा को दबाने का प्रयास

2022 की हिंसा का सबसे काला पक्ष वह था जिसे इस रिपोर्ट ने पूरी तरह अनदेखा कर दिया। लीसेस्टर में लगातार तीन रातों तक हिंदू घरों, कारों और मंदिरों को निशाना बनाया गया। कट्टरपंथी भीड़ ने एक हिंदू मंदिर की दीवार फाँदकर उसके ऊपर से पवित्र ध्वज को नीचे गिरा दिया और तोड़फोड़ की। हिंदू युवाओं को उनके धर्म के कारण सड़कों पर पीटा गया। लेकिन SOAS की इस रिपोर्ट में इन घटनाओं को बहुत छोटा करके दिखाया गया है।

हैरानी की बात यह है कि रिपोर्ट ने सारा दोष ‘हिंदुत्व’ के मत्थे मढ़ने के लिए एक अलग अध्याय समर्पित कर दिया। रिपोर्ट में हिंदुत्व को राजनीतिक इस्लामवाद के बराबर खतरनाक बताने की सिफारिश की गई है। यह उन हिंदुओं के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है जो खुद हिंसा के शिकार हुए थे। ब्रिटिश सरकार की आधिकारिक जाँच और हेनरी जैक्सन सोसाइटी की रिपोर्ट में हिंदुओं के खिलाफ हुए इन सुनियोजित हमलों का जिक्र है, लेकिन SOAS की रिपोर्ट ने केवल एकतरफा नैरेटिव को बढ़ावा दिया है।

सच को दबाने की अंतरराष्ट्रीय साजिश

SOAS की यह रिपोर्ट केवल एक अकादमिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह हिंदुओं को वैश्विक स्तर पर अपराधी बनाने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। जब ब्रिटिश सरकार खुद एक आधिकारिक जाँच कर रही थी, तब SOAS ने जॉर्ज सोरोस के पैसों पर अपनी अलग जाँच क्यों बिठाई? इसका सीधा जवाब है- सरकारी जाँच में तथ्यों और पुलिस रिकॉर्ड को देखा जाता है, जबकि इस प्राइवेट जाँच का मकसद केवल ‘हिंदू फोबिया’ को बढ़ावा देना था।

मजीद फ्रीमैन जैसे कट्टरपंथियों को ‘शांतिदूत’ की तरह पेश करने की कोशिश की गई है, असल में वही लोग थे जिन्होंने आग में घी डालने का काम किया था। लीसेस्टर की पुलिस ने बार-बार इन अफवाहों का खंडन किया, लेकिन SOAS ने पुलिस की बातों से ज्यादा महत्व कट्टरपंथी दावों को दिया। यह रिपोर्ट हिंदुओं के मानवाधिकारों का हनन है क्योंकि यह असली पीड़ितों को ही कटघरे में खड़ा करती है। हिंदू समुदाय ने इसे खारिज करके यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अब अपनी बदनामी को और बर्दाश्त नहीं करेंगे।

किसी तो दिए ड्रग्स तो किसी का वर्षों तक किया रेप: दर्जनों पीड़िताओं ने बताया कैसे फँसाते हैं ‘लव जिहादी’, कहा- द केरला स्टोरी-2 जैसी फिल्में हैं जरूरी

‘लव जिहाद’ सिर्फ शब्द नहीं बल्कि एक लड़की की जिंदगी के जहन्नुम बनने का नाम है। इसका असर न सिर्फ लड़की पर पड़ता है, बल्कि पूरा परिवार इसकी जद में होता है। ‘लव जिहाद’ के बेस पर बनी फिल्म द केरला स्टोरी 2- गोज बियॉन्ड’ 27 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इसमें दिखाई गई तीन ‘लव जिहाद’ की घटनाओं को लेकर जब सवाल उठाए गए तो फिल्म प्रोड्यूसर ने इसको लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया और इसमें ऐसी पीड़िताओं को मिलवाया, जिसकी आपबीती हर दिल को झकझोरने के लिए काफी है।

योजनाबद्ध तरीके से लड़कियों को फँसाना

‘लव जिहादी’ पहले लड़की को टारगेट करते हैं। ज्यादातर मामलों में ‘लव जिहादी’ अपना नाम बदलते हैं और हिन्दू लड़कियों के साथ प्यार का इजहार करते हैं। उन्हें प्रेम जाल में फँसा कर उसे पहले परिवार से दूर करते हैं। उसपर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया जाता है। मजबूरी में अगर लड़की ने हाँ कह दिया, तो नाम बदलकर उसका धर्मांतरण कर निकाह कर लेते हैं। उसे बीफ खाने पर मजबूर किया जाता है और उसे इस तरह तोड़ दिया जाता है कि मजबूर लड़की अपनी आवाज नहीं उठा सके।

भावनात्मक रूप से टूटने पर सहारा देने का नाटक

लड़कियों को तब फँसाया जाता है, जब वह भावनात्मक रूप से कमजोर हो। ‘लव जिहाद’ की पीड़िता नेशनल शूटर तारा सहदेव का कहना है कि उनकी माँ की मौत हो जाने और पिता के बीमार होने के वक्त उसे शादी का ऑफर आया। पिता और भाई ने पता लगाया और पूरी जाँच परख कर उसकी शादी पुलिस अधिकारी रंजीत कुमार से हुई। लेकिन शादी के अगले दिन ही उसे घर में भगवान की फोटो की जगह मक्का-मदीना की तस्वीर लगी मिली।

रंजीत कुमार बना नकीबुल हसन का असली चेहरा सामने आ गया। सवाल पूछने पर उसकी अम्मी ने थप्पड़ जड़ दिए। उसके घर पर काजी और कई सरकारी मुस्लिम अधिकारी आ गए। वह जज भी आया जिसने उसके रिश्ते की बात की थी। ऐसी परिस्थिति में उसे निकाह करने के लिए सिर्फ तीन बार ‘कबूल है’ कहने के लिए दबाव बनाया गया। लेकिन उसे अपना नाम बदलना गवारा नहीं था, इसलिए तारा सहदेव से शाहा परवीन बनने से इनकार करते हुए निकाहनामा पर दस्तखत करने के इनकार कर दिया और उसने हर तरह से लड़ाई लड़ी। 40 दिन दरिंदों के चंगुल से छूटने से लेकर 9 साल तक न्याय पाने की लड़ाई।

लड़कियों को किस तरह से फँसाया जाता है, इसे समझने के लिए तारा सहदेव की आपबीती सुन कर समझा जा सकता है। फिल्म की स्टोरी को लेकर कई जगहों पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। मीडिया का एक वर्ग प्रोपेगेंडा बता रहा है, उन्हें ऐसी महिलाओं से ‘सच’ जानना चाहिए।

डबल आइडेंटिटी लेकर समाज में हिन्दू लड़कियों को फँसाने का जाल देशभर में चल रहा है। यही वजह है कि फिल्म ‘द केरला स्टोरी 2- गोज बियॉन्ड’ के मंच पर आनेवाली पीड़ित हिन्दू महिलाएँ बंगाल, बिहार, जम्मू, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड, दिल्ली-एनसीआर, यूपी हर जगह की थी। इन ‘लव जिहाद’ की 49 पीड़िताओं और उनके परिवार के सदस्य में मंच पर आए और अपनी बात रखी।

‘लव जिहाद’ पीड़िताओं ने क्या-क्या कहा

सनातन धर्म को समझाना- पीड़िताओं का मानना है कि सिर्फ बेटी को पढाओ बोलकर स्कूली शिक्षा देने से कुछ नहीं होगा। बचपन से ही उसे सनातन धर्म को समझाना जरूरी है। बेटी को एजुकेशन देकर आर्थिक तौर पर हम खड़े कर रहे हैं, उन्हें सामाजिक तौर पर खड़ा करने के लिए साजिशों से आगाह करना बेहद जरूरी है। समाज में किस तरह से लड़कियों को टारगेट किया जाता है, क्यों किया जाता है, किस तरह से दोस्ती के नाम पर धोखा, प्यार के नाम पर साजिश और शादी के नाम पर निकाह करने के लिए मजबूर करना, चाहे रेप कर उसका वीडियो बना ब्लैकमेल किया जाए या सहमति से संबंध बना उसे धर्मपरिवर्तन के लिए मजबूर किया जाए।

पीड़िता इन लव जिहादियों को आतंकवादियों से कम नहीं मानती। इनका कहना है कि कई फोन, सिम्स का इस्तेमाल कर लड़कियों को फँसाना, एक साथ कई लड़कियों को इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर करना और निकाह कर फिर ‘नए शिकार’ की तलाश में लग जाना।

मंच पर मौजूद एक और पीड़िता गौरी सैला का कहना है कि 16 साल की उम्र में उनके साथ ‘लव जिहाद’ हुआ। अब वह लॉ की छात्रा हैं। उनसे प्रेम करने का नाटक किया गया। नाम बदल कर दोस्ती की थी। उसे अकेला मजार पर ले जाकर वशीकरण किया, एक ग्लास कड़वा पानी पिलाया।

ड्रग्स दिए गए और नशे की हालत में ब्रांदा कोर्ट में गोरी की जगह पलक लिखा कर निकाह रजिस्ट्रेशन कराया दिया। उसका धर्मांतरण कब हुआ उसे पता भी नहीं चला। उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। उसने खुदकुशी करने की कोशिश भी की। अंत में हिम्मत कर वह वहाँ से निकल पाई। महाराष्ट्र की रहने वाली इस पीड़िता का कहना है कि अगर ऐसी स्थिति में बच्ची फँस जाए तो कभी भी उसे अकेला मत छोडिए। उसे संभालिए वरना उसका बचना मुश्किल है।

समाज ऐसी बच्चियों के चरित्र पर सवाल उठाने के बजाए उसकी मदद करे। उसे फिर से जीवन जीने के लिए नई ताकत दे और प्रशासन ‘लव जिहाद’ के मामलों को संजीदगी से ले और जाँच के बाद दोषियों को सजा हो, इसकी व्यवस्था करे। तभी ‘लड़की बचाओ, लड़की पढ़ाओ’ जैसे नारे का कोई मतलब बनेगा।

पीड़िताओं का मत है कि सनातन समाज को बचपन से ही बच्चों में धर्म के प्रति आस्था, शिष्टाचार की शिक्षा दी जानी चाहिए। बच्चे स्कूल में तो किताबी शिक्षा ले लेते हैं, लेकिन आजकल धार्मिक ज्ञान नहीं मिल पाता। इसलिए इन बच्चों को बरगलाकर ‘लव जिहाद’ के चंगुल में फँसाया जा रहा है।

ऑपइंडिया ने ‘लव जिहाद’ के सैकड़ों मामले को अपने प्लेटफॉर्म पर जगह दी। 2022 में डेढ़ सौ से ज्यादा मामले हमने उठाए और पीड़िताओं की आवाज बनी। 2023 में 153 केस पर रिपोर्ट प्रकाशित की और 2024 में भी ऐसे सैकड़ों मामलों को उजागर कर बताया कि कैसे हिन्दू लड़कियों को ‘लव जिहाद’ में फँसाया गया। ज्यादातर मामलों में पीड़िता को हिन्दू पहचान बता कर दोस्ती करना, फिर प्रेमजाल में फँसाना।

इसमें सोशल मीडिया काफी मदद कर रहा है। इसके जरिए आसानी से अपना नाम छिपा कर दूसरी पहचान के साथ सामने आने में मदद मिलती है। फिर समाज और परिवार से दूर करना, ताकि जब उसे मदद की जरूरत पड़े तो कोई भी उसे सहारा देनेवाला न हो। लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन करवाना। इसके लिए वीडियो बना कर ब्लैकमेल करने से भी ये लोग पीछे नहीं हटते। फिर निकाह कर उसे ऐसे रास्ते पर ले जाना, जहाँ से वापसी संभव न हो।

सेक्स के बाद कुंडली न मिलने का बहाना देकर शादी से मुकरना अपराध: दिल्ली HC ने खारिज की याचिका, पढ़ें कोर्ट ने फैसले में क्या कहा

शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में कुंडली न मिलने का हवाला देकर विवाह से इनकार करना कानून की नजर में गंभीर अपराध होगा। दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी शख्स ने पहले शादी का भरोसा दिलाकर संबंध बनाए हों और बाद में ‘कुंडली न मिलने’ का बहाना बनाकर मुकर जाए तो यह BNS की धारा 69 के तहत धोखे से यौन संबंध बनाने या झूठे विवाह-प्रलोभन का मामला माना जा सकता है।

बार ऐंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 फरवरी 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णाकांत शर्मा की बेंच ने इस मामले में फैसला दिया है। अदालत एक ऐसे आरोपित की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिस पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत बलात्कार का मामला दर्ज है। साथ ही उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 भी लगाई गई है। अदालत ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

क्या है मामला?

27 साल की एक महिला ने 3 जनवरी 2026 को दिल्ली के केशव पुरम थाने में शिकायत दर्ज कराई कि एक युवक ने शादी का झूठा वादा करके कई सालों तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में कुंडली न मिलने का बहाना बनाकर शादी से इनकार कर दिया।

महिला का कहना है कि वह आरोपित और उसके परिवार को 2018 से जानती थी। आरोपी ने जुलाई 2019 में पहली बार अपनी कार में उससे शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद उसके घर, द गोल्डन कीज होटल (अशोक विहार) और अन्य जगहों पर भी संबंध बनाए गए। महिला के अनुसार आखिरी बार 12 सितंबर 2025 को दिल्ली के शक्ति नगर में संबंध बनाए गए।

महिला ने पहले भी लिखित शिकायत दी थी लेकिन आरोपित और उसके परिवार ने शादी का भरोसा दिलाया, जिस पर उसने शिकायत वापस ले ली। बाद में जब शादी नहीं हुई तो उसने फिर से शिकायत दी। इसके बाद आईपीसी की धारा 376 (रेप) और बीएनएस की धारा 69 के तहत FIR दर्ज की गई।

पीड़िता ने जाँच के दौरान दावा किया कि आरोपित ने उसकी तस्वीरें लीक करने की धमकी दी थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता ने बताया कि आरोपित उसे बार-बार शादी का भरोसा देता था और इसी भरोसे पर कई बार शारीरिक संबंध बने। आरोपित ने उसे अपने परिवार और रिश्तेदारों से होने वाली पत्नी के रूप में मिलवाया गया था और वह पारिवारिक कार्यक्रमों में भी शामिल हुई।

पीड़िता के अनुसार, मई 2025 से आवेदक उससे दूर होने लगा और जून 2025 में कुंडली न मिलने का कारण बताकर शादी से मना कर दिया। बाद में उसने फिर शादी का भरोसा दिया और सितंबर 2025 तक कई बार शारीरिक संबंध बनाए। उसने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मौकों पर उस पर दबाव डाला गया और फोटो लीक करने की धमकी दी गई।

कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि पहले शादी का आश्वासन देने और बाद में कुंडली न मिलने का आधार लेकर विवाह से इनकार करना प्रथम दृष्टया (prima facie) इस बात पर प्रश्न खड़ा करता है कि आरोपित द्वारा किया गया वादा कितना ईमानदार था।

जस्टिस शर्मा ने कहा, “रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों से यह संकेत मिलता है कि बार-बार पीड़िता को यह भरोसा दिलाया गया कि उनकी शादी में कोई भी बाधा नहीं है। यहाँ तक कि आरोपित ने कुंडली मिलाए जाने को लेकर में भी आश्वासन दिया और कहा कि दोनों की कुंडलियाँ पहले ही मिल चुकी हैं।”

जस्टिस शर्मा ने अपने फैसले में लिखा है कि आरोपित ने चैट में शादी करने की बात कही थी। शर्मा ने लिखा, “कोर्ट के ध्यान में यह भी लाया गया है कि 14 सितंबर 2023 को एक चेट में आरोपित ने लिखा था, ‘kal hi shaadi kar rahe hain hum’ (कल ही शादी कर रहे हैं हम)। पहली नजर में इससे साफ पता चलता है कि कुंडली मिलान का मुद्दा पहले ही सुलझा लिया गया था।”

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का एक हिस्सा

न्यायालय ने उन अन्य चैट्स के स्क्रीनशॉट भी देखे हैं जिन्हें पीड़िता ने जाँच अधिकारी को दिया था। ये चैट्स 2022 से 2025 के बीच की हैं जिनमें आवेदक ने पीड़िता को आश्वासन दिया था कि कुंडली मिलान का मुद्दा सुलझा लिया जाएगा और उनकी शादी में कोई बाधा नहीं है।

कोर्ट ने कहा, “इन्हीं आश्वासनों के आधार पर दोनों के बीच एक अवधि तक शारीरिक संबंध बनाए गए। बाद में आवेदक ने कुंडली न मिलने का कारण बताकर शादी से इंकार कर दिया। इस तरह का व्यवहार पहली नजर में यह सवाल खड़ा करता है कि आवेदक द्वारा किया गया शादी का वादा कितना सच्चा और वास्तविक था। ऐसा आचरण भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है। यह धारा विशेष रूप से उन मामलों से संबंधित है, जहाँ शादी का झूठा वादा या धोखे से शारीरिक संबंध बनाए जाते हैं।”

कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

कोर्ट ने माना कि आरोपित का यह कहना कि शादी केवल कुंडली न मिलने के कारण नहीं हो सकी उसके अपने ही व्यवहार और कई वर्षों तक दिए गए आश्वासनों से मेल नहीं खाता। कोर्ट ने कहा कि अगर कुंडली मिलान का मुद्दा आरोपित और उसके परिवार के लिए इतना महत्वपूर्ण था तो इसे शारीरिक संबंध बनाने से पहले ही इस विषय को स्पष्ट रूप से सुलझा लिया जाना चाहिए था।

कोर्ट ने आरोपित की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा, “आरोपों की प्रकृति, अब तक की जाँच में मिली चीजें और इस तथ्य को देखते हुए कि मामले में अभी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है कोर्ट जमानत नहीं देगा।”

अब उथले पानी में भी नहीं बच पाएँगी दुश्मन की पनडुब्बियाँ, नौसेना को मिलेगा ‘डॉल्फिन हंटर’: जानें- क्या हैं ‘अंजदीप’ युद्धपोत की खासियत

भारतीय नौसेना अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा ताकत को और मजबूत करने जा रही है। इसी दिशा में एक अहम कदम है ‘अंजदीप’ (Anjadip) युद्धपोत का कमीशन होना। अंजदीप, 8 जहाजों की उस विशेष परियोजना का तीसरा पोत है जिसे एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) परियोजना के तहत तैयार किया गया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य समुद्र के उथले इलाकों (कम गहरे पानी) में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना और उन्हें नष्ट करना है।

आज के समय में समुद्री सुरक्षा केवल सतह पर दिखने वाले जहाजों तक सीमित नहीं है बल्कि असली चुनौती समुद्र के भीतर छिपी पनडुब्बियों से होती है। ऐसे में ‘अंजदीप’ जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत भारतीय नौसेना की ताकत को नई ऊँचाई देंगे। यह पोत तटीय क्षेत्रों में निगरानी, दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने और जरूरत पड़ने पर तेज कार्रवाई करने में सक्षम होगा।

‘अंजदीप’ के नौसेना में शामिल होने से न केवल भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक उपस्थिति भी और प्रभावशाली बनेगी। यह कदम देश की रक्षा तैयारियों को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अंजदीप को 27 फरवरी 2026 को चेन्नई बंदरगाह पर पूर्वी नौसेना कमान में औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा।

कहाँ से आया यह नाम?

‘अंजदीप’ नाम कर्नाटक के कारवार तट के पास स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है। गोवा से करीब 2 किलोमीटर दूर इस द्वीप को सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। साथ ही, यह नाम पहले के युद्धपोत ‘INS अंजदीप’ की याद को भी दोबारा जीवित करता है। वह जहाज भारतीय नौसेना में अपनी सेवा दे चुका था लेकिन उसे साल 2003 में सेवा से हटा दिया गया था। यह पेट्या श्रेणी का युद्धपोत था। ‘अंजदीप’ अपने नाम के जरिए एक पुराने गौरवशाली युद्धपोत और भारत के समुद्री इतिहास दोनों को सम्मान देता है।

क्या हैं ‘अंजदीप’ की विशेषताएँ?

यह युद्धपोत भारतीय नौसेना के लिए खास तौर पर पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसे ‘डॉल्फिन हंटर’ कहा जा रहा है क्योंकि इसका मुख्य काम समुद्र के भीतर छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूँढना, उनका पीछा करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें निष्क्रिय करना है। खासतौर पर तटीय इलाकों में यह पोत बेहद अहम भूमिका निभाएगा जहाँ उथले पानी में पनडुब्बियों का पता लगाना आसान नहीं होता।

यह पोत लगभग 77 मीटर लंबा है और भारतीय नौसेना के उन सबसे बड़े युद्धपोतों में शामिल है जिन्हें वाटर-जेट प्रोपल्शन प्रणाली से चलाया जाता है। वाटर-जेट तकनीक इसे तेज रफ्तार और बेहतर नियंत्रण देती है। इसकी अधिकतम गति 25 समुद्री मील तक है जिससे यह किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दे सकता है और लगातार संचालन कर सकता है। इसकी फुर्ती इसे तटीय क्षेत्रों में और अधिक प्रभावी बनाती है।

इस जहाज में अत्याधुनिक और स्वदेशी तकनीकों का उपयोग किया गया है। इसमें हल माउंटेड सोनार ‘अभय’ लगाया गया है, जो उथले पानी में पनडुब्बियों का पता लगाने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें हल्के टॉरपीडो और स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए पनडुब्बी रोधी रॉकेट लगाए गए हैं। ये हथियार समुद्र के भीतर छिपे खतरों से निपटने में सक्षम हैं। इस तरह यह पोत पानी के नीचे मौजूद दुश्मन की गतिविधियों का प्रभावी ढंग से पता लगा सकता है और उन पर कार्रवाई कर सकता है।

हालाँकि, इसका मुख्य कार्य पनडुब्बी रोधी अभियान है लेकिन यह पोत अन्य भूमिकाएँ भी निभा सकता है। यह तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान (LIMO), खोज व बचाव अभियान और माइन बिछाने जैसे कार्यों में भी सक्षम है। इसके आने से नौसेना की समग्र क्षमता मजबूत होगी और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और भी प्रभावी बनेगी।

आत्मनिर्भर भारत का उदाहरण है ‘अंजदीप’

इन जहाजों का डिजाइन और निर्माण भारतीय रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) के नियमों के अनुसार किया गया है। इनका निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत हुआ है, जिसमें गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने एम/एस एलएंडटी शिपयार्ड (कट्टुपल्ली) के साथ मिलकर काम किया। यह सहयोगी रक्षा निर्माण का एक सफल उदाहरण है जो दिखाता है कि सरकारी और निजी क्षेत्र मिलकर आधुनिक रक्षा उपकरण तैयार कर सकते हैं।

इस पोत की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को भी दिखाता है। इसका निर्माण भारत में ही हुआ है जिससे घरेलू रक्षा निर्माण उद्योग को मजबूती मिलती है और आयात पर निर्भरता कम होती दिख रही है।

मुलायम-मायावती-अखिलेश सब गए विदेश, पर नतीजा निल बट्टे सन्नाटा: CM योगी ने 1 दिन में ही ₹19877 करोड़ का निवेश जुटाया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन दिनों सिंगापुर में हैं। सिर्फ दो-तीन दिन की आधिकारिक यात्रा, लेकिन पहले दिन ही राज्य को 19,877 करोड़ रुपए के बड़े-बड़े निवेश के MoU मिल गए। ये कोई कागजी वादा नहीं, बल्कि ठोस समझौते हैं, जिसमें टाउनशिप, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क, ग्रीन एनर्जी पर निवेश शामिल है।

इसमें जेवर एयरपोर्ट के पास इंटरनेशनल टाउनशिप, नोएडा में 100 मेगावाट का डेटा सेंटर, कानपुर-लखनऊ हाईवे पर लॉजिस्टिक्स पार्क… सब कुछ ग्राउंड पर उतरने वाला है। पहले दिन के इन समझौतों से ही करीब 20 हजार युवाओं को नौकरियाँ मिलने का अनुमान है।

ये दौरा सिर्फ फोटो खिंचवाने या घूमने का नहीं है। मुख्यमंत्री योगी ने सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग, विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन, DBS ग्रुप, GIC, टेमासेक जैसे बड़े निवेशकों से सीधे बात की। कौशल विकास पर भी ITEES के साथ MoU साइन किया। मतलब निवेश तो आ रहा है, साथ में युवाओं को ट्रेनिंग भी मिलेगी। इसके बाद वो जापान जा रहे हैं, वहाँ भी 1-on-1 मीटिंग्स में ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन जैसे सेक्टर में बड़े समझौते होने वाले हैं।

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की नई तस्वीर गढ़ रहे हैं, जहाँ कानून-व्यवस्था ठीक है, लैंड क्लियर है, सिंगल विंडो क्लियरेंस है और CM खुद निवेशकों को कॉल करके बुला रहे हैं।

पहले के मुख्यमंत्रियों ने भी किए विदेश दौरे, लेकिन नतीजे में मिले शून्य

अब तुलना करते हैं। पहले मुलायम सिंह यादव, फिर मायावती, फिर अखिलेश यादव… सबने विदेश गए, निवेश लाने की बात की, लेकिन जमीनी हकीकत क्या रही?

मुलायम सिंह यादव 1995 में ब्रिटेन गए थे। तब वे मुख्यमंत्री थे। निवेशकों को UP में बुलाने की कोशिश की। लेकिन उस समय UP में दंगे, अपराध, बिजली-पानी की समस्या, सड़कें खराब… विदेशी निवेशक डरते थे। दौरे के बाद कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं आया। कोई फैक्ट्री नहीं लगी। कोई MoU जमीन पर नहीं उतरा। सिर्फ घोषणा रह गई।

मायावती ने भी कोशिश की। 1997 में जापान और साउथ कोरिया गईं। फिर 2003 में पाँच देशों का लंबा दौरा किया, जिसमें इंग्लैंड, कनाडा, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, अमेरिका शामिल रहे। इन 15-16 दिन की यात्रा में वो NRIs और विदेशी कंपनियों से मिलीं। ताज एक्सप्रेसवे, NRI सिटी, मेडी सिटी, बायोटेक सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स में निवेश की बात की। वहाँ से वापस आकर दावा किया कि यूपी में निवेश के लिए ₹20,000 करोड़ के प्रस्ताव मिल गए।

लेकिन हकीकत? मीडिया रिपोर्ट्स साफ बताती हैं- रिस्पॉन्स ठंडा था। कोई ठोस निवेश नहीं आया। प्रोजेक्ट्स शुरू नहीं हुए। 2007-2012 के लंबे कार्यकाल में भी कोई बड़ा विदेशी निवेश दौरा नहीं हुआ। उनका फोकस राज्य के अंदर मूर्तियाँ बनाने पर ज्यादा रहा। विदेश दौरे सिर्फ एक-दो रहे, नतीजे शून्य।

अखिलेश यादव का समय तो और मजेदार रहा। उन्होंने साल 2012-2017 के बीच कई विदेश दौरे किए। जिसमें जुलाई 2012 का ऑस्ट्रेलिया दौरा पूरी तरह से पारिवारिक छुट्टी का था। वो अप्रैल 2013 में अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी गए, यहाँ खर्च भी ₹1.06 करोड़ का कर दिए, लेकिन आजम खान से हुई बदतमीजी (याद करें) के चलते उन्होंने प्रेजेंटेशन ही नहीं दिया

इसके बाद वो साल 2014 में नीदरलैंड गए, निवेश की बात करे.. फिर साल 2015 में जर्मनी के बर्लिन टूरिज्म फेयर में शामिल हुए। इसके अलावा फ्रांस और ग्रीस में भी निवेशकों से मुलाकात की। हाँ, इस बीच में वो लंदन कई बार गए, कुछ दौरे पारिवारिक रहे, तो कुछ में जन्मदिन मनाने।

लेकिन निवेश? कोई बड़ा MoU नहीं आया जो जमीन पर उतरा हो। कुछ मीटिंग्स हुईं, कुछ इंटरेस्ट दिखा, लेकिन UP की छवि अराजकता वाली थी- लॉ एंड ऑर्डर खराब, घोटाले, राजनीतिक अस्थिरता। विदेशी कंपनियाँ दूर ही रहीं। अखिलेश खुद कहते थे निवेश लाएँगे, लेकिन दौरे ज्यादातर पर्सनल या फोटो-ऑप लगते थे।

योगी का पुराना बयान और नया रिकॉर्ड

सीएम योगी ने एक बार कहा था कि कुछ लोग विदेश जाते हैं ये जानने के लिए कि उनकी प्रॉपर्टी पर कब्जा तो नहीं हो गया। ये तंज पुराने नेताओं पर था। आज खुद योगी विदेश जा रहे हैं, लेकिन निवेश लाने, रोजगार देने।

सिंगापुर के बाद बाद वो जापान प्रवास के दौरान आठ प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। कुबोटा और सुजुकी के साथ ऑटोमोबाइल निवेश, टोक्यो इलेक्ट्रॉन के साथ सेमीकंडक्टर, तोशिबा के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग तथा टोयो डेंसो, जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स और नागासे एंड कंपनी के साथ ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन सहयोग प्रमुख एजेंडा रहेंगे। कनाडेविया के साथ ग्रीन हाइड्रोजन और मारुबेनी के साथ हॉस्पिटैलिटी व रियल एस्टेट निवेश पर भी चर्चा होगी।

दौरे के दौरान आयोजित जी-टू-बी और राउंड टेबल बैठकों में मुख्यमंत्री प्रदेश की औद्योगिक नीति, भूमि बैंक, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और कौशल विकास से जुड़े पहलुओं पर निवेशकों के साथ संवाद करेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इन बैठकों से निवेश प्रस्तावों को गति मिलेगी और संयुक्त परियोजनाओं का रास्ता साफ होगा। मुख्यमंत्री की यह यात्रा न केवल निवेश आकर्षित करने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक मंच पर ‘ब्रांड यूपी’ को सशक्त रूप से स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

योगी राज में कैसे आया फर्क?

क्योंकि योगी सरकार ने पहले घरेलू मोर्चा मजबूत किया। साल 2017 से कानून-व्यवस्था सुधारी, बुलडोजर चलाया, माफिया को मिट्टी में मिलाया और अब इसका असर भी दिख रहा है। आज इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में देखेंगे तो राज्य में 6 एक्सप्रेसवे हैं। नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट बने हैं। डेटा सेंटर पॉलिसी तैयार की गई है। सेमीकंडक्टर मिशन में यूपी आगे दिख रहा है। आज ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में UP टॉप-3 में आ चुका है।

सिंगापुर दौरे का पहला दिन ही देख लें, जिसमें यूनिवर्सल सक्सेस ग्रुप ने ₹6,650 करोड़ का निवेश किया। इसमें जेवर के पास टाउनशिप (3,500 करोड़), नोएडा डेटा सेंटर (2,500 करोड़), लॉजिस्टिक्स पार्क (650 करोड़ बनेगा। इसके साथ ही गोल्डन स्टेट कैपिटल ने 8,000 करोड़ के 100 MW डेटा सेंटर के लिए निवेश किया है। PIDG ने 2,500 करोड़ रुपए ग्रीन हाइड्रोजन और एग्री-पीवी में निवेश किया है, तो AVPN ने 2,727 करोड़ रिन्यूएबल एनर्जी में। कुल 19,877 करोड़ का निवेश और इससे राज्य में 19,500+ नौकरियाँ आएँगी।

CM योगी का मॉडल- चुपचाप काम को अंजाम देना

मुलायम-मायावती-अखिलेश के दौरों में निवेश प्रस्ताव तो आए, लेकिन 90% कागजों पर रह गए। 1995, 1997, 2003, 2012-17… कोई बड़ा विदेशी प्लांट UP में नहीं लगा जो उनके दौरे का नतीजा हो। जबकि योगी के समय Foxconn, Samsung, Adani, Reliance जैसी कंपनियाँ आ रही हैं। डेटा सेंटर हब बन रहा है। जेवर एयरपोर्ट विश्व स्तरीय बन चुका है और उसके आसपास विकास की रफ्तार तेज हो चुकी है।

योगी का फोकस रिजल्ट पर होता है। वो विदेश गए हैं तो पूरे डेलिगेशन, प्रेजेंटेशन, साइट विजिट, फॉलो-अप के साथ। सिंगापुर के बाद जब वो जाना जाएँगे, तो वहाँ भी Kubota, Suzuki, Tokyo Electron, Toshiba जैसी कंपनियों से 1-on-1 मीटिंग करेंगे।

सिंगापुर-जापान दौरा साबित करता है कि मुख्यमंत्री अगर संकल्पित हो, राज्य की छवि बदले, तो विदेशी निवेशक खुद आते हैं। पुराने CMs के समय में समस्या थी अंदरूनी अस्थिरता की, लेकिन योगी सरकार ने उसे दूर कर दिया। यही वजह है कि अब UP ग्लोबल इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बन रहा है।

ये दौरा सिर्फ 20 हजार करोड़ का नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के नए ब्रांड का है, जहाँ निवेशक आते हैं, प्रोजेक्ट शुरू होते हैं, युवा नौकरी पाते हैं। योगी आदित्यनाथ का ये मॉडल पूरे देश के लिए उदाहरण है।

सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी के मामले में मुख्य पुजारी को फँसा रही केरल सरकार, कोर्ट ने SIT को लताड़ते हुए दी जमानत: जानें- कैसे सनातनियों को निशाना बना रहे वामपंथी

सबरीमाला मंदिर में सोना चोरी के मामले में केरल की वामपंथी सरकार जबरदस्ती तंत्री यानी प्रधान पुजारी कंदारारू राजीवरू को फँसाने में लगी हुई है। ये बात कोल्लम विजिलेंस कोर्ट के फैसले को देख कर भी कहा जा सकता है। कोर्ट ने कहा है कि सोना चोरी मामले में तंत्री राजीवरू का ‘लेश मात्र भी हाथ’ नहीं है।

41 दिनों तक जेल में रहने के बाद उन्हें विजिलेंस कोर्ट ने जमानत दे दी। एसआईटी को इससे धक्का लगा है, क्योंकि उसके ‘सबूतों’ को कोर्ट ने नकारा दिया। अब एसआईटी ऊपरी अदालत में जाने का मन बना रही है। उधर लोकल कोर्ट से रिहा होने के बाद प्रधान पुजारी राजीवरू ने पूरे मामले पर केरल सरकार को घेरा और 2018 में महिलाओं के मंदिर में प्रवेश मामले से जोड़ा।

सोना चोरी मामले में तंत्री की गिरफ्तारी का शुरू से विरोध हो रहा है। विपक्ष वामपंथी सरकार पर राजनीतिक कार्रवाई करने का आरोप लगा रही है। इनका कहना है कि वामपंथी सरकार और सीएमओ पूर्व और मौजूदा देवास्वोम मंत्रियों और टीडीबी अध्यक्ष को बचाने के लिए तंत्री को बली का बकरा बना रही है, क्योंकि इन पदों पर विराजमान लोगों को सरकार ने चुना है।

तंत्री ने बताया ‘बदले की कार्रवाई’

मुख्य पुजारी का कहना है कि उन्होंने मंदिर की परंपरा और अनुष्ठानों की रक्षा के लिए मासिक धर्म आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। उस वक्त उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं मानी थी और परंपरा से छेड़छाड़ होने पर पूजा-अर्चना नहीं करने की धमकी दी थी।

उन्होंने ये भी कहा कि मंदिर को हर दिन खोलने के भी वे खिलाफ थे। इससे ‘प्रभावशाली’ लोग नाराज हो गए और उनकी प्रतिष्ठा धुमिल करने के लिए अवैध लेन-देन के मामले में उन्हें फँसाने की कोशिश की गई। एसआईटी ने तंत्री को सोना चोरी केस के मुख्य आरोपित उन्नीकृष्णन पोट्टी से जोड़ने की कोशिश की। जबरदस्ती ये दिखाने की कोशिश की कि उन्होंने ही पोट्टी को नियुक्त किया था।

कोल्लम कोर्ट ने आरोप को नकारा

एसआईटी ने कोर्ट के सामने दलील दी कि 18 जून 2019 को मंदिर की मूर्तियों और आवरणों पर चढ़ी सोने के परत की मरम्मत का काम करने की राय तंत्री द्वारा दी गई थी। उसे खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है। यहाँ तक कि एसआईटी ने भी कोई सबूत पेश नहीं किया है, जिससे प्रधान पुजारी की अनियमितताओं में किसी तरह की संलिप्तता प्रमाणित हो।

कोर्ट ने कहा कि प्रधान पुजारी यानी तंत्नी के 20 जुलाई 2019 और 18 मई 2019 में से किसी भी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं है। अगर कोई साजिश होती , तो तंत्री का जरूर हस्ताक्षर होता। कोर्ट ने साफ कहा कि 10 जुलाई 2019 वाले प्रस्ताव पर तंत्री का हस्ताक्षर इसलिए है क्योंकि वे बोर्ड द्वारा माँगी गई राय देने के लिए बाध्य थे।

मंदिर के नियम के मुताबिक भी तंत्री का काम बोर्ड द्वारा माँगे गए मुद्दे पर अपनी राय देना और केवल पूजा और नियम अनुष्ठान तक ही सीमित है। इसलिए मंदिर की मूर्तियों और आवरणों के रखरखाव की जिम्मेदारी तंत्री की नहीं बल्कि त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड के अधिकारियों की थी।

एसआईटी केरल हाईकोर्ट का करेगी रुख

एसआईटी की किरकिरी होने के बाद बताया जा रहा है कि वह तंत्री को जमानत दिए जाने के कोल्लम विजिलेंस कोर्ट के फैसले को चुनौती देगी और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी ने तंत्री को जमानत देते समय कोल्लम विजिलेंस कोर्ट की सख्त टिप्पणियों को लेकर भी कानूनी राय माँगी है।

उधर, विपक्षी पार्टियाँ अब सवाल पूछ रही है कि जब तंत्री का कोई कसूर नहीं था तो उन्हें जबरन 41 दिन जेल में क्यों रखा गया। एसआईटी को इसका जवाब देना चाहिए। एसआईटी अब नए सिरे से सबूतों को जुटाने की कोशिश करेगी, ताकि तंत्री राजीवरू की बेल को चुनौती दी जा सके।

सीपीएम बता रही ‘महा चोर’

तंत्री राजीवरू के खिलाफ कोई सबूत नहीं है, फिर भी उन्हें सीपीएम नेता ‘चोर’ कह रहे हैं। सीपीएम केरल के स्टेट सेक्रेटरी एम वी गोविंदन ने सबरीमाला तंत्री कंदारारू राजीवारू को ‘मास्टर चोर’ कहा। उनका कहना है कि तंत्री सोने की चोरी में शामिल ‘चोरों की लिस्ट’ में था, जाँच अभी भी चल रही है। आखिर कब तक एसआईटी की जाँच करवाएगी केरल सरकार पता नहीं।

सीपीएम नेता का सवाल है कि जब ईडी दूसरे आरोपितों के खिलाफ जाँच कर रही है, तो तंत्री के खिलाफ क्यों नहीं जाँच कर रही। जब आय से अधिक का मामला तंत्री के खिलाफ सामने नहीं आया और तंत्री को कोर्ट ने भी एसआईटी को लताड़ते हुए जमानत दे दी, तो ईडी की जाँच क्यों हो।

कॉन्ग्रेस नेता वेणुगोपाल पर सीपीएम नेता ने लगाया आरोप

दरअसल सबरीमाला सोना चोरी केस में सीपीएम के पूर्व विधायक ए पद्मकुमार समेत तीन नेता और मुख्य आरोपित उन्नीकृष्णन पोट्टी को गिरफ्तार किया गया है। उन्नीकृष्णन पोट्टी को लेकर कॉन्ग्रेस और सीपीएम में तू-तू मैं-मैं जारी है।

सीपीएम नेता गोविंदन का कहना है कि कॉन्ग्रेस पहले CPI(M) और मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी के बीच सांठगांठ का आरोप लगा रही थी, लेकिन पोट्टी ने AICC के जनरल सेक्रेटरी के सी वी वेणुगोपाल के केरल विकास मंत्री के तौर पर कार्यकाल के दौरान सबरीमाला में एंट्री ली थी, ये बात सामने आई है।

त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति केरल की सत्ताधारी राज्य सरकार द्वारा की जाती है, जिसमें अक्सर राजनीतिक नियुक्तियां होती हैं। पूर्व विधायक और सीपीएम नेता पद्मकुमार टीडीबी के अध्यक्ष रहे। उससे पहले सीपीएम के ही एक और नेता एन वासु अध्यक्ष थे। जानकारों के मुताबिक, मार्च 2019 में सन्निधानम द्वार पैनल से सोना पिघलाने के पूरे काम की जानकारी वासु को थी और उनकी सहमति से ही ये काम हुआ। इस दौरान वासु टीडीबी के अध्यक्ष थे। वे टीडीबी के दो बार आयुक्त रह चुके हैं।

मुख्य आरोपित उन्नीकृष्णन पोट्टी के पुराने ईमेल से भी पता चला है कि वासु को मालूम था कि मंदिर के देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की मरम्मती के बाद सोना बच गया है। पोट्टी ने कथित तौर पर उस बचे हुए सोना का इस्तेमाल एक जरूरतमंद लड़की की शादी में लगा दिया। इससे संबंधित ईमेल 9 दिसंबर 2019 को भेजा गया था।

वासु ने ईमेल फॉरवर्ड तो कर दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद सोना गायब पाया गया। यही वजह है कि सीपीएम और कॉन्ग्रेस एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। एक तरह से कहा जाए तो तंत्री की गिरफ्तारी एसआईटी ने पूरे मामले से ध्यान भटकाने के लिए किया था, ताकि वामपंथी नेताओं के करतूतों पर पर्दा डाला जा सके।

अनुराग कश्यप, आपके लिए खिचड़ी और Beef होगा एक समान, ‘लव जिहाद पीड़िताओं’ के लिए बिलकुल नहीं है

सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म ‘द केरल स्टोरी-2 गोज बीयॉन्ड‘ का ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया है। फिल्म में लव जिहाद मामलों में पीड़ित हिंदू लड़कियों के साथ अत्याचार की सच्चाई को दर्शाया गया है, जो झकझोर देने वाले हैं। फिल्म मेकर्स ने इसे हकीकत का आईना बताया है। लेकिन इसी बीच फिल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने फिल्म में पीड़िता को जबरन ‘बीफ’ यानी गोमांस खिलाने वाले दृश्य की खिचड़ी से तुलना की है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है, जिसमें रिपोर्टर ने अनुराग कश्यप से सवाल पूछा कि आपकी केरल स्टोरी-2 पर क्या राय है? इसका जवाब देते हुए अनुराग कश्यप कहते हैं, “फिल्म ‘बुलशिट’ है। ये प्रोपेगेंडा है। ऐसे कौन ‘बीफ’ खिलाता है, ऐसे कोई खिचड़ी भी नहीं खिलाता है।”

इसके बाद रिपोर्टर एक और सवाल पूछता है कि इस फिल्म को बनाने का उद्देश्य क्या है? इस पर अनुराग कश्यप ने कहा, “वो पैसा कमाना चाहते हैं। वो बस सबको खुश करना चाहते हैं, लोगों को बाँटना चाहते हैं। फिल्ममेकर एक लालची आदमी है।”

अनुराग कश्यप की टिप्पणी पर द केरल स्टोरी-2 के डायरेक्टर की प्रतिक्रिया

फिल्म पर अनुराग कश्यप की टिप्पणी का वीडियो वायरल होते ही विवाद शुरू हो गया। फिर ‘द केरल स्टोरी-2’ के फिल्म डायरेक्टर कामाख्य नारायण ने विवाद में उतरकर दिया। उन्होंने अनुराग कश्यप की टिप्पणी पर रिएक्ट करते हुए कहा कि समाज ने उन्हें गंभीरता से लेना छोड़ दिया है, वह मानसिक रूप से दुर्बल हो चुके हैं।

वीडियो में फिल्म के डायरेक्टर कामाख्य नारायण ने कहा, “ऑडियंस उन्हें गंभीरता (सीरियसली) से नहीं लेती है। पिछले कई सालों से उनकी सारी फिल्में फ्लोप हो रही हैं। वो मानसिक रूप से दुर्बल हो चुके हैं। उनकों सच्चाई दिखती नहीं है। उनको ये नहीं दिख रहा कि हमारी बहनों को जबरन बीफ खिलाया जा रहा है, धर्म परिवर्तन करने के लिए। ये सत्य घटना है।”

नारायण आगे कहते हैं, उनको पूरी दुनिया से समस्या है। उनको नेटफ्लिक्स से समस्या है। उनको ब्राह्मणों से समस्या है। उनको फिल्म इंडस्ट्री से समस्या है। आजकल हमसे समस्या है उनको। उनको गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। हमारी फिल्म सत्य घटनाओं पर आधारित है, “हमें ये पता है। हम अनुराग जी के घर रिसर्च मैटेरियल भेज देंगे। वो तो लोगों के घर जूते-चप्पल भेजते हैं। मैं तो ये नहीं भेज सकता हूँ।”

फिल्म की रिसर्च को लेकर कामाख्य नारायण कहते हैं, “मैनें 1500 आर्टिकल पढ़े हैं। 70-80 FIR पढ़ी हैं। पीड़िताओं से मिला हूँ और उनसे मिलकर मैं पिछले 1-1.5 साल से सो नहीं पाया हूँ। कोर्ट जजमेंट पढ़े हैं। ये सभी सत्य घटनाएँ हैं। समाज में हो रहा है। हम अपनी आँखो को बंद कर सकते हैं, लेकिन उससे सत्य नहीं बदलेगा। समाज में ये बहुत बड़े पैमाने पर हो रहा है।”

हिंदू लड़कियों को ‘जबरन गोमांस’ खिलाने के असल मामले

फिल्म ‘द केरल स्टोरी-2’ ने हिंदू लड़कियों को लव जिहाद में फँसाकर गोमांस खिलाने और धर्मांतरण कराने की सच्ची घटनाओं को उजागर किया है, जो आए दिन सामने आती हैं। ऐसी कई घटनाएँ हैं, जिनमें हिंदू लड़कियों को पहले प्रेमजाल में फँसाया जाता है, फिर बहला-फुसलाकर रेप और फिर गोमांस खिलाकर जबरन इस्लाम कबूलने को मजबूर किया जाता है।

चाहे वह रायबरेली का एक बच्चे का अब्बू मोहम्मद मुकीम हो, जिसने निकाह का झाँसा देकर दो साल तक रेप किया। फिर धीरे-धीरे धर्म परिवर्तन का दबाव डालने लगा और घर ले जाकर जबरन गोमांस तक खिलाया।

या फिर उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले का अहमद रजा हो, जिसने चाकू की नोक पर हिंदू लड़की से बलात्कार किया और निकाह का झाँसा देकर अम्मी-अब्बू से मिलवाया। फिर घर ले जाकर अम्मी-अब्बू के सामने गोमांस खाने और नमाज पढ़ने की धमकी दी। जब पीड़िता ने इनकार किया, तो बेरहमी से पीटा।

महाराष्ट्र के संभाजीनगर का ताहेर पठान ने भी हिंदू लड़की के साथ यही किया। समीर पटेल बनकर पीड़िता से मिला, फिर प्रेमजाल में फँसाकर रेप किया। और अंत में अपना मकसद पूरा करने के लिए पीड़िता को बुर्का पहनने और गोमांस खाने को मजबूर किया। इस काम में उसकी अम्मीजान, अब्बाजान के साथ-साथ उसकी पहली बेगम आयेशा पठान भी शामिल थी, जिसके साथ ताहेर के 4 बच्चे भी थे।

ये कुछ गिने चुने मामले हैं, लेकिन आँकड़ा सोच से कही परे है। कई मामलों में FIR होती हैं, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे होते हैं। कैसे ‘अब्दुल’ अपने जाल में फँसाकर हिंदू लड़कियों का धर्म परिवर्तन करा देते हैं। इससे कई हिंदू लड़कियों की जिंदगियाँ बर्बाद हुई हैं। ‘द केरल स्टोरी पार्ट-1’ और ‘पार्ट-2’ जैसी फिल्मों में इन्हीं पीड़ित हिंदू लड़कियों का दर्द दिखाकर ऐसे ‘अब्दुलों’ की सच्चाई को उजागर किया गया है।

हिंदू पीड़िताओं के दर्द पर अनुराग कश्यप का ‘खिचड़ी’ ह्यूमर

अब वापस आते हैं अनुराग कश्यप की टिप्पणी पर, तो बात सीधी है। अगर किसी हिंदू लड़की को उसकी मर्जी के बगैर जबरन गोमांस खिलाया गया है, तो यह सिर्फ फिल्म का एक दृश्य नहीं है, यह उन लव जिहाद की पीड़िताओं के दर्द की असलियत है। जिन मामलों का जिक्र फिल्म में है, जिन पीड़िताओं ने यह दर्द झेला है, उनके लिए यह कोई हल्का अनुभव नहीं रहा। ऐसे जख्म लंबे समय तक याद रहते हैं, और इन्हें शब्दों की चतुराई से छोटा नहीं किया जा सकता।

ऐसे में अनुराग कश्यप का यह कहना कि ‘ऐसे तो लोग खिचड़ी भी नहीं खिलाते’ आखिर क्या संदेश देता है। क्या यह टिप्पणी उन घटनाओं की गंभीरता को कम करके दिखाने की कोशिश है या फिर दर्द को एक सामान्य मजाक में बदल देने का अंदाज है। क्या जिन लड़कियों ने यह सब सहा, उनके लिए यह सिर्फ एक हल्की टिप्पणी भर है। इसका जवाब तो अनुराग कश्यप ही दे सकते हैं, जिन्हें बीफ पराठा शायद बेहद पसंद भी है।

जाहिर है खिचड़ी और गोमांस की तुलना करना कोई ह्यूमर में नहीं आता। ये दोनों एक चीज नहीं है, न ही इन्हें जबरन खिलाने के मायने एक हैं। आस्था, दर्द और जबरन जैसे शब्दों का वजन समझे बिना की गई तुलना अपने आप बहुत कुछ कह जाती है।

AI समिट में नंगई से लेकर देश भर में BJP-RSS कार्यकर्ताओं के खिलाफ गुंडई तक: पढ़ें- कॉन्ग्रेसियों की हिंसा की 5 घटनाएँ, समझें इस पार्टी का चाल और चरित्र

इंडियन नेशनल कॉन्ग्रेस एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। पार्टी के कार्यकर्ताओं पर गुंडागर्दी के आरोप लग रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि को नुकसान पहुँचा है। पिछले कुछ दिनों में कॉन्ग्रेस और उसकी युवा इकाई के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कई राज्यों में हिंसक झड़पें और राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिली हैं।

दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में हंगामे से लेकर इंदौर, पुडुचेरी और तेलंगाना में हुए हालिया हमले ने कॉन्ग्रेस की आक्रामक और हिंसक रणनीति को जगजाहिर किया है।

भारत मंडपम में ‘शर्टलेस’ प्रदर्शन

घटना की शुरुआत दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित प्रतिष्ठित AI इम्पैक्ट समिट से हुई। इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में शीर्ष टेक कंपनियों के CEO और विदेशी प्रतिनिधि शामिल हुए। इसका उद्देश्य AI के क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत को दिखाना था।

हालाँकि, इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस (IYC) के सदस्यों ने कार्यक्रम स्थल पर शर्टलेस प्रदर्शन करते हुए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी कर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में रुकावट डालने की कोशिश की।

पुलिस के मुताबिक, शुक्रवार (20 फरवरी 2026) को यूथ कॉन्ग्रेस के कुछ नेता ऑनलाइन पंजीकरण कर और क्यूआर कोड के माध्यम से कार्यक्रम स्थल में प्रवेश कर गए। उन्होंने अंदर टीशर्ट पहनी थी, जिस पर राजनीतिक नारे लिखे थे। इसके ऊपर से स्वेटर और जैकेट पहन रखी थी। इससे एंट्री के दौरान किसी का ध्यान नहीं गया।

हॉल नंबर 5 में पहुँचने के बाद उन्होंने अपने गर्म कपड़े और टी-शर्ट उतारकर हवा में लहराए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, जिसमें ‘PM is compromised’ जैसे नारे भी शामिल थे।

यह प्रदर्शन हाल ही में घोषित भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में आयोजित किया गया था। INC का आरोप है कि यह समझौता देशहित से खिलाफ है।

इस घटना से कई प्रतिभागी, विशेषकर विदेशी प्रतिनिधि शॉक्ड रह गए। मीडिया के जरिए जो वीडियो और तस्वीरें सामने आईं, उसमें प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के खिलाफ नारे लिखे गए थे। स्थिति तब बिगड़ गई जब धक्का-मुक्की शुरू हो गई और हालात को काबू करने की कोशिश में कम से कम तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।

दिल्ली पुलिस ने यूथ कॉन्ग्रेस के चार नेताओं कृष्ण हरि, कुंदन यादव, अजय कुमार और नरसिम्हा यादव को गिरफ्तार किया।

बाद में कोर्ट ने उन्हें पाँच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि गिरफ्तार आरोपितों की योजना नेपाल जैसी स्थिति पैदा करने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि धूमिल करने की थी।

जहाँ यूथ कॉन्ग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार बताया, वहीं बीजेपी ने इस घटना को राष्ट्रीय शर्म करार देते हुए आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस ने एक इंटरनेशनल कार्यक्रम का राजनीतिकरण करने की कोशिश की।

इंदौर में हिंसक झड़पों में कई लोग घायल

राजनीतिक तनाव जल्द ही सड़कों तक पहुँच गया। इंदौर के मच्छी बाजार स्थित कॉन्ग्रेस कार्यालय के पास शनिवार (21 फरवरी 2026) को भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ताओं और कॉन्ग्रेस समर्थकों के बीच झड़पें हुईं।

बताया गया कि BJYM कार्यकर्ता AI समिट में युवा कॉन्ग्रेस की कार्रवाई के विरोध में एकत्र हुए थे। भारी पुलिस बैरिकेडिंग के बावजूद तनाव तेजी से बढ़ गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अचानक पथराव शुरू हो गया और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हिंसा शुरू करने का आरोप लगाया।

बीजेपी की महिला कार्यकर्ता बिंदु चौहान उस समय गंभीर रूप से घायल हो गईं जब एक पत्थर उनकी आँख के पास लगा। बीजेपी ने जो तस्वीरें शेयर की हैं, उसमें उनके माथे और नाक से खून बहता दिखाई दिया। अपने बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस कार्यालय की ओर से पथराव किया गया और उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया। इस झड़प में कई अन्य प्रदर्शनकारी, मीडिया कर्मी और एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर भी घायल हुए।

मामले में पंढरीनाथ पुलिस स्टेशन ने दो FIR दर्ज की। एक भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता अवेश राठौर की शिकायत पर और दूसरा कॉन्ग्रेस नेताओं की शिकायत पर। इसके अलावा पुलिस ने सरकारी काम में बाधा और सरकारी आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में एक और मामला भी दर्ज किया।

BJYM की शिकायत में करीब 20 कॉन्ग्रेस नेताओं को नामजद किया गया है, जिनमें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े शामिल हैं, साथ ही कई अज्ञात लोगों को भी आरोपित बनाया गया है। इन पर अवैध जमावड़ा, दंगा, जानबूझकर चोट पहुँचाना और आपराधिक साजिश जैसी धाराएँ लगाई गई हैं।

कॉन्ग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि BJYM कार्यकर्ताओं ने कॉन्ग्रेस कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की और बाहर खड़े वाहनों को नुकसान पहुँचाया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिम्मेदारी तय करने के लिए दोनों पक्षों के CCTV  फुटेज और वीडियो साक्ष्यों की जाँच की जा रही है। पुलिस ने कहा कि यह निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी कि हिंसा किस पक्ष ने शुरू की।

AI समिट का नतीजा देश भर में राजनीतिक तूफान बन गया

AI समिट में हुए हंगामे का असर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। अगले ही दिन यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली और चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए और एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की। दोनों शहरों में सुरक्षा कर्मियों से झड़प के बाद पुलिस को प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।

दिल्ली के कुछ इलाकों में महात्मा गाँधी की तस्वीर के साथ ‘Shirtless Congressi’ लिखे पोस्टर भी लगाए गए, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया। इस बीच भारतीय जनता युवा मोर्चा ने कई राज्यों में जवाबी प्रदर्शन आयोजित करते हुए आरोप लगाया कि INC भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचा रही है।

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि गिरफ्तार यूथ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय नेताओं और बड़ी टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों के सामने हंगामा करने की कोशिश की थी। पुलिस ने यह भी कहा कि आरोपितों के मोबाइल फोन की जाँच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं किसी बाहरी फंडिंग की भूमिका तो नहीं थी।

वहीं बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और राजनीतिक असहमति को अपराध नहीं माना जाना चाहिए।

पुडुचेरी में BJP ऑफिस के बाहर हिंसक झड़प

तनाव जल्द ही पुदुचेरी तक फैल गया, जहाँ कॉन्ग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प में पाँच लोग घायल हुए, जिनमें पुलिस अधीक्षक वमसी रेड्डी भी शामिल हैं। दरअसल करीब 100 कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता विरोध करने के लिए बीजेपी कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। रास्ते में पुलिस बैरिकेड को तोड़ते हुए ये वहाँ तक पहुँचने की कोशिश की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूँका। इस दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ इनकी भिड़ंत हुई।

यह प्रदर्शन राज्य कॉन्ग्रेस अध्यक्ष वी वैथिलिंगम और पूर्व मुख्यमंत्री वी नारायणसामी के नेतृत्व में आयोजित किया गया था। बीजेपी कार्यालय के पास स्थिति को बिगड़ते देख कर पुलिस को प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान SP वामसी रेड्डी के हाथ में चोट लग गई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 100 से अधिक पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया।

कामारेड्डी में जमीन विवाद को लेकर झड़प

तेलंगाना के कामारेड्डी में कॉन्ग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं की भिड़ंत जमीन विवाद को लेकर शनिवार (21 फरवरी 2026) को हुई। झड़प की वजह राज्य के एडवाइजर मोहम्मद अली शब्बीर और बीजेपी विधायक के वेंकट रामन रेड्डी के बीच तीखी नोंकझोंक की वजह से हुई।

कॉन्ग्रेस नेता गिरी रेड्डी महेंद्र रेड्डी और उनके समर्थक बीजेपी विधायक के कैंप ऑफिस के पास जमा हुए और उनके खिलाफ प्रदर्शन किया। इनलोगों ने महेंद्र रेड्डी की कार पलट दी। पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था।

तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे राजनीतिक हिंसा करार दिया। X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने कहा, “कामारेड्डी बीजेपी विधायक के वेंकट रमना रेड्डी गारू के कैंप ऑफिस पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं का हमला बहुत निंदनीय और चौंकाने वाला है…” राव ने कहा, “ऐसी पॉलिटिकल हिंसा की लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि वह BJP कार्यकर्ताओं के साथ खड़े होने और हालात का जायजा लेने के लिए वे खुद मौके पर जाएँगे।

तेलंगाना में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने BRS ऑफिस पर धावा बोला

तेलंगाना के भोंगीर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाल ही में बीआरएस के ऑफिस पर धावा बोल दिया था। आरोप लगाया कि BRS के एक नेता ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के बारे में गलत बातें कही।

चश्मदीदों के मुताबिक, कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने ऑफिस में तोड़-फोड़ की, फर्नीचर को नुकसान पहुँचाया और कुर्सियाँ ​​फेंकी, जिससे काफी नुकसान हुआ। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भीड़ को तितर-बितर किया। दोषियों की पहचान के लिए CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

BRS के वर्किंग प्रेसिडेंट के. टी. रामा राव ने इस घटना की निंदा की और राज्य में हिंसा और अराजकता के कल्चर को बढ़ावा देने के लिए कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की माँग की और ऐसे हमलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा।

जैसे-जैसे राज्यों में झड़पें और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, राजनीतिक माहौल गरमा रहा है। गुंडागर्दी, हिंसा और ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर देश को शर्मिंदा करने की कोशिशों ने पार्टियों की लक्ष्मण रेखा लाँघने की नई परिपाटी को जन्म दिया है।

(ये लेख अंग्रेजी में लिखा गया है। मूल रूप को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें)


कौन था ₹136 करोड़ का इनामी एल मैंचो? जिसकी मौत के बाद मेक्सिको में भड़की हिंसा: भारत ने अपने नागरिकों से कहा- अगले आदेश तक घर से न निकलें

मेक्सिको इस समय अपने हालिया इतिहास के सबसे गंभीर सुरक्षा संकटों में से एक से गुजर रहा है। देश के कई राज्यों में अचानक भड़की हिंसा, आगजनी, गोलीबारी, सड़क जाम और व्यापक दहशत ने आम जनजीवन को लगभग ठप कर दिया है। सार्वजनिक परिवहन से लेकर हवाई सेवाएँ तक प्रभावित हुई हैं। बाजार बंद हैं, स्कूलों में छुट्टियाँ घोषित कर दी गई हैं और लोगों को घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई है।

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में है मेक्सिको के सबसे कुख्यात ड्रग माफिया एल मेंचो की मौत। एक बड़े सैन्य ऑपरेशन में उसकी मौत के बाद उसके संगठन जालिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल (CJNG) ने पूरे देश में जवाबी हिंसा छेड़ दी। हालात इतने बिगड़ गए कि भारत, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों को भी अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी करनी पड़ी।

मेक्सिको में अचानक क्यों भड़क उठी हिंसा?

रविवार (22 फरवरी 2026) की देर रात मेक्सिको के पश्चिमी राज्य जालिस्को के छोटे से कस्बे Tapalpa में सेना और सुरक्षा बलों ने एक अत्यंत गोपनीय और बड़े स्तर का ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन का मकसद था CJNG के सरगना एल मेंचो को पकड़ना या मार गिराना।

मुठभेड़ के दौरान एल मेंचो गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत हेलीकॉप्टर से इलाज के लिए मेक्सिको सिटी ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। जैसे ही यह खबर फैली, CJNG के लड़ाकों ने बड़े पैमाने पर हिंसक जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।

कार्टेल के हथियारबंद गुर्गों ने सड़कों पर गाड़ियाँ जला दीं, हाईवे जाम कर दिए, दुकानों और पेट्रोल पंपों को आग के हवाले कर दिया और सुरक्षा बलों पर हमले किए। देखते ही देखते हालात जालिस्को से निकलकर कई अन्य राज्यों तक फैल गए।

(फोटो साभार: दैनिक जागरण)

कौन था एल मेंचो और दुनिया के सबसे खतरनाक ड्रग लॉर्ड्स में क्यों गिना जाता था?

एल मेंचो का असली नाम नेमेसियो रूबेन ओसेगुएरा सर्वेंटेस था। उसका जन्म 1966 में मेक्सिको के मिचोआकान राज्य के एक गरीब गाँव में हुआ था। बेहतर जिंदगी की तलाश में वह 1980 के दशक में अमेरिका चला गया, लेकिन वहाँ अपराध की दुनिया में फँस गया।

अमेरिका में वह हेरोइन तस्करी के मामलों में पकड़ा गया, जेल गया और बाद में मेक्सिको डिपोर्ट कर दिया गया। स्वदेश लौटने के बाद उसने कुछ समय तक स्थानीय पुलिस में नौकरी की, लेकिन जल्दी ही संगठित अपराध की ओर मुड़ गया।

उसने मिलेनियो कार्टेल के जरिए अपनी पहचान बनाई और फिर 2009 में जालिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल (CJNG) की स्थापना की। कुछ ही वर्षों में CJNG मेक्सिको का सबसे ताकतवर और हिंसक ड्रग कार्टेल बन गया। यह संगठन अमेरिका और अन्य देशों में फेंटानिल, मेथामफेटामीन, कोकीन और हेरोइन की बड़े पैमाने पर तस्करी करता था।

एल मेंचो अपने अत्यंत क्रूर तरीकों, खुलेआम सैन्य टकराव और भारी हथियारों के इस्तेमाल के लिए कुख्यात था। अमेरिका ने उसकी गिरफ्तारी पर 1.5 करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा था। उस पर अमेरिका में कई गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज थे और वह दुनिया के सबसे वांछित अपराधियों में शुमार था।

कैसे ढेर हुआ एल मेंचो?

मेक्सिको की सेना, नेशनल गार्ड और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर Tapalpa में यह विशेष ऑपरेशन अंजाम दिया। खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और एल मेंचो के ठिकाने पर छापा मारा। भीषण मुठभेड़ के दौरान एल मेंचो घायल हो गया।

इस कार्रवाई में छह संदिग्ध कार्टेल सदस्य मारे गए, तीन सैनिक घायल हुए और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। सुरक्षा बलों ने बड़ी मात्रा में हथियार भी बरामद किए, जिनमें रॉकेट लॉन्चर जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल थे, जो हेलीकॉप्टर गिराने और बख्तरबंद गाड़ियों को तबाह करने में सक्षम हैं।

अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को जोआक्विन ‘एल चापो’ गुजमान और इस्माइल जाम्बादा जैसे बड़े ड्रग लॉर्ड्स की गिरफ्तारी के बाद संगठित अपराध पर सबसे बड़ी कार्रवाई बताया।

मौत के बाद बेकाबू हुई हिंसा: कई राज्यों में आगजनी और अराजकता

एल मेंचो की मौत के कुछ ही घंटों के भीतर पूरे क्षेत्र में अराजकता फैल गई। जालिस्को, मिचोआकान, गुआनाहुआतो, तमाउलीपास, गुएरेरो और न्यूवो लियोन जैसे राज्यों में हिंसा की खबरें सामने आईं। 20 से ज्यादा सड़कों पर जलती हुई गाड़ियाँ खड़ी कर हाईवे जाम कर दिए गए।

(फोटो साभार: दैनिक जागरण)

ग्वाडलहारा और पुएर्तो वायार्ता जैसे बड़े शहरों में दुकानें, फार्मेसियाँ और पेट्रोल पंप बंद कर दिए गए। कई जगहों पर आगजनी की घटनाएँ हुईं और आम लोग जान बचाकर घरों में दुबक गए। पर्यटन केंद्र पुएर्तो वायार्ता में हालात इतने खराब हो गए कि पर्यटकों ने इसे ‘युद्ध जैसे दृश्य’ बताया। हवाई अड्डों पर भगदड़ के माहौल में कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

स्कूल, खेल और उड़ानों पर असर: जनजीवन पूरी तरह ठप

हालात बिगड़ने के चलते कई राज्यों में स्कूल बंद कर दिए गए और सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। 2026 फुटबॉल वर्ल्ड कप के तहत होने वाले कुछ आयोजनों को भी स्थगित करना पड़ा। मैक्सिको की घरेलू फुटबॉल लीग के कई मैच टाल दिए गए, महिला लीग और अंतरराष्ट्रीय फ्रेंडली मुकाबले भी रद्द हुए।

अमेरिका और कनाडा की प्रमुख एयरलाइनों ने पुएर्तो वायार्ता और आसपास के इलाकों के लिए उड़ानें निलंबित कर दीं, जिससे हजारों यात्री फँस गए।

भारत की एडवाइजरी: भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत के दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की। इसमें कहा गया कि जालिस्को (पुएर्तो वायार्ता, चापाला, ग्वाडलहारा), तमाउलीपास, मिचोआकान, गुएरेरो और न्यूवो लियोन में रह रहे भारतीय नागरिक अगले आदेश तक घर के अंदर ही रहें।

दूतावास ने आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी करते हुए बतायै है कि मेक्सिको में रह रहे भारतीय नागरिक +52 55 4847 7539 इस नंबर कॉल करके संपर्क कर सकते हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

अमेरिका और कनाडा की चेतावनी: ‘शेल्टर इन प्लेस’ का आदेश

भारत के अलावा अमेरिका ने भी अपने नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि प्रभावित राज्यों में रह रहे अमेरिकी नागरिक जहाँ हैं वहीं सुरक्षित स्थान पर रुकें, गैर-जरूरी यात्रा से बचें, कानून व्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों से दूरी बनाए रखें और स्थानीय मीडिया पर नजर रखें।

कनाडा सरकार ने भी अपने नागरिकों को खासतौर पर पुएर्तो वायार्ता और ग्वाडलहारा में घरों के अंदर रहने और भीड़भाड़ से दूर रहने की सलाह दी।

अमेरिका की भूमिका और ट्रंप का बयान

एल मेंचो की मौत के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  के एक सोशल मीडिया पोस्ट, जिसमें उन्होंने लिखा है, वी आर वीनिंग टू मच” “ने वॉशिंगटन की भूमिका पर अटकलें तेज कर दीं। कई लोगों ने इसे इस ऑपरेशन में अमेरिका की सीधी भूमिका से जोड़कर देखा।

हालाँकि मेक्सिको स्थित अमेरिकी दूतावास ने सफाई दी कि यह ऑपरेशन पूरी तरह मेक्सिको के विशेष बलों द्वारा किया गया था और अमेरिका ने केवल खुफिया सहयोग दिया। व्हाइट हाउस ने भी यही कहा कि यह संयुक्त खुफिया समन्वय का परिणाम था, न कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई।

मेक्सिको सरकार की प्रतिक्रिया: राष्ट्रपति ने की शांति की अपील

मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम (Claudia Sheinbaum) ने देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि केंद्र सरकार सभी राज्यों के साथ मिलकर हालात को काबू में करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है और जल्द ही हालात सामान्य किए जाएँगे। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि एल मेंचो की मौत संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता है, लेकिन इसके बाद भड़की हिंसा गंभीर चिंता का विषय है।

CJNG का खौफ और आगे की चुनौती

जालिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल पिछले एक दशक में मेक्सिको का सबसे ताकतवर आपराधिक संगठन बन चुका है। भारी हथियार, सैन्य शैली के काफिले और खुलेआम हिंसा इसके प्रमुख हथकंडे रहे हैं। एल मेंचो की मौत से संगठन को बड़ा झटका लगा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हिंसा और अंदरूनी सत्ता संघर्ष बढ़ सकता है।

एल मेंचो की मौत मेक्सिको के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। यह संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता जरूर है, लेकिन इसके बाद भड़की हिंसा ने यह साफ कर दिया है कि ड्रग कार्टेल की जड़ें कितनी गहरी हैं। सड़कों पर जलती गाड़ियाँ, बंद बाजार, रद्द उड़ानें और दहशत का माहौल इस बात का संकेत हैं कि मेक्सिको को शांति बहाल करने के लिए अभी लंबा और कठिन संघर्ष करना होगा।

आँख पर छिड़का फायर एक्सटिंग्विशर, डंडे-चाकू-पत्थर लेकर की छात्रों की पिटाई: JNU में वामपंथी गुंडों के बवाल मचाने की Videos सामने आई, कई ABVP कार्यकर्ता बुरी तरह घायल

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में रविवार (22 फरवरी 2026) की देर रात हिंसक झड़प की गंभीर घटना सामने आई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने आरोप लगाया है कि वामपंथी संगठनों से जुड़े तत्वों ने उनके कार्यकर्ताओं और छात्रों पर सुनियोजित हमला किया, जिसमें कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए। ABVP के मुताबिक, यह हिंसा बीते एक सप्ताह से चल रही वामपंथी संगठनों की हड़ताल के बाद भड़की, जिसने पूरे कैंपस में भय और अराजकता का माहौल पैदा कर दिया।

सोशल साइंसेज स्कूल में बायोटेक छात्र पर जानलेवा हमला

ABVP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए बताया कि स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के छात्र प्रतीक भारद्वाज पर स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज परिसर के भीतर हमला किया गया। आरोप है कि पहले प्रतीक की आँख में फायर एक्सटिंग्विशर पाउडर छिड़का और फिर बेरहमी से पीटा गया।

इतना ही नहीं हमले के दौरान एक सिलेंडर खोलकर उसका भी इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है। इस बर्बर हमले में प्रतीक गंभीर रूप से घायल हो गया। प्रतीक को अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। छात्र ने खुद बताया है कि कैसे डंडे और चाकू लेकर उस पर हमला किया गया और वह बचने के लिए वॉशरुम में छिपा हुआ है।

X पर ABVP ने घायल छात्र का एक और वीडियो शेयर किया है, जिसमें उसे सहारा देकर अस्पताल ले जाया जा रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि छात्र बुरी तरह घायल है, उसे उल्टियाँ हो रही हैं और वो ठीक से चल भी नहीं पा रहा है। वीडियो को शेयर कर ABVP ने तुरंत कार्रवाई की माँग की है।

प्रतीक की ही तरह ABVP के एक कार्यकर्ता विजय जायसवाल पर भी हमला किया गया। छात्र ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर इसकी जानकारी दी। वीडियो में विजय ने दिखाया कि वामपंथी गुट किस तरह मार्च को छोड़ कर अचानक स्टूडेंट्स पर हमला करना शुरू कर दिया और जानबूझकर कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने लगे।

ABVP ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर लिखा, “वीडियो में देखिए किस प्रकार वामपंथी संगठन के लोग हाथ में पत्थर लाठी ले कर घूम रहे है और जब हम वीडियो रिकॉर्ड करने लगे तो वहाँ से भागना शुरू कर दिए। वामपंथियों का हमेशा से यही फसाना है, जब खुद से क्रांति नहीं होती है तो जबरदस्ती अपनी क्रांति छात्रों पर लादना शुरू कर देते है।”

पोस्ट में आगे लिखा, “आज जब वामपंथी संगठन के स्कूल में ताला बंद करने लगे तो वहाँ रीडिंग रूम्स में पढ़ने वाले छात्रों ने उसका विरोध किया और उन्हें मारना शुरू कर दिया जिसको लेकर हम बात करने गए तो हमारे ऊपर भी पत्थरबाजी शुरू कर दी।”

रातभर आतंक का माहौल, सैकड़ों नकाबपोशों ने फैलाई हिंसा

JNU छात्र संघ के संयुक्त सचिव और ABVP नेता वैभव मीणा ने इस पूरी घटना को ‘आतंक की रात’ करार दिया। उन्होंने कहा कि पिछले 7-8 दिनों से वामपंथी संगठनों की हड़ताल चल रही थी और इसी की आड़ में सैकड़ों नकाबपोश हमलावरों ने कैंपस में बवाल मचाया।

मीणा के अनुसार, “300 से 400 नकाबपोश लोगों की भीड़ ने लाइब्रेरी और रीडिंग रूम में पढ़ रहे छात्रों को खदेड़ दिया और उनके साथ मारपीट की।” उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि विजय नाम के एक छात्र को 100 से 150 लोगों की भीड़ ने बेरहमी से पीटा। उन्होंने इस घटना को ‘मॉब लिंचिंग’ बताया।

मीणा ने दिल्ली पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि पूरी रात हिंसा होती रही, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

#LeftAttacksJNUAgain अभियान, सख्त कार्रवाई की माँग

ABVP ने इस घटना के विरोध में सोशल मीडिया पर #LeftAttacksJNUAgain अभियान शुरू किया और दिल्ली पुलिस से तत्काल कार्रवाई की माँग की। संगठन ने कहा कि यह छात्र राजनीति नहीं, बल्कि सुनियोजित और ठंडे दिमाग से की गई हिंसा है, जिसमें सिर्फ पढ़ाई कर रहे छात्रों को निशाना बनाया गया।

ABVP ने आरोप लगाया कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के परिसर को युद्धक्षेत्र में बदल दिया गया है और छात्रों की जान खतरे में डाल दी गई है। संगठन ने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।

फिलहाल वामपंथी संगठनों की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं पूरे घटनाक्रम के बाद JNU परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है और छात्र सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

क्या पहले से हो रही थी तैयारी?

बता दें कि 22 फरवरी की रात जेएनयू में जो हमला हुआ है वो कोई अचानक घटी घटना नहीं है। पिछले कुछ दिनों से JNU में लगातार ऐसा माहौल बनाया जा रहा था जिससे ये साफ था कि ऐसी कोई घटना कभी भी हो सकती है। इसी हफ्ते चेतावनी रैली में ब्राह्मणविरोधी नारेबाजी सुनी गई थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री के खिलाफ अभद्र नारे लगाए गए थे।