लोकसभा में अमित शाह की ओर से लाया गया संकल्प स्वीकार किया गया है। इसके पक्ष में 370 और विपक्ष में 70 वोट पड़े हैं। एक सांसद ने अपना मत नहीं डाला, जबकि कुल 441 सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा लिया है। इसके साथ ही लोकसभा से भी जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल 2019 पास हो गया है।
भाजपा की ओर से लोक सभा में मोर्चा संभालने वालों में से एक थे लद्दाख के सांसद जाम्यांग त्सेरिंग नामग्याल, जिन्होंने राज्य के विभाजन के समर्थन में लद्दाख का पक्ष रखा।
Article 370 और कश्मीर पर केंद्र के फैसले के विरोध में मीटिंग कर रहे वामपंथी कार्यकर्ताओं से इसके समर्थन में जश्न मना रहे युवकों की भिड़ंत हो गई। इस दौरान समर्थकों ने लाठी-डंडे से हमला कर सीपीआई के सुमंत कुमार का सिर फोड़ दिया। 3 अन्य लोगों को...
कॉन्ग्रेस को भय है कि समर्थन करने में मुस्लिम वोट बैंक से हाथ धोना पड़ सकता है और विरोध करने में हाल ही में अपनाया गया ताजातरीन हिंदुत्व खतरे में पड़ सकता है इसलिए बेहतर है कि इस सब चर्चा से ऊपर उठकर नेहरू जी के नाम का कलमा पढ़ा जाए।
श्रीनगर के हाजी बाग कैंप, सोम्यार मंदिर, इस्लामियां कॉलेज, छोटा बाजार समेत 9 इलाकों में अराजक तत्वों द्वारा पत्थरबाजी की गई है। जबकि कुछ अन्य इलाकों में लोगों के सड़कों पर उतर आने और पाबंदियों का विरोध करते हुए प्रदर्शन किए गए।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद हसनैन मसूदी ने 370 के अस्थायी होने के भाजपा के तर्क पर भी सवाल उठाए। उन्होंने BJP को गोपालस्वामी अयंगर के भाषण पढ़ने तक की सलाह दे डाली। एक दिन पहले वह कश्मीर को 'मुस्लिम राज्य' बता चुके थे।
JNU में तो दो बार से सारे वामपंथियों के नितम्ब चिपक कर एक होने के बाद ही चुनाव जीते जा रहे हैं, इस साल कितने चिपकेंगे ये देखने की बात है। घर में कॉफी पीने वाला लेनिनवंशी पब्लिक में लाल चाय पीने लगता है और छत पर मार्लबोरो फूँकता माओनंदन कॉलेज के स्टाफ क्लब में बीड़ी पीता दिखता है।
पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बताया कि उनकी सरकार ने जेडीएस की तुलना में कॉन्ग्रेस विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अधिक धन आवंटित किया था, लेकिन फिर भी सरकार गिरने का दोष उन्हें ही दिया जा रहा है
“मोदी सरकार कश्मीर को दूसरा फिलिस्तीन बनाना चाहती है। वह वहाँ की जनसांख्यिकी में बदलाव करने के लिए बाकी लोगों को कश्मीर में बसाना चाहती है। सांसदों को तुच्छ मुद्दों पर लड़ना बंद करके भारत को खून, आँसू और पसीने से जवाब देना चाहिए और अगर जंग थोपी जाए तो हमें जंग के लिए तैयार रहना चाहिए।”
लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी के विवादस्पद बयानों की झड़ी लगी हुई है। कश्मीर को UN का मसला बताने के बाद अब वह केंद्र सरकार पर POK (पाक-अधिकृत, गुलाम कश्मीर) से पल्ला झाड़ लेने का आरोप लगाते पाए जा रहे हैं।
शाहिद अफरीदी ने कल रात डोनल्ड ट्रंप को टैग करते हुए कश्मीर मामले पर अपनी बौखलाहट निकाली। लेकिन भारत के पूर्व आक्रमक बल्लेबाज गौतम गंभीर और फिलहाल भाजपा के सांसद ने उन्हें जवाब देने में देर नहीं लगाई।
“जम्मू-कश्मीर को 2 हिस्सों में बाँटकर, जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों को जेल में डालकर और संविधान का उल्लंघन करके देश को एकजुट नहीं रखा जा सकता। देश उसकी जनता से बनता है न कि जमीन के टुकड़ों से। सरकार द्वारा शक्तियों का दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंंभीर खतरा साबित हो सकता है।”
लोकसभा में कॉन्ग्रेस सांसद दल के मुखिया अधीर रंजन चौधरी ने ऐसी बयानबाजी कर डाली, जिससे सत्ताधारी भाजपा के साथ-साथ उनके अपने संप्रग की अध्यक्षा सोनिया गाँधी भी नाराज़ हो गईं। उन्होंने कश्मीर मसले पर बिल लाने की सरकार की हैसियत को ही चुनौती दे डाली।
कई राजनेताओं ने केंद्र सरकार के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि ये भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता और उसके लोगों के कल्याण के हित में लिया गया फैसला है। हालाँकि, इनमें से सभी नेता अपनी पार्टी के रुख का खुलकर विरोध नहीं कर रहे हैं।
"प्रदेश बोर्डों में अलग पाठ्यक्रम होने के कारण मेडिकल और इंजीनियरिंग के दाखिले की परीक्षाओं में ग्रामीण इलाकों के बच्चे स्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए पूरे देश में एक बोर्ड होना चाहिए ताकि सभी बच्चे एक तरह की पढ़ाई करें और सबको बराबर का मौका मिले।"
"पाकिस्तान कश्मीर में जनमत संग्रह की बात करता है, लेकिन क्या वह यही अधिकार अपने यहाँ के उन अल्पसंख्यकों को देने के लिए तैयार है, जो सांस्कृतिक व जातीय भिन्नता के कारण हाशिये पर हैं?"
'हमने सिर्फ एक किताब फाड़ा है।' यानी कि उनके अनुसार देश के संविधान की प्रति उनके लिए महज एक किताब है। उनका कहना है कि संविधान उन्होंने नहीं, बल्कि भाजपा ने फाड़ा है।
अनुच्छेद 370 में किए गए बदलाव पर जहाँ पूरा देश जश्न मना रहा है, वहीं पश्चिम बंगाल में लोगोंं को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने सिलीगुड़ी में भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष कंचन देबनाथ और महामंत्री समेत 5 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है।
"आप लोग डरिए मत, ये हम कह रहे हैं... ये जुल्म कश्मीरी बर्दाश्त नहीं करेगा। हिन्दुस्तान तो फासिस्ट है... ये हमारे लिए एक लानत है और मैं इस लानत को स्वीकार नहीं करूँगा।"
”हम समझते हैं कि नेहरू की वजह से कश्मीर हमारे पक्ष में आया। अगर रेडक्लिफ अवॉर्ड न होता और गुरदासपुर हमारे पास न होता और मैजॉरिटी का सिद्धांत माना जाता तो शायद यह राज्य हमारे पक्ष में न आता। उस वक्त सरदार पटेल होम मिनिस्टर थे और वही यहाँ 370 लेकर आए।”
कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी अलग ही राग छेड़ते दिखे। उन्होंने बेतुकी बात कहते हुए कश्मीर मसले को UN का मसला बता दिया। इस पर अमित शाह ने करारा जवाब देते हुए कहा कि अब कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र मॉनिटर करेगा?
दुर्घटना की सूचना मिलते ही SDRF की टीम मौक़े पर पहुँच गई है और घायल बच्चों को नजदीकी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे में 5 बच्चों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। अस्पताल में घायल बच्चों को हर संभव इलाज देने का प्रयास किया जा रहा है।
किताबें तो मैंने भी बहुत पढ़ी हैं, और पेज नंबर मुझे भी याद हैं, लेकिन मैं अभी तक इतना धूर्त नहीं बन पाया कि उस ज्ञान का इस्तेमाल अपनी फर्जी विचारधारा और मालिकों के प्रोपेगेंडा की रोटी सेंकने में कर सकूँ। वो तरीके रवीश को ही मुबारक हों।
जहाँ कॉन्ग्रेस के आलाकमान अनुच्छेद-370 का 'पावर' खत्म होने का विरोध कर रहे हैं, वहीं पार्टी के दो धुरंधर युवा नेता मोदी सरकार के फैसले से न सिर्फ खुश हैं बल्कि अपनी बात रख भी रहे हैं। इनके अलावा वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता जनार्दन द्विवेदी ने भी...
जेएनयू में आर्टिकल 370 पर सरकार के फैसले के ख़िलाफ़ 'आजादी-आजादी' के नारों की गूँज सुनाई दी। भीड़ ने रात के अँधेरे में यहाँ जमकर नारेबाजी की और अनुच्छेद 370 को वापस लेने की माँग की। इन लोगों ने सेना को लेकर भी काफ़ी अपशब्द बोले।
"अगर हिंदुस्तान सच में 370 को हटा कर कश्मीर का पूर्ण विलय हिंदुस्तान में कर ले गया तो ट्रम्प का कश्मीर मामले पर मध्यस्थता करना पाकिस्तान को ही महँगा पड़ेगा।"
मौलाना अब्बास ने यह भी कहा कि हिन्दुस्तान एक है, संविधान एक है तो सब कुछ एक होना चाहिए। आगे भी ऐसे काम होते रहने चाहिए जिससे भेदभाव ख़त्म किया जा सके जिससे देश में एकता नज़र आए।
पाकिस्तान ने भारत के इस फ़ैसले पर कहा है कि कश्मीर का मुद्दा एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है। इसलिए भारत सरकार इस मसले पर एकतरफ़ा फ़ैसला नहीं कर सकता। ऐसा करने से कश्मीर का मुद्दा हल नहीं होगा, इसलिए यह फ़ैसला न तो पाकिस्तान को स्वीकार्य है और न ही जम्मू-कश्मीर के लोगों को स्वीकार्य है।
"आज का दिन भारतीय इतिहास का काला दिन है। बीजेपी की सरकार ने सत्ता के नशे में और वोट हासिल करने के लिए एक झटके में अनुच्छेद 370 के साथ 35A को खत्म कर दिया। इसके साथ खिलवाड़ कर यह बहुत बड़ी गद्दारी कर रहे हैं।"
पहले ही घर में नज़रबंद चल रहीं महबूबा मुफ़्ती को उनके घर से VIP गेस्ट हाउस हरि निवास ले जाया गया है। महबूबा मुफ़्ती ने 370/35A के न केवल पक्ष में बयान दिए थे, बल्कि उन्होंने देश-विरोधी और लोगों को भड़काने वालीं कई बातें ट्वीट भी की थी।
मोदी सरकार के इस फैसले ने जहाँ विपक्ष को बेचैन किया वहीं पाकिस्तान में भी उथल-पुथल मच गई। राजनेताओं से लेकर पाकिस्तान के कलाकार और आम जनता भी इस विषय पर अपना मत रख रहे हैं। इस खबर को पाकिस्तानी मीडिया अपनी हेडलाइनों में लगातार ब्रेकिंग बनाकर चला रहा है।
“अपनी यूनियन टैरिटरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के असंभव ख्वाब देखने वाले आत्ममुग्ध बौने को भी एक पूर्ण राज्य के यूनियन टैरिटरी में बदलने के प्रस्ताव का समर्थन करना पड़ रहा है, इसी को 'खुदाई-जूता' कहते हैं जो लगता भी है और रोने भी नहीं देता।”
टीवी, जो आप तक सन्देश तो पहुँचाता है, लेकिन उस सन्देश को आपने कैसे लिया इस बारे में सन्देश भेजने वाले चैनल को कुछ नहीं बताता। यानी टीवी एक कम्युनिकेशन का माध्यम- मीडिया नहीं है, ना ही उसके चैनल में काम करने वाले मीडियाकर्मी कहलाएँगे।
सरकार की घोषणा के बाद केंद्र शासित प्रदेशों की लिस्ट में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का नाम जुड़ गया है। वहीं, 29 राज्यों में से एक राज्य (जम्मू-कश्मीर) घट गया जिससे अब कुल राज्यों की संख्या 28 हो गई है और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या 9 हो गई है।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल राज्यसभा में पास हो गया है। जम्मू-कश्मीर को दो भागों में बाँटने वाले इस बिल पर सदन में बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े तो वहीं इसके विपक्ष में 61 वोट पड़े। जबकि एक सदस्य गैर हाजिर रहा। इससे पहले राज्यसभा से जम्मू कश्मीर आरक्षण दूसरा संशोधन बिल ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इसमें सांप्रदायिक दंगों के खिलाफ सतर्क रहने की सलाह दी गई है। साथ ही हिंसा को रोकने के लिए पुलिस से मॉक ड्रिल चलाने का निर्देश भी जारी किया गया है।
कलीम हैदर नकवी ने तमाम शिया समुदाय से अपील करते हुए कहा है कि सावन के सोमवार के आखिरी दिन बड़ी संख्या में शिवभक्त मंदिर जाते हैं। ऐसे में लोग 12 अगस्त को जानवरों की कुर्बानी न दें और इस दिन केवल नमाज पढ़ें।
नेहरू और इंदिरा ने 370 की आड़ में शेख अब्दुल्ला से विभिन्न करार किए, जिनकी न कोई वैधानिकता थी न ज़रूरत। उन्हीं करारों के चलते जम्मू-कश्मीर राज्य को अलग झंडा और न जाने क्या-क्या दे दिया गया, जिसके कारण बाद के वर्षों में अलगाववाद को हवा मिली।
शाह फैसल की पार्टी से जुड़ीं शेहला रशीद ने कहा कि सरकार को गवर्नर मान लेने और संविधान सभा की जगह विधानसभा को रखने का फैसला संविधान के साथ धोखा है। वो इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी।
आज होने वाले वाले बड़े फैसले के मद्देनज़र केंद्र ने विभिन्न एयरलाइन्स के टिकट बढ़ते दाम पर रोक लगाते हुए उसकी क़ीमत 7,000 रुपए कर दी थी जिससे अमरनाथ यात्री और पर्यटक घाटी से निकलने में काफ़ी मदद मिली।
अजित डोभाल आज ही जम्मू-कश्मीर के दौरे पर जाएँगे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेंगे। वहाँ की स्थितियों को देखते हुए वो रुक भी सकते हैं और स्थितियाँ सामान्य होने तक सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखेंगे।
कश्मीर से 370 जाने पर कभी "मार दूँगा-चीर दूँगा", तो कभी "ऐ जानेवफ़ा, ये ज़ुल्म न कर" का ऑड-ईवेन खेलने वाले इन नेताओं ने PM मोदी के साथ-साथ पूरे देश को जिस-जिस भाषा में धमकी दी थी, उसका पूरा कच्चा चिट्ठा यहाँ है। आज ये नेता कहाँ होंगे, क्या कर रहे होंगे, सोचिए...
स्लीपर बस होने के कारण घटना के समय कई यात्री ऊपर के बर्थ पर सो रहे थे। जिस कारण वे आग लगी बस से नहीं निकल पाए और उनकी मौत हो गई। कई यात्री शीशा तोड़कर बस से निकल पाए।
अब्दुल्ला को घर में नजरबंद किए जाने के बाद शशि थरूर ने ट्वीट किया, "आप अकेले नहीं हैं उमर अब्दुल्ला। लोकतंत्र को मानने वाला हर भारतीय कश्मीर की मुख्यधारा से जुड़े नेताओं के साथ खड़ा होगा। संसद का सत्र अभी भी चल रहा है और हमारी आवाज खामोश नहीं रहेगी।"
दूसरे ट्वीट में उमर अब्दुल्ला ने चेतावनी भरे लहजे में लिखा था, “मेरे शब्दों को याद रखना। या तो आर्टिकल 370 रहेगा या फिर जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं रहेगा।”
राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कश्मीर में लागू अनुच्छेद-370 और 35 A को खत्म करने के प्रस्ताव को पेश करते ही विपक्षी पार्टियों और लिबरल गैंग को झटके लगने शुरू हो गए हैं। बरखा दत्त ने ट्वीट किया, “एक डेस्क में दो विधानसभा, दो प्रधान, दो निशान नहीं हो सकते।”