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पीड़ित दलितों को नागरिकता मिल रही तो विरोध क्यों? अफवाह से बाज आएँ अर्बन नक्सल: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई जनसभा में पुलिस के योगदान की सराहना की और आरोप लगाया कि कुछ लोग परदे के पीछे से पुलिसकर्मियों पर हो रहे हमलों की साज़िश रच रहे हैं। पीएम मोदी ने वहाँ उपस्थित लोगों से पूछा कि क्या पुलिस का आदर नहीं होना चाहिए। पीएम मोदी ने “शहीदों, अमर रहो” का नारा लगवाया। उन्होंने लोगों से निवेदन किया कि वो पुलिस का सम्मान करें, शहीदों का सम्मान करें और पुलिस से भाईचारा बढ़ाएँ। पीएम मोदी ने कहा कि हिंसा फैलाने वाले दो तरह के लोग हैं:

  • एक वो जिनकी राजनीति दशकों तक झूठ फैलाने पर ही टिकी हुई है।
  • दूसरे वो लोग जो समझते थे कि वो ही सरकार हैं और वो जो इतिहास बताएँगे, वही सच माना जाएगा। ख़ुद को भारत भाग्य विधाता मानने वालों ने अब बाँटो और राज़ करो वाली नीति पर काम करना शुरू कर दिया है।

सीएए के बारे में बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ये क़ानून भारत के किसी नागरिक के लिए है ही नहीं, चाहे वो हिन्दू-मुस्लिम हो या सिख-ईसाई। उन्होंने कहा कि देश के 130 करोड़ लोगों से इसका कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि एनआरसी कॉन्ग्रेस ने बनाया था। उन्होंने कहा कि उस एनआरसी को लेकर हौवा खड़ा किया जा रहा है, जो न कैबिनेट में आया है और न ही उसके नियम-कायदे तय हुए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि जिस सरकार ने लोगों को घर दिया है, वो कैसे किसी को निकाल सकती है?

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने लोगों को चीख-चीख कर बताया है कि कौवा कान लेकर उड़ गया और कुछ लोग कौवे के पीछे भाग निकले। पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों को कौवे के पीछे भागने से पहले अपना कान तो चेक कर लेना चाहिए। पीएम मोदी ने लोगों को समझाया कि एनआरसी पूरे देश में आया ही नहीं है, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केवल असम में आया है। पीएम ने कहा कि कुछ पढ़े-लिखे नक्सली, अर्बन नक्सल अफवाह फैला रहे हैं कि सारे कथित अल्पसंख्यकों को डिटेंशन सेंटर में भेज दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अफवाह के बाद पढ़े-लिखे लोग भी पूछ रहे हैं ये डिटेंशन सेंटर क्या होता है?

पीएम मोदी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वो सीएए क्या है, एक बार पढ़ लें। पीएम मोदी ने कहा कि जो देश की मिट्टी के मुस्लिम हैं, उन्हें कहीं नहीं भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अर्बन नक्सल्स के अफवाहों के उलट देश में कोई डिटेंशन सेंटर है ही नहीं। उन्होंने कहा कि झूठ फैलाया जा रहा है कि जो लोग बाहर से आएँगे, वो देश के लोगों का हक़ छीन लेंगे। पीएम ने समझाया कि ये एक्ट उन लोगों के लिए है, जो वर्षों से भारत में रह रहे हैं। किसी नए शरणार्थी को इस क़ानून का फ़ायदा नहीं मिलेगा।

पीएम ने कहा कि पाकिस्तान से भारत आए अधिकतर शरणार्थी दलित हैं, जिन्हें अधिकार मिला है। उन्होंने आश्चर्य जताया कि कुछ दलित नेता भी सीएए का विरोध कर रहे हैं। पीएम ने बताया कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के बहू-बेटियों को बेचा जाता है, उनसे जबरन शादियाँ की जाती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ही प्रताड़ित लोग भाग कर भारत आए और वो पहले से ही भारत में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें इस समय ये साबित करना चाहिए था कि पाकिस्तान कैसे मानवाधिकार हनन करता है और वहाँ अल्पसंख्यकों की क्या परिस्थिति है, लेकिन देश के बदले दल देखने वाले लोगों ने ये मौक़ा गँवा दिया।

पीएम ने जिक्र किया कि कुछ दिनों पहले दिल्ली के ही एक शरणार्थी कैम्प में जन्म हुआ, जिसका नाम नागरिकता गया। पीएम मोदी ने हुड़दंग मचाने वालों से पूछा कि उत्पीड़ित दलितों को नागरिकता मिल रही है तो इससे हुड़दंगियों को क्या दुश्मनी है? पीएम ने इस दौरान अवैध घुसपैठियों की भी बात की। उन्होंने लोगों को पीड़ित शरणार्थी और घुसपैठियों के बीच अंतर समझने की अपील की।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (दिसंबर 22, 2019) को रामलीला मैदान में एक विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि कई राजनीतिक दल भ्रम फैला कर लोगों की भावनाओं को भड़का रहे हैं। उन्होंने पूछा कि जब केंद्र सरकार ने दिल्ली के सैंकड़ों कॉलनियों को वैध करने का काम किया तो क्या किसी से भी उनका धर्म पूछा था? मोदी ने कहा कि किसी से क्या सबूत माँगा गया था कि वो किस पार्टी को वोट देते हैं? उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों को इसका लाभ मिला, क्योंकि भाजपा देश से लगाव के कारण जीती है और वो ख़ुद देश के विकास के मंत्र के प्रति समर्पित हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि एक ही स्तर में दो बिल पारित हुए, जिनमें से एक क़ानून से 40 लाख लोगों को अधिकार दिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि विपक्ष अफवाह फैला रहा है कि भाजपा सरकार अधिकार छीनने वाला काम कर रही है। पीएम ने कहा कि उज्ज्वला के तहत 8 करोड़ लोगों को मुफ्त गैस कनेक्शन मिला लेकिन किसी ने न जाति पूछी गई, न नागरिकता का प्रमाण माँगा गया और न ही मजहब पूछा गया। पीएम मोदी ने कहा कि आगे भी हर ग़रीब परिवार को उज्ज्वला योजना का लाभ पहुँचाया जाएगा।

पीएम मोदी ने बताया कि उनकी सरकार ने 1.5 करोड़ लोगों को घर दिया लेकिन किसी लाभार्थी से उसका जाति-धर्म नहीं पूछा गया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग ‘कागज़-कागज़’ और ‘सर्टिफिकेट-सर्टिफिकेट’ रट रहे हैं और मुस्लिमों को भड़का रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि आयुष्मान योजना में बिना किसी का धर्म पूछे गरीबों का इलाज हो रहा है। पीएम ने कहा कि झूठे आरोप लगा कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को बदनाम करने की साज़िश हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में अराजकता का माहौल फैलाया जा रहा है। पीएम ने कहा:

“लोगों की गाड़ियों पर हमले किए गए। छोटी-छोटी दुकानों को जलाया गया है। सरकारी संपत्ति को आग में ख़ाक कर दिया गया है। उनकी राजनीति और इरादे कैसे हैं, ये देश भली-भाँति समझ चुका है। मैं ऐसे लोगों से कहता चाहता हूँ- जब मैं पहली बार जीत कर आया तो कुछ लोगों को ये समझ ही नहीं आया कि ये कैसे हो गया। दूसरी बार मुझे हराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा कर झूठ फैलाया गया लेकिन देश की जनता ने पहले से ज्यादा आशीर्वाद दे दिया। ये सदमा कुछ लोग अभी भी सहन नहीं कर पा रहे कि मोदी दोबारा कैसे आ गया? जिस दिन से नतीजे आ गए हैं, तभी से देश में तूफ़ान खड़ा करने के इरादे हैं। अगर आपको मोदी पसंद नहीं है तो मोदी को गाली दो, मोदी का पुतला जलाओ, जूते मारो लेकिन देश की सम्पत्ति मत जलाओ।”

पीएम ने कहा कि जिन पुलिसकर्मियों पर पत्थर बरसा कर उन्हें जख्मी किया जा रहा है, उनसे मैं पूछना चाहता हूँ कि पुलिसवालों के साथ हिंसा कर के उन्हें कर क्या मिलेगा? उन्होंने बताया कि पुलिसवाले किसी के दुश्मन नहीं होते, सरकारें बदलती हैं। उन्होंने आँकड़े गिनाते हुए कहा कि आज़ादी के बाद से अब तक 33,000 पुलिसकर्मियों ने देश के लिए बलिदान दिया है। मोदी के ऐसा कहते ही ‘मोदी तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं’ के नारे से लोगों ने उनकी हौसला-आफजाई की। पीएम मोदी ने कहा कि पुलिसकर्मियों को बेरहमी से मारा जा रहा है, जो बिना मौसम देखे हुए दिन-रात लोगों के भले के लिए खड़े रहते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि जब दिल्ली की मंडी में आग लगी थी, तब पुलिस वालों ने बिना महजब देखे ही लोगों को बचाया था। बता दें कि रानी झाँसी रोड में लगी आग में यूपी-बिहार के कई लोग मारे गए थे। पीएम मोदी ने कहा कि जिन पुलिसकर्मियों ने तुम्हें बचाया, उन्हीं पर पत्थर चलाया जा रहे हो?

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यूपी पुलिस ने चौराहे पर टाँगी दंगाइयों की तस्वीर, कहा- बवालियों की पहचान कर फ़ौरन खबर करें

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने हिंसा और आगजनी की। इन दंगाइयों पर यूपी पुलिस लगातार शिंकजा कसने में लगी है। इसी कड़ी में गाजियाबाद पुलिस ने शुक्रवार को हुए प्रदर्शन के दौरान उपद्रव करने वालों की तस्वीर जारी की है। इनकी तस्वीर वाले पोस्टर चौराहे पर लगाए हैं और लोगों से इनकी पहचान कर जानकारी देने की अपील की है।

प्रदर्शन के दौरान जिले के लोनी थाना क्षेत्र में उपद्रवियों ने काफी हिंसा की थी। इनकी पहचान के लिए तस्वीरों वाले पोस्टर बीच चौराहों पर लगाए गए हैं। इनके बारे में सूचना देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी।

शुक्रवार को CAA ख़िलाफ़ हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद पत्थरबाज़ी और बवाल काटने के मामले में जिले के 4 थानों में 451 ज्ञात समेत क़रीब 5000 अज्ञात पर मुक़दमा दर्ज किया गया है। इनमें पूर्व विधायक ज़ाकिर अली, सभासद सलाउद्दीन, सपा नेता रिज़वान सैफी, आरिफ़ के नाम भी शामिल हैं।

ख़बर के अनुसार, एसएसपी ने बताया कि फ़िलहाल साहिबाबाद से 44, मुरादनगर से 17 और लोनी से 4 आरोपितों को गिरफ़्तार किया गया है। अज्ञात दंगाइयों की पहचान के लिए सामने आई फ़ोटो और वीडियो फुटेज के माध्यम से की जा रही है। बता दें कि शुक्रवार को हुए बवाल में दंगाइयों ने जमकर पत्थरबाज़ी की थी। 

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने देर रात घंटाघर कोतवाली, मुरादनगर, लोनी बॉर्डर और साहिबाबाद में सात मुक़दमे दर्ज किए थे। ग़ौर करने वाली बात यह है सबसे ज़्यादा मुक़दमे लोनी क्षेत्र में दर्ज हुए। लोनी औक लोनी बॉर्डर में ही 3200 से अधिक ज्ञात और अज्ञात दंगाइयों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है। वहीं, सबसे अधिक गिरफ़्तारियाँ साहिबाबाद क्षेत्र में हुई। कुल मिलाकर अब तक गाज़ियाबाद में 135 से अधिक उद्रवियों को गिरफ़्तार किया जा चुका है।

इससे पहले गोरखपुर में पुलिस ने उपद्रवियों की फ़ोटो सोशल मीडिया पर जारी की थी। गोरखपुर पुलिस ने भी कहा था कि दंगाइयों के संबंध में सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा और सहयोग करने वालों को उचित ईनाम भी दिया जाएगा। एक्शन में आई योगी सरकार ने राजधानी लखनऊ के खदरा इलाक़े में हिंसक विरोध-प्रदर्शन के दौरान उपद्रव मचाने वाले दंगाइयों के स्कैच जारी किए थे।

लखनऊ हिंसा में 250 लोग गिरफ्तार (तस्वीर साभार: News-18)

शनिवार (21 दिसंबर) को लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया था कि 250 दंगाइयों को वीडियो फ़ुटेज और फ़ोटो के आधार पर पहचान कर गिरफ़्तार किया गया। उन्होंने बताया था कि दंगाइयों की गिरफ़्तारी के लिए छापेमारी जारी है। इसके अलावा पुलिस प्रशासन आरोपितों पर रासुका (NSA) और सम्पत्ति कुर्क की कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रामलीला मैदान में विशाल जनसभा को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने सीएए और दिल्ली की अनधिकृत कॉलनियों को लेकर बड़ा बयान दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार ने दिल्ली के 40 लाख लोगों के जीवन में नया सवेरा लाने का काम किया है। पीएम मोदी ने कहा कि अनधिकृत कॉलनियों को पक्की किए जाने के फ़ैसले के बाद दिल्ली के लोगों के मन में अपने घरों को लेकर जो अनिश्चितता थी, वो ख़त्म हो गई। अपने सम्बोधन की शुरुआत करते हुए पीएम ने कहा कि जीवन से जब अनिश्चितता निकल जाती है, एक बड़ी चिंता हट जाती है तो उसका प्रभाव क्या होता है, ये मैं आज आप सभी के चेहरों पर देख रहा हूँ। इसके बाद लोगों ने ‘मोदी है तो मुमकिन है’ के नारे से पीएम की इस बात का स्वागत किया।

प्रधानमंत्री ने बताया कि दिल्ली की 1700 से ज़्यादा कॉलनियों की बाउंड्री चिह्नित करने का काम पूरा किया जा चुका है और 1200 से ज़्यादा कॉलनियों के नक़्शे डिजिटल रूप से डाले जा चुके हैं। पीएम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों से दिल्ली ने कॉलनियों को पक्का करने की माँग की थी, उन लोगों ने दिल्ली के सबसे आलिशान इलाक़ों में 2000 से ज़्यादा बँगले अवैध तरीके से अपने कारोबारियों को दे रखे थे। पीएम ने कहा कि इन बँगलों के बदले किसे क्या मिला, ये सबको पता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब केंद्र सरकार ने ग़रीबों को उनका घर देने का निर्णय लिया, तब रोड़े अटका रहे थे। पीएम ने कहा- “उन्हें शायद पता नहीं था। ये मोदी है।” उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार ने 40 लाख से ज्यादा लोगों को उनके घर का हक़ दिया। पीएम ने इस दौरान दिल्ली मेट्रो के विस्तार पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले इस नेटवर्क में 14 किलोमीटर प्रति वर्ष की रफ़्तार से विस्तार हो रहा था। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार आने के बाद केजरीवाल सरकार के अवरोधों के बाद प्रतिवर्ष 25 किलोमीटर नए मेट्रो रूट बन रहे हैं। पिछले 5 वर्ष में 116 किलोमीटर नई लाइनें शुरू हैं और 170 किलोमीटर नए रूट पर काम हो रहा है।

पीएम मोदी ने दिल्ली की बसों की खस्ता हालत को लेकर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। प्रदूषण ख़त्म करने की दिशा में हो रहे प्रयासों के बारे में बताते हुए पीएम ने कहा कि सैंकड़ों नए सीएनजी स्टेशन बने हैं, कई उद्योगों को पीएनजी पर लाया गया है और हज़ारों ईंट-भट्ठों को नई तकनीक से जोड़ा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार राज्य की सबसे बड़ी समस्या, अर्थात पीने की पानी की समस्या से आँख मूँद कर बैठी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि घरों में गन्दा पानी आने की वजह से लोग या तो वाटर प्यूरीफायर लगा रहे हैं या फिर बोतल ख़रीद रहे हैं।

सीएए को लेकर हुए उपद्रव पर बोलते हुए पीएम ने कहा कि कौन लोग आग लगाने का काम कर रहे हैं, ये जनता को बखूबी पता है। पीएम ने कहा कि दलितों और शोषितों के लिए नागरिकता संशोधन क़ानून लाया गया है। इसके बाद लोगों ने खड़े होकर देश की संसद के सम्मान में ‘जय श्री राम’ का नारा लगा कर सीएए का स्वागत किया। पूरा रामलीला मैदान ‘जय श्री राम’ के नारों से गूँज उठा।

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SIMI, ओवैसी की पार्टी से जुड़े कानपुर हिंसा के तार, ममता बनर्जी के नेता नहीं कर पाएँगे लखनऊ में प्रवेश

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर यूपी में हो रहे हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए कानपुर में सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। शनिवार को दोपहर बाद उपद्रवियों ने यतीमखाना पुलिस चौकी पर हमला बोल दिया था। इस मामले में आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है। 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं 15 अन्य को हिरासत में लिया गया है।

कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि यतीमखाने में हुई हिंसा में आतंकवादी संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (SIMI) का हाथ है। साथ ही इस घटना को अंजाम देने वालों में हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) से जुड़े नेता का नाम भी सामने आ रहा है। इस बीच, ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं के लखनऊ में प्रवेश करने पर रोक लगा दी गई है।

कानपुर (पूर्व) के एसपी ने कहा, “12 लोगों को गिरफ्तार किया है और 15 अन्य को हिरासत में लिया गया है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। हम लोगों से अपील करते हैं कि अफवाहों पर विश्वास न करें और शांति बनाए रखें।”

दैनिक जागरण की रिपोर्ट में बताया गया है कि शनिवार को यतीमखाना में दंगा भड़काने के आरोप में सुन्नी उलमा काउन्सिल के महामंत्री हाजी सलीस समेत 14 लोगों को नामजद किया गया है। हाजी सलीस आतंकवादी संगठन SIMI से भी जुड़ा रहा है। साथ ही एडीजी प्रेम प्रकाश के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि पुलिस की जाँच में सामने आया है कि उपद्रव करने वालों में तमाम लोग AIMIM से जुड़े हैं। गिरफ्तार होने वालों में मोहम्मद यासीन, अब्दुल रहमान, मोहम्मद मुस्तफा, परवेज खान, मोहम्मद अरमान, नदीम, मोहसिन, मोहम्मद ताहिर और मोहम्मद अहसान का नाम शामिल है।

इस बीच, उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह ने इस बाबत कहा, “हमें पता चला है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के कुछ राजनीतिक नेता यहाँ (लखनऊ) आना चाहते हैं। हम उन्हें इसके लिए अनुमति नहीं देंगे, क्योंकि क्षेत्र में धारा 144 लागू है और उनका यहाँ आना माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना सकता है।”

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शुक्रवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों में भड़की आग शनिवार को भी सुलगती रही। कानपुर में दूसरे दिन भी यह आग धधक उठी और उग्र भीड़ ने यतीमखाना पुलिस चौकी पर हमला करते हुए जमकर पत्थरबाजी और आगजनी की। पेट्रोल व देसी बम भी फेंके।

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टेरर फंडिंग पर पाकिस्तान से FATF ने पूछे 150 सवाल, आतंकवाद में संलिप्त मदरसों पर भी मॉंगा जवाब

फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) ने पाकिस्तान से 150 सवाल पूछे हैं। FATF दुनियाभर में टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों पर जर रखती है। सवाल आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर इमरान खान की सरकार के दावों से जुड़े हैं। उन मदरसों पर कार्रवाई की बाबत भी जवाब मॉंगा गया है जो आतंकी गतिविधियों में संलिप्त हैं। पाकिस्तान को इन सारे सवालों के जवाब 8 जनवरी तक देने होंगे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान ने 7 दिसंबर को ही एफएटीएफ के 22 सवालों का जवाब दिया था। अब एफएटीएफ ने पाकिस्तान से आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों पर अदालती कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही मदरसों को आतंकी गतिविधियों से दूर रखने के लिए उठाए गए कदमों का ब्यौरा भी मॉंगा है।

ख़बर के अनुसार, FATF ने पाकिस्तानी अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि आतंकवादी संगठनों से जुड़े व्यक्तियों को दोषी ठहराया जाए। FATF द्वारा 150 सवालों के जवाब माँगे जाने की पुष्टि पाकिस्तानी अधिकारियों ने की है।

पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट में डाला जाए या नहीं यह फरवरी में होनी वाली FATF की बैठक में तय होगा। पिछले साल फरवरी में ही पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला गया था। पाकिस्तान इस उम्मीद में है कि अगली बैठक में भी उसे ब्लैक लिस्ट में डालने का फ़ैसला टल जाएगा और उसे जून 2020 तक की नई मियाद मिल जाएगी। हालाँकि, FATF ने पिछली मीटिंग में पाकिस्तान को कड़े लहज़े में कहा था कि अगर उसने तय समय-सीमा में ऐंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और काउंटर-टेरर फाइनैंसिंग के 27 में से बाकी बचे 22 बिंदुओं (सवालों) पर उचित कार्रवाई नहीं की तो उसे ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाएगा।

पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने वहाँ के वित्त मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से लिखा कि पाकिस्तान ने 7 दिसंबर को ही एफएटीएफ के 22 सवालों का जवाब दिया था। उन्हीं जवाबों पर एफएटीएफ ने दोबारा 150 सवाल पूछ डाले। अब पाकिस्तान को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनैंसिंग पर नए सवालों के जवाब देने होंगे।

पाकिस्तान FATF को यह भी बताएगा कि उसने पैसे की सीमा पार अवैध आवाजाही पर रोक के लिए कौन-कौन से क़दम उठाए। 7 दिसंबर को पाकिस्तान ने जो कंप्लायंस रिपोर्ट सौंपी थी, उसमें संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी समूहों पर इमरान सरकार के ऐक्शन और उन्हें कोर्ट से मिली सज़ा के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी थी। पाकिस्तान अब तक चीन, तुर्की, मलेशिया, सऊदी अरब और मध्य पूर्व देशों के राजनयिक समर्थन के कारण ब्लैकलिस्ट से बचने में सफल रहा है।

‘मुर्गीघर की रखवाली लोमड़ी करे तो सतर्क रहने की ज़रूरत, हर आतंकी गतिविधि के पीछे होता है पाकिस्तान’

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बुलेट प्रूफ जैकेट को चीरती हुई निकली दंगाई की गोली, जेब में विराजमान शिवजी ने बचाई कॉन्स्टेबल की जान

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद शुरू हुआ हिंसक-प्रदर्शन शनिवार को भी जारी रहा। इस दौरान कॉन्स्टेबल विजेंद्र कुमार को नया जीवन मिला। प्रदर्शन के दौरान दंगाइयों ने फायरिंग की। इस दौरान एक बुलेट विजेंद्र कुमार के बुलेटप्रूफ जैकेट के आर-पार चली गई। लेकिन सिक्कों से भरे पर्स में जाकर गोली फँस गई। विजेंद्र ने पर्स जैकेट की ऊपर वाली जेब में रखा हुआ था।

विजेंद्र ने कहा, “यह मेरा दूसरा जीवन है। मैं भगवान का शुक्रगुजार हूँ। कल विरोध-प्रदर्शन के दौरान यह गोली लगी थी। मुझे वास्तव में ऐसा लग रहा है कि यह मेरा दूसरा जीवन है।” उन्होंने बताया, “भारी पथराव और फायरिंग के बीच मुझे हिंसक भीड़ को रोकना था। इसी दौरान एक गोली मेरे सीने की तरफ आई। मेरी बुलेटप्रूफ जैकेट तो इससे नहीं बचा पाई, लेकिन मेरा पर्स जिसमें मैंने भगवान शिव की तस्वीर रखी थी ने बचा लिया।”

जब विरोध-प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया और फायरिंग शुरू हुई उस वक़्त विजेंद्र कुमार फिरोजाबाद एसपी के एस्कॉर्ट में शामिल थे। फिरोजाबाद एसपी सचिंद्र पटेल ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि विजेंद्र कुमार भाग्यशाली थे, वो बाल-बाल बच गए। पटेल ने बताया कि हिंसक भीड़ पुलिसवालों पर फायरिंग कर रही थी। थानाध्यक्ष, सब इंस्पेक्टर और कॉन्स्टेबल सहित 40 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर प्रदेश में हुई हिंसा को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करनी शुरू कर दी है। उपद्रवियों की पहचान कर एफआईआर दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार का सिलसिला जारी है। साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने हिंसा के बाद हुए नुकसान की भरपाई के लिए एक 4 सदस्यीय कमेटी बना दी है, जो गिरफ्तार लोगों को पैसा वसूल करेगी। सीएम के इस ऐलान के दो दिन बाद शनिवार से ही उपद्रवियों की पहचान कर नोटिस भेजना शुरू हो गया है। मुजफ्फरनगर में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 50 दुकानों को सील कर दिया है।

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भीम आर्मी के चंद्रशेखर से मायावती ने दलितों को किया सचेत, कहा- यूपी का होकर दिल्ली के जामा मस्जिद जाता है

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हो रहे ​हिंसक प्रदर्शनों को लेकर दलित नेतृत्व के बीच मतभेद स्पष्ट दिख रहा है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने कार्यकर्ताओं को पहले ही इससे दूर रहने को कहा था। अब उन्होंने भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण पर इसको लेकर निशाना साधा है। उन्होंने चंद्रशेखर पर विरोधियों के हाथ खेलने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश का होकर भी वह दिल्ली के जामा मस्जिद जाता है और जबरन अपनी गिरफ्तारी करवाता है।

मायावती ने सिलसिलेवार ट्वीट के जरिये भीम आर्मी चीफ़ को लताड़ लगाई है। उन्होंने ट्वीट कर कर कहा है कि दलितों का मानना है कि षड्यंत्र के तहत चंद्रशेखर ऐसे राज्यों में जाता है जहॉं चुनाव करीब हो और बीएसपी की पकड़ हो। वोटों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर प्रदर्शन वगैरह कर वह फिर जबरन जेल चला जाता है।

मायावती ने कहा कि वह (चंद्रशेखर) उत्तर प्रदेश का रहने वाला है। लेकिन, CAA/ NRC पर वो यूपी के बजाए वह दिल्ली के जामा मस्जिद में हो रहे विरोध-प्रदर्शन में शामिल होता है। जबरन अपनी गिरफ़्तारी करवाता है, क्योंकि दिल्ली में जल्द ही विधानसभा चुनााव होने हैं। उन्होंने कहा, “मैं पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करती हूँ कि वे ऐसे सभी स्वार्थी तत्वों, संगठनों व पार्टियों से हमेशा सचेत रहें। वैसे ऐसे तत्वों को पार्टी कभी लेती नहीं है, चाहे वे कितना ही प्रयास क्यों न कर लें।”

दरअसल, रविदास मंदिर की घटना के दौरान हुए आंदोलन पर अपनी गिरफ़्तारी से मुक्त होने के बाद, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने बसपा सुप्रीमो मायावती की तरफ़ दोस्ती का हाथ बढ़ाया था और भाजपा के ख़िलाफ़ एकजुट होने के लिए कहा था। चंद्रशेखर, जो मायावती को ‘बुआ’ या चाची के रूप में संदर्भित करता है, उसने मायावती को एक खुला पत्र लिखा था, जिसमें चंद्रशेखर ने बहुजन आंदोलन को मज़बूत करने के लिए चर्चा में शामिल होने के लिए कहा था ताकि वह दलित विरोधी नीतियों के लिए भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ लड़ सके। हालाँकि, बसपा प्रमुख ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था, क्योंकि बसपा इसे दलितों के बीच भ्रम पैदा करने की चाल मानती है।

ग़ौरतलब है कि शुक्रवार (20 दिसंबर) को चंद्रशेखर आज़ाद दिल्ली के जामा मस्जिद पर हुए प्रदर्शन में दिखा था। बाद में उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था।

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नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर प्रदेश में हुई हिंसा को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। उपद्रवियों की पहचान कर एफआईआर दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार का सिलसिला जारी है। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ उत्तर प्रदेश के कई जिलों में शनिवार (दिसंबर 21, 2019) को भी हिंसक प्रदर्शन जारी रहा। उपद्रवी तत्वों ने पुलिस पर हमले किए, कई वाहनों में आग लगा दी और तोड़फोड़ की।

यूपी पुलिस ने बताया कि CAA के दौरान हुई हिंसा में शामिल 705 लोगों को गिरफ्तार व 4500 लोगों को हिरासत में लेने के बाद छोड़ दिया गया है। पुलिस द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार अब तक 124 एफआईआर दर्ज की गई है, वहीं इस हिंसा में अभी तक कुल 263 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें से 57 पुलिसकर्मी को बुलेट इंजरी आई हैl हिंसाग्रस्त क्षेत्रों से 405 खोखा कारतूस बरामद हुए हैं।

इस बीच गोरखपुर में पुलिस ने उपद्रवियों की फोटो सोशल मीडिया पर जारी करते हुए पहचान बताने वालों को ईनाम देने की घोषणा की है। पुलिस ने कहा है कि उपद्रवियों की सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम गोपनीय रखा जाएगा और सहयोग करने वालों को उचित ईनाम दिया जाएगा।

विज्ञप्ति में बताया गया है कि सोशल मीडिया पर भी पुलिस की नजर लगातार बनी हुई है और वह बड़ी कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने बताया कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर किए गए आपत्तिजनक/ भ्रामक पोस्टों/ मैसेज आदि के संबंध में प्रदेश में अब तक कुल 63 एफआईआर दर्ज की गई हैं, वहीं 102 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। कुल 14101 सोशल मीडिया पोस्टों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। इनमें टि्वटर की 5965, फेसबुक की 7995 और यूट्यूब की 141 आपत्तिजनक पोस्ट शामिल हैं।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश में सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार ने हिंसा के बाद हुए नुकसान की भरपाई के लिए एक 4 सदस्यीय कमेटी बना दी है, जो गिरफ्तार लोगों को पैसा वसूल करेगी। सीएम के इस ऐलान के दो दिन बाद शनिवार से ही उपद्रवियों की पहचान कर नोटिस भेजना शुरू हो गया है। मुजफ्फरनगर में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 50 दुकानों को सील कर दिया है।

वहीं अलीगढ़ में इंटरनेट सेवाएँ बहाल कर दी गई हैं। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़कने के बाद 15 दिसंबर से सेवाओं को निलंबित कर दिया गया था।

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दंगाई भीड़ में शामिल 7-14 साल के बच्चों ने की पत्थरबाज़ी, जबलपुर के SP का चौंकाने वाला ख़ुलासा

मध्य प्रदेश के जबलपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित सिंह ने चौंकाने वाला ख़ुलासा किया है। उन्होंने बताया कि नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध कर रहे दंगाइयों की भीड़ में शामिल 7 से 14 साल के बच्चों ने पुलिस पर पत्थरबाज़ी की। उन्होंने कहा उपद्रवियों में शामिल 7-14 साल के बच्चों को नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (NRC) के बारे कुछ नहीं पता, बावजूद इसके उन्होंने न सिर्फ़ पुलिस पर पथराव किया बल्कि वाहनों को भी क्षतिग्रस्त किया।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि आमतौर पर यह आरोप पुलिस पर लगाया जाता है कि उन्होंने बच्चों पर लाठीचार्ज किया और नाबालिगों पर आँसू गैस का इस्तेमाल किया। लेकिन, अब भी शहर के कुछ हिस्से ऐसे हैं जहाँ छोटे बच्चे उत्पात मचा रहे हैं। उन्होंने कहा, “न केवल बच्चे बल्कि उनके अभिभावकों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जाएगी।” हिंसा के बाद स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए इलाक़े में कर्फ़्यू लगा दिया गया है।

जबलपुर में नागरिकता क़ानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (NRC) के ख़िलाफ़ उग्र हुई भीड़ ने एक विरोध मार्च के दौरान काफ़ी हिंसक रूप ले लिया था।

ख़बर के अनुसार, हिंसक भीड़ ने न केवल पुलिसकर्मियों, बल्कि मीडिया कर्मियों पर भी जमकर पथराव किया और सार्वजनिक सम्पत्तियों को नुक़सान पहुँचाया। कुछ पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया।

एसपी अमित सिंह ने आगे कहा कि उग्र हुई भीड़ में नक़ाबपोश बच्चों की बड़ी संख्या में मौजूदगी इस बात का स्पष्ट संकेत था कि उन्हें कुछ तत्वों द्वारा भड़काया गया था। उपद्रवियों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले दागने पड़े। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता स्थिति को नियंत्रण में लाने की रहती है। उन्होंने जानकारी दी कि इलाक़े के चार पुलिस स्टेशनों में कर्फ़्यू लगा दिया गया है।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि शुक्रवार (20 दिसंबर) को जुमे की नमाज के बाद स्थानीय लोगों ने छोटे समूहों में विभाजित होकर, छोटी गलियों में घुसकर जुलूस का नेतृत्व करने की कोशिश की। बच्चों और किशोरों की भीड़ ने पत्रकारों और कैमरापर्सन पर भी हमला किया। कई मीडियाकर्मियों को पत्थरों से मारा गया।

नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में शुक्रवार की दोपहर हज़ारों लोगों के सड़कों पर उतरने के बाद मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंसक विरोध-प्रदर्शन किया गया। दंगों के बाद चार थाना क्षेत्रों- अधारताल, हनुमंतल, गोहलपुर और कोतवाली में कर्फ़्यू लगा दिया गया।

फ़िलहाल, जबलपुर में कर्फ़्यू में ढील दी गई है। मध्य प्रदेश के 50 ज़िलों में धारा-144 लगी हुई है। भोपाल क़ाज़ी ने शांति की अपील की है।

दंगों से कुछ तस्वीरें, जो बताती हैं पुलिस वाले भी चोट खाते हैं, उनका भी ख़ून बहता है…

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