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BHU: 10-12 आज़ादी गैंग सदस्यों की खुली पोल, CAA-NRC के समर्थन में दिखी बड़ी भीड़

अब मीडिया गिरोह द्वारा ‘शीरोज’ के रूप में उछाली गई लड़कियों की सच्चाई सामने आ चुकी है। जिहाद और आतंकवाद समर्थक केरल की लदीदा और आयशा रेना की पोल खुल चुकी है और उनकी भी जिन्होंने बाकायदा इसकी प्लानिंग की थी। जिन जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के समर्थन में देश के अन्य छात्रों को ये मीडिया गिरोह खड़ा कर, उनके कन्धों पर बंदूक रखकर हिंसा और सत्ता विरोध का नाटक करने वाला था, उसकी भी हवा निकल चुकी है लेकिन वामपंथी और कॉन्ग्रेसी तंत्र ने हार नहीं मानी है। आखिरी जोर आजमाइस जारी है और देश के खासतौर से गुमराह मजहबी लोग और छात्र इनके द्वारा फैलाए झूठ का शिकार होकर खुद को ही नुकसान पहुँचा रहे हैं।

इसे समझने के लिए आपको कल काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के बाहर का नज़ारा दिखाना चाहता हूँ। सोमवार (16 दिसंबर) को BHU के सिंहद्वार पर जॉइंट एक्शन कमिटी के बैनर तले कुछ वामपंथी संगठनों के लोग थे जो CAA के विरोध में जुलुस निकाल रहे थे। उसी समय बहुत से BHU के छात्र ऐसे भी थे, जो देश के इस कानून के साथ थे। ऐसे समर्थक छात्रों ने एक बड़ी सभा की, कानून के समर्थन में अपनी बात रखी लेकिन दूसरों को गोदी मीडिया कहने वाली यह वामपंथी-कॉन्ग्रेसी विचारधारा से पोषित गिरोह ऐसे छात्रों को नजरअंदाज करती है और कल भी यही किया। उन्हें जो करना था, वही किया। वामपंथी-कॉन्ग्रेसी एजेंडे के तहत उस विरोध के आंदोलन को उन्होंने हाईलाइट किया, जिसे वामपंथी छात्रों द्वारा आयोजित किया गया था। छात्रों ने ही ऑपइंडिया को बताया कि यह पूरा विरोध प्रदर्शन वामपंथी संगठन जॉइंट एक्शन कमिटी के द्वारा चलाया गया।

CAA और NRC के समर्थन में BHU के छात्र

जॉइंट एक्शन कमिटी सिर्फ BHU में ही नहीं बल्कि कई और विश्वविद्यालयों में भी है। जिसका काम ही है देशविरोधी गतिविधियों को संचालित करते हुए विरोध प्रदर्शन करना। इस जॉइंट एक्शन कमिटी में वामपंथी संगठन भगत सिंह छात्र मोर्चा, आइसा और कॉन्ग्रेस का छात्र संगठन जो अब BHU में पूरी तरह बिखरा हुआ है, के लोग शामिल हैं। BHU के ही विभिन्न विभागों के CAA समर्थक छात्रों ने बताया कि इनका सपोर्ट कर रहे विश्विद्यालय के ही कुछ वामपंथी और JNU के प्रोफ़ेसर हैं, जो ऐसे विरोध प्रदर्शनों को अक्सर हवा देते हैं।

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में बीएचयू के सिंहद्वार पर सोमवार को जिन संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया, उनके नाम से ही आप काफी कुछ समझ जाएँगे, ये नाम हैं- आइसा, भगत सिंह छात्र मोर्चा आदि। इनसे जुड़े छात्रों ने कहा कि छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई पूरी तरह गलत है। इस दौरान ‘हमें चाहिए आजादी’ के चिर-परिचित नारे भी लगाए गए। किससे-किसको आजादी चाहिए, ये आप कई और मंचों से भी सुन चुके हैं।

जॉइंट एक्शन कमिटी के बैनर तले प्रदर्शन करते वामपंथी संगठन

जॉइंट एक्शन कमिटी के तहत ये वही लोग हैं, जो कुछ दिन पहले ही डॉ. फिरोज खान के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में नियुक्ति के समर्थन में भी जुलुस निकाल रहे थे। जिसे तब भी मीडिया के एक धड़े ने भारी समर्थन देते हुए लाइव दिखाया था और जो खान की नियुक्ति का विरोध कर रहे थे; उन्हें धर्मान्ध, ब्राह्मणवाद समर्थक से लेकर, छात्र के नाम पर कलंक भी कहा गया था।

कल शाम को फिर से ‘प्रोफेशनल’ धरना-विरोध-प्रदर्शन करने वाले छात्रों द्वारा नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में ब्राह्मणवाद से लेकर आजादी और कई तरह की डिमांड की जा रही थी। इन 10-12 ‘प्रोफेशनल’ प्रदर्शनकारियों का साथ किसने दिया, वो भी मुख्यद्वार पर? इन्हें साथ मिला ऐसे छात्रों का, जो मुख्यद्वार पर खड़े थे और जो मुद्दे और सच से ही अनजान थे।

जॉइंट एक्शन कमिटी के सदस्य

ज़्यादातर छात्र कल जामिया में पुलिस के द्वारा किए गए लाठीचार्ज के कारण इस आशंका में बुलाए गए थे कि कल आपको भी पुलिस पिटेगी तो आप क्या करेंगे? और तो और, विरोध करने वाले अधिकांश छात्र-छात्राएँ, BHU के न होकर बाहरी थे। ऐसा BHU के छात्रों ने ही ऑपइंडिया को बताया और कइयों के नाम भी गिनाए जैसे- इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वालों में आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए संदीप पांडेय, आइसा के आशुतोष कुमार, प्रियांक मणि, अनुपम कुमार, आदर्श पांडेय और शुभम सुभाष राव से लेकर आयुषी जैसे जॉइंट एक्शन कमिटी के कई लोग थे।

विरोध कर रहे वामपंथी संगठन के सदस्य

विरोध कर रहे जॉइंट एक्शन कमिटी के सदस्यों ने वहाँ मौजूद छात्रों को भी अधूरा सच बताया। उन्होंने कहा, “कई दिनों से छात्र जामिया मिलिया, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी समेत देश भर में आंदोलन चला रहे हैं। इस क्रम में पुलिस ने जामिया के अंदर घुसकर लाइब्रेरी, हॉस्टल और बाथरूम में भी लाठी चार्ज किया। गोलियाँ चलाई गई। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में पुलिस द्वारा इस तरह की गुंडागर्दी बहुत ही शर्मनाक है।” जबकि इसका सच कल ही सामने आ गया था कि तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा की शुरुआत किसने की। किसने देशविरोधी और जिहादी नारे लगाए। लेकिन वामपंथी मीडिया गिरोह को सच बोलना कहाँ हैं!

आइसा के नेतृत्व में भी यही लोग प्रदर्शन करते हैं , तस्वीर हाल ही की है , यहाँ भी इन्हें ब्राह्मणवाद से आजादी चाहिए

इनके पूरे विरोध-प्रदर्शन को मीडिया ने इस तरह से चलाया मानो दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के बाद अब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र भी नागरिकता संशोधन अधिनियम और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जबकि पूरा सच यह नहीं है। पूरा सच यह है कि इसी कानून के समर्थन में विरोध वालों के मुकाबले ज्यादा छात्र थे।

दूसरी सच्चाई यह है कि कल इस विरोध प्रदर्शन की स्पीच सुनेंगे तो सच की कई और परतें भी खुलेंगी। विरोध करने वालों ने जो कहा वो भी पढ़िए, “पुलिस ने जामिया के छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार भी किया है। यह लड़ाई देश बचाने की लड़ाई है, जिसमें सभी को साथ आना चाहिए। देश को हिटलर की जर्मनी की तरह बनाया जा रहा है। आज मुस्लिमों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, सरकार उन्हें आतंकवादी बता रही है और उन पर गोलियाँ चलाई जा रही है। अगर आज हम खड़े न हुए तो कल देश बर्बाद हो जाएगा। यह सरकार जब तक साम्प्रदायिक फासीवादी नागरिकता संसोधन कानून को वापस नहीं लेती है, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।” अब इस स्पीच को पढ़कर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये कौन लोग हैं। और ऐसा कब से करते आ रहे हैं और क्यों?

BHU में विरोध प्रदर्शन के उलट दूसरी तस्वीर भी देखी जाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान ही नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में भी BHU के तमाम दूसरे छात्र भी आ गए। इन्होंने इस कानून के समर्थन में और वामपंथी संगठन जॉइंट एक्शन कमिटी के विरोध में प्रदर्शन किया। मामला बढ़ते-बढ़ते दोनों ग्रुप में नोकझोंक तक पहुँच गई। हालाँकि, किसी तरह पुलिस ने स्थिति को काबू में किया। CAA कानून के समर्थन में भी BHU के बड़े ग्रुप ने मार्च निकाला। उन्होंने कहा, “CAA देशहित में है और इसका स्वागत होना चाहिए। विरोध करने वाले संविधान का विरोध कर रहे हैं और इन्हें ब्राह्मणवाद से आजादी चाहिए, इन्हें हिंदुत्व से आजादी चाहिए। ऐसे लोगों को देशहित से कोई मतलब नहीं है। हर अच्छी चीज का विरोध करना ही इनका काम है।”

अब बात मीडिया की। फिरोज खान के समर्थन में निकले जुलुस को मीडिया के एक धड़े ने महान आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया था। उसी मीडिया गिरोह ने CAA विरोध के जुलूस को कवर भी किया और यह भी कहा कि विरोध करने वाले सभी BHU के छात्र हैं। जबकि सच यह है कि जॉइंट एक्शन कमिटी में ज़्यादातर प्रोफेशनल विरोध प्रदर्शन करने वाले वामपंथी छात्र थे। उनमें से BHU के कुछ ही गिने-चुने। सच्चाई यह भी है कि ज़्यादातर विरोध करने वाले महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ और हरिश्चंद पीजी कॉलेज के वामपंथी संगठनों के छात्र थे, जो BHU गेट पर मौजूद थे।

मीडिया गिरोह को ये नैरेटिव शूट करता है। इसलिए पहले पूरा तंत्र मिलकर अफवाह उड़ाता है। लोगों को भरमाता है। जब झूठ अपनी जड़ें जमा लेता है तो उसे इस तरह से पेश करता है, जैसे ये उन्हीं की आवाज हो, जो खुद शिकार हुए हैं।

कल शाम विरोध-प्रदर्शन में जो भी थे, उनमें उन सभी अफवाहों के बैनर-पोस्टर लहरा रहे थे, जो दरअसल हुआ ही नहीं। न जामिया में कोई मरा और न ही पुलिस के लाइब्रेरी में घूसकर तोड़फोड़ और बस के आगजनी की बात सच थी। मनीष सिसोदिया, अमानतुल्लाह जैसे लोग जो भ्रम और झूठ फैलाए थे, उन पर FIR दर्ज हुआ है। लेकिन वामपंथी तंत्र की तरह सच सामने आने पर भी इन नेताओं ने माफ़ी नहीं माँगी है। बाकी मीडिया गिरोह भी भ्रमित छात्रों के विरोध को जनता की आवाज बता चुका है। लेकिन किसी ने भी छात्रों को सच बताना ज़रूरी नहीं समझा। स्टूडियो से रैली वाले दौर में मीडिया गिरोह खुद ही नफ़रत और झूठ को हवा देने में लगा है और दूसरों से ये अपील करता है कि टीवी मत देखिए, अखबार मत पढ़िए। हालाँकि इसमें भी उनका प्रोपेगेंडा है। प्रोपेगेंडा यह है कि अगर आप TV देखेंगे, पेपर या वेबसाइट पढ़ेंगे तो उन्हें सच पता चल जाएगा और फिर वो गिरोह के झूठ और अर्धसत्य की दुकान से मुँह फेर लेंगे, जो यह नहीं चाहते।

ये पूरा वामपंथी तंत्र इतना मजबूत है कि पूरे देश में आसानी से मैनेज कर लेता है कि कब विरोध होगा और कब हिंसा और तोड़फोड़। क्या दिखाना है और क्या छिपाना है, ये भी बड़ी चालाकी से तय हो जाता है फिर बाकी लोग इस झूठ का पूरे जी-जान से प्रचार करते हैं।

ये पूरा गिरोह आपको कभी ये नहीं बताएगा कि ये खुद ही मजहब विशेष में डर पैदा कर रहे हैं। ये नहीं बताएँगे कि उन जेहादी लड़कियों को जो कभी याकूब मेमन से लेकर जिहाद का खुला आह्वान कर चुकी हैं, जिनके नेतृत्व में पुलिस और पत्रकारों पर हमले भी हुए हैं, उन्हें ‘शीरोज’ बनाकर ये क्यों प्रस्तुत करते हैं। इनका तरीका बहुत सिंपल है – जो बात जिस तक पहुँचानी थी, वो पहुँच गई, अब जब सारा सच सामने आ गया तो चुप्पी साध लो। झूठ को सच की तरह परोस दो। सच को झूठ कहना है क्योंकि सत्ता के खिलाफ नैरेटिव बिल्डिंग में इस तरह का मैनेजमेंट जरूरी है। यह गिरोह इस वर्किंग कल्चर को ठीक से जानता है।

ऑपइंडिया ने BHU के विभिन्न छात्रों से इस पूरे मुद्दे पर बात की। कई छात्रों से हमने पूछा कि CAA में ऐसा क्या है, जिसका विरोध किया जाए? इस सवाल पर ज़्यादातर छात्रों का कहना था कि वे तो समर्थन में हैं। देश के साथ हैं। जो छात्र इसके विरोध में दिखे, उनसे भी हमने बात की। उनसे पता चला कि ज़्यादातर एक प्रचलित प्राइम टाइम से फैलाए गए अफवाहों के शिकार हुए हैं। यह वही प्राइम टाइम है, जो स्टूडियो से देश विरोधी प्रोग्राम के लिए जाना जाता है। जहाँ से झूठ को भविष्य और उसके काल्पनिक डर की खोल में लपेटकर छात्रों को ही नहीं बल्कि पूरे देश को बहकाया जाता है। इस बात को कई छात्रों ने भी स्वीकारा।

प्रोपेगेंडा में फँस गए छात्रों ने बताया कि मुस्लिमों को मोदी सरकार देश से बाहर कर रही है और उनकी नागरिकता छीन रही है। जबकि इस कानून में ऐसा कुछ भी नहीं है। लेकिन सच से किसे वास्ता! गिरोह का प्रोपेगेंडा प्रचार तंत्र इतना मजबूत है कि बहुत कम समय में झूठ को देश का सच बनाने में माहिर है। कुछ पूछने पर वही हिटलर की बात करते मिलेंगे और उसके नाम पर डर फैलाते कि ऐसा भारत में भी होने जा रहा है। जबकि उन्हें पता है कि ये डर उन्होंने ही पैदा किया है और इस डर के बल पर ही हर तरह की हिंसा को जायज ठहराया है।

कल BHU के सिंहद्वार पर ही CAA के समर्थन कर रहे छात्रों ने माइक मीटिंग के दौरान ही, इस पूरे अफवाह तंत्र और देश विरोधी गतिविधि की पोल खोल दी। पतंजलि पांडेय, अरुण चौबे, अक्षय, देवेश ठाकुर, आनंद मोहन, शशिकांत जैसे BHU के सोशल साइंस और कला संकाय, विज्ञान संकाय, SVDV के कई छात्रों ने बताया कि वे कौन-कौन लोग हैं, जो BHU के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं। इन छात्रों ने बताया कि जॉइंट एक्शन कमिटी के कई लोग BHU के बाहर के हैं और इनका BHU से कोई लेना देना नहीं है। जबकि मीडिया गिरोह ने जिस तरह से इन्हें कवर किया, वो आपको इस तंत्र के फैले हुए विस्तृत जाल के बारे में बताता है।

BHU के मुख्यद्वार पर CAA के समर्थन में माइक मीटिंग करते BHU के छात्र

चंद छात्रों को छोड़कर ज़्यादातर BHU के छात्र CAA के समर्थन में हैं। आज भी छात्रों ने CAA के समर्थन में जुलुस निकाला, जिसे प्रशासन ने मुख्य द्वार बंद कर रोक दिया लेकिन छात्रों ने कैंपस में ही महिला महाविद्यालय से मुख्य द्वार तक समर्थन रैली की। यह जुलुस कैंपस में ही महिला महाविद्यालय से छात्र संघ भवन होते हुए चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा के सामने आकर रुकी और यहीं पर एक सभा के साथ कार्यक्रम संपन्न किया गया।

मीडिया गिरोह ने इसे आज भी रिपोर्ट नहीं किया क्योंकि ये उनके नैरेटिव को शूट नहीं करता। छात्रों ने बताया, “BHU कभी भी देश विरोधी गतिविधियों का अड्डा नहीं रहा और न आज है।” वहाँ के ज़्यादातर छात्रों से बातचीत में हमने पाया कि उन्होंने इस कानून को पढ़ा है, न ये किसी विशेष मजहब के खिलाफ है और न ही देश के नागरिकों के खिलाफ। जो भी ऐसा कह रहे हैं वो झूठ फैला रहे हैं और वो ऐसे वामपंथी और कॉन्ग्रेसी संगठनों के विरोध में तथा देश एवं संविधान के साथ हैं। उनका कहना है कि वे किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करते और न करेंगे बल्कि कैंपस में अगर कोई ऐसा करने की कोशिश भी करता है तो उसे कामयाब नहीं होने देंगे।

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स्मृति ईरानी को नीचा दिखाने के लिए कॉन्ग्रेसियों ने पद्मभूषण सम्मानित BEST सांसद को बताया ‘रेप गुरु’

वैसे तो सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा फैलाए जा रहे झूठ का आए दिन पर्दाफाश होता रहता है और दुनिया को पता चलता रहता है कि कॉन्ग्रेस खुद को पाक साफ दिखाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। लेकिन, इस बार मामला सिर्फ़ झूठ का नहीं है। इस बार मामला नारी सम्मान का है। इस बार मामला एक मंत्री पद पर आसित महिला की छवि धूमिल करने का है और साथ ही उसके चरित्र पर सवालिया निशान लगाने का है…

बीते दिनों राहुल गाँधी ने ‘रेप इन इंडिया’ पर एक विवादित बयान दिया। जिसके बाद संसद में हंगामा हुआ और स्मृति ईरानी समेत कई महिला सांसदों ने उनके माफी माँगने की बात की। लेकिन कॉन्ग्रेस की बेशर्मी देखिए, माफी माँगना तो दूर उन्होंने स्मृति ईरानी को ही बदनाम करना शुरू कर दिया।

दरअसल, महिला कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और AICC की सदस्य इंद्राणी मिश्रा ने स्मृति ईरानी की एक तस्वीर को ट्वीट किया, जिसमें वे संसद के बाहर पद्म भूषण से सम्मानित हुकुमदेव नारायण यादव के सामने हाथ जोड़कर उनसे आशीर्वाद ले रही हैं। लेकिन इंद्राणी ने इस तस्वीर को ऐसे पेश किया है जैसे स्मृति ईरानी कोई बहुत गलत काम कर रही हैं और उन्हें उसके लिए शर्म भी नहीं आ रही।

इंद्राणी इस तस्वीर में सांसद हुकुमदेव को ‘रेप गुरु’ का चेहरा बता रही हैं और कह रही है स्मृति ईरानी इनके आगे हाथ जोड़े खड़ी हैं। हालाँकि उनकी इस हरकत से साफ पता चलता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी से जुड़ने के बावजूद भी उन्हें विरोधी पार्टी से जुड़े नेताओं की बिलकुल पहचान नहीं है। या ये कहें कि वो एक महिला मंत्री को गिराने के लिए जानबूझकर ऐसा कर रही है। लेकिन हैरानी की बात है कि वो अकेली ऐसी कॉन्ग्रेसी नहीं हैं…


कॉन्ग्रेस की छात्र संगठन ईकाई NSUI की सोशल मीडिया कॉर्डिनेटर पंपी बघेल ने भी इसी तस्वीर को पोस्ट किया है और चिन्मयानंद की जय करते हुए बोला है कि जिसके आगे मैडम (स्मृति ईरानी) हाथ जोड़ती हैं, उसके लिए सजा की माँग कैसे करेंगी।

अब, इन दोनों कॉन्ग्रेसी महिलाओं द्वारा भ्रम फैलाने के लिए अपलोड की गई तस्वीर के बाद सोशल मीडिया पर ये मामला तूल पकड़ने लगा। देखते ही देखते कॉन्ग्रेसी समर्थकों ने स्मृति ईरानी पर तरह-तरह की बातें करनी शुरू कर दीं।

किसी ने इस तस्वीर में दिख रही स्मृति ईरानी को नौटंकी बताया और किसी ने उनके चाल-चरित्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि देखो आशीर्वाद कौन ले रहा है और आशीर्वाद कौन दे रहा है। इन कॉन्ग्रेसी टुटपूंजिए नेताओं को पता ही नहीं कि हुकुमदेव नारायण वही सांसद हैं, जिन्हें 2014-17 तक आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंट्रियन अवॉर्ड मिल चुका है।

कॉन्ग्रेस समर्थकों ने इस बीच बार-बार यह दर्शाने की कोशिश की कि भाजपा की महिला मंत्री चिन्मयानंद से आशीर्वाद ले रही है और संसद में, जनता के सामने बार-बार झूठ बोल रही हैं।

इसके बाद, छत्तीसगढ़ से युवा कॉन्ग्रेस नेता संजय अजगल्ले ने भी इस पर ट्वीट किया और स्मृति ईरानी पर निशाना साधते हुए लिखा कि नौटंकी करना हो तो कोई इनसे सीखें?

राजनीता मेहता, जो खुद को ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस की नेशनल कॉर्डिनेटर और हरियाणा राज्य की मीडिया प्रवक्ता बताती हैं, वे भी इस तस्वीर को शेयर करती हैं और स्मृति ईरानी को कहती हैं कि अब जनता को मैडम क्या मुँह दिखाएँगी?

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं की मूढ़ता देखने के बाद सोशल मीडिया पर स्मृति ने खुद ट्वीट किया और सबको ये बताया कि वे लोग जिस सज्जन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, उनका नाम चिन्मयानंद नहीं है, बल्कि हुकुमदेव नारायण यादव है। जिन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया है और जो दलित समाज के लिए काम कर चुके हैं।

बता दें कि ये पहली बार नहीं है, जब स्मृति ईरानी को नीचा दिखाने के लिए कॉन्ग्रेस ने इस तरह उन पर हमला किया हो। साल 2014 में भी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता उनके ख़िलाफ़ बोलते नजर आए थे। जिसका जवाब देते हुए उन्होंने इस वर्ष अमेठी में राहुल गाँधी को हराकर ऐतिहासिक जीत हासिल की।

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जामिया में मिला कारतूस हमारा नहीं, दिल्ली पुलिस ने गोली नहीं चलाई: गृह मंत्रालय

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दावा किया है कि नागरिकता विधेयक संशोधन के खिलाफ विरोध के बहाने चल रही हिंसा के दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के किसी भी छात्र पर दिल्ली पुलिस ने गोली नहीं चलाई है। गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के ही मातहत आती है।

गौरतलब है कि सफदरजंग और होली फैमिली अस्पतालों में क्रमशः दो और एक ‘प्रदर्शनकारी’ भर्ती किए गए थे। इनमें से होली फैमिली अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारी की चोट गोली से नहीं थी, और उसे डिस्चार्ज भी कर दिया गया है। वहीं सफ़दरजंग अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों के घावों के बारे में अलग-अलग मेडिकल और पुलिस जाँच चल रही है

प्रदर्शन स्थल पर पाए गए खाली कारतूस के बारे में भी पुलिस के एक अधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए यह साफ़ कर दिया कि हालाँकि यह बात तो तय है कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कोई गोली नहीं चलाई है, लेकिन इसकी फिर भी विस्तृत जाँच चल रही है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एक अन्य प्रश्न के जवाब में अधिकारी ने बताया कि घटना वाले दिन दिल्ली पुलिस के पास रबड़ की गोलियाँ तक नहीं थीं।

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पायल रोहतगी को मिली जमानत, जल्द होंगी जेल से रिहा: नेहरू-गाँधी परिवार पर विवादित टिप्पणी करने का आरोप

राजस्थान के बूँदी एडीजे कोर्ट ने जेल में बंद अभिनेत्री पायल रोहतगी को बड़ी राहत प्रदान करते हुए उन्हें जमानत दे दी है। कोर्ट ने पायल की जमानत याचिका पर दोनों पक्षों के वकीलों की बहस के बाद रोहतगी द्वारा सोशल मीडिया पर डाले गए नेहरू-गाँधी परिवार के वीडियो को देखा और इसके बाद अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने उन्हें 25-25 हजार रुपए के दो मुचलकों पर जमानत दे दी है।

इससे पहले पायल रोहतगी को कोर्ट ने 24 दिसंबर तक के लिए जेल भेज दिया था। रोहतगी को अब जमानत के बाद जेल से रिहाई मिलेगी। बता दें कि पायल को बूॅंदी पुलिस ने रविवार (दिसंबर 15, 2019) को अहमदाबाद स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था। उन्हें लूट और हत्या समेत अन्य आपराधिक मामलों में आरोपित महिला कैदियों के साथ जेल में रखा गया था। इससे पहले पायल की तरफ से अडिशनल चीफ जुडिशल मैजिस्ट्रेट कोर्ट में जमानत याचिका पेश की गई थी, लेकिन कोर्ट ने तब खारिज कर दी थी।

पायल पर मोतीलाल नेहरू को लेकर सोशल मीडिया में आपत्तिजनक पोस्ट करने का आरोप है। उनकी गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थन में सोशल मीडिया में ‘आई स्टैंड विथ पायल रोहतगी’ ट्रेंड करने लगा था। जेल भेजे जाने के बाद एक बार फिर लोग सोशल मीडिया पर उनका समर्थन कर रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि सावरकर पर अपमानजनक टिप्पणी के लिए महाराष्ट्र सरकार कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी को कब गिरफ्तार करेगी?

बता दें कि रविवार को पायल ने ट्वीट किया था, “मुझे राजस्थान पुलिस ने मोतीलाल नेहरू पर एक वीडियो शेयर करने के लिए गिरफ्तार किया है। उस वीडियो को मैंने गूगल से जानकारी लेकर बनाया था। बोलने की आजादी एक मजाक है।” अपने ट्वीट में उन्होंने राजस्थान पुलिस, पीएमओ, होम मिनिस्ट्री के ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट को टैग किया था।

पायल की गिरफ्तारी पर पुलिस अधिकारी ने बताया था कि रोहतगी के खिलाफ पुलिस को 10 अक्टूबर 2019 को शिकायत मिली थी। उन पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता चर्मेश शर्मा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाए थे कि अभिनेत्री ने फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से नेहरू और उनके परिजनों के खिलाफ विवादास्पद विडियो बनाकर पोस्ट किए हैं। पायल पर हुई इस कार्रवाई के बाद उनके पति संग्राम सिंह ने ट्वीट कर पीएम मोदी से इस मामले में मदद की गुहार लगाई थी।

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कारगिल के ‘शैतान’ परवेज़ मुशर्रफ़ को फाँसी की सजा: इमरजेंसी थोपने के लिए देशद्रोह का था मामला

पेशावर हाई कोर्ट ने गायब चल रहे पूर्व राष्ट्रपति, सैन्य जनरल और मुल्क को कारगिल की शर्मनाक हार में झोंकने वाले पूर्व तानाशाह परवेज़ मुशर्रफ़ को मौत की सज़ा सुनाई है। उन पर 3 नवंबर, 2007 को संविधान को निलंबित कर देश में इमरजेंसी थोपने के मामले में देशद्रोह का मुकदमा चल रहा था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह पाकिस्तान में पहली बार हो रहा है कि जम्हूरियत और दस्तूर (लोकतंत्र और संविधान) की ‘हत्या’ के आरोप में किसी सैन्य शासक को फाँसी सुनाई जा रही है। गौरतलब है कि पाकिस्तान ने अपने 70 साल के इतिहास में अधिकांश समय सैन्य तख्तापलट और तानाशाही के बीच ही बिताया है।

2013 में दायर इस मुकदमे में उनका केस तीन जजों की पीठ सुन रही थी। बताया जा रहा है कि इस समय वे दुबई में हैं, जहाँ वह 2016 में इलाज के नाम पर गए थे। इसके पहले 2001 से 2008 तक मुशर्रफ़ पाकिस्तान के राष्ट्रपति रह चुके हैं। इसी महीने उन्होंने अस्पताल के बिस्तर से एक वीडियो संदेश जारी कर अपने खिलाफ मुकदमे को बेबुनियाद बताया था।

रॉयटर्स ने पाकिस्तानी कानून अधिकारी सलमान नदीम के हवाले से दावा किया है कि परवेज़ मुशर्रफ़ को पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 6 के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। उन्होंने 1999 में कारगिल युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का तख्ता-पलट कर सत्ता हासिल की थी।

मुशर्रफ को जिस कानून के तहत मृत्युदण्ड सुनाया गया है, वह 1973 में लागू हुआ था। इसके तहत राष्ट्रद्रोह के मामले में मौत की सज़ा या उम्रकैद ही मिलती है

क़ानूनी उपायों की बात करें तो मुशर्रफ़ के पास सुप्रीम कोर्ट में इस निर्णय को चुनौती देने का रास्ता खुला है। अगर वहाँ से उन्हें निराशा हाथ लगती है तो वे राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के सामने दया याचिका दायर कर सकते हैं।

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भारत में नागरिकता संशोधन कानून पर चल रही बहस के बीच पाकिस्तान से खबर आई है कि वहाँ एक बार फिर एक गैर-मुस्लिम लड़की का अपहरण कर उसका धर्म परिवर्तन करवा लिया गया है। लड़की का नाम महस केसवानी है।

बताया जा रहा है कि वो पिछले शुक्रवार यानी 13 दिसंबर से अपने कराची स्थित घर से गायब हुई थी। जिसके बाद सिर्फ़ उसका एक वीडियो आया है। इस वीडियो में महक हिजाब पहनकर बैठी है और अपना नाम महक केसवानी की जगह महक फातिमा बता रही है।

वीडियो में महक को कहते सुना जा सकता है कि वो उसने अपने मर्जी से इस्लाम कुबूल कर लिया है। इसलिए उसका उसके परिवार वालों से निवेदन है कि उसे उसकी मर्जी से जिंदगी जीने दी जाए। जानकारी के अनुसार लड़की का धर्म परिवर्तन मियाँ मिट्ठू से करवाया गया है और उसका अपहरण करने वाले का नाम अहिशर मेमन है।

हालाँकि, बता दें कि 5 दिन पहले गायब हुई लड़की के पिता अमर लाल का कहना है कि शुक्रवार के बाद से उनकी बेटी की उन्हें कोई खबर नहीं है। उनके पास फिरौती की माँग के लिए कोई फोन नहीं आया है और न ही किसी ने उन्हें उसकी शादी या फिर उसके धर्म परिवर्तन के बारे में सूचित किया है।

उल्लेखनीय है कि डिफेंस हाउसिंग सोसाइटी कराची से हिंदू लड़की के अपहरण का ये तीसरा मामला है। इसके अलावा पाकिस्तान में पिछले 7 महीने के अंदर 81 हिंदू लड़कियों के रेप और गायब होने की सूची भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायल हो रही है।

लोग इस घटना को नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों के सामने उदाहरण की तरह पेश कर रहे हैं और बता रहे हैं कि ऐसी घटनाओं के कारण ही देश में CAA की आवश्कता है।

बाबर की औलादें आगजनी कर सबूत दे रहे कि ये देश उनका नहीं: पहलवान ने उपद्रवियों को दी धोबी-पछाड़

भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त ने नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा कर रहे उपद्रवियों को ललकारा है। दत्त ने दिल्ली के जामिया नगर और सीलमपुर इलाक़े में हुई हिंसा को लेकर बड़ा बयान दिया है। योगेश्वर दत्त ने कहा कि मेरे देश को मेरा देश कह देने से ये देश आपका नहीं हो जाता। साथ ही उन्होंने हिंसा में व्याप्त उपद्रवियों को धोबी-पछाड़ देते हुए कहा कि भारत में अभी भी बाबर की बची-खुची औलादें हैं, जो तोड़फोड़, हिंसा और आगजनी कर के अपने अस्तित्व का सबूत दे रहे हैं। बकौल दत्त, बाबर की औलादें इस बात का सबूत दे रहे हैं कि ये देश उनका कभी था ही नहीं, और न कभी होगा।

योगेश्वर दत्त ने दंगाइयों को लोकतान्त्रिक विरोध का मतलब समझाते हुए कहा कि प्रदर्शन का मतलब सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना नहीं होता, देश को नुकसान पहुँचाना नहीं होता। ओलम्पिक मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त ने संशोधित नागरिकता क़ानून का समर्थन करते हुए कहा कि जो इस देश के नागरिक हैं, जो इस देश को अपना मानते हैं- उन्हें भला किस बात का डर? भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किए जा चुके पहलवान ने ‘दिल्ली पुलिस ज़िंदाबाद’ के नारे भी लगाए और संशोधित नागरिकता क़ानून का समर्थन करने की बात कही।

कॉमनवैल्थ गोल्ड मेडलिस्ट योगेश्वर दत्त ने जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी व उसके छात्रों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस यूनिवर्सिटी में मजहब के आधार पर आरक्षण दिया जाता है, वही यूनिवर्सिटी अब सेकुलरिज्म के लिए लड़ने का दावा कर रही है। दत्त ने इसे दोहरा रवैया करार दिया। उन्होंने हिंसक तत्वों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस की सराहना की। योगेश्वर दत्त ने प्रोपेगंडा पत्रकार बरखा दत्त पर बरसते हुए कहा:

“इन उपद्रवियों ने सरकारी संपत्ति को तहस-नहस कर दिया, ये तुम्हें दिखाई नहीं दिया? ये लोग छात्र नहीं हैं, ये सभी देश के दुश्मन हैं। और हाँ, तुम जैसे नकारात्मक लोग इनका समर्थन कर रहे हैं। जो लोग पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ित किए जा रहे हैं, वहाँ नरक से भी बदतर जीवन जी रहे थे, उन्हें नागरिकता दी जा रही है। तुम लोग इसका विरोध क्यों कर रहे हो, इसका कोई जवाब है क्या तुम्हारे पास?”

बता दें कि बॉलीवुड के कई सेलेब्रिटी दिल्ली पुलिस की निंदा कर रहे हैं और हिंसक छात्रों के समर्थन में लगे हैं। आयुष्मान खुराना, विक्की कौशल, परिणीति चोपड़ा, कोंकणा सेन शर्मा, जावेद जाफरी, अली फजल, ज़ीशान अयूब, राजकुमार राव, स्वरा भास्कर, अनुराग कश्यप और ऋचा चड्डा जैसे लोगों ने इन छात्रों के समर्थन में ट्वीट किया।

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राजस्थान पुलिस की सुस्ती की भेंट चढ़ा रेप पीड़िता का पिता, घर में घुस तलवार से काटा

राजस्थान के पाली जिले में अपहरण और दुष्कर्म के बाद पीड़िता के पिता की हत्या की खबर सामने आई है। आरोपित ने पीड़िता के पिता की तलवार से काटकर हत्या कर दी। आरोपित ने बीच-बचाव करने आई पीड़िता की माँ और भाई को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसके बाद वह भागने की फिराक में था। हालाँकि भागने के दौरान वो घायल हो गया। इसके बाद ग्रामीणों ने उसे पुलिस के हवाले कर दिया।

यह सब कुछ हुआ है राजस्थान पुलिस की लापरवाही की वजह से। अगर राजस्थान पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सक्रियता दिखाई होती और आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया होता तो इसकी नौबत ही नहीं आती। पीड़िता के पिता को जान नहीं गँवानी पड़ती। बता दें कि पीड़िता ने 10 नवंबर को केस दर्ज कराया कि आरोपित धन्नाराम उसे नासिक ले गया और उसका बलात्कार किया।

पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस उसे नासिक तो गई, लेकिन आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया। इस बीच आरोपित ने नासिक कोर्ट से अंतरिम जमानत ले ली, लेकिन 13 दिसंबर को पाली के एडीजे कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी। इसके बाद भी गिरफ्तारी नहीं हुई। इसका फायदा उठाते हुए रविवार (दिसंबर 15, 2019) को आरोपित ने पीड़िता के पिता को मौत के घाट उतार दिया। साथ ही बचाव में आए पीड़िता के माँ और भाई पर भी तलवार से हमला कर दिया। आरोपित ने सादड़ी थाना क्षेत्र के उंदरथल गाँव में वारदात को अंजाम दिया।

जानकारी के मुताबिक आरोपित लगातार पीड़िता पर केस वापस लेने का दबाव बना रहा था और धमकी भी दे रहा था। गाँववालों का आरोप है कि पीड़ित परिवार ने पुलिस को शिकायत भी की थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पूरे मामले को लेकर पुलिस पर भी सवाल उठ रहे हैं कि केस दर्ज होने के बाद भी आरोपित युवक को क्यों नहीं पकड़ा। सादड़ी के एसपी आनंद शर्मा ने भी इसमें पुलिस द्वारा लापरवाही दिखाने की बात मानी है। उन्होंने कहा कि मामले में सादड़ी थाना प्रभारी राज दीपेंद्र की लापरवाही की वजह से आरोपित गिरफ्तार नहीं किया जा सका। थाना प्रभारी को निलंबित कर विभागीय जाँच के आदेश दिए गए हैं।

बता दें कि पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता के पिता के सीने में चाकू के दो गहरे घाव हैं। वहीं शरीर पर तलवार से 11 वार हैं। घायल भाई के दोनों हाथों की नस कट गई है, ऊँगलियाँ भी कटी हुई है। उसके शरीर पर कुल 5 वार है। वहीं माँ के सिर, पेट व शरीर पर तलवार के चार वार हैं। पीड़िता ने घटना के बारे में बताते हुए कहा, “धन्नाराम छत के रास्ते घर में घुसा और सीढ़ियाें का दरवाजा खोलते ही मेरे पिता के सीने में चाकू घोंप दिए। फिर तलवार से हमला किया। शोर सुन मेरी माँ और भाई आए तो तलवार से उन दाेनों पर भी हमला कर दिया। मैंने दरवाजे के पीछे छिपकर जान बचाई। वह जोर-जोर से चिल्ला रहा था कि पूरे परिवार को खत्म कर दूँगा।”

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दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया के बाद अब सीलमपुर इलाके में नागरिकता कानून के विरोध में हिंसक प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने डीटीसी की बसों में जमकर तोड़फोड़ की। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पुलिस पर जमकर पथराव किया। इसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े। सीलमपुर से प्रदर्शनकारियों का मार्च शुरू हुआ था जो जाफराबाद इलाके में पहुँचकर हिंसक हो गया।

एहतियात के तौर पर सीलमपुर, जफरबाद, वेलकम, मौजपुर-बाबपुर, गोकुलपुरी समेत कई मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया गया है। इन मेट्रो स्टेशन पर मेट्रो नहीं रूक रही है। सीलमपुर में करीब दो घंटे से बवाल चल रहा है। बवाल की शुरुआत दोपहर 1 बजे से हुई। इस दौरान प्रदर्शनकारी नए नागरिकता कानून को हटाने की माँग कर रहे थे। देखते ही देखते प्रदर्शन ने उग्र रूप से ले लिया। इसके बाद पथराव शुरू हो गया। उग्र भीड़ ने स्कूल बस को भी नहीं छोड़ा।

पथराव के दौरान कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके साथ ही अतिरिक्त पुलिस फोर्स की तैनाती कर दी गई है। पूरे इलाके पर ड्रोन कैमरे के जरिए नजर रखी जा रही है। इलाके में प्रदर्शन के बाद दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। सीलमपुर से जाफराबाद जानेवाली 66 फीट रोड पर आवागमन को पूरी तरह से बंद कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 घंटे से ज्यादा वक्त से प्रदर्शनकारी लगातार बवाल कर रहे हैं। स्थिति बिगड़ते देखकर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आँसू गैस के गोले दागे। 

बता दें कि रविवार को जामिया में भी नागरिकता कानून के विरोध में प्रदर्शन हिंसक हो गया था। इसके बाद पुलिस को भी बल प्रयोग करना पड़ा। दिल्ली पुलिस का आज एक विडियो भी जारी किया गया है। जिसमें पुलिस जामिया प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी नहीं करने की अपील कर रही है। 

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वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में उनके अपने ही लैब में घुसने से रोक दिया गया। उन्हें लगातार 2 दिन लैब में नहीं घुसने नहीं दिया गया। जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रों की हिंसा के बाद पुलिस ने कार्रवाई की। इसके बाद जेएनयू में भी छात्रों के कई गुट ने दिल्ली पुलिस पर बर्बर होने का इल्जाम लगाते हुए विरोध-प्रदर्शन किया। सोमवार (दिसंबर 16, 2019) को जब रंगनाथन लैब के पास पहुँचे, वहाँ चीजें अस्त-व्यस्त पड़ी हुई थीं और उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। जेएनयू में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत आनंद रंगनाथन सहित 2 अन्य लोगों को भी लैब में नहीं जाने दिया गया।

इसके अगले दिन मंगलवार को रंगनाथन व उनके साथियों को फिर लैब में घुसने से रोक दिया। रंगनाथन लाख मिन्नतें करते रहे कि विज्ञान विभाग किसी अन्य विभाग की तरह थ्योरेटिकल नहीं है बल्कि यहाँ प्रैक्टिकल होते है, लेकिन छात्र नहीं माने। कई अहम एक्सपेरिमेंट करने होते हैं, इसके लिए महँगे उपकरण मँगाए जाते हैं और इन सभी चीजों के लिए आम नागरिक के टैक्स से मिले रुपयों का इस्तेमाल होता है। सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती सुनाते हुए रंगनाथन ने लिखा कि इन हरकतों की वजह से कसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि सबकी हानि होगी।

आनंद रंगनाथन को परीक्षाएँ भी लेनी थीं, जो छात्रों की गुंडागर्दी के कारण संभव नहीं हो सकी। इसी तरह प्रोफेसर गोवर्धन दास को एक इंटरनेशनल ग्रांट प्रपोजल पर काम करना था, जो संभव नहीं हो सका। उन्हें एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपना काम ख़त्म करना है, लेकिन लैब में तालाबंदी कर छात्र उन्हें परेशान कर रहे हैं। इन दोनों के अलावा वैज्ञानिक शैलजा सिंह भी लैब में नहीं जा सकीं। जेएनयू के छात्रों की गुंडागर्दी से आहत रंगनाथन ने कहा कि पता नहीं इस देश में विज्ञान कैसे आगे बढ़ेगा। इस बारे में एक प्रोफेसर ने बताया:

“मुझे सेमेस्टर एग्जाम लेने थे और मेकशिफ्ट वेन्यू कन्वेंशन सेंटर में 10 से 12 बजे तक का समय निर्धारित किया गया था। परीक्षा के लिए 36 में से मात्र 8 विद्यार्थी पहुँचे। मैं अपने साथियों के साथ एग्जाम हॉल में ही मौजूद था। अचानक से 40 छात्रों की एक भीड़ अंदर घुसी और मुझे गालियाँ बकनी शुरू कर दी। उन्होंने मुझसे मोबाइल छीन लिया। मेरे साथ धक्का-मुक्की की और धमकी दी कि अगर मैंने परीक्षा ली तो अच्छा नहीं होगा। यह सब देख कर मेरे बगल के रूम में मौजूद अन्य प्रोफेसर बीच-बचाव के लिए आए। डीन सहित 12 प्रोफेसरों को 1 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया। परीक्षा लेने वाले कर्मचारियों को छात्रों की भीड़ ने खदेड़ डाला।”

प्रोफेसर ने बताया कि छात्रों ने उन्हें व उनके साथियों को 1 घंटे तक बंधक बनाए जाने के दौरान उनके पास से 8 उत्तर-पुस्तिकाएँ व 1 अटेंडेंस शीट छीन ली। यह सब डीन के सामने ही हुआ। इसके बाद एक छात्र ने प्रोफेसर का मोबाइल फोन लौटाया और उन्हें जाने दिया। प्रोफेसर ने इस घटना को याद करते हुए कहा कि वो काफ़ी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस घटना ने उन्हें बुरी तरह डरा दिया है। वे सदमे में हैं। उन्होंने जेएनयू के शिक्षक संगठन से निवेदन किया है कि गुंडागर्दी करने वाले छात्रों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए और एफआईआर दर्ज कराई जाए।

वैसे ये पहली बार नहीं है जब आनंद रंगनाथन के साथ ऐसी हरकत की गई हो। इससे पहले जब जेएनयू के छात्र हॉस्टल फी बढ़ाने को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, तब भी उन्हें लैब में जाने से रोक दिया गया था। छात्रों ने उनके सामने तालाबंदी कर हंगामा किया था।

इस दौरान छात्रों ने सिक्योरिटी गार्ड को भी धमकी दी थी। जब गार्ड ने छात्रों के बात करने के रवैए पर ऐतराज जताया तो एक छात्रा ने उसे चुप रहने की हिदायत देते हुए कहा था कि सिक्योरिटी गार्ड बात नहीं करेगा। छात्रों ने लैब के एंट्रेंस पर पोस्टर भी चिपका रखे थे।

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