पश्चिम बंगाल में भवानीपुर के साथ समसेरगंज और जंगीरपुर में भी आज उपचुनाव हो रहे हैं। इस बीच समसेरगंज में बम फेंके जाने के मामले में टीएमसी नेता अनारुल को पकड़ा गया है।
दिल्ली के अंसल प्लाजा का अकीला (Aquila) रेस्टोरेंट बंद हो गया है। यह बगैर लाइसेंस के चल रहा था। यह रेस्टोरेंट पिछले दिनों साड़ी विवाद को लेकर सुर्खियों में था।
अबरार ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज को गाली देकर अपमानित कर कहते हैं, "नहीं हमको इनका वोट नहीं चाहिए। मुसलमान ही हमारे वास्तविक वोटर्स हैं। ये सब $%@..चोट्टा है।"
कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन ने उन पर निशाना साधा। वह बोले पार्टी में हर किसी की सुनवाई होती है। इसलिए उस संगठन को नीचा नहीं दिखाना चाहिए जिसने उन्हें पहचान दी।
चर्चा है कि छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस दो गुटों में बँट गई है। टीएस सिंहदेव का धड़ा आलाकमान से ढाई साल वाला वादा पूरा करने का दबाव बना रहा है। जबकि, भूपेश बघेल अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
रवि ने कहा कि यह कॉन्ग्रेस के सिद्धारमैया थे जिन्होंने एक मुस्लिम मौलवी को धर्मस्थल के पुजारी के रूप में स्थापित करने के लिए झूठ का ऐसा जाल बुना था, जो कई सदियों पहले के इतिहास और परंपरा के साथ खिलवाड़ है।
कन्हैया कुमार का कॉन्ग्रेस ज्वाइन करना आश्चर्य व्यक्त करने वाली घटना नहीं है। वर्तमान भारतीय राजनीति के सेक्युलर दलों के बीच एक्सचेंज प्रोग्राम चल रहा है।
सिद्धू ने अपना इस्तीफा देने के बाद पहला वीडियो संदेश जारी किया। सिद्धू ने कहा, वह अपने मुद्दों से समझौता नहीं कर सकते हैं, हक और सच की लड़ाई को वह लड़ते रहेंगे।
उमर खालिद को पिछले साल 14 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था, वो भी उत्तर पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के मामले में। उसपे ट्रंप दौरे के दौरान साजिश रचने का आरोप है
सुल्ताना ने कहा, ''सिद्धू साहब सिद्धांतों के आदमी हैं। वह पंजाब और पंजाबियत के लिए लड़ रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू के साथ एकजुटता दिखाते हुए’ इस्तीफा दे रही हूँ।"
जनहित याचिका को सयान बनर्जी द्वारा दायर किया गया था। इस पर मुख्य न्यायाधीश (कार्यवाहक) राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ ने सुनवाई की।
असम के दर्रांग जिले में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई हिंसा को लेकर मध्य-पूर्व के इस्लामवादियों ने एक टारगेट प्रोपेगेंडा कैंपेन शुरू किया है।
उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों के अलावा यूपी के कई क्षेत्रों को लेकर भी अलर्ट जारी किया गया था। बताया गया था कि नेपाल सीमा वाले क्षेत्र में 400 से अधिक मजहबी संस्थान खुले।
यह अल्पज्ञात तथ्य है कि लता मंगेशकर ने शुरुआती समय में समाज सेवा के लिए गायन छोड़ने का मन बना लिया था। लेकिन सावरकर के समझाने पर वह इसी दिशा में बढ़ीं।