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MP: अजीज कुरैशी के अध्यक्ष बनते ही उर्दू अकादमी से हटाई गई राष्ट्रपति और पीएम की तस्वीर

मध्यप्रदेश के भोपाल में उर्दू अकादमी का अध्यक्ष बदलते ही कार्यालय की दीवार से प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की तस्वीरें हटा दी गई है। हाल ही में पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी अकादमी के अध्यक्ष बनाए गए हैं। मामला प्रकाश में आने के बाद भाजपा नेताओं ने इसका विरोध किया। उनका कहना है मुस्लिम अध्यक्ष होने के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति कोविंद की तस्वीर हटाई गई है।

इसके विरोध में शुक्रवार को भाजपा नेताओं ने अकादमी का घेराव भी किया। भाजपा नेता राजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि धार्मिक आधार पर संस्थानों में विकृत मानसिकता का परिचय दिया जा रहा है। विवाद बढ़ने के बाद प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तस्वीरें दोबारा से लगा दी गई है।

पत्रिका में प्रकाशित खबर

ताजा जानकारी के अनुसार तस्वीर हटाने के आरोप में पुलिस ने मोहम्मद राहिल नामक युवक को गिरफ्तार किया है। राहिल पर भोपाल के टीटी नगर स्थित उर्दू अकेडमी के दफ्तर से बगैर किसी की अनुमति के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो हटाने का आरोप है। घटना के लिए भाजपा नेताओं द्वारा जिम्मेदार ठहराए जा रहे अकादमी अध्यक्ष अजीज कुरैशी ने खुद उसके ख़िलाफ़ शिकायत की। आरोपित युवक पर 153B (1C) के तहत मामला दर्ज हुआ है। बताया जा रहा है कि मोहम्मद राहिल सीएए से नाराज था।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून के आने के बाद से कई राज्यों में मोदी सरकार को घेरा जा रहा है। लेकिन जहाँ गैर भाजपा सरकार है वहाँ इसका विरोध ज्यादा देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश की ही यदि बात करें तो वहाँ कमलनाथ सरकार ने पिछले महीने संविधान बचाओ शांति मार्च निकाला था। इस दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था, “आज सवाल यह नहीं है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री क्या कह रहे हैं। वे अलग-अलग बातें कह रहे हैं। सवाल यह नहीं है कि कानून में क्या शामिल है, सवाल उस पर है जो इसमें शामिल नहीं है। सवाल इसके उपयोग का नहीं बल्कि इसके दुरुपयोग के बारे में है।”

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गोडसे से रामभक्त गो** तक: बौद्धिक आतंकियों की हिंदुत्व को बदनाम करने की साजिश हमेशा धराशाई हुई है

तेरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूठ जाना, कि ख़ुशी से मर न जाते गर ऐतबार होता।

फैज़-परस्त उदारवादियों पर ग़ालिब का यह शेर एकदम सही बैठता नजर आता है। रामभक्त गुलशन (बदला हुआ नाम) के जामिया में बन्दूक लहराने और सोशल मीडिया पर ‘हिन्दू आतंकवाद’ जैसे शब्दों को ट्रेंड होने में बस कुछ ही पलों का फासला रहा होगा। लेकिन वैचारिक जिहादियों की छटपटाहट ने बंदूकधारी गुलशन के सारे तमाशे को बर्बाद कर दिया।

गुलशन के फायर करने और शादाब के जख्मी होने के इस नाटकीय क्रम के बस आधे घंटे में ही रामभक्त बताए गए इस अल्पवयस्क युवक की सोशल मीडिया से वायरल हुई तस्वीरों और सभी सोशल मीडिया अकाउंट के अचानक गायब हो जाने के खेल ने तस्वीर लगभग स्पष्ट कर दी।

जामिया में कल हुए इस पूरे नाटक के दौरान सबसे ज्यादा आश्चर्य एक अल्पवयस्क के बंदूक उठाकर फायर कर देने में नहीं था, बल्कि इसके बाद सदियों से ‘हिन्दू आतंकवाद’ और ‘हिन्दू कट्टरपंथी’ शब्द गढ़ने के लिए लालायित बौद्धिक दैन्य लिबरल गिरोह की प्रतिक्रिया थी। सत्यान्वेषी पत्रकार रवीश कालजयी मुस्कान लेकर जरा देर से अपने प्राइम टाइम में आए लेकिन इससे पहले ही उनकी घातक टुकड़ियों के सिपहसालार ध्रुव राठी से लेकर शेहला रशीद और स्वरा भास्कर ट्विटर पर गोडसे और गो** में तालमेल बैठाते नजर आए।

यह स्क्रीनशॉट ‘रामभक्त गुलशन’ के जामिया में चर्चा बनने के कुछ देर बाद ही ट्विटर से लिया गया था:

एक घंटे के भीतर ही ट्विटर पर ‘हिन्दू आतंकवाद’ जैसे शब्द ट्रेंड करने लगे। एक लम्बे समय तक देश में विचारधारा के इकलौते मसीहा बने हुए वामपंथ और नव-उदारवादियों ने हमेशा से ही हिन्दुओं को भी एक आतंकवाद का मुखौटा पहनाने का भरसक प्रयास किए हैं।

बुरहान वानी और अफजल गुरु के लिए टेसू बहाने वाले इस विचारक वर्ग ने इस क्रम में कभी गोडसे को कट्टर हिन्दू साबित करने की कोशिशें की तो कभी किसी रामभक्त गुलशन को। लेकिन इस छटपटाहट और इस जल्दबाजी में ये लोग कभी भूल से भी असम को भारत से अलग काट देने की योजना बनाने वाले शाहीन बाग़ के मास्टर माइंड शरजील इमाम को अपनी जुबान से राजद्रोही तक कहते नहीं सुने गए हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इसी भीड़ में से आज एक मुहम्मद इलियास नाम के युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दिसंबर 13, 2019 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के पास के क्षेत्र में हुई हिंसा मामले में इलियास की गिरफ्तारी हुई है। कायदे से तो बौद्धिक आतंकवादियों को आज ‘इस्लामी आतंकवाद’ जैसे शब्दों को ट्रेंड करवाना चाहिए, क्योंकि वह तो स्वयं को सेकुलर उदारवादी ही महसूस करते आए हैं, तो फिर इलियास के नाम पर यह चुप्पी क्या साबित करती है? या फिर हो सकता है कि अपनी जान का खतरा उन्हें एक सुरक्षित ‘अल्पसंख्यक विचारधारा’ की तरफ होने के लिए मजबूर करता हो, वरना विचारकों की तो कोई सीमा ही नहीं होनी चाहिए।

इन बौद्धिक आतंकवादियों ने मौका मिलते ही हिन्दुओं के प्रतीक चिन्हों को अपमानित किया है। कश्मीर में सेना पर पत्थरबाजी कर रहे ‘युवा’ इनकी नजरों में मासूम और भटके हुए हुआ करते हैं। जितनी जल्दबाजी और तत्परता रामभक्त गुलशन को हिन्दू आतंकवादी कहने में दिखाई गई है, उसी तत्परता से सेना पर बन्दूक तानने वाले और पत्थरबाजी करने वाले इन समुदाय विशेष के युवाओं को कभी इस्लामिक आतंकी नहीं कहा गया।

शाहीन बाग़ इसका सबसे ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है। शाहीन बाग़ में खुलेआम पत्रकारों की ‘लिंचिंग’ की जा रही हैं, जनता, सत्ता और सेना के खिलाफ खुले में भड़काऊ भाषणबाजी करते हुए बुर्के और लाल दाढ़ी वाले लोग देखे जा रहे हैं। शरजील इमाम तो खुद स्वीकार कर चुका है कि वह कट्टर इस्लामी है और देश को इस्लामी मुल्क बना देना चाहता है। लेकिन वैचारिक जिहादियों को यह सब अनदेखा करना होता है। इन वैचारिक उदारवादी आतंकियों को इंतजार सिर्फ किसी रामभक्त गुलशन के बन्दूक लहराते हुए खुदको हिंदूवादी विचारधारा से जुड़ते हुए देखने का था।

अगर ऐसा न होता तो सत्यान्वेषी पत्रकार रवीश कुमार इस घटना की शाम हुए प्राइम टाइम में उस विजयी मुस्कान के साथ न देखे जाते। यह बौड़म और पाखंडी बौद्धिक उदारवादी आतंकी एक अल्पवयस्क को बन्दूक फायर करते हुए देखकर सिर्फ इसलिए ‘हें हें हें’ की हंसी हँसता है क्योंकि उसे अपना नायक मिल चुका है।

एक नजर रामभक्त गुलशन पर प्राइम टाइम पढ़ते हुए सत्यान्वेषी पत्रकार की ऐतिहासिक विजयी मुस्कान पर जरूर डालें-

यह लिबरल पत्रकार और वामपंथी विचारधारा का ‘कैसेनोवा’ जिस जहर को रामभक्त गुलशन के बन्दूक उठाने के लिए जिम्मेदार बताता नजर आया है, वह जहर तो सत्यान्वेषी पत्रकार रोजाना 9 से 10 अपने प्राइम टाइम में अनुलोम-विलोम में छोड़ते और ग्रहण करते हैं। यही वजह है कि उम्र के साथ झुर्रियों की जगह दर्रे देखने को मिल रहे हैं।

देश के इस पाखंडी उदारवादी गिरोह की हिन्दू आतंकवाद जैसे शब्दों को गढ़ने से पहले वर्षों तक अभी आत्म चिंतन की आवश्यकता है। उसे यह तय करना होगा कि उसका पहला लक्ष्य आज़ादी है या फिर शाहीन बाग की नाकामयाबी को छुपाना। क्योंकि शाहीन बाग़ को जिस अरमानों से सजाया गया था उसकी इमारते जर्जर होकर बिखरने लगी हैं। इस शाहीन बाग़ के इस्लामी एजेंडे का मकसद कभी शरजील तो कभी कुदरती खाने की दुहाई देता हुआ CAA-विरोधी प्रदर्शनकारी साबित करते जा रहा है।

‘हिन्दू आतंकवाद’ को साबित करने से पहले बस एक बार स्वयं से यह जरूर पूछिए कि शाहीन बाग़ में जो कुछ भी चल रहा है वो संविधान की किताब के मुताबिक़ है या फिर किसी आसमानी किताब के अनुसार उसकी रूपरेखा तय हुई है? यदि इसका जवाब मिलने पर आपका विवेक, जो कि यूँ तो कब का मर चुका है, लेकिन फिर भी अगर गवाही दे कि वह सब सेक्युलर है तो हिन्दू आतंकवाद की ओर जरूर आगे बढ़ें।

₹2 किलो आटा, कॉलेज जाने वाली लड़कियों को स्कूटी: भाजपा के संकल्प-पत्र में हर तबके का ख्याल

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार (जनवरी 31, 2020) को भारतीय जनता पार्टी ने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में कई बड़े वादे किए हैं। गरीबों को 2 रुपए प्रति किलो आटा, कॉलेज जाने वाली छात्रों को मुफ्त इलेक्ट्रिक स्कूटी, 9वीं जाने वाले छात्रों को निशुल्क साइकिल देने की बात कही गई है।

केंद्रीय परिवहन मंत्री और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने प्रदेश कार्यालय में दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए संकल्प पत्र जारी करते हुए कहा कि दिल्ली देश का हृदय है। ये एक ऐसा शहर है जो सभी हिन्दुस्तानियों के लिए अभिमान का विषय है। पुराने इतिहास से लेकर पूरे देश का इतिहास दिल्ली से जुड़ा हुआ है और भाजपा का इतिहास भी दिल्ली से ही जुड़ा हुआ है।

नितिन गडकरी ने कहा कि अप्रैल में 16 लेन के दिल्ली-मेरठ रोड का उद्घाटन किया जाएगा। गडकरी ने बताया कि इस 90 किमी रोड के निर्माण में 8 हजार करोड़ रुपए की लागत आई है। इसके बन जाने के बाद 40 से 45 मिनट में दिल्ली से मेरठ का सफर पूरा हो सकेगा।

संकल्प-पत्र में कहा गया है कि पाँच साल में कम से कम 10 लाख बेरोजगारों को रोजगार दिया जाएगा। युवाओं को सफल उद्यमी बनाने के लिए 1,000 करोड़ रुपए के विशेष ‘स्टार्टअप एंड इनोवेशन फंड’ सहित एक दूरदर्शी स्टार्टअप नीति बनाई जाएगी। इसके साथ ही युवाओं के लिए विशवकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों के लिए 100% रोजगार सुनिश्चित होगा।

केंद्रीय मंत्री ने केजरीवाल की मुफ्त योजनाओं की आलोचना करते हुए कहा कि दिल्ली की तस्वीर को, दिल्ली की तकदीर को कोई चंद चीजें फ्री में बाँटकर नहीं बदल सकता। दिल्ली का कंक्रीट भविष्य बनाने के लिए दूरगामी प्लानिंग लगेगी और वो सोच और विजन भाजपा ने बताई है।

संकल्प-पत्र में 10 नए कॉलेज और 200 नए स्कूल खोलने का भी ऐलान किया गया है। इसके साथ ही कहा गया है कि घरों, कॉलोनियों, कार्यालयों और कारखानों में सौर पैनल के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की पहली 2 लड़कियों को उनके 21 साल के होने पर 2 लाख रुपए का लाभ मिलेगा। इसमें ग्रामीण और कृषि विकास पर भी ध्यान देने की बात कही गई है।

बीजेपी ने 1984 के दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने का वादा किया है। दंगों के दौरान जान गॅंवाने वाले कमाऊ सदस्यों के परिवार से एक बच्चे को नौकरी दी जाएगी। विधवा हुई महिलाओं की मासिक पेंशन बढ़ाकर 3500 रुपए की जाएगी। दिल्ली को पूरी तरह से टैंकर मुक्त बनाकर साल 2024 तक हर घर-हर नल योजना के तहत स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की बात कही गई है। 2022 तक सबको आवास देने की भी बात कही गई है।

इसमें कहा गया है कि अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 40 लाख निवासियों को मालिकाना हक़ देने के बाद इन कॉलोनियों के समुचित विकास के लिए ‘कॉलोनीज डेवलपमेंट बोर्ड’ का गठन किया जाएगा।

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फिल्ममेकर हंसल मेहता ने दी विवेक अग्रिहोत्री को इस्लाम समझने के लिए मुस्लिम बनने की सलाह

उत्तरप्रदेश के मेरठ से गायब हुई लड़की के शाहीन बाग में मिलने के बाद इस खबर की चर्चा चारो ओर है। लड़की का अपहरण करने वाले शहजाद के मनसूबों और शाहीन बाग प्रदर्शन के पीछे छिपे मकसद पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी क्रम में फिल्म मेकर विवेक अग्रिहोत्री ने भी इस वाकये पर अपनी प्रतिक्रिया दी। जो सीएए के विरोध में खड़े फिल्ममेकर हंसल मेहता से ये बर्दाश्त नहीं हुई और उन्होंने विवेक अग्रिहोत्री को मुस्लिम बनने की सलाह दे डाली।

दरअसल, मेरठ की घटना को शेयर करते हुए फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने अपने ट्विटर पर कहा, “शाहीन बाग अब इस्लाम में परिवर्तन करवाने का केंद्र बन चुका है। जहाँ हर जेबकतरे, मोबाइल चोर जैसे लोगों को छिपाया जाता है और हर तरह की अवैध गतिविधि को बढ़ावा दिया जा रहा है।” वे इस खबर के लिंक को शेयर करते हुए लिखते हैं, “मुझे हैरानी है कि दिल्ली के लोग इसे क्यों बर्दाश्त कर रहे हैं।”

अब हालाँकि, विवेक अग्निहोत्री की ये प्रतिक्रिया स्वभाविक है, क्योंकि अभी बीते दिनों शाहीन बाग में जिन्ना वाली आजादी के नारे सुनाई दिए और अभी इसी प्रदर्शन से निकले शरजील इमाम जैसे शख्स की गिरफ्तारी हुई है। जिसने अतिउत्साह में देश से असम काटने की बात ही कह डाली। लेकिन, तथाकथित सेकुलर फिल्ममेकर हंसल मेहता से ये रिएक्शन बर्दाश नहीं हुआ।

हंसल मेहता ने विवेक के पोस्ट पर रिप्लाई देते हुए उन्हें नफरत फैलाने वाला कहा। साथ ही कहा कि उन्हें शाहीन बाग के प्रदर्शन को समझने के लिए इस्लाम में अपना धर्मपरिवर्तन करना चाहिए।

हंसल लिखते हैं, “बदकिस्तमकी से ट्विटर तुम जैसे घृणा फैलाने वालों की जगह बन गया है। मैं सच में उम्मीद करता हूँ कि तुम इस्लाम में परिवर्तित हो जाओ, ताकि तुम्हें समझ आए कि इस मजहब के लोग किसकी लड़ाई लड़ रहे है।” इसके बाद हंसल लिखते हैं, “वास्तव में तो मैं चाहता हूँ कि आप हिंदुत्व को समझें ताकि आप उसे कलंकित न करें।”

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ शाहीन बाग का नाम लेने के कारण हंसल मेहता अपनी धर्म निरपेक्ष छवि को स्थापित करने के लिए, विवेक अग्निहोत्री को हिंदू धर्म को कलंकित करने वाला करार देते हैं और कह रहे हैं कि उन्हें प्रदर्शन को समझने के लिए इस्लाम कबूलना चाहिए। वहीं, ट्विटर यूजर्स उनके इस कमेंट के लिए उन्हें आड़े हाथों ले रहे हैं।

यूजर्स का कहना है कि इस्लाम समझने के लिए परिवर्तित होने की क्या जरूरत? अल बगदादी, हाफिज सईद, मसूद अजहर, ISIS, अलकायदा, बोको हरम जैसे संगठनों को देखकर समझा जा सकता है कि ये किसलिए खड़े हैं।

कुछ लोग शरजील, याकूब मेमन, दाऊद इब्राहिब जैसे कट्टरपंथियों का उदाहरण देकर हंसल से सवाल कर रहे हैं कि क्या ऐसा बनने के लिए उन्हें धर्म परिवर्तन करवाना चाहिए।

12 साल पहले असलम की बीवी से शाहरुख को हुआ प्यार, मोहसिन संग मिल कर दी हत्या

मध्यप्रदेश में भोपाल के गाँधीनगर इलाके में 27 जनवरी की रात हुई असलम नामक ऑटो चालक की नृशंस हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली। आरोपितों की पहचान शाहरुख और महोसिन के तौर पर हुई है। असलम की बीवी से शाहरुख एकतरफा प्यार करता था। उसे हासिल करने के लिए ही उसने हत्या की साजिश रची थी।

नई दुनिया में प्रकाशित खबर

नई दुनिया की खबर के अनुसार, पुलिस ने असलम के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल जाँची और संदेह के आधार पर उसके परिचित शाहरुख और मोहसिन उर्फ छोटू को हिरासत में लिया। सीएसपी लोकेश सिन्हा के अनुसार सख्ती से पूछताछ के बाद दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। शाहरुख ने बताया कि वह करीब 12 साल पहले असलम के पड़ोस में रहता था, तभी से असलम की पत्नी से एकतरफा प्रेम करने लगा था। असलम के रहते वह उसे कभी हासिल नहीं हो सकती थी। इसके लिए उसने असलम को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। साजिश में उसने मोहसिन को भी शामिल कर लिया।

साजिश के तहत आरोपितों ने असलम को पहले सामान शिफ्ट करवाने के बहाने करोंद चौराहे पर बुलाया। असलम ऑटो लेकर वहाँ पहुँचा तो शाहरुख़ उसमें बैठ गया। मोहसिन अपनी बाइक से उनके आगे चलने लगा। रास्ते में असलम को भांग वाला पान खिलाया गया और अब्बास नगर चलने को बुलाया। थोड़ी देर बाद असलम जब नशा चढ़ा तो दोनों उसे लेकर महावीर अस्पताल के पास एक सुनसान जगह पर चले गए। वहाँ पहले असलम का गला घोंटा और फिर चाकू घोंप उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसे गड्ढे में डालकर फरार हो गए।

अम्मी का मर्डर कर पूरी रात लाश के साथ सोया सोहेल, सुबह गहने बेच गर्लफ्रेंड के लिए खरीदी चूड़ियाँ

आगरा में हिंदू परिवार घर बेचने पर मजबूर: मर्डर केस वापस लेने का दबाव, बहू-बेटियों की इज्जत से खिलवाड़

सब-इंस्पेक्टर के मर्डर से ज्यादा बड़ी प्लानिंग थी आतंकी शमीम और तौफिक की, NIA करेगी अब केस की जाँच!

जलील कुणाल कामरा अर्णब को कर रहा है पर्सनल मैसेज भेजकर परेशान, ट्वीट में बताया खुद को बुद्ध का अनुयाई

रिपब्लिक न्यूज़ चैनल के एडिटर अर्णब गोस्वामी से इंडिगो की फ़्लाइट में बदतमीजी करने के बाद कुणाल कामरा के अर्नब गोस्वामी पर व्यक्तिगत हमले बढ़ते जा रहे हैं। कुणाल कामरा ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक स्क्रीनशॉट ट्वीट करते हुए लिखा है- “मुझे अर्णब का नंबर मिला, मैं अभी भी उन्हें डिबेट करने के लिए पूछ रहा हूँ लेकिन वो जवाब नहीं दे रहे हैं।” इसी ट्वीट में रिपब्लिक न्यूज़ चैनल को टैग करते हुए कामरा ने लिखा है क्या उनके एडिटर कायर हैं या राष्ट्रवादी?

कुणाल कामरा द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में लिखा है- “मिस्टर गोस्वामी, यह मेरा नंबर है और जब भी आपको लगे कि आप मुझसे राष्ट्रवाद और राष्ट्र के विचार पर डिबेट कर सकते हैं तो मुझसे इसी नंबर पर सम्पर्क कर सकते हैं। आपके प्रति मेरी सारी नाराजगी का कारण मेरा भूतकाल है। मैं बुद्ध और महावीर का अनुयाई हूँ और आपसे शांतिपूर्वक बहस करना चाहता हूँ। यही बात मैं शुरू से कहता आया हूँ। मैं कुणाल कामरा हूँ और मुझे कोई खेद नहीं है।”

कामरा के इस ट्वीट के बाद ट्विटर पर कुणाल कामरा के जबरन किसी व्यक्ति का मोबाइल नंबर निकालकर उसे परेशान करने और उसका पीछा किए जाने को लेकर कामरा की निंदा की जा रही है क्योंकि यह आईटी अधिनियमों का उलंघन है। और इसके लिए कुणाल कामरा पर कार्रवाई की जा सकती है।

ज्ञात हो कि NDTV के प्रोपेगैंडा पत्रकार रवीश कुमार भी अक्सर हर जगह शिकायत करते देखे जाते हैं कि उन्हें उनके वॉट्सएप नंबर पर अनजान लोग सन्देश भेजते हैं। हो सकता है कि कुणाल कामरा जैसे ही कुछ अन्य बुद्ध और भगवान् महावीर के अनुयाई रवीश कुमार के साथ भी एक शांतिपूर्ण बहस करना चाहते हों।

गौरतलब है कि कुणाल कामरा ने रिपब्लिक न्यूज़ के संस्थापक अर्णब गोस्वामी के साथ बदसलूकी की थी। इसके बाद इंडिगो सहित अन्य विमान सेवा कंपनियों ने भी फ्लाइट में उड़ान भरने के लिए 6 महीनों के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। इसी बौखलाहट में अब कुणाल कामरा व्यक्तिगत हमलों पर उतर आया है।

मोहम्मद मकबूल की ट्रक में सवार हो आए जैश आतंकी: CRPF जवानों पर गोलीबारी, जवाबी कार्रवाई में 3 ढेर

जम्मू-कश्मीर में बड़े हमले को अंजाम देने के मंसूबे से सीमा पार से आए तीन आतंकियों को सेना ने मार गिराया है। इनके पास से 6 हथियार बरामद किए गए हैं। पुलिस ने उस ट्रक के ड्राइवर और कंडक्टर को भी गिरफ्तार कर लिया है जिसमें सवार होकर आतंकी आए थे। एक अन्य आतंकी की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बताया कि तीन से चार आतंकवादी ट्रक में सवार होकर जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग से होते हुए घाटी की ओर जा रहे थे। शुक्रवार तड़के बान टोल नाका के पास जब ट्रक को रोका गया तो आतंकवादियों ने सीआरपीएएफ के जवानों पर गोलीबारी की। इसमें एक जवान घायल हो गया। जवाबी कार्रवाई में जवानों ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया। एक आतंकी अंधेरे का फायदा उठाकर जंगल की ओर भाग निकला। उसकी तलाश में सुरक्षा बल व्यापक तलाशी अभियान चला रहे हैं।

सेना की मुठभेड़ में मारे गए तीनों आतंकी जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य बताए जा रहे हैं। पुलिस महानिदेशक ने आशंका जताई है कि आतंकियों ने कठुआ, हीरानगर सीमा से घुसपैठ की होगी। जिस ट्रक में सवार होकर ये आतंकी गुजर रहे थे उसके ड्राइवर मोहम्मद मकबूल और कंडक्टर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ट्रक ड्राइवर अनंतनाग का निवासी बताया गया है। पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है।

उधर, एक आतंकी की खोज में जारी तलाशी अभियान को ध्यान में रखते हुए आसपास के सभी स्कूलों और डिग्री कॉलेजों में उधमपुर जिलाधिकारी ने एक दिन का अवकाश घोषित कर दिया है। साथ ही जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर पर यातायात भी बंद कर दिया गया है। कटरा में वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

जैश के 5 आतंकी: कोई चलाता था गाड़ी तो कोई लगाता था ठेला, 26 जनवरी पर बड़े हमले की थी साजिश

लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी निसार अहमद डार श्रीनगर से गिरफ़्तार: कश्मीर में बड़े हमले की रच रहा था साज़िश

मदरसे में जुटे आतंकी, ISI ने दिया जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को मार गिराने का ऑर्डर

उर्मिला मातोंडकर का आँकलन गलत, रॉलेट एक्ट जैसा कानून मोदी सरकार नहीं, कॉन्ग्रेस लाई थी

लोकसभा चुनावों के मद्देनजर कॉन्ग्रेस का हाथ थामकर राजनीति के मैदान में उतरने वाली कॉन्ग्रेस की पूर्व नेता उर्मिला मातोंडकर ने गुरुवार को सीएए के ख़िलाफ़ बोलते हुए मोदी सरकार द्वारा लाए गए कानून की तुलना ब्रिटिश समय में लागू हुए रॉलेट कानून से की। मातोंडकर ने महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ये टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 1919 के रॉलेट एक्ट की तरह 2019 के नागरिकता संशोधन कानून को इतिहास के काले कानून के रूप में जाना जाएगा।

उर्मिला कहा, “1919 में दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने बाद अंग्रेज यह समझ गए थे कि हिंदुस्तान में उनके खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में उन्होंने रॉलेट एक्ट जैसे कानून को भारत में लागू किया। वर्ष 1919 के इस रॉलेट एक्ट और 2019 के नागरिकता संशोधन कानून को अब इतिहास के काले कानून के रूप में जाना जाएगा।”

हालाँकि, ये बात साफ है कि उर्मिला मातोंडकर ने सीएए के साथ रॉलेट एक्ट की तुलना मोदी सरकार की छवि को तार-तार करने के लिए किया। लेकिन शायद इस दौरान वे ये नहीं समझ पाईं कि रॉलेट एक्ट क्या था और सीएए क्या है। और आखिर क्यों भूलकर कर भी इनके बीच तुलना नहीं होनी चाहिए।

दरअसल, रॉलेट कानून ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में उभर रहे राष्ट्रीय आंदोलन को कुचलने के उद्देश्य से निर्मित कानून था। इसके अनुसार ब्रिटिश सरकार को यह अधिकार प्राप्त हो गया था कि वह किसी भी भारतीय पर अदालत में बिना मुकदमा चलाए उसे जेल में बंद कर सके। लेकिन, मोदी सरकार द्वारा लाया गया कानून तो केवल इंसानियत की सतह पर है। जिसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश के सताए लोगों को एक छत मिलेगी। इसलिए इन दोनों कानूनों को एक दूसरे से जोड़ना, वो भी सिर्फ़ इसलिए कि एक बड़ा तबका इसका विरोध कर रहा है, निराधार है।

अगर वाकई आजाद भारत के इतिहास में किसी कानून की तुलना उर्मिला मातोंडकर को रॉलेट एक्ट से करनी है। तो वो उसी पार्टी की देन है। जिसके सहारे वो साल 2019 में राजनीति में आईं।

साल 1971 में इंदिरा काल में आया मीसा कानून था। एक ऐसा विवादस्पद कानून जिसमें कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्थाओं को बहुत अधिक अधिकार दे दिए गए और आपातकाल के दौरान (1975-1977) इन्ही में कई संशोधन करके देखते ही देखते राजनीतिक विरोधियों को उनके घरों से, ठिकानों से उठाकर जेल में डाल दिया गया। कहा जाता है कि इस कानून के तहत इंदिरा गाँधी पूरी तानाशाह हो गई थीं। इस कानून के तहत करीब 1 लाख लोगों को जेल में डाला गया था। इसका इस्तेमाल खासकर अपने विपक्षियों, पत्रकरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डालने के लिए किया गया था।

पूर्व खुफिया अधिकारी RSN सिंह ने खोली देश विरोधी ताकतों की पोल, बताई CAA विरोध की असली वजह

देश के जाने माने रक्षा विश्लेषक, पूर्व रॉ अधिकारी और रिटायर्ड कर्नल आरएसएन सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर देश विरोधी ताकतों पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने ‘Defensive Offence’ नामक यूट्यूब चैनल पर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और उसको लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन पर बोला। उन्होंने शाहीन बाग में मुस्लिम महिलाओं द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधते हुए कहा, “इनका कहना है कि आपने  पाकिस्तान से तो हमें पुरस्कृत कर दिया है और अब हमारे लोग वहाँ से आते रहेंगे तो आपको कॉन्सोलेशन प्राइज देते रहना होगा। तब तक, जब तक कि हिन्दुस्तान इस्लामिक मुल्क नहीं बन जाता है और वही है गजवा-ए-हिंद।”

वीडियो में ये बातें आप शुरुआत से 4:00 मिनट तक सुन सकते हैं

कर्नल आरएसएन सिंह ने कश्मीर की मस्जिद से आने वाली आवाज को लेकर कहा कि अगर आप अभी नहीं सँभले तो वो दिन दूर नहीं जब सभी मस्जिद से ऐसा ही आह्वान होगा। उन्होंने आगे कहा, “ये जो आप देख रहे हैं वो CAA का विरोध नहीं है। इनको दर्द है अनुच्छेद 370 का, इनको दर्द है राम मंदिर का, इनको दर्द है बालाकोट एयरस्ट्राइक का। लेकिन इतना मैं बता दूँ कि 200 रुपए के बिजली बिल के लिए अपने देश को मत नीलाम करो। 200 रुपए के बिजली बिल के लिए पंचर वाले तुम्हारे बहू-बेटी का ऐसी की तैसी कर देगा कि तुम जिंदगी भर याद करोगे कि ये 200 रुपए के साथ हमने क्या पाप किया था।”

उन्होंने कहा कि ये इनकी हिंदुओं के प्रति नफरत है और ये नफरत ऐसी है जैसे कि अगर मुझे एड्स हो गया तो सभी को हो जाए। कुछ लोग बचे हुए क्यों हैं। उन्होंने आगे हिन्दुस्तान को नार्थ ईस्ट से काटने की धमकी देने वाले शरजील इमाम के बारे में बात करते हुए कहा कि वो ये बातें ऐसे ही नहीं बोल रहा है। वो ये सारी बातें एक साजिश के तहत बोल रहा है। इस दौरान उन्होंने सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) को समझाते हुए कहा कि शरजील इमाम ने जो भी कहा है वह एक बहुत बड़े साजिश का हिस्सा है। 

उन्होंने इसके देश के खिलाफ योजना को समझाने के लिए नॉर्थ में कश्मीर, साउथ में केरल और ईस्ट में पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया और बताया कि इसकी योजना काफी समय पहले से बनाई जा रही थी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की डेमोग्राफी बदलने के लिए कई सालों से सुनियोजित तरीके से काम चल रहा था और उसी के तहत आज शरजील इमाम सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक के बारे में बात कर रहा है, क्योंकि वहाँ का डेमोग्राफी काफी बदल गया है। उसका संदर्भ यही है।

CAA पर हिंसा: कानपुर से PFI के 5 सदस्य गिरफ्तार, मेरठ के 12 खातों में डाला गया पैसा

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम देश के कई हिस्सों में हिंसा हुई है। उत्तर प्रदेश के कानपुर सहित कई अन्य जिलों में हुई हिंसा के सिलसिले में चरमपंथी इस्लामी संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) के पाँच सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। PFI पर कानपुर के बाबूपुरवा और यतीमखाना में हिंसा भड़काने का आरोप है। बता दें कि कानपुर में हुई हिंसा में दर्ज एफआईआर में कई आरोपी बनाए गए जिनमें इन पाँचों के नाम भी शामिल थे। पुलिस ने इन पाँचों के नाम मोहम्मद उमर, सैयद अब्दुल, फैज़ान, वासिफ और सरवर बताए हैं।

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जाँच के बाद दावा किया था कि CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में हिंसा भड़काने, आगजनी करवाने के लिए इस्लामिक कट्टरपंथी PFI ने ही अपना पैसा लगाया है। कथित तौर पर कपिल सिब्बल और इंदिरा जय सिंह जैसे कॉन्ग्रेसियों एवं सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की भी भूमिका बताई गई थी। 73 सिंडिकेट बैंक अकॉउंट की पड़ताल से खुलासा हुआ था कि पूरी हिंसा को भड़काने में इनमें 120 करोड़ रुपए डाले गए। बाद में इन खातों से कुछ पैसे छोड़कर शेष रकम निकाल ली गई।

दैनिक जागरण के मेरठ संस्करण में प्रकाशित खबर

CAA विरोध के नाम पर 20 दिसंबर को मेरठ में भी हिंसा हुई थी। इसमें SDPI और PFI की अहम भूमिका सामने आई थी। बताया जा रहा है कि मेरठ में भी PFI ने 12 खातों में रकम भेजी थी। यह रकम रिहैबिलिटेशन इंडिया एनजीओ के माध्यम से फंडिंग की गई थी। पुलिस इस एनजीओ की भी पड़ताल कर रही है। एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि अभी तक की जानकारी में ये बात सामने आई है कि PFI ने चार खातों में तीन करोड़ की रकम भेजी थी। इसके साथ ही हिंसा में अहम भूमिका निभाने वाले परवेज, आलम, अमजद, जावेद, अनीस खलीफा और अनस एवं SDPI के सदस्यों के खातों की डिटेल माँगी गई है।

आपको बता दें कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया एक उग्र इस्लामी कट्टरपंथी संगठन है जिसे पिछले ही वर्ष झारखंड में प्रतिबंधित किया गया था। ये कदम राज्‍य सरकार ने इस संगठन के राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की शिकायत के बाद उठाया था। झारखंड सरकार ने माना था कि पीएफआई एक ऐसा संगठन है जो आतंकवादी संगठन आईएस से प्रभावित है। केरल में भी इस संगठन को प्रतिबंधित करने को लेकर वर्ष 2018 में काफी बवाल हुआ था। हालाँकि, विरोध के बाद राज्‍य सरकार ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने से साफ इनकार कर दिया था।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का गठन वर्ष 2006 में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट के सफल होने के बाद किया गया था। धीरे-धीरे इस संगठन से दूसरे कट्टरवादी सोच रखने वाले संगठन भी जुड़ते चले गए। वर्तमान में पीएफआई का असर 16 राज्यों में है और 15 से ज्यादा मुस्लिम संगठन इससे जुड़े हुए हैं। पीएफआई की एक महिला विंग भी है। यूपी और असम में हिंसक प्रदर्शनों में शामिल रहने से पहले भी यह संगठन कई तरह की गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल रहा है।

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