शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत समेत 5 अन्य संघ पदाधिकारियों के ट्विटर एकाउंट का ब्लू टिक हटा दिया था और इन सभी को ‘Unverified’ की श्रेणी में डाल दिया था।
कपूर ने अपने प्रोपेगेंडा लेख में लिखा कि मोदी का हिन्दू तालिबान देश में सांस्कृतिक प्रभुसत्ता स्थापित करने के लिए स्मारक बनाना चाहता है जैसा कि लगभग सभी फासीवादी नेता करते हैं।
केया घोष ने ट्वीट करके यह जानकारी दी कि स्थानीय टीएमसी ने कुछ लोगों की लिस्ट जारी की है और दुकानदारों से कहा है कि इन 18 सूचीबद्ध लोगों को कोई भी सामान न बेचा जाए, यहाँ तक कि चाय भी नहीं।
भारत सरकार पर तंज कसते हुए मंजुल ने लिखा, “शुक्र है मोदी सरकार ने ट्विटर को यह नहीं लिखा कि ये ट्विटर हैन्डल बंद करो। ये कार्टूनिस्ट अधर्मी है, नास्तिक है, मोदी जी को भगवान नहीं मानता।“
राज्य सरकार ने SC में पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें हाईकोर्ट ने सरकार को मृतक के परिवार को मुआवजे के तौर पर 10 लाख रुपए देने के निर्देश दिए थे।
रवीश कुमार ने अगस्त 22, 2015 में एक ट्वीट के बाद सीधा जनवरी 2020 में एक ट्वीट को एक रीट्वीट किया था, अर्थात साढ़े 4 साल का गैप। इसके बाद फिर 1 साल का गैप।
फ़्रांसिसी नोबेल पुरस्कार के विजेता लुक मोन्टैग्नीर के हवाले से बयान चलाया जा रहा था कि किसी ने कोरोना की कोई भी वैक्सीन ली हो, उसके बचने की कोई संभावना नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि सेक्युलरिज्म भारतीय संविधान के मूलभूत पहलुओं में से एक है और और इसे ज़िंदा रखने की जिम्मेदारी किसी एक संप्रदाय की नहीं है, बल्कि सभी भारतीयों को इसके लिए संचित प्रयास करने होंगे।
हिंदुत्व को गाली, भगवा ध्वज व स्वस्तिक का अपमान और 'फासिस्ट' शब्द का प्रयोग - आतंकियों की भाषा वही है, जिसका इस्तेमाल भारत का लेफ्ट और कुछ विपक्षी नेता पीएम मोदी को निशाना बनाने के लिए करते हैं।
इंस्टाग्राम पर शेयर की गई स्टोरी में उन्होंने लिखा, "ना तो ये समय स्ट्रेट है और न ही मैं।" साथ ही उन्होंने 'गे प्राइड' और 'Bi प्राइड' का स्टिकर भी लगाया।
"आज एग्रिकल्चर से एस्ट्रॉनॉमी तक, आपदा प्रबंधन से रक्षा तकनीक तक, वैक्सीन से वर्चुअल रियलिटी तक, बायोटेक्नोलॉजी से लेकर बैटरी टेक्नोलॉजीज तक, देश हर दिशा में आत्मनिर्भर और सशक्त बनना चाहता है।"