लाल किले में हुई हिंसा और बर्बरता की घटना के जाँच के लिए कथिततौर पर एनकाउंटर स्पेशिलिस्ट एसीपी ललित मोहन नेगी को यूएपीए का नया इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है।
हाल के दिनों में विभिन्न मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए यूपी पुलिस ने लोकप्रिय विषयों का बहुत ही बेखूबी से उपयोग करते हुए अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया है। जिसका यूपी पुलिस को काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।
इसके अलावा नेशनल हेराल्ड की वरिष्ठ सम्पादकीय सलाहकार मृणाल पांडे, कौमी आवाज के जफर आगा, कारवा पत्रिका के मुख्य संपादक प्रकाशक परेशनाथ, कारवाँ पत्रिका के अनन्तनाथ व इसी पत्रिका के कार्यकारी संपादक विनोद और एक अज्ञात का नाम शामिल है।
वीडियो में दंगाइयों के एक समूह को लाल किले की दीवारों पर पेशाब करते हुए देखा गया था। वीडियो बनाते हुए एक दंगाई कहता है कि, "हम मोदी के मुँह में पेशाब करेंगे।"
प्रदर्शनस्थल पर टेंट आदि समेट लिए गए हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरह से जारी रहेगा। पुलिस चाहे तो गिरफ्तार कर सकती है।
प्रबंधन ने राजदीप के ट्वीट्स को ग्रुप की सोशल मीडिया पॉलिसी से अलग माना है। इसीलिए अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें 2 हफ़्ते के लिए ऑफ़ एयर कर दिया।
गद्दार कहे जाने से नाराज दीप सिद्धू ने किसान नेताओं को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने अंदर की बातें खोलनी शुरू कर दी तो इन नेताओं को भागने की राह नहीं मिलेगी।
योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर की ओर से श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 1 करोड़, 1 लाख रुपए अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि निर्माण निधि समर्पण के रूप में दान किए।
वीडियो में बुजुर्ग आदमी सड़क पर बैठे हैं और वहाँ से उठते हुए कहते हैं, "ये बोलते है आगे जाओगे तो मारूँगा। अरे क्या गुनाह किया है? हम यहाँ से निकले नहीं? हमारे रास्ते में आ गए।"
कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य ललन प्रसाद सिंह से प्रभार को लेकर डॉ शम्शी का विवाद चल रहा था। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद से इलाके में हड़कंप मच गया है।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि कर्नाटक के कब्जे वाले मराठी-भाषी क्षेत्रों को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाना चाहिए, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट अपना अंतिम फैसला नहीं दे देता।
इंदौर से एक बेहद ही सनसनीखेज मामला सामने आ रहा है, जहाँ एक लड़की ने अपने ही माता-पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है कि वे उसका जबरन धर्मांतरण करवा रहे थे।
राजधानी में हुई हिंसा के बाद एक्शन मोड में आई दिल्ली पुलिस ने 37 नेताओं पर एफआईआर दर्ज की है। इनमें राकेश टिकैत, डाॅ दर्शनपाल, जोगिंदर सिंह, बूटा, बलवीर सिंह राजेवाल और राजेंद्र सिंह के नाम शामिल हैं।
पंचायत में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि एक महीने से प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली-जयपुर हाईवे को बंधक बनाया हुआ है, जिस कारण आसपास के ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
भारतीय किसान यूनियन 'भानु' के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह और राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के वीएम सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना आंदोलन खत्म करने का एलान किया है।
सिंघु बॉर्डर पर किसान क्यों हैं अभी भी? एक भी अरेस्ट क्यों नहीं? मीटिंग तो एक रूटीन प्रक्रिया है, लेकिन असामान्य परिस्थिति में रूटीन से बाहर क्यों नहीं है सरकार? टिकैत, योगेन्द्र यादव समेत वो चालीस किसान नेता क्यों नहीं हैं कस्टडी में? सरकार जवाबदेही तक क्यों नहीं तय कर पाई है?