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भाई को मंत्री न बनाए जाने से संजय राउत नाराज़: कहा- हम माँगने वाले लोग नहीं, सरकार गठन में हमारा योगदान

महाराष्ट्र में कैबिनेट विस्तार हुआ और उद्धव ठाकरे सरकार में एनसीपी के अजित पवार उप-मुख्यमंत्री बने। वहीं उनके बेटे आदित्य ठाकरे को भी कैबिनेट में शामिल किया गया। कॉन्ग्रेस के कोटे से सिने अभिनेता रितेश देशमुख के भाई अमित देशमुख को मंत्री बनाया गया। वो दिवंगत मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण भी कॉन्ग्रेस कोटे से मंत्री बने। हालाँकि, इन सबके बीच शिवसेना के कई विधायकों की नाराज़गी भी सामने आई, जो अजित पवार को उप-मुख्यमंत्री बनाए जाने और शिवसेना विधायकों को नज़रअंदाज़ किए जाने से नाराज़ हैं। लेकिन, इन सबके बीच कोई और भी निराश है।

सुनील राउत 2014 में मुंबई सब-अर्बन क्षेत्र के विखरोली विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में भी उन्हें जीत मिली। दोनों बार उन्होने शिवसेना के टिकट पर ही चुनाव लड़ा। अंदेशा जताया जा रहा था कि संजय राउत के भाई को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा लेकिन ऐन मौके पर उनका नाम हटाए जाने के आरोप लग रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में तो यहाँ तक दावा किया गया कि सुनील राउत शिवसेना से इस्तीफा भी दे सकते हैं। सुनील राउत, शिवसेना के प्रवक्ता और पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत के भाई हैं।

संजय राउत को ही शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस गठबंधन का सूत्रधार माना जाता है। उन्होंने ही भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ कर उद्धव को मुख्यमंत्री बनाए जाने की पहल की। उन्होंने बार-बार “अगला मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा” बोल कर भाजपा गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिलने के बावजूद राजग से नाता तोड़ लिया। भाई को मंत्री न बनाए जाने वाले सवाल पर संजय राउत ने नाराज़गी की ख़बरों को नकार दिया लेकिन उनके बयान में थोड़ी झल्लाहट दिखी। संजय राउत ने कहा:

“हम माँगने वाले लोग नहीं हैं। हम देने वाले लोग है। हमने हमारे लिए या फिर हमारे परिवार के लिए कभी कुछ नही माँगा है। हम हमेशा हमारी पार्टी मे हमारा योगदान देने वाले लोग है। कुछ लोग मेरे परिवार को लेकर अफवाह फैला रहे हैं। हमलोग ठाकरे परिवार के प्रति हमेशा वफादार रहे हैं। मेरे परिवार ने महाराष्ट्र में सरकार गठन में योगदान दिया है। ये तीन दलों की सरकार है और सभी दलों में योग्य लोग हैं। कोटे के तहत जिसे जो मिला, स्वीकार्य है। मैं इसी बात से ख़ुश हूँ की हमारे नेता उद्धव राज्य के मुख्यमंत्री हैं। मेरे भाई सुनील ने कभी मंत्रीपद की माँग नहीं की।

संजय राउत ने कहा कि उनका परिवार मंत्री बनने के लिए राजनीति में नहीं आया है बल्कि संगठन को मजबूत करने के लिए आया है। उन्होंने कहा कि उनके भाई सुनील लम्बे समय से विधायक रहे हैं लेकिन उन्होंने कभी भी मंत्री बनने की इच्छा नहीं जाहिर की। उन्हों कहा कि सुनील व उनके जैसे हज़ारों लोग लगातार पार्टी व महाराष्ट्र की जनता के लिए काम करने में लगे हुए हैं।

36 नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद अब महाराष्ट्र सरकार में कुल 43 मंत्री हो गए हैं। 33 कैबिनेट मंत्रियों में से 10 शिवसेना के हैं, 12 एनसीपी के और 10 कॉन्ग्रेस के हैं। एक मंत्री ‘क्रन्तिकारी शेतकरी पक्ष’ का है। 10 राज्यमंत्रियों में से 1 शिवसेना का, 5 एनसीपी के और 2 कॉन्ग्रेस के हैं। शिवसेना कोटे से एक निर्दलीय को राज्यमंत्री बनाया गया है। वहीं ‘प्रहार जनशक्ति पक्ष’ के विधायक को राज्यमंत्री का पद दिया गया है।

देश के पहले CDS होंगे जनरल बिपिन रावत, PM मोदी ने निभाया लाल किले से किया गया बड़ा वादा

सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत को देश का पहला ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ’ नामित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से देश को ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ’ के गठन की सौगात दी थी। इससे न सिर्फ़ तीनों सेनाओं के आपसी सामंजस्य को बढ़ावा मिलेगा बल्कि उनकी समस्याओं पर ग़ौर करने के लिए भी रक्षा मंत्री का एक सलाहकार होगा। अब तक ये मामले केंद्रीय रक्षा सचिव ही देखते आ रहे थे, जिनके पास कोई सैन्य अनुभव नहीं होता। केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल सिंह गुर्जर ने विपिन रावत को ‘चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS)’ बनाए जाने की पुष्टि की है।

सरकार ने बताया है कि सीडीएस 65 वर्ष की उम्र तक सेवा देने के योग्य रहेगा। हालाँकि, अभी तक सीडीएस का कात्याकाल निश्चित निर्धारित नहीं किया गया है। जनरल विपिन रावत इस वर्ष 31 दिसंबर को रिटायर होने वाले हैं। सीडीएस एक फोर स्टार जनरल होगा, जो रक्षा मंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार के रूप में काम करेगा। वो ‘चीफ ऑफ स्टाफ कमिटी’ का स्थायी अध्यक्ष भी होगा। परम विशिष्ट सेवा मैडल, उत्तम युद्ध सेवा मैडल, अति विशिष्ट सेवा मैडल, युद्ध सेवा मैडल, सेना मैडल और विशिष्ट सेवा मैडल से सम्मानित जनरल रावत को सीडीएस बनाए जाने पर सोशल मीडिया में उन्हें बधाइयाँ दी गईं।

केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री कृष्णा पाल सिंह गुर्जर ने कहा कि भारत सरकार के इस बड़े रणनीतिक निर्णय से देश की चुस्त रक्षा व्यवस्था और सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी। जनरल विपिन रावत की उम्र 61 वर्ष है। मीडिया रिपोर्ट्स में सम्भावना जताई गई है कि वो अगले 4 वर्षों तक इस पद पर बने रह सकते हैं।

युद्ध या बड़े आपदा के समय सीडीएस की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि तीनों सेनाओं को मिल कर कैसे काम करना है और उनकी समस्याओं व बातों को रक्षा मंत्री तक कैसे पहुँचाना है, ये सीडीएस ही देखता है। दुनिया भर के कई देशों में सीडीएस या इसके जैसा पद है। कारगिल युद्ध के बाद बनाई गई कमिटी ने सीडीएस के गठन की सिफारिश की थी। अब तक ये सब ‘डिफेंस प्लानिंग कमिटी’ के माध्यम से किया जा रहा था, जो प्रधानमंत्री को सलाह देती है। एनएसए अजित डोभाल इसके अध्यक्ष हैं और इसमें तीनों सेनाओं के अध्यक्ष शामिल हैं। इसमें रक्षा, विदेश और एक्सपेंडिचर के मुख्य सचिव भी शामिल हैं।

सीडीएस का कोई ऑपरेशनल रोल नहीं होगा। ये मिलिट्री कमांड में ऑपरेशन को संचालित नहीं करेगा। सीडीएस के पद को लेकर एक और बात ये होगी कि इससे रिटायर होने वाला व्यक्ति आगे किसी भी सरकारी पद पर बहाल नहीं किया जा सकेगा। मोदी सरकार के फ़ैसले के बाद अब दशकों पुरानी माँग पूरी हो गई है।

6000 साल पुराना फायर टेम्पल, Pak के हिन्दू युवक की आपबीती और जामिया हिंसा का कनेक्शन

सोशल मीडिया पर लोगों ने नागरिकता संशोधन क़ानून के समर्थन में अभियान चला कर उपद्रवियों व दंगाइयों को करारा जवाब दिया। ख़बर लिखे जाने तक ‘आई सपोर्ट सीएए’ को लेकर 7 लाख ट्वीट्स किए जा चुके थे जबकि इसका विपक्ष में 50 हज़ार ट्वीट्स भी नहीं हुए थे। आम लोगों ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर सड़क पर उत्तर कर गुंडई करने वालों को जवाब दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अभियान में भाग लेते हुए सद्गुरु का एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने सीएए को लेकर बातें की हैं। पीएम मोदी ने लिखा कि सद्गुरु ने सीएए के सभी पहलुओं के बारे में स्पष्टता से बात की है।

इस वीडियो में सद्गुरु ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से जिस तरह की हिंसा देखने को मिली है, उस हिसाब से इसे स्पष्ट करना आवश्यक है। उन्होंने विभाजन की त्रासदी की चर्चा करते हुए बताया कि किस तरह दोनों तरफ के लोगों ने बड़े पैमाने पर माइग्रेट होना पड़ा। सद्गुरु ने कहा कि पकिस्तान और बांग्लादेश का गठन मजहबी आधार पर हुआ लेकिन भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश रहा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने अपनी मातृभूमि और संपत्ति को छोड़ कर जाना उचित नहीं समझा। सद्गुरु ने बताया कि 1971 में बांग्लादेश गठन के समय 19-20% लोग प्रताड़ना से तंग आकर भारत में आ गए थे।

उन्होंने पाकिस्तान की चर्चा करते हुए कहा कि वहाँ का क़ानून ही भेदभाव वाला है। उन्होंने कहा कि भारत में भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं लेकिन यहाँ एक व्यक्तिगत स्तर पर हो सकता है, क़ानून में नहीं है। उन्होंने कहा कि जाति-धर्म, लिंग इत्यादि के आधार पर दुनिया में हर जगह भेदभाव होते हैं। उन्होंने कहा कि क़ानून के अनुसार, भारत के सभी लोग समान हैं। सद्गुरु ने आगे कहा:

“पाकिस्तान में महिलाओं के साथ भेदभाव होता है, सभी अल्पसंख्यकों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। एक प्रोफेसर पर ईशनिंदा का आरोप लगा कर सज़ा-ए-मौत दी गई। ऐसी चीजें भारत में संभव नहीं हैं। मैं अज़रबैजान के बाकू में था, जहाँ फायर टेम्पल है। वहाँ 164 पाकिस्तानी हिन्दू पहुँचे थे। वो फायर टेम्पल 6000 साल पुराना है। प्राचीनकाल में साधना के लिए भारत के लोग वहाँ जाया करते थे, ऐसा प्रमाण मिला है। भारत के लोग बाकू के बारे में भूल गए हैं। लेकिन, पाकिस्तानी वहाँ भी जाते हैं। मैंने 164 लोगों के साथ अलग-अलग फोटोज लिए, कुल 200 से भी ज्यादा फोटोज। एक पाकिस्तानी हिन्दू युवक ने मुझे बताया कि 10-12 लोग आए और उसके साथ मारपीट की, इसके बाद वो उसकी पत्नी को उठा कर ले गए।”

सद्गुरु ने बताया कि उक्त युवक की पत्नी की शादी किसी और से कर दी गई। वो क़ानून के पास भी नहीं जा सकता था, वो अदालत में केस भी नहीं दायर कर सकता था क्योंकि पाकिस्तान में हिन्दू शादी को वैध माना ही नहीं जाता है। सद्गुरु ने बताया कि पाकिस्तान में ऐसी कई वारदातें होती हैं और उत्पीड़ित लोग दशकों से यहाँ आते रहते हैं। बकौल सद्गुरु, सीएए तो उनके लिए बहुत कम राहत है, जो काफ़ी देर से मिला। उन्होंने पाकिस्तान में मंदिरों की संख्या कम होने और तोड़े जाने की भी चर्चा की। वहीं भारत के बारे में उन्होंने कहा कि यहाँ सभी धर्मों के लोग अपनी आस्था की प्रैक्टिस करते हुए रह सकते हैं।

सद्गुरु ने समझाया कि सीएए उनलोगों के लिए नहीं है, जो दूसरे देशों से भारत में आएँगे। ये उन धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए है, जो तीन पड़ोसी इस्लामिक देशों में हुई प्रताड़ना से तंग आकर दिसंबर 2014 तक भारत में आ चुके हैं। उन्होंने समझाया कि इससे नए लोग नहीं आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश को आज़ाद किए जाने के समय 30 लाख हिन्दुओं को मार डाला गया था। उन्होंने बताया कि असम में शरणार्थियों की संख्या ज्यादा हो गई थी, जिसके बाद असम एकॉर्ड बना और घुसपैठियों को बाहर निकाले की व्यवस्था की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन्होंने ये एकॉर्ड बनाया, उन्होंने ही इसे अमल में नहीं लाया।

सद्गुरु ने सीएए के ख़िलाफ़ हो रहे उपद्रव पर आश्चर्य जताते हुए पूछा कि इसका विरोध कैसे किया जा सकता है? उन्होंने बताया कि भारतीय नागरिकता के लिए कोई भी आवेदन कर सकता है, किसी के लिए दरवाजे बंद नहीं किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिन्हें भी नागरिकता मिलेगी, वो सालों से यहाँ रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका विरोध किया जाना अजीब है। उन्होंने कहा कि सीएए के ख़िलाफ़ विरोध करने वाले अब कह रहे हैं कि वो पुलिस की बर्बरता के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं। सद्गुरु ने कहा:

“केंद्र सरकार को भी अंदाज़ा नहीं था कि इतने अच्छे क़ानून का इतने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन होगा और इसे मुद्दा बना दिया जाएगा। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा हुई और पुलिस के साथ काफ़ी बर्बर तरीके से व्यवहार किया गया। हज़ारों लोगों ने पुलिस को पीटा, जिसके बाद बड़ी संख्या में सुरक्षा बल लगाना पड़ा। सीएए विरोधी कह रहे हैं कि वो जामिया में पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। जामिया वालों ने पत्थरबाजी की, जिसके बाद पुलिस को कैम्पस में घुसना पड़ा। हो सकता है उन्हें भी पीटा गया हो, जिन्होंने पत्थर नहीं चलाए लेकिन वो पत्थरबाजों के साथ बस बैठे हुए थे। भीड़ में ऐसा होता है। लेकिन, फिर भी पुलिस ने धैर्य दिखाते हुए गोली नहीं चलाई। लखनऊ में 56 पुलिसकर्मियों को गोली लगी। तब गोलियाँ कहाँ से आई? पुलिस पर गोली किन लोगों ने चलाई? कई लोगों ने खतरनाक खेल खेला।”

सद्गुरु ने कहा कि कुछ अनपढ़ मजहबी उन्मादियों ने हिंसा की वारदातों को अंजाम दिया। अफवाह फैलाया गया कि भारतीय मुस्लिमों की नागरिकता छीन ली जाएगी और उन्हें निकाल बाहर किया जाएगा। सद्गुरु ने आश्चर्य जताया कि इतने बड़े स्तर पर अफवाह फैलाया गया। सद्गुरु ने कहा कि बड़े यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों ने भी क़ानून को पढ़ने की भी जहमत नहीं उठाई और अफवाहों पर ध्यान दिया। उन्होंने पूछा कि क्या ये छात्र व्हाट्सप्प पर पीएचडी कर रहे हैं? सद्गुरु ने सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुँचाए जाने की भी निंदा की।

CAA पर सद्गुरु की बातों को शब्दशः हिंदी में सुनें

सद्गुरु ने कहा कि अल्पसंख्यकों के बीच काफ़ी सुनियोजित तरीके से अफवाहें फैलाई गई। उन्होंने कहा कि अब जब उपद्रवियों की पोल खुल गई है, वो कह रहे हैं कि वो फलाँ कारण से प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान सद्गुरु ने एनआरसी को लेकर भी बातें की। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से लोगों को डेटाबेस में रजिस्टर किया जाना है। उन्होंने कहा कि ये पता होना चाहिए कि देश में कितने लोग हैं और वो कहाँ से आए हैं। उन्होंने पूछा कि जब ये नियम सबके लिए है, फिर भी इसे भेदभाव वाला क्यों बताया जा रहा है? उन्होंने कहा कि जो बोल रहे हैं कि उनके पास कोई कागज़ात नहीं हैं, फिर वो आख़िर हैं कौन?

ऑपइंडिया टॉप 10: नृशंस अपराधों की दस खबरें जिसने पूरे देश को हिला दिया (वामपंथियों के फर्जी नैरेटिव शामिल नहीं)

इस साल चाहे हैदराबाद के डॉक्टर की बलात्कार और हत्या की खबर हो, या फिर मोहम्मद रफी द्वारा पाँच साल की बच्ची के रेप की खबर… चाहे कौशाम्बी की दलित किशोरी की दहलाने वाली कहानी हो, जहाँ बलात्कारी ने उसे ‘अल्लाह के नाम पर रहम’ माँगने को कहा, या 40,000 हिन्दुओं के प्रसाद में ज़हर मिलाने की योजना… ये खबरें सबसे ज्यादा पढ़ी और शेयर की गईं।

5 साल की बच्ची का बेहोश होने तक रेप किया, जब मर गई तो फेंक दिया: मोहम्मद रफी गिरफ्तार
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में 5 वर्षीय एक बच्ची के साथ यौन शोषण और उसकी हत्या के मामले में एक 25 वर्षीय लॉरी क्लीनर मोहम्मद रफ़ी को गिरफ्तार किया गया। आरोपित रफ़ी बच्ची की फोटो क्लिक करने और उसके साथ दोस्ती करने के बाद उसे बाथरूम ले गया और फिर उसका यौन शोषण किया। जब वह बेहोश हो गई और फिर मर गई, तो रफी ने उसके शव को समारोह हॉल के परिसर से बाहर फेंक दिया। 10 साल पहले भी मोहम्मद रफ़ी को एक 5 साल की बच्ची के साथ बलात्कार के मामले में गिरफ़्तार किया गया था

अल्लाह की कसम मुझे छोड़ दो, भैया आप तो मुझे जानते हो… फिर भी आदिल, नाजिक ने रेप कर बनाया वीडियो
यूपी स्थित सराय अकिल कोतवाली इलाक़े के गाँव में दलित लड़की घास छीलने गई थी। इसी दौरान नाजिक पुत्र उबैर उल्ला, आदिल उर्फ़ छोटू पुत्र इस्माइल और एक अन्य युवक लड़की को पकड़ कर झाड़ियों में ले गए और उसके साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान पीड़िता लगातार दया की भीख माँगते हुए कहती रही- ‘भैया आप मुझे जानते हो, अल्लाह के लिए छोड़ दो”, लेकिन फिर भी इन दरिंदों को रहम नहीं आई। वह रोती, चीखती, चिल्लाती रही और आदिल, नजिक जैसे दरिंदे उसकी चीख को फिल्माते रहे।

26 साल की ‘प्रीति रेड्डी’ का रेप, मर्डर: शमसाबाद में मिली आधी जली लाश, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
हैदराबाद में पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) का सामूहिक बलात्कार किया गया। आरोपितों ने पीड़िता की स्कूटी को जानबूझ कर पंक्चर किया और मदद करने का बहाना बनाया। आरोपितों मोहम्मद आरिफ, जोल्लू शिवा, नवीन और चेन्नाकेशवुलु ने पीड़िता के साथ बलात्कार किया। आरोपितों ने डॉक्टर रेड्डी का नाक और मुँह दबा कर मार डाला और मरने के बाद शरीर पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी।

तबरेज का बदला! ओवैसी की पार्टी के नेता गाँव में दे रहे रेप की धमकी, मंदिर को किया क्षतिग्रस्त, 34 महिलाओं की FIR
मामला झारखण्ड के सरायकेला का है। यहाँ ओवैसी की पार्टी के नेताओं ने महिलाओं के साथ गाली-गलौज किया और फिर रेप करने की धमकी तक की। एआईएमआईएम के नेताओं ने लूटमार की भी कोशिश की। बता दें कि सरायकेला में ही तबरेज अंसारी नामक व्यक्ति की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। गाँव की 34 महिलाओं ने थाने में आवेदन देकर शिकायत की। चारपहिया वाहनों से पहुँचे आरोपितों ने महिलाओं से लूटपाट की, रेप और बम से उड़ा देने की धमकी भी दी।

कॉलोनी में रहना है, तो असलम भाई कहना है, समझ गए ना, यहाँ मोदी जी नहीं आएँगे: बंद कराया भजन
महाराष्ट्र के मलाड से एक वीडियो वायरल हुआ, जहाँ एक मुस्लिम युवक असलम अपने कुछ साथियों के साथ दुर्गा पंडाल में बज रहे भजन को न सिर्फ़ बंद करने का हुक़्म दिया बल्कि पंडाल में मौजूद लोगों को धमकीभरे लहज़े में चेतावनी देते हुए कहा, “कॉलोनी में रहना है, तो असलम भाई-असलम भाई कहना है, समझ गए ना। यहाँ मोदी जी नहीं आएँगे, यहाँ असलम भाई ही आएँगे…बस।”

‘घंटों नंगी खड़ी रखी जाती हैं ननें, पादरी बनाते हैं यौन सम्बन्ध’ – ‘प्रैक्टिकल क्लास’ का एक नन द्वारा खुलासा
केरल की नन सिस्टर लूसी कलाप्पुरा ने अपनी आत्मकथा लिखी है। इसमें बताया गया है कि पादरी और बिशप अपने पदों का दुरूपयोग करते हुए ननों के साथ जबरदस्ती कर यौन सम्बन्ध बनाते हैं। वो इसके लिए कई ननों की जबरन सहमति भी लेते हैं। एक पादरी ने अपने कक्ष में ननों को बुला कर ‘सुरक्षित सेक्स’ का प्रैक्टिकल क्लास लगाना शुरू कर दिया। इस दौरान वह ननों के साथ यौन सम्बन्ध बनाता था।

मोहम्मद नन्हे ने दिन दहाड़े किया 6 साल की मासूम बच्ची का रेप, CCTV में हुआ कैद
दिल्ली के द्वारका सेक्टर-23 में 6 साल की बच्ची के साथ बलात्कार किया गया। डॉक्टरों का कहना था कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट की नसें कटी हुई थीं, साथ ही उसके पेट पर दांतों से काटे जाने के गहरे जख्म भी मिले। मोहम्मद नन्हे ने दिन दहाड़े मोहम्मद नन्हें नाम के इस शख्स ने बच्ची को अपने साथ ले जाकर पूरी वारदात को अंजाम दिया। बच्ची की माँ घरों में साफ़ सफाई का काम करती है जबकि पिता बेलदारी का काम करके घर का खर्चा चलाते हैं।

‘मंदिर में प्रतिमाएँ तोड़ीं, लगाए ‘अल्लाहु-अकबर’ के नारे’: स्थानीय लोगों में गुस्सा, तनाव के बीच वीडियो वायरल
दिल्ली के चाँदनी चौक इलाक़े में मुस्लिमों की भीड़ ने मंदिर में घुसकर वहाँ की मूर्तियों को तोड़ा। यह काम बदमाशों या गुंडों ने नहीं बल्कि सैकड़ो स्थानीय लोगों की भीड़ ने किया। उन्होंने मजहबी नारे लगाते हुए मंदिर तोड़ा डाला। मुस्लिमों की भीड़जमा हुई और उस मॉब ने पहले मंदिर में और उसके बाद थाने में हंगामा किया।

मो. पाशा ने पहले से ही प्लानिंग करके किया ‘प्रीति रेड्डी’ का रेप और मर्डर, जलाई लाश: पुलिस का दावा
प्रीति रेड्डी रेपकांड के बारे में आप पढ़ चुके हैं। पुलिस की जाँच में पता चला कि सामूहिक बलात्कार व हत्या की इस वीभत्स घटना को पूरी प्लानिंग के साथ अंजाम दिया गया था। मोहम्मद आरिफ ने ही डॉक्टर रेड्डी की हत्या की थी और उसपर पेट्रोल डाला था। पुलिस के सामने दरिंदों ने स्वीकार किया कि मरने के बाद भी डॉक्टर रेड्डी के साथ रेप किया गया।

40,000 हिन्दुओं के नरसंहार के लिए मंदिर के प्रसाद में जहर मिलाने की योजना, जाकिर नाइक से था प्रेरित
मुंबई स्थित मुम्बेश्वर मंदिर में नरसंहार की कथित योजना बनाने को लेकर महाराष्ट्र से गिरफ्तार आतंकवादी जाकिर नाइक से प्रेरित थे। ये आतंकी ISIS से प्रेरित एक आतंकी समूह ‘उम्मत-ए- मोहम्मदिया’ के सदस्य थे। दहशतगर्दों की साजिश थी कि महाप्रसाद में जहर मिलाकर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की जान ली जा सके।

ऑपइंडिया टॉप 10: अतिथि लेखकों के दस आलेख जो साल भर सबसे ज्यादा चर्चा में रहे

ऑपइंडिया टॉप 10: साल भर की वो खबरें जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं, जिसे वामपंथियों ने छुपाया

डॉन के CEO हामिद हारून ने किया था मेरा 13 साल की उम्र में रेप: PAK फिल्ममेकर

इसी साल अक्टूबर में मी_टू का समर्थन करते हुए पाकिस्तानी फिल्ममेकर जमशेद महमूद उर्फ जैमी ने एक बड़ा खुलासा कर सबको चौंकाया था। कई अवार्ड विनिंग फ़िल्में बना चुके महमूद ने बताया था कि 13 साल की उम्र में एक नामी मीडिया टाइकून ने उनका बलात्कार किया।

हालाँकि, इस दौरान आरोप लगाते हुए उन्होंने उस मीडिया टाइकून का नाम नहीं बताया था। लेकिन, अब उन्होंने लगभग 2 महीने बाद इसपर चुप्पी तोड़ी है और बताया है कि उनका रेप करने वाला मीडिया टाइकून कोई और नहीं, बल्कि पाकिस्तान के मशहूर अखबार ‘डॉन’ के सीईओ हामिद हारून हैं।

13 साल की उम्र में अपने साथ हुई घटना को ट्विटर पर लिखते हुए उन्होंने डॉन को टैग करके पूछा है कि वो तैयार हैं उस बलात्कारी का नाम बताने के लिए, लेकिन क्या वो तैयार हैं इस तथ्य को छापने के लिए। महमूद ट्विटर लिखते हैं, “हाँ, हामिद हारून ने मेरा बलात्कार किया। मैं अब तैयार हूँ। डॉन, क्या तुम इसे प्रकाशित करने के लिए तैयार हो।”

गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तानी फिल्ममेकर ने ट्विटर पर ही खुलासा करते हुए आपबीती सुनाई थी। उन्होंने उस दौरान बताया था, कि आखिर वे क्यों मी_टू अभियान का मुखर होकर समर्थन कर रहे हैं।

उन्होंने ट्वीट पर लिखा था- “मुझे पता है मी_टू के पीड़ित कैसा महसूस करते हैं। वह भी तब, जब मीडिया का कोई बड़ा नाम या फिर एक ‘दानव’ बुरी तरह पीड़ित का रेप करे।”

अपने ट्वीट के क्रम में उन्होंने बताया था कि अपने साथ हुई घटना के बारे में उन्होंने कई बार अपने कई करीबी दोस्तों को बताया था, लेकिन उनमें से किसी ने भी उन्हें सीरियस नहीं लिया। इसके अलावा मीडिया में अपने कई दोस्तों से जैमी ने बात की लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की।

जमशेद के अनुसार इस घटना के बाद उन्हें काफी सदमा लगा था, जिसके बाद उन्हें थेरेपी की जरूरत तक पड़ी। उन्होंने खुद बताया, “मैंने आगा खान में 6 महीने थेरेपिस्ट के साथ बिताए थे और दवाइयाँ लेने के साथ कुछ महीने आराम भी किया था।”

बता दें कि जमशेद का पहला अकाउंट हैक हो चुका है, लेकिन उन्होंने इस बारे में जानकारी देने के लिए नया अकॉउंट बनाया है और इस पूरे घटनाक्रम के पीछे मुख्य आरोपित के नाम से अवगत करवाया।

ऑपइंडिया टॉप 10: अतिथि लेखकों के दस आलेख जो साल भर सबसे ज्यादा चर्चा में रहे

ऑपइंडिया ने एक साल पूरे किए और लगभग 10,000 लेख हमने खबरों, विचार और विश्लेषण के रूप में आप तक पहुँचाया। लेकिन इसमें सिर्फ ऑपइंडिया की सम्पादकीय टीम का ही योगदान नहीं रहा, बल्कि पाठकों में से भी कई लोगों ने अपने लेखों और विश्लेषणों से हमारे प्लेटफ़ॉर्म को बेहतर बनाया। कश्मीर, वामपंथी अजेंडा, मीडिया नैरेटिव, हिन्दू धर्म समेत कई समसामयिक विषयों पर हमने इनके लेखन को आप सब तक पहुँचाया। उन्हीं में से दस आलेखों को हम आपके लिए दोबारा यहाँ रख रहे हैं जो समय से परे आपका ज्ञानवर्धन करते रहेंगे।

हम आपके लिए उन खबरों को संक्षिप्त तरीके से दोबारा रख रहे हैं:

जय भीम-जय मीम की विश्वासघात और पश्चाताप की कहानी: पाक का छला, हिंदुस्तान में गुमनाम मौत मरा
बंगाल के दलित नेता थे जोगेंद्र नाथ मंडल। आपने उनका नाम नहीं सुना होगा। आम तौर पर दल हित चिन्तक उनका नाम लेने से कतराते नजर आएँगे। आजकल जो जय भीम के साथ जय मीम जोड़ने की कवायद चल रही है, ये नाम उसकी नींव ही खोद डालता है। इसलिए जोगेंद्र नाथ मंडल ने जिस तर्ज पर इतिहास रचा उसका हश्र जानना जरूरी है। जोगेंद्र नाथ तो नेता थे, परिस्थितियाँ विपरीत हुईं तो गुमनामी में ही सही वापस भारत आ गए, लेकिन उनका क्या जो उनके आह्वान पर मात्र एक वोट बनकर पाकिस्तानी हुए।
लेखक: आनंद कुमार

कॉमरेड चंदू से लेकर कन्हैया कुमार तक: जेएनयू के कपटी कम्युनिस्टों की कहानी, भाग-1
मैं जेएनयू की खदान का ही उत्पाद हूँ। कन्हैया तो कुछ भी नहीं, इसके बौद्धिक पितृ-पुरुषों और माताओं से मैं उलझा हूँ, उनकी सोच किस हद तक भारत और हिंदू-विरोधी है, यह मुझे बेहतर पता है। इसलिए मैं जानता हूँ कि वामपंथियों की धोखेबाज़ी, द्रोह और मक्कारी कोई नई बात नहीं है। खुद चंदू को जब इन्होंने बेच दिया, उनकी माँ को धोखा दिया, तो मेरे जैसों के लिए नजीब हों या रोहित, इनके नाटक और नौटंकी से कोई अपरिचित नहीं। दुनिया में शायद किसी का भी यकीन कर लिया जाए, लेकिन किसी कम्युनिस्ट पर कभी नहीं।
लेखक: व्यालोक पाठक

बिना जुबाँ लड़खड़ाए कश्मीर समस्या को इस्लामी आतंक जनित समस्या कहना ज़रूरी
1989 का कश्मीरी पंडितों का पलायन तो घाटी से उनका सातवाँ पलायन था। शाह मीर, औरंगज़ेब, अब्दुल्लाओं और आज के जमात-ए-इस्लामी या बुरहान, इन सभी के द्वारा किया गया रक्तपात इस्लामिक वर्चस्व की मानसिकता की ही देन रही। कश्मीर में अलगाववाद को बल मिलता है इसी पैन-इस्लामिज़म से, जो खिलाफत आंदोलन के या उससे भी पूर्व के उस विचार से प्रभावित है, जिसमें दुनिया के सभी समुदाय विशेष वालों को राष्ट्रीय सीमाओं से परे एक झंडे के नीचे खड़े होने को अपना आदर्श मानता है।
लेखक: शशांक शेखर सिंह

मैकाले-मैक्समूलर के जले हिन्दू को ‘फिरोज खान’ फूँक-फूँक कर पीना चाहिए
अंग्रेज विद्वानों ने जो सबसे बड़ा झूठ गढ़ा वो ये कि संस्कृत ब्राह्मणों की भाषा है। संस्कृत की जड़ में डाला गया ये वो मट्ठा था, जिसका नतीजा है कि यह भाषा लुप्त होने की कगार पर है। भारतीय संस्कृति के खिलाफ ये खेल जिन दिनों चल रहा था उन्हीं दिनों मालवीय ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की कल्पना की थी। अब वहीं अगर किसी फिरोज खान को हिंदू धर्म की शिक्षा देने की जिम्मेदारी दी जा रही है तो क्या यह पूछा नहीं जाना चाहिए कि मालवीय जी के आदेश का क्या होगा? फिरोज खान जिस धर्म से ताल्लुक रखते हैं वो हिंदुओं को काफिर और वाजिबुल कत्ल मानता है। अगर वो इससे सहमत नहीं हैं तो घर वापसी कर लें।
लेखक: चंद्र प्रकाश

‘कबीर सिंह’ में जिनको मर्दवाद दिख रहा है: नकली समीक्षकों की समीक्षा
“यार तुझे पता है जब पीरियड्स होते हैं तब उसे कितना दर्द होता है। गर्म पानी का बैग रखना होता है उसकी थाई पर वगैरह वगैरह, समझ रहा है तू मेरी बात?” बॉलीवुड में संभवतः पहली मेनस्ट्रीम फिल्म, जिसके सीन में प्रेमिका के पीरियड्स की तकलीफ और दर्द पर बात की गई लेकिन फिल्म हो गई स्त्री-विरोधी! वाह!! अर्जुन रेड्डी स्त्री विरोधी नहीं थी लेकिन कबीर सिंह है! हें हें हें! गैंग्स ऑफ़ वासेपुर कल्ट है और कबीर सिंह कबाड़ा! हें हें हें! मानोगे नहीं ना सुपर दोगलों!
लेखिका: भारती गौड़

गाँधी फैमिली के अनकहे-अनसुने कीर्तिमानों का खुलासा: BJP वाले भी करेंगे शत-शत नमन!
प्रस्तुत है पत्रकारिता के इतिहास में पहली बार गाँधी परिवार के कुछ ऐसे कारनामों के खुलासे, जो उन्होंने देश पर अहसान न लादने के लिए नहीं बताए। लेकिन हम आपको बताएँगे ताकि हम और हम सबकी पीढ़ियाँ इस महान परिवार की चरण-वंदना करते रहें… अनंत काल तक। महान जिमनास्ट राजीव गाँधी के नाम पर खेल रत्न दिया जाता है। सँजय गाँधी को वन्य जीवों से अगाध प्रेम था। उन्हीं की याद में अपने-आप सँजय गाँधी प्राणी उद्यान पैदा हुआ।
लेखक: साकेत सुर्येश

टेरेसा ‘मदर’ नहीं, कलकत्ता की ‘पिशाच’: भोपाल गैस त्रासदी का समर्थन, करोड़ों रुपयों की हेराफेरी
क्रिस्टोफर हित्चेंस ने ‘मिशनरी पोजीशन’ नाम से 128 पन्ने की एक किताब लिखी है। वो टेरेसा को ‘घोउल ऑफ़ कोलकाता’ कहते थे। नॉबेल पुरस्कार लेते वक्त टेरेसा ने शांति के लिए सबसे बड़ा ख़तरा गर्भपात को बताया था। और इसी टेरेसा ने 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड का समर्थन किया था। वो मार्गरेट थेचर और रोनाल्ड रीगन जैसों की सरकार का समर्थन करती थीं। चार्ल्स कीटिंग ने उन्हें 1.25 मिलियन डॉलर का चंदा दिया था।
लेखक: आनंद कुमार

हिन्दू धर्मांतरण क्यों नहीं करते? कलमा क्यों नहीं पढ़ लेते? क्योंकि वो काल को जीतने वाले राम के उपासक हैं
पाकिस्तानी हिन्दू विस्थापित इतनी विपरीत परिस्थितियों में भी धर्मांतरण क्यों नहीं करते? कलमा क्यों नहीं पढ़ लेते? अपना सर्वस्व त्यागकर ये हिंदू भारत की शरण में आ जाते हैं, पर धर्मांतरण नहीं करते हैं। क्यों? क्योंकि अपने अंतर्मन में वहाँ का हर हिन्दू यह बात जानता था कि श्री राम व राम का नाम हिन्दू धर्म की आत्मा है। राम गए तो हिन्दू धर्म नहीं बचेगा। वह आस्था, वह श्रद्धा जो हमारे रक्त और हमारी हड्डियों में समाई हुई है। राम का ‘तत्व’ ही वह शाश्वत धारा है, जिसने हिन्दू समाज को विषम-से-विषम परिस्थिति में भी स्पंदित व जीवित रखा है, तथा सदैव रखेगी।
लेखक: ओमेन्द्र रत्नु

जेपी जन्मदिन पर: उनकी अव्यवहारिक क्रांति के चेले आज भी प्रयोग के मूड में रहते हैं
जेपी ने अव्यवहारिक राजनीति की, वे ऐसी मसीहाई भूमिका में आ गए थे, जो अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई और अपने ही लोगों के खिलाफ लड़ाई को एक ही तराजू में तौल रहे थे। उन्हें उम्र के उस अंतिम पड़ाव में जरा भी भान नहीं हुआ कि जो लोग उनकी पालकी उठा रहे हैं, उनकी मंशा क्या है? तभी तो शरद यादव, रामविलास पासवान, मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद यादव और तमाम अन्य नेता जो उस दौर की राजनीति से निकले, वह आज तलक भी प्रयोग के मूड में हैं। तब इस ऐब को सम्पूर्ण क्रांति कहा जाता था, अब इसे तीसरा मोर्चा, थर्ड फोर्स, वैकल्पिक राजनीति और गैर कॉन्ग्रेस-भाजपा की राजनीति कहा जाता है।
लेखक: अरविंद शर्मा

व्यक्तिगत रूप से हम हिन्दू सभ्यता को बचाए रखने के लिए आखिर क्या कर सकते हैं?
सभ्यतागत संघर्ष को नकारना अब किसी भी हालत में सम्भव नहीं- इससे केवल सभ्यता को गर्त में धकेला ही जा सकता है। अब समय है कि हम उस खतरे को पहचानें जिसे हम ज़बरदस्ती नज़रअंदाज़ करते आ रहे हैं, और उस खतरे के निवारण के लिए कदम उठाएँ। हिन्दू धर्म और प्रथाओं, परम्पराओं के प्रचार-प्रसार में शामिल लोगों को भी हमेशा सचेत रहना चाहिए कि हमारे ज्ञान और प्रणालियों को इतना धूमिल या व्यवसायीकृत न किया जाए कि उनके मूल रूप, उनकी आत्मा से छेड़-छाड़ होने लगे या वह क्षीण हो जाए।
लेखक: नितिन श्रीधर

ऑपइंडिया टॉप 10: साल भर की वो खबरें जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं, जिसे वामपंथियों ने छुपाया

NDTV अजित पवार पर Odd-Even मोड में: हटाए ‘भ्रष्टाचारी’ और ‘दागी’ जैसे शब्द

अजित पवार को लेकर एनडीटीवी काफ़ी दुविधा में दिख रहा है। दरअसल, उनका इतिहास ही ऐसा है कि एनडीटीवी एकमत पर पहुँच नहीं पा रहा क्योंकि उसकी हैडलाइन इस आधार पर बनाई जाती है कि वो भाजपा के साथ हैं, या फिर भाजपा के विरुद्ध। पहले वो कॉन्ग्रेस की सरकार में उप-मुख्यमंत्री रह चुके हैं। हाल ही में उन्होंने देवेंद्र फडणवीस को समर्थन देकर उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। हालाँकि, फडणवीस ने बहुमत न होने के कारण इस्तीफा दे दिया था। अब एनसीपी ने शिवसेना को समर्थन दिया है, जिसमें अजित पवार फिर से उप-मुख्यमंत्री बने हैं।

जब अजित पवार ने भाजपा की सरकार में उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब एनडीटीवी ने उन्हें ‘भ्रष्टाचारी और दागी नेता’ बताया था। वहीं सोमवार (दिसंबर 30, 2019) को जब अजित पवार ने ठाकरे सरकार में उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब एनडीटीवी ने ‘भ्रष्टाचारी’ और ‘दागी’ जैसे शब्दों को हटा दिया। अब वो सीधा ‘एनसीपी नेता अजित पवार’ हो गए हैं। अर्थात, एनडीटीवी अजित पवार को लेकर Odd-Even मोड में चल रहा है। जब वो भाजपा के साथ रहें तो ‘भ्रस्टाचारी एनसीपी नेता’ और जब भाजपा के विरुद्ध रहें तो सीधा ‘एनसीपी नेता’।

जब अजित पवार के उप-मुख्यमंत्री बनने की सम्भावना जताई जा रही थी, तब एनडीटीवी ने लगातार उन्हें ‘एनसीपी के अजित पवार’ लिख कर सम्बोधित किया। भाजपा के साथ जाने पर उनके लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया गया था, वैसे किसी भी शब्द से बचा गया। इससे पहले एनडीटीवी ने अजित पवार को लेकर फेक न्यूज़ भी चलाई थी, जिसमें कहा गया था कि उन्हें इरीगेशन स्कैम से जुड़े सभी मामलों में क्लीन चिट दे दी गई है। जबकि सच्चाई ये थी कि जिन मामलों को बंद किया गया था, उनमें से कोई भी अजित पवार से जुड़ा नहीं था।

आज उद्धव ठाकरे मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ, जिसमें उद्धव ठाकरे को उप-मुख़्यमंत्री बनाया गया। उद्धव के बेटे और युवा सेना के सुप्रीमो आदित्य ठाकरे को भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई। कॉन्ग्रेस की तरफ से अमित देशमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण मंत्री बने। पिछली कॉन्ग्रेस सरकार में भी मंत्री रह चुके अमित दिवंगत कॉन्ग्रेस नेता विलासराव देशमुख के बेटे हैं। उनके भाई रितेश देशमुख फ़िल्मों में सक्रिय हैं।

ऑपइंडिया टॉप 10: साल भर की वो खबरें जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं, जिसे वामपंथियों ने छुपाया

वर्ष 2019 जाने वाला है और इसी के साथ ऑपइंडिया हिन्दी के भी एक साल पूरे हो रहे हैं। इस साल राजनीति और समाज से ले कर न्यायपालिका और मीडिया से जुड़ी कई ऐसी खबरें थीं जिन्हें पाठकों ने खूब पढ़ा और पसंद किया। रवीश के ऑपइंडिया और एडिटर अजीत भारती पर निजी हमले से ले कर मंदिरों की मूर्तियाँ तोड़ने, कश्मीर के मस्जिदों से हिन्दू औरतों की माँग, सिख नरसंहार की फाइलों के दोबारा खुलने और मेरठ से 125 हिन्दू परिवारों के पलायन की वो खबरें जो इस साल सबसे ज्यादा पढ़ी गईं। 

हम आपके लिए उन खबरों को संक्षिप्त तरीके से दोबारा रख रहे हैं: 

फिर से खुलेंगी 1984 सिख नरसंहार से जुड़ी फाइल्स, कई नेताओं की परेशानी बढ़ी: गृह मंत्रालय का अहम फैसला

इस खबर में प्रमुख बात ये थी कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी के प्रतिनिधियों की बातें सुनने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जाँच का दायरा बढ़ा दिया। गृह मंत्रालय ने कहा कि 1984 सिख विरोधी दंगे के वीभत्स रूप को देखते हुए इससे जुड़े सभी ऐसे गंभीर मामलों में जाँच फिर से शुरू की जाएगी, जिसे बंद कर दिया गया था या फिर जाँच पूरी कर ली गई थी। बता दें कि एसआईटी ने क़ानूनी सलाह लेने के बाद सिख नरसंहार से जुड़े उन मामलों की सूची तैयार करनी शुरू कर दी है, जिनमें आरोपितों को बरी कर दिया गया या फिर दोषमुक्त कर दिया गया।

शिवसेना विधायकों ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ खोला मोर्चा, पूछा- सीएम पद के लिए क्यों लगाया दाँव पर

खबर केंद्रित है उस घटनाक्रम पर जब शिवसेना ने अपने विधायकों को मुंबई के मलाड स्थित रिट्रीट होटल में कैद कर रखा था। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक होटल में कैद विधायक बगावत पर उतर आए थे। उनके तेवर ने उद्धव ठाकरे को भी होटल आने पर मजबूर कर दिया था। बागी विधायक खुद अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाना चाहते थे। इन विधायकों का कहना था कि ठाकरे परिवार निजी फायदे के लिए सीएम पद की मॉंग पर अड़ी रही। कुछ विधायकों ने एनसीपी से हाथ मिलाने के फैसले का भी ये विरोध करते हुए कहा था- सारी मलाई खुद हड़प जाएँगे शरद पवार।

प्रिय रवीश जी, छोटे रिपोर्टर को अपमानित करने से आपका कब्ज नहीं जाएगा, चाहे कितना भी कुथिए

अयोध्या में दिवाली मनाया जा रहा था जिसकी भव्यता देखकर रिपोर्टर ने लिखा था कि यह दृश्य ऐसा था जिसे महसूस किया जा सकता है, बयाँ करना मुश्किल है। इसी लाइन से रवीश जी की सबसे ज़्यादा सुलग गई थी क्योंकि अयोध्या में लाखों दीपक जल रहे थे और उसके ताप को रवीश ने ऐसा महसूस किया कि बयाँ करने से रह नहीं पाए! इस खबर में रवीश कुमार ने एक रिपोर्टर के रिपोर्ट का मजाक सिर्फ इसलिए उड़ाया क्योंकि वो रिपोर्टर उनके जितना बड़ा पत्रकार नहीं है और दूसरी बात उसने रिपोर्ट अयोध्या के दीपोत्सव पर लिखी। और गलती से सरकार के आयोजन की तारीफ कर दी।

मुस्लिमों ने हिन्दू परिवार को दिवाली मनाने से रोका: प्रताड़ित किया, घर की लाइट्स तोड़ीं, FIR दर्ज

रिपोर्ट एक व्यथा की कथा है, जिसमे पीड़ित अपना दर्द खुद बयान करता है, “हर साल की तरह, मेरी पत्नी प्रियंका शर्मा को मोमबत्ती जलाने और दिवाली पर अपनी रंगोली बनाने से रोका गया है। असामाजिक तत्व जो सोसायटी में रहते हैं, रेहान पेटीवाला, सलीम और मुस्तफा ने लाइट्स तोड़ दीं। हर साल वे ऐसा करते हैं और यहाँ तक कि हमारे भगवान और देवी-देवताओं का भी मजाक उड़ाते हैं। बकरा ईद पर, वे हमें अपना दरवाज़ा खुला रखने के लिए मजबूर करते हैं और वे हमारे घर के सामने बकरियों का वध करते हैं। लेकिन, मैंने कभी कुछ नहीं कहा क्योंकि यह उनका त्योहार है। क्योंकि हम हिन्दू हैं, हमारा मज़ाक उड़ाया जाता है, दबाव डाला जाता है और ऐसी स्थिति बनाई जाती है कि हम जल्द ही इस क्षेत्र को छोड़ दें।”

ख़ुद में ‘ढुका लाग के’ देखिए रवीश जी, दूसरों को ‘लबरा’ बता कर नेतागिरी करना बंद कर देंगे

स्टोरी में रवीश कुमार केंद्र में हैं और जगह हैं पूर्वी चम्पारण में स्थित सोमेश्वरनाथ महादेव की धरती- अरेराज। रवीश ने अपने गृहक्षेत्र में भोजपुरी में झूठ बोल कर दूसरों को ‘लबरा’ बताया था। हमेशा की तरह प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए थे। रवीश कुमार ने पत्रकारिता के साथ नेतागिरी की शुरुआत करते हुए एक नमूना पेश किया था, “जे हमरा दिमाग में आई से कहेब लेकिन लबरई ना कहेब। काहे कि हमरा सरकार बनावे के त नइखे। त ना हम लबरई ढिलेम आ ना रउआ लोगन लबरई लपेटेम।”

‘मंदिर में प्रतिमाएँ तोड़ीं, लगाए ‘अल्लाहु-अकबर’ के नारे’: स्थानीय लोगों में गुस्सा, तनाव के बीच वीडियो वायरल

मामला दिल्ली के चाँदनी चौक इलाक़े में मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा मंदिर में तोड़फोड़ करने का था, प्रमुखता से जोर इस बात पर था कि “ये पाकिस्तान नहीं बल्कि दिल्ली के चावड़ी बाजार का हिन्दू मंदिर है। जहाँ धर्म विशेष की भीड़ ने मंदिर में घुसकर वहाँ की मूर्तियों को तोड़ा है।” रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के अनुसार लिखा गया था कि पहले साज़िश के तहत यह अफवाह फैलाई गई कि एक मुस्लिम व्यक्ति की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई है और उससे जबरदस्ती ‘जय श्री राम’ बुलवाया गया है। इस अफवाह के बाद मुस्लिम मॉब मंदिर में घुस आई और मूर्तियों को तोड़-फोड़ दिया।

‘हमें सिर्फ़ हिंदू औरतें चाहिए, हिंदू मर्द नहीं’– कश्मीर की हर मस्जिद से 19/1/1990 की रात आ रही थी यही आवाज

“उस रात इस्लामी आतंकियों ने 3 विकल्प दिए थे- कश्मीर छोड़ दो, धर्मांतरण कर लो या मारे जाओ। इसके बाद गिरिजा टिक्कू का सामूहिक बलात्कार कर टुकड़ों में काट दिया गया। बीके गंजू को गोली मारी गई और उनकी पत्नी को खून से सने चावल (वो भी पति के ही खून से सने) खाने को मजबूर किया गया।” इतना ही नहीं पीड़िता ने यह भी बताया, “मेरे दादाजी रसोई की चाकू और जंग लगी कुल्हाड़ी लेकर हमें मारने के लिए खड़े थे, ताकि वो हमें उस बर्बरता से बचा सकें, जो जिंदा रहने पर हमारा आगे इंतजार कर रही थी।”

10 गलियाँ हुईं सुनसान, 125 हिन्दू परिवारों के पलायन के बाद मेरठ बन रहा दूसरा कैराना

खबर उत्तर प्रदेश के मेरठ से है जो नया कैराना बन रहा था। यहाँ से हिन्दू पलायन करने को मज़बूर थे वजह वही समुदाय विशेष। वहाँ के स्थानीय हिन्दुओं का कहना था, “समुदाय विशेष के लोग स्टंटबाजी, छेड़खानी, लूटपाट, अवैध पार्किंग, हूटिंग और हुड़दंग करते हैं। आपत्ति जताने पर कहते हैं यब सब उनका अधिकार है। अब तक पलायन से 10 गालियाँ सुनसान हो चुकी हैं।” लोगों ने तो यह भी बताया था कि थोड़ी-थोड़ी सी बात पर शरारती तत्व भीड़ लगा देते हैं और हुड़दंग चालू कर देते हैं। समुदाय विशेष के लोग बहुसंख्यकों के मकान के सामने अपनी गाड़ी खड़ी कर देते हैं और मना करने पर गाली-गलौज करते हैं। एक स्थानीय महिला ने कहा कि विरोध करने पर वो कहते हैं कि यह सब उनका अधिकार है।

मेरी अंतिम इच्छा है कि मरने से पहले इस मामले को अंजाम तक पहुँचा दूँ: रामलला के 92 वर्षीय वकील

कहानी है, 2012 से 2018 तक राज्यसभा सांसद रह चुके पराशरण के बारें में जो 70 के दशक से ही अधिकतर सरकारों के फेवरिट वकील रहे हैं। धार्मिक पुस्तकों का उन्हें इतना ज्ञान है कि वह अदालत में बहस के दौरान भी उनका जिक्र करते रहते हैं। उन्हें हिंदुत्व का विद्वान माना जाता है। धार्मिक पुस्तकों का उन्हें इतना ज्ञान है कि वह अदालत में बहस के दौरान भी उनका जिक्र करते रहते हैं। तभी तो मद्रास HC के पूर्व मुख्य न्यायाधीश उन्हें ‘भारतीय वकालत के पितामह’ कहते हैं। अयोध्या के फैसले में उनकी भूमिका भगवान राम के प्रति समर्पण और उनकी आस्था का प्रमाण भी है। उन्होंने अदालत में कहा, “मैं अपने श्रीराम के लिए इतना तो कर ही सकता हूँ।

खिसियाया रवीश ऑपइंडिया नोचे: न्यूज़लॉन्ड्री का लेख रवीश ने ही लिखवाया, एडिट किया, नहीं चला तो खुद शेयर किया
बात यहाँ हो रही है उस प्रपंची पत्रकार की जो हर उस आदमी को गोदी मीडिया, आईटी सेल, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी बोल देते हैं, जो उनके पाखंड की पोल खोलने की जुर्रत करता है। लेखक ने इस बात पर जोर देते हुए कहा है, “मुझे भरोसा है कि रवीश जी सबका नाम किसी कॉपी में लिखकर रख रहे होंगे कि जब राहुल गाँधी प्रधानमंत्री बनेंगे तो उनसे बोलकर सबको जेल भिजवाएँगे।” इसी रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा है कि ऑपइंडिया के खिलाफ एक लेख रवीश जी ने ही पोस्ट करवाया है। उसका ड्राफ़्ट भी उनसे चेक कराया गया था। वेबसाइट पर जब अपलोड किया गया तो तीन दिन तक जब कोई रिस्पॉन्स नहीं आया। तब रवीश जी ने परेशान होकर ख़ुद ही फ़ेसबुक पर शेयर किया ताकि ऑपइंडिया की पोल खुल जाए। लेकिन हो गया उल्टा।

दंगाइयों से वसूले जाएँगे ₹80 करोड़: रेलवे ने बनाई CAA हिंसा के दौरान हुए नुक़सान के भरपाई की योजना

भारतीय रेलवे ने कहा है कि नागरिकता संशोधन क़ानून के नाम पर हिंसा करने वालों ने रेलवे की संपत्ति को जो नुकसान पहुँचाया है, उसकी भरपाई भी उन्हीं से कराई जाएगी। बता दें कि देश भर में बड़े पैमाने पर रेलवे स्टेशनों में तोड़फोड़ की गई थी। कई ट्रेनों को घंटों रोक कर रखा गया था और उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया था। यात्रीगण डरे-सहमे दुबके रहे थे। सबसे ज़्यादा उपद्रव मुर्शिदाबाद रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला था, जहाँ जुमे की नमाज के बाद मस्जिद से निकली 700 लोगों की भीड़ ने घटों रेलवे स्टेशन पर तांडव मचाया।

रेलवे ने बताया है कि इस दौरान कुल 80 करोड़ रुपए की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। परिचालन आदि को यदि जोड़े तो सरकार द्वारा कुल नुकसान 250 करोड़ रुपए आँके गए थे। जिसका विवरण नीचे दिया गया गया है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने बताया है कि रेलवे को नुक़सान पहुँचाने वाले दंगाइयों से ही वसूली कर के नुकसान की भरपाई की जाएगी। बता दें कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार भी इसी नीति पर काम कर रही है। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों और तोड़फोड़ मचाने वालों की संपत्ति नीलाम कर भरपाई की जा रही है।

लोगों का कहना है कि रेलवे और यूपी सरकार के इस क़दम से उन्हें सबक मिलेगा, जिन्होंने विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा, आगजनी और दंगे किए। यूपी के मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला पहले ही कह चुके हैं कि उनकी सरकार ऐसी कार्रवाई करेगी कि दंगाइयों की सात पुश्तें भी गुंडई करने से डरेंगी। हालाँकि, कई अन्य राज्यों में भी सीएए के विरोध में हिंसा हुई है। दिल्ली में अभी तक दंगाइयों से वसूल कर नुकसान की भरपाई किए जाने की कोई बात सामने नहीं आई है।

वहीं अगर कुल नुक़सान की बात करें तो ईस्ट रेलवे ने बताया था कि उसे अब तक 8 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। कई इलाक़ों में ‘रेल रोको अभियान’ और बंद का आयोजन किया गया, जिससे साउथ-ईस्ट रेलवे को 16 करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ था। ईस्टर्न रेलवे ने बताया था कि उसके 15 स्टेशनों को तबाह कर दिया गया। कई स्टेशनों पर कैश बॉक्स को लूट लिया गया। कुल मिला कर अब तक 250 करोड़ रुपयों का नुकसान की बात सामने आई थी।

रवीना, फराह और भारती ने पादरी से मिल कर सौंपी लिखित क्षमा-प्रार्थना, ट्विटर पर माफ़ी से नहीं चला काम

सिने अभिनेत्री रवीना टंडन, कॉमेडियन भारती सिंह और फ़िल्म निर्देशक फराह ख़ान ने रोमन कैथोलिक चर्च के भारतीय कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस से मिल कर लिखित में माफ़ीनामा सौंपा। तीनों हस्तियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी ईसाई समुदाय से माफ़ी माँगी थी। इन तीनों के ख़िलाफ़ जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए और कुल 3 एफआईआर भी दर्ज कराइ गई। तीनों फ़िल्मी सेलेब्रिटीज ने लिखित माफ़ीनामे में स्वीकार किया कि उन्होंने इसे समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का काम किया है और वो इसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं। तीनों ने अलग-अलग माफ़ीनामा लिख कर अपने हस्ताक्षर सहित कार्डिनल को सौंपा।

फेसबुक पर ‘Persecution Relief’ नामक पेज ने इन तीनों की कार्डिनल से मिलते हुए फोटो शेयर की और तीनों माफीनामे की कॉपी भी शेयर की। इसे नीचे संलग्न किया गया है। पेज ने लिखा कि क्षमा करना किसी दूसरे पर दया दिखाना नहीं है बल्कि ये तो ख़ुद पर दया करने जैसा है। साथ ही आगे लिखा गया कि किसी ने कुछ ग़लत किया हो तो उसके प्रति बुरे विचार रखना ख़ुद को सज़ा देने के समान है।

रोमन कैथोलिक चर्च के भारतीय कार्डिनल से मिल कर तीनों फ़िल्मी हस्तियों ने सौंपा माफ़ीनामा

अब आपको बताते हैं कि मामला क्या है। दरअसल, रवीना, भारती और फराह के ख़िलाफ़ ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था। क्रिसमस की पूर्व संध्या पर प्रसारित शो को लेकर उन पर ये आरोप लगे। आरोप है कि इन लोगों ने ईसाई धर्म की पवित्र पुस्तक बाइबल की शब्दावली का मज़ाक उड़ाया है। फराह ख़ान ने बाइबिल का एक शब्द बोला और भारती सिंह को ब्लैकबोर्ड पर लिखने को कहा। आरोप लगाया गया है कि शो में बाइबिल के शब्द को अश्लील रूप में पेश किया गया।

पंजाब के कैंट पुलिस स्टेशन में इन तीनों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया गया था। पंजाब के फ़िरोज़पुर में भी इन तीनों के ख़िलाफ़ एफआईआर लिखाई गई। इसके अलावा महाराष्ट्र की बीड में तीनों पर मामला दर्ज किया गया था। कुल तीन एफआईआर होने के साथ ही इनके ख़िलाफ़ जगह-जगह पर विरोध प्रदर्शन भी चालू हो गए थे। ये एफआईआर ईसाई संस्थाओं व एनजीओ द्वारा दर्ज कराए गए थे। इस सम्बन्ध में तीनों ने सोसियल मीडिया पर माफ़ी भी माँगी थी लेकिन उससे बात नहीं बन पाई। अंततः इन्हें कार्डिनल से मिल कर लिखित में माफ़ी माँगनी पड़ी।

रवीना टंडन, भारती सिंह और फ़राह खान पर केस: एक शब्द को लेकर ईसाई संगठन की शिक़ायत

शिव मंदिर में फेंके प्रतिबंधित मांस के टुकड़े, बीफ के कारण पहले भी इस इलाके में हुआ था बवाल

‘पैगंबर मुहम्मद ने 19 महिलाओं से निक़ाह क्यों किया?’ – सवाल पूछने पर लड़की को सरेआम फाँसी की माँग