Home Blog Page 4823

‘बेटियों के सामने पैंट उतार जय श्रीराम के नारे लगाने वाले, हस्तमैथुन करने वाले’: योगी सरकार पर कॉन्ग्रेसी नेता के बोल

कॉन्ग्रेस नेता पंकज पुनिया ने कल (मई 19, 2020) नैतिकता की हर सीमा पार करते हुए अपने एक ट्वीट में हिंदुओं की भावनाओं को खुलेआम ठेस पहुँचाई। अपने ट्वीट में पुनिया ने ‘संघियों’ को बलात्कारी बताया, श्रीराम के नाम का गलत इस्तेमाल किया और योगी सरकार की आलोचना करते हुए उनके लिए आपत्तिजनक शब्द लिखे।

पुनिया ने यूपी सरकार की आलोचना करते हुए लिखा, “कॉन्ग्रेस सिर्फ़ मजदूरों को अपने खर्च पर उनके घरों तक पहुँचाना चाहती थी। बिष्ट सरकार ने राजनीति शुरू की। भगवा लपेटकर नीच काम संघी ही कर सकते हैं। ये कब्र से निकालकर लाशों का बलात्कार करने वाले लोग हैं। बेटियों के सामने पैंट उतारकर जय श्रीराम के नारे लगाने वाले हस्तमैथुन करने वाले लोग हैं।”

इस ट्वीट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस नेता पंकज पुनिया की गिरफ्तारी को लेकर लगातार माँग की जाने लगी। हालाँकि, 19 मई की शाम किए गए इस ट्वीट को कॉन्ग्रेस नेता ने अपने सोशल मीडिया अकॉउंट से डिलीट कर दिया है। मगर, ट्वीट का स्क्रीनशॉट ट्विटर पर धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है।

यूजर्स न केवल पुनिया के ट्वीट को बकवास बता रहे हैं बल्कि ये भी पूछ रहे हैं कि आखिर इन्हें हिंदुओं की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने की आजादी किसने दी?

बता दें कि यूपी के वकील प्रशांत पटेल उमराव ने तो पंकज पुनिया के ट्वीट के बाद सूचना भी दे दी है कि वे सीएम योगी व संघ को गाली देने व हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के लिए पंकज पुनिया के ख़िलाफ़ यूपी पुलिस में शिकायत दर्ज करवा रहे हैं।

हिंदुत्व के मुद्दों पर अक्सर अपनी बेबाक राय रखने वाले पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के ट्विटर अकॉउंट से भी पंकज पुनिया की भाषा पर बात रखी गई। उन्होंने लिखा, “इतनी गन्दी भाषा का प्रयोग वो भी सोशल मीडिया पर कैसे कोई कर सकता है! आखिर क्यों सत्ता के लिए ये लोग इस हद तक गिर रहे हैं कि भाषा की मर्यादा को भी भूल गए। इस हद तक नफरत सनातन के खिलाफ क्यों कर रहे हैं ये कॉन्ग्रेसी…?

एक यूजर पुनिया की गिरफ्तारी की माँग करते हुए लिखते हैं, “आप मोदी से नाखुश हो सकते हैं, आप योगी की नीतियों का विरोध कर सकते है, लेकिन इसका ये मतलब नहीं की भाजपा विरोध में आकर तुम्हारे जैसे दो कौड़ी के नेता हिन्दुओं की आस्था पर चोट पहुचाएँ, जेल के सलाखों के पीछे तुम जरूर आओगे लिख कर रख लो।”

वहीं दीपक कुमार नाम का यूजर सोशल मीडिया पर पुनिया के लिए लिखते हैं, “ये इंसान पंकज पुनिया राजनीति में अंधा होकर हिन्दुओं के प्रभु श्रीराम को लेकर भद्दी-भद्दी बातें कर रहा है, जिससे की हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँची है। जल्द से जल्द कार्रवाई करके इसे जेल में डालें।”

ऐसे ही प्रभात अवस्थी लिखते हैं, ”बेटी का अपमान, बलात्कार से पीड़ित महिलाओं का अपमान और मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी का अपमान, यहाँ तक की भारत देश की संस्कृति का अपमान। किस हद तक गिर चुका है ये इंसान पंकज पुनिया… इससे भी ज्यादा शर्मनाक तो यह है कि कॉन्ग्रेस फिर भी इसके समर्थन में खड़ी है!”

गौरतलब है कि पंकज पुनिया का ये ट्वीट प्रियंका गाँधी और यूपी सरकार के बीच 1000 बसों को लेकर उठे विवाद के बाद आया। जहाँ पहले प्रियंका गाँधी ने यूपी सरकार से अनुमति माँगी कि वे 1000 बसें चलवाकर प्रवासी मजदूरों को घर भेजना चाहती हैं। लेकिन जब योगी सरकार ने उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया और सुरक्षा लिहाज से गाड़ियों का विवरण माँगा, तो प्रियंका गाँधी लेटरबाजी पर उतर आईं और बाद में ये भी पता चला कि जिन गाड़ियों का विवरण उन्होंने यूपी सरकार को भेजा, उनमें से कुछ ऑटोरिक्शा हैं और कुछ ब्लैकलिस्ट वाहन हैं।

उत्तर प्रदेश में फर्जी निकले 2846 मदरसे, रजिस्ट्रेशन की अनुमति देने से किया गया इनकार

उत्तर प्रदेश में लगभग 3000 मदरसों में फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है। मदरसा वेब पोर्टल पर उन्हें रजिस्टर किए जाने से भी इनकार कर दिया गया है। इन मदरसों ने तय मानक पूरे नहीं किए थे, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई।

इन फर्जी मदरसों ने सरकार से आग्रह किया है कि इन्हें नए सिरे से मान्यता के लिए आवेदन करने दिया जाए। फ़िलहाल योगी आदित्यनाथ सरकार ने मदरसों को मान्यता देने पर रोक लगाई हुई है। अब तक छात्रवृति और मान्यता में फर्जीवाड़ा के कई मामले सामने आ चुके हैं।

बता दें कि योगी सरकार के आने से पहले इन मदरसों में घोटालों और फर्जीवाड़ा का बोलबाला था। इसकी रोकथाम के लिए 2017 में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने मदरसा पोर्टल लॉन्च किया था। सभी मदरसों के लिए इस वेब पोर्टल पर ख़ुद को रजिस्टर कराना अनिवार्य कर दिया गया था।

रजिस्ट्रेशन के लिए सरकार ने मानक तय किए थे। वेब पोर्टल पर आए आवेदनों की लम्बे समय तक जाँच-पड़ताल की गई, जिनमें 3000 के क़रीब मदरसे फर्जी पाए गए हैं। इन्होंने मानकों को पूरा किए बिना ही रजिस्ट्री करा लिया था।

दैनिक जागरण की ख़बर के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पहले 19123 मदरसे रजिस्टर्ड थे लेकिन मदरसा वेब पोर्टल पर अभी तक 16277 को ही रजिस्ट्रेशन की अनुमति मिली है। यानी, कुल 2846 मदरसे फर्जी निकले।

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले का ही उदाहरण लें तो वहाँ अभी 321 मदरसे संचालित किए जा रहे हैं। इनके अलावा 100 से अधिक ऐसे मदरसे भी हैं, जिन्हें रजिस्ट्रेशन की अनुमति नहीं दी गई है। ये मदरसे मान्यता लेने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं।

रामपुर के मदरसों में कुल छात्रों की संख्या 40,000 है जबकि पूरे उत्तर प्रदेश में 20 लाख ऐसे छात्र हैं, जो विभिन्न मदरसों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मोहम्मद ख़ालिद ने इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी देते हुए कहा:

“मान्यता के लिए मदरसा शिक्षा परिषद ने कुछ मानक तय कर रखे हैं। जैसे प्राइमरी स्तर के मदरसे के लिए 3 कमरे, जूनियर हाई स्कूल स्तर के लिए 6 कमरे और हाईस्कूल स्तर के मदरसे के लिए 10 कमरे होना अनिवार्य कर दिया गया है। इन सबके अलावा प्राइमरी स्तर के मदरसों में छात्रों की संख्या कम से कम 60 होनी ही चाहिए। नए मदरसों की मान्यता पर प्रदेश सरकार ने जुलाई 2016 से रोक लगाई हुई है, इसलिए फिलहाल मान्यता नहीं दी जा रही है।”

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने ‘दैनिक जागरण’ को जानकारी दी कि मदरसा वेब पोर्टल का लक्ष्य ही मदरसों में फर्जीवाड़ा ख़त्म करना है। उन्होंने बताया कि इस वेब पोर्टल के जरिए रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया है।

मदरसों में सरकारी योजनाओं की जानकारी दिए जाने के सात-साथ एनसीईआरटी की पुस्तकें भी पढ़ाई जा रही हैं। कोरोना लॉकडाउन के बीच भी ऑनलाइन क्लासेज की व्यवस्था की गई है। ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मदरसा एजुकेशन पोर्टल के निर्माण पर काम चल रहा है।

इससे पहले कानपुर में एक मदरसे में संपर्क में आने के कारण 13 छात्र इस खतरनाक वायरस से संक्रमित हो गए थे। हाल ही में रामपुर जिले में घोषित लॉकडाउन के बाद भी एक मौलवी द्वारा मदरसे में बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। इसकी जानकारी जब जिला प्रशासन को हुई तो उसने तत्काल कार्रवाई करते हुए मदरसा संचालक को हिरासत में ले लिया था।

TikTok पर दाऊद को बुलावा, PM मोदी की फोटो के साथ गाना – हद हो चुकी है आ जा, तेरी कमी है आ जा…

चाइनीज सोशल मीडिया एप्लीकेशन टिक-टॉक (TikTok) पर हमने एसिड अटैक और रेप का महिमामंडन देखा था, जो महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा और दुर्व्यवहार को बढ़ावा दे रहा था। अब टिक-टॉक (TikTok) पर आतंकियों के समर्थन वाला वीडियो भी वायरल हो रहा है।

महाराष्ट्र के औरंगाबाद के रहने वाले इमरान शेख ने अपने एक वीडियो के जरिए आतंकी दाऊद इब्राहिम को एक हीरो के रूप में दिखाया है। साथ ही इस वीडियो के जरिए दाऊद को बुलाया भी जा रहा है।

‘दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इस वीडियो की तरह केंद्रीय सूचना एवं पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का ध्यान इस तरफ आकृष्ट कराया है। उन्होंने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी और महाराष्ट्र के टैग किया।

बग्गा ने लिखा कि ये यहीं रुकने वाला नहीं है, अब टिक-टॉक (TikTok) पर वीडियो बना कर दाऊद इब्राहिम को निमंत्रण भेजा जा रहा है। उन्होंने इस वीडियो के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के साथ-साथ इस एप्लीकेशन को प्रतिबंधित करने की माँग की।

इस वीडियो में दाऊद की फोटो के साथ ‘मैं निर्दोष हूँ’ भी लिखा गया है। साथ ही बीच में एक जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तस्वीर भी दिखती है।

इमरान शेख द्वारा डाले गए इस वीडियो में दाऊद इब्राहिम के फोटोज स्लाइड-शो में चल रहा है। साथ ही ऋषि कपूर अभिनीत फ़िल्म ‘हीना’ का गाना बज रहा है। इस वीडियो में संलग्न किए गए गाने के बोल इस प्रकार हैं-

हद हो चुकी है आजा
जाँ पर बनी है आजा
महफ़िल सजी है आजा
तेरी कमी है आजा
देर ना हो जाए कहीं देर ना हो जाए

बता दें कि दाऊद इब्राहिम 1993 मुंबई बम ब्लास्ट का मुख्य साजिशकर्ता है, जिसके कारण 317 लोगों की मौत हो गई थी और क़रीब 1500 घायल हुए थे। दाऊद इब्राहिम के बारे में कहा जाता है कि वो फ़िलहाल पाकिस्तान के कराची में रह रहा है, जहाँ पाक की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई उसकी खातिरदारी में लगी रहती है।

दाऊद अंडरवर्ल्ड के ‘डी-कम्पनी’ का सबसे बड़ा सरगना रहा है। एफबीआई ने दुनिया के 10 शीर्ष ‘मोस्ट वॉन्टेड’ आतंकियों की सूची में तीसरे स्थान पर रखा है। ऐसे में उसका महिमामंडन किया जाना टिक-टॉक (TikTok) के विरोध को और प्रबल करेगा।

टिक-टॉक (TikTok) पर इससे पहले रेप के महिमामण्डन का वीडियो वायरल हुआ था। उससे पहले एक वीडियो में फैज़ल सिद्दीकी लड़की से कहता है- “उसने तुम्हें छोड़ दिया, जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा था?” इसके बाद लड़की के चेहरे पर एक लिक्विड फेंका जाता है और उसका चेहरा पूरा जल जाता है। उसने एसिड अटैक को प्रमोट किया था।

इस मामले में फैज़ल सिद्दीकी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। वकील अभिषेक राजपूत ने एफआईआर की कॉपी ट्विटर पर शेयर की थी। एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल ने भी फैज़ल पर निशाना साधा था। अब उसका अकाउंट सस्पेंड हो चुका है। उसकी साथी आलिया हामिदी के ख़िलाफ़ भी एफआईआर दर्ज कराया गया है।

इसके अलावा चाइनीज सोशल मीडिया ऐप टिक-टॉक (TikTok) पर रेप के महिमामंडन का वीडियो भी वायरल हो रहा है। टिक-टॉक (TikTok) पर वायरल हुए इस वीडियो में दो लड़के अपने कपड़े पहन रहे हैं, पैंट की चेन लगा रहे हैं और दूसरी तरफ एक लड़की रोती हुई दिखती है। लड़की भी अपने कपड़े सही कर रही होती है।

अम्फान चक्रवात ने दी ओडिशा में दस्तक, 200 km/h पहुँचेगी रफ्तार: कई जगह हाई अलर्ट

सुपर साइक्लोन ‘अम्फान’ (Amphan cyclone) का असर ओडिशा में दिखने लगा है। सुबह तक अनुमान लगाया जा रहा था कि चक्रवाती तूफान अम्फान आज (मई 20, 2020) दोपहर तक ओडिशा और बंगाल के तटीय इलाकों से टकरा सकता है। मगर, अब खबर है ओडिशा के भद्रक में अम्फान ने दस्तक दे दी है। यहाँ सुबह 4:30 बजे से ही 82 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तेज हवाएँ चलनी शुरू हो गईं हैं।

खबरों के अनुसार, हवाओं की वजह से ओडिशा में पेड़ टूटकर गिरने लगे हैं। स्थिति ये बन गई है कि फायर सर्विसेज टीम वाहनों की आवाजाही, आवश्यक वस्तुओं, और आपातकालीन सेवा कर्मियों की सुविधा के लिए भद्रक में आर एंड बी कार्यालय के पास सड़क पर गिरे पेड़ों को हटा रही है।

वहीं, तटिए इलाके के लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुँचा दिया गया है। बाकी स्थिति पर राज्य सरकार के अधिकारी नजर बनाए हुए हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि दिन में करीब 2:30 बजे के आसपास चक्रवात ओडिशा के तट से टकराएगा।

अभी और बढ़ेगी अम्फान चक्रवात की रफ्तार

मौसम विभाग के अनुसार यह चक्रवात उत्तर और उत्तर पश्चिम दिशा में काफी रफ्तार में आगे बढ़ रहा है। अनुमान है कि इसकी गति अभी और बढ़ेगी। आज दोपहर तक पश्चिम बंगाल के दीघा और बांग्लादेश के हादिया में टकरा सकता है।

जानकारी के मुताबिक, चक्रवाती तूफान ओडिशा के पारादीप तट के पास पहुँचने वाला है। सुबह 8:30 बजे यह मात्र पारादीप तट से 120 किलोमीटर दूर पूर्व-दक्षिण पूर्व में था। मौसम विभाग ने दोपहर तक इसके तट से टकराने की संभावना जताई है।

मौसम विभाग के अनुसार, जब अम्फान तटीय इलाकों से टकराएगा तो इसकी रफ्तार 200 किमी प्रति घंटा की हो सकती है। मुख्य रूप से इस तूफान का खतरा पश्चिम बंगाल, ओडिशा में है, लेकिन पूर्वोत्तर के कई राज्य भी अलर्ट पर हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु में पहले ही अलर्ट जारी कर दिया गया है।

भारत मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, आज अम्फान के पश्चिम बंगाल के तट पर टकराने की भी संभावना है। जिसके कारण 155 किलोमीटर से 185 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएँ चलेंगी और भारी बारिश का अनुमान है।

कहा जा रहा है कि इस दौरान बंगाल के तटीय जिलों में भारी बारिश होगी और समुद्र में 4-5 मीटर ऊँची लहरें उठेंगी, जिसके कारण मौसम विभाग की ओर से जारी निर्देशों में अगले कुछ दिनों तक मछुआरों को तटीय इलाकों में जाने की सख्त मनाही है।

अम्फान चक्रवात (Amphan cyclone) का कहाँ-कहाँ होगा असर

मौसम विभाग ने कैबिनेट सचिव राजीव गौबा की अध्यक्षता में हुई एनसीएमसी की बैठक में बताया कि तूफान से सबसे भारी तबाही पश्चिम बंगाल और ओडिशा के छह जिलों में होगी। मंगलवार को यह तूफान ओडिशा तट के करीब पहुँच गया और कई इलाकों में बारिश शुरू हो गई। मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिम बंगाल में पूर्वी मेदिनीपुर, दक्षिणी एवं उत्तरी 24 परगना, हावड़ा, हुगली और कोलकाता पर सबसे बुरा असर होगा।

अनुमान है कि इलाकों में हवा की रफ्तार 75 किमी. प्रति घंटा से शुरू होकर 190 किमी. प्रति घंटा तक पहुँच सकती है। बता दें कि फिलहाल ओडिशा के बालासोर-भद्रक-मयूरभंज-जाजपुर जैसे जिलों में रेड अलर्ट जारी है।

पश्चिम बंगाल में 19 एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें तैनात

अम्फान चक्रवात के मद्देनजर पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की 19 टीमों को तैनात किया गया है। दक्षिण-24 परगना में 6 टीमें, पूर्वी मिदनापुर और कोलकाता में 4 टीमें, उत्तर-24 परगना में 3 टीमें, हुगली और हावड़ा में 1 टीम तैनात किया गया है। इसकी जानकारी खुद एनडीआरएफ के दूसरे बटालियन के कमांडेंट निशित उपाध्याय ने दी है।

गृह मंत्रालय ने पहले ही दे दी थी चेतावनी

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 18 मई को गृह मंत्रालय ने अम्फान तूफ़ान (Amphan Cyclone) को लेकर चेतावनी जारी की थी। जिसमें उन्होंने कहा था कि अभी इसके और आक्रामक होने की आशंका है। ये अब एक ‘सुपर साइक्लोन’ में बदल जाएगा।

मंत्रालय ने इस दौरान बताया था कि सोमवार (मई 18, 2020) की शाम से इसके और खतरनाक होने की आशंका है, जिसके बाद ये और ज्यादा तबाही मचा सकता है। बांग्लादेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाक़ों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई थी।

इसके बाद भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी साउथ बे ऑफ बंगाल के ऊपर अम्फान की गति तीव्र होने की सूचना दी थी और चेताया था कि ये एक खतरनाक चक्रवात में तब्दील हो रहा है। जिसके कारण पश्चिम बंगाल और ओडिशा के तटीय इलाक़ों के लिए तो अलर्ट भी जारी कर दिया गया है।

बस ड्राइवरों ने कॉन्ग्रेस का खोला पोल, खराब खाने को लेकर जम कर की नारेबाजी: अब तक 297 गाड़ियों में गड़बड़ी

उत्तर प्रदेश में श्रमिकों के लिए बसों को लेकर राजनीति और गहरी हो गई है। इस मामले में योगी आदित्यनाथ की सरकार और कॉन्ग्रेस की प्रियंका गाँधी आमने-सामने आ गई है।

कॉन्ग्रेस का दावा है कि उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर बड़ी संख्या में बसें योगी सरकार की अनुमति का इंतजार कर रही हैं। अब ख़बर आई है कि इन बसों के ड्राइवरों ने कॉन्ग्रेस पार्टी के ख़िलाफ़ नारेबाजी की है। कहा जा रहा है कि इन ड्राइवरों को ठीक से खाना नहीं खिलाया जा रहा था, जिस कारण उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया।

ये बसें भरतपुर-आगरा सीमा पर खड़ी हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी का दावा है कि इनमें सैकड़ों बसें शामिल हैं। कभी बसों को लखनऊ भेजने की बात कही जा रही है तो कभी कागज़ी काम पूरा होने के कारण उनके वहाँ फँसे होने की बात बताई जा रही है।

यूपी व राजस्थान के कई कॉन्ग्रेस नेताओं ने भी धरना और विरोध प्रदर्शन किया। कॉन्ग्रेस नेताओं ने यूपी सरकार के ख़िलाफ़ जम कर नारेबाजी की। राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने योगी सरकार पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप मढ़ दिया।

वहीं राजस्थान में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियाँ ने कहा कि कॉन्ग्रेस की ओछी राजनीति का इतिहास रहा है लेकिन ये नहीं पता था कि वो इसके लिए कोरोना को भी अपना हथियार बना लेगी। उन्होंने कहा कि जहाँ राजस्थान में लाखों प्रवासी पैदल चल रहे हैं, कॉन्ग्रेस सस्ती लोकप्रियता के लिए ये सब कर रही है।

अलवर के कॉन्ग्रेस नेता जुबैर ख़ान इस पूरे प्रकरण में कॉन्ग्रेस की ओर से बढ़-चढ़ कर सक्रिय हैं। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष ज्ञानदेव आहूजा ने कहा कि पूरी ज़िंदगी में कभी कोई आंदोलन न करने वाले ज़ुबैर अब प्रियंका के कहने पर धरने दे रहे हैं।

आगरा जिले के नजदीक बॉर्डर पर मंगलवार (मई 19, 2020) को उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू अपने समर्थकों के साथ मौजूद थे, जहाँ से पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

अजय कुमार लल्लू के खिलाफ लखनऊ स्थित हजरतगंज थाने में आईपीसी की धारा 420/467/468 के अंतर्गत दर्ज कराया गया है। कॉन्ग्रेस ने इसे बलपूर्वक कार्रवाई करार दिया और कहा कि ये मानवता को शर्मसार करने वाला है। इस दौरान पुलिस और कॉन्ग्रेसियों के बीच झड़प भी हुई। योगी सरकार के ख़िलाफ़ नारे लगे।

इससे पहले कॉन्ग्रेस पार्टी ने यूपी सरकार को 1000 बसों की सूची सौंपने का दावा किया था। वो अलग बात है कि इनमें से 297 गाड़ियों में कोई न कोई गड़बड़ी है। 79 की फिटनेस नहीं है, 140 का बीमा समाप्त हो चुका है और 78 ऐसी हैं, जिनमें ये दोनों ही ख़त्म हो चुका है।

प्रियंका गाँधी द्वारा भेजे गए बसों की सूची में से 31 ऑटो थे, 69 एंबुलेंस, ट्रक या फिर अन्य वाहन थे। इसके साथ ही 70 ऐसे वाहनों की लिस्ट दी गई थी, जिसका कोई डेटा ही उपलब्ध नहीं था।

भारत में इस्लामोफोबिया कौन फैला रहा? वो अमेरिका और यूरोप जिन्होंने 14 इस्लामी देशों पर हमले किए

इस्लामोफ़ोबिया शब्द अमेरिका और यूरोप के बाद भारत के सन्दर्भ में भी स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही के वर्षों में हमने यह खूब देखा, जब भारत को इस्लामोफ़ोबिक साबित करने के नैरेटिव को सबसे ज्यादा हवा दी जाने लगी। कहा गया कि भारत भी इस्लामोफ़ोबिया से ग्रसित है, जहाँ मुस्लिम सुरक्षित नहीं हैं और इसके जिम्मेदार हिन्दू हैं।

इस्लामोफोबिया

लोरी पीक अमेरिका के कॉलोराडो विश्वविद्यालय में समाज विज्ञान की प्रोफेसर हैं। उन्होंने साल 2011 में ‘BEHIND THE BACKLASH- Muslim Americans after 9/11′ नाम की एक किताब लिखी थी। किताब के बाहरी आवरण पर एक ग्राफ्टी आर्ट (दीवारों पर पेंटिंग) दिखाया गया है, जिस पर ‘MUSLIMS GO HOME’ (मुस्लिम्स घर जाओ) लिखा है।

प्रोफेसर पीक ने अपनी पुस्तक के माध्यम से सितंबर 11, 2001 के आतंकवादी हमलों के बाद अमेरिकी बहुसंख्यक ईसाई नागरिकों में इस्लाम के प्रति भेदभाव की जानकारियों को प्रस्तुत किया है।

पुस्तक की प्रस्तावना में ही प्रोफेसर पीक ने अमेरिकी सरकार और चर्च दोनों के खास मजहब के विरुद्ध घृणा के कई उदाहरण क्रमबद्ध किए हैं। जैसे फ्रेंक्लिन ग्राहम ने इस्लाम को सबसे हानिकारक धर्म बताया था। ग्राहम जाने-माने ईसाई मिशनरी हैं और जॉर्ज बुश के शपथग्रहण समारोह में उन्होंने ही धार्मिक उपदेश दिया था।

प्रोफेसर ने इस बात का भी खुलासा किया कि अमेरिका पर हमले के तुरंत बाद (सितंबर-दिसंबर 2001) कुल 481 गैर-इस्लामिक अपराध दर्ज किए गए थे। इस दौरान तकरीबन 19 निर्दोष मुस्लिमों की हत्या भी हुई थी।

साल 2002 में भी ‘द एवरलास्टिंग हेटरेड’ नाम से एक पुस्तक छपी थी। इसके लेखक हॉल लिंडसे, जो कि एक ईसाई धर्मगुरु हैं, उन्होंने इस्लाम को धरती का सबसे बड़ा खतरा घोषित किया था।

साल 2007 में गेब्रियल ग्रीनबर्ग और पीटर गोस्चाक ने मिलकर ‘इस्लामोफोबिया: मेकिंग मुस्लिम एनिमी’ पुस्तक को लिखा। उन्होंने बताया कि अमेरिका के रक्षा विभाग से जुड़े एक बड़े अधिकारी जनरल विलियम बोयकिन ने कई ईसाई धर्मसभाओं को संबोधित किया और सामान्य अमेरिकी नागरिकों के मन में इस्लाम के खिलाफ जहर भर दिया।

उस दौरान इस तरह की दर्जनों किताबें, सैकड़ों लेख और प्रचार सामग्री अमेरिका के बाज़ारों में आने लगी थी। जिसके परिणामस्वरूप अगले एक दशक में अधिकतर अमेरिकी नागरिकों का इस्लाम के प्रति नकारात्मक भाव बन चुका था।

उदाहरण के तौर पर साल 2010 में अमेरिकी नेशनल पब्लिक रेडियो से जुड़ी पत्रकार जुआन विलियम्स ने सार्वजनिक रूप से कहा कि हवाई जहाज यात्रा के दौरान किसी खास मजहब के व्यक्ति की उपस्थिति उन्हें बैचैन कर देती है।

मजहब विशेष के प्रति इस अमेरिकी नजरिए को इस्लामोफोबिया कहा गया। यह एक पुराना शब्द है, जिसे 1910 में फ्रेंच प्रशासन द्वारा अपने मुस्लिम नागरिकों के प्रति व्यवहार के लिए इस्तेमाल में लाया गया था। सामान्य बोलचाल में इसका प्रयोग फिर से ब्रिटेन के एक प्रतिष्ठित शोध संस्थान ने साल 1997 में किया था।

उस साल संस्थान ने ‘इस्लामोफोबिया, ए चेलेंज फ़ॉर उस आल’ नाम से एक शोध प्रकाशित किया था। शोध से जुड़ी एक मुस्लिम शोधकर्ता फराह इलाही ने ब्रिटिश सरकार पर इस्लाम के प्रति भेदभाव के आरोप लगाए थे।

साल 2017 में संस्थान ने फिर से ‘इस्लामोफोबिया स्टिल ए चैलेंज फ़ॉर उस आल’ नाम से शोध का प्रकाशन किया। मतलब साफ है कि यूरोप में कुछ भी नहीं बदला और आज भी वहाँ इस्लाम के प्रति नकारात्मक सोच रखी जाती है।

अमेरिका और यूरोप के बाद इस्लामोफोबिया का प्रयोग अब भारत के लिए भी किया जाने लगा है। पिछले कुछ महीनों से लगातार एक झूठा प्रचार फैलाया जा रहा है कि मजहब विशेष के लोग भारत में सुरक्षित नहीं है और इसके जिम्मेदार हिन्दू हैं।

यह प्रचार नागरिकता संशोधन कानून से शुरू हुआ और कोरोना संक्रमण में भी चलता आ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जो देश खुद इस्लामोफोबिया से बुरी तरह ग्रस्त है वही आज भारत को धर्मनिरपेक्षता का ज्ञान अथवा प्रवचन दे रहे है। 

भारत में इस्लाम का इतिहास तब से है, जब पैगम्बर मोहम्मद जिन्दा थे। अमेरिका का उस दौरान कोई वजूद ही नहीं था। मोहम्मद बिन कासिम (712 ईसवी) से लेकर आखिरी मुगल बादशाह तक हज़ार सालों का लिखित इतिहास है – जिसमें हिन्दुओं का नरसंहार हुआ, मंदिरों को तोड़ा गया, जबरन धर्म परिवर्तन किए गए, महिलाओं के साथ बलात्कार और बच्चों को गुलाम बनाया गया।

ब्रिटिश इतिहासकार एचएम इलियट की बहुचर्चित पुस्तक ‘द हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया – एज टोल्ड बाय इट्स ओन हिस्टोरियंस’ (1867) के पृष्ठ संख्या 121-122 के अनुसार हिन्दू राजा दाहिर की मृत्यु के बाद ‘मुस्लिमों ने नरसंहार से अपनी प्यास बुझाई थी’।

ईश्वरी प्रसाद अपनी पुस्तक ‘हिस्ट्री ऑफ़ मेडिवल इंडिया’ (1921) में लिखते हैं कि मुलतान में 17 साल से ऊपर के हर उस हिन्दू का कत्ल किया गया, जिसने इस्लाम को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

केएस लाल अपनी पुस्तक ‘ग्रोथ ऑफ़ मुस्लिम पापुलेशन इन मेडिवल इंडिया’ में महमूद गजनवी द्वारा 20 लाख हिन्दुओं के नरसंहार का उल्लेख करते हैं। 

दुर्भाग्य से अमानवीय और क्रूरता के सिलसिले कभी नहीं रुके और अगले 700 सालों तक भारत में यही सब होता रहा। अभी 70 साल पहले ही इस्लाम के नाम पर भारत का विभाजन भी कर दिया गया।

खुद एक यूरोपियन पत्रकार लियोनार्ड मोसेली अपनी पुस्तक ‘द लास्ट डेज ऑफ़ द ब्रिटिश राज’ में भारत विभाजन पर हृदयविदारक घटनाओं का जिक्र कुछ इस तरह किया है –

“अगस्त 1947 से अगले नौ महीनों में 1 करोड़ 40 लाख लोगों का विस्थापन हुआ। इस दौरान करीब 6,00,000 लोगों की हत्या कर दी गई। बच्चों को पैरों से उठाकर उनके सिर दीवार से फोड़ दिए गए, बच्चियों का बलात्कार किया गया, बलात्कार कर लड़कियों के स्तन काट दिए गए और गर्भवती महिलाओं के आतंरिक अंगों को बाहर निकाल दिया गया।”

इन मार्मिक घटनाओं को देखते हुए सरदार पटेल ने प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को 2 सितम्बर, 1947 को पत्र लिखा, “सुबह से शाम तक मेरा पूरा समय पश्चिम पाकिस्तान से आने वाले हिन्दू और सिखों के दुख और अत्याचारों की कहानियों में बीत जाता है।”

इस तरह की भयावह स्थितियों का सामना यूरोप के किसी देश और अमेरिका को नहीं करना पड़ा, जो 7वीं सदी से हिन्दू झेलते आ रहे हैं। इतना होने के बावजूद, हिन्दुओं की सहिष्णुता कायम रही और व्यक्तिगत तौर पर मुस्लिमों को नुकसान भी नहीं पहुँचाया।

उपरोक्त तथ्य को आसानी से भी समझा जा सकता है, क्योंकि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी भारत में ही रहती है। दूसरी तरफ, अमेरिका को 80 के दशक में पहली बार इस्लामिक आतंकवाद का सामना करना पड़ा। नतीजतन तब से अब तक अमेरिका 14 मुस्लिम देशों पर हमले अथवा बम गिरा चुका है।

इसमें ईरान, लीबिया, लेबनान, कुवैत, ईराक, सोमालिया, बोसनिया, सऊदी अरब, अफगानिस्तान, सूडान, कोसोवो, यमन, पाकिस्तान और सीरिया शामिल है। ‘द इकोनॉमिस्ट’ की साल 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन हमलों में कितने निर्दोष लोगों की जान चली गई, इसका अनुमान भी पेंटागन को नहीं है।

भारतीय संस्कृति और पश्चिम के देशों में यही एक मूलभूत अंतर है कि हमने अपने अत्याचारों का बदला निर्दोष लोगों के खून से नहीं लिया। हमने इस्लामिक आतंकवाद, कट्टरवाद और अतिवाद का प्रतिकार किया है, क्योंकि मानवीय मूल्यों के नाते यह बेहद जरूरी कदम है।  

अब बात करते हैं, इस्लाम के ‘विक्टिमहुड’ यानी उत्पीड़ित होने की। वास्तव में, इस्लामोफोबिया शब्द एक भ्रम है, जिसका इस्तेमाल अपने पापों को छुपाने के लिए किया जा रहा है। साल 2006 में एक पोस्टर सामने आया था, जिस पर लिखा था – “हर उस व्यक्ति का सिर कलम कर दो, जो इस्लाम को हिंसक बताता है।”

मुझे नहीं लगता कि अब इस विषय पर ज्यादा स्पष्टीकरण की जरूरत है। यह एक पोस्टर ही पूरी विचारधारा की सच्चाई बयाँ कर देता है।     

कुछ वेबसाइट्स जो कि इस्लामिक जेहाद पर नज़र रखती है, उनका दावा है कि इस जेहाद के चलते पिछले 1400 सालों में तक़रीबन 270 मिलियन लोगों का नरसंहार हो चुका है।

इसलिए तथाकथित इस्लामिक पैरोकार पहले अपने आंतरिक आतंकवादी और जेहादी स्वरूप के खिलाफ बोलना शुरू करें, जिससे दुनिया में शांति और सौहार्द्र को स्थापित किया जा सके और इस्लामोफोबिया को भी खत्म करने का भी यही एकमात्र रास्ता है। 

    

ऑपइंडिया और इनके सम्पादकों के हालिया उत्पीड़न पर CEO राहुल रौशन का संदेश

पिछले कुछ दिनों में आपने देखा होगा कि हम कुछ जाने-पहचाने दुरात्माओं के साथ ही कुछ असामान्य लोगों/संस्थाओं के एक सामूहिक हमले के केंद्रबिंदु थे, या यूँ कहें कि लम्बे समय से ऐसे अवांछित तत्वों के निशाने पर थे।

सही मायनों में कहा जाए तो हमले हमें परेशान नहीं करते हैं। अगर ये लोग हम पर हमला नहीं करते हैं, तो हमें ऐसा लगता है कि हम कुछ सही नहीं कर रहे हैं, कुछ दमदार काम नहीं है। इसलिए सबसे पहले, ऐसे नफरत करने वालों को धन्यवाद, और आग्रह कि वे हम पर हमला करते रहें। दुराग्रह इसलिए भी क्योंकि जब-जब नफरत और घृणा के इंधन से चलने वाले लोगों ने हमारे साथ ऐसा किया है, तो हम और भी बड़े और मजबूत होकर उभरे हैं।

अब, जब सब कुछ कहा और किया जा चुका है, तो ऑपइंडिया एवं इनके सम्पादकों, नुपुर शर्मा (अंग्रेजी) और अजीत भारती (हिन्दी) के समर्थन में बोलने वाले हमारे पाठकों, समर्थकों, हमारे अपने लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद। आप सभी ने न केवल हमारे लिए आवाज़ उठाई बल्कि आर्थिक सहायता भी प्रदान की और हर कदम पर हमारा साथ दिया।

चीजों के थोड़ा सुलझने के बाद, मैंने दोनों संपादकों से कहा कि हमें सिर्फ एक ही दवाब के नीचे सर झुकाना है, और वो है ऐसे समयों में लोगों द्वारा ऑपइंडिया पर दिखाया गया अटूट विश्वास। यह एक ऐसा अभूतपूर्व समर्थन है, जिसे हमने वेबसाइट के लॉन्च के बाद से सीधा अब देखा। हम वास्तव में आप सभी के प्रति अभिभूत और आभारी हैं। साथ ही, आपको भरोसा दिलाते हैं नफरत करने वालों का, किसी तरह का, कोई भी दबाव सफल नहीं होने वाला है।

कहीं न कहीं, इस घटना ने दोनों संपादकों को और अधिक मजबूत और ज़्यादा ऊर्जावान बना दिया है। देखा जाए तो वास्तव में उनकी गलती क्या थी? अजीत की गलती यह थी कि उन्होंने एक दुःखी पिता की बातों पर भरोसा किया, जबकि नुपुर की गलती यह थी कि वह भारत के एक विशेष पूर्वी हिस्से में रहती हैं!

वैसे, दोनों अलग-अलग मामले थे, एक-दूसरे से कोई संबंध नहीं होने के साथ पूरी तरह से अलग-अलग घटनाओं से संबंधित। बस एक अजीब संयोग है कि दोनों एक ही समय पर हुआ। जानबूझकर या सुनियोजित ढंग से? यह हम नहीं जानते।

फिलहाल, हमें कानूनी रूप से सलाह दी गई है कि सार्वजनिक रूप से इस पर अटकलबाजी या बहस न करें और यही सलाह भविष्य के लिए भी है। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि वे गलतियाँ करेंगे ही नहीं, लेकिन जब आप जैसे हमारे शुभचिंतक उन्हें इशारा करेंगे, तो वे इसमें संशोधन भी करेंगे। लेकिन इस बार, उनकी एकमात्र गलती यह थी कि वे विचारधाराओं के विभाजन के दूसरी ओर खड़े थे। लेकिन हमारा यही वैचारिक रुख अटल है। यही भारत की आत्मा है, पहचान है और यह बदलने वाला नहीं है।

इसलिए, टीम को दिखाए गए समर्थन के लिए एक बार फिर हार्दिक धन्यवाद। हम जो कुछ भी हैं आपलोगों के दम से हैं और अंत में हम यहीं कहेंगे कि हमारे साथ आप सदैव दृढ़ता से बने रहिए।

राहुल रौशन


नोट: यह मूल रूप से इंग्लिश में लिखे गए ‘पाठकों के नाम नोट’ का हिंदी अनुवाद है।

TikTok पर एसिड अटैक को प्रमोट करने वाली मेकअप आर्टिस्ट के खिलाफ FIR, फैजल का दिया था साथ

सोशल मीडिया एप्लीकेशन टिक-टॉक (TikTok) पर एसिड अटैक का महिमामंडन करने में फैजल सिद्दीकी का साथ देने वाली मेकअप आर्टिस्ट के खिलाफ भी शिकायत दर्ज किया गया है। एडवोकेट चाँदनी शाह ने ट्विटर पर इसकी जानकारी दी है।

बता दें कि फैजल ने इस तरह के वीडियो से ये दिखाने की कोशिश की कि अगर कोई महिला आपको रिजेक्ट करती है तो आप उस पर एसिड अटैक कर के इसका बदला लो, जो कि बेहद ही घृणित अपराध है। फैजल के साथ वीडियो में नजर आने वाली लड़की का नाम आलिया हामिदी बताया जा रहा है।

एडवोकेट चाँदनी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए ट्विटर पर लिखा, “बदला लेने के लिए एसिड फेंकने के घृणित अपराध को बढ़ावा देने के लिए फैजल सिद्दीकी के tiktok वीडियो में महिला मेकअप कलाकार के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई। वह अपने सोशल मीडिया हैंडल पर Faby_makeupartist के रूप में जानी जाती है।”

वकील चाँदनी ने अपने ट्वीट के साथ एफआईआर की कॉपी भी शेयर की है। इस पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि फिर वापस ले लेना केस, ठीक है। इसका जवाब देते हुए चाँदनी कहा, “मैं वापस लेने के लिए भी कुछ कर रही हूँ। आपसे तो उतना भी नहीं हो रहा। तो पहले आप कितने पानी में हैं, वो भी देखना सीख लीजिए।”

गौरतलब है कि फैजल सिद्दीकी का अकाउंट बैन कर दिया गया है। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने ट्विटर पर इसकी सूचना दी। उन्होंने बताया कि उनके कार्यालय को टिक-टॉक (TikTok) की तरफ से सूचित किया गया है कि फैजल सिद्दीकी का अकाउंट सस्पेंड हो गया है। इसके बाद दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा समेत अन्य लोगों ने भी रेखा शर्मा को धन्यवाद दिया।

बता दें कि वायरल वीडियो में फैज़ल लड़की से कहता है- “उसने तुम्हें छोड़ दिया, जिसके लिए तुमने मुझे छोड़ा था?” इसके बाद लड़की के चेहरे पर एक लिक्विड फेंका जाता है और उसका चेहरा पूरा जल जाता है। उसने एसिड अटैक को प्रमोट किया था। इस मामले में फैजल सिद्दीकी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। वकील अभिषेक राजपूत ने एफआईआर की कॉपी ट्विटर पर शेयर की थी। एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल ने भी फैज़ल पर निशाना साधा था।

उल्लेखनीय है कि फैजल सिद्दीकी ने दीपिका पादुकोण की फ़िल्म ‘छपाक’ का समर्थन किया था, जिसमें एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं की व्यथा दिखाने का दावा किया गया था। दीपिका फिल्म के प्रमोशन के लिए जेएनयू गई थीं, इसीलिए फैजल ने ऐसा किया था। दीपिका ने भी एसिड अटैक को लेकर लोगों को वीडियो बनाने की सलाह दी थी, जिसके बाद उनकी आलोचना हुई थी। उनके टिक-टॉक चैलेन्ज को लोगों ने एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के दर्द का मजाक बताया था।

बसों की गलत जानकारी देने, धोखाधड़ी के आरोप में UP कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अजय लल्लू हिरासत में, FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश में बसों को भेजने के मामले के कारण विवाद बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में आगरा जिले के नजदीक बॉर्डर पर मंगलवार को उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू अपने समर्थकों के साथ मौजूद थे, जहाँ से पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अजय कुमार लल्लू के खिलाफ लखनऊ स्थित हजरतगंज थाने में आईपीसी की धारा 420/467/468 के अंतर्गत दर्ज कराया गया है।

अजय कुमार लल्लू को हिरासत में लिए जाने के बाद कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने भी इस मामले पर ट्वीट करते हुए लिखा –

“यूपी सरकार ने हद कर दी है। जब राजनीतिक परहेजों को परे करते हुए त्रस्त और असहाय प्रवासी भाई-बहनों की मदद करने का मौका मिला तो दुनिया भर की बाधाओं को सामने रख दिया। योगी जी इन बसों पर आप चाहें तो बीजेपी का बैनर लगवा दीजिए, अपने पोस्टर बेशक लगवा दीजिए लेकिन हमारे सेवाभाव को मत ठुकराइए। इस राजनीतिक खिलवाड़ में तीन दिन बर्बाद हो चुके हैं। इन तीन दिनों में हमारे देशवासी सड़कों पर चलते हुए दम तोड़ रहे हैं।”

एक अन्य ट्वीट में प्रियंका गाँधी ने लिखा – “उप्र सरकार का खुद का बयान है कि हमारी 1049 बसों में से 879 बसें जाँच में सही पाईं गईं। ऊँचा नागला बॉर्डर पर आपके प्रशासन ने हमारी 500 बसों से ज्यादा बसों को घंटों से रोक रखा है। इधर दिल्ली बॉर्डर पर भी 300 से ज्यादा बसें पहुँच रही हैं। कृपया इन 879 बसों को तो चलने दीजिए।”

प्रियंका गाँधी ने कहा- “हम आपको कल 200 बसें की नई सूची दिलाकर बसें उपलब्ध करा देंगे। बेशक आप इस सूची की भी जाँच कीजिएगा। लोग बहुत कष्ट में हैं। दुखी हैं। हम और देर नहीं कर सकते।”

कॉन्ग्रेस द्वारा भेजी गई बसों की हकीकत

वहीं, कॉन्ग्रेस द्वारा जिन बसों को भेजने का दावा किया जा रहा है उनकी वास्तविकता यह है कि इसमें 31 ऑटो, 69 एम्बुलेंस/ट्रक व दूसरे वाहन हैं जबकि, 70 वाहनों के बारे में सरकारी रिकॉर्ड में कोई डाटा ही नहीं हैं या अवैध हैं। वहीं, 297 वाहनों के बीमा और फिटनेस नहीं है।

मंदिर में मांस, बलात्कारी सवर्ण, भटके हुए कट्टरपंथी, डरे हुए पत्रकार: हिन्दूफोबिया की घृणा से सना है ‘पाताल लोक’

मनोरंजन इंडस्ट्री में दशकों से जमे इकोसिस्टम को देखें तो ये तो मानना ही पड़ेगा कि इनमें से काफ़ी लोग प्रतिभाशाली और क्रिएटिव रहे हैं। एक ऐसी चीज, जो दक्षिणपंथी निर्माता-निर्देशकों-लेखकों में या तो है नहीं या फिर उन्हें इसे दिखाने के उचित मौके नहीं मिले। हम बात कर रहे हैं अमेजन प्राइम पर आए वीडियो सीरीज ‘पाताल लोक’ की, जिसमें हिन्दू-घृणा कूट-कूट कर भरी हुई है। अगर कथित सवर्णों के प्रति घृणा को भी जोड़ दें तो ‘पाताल लोक’ कई अवॉर्ड्स जीत सकती है।

आख़िर क्या है ‘पाताल लोक’? कहानी आउटर जमुना पार पुलिस स्टेशन की है। यही है पाताल लोक, जहाँ पुलिस अधिकरी पोस्टिंग होने से भागते हैं। शुरू में ही बता दिया जाता है कि कहाँ-कहाँ पोस्टिंग होना स्वर्ग लोक के समान है और कहाँ पृथ्वी लोक के सामान। ‘पातल लोक’ का एक बना बनाया सिस्टम है, जो वैसे ही चला आ रहा है। अधिकतर मामलों में केस की जाँच शुरू होने से पहले ही फ़ैसला सुनाया जाता है और फिर परिणाम तक पहुँचा जाता है।

इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी इस सीरीज के मुख्य किरदार हैं, जिसे जयदीप अहलावत ने अदा किया है। हमने उन्हें अक्षय कुमार के ‘गब्बर इज बैक’ में एक जाँच अधिकारी के किरदार में देखा था। उस किरदार में से ग्लैमर हटा कर उसे और ग़रीब बना दिया जाए तो ‘पाताल लोक’ का उनका किरदार बन जाता है। वही मध्यम वर्गीय पुलिस अधिकारी जिसकी बीवी भी रुपए कमाने की जुगत में लगी है, जो अपने बेटे को किसी तरह महँगे स्कूल में पढ़ा रहा है, जिसका सालों से प्रमोशन नहीं हुआ, जिसे पुलिस विभाग में कम बुद्धि वाला माना जाता है।

यहाँ हम कहानी की चर्चा नहीं करेंगे। अनुष्का शर्मा ने इस सीरीज को प्रोड्यूस किया है, जिन्हें सोशल मीडिया पर सितारों की बधाइयों का ताँता लगा हुआ है। जयदीप की एक्टिंग सही में शानदार है। और हाँ, वामपंथ की यही ख़ासियत है कि चीजों को इतनी बारीकी से आपके समक्ष पेश किया जाता है कि वो वास्तविकता से भी ज़्यादा वास्तविक लगने लगता है। निर्देशन में मेहनत की जाती है, दृश्यों के बदलने में क्रिएटिविटी दिखाई जाती है- जैसे बंदूक का चलना और अगले ही दृश्य में कैमरे का चमकना।

‘पीके’ वाला फंडा: तब भगवान शंकर थे, अब नरसिंह हैं

वैसे तो ये दृश्य अंतिम एपिसोड में आता है लेकिन इसका जिक्र सबसे पहले करना ज़रूरी है। जब आमिर ख़ान से पूछा गया था कि उन्होंने ‘पीके’ में हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक क्यों बनाया तो उन्होंने जवाब दिया कि ऐसा तो होता है, नसीरुद्दीन शाह की फिल्म ‘जाने भी दो यारों’ में ऐसा हुआ था। बता दें कि उस फ़िल्म के अंतिम दृश्य में महाभारत और अनारकली वाले नाटक को मिक्स कर दिया जाता है। इसी तरह ‘पाताल लोक’ में भी जब इंस्पेक्टर चौधरी भागते रहते हैं तो एक मेले चल रहे भक्त प्रह्लाद वाले नाटक में पहुँच जाते हैं।

गुंडे उनका पीछा कर रहे होते हैं, जिनसे भागते-भागते वो स्टेज पर चढ़ जाते हैं। संयोग देखिए कि ठीक उसी समय खम्भे को फाड़ कर हिरण्यकश्यप राक्षस के समक्ष भगवान विष्णु के अवतार नरसिंह प्रकट होते हैं। नरसिंह के किरदार को भागते हुए इंस्पेक्टर चौधरी जोर का धक्का देकर निकल जाते हैं। नरसिंह सीधा हिरण्यकश्यप के ऊपर गिरते हैं। सोचिए, अगर ऐसा किसी और धर्म या मजहब के ईश्वर के साथ किया गया रहता तो क्या होता? क्या ये सीरीज रिलीज हो पाती?

निर्देशक फराह खान, अभिनेत्री रवीना टंडन और कॉमेडियन भारती सिंह ने एक शो के दौरान बाइबिल के किसी शब्द को लेकर हल्का सा मजाक कर दिया था तो इतना विरोध हुआ था कि उन तीनों को माफ़ी माँगनी पड़ी थी। इतने पर भी बात नहीं बनीं तो भारत में वेटिकन के आर्कबिशप के पास जाकर लिखित माफ़ीनामा सौंपना पड़ा था। यही सेलेब्रिटीज हिन्दुओं के मामले में ख़ुद के न झुकने का दिखावा करते हुए निडरता का स्वांग भरते हैं। समुदाय विशेष या ईसाईयों का एक समूह भी विरोध कर दे तो इनकी घिग्घी बँध जाती है।

हिंदूवादियों से लोग डरते हैं, वो मारकाट मचाते रहते हैं

अगर अपराधियों के महिमामंडन की कोई प्रतियोगिता होगी तो ‘पाताल लोक’ को सबसे ऊपर की श्रेणी में रखा जाएगा। ट्रेन में एक महिला अपनी युवा बेटी के साथ बैठी होती है। सामने कुछ समुदाय विशेष के लोग बैठे होते हैं, जिनमें से एक युवक से युवती प्रभावित हो रही है और बार-बार उसकी तरफ देखती है। जैसे ही वो खाने की पोटली निकालते हैं, उसमें माँस देखते ही महिला को चक्कर आ जाता है और उलटी आने लगती है। ‘अच्छे’ मजहब वाले उसे पानी ऑफर करते हैं, जिसे वो ‘घृणा’ के कारण ठुकरा देती है।

शायद इस दृश्य से हम हिन्दुओं के इस ‘घटिया’ व्यवहार का पता चलता है। अरे, हमलोग तो बिना किसी कारण समुदाय विशेष को हमेशा हेय दृष्टि से देखते हैं न। अब आते हैं एक अपराधी कबीर एम पर। जिन चार अपराधियों के इर्दगिर्द ये फ़िल्म घूमती है, वो उनमें से एक है। एक मुस्लिम, एक दलित, एक हिन्दू और एक ट्रांसजेंडर- 4 अपराधियों का ऐसा कॉकटेल है कि इनके ‘मानवीय पक्षों’ को उभार कर इन्हें सिर्फ़ इसीलिए बेचारा साबित किया जाता है क्योंकि इन्हें आईएसआई-पाकिस्तान वगैरह के केस में ‘फँसाया’ जा रहा है।

तो कबीर एम समुदाय विशेष का व्यक्ति है लेकिन किसी को बताता नहीं। उसके पास ऑपरेशन का एक मेडिककल सर्टिफिकेट मिलता है। उसके पिता हाथीराम से कहते हैं कि उनके बड़े बेटे को विशेष मजहब से होने के कारण मार डाला गया था। उस दृश्य में भगवा झंडा लिए हिंदूवादी कत्लेआम मचाते दिखते हैं। कबीर के पिता कहते हैं कि इसी कारण उन्होंने अपने दूसरे बेटे को मुस्लिम तक नहीं बनने दिया लेकिन आपलोगों ने उसे आतंकवादी बना दिया।

दरअसल, ये वही था जिसने माँस खाने के लिए निकाला था ट्रेन में। कुछ याद आया? जुनैद हत्याकांड के बारे में प्रचारित किया गया था कि उसे बीफ के कारण ट्रेन में मारा गया जबकि वो सीट का झगड़ा था। बस इसी दृश्य को एक तरह से प्रोपेगंडा के अनुसार रीक्रिएट किया गया है। उस देश की कहानी है, जहाँ मुस्लिमों के 20 करोड़ से भी अधिक होने का दम्भ उसी समाज के तथाकथित ठेकेदारों द्वारा भरा जाता है और 15 मिनट के लिए पुलिस हटाने की धमकी दी जाती है।

इस्लामोफोबिया से ग्रसित है ये देश

‘पाताल लोक’ एक और सन्देश ये देती है कि आप चाहें कितने भी ऊपर चले जाओ, देश आपको समुदाय विशेष से होने का एहसास पग-पग पर दिलाता रहेगा। इसके लिए हाथीराम के अंतर्गत काम करने वाले पुलिसकर्मी इमरान अंसारी का किरदार गढ़ा गया है। वो यूपीएससी क्लियर कर लेता है, और काफ़ी सौम्य है। यानी, हर हिसाब से एक अच्छा मुस्लिम। जब सीबीआई की महिला अधिकारी को पता चलता है कि इमरान ने यूपीएससी निकाला है तो वो कहती हैं- “आजकल काफ़ी आ रहे हैं न इनके कम्युनिटी से?”

जब वो इंटरव्यू देकर निकलता है तो एक दूसरा प्रतियोगी उस पर तंज कसते हुए कहता है, “अरे तेरा तो हो ही जाएगा। उनलोगों को भी तो रिप्रजेंटेशन दिखानी होती है।” यहाँ तक कि इंटरव्यू लेने वाले भी उसे ‘पॉजिटिव’ होने की सलाह देते हैं, जब उससे मुस्लिम समुदाय के उत्थान को लेकर सवाल पूछा जाता है। उसके सामने हाथीराम कबीर को ‘कटुआ’ कहता है। हाँ, उसका पैंट खोल कर उसका मजहब चेक करता है। बेचारा इमरान! हिंदूवादी सिस्टम के बीच फँसा हुआ है।

पत्रकारों पर हो रहे हैं जुल्म, ख़तरे में मीडिया की स्वतंत्रता

इस सीरीज में आपको बार-बार एहसास दिलाया जाएगा कि समय बदल गया है। हम सभी को पता है कि लिबरल गैंग के लिए समय मई 2014 के बाद से ही बदला है। एक पत्रकार है, जो सत्ता से सवाल पूछता है। ये किरदार नीरज काबी ने काफ़ी अच्छे से निभाया है। चैनल की टीआरपी गिर रही है, मालिक दबाव बना रहा है कि उसे निकल जाना चाहिए। लेकिन हाँ, वो जैसे ही आईएसआई और पाकिस्तान की बातें शुरू करता है, उसे टीआरपी आने लगती है। जानते हुए कि ये तो सीबीआई की बनी बनाई बातें हैं।

चाहे वो ‘ट्रोल आर्मी’ की बात हो या फिर या फिर रोज मिल रही धमकियों की, इस अँग्रेजी पत्रकार के किरदार को यूँ गढ़ा गया है जैसे वो ये दिखा रहें हों कि मोदी युग में पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं। साथ ही सीधा सन्देश है कि अगर किसी मामले को आईएसआई या पाकिस्तान से जुड़ा पाया जाए तो उस पर शक कीजिए, इन्वेस्टीगेशन पर शक कीजिए। क्यों? क्योंकि आजकल एकाध दर्जन ख़ून करने वाले ‘बेचारे अपराधियों’ को भी ऐसे मामलों में घसीट कर आतंकवादी बता दिया जा रहा है।

मनोरंजन इंडस्ट्री का सवर्णोफोबिया

‘मिर्जापुर’ में त्रिपाठी खानदान ने आतंक मचा रखा था। ‘आर्टिकल-15’ में तो जानबूझ कर उन्नाव गैंगरेप व हत्या केस के असली आरोपितों की पहचान छिपा कर उनकी जगह पर कथित उच्च-जाति के लोगों को फिट किया गया। ‘सेक्रेड गेम्स’ में त्रिवेदी सबसे बड़े विलेन्स में से एक होता है। गायतोंडे समुदाय विशेष के लोगों को मारता है। ठीक इसी तरह, ‘पाताल लोक’ में भी जगह-जगह सवर्ण दलितों पर अत्याचार करते दिखते हैं। पंजाब में तो एक सवर्ण समूह एक दलित एक्टिविस्ट का सिर काट लेता है। दूसरे की माँ के साथ सबके सामने बलात्कार करता है।

‘वाजपेयी’ (अनूप जलोटा ने ये किरदार निभाया है) दलितों के सबसे बड़े नेता बन कर बैठे हैं, जो छिपा कर अपनी गाड़ी में गंगाजल लेकर चलते हैं। दलितों के साथ खाने का दिखावा कर वो उसी से नहा कर ‘पवित्र’ होते हैं। शुक्ला उनके लिए काम करता है। त्यागी सबसे बड़ा हत्यारा है। यानी, जहाँ भी कथित सवर्ण दिखें, वहाँ वो किसी न किसी दलित पर अत्याचार कर रहे होते हैं। एक तरह से इस इंडस्ट्री ने जांतिवाद की खाई को और बढ़ाने का ठेका ले रखा है। एक ‘साधु महाराज’ माँ की गालियाँ बकते हैं और माँस खाते-परोसते हैं, वो भी मंदिर के प्रांगण में।

शुक्ला कान पर जनेऊ रख कर होटल में पराई स्त्री के साथ सेक्स करता दिखता है। वैसे अगर ये लोग चाहते तो इमरान को यूपीएससी के इंटरव्यू की जगह किसी बम ब्लास्ट की प्लानिंग करने भी भेज सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। समुदाय विशेष का किरदार तो हर जगह पीड़ित ही है, दलित जहाँ है वहाँ कथित सवर्णों के अत्याचार ही झेल रहा है बेचारा। इमरान भी बेचारा है।

दक्षिणपंथ विरोधी प्रोपेगेंडा है ‘पाताल लोक’

कुछ और चीजों को देखें तो एक कुतिया का नाम सावित्री है। गुंडों का कनेक्शन चित्रकूट से है, जहाँ दत्तात्रेय, वाल्मीकि, मार्कण्डेय और अत्रि जैसे ऋषियों ने क़दम रखे थे। क्या जानबूझ कर रामायण से जुड़े स्थान को गुंडों से जोड़ कर दिखाया गया? इन सबके बारे में सोशल मीडिया पर भी चर्चा चल रही है। वैसे बॉलीवुड पहले से ही गुंडों को चन्दन-टीका करने वाला और महादेव या देवी का भक्त बताता रहा है। हाँ, ‘अच्छे मुस्लिम’ ज़रूर पाँच वक़्त नमाज पढ़ते हैं।

इसका अर्थ क्या निकाला जाए? यही कि जो ज्यादा शास्त्र पढ़ लेता है या फिर मंदिरों वगैरह से जिसका ज़्यादा जुड़ाव है- वो गुंडा और कातिल बन जाता है? वामपंथी पत्रकार को पाकिस्तान जाने धमकियाँ मिलती है। इन चीजों से पता चलता है कि ये सीरीज पूरी तरह वामपंथी प्रोपेगेंडा है।