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केजरीवाल के सूजे गाल: लोगों ने जोड़ा अमानतुल्लाह कनेक्शन, कहा- अमानती गुंडे ने इसका भी फेसियल कर दिया

सीएम केजरीवाल ने सोमवार (फरवरी 3, 2020) को समाचार चैनल न्यूज 18 हिंदी के कार्यक्रम ‘एजेंडा दिल्ली’ में हिस्सा लिया। इस दौरान उनका चेहरा सूजा हुआ दिख रहा था। इसको लेकर जब एंकर ने पूछा कि आपके चेहरे पर कुछ हुआ है क्या ? जवाब देते हुए केजरीवाल ने कहा कि चुनाव के समय अत्यधिक धूल-मिट्टी के कारण उन्हें इंफेक्शन हो गया है। 1-2 दिन में ठीक हो जाएगा।

इस वीडियो के 0:10 से 0:22 के बीच आप इस बात को सुन सकते हैं

सुधांशु नाम के एक ट्विटर यूजर ने इस क्लिप को शेयर करते हुए लिखा, “केजरीवाल को बाहर निकलते ही इनफेक्शन हो जाता है।” इसके बाद ट्विटर यूजर्स ने इसे आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान से जोड़ना शुरू कर दिया। एक ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, किसने धोया फिर आपकी धूल मिट्टी को? अमानतुल्लाह ??

दूसरे ने लिखा कि लगता है कि थप्पड़ खाया है इसने खान का।

एक यूजर ने लिखा, “देख लो दिल्ली वालों जो CM वोट के लिए मुग़लो से पिटता रहा हो, वह तुम्हें क्या सुरक्षित रखेगा!!!”

सुनीता दास नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “अमानती गुंडे ने इसका भी फेसियल कर दिया।”

बता दें कि केजरीवाल के बिगड़े चेहरे को अमानतुल्लाह से इसलिए जोड़ा जा रहा है क्योंकि हाल ही में एक ट्विटर यूजर ने दावा किया था कि अमानतुल्लाह खान ने केजरीवाल को पीट दिया। ट्वीट में कहा गया था कि केजरीवाल इस बात से नाराज चल रहे थे कि करोड़ों रुपए फूँकने के बाद भी आम आदमी पार्टी को शाहीन बाग प्रदर्शन का कोई फायदा नहीं मिल रहा है। ‘पोकर शाह’ नामक ट्विटर अकाउंट के अनुसार, दिल्ली के सीएम इस बात से नाराज़ थे कि उन्हें शाहीन बाग़ प्रदर्शन का कोई फ़ायदा क्यों नहीं हो रहा है?

अटकलों का बाजार गर्म करते हुए यूजर ने लिखा कि रविवार (फरवरी 2, 2020) की रात आक्रोशित केजरीवाल ने अमानतुल्लाह से इस बारे में पूछा और नाराज़गी जताई। इस ट्वीट की मानें तो अमानतुल्लाह इसके बाद मारपीट पर उतर आए और उन्होंने केजरीवाल के साथ जोर-जबरदस्ती की। ‘पोकर शाह’ ने कहा कि प्रार्थना कीजिए कि ये ख़बर सत्य नहीं हो। अब केजरीवाल के सूजे हुए चेहरे को देखकर सोशल मीडिया में फिर से अटकलों का दौर गरम है।

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LGBTQ रैली में शरजील के समर्थन में लगे नारे: उर्वशी सहित 50 के ख़िलाफ देशद्रोह के मामले में मुकदमा दर्ज

मुंबई के आज़ाद मैदान में समलैंगिक समुदाय द्वारा निकाली गई रैली के दौरान देशद्रोही नारे लगाने वालों के ख़िलाफ मुंबई पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुंबई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उर्वशी चूड़ावाला सहित 50 के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है। दरअसल इस मार्च में लोगों ने सीएए विरोध के नाम पर शरजील के समर्थन में नारे लगाते हुए कश्मीर की आज़ादी की माँग के पोस्टर लहराए थे।

मुंबई पुलिस ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आज़ाद मैदान स्टेशन पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता उर्वशी चूड़ावाला सहित अन्य के खिलाफ देशद्रोह के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके बाद पुलिस कार्रवाई करते हुए आरोपितों की तलाश में जुट गई है। जल्द ही पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार करेगी। दरअसल इन सभी पर शरजील के समर्थन में नारे लगाने के आरोप हैं।

बीते शनिवार को एलजीबीटी समुदाय द्वारा अपने अधिकारों की माँग के लिए हर वर्ष की तरह मुंबई में एक रैली निकाली। यह रैली पहले हर वर्ष की तरह मुंबई के क्रांति मैदान में होनी थी, लेकिन पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बाद इसे मुंबई के आज़ाद मैदान में आयोजित किया गया थी। इस बार सीएए, एनआरसी के विरोध के नाम पर की गई इस रैली में न सिर्फ़ शरजील इमाम के समर्थन में नारे लगाए गए बल्कि कई बैनर-पोस्टरों में कश्मीर की ‘आज़ादी’ की माँग की गई थी।

बता दें कि हमसफर संस्था द्वारा आयोजित इस मार्च में शामिल लोगों ने शरजील इमाम के समर्थन में नारे और कश्मीर को आज़ाद करने की माँग की थी। मामला प्रकाश में आने के बाद बीजेपी नेता किरीट सौमेया ने इसकी शिकायत पुलिस थाने में की थी। वहीं वायरल वीडियो की जाँच के बाद ही पुलिस ने उर्वशी चूड़ावाला सहित 50 लोगों के ख़िलाफ़ में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है। गौरतलब है कि शरजील इमाम द्वारा सीएए विरोध के नाम पर दिए गए बयानों के बाद दिल्ली पुलिस ने शरजील को पिछले दिनों गिरफ्तार कर लिया था। शरजील ने पुलिस पूछताछ में कई बड़े खुलासे किए हैं।

शमी की बेटी को सरस्वती की पूजा करते देख भड़के कट्टरपंथी, कहा- जहन्नुम में जाओगे

भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी फिर से इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। इस बार वजह है उनकी बेटी आयरा की तस्वीर। शमी ने एक प्यारे से संदेश के साथ सोशल मीडिया में सरस्वती पूजा के मौके पर आयरा की तस्वीर शेयर की थी। इससे कट्टरपंथी भड़क गए। उन्होंने इसे इस्लाम के खिलाफ करार देते हुए शमी से कहा कि वे अपनी बेटी से मूर्ति पूजन न कराएं। साथ ही यह भी कहा कि ‘मुस्लिम होकर पूजा करवाने के कारण जहन्नुम में जाओगे।’

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सोशल मीडिया पर शमी की बेटी की फोटो पर आए कट्टरपंथियों के रिप्लाई

गौरतलब है कि इंस्टाग्राम और फेसबुक पर फोटो शेयर करते हुए शमी ने अपनी बेटी के बारे में लिखा था- “बहुत प्यारी लग रही हो बेटा, ईश्वर तुम्हारा भला करे। जल्द मिलूँगा।”

अब आयरा की ये खूबसूरत तस्वीर देखकर जहाँ फेसबुक से लेकर इंस्टाग्राम पर एक तरफ लोग आयरा की तारीफ कर रहे हैं। उनकी मासूमियत और खूबसूरती के कसीदे पढ़ रहे हैं। उन्हें साक्षात सरस्वती जैसा बता रहे हैं। उन्हें देवी स्वरूप कहकर चरण स्पर्श कर रहे हैं।

वहीं इस्लामिक कट्टरपंथी इस तस्वीर को देख शिकायत कर रहे हैं कि भारत के मुस्लिम उनके जैसे मुस्लिमों के कारण धीरे-धीरे हिंदू बन रहे हैं। शमी से पूछ रहे हैं कि जब वे मुस्लिम हैं, तो आखिर उनकी बेटी हिंदू कैसे हो गई। इसके अलावा उनसे उनके नाम के आगे से मोहम्मद हटाने की सलाह भी दी जा रही है।

गौरतलब है कि ये पहली बार नहीं है जब इस्लामिक कट्टरपंथियों ने शमी को ट्रोल किया हो। इससे पहले साल 2018 में शमी को नए साल की शुभकामनाएँ देने के लिए शिवा लिंगम की तस्वीर लगाने पर घेरा था। साथ ही उन्हें उनकी पत्नी के साथ फोटो खिंचवाने और सोशल मीडिया पर डालने के लिए भी ट्रोल किया जा चुका है।

बता दें, शमी अकेले मुस्लिम जाने-माने नाम नहीं हैं जिन्हें सोशल मीडिया पर इस प्रकार घेरा गया है। इससे पहले टीएमसी सांसद नुसरत जहाँ को भी मूर्ति पूजन के नाम पर ट्रोल किया गया था। उनके ख़िलाफ़ फरमान तक जारी हुआ था। साथ ही उन्हें अपना धर्म परिवर्तन करने के लिए कहा गया था।

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‘शाहीन बाग़ में फैसला हो चुका है..आपकी कब्र खुदेगी..आपको तय करना है कि 2 फ़ीट नीचे या 20 फ़ीट नीचे’

शाहीन बाग़ में CAA और अदृश्य NRC के खिलाफ धरना-प्रदर्शन जारी है। शाहीन बाग की तर्ज पर शाहीन बाग़ के मास्टरमाइंड शरजील इमाम के शुरूआती अपील पर कई और प्रदर्शन स्थल देश के अलग-अलग शहरों में बनाए गए जहाँ से अक्सर तरह-तरह के भड़काऊ बयान आते रहते हैं।

अब धमकी भरा और इस प्रोटेस्ट को बेनकाब करता एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें दिल्ली के शाहीन बाग के सपोर्ट में नांदेड़ से जो बयान जारी हुआ है वो इस प्रदर्शन के खतरनाक मंसूबों को उजागर करता है। कि इनकी लड़ाई CAA के खिलाफ नहीं है बल्कि देश को अस्थिर करने की साजिश है।

वायरल वीडियो में कहा जा रहा है, “इस लड़ाई में अगर-मगर की कोई गुंजाइश नहीं है। ये कानून वापस जायेगा, हुकूमत वापस जाएगी। CAA भी नहीं रहेगा, हुकूमत भी नहीं रहेगा। और अगर ये दोनों नहीं रहेंगे तो कुछ भी नहीं रहेगा। ये बात भी बहुत क्लियर करने की ज़रूरत है कि CAA भी नहीं रहेगा और हुकूमत भी नहीं रहेगा। अगर दोनों रहेंगे तो कुछ भी नहीं रहेगा। चाहे उसके लिए कुछ भी करना हो मुस्लिम कम्युनिटी और नौजवान इसके लिए तैयार है। ये कोई बाबरी मस्जिद वाली स्ट्रैटजी की बात नहीं है कि कोर्ट का फैसला मान लेंगे। शाहीन बाग़ में फैसला हो चुका है, फैसला हम कर चुके हैं अब हिन्दुस्तान उसे मानेगा, कोई एडजस्टमेन्ट नहीं होगा। फैसला शाहीन बाग से हो चुका है। ये आपके ऊपर है कि कब मानेगें। जितना जल्दी करेंगे उतना अच्छा होगा, जितना डिले करेंगे आपकी कब्र उतनी गहरी खुदेगी। आपको तय करना है कि 2 फ़ीट नीचे जाना है या 20 फ़ीट नीचे जाएँगे।”

ये क्या है? क्या अब भी आपको लगता है ये प्रोटेस्ट सिर्फ CAA के खिलाफ है। आप खुद देखिए वीडियो और तय कीजिए। ऐसे कई और बयान पहले भी सामने आ चुके हैं। जो न सिर्फ देश के खिलाफ है बल्कि खुलेआम देश के बहुसंख्यक आबादी को धमकी है।

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जिन्न रोक रहे अयोध्या में राम मंदिर का काम, संजय दत्त से डरे PM मोदी: पाकिस्तानी चैनल का दावा

पाकिस्तान को ‘पैरोडी मुल्क’ कहा जाता है और वे हर दिन इस टैग को सही ठहराते हैं। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद दुनिया भर में जलील होने वाले पाकिस्तान में खाने के लाले पड़े हैं। पैसा और रोटी के लिए लगभग हर देश से भीख माँगने के बाद अब उन्होंने अपना विश्वास जिन्न में दिखाया है।

3 फरवरी 2020 को पाकिस्तानी चैनल ‘खबर गाम’ ने एक वीडियो शेयर किया गया। इसमें कहा गया कि अयोध्या में जिस जगह पर बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ था, वहाँ पर भारत की मोदी सरकार राम मंदिर बनाने के लिए जेसीबी भेज रही है, मगर जिन्न और अदृश्य ताकतें उसे रोक रहे हैं।

वीडियो में आगे कहा गया है कि जब इन जेसीबी को रोक दिया गया तो मोदी सरकार ने अदृश्य शक्तियों को भगाने के लिए हिंदू पंडितों की टोली को वहाँ भेजा, मगर वो भी कुछ नहीं कर पाए। इसके बाद भारत सरकार ने वहाँ की गतिविधियों का पता करने के लिए सीसीटीवी कैमरा लगाया तो उन जिन्नों को देख मोदी सरकार की अक्ल जवाब दे गई।

आगे एंकर ने दावा किया कि ये बाबरी विध्वंस के समय शहीद हुए मुस्लिमों की रूह है। एंकर कहती है कि 1992 में जब हिंदुओं ने बाबरी मस्जिद को शहीद करने के लिए धावा बोला था तो वहाँ कई मुस्लिम शहीद हो गए थे। उन लोगों की रूहें आज भी इस मस्जिद में मौजूद हैं, जो अब बाबरी मस्जिद को शहीद होने से रोक रहे हैं।

पाकिस्तानी चैनल के दावे के मुताबिक यह अयोध्या साइट की तस्वीर है

पाकिस्तानी एंकर यहीं नहीं रूकती है। वो आगे कहती है कि मोदी सरकार नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन से डर गई है। वो कहती है कि हमने सुना है कि सन्नी देओल, अंडरटेकर, नवजोत सिंह सिद्धू और सलमान खान के बाद अब संजय दत्त ने भी भारत सरकार को ‘चैलेंज’ किया है। उनका कहना है कि संजय दत्त ने हमेशा ही मुस्लिमों के लिए मोहब्बत का इजहार किया है और वो कभी भी मुस्लिमों की हिमाकत करने से पीछे नहीं हटे हैं।

वीडियो में कहा गया है कि राम मंदिर फैसले पर भी संजय दत्त ने ऐसा ही दबंग बयान दिया है कि मोदी सरकार की बोलती बंद हो गई है। एंकर के मुताबिक संजय दत्त ने एक इंटरव्यू में इस फैसले को अफसोसजनक बताया और कहा कि इससे भारत समेत पूरी दुनिया के मुस्लिम तकलीफ में हैं। इसके अलावा पाकिस्तानी एंकर ने एक पंजाबी कलाकार बब्बू मान का नाम लेते हुए कहा कि इनसे मोदी सरकार डर गई है। एंकर का कहना है कि बब्बू मान भी बाबरी मस्जिद फैसले के खिलाफ आवाज उठा चुके हैं।

गौरतलब है कि ये पहली बार नहीं है, जब पाकिस्तान ने भूत-प्रेत में अपना विश्वास दिखाया है। इससे पहले खबर आई थी कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की पत्नी बुशरा मानेका का अक्स आईने में नहीं दिखता है। प्रधानमंत्री आवास में तैनात एक कर्मचारी ने यह दावा किया था। रिपोर्ट्स में कहा गया था कि इमरान खान की तीसरी पत्नी बुशरा की छवि एक तंत्र-मंत्र और जादू टोना करने वाली शख्सियत के रूप में है। दावा तो ये भी किया जाता है कि बुशरा ने दो जिन्न भी पाल रखे हैं और वह उन्हें पका हुआ गोश्त परोसती हैं। बुशरा प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के चीफ इमरान खान की तीसरी बीबी हैं।

पाकिस्तानी चैनल पर सिखों का उड़ाया मजाक, दिखाया जोकर: सोशल मीडिया पर गुस्सा और थू-थू

‘एक बड़े पाकिस्तानी मीडिया बिजनेसमैन ने मेरा रेप किया, किसी अखबार-चैनल ने नहीं छापी रिपोर्ट’

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द टेलीग्राफ की नंगई: मजहब की आग में झोंके जा रहे शाहीन बाग के बच्चों को राम, कृष्ण से जोड़ा

दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहा विरोध प्रदर्शन अब एक नवजात बच्ची की हत्या के लिए जिम्मेदार है। इस प्रदर्शन ने एक ऐसी मासूम की जान ले ली, जिसे यही नहीं पता था कि वो अपने माता-पिता की नासमझी के कारण किस तरह इस्तेमाल हो रही है। उसे सिर्फ़ इन मतलबी प्रदर्शनकारियों ने शाहीन बाग की साज-सज्जा की तरह पहले प्रयोग किया और फिर निराधार प्रदर्शन को बुजुर्ग से लेकर नवजात की लड़ाई बताया। मगर, जब उसकी मौत हो गई तो इन्हीं धूर्तों ने खुद से सवाल पूछने की जगह, अपनी मूर्खता को कोसने की जगह उसे इस लड़ाई में एक कुर्बानी बता दिया और बेशर्मी से कहा- अल्लाह की बच्ची थी, अल्लाह उसे ले गए।

इस बच्ची की तरह अनेकों बच्चे शाहीन बाग से लेकर कई जगह पर इन प्रदर्शनों में शामिल हो रहे हैं। विशेष समुदाय के लोग अपने बच्चों को ऐसा करने के लिए उकसा रहे हैं। कट्टरपंथी इनका ब्रेनवॉश कर रहे हैं। इनसे सरेआम देश के प्रतिनिधियों को गाली दिलवाई जा रही है। इनसे आजादी के नारे लगवाए जा रहे हैं और हैरानी की बात है की मानवाधिकारों के नाम पर हल्ला मचाने वाला मीडिया गिरोह इन चीजों का समर्थन कर रहा है। द टेलीग्राफ की हालिया रिपोर्ट पढ़िए। अखबार ने इसके पाठकों को अलग ही स्तर पर बरगलाना शुरू कर दिया है। वे न केवल बेवकूफी को अपने एजेंडे के हिसाब से जस्टिफाई कर रहा है। प्रदर्शनों में बच्चों की सहभागिता पर उठते सवालों को हिंदू पौराणिक कथाओं से जोड़कर काउंटर करने के लिए कुतर्क भी कर रहा है।

जी हाँ। ऐसे माहौल में जब सीएए के विरोध में शाहीन बाग और अन्य प्रदर्शनस्थलों पर बैठे बच्चों को काउंसलिंग की सख्त जरूरत है कि कहीं वे गलत जानकारी पाकर कोई गलत कदम न उठा लें या फिर शरजील इमाम की तरह देशद्रोह की भावना अपने भीतर न उपजा लें। उस समय टेलीग्राफ अपनी रिपोर्ट में बाल अधिकारों के लिए लड़ने वाली दो कथित कार्यकर्ताओं के कुतर्कों का हवाला देकर अपने पाठकों तक ये बात पहुँचाना चाहता है कि भगवान कृष्ण जब साँप से लड़ रहे थे और जब भगवान राम-लक्ष्मण राक्षसों से लड़ रहे थे, तब वे सब टीनेजर थे।टेलीग्राफ ने इनाक्षी गांगुली और शंथा सिन्हा के हवाले से एनसीपीसीआर के निर्देशों पर सवाल उठाए हैं। राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार ने एंटी सीएए प्रोटेस्ट में बच्चों के इस्तेमाल को लेकर आगाह किया था।

हैरानी की बात है कि एजेंडायुक्त पत्रकारिता के लिए ये लोग टीनएजर और इन्फेंट के अंतर को भुला चुके हैं। ये भूल चुके हैं कि जिन पौराणिक गाथाओं का प्रयोग करके इस प्रदर्शन में बच्चों के गलत इस्तेमाल को सही बताने की कोशिश हो रही है और जिसके लिए NCPCR के निर्देश पर सवाल उठा रहे हैं, वो उतना ही बेबुनियाद है, जितना की ये पूरा प्रदर्शन।

एनसीपीसीआर के आदेश के आगे ये कुतर्क बिलकुल नहीं चल सकता कि हिंदुओं की पौराणिक कथाओं में क्या था, क्योंकि उनकी महत्ता और संदर्भ बिलकुल अलग है। इसे समझ पाना तथाकथित बुद्धिजीवियों के बूते की बात नहीं।

चाइल्ड राइट्स को स्टेट संरक्षित करता है। नॉर्वे जैसे तमाम देशों में अगर माता-पिता अपने बच्चों को पीटते हैं तो सरकार उन्हें अलग कर देती है। अगर उनकी परवरिश ठीक से नहीं हो रही हो तो सरकार उन्हें अपने संरक्षण में लेती है। इसलिए दो महीने और दो साल के बच्चों के अधिकार का बहाना बनाना वाहियात तर्क है।

इस बात पर विचार कीजिए कि संसद में पास हुए कानून पर अपना पक्ष या अपना विरोध केवल वही रख सकता है जिसमें राजनैतिक/सामाजिक रूप से सोचने-समझने की क्षमता हो। लेकिन क्या आपको प्रदर्शन पर बैठे अधिकांश लोगों की उल-जुलूल बाते सुनकर ऐसा लगता है कि उनके अंदर ये क्षमता है? शायद नहीं। बिना किसी तर्क और उदाहरण के प्रदर्शनकारियों द्वारा एक ही बात को दोहराना दर्शाता है कि उन्हें ये सारी बातें सिखाई जा रहीं हैं। इस्लामिक कट्टरपंथी इन प्रदर्शनों के जरिए अपने मंसूबों को खुलेआम अंजाम दे रहे हैं। इसलिए, ऐसी जगहों पर किसी को खींच कर विरोध में लाना या उसे कड़ाके की ठंड में बिठाए रखना, उसका ब्रेनवॉश करने की कोशिश करना, उसका इस्तेमाल करना, उसके अधिकारों का हनन है, क्योंकि उसको अगर कोई नुकसान पहुँचता है तो वो उसकी परवरिश में हुई चूक होगी। अगर वो मर जाए, तो यह हत्या ही है। जैसे शाहीन बाग में नवजात की हुई।

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‘ओवैसी भी पढ़ेगा हनुमान चालीसा, वोट बैंक की राजनीति की कब्र खुदकर रहेगी’

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए 8 फरवरी को मतदान होने वाले हैं, सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने प्रचार अभियान को तेज कर दिया है। इस बीच बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर एक बार फिर से दिल्ली के सीएम और AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल को निशाने पर लिया है। मिश्रा ने केजरीवाल के हनुमान चालीसा पढ़ने पर तंज कसा है। उनके साथ ही बीजेपी नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और संसद रवि किशन ने भी इसके लिए केजरीवाल पर निशाना साधा है।

मॉडल टाउन से बीजेपी उम्मीदवार कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर कहा, “केजरीवाल हनुमान चालीसा पढ़ने लगे हैं। अभी तो ओवैसी भी हनुमान चालीसा पढ़ेगा। ये हमारी एकता की ताकत है। ऐसे ही एक रहना है। इकट्ठा रहना है। एक होकर वोट करना है। हम सबकी एकता से “20% वाली वोट बैंक” की गंदी राजनीति की कब्र खुदकर रहेगी।”

शिवराज सिंह ने ट्वीट किया, “हनुमान जी से आज के ‘लंकेश्वर’ भी भयभीत होते हैं। बोलो महाबली श्री हनुमान की जय!”

वहीं रवि किशन ने कहा, “केजरीवाल को अचानक शाहीन बाग में बिरयानी खिलाने के बाद अब उनको याद आ गया कि मैं हिन्दू हूँ। हनुमान जी को अब ये बुड़बक नहीं बना सकते, हनुमान चालीसा पढ़ें या पेड़ पर उल्टा लटक जाएँ ये चुनाव वो हार रहे हैं।”

बता दें कि सीएम केजरीवाल ने सोमवार (फरवरी 3, 2020) को समाचार चैनल न्यूज 18 हिंदी द्वारा ‘एजेंडा दिल्ली’ के एक कार्यक्रम में खुद को हनुमान भक्त बताते हुए हनुमान चालीसा पढ़ा था। उन्होंने कहा था कि वह बचपन से बजरंग बली के सबसे बड़े भक्त हैं। दिल्ली के सीएम ने कहा कि वह अक्सर अपने पड़ोस और कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर में पूजा के लिए जाते हैं। जैसे ही केजरीवाल से हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए कहा गया तो वो पानी पीने लगे। हालाँकि उन्होंने बाद में एक चौपाई सुनाई।

इस पर चुटकी लेते हुए न्यूज चैनल ABP के पत्रकार विकास भदौरिया ने ट्वीट किया। उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “जब कोई हनुमान चालीसा पढ़ने में पानी माँगे और हिन्दू होने का प्रमाण देने लगे तो समझ लीजिए “हिन्दू” एक हो गया है। याद है न गुजरात में कौन अपने आप को जनेऊधारी ब्राह्मण बता रहा था ? अब समझ लीजिए दिल्ली का चुनाव किस करवट बैठ रहा है।”

हालाँकि, हिंदू वोटों को अपनी ओर खींचने के प्रयासों में केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर इस्लामवादियों को नाराज कर दिया। एक यूजर ने केजरीवाल पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया और लिखा कि क्या हिंदुओं को ही अपनी धर्म के बातें करने की आज़ादी है? वहीं जब दूसरे धर्मों के लोग प्रदर्शित करते हैं तो उनको गलत ठहरा दिया जाता है।

बता दें कि इससे पहले कपिल मिश्रा ने पाकिस्तान का जिक्र करते हुए कहा था कि आम आदमी पार्टी को अपना नाम बदल कर मुस्लिम लीग रख लेना चाहिए, क्योंकि उमर खालिद, अफजल गुरु, बुरहान वानी आतंकवादियों को अपना बाप मानने वालों को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से डर लग रहा है।

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डॉक्टर बनना चाहती थी केरल की निमिषा, लव जिहादियों ने पहले फातिमा बनाया फिर फिदायीन बम

केरल में लव जिहाद की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं। हिंदू संगठनों के बाद अब ईसाई संगठन भी इस पर चिंता जता रहे हैं। बीते दिनों केरल के सबसे बड़े चर्च साइरो मालाबार ने एक रिपोर्ट में बताया था कि लव जिहाद के नाम पर ईसाई लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है। उनकी हत्या हो रही है। राज्य के कैथोलिक चर्च के एक वरिष्ठ पादरी ने राज्य की वामपंथी सरकार पर लव जिहाद को मूक सहमति देने का आरोप भी लगाया था। पादरी का कहना था कि राज्य सरकार लव जिहाद के मामलों की अनदेखी कर रही है। लव जिहाद में लड़कियों को फँसाकर उन्हें युद्धग्रस्त देशों में भेजा जा रहा है। वहाँ उनका ‘सेक्स स्लेव’ की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

अब इसी कड़ी में एक नई जानकारी सामने आई है। केरल में सज्जाद नाम के एक शख्स ने हिंदू लड़की निमिषा को प्रेम जाल में फँसाया। निकाह के बाद उसका धर्म परिवर्तन करवाया गया। उसे फातिमा नाम दिया गया। जब वह गर्भवती हो गई तो सज्जाद ने उसे तलाक दे दिया। फिर एक मुस्लिम संगठन ने मदद के नाम पर उसका दोबारा निकाह करवाया। इसके बाद गर्भवती फातिमा फिदायीन बम बनाकर अफगानिस्तान भेज दी गई।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इस मामले में खुलासा किया कि निमिषा को आतंकवादी बनाकर अफगानिस्तान भेजा गया और अब वह आईएसआईएस आतंकी होने के आरोप में काबुल की जेल में बंद है। इस बारे में जब इंडिया टीवी ने निमिषा (फातिमा) की माँ बिंदु से बात की तो उन्होंने उस दर्द को साझा किया जिसे वो अपनी बेटी के जाने के बाद से झेल रही हैं।

बता दें कि निमिषा साल 2016 से लापता है। बिंदु ने इस बारे में बात करते हुए नम आँखों से बताया, “उस दिन से हमने उसको कॉल करने की कोशिश की। लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा था, फिर हम राज्य सरकार के पास गए। उनको सारे कागजात दिखाए और तब से लेकर आज तक हमारा संघर्ष जारी है। इसके बाद हमने अपनी बेटी को तलाशने के लिए पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई। वहाँ पर पुलिस अधिकारी ने मुझे बताया कि डॉ. सज्जाद सलीम नाम के शख्स ने अपने परिवारवालों के साथ मिलकर मेरी बेटी का धर्म परिवर्तन कराया।”

निमिषा डॉक्टर बनना चाहती थी। इसके लिए परिवारवालों ने लाखों खर्चा करके उसका एडमिशन एक अच्छे मेडिकल कॉलेज में कराया, मगर उन्हें कहाँ पता था कि उनकी बेटी लव जिहाद का शिकार बन जाएगी। उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि डॉक्टरी की पढाई पढ़ने गई निमिषा लव जिहाद का शिकार होकर फातिमा बनेगी और आईएसआईएस के लिए काम करने लगेगी। जब परिजनों को इसकी भनक लगी तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

जानकारी के मुताबिक निमिषा साल 2012 में धर्म परिवर्तन कर फातिमा बन गई। निमिषा की माँ ने इस बारे में बात करते हुए कहा, “मेरी बेटी को बहकाया गया, उस पर दबाव डाला गया। ये सब उसी सज्जाद सलीम ने किया। वो भी उसी कॉलेज से MBBS कर रहा था। सज्जाद अपनी माँ और पूरे परिवार के साथ 2012 से मेरी बेटी से मिल रहा था। उसकी माँ ने कहा कि अगर तुम इस्लाम कबूल कर लो, तो मैं तुम्हारे परिवार से बात करूँगी और अपने बेटे से शादी करवा दूँगी। लेकिन मेरी बेटी की गलती यही थी कि उसने मुझे कुछ नहीं बताया। अगर उसने मुझे बताया होता तो मैं कुछ करती। उन्होंने जबरन शादी करवाई, उसे बाहर ले जाया गया। वो गर्भवती हो गई, तो उसे तलाक दे दिया।”

इसके बाद एक मुस्लिम संगठन ने निमिषा की मदद का आश्वासन दिया और फिर कनवर्टेड मुस्लिम से उसका निकाह करवाया। इसके बाद उसके मन में इस्लाम के लिए जान देने वाला जहर घोला गया और फिर यहीं से आईएसआईएस आतंकी बनाकर अफ़ग़ानिस्तान भेजने की साजिश रची गई।

बता दें कि केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (KCBC) के प्रवक्ता ने फादर वर्गीज वल्लिकट्ट ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा था कि लव जिहाद सच्चाई है और ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज करना इन्हें ‘मूक मंजूरी देने के समान’ है। वीडियो में पादरी ने कहा कि प्रेम के जाल में फँसाकर भगाई गई लड़कियों का पता लगाने के लिए कोई भी सरकार प्रभावी तरीके से जाँच नहीं करा रही है।

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शरजील के फोन से चौंकाने वाले खुलासे, जामिया और एएमयू के छात्रों सहित 15 पर कसा शिकंजा

भारत से असम को काटकर अलग कर देने की बात करने वाले शरजील इमाम के फोन से दिल्ली पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिली हैं। कहा जा रहा है कि इन जानकारियों के आधार पर 15 और लोगों की पहचान हुई है। इनमें से कुछ को पुलिस ने नोटिस भी भेज दिया है और बाकी अन्य लोगों से पूछताछ जारी है। इन 15 चिह्नित लोगों में कुछ जामिया और कुछ एएमयू के छात्र भी शामिल हैं। इसके अलावा इस सूची में कुछ शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों का भी नाम है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार क्राइम ब्रांच की पड़ताल में कुछ और जरूरी खुलासे भी हुए हैं। जैसे, शरजील के लैपटॉप मे विवादित पोस्टर मिला। इसे जामिया हिंसा से ठीक एक दिन पहले यानी 14 दिसंबर को शरजील ने तमाम जगहों पर सर्कुलेट किया था। इस पोस्टर में जामिया में इकट्ठा होने की बात लिखी थी। साथ ही सीएए/एनआरसी से संबंधित विवादित चीजें भी उसमें थीं। इसलिए, अब इन्हीं सबूतों के आधार पर पुलिस शरजील के ख़िलाफ़ जामिया हिंसा मामले में भी एफआईआर दर्ज करेगी और इस मामले में भी उसकी गिरफ्तारी होगी।

अब आगे की पड़ताल में शरजील के बैंक अकाउंट को भी खँगाला जा रहा है ताकि फंडिंग आदि से संबंधित जानकारी मिल सके। इसके अलावा इस बात की भी जाँच की जा रही है कि शरजील इमाम के साथ कौन-कौन लोग भड़काऊ भाषण में और विवादित पोस्टर छपवाने में शामिल थे।

इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, एक पोस्टर में इमाम ने सीएए को असंवैधानिक बताया हुआ था। साथ ही उसमें मुस्लिमों के साथ होने वाले भेदभाव की भी बात थी। दिल्ली पुलिस के मुताबिक शरजील की इच्छा अंतरराष्ट्रीय मीडिया सुर्खियों में आने की थी। वो आर्टिकल 370, अयोध्या और सीएए को लेकर भारत के मुस्लिमों को कड़ी प्रतिक्रिया देने के लिए लगातार भड़का रहा था।

उल्लेखनीय है कि शुरुआती जाँच में पता चला है कि शरजील के लगभग 9 ऐसे लोगों से करीबी संबंध थे, जो इस्लामिक कट्टरपंथ से जुड़े थे। पीएफआई के भी वह लगातार संपर्क में था। पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि कहीं उसे विदेशी फंडिंग तो नहीं हुई।

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₹200 के लिए गुणानंद और मुर्शीद के बीच विवाद, कट्टर पंथियों ने CAA-NRC से जोड़ की आगजनी, पथराव

बिहार के दरभंगा जिले में रविवार (फरवरी 2, 2020) को समुदाय विशेष के लोगों ने जमकर हिंसा की। घटना मनीगाछी प्रखंड के दहौड़ा गॉंव की है। 200 रुपए की लेनदेन के विवाद को सांपद्रायिक रंग दे दिया गया। पत्थरबाजी और आगजनी की गई। तोड़फोड़ और लूटपाट की गई। दर्जन भर लोगों को गंभीर चोटें आई। घटना की सूचना मिलने पर मनीगाछी, नेहरा, बाजितपुर, बहेड़ा, सकतपुर सहित कई थानों की पुलिस मौके पर पहुँची। हिंसा पर काबू पाने में 6 पुलिस वाले भी घायल हो गए। इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक गुणानंद यादव और बाइक मिस्त्री मोहम्मद मुर्शीद के बीच पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ। ग्रामीणों के अनुसार गुणानंद ने अपने ट्रैक्टर से मुर्शीद के यहाँ मिट्टी गिराई थी। दो सौ रुपए बकाया था जिसे देने में मुर्शीद आनाकानी कर रहा था।

प्रत्यक्षदर्शियों ने ऑपइंडिया को बताया कि लेनदेन के विवाद को मुर्शीद ने एनआरसी और सीएए से जोड़ दिया। इसके बाद समुदाय विशेष के लोग हिंसा पर उतर आए। मस्जिद से भी पथराव किए जाने की बात स्थानीय लोगों ने कही है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि गॉंव के ​हिंदुओं को दौड़-दौड़ा कर पीटा गया।

हिंसक भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने बाजार की दुकानों में भी तोड़फोड़ और लूटपाट की। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि बाजार के अधिकांश दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर फरार हो गए। प्रारंभिक तौर पर तोड़फोड़ में करीब चार लाख की क्षति होने की बात बताई सामने आई है। हालाँकि, अभी लोगों का कहना है कि यह अनुमान बढ़ सकता है। स्थानीय प्रशासन की ओर से किए गए सर्वे में करीब 21 क्षतिग्रस्त दुकानों को चिह्नित किया गया है।

दैनिक जागरण के दरभंगा संस्करण में 3 फरवरी 2020 को प्रकाशित खबर

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति सामान्य करने के लिए स्थानीय विधायक ललित कुमार यादव ने घटनास्थल पहुँचकर शांति मार्च किया। शांति बनाए रखने की अपील की। समय रहते माहौल को नियंत्रण करने के लिए उन्होंने प्रशासन को बधाई दी। लोगों से कहा कि प्रशासन को कार्रवाई करने में मदद करें। ताकि, ऐसी घटना फिर से न हो।

इधर, अधिकारियों ने भी गणमान्य लोगों से शांति समिति की बैठक कर लोगों से सामाजिक सौहार्द बनाने की अपील की। अफवाह फैलाने वालों को चिह्नित कर प्रशासन को सूचित करने को कहा। साथ ही ग्रामीणों ने माहौल सामान्य होने तक गाँव में मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति करने की माँग की।

ताजा जानकारी के अनुसार इस मामले में अराजक तत्वों के ख़िलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी। अवर निरीक्षक रमाशंकर पांडेय के आवेदन पर 23 लोगों को नामजद एवं करीब 150 अज्ञात लोगों को अभियुक्त बनाया गया है। नामजद लोगों में से 18 को सोमवार को न्यायायिक हिरासत में भी भेजा गया है। इसकी जानकारी एसडीपीओ उमेश्वर चौधरी ने दी।

फिलहाल गाँव का माहौल सामान्य करने के लिए शांति समिति की बैठक का गठन करके कई प्रयास किए जा रहे हैं। सोमवार को इस समिति की बैठक बीडीओ मनोज कुमार राय की अध्यक्षता में हुई। इसमें सभी लोगों से आपसी सौहार्द व भाईचारा बनाए रखने की अपील की गई।

प्रभात खबर के दरभंगा संस्करण में 4 फरवरी 2020 को प्रकाशित खबर

दरभंगा जिले में ही पिछले दिनों सर्वे करने आई एक टीम को कट्टरपंथियों ने सीएए से जोड़ बंधक बना लिया था। साथ ही उनसे मारपीट भी की थी। यह घटना 31 जनवरी की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जमालपुर थाना क्षेत्र के झगरुआ गॉंव में शुक्रवार को लखनऊ से सामाजिक सर्वे करने आई 17 सदस्यीय टीम को बंधक बना लिया गया। टीम में चार महिलाएँ भी शामिल थीं। काफी जद्दोजहद के बाद प्रशासन ने सर्वे टीम को भीड़ से मुक्त कराया था। उससे पहले भीड़ ने बंधकों से लिखवाया, “हम यह सर्वे RSS और बजरंग दल के लिए कर रहे हैं।”

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