टीआरपी हेरफेर घोटाले की जाँच कर रही मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रिपब्लिक टीवी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) प्रिया मुखर्जी को तलब किया है। मुंबई पुलिस ने प्रिया मुखर्जी को मंगलवार (नवंबर 17, 2020) को पूछताछ के लिए बुलाया है। पुलिस ने बताया कि प्रिया मुखर्जी घनश्याम सिंह (44) की गतिविधियों के बारे में प्राप्त जानकारी के संबंध में बुलाया गया है।
बता दें कि घनश्याम सिंह रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के असिसटेंट वाइस प्रेसिडेंट और डिस्ट्रीब्यूशन हेड हैं। उन्हें पिछले हफ्ते फेक टीआरपी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। शुक्रवार (नवंबर 13, 2020) को हॉलीडे कोर्ट में पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें 16 नवंबर तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस का कहना है कि घनश्याम सिंह ने केबल ऑपरेटरों और मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs) के साथ मिलकर रिपब्लिक टीवी को ड्यूल लॉजिकल चैनल नंबर (LCNs) या दो फ्रीक्वेंसी पर चलाया, जो भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।
एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “घनश्याम सिंह ने कथित तौर पर केबल ऑपरेटरों और MSOs को दो आवृत्तियों पर चैनल चलाने के लिए पैसे का भुगतान किया, जिससे उन्हें टीआरपी में सुधार करने में मदद मिली। हम वित्तीय पहलुओं की जाँच करना चाहते हैं।”
गौरतलब है कि टीआरपी हेरफेर मामले में हंसा रिसर्च ग्रुप ने मुंबई पुलिस पर बेहद संगीन आरोप लगाए थे। ग्रुप ने कहा था कि मुंबई पुलिस द्वारा उन्हें रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के खिलाफ गलत बयान देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बार और बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, BARC के बार-ओ-मीटर (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) का संचालन करने वाली कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए इस मामले की जाँच मुंबई पुलिस के बजाय केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की माँग की।
बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर याचिका में हंसा रिसर्च ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके कर्मचारियों को फर्जी बयान जारी करने के लिए दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है। साथ ही रिपब्लिक टीवी द्वारा जारी एक डॉक्यूमेंट को फर्जी करार देने के लिए कह रही है।
वहीं वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल के बेटे अखिल सिब्बल ने बॉलीवुड के एक प्रख्यात प्रोडक्शन हाउस का पक्ष रखते हुए स्वीकार किया था कि रिपब्लिक टीवी की दर्शक दीर्घा (audience base) और टीआरपी काफी ज़्यादा है।
मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि के 13.37 एकड़ जमीन के स्वामित्व का विवाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुँच गया है। सुप्रीम कोर्ट के वकील महक माहेश्वरी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता की माँग है कि जिस जगह पर शाही ईदगाह मस्जिद बनाई गई है, उसे हिंदुओं को दिया जाए, ताकि उस भूमि पर भी मंदिर निर्माण किया जा सके।
इस याचिका के निपटारे तक कोर्ट जन्माष्टमी या हफ्ते में कुछ दिन ईदगाह मस्जिद के भीतर हिंदुओं को पूजा अर्चना करने की इजाजत दी जाए। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु जैन, वकील रंजना अग्निहोत्री समेत 6 लोगों ने कृष्ण विराजमान की तरफ से मथुरा के जिला अदालत में याचिका दाखिल की थी। वहीं तीन अन्य संस्थाओं ने भी इस केस में खुद को पक्षकार बनाए जाने की माँग करते हुए जिला अदालत में याचिका दाखिल की है। जिस पर 18 नवंबर को सुनवाई प्रस्तावित है।
याचिका में और क्या-क्या बातें रखी गई
कोर्ट सरकार को निर्देश दे कि अदालत की निगरानी में विवादित भूमि की खुदाई की जाए और रिपोर्ट कोर्ट में सौंपी जाए।
जिस जगह शाही ईदगाह मस्जिद है, उसी जगह पर कारागार था। जहाँ भगवान का जन्म हुआ था।
प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 एक्ट को चुनौती दी गई है। इस एक्ट में है कि 1947 के बाद धार्मिक स्थलों का जैसा स्वरूप है, वैसा ही रहेगा। यह एक्ट काशी, मथुरा में हिंदुओं के मालिकाना हक के लिए कानूनी लड़ाई से रोकता है। यह एक्ट राम जन्मभूमि पर लागू नहीं था।
जहाँ भगवान का जन्म हुआ, वहाँ हिंदुओं को प्रार्थना करने की इजाजत दी जाए, क्योंकि यह हिंदुओं का मौलिक अधिकार है।
कृष्ण जन्मभूमि जन्मस्थान के लिए एक उचित ट्रस्ट बनाया जाए, जो उक्त जमीन पर मंदिर का निर्माण कर सकें।
गौरतलब है कि 16 अक्टूबर, 2020 को मथुरा के जिला कोर्ट में जज ने श्रीकृष्ण विराजमान की याचिका स्वीकार कर ली। इस संबंध में जिला जज मथुरा साधनी रानी ठाकुर की कोर्ट में 12 अक्टूबर को दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के 13 एकड़ के कटरा केशव देव मंदिर के परिसर पर 17वीं शताब्दी में शाही ईदगाह बनाया गया था।
इससे पहले मथुरा के सिविल कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने का फैसला किया। मथुरा सिविल जज सीनियर डिवीजन में श्रीकृष्ण विराजमान का वाद दायर करने वाले हरिशंकर जैन, विष्णु जैन व रंजना अग्निहोत्री ने कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मामले में याचिका दाखिल की थी।
बता दें कि मथुरा की अदालत में दायर हुए एक सिविल मुकदमे में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर की 13.37 एकड़ जमीन का मालिकाना हक माँगा गया था। इसके साथ ही मंदिर स्थल से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की अपील की गई। इससे पहले 28 सितंबर को हुई संक्षिप्त सुनवाई में एडीजी छाया शर्मा ने मामले को सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया था। श्रीकृष्ण विराजमान व सात अन्य ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर एक दावा 25 सितंबर को अदालत में प्रस्तुत किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार (नवंबर 14, 2020) को राजस्थान के जैसलमेर स्थित लोंगेवाला (Longewala) में तैनात सीमा सुरक्षा बल के जवानों के साथ दीवाली मनाई। जवानों के साथ दीवाली मनाने की परंपरा को कायम रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी जैसलमेर बॉर्डर पहुँच गए हैं। उनके साथ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत, आर्मी चीफ एमएम नरवने और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के डायरेक्टर जनरल राकेश अस्थाना भी हैं।
पीएम ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा, “मैं आज आपके बीच प्रत्येक भारतवासी की शुभकामनाएँ लेकर आया हूँ। आपके लिए प्यार लेकर आया हूँ, आशीष लेकर आया हूँ। मैं आज उन वीर माताओं-बहनों और बच्चों को भी दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ, उनके त्याग को नमन करता हूँ, जिनके अपने सरहद पर हैं।”
इस दौरान पीएम ने चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि आज पूरा विश्व विस्तारवादी ताकतों से परेशान हैं। विस्तारवाद, एक तरह से मानसिक विकृति है और अठ्ठारहवीं शताब्दी की सोच को दर्शाती है। इस सोच के खिलाफ भी भारत प्रखर आवाज बन रहा है।
#WATCH: Whenever history on the excellence of soldiers will be written and read, the Battle of Longewala will be remembered: PM Narendra Modi in Jaisalmer, #Rajasthanpic.twitter.com/d6KSUw7bzZ
पीएम ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा, “आज दुनिया ये जान रही है, समझ रही है कि ये देश अपने हितों से किसी भी कीमत पर रत्ती भर भी समझौता करने वाला नहीं है। भारत का ये रुतबा, ये कद आपकी शक्ति और आपके पराक्रम के ही कारण है। आपने देश को सुरक्षित किया हुआ है इसीलिए आज भारत वैश्विक मंचों पर प्रखरता से अपनी बात रखता है।”
130 Crore Indians are standing with you. Every Indian is proud of the strength and valour of our soldiers. They are proud of your invincibility. No power in the world can stop our brave soldiers from guarding the borders of our country: PM Modi pic.twitter.com/Xkgmv4nDq7
उन्होंने कहा, “आपके शौर्य को नमन करते हुए आज भारत के 130 करोड़ देशवासी आपके साथ मजबूती से खड़े हैं। आज हर भारतवासी को अपने सैनिकों की ताकत और शौर्य पर गर्व है। उन्हें आपकी अजेयता पर, आपकी अपराजेयता पर गर्व है।”
देशवासियों को दी शुभकामनाएँ
प्रधानमंत्री ने दीपावली के शुभ अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएँ भी दी। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “सभी देशवासियों को दीपावली की हार्दिक मंगलकामनाएँ। यह त्योहार लोगों की जिंदगी में खुशहाली लाए और सभी स्वस्थ व समृद्ध रहें।”
शुक्रवार (नवंबर 13, 2020) को ही प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा था, “इस दीपावली हम सभी एक दीया उन सैनिकों के सम्मान में जलाएँ जो निडर होकर देश की रक्षा करते हैं। सैनिकों की अनुकरणीय बहादुरी के लिए उनके प्रति शब्दों से कृतज्ञता ज्ञापित करने की भावना न्याय नहीं कर सकती। हम सीमाओं पर डटे सैनिकों के परिवार वालों के प्रति भी कृतज्ञ हैं।”
This Diwali, let us also light a Diya as a #Salute2Soldiers who fearlessly protect our nation. Words can’t do justice to the sense of gratitude we have for our soldiers for their exemplary courage. We are also grateful to the families of those on the borders. pic.twitter.com/UAKqPLvKR8
उन्होंने कहा, “हमें अपने उन जांबाज सैनिकों को भी याद रखना है, जो इन त्योहारों पर भी सीमाओं पर डटे हैं। भारत माता की सेवा और सुरक्षा कर रहे हैं। हमें उनको याद करके ही अपने त्योहार मनाने हैं। हमें घर में एक दीया भारत माता के इन वीर बेटे-बेटियों के सम्मान में भी जलाना है। मैं अपने वीर जवानों से भी कहना चाहता हूँ कि भले ही आप सीमा पर हैं, लेकिन पूरा देश आपके साथ है, आपके लिए कामना कर रहा है। मैं उन परिवारों के त्याग को भी नमन करता हूँ, जिनके बेटे-बेटियाँ आज सरहद पर हैं। हर वो व्यक्ति जो देश से जुड़ी किसी न किसी जिम्मेदारी की वजह से अपने घर पर नहीं है, अपने परिवार से दूर है, मैं हृदय से उनका आभार प्रकट करता हूँ।”
पिछले 6 सालों में पीएम मोदी ने कहाँ-कहाँ मनाई दिवाली?
2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से मोदी हर साल दीवाली जवानों के साथ मनाते रहे हैं। पहली बार वे सियाचिन में जवानों के बीच पहुँचे थे। इस बार कोरोना आपदा के बावजूद उन्होंने यह परंपरा कायम रखी है। उनका लोंगेवाला पोस्ट पहुँचना इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि 1971 के युद्ध में यहाँ पाकिस्तान को करारी शिकस्त मिली थी और संघर्षविराम उल्लंघन के कारण सीमा पर तनाव बना हुआ है।
सियाचिन में जवानों के बीच दिवाली मनाते पीएम मोदी
2014: पीएम मोदी ने सियाचिन में जवानों के बीच दिवाली मनाई थी।
अमृतसर (पंजाब) बॉर्डर परजवानों के बीच दिवाली मनाते पीएम मोदी
2015: प्रधानमंत्री ने अमृतसर (पंजाब) बॉर्डर पर जवानों के साथ दिवाली मनाई थी।
चीन बॉर्डर के पास इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवानों के साथ दिवाली मनाते पीएम मोदी
2016: मोदी ने हिमाचल प्रदेश से लगे चीन बॉर्डर के पास इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवानों के साथ दिवाली मनाई।
म्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में सैनिकों के साथ दिवाली मनाते पीएम मोदी
2017: इस साल मोदी ने दिवाली का जश्न जम्मू-कश्मीर के गुरेज सेक्टर में सैनिकों के साथ मनाया।
उत्तराखंड में सैनिकों के साथ दिवाली मनाते पीएम मोदी
2018: प्रधानमंत्री दिवाली के मौके पर उत्तराखंड में केदारनाथ मंदिर के दर्शन के लिए गए थे। यहाँ उन्होंने चीन बॉर्डर के पास हरसिल गाँव के केंट इलाके में भारतीय सशस्त्र बल और ITBP के जवानों से मुलाकात की थी। यहाँ कहा था, “बर्फीले इलाके में आपका ड्यूटी के लिए समर्पण देश को मजबूती प्रदान करता है। आपके चलते ही सवा सौ करोड़ लोगों के सपने सुरक्षित हैं।”
जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सैनिकों के साथ दिवाली मनाते पीएम मोदी
2019: मोदी जम्मू-कश्मीर के राजौरी में नियंत्रण रेखा (LoC) पर तैनात जवानों के साथ दिवाली मनाने के लिए राजौरी पहुँचे थे। पीएम ने कहा था, “युद्ध हो या घुसपैठ हो, इस क्षेत्र को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यह जगह हमेशा उन परेशानियों से निकल आती है। यह ऐसा क्षेत्र है, जिसने कभी हार नहीं देखी।”
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक किताब लिखी है। नाम है- ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ (A promised Land)। इसमें उन्होंने मनमोहन सिंह और राहुल गाँधी पर निशाना साधा है। किताब में ओबामा ने राहुल को घबराया हुआ और अनगढ़ बताया है। NYT की समीक्षा के अनुसार, यह पुस्तक ओबामा की एक आत्मकथा है जो ‘व्यक्तिगत से अधिक राजनीतिक’ है।
पुस्तक की समीक्षा के बाद कॉन्ग्रेस की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। ओबामा का राहुल गाँधी के बारे में ये लिखना भर था कि तमाम कॉन्ग्रेसी नेता अपने ‘पूर्व अध्यक्ष’ के बचाव में सामने आ गए। बचाव में राहुल समर्थक चाटुकारिता की नई मिसाल गढ़ रहे हैं।
इस कड़ी में कॉन्ग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके आचार्य प्रमोद कृष्णन ने एक वीडियो शेयर किया है।
इस वीडियो में वे कहते नजर आ रहे हैं, “बराक ओबामा, राहुल गाँधी के साथ पढ़े हैं क्या या जिस स्कूल में राहुल गाँधी पढ़े, उस स्कूल में वो मास्टर थे या उन्होंने काबिलियत का सर्टिफिकेट देने का कोई इंस्टीट्यूट खोल रखा है। बराक ओबामा को यह कैसे पता चला कि राहुल गाँधी अयोग्य हैं। बराक ओबामा को यह कैसे पता चला कि राहुल गाँधी अपरिपक्व हैं, काबिल नहीं हैं, नर्वस छात्र हैं। बराक ओबामा को यह पता होना चाहिए कि राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के करोड़ों कार्यकर्ता के भगवान हैं। अपनी सीमा में रहें बराक ओबामा या फिर खुल कर बोल दें कि वो भी मोदी के अंधे भक्त हैं।”
ओबामा ने राहुल गांधी को “अयोग्य” बता कर, कांग्रेस के उन करोड़ों “कार्यकर्ताओं” के ह्रदय पर “वज्रपात” किया है, जो उन्हें “भगवान” की तरह मानते हैं.
आचार्य प्रमोद कृष्णन ने इससे पहले ट्वीट करते हुए लिखा था, “ओबामा ने राहुल गाँधी को ‘अयोग्य’ बता कर, कॉन्ग्रेस के उन करोड़ों ‘कार्यकर्ताओं’ के ह्रदय पर ‘वज्रपात’ किया है, जो उन्हें ‘भगवान’ की तरह मानते हैं।”
बराक “ओबामा” मोदी “मित्र” हैं ये सबको पता था,लेकिन वो अन्ध “भक्त” हैं, ये आज पता चला.
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा था, “बराक ‘ओबामा’ मोदी ‘मित्र’ हैं ये सबको पता था, लेकिन वो अन्ध ‘भक्त’ हैं, ये आज पता चला।”
कहना गलत नहीं होगा कि ये उसी दर्जे की चाटुकारिता है जिसमें ‘इंडिया इज इंदिरा’ और ‘सोनिया गाँधी पूरे देश की माँ’ है। बता दें कि आपातकाल के दौरान 1975 में कांग्रेस अध्यक्ष देव कांत बरुआ ने नारा दिया था: इंदिरा इज इंडिया एंड इंडिया इज इंदिरा (इंदिरा भारत हैं और भारत इंदिरा है)। वहीं मणिशंकर अय्यर के सोनिया गाँधी को प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के तौर पर राहुल का विकल्प बताने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा था कि सोनिया गाँधी सिर्फ राहुल गाँधी की माँ नहीं हैं, वे हमारी भी माँ हैं और पूरे देश की माँ हैं। कॉन्ग्रेस तो चाटुकारिता की हद को पार करने में कोशिश में ‘भारत माता की जय’ की जगह ‘सोनिया माता की जय’ तक कह देते हैं।
प्रमोद कृष्णन ने राहुल भक्ति दिखाते हुए जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है, वो कहीं न कहीं एक कॉन्ग्रेसी नेता के रूप में उन्होंने अपनी पार्टी का चाल, चरित्र और चेहरा पूरे देश के सामने जगजाहिर कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में एनडीए की जीत के लिए जिस नारी शक्ति का आभार जताया था उसे अब इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ रहा है। सहरसा की एक वृद्ध महिला ने घर वालों के कहने के बावजूद लालटेन का बटन नहीं दबाया और बीजेपी को वोट दे दिया। नतीजतन, उन्हें घर से निकाल दिया गया। इंसाफ माँगने के लिए महिला बिहार के मुख्यमंत्री आवास पहुँची, लेकिन वहाँ से पुलिस उसे थाने ले गई।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक सहरसा जिले के रामपुर गाँव की मुखियाइन देवी के साथ ये वाकया हुआ है। मुखियाइन देवी का परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा गाँव विरोधी हो गया है। परिवार समेत गाँव के लोग चुनाव में राजद को वोट देने को कह रहे थे। लेकिन मुखियाइन देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं से लाभान्वित होकर बीजेपी को वोट देने का फैसला लिया। तमाम विरोध के बावजूद मुखियाइन देवी ने कमल छाप का बटन दबाया। इसके बाद उन्हें जो झेलना पड़ा वो उन्होंने सीएम आवास के बाहर मीडियाकर्मियों को बताया।
मुखियाइन देवी ने मीडिया को बताया, “मेरे परिवार और गाँव के लोग लालटेन पर वोट देने के लिए कह रहे थे, लेकिन हम भाजपा को वोट दिए। इसके बाद बेटा-बहू ने मारपीट किया और घर से बाहर निकाल दिया।”
परेशान मुखियाइन देनी सहरसा से बस पकड़ कर पटना चली आई। वह सीएम आवास पहुँची ताकि बिहार के मुख्यमंत्री उसे न्याय दिलाएँगे। लेकिन मुख्यमंत्री आवास के बाहर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें सीएम से मिलने नहीं दिया। सचिवालय थाने को बुलाया गया और महिला को थाना ले जाया गया। मुखियाइन देवी बार-बार न्याय की गुहार लगा रही थी। उसके पास प्रधानमंत्री का फोटो, बीजेपी का झंडा और दूसरी प्रचार सामग्री मिली है।
गौरतलब है कि तेजस्वी यादव की अगुवाई में बिहार चुनाव लड़ रही राजद को चुनाव के नतीजों से गहरा झटका लगा है। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार को राजद के कार्यकर्ता पचा नहीं पा रहे हैं। यही वजह है कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) कार्यकर्ताओं का आक्रोश अब हिंसक हो रहा है। गुरुवार (नवंबर 12, 2020) को राजद कार्यकर्ताओं ने आरा-मोहनिया एनएच-30 को जाम कर दिया। राजद के कार्यकर्ताओं ने आगजनी भी की।
सड़क जाम कर रहे राजद कार्यकर्ताओं का कहना था कि इस बार के चुनाव परिणाम में धांधली हुई है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार की मिलीभगत से चुनाव का परिणाम घोषित किया गया है, जिसके विरोध में वो सड़क पर उतरे हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं। हालाँकि भोजपुर जिले में इस बार महागठबंधन का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा है। भोजपुर की 7 सीटों में से 5 पर महागठबंधन के प्रत्याशियों को जीत मिली है।
बता दें कि इससे पहले बिहार के अंतिम चरण के चुनाव के दौरान नीतीश कुमार के चुनाव चिह्न तीर पर वोट देने की बात कही तो लालटेन के निशान वाले RJD समर्थकों ने बुजुर्ग की बुरी तरह से पिटाई कर डाली। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में बुजुर्ग व्यक्ति RJD के गुंडों द्वारा अपने साथ की गई मारपीट के बारे में बताया था।
बुजुर्ग के साथ मारपीट करने वाले लोग कथित तौर पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के समर्थक थे और वह बुजुर्ग व्यक्ति को इसलिए पीट रहे थे क्योंकि उन्होंने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी के लिए मतदान किया। यह घटना बिहार के मधेपुरा जिले के भवानीपुरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बरगाँव की थी।
दिल्ली एनसीआर समेत कई राज्यों में सरकार ने बढ़ते प्रदूषण और कोरोना वायरस का बहाना देकर दीपावली के अवसर पर पटाखों की बिक्री बैन लगा दिया है। इस बीच उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आया है। पुलिस का अमानवीय चेहरा सामने आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्शन लेते हुए दोषी पुलिस वाले के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया है कि पुलिस हर किसी से संवेदनशीलता से पेश आए।
पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, बुलंदशहर पुलिस ने बयान जारी किया और बताया कि उक्त पुलिसकर्मी को बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करने के लिए पुलिस लाइन भेजा गया है।
वीडियो में देखा जा सकता है कि बुलंदशहर में कुछ दुकानदार खुलेआम पटाखे बेच रहे थे, जिन पर खुर्जा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 6 दुकानदारों को हिरासत में लिया और पटाखे जब्त कर लिए। इस दौरान एक बच्ची पुलिस से अपने पिता को छोड़ने की गुहार लगाती रही। बच्ची ने रोते हुए कई बार पुलिस की गाड़ी पर सिर मारा और पिता को छोड़ने की जिद्द की, लेकिन पुलिस वालों ने किसी तरह बच्ची हटा दिया और दुकानदार को लेकर चले गए। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
In UP’s Bulandshahar district, police crackdown against vendors selling crackers, despite ban, in a busy market in Khurja area. Bulandshahar is among 13 of the cities in state where there is blanket ban on crackers. pic.twitter.com/owFO1pqZPo
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद बुलंदशहर पुलिस ने ट्विटर पर बयान जारी किया। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से पटाखे बेचने की सूचना मिलने के बाद पुलिस की एक टीम मौके पर गई, पटाखों को जब्त किया और विक्रेताओं को हिरासत में लिया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने यह कार्रवाई इसलिए की क्योंकि उस जिले में पटाखों की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध है।
एसपी संतोष कुमार सिंह ने कहा कि इस घटना के दौरान, पटाखा विक्रेताओं के छोटे बच्चों ने वाहन को घेर लिया और रोने लगे। उन्होंने कहा कि कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए, पुलिस को संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ मामले से निपटने के लिए निर्देशित किया गया है।
बाद में बुलंदशहर ने ट्वीट कर जानकारी दी कि हेड कॉन्स्टेबल बृजबीर को अनधिकृत पटाखा विक्रेताओं को गिरफ्तार करते हुए बच्चों के प्रति असंवेदनशील व्यवहार के लिए पुलिस लाइन भेजा गया है।
माननीय मुख्यमंत्री योगीजी ने बुलंदशहर की घटना को बेहद संवेदनशीलता से लेते हुए ना सिर्फ पटाखा कारोबारी को तत्काल रिहा कराया बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों के हाथों उनके व उनकी मासूम बेटी के लिए दीपावली के उपहार व मिठाइयां भी भिजवांईं, दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख़्त कार्रवाई कर दी गई है। pic.twitter.com/J1VtZgw9hI
इसके साथ ही यूपी सीएम के मीडिया एडवाइजर शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट कर कहा, “मुख्यमंत्री योगी ने बुलंदशहर की घटना को बेहद संवेदनशीलता से लेते हुए ना सिर्फ पटाखा कारोबारी को तत्काल रिहा कराया, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों के हाथों उनके व उनकी मासूम बेटी के लिए दीपावली के उपहार व मिठाइयाँ भी भिजवाईं। दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर दी गई है। मुख्यमंत्री जी का स्पष्ट निर्देश है कि पुलिस हर किसी से संवेदनशीलता से पेश आए।”
मुख्यमंत्री जी का स्पष्ट निर्देश है कि पुलिस हर किसी से संवेदनशीलता से पेश आए, मुख्यमंत्री जी ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को रात में ही पटाखा कारोबारी के परिवार के बीच जाने के आदेश दिए,मुख्यमंत्री जी की पहल से इस परिवार की दीपावली खुशहाल और यादगार हो गई। pic.twitter.com/bgG0rPvKam
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में बच्ची के बयान का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि पुलिस हर किसी से संवेदनशीलता से पेश आए। मुख्यमंत्री ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को रात में ही पटाखा कारोबारी के परिवार के बीच जाने के आदेश दिए। मुख्यमंत्री की पहल से इस परिवार की दीपावली खुशहाल और यादगार हो गई।” बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 प्रदूषण प्रभावित जिलों में पटाखों की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है और बुलंदशहर भी उनमें से एक है।
कार्टूनिस्ट आरके लक्ष्मण ने 1959 में कहा था, “जैसे-जैसे वक्त बीतता जा रहा है नेहरू की प्रतिष्ठा और प्रसिद्धि का आधार कमजोर होता जा रहा है।” 60 साल बाद यह आधार कितना खोखला हो चुका है यह दबी-छिपी बात नहीं। सो, बाल दिवस पर कॉन्ग्रेस के ‘चाचा नेहरू’ को याद करने से बेहतर है बिहार के छपरा के भगेरन तिवारी के बेटे और दरभंगा के अभिराम दास को याद कर लीजिए।
इन दोनों की कहानी में भी नेहरू आएँगे। लेकिन, भगेरन तिवारी के बटे और अभिराम दास आपको जिस छोर पर खड़े मिलेंगे, ठीक उसके विपरीत ध्रुव पर नेहरू दिखेंगे। इनको याद करने का एक कारण यह भी है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण की हाल में ही नींव रखी गई है। करीब 500 साल बाद राम जन्मभूमि पर दीपोत्सव मनाया जा रहा है। यहाँ तक पहुॅंचने की लंबी संघर्ष यात्रा में भगेरन तिवारी के बेटे और अभिराम दास का बेहद महत्वपूर्ण योगदान है। योगदान तो नेहरू का भी है। रामलला की मूर्ति हटाने की नाकाम कोशिश का।
हेमंत शर्मा ‘युद्ध में अयोध्या’ में लिखते हैं कि भगेरन तिवारी के बेटे चंद्रशेखर तिवारी 1930 में जब अयोध्या आए तो वे आयुर्वेदाचार्य थे। दिगंबर अखाड़े की छावनी में परमहंस रामकिंकरदास से मिल वे रामचंद्रदास हो गए। काम मिला राम जन्मभूमि की मुक्ति का। 1934 में वे इस आंदोलन से जुड़े, 1975 में दिगंबर अखाड़े के महंत बने और 1989 में राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष। 1990 में अयोध्या में कारसेवकों के जिस जत्थे पर गोली चली उसका नेतृत्व भी परमहंस रामचंद्रदास ही कर रहे थे। राम जन्मभूमि पर मालिकाने और पूजा-पाठ के अधिकार को लेकर 1 जनवरी 1950 को फैजाबाद की अदालत में मुकदमा दायर करने वाले महंत रामचंद्र परमहंस ने 31 जुलाई 2003 को अंतिम सॉंसें ली। आखिरी दम तक वे राम जन्मभूमि के लिए लड़ते रहे।
कहानी के दूसरे नायक दरभंगा के मैथिल ब्राह्मण अभिराम दास गरीब परिवार से आते थे। 6 फुट के बलिष्ठ और हठी साधु अभिरामदास की गिनती अयोध्या के लड़ाकू साधुओं में होती थी। उनके बारे में ख्यात था कि उन्हें हनुमान जी की सिद्धि मिली हुई है। उनकी ख्याति रामजन्मभूमि के ‘उद्धारक बाबा’ के तौर पर थी। 3 दिसंबर 1981 को जब उनकी मौत हुई और हनुमानगढ़ी से उनका विमान (साधु की अर्थी) उठा तो ‘राम जन्मभूमि के उद्धारक अमर रहे’ के नारे लग रहे थे।
जिस मोड़ के कारण इन दोनों की कहानी में नेहरू आते हैं, वह 22-23 दिसंबर 1949 की दरम्यानी रात थी। ‘युद्ध में अयोध्या’ के मुताबिक हाड़ तोड़ने वाली ठंड की उस रात रामचंद्र परमहंस और अभिराम दास साधु-संतों के एक समूह के साथ सरयू स्नान करते हैं। नए वस्त्र धारण करते हैं। उनके साथ गीता प्रेस गोरखपुर के संस्थापक हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी) भी थे। भाईजी अष्टधातु की भगवान राम के बचपन की एक मूर्ति लेकर आए थे। मूर्ति का नदी किनारे ही पूजन-अर्चन होता। फिर मूर्ति को एक बॉंस की टोकरी में रख कपड़ों से ढका जाता है। बाबा अभिराम दास उसे सिर पर उठाते हैं। परमहंस रामचंद्र के हाथ सरयू जल से भरा एक तॉंबे का कलश होता है। समूह रामधुन गाता हुआ आगे बढ़ता है… और फिर विवादित ढॉंचे के नीचे रामलला बाल स्वरुप में भाइयों संग प्रकट होते हैं। सुबह के चार बजते-बजते रामजन्मभूमि स्थान पर मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा हो चुकी थी।
फिर इस कहानी में उस समय देश के प्रधानमंत्री रहे जवाहर लाल नेहरू की एंट्री होती है। हेमंत शर्मा लिखते हैं, “उत्तर प्रदेश के कुछ मुस्लिम नेताओं और देवबंद के उलेमाओं ने नेहरू को तार भेजकर उनका ध्यान अयोध्या की ओर दिलाया। नेहरू ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत और राज्य के गृह मंत्री लाल बहादुर शास्त्री को तत्काल मूर्तियों को हटाने के निर्देश दिए। लगातार केंद्र से संदेश लखनऊ आते और वैसे ही तार लखनऊ से फैजाबाद भेजे जाते कि मूर्तियॉं तुरंत हटाई जाएँ। 24 और 25 दिसंबर 1949 को लखनऊ में इस मुद्दे पर दिन भर उच्च स्तरीय बैठक होती रही। तय किया गया कि मूर्तियों को गर्भगृह से बाहर ले जाकर राम चबूतरे पर रखा जाएगा। पर फैजाबाद के सिटी मजिस्ट्रेट केकेके नायर इस बात पर अड़े रहे कि मूर्ति हटाने की घोषणा मात्र से खून-खराबा हो जाएगा।”
नायर के अड़ जाने के कारण मूर्तियॉं तो नहीं हटीं, पर नेहरू ने प्रयास नहीं छोड़े। देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभाई पटेल से भी पंत पर दबाव डलवाने की कोशिश की। शर्मा ने अपनी किताब में जिन घटनाओं और चिट्ठियों का जिक्र किया है, उनसे जाहिर होता है कि नेहरू मूर्तियॉं हटाने पर अमादा थे। लेकिन, नायर के अड़ने और पंत तथा पटेल के नरम रुख के कारण वे इसमें कामयाब नहीं हो पाए। शायद उस दिन नेहरू कामयाब हो जाते तो आज रामलला अपनी जन्मभूमि पर विराजमान नहीं होते।
ऐसा नहीं है कि नेहरू को अयोध्या में रामलला का होना ही नागवार था। उन्हें तो उस सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भी खटक रहा था, जिसे मुस्लिम अक्रांताओं ने कई बार तबाह किया था। वे यह भी नहीं चाहते थे कि 1951 में इस मंदिर के उद्घाटन समारोह में उस समय के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जाएँ। रामचंद्र गुहा ने अपनी किताब ‘भारत: गॉंधी के बाद’ में लिखा है कि जब राष्ट्रपति ने मंदिर के उद्धाटन समारोह में भाग लेने का फैसला किया तो यह बात नेहरू को पसंद नहीं आई। उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद से कहा कि वे इसमें शामिल न हों, क्योंकि इसके कई मतलब निकाले जाएँगे। नेहरू ने कहा, “व्यक्तिगत रूप से मैं सोचता हूॅं कि सोमनाथ में विशाल मंदिर बनाने पर जोर देना का यह उचित समय नहीं था।” हालॉंकि प्रसाद ने उनकी बात नहीं मानी और उस गौरवशाली क्षण के साक्षी बने।
आखिर में लिबरलों, वामपंथियों और कॉन्ग्रेसियों के लिए ह्वाटसएप यूनिवर्सिटी का ज्ञान छोड़े जा रहा हूँ। इसका जिक्र पीयूष बबेले ने अपनी किताब ‘नेहरू: मिथक और सत्य’ में किया है। इस किताब के मुताबिक 4 जून 1949 को कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्रियों को नेहरू एक पत्र लिखते हैं। इसमें कहते हैं, “मुझे यह कहना पड़ेगा कि कॉन्ग्रेस के लोग सुस्त हो गए हैं। तेजी से बदलती दुनिया में दिमाग के जड़ हो जाने और मुगालते में रहने से ज्यादा खतरनाक कोई चीज नहीं है।” जिन्हें यह भी गोदी मीडिया का प्रोपेगेंडा लग रहा हो उनके लिए गौर करने वाली बात यह है कि इस किताब की भूमिका काली स्क्रीन वाले रवीश कुमार ने लिखी है।
साल 2014 के आम चुनावों के ठीक बाद भारत के कई पहलुओं में बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ। जिसमें सबसे उल्लेखनीय है सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहलू। देश में हिन्दू शब्द के इर्द-गिर्द जितने भी विमर्श मौजूद थे सभी को नए सिरे से अलंकृत और परिभाषित किया गया। चाहे योग को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करना हो या मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मस्थली पर भव्य मंदिर की संकल्पना। ऐसे तमाम दृष्टान्तों के बीच सबसे नई मिसाल है उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा आयोजित विलक्षण और विहंगम ‘दीपोत्सव’। वर्तमान सरकार ने अपनी अमूमन हर राजनीतिक गतिविधि में खुद को मिले मत का मान रखा है।
अयोध्या के दीपोत्सव का अद्भुत दृश्य
इसे देश का दुर्भाग्य कहना ही उचित होगा कि 2014 के पहले सत्ता में रही लगभग हर सरकारों ने हिंदुत्व शब्द के मूल स्वरूप को विक्षिप्त ही किया है। इसकी सबसे मज़बूत नज़ीर है देश की वह तथाकथित ‘सेक्युलर पार्टी’ जिसने श्रीराम के अस्तित्व पर प्रश्न उठाया। आज भारतीय राजनीति के पटल पर उनका स्थान कहाँ है? इस पर शब्द खर्च करना स्वयं में हास्यास्पद है। देश का शायद ही कोई राजनीतिक दल होगा जिसके नेता/प्रवक्ता ने व्यंग्यात्मक शैली में ‘मंदिर निर्माण की तिथि’ पर प्रश्न नहीं उठाया हो।
एक समुदाय या पंथ के लिए इससे बेहतर और क्या हो सकता है कि उसकी मान्यताओं, परम्पराओं और त्योहारों को अहमियत मिले। साल 2017 में सत्ता हासिल करने के बाद योगी सरकार ने एक वर्ष के भीतर उत्तर प्रदेश के तमाम धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया। चित्रकूट से लेकर मिर्जापुर तक और मथुरा से लेकर काशी तक, दशकों बाद किसी सरकार ने (हिन्दू) स्थलों की सुध ली।
लेकिन देश के नेताओं को इफ़्तार करने और सेवई खाने से वक्त मिलता तब बहुसंख्यक वर्ग की विचारधारा के उद्धार पर चिंतन करते। आज विश्व के तमाम देशों में भारतीय त्योहार उत्साह के साथ मनाए जाते हैं, उन्हें लेकर स्वीकार्यता और समझ का दायरा बढ़ा है। इतना ही नहीं ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, रूस जैसे देशों के दिग्गज नेता भारतीय जनमानस को भारतीय त्योहारों की शुभकामनाएँ देते हैं। भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति और योग के विषय में विमर्श का दायरा सीमित था। वर्तमान सरकार ने प्राचीन चिकित्सा पद्धति- आयुर्वेद और योग को नए आयाम दिए।
वर्तमान सरकार ने अपनी लगभग हर छोटी बड़ी क्रिया से यह सिद्ध किया है कि उनके लिए भारतीय विमर्श कितना अहम है। इस बात के समर्थन में सिर्फ नवंबर महीने में 3 सिलसिलेवार उदाहरण नज़र आए।
पहला उदाहरण नज़र आया जब 6 नवंबर को भारत और इटली की वर्चुअल समिट थी। समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की पृष्ठभूमि में लगा चित्र तमिलनाडु स्थित मामल्लपुरम मंदिर का था।
दूसरा उदाहरण 10 नवंबर को हुई एससीओ काउंसिल ऑफ़ हेड्स ऑफ़ स्टेट 20वीं समिट का है। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी की पृष्ठभूमि में लगा चित्र जोधपुर स्थित मेहरानगढ़ किले का है।
तीसरा उदाहरण 11 नवंबर को हुई आसियान (ASEAN) इंडिया समिट का है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी की पृष्ठभूमि में लगा चित्र वाराणसी सारनाथ स्थित धामेक स्तूप का है।
इन बहुआयामी तर्कों के आधार पर एक बात स्पष्ट हो जाती है कि वर्तमान सरकार इस मुद्दे पर प्रबल है कि देश की आवाम को ऐसी चीज़ों पर ही गर्व करना है जो इस देश की धार्मिक/सांस्कृतिक जड़ में हैं। देश में सर्वप्रथम वही प्रस्तुत किया जाना चाहिए जो इस राष्ट्र की अवधारणा का हिस्सा हैं। तभी दुनिया को आभास होगा कि हम क्यों विशेष और भिन्न हैं।
शायद यही कारण है कि अब देश के तमाम स्वघोषित लिबरल और सेक्युलर राजनीतिक दलों के नूतन हिन्दूवादी नेता (जी राहुल गाँधी भी) मंदिरों के चौखट पर पाए जाते हैं। अपना जनेऊ (जो कि कभी परम्परागत रूप से धारण किया ही नहीं) दिखा कर हिन्दू होने का प्रमाण देते हैं। अन्य राजनीतिक दलों के गिरगिटनुमा इफ़्तार एवं नमाज़वादी (जी अरविन्द केजरीवाल और अखिलेश यादव) जालीदार टोपी पहन कर धार्मिक पाखण्ड की मिसाल पेश करते हैं।
जनता सुबोध हो सकती है लेकिन निर्बोध नहीं, इस श्रेणी के हर छद्म क्रियाकलाप को पहचानती है और अवसर पर हिसाब करती है। जैसे पिछले कुछ वर्षों से लगातार कर रही है।
राम नगरी अयोध्या रोशनी से सराबोर नजर आ रही है। कोविड-19 के दिशा-निर्देशों को मद्देनजर रखते हुए दीपोत्सव 2020 के लिए अयोध्या को दुल्हन की तरह सजाया गया है। राम की पैड़ी में इस वर्ष के ‘दीपोत्सव’ समारोह के लिए खास तैयारियाँ चल रही हैं। दीपोत्सव समारोह 13 नवंबर को ‘छोटी दिवाली’ के साथ शुरू हो चुका है।
अयोध्या में चल रही भव्य तैयारियाँ
रामजन्मभूमि पर राममंदिर निर्माण की आधारशिला रखे जाने के बाद यह पहली दिवाली है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री नीलकंठ तिवारी ने कहा कि यह पहली बार होगा जब दीपोत्सव अयोध्या में राम जन्मभूमि पर आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम पिछले 500 वर्षों से लंबित था।
इस वर्ष अयोध्या के लोगों को एक अलग ही अंदाज में उत्साह और जश्न मनाते हुए देखा जा रहा है। आयोजन के लिए गुरुवार को कई लोग अयोध्या में राम की पैड़ी को सजाने के लिए एकत्र हुए।
रंगोली बनाते कार्यकर्ता
11 झांकियों को लगभग 100 से अधिक कार्यकर्ताओं द्वारा तैयार किया गया है। इस साल सरयू तट यानी राम की पौड़ी पर 5.51 लाख दीये जलाकर विश्व कीर्तिमान भी बनाया जाएगा।
दीपों से बनाई राम की प्रतीकात्मक छवि
वहीं उत्तरप्रदेश के सीएम ऑफिस के ट्विटर एकाउंट से ट्वीट कर जानकारी दी गई कि,”मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुसार अयोध्या में आयोजित किए जा रहे ‘दीपोत्सव-2020’ में वर्चुअल दीपोत्सव की व्यवस्था की गई है। कोविड-19 के कारण अयोध्या न पहुँच पाने वाले श्रद्धालु वेबसाइट के माध्यम से श्रीरामलला विराजमान के समक्ष वर्चुअली दीप प्रज्ज्वलित कर सकेंगे।”
CM श्री @myogiadityanath जी के निर्देशों के क्रम में अयोध्या में आयोजित किए जा रहे ‘दीपोत्सव-2020’ में वर्चुअल दीपोत्सव की व्यवस्था की गई है। कोविड-19 के कारण अयोध्या न पहुंच पाने वाले श्रद्धालु वेबसाइट के माध्यम से श्रीरामलला विराजमान के समक्ष वर्चुअली दीप प्रज्ज्वलित कर सकेंगे।
अयोध्या में वर्चुअल लाइटिंग भी लोगों का मन मोह रही है। दीपों से सजी पूरी अयोध्या बेहद खूबसूरत नजर आ रही है। अयोध्या में मौजूद सभी मंदिरों, घरों के बाहर भी दीये जलाए गए हैं। पूरा शहर रोशनी से नहाया हुआ नजर आ रहा है।
रंगबिरंगी लाइट से सजाया गई नगरी
दीवाली की पूर्व संध्या पर,उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी राम जन्मभूमि स्थल पर भगवान राम की पूजा-अर्चना की। बता दें राम मंदिर के निर्माण के कारण, रामलला को उनके मूल स्थान से स्थानांतरित कर दिया गया था।
जगमगाती अयोध्या
इस दौरान सीएम ने कहा कि पीएम मोदी की प्रेरणा से पाँच सदी बाद प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। कई पीढ़ियों से सभी के मन में एक ही तमन्ना थी कि हम भगवान श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण कार्य को अपनी आँखों से देख लेते तो हमारा जन्म और जीवन धन्य हो जाता। ये कार्य प्रधानमंत्री मोदी जी के कारण सफल हुआ है।
यूपी सरकार द्वारा जारी एक स्टेटमेंट में कहा गया है, “लगभग पाँच शताब्दियों के इंतजार के बाद आखिरकार श्री राम जन्मभूमि मंदिर बनाने का सपना पूरा हो रहा है। कोई भी भक्त राम दरबार में आस्था के दीप जलाने से वंचित नहीं होना चाहिए। सभी की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, उत्तर प्रदेश सरकार ने एक वेबसाइट तैयार की है, जिसके जरिए वर्चुअल लैंप जलाया जा सकता है।”
इतिहास में यह पहली बार होगा जब राम जन्मभूमि परिसर में वर्चुअल रूप में कोई भी व्यक्ति दीपक जला सकता है। यह मंच लोगों को अपने अनुसार लैंपस्टैंड चुनने का मौका देगा। साथ ही घी, सरसों और तिल के तेल जैसे विकल्प भी उपलब्ध होंगे।
कर्नाटक स्थित उप्पीननगड़ी पुलिस थाने में एक मुस्लिम युवक पर मामला दर्ज किया गया है। मुस्लिम युवक पर आरोप है कि उसने अपनी पहचान बदल कर हिन्दू युवती को धोखा दिया और उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कर दी। आरोपित युवक का नाम अब्दुल रज्जाक (25) है और वह दक्षिण कन्नड़ जिले के कडाबा तलूक क्षेत्र का रहने वाला है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अब्दुल ने फेसबुक पर कौशिक उर्फ़ संजू बन कर 24 वर्षीय हिन्दू युवती से दोस्ती की। युवती से बातचीत के दौरान अब्दुल ने झूठ बोलते हुए कहा कि वह कट्टर हिन्दू और अनाथ है। बातचीत जारी रहने के कुछ दिन बाद दोनों ने एक-दूसरे से अपने फोन नंबर साझा किए और व्हाट्सएप पर चैटिंग शुरू की। नवंबर महीने की 1 तारीख को अब्दुल हिन्दू युवती को तीर्थ यात्रा के लिए अपने साथ एक पवित्र शहर के धर्मस्थल लेकर गया था। इस दौरान अब्दुल ने कुछ तस्वीरें भी ली थीं और उन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा कर दिया।
अब्दुल ने हिन्दू युवती को बहलाने फुसलाने के लिए तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की थी और इन तस्वीरों में उसने तिलक भी लगाया हुआ है। अब्दुल के व्यवहार और तौर-तरीके पर संदेह होने के बाद युवती के माता-पिता ने उसके अतीत के बारे में जानने का प्रयास किया। वह हैरान रह गए जब उन्हें मालूम चला कि अब्दुल अपनी पहचान छुपा कर और हिन्दू होने का दावा करके उनकी बेटी को धोखा दे रहा है। इतना होने के बाद युवती के घर वालों ने उप्पीननगड़ी पुलिस थाने में अब्दुल के विरुद्ध मामला दर्ज कराया।
पुलिस ने इस पूरे प्रकरण की जानकारी मिलने के बाद अब्दुल रज्जाक पर मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। पिछले कुछ समय में देश के भीतर इस तरह के तमाम मामले सामने आए हैं, जिसमें मुस्लिम युवक अपनी पहचान छुपा कर इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं।