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प्रीति से पहले 9 और महिलाओं को रेप के बाद जलाकर मारा था: हैदराबाद में ढेर किए गए दरिंदे पुराने हवसी

हैदराबाद के बाहरी इलाके शादनगर में पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी। उनका जला हुआ शव बरामद होने के बाद पूरा देश उबल पड़ा था। इस मामले में चार लोग गिरफ्तार किए गए थे। बाद में पुलिस ने एनकाउंटर में चारों आरोपितों को मार गिराया था। बावजूद इसके इन आरोपितों को लेकर जो जानकारियॉं सामने आ रही है वह हैरान करने वाली हैं। इनसे पता चलता है कि ये आदतन अपराधी थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रीति रेड्डी के साथ वारदात को अंजाम देने से पहले आरोपित इस तरह की कई और जघन्य घटनाओं में शामिल थे। पुलिस के अनुसार चार आरोपितों में दो ने इस तरह की 9 और वारदातों में संलिप्तता कबूली थी।

पुलिस का कहना है कि पूछताछ में 2 आरोपितों ( आरिफ और चेन्नाकेशववुलू) ने इस बात का खुलासा किया था कि उन्होंने पहले भी 9 महिलाओं का बलात्कार करके उन्हें जलाकर मारा है। फिलहाल पुलिस इसी जानकारी के आधार पर कर्नाटक और तेलंगाना में पूरी पड़ताल कर रही है। आरोपितों के फोन टावर लोकेशन और अपराधस्थल के साथ मिलान किया जा रहा है। आरोपितों का कहना था कि उन्होंने तेलंगाना के संगारेड्डी, रंगारेड्डी, माहबूबनगर में अपने कुकर्मों को अंजाम दिया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि आरोपित आरिफ और चेन्नाकेशववुलू ने खुद स्वीकारा था कि वे हाईवे पर कई बार हिजड़ों और वेश्याओं का यौन शोषण करते थे। लेकिन 9 महिलाएँ ऐसी थीं, जिनका बलात्कार कर उन्होंने जलाकर मारा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को इस बात का खुलासा करते हुए बताया, “आरोपितों को कस्‍टडी में लेने के बाद से ही हम तेलंगाना और कर्नाटक हाइवे पर महिलाओं के साथ रेप और जलाकर मारने की 15 घटनाओं में उनकी भूमिका की जाँच कर रहे थे। चार में से दो ने इनमें से 9 घटनाओं में अपने शामिल होने की बात मान ली थी। लेकिन अब हम हर एक केस की पुष्टि कर रहे हैं इसलिए अलग-अलग जगहों पर हमने जाँचकर्ताओं की कई टीम भेजी हैं।”

गौरतलब है कि पुलिस ने आरोपितों को लेकर ये चौंकाने वाला खुलासा उस समय किया है जब सुप्रीम कोर्ट ने 6 दिसंबर के एनकाउंटर की जाँच के लिए 3 सदस्यीय आयोग बनाया है। इसकी अगुवाई रिटायर्ड जज वीएस सरपुरकर कर रहे हैं।

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जामिया हिंसा पर FIR: कॉन्ग्रेस का पूर्व MLA आसिफ खान भी था शामिल, दंगाइयों के साथ छात्रों ने भी की पत्थरबाजी

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ रविवार (दिसंबर 15,2019 ) को जामिया नगर इलाके में भड़की हिंसा को लेकर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। ओखला के पूर्व कॉन्ग्रेसी विधायक आसिफ मुहम्मद खान को भी आरोपी बनाया गया। इसके अलावा स्थानीय नेता आशु खान, मुस्तफा और हैदर के नाम भी हैं। छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस) के नेता कासिम उस्मानी, ऑल इंडिया स्टू़डेंट्स असोसिएशन (AISA) के नेता चंदन और स्टूडेंट ऑफ इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (एसआईओ) के आसिफ तन्हा को भी आरोपी बनाया गया है।

एफआईआर जामिया थाने के एसएचओ उपेंद्र सिंह ने दर्ज कराई है। आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की 13 धाराएँ लगाई गई हैं। आईपीसी की धारा- 143/ 147/ 148/ 149/ 186/ 353/ 332/ 308/427/435/ 323/341/120बी/34 के अलावा प्रिवेंशन ऑफ डेमेज टु पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट, 3/4 1984 लगाई गई हैं।

वहीं, पूर्व विधायक आसिफ मुहम्मद खान ने कहा है कि वे शाहीनबाग में शांतिपूर्वक विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। फिर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी और जामिया नगर में उनके ख़िलाफ क्यों मामला दर्ज किया गया है?

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एफआईआर का पहला पन्ना
(साभार: आजतक)

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एफआईआर का दूसरा पन्ना (साभार: आजतक)
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एफआईआर का तीसरा पन्ना (साभार: आजतक)
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एफआईआर का चौथा पन्ना (साभार: आजतक)

एफआईआर में इस बात का भी उल्लेख है कि पुलिस ने इस पूरी घटना में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए केवल 75 आँसू गैस के गोले दागे थे। साथ ही पुलिस ने कैंपस में प्रवेश भी किया था, लेकिन वो सिर्फ़ उपद्रवियों को पकड़ने के लिए और बाकी छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए। एफआईआर में बताया गया है कि हिंसा वाले दिन 7-8 छात्र ऐसे थे, जो यूनिवर्सिटी के भीतर से आराजक तत्वों के साथ पत्थरबाजी कर रहे थे।

बता दें, दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में मंगलवार तक भी नागरिकता कानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन जारी रहा। सुबह से ही प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वारा ‘अब्दुल कलाम आजाद’ गेट के बाहर धरना दिया और जमकर नारेबाजी की। लेकिन मंगलवार को जमा हुई भीड़ में विश्वविद्यावय के छात्र बहुत कम रहे। ज्यादातर प्रदर्शनकारी यहाँ कानून और दिल्ली पुलिस का विरोध करने जामिया नगर, बाटला हाउस, हमदर्द, पुरानी दिल्ली की जामा मस्जिद, नोएडा, हरियाणा आदि इलाकों से पहुँचे थे।

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भारत के साथ रिश्ते सुनहरे दौर में, अवैध रूप से रह रहे हर बांग्लादेशी को बुलाएँगे: पीएम शेख हसीना का सलाहकार

तुष्टिकरण और निहित राजनीतिक स्वार्थों के कारण देश के भीतर भले कुछ ताकतें घुसपैठियों की ढाल बनने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन बांग्लादेश ने फिर दोहराया है कि अवैध रूप से भारत में रह रहे अपने हरेक नागिरक को वह वापस बुलाएगा। उसने कहा है कि अगर भारत में किसी भी बांग्लादेशी नागरिक के अवैध रूप से रहने का सबूत दिया जाता है तो उसे वापस बुलाया जाएगा। यह बात बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सलाहकार गौहर रिजवी ने कहा है।

इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने रविवार (दिसंबर 15, 2019) को यही बात कही थी। उन्होंने कहा था कि हमने भारत से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की सूची मुहैया कराने का अनुरोध किया है। भारत द्वारा सूची मुहैया कराने पर उन नागरिकों को लौटने की मॅंजूरी दी जाएगी।

इसी कड़ी में अब रिजवी ने कहा है, “हम भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को वापस बुलाएँगे, लेकिन भारत को इसका सबूत देना होगा। यह मानक प्रक्रिया है। मुझे नहीं लगता कि इसे कोई मुद्दा बनाने की जरूरत है।” उन्होंने राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए यह बात कही।

इनका संबंधों पर असर पड़ने की बात को भी रिजवी ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ रिश्ते इस वक्त सुनहरे दौर में हैं। बकौल रिजवी, “हमारी दोस्ती पिछले 50 वर्षों से है। भारत हमेशा हमारे साथ है और भविष्य में भी रहेगा। दुनिया में बहुत कम ऐसे उदाहरण हैं जहॉं एक देश के लोगों ने दूसरे देश की आजादी के लिए खून बहाया हो। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से सहिष्णु और धर्मनिरपेक्षता में यकीन करने वाला मुल्क रहा।”

रिजवी और मोमेन का बयान ऐसे वक्त में आया है जब दावा किया जा रहा था कि एनआरसी और सीएए को लेकर बांग्लादेश खुश नहीं है। इसका भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर असर पड़ने की बात भी कही जा रही थी। मोमेन का भारत दौरा रद्द होने की वजह भी यही बताया जा रहा था। लेकिन, मोमेन ने भारत के साथ मजबूत संबंधों का हवाला देकर तमाम अटकलों को खारिज कर दिया था।

बता दें कि 30 अगस्त को NRC की अंतिम लिस्ट प्रकाशित हुई थी। इसके लिए 3.3 करोड़ आवेदकों ने आवेदन किया था। जिसमें से 19 लाख से अधिक लोगों को बाहर रखा गया। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सितंबर में न्यूयॉर्क में द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ NRC का मुद्दा उठाया था। हालाँकि भारत ने बता दिया कि यह मुद्दा देश का आंतरिक मामला है।

इस बीच, प्रधानमंत्री शेख हसीना के हवाले बांग्लादेशी मीडिया में कहा गया है कि पाकिस्तान केवल भारत ही नहीं अन्य पड़ोसी देशों के खिलाफ भी साजिश रचता है। हसीना ने कहा है कि कड़े संघर्ष के बाद मिली आजादी को पाकिस्तानी से मोहब्बत रखने वाले खत्म करने और विफल करने की कोशिश में हैं। लेकिन, वह इन साजिशों को सफल नहीं होने देंगी।

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वामपंथियों को खदेड़ने के लिए BHU में बनी ‘अखिल भारतीय बाँस योजना’

BHU पिछले काफी दिनों से सुर्ख़ियों में है। कभी अपने साफ-सुथरे छवि के लिए जाना जाने वाला महामना का ये परिसर कुछ सालों से आंदोलनों, प्रदर्शन, मारपीट और लाठीचार्ज का अड्डा बनता जा रहा है। ऐसा क्यों है, जब हमने इस पर वहाँ के विभिन्न संकायों के छात्रों से बात करने की कोशिश की, तो छात्रों ने कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

छात्रों का कहना है कि जब से BHU में वामपंथ का प्रकोप बढ़ना शुरू हुआ तब से यहाँ पढ़ाई कम और बेमतलब के लफड़े ज़्यादा हो रहे हैं। चाहे दो साल पहले का छेड़छाड़ का फर्जी मामला हो या यहाँ के छात्रों का चरित्रहनन, सबमें यहाँ के वामपंथी धड़े का बहुत बड़ा हाथ है। इन्हें शुरू से ही कॉन्ग्रेस का साथ मिलता रहा। अब तो यहाँ के सभी देश-विरोधी छोटे-छोटे संगठन मिलकर जॉइंट एक्शन कमिटी के बैनर तले आकर हर स्थापित व्यवस्था का विरोध करने लगे हैं, जिससे यहाँ पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।

नाम न छापने की शर्त पर वहाँ के कई छात्रों ने बताया कि BHU में JNU के लोगों और वामपंथ समर्थकों की नियुक्ति तेज हुई है तभी से यहाँ भी वामपंथ का कोढ़ फ़ैल गया है। जिसके उपचार के लिए राष्ट्र, यहाँ के नागरिकों और मातृभूमि के लिए समर्पित छात्रों ने एक व्हाट्सअप ग्रुप बनाया है जिसे नाम दिया है ‘अखिल भारतीय बाँस योजना।’

जब ऑपइंडिया ने योजना के मकसद या प्रयोजन के बारे में तहकीकात की तो हमें BHU के छात्रों ने ही बताया, “इस परिसर को वामपंथी प्रकोप से, जहरीले वामपंथ से बचाने के लिए बनाया गया है। क्योंकि अब यहाँ भी आजादी के नारे लगने लगे हैं। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में वामपंथियों को हिंदुत्व से ही आजादी चाहिए। इन्हें ब्राह्मणों से आजादी चाहिए। जितनी भी तरह की आए दिन इनकी आजादी की माँग है, उसे देखते हुए हम छात्रों ने वामपंथियों को ही यहाँ से खदेड़ने के लिए यह स्वयं सहायता समूह बनाया हैं।”

“लेकिन उसके लिए हम गाँधीवादी तरीका ही अपनाएँगे। शांतिपूर्ण तरीके से इनके हर नैरेटिव को काटना यहाँ के राष्ट्रवादी छात्रों का महामना प्रदत्त कर्तव्य है, जिसका हम तहे दिल से पालन करने के लिए वचनबद्ध हैं। क्योंकि हमें इस देश से प्यार है। महामना के उद्देश्यों और उनके आदर्शों से मुहब्बत है। यहाँ हम जातिवाद की विषबेल नहीं पनपने देंगे। इसीलिए जहरीले वामपंथ को विषहीन बना कर छोड़ना है।”

जब हमने इस योजना के संस्थापक सदस्यों से बात की तो उन्होंने इस पर थोड़ा और प्रकाश डाला। ‘अखिल भारतीय बाँस योजना’ दरअसल काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा शुरू किया गया एक निकाय है। जब जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाए गए और उसके बाद देश के अन्य शिक्षण संस्थानों को अस्थिर और देशद्रोह के विष से व्याप्त करने की कोशिश की गई तब BHU के छात्रों ने तय किया कि एक ऐसा छात्र समूह बनाया जाए जो कि शिक्षण संस्थानो में जेहादी, नक्सली और देशद्रोही प्रवृत्ति का विरोध हर स्तर पर कर सके।

संस्थापकों ने अपने स्वयंसेवक छात्रों के बारे में बताया, “बाँस योजना के छात्र सोशल मीडिया से लेकर जमीनी विरोध तक हर स्तर पर ऐसे तत्वों का विरोध करने से नही चुकते। इनका मुख्य नारा है ‘जय बाँस-तय बाँस।’ बाँस को चूँकि आदिशस्त्र माना जाता है इसलिए उस प्रतीक को हमने अपनाया है।”

“बौद्धिक विमर्श, सोशल मीडिया के अभियान और जमीनी कार्रवाई सभी के लिए इनकी अपनी टीम है। राष्ट्रवादी संगठन जहाँ छवि, पहल और श्रेय के बारे में सोचते हुए कई बार अपने दायित्वों से चूक जाते है इसलिए बाँस योजना ने अपनी कार्यपद्धति भी ईजाद की है। इसमें जुड़ा हर व्यक्ति राष्ट्रीय पदाधिकारी होता है और इसमें सभी के अधिकार और निर्णय की शक्ति एक समान है ताकि कोई बड़ा और कोई छोटा न हो। इसका मूल मर्म यह है कि जब हम भारत माता की सेवा में लगे हो तो सभी सेवक और सेनानी है इसमें कोई बड़ा और छोटा हो ही नही सकता।”

“बाँस योजना की सैद्धान्तिक दृष्टि यह है कि देश और देश की संस्कृति से बड़ा कुछ नहीं होता इसलिए सभी कार्यक्रम और कार्य लक्ष्य आधारित होने चाहिए। इसलिए मार्ग कौन-सा अपनाया जाए यह विमर्श का विषय नही होना चाहिए।”

नोट- ऑपइंडिया इस तरह के किसी भी समूह और उसकी गतिविधियों का समर्थन नहीं करता है।

‘नरमी की किंचित मात्र भी संभावना नहीं, पथराव और आग लगाओगे तो पुलिस एक्शन नहीं लेगी क्या?’

आज भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दो-दो खबरिया चैनलों को इंटरव्यू देते हुए कई बड़ी बातें कहीं। जहाँ CAA को लेकर चल रहे मौजूदा बवाल के बारे में उन्होंने दिल्ली पुलिस का पक्ष लेते हुए कहा कि अगर कोई आगजनी कर रहा हो तो पुलिस एक्शन नहीं लेगी तो क्या करेगी, वहीं राम जन्मभूमि मंदिर के ट्रस्ट के बारे में उन्होंने घोषणा की कि भाजपा का कोई सदस्य इसका सदस्य नहीं बनेगा।

राम जन्मभूमि मंदिर, जिसके लिए भाजपा ने दशकों और हिन्दुओं ने सैकड़ों साल लड़ाई लड़ी, के ट्रस्ट के बारे में अमित शाह ने कहा कि न भाजपाई इस ट्रस्ट के सदस्य बनेंगे, न ही मंदिर के निर्माण में सरकार का पैसा खर्च होगा। इसके लिए पैसा समाज से ही जुटाकर खर्च किया जाएगा।

नागरिकता संशोधन एक्ट के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें नरमी की “किंचित मात्र भी संभावना नहीं है।” साथ ही उन्होंने “लाखों-करोड़ों लोग जो अपना धर्म बचाने के लिए देश की शरण में आए हैं” के प्रति भारत का नैतिक दायित्व “नेहरू-लियाकत अली पैक्ट के अनुसार” बताया।

जामिया, JNU आदि के बवाल और पुलिस की कार्रवाई पर अमित शाह पूरी तरह अपने मातहतों (दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है) के साथ खड़े नज़र आए। उन्होंने बल्कि यह तक कहा कि अगर कहीं आगजनी या अव्यवस्था हो जाती है तो उनके हिसाब से यह पुलिस का काम ठीक से न करना होगा।

राहुल गाँधी द्वारा वीर सावरकर का अपमान करने पर उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी सावरकर के बराबर बन भी नहीं सकते। “सावरकर बनने के लिए बहुत बड़ी तपस्या, बहुत बड़ा त्याग और बहुत तीव्र देशभक्ति चाहिए। इन तीनों में से कुछ भी राहुल गांधी के व्यक्तित्व में झलकता नहीं है।”

नागरिकता विधेयक संशोधन के खिलाफ उतरे छात्रों से उन्होंने अपील की कि वे इस एक्ट को “अच्छी तरह से स्टडी करें।” उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि अगर एक्ट का अध्ययन करने के बाद भी किसी को कोई समस्या है तो “जरूर सरकार के साथ चर्चा करनी चाहिए, हम तैयार हैं।”

‘जामिया-जलियाँवाला की तुलना वीरों का, देश के लिए प्राणोत्सर्ग करने वालों का अपमान’

जामिया में मिला कारतूस हमारा नहीं, दिल्ली पुलिस ने गोली नहीं चलाई: गृह मंत्रालय

बाबर की औलादें आगजनी कर सबूत दे रहे कि ये देश उनका नहीं: पहलवान ने उपद्रवियों को दी धोबी-पछाड़

स्कूल बस को भी नहीं छोड़ा दंगाई भीड़ ने, दिल्ली के सीलमपुर-जाफराबाद में उग्र प्रदर्शन: कई पुलिसकर्मी घायल

CAA के विरोध के बहाने, आतंक समर्थक वामपंथी संगठन SDPI ने रोकी बीमार बेटे को ले जा रही कार

“तेरे को फ़ोटो लेना है, वीडियो बनाना है, जो मर्ज़ी आए करना हो कर।”

“हमें वीडियो से डराने की कोशिश मत कर।”

ये गुंडागर्दी और धमकी भरी भाषा और किसी की नहीं, आम आदमी के सबसे बड़े संगी-साथी बनने का ढोंग करने वाले वामपंथियों की है, जो एक बाप को अपने बीमार बेटे और डरी हुई पत्नी को अस्पताल पहुँचाने से रोकने की पूरी कोशिश कर रहे थे। क्यों? क्योंकि इस बाप ने उस सड़क से गुज़र कर अस्पताल पहुँचने की कोशिश कर दी, जिसे इन वामपंथियों ने “फ़ासिस्ट कानून” के विरोध के लिए ‘खरीद’ लिया था।

लैबों को बंधक बनाना, प्रोफ़ेसरों के लाखों रुपए के प्रयोग मिट्टी कर देना, दिल्ली-अलीगढ़-लखनऊ में हिंसा, आगजनी, पत्थरबाज़ी, असम में असमीभाषी लोगों को बरगलाना, मुंबई में छुट्टियों में खाली हुई यूनिवर्सिटी में इकट्ठे होकर उसे पूरे विश्वविद्यालय का मत बताना- नागरिकता विधेयक के विरोध के इन्हीं ओछे हथकण्डों की फेहरिस्त में एक और है 4-5 साल के रोते बच्चे और उसकी रुआँसी माँ के आगे न पसीजना।

वामपंथ के अंतिम दुर्गों में से एक केरल में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) नामक इस संगठन के सदस्यों ने अरुण नामक पिता की कार को सड़क पर रोक लिया। अरुण ने जब उनके आगे हाथ जोड़े कि उनका छोटा-सा बेटा बीमार है और उसे अस्पताल ले जाया जाना ज़रूरी है, तो कुछ कार्यकर्ता तो पसीज गए लेकिन 5 ‘क्रांतिकारी’ फिर भी अड़े रहे।

जब अरुण ने अपना फ़ोन निकाल कर उनका वीडियो बनाना शुरू किया तो वे कथित तौर पर और भी आक्रामक हो गए। इस रिपोर्ट की शुरुआत में जो संवाद हैं, वो उन्हीं के कहे गए शब्दों का अनुवाद है। जब तक अपनी चल सकी, तब तक उन्होंने अरुण को नहीं ही जाने दिया। 15 मिनट बाद जब पुलिस आई, तभी पुलिस के डर से वे तितर-बितर हुए और अरुण निकल पाए।

केरल में लगभग 40 संगठनों के नागरिकता विधेयक संशोधन का विरोध करने की खबर सामने आई है। इनमें स्थानीय दलों के अलावा उत्तर प्रदेश में लगभग जड़ से उखाड़ी जा चुकी मायावती की पार्टी बसपा भी शामिल है।

NIA के रडार पर SDPI

जिस पार्टी SDPI के यह सदस्य बताए जा रहे हैं, उसे न केवल हिंसक, चरमपंथी, लगभग-आतंकवादी अति-वामपंथी विचारधारा का अनुगामी माना जाता है, बल्कि पार्टी मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए किसी भी हद तक जा सकने के लिए भी बदनाम है। 2016 में मुस्लिमों के हज़रत माने जाने वाले पैगम्बर मुहम्मद की आलोचना वाला एक फेसबुक कमेंट भर प्रकाशित होने पर इस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ‘मातृभूमि’ समाचारपत्र के दफ़्तर के बाहर जमकर बवाल काटा

इसके अलावा कन्नूर जिले में पॉप्युलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) नामक एक और संदिग्ध संगठन के साथ SDPI के कार्यकर्ता हथियारों के जखीरे ऊपर बैठे हुए पकड़े गए थे। पुलिस को इनके पास से देसी बम, लोहे की कीलों का ढेर, तलवार आदि मिले थे। मामले में दोनों संगठनों के कुल मिलाकर 24 सदस्यों पर NIA ने प्राथमिकी दर्ज की थी, जिनमें मुख्य आरोपित थे पीवी अब्दुल अज़ीज़ और एवी फ़हद। इसके अलावा अज़हरुद्दीन उर्फ़ अज़हर, खमरुद्दीन और जलील फ़रार हो गए थे।

10वीं की छात्रा के साथ गैंगरेप का प्रयास, असफल होने पर मार दी गोली: आजाद खान समेत 4 गिरफ्तार

बिहार के मुजफ्फपुर में रेप की कोशिश में नाकाम होने पर जिंदा जला देने के बाद एक और दरिंदगी सामने आ रही है। बिहार के रोहतास में एक युवती के साथ गैंगरेप करने में नाकाम होने पर आरोपितों ने पीड़िता को गोली मार दी। गोली लड़की के गले के पास लगी है। पीड़िता को जख्मी हालत में इलाज के लिए राजपुर के पीएचसी लाया गया है। जहाँ वो जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है।

इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपित आजाद खान समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक पीड़िता 10वीं की छात्रा है। पीड़ित छात्रा के साथ गाँव के ही चार युवकों ने उस समय गैंगरेप का प्रयास किया, जब वो रविवार (दिसंबर 15, 2019) को अपनी दादी के साथ शौच कर के लौट रही थी। कोहरा और बरसात का फायदा उठाकर मनचलों ने लड़की को जबरन खींच लिया और एक कमरे में ले जाकर गैंगरेप का प्रयास किया। आरोपित यहीं पर नहीं रुके। वारदात के दो दिन बाद मंगलवार (दिसंबर 17, 2019) को पीड़िता को गोली मार दी। इस घटना से पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। हालाँकि पुलिस अधीक्षक सत्यवीर सिंह के निर्देश पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित आजाद खान सहित चार लोगों को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है।

पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी लड़की सुबह अपनी दादी के साथ घर के पास के शौचालय के लिए निकली थी। इस दौरान वहाँ पहले से घात लगाए अपराधियों ने फायरिंग शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि धमाका इतना जोरदार हुआ कि सभी लोग डर गए, फिर उन्होंने देखा तो उनकी बेटी जमीन पर गिरी छटपटा रही थी। शोर मचाने पर गाँव के अन्य लोग वहाँ जुट गए। घटना को लेकर गाँव में पहले से मौजूद पुलिस और गाँव वाले आनन-फानन में लड़की को लेकर राजपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आए जहाँ उसका इलाज किया जा रहा है।

बता दें कि इससे पहले मुजफ्फरपुर में युवती को जलाने का मामला सामने आया था। आरोपित ने युवती के साथ रेप करने की कोशिश की, लेकिन जब वह ऐसा करने में विफल रहा तो उसने पीड़िता को जला दिया। परिवार ने आरोप लगाया था कि आरोपित शख्स ने घर में घुसकर पीड़िता के साथ रेप का प्रयास किया था लेकिन पीड़िता के विरोध के बाद जब वह नाकाम रहा तो उसने केरोसिन तेल छिड़कर पीड़िता को जिंदा जलाने की कोशिश की। जिसके बाद तुरंत ही पीड़िता को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहाँ वो करीब दस दिन तक वह जिंदगी की जंग लड़ती रही, लेकिन मंगलवार (दिसंबर 17, 2019) को जिंदगी की जंग हार गई

गैंगरेप के बाद हत्या कर शव को पेड़ से लटकाया: जाहिद, नसीम, ताहिर समेत 6 के खिलाफ FIR

नाबालिग से दूसरी बार गैंगरेप: आरोपित अल्ताफ, सरफराज, इरशाद, सौयब पलवल से फरार

गैंगरेप पीड़िता की अर्ध-नग्न लाश: टूटी उंगलियाँ, आँखें बाहर निकली हुईं – शाबोद्दीन, शेख बाबू, मकदूम ने कबूला जुर्म

5 लड़कियों का गैंगरेप करने वाले पादरी अल्फांसो समेत 6 को उम्रकैद… लेकिन NGO मामले में बरी

शहनवाज मरा, जब्बार फ़रार: अब्बा के कातिलों पर बेटे ने मजिस्ट्रेट के सामने की फायरिंग

बिजनौर की दिल दहला देने वाली घटना में एक मृतक के बेटे ने अब्बा के कथित कातिलों को सीजेएम के सामने ही मौत के घाट उतार दिया है। वारदात में मृतक हत्यारोपित का दूसरा साथी भाग निकला है, और एक न्यायिक अधिकारी भी गोली लगने से घायल हो गए हैं। दिन-दहाड़े हुए इस हत्याकाण्ड के बाद हमलावर और उसके साथियों को पुलिस ने अदालत में ही कैद कर दिया है। अदालत के परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है।

अक्टूबर में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अंसारी गैंग के ‘किंगपिन’/सरगना शाहनवाज अंसारी और उसके शार्प शूटर जब्बार अंसारी को गिरफ्तार कर लिया था। दोनों ही शातिर अपराधी बहुजन समाजवादी पार्टी के नेता हाजी अहसान और उनके भाँजे शादाब के डबल मर्डर मामले में उत्तर प्रदेश में वांछित थे।

हाजी अहसान और शादाब के दोहरे हत्याकांड की पोल तब खुली जब उनकी हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में शूटरों को बाइक से ले जाने वाले दानिश को पुलिस ने धर दबोचा। उसने शाहनवाज और शादाब के बारे में पुलिस को बताया। उसकी दी गई जानकारी के अनुसार इस हत्या की सुपारी के पीछे शाहनवाज का न केवल संपत्ति विवाद, बल्कि उसकी ‘डॉन’ बनने की चाह भी कारक थे। पुलिस तब से दोनों शूटरों के अतिरिक्त शाहनवाज की भी खोज में थी। अंततः दिल्ली में 12 अक्टूबर को शाहनवाज व जब्बार पुलिस की हिरासत में आ गए थे। तब से दिल्ली जेल में बंद शाहनवाज को इस पेशी के लिए ही बिजनौर लाया गया था।

मीडिया खबरों के अनुसार आज सीजेएम योगेश कुमार के सामने शाहनवाज अंसारी की हत्या करने वाला साहिल हाजी अहसान का ही बेटा बताया जा रहा है। वह वहाँ दो अन्य शार्प शूटरों के साथ मौजूद था। बताया जा रहा है कि तीनों ने मिलकर तकरीबन 20 राउंड फायरिंग की है। इसमें हेड मोहर्रिर मनीश भी गोली लगने से घायल हो गए हैं। इसके अतिरिक्त दो पुलिस वाले भी घायल हुए हैं, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार भागने वालों में जब्बार के अलवर एक अन्य आरोपित नाजिर भी है।

नवभारत टाइम्स ने एसपी संजीव त्यागी के हवाले से लिखा है कि साहिल ने इस हत्याकाण्ड को अंजाम जज के सामने देने के पहले कोर्टरूम के दरवाजे भी बंद करा दिए थे।

‘जामिया-जलियाँवाला की तुलना वीरों का, देश के लिए प्राणोत्सर्ग करने वालों का अपमान’

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा के नेता विपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और शिव सेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा है। ठाकरे द्वारा जामिया के (हुड़दंगी और हिंसक) छात्रों को रोकने के लिए की गई सीमित पुलिस कार्रवाई की तुलना जलियाँवाला बाग़ हत्याकाण्ड से करने को महाराष्ट्र भाजपा के शीर्ष नेता ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। साथ ही फडणवीस ने कहा है कि इससे ठाकरे ने देश के लिए प्राणोत्सर्ग करने वाले वीरों का अपमान किया है।

गौरतलब है कि आज ही (17 दिसंबर, 2019 को) उद्धव ठाकरे ने जामिया में विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा के ख़िलाफ़ कार्रवाई की तुलना जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड से कर दी थी। 1919 में हुआ यह हत्याकाण्ड जनरल डायर की ब्रिटिश-हिंदुस्तानी फ़ौज द्वारा निहत्थे भारतीयों पर लोहड़ी के दिन किया गया लोमहर्षक अत्याचार था।

‘सेक्युलर’ कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार चला रहे उद्धव ठाकरे लगातार नागरिकता विधेयक पर अपना स्टैंड बदलते आए हैं। लोक सभा में उनकी पार्टी ने बिना कॉन्ग्रेस से कोई सलाह-मशविरा किए विधेयक को समर्थन दे दिया। लेकिन फिर कॉन्ग्रेस के आँख दिखाने पर अपना स्टैंड बदलते हुए ठाकरे राज्य सभा में इसके समर्थन के लिए तीन-पाँच करने लगे। और उस पर भी कोर वोटबैंक की प्रतिक्रिया नकारात्मक होने पर अंततः उनकी पार्टी ने वॉक आउट कर बीच का रास्ता अपनाया- ताकि न ही विधेयक की खुल कर मुख़ालफ़त करनी पड़े, न ही इसके समर्थन से कॉन्ग्रेस का महाराष्ट्र राज्य सरकार को समर्थन छूट जाए।

उद्धव के इस बयान के बाद खबर यह भी आई कि शिवसेना ने सभी विपक्षी दलों को झटका देते हुए राष्ट्रपति से मिलने जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया। मंगलवार शाम (दिसंबर 17, 2019) को ‘ऑल पार्टी डेलीगेशन’ की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाक़ात की। इसमें कॉन्ग्रेस समेत सभी विपक्षी दल राष्ट्रपति के समक्ष सीएए को लेकर अपनी चिंताएँ जाहिर की। लेकिन विपक्षी पार्टी बन चुकने के बाद भी शिव सेना इससे दूर ही रही।

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2 Pak कमांडो ढेर, बाकी जान बचाकर भागे: घुसपैठ कर रही पाकिस्तानी सेना को मिला मुँहतोड़ जवाब

जम्मू-कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की नापाक हरकतों का आज भारतीय सेना ने मुँहतोड़ जवाब दिया। सुंदरबनी सेक्टर में घुसपैठ करते हुए सेना के जवानों ने पाकिस्तान के कम से कम 2 एसएसजी के कमांडो को ढेर किया। जबकि दस्ते के अन्य सदस्य अपनी जान बचाकर मौक़े से भाग निकले। इस कार्रवाई में 1 भारतीय जवान के शहीद होने की भी खबर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार (दिसंबर 16, 2019) की शाम, भारतीय जवानों की मुस्तैदी के बावजूद, सुंदरबनी सेक्टर में पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) द्वारा घुसपैठ की कोशिश की जा रही थी। लेकिन संदिग्ध गतिविधियों का पता चलते ही भारत ने जवाबी कार्रवाई की और पाकिस्तान की एसएसजी यूनिट के कम से कम 2 एलीट कमांडो को मार गिराया।

जानकारी के अनुसार, सोमवार को राजौरी के सुंदरबनी सेक्टर के अंतर्गत केरी बट्टल इलाके में एलओसी पर स्थित ललयाली चौकी पर पाकिस्तानी सेना के बैट दस्ते ने हमला किया। हालाँकि, फायरिंग होने से भारतीय सेना समझ गई कि या तो घुसपैठ की कोशिश हो रही है या फिर पाकिस्तानी सेना किसी बड़े बैट हमले को अंजाम दे रही है। सेना ने उसी समय सभी नाका पार्टियों और अग्रिम चौकियों को सचेत कर दिया।

इसके बाद पाकिस्तानी की ओर से हो रही गोलाबारी के थोड़ा धीमा पड़ते ही पाकिस्तानी सेना का बैट दस्ता एलओसी पार कर ललियाली चौकी की तरफ बढ़ा, लेकिन वहाँ मौजूद जवानों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए बैट दस्ते के 2 कमांडों को ढेर कर दिया। जिसके बाद उनके अन्य साथी उन शवों को अपने साथ अपने इलाके में ले गए।

बता दें कि पाकिस्तान की ओर से हुई इस नापाक हरकत पर रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल देवेंद्र आनंद ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए पाकिस्तानी सेना ने भारतीय ठिकानों पर गोलाबारी की। इसमें एक जवान शहीद हो गया।

उन्होंने ये भी बताया कि इसी दौरान अग्रिम इलाके में नाका पार्टी ने कुछ संदिग्ध तत्वों को भारतीय इलाके में घुसते देखा। जवानों द्वारा ललकारे जाने पर उन्होंने फायरिग शुरू कर दी और वापस भागने लगे। जवानों ने भी जवाबी फायर किया और उन्हें वापस भागने पर मजबूर कर दिया।

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