Home Blog Page 3894

कोरोना महामारी के बीच ऐसे फैलाया गया 40 झूठ: विपक्ष, वामपंथी, मीडिया गिरोह, इस्लामी कट्टरपंथी… सबने दिया योगदान

कोरोना महामारी की शुरुआत से ही फर्जी खबरों को फैलाने का कारोबार तेजी से चल रहा है। विपक्षी पार्टियाँ और वामपंथी पत्रकार इस काम में लगातार अपना योगदान दे रहे हैं। तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर ये बताया जा रहा है कि कैसे मोदी सरकार ने भारत की जनता को ठगा। 

बात चाहे आम ट्रोलर्स की हो, बड़े-बड़े बुद्धिजीवियों की हो, विपक्ष के दिग्गज नेताओं की हो या फिर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की, कोई इस दाग से अछूता नहीं है। सबने 2020 से लेकर अब तक न जाने कितनी तरह फेक न्यूज फैलाकर अपना एजेंडा चलाया।

आज हम उन्हीं टॉप फेक न्यूज के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जिन्हें महामारी की शुरुआत से अब तक फैलाया गया:

  1. हाल में दावा हुआ कि दुनिया भर के कई देशों में फैलने वाले कोरोना का डबल म्यूटेंट भारतीय है। जबकि सच्चाई ये है कि ये डबल म्यूटेंट कई अन्य देशों में पाया गया है।
  2. ‘सीएम योगी कुम्भ जाकर हुए कोरोना पॉजिटिव’, यह खबर भी फैलाई गई। कॉन्ग्रेस नेत्री अलका लांबा ने अपने झूठ को सही साबित करने के लिए 2019 की तस्वीर शेयर की।
  3. प्रशांत भूषण ने हिपोथीसिस शेयर करके बताया कि कोविड-19 को रोकने में मास्क अप्रभावी है।
  4. अस्पतालों के बाहर बेड न मिलने वाले मरीजों की तमाम शिकायतों के बीच दिल्ली सीएम ने कहा था कि दिल्ली में बेड्स की कमी नहीं है। 
  5. हर राज्य को अपने हिसाब से काम करने की आजादी देने वाली केंद्र सरकार के लिए दि प्रिंट के शेखर गुप्ता ने आरोप लगाया कि देश में बढ़ रहे कोरोना के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है क्योंकि उन्होंने महामारी के समय में राज्यों पर अपना फैसला थोपा।
  6. केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली में फैलते संक्रमण पर रिपोर्ट जारी करने के बाद भी AAP स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि महामारी खत्म होने की कगार पर है।
  7. वैक्सीन के नाम पर कई जगह वरिष्ठ नागरिकों से उनके फोन पर आने वाले ओटीपी माँगे गए। बाद में पता चला कि ये हरकत जालसाजों की थी।
  8. वैक्सीन के बारे में भ्रम फैलाते हुए दावा किया गया कि मुरादाबाद जिले के वार्ड ब्वॉय को वैक्सीन लेने के बाद अपनी जान गँवानी पड़ी। हालाँकि रिपोर्ट में सामने आया कि मौत का वैक्सीन से कोई संबंध नहीं है।
  9. कोरोना वायरस आने के बाद बाबा रामदेव इम्युनिटी बढ़ाने के लिए लगातार अपील कर रहे थे। ऐसे में ट्रोलर्स ने उनकी पुरानी तस्वीर के साथ ये फैलाया कि वह अत्यधिक गोमूत्र पीने से बीमार हुए।
  10. कारवाँ पत्रिका ने फैलाया कि ICMR के टास्क फोर्स में 21 वैज्ञानिक मोदी सरकार को कोरोना से निपटने की सलाह देने वाले थे, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया। वहीं ICMR ने अपने बयान में कहा कि खबर पूरी तरह झूठी है।
  11. द वायर ने दावा किया कि मजहब को देखकर अहमदाबाद सिविल अस्पताल में मरीजों को अलग अलग वार्ड में रखा जा रहा है। जबकि राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि किसी भी मरीज के लिए धार्मिक आधार पर विभाजन नहीं किया गया है। कोरोना मरीजों को उनके लक्षण, उनकी गंभीरता के आधार पर और डॉक्टरों की सिफारिशों आदि पर इलाज किया जा रहा है।
  12. द टेलीग्राफ ने अपनी एक रिपोर्ट में क्वारंटाइन में भी अस्पृश्यता नाम से रिपोर्ट प्रकाशित की। असली खबर में दोषी कोई सिराज अहमद था, लेकिन द टेलीग्राफ ने प्रोपगेंडा चलाने के लिए तस्वीर में आरएसएस की फोटो लगाई, जिसके कारण वामपंथी धड़ा बिना सच्चाई जाने आरएएस को भरा बुरा कहने लगा।
  13. वामपंथन अरुंधति रॉय ने भारत में कोरोना प्रसार पर अफवाह फैलाई। रॉय ने कहा कि मोदी सरकार समुदाय विशेष के लिए डिटेंशन सेंटर बनवा रही है और कोरोना की आड़ में मीडिया को दबा रही है।
  14. वामपंथी मीडिया गिरोह के दिग्गज पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने केंद्र सरकार पर पंजाब के साथ भेदभाव करने का आरोप  लगाया। सरदेसाई ने कहा कि महामारी से लड़ने के लिए पंजाब को सिर्फ 71 करोड़ रुपए मिले हैं जबकि हकीकत में ये आँकड़ा 247 करोड़ का था।
  15. कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने झूठ फैलाने की कोशिश की कि 500 रुपए की कोरोना टेस्ट किट को ठुकरा कर पीएम मोदी ने गुजरात कंपनी को फायदा दिलवा दिया, जो कोरोना किट 4500 रुपए में बेच रही है।
  16. कोरोना संकट में जब मजदूर अपने घर जाना चाहते थे तब मोदी सरकार को घेरने के लिए रवीश कुमार ने लालू यादव का गुणगान किया और ये कह दिया कि श्रमिक ट्रेन में मजदूरों से किराया लिया जाएगा।
  17. कोरोना से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने आरोग्य सेतु ऐप को लॉन्च किया था। उस समय राहुल गाँधी ने झूठ फैलाया था कि ये ऐप लोगों के डेटा और प्राइवेसी लेता है।
  18. भारतीय वायुसेना ने पिछले साल कोरोना वॉरियर्स के स्वागत में हेलीकॉप्टर से फूल बरसाए थे। हालाँकि, विपक्षी नेताओं और पत्रकारों ने इस फोटो के एडिटिड वर्जन पेश किए और आरोप लगाया कि वायुसेना ने लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों पर फूल बरसाए।
  19. कोरोना संक्रमण के समय जब हर किसी को वैक्सीन का इंतजार था, तब AIMIM नेता अबु फाजल ने वैक्सीन पर झूठी जानकारी देते हुए कहा था कि उनके पास पर्याप्त सबूत है कि सरकार वैक्सीन के बहाने नपुंसक बनाने की तैयारी कर रही है।
  20. महाराष्ट्र में बढ़ते कोरोना की बाबत यह भी फैलाया गया था कि मुंबई में 10 दिन का मिलिट्री लॉकडाउन लगने वाला है। हालाँकि पीआईबी ने दावों का भंडाफोड़ कर दिया। 
  21. चीन के माल पर रोक लगने के बाद मीडिया गिरोह ने ये फैलाया कि 25 करोड़ लोग बीमार होने वाले हैं इसलिए सरकार विदेश से टेस्टिंग किट खरीदे। ये उस समय की बात है, जब देश में तेजी से स्वास्थ्य उपकरण का इंतजाम होना शुरू हो गया था।
  22. इस्लामी पत्रकारिता की पैरोकार राणा अयूब ने झूठी खबर शेयर करके फैलाया कि प्रवासी मजदूर का बच्चा भूख से मर गया। जबकि रेलवे ने कहा कि बच्चे की मौत ट्रेन से उतरने के 5 घंटे पहले हो गई थी।
  23. केरल मॉडल पर कोरोना के शुरुआती दिनों पर कई मीडिया गिरोह ने रिपोर्ट छापी कि वहाँ से अन्य राज्यों को सीखना चाहिए। हालाँकि सच्चाई यह निकली कि दिसंबर तक केरल अकेला राज्य था, जहाँ कोरोना केस लगातार बढ़ रहे थे।
  24. राहुल गाँधी ने बिहार चुनाव के मद्देनजर वैक्सीन मामले में जनता को बरगलाया जबकि पीएम मोदी पहले बता चुके थे कि वैक्सीन की सुविधा पहले किस-किस को मिलेगी।
  25. एनडीटीवी ने स्वदेशी वैक्सीन को लेकर झूठ फैलाया, जिस पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने संज्ञान लेकर कहा कि एनडीटीवी पर चल रही खबर फर्जी है।
  26. न्यूयॉर्क टाइम्स में मोदी सरकार के विरोध में एक खबर छपी, जिसमें बताया गया कि कैसे लॉकडाउन की अव्यवस्था ने कोविड 19 को देश भर में फैलाया।
  27. द हिंदू ने डेनमार्क के प्राइम मिनिस्टर के हवाले से भारत में कोरोना से उपजे हालातों पर सवाल उठाया। लेकिन स्वयं वहाँ के राजदूत ने द हिंदू की इस खबर को झूठ करार दे दिया। 
  28. द वायर ने श्रमिकों से किराया लेने की फर्जी खबर फैलाई, जिसके बाद उत्तर रेलवे ने उसे फर्जी करार करार दिया। साथ ही खबर को तथ्यों से अलग बताया।
  29. सोशल मीडिया पर महामारी का फायदा उठा कहा गया कि यदि व्हॉट्सएप ग्रुप में किसी ने कोरोना संबंधी जोक भेजा तो वह पकड़ा जाएगा। इस खबर पर सरकार ने स्पष्ट बताया कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया।
  30. एक क्लिप वायरल हुई। WHO के हवाले से जिसमें दावा किया गया कि 72 से 108 घंटे भारत के लिए भारी है। मगर, इस पर संज्ञान लेकर WHO ने खुद कहा कि उन्होंने ऐसी चेतावनी जारी नहीं की।
  31. प्रियंका गाँधी समेत कई नामी चेहरों ने दावा किया यूपी में कोरोना मरीज को अस्पताल में भर्ती होने के लिए CMO से अनुमति पत्र लेना होगा। हालाँकि यूपी सरकार ने इसका फैक्ट चेक करते हुए बताया कि ये खबर झूठी है और ऐसे कोई निर्देश नहीं दिए गए।
  32. द लॉजिकल इंडियन ने बताया कि भाजपा नेता कोरोना संक्रमित होने के बाद कुंभ में गए, जबकि हकीकत ये थी कि वह कुंभ से लौटकर कोरोना संक्रमित हुए।
  33. भाजपा सांसद वीके सिंह के एक ट्वीट पर, जिसे उन्होंने नागरिक की मदद के लिए शेयर किया था, उसमें दावा किया गया कि कोविड की हालत इतनी ज्यादा खराब है कि एक केंद्रीय मंत्री को भी अपने भाई के लिए ट्विटर पर बेड के लिए ‘भीख’ माँगनी पड़ रही है।
  34. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट में बताया कि कोरोना की ड्यूटी के दौरान मरने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के लिए 50 लाख की बीमा योजना केंद्र सरकार ने वापस ले ली है जबकि सच ये है कि अप्रैल 24, 2021 के बाद कोरोना वॉरियर्स के लिए एक नई व्यवस्था आने वाली है, जिसके तहत उन्हें सहायता मिलेगी।
  35. महामारी के शुरुआती दौर में असम के ऑल इंडिया यूनाइटिड डेमोक्रेटिक फ्रंट के नेता अमिनुल इस्लाम ने क्वारंटाइन सेंटर्स को लेकर कहा कि वहाँ इंजेक्शन देकर मारा जाता है। वीडियो वायरल होने पर हुए गिरफ्तार।
  36. ईरान में कोरोना वायरस के चरम पर पहुँचने पर दावा किया गया कि पैगंबर इत्र से इस्लामिक व्यक्ति कोरोना वायरस से रोगियों को ठीक कर रहा है।
  37. इंदौर पुलिस ने इरशाद नाम के युवक को गिरफ्तार किया। उसका कहना था कि इलाज की आड़ में जो डॉक्टर उनके मोहल्लों में आ रहे हैं, वे जहरीला इंजेक्शन दे रहे हैं। इसलिए उनका बहिष्कार करें।
  38. 28 मार्च 2020 को एनडीटीवी ने एक यूनिवर्सिटी के हवाले से कहा था कि भारत में 25 करोड़ मामले आ सकते हैं। हास्यास्पद बात ये है कि एनडीटीवी को इस खबर के लिए यूनिवर्सिटी से ही डाँट पड़ गई। बाद में उसे खबर तक हटानी पड़ी।
  39. दि प्रिंट के शेखर गुप्ता ने महामारी की शुरुआत में दावा किया था कि सिंगापुर से एक भी मौत का मामला नहीं है। हालाँकि बाद में उनका झूठ पकड़ा गया और पता चला कि वहाँ भी 2 मौत हो चुकी है।
  40. रूस में पुतिन सरकार पर सवाल उठाने के लिए एक शेर की सड़कों पर घूमते हुए तस्वीर सामने आई। इसे लेकर कहा गया कि लोग सेल्फ क्वारंटाइन रहें, इसलिए ऐसा किया गया है। पड़ताल में पता चला तस्वीर 2016 की है।

भारत में कोरोना का कहर दुनिया भर में सबसे ज्यादा, दिल्ली HC ने सरकार से कहा – ‘माँगो या चुराओ पर ऑक्सीजन दो’

पिछले 1 दिन में पूरे भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के 3,15,735 नए मामले सामने आए हैं, जो अब तक किसी भी देश का 1 दिन में सबसे बड़ा आँकड़ा है। जबकि ठीक होने वालों की संख्या इससे काफी कम 1,79,427 रही। साथ ही मात्र 1 दिन में 2101 लोगों को कोरोना की वजह से अपनी जान गँवानी पड़ी। इस तरह से भारत में सक्रिय कोरोना संक्रमितों की संख्या 22,84,411 पहुँच गई है।

सक्रिय कोरोना संक्रमितों की संख्या के मामले में अमेरिका के बाद भारत पूरे विश्व में दूसरे स्थान पर पहुँच गया है। इसके बाद ब्राजील और फ्रांस का नंबर आता है। भारत की बात करें तो यहाँ पिछले 1 दिन में सबसे ज्यादा महाराष्ट्र से 67,468 और उत्तर प्रदेश से 33,106 मामले सामने आए। मृतकों में सबसे ज्यादा 568 महाराष्ट्र और 249 दिल्ली से रहे। इस तरह से महाराष्ट्र में फ़िलहाल 6,95,747 और यूपी में 2,42,265 सक्रिय कोरोना मामले हैं।

अमेरिका में नवंबर 2020 की शुरुआत से लेकर फरवरी 2021 के मध्य तक कोरोना वायरस जिस तेजी से फ़ैल रहा है, फ़िलहाल भारत में वो उससे 4 गुना अधिक रफ़्तार से हावी हो रहा है। लेकिन, मृत्यु दर उसका आधा है। जहाँ 1 अप्रैल को 81,398 नए मामले सामने आए थे, 22 दिनों में ये संख्या लगभग 4 गुना बढ़ गई है। अगर हम भारत और अमेरिका की जनसंख्या को देखें तो वहाँ की त्रासदी कहीं ज्यादा भयंकर थी।

जहाँ अमेरिका में प्रति 10 लाख में 97,881 मामले सामने आ रहे थे, भारत में ये आँकड़ा उससे कहीं 9 गुना कम 11,418 पर है। अमेरिका में जहाँ प्रति मिलियन में 1752 लोग मर रहे थे, भारत में ये आँकड़ा 132 है, यानी 13 गुना कम। बिहार, उत्तर प्रदेश और असम में कोरोना के मामलों की संख्या पहले के मुकाबले ज्यादा तेज़ी से बढ़ रही है। बुधवार (अप्रैल 21, 2021) को 17 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में कोरोना के अब तक के सबसे ज्यादा मामले सामने आए।

अब तक 13.01 करोड़ लोगों का टीकाकरण किया गया है। दिल्ली में कोरोना के मामलों की संख्या पिछले 1 दिन में कम आई क्योंकि यहाँ टेस्टिंग की संख्या ही घटा दी गई है। छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य में 1 दिन में 193 लोगों की कोविड-19 की वजह से मौत होना चिंता का सबब है। उत्तर-पूर्वी राज्यों में अन्य राज्यों के मुकाबले कम मामले सामने आए। इससे पहले अमेरिका में 1 दिन में सबसे ज्यादा जनवरी 8 को 3,07,581 नए मामले सामने आए थे।

देश में ऑक्सीजन की कमी की बात भी सामने आ रही है, जिस कारण रिलायंस, टाटा और सरकारी तेल कंपनियों ने आगे आकर मोर्चा संभाला है। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन की कमी पूरी करने उसकी जिम्मेदारी है, वो माँग कर, उधार लेकर या चुरा कर – इसे किसी तरह पूरा करे। उच्च न्यायालय ने कहा कि ये मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति है। ‘हैरान और निराश’ हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार वास्तविकता नहीं देख पा रही है।

हाईकोर्ट ने पूछा, “ये क्या हो रहा है? आखिर सरकार क्यों वास्तविकता को नहीं देख पा रही है? पिछले 10 दिनों में कोरोना के मामले दोगुने हो गए हैं और ये सिर्फ दिखाया नहीं जा रहा है, सच्चाई है।” मैक्स हैल्थकेयर नेटवर्क ने याचिका दायर कर के कहा था कि अधिकतर अस्पताल खतरनाक रूप से काफी कम ऑक्सीजन पर काम कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि एक संप्रभु राष्ट्र अपने लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकता।

CPM महासचिव सीताराम येचुरी के बेटे आशीष येचुरी का कोरोना से निधन

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव सीताराम येचुरी के बड़े बेटे आशीष येचुरी का गुरुवार की सुबह 6 बजे कोरोना संक्रमण से निधन हो गया है।

कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद से आशीष का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा था। इंफेक्शन होने के बाद उनका इलाज दो सप्ताह पहले तक होली फैमिली अस्पताल में चल रहा था, लेकिन हालत बिगड़ने के बाद उन्हें गुरुग्राम रेफर कर दिया गया था।

जानकारी के मुताबिक, 34 वर्षीय आशीष दिल्ली के एक समाचार पत्र में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत थे।

आशीष की मौत पर सीताराम येचुरी ने ट्वीट किया है। उन्होंने सभी डॉक्टरों, नर्सों और अन्य लोगों को भी धन्यवाद दिया, जिन्होंने उनके बेटे का इलाज किया।

मतुआ समुदाय, चिकेन्स नेक और बांग्लादेश से लगे इलाके: छठे चरण में कौन से फैक्टर करेंगे काम, BJP से लोगों को हैं उम्मीदें

पश्चिम बंगाल में गुरुवार (अप्रैल 22, 2021) को छठे चरण का चुनाव होना है, जिसके तहत कई महत्वपूर्ण इलाकों में मतदान होगा। इसमें उत्तरी दिनाजपुर के चोपरा, इस्लामपुर, गोलपोखर और चाकुलिया जैसे विधानसभा क्षेत्र भी शामिल हैं, जिनकी सीमाएँ बांग्लादेश से लगती हैं। इस चरण में उत्तर-दक्षिण बंगाल को जोड़ने वाले चिकेन्स नेक से लेकर नदिया और नॉर्थ 24 परगना में बांग्लादेश की सीमा तक, कई इलाके कल मतदान की जद में आएँगे।

जिन 43 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव होने हैं, वो उत्तर और दक्षिण बंगाल में फैला हुआ है। इसमें उत्तर बंगाल का दिनाजपुर जिला और दक्षिण बंगाल का बर्धमान पूर्व, नदिया और नॉर्थ 24 परगना शामिल है। उत्तर दिनाजपुर और नदिया की 9, नॉर्थ 24 परगना की 17 और पूर्वी बर्धमान की 8 सीटों पर कल चुनाव होंगे। उत्तरी दिनाजपुर की जिन 4 क्षेत्रों की सीमाएँ बांग्लादेश से लगती हैं, एक तरफ उनकी सीमाएँ बिहार से भी सटी हुई हैं।

चिकेन्स नेक का भारतीय सुरक्षा के लिए बड़ा ही महत्व है और यहाँ हर धर्म के लोग रहते हैं। शाहीन बाग़ में शरजील इमाम ने इसी चिकेन्स नेक को भारत से अलग करने की धमकी दी थी, ताकि पूरा का पूरा उत्तर पूर्व शेष भारत से अलग हो जाए। रणनीतिक रूप से चीन की साजिश भी कभी यही रही थी। इसीलिए, यहाँ अर्धसैनिक बलों की तगड़ी मौजूदगी है। वहीं नॉर्थ 24 परगना के कुछ क्षेत्र हुगली नदी के किनारे बसे हैं।

ये वो क्षेत्र हैं, जो सदियों से जूट मिल का गढ़ रहे हैं। इनमें नैहाटी, भटपारा, जगद्दल और बैरकपुर शामिल हैं। यहाँ भी कई जाति-मजहब के लोग निवास करते हैं। मतुआ समुदाय का झुकाव किस तरफ है, इसका फैसला भी इसी चरण में होगा। बनगाँव उत्तर, बनगाँव दक्षिण, स्वरूपनगर, बगडा और कृष्णनगर दक्षिण में मतुआ समुदाय के लोगों की संख्या खासी अधिक है। इन 43 विधानसभा सीटों में से 9 दलितों के लिए आरक्षित हैं।

भाजपा ने CAA को लागू करने और NRC कानून लाने की योजना को अपना चुनावी वादा बनाया है। ये वही क्षेत्र हैं, जो घुसपैठ की समस्या से तो पीड़ित हैं ही, साथ ही इस्लामी कट्टरता का भी गढ़ बनते जा रहे हैं। वहीं TMC अल्पसंख्यकों को CAA/NRC का भय दिखा कर वोट बटोरना चाहती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इन इलाकों में जम कर चुनाव प्रचार किया है।

जबकि तृणमूल की तरफ से ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक ने मोर्चा संभाला हुआ था। अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भाजपा हमलावर भी हैं क्योंकि आरोप है कि पार्टी में अब ‘भाईपो’ की ही चलती है और ममता उन्हें अपने उत्तराधिकारी के रूप में सेट कर रही हैं। मतुआ समुदाय बहुतायत में भाजपा को वोट कर रहा है, ‘खान मार्किट गैंग’ के साथ क्लबहाउस बातचीत में TMC के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ये स्वीकार कर चुके हैं।

सोमवार को इन 43 सीटों पर चुनाव प्रचार भी ख़त्म हो गया है। ECI ने अगले चरणों में 48-72 घंटे तक की साइलेंट अवधि का ऐलान किया है। इस चरण में अर्धसैनिक बलों की 779 कंपनियों का इस्तेमाल किया जाएगा। हाबड़ा से ज्योतिप्रिया मलिक और दमदम उत्तर से चंद्रिमा भट्टाचार्य जैसे मंत्रियों की किस्मत इसी चरण में EVM में कैद होगी। हाबड़ा से भाजपा के राहुल सिन्हा मैदान में हैं। कृष्णानगर से मुकुल रॉय खुद मैदान में हैं।

इन क्षेत्रों के लोगों के लिए बेरोजगारी भी एक बड़ी समस्या है। 2018 के पंचायत चुनाव में जिस तरह से TMC ने लोकतंत्र का मजाक बनाया, उससे लोग नाराज हैं। राजनीतिक हिंसा से भी लोग परेशान हैं। लोगों को उम्मीद है कि भाजपा इंडस्ट्री लेकर आएगी। साथ ही एंटी-इंकम्बेंसी भी है। ‘दीदी के बोलो’ और ‘दुआरे सरकार’ के जरिए लोगों के गुस्से को कम करने का सीएम ममता ने प्रयास किया। साथ ही अपनी हिन्दू पहचान को आगे बढ़ाया।

कई इलाकों में चेहरे बदल दिए गए। भ्रष्टाचार, तानाशाही और भाई-भतीजावाद के आरोपों को किसी तरह दबाने के लिए प्रशांत किशोर की सलाह पर ये सब किया गया। लेकिन, मुस्लिम तुष्टिकरण पर पार्टी जनता को कोई जवाब नहीं दे पाई। लेफ्ट ने 2006 में इंडस्ट्रियलाइजेशन के वादा कर के सिंगूर, नंदीग्राम और सालबोनी में जरूर उद्योगों को आकर्षित किया, लेकिन विपक्ष के आंदोलन के कारण सब गुड़-गोबर हो गया।

जमीन अधिग्रहण पर लुभावनी नीतियाँ बना कर ममता बनर्जी ने किसी तरह किसानों को अपने पाले में किया। भाजपा केंद्र में भी सत्ता में है, इसीलिए विकास को लेकर लोग उसे तरजीह दे रहे हैं। इससे पहले 1972-77 में ऐसा हुआ था जब नई दिल्ली और कोलकाता में समान पार्टी की सरकार थी। 2019 का लोकसभा चुनाव TMC को सबक सिखाने का था। इस बार जनता अपेक्षाओं की बोझ के साथ भाजपा को चुन रही।

छठे चरण में कुल 306 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होना है। पिछले कुछ दिनों से ममता बनर्जी ने कोरोना वायरस की दूसरी लहर का मुद्दा भी अपनी रैलियों में उठाया है। उन्होंने पीएम मोदी के पास कोरोना को लेकर कोई प्लान न होने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर वो सही समय पर जिम्मेदारी लेते तो ये सब नहीं होता। ये अलग बात है कि जब EC ने वर्चुअल कैम्पेनिंग की बात की थी तो कॉन्ग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध किया था।

वहीं भाजपा ने हाल के दिनों में मुख्यमंत्री के उस लीक हुए ऑडियो टेप को मुद्दा बनाया, जिसमें वो कूच बिहार में अर्धसैनिक बलों की गोली से मरे लोगों की बातें कर रही हैं। भाजपा ने उन पर लाशों पर रैलियाँ करने का आरोप लगाया। किस तरह पुराने उद्योग बंद हुए और नौकरी के लिए युवाओं ने पलायन किया, वो भी मुद्दा बना हुआ है। हाल ही में पूर्वी बर्धमान में एक रोडशो में अमित शाह ने ममता को घेरा।

जयपुर में जामा मस्जिद पर जमा थी भीड़, समझाने गई पुलिस पर किया गया पथराव: पुलिस की गाड़ी के टूटे शीशे

जयपुर के सांगानेर में भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया है। पुलिस की गाड़ी पर भी पथराव किया गया है जिससे गाड़ी के शीशे टूट गए हैं। सांगानेर की जामा मस्जिद में कर्फ्यू के बाद भी इकट्ठी भीड़ ने पुलिस द्वारा समझाइश दिए जाने के बाद पुलिस कर्मियों पर पत्थरबाजी कर दी।

मीडिया खबर के अनुसार जयपुर के सांगानेर के जामा मस्जिद में लगातार भीड़ बनी हुई थी। कर्फ्यू के बाद भी मस्जिद में लोगों की आवाजाही रुक नहीं रही थी। इस पर सांगानेर पुलिस मस्जिद प्रशासन से बात करने पहुँची। इसी दौरान मस्जिद में उपस्थित भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। पुलिसकर्मियों पर हुए इस हमले में कई गाड़ियों को नुकसान पहुँचा है।

वीडियो : Zee राजस्थान

आपको बता दें कि राजस्थान में कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के बीच 22 अप्रैल से 21 मई तक राज्य में धारा 144 लागू की गई है। ऐसे में मस्जिद में भीड़ इकट्ठा करना गैर कानूनी था। इस पर कार्रवाई करने के लिए ही सांगानेर पुलिस जामा मस्जिद पहुँची थी। तोड़फोड़ करने वालों की पहचान की जा रही है। इसके साथ ही उन लोगों की भी तलाश की जा रही है जिन्होंने धारा 144 का उल्लंघन किया है।

मंगलवार को राजस्थान में पिछले 24 घंटों में 14,000 से अधिक नए संक्रमित मरीज मिले। इनमें से राजधानी जयपुर में ही नए संक्रमितों की संख्या 3000 से अधिक है।

अंबानी-अडानी के बाद अब अदार पूनावाला के पीछे पड़े राहुल गाँधी, कहा-‘आपदा में मोदी ने दिया अपने मित्रों को अवसर’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने के लिए कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी सदैव ही भारतीय उद्योगपतियों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कई बार अंबानी और अडानी की आलोचना की। उद्योगपतियों से राहुल गाँधी की घृणा के नए शिकार हैं, भारतीय वैक्सीन निर्माता। भारत बायोटेक की स्वदेशी ‘कोवैक्सीन’ पर भ्रम फैलाने के बाद अब राहुल गाँधी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के सीईओ अदार पूनावाला के पीछे पड़ गए हैं। एसआईआई भारत में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और AstraZeneca की वैक्सीन कोविशील्ड का निर्माण कर रहे हैं।

अंबानी-अडानी के बाद अदार :  

हाल ही में एसआईआई ने अपनी वैक्सीन की कीमतों का निर्धारण किया। इस पर राहुल गाँधी ने ट्वीट करके अदार पूनावाला को ‘मोदी का दोस्त’ बताया और यह कहा कि केंद्र सरकार कुछ उद्योगपतियों को लाभ कमाने में सहायता कर रही है।

राहुल गाँधी पीएम मोदी पर देश को उद्योगपतियों को बेचने का आरोप लगाते ही रहते हैं। बस इस बार अंबानी-अडानी की लिस्ट में अदार पूनावाला का नाम जोड़ दिया है।

केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन कार्यक्रम को और तेज करने के लिए Covid-19 वैक्सीन की बिक्री से संबंधित नियमों में कुछ ढील प्रदान की है जिसके बाद राहुल गाँधी ने यह आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने यह निर्णय वैक्सीन निर्माताओं को लाभ प्रदान करने के लिए लिया है।

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि CNBC-TV18 को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा था कि कंपनी महामारी का कोई लाभ नहीं लेना चाहती है और प्रति डोज में कंपनी 150 रुपए का नुकसान ही सहन कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआई को AstraZeneca को 50% रॉयल्टी के रूप में देना होता है।

ज्ञात हो कि राहुल गाँधी और अन्य कॉन्ग्रेस नेता लगातार विदेशी वैक्सीनों की सिफारिश करते आए हैं। जब मोदी सरकार ने रूस की वैक्सीन स्पूतनिक-V को मंजूरी दी तब भी राहुल गाँधी ने इसका क्रेडिट खुद को ही दिया था।  

यह बड़े आश्चर्य की बात है कि विपक्षी नेताओं ने फाइजर, मॉडर्ना और जॉनसन & जॉनसन द्वारा बनाई गई महँगी वैक्सीनों की वकालत करते हुए कहा था कि जो इन वैक्सीनों के लिए पैसे दे सकते हैं उन्हें देना चाहिए। लेकिन जब एक भारतीय कंपनी ने अपनी वैक्सीन की लागत के बराबर मूल्य निर्धारित किया है जो अन्य वैक्सीनों की तुलना में फिर भी कम है तब यह आरोप लगाया जा रहा है कि ‘मोदी के उद्योगपति मित्र’ लाभ कमा रहे हैं।

भारत का वैक्सीनेशन कार्यक्रम :

भारत में इस समय विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम चल रहा है। अब तक Covid-19 के 13 करोड़ से अधिक डोज दिए जा चुके हैं और साथ ही 17.5 मिलियन लोग पूरी तरह से वैक्सीनेटेड हो चुके हैं। सरकार भी उत्पादन बढ़ाने के लिए वैक्सीन निर्माताओं को अतिरिक्त सहायता मुहैया करा रही है।  

उद्धव सरकार खरीदेगी विदेशी वैक्सीन, महाराष्ट्र में फैले कुप्रशासन के बीच स्वास्थ्य मंत्री का ऐलान

महाराष्ट्र में रेमडेसिविर की आपूर्ति के मामले में दमन की फार्मा कंपनी ब्रुक फार्मास्युटिकल्स के डायरेक्टर के साथ विवाद करने के बाद महा विकास अघाड़ी सरकार ने यह घोषणा की कि वह विदेशी वैक्सीन का आयात करेगी और वैक्सीनेशन कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए सभी विभागों को दिए जाने वाले फंड में भी कटौती करेगी।

सभी वयस्कों को वैक्सीन उपलब्ध कराने के निर्णय का स्वागत करते हुए महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि उनकी सरकार ने एक ‘अनुकरणीय’ वैक्सीनेशन कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो राज्य सरकार सभी विभागों के फंड में कटौती भी कर सकती है।

इंडियन एक्स्प्रेस की खबर के अनुसार टोपे ने कहा कि 18-45 वर्ष की आयु के व्यक्ति सरकारी अस्पतालों में 400 रुपए और निजी अस्पतालों में 600 रुपए की दर से वैक्सीन ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कोविड वैक्सीन के रूप में कोविशील्ड और कोवैक्सीन उपलब्ध हैं लेकिन आवश्यकता होने पर अन्य वैक्सीनों का आयात किया जाएगा। टोपे ने यह भी कहा कि उनकी सरकार विदेशी वैक्सीन स्पूतनिक, फाइजर और मॉडर्ना के डोज खरीदने पर भी विचार कर रही है।

टोपे ने बताया कि उनकी सरकार 7 लाख लोगों को प्रतिदिन वैक्सीनेट करना चाहती थी लेकिन वैक्सीन की आपूर्ति में कमी के कारण मात्र 3 लाख लोगों को प्रतिदिन वैक्सीनेट कर पाई। उन्होंने राज्य में वैक्सीनेशन कार्यक्रम को बेहतर करने के लिए यूनाइटेड किंगडम का मॉडल अपनाने की बात की। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने सभी विभागों के खर्चों को कम करने का निर्णय लिया है और सरकार देश में निर्मित मात्र दो वैक्सीनों पर निर्भर नहीं रहने वाली है।

संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित राज्य है महाराष्ट्र:

देश में कोरोनावायरस संक्रमण से महाराष्ट्र सबसे ज्यादा प्रभावित है। राज्य में पिछले दो हफ्तों से लगातार 50,000 से अधिक संक्रमित मिल रहे हैं। संक्रमण की उच्च दर के बाद भी महाराष्ट्र सरकार की महामारी के प्रबंधन की नीतियों की आलोचना हो रही है।  

पिछले हफ्ते ही मुंबई पुलिस ने दमन की फार्मा कंपनी ब्रुक फार्मास्युटिकल्स के डायरेक्टर से रेमडेसिविर की आपूर्ति के मामले में गिरफ्तार करके कई घंटे तक पूछताछ की। हालाँकि विपक्ष के नेता देवेन्द्र फड़नवीस ने यह आरोप लगाया था कि राज्य में रेमडेसिविर की सप्लाई के लिए भाजपा परमिशन लेने में सफल रही इसलिए फार्मा कंपनी के डायरेक्टर को गिरफ्तार किया गया।

महा विकास अघाड़ी के नेताओं का दुर्भावनापूर्ण व्यवहार :

विपक्षी दलों पर आरोप मढ़ने और अपनी असफलताओं को छुपने के लिए महा विकास अघाड़ी के नेताओं ने लगातार प्रयास किए। कॉन्ग्रेसी ट्रोल साकेत गोखले ने आरोप लगाया कि देवेन्द्र फड़नवीस के द्वारा खरीदी गई रेमडेसिविर गुजरात के लिए थी न कि महाराष्ट्र के लिए।

हालाँकि, महाराष्ट्र के ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री और एनसीपी नेता राजेन्द्र सिंगणे ने अपनी ही सरकार के मंत्रियों और नेताओं के दावों की पोल खोल डी। News18 लोकमत में दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने स्वीकार किया कि विपक्षी दल भाजपा द्वारा खरीदी गई रेमडेसिविर महाराष्ट्र के लिए ही थी और वह इससे अवगत थे। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता औषधि निर्माताओं के साथ उनके पास आए थे और रेमडेसिविर की खरीद में सहायता करने का अनुरोध किया था। रेमडेसिविर की खरीद भी पूरे नियम के अनुसार हुई और उसका उद्देश्य मात्र नागरिकों की सहायता करना ही था।

‘सरकार ने संकट में भी किया ऑक्सीजन निर्यात’- NDTV समेत मीडिया गिरोह ने फैलाई फेक न्यूज: पोल खुलने पर किया डिलीट

21 अप्रैल को भारत सरकार ने यह आरोप सिरे से खारिज कर दिया कि जनवरी 2021 से मार्च 2021 तक भारत ने 9884 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया है। मीडिया की मुख्य धारा में भी यह रिपोर्ट दी जा रही है कि भारत ने 31 मार्च 2021 तक लगभग 9300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया है। NDTV, News18 और मनी कंट्रोल जैसे मीडिया समूहों ने भारत के ऑक्सीजन निर्यात से संबंधित तथ्यों को अनदेखा करके भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत की। हालाँकि, वास्तविक तथ्यों के सामने आने के बाद मनी कंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट डिलीट कर दी।

20 अप्रैल 2021 को मनी कंट्रोल ने यह दावा किया कि 2021 के पहले तीन महीनों में भारत ने 9300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया। हालाँकि, मनी कंट्रोल ने यह नहीं बताया कि निर्यातित ऑक्सीजन मेडिकल ऑक्सीजन है या नहीं। इस कारण रिपोर्ट में ऑक्सीजन की स्थिति चिंताजनक दिखाई दी।

मनी कंट्रोल की गुमराह करने वाली रिपोर्ट

ऐसी ही एक रिपोर्ट News18 के द्वारा शेयर की गई जिसमें मनी कंट्रोल की ही रिपोर्ट का जिक्र था। जल्दी ही ये रिपोर्ट्स सोशल मीडिया में शेयर होने लगीं जिससे भारत में जहाँ मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की समस्या सबके सामने है, चिंता की परिस्थितियाँ उत्पन्न हो गईं।

News18 की रिपोर्ट
इस मामले पर संजय झा का ट्वीट

हालाँकि, ऑक्सीजन के निर्यात से संबंधित तथ्यों के सबके सामने आने के बाद मनी कंट्रोल ने अपनी रिपोर्ट डिलीट कर दी और सार्वजनिक रूप से इसके लिए माफी माँगी। मनी कंट्रोल के द्वारा ट्विटर पर पोस्ट किए गए माफीनामे में कहा गया कि भारत के ऑक्सीजन निर्यात से संबंधित रिपोर्ट को डिलीट कर दिया गया है क्योंकि इस रिपोर्ट से औद्योगिक ऑक्सीजन के निर्यात की गलत तस्वीर पेश हुई जिससे अनावश्यक चिंता उत्पन्न हुई। मनी कंट्रोल ने लिखा कि यह रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए थी। मनी कंट्रोल ने अपनी गलती के लिए खेद प्रकट किया।

इसके अलावा फेक न्यूज फैलाने के लिए प्रसिद्ध NDTV ने भी भारत के ऑक्सीजन निर्यात पर भ्रामक खबर चलाई। सरकार के द्वारा ऑक्सीजन निर्यात पर पूरी स्थिति साफ कर देने के बाद भी NDTV ने यह आरोप लगाया कि 2020 की तुलना में जनवरी 2021 में भारत का ऑक्सीजन निर्यात 700% बढ़ा है।

हालाँकि सरकार के सूत्रों ने इन मीडिया रिपोर्ट्स को भ्रांतिपूर्ण बताया क्योंकि इन रिपोर्ट्स में जिस ऑक्सीजन की बात की गई है वह औद्योगिक ऑक्सीजन है जो कि मेडिकल ऑक्सीजन से कहीं अलग होती है।  


सरकार के सूत्रों के अनुसार निर्यातित ऑक्सीजन दो प्रकार की होती है, एक औद्योगिक ऑक्सीजन और दूसरी मेडिकल ऑक्सीजन। 2020-21 के दौरान अप्रैल से फरवरी के मध्य भारत ने 9884 मीट्रिक टन औद्योगिक ऑक्सीजन का निर्यात किया जबकि इसी दौरान मात्र 12 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन का निर्यात हुआ।  

सालाना निर्यातित ऑक्सीजन की मात्रा भारत की सालाना ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता का मात्र 0.4% है। औद्योगिक ऑक्सीजन का अधिकतर निर्यात दिसंबर 2020 में हुआ। इसके अलावा सितंबर 2020 में भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की खपत 2675 मीट्रिक टन प्रतिदिन थी वह जनवरी 2021 में घटकर 1418 मीट्रिक टन प्रतिदिन रह गई।

सरकार के आँकड़ों के अनुसार 2016-17 के दौरान भारत ने 15,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का निर्यात किया था जबकि इसी समय मेडिकल ऑक्सीजन का निर्यात 229.82 मीट्रिक टन था। अगले पाँच वर्षों में ऑक्सीजन की माँग घटी जिससे 2019-20 के दौरान औद्योगिक ऑक्सीजन का निर्यात घटकर 4328 मीट्रिक टन हो गया जबकि मेडिकल ऑक्सीजन का निर्यात इसी समय 9.62 मीट्रिक टन रह गया।

ऑक्सीजन निर्यात पर आधारित आँकड़े

औद्योगिक ऑक्सीजन का चिकित्सा में उपयोग नहीं :

रेलवे प्लांट अपनी औद्योगिक ऑक्सीजन सप्लाई का उपयोग मेडिकल उद्देश्य के लिए करना चाहता था। इस पर प्रीमियर क्रायोजेनिक्स लिमिटेड के डेप्युटी जनरल मैनेजर पीके बोरा ने यह बताया कि औद्योगिक लिक्विड ऑक्सीजन का उपयोग चिकित्सा उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता है।

मेडिकल और औद्योगिक ऑक्सीजन के विषय में पीके बोरा का पत्र

भारत सरकार ने ऑक्सीजन का निर्यात बैन किया :

कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत सरकार ने नौ उद्योगों को छोड़कर शेष उद्योगों में ऑक्सीजन के उपयोग को बैन कर दिया है। बढ़ती माँग को देखते हुए सरकार ऑक्सीजन के उत्पादन और आपूर्ति को बढ़ाने का भरपूर प्रयास कर रही है।

टाटा, रिलायंस, जिंदल और ऐसे ही अन्य औद्योगिक घरानों ने अपनी औद्योगिक ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता का उपयोग मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश जैसी राज्य सरकारों और डीआरडीओ जैसी सरकारी संस्थाओं ने भी अस्पतालों में ही ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र स्थापित करने की दिशा में कार्य प्रारंभ कर दिया है जिससे किसी भी प्रकार की ऑक्सीजन की कमी न हो।

कोरोना महामारी में कश्मीरी पत्रकार, TMC और प्रोपगेंडाबाजों ने जमकर शेयर की फेक तस्वीरें: फैक्ट चेक

कोरोना महामारी के समय में विपक्षी पार्टियाँ, वामपंथी पत्रकार और प्रोपगेंडा फैलाने वाले लोग लगातार फर्जी खबरों के सहारे देश में पैनिक क्रिएट करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे समय में जब कोविड महामारी से भारत त्रस्त है तब हर किसी को झूठी खबरें फैलाने से बचना चाहिए, लेकिन ये लोग इसे अवसर मानकर अपना एजेंडा चला रहे हैं।

इसी क्रम में कश्मीर के पत्रकार आरिफ शाह ने कल एक बुजुर्ग महिला की पुरानी तस्वीर शेयर की। तस्वीर में महिला रोड पर बैठी दिखी और ऑक्सीजन सिलेंडर उसके बगल में रखा था। शाह ने इस तस्वीर को शेयर करके कहा, “ये वो जगह है जहाँ भारत इस समय है।” 

पत्रकार का मकसद जाहिर है यही दिखाना था कि ये फोटो अभी हाल की है जबकि हकीकत में ये फोटो पुरानी है। हमारे खबर लिखने तक आरिफ इस तस्वीर को डिलीट कर चुके हैं। लेकिन स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि इस पर हजार रीट्वीट हो चुके हैं। इतने व्यापक स्तर पर झूठी खबर फैलाने के बाद आरिफ ने किसी तरह की माफी भी नहीं माँगी।

इसी तस्वीर को अपने ट्विटर हैंडल से RVCJ ग्रुप ने भी शेयर किया था। हालाँकि, आलोचना के बाद उन्होंने पोस्ट डिलीट कर दिया। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा था, “इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता।”

ममता सरकार के एक आधिकारिक ट्विटर हैंडल ‘बंगलार गोरबो ममता’ ने भी इस पुरानी तस्वीर को शेयर करके मोदी सरकार को देश से हटाने की अपील की। हमारे खबर लिखने तक ये पोस्ट अकॉउंट पर ही था।

बता दें कि सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही इस तस्वीर पर जब हमने पड़ताल की तो पाया कि ये तस्वीर 2018 की है। ANI ने तब रिपोर्ट में बताया था कि एक आदमी आगरा मेडिकल कॉलेज के बाहर कंधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर रखकर एम्बुलेंस का वेट कर रहा था। उसी समय ये तस्वीर भी ली गई थी।

यहाँ हम ये नहीं कह रहे कि 2018 की यह तस्वीर किसी कीमत पर जायज है या इसे सही ठहराया जा सकता है, लेकिन इस समय में इसे शेयर करना सिर्फ़ सामान्य जन में डर व्याप्त करने के अतिरिक्त और कुछ नहीं है।

महाराष्ट्र की तस्वीर को बताया गया गुजरात का मॉडल

स्वरा भास्कर के दोस्त व अनारकली ऑफ आरा के निर्देशक अविनाश दास ने 20 अप्रैल को एक तस्वीर शेयर की थी। तस्वीर में लोग अपने हाथ में ड्रिप लगाए जमीन पर पड़े थे। इसमें दास ने लिखा था कि यह गुजरात के हेल्थकेयर का मॉडल है और तस्वीर गुजरात के तापी जिले की है, जहाँ कोरोना मरीजों का इलाज टेंट में हो रहा है।

इसी तस्वीर को ममता सरकार के एक आधिकारिक ट्विटर हैंडल ‘बंगलार गोरबो ममता’ ने शेयर किया। अपने ट्वीट में उन्होंने पूछा कि क्या वाकई प्रधानमंत्री को कोई परवाह है।

जब हमने इस तस्वीर का पता लगाया तो पता चला कि ये तस्वीर गुजरात की नहीं बल्कि महाराष्ट्र के नवापोरा की है और यहाँ कोविड का इलाज नहीं बल्कि टाइफाइड का इलाज हो रहा है। अस्पताल में बेड की कमी के कारण इलाज टेंट में दिया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर ऐसी भ्रामक सामग्री कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं और कई यूजर्स ऐसे हैं जो इनकी पोल खोल रहे हैं।

फर्जी खबर फैलाने वालों के लिए क्या है कानून?

बता दें कि भारत में ऐसी फर्जी खबरें फैलाने वालों से निपटने के लिए कोई अलग से कानून नहीं है। लेकिन आईपीसी, आईटी एक्ट, महामारी अधिनियम कानून में कुछ प्रावधान है जिनका इस्तेमाल इनसे निपटने के लिए किया जा सकता है।

IPC, 1860 की धारा 505 (1 ) के अनुसार जो कोई भी ऐसे बयान या झूठी खबरें फैला कर डर व्याप्त करने की कोशिश करता है, उसे 3 साल की जेल या जुर्माना या दोनों भुगतना पड़ सकता है।

इसी तरह आईटी एक्ट की धारा 66डी के तहत, जो कोई भी संचार उपरकरण या कम्प्यूटर संसाधनों का प्रयोग करके कोई ऐसी धोखाधड़ी करता है तो उसे जेल या फिर 1 लाख तक का फाइन हो सकता है।

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 54 के अनुसार, जो कोई भी झूठी चेतावनी देता है या आपदा या उसकी गंभीरता या परिमाण के रूप में ऐसा कोई झूठ फैलाता है, जिससे लोगों में घबराहट पैदा हो, तो उसे 1 वर्ष तक की कारावास की सजा या जुर्माना हो सकता है।

महाराष्ट्र में अब अजीबो-गरीब समस्या मुर्गियों ने अंडे देने किए बंद, शिकायत लेकर थाने पहुँचा पोल्ट्री फर्म का मालिक

महाराष्ट्र के पुणे से एक बहुत अजीबोगरीब मामला सामने आया है। वहाँ एक मुर्गी पालक ने अपने फर्म में मुर्गियों के अंडे न देने पर एक कंपनी को जिम्मेदार बताते हुए पुलिस के पास शिकायत की। मालिक का कहना है कि एक निश्चित कंपनी का उत्पाद खाकर उसकी मुर्गियाँ अंडे नहीं दे रहीं।

डेक्कन हेराल्ड की खबर के अनुसार, इस संबंध में पुलिस अधिकारी ने बताया कि फर्म मालिक ने उनके पास बुधवार को शिकायत की। हालाँकि, इस पर एफआईआर नहीं हुई क्योंकि जिस कंपनी पर फर्म मालिक ने आरोप मढ़ा, वह उसके लिए उसे मुआवजा देने को तैयार हो गया है। 

लोनी कालभोर पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी राजेंद्र मोक्षी ने कहा, “शिकायतकर्ता पोल्ट्री फार्म का मालिक है। वह और कम से कम 4 अन्य पोल्ट्री फार्म मालिक इलाके में इसी परेशानी से ग्रसित थे। सबने हमारे पास शिकायत करवाई।”

अधिकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ताओं ने कहा कि वह राज्य के अहमदनगर जिले में बनी एक कंपनी से उत्पाद खरीद कर मुर्गियों को खिलाते थे। लेकिन मुर्गियों ने उत्पाद का सेवन करने के बाद अंडे देना ही बंद कर दिया।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने ब्लॉक लेवल एनिमल हस्बैंड्री अधिकारी को अहमदनगर में संपर्क किया। अधिकारियों ने पुलिस को बताया कि ये बहुत सामान्य प्रक्रिया है कि कई बार कुछ उत्पाद मुर्गियों को सूट नहीं होते और वह उन्हें खाने के बाद अंडे देना बंद कर देती हैं। अधिकारियों के हवाले से पुलिस ने कहा कि मुर्गियों के अंडे न देने का मामला मुर्गियों द्वारा नए उत्पाद सेवन करने के बाद आया है। जैसे ही मुर्गियों पुराने खाने का सेवन करेंगी वह दोबारा अंडे देने लगेंगी।

पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमने संबंधित कंपनी से भी बात की, जिन्होंने बताया कि उन्हें कुछ अन्य ग्राहकों से भी फीड के बारे में ऐसी ही शिकायतें मिली हैं। निर्माता ने हमें आश्वासन दिया कि वे उत्पाद वापस ले लेंगे और प्रभावित लोगों को उनके नुकसान के लिए मुआवजे की पेशकश करेंगे।” पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता एक नामी उत्पाद कंपनी से अपनी मुर्गियों के लिए खाना खरीदते थे। लेकिन बाद में रेट बढ़ने के कारण उन्होंने अहमद नगर से माल खरीदना शुरू कर दिया और तभी से उन्हें यह समस्या हुई।