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औरंगज़ेब के नाम पर सिखों ने पोती स्याही, कहा- वह लाखों हिंदुओं का क़ातिल, उसके नाम से आहत होती है भावना

शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अन्य सदस्यों ने रविवार (दिसंबर 1, 2019) को राजधानी दिल्ली के औरंगजेब लेन के साइन बोर्ड पर स्याही पोत दी। उनकी माँग है कि मुगल बादशाह औरंगजेब का नाम देश की सड़कों और किताबों से हटाया जाए।

उन्होंने कहा कि औरंगज़ेब हिंदुओं का ज़बरन धर्म परिवर्तन करता था। वो लाखों हिंदुओं का क़ातिल है। उसके नाम पर सड़क करोड़ों हिंदू और सिखों की भावना के साथ खिलवाड़ है। उसका नाम सड़कों और किताबों से बाहर किया जाए।

मीडिया से बातचीत करते हुए मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “गुरु तेग बहादुर ने औरंगजेब द्वारा जबरदस्ती धर्मांतरण के प्रयासों के खिलाफ अपने जीवन का बलिदान दिया। हम सड़कों और किताबों पर औरंगजेब के नाम का विरोध करते हैं, वह एक हत्यारा था। सड़कों पर उसका नाम देख हमारी भावनाएँ आहत होती हैं।”

मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्वीट करते हुए लिखा कि गुरु तेग बहादुर जी ने जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ शहादत दी। क्रूर औरंगज़ेब भी उनकी धर्म आस्था को हिला नहीं पाया था। देश की राजधानी दिल्ली में उस औरंगज़ेब के नाम पर सड़क होना न देश को शोभा देता है और न देशवासियों को खुशी। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि जिस क्रूर शासक ने भारत के लाखों हिंदुओं पर अत्याचार कर उनका धर्म परिवर्तन किया, उस औरंगज़ेब के नाम पर हमारे देश में आज भी एक सड़क है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से इस लेन का नाम बदलने की अपील की है।

‘मुगलों ने हिंदुस्तान को लूटा ही नहीं, माल बाहर भी भेजा, ये रहा सबूत’

जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दफ़न की गई थी मंदिरों से लूटी गई हिन्दू प्रतिमाएँ, ये रहा सबूत

मुगलों ने हमें अमीर नहीं बनाया DailyO, भ्रामक तथ्यों के लेख लिखकर स्वरा भास्कर को मसाला मत दो

संघ प्रमुख भागवत के साथ दिखे सोनिया गाँधी के ‘टीचर’, अटकलों का बाजार गरम

दिल्ली के लालकिले में आयोजित गीता प्रेरणा महोत्सव में रविवार (1 दिसंबर 2019) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के साथ कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जर्नादन द्विवेदी भी नजर आए। द्विवेदी कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी के बेहद करीबी रहे हैं। जब सोनिया ने राजनीति में आने का फैसला किया था तो उन्हें हिन्दी सिखाने की जिम्मेदारी भी द्विवेदी पर ही थी। राहुल गॉंधी के अध्यक्ष बनने से पहले कॉन्ग्रेस संगठन में वे बेहद प्रभावशाली माने जाते थे।

ऐसे में भागवत के साथ उनके मंच शेयर करने के कई मायने निकाले जा रहे हैं। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने भी शिरकत की। कार्यक्रम का आयोजन ‘जीओ गीता’ नामक संगठन ने किया था।

बीते साल स्वेच्छा से सक्रिय राजनीति से किनारा करने वाले द्विवेदी सोनिया के अलावा कई कांग्रेस अध्यक्षों मसलन, इंदिरा गॉंधी, राजीव गॉंधी और पीवी नरसिम्हा राव के साथ भी काम कर चुके हैं। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने का भी उन्होंने समर्थन किया था। उन्होंने कहा था, “मैंने राम मनोहर लोहिया के नेतृत्व में राजनीति की शुरुआत की थी। वह हमेशा इस अनुच्छेद के खिलाफ थे। आज इतिहास की एक गलती को सुधार लिया गया है।” उस समय भी सोशल मीडिया में उनके इस बयान को लेकर कई तरह के कयास लगे थे।

सक्रिय राजनीति से दूरी बनाते वक्त भी द्विवेदी ने कॉन्ग्रेस नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कहा था कि जिस संगठन में पूरी जिंदगी लगा दी उसकी यह स्थिति देख पीड़ा होती है। उन्होंने कहा था कि लोकसभा में पार्टी भीतरी कारणों से हारी। यहॉं तक कि आर्थिक आरक्षण पर पार्टी के स्टैंड की भी उन्होंने आलोचना की थी।

आरएसएस प्रमुख भागवत के साथ हाल में मंच साझा करने वाले वे कॉन्ग्रेस से जुड़े दूसरे नेता हैं। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आरएसएस के विजयादशमी कार्यक्रम में शामिल हुए थे। मुखर्जी का इस कार्यक्रम में जाना गॉंधी परिवार को रास नहीं आया था।

रवीश जी, रेप में ‘जात’ तो दिख गया आपको, पर मजहबी ‘रेप जिहाद’ पर भी आँख खोलिए

रवीश जी ने फेसबुक पर तेलंगाना की डॉक्टर के सामूहिक बलात्कार, हत्या, लाश के साथ बलात्कार और फिर उसे जला देने वाले मामले में ज्ञान दिया कि ऐसे मामलों में साम्प्रदायिक बातें नहीं होनी चाहिए क्योंकि बलात्कार इन सब बातों से परे होता है, बलात्कारी कोई भी हो सकता है, जाति-मजहब से परे… सही बात है रवीश जी, बिलकुल सही बात है। बस यही ज्ञान आप तब नहीं दे पाते जब पीड़िता समुदाय विशेष से हो और बलात्कारी हिन्दू, और हिन्दुओं में भी कहीं पांडे, तिवारी, सिंह, ठाकुर टाइप का निकल आए तो आपकी बाँछें, जहाँ-जहाँ भी होती हैं, खिल आती हैं। सॉरी, ‘पांडे’ पर नहीं खिलती, खास कर तब जब वो सेक्स रैकेट में लिप्त एक खास टीवी चैनल के प्राइम टाइम एंकर का भाई निकल आए!

रवीश जी की बातों से मैं इत्तेफाक रखता हूँ क्योंकि हैदराबाद रेप और हत्याकांड में मुख्य आरोपित मुहम्मद आरिफ है, और पीड़िता हिन्दू, बाकी तीन का नाम रवीश जी ने लिख दिया है, जिससे पता चलता है कि हिन्दू भी शामिल है, तो ‘अल्पसंख्यकों को घृणा का पात्र बनाया जा रहा है’ वाली बात कहने में थोड़ा बल मिल जाता है इसलिए रवीश जी उनके नामों पर ज्यादा ज़ोर देते हैं। तब प्रतिशत खिसक कर हिन्दुओं की संलिप्तता को 75% बना देता है, फिर ‘मुख्य आरोपित’ या योजना बनाने वाला कौन था, ये सारी बातें गायब की जा सकती हैं क्योंकि ‘अरे तीन हिन्दू भी तो थे’।

जहाँ तक हैदराबाद वाले इस बलात्कार की बात है, वो अभी तक सामने आई बातों से साम्प्रदायिक नहीं लगता। साथ ही, रवीश जी जो चिहुँक रहे हैं कि इसे लोग साम्प्रदायिक रंग दे रहे हैं, वहाँ भी वो गलत हैं क्योंकि पुलिस ने शुरू में मुख्य आरोपित मोहम्मद आरिफ (कहीं-कहीं मोहम्मद पाशा) का नाम ही जारी किया था, तो लोगों को लगा कि ये भी दोनों मजहबों के बीच वाला केस है। अब रवीश कुमार कितने घाघ हैं उसका पता इस बात से चलता है कि बहुत ही सूक्ष्म तरीके से, धूर्तता करते हुए इन्होंने बाकियों को ही धूर्त कह दिया है।

रवीश की धूर्तता यह है कि अपने चेले ध्रुव राठी वाले स्टायल में कुछ आँकड़े दे कर उन्होंने उन तमाम मजहबी बलात्कारों को पोतने की कोशिश की है, जहाँ मुख्य उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ मजहब ही है। ऐसे मामलों का प्रतिशत हो सकता है कम हो, लेकिन वो होते ही नहीं, ऐसा मानना बिलकुल गलत है। इन मामलों का प्रतिशत इसलिए भी कम है क्योंकि इन मामलों को सरकार उन तरीकों से रिकॉर्ड नहीं करती। करती भी हो, तो ऐसे ऑडिट सामने नहीं आते ताकि पता चले कि किस मजहब के लोग ने दूसरे मजहब के लोगों का यौन शोषण या बलात्कार किया।

इसलिए हमारे सामने सिवाय मीडिया में आई खबरों के और स्थानीय थाना द्वारा जारी किए बयानों के, और किसी भी तरह से आँकड़े इकट्ठा करने का विकल्प है भी नहीं। दूसरी समस्या यहाँ यह भी है कि बहुत सारे मामलों में आरोपित का नाम तो पता चल जाता है, लेकिन पीड़िता का नाम बाहर नहीं आता, न ही उससे जुड़ी कोई भी पहचान। इसलिए भी, ‘रेप जिहाद’ या ‘लव जिहाद’ जैसी बातों को साबित करने के लिए बहुत ही सीमित तरीके से लाए गए आँकड़े ही सार्वजनिक हो पाते हैं। आरोपित के द्वारा किए गए अपराधों के कई मामलों को बस इसलिए छोड़ना पड़ा क्योंकि पीड़िता के साथ प्रेम, ब्लैकमेल, निकाह और बलात्कार के बावजूद उसका नाम मीडिया में नहीं है। इसी बात का लाभ रवीश और उसका गिरोह उठाता है, जब वो बड़ी ही आसानी से कह देता है कि सरकार आँकड़े जारी नहीं करती, आप कहाँ से ला रहे हैं ये खबरें!

ख़ैर, अपने पोस्ट में रवीशानंद जी महाराज ने लिखा है कि सरकार जो आँकड़े देती है, उसमें अनुसूचित जाति और जनजाति के खिलाफ हुए मामलों को अलग से रखा जाता है क्योंकि ऐसा संविधान और सरकार मानती है कि उच्च जातियों के दबंग घृणा और बदला लेने के लिए ऐसा काम करते हैं। रवीश जी यहाँ संविधान की छतरी के नीचे ठिठुरते हुए छुप जाते हैं और वही संविधान सब कुछ हो जाता है जिसके अंतर्गत काम करने वाले कोर्ट के न्याय पर इन्होंने राम मंदिर के फैसले से ले कर जस्टिस लोया की मृत्यु और तमाम मामलों में ‘अंतरात्मा’ की आवाज तक को सुनने का वास्ता दे दिया है।

रवीश जी, मैं कुछ मामले नीचे रखने जा रहा हूँ, जो कि बस चार महीने पुराने ही हैं, और समय तथा जगह की कमी के कारण भी इतने ही एडजस्ट हो सकते हैं, जिनमें कथित अल्पसंख्यकों द्वारा न सिर्फ हिन्दू उच्च जाति, बल्कि दलितों के साथ हुए रेप, गैंगरेप, हत्या, निकाह के बाद पारिवारिक गैंगरेप, लव जिहाद जैसी घटनाएँ पूरी तरह से मजहबी रंग से रंगी प्रतीत होती हैं।

यहाँ आपका ‘उच्च जाति घृणा और बदला लेने के लिए’ वाला तर्क शब्द बदल कर ‘समुदाय विशेष घृणा और बदनाम करने के लिए’ प्रेम का झाँसा दे कर बलात्कार कर रहा है, भगवान और अल्लाह कर रहा है, अपने भाइयों और दोस्तों से बलात्कार करवा रहा है, और हाँ, विडियो बना कर वायरल कर रहा है। इसमें दलित भी हैं सर, जिससे मजहबी आरोपित कह रहा है कि वो उससे अल्लाह के नाम पर रहम की भीख माँगे…

अब सर ये बताइए कि इसमें मजहब का एंगल है या फिर वो लड़के भटके हुए कुछ नौजवान हैं, जिन्हें पता नहीं कि वो क्या कर रहे हैं! और हाँ सर, वो ये भी कह रहे हैं कि वो तो बस चार-पाँच हैं, जो ये दुष्कृत्य करके उस नाबालिग दलित बच्ची को बचा रहे हैं वरना बीस दूसरे लड़के आ कर उसके साथ ऐसा करते! सर, मुझे पता है कि आपका ऑन-ऑफ स्विच ऐसे मौकों पर ऑफ हो कर रवीश वचनामृत बाँटते हुए ‘ऐसी खबरों पर चर्चा नहीं होनी चाहिए क्योंकि समाज में वैमनस्य बढ़ता है। जैसा कि आप लोग ममता शासित बंगाल वाले दंगों पर कहने लगते हैं कि दंगों की खबरों पर चर्चा नहीं करना चाहिए क्योंकि सामाजिक सद्भाव बिगड़ता है।

सर, पेश-ए-खिदमत हैं चंद उदाहरण:

सिर्फ अगस्त से नवम्बर की बात की जाए तो 15 से ज्यादा खबरें तो ऑपइंडिया ने कवर की हैं, जहाँ बलात्कारियों का मकसद धर्म के अलावा कुछ और दिखता ही नहीं। 1 अगस्त की एक खबर के अनुसार, पानीपत में सद्दाम एक नाबालिग को शादी के लिए फुसलाता है, और फिर उसका बलात्कार करता है। उसकी बहन उसे जबरन मांस खिलाती है। उत्तर प्रदेश के बरेली में अगस्त में ही 14 साल की दलित हिन्दू लड़की को खालिद नाम के आरोपित द्वारा प्रेमजाल में फँसाने, बलात्कार करने और उसका अश्लील वीडियो बनाकर नाबालिग को ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया।

मुंबई में अजमल अजय बन गया और कोर्ट में निकाह करने के बाद मुँह दिखाई के मौके पर अपने भाइयों और दोस्त के साथ पीड़िता का गैंगरेप किया। सऊदी जाने से पहले यूपी के बलरामपुर में पीड़िता का मतपरिवर्तन करा कर अब्दुल ने निकाह कराया, बाद में फोन पर तलाक दिया। देवर और पति के बहनोई ने उसका रेप करने की लगातार कोशिश की। अब्दुल ने वापस आ कर दूसरी शादी कर ली।

सितम्बर माह में पश्चिम बंगाल के गंगरारपुर में शादीशुदा रहमान ने पिंटू नाम कह कर पीड़िता से सम्पर्क बनाया, उसे गर्भवती बनाया, सच का पता चलने पर लड़की को शादी करने के बहाने नदी किनारे बुलाया, दो साथियों के साथ बलात्कार किया, गला रेता और नदी में फेंक दिया। मुरादाबाद में नौकरी दिलाने का झाँसा दे कर मजहब विशेष के युवक ने पहले पीड़िता का रेप किया, बंधक बना कर रखा और बाद में जबरन इस्लाम कबूल कराया। लड़की किसी तरह जान बचा कर भागने में सफल रही।

उत्तर प्रदेश के रामपुर में दलित पीड़िता के साथ अब्दुल ने प्रेम का छलावा किया, उसकी बातें रिकॉर्ड की और फिर एक दिन अपने दोस्त नावेद के साथ बंदूक की नोक पर उसका बलात्कार किया, विडियो बनाया और इंटरनेट पर डाल दिया। वहीं, उत्तर प्रदेश की कौशाम्बी में ही, इस घटना के कुछ ही दिन बाद नाजिम, आदिल, और आकिब ने एक नाबालिग दलित के साथ सामूहिक बलात्कार किया, विडियो बनाया, इंटरनेट पर डाला। पीड़िता ने जब ‘भगवान के नाम पर’ छोड़ देने की बात की तो आरोपित ने कहा कि वो ‘अल्लाह के नाम पर रहम’ करने की भीख माँगे।

नवम्बर माह में बरेली में वसीम, सावेज, अखलाक, आरिफ और आमिर ने अपने ही गाँव की दो बहनों को अपने पास आने की धमकी दी। वो जब नहीं आईं, तो पाँचों ने तमंचा दिखा कर जबरन गन्ने के खेत में खींच लिया, बारी-बारी से बलात्कार किया, और फिर विडियो बनाया और इंटरनेट पर डाल दिया। कुछ ही दिन पहले कैमूर के मोहनिया में नाबालिग को कार में खींच कर अरबाज, सिकंदर, सोनू और कलाम ने गैंगरेप भी किया और विडियो भी बनाया! शादी का झाँसा देकर पिछले 5 महीने से अरबाज लड़की का यौन शोषण कर रहा था।

घटनाएँ बस आठ ही नहीं हैं…

ये तो बस कुछ ही घटनाएँ हैं जो सामने आई हैं, या स्थानीय मीडिया में ये छपे। ऑपइंडिया जैसी छोटी संस्थाओं के पास संसाधनों की कमी है अतः ये संख्या भी कम है, वरना आप यह अंदाजा लगा सकते हैं कि इन घटनाओं की कमी तो नहीं ही होगी। ये तो बस चंद घटनाएँ हैं जहाँ पीड़िता का या तो विडियो वायरल कर दिया तो घरवालों ने रिपोर्ट लिखवाई, या फिर पीड़िता ने ही हिम्मत दिखा कर पुलिस का दरवाजा खटखटाया। लेकिन हर एक घटना पर कई ऐसी घटनाएँ भी होंगी, जहाँ पीड़िता को परिवारों ने भी चुप रहने बोला होगा, या वो स्वयं ही डर से छुपी होंगी क्योंकि हमारा समाज उन्हें ही अपराधी के तौर पर देखने की गलती करता रहता है।

इसी तरह ‘लव जिहाद‘ को भी नकारा गया था, और अभी भी वामपंथी और छद्म लिबरल इसे एक साजिश के तौर पर देखते हैं। उन्हें लगता है कि रहमान जब पिंटू बन कर किसी हिन्दू लड़की से प्रेम के नाम पर बलात्कार कर के धोखा करता है तो वो प्रेम है, या फिर बेचारा रहमान उदास है कि पीड़िता ने उसके दोस्तों को भी ऐसा कुत्सित प्रेम नहीं करने दिया तो ‘हेडमास्टर का बेटा’ नाराज हो गया और उसने सामूहिक बलात्कार करने के बाद लड़की का गला रेत कर, लाश नदी में फेंकने का रास्ता अपनाया!

आखिर ऐसे मामलों में हिन्दू लड़की को ही इस्लाम क्यों कबूल करना होता है? प्रेम है तो सज्जाद शेख हिन्दू सज्जन सिंह बन कर अग्नि के सात फेरे क्यों नहीं लेता? ये कौन सा प्रेम है जहाँ लड़की को अपना धर्म त्यागना ही पड़ता है? प्रेम की यह कौन सी व्याख्या है, जहाँ छः महीने से लगातार ब्लैकमेलिंग के दम पर रेप चल रहा होता है और जब लगे कि अब ज्यादा दिन तक धोखा नहीं दिया जा सकता तो दोस्तों को बुला कर, कार में, मुँह पर पट्टी बाँध कर रेप होता है, विडियो बनाया जाता है?

तो रवीश जी, मजहब देखना पड़ता है सर! आप अपने प्राइम टाइम में कठुआ वाले मामले में तो आठ साल की बच्ची का नाम लेते वक्त सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन याद नहीं कर रहे थे जबकि वो नाबालिग भी थी, लेकिन आपको तेलंगाना के डॉक्टर की मोहम्मद आरिफ पाशा द्वारा बलात्कार, हत्या और फिर लाश को जलाने के बाद इस खबर की कवरेज में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन याद आ गई कि ये ग़ैरज़िम्मेदाराना बात है कि लोग पीड़िता का नाम बाहर कर रहे हैं! वाह रवीश जी, आप तो दिनों दिन वैचारिक दोगलेपन का पर्याय नहीं, उसका वैयक्तिक रूप होते जा रहे हैं, सर! इतनी सहजता से कैसे कर लेते हैं सर?

सर बताइए न प्लीज! कैसे कर लेते हैं ये सब? कोई ऑन-ऑफ स्विच है जहाँ फ्लो चार्ट में बूलियन अलजेबरा वाला लॉजिक गेट काम करता है कि रेप होने पर देखो कि बलात्कारी हिन्दू है, सवर्ण है, और पीड़िता दलित या गैर-हिन्दू, तो आपके आउटरेज, यानी क्रोधित होने वाला स्विच ऑन हो जाता है। वहीं, पीड़िता दलित, आरोपित मजहबी, या पीड़िता कोई भी, आरोपित मजहबी तो वो स्विच ऑफ़ हो जाता है और आप प्रवचन करने लगते हैं कि एक समाज के तौर पर हमें मजहबों में नहीं उलझना चाहिए, रेप में मजहब नहीं ढूँढना चाहिए, बलात्कार तो बलात्कार है, सारे मर्द करते हैं…

आ हा हा… सर बैठे-बैठे अयोध्या घुमा दिया आपने! आपके चरण कहाँ हैं सर? उसकी धूलि अपने माथे पर लगानी है सर और उसी पैर छूने के समय आपके जेब से वो ऑन-ऑफ स्विच भी चुराना चाहता हूँ सर। फिर उसे ओपन सोर्स करके सर्वसाधारण के लिए उसका सर्किट उपलब्ध करा दूँगा ताकि हर कोई आपकी दोगली विचारधारा के हिसाब से चले और उसी अनुपात में क्रोधित हो जहाँ उसका मकसद पीड़िता के प्रति सहानुभूति न हो, उसे अपने राज्यसभा की सीट दिख रही हो, उसे अपने राजनैतिक मालिकों की रैलियों का स्टेज दिख रहा हो, उसे चार्टर्ड प्लेन दिख रहा हो… हें हें हें… आप तो समझते ही हैं ये सब सर!

अजमल को अजय बनने की क्या ज़रूरत है?

रवीश जी आप ही बता दीजिए न कि अब्दुल अपना नाम राहुल क्यों रखता है? अजमल आखिर अजय क्यों बनता है? साजिद को अपना नाम सज्जन क्यों बताना होता है? कोई मजिदुर रहमान पिंटू क्यों बनता है? आखिर इसके पीछे की वजह क्या होती है कि मजहबी नाम वाले अपने नाम के साथ किसी हिन्दू लड़की से प्रेम नहीं कर पाते? और प्रेम के नाम पर निकाह करने पर मतपरिवर्तन, फिर ससुर और देवर से रेप कराना, या कहीं मिलने के बहाने बुला कर अपने साथियों के हवाले कर देना प्रेम की कौन सी परिभाषा है जिसमें आप ‘न उम्र की सीमा और न जन्म का बंधन’ वाली बात कर रहे हैं?

यहाँ प्रेम अंधा है या प्रेम करने के पीछे की वजह बिलकुल साफ है कि हिन्दू लड़की को फँसाना है, और फिर बलात्कार कर के उसे इसी समाज में या तो आत्महत्या के लिए मजबूर करना है, या हर दिन घुटने के लिए जिंदा रहना है जहाँ उसका परिवार पूरे समाज की नजरों में गिर जाता है। यह दुर्भाग्य है कि पीड़िता को ही समाज अपनी नजरों में गिरा देता है, उसे ही अपराधी की तरह देखता है। यह बात इन बलात्कारी मजहबियों को मालूम है, इसलिए वो न सिर्फ बलात्कार करते हैं, बल्कि बेखौफ विडियो बनाते हैं, और उसे वायरल करते हैं।

क्या आपको कौशाम्बी का बलात्कार महज सामाजिक अपराध लगता है जहाँ लड़के एक नाबालिग दलित लड़की का बलात्कार करते हुए उसे भगवान की जगह अल्लाह का नाम लेने कह रहे हैं? आपको नहीं लगता कि मकसद बिल्कुल साफ है कि एक कट्टरपंथी एक हिन्दू का बलात्कार कर रहा है, और उसे महसूस करवा रहा है कि बलात्कारी और पीड़िता के मजहब और धर्म भिन्न हैं। विडियो बनाते हुए, और उसे इंटरनेट पर डालते वक्त क्या उसे अंदाजा नहीं कि वो पकड़ा जाएगा? लेकिन वो फिर भी ऐसा करता है, कई मामलों में करता पाया जाता है क्योंकि उसका मकसद सिर्फ बलात्कार नहीं, मु##मान द्वारा हिन्दू का बलात्कार है।

आपका तर्क होता है कि शांतिप्रिय मजहब वाला हिन्दू से प्रेम करता है और लोग उसे ‘लव जिहाद’ कह देते हैं। वो हिन्दू से प्रेम करे, निकाह कर ले, जबरन मतपरिवर्तन भी करा ले निकाह करने के लिए, वहाँ तक भी ठीक है क्योंकि संविधान उसकी आजादी देता है। लेकिन यह कैसा प्रेम है जहाँ नाम बदल कर प्रेम पनपता है, तुम्हें कलावा बाँधना पड़ता है, फिर शारीरिक संबंध बनते हैं, उसका विडियो बनाते हो, ब्लैकमेल करते हो, फिर शादी के बहाने नदी किनारे बुलाते हो, और दोस्तों के साथ रेप करने के बाद गला रेत कर मार देते हो? मैं यहाँ भी मजहब न देखूँ?

क्या इन घटनाओं पर आँख मूँद ली जाए कि ये ‘लव जिहाद’ से आगे ‘रेप जिहाद’ नहीं है? राह चलते, किसी लड़की को सुनसान जगह देख कर, विकृत मानसिकता वाले, मौके का फायदा उठा कर जब बलात्कार जैसे अपराध करते हैं तो वो सामाजिक अपराध है, क्योंकि पीड़िता परिचित नहीं होती। किसी अनजान लड़की को दस दिन आते-जाते देख, बिना उसका नाम-पता जाने, कोई अपराधी जब पीछा कर के ऐसे अपराध को अंजाम देता है तो वो सामाजिक अपराध है।

ये सब मजहबी मामले नहीं है तो क्या हैं?

लेकिन, जहाँ कोई अपराधी, पीड़िता को पूरी तरह से पहचानने के बाद, अपनी पहचान छिपा कर, या बाद में बता कर, प्रेम का चोला ओढ़ कर, उससे संबंध स्थापित करने के बाद, जब ब्लैकमेल करने लगता है, उसका अपने दोस्तों से रेप करवाता है, उसका विडियो बनाता है, इंटरनेट पर डालता है, तो मकसद महज बलात्कार नहीं रह जाता। यहाँ तो शुरू से ही मजहब का मामला चल रहा है।

पूरे अपराध की शुरुआत ही धर्म और मजहब की नींव पर हुई है, वही लक्ष्य ही है क्योंकि किसी से आप प्रेम करते हैं तो आप या तो शादी करेंगे, या संबंध विच्छेद हो जाएगा ब्रेक अप के बाद। यहाँ दोस्तों के साथ बलात्कार कैसे हो जाता है? मुँहदिखाई के दिन अपने भाइयों और दोस्त के साथ गैंगरेप कैसे करते हैं? क्या ऐसा काम आम बात है ऐसे घरों में? या फिर, आपको बखूबी पता है कि आपने उससे अजमल से अजय बन कर इसी मकसद से प्रेम किया था कि आप उसका फायदा उठाएँगे, और लड़की अगर पुलिस के भी पास गई तो अपने मजहब की तो नहीं थी!

इसलिए, बीमारी को चिह्नित करना ज़रूरी है, उसके लक्षण पहचानना आवश्यक है तभी उसका समुचित इलाज संभव है। वरना हम तो पोलिटकली करेक्ट होने के चक्कर में घूमते रहेंगे और एक खास तरह के नाम वाले, जिहाद के विकृत रूप का हर पहलू सामने लाते रहेंगे। वक्त शब्दों को चाशनी में लपेट कर स्कोडा-लहसुन तहजीब के नाम पर कव्वाली सुनने का नहीं है, वक्त है अपने घरों की बच्चियों को ऐसे दरिंदों से बचने की सलाह देने का। उन्हें ये खबरें दिखाने की कि तुम किससे बात करती हो, किससे चैट करती हो, किसे कौन सी तस्वीर भेजती हो, वो कैसा निकल सकता है। जब वो तुम्हें अकेले में बुलाए तो वो क्या कर सकता है, उसे वैसी खबरें भी पढ़ाने की ज़रूरत है।

ये किसी रेडियो प्रोग्राम के ज़रिए ‘जनहित में जारी’ बन कर नहीं आएगा क्योंकि ये काम आपको अपने घर से स्वयं ही शुरू करना होगा। ये बच्चियाँ आपकी हैं, कल को आपके पास अगर उसका कोई विडियो आएगा तब तक बहुत देर हो चुकी होगी। पुलिस और कोर्ट तो कुछ होने के बाद, कुछ करती है, वो भी सबूत मिलने पर, लेकिन पहले से तैयार रहना, आपके घरों की बच्चियों को इस ‘रेप जिहाद’ के दायरे से बाहर रख सकता है।

ये आपको करना है, क्योंकि दूसरा उपाय कुछ और नहीं है। कानूनन बालिग लड़की किसी से भी प्रेम और शादी करने को स्वतंत्र है, लेकिन उसे अपने देवर और ससुर के साथ किसी बुरे दौर से गुजरना पड़े, तो वो पाप आपके माथे भी जाएगा। हर परिवार को यही लगता है कि उसके घर की बच्ची के साथ ऐसा नहीं होगा, लेकिन जब दुर्घटना हो जाती है, तो हाथ मलने के अलावा कोई चारा नहीं। सतर्क रहिए क्योंकि सावधानी ही बचाव है इस लगातार फैलते कैंसर का।

नरेंद्र मोदी-अमित शाह खुद घुसपैठिए हैं, घर गुजरात है और आ गए दिल्ली: कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी

अधीर रंजन चौधरी जब से लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता बने हैं अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। अक्सर अपने बयानों से पार्टी की भद भी पिटवाते रहते हैं। अब एक बार फिर उन्होंने विवादित टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री तथा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को घुसपैठिया करार दिया है।

उन्होंने कहा, “हिंदुस्तान सबके लिए है। ये हिंदुस्तान किसी की जागीर है क्या? सबका समान अधिकार है। अमित शाह, नरेंद्र मोदी खुद घुसपैठिए हैं। घर गुजरात है और दिल्ली आ गए। वे खुद माइग्रेंट हैं।”

एनआरसी को लेकर उन्होंने यह बात कही। चौधरी ने कहा कि एनआरसी के कारण देश के असल नागरिक डरे हुए हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उनका क्या होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार दिखाना चाहती है कि वह दूसरे मजहब वालों को भगाएगी। मु###नों को भगाने की हिम्मत उनमें नहीं है। चौधरी ने कहा कि हिंदुस्तान किसी की जागीर नहीं है। गंगा-जमुनी तहज़ीब वाला देश है। मु###न क्यों इस देश को छोड़कर जाएँगे।

अधीर रंजन चौधरी इससे पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं। हाल ही में जम्मू-कश्मीर का दौरा करने वाले यूरोपीय यूनियन के सदस्यों को उन्होंने “किराए का टट्टू” कहा था। कई सांसदों ने अधीर रंजन के इस बयान का विरोध किया था। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी अधीर रंजन के इस बयान को जाँचने की बात कहते हुए कहा था कि ज़रूरत पड़ी तो इसे लोकसभा कार्रवाई के रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को लेकर लोकसभा में बहस के दौरान उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय मसला तक बता दिया था।

अधीर रंजन ने संसद सत्र के पहले ही दिन दिया विवादित: कॉन्ग्रेस की हुई फजीहत

चिदंबरम का क्या बड़ा हो गया है? अधीर रंजन ने प्रयोग किया ‘लीगल शब्द’ तो सोशल मीडिया ने पूछे सवाल

गाँधी-नेहरू नाम काफी नहीं, क्षेत्रीय दलों के मरने पर ही जिंदा होगी कॉन्ग्रेस: अधीर रंजन चौधरी

‘जैसे ‘डॉ प्रीति’ को मारा, मेरे हैवान बेटे को भी जिंदा जला कर मार दो… लोग मुझसे नफरत करेंगे’

देश को झकझोर देने वाली हैदराबाद की घटना में एक बड़ा मामला सामने आया है। हैदराबाद में वेटनरी डॉक्टर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के गैंगरेप और उन्हें जला देने वाले आरोपितों के परिवार वाले भी अब उन्हें जल्द सज़ा देने की माँग करने लगे हैं। एक आरोपित के परिवार की ओर से कहा गया कि जो अपराध उन्होंने किया उसके लिए उन्हें या तो फाँसी दी जानी चाहिए या फिर जिंदा ही जला देना चाहिए।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हैदराबाद में बलात्कार के बाद डॉ प्रीति को जला देने वाले आरोपित सी चेन्ना केशवुलु की माँ ने स्थानीय मीडिया से कहा “मेरी खुद की भी एक बेटी है, मैं मृतक लड़की के परिवार का दर्द समझ सकती हूँ”। उन्होंने कहा कि इस हैवानियत भरे कृत्य के लिए उनके बेटे को फाँसी दे दी जानी चाहिए या फिर जिंदा जला दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी घटना पर भी अपने बेटे का बचाव करती हूँ तो लोग पूरी जिंदगी मुझसे नफरत करेंगे।

बता दें कि हैदराबाद में एक वेटेनरी डॉक्टर के तौर पर काम करने वाली डॉ प्रीति के साथ गैंगरेप करने के बाद आरोपितों ने उन्हें जला दिया था। इस मामले में पुलिस ने सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। गैंगरेप के दौरान ही दुष्कर्म पीड़िता की मौत हो गई थी। इसके बाद सभी आरोपित डॉ प्रीति के शव को गाड़ी में रखकर रिंग रोड के करीब ले गए, जहाँ कम्बल में लिपटे उनकी लाश को उन सबने पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। गिरफ़्तारी के बाद शनिवार को मजिस्ट्रेट ने सभी आरोपितों [मोहम्मद आरिफ (26 साल), जोल्लू शिवा (20 साल), जोल्लू नवीन कुमार (20 साल), चिन्ताकुट्टा चेन्ना केशवुलु (21 साल)] को 14 दिनों की हिरासत में भेज दिया।

मामले की जाँच में यह भी पता चला है कि रेप और मर्डर की इस साझा वारदात में कई परतें खुली हैं। इसके लिए पुलिस ने उस चश्मदीद गवाह का भी सहारा लिया, जिससे आरोपित पेट्रोल खरीदने गए थे। एक रिपोर्ट के अनुसार जब इस घटना को लेकर मीडिया में खबरें आने लगीं तो एक स्थानीय लिंगराम प्रवीण ने 100 नंबर पर फोन कर पुलिस को इस घटना के सम्बन्ध में जानकारी होने की बात बताई। उन्होंने ही पुलिस को बताया कि एक लाल स्कूटर पर सवार दो लोग उनसे पेट्रोल लेने आए थे। इन दोनों आरोपितों को पहचानने में प्रवीण ने ही पुलिस की मदद भी की थी।

प्रियंका गाँधी को भूले दिल्ली के कॉन्ग्रेसी, ‘प्रियंका चोपड़ा ज़िंदाबाद’ के लगे नारे: देखें वीडियो

दिल्ली में कॉन्ग्रेस पार्टी की एक कार्यक्रम के दौरान माहौल तब बड़ा ही मज़ाकिया हो गया, जब नेताओं ने पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी की जगह बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा के ज़िंदाबाद के नारे लगा दिया। कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक सुरेंद्र कुमार मंच से नारे लगवा रहे थे। कॉन्ग्रेस नेता आगामी 14 दिसम्बर को होने वाली महारैली के लिए कमर कस रहे हैं और इसी सिलसिले में ये रैली भी आयोजित की गई थी। नेताओं ने सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के नारे तो सही लगाए लेकिन प्रियंका गाँधी की जगह प्रियंका चोपड़ा के नारे लगा दिए।

मंच पर उपस्थित नेताओं को जैसे ही ग़लती का एहसास हुआ, उन्होंने नारे को ठीक करवाया और फिर से ‘प्रियंका गाँधी ज़िंदाबाद’ के नारे लगवाए गए। हालाँकि, इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों के मज़ाक का विषय-वस्तु बन गया। वीडियो आप यहाँ देख सकते हैं:

14 दिसंबर को कॉन्ग्रेस ने ‘देश बचाओ महारैली’ आयोजित की है, जिसमें पार्टी के सभी बड़े नेता शामिल होने वाले हैं। इस रैली में केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने के साथ-साथ आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए भी बिगुल फूँका जाएगा। इसी रैली के सिलसिले में यह आयोजन किया गया था।

कार्यक्रम के दौरान कॉन्ग्रेस नेताओं ने भाजपा और संघ पर हमला बोला। सभी जिलाध्यक्षों को अधिक से अधिक संख्या में कार्यकर्ताओं को लेकर रैली में पहुँचने को कहा गया है। 14 दिसंबर की रैली में सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी भी हिस्सा लेंगे।

स्कूल छोड़ते ही आतंकी बन गया था उस्मान खान, ‘ब्रिटेन के बगदादी’ से था प्रभावित

ब्रिटेन के मशहूर लंदन ब्रिज के पास आतंकी हमले को अंजाम देने वाले उस्मान खान के बारे में कई जानकारियॉं सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक स्कूल छोड़ते ही वह आतंकी बन गया था। वह पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश इस्लामी प्रचारक अंजम चौधरी से बेहद प्रभावित था। ब्रिटेन का बगदादी कहा जाने वाला चौधरी इस्लामिक स्टेट के लिए समर्थन जुटाने के मामले में सजा पा चुका है।

उस्मान ने शुक्रवार को हमला कर दो लोगों की हत्या कर दी थी और कई अन्य जख्मी हो गए थे। बाद में स्कॉटलैंड यार्ड ने उसे मौके पर ही मार गिराया था। उसने नकली विस्फोटक जैकेट भी पहन रखा था। स्कूल की पढ़ाई अधूरी छोड़ने वाले उस्मान ने कुछ समय पाकिस्तान में भी बिताया था।

28 वर्षीय उस्मान अपने स्कूल के दिनों से ही आतंकवाद की राह पर निकल पड़ा था। एक मीडिया रिपोर्ट में उसके सहपाठी के हवाले से बताया गया है कि स्कूल में परेशान किए जाने पर उसने यह रास्ता अख्तियार किया।

नाम सार्वजानिक न करने की शर्त पर उसके सहपाठी ने बताया उस्मान स्कूली दिनों में बेहद शांत था। पूरी क्लास में उसका एक ही दोस्त था। वह चाहता था कि उसे सब पसंद करें लेकिन उसमे आत्मविश्वास की बहुत कमी थी। उन्होंने बताया कि उसे अपने उम्र के लड़कों से पहले दाढ़ी आने पर सहपाठियों ने उसे परेशान करने लगे थे। बाद में स्कूल छोड़कर वह इस्लामिक स्टेट का आतंकी बन गया।

आम नागरिकों को मारने वाले इस आतंकी के लन्दन घुसने पर प्रतिबन्ध लगा हुआ था। उसे 20 कड़ी शर्तों पर जेल से रिहा किया गया था। इसमें राजधानी लन्दन में न घुसने की भी शर्त शामिल थी। हालाँकि अधिकारियों ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के कैदियों की एक कांफ्रेंस में शामिल होने की अनुमति दे दी थी। जब उसने इस कार्यक्रम में जाने की इच्छा जताई थी उस वक़्त उसका दावा था कि वह सुधर चुका है।

उस्मान और उसके साथियों की यह योजना थी कि पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी कैम्पों के लिए पैसा जुटाया जाए। इसके ज़रिए वह लोग मुंबई हमले जैसी ही एक घटना को अंजाम देने की फ़िराक में था। पुलिस द्वारा दर्ज किए उसके बयान के मुताबिक खान ने यूके के फायदों का भी ज़िक्र किया था। उसने कहा था कि जितना पैसा कश्मीर में एक महीने में मिलता था, उतना यहाँ (यूके) में एक दिन में मिल जाता है।

बता दें कि यह लोग इसलिए गिरफ्त में आए क्योंकि लन्दन में चल रहे एक आतंकवाद-रोधी अभियान में इनपर पूरी नज़र रखी जा रही थी। उस्मान समेत उसके नौ साथियों को 2012 में गिरफ्तार कर लिया गया था। उस वक़्त वह तत्कालीन मेयर बोरिस जॉनसन की हत्या की साज़िश रच रहे थे। साथ ही स्टॉक एक्सचेंज समेत कई जगहों पर धमाका कर पूरे लन्दन को दहला देने की योजना भी इनकी इसी साजिश का हिस्सा थी।

पिछले साल दिसंबर में उस्मान को कड़ी शर्तों के साथ बेल दी गई थी। उसे एक टैग पहनने के सख्त निर्देश थे, कट्टरता का ब्रेनवाश करने वाले कार्यक्रमों में भेजा जाता, और इस सब के बीच एमआई-5 उसकी निगरानी करता था।

…वो पेट्रोल पम्प वर्कर, जिसकी मदद से ‘प्रीति रेड्डी’ के बलात्कारी-हत्यारे तक पहुँच पाई पुलिस

हैदराबाद में डॉक्टर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के साथ गैंगरेप करने के बाद उन्हें जला दिया गया। पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद आरिफ के अलावा मरवीन, केशवा और रिवा (सभी नाम बदले हुए, क्योंकि इनमें से कोई एक नाबालिग होने की संभावना है) – मतलब कुल 4 आरोपितों को गिरफ़्तार किया है। पुलिस ने डॉक्टर रेड्डी की जली हुई लाश मिलने के कुछ देर बाद ही आरोपितों को धर दबोचा। अब पता चला है कि एक पेट्रोल पम्प वर्कर ने इस मामले में पुलिस की मदद की। आरोपितों ने उसी पेट्रोल पम्प से पेट्रोल ख़रीदा था। वह पेट्रोल पम्प वर्कर इस मामले में एक अहम गवाह है।

जैसे ही डॉक्टर रेड्डी के साथ हुई दरिंदगी की ख़बर सार्वजनिक हुई और मीडिया में इसे दिखाया गया, पुलिस के 100 नंबर पर किसी ने एक कॉल किया। वो फोन कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम लिंगाराम प्रवीण गौड़ था। लिंगाराम ने पुलिस को महत्वपूर्ण सूचना दी। उन्होंने पुलिस को बताया कि लाल रंग की स्कूटर पर आए दो लोगों ने पेट्रोल ख़रीदने की कोशिश की थी और प्लास्टिक की बोतल में डाल कर के जाना चाह रहे थे। लिंगाराम उसी पेट्रोल पम्प पर कार्यरत हैं।

लिंगाराम ने बताया कि दोनों पहली नज़र में ही संदिग्ध प्रतीत हो रहे थे। उनकी गतिविधियाँ संदेहास्पद होने के कारण लिंगाराम ने उन्हें पेट्रोल बेचने से इनकार कर दिया। गवाह लिंगाराम ने पुलिस को यह भी बताया कि वो आरोपितों को सामने देखते ही पहचान सकते हैं। इसके बाद पुलिस ने पूरे घटनाक्रम का खाका खींचा और आरोपितों को पकड़ने में कामयाब हुई। पुलिस की रिमांड रिपोर्ट में पता चला है कि केशवा (बदला हुआ नाम) ही वो व्यक्ति था, जो पीड़िता की स्कूटी को रिपेयर कराने के बहाने लेकर गया था।

इसके बाद अन्य आरोपितों ने झाड़ियों में ले जाकर पीड़िता के साथ बलात्कार किया। जब केशवा वापस आया, तो उसने भी पीड़िता के साथ बलात्कार किया। चूँकि पीड़िता बार-बार चीख रही थी, आरोपितों ने उसे जबरन शराब पिला दिया। दरिंदगी का आलम ये था कि डॉक्टर रेड्डी की मृत्यु के साथ भी उनके साथ बलात्कार किया गया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपितों ने लाश को एक चादर में लपेट कर पेट्रोल डाला और आग लगा दी। पुरी तरह झुलस चुकी लाश को शादनगर आउटर रिंग रोड पर फेंक दिया गया।

शादनगर पुलिस थाना में आरोपितों को रखे जाने की सूचना मिलते ही भारी संख्या में लोग जमा हो गए। ‘न्याय’ का नारा लगा रहे लोगों ने थाने में घुस कर आरोपितों को अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया। पुलिस ने लोगों पर लाठीचार्ज भी किया। फ़िलहाल मंडल मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद चरों आरोपितों को 14 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है।

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‘मैं अभी भी हिन्दुत्व की विचारधारा के साथ हूँ, इसे कभी नहीं छोड़ूँगा’ – ‘सेकुलर’ सरकार के CM उद्धव ठाकरे

महाराष्ट्र में गुरुवार (28 नवंबर) को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्होंने अपने पूर्ववर्ती देवेंद्र फडनवीस से बहुत कुछ सीखा है और वे हमेशा उनके दोस्त रहेंगे। साथ ही उन्होंने कहा “मैं आपको विपक्ष को नेता नहीं कहूँगा, बल्कि एक पार्टी का बड़ा ज़िम्मेदार नेता कहूँगा।”

रविवार (1 दिसंबर) को राज्य विधानसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “मैं अभी भी ‘हिन्दुत्व’ की विचारधारा के साथ हूँ और इसे कभी नहीं छोड़ूँगा। पिछले पाँच वर्षों में, मैंने कभी सरकार के साथ विश्वासघात नहीं किया है।”

इसके आगे उन्होंने कहा, “मैं एक भाग्यशाली मुख्यमंत्री हूँ क्योंकि जिन्होंने मेरा विरोध किया वे अब मेरे साथ हैं। और जो मेरे साथ थे, वे अब विपरीत दिशा में बैठे हैं। मैं यहाँ अपनी क़िस्मत और लोगों के आशीर्वाद के साथ आया हूँ। मैंने कभी किसी को नहीं बताया कि मैं यहाँ आऊँगा, लेकिन मैं आ गया।”

इसके अलावा, उद्धव ठाकरे ने अपने उन विरोधियों की आलोचना की जिन्होंने एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ हाथ मिलाकर अपनी पार्टी की हिन्दुत्व विचारधारा को कमज़ोर करने का आरोप लगाया था।

ग़ौरतलब है कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री की सीट को लेकर काफ़ी लंबा विवाद चला। 23 नवंबर को देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और एनसीपी के अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सभी को चौंका दिया था। लेकिन, बिगड़ते राजनीतिक समीकरणों के चलते राज्य में बीजेपी की सरकार नहीं बन पाई और 28 नवंबर को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

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‘घंटों नंगी खड़ी रखी जाती हैं ननें, पादरी बनाते हैं यौन सम्बन्ध’ – ‘प्रैक्टिकल क्लास’ का एक नन द्वारा खुलासा

केरल की नन सिस्टर लूसी कलाप्पुरा ने अपनी आत्मकथा लिखी है। उनकी पुस्तक लॉन्च होने के बाद केरल के चर्चों में हड़कंप मचनी तय है क्योंकि इसमें पादरियों के कुकर्मों को लेकर कई खुलासे होंगे। सिस्टर लूसी के बारे में बता दें कि इन्होंने ही बलात्कार आरोपित पादरी फ्रैंको मुलक्कल के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी। मुलक्कल की पैठ न सिर्फ़ चर्चों में है बल्कि कई राजनेताओं से भी उसके ख़ासे अच्छे सम्बन्ध हैं। अपने इन्हीं सबंधों का फ़ायदा उठा कर उसने पीड़ित ननों की आवाज़ दबाने के लिए कई प्रयास किए। उन ननों को वेटिकन तक से भी राहत नहीं मिली।

सिस्टर लूसी की पुस्तक के कुछ अंश एक मलयालम पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि साइरो-मालाबार चर्च में उनका कैसा अनुभव रहा? ईसाई संस्थाओं द्वारा संचालित प्राइवेट स्कूलों में पादरियों द्वारा क्या गुल खिलाए जाते हैं, सिस्टर लूसी की पुस्तक में इसके कई उदाहरण मिलेंगे। पादरी और बिशप अपने पदों का दुरूपयोग करते हुए ननों के साथ जबरदस्ती कर यौन सम्बन्ध बनाते हैं। वो इसके लिए कई ननों की जबरन सहमति भी लेते हैं।

सिस्टर लूसी ने एक घटना का जिक्र किया है, जिसे जानना ज़रूरी है। जब वो मालाबार चर्च में थीं, तब वहाँ एक पादरी हुआ करता था। वो कॉलेज में पढ़ाता था और पास ही कॉन्वेंट में रहता था। कॉन्वेंट में उसने अपने लिए एक प्राइवेट कक्ष रखा था। उस पादरी को सुरक्षित सेक्स के लिए काउंसलिंग देने का कार्य सौंपा गया था। वह छात्रों को सेफ सेक्स के बारे में बताता था और सलाह देता था। लेकिन दिक्कत इससे नहीं थी। समस्या तब शुरू हुई, तब उक्त पादरी ने सेफ सेक्स के लिए ‘प्रैक्टिकल क्लास’ आयोजित करना शुरू किया।

उसने अपने कक्ष में ननों को बुला कर ‘सुरक्षित सेक्स’ का प्रैक्टिकल क्लास लगाना शुरू कर दिया। इस दौरान वह ननों के साथ यौन सम्बन्ध बनाता था। ऐसा नहीं था कि उसके ख़िलाफ़ शिकायत नहीं की गई। उसके ख़िलाफ़ लाख शिकायतें करने के बावजूद उसका कुछ नहीं बिगड़ा। उसके हाथों ननों पर अत्याचार का सिलसिला तभी थमा, जब वह रिटायर हुआ। सिस्टर लूसी लिखती हैं कि उनके कई साथी ननों ने अपने साथ हुई अलग-अलग घटनाओं का जिक्र किया और वो सभी भयावह हैं।

सिस्टर लूसी ने लिखा कि कॉन्वेंट्स में जवान ननों को पादरियों के पास उनके ‘यौन सुख’ के लिए भेजा जाता था। वहाँ वो सभी ननें घंटों नंगी खड़ी रखी जाती थीं। वो लगातार गिड़गिड़ाती रहती थीं लेकिन उन्हें जाने नहीं दिया जाता था। कई ऐसे भी मामले हैं, जहाँ सीनियर ननों ने जूनियर ननों के साथ समलैंगिक सम्बन्ध बनाए। कई ऐसे मामले हैं, जहाँ नए पादरियों ने काम छोड़ देना ही उचित समझा क्योंकि पुराने पादरी उन्हें समलैंगिक सम्बन्ध बनाने को मज़बूर करते हैं। सिस्टर लूसी की आत्मकथा जल्द ही प्रकाशित होगी।

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