दिल्ली दंगों में चार्जशीट दाखिल होने का सिलसिला शुरू होते ही 'मासूम' नैरेटिव गढ़ने की कोशिशें भी शुरू हो गई है। जानिए, मोनिका अरोड़ा से कैसे रची गई थी पूरी साजिश।
नेहरू ने तो मानो अपने आदर्श पश्चिमी देशों से भी कुछ नहीं सीखा। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जब सोवियत संघ मित्र राष्ट्रों के साथ खड़ा हुआ, तब उसने विचारधारा की परवाह नहीं की थी और वह पूँजीवादियों के साथ नजर आया।
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने चीन पर तीखा हमला किया है। उन्होंने चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी को दुष्ट करार देते हुए कहा कि वह भारत के साथ सीमा पर तनाव भड़का रही है।
"भारतीय सेना मजबूत सेना है। चीन को हरा सकती है। राहुल गाँधी, आप नेतागिरी मत करना। ये राजनीति अच्छी नहीं है। मेरा छोरा पहले भी फौजी में लड़ा। फिर लड़ेगा शेर की तरह।"
"सब ठीक हो जाएगा। बस लेह का आधा हिस्सा चाइना लेना चाहिए। फिर पता है क्या होगा... दिल्ली में मोदी की माँ-बहन हो जाएगी...। लद्दाख यूटी के फिर हजार टुकड़े हो जाएँगे।"
कंगना रनौत का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह मीडिया रिपोर्टों का हवाला देकर बता रही हैं कि कैसे सुशांत सिंह राजपूत की मीडिया ने मूवी माफिया की शह पर लिंचिंग की।
द क्विंट ने डीएस बिंद्रा नाम के उस आरोपित को बचाने की कोशिश की है, जिसके लिए चार्जशीट में कहा गया है कि उसने उन दंगों को भड़काने का काम किया, जिसमें कॉन्स्टेबल रतनलाल की जान गई थी।
इस निर्माण कार्य में नेपाल के नहीं बल्कि 30 चीनी इंजिनियर लगे हुए हैं। जिन्हें नेपाल ने नेपाली सैनिकों की वर्दी में सैनिक हेलीकॉप्टर के जरिए वहाँ पहुँचाया है और उसी से......
भारतीय सेना ने जानकारी देते हुए बताया कि इस हिंसक झड़प के बाद कोई भी भारतीय जवान लापता नहीं है। जितने भी जवान गलवान घाटी के पास थे, सभी की जानकारी उनके पास है।
नोएडा में करीब 20 हजार MSME क्षेत्र की कंपनियाँ मौजूद हैं, जिन्होंने निर्माण प्रक्रिया में चीनी उत्पादों और उपकरणों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
तेलंगाना हाईकोर्ट ने पूछा है कि लॉकडाउन में समुदाय विशेष पर ही ज्यादा मुकदमे क्यों? यह भी तो हो सकता है कि कोई समुदाय शांतिप्रिय हो, और कोई सिर्फ शांतिप्रिय कहलाता हो, लेकिन उपद्रव करने में अग्रणी हो?
वह असंतोष न चीन के कम्युनिस्टों के हक में होगा और न भारत के वामपंथियों और उनके पोषक कॉन्ग्रेस के। इसलिए, नानजिंग के प्रेसिडेंशियल पैलेस और जनपथ की बेचैनियाँ आज एक सी दिख रहीं।
निजामुद्दीन चिश्ती जैसों के 'शांतिपूर्ण सूफीवाद' का मिथक खूब फैलाया गया है। लेकिन वास्तविकता यही है कि ये जिहाद को बढ़ावा देने, 'काफिरों' के धर्मांतरण के लिए ही भारत आए थे।
एक हथियार की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई। जिसे लेकर दावा किया जा रहा था कि इन्हीं हथियारों से चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर हमला किया। लेकिन आर्मी ने यह स्पष्ट किया कि........
सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए फैसला दिया है कि कोरोना महामारी के फैलने के डर और लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जगन्नाथ मंदिर में होने वाली वार्षिक रथयात्रा ना निकाली जाए।