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तमिलनाडु में कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुआ जल्लीकट्टू, 2000 हजार से ज्यादा साँड़ ले रहे हिस्‍सा

तमिलनाडु में पोंगल के अवसर पर खेले जाने वाले जल्लीकट्टू की शुरुआत मदुरै के अवनियपुरम में आज से हो गई। इसके लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। खुद प्रधान जिला न्यायाधीश सी. मणिकम ने मदुरै में आयोजन स्थल का दौरान किया और सुरक्षा-व्यवस्था का जायजा लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार अवनियपुरम में इस साल 730, अलंगानल्लूर में 700 सांड और पालामेडु में 650 साँड़ जलीकट्टू प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं। इस खेल का आयोजन 15 से 31 जनवरी के बीच होगा।

जल्लीकट्टू तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों का एक परंपरागत खेल है जो पोंगल पर आयोजित किया जाता है। इस दौरान जल्लीकट्टू प्रतियोगिता में भाग लेने वाले युवक साँड़ को वश में करने की कोशिश करते हैं। लेकिन इस बार 21 वर्ष से कम उम्र के युवाओं को पालमेडु और अलंगनल्लूर में आयोजित जल्लीकट्टू में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

जानकारी के मुताबिक अवनियपुरम में ये खेल आज सुबह 8 बजे से शुरू हो गया जो शाम 4 बजे तक चलेगा। इस बीच हर घंटे तकरीबन 75 लोग मैदान में उतरेंगे। पूरे आयोजन को सीसीटीवी कैमरे से रिकॉर्ड किया जाएगा।

अवनियपुरम में कानून-व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए 1000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। 30 सदस्यों की एक मेडिकल टीम भी लगाई गई है जिसमें डॉक्टर और नर्सों के अलावा 10 एंबुलेंस शामिल हैं। यह टीम साँड़ और उसे काबू में करने वाले व्यक्ति पर पल-पल की निगरानी रखेगी।

गौरतलब है कि जलीकट्टू के खेल की निगरानी के लिए मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने रिटायर प्रधान जिला जज सी मणिकम को नियुक्‍त किया है। जिन्होंने सुरक्षा-व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद  बताया, “हमने खिलाड़ियों को 75 के बैच में विभाजित किया है, एक बार में 60 साँड़ एक-एक करके छोड़े जाएँगे। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस के आला अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। जिला कलेक्टर ने एक स्थानीय मंत्री के साथ मिलकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। घायल खिलाड़ियों को चिकित्सा सुविधा देने के लिए इक्कीस एम्बुलेंस तैनात हैं।”

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UP पुलिस पर गोलीबारी करने वाला PFI का खलीफा गिरफ़्तार, CAA विरोध में जुमे के दिन हुई थी हिंसा

उत्तर प्रदेश के मेरठ में दिसंबर 20, 2019 को हिंसा भड़क गई थी। इसमें कई जवान घायल हो गए थे। उपद्रवियों ने न सिर्फ़ पुलिस पर पत्थरबाजी की थी, बल्कि गोलियाँ भी चलाई थी। पुलिस के कई जवानों को छिप कर अपनी जान बचानी पड़ी थी। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के नाम पर हिंसा करने वाले कई उपद्रवियों की पहचान करने के बाद पुलिस उन पर कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में पुलिस पर ताबड़तोड़ गोलियाँ चलाने वाले अनीश खलीफा को भी गिरफ़्तार किया गया है। उस पर 20 हज़ार रुपए का इनाम रखा गया था। उसके साथ शाने आलम भी गिरफ़्तार किया गया है।

पुलिस ने इन दोनों को हथियार के साथ गिरफ़्तार किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अनीश खलीफा ने बताया है कि 1987 के दंगों में उसका भाई मारा गया था। उसने दावा किया कि 33 साल पहले हुई इसी वारदात का बदला लेने के लिए उसने पुलिसकर्मियों पर गोली चलाई। अनीश आतंकी संगठन पीएफआई से भी जुड़ा हुआ है। अनीश और आलम इससे पहले भी कई मुक़दमों में आरोपित रहे हैं। बता दें कि 20 दिसम्बर को मेरठ के 4 थाना क्षेत्रों के 8 स्थानों पर हिंसा हुई थी। इसके बाद 180 नामजद व 5000 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किए गए थे।

अब तक 178 आरोपितों की पहचान कर ली गई है। 28 आरोपित फरार हो गए थे, जिनमें से प्रत्येक पर 5,000 रुपए का इनाम रखा गया था। अनीश खलीफा और अनस ने अपने चेहरा छिपा पर पुलिस पर फायरिंग की थी। इन दोनों पर 20-20 हज़ार रुपए का इनाम घोषित किया गया था। अनस पहले ही गिरफ़्तार कर जेल भेजा जा चुका है। वहीं ऊँचा सद्दीक निवासी अनीश को एक गैस गोदाम में से गिरफ़्तार किया गया। उसके पास से तमंचा भी बरामद हुआ है। अनीश का दावा है कि उसके भाई रईस की मौत को उसके परिवार वाले अभी भी याद करते हैं।

अनीश ने 2005 में तारापुरी के पप्पू उर्फ़ अहमद की हत्या कर दी थी। वो उस वक़्त भी जेल गया था। ज़मानत पर रिहा होने के बाद उसने इस मुक़दमे में पीड़ित परिवार से समझौता कर लिया था। अनीश ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि अयोध्या फ़ैसले के बाद पीएफआई सक्रिय हो गया था। पीएफआई के लोग घर-घर जाकर मुस्लिमों को राम मंदिर फ़ैसले के ख़िलाफ़ उकसा रहे थे। इसी तरह 20 दिसम्बर को भी जुमे की नमाज के पास पुलिस पर हमले की साज़िश रची गई थी।

अनीश खलीफा के साथ 8 युवकों को पुलिस पर गोलीबारी करने के लिए तैयार किया गया था। बाद में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बवालियों की पहचान हो गई। खलीफा की गिरफ़्तारी के बाद पुलिस अब पीएफआई के अन्य सदस्यों की धर-पकड़ में लगी है।

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‘₹21 करोड़ में केजरीवाल और सिसोदिया ने बेचा टिकट’: लाल बहादुर के पोते भी बेटिकट

आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल सरकार के पॉंच साल के कामकाज के आधार पर दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ने का ऐलान कर रखा है। लेकिन, उम्मीदवारों की लिस्ट देखकर ऐसा लगता है कि पार्टी को अपने पुराने वफादारों पर भी भरोसा नहीं है। 70 सदस्यीय विधानसभा चुनाव के लेकर आप ने मंगलवार को उम्मीदवारों का ऐलान किया था। 15 विधायकों को बेटिकट कर पार्टी ने 5 ऐसे चेहरों पर दॉंव लगाया है जो उम्मीदवारों की सूची जारी होने से 24 घंटे पहले ही पार्टी में शामिल हुए थे। इनमें कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद महाबल मिश्रा के बेटे विनय मिश्रा भी हैं। उन्हें द्वारका से आप ने उम्मीदवार बनाया है। यहॉं से पिछला चुनाव आप के टिकट पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पोते आदर्श शास्त्री जीते थे।

विनय के अलावा राजकुमारी ढिल्लो, नवीन चौधरी (दीपू), जय भगवान और राम सिंह नेताजी भी अंतिम क्षणों में झाड़ू थाम आप का टिकट पाने में कामयाब रहे हैं। राम सिंह नेताजी को बदरपुर के विधायक एनडी शर्मा का टिकट काट कर आप ने मैदान में उतारा है। शर्मा ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री अ​रविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 21 करोड़ रुपए लेकर राम सिंह को टिकट दिया है। उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान करते हुए आप को देश की सबसे भ्रष्ट पार्टी करार दिया है।

दिल्ली में 8 फरवरी को वोट डाले जाएँगे। आप ने 46 मौजूदा विधायकों पर दोबारा भरोसा जताया है। 24 सीटों पर नए चेहरे उतारे हैं। इनमें 15 सीट उन विधायकों की है, जिनके टिकट काटे गए। 5 वो सीटें हैं, जो विधायकोंं की सदस्यता रद्द होने से खाली हुई और शेष 4 वो सीटें है, जिनपर फिलहाल भाजपा का कब्जा है। आप ने इस बार 8 महिला और 7 अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।

मंगलवार को जारी सूची के मुताबिक अरविंद केजरीवाल इस बार भी नई दिल्ली सीट से ही मैदान में उतरे हैं। 24 सीटों पर बाहरी चेहरों को मौका मिलने के बाद आप में बगावत भी तेज हो गई है। बदरपुर विधायक शर्मा के अलावा सीलमपुर के विधायक हाजी इशराक और दिल्ली कैंट के MLA कमांडो सुरेंद्र ने विरोध जताया है।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर

यहाँ बता दें कि आम आदमी पार्टी की इस सूची में अब्दुल रहमान समेत कई विवादित चेहरों के नाम शामिल हैं। जो पार्टी से बाद में जुड़े और पार्टी में रहते हुए विवादों में घिरे रहे। लेकिन, बावजूद इसके कहा जा रहा था कि पार्टी ने हर टिकट का पैमाना जीतने वाला प्रत्याशी रखा है। खबरों के मुताबिक उन्होंने सर्वे में कमजोर सीटों पर विधायकों को टिकट नहीं दिया है। इन सीटों पर दूसरे दलों के नेताओं को ही टिकट दिया है।

किसका कहाँ से कटा टिकट?

हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर

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समुद्र के रास्ते घुसी रोहिंग्याओं की पलटन, अंडमान में पैर रखते ही पकड़े गए

अंडमान निकोबार द्वीप समूह में रोहिंग्या मुस्लिमों की संदिग्ध गतिविधियाँ बढ़ती जा रही हैं। साथ ही उनकी आबादी में भी तेज़ी से इजाफा हो रहा है। सोमवार (जनवरी 13, 2020) को पुलिस को सूचना मिली थी कि तरमुगली द्वीप पर कुछ संदिग्ध लोगों को नाव के साथ देखा गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 66 लोगों को हिरासत में लिया, जो बाद में रोहिंग्या मुस्लिम निकले। हिरासत में लिए गए सभी आरोपित बांग्लादेश से आए थे। उन्हें जहाँ से गिरफ़्तार किया गया, उससे 34 किलोमीटर की दूरी पर ही वो ख़ास जनजाति के लोग रहते हैं, जिनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं।

ये सभी 66 लोग बांग्लादेश से नाव से अंडमान आए थे। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए लोगों में 24 पुरुष, 27 महिलाएँ व 15 बच्चे हैं। पुलिस इस मामले में आगे की जाँच कर रही है। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में कई वर्षों से रोहिंग्या मुस्लिमों का आना-जाना लगा हुआ है। माना जा रहा है कि रोहिंग्या मुस्लिमों को द्वीप समूह में बसा कर वहाँ की डेमोग्राफी में बदलाव करने की सजिश है। ये सब काफ़ी पहले से हो रहा है। 2013 में ही ख़बर आई थी कि उस साल 1100 रोहिंग्या मुस्लिम अंडमान पहुँचे थे।

इन घटनाओं को देखते हुए इंडियन कोस्ट गार्ड्स भारत-बांग्लादेश समुद्री सीमा पर कड़ी नज़र रख रहे हैं। दिसंबर 2019 में अंडमान सागर में म्यांमार की नौसेना ने 174 रोहिंग्या मुस्लिमों को गिरफ़्तार किया था, जो बांग्लादेश के कैम्पों से भाग रहे थे। उनमें 82 पुरुष, 69 महिलाएँ, 3 किशोर और 15 लड़कियाँ शामिल थीं। पिछले साल कुल 25,000 रोहिंग्या के अंडमान सागर को पार करने की ख़बर आई है।

कहा जा रहा है कि इनमें से अधिकतर ने थाइलैंड का रुख किया है। भारत के कई राज्यों में डेरा डाल चुके रोहिंग्या अब द्वीपों को निशाना बनाने में लगे हैं। इससे मीडिया में चर्चा भी नहीं होती और वो गुपचुप तरीके से बस जाते हैं।

अगर आँकड़ों की बात करें तो 2012 से लेकर 2015 तक 1,12,500 रोहिंग्या मुस्लिमों ने नाव से अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी को पार किया है। म्यांमार के रखाइन स्टेट की बात करें तो वहाँ से 7,50,000 रोहिंग्या मुस्लिमों ने पलायन किया है, जिनमें से अधिकतर भारत आकर बस गए हैं। कई इलाक़ों से आपराधिक वारदातों में इनका हाथ होने की बातें सामने आती रहती हैं।

हाल ही में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सेना और अर्ध सैनिक बलों को रोहिंग्याओं को लेकर अलर्ट किया था। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, भारत पर हमले के लिए पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई करीब 40 रोहिंग्याओं को बांग्लादेश में ट्रेनिंग दे रही है। इसमें बांग्लादेशी आंतकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन (जेएमबी) आईएसआई की मदद कर रहा है।

भारत में हमले का बड़ा प्लान: 40 रोहिंग्याओं का दस्ता, पाकिस्तान दे रहा ट्रेनिंग

1 लाख रोहिंग्या को मुस्लिम देश भेज रहा ऐसी जगह जिसके चारों ओर है पानी ही पानी

बांग्लादेशी या रोहिंग्या इस देश का नहीं है, उसकी पहचान कर, अलग करना समय की माँग

उद्धव के मंत्री नवाब मलिक के भाई ने ग़रीब मजदूरों को लात-घूसों से पीटा, देखें वीडियो

उद्धव ठाकरे कैबिनेट में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक ने मजूदरों की पिटाई की है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो गया, जिसके बाद लोगों ने मंत्री के भाई की इस करतूत की आलोचना की। नवाब उद्धव कैबिनेट में मंत्री हैं। वो एनसीपी की मुंबई यूनिट के अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में उनके भाई कप्तान मलिक द्वारा मजदूरों को लात-घूसों से मारने का वीडियो वायरल होना उद्धव ठाकरे के लिए भी चिंता का सबब बन सकता है।

बता दें कि राज्य में शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के गठजोड़ में नवाब मलिक ने अहम भूमिका निभाई थी। एनसीपी उन्हें राज्य के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे के रूप में पेश करती रही है। वीडियो में देखा जा सकता है कि मजदूर हाथ जोड़ कर मिन्नतें कर रहे हैं कि कप्तान उन्हें न पीटें, लेकिन फिर भी उनकी पिटाई की जा रही है। वीडियो को यहाँ देखें:

कप्तान मलिक ने ग़रीब मजदूरों से पूछा कि उनका ‘वर्क ऑर्डर’ कहाँ है और उनकी पिटाई शुरू कर दी। अभी इस मुद्दे पर उनके भाई नवाब मलिक का कोई बयान नहीं आया है। कप्तान सड़क पर काम कर रहे मजदूरों के पास पहुँचे और उनसे पूछा- “क्या कर रहे हो? कहाँ से आए हो?” इसके बाद उन्होंने उनकी पिटाई शुरू कर दी। कप्तान उनसे पूछने लगे कि क्या उनके पास काम करने की इजाजत है?

कप्तान मलिक ने बाद में अपनी करतूत को जायज भी ठहराया। उन्होंने कहा कि ये मजूदर बिना अनुमति सड़कों को खोदते हैं। उन्होंने कहा कि इन मजदूरों के पास अनुमति का कोई सबूत नहीं था। उन्होंने दावा किया कि ये मजदूर बीएमसी को नुकसान पहुँचा रहे हैं। कप्तान ने कहा कि ये वीडियो एक महीने पहले का है। वीडियो कुर्ला इलाक़े का है। नवाब मलिक अनुशान्ति नगर जीत कर विधायक बने हैं।

‘क़ातिल’ वाले बयान के साथ ‘BJP के स्टार प्रचारक’ मणिशंकर अय्यर की शाहीन बाग़ में दमदार वापसी

कॉन्ग्रेस की तरफ़ से बयान देकर भाजपा के ‘स्टार कैम्पेनर’ का किरदार निभाने वाले मणिशंकर अय्यर की दमदार वापसी हुई है। विवादित बयानों के मसीहा और अजीबोगरीब हरकतें करके सुर्खियाँ बटोरने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री अय्यर ने मंगलवार (जनवरी 14, 2020) को शाहीन बाग़ पहुँच कर सीएए के ख़िलाफ़ धरना प्रदर्शन के लिए बैठे लोगों को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा- “देखते हैं कि किसका हाथ ज़्यादा मजबूत है, हमारा या फिर उस कातिल का?”

बता दें कि मंगलवार को अय्यर शाहीन बाग़ पहुँचे और इसी दिन दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहाँ से हटाने का काम शुरू किया। हालाँकि, पुलिस अभी लोगों को शांतिपूर्वक समझा रही है लेकिन वो मान नहीं रहे हैं। स्थानीय लोगों को इन प्रदर्शनकारियों के कारण ख़ासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और बच्चों को स्कूल आने-जाने में कई अतिरिक्त घंटे लग रहे हैं। ऐसे में, हाईकोर्ट ने पुलिस से जनहित में क़ानून-व्यवस्था बहाल करने को कहा है।

मणिशंकर अय्यर ने कातिल किसे कहा, ये अभी भी चर्चा का विषय है। जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया तो वो टाल गए। अय्यर ने कहा कि शाहीन बाग़ में धरना प्रदर्शन पर बैठे लोग काफ़ी बहादुरी का काम कर रहे हैं और वो बस उनलोगों को सम्मान देने आए हैं। अय्यर ने कहा कि इतनी ठण्ड में भी महिलाएँ वहाँ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं, ये काबिले तारीफ है। आरोप है कि अय्यर ने वहाँ लोगों को भड़काने के लिए ‘कातिल’ वाले बयान का प्रयोग किया।

मणिशंकर अय्यर से जब पूछा गया कि वो कॉन्ग्रेस की तरफ़ से विरोध प्रदर्शन में पहुँचे हैं या फिर व्यक्तिगत रूप से तो उन्होंने कहा कि पार्टी प्रवक्ता से इस बारे में सवाल किया जाना चाहिए। ऐसे में अंदेशा जताया गया है कि कॉन्ग्रेस ने अय्यर को भेज कर शाहीन बाग़ में अराजकता फैलाने वाले लोगों का समर्थन किया है। मीडिया में ये भी कहा जा रहा है कि अगर वो व्यक्तिगत रूप से आए हैं तो हो सकता है कि वो कॉन्ग्रेस के नियंत्रण से ही बाहर निकल गए हैं।

कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर जब भी कोई बयान देते हैं या फिर कोई अजीबोगरीब हरकतें करते हैं, उसका फ़ायदा भाजपा को ही मिलता है। शायद यही कारण है कि पार्टी उन्हें एकांतवास में रखती है। लेकिन वो अचानक से बीच-बीच में निकल आते हैं और अपनी पार्टी की मुश्किलें बढ़ा देते हैं।

तुम देश की एकता व अखंडता के लिए ख़तरा हो: इरफ़ान हबीब को नोटिस, AMU में दिया था ज़हरीला भाषण

आपको याद होगा कि हाल ही में इतिहासकार इरफ़ान हबीब ने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान के साथ दुर्व्यवहार किया था। इरफ़ान हबीब राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ख़ान पर झपट पड़े थे और उनका कॉलर पकड़ कर नोचना चाहते थे। जब ख़ान ने मौलाना आज़ाद का जिक्र किया तो भड़के इरफ़ान हबीब ने कहा कि वो इन्हें नहीं सुनेंगे। अब इरफ़ान हबीब को उनके कई ज़हरीले बयानों के कारण यूपी के एक अधिवक्ता ने नोटिस भेजी है। आरोप है कि उनके बयानों से देश की अखंडता और सम्प्रभुता को ख़तरा पहुँचा है।

88 वर्षीय इरफ़ान हबीब पर आरोप है कि उन्होंने न सिर्फ़ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उपनाम को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी भला-बुरा कहा। लेकिन इससे भी बड़ा आरोप है कि लोगों को भड़का कर वो देश की अखंडता को नुकसान पहुँचाने का काम कर रहे हैं। अलीगढ़ सिविल कोर्ट के अधिवक्ता ने ये नोटिस भेजी। इरफ़ान हबीब ने ये ज़हरीला भाषण एएमयू में दिया था। एएमयू पहले से ही विवादित यूनिवर्सिटी रहा है और सीएए विरोध के दौरान भी यहाँ हिंसा भड़क गई थी।

वकील संदीप कुमार गुप्ता ने अपनी नोटिस में आरोप लगाया है कि सोमवार (जनवरी 13, 2020) को इरफ़ान हबीब के दिए भाषण से देश की ‘अखंडता और विविधता’ को ख़तरा पहुँचा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ये भाषण देश की सम्प्रभुता को भी ठेस पहुँचाने वाला है। गुप्ता ने अपनी नोटिस में इरफ़ान हबीब को सम्बोधित करते हुए लिखा है:

“आपने अमित शाह को सलाह दी कि वो अपने नाम से ‘शाह’ उपनाम हटा लें। आपने कहा कि ये फ़ारसी शब्द है। आपने ये भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का गठन मुस्लिमों पर हमला करने के लिए किया गया। आपने वीर सावरकर को देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराया। क्या आपको नहीं पता कि ‘टू नेशन थ्योरी’ मोहम्मद अली जिन्ना के दिमाग की उपज थी? आपने स्वच्छ भारत अभियान में महात्मा गाँधी के चश्मे के प्रयोग का मखौल उड़ाया।”

इसके अलावा इरफ़ान हबीब के कई ज़हरीले बयान अख़बारों में भी छपे हैं, ऐसा अधिवक्ता की नोटिस में दावा किया गया है। उन्होंने इरफ़ान हबीब से 7 दिनों के भीतर बिना शर्त माफ़ी माँगने को कहा है। उन्होंने कहा है कि अगर हबीब ने माफ़ी नहीं माँगी तो वे उनके ख़िलाफ़ लीगल एक्शन लेने के लिए बाध्य होंगे। इरफ़ान हबीब ने ये बयान सीएए के विरोध में दिए थे।

बंगाल में CAA के समर्थन में रैली की अनुमति नहीं, धारा-144 लगा कर रोक रही TMC सरकार

पश्चिम बंगाल सरकार सीएए को लेकर दोहरा रवैया अपना रही है। जहाँ एक तरफ़ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पदयात्रा कर के लगातार इस क़ानून के विरोध में रैलियाँ कर रही हैं, सीएए के समर्थकों को रोकने के लिए कर्फ्यू लगा दिया जा रहा है। बंगाल पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 144 लगा कर रविवार (जनवरी 12, 2020) को भाजपा को सीएए के समर्थन में रैलियाँ करने की अनुमति नहीं दी। इतना ही नहीं, कई भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ मामला भी दर्ज कर लिया गया। सीएए के समर्थन में नॉर्थ बंगाल में 2 रैलियाँ होनी थीं।

नॉर्थ बंगाल में अपनी कमज़ोर स्थिति को देखते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस ने पूरी ताक़त झोंक दी है। ये वही क्षेत्र है, जहाँ भाजपा ने तृणमूल को कई लोकसभा सीटों पर 2019 चुनाव में पटखनी दी। ममता बनर्जी की पार्टी ने अधिकतर सीटें साउथ बंगाल में जीती। जनवरी 12 को बंगाल भाजपा के महासचिव सायंतन बासु और कूच विहार यूनिट की पार्टी अध्यक्ष मालती रे को सीएए के समर्थन में आयोजित ‘अभिनन्दन यात्रा’ में भाग लेने से रोक दिया गया। पुलिस ने बहाना बनाया कि हिंसा की आशंका से कर्फ्यू लगा दिया गया है।

भाजपा ने तृणमूल सरकार की इन पैंतरेबाजियों के ख़िलाफ़ कोलकाता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। भाजपा का आरोप है कि ममता बनर्जी राज्य में भाजपा के बढ़ते प्रभाव से डर गई हैं और वो जनता को सीएए के समर्थन में रैली करने से रोक रही हैं। जिस रैली में जाने से भाजपा नेताओं को रोका गया, वहाँ पहले से ही बड़ी भीड़ जुट गई थी और मंच सज गया था। किसी ने सम्बोधन भी नहीं किया था। जब भाजपा नेताओं ने किसी अन्य स्थल पर बैठक की तो उनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया।

तृणमूल कॉन्ग्रेस ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान देने की बजाय आरोप-प्रत्यारोप की रणनीति अपनाई है। टीएमसी ने कहा कि भाजपा को पहले राज्य में पार्टी के अध्यक्ष दिलीप घोष को आक्रामक बयान देने से रोकना चाहिए। तृणमूल सरकार का दावा है कि क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ये सब किया गया। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि भाजपा को कभी भी बैठक व रैलियाँ करने से नहीं रोका गया।

न सिर्फ़ भाजपा बल्कि वामपंथी पार्टियों को भी बंगाल में बैठक व रैलियाँ करने से रोका जा रहा है। सीपीएम नेता सूजन चक्रवर्ती ने दावा किया कि उनकी पार्टी के कई बैठकों को टालने के लिए भी पश्चिम बंगाल सरकार ने कई बार धारा-144 का सहारा लिया है।

शाहरुख़ हो गया बेगाना सनम: शाहीन बाग़ के CAA विरोधियों ने ‘खामोश किंग ख़ान’ पर साधा निशाना

शाहरुख़ ख़ान को सीएए विरोधियों ने निशाना बनाया है। बता दें कि शाहीन बाग़ में कई प्रदर्शनकारी कई दिनों से जमे हुए हैं और सरकार के विरोध के नाम पर अंडे व बिरयानी खा कर पिकनिक मना रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों को ख़ासी परेशानी का समाना करना पड़ रहा है, जिन्हें कहीं भी आने-जाने में घंटों लग जा रहे हैं। शाहरुख़ ख़ान से भी वामपंथी लगातार अपील करते रहे हैं कि वो सरकार के ख़िलाफ़ बोलें लेकिन तीनों ख़ान ने इस सम्बन्ध में अब तक कोई बयान नहीं दिया है।

अब स्थिति ये है कि शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों ने शाहरुख़ ख़ान को निशाना बनाया है। उन्होंने नाराज़गी जताई है कि वो इस मुद्दे पर सरकार के विरोध में क्यों नहीं बोल रहे? प्रदर्शनकारियों ने ‘किंग ख़ान’ के विरोध में ये गाना गाया:

तुझे देखा तो ये जाना सनम..
शाहरुख़ हो गया बेगाना सनम..
अब यहाँ से कहाँ जाएँ हम..
अब काग़ज़ कैसे दिखाएँगे हम..

प्रदर्शनकारियों ने पूछा कि जब वो लोग ‘लड़ाई’ लड़ रहे हैं, ऐसे में सुपरस्टार चुप क्यों हैं? उन्होंने शाहरुख़ पर ख़ामोश रहने का भी आरोप लगाया।

बता दें कि इस गाने को ‘दिलवाले दुहनिया ले जाएँगे’ के लोकप्रिय गाने के शब्दों में हेरफेर कर के तैयार किया गया है। 1995 में आई इसी फ़िल्म ने शाहरुख़ को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया था। अब इसी फ़िल्म के गाने का इस्तेमाल कर के सीएए विरोधी उनकी आलोचना कर रहे हैं।

शाहीन बाग़ में मंगलवार (जनवरी 14, 2020) को पुलिस भी पहुँची, जो प्रदर्शनकारियों को वहाँ से हटाएगी। पुलिस ने कहा है कि इसके लिए शांतिपूर्वक तरीके का सहारा लिया जाएगा और बलप्रयोग नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने ये कार्रवाई की है। स्थानीय लोगों की परेशानी को देखते हुए हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वो जनहित में क़ानू-व्यवस्था बहाल करने का कार्य करे।

प्रोफेसर को राहुल गाँधी पर फेसबुक पोस्ट पड़ा भारी, NSUI के विरोध के कारण MU ने उन्हें अनिवार्य ‘छुट्टी’ पर भेजा

मुंबई यूनिवर्सिटी के एक प्रोफ़ेसर को अनिवार्य ‘छुट्टी’ पर भेज दिया गया है। बताया गया है कि प्रोफेसर ने दिसंबर के महीने में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को लेकर फेसबुक पर एक आपत्तिजनक पोस्ट लिखा था। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की गठबंधन सरकार पर असहिष्णुता का आरोप लगाया है। मुंबई यूनिवर्सिटी के एकेडमी ऑफ थिएटर आर्ट्स के निदेशक योगेश सोमन ने कथित तौर पर वीडियो में कुछ आपत्तिजनक बातें कहीं थी, जिसकी वजह से यूनिवर्सिटी द्वारा यह निर्णय लिया गया।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोफेसर सोमन ने 14 दिसंबर को फेसबुक पर एक वीडियो ब्लॉग लिखा था। इस वीडियो में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को NSUI द्वारा और कुछ शब्दों को विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा आपत्तिजनक बताया गया। बताया जा रहा है कि NSUI ने प्रोफेसर योगेश सोमन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। जिसके बाद कल विश्वविद्यालय की फैक्ट-फाइंडिंग ने उसे दोषी पाया और फिर उन्हें छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया गया।

23 दिसंबर को NSUI के सदस्यों ने मुंबई विश्वविद्यालय के वीसी डॉ सुभाष पेडणेकर का घेराव किया था और योगेश सोमन के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। 51 सेकंड के इस वीडियो में मुंबई विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर सोमन, राहुल गाँधी से कहते हुए दिखाई दे रहे हैं, “आप वास्तव में सावरकर नहीं हैं, आपके अंदर उनके कोई गुण मोजूद नहीं हैं। सच तो यह है कि आप एक सच्चे गाँधी ही नहीं हैं… ”

रिपोर्ट्स के अनुसार NSUI ने कहा था कि सोमन विश्वविद्यालय में एक राजनीतिक वकील की तरह व्यवहार कर रहे हैं और छात्रों के बीच संघर्ष को भड़का सकते हैं।

वहीं, यूनिवर्सिटी का कहना है कि प्रोफेसर के खिलाफ फेसबुक पोस्ट के अलावा और भी कई अन्य आरोप थे। यह वीडियो पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा वीर सावरकर के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर था। गौरतलब है कि राहुल गाँधी ने दिल्ली में एक रैली के दौरान कहा था, “मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं है, मैं सच के लिए माफी नहीं माँगूँगा”, उन्होंने सावरकर पर अंग्रेजों से माफी माँगने का आरोप लगाया था।

प्रोफेसर के साथ हुई घटना अघाड़ी सरकार की असंतोष पर कार्रवाई का ताजा उदाहरण है। अभी कुछ दिनों पहले ही शिवसेना ने उद्धव ठाकरे की आलोचना करने के लिए उसकी पिटाई की थी और फिर जबरन उसका सिर मूँड़वा दिया था। विधायक आदित्य ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं के इस व्यवहार की निंदा करने के बजाय उन्होंने पीड़ित को ट्र्रोल कहा था।