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ममता बनर्जी को झटका: कलकत्ता हाईकोर्ट ने CAA-NRC संबंधी विज्ञापनों को हटाने के दिए निर्देश

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ लड़ाई लड़ रहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी को CAA और NRC के खिलाफ लगाए गए सभी विज्ञापनों को हटाने का आदेश दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब 9 जनवरी 2020 को होगी। बता दें कि ममता बनर्जी ने टीवी चैनलों पर नागरिकता कानून और NRC नहीं लागू करने का विज्ञापन दिया था। ममता बनर्जी खुद यह कहते हुए दिखीं कि बंगाल के लोगों को चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि राज्य में NRC और नागरिकता संशोधन कानून लागू नहीं होगा।

ममता बनर्जी के इस बयान के बाद अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने ममता सरकार को वेबसाइटों और अन्य स्थानों से विज्ञापन हटाने का आदेश दिया। ममता ने नागरिकता संशोधन कानून को ‘विभाजनकारी’ और ‘क्रूर’ कानून बताया था।

16 दिसंबर को ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पूरे राज्य में रैलियाँ निकाली थी। हाथों में पोस्टर, बैनर और तख्तियाँ लिए टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ नारे लगाए। इन कार्यकर्ताओं की माँग CAA को रद करने की थी।

बता दें कि कुछ दिन पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए ममता सरकार को एक जिलेवार रिपोर्ट तलब की थी जिसमें पूछा गया था वहाँ कानून-व्यवस्था की क्या स्थिति है? नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में बंगाल के कई जिलों में सरकार संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया था और बड़े स्तर पर तोड़-फोड़ की गई थी। कोर्ट ने बंगाल के एटॉर्नी जनरल से CAA के खिलाफ दिए गए विज्ञापनों पर भी सवाल जवाब किया था जिसमें भारी मात्रा में सरकारी धन का इस्तेमाल हुआ।

यूपी हिंसा: CAA के विरोध-प्रदर्शन में 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल, 62 दंगाइयों की गोली से जख़्मी

नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध-प्रदर्शनों के नाम पर देशभर में लगातार हिंसक दंगे हो रहे हैं। उपद्रवियों के हमले से कई पुलिसकर्मियों के गंभीर रूप से घायल होने की ख़बरें भी सामने आ रही हैं। जिस तरह से इन हिंसक विरोध-प्रदर्शनों को अंजाम दिया जा रहा है उससे यह साफ़ पता चलता है कि दंगाइयों के सिर पर ख़ून सवार है, जो जान लेने पर उतारू हैं।

इस बीच, ख़बर है कि यूपी में 250 से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इनमें 62 पुलिसकर्मी दंगाइयों की गोली से घायल हुए हैं। पुलिस ने 700 से अधिक गैर-प्रतिबंधित बोर (पुलिस द्वारा इस्तेमाल नहीं की गई) बरामद की है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन ज़िंदा व इस्तेमाल की गई कारतूसों की बरामदगी ‘शांतिपूर्ण ढंग से कर रहे विरोधियो’ से हुई है। ऐसे में यह सवाल एकाएक ही उठ जाता है कि दंगाइयों का अगर यह ‘शांतिपूर्ण ढंग से किया गया विरोध-प्रदर्शन है, तो फिर अशांतिपूर्ण तरीक़ा क्या होगा?

सच्चाई तो यह है कि उपद्रवियों का यह जानलेवा और हिंसक रवैया इस बात का सबूत है कि उन्हें न तो क़ानून का कोई डर है और न ही उनके अंदर कोई इंसानियत बची है, इस पर यह कह देना कि यह तो ‘शांतिपूर्ण ढंग से किया गया विरोध’ है इसका कोई अर्थ ही नहीं रह जाता है।

इन्हीं हालातों को ध्यान में रखते हुए यूपी में क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए योगी सरकार सख़्ती के साथ काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा संदेश देते हुए कहा था कि सार्वजनिक सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचाने वालों की सम्पत्ति इसकी भरपाई की जाएगी। उपद्रवियो की सम्पत्ति को नीलाम करके जो पैसे आएँगे, उससे उनके द्वारा सार्वजनिक संपत्ति को पहुँचाई गई क्षति की भरपाई होगी।

इसी कड़ी में गाजियाबाद पुलिस ने शुक्रवार (20 दिसंबर) को हुए प्रदर्शन के दौरान उपद्रव करने वालों की तस्वीर जारी की है। इनकी तस्वीर वाले पोस्टर चौराहे पर लगाए गए और लोगों से इनकी पहचान कर जानकारी देने की अपील की गई। प्रदर्शन के दौरान ज़िले के लोनी थाना क्षेत्र में उपद्रवियों ने काफी हिंसा की थी। इनकी पहचान के लिए तस्वीरों वाले पोस्टर बीच चौराहों पर लगाए गए हैं। इनके बारे में सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी।

उधर, कानपुर में CAA के ख़िलाफ़ शुक्रवार (20 दिसंबर) को जुमे की नमाज़ के बाद दंगाइयों ने क़रीब ढाई घंटे तक जमकर उत्पात मचाया। बाबूपुरवा के बेगमपुरवा, बगाही मस्जिद के पास प्रदर्शन के दौरान अराजक तत्वों ने पुलिस पर तेज़ाब से हमला कर दिया। यहाँ आगजनी, पथराव और गोलीबारी में 12 लोगों को गोली लगी।

दंगों से कुछ तस्वीरें, जो बताती हैं पुलिस वाले भी चोट खाते हैं, उनका भी ख़ून बहता है…

25-30 पुलिस वालों को दुकान में बंद कर जिंदा जलाने का प्रयास: नमाज के बाद हापुड़ में उपद्रवियों का तांडव

कानपुर में CAA पर हिंसा: दंगाइयों ने पुलिस पर तेज़ाब और पेट्रोल बम से किया हमला, 50 गिरफ़्तार-12 को लगी गोली

मुस्लिम भीड़ ने CAA के विरोध के नाम पर हनुमान मंदिर में घुस कर मूर्तियों को तोड़ा: वीडियो आया सामने

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) एवं राष्‍ट्रीय नागरिक रजिस्‍टर (NRC) के विरोध में आयोजित राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) के बिहार बंद के नाम पर शनिवार (दिसंबर 21, 2019) को ‘हिंदुओं के साथ खिलवाड़ किया गया।’ राज्‍य में कई जगहों भारी हिंसा हुई। सबसे बड़ी घटना पटना के फुलवारीशरीफ में हुई, जहाँ मुस्लिम भीड़ ने हनुमान मंदिर में घुसकर तोड़-फोड़ की।

इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा हनुमान मंदिर को तोड़ दिया गया। इस वीडियो में उपद्रवियों की भीड़ को मंदिर में प्रवेश करते हुए और मूर्ति को तोड़ते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में मौजूद शख्स बोलते हुए सुना जा सकता है, “हिंदुओं के साथ खिलवाड़ किया गया है। वो लोग हमारे मंदिर में घुसकर मूर्तियों को तोड़ रहे हैं।”

बंद के दौरान चेहरे पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का मुखौटा लगाए राजद कार्यकर्ताओं ने लाठी-डंडों से ऑटोरिक्शा में तोड़फोड़ की। बताया जा रहा है कि बंद के समर्थन में निकला जुलूस टमटम पड़ाव के पास धार्मिक स्थल से गुजर रहा था। इस जुलूस में उपद्रवी और असामाजिक तत्व भी मौजूद थे। सभी टमटम पड़ाव पर पहुँचने के बाद संगतपर मोहल्ले से आगे बढ़ने पर अड़ गए।

लेकिन संगतपर निवासियों ने जुलूस का रास्ता रोक लिया था। पुलिस ने भी उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद विवाद बढ़ गया और जुलूस में शामिल उपद्रवियों ने धार्मिक स्थल में तोड-फ़ोड़ करनी शुरू कर दी और फिर आगजनी भी की। इससे विवाद ने और विकराल रूप ले लिया। दोनों गुटों के बीच जमकर पत्थरबाजी और फायरिंग हुई।

फुलवारी शरीफ क्षेत्र का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें दो समूहों के बीच हुई भीड़ हिंसा को देखा जा सकता है।

शनिवार को पटना में हुई हिंसा में 25 लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि बंद के दौरान भड़के दंगे में एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हालाँकि ऑपइंडिया गोली मारकर हत्या करने के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका। हिंसा में घायल हुए 2 पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 11 लोगों को एम्स में भर्ती कराया गया था, जिनमें से 6 को गोली लगी थी।

‘शव यात्रा पर पत्थरबाजी, अत्याचारों का विरोध करते तो जेल, लूट लेते थे सारा सामान, छोड़ना पड़ा पाकिस्तान’

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध के बीच हरियाणा के यमुनानगर में रहने वाले कुछ पाकिस्तानी हिंदुओं ने रविवार को एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री रतन लाल कटारिया और विधायक घनश्याम दास अरोड़ा को अपनी आपबीती सुनाई। इन लोगों ने इस कार्यक्रम में नए कानून पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि आखिर किस तरह इन लोगों ने भारत में आकर खुलकर सांस ली। क्योंकि, पाकिस्तान में तो न केवल उनपर धर्म परिवर्तन के लिए जोर दिया जाता था, बल्कि उनके द्वारा श्मशान की ओर ले जा रही शव यात्रा पर भी पथराव होता था। इतना ही नहीं, इन लोगों ने ये भी बताया कि जब ये लोग अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों का विरोध करते थे तो इन्हें जेल होती थी और इनके सामानों को लूट लिया जाता था।

हरियाणा के यमुनानगर में इस समय पाकिस्तान से आए करीब 22 हिंदू परिवार रह रहे हैं। जिनमें से 10 को नागरिकता मिल चुकी है और बाकी इंतजार में हैं। इनमें से कुछ ने केंद्रीय मंत्री रतन लाल कटारिया और विधायक घनश्याम दास अरोड़ा को अपनी आप बीती सुनाई और कहा कि इन्होंने बीते हरियाणा विधानसभा चुनावों में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पार्टी को समर्थन दिया था, क्योंकि उनका कहना था कि वे पाकिस्तान से आए हिंदुओं को नागरिकता दिलाने में मदद करेंगे। लेकिन अब जब मोदी सरकार ने ये बिल पास कर दिया तो वे उसका विरोध कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने भाजपा का हाथ थाम लिया है।

पाकिस्तान और भारत के बीच फर्क़ बताते हुए नगर सुधार मंडल के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मण दास बहल (88) ने बताया कि पाकिस्तान में उन्होंने 3 बार जिला काउंसलर का चुनाव जीता और हर बार उन्हें बहुमत मिला। लेकिन फिर भी वहाँ उनकी बात नहीं मानी जाती। हिंदुओं द्वारा शव को श्मशान ले जाते समय उसपर पत्थर फेंके जाते, धर्म परिवर्तन के लिए लंबे समय तक जेल में रखा जाता, एवं तरह-तरह के अत्याचार होते। मगर, लक्ष्मण दास के अनुसार उन्होंने इतने सब के बावजूद कभी हार नहीं मानी और अपने परिवार के साथ हरियाणा के यमुनानगर पहुँचे।

बहल ने इस कार्यक्रम में बताया कि पाकिस्तान के शहर कोहाट में उनका कारोबार था। लेकिन उनका सब कुछ वहाँ लूट लिया गया। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि उन्हें अपने बच्चों को और उनकी धार्मिक पहचान को छिपाना पड़ा। साथ ही अपनी करोड़ों की संपत्ति को हजारों में बेचना पड़ा। बहल के अनुसार साल 1988 में उन्होंने भारत आकर खुली हवा में सांस ली। यहाँ लोगों ने उनका काफी साथ दिया। हमीदा में उन्हें किराए पर मकान मिला और फिर उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया। उनका कहना है कि आज पुराने दिन को याद करते हैं तो उनका मन घबरा जाता है।

इसके बाद दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार आजाद नगर में रहने वाले रणजीत बताते हैं कि उनके पिता 2 भाई हैं। जिनमें उनके चाचा दर्शन सिंह पहले ही यमुना नगर आ गए थे। लेकिन वे पाकिस्तान में फँस गए थे। इस बीच उनके घर की महिलाएँ बुर्का पहनकर घर से निकलती थीं और बिंदी भी नहीं लगाती थीं। क्योंकि अगर वहाँ के लोगों को पता चल जाता था कि वे हिंदू हैं तो उनके साथ बुरा बर्ताव होता था, जिसे सोचकर भी उनकी रूह कांपती हैं।

वहीं, इस कार्यक्रम में वैद्य जसबीर नाम के पाकिस्तानी हिंदू ने भी केंद्रीय मंत्री को आप बीती सुनाते हुए माँग उठाई कि पाकिस्तान में जब कोई हिंदू भारत आने के लिए वीजा लगाता है तो उनको क्लास वन अधिकारी का आइकार्ड साथ लगाना होता है। ये बहुत बड़ी चुनौती है, जिस कारण परेशानी का सामना करना पड़ता। इसलिए इस शर्त में भी संशोधन होना चाहिए। जिसके बाद केंद्रीय राज्यमंत्री रतन लाल कटारिया ने इस बारे में विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात करने का आश्वासन दिया। साथ ही दूसरे देशों से आए अल्पसंख्यकों के लिए कैंप लगाने की बात भी कही।

गौरतलब है कि एक ओर नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे विशेष समुदाय के लोग खुद की नागरिकता छिन जाने का डर दिखाकर मोदी सरकार को घेरने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। वहीं, दूसरी ओर वे शरणार्थी हैं, जिन्हें इस कानून के बनने से फायदा होने वाला है और वे बार-बार मोदी सरकार को आभार कहने से थक नहीं रहे।

हयातुनिसा ने दो बार ₹2-2 लाख कर्ज लिया, शौहर मुस्तफा ने सारे पैसे डुबोए, टोका तो बल्ले से पीट कर मार डाला

आंध्र प्रदेश के नरसरावपेट में तीखी बहस के बाद शौहर ने बीबी की बल्ले से मारकर हत्या कर दी। ग्रामीण पुलिस इंस्पेक्टर वाई अचैया ने बताया कि नरसरावोपेट के साई नगर इलाके में रहने वाले मुस्तफा और उसकी बीबी हयातुननिसा के बीच शनिवार (दिसंबर 21, 2019) रात को किसी बात को लेकर विवाद हो गया। इसी दौरान मुस्तफा ने बीवी पर हमला कर दिया जिससे उसकी मौत हो गई। दोनों का निकाह करीब 10 साल पहले हुआ था।

जानकारी के मुताबिक हयातुननिसा बर्नपेट के एक सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका थी, जबकि मुस्तफा बेरोजगार था। पुलिस ने कहा कि हयातुननिसा ने मुस्तफा की मदद करने के लिए बार-बार प्रयास किए। यहाँ तक कि अपने पति के लिए कार खरीदने के लिए 2 लाख रुपए का ऋण भी लिया, ताकि मुस्तफा ट्रेवल बिजनेस करके कमा सके। लेकिन उसे नुकसान उठाना पड़ा, जिसके बाद उसने कार बेच दी। हयातुननिसा ने फिर से 2 लाख रुपए का ऋण लेकर मुस्तफा के लिए कपड़ों की दुकान खोल दी, मगर इस बार भी मुस्तफा की लापरवाही की वजह से नुकसान हुआ और दुकान बंद हो गया।

पुलिस ने बताया कि इस सबकी वजह से दोनों का रिश्ता तनावपूर्ण हो गया था। दोनों अक्सर लड़ते-झगड़ते रहते थे। शनिवार की रात को भी दोनों के बीच बहस छिड़ गई, जिसके बाद मुस्तफा ने गुस्से में बल्ला उठाया और हयातुननिसा की पिटाई शुरू कर दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। 

मुस्तफा ने रविवार (दिसंबर 22, 2019) सुबह पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें घटना की जानकारी दी। पुलिस ने मुस्तफा के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत मामला दर्ज कर हयातुननिसा के शव को पोस्टमार्टम के लिए नरसरावपेट सरकारी क्षेत्र अस्पताल में भेज दिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले तेलंगाना में दो भाइयों ने बहस होने पर अपने जीजा सद्दाम की गला काटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद दोनों मृतक का कटा हुआ सिर लेकर नामपल्ली पुलिस थाने पहुँचकर आत्मसमर्पण कर दिया था। इरफान और घोसे ने घटना को सड़क पर भरी दोपहर में अंजाम दिया थी। आरोपितों के हाथ में मृतक का कटा हुआ सिर देखकर पुलिस भी हैरत में पड़ गई थी। इरफान और घोसे चाकू से तब तक सद्दाम पर हमला करते रहे, जब तक कि उसका सिर धड़ से अलग नहीं हो गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने हमारी बच्ची का नाम लिया, हमारे तो भाग्य खुल गए: ‘नागरिकता’ की माँ

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार (23 दिसंबर) को आयोजित जनसभा को संबोधित करने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मजनूं के टीला इलाक़े में जन्मी एक बच्ची का ज़िक्र किया। बता दें कि इस बच्ची का नाम ‘नागरिकता’ है, जिसे इस दुनिया में आए अभी महज़ 14 दिन ही हुए हैं। यह अपने आप में बेहद दिलचस्प बात है कि पीएम मोदी के लिए यह बच्ची बहुत ख़ास है, तभी तो उन्होंने अपने संबोधन में उसका ज़िक्र किया।

पीएम मोदी द्वारा रैली में बच्ची का नाम लिए जाने से उसकी माँ बहुत ख़ुश थीं। उन्होंने कहा,

“प्रधानमंत्री ने हमारी बच्ची का नाम लिया, हमारे तो भाग्य खुल गए। इस बच्ची के रूप में हमारे घर में लक्ष्मी ने जन्म लिया है। अब हमारी नागरिकता की राह आसान हो जाएगी साथ ही बिजली पानी की सुविधा भी मिल सकेगी।”

जो लोग नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध कर रहे हैं उन्हें संदेश देते हुए नागरिकता की माँ ने कहा, “मैं उनसे यह कहना चाहूँगी कि हमें नागरिकता मिल रही है तो आप क्यों नाराज़ हो रहे हैं। तोड़फोड़ की ख़बर सुनकर बेहद दुख होता है।” पाकिस्तान में बिताए अपने दु:खद अनुभव को याद करते हुए उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में तो हमें परेशान किया ही जाता था, लेकिन यहाँ हमें इज़्ज़त मिलेगी।”

बच्ची की माँ के अलावा, उसके दादा ने भी इस बात पर ख़ुशी ज़ाहिर की कि देश के प्रधानमंत्री ने बच्ची का ज़िक्र अपने संबोधन में किया। उन्होंने कहा कि पीए मोदी ने सब साफ़ कर दिया है कि किसी को बाहर नहीं किया जा रहा है। अब उम्मीद है कि नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ लोग विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे।

दरअसल, दिल्ली के मजनूं के टीला में रह रहे पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थी परिवार ने नागरिकता संशोधन क़ानून के लोकसभा और राज्यसभा से पास होने की ख़ुशी में 9 दिसंबर को जन्मी अपनी बच्ची का नाम ‘नागरिकता’ रख दिया था। बता दें कि पाकिस्तान में वर्षों से रह रहे हिन्दू परिवार वहाँ सताए जाने के बाद भारत में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। मजनूं का टीला में रह रहे कुल 135 से अधिक परिवारों का जीवन बेहद ग़रीबी में गुज़र रहा था।

135 से अधिक परिवारों में 800 से अधिक लोग रहते हैं, जिनके पास नियमित तौर पर कोई रोज़गार नहीं है। 2013 में यहाँ शरणार्थी शिविर बनाए गए थे, जहाँ पाकिस्तान से भाग कर आए क़रीब 40 परिवार रहते थे। धीरे-धीरे यहाँ आने वाले शरणीर्थियों की संख्या बढ़कर 135 हो गई।

दिल्ली के मजनूं का टीला में पाकिस्तान से आकर रहने वाले हिन्दू शरणार्थी पड़ोसी मुल्क़ से इस कदर सताए गए कि वो ख़ुद को पाकिस्तानी कहलवाना तक पसंद नहीं करते। वो खुद को हिन्दुस्तानी कहते हैं। वहाँ पर रह रहे एक अन्य हिन्दू शरणार्थी से जब पूछा गया कि पाकिस्तान में रहने के दौरान उन्हें किन जुल्मों-सितम का सामना करना पड़ा तो उन्होंने काफी भावुक होते हुए कहा कि पाकिस्तान के अंदर हिन्दू होना गुनाह है, क्योंकि वहाँ हिन्दुत्व की कोई अहमियत ही नहीं है। यहाँ हिन्दुस्तान में हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सारे भाई-भाई है। भारत ही वो जगह है, जहाँ हम हिन्दू सुरक्षित हैं, इसलिए वो पाकिस्तान से भारत में रहने आए हैं।

पाकिस्तान से आए हिन्दुओं को उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें भारत की नागरिकता मिल जाएगी और उनकी शरणार्थी पहचान ख़त्म हो जाएगी। इनमें से अधिकतर शरणार्थियों का कहना था कि पाकिस्तान में अपना घर छोड़ने का फ़ैसला इनके लिए आसान नहीं था। लेकिन उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था। धार्मिक उन्माद के कारण इन पाकिस्तानी हिन्दुओं को अपना देश छोड़ना पड़ा।

पाक से आए हिंदू ने बेटी का नाम रखा ‘नागरिकता’, पिता ने कहा – भारत की बेटी हुई है

Pak मुस्लिम महिला हसीना बेन को मिली भारतीय नागरिकता: CAA के विरोध पर आँख खोलती खबर

मोदी सरकार ने 566 मुस्लिमों को दी नागरिकता: राज्य सभा में अमित शाह

जामिया के नाम पर बिल फाड़ने वाले नासिर आज़मी की खुली पोल, Zee Media ने दिया था परफॉर्मेंस सुधारने का अल्टीमेटम

Zee Media के प्रोडक्शन हेड नासिर आज़मी ने रविवार (22 दिसंबर) को सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए इस्तीफ़ा दे दिया है। नासिर का कहना था कि जेएनयू, कन्हैया कुमार, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और हाल ही में जामिया मिलिया इस्लामिया की घटनाओं को कवर करने के मामले में Zee News “विफल” रहा है।

उन्होंने अपने ट्वीट में भी ऐसा ही दावा किया।

लोगों की नज़र में आने के लिए नासिर आज़मी ने कुछ राजनीतिक दलों और राजनेताओं को टैग भी किया, जिससे उन्हें कुछ रीट्वीट मिल सकें।

लेकिन नासिर आज़मी के Zee Media छोड़ने की असल वजह कुछ और है, जो उन्होंने नहीं बताई।


Zee News के नासिर आज़मी को मिला था परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान का नोटिस

ऑपइंडिया को सूत्रों ने बताया कि नासिर आज़मी को पहले ही एक महीने के लिए परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (PIP) में रखा गया था, क्योंकि उनके काम की परफार्मेंस मीडिया संस्थान के मानक पर खरी नहीं उतरती थी। इस बात को प्रमाणित करने के लिए ऊपर अपलोड किए दस्तावेज़ के अनुसार, उनका PIP टाइम 4 दिसंबर, 2019 से 4 जनवरी 2020 तक प्रभावी था।

22 दिसंबर को जब उन्होंने जामिया के छात्रों और अन्य लोगों के साथ नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ एकजुटता दिखाते हुए ट्वीट किया तो उन्होंने अपने PIP से जुड़े सच के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया। शायद उन्हें यह लगा होगा कि उनका यह सच किसी के सामने तब तक नहीं आएगा, जब तक वो किसी से शेयर नहीं करेंगे। लेकिन सोशल मीडिया के युग में कुछ भी छिपाए नहीं छिपता।

Zee News के सीनियर प्रोड्यूसर अमित कुमार सिंह ने आज़मी के झूठ का पर्दाफ़ाश फेसबुक पर किया।

सिंह ने कहा कि आज़मी न केवल जामिया के छात्रों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि इस्लाम के नाम पर झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर कोई अपनी बेहतरी के लिए किसी भी संस्थान को छोड़ने के लिए स्वतंत्र होता है। लेकिन यहाँ सवाल बेहतरी का नहीं, बल्कि मौक़ा देखकर ख़ुद को शहीद दिखाने का है।

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि उम्मीद नहीं थी कि जिस संस्थान ने आपको (नासिर आज़मी) 10 सालों से भी ज्यादा वक्त तक आसरा दिया, जहाँ की बदौलत आपकी दाल-रोटी चलती रही वहाँ से रुखसत होते समय आप अपने झूठे ज़मीर को आगे कर देंगे। पोस्ट में नासिर से पूछा गया है कि उन्होंने अपने फैसले की वजह जेएनयू, एएमयू, कन्हैया कुमार और जामिया को बताया है। लेकिन, जब इन जगहों पर घटनाएँ हुई तो उनका जमीर क्यों नहीं जागा? यह एहसास होने के बाद कि ज़ी मीडिया में ज्यादा दिन तक ठहरना मुमकिन नहीं है तो आपने जामिया के छात्रों और दूसरे लोगों को बेवकूफ़ बनाना शुरू कर दिया।

सिंह ने नासिर को फ़टकारते हुए लिखा कि आपके ज़मीर के मुताबिक़ 2016 में ही आपको ज़ी मीडिया को बाय-बाय बोल देना चाहिए था..लेकिन कौन छोड़ता है मोटी तनख्वाह को, वो भी लाखो की तनख्वाह को। लेकिन, यहाँ तो ज़मीर का मसला था ही नहीं, आपने तो ज़मीर के नाम पर दूसरों को बेवकूफ़ बनाना शुरू कर दिया..इस बारे में सोचिएगा। उन्होंने लिखा कि CAA और NRC के बारे में अफ़वाह फैलाने वालों में आप भी शामिल हैं… आपको सच्चाई मालूम है, इसलिए PIP का ये लेटर उनके लिए अटैच कर रहा हूँ, जो आपके बारे में जानते नहीं हैं।

‘तबरेज के बदले’ पर हसनैन का नफरत फैलाने वाला TikTok वीडियो, Zee Music ने कर दी छुट्टी

जामिया मिलिया के बाहर ANI पत्रकारों पर हमला, हॉस्पिटल भेजे गए: अन्य रिपोर्टरों से भी हो चुकी है बदसलूकी

जामिया में दंगाइयों ने ही लगाई थी बसों में आग: CCTV फुटेज जारी होने के बाद माफ़ी माँगेंगे सिसोदिया?

4 दिन तक टंकी पर चढ़ी रही छात्राएँ, CM अशोक गहलोत करते रहे ट्वीट: अधर में 1.5 लाख छात्रों का भविष्य

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक ट्वीट किया कि वो टंकी पर चढ़ी छात्राओं से नीचे उतरने की अपील करते हैं। इसके बाद लोग अचम्भे में पड़ गए कि उनके इस ट्वीट का मतलब क्या है, क्योंकि काफ़ी लोगों को इसके पीछे की कहानी पता ही नहीं थी। दरअसल, जयपुर की जगतपुरा में सीबीआई गेट के पास व्याख्याता परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर 5 लड़कियाँ टंकी पर चढ़ गईं। शनिवार (दिसंबर 21, 2019) को पानी टंकी पर चढ़ी ये लड़कियाँ मंगलवार को नीचे उतरीं। सरकार और पुलिस-प्रशासन लगातार उनसे मिन्नतें करता रहा कि वो लोग बातचीत के जरिए मामले को सुलझाएँ।

आज मुख्यमंत्री गहलोत ने ख़ुद ट्वीट कर उनसे नीचे उतरने की अपील की। टंकी के नीचे भारी पुलिस बल, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस, सिविल डिफेंस की टीमें खड़ी रहीं। छात्राओं की माँग है कि स्कूल व्याख्याता परीक्षा तिथि 6 महीने आगे बढ़ाई जाए, पदों में बढ़ोतरी की जाए, अन्य राज्यों का कोटा निर्धारित किया जाए और उर्दू के पदों के लिए भी वैकेंसी निकाली जाए। सरकार ने साफ़ कर दिया है कि परीक्षा की तिथि आगे नहीं बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले ही 2 बार तिथि आगे बढ़ाई जा चुकी है।

छात्राओं का टंकी पर चढ़ना आमजनों के लिए भी चर्चा का विषय बन गया। छात्राओं को सोने के लिए रज़ाई, गद्दा और भूख-प्यास मिटाने के लिए खाना-पानी रस्सी के माध्यम से पहुँचाया जा रहा था। छात्राएँ माइक से बता रही थीं कि उन्हें क्या चाहिए और उन्हें वो सारी चीजें पहुँचाई जा रही थीं। नीचे भी कई छात्र-छात्राएँ जमा हो गए। उन्होंने सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए टंकी पर चढ़ी छात्राओं का समर्थन किया। कई लड़कों ने स्थानीय लोकगीतों पर नृत्य कर अपना विरोध दर्ज कराया।

मुख़्यमंत्रीओ अशोक गहलोत के ट्वीट के रिप्लाई में कई अभ्यर्थियों व युवाओं ने अपनी परेशानी बताई, जिसे हम नीचे उनके नाम के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं:

सुरजीत सिहाग: श्रीमान मुख्यमंत्री महोदय, मैं जब से यह भर्ती निकली है तब से तैयारी कर रहा हूँ। लेकिन इन साथियों की माँगों से इत्तेफाक रखता हूँ। मेरा आपसे निवेदन है कि आप एक बार इनकी बात पर अवश्य गौर करें।

राजू उलियाना: ये परीक्षा जुलाई मे होनी चाहिए। 1.5 लाख छात्रों के करियर का सवाल है।

विक्रम सिंह यादव: इस भर्ती को आगे खिसका कर आपका कोई बहुत बड़ा नुकसान नहीं हो जाएगा, परन्तु इसे जनवरी में करवाने की जिद में आप लाखों युवाओं के सपनों को खत्म कर रहे हैं। साहब, आपसे हाथ जोड़कर विनती है इस भर्ती को अपने नाक का सवाल न बनाएँ। हम बच्चे केवल तैयारी के लिए पर्याप्त समय माँग रहे हैं और कुछ नही। आप भी अपने अशिक्षित शिक्षामंत्री की तरह बातें मत कीजिए। हमें न्याय दीजिए।

भूपेंद्र विधौलिया: दूसरी बार सरकार ने बढ़ाया था, अभ्यर्थियों ने बढ़ाने की माँग नहीं की थी। ईडब्ल्यूएस में अचल संपत्ति का प्रावधान हटाने से इसके दायरे में आने वाले अभ्यर्थियों को फार्म संशोधन का मौका सरकार को देना चाहिए। परीक्षा स्थगित कर दो।

कुँवर भैंरो सिंह: श्रीमान, अगर ये परीक्षा जुलाई में हो जाएगी तो उन 1.56 लाख को अपना भाग्य आजमाने का अवसर मिल जाएगा वरना इन 1.56 लाख में से अगर किसी का सेलेक्शन हो भी गया तो RPSC (Rajasthan Public Service Commission ) इन्हें योग्य नहीं मानेगी क्योकि इनकी फाइनल परीक्षा का परिणाम जून तक आता है। श्रीमान, आपसे पुनः निवेदन हैं।

इसी तरह हज़ारों छात्रों ने अशोक गहलोत से नाराज़गी जताई। व्याख्याता परीक्षा का मुद्दा राजस्थान में गरमा गया है और इन छात्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री इसे इगो का मुद्दा बना रहे हैं। ये भी गौर करने लायक बात है कि ज्यादातर नाराज़ छात्र मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक हैं।

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5 ट्रिलियन में जीरो गिनाने वाले कॉन्ग्रेसी गौरव वल्लभ चौथे नंबर पर, ज़मानत जब्त होनी तय

सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों ने कॉन्ग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ और भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा के बीच की वो बहस ज़रूर देखी होगी, जिसमें 5 ट्रिलियन इकोनॉमी पर बात की गई थी। बात तो 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी पर शुरू हुई लेकिन कहीं और जाकर अटक गई। गौरव वल्लभ ने संबित से पूछा था कि 5 ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं? हालाँकि, संबित बार-बार तंज कसते रहे, जिसके बाद गौरव वल्लभ ने बिलियन और ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं, इसका गणितीय सूत्र बताया और वीडियो वायरल हो गया। यह वीडियो सोशल मीडिया में खूब चला और इससे उत्साहित होकर कॉन्ग्रेस ने गौरव को झारखंड के चुनावी मैदान में उतार दिया।

गौरव वल्लभ जमशेदपुर पूर्वी से बुरी तरह हार रहे हैं। वे चौथे नंबर पर चल रहे हैं। मुख्यमंत्री रघुवर दास 10829 वोटों के साथ पहले नंबर पर चल रहे हैं, वहीं भाजपा के बागी नेता व निर्दलीय उम्मीदवार सरयू राय 10673 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर चल रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता गौरव वल्लभ मात्र 1581 वोट अब तक मिले हैं। जेवीएम के अभय सिंह भी उनसे आगे चल रहे हैं। ताज़ा आँकड़े बताते हैं कि जमशेदपुर पूर्वी सीट से गौरव वल्लभ की जमानत जब्त होनी तय है।

टीवी बहस में कुर्सी पर बैठ कर भले ही गौरव वल्लभ ये बता देते हों कि बिलियन और ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं, लेकिन जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र से उन्हें बुरी हार का मुँह देखना पड़ेगा, ऐसा निश्चित लग रहा है। इस सीट पर उनकी लड़ाई मुख्यमंत्री रघुवर दास और भाजपा के बागी सरयू राय से थी। सरयू तो रघुवर मंत्रिमंडल का हिस्सा भी थे। 19 वर्षों के राजनीतिक इतिहास में झारखण्ड में लगातार 5 साल सरकार चलाने वाले रघुवर दास एक बार फिर से जमशेदपुर पूर्वी से जीतते हैं तो वो झारखंड में मुख्यमंत्री की हार वाला मिथक तोड़ने में कामयाब होंगे।

रघुवर दास के गढ़ जमशेदपुर की सभी 6 सीटों पर चुनावी परिणाम के ट्रेंड्स का अब तक कुछ यूँ गणित रहा:

बहरागोड़ा: जेएमएम
घाटशिला: भाजपा
पोटका: भाजपा
जुगसलाई: जेवीएम
जमशेदपुर ईस्ट: भाजपा
जमशेदपुर वेस्ट: भाजपा

1995 में इस क्षेत्र से पहली बार जीतने वाले रघुवर लगातार छठी बार जीत दर्ज कर अपना गढ़ बचाएँगे या नहीं, ये देखने वाली बात होगी। कभी टाटा स्टील रोलिंग मिल में बतौर मजदूर काम करने वाले रघुवर 2014 में तब राज्य के मुखिया बने, जब जीत के बाद भाजपा आलाकमान ने उन पर भरोसा जताया। गौरव वल्लभ पूरे चुनाव के दौरान आरोप लगाते रहे कि पूर्वी जमशेदपुर से रघुवर भाजपा के घोषित प्रत्याशी हैं और सरयू अघोषित। यह दूसरी बात है कि पर्दे के पीछे से कॉन्ग्रेस के सहयोगी दल भी गौरव की मदद करने की बजाए सरयू राय पर दॉंव लगा रहे थे। आगे बढ़ने से पहले अब भी ट्रिलियन डॉलर वीडियो का आनंद ले सकते हैं:

गौरव वल्लभ, जिन्हें पता है कि 5 ट्रिलियन में कितने जीरो होते हैं

जमेशदपुर में 3 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने रघुवर दास के लिए वोट माँगा था। सरयू राय भले ही बागी होकर निर्दलीय लड़े लेकिन उन्होंने झामुमो-कॉन्ग्रेस गठबंधन के नेता हेमंत सोरेन के लिए चुनाव प्रचार भी किया था।

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सिखों के दिखाए राह पर बढ़े मुस्लिम, झेलम पर पुल के लिए 40 साल पुरानी मस्जिद हटाने को तैयार

आर्टिकल 370 के प्रावधान निरस्त किए जाने के बाद से जम्मू—कश्मीर का माहौल बदलने लगा है। विकास के लिए लोग खुद आगे आने लगे हैं। कुछ दिनों पहले श्रीनगर-बारामुला राष्ट्रीय राजमार्ग के एक हिस्से में आड़े आ रहे गुरुद्वारे को हटाने के लिए सिखों के तैयार होने के बाद अब मुस्लिमों ने भी ऐसी ही मिसाल पेश की है। वे झेलम नदी पर प्रस्तावित पुल के आड़े आ रही 40 साल पुरानी एक मस्जिद को हटाने पर सहमत हो गए हैं। बता दें कि इस पुल का निर्माण वर्ष 2002 से रुका हुआ है।

अधिकारियों ने बताया कि रामपोरा में झेलम नदी पर प्रस्तावित 166 मीटर लंबे दो लेन वाले पुल को बनाने के लिए वर्ष 2002 में 10 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की गई थी। मगर इसके रास्ते में अबु तुराब मस्जिद, कुछ आवास और व्यावसायिक इमारतों समेत 18 बाधाएँ आड़े आ रहे थे, जिसके कारण काम अटका हुआ था। सबसे मुश्किल मस्जिद हटाने के लिए लोगों को तैयार करना था।

श्रीनगर के जिला मजिस्ट्रेट और डेवलपमेंट कमिश्नर शाहिद इकबाल चौधरी ने कमरवारी के रामपोरा क्षेत्र में अबु तुराब मस्जिद की प्रबंध समिति के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू किया और सहमति के बाद शनिवार को मस्जिद को हटाने का काम शुरू हो गया है। समझौते के तहत मस्जिद का पुनर्निर्माण दूसरी जगह पर जिला प्रशासन 12 महीने के अंदर अपने खर्चे पर कराएगा। 2018 में जम्मू और कश्मीर इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन से 2.5 करोड़ रुपए से अधिक की फंंडिंग मिलने के बावजूद, मस्जिद सहित कुल 18 बाधाओं की वजह से काम ठप रहा।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

शाहिद इकबाल चौधरी ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने में आ रही अड़चन को सुलझा लिया गया है, काम फिर से शुरू हो जाएगा। अन्य अड़चनों को दूर करने के लिए भी योजना तैयार की गई है। जिसमें एक फायर स्टेशन और 16 आवासीय और व्यावसायिक इमारतें हैं। उक्त पुल के निर्माण के साथ जिला प्रशासन झेलम के साथ बाढ़ सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के लिए काम करेगा। आसपास की सड़कों की मरम्मत की जाएगी और पूरे इलाके में स्मार्ट स्ट्रीट लाइटें स्थापित की जाएँगी।

बता दें कि श्रीनगर में विकास के लिए स्थानीय लोगों के आगे आने का यह दूसरा उदाहरण है। इससे पहले जिला मजिस्ट्रेट और डेवलपमेंट कमिश्नर शाहिद चौधरी ने इस माह की शुरुआत में श्रीनगर-बारामुला राष्ट्रीय राजमार्ग पर जैनकोट में ऐतिहासिक दमदमा साहिब गुरुद्वारा के प्रबंधन के साथ सफलतापूर्वक बातचीत कर उनको इस 100 साल पुराने गुरुद्वारे को दूसरे स्थान पर स्थापित करने के लिए सिखों को तैयार कर लिया था। गुरुद्वारे का पुनर्निर्माण भी सरकारी खर्च पर किया जाएगा।

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