रवीश आज भी नेहरू-इंदिरा के अहंकार के उस दौर से आतंकित हैं, जब मनचाहे तरीकों से सत्ता, समाज और संस्थाओं को अपने नियंत्रण में रखा करती थी। लप्रेकी रवीश इस नींद से जागना नहीं चाहते क्योंकि उन्हें 'दंगा साहित्य' पसंद है।
एर्टुग्रुल को इतिहासकारों ने ‘गाजी’ कहकर संबोधित किया है। इस्लाम में ‘गाजी’ की उपाधि मूर्तिपूजकों, गैर-मुस्लिमों, अल्लाह को न मानाने वाले अथवा काफिरों की हत्या करने वाले को दी जाती है।
फरार चल रहे तबलीगी जमात के मुखिया मौलाना साद को दिल्ली के एक मस्जिद में देखे जाने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि उसने 20 लोगों के साथ नमाज पढ़ी थी।
एक तरफ एक मजहब है, जो कि अपने मूल रूप में प्रसारवादी, राजनैतिक और ऐतिहासिक तौर पर हिंसक और लूट-पाट से ले कर आतंक का शासन स्थापित करने पर तुला हुआ है, और दूसरी तरफ उसी की प्रसारवादी नीतियों को झेल कर हर बार खड़ा होने वाला धर्म! दोनों एक हैं ही नहीं, आप क्यों मिलाना चाह रहे हो?
राहुल गॉंधी ने जो 2013 में किया उसे प्रियंका गॉंधी 2020 में अजय सिंह लल्लू के नाम पर दोहराने की कोशिश में हैं। दिलचस्प यह है कि इस कोशिश में चायवाले का मजाक उड़ाने वाली कॉन्ग्रेस नमक बेचने की दुहाई दे रही है।
दिवंगत अजय पंडिता की बेटी नियंता ने कहा है कि कॉन्ग्रेस को भारत के बेटे की हत्या पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। उनके पिता की हत्या पर राजनीति करने की जरूरत नहीं है। उनका परिवार किसी से कुछ नहीं माँग रहा। उन्हें बस इंसाफ चाहिए।
रायबरेली से कॉन्ग्रेस विधायक अदिति सिंह ने पार्टी के सभी Whatsapp ग्रुपों को छोड़ दिया है। पिछले दिनों उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से पार्टी का नाम हटाया था।
जिस समय दुनिया कोरोना से लड़ रही है उत्तराखंड ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण के षड्यंत्रों से भी संघर्षरत है। यह कभी ऑनलाइन तो कभी राशन, बाइक और मुर्गा के नाम पर परोसा जा रहा है।
भारत में महिलाओं, और आदिवासियों को 'ब्लैक लाइव्स मैटर' विरोध प्रदर्शन की तरह विरोध करने और उन्हें भड़काने वाले आकार पटेल का ट्विटर एकाउंट सस्पेंड कर दिया गया है।
"लाशें किस तरह से रखी जा रही हैं? ये क्या हो रहा है? अगर लाशों के साथ ऐसा सलूक हो रहा है, अगर लाशें कचरे के ढेर में मिल रही हैं तो यह इंसानों के साथ जानवरों से भी बदतर सलूक है।"
"यह पुस्तक शिक्षा विभाग द्वारा निर्दिष्ट पाठ्यपुस्तकों का हिस्सा नहीं है। स्कूल ने स्वयं यह किताब शामिल की है। छात्रों के मन में पूर्वाग्रह स्थापित करने वाले किसी भी कृत्य को हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
प्रदर्शनकारियों ने अब उपनिवेशवाद और अश्वेतों की गुलामी को समर्थन देने वालों की मूर्तियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है और उन्हें हटाए जाने की माँग भी जोर-शोर से उठ रही हैं।
भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाक सेना की दो चौकियाँ पूरी तरह नष्ट कर दिन। साथ ही पाक सेना के एक मेजर रैंक के अधिकारी सहित पाँच सैनिकों के मारे जाने की सूचना है।
इस कदम ने इंदिरा गाँधी को और भी अधिक निरंकुश बना दिया था। फिर पत्रकारों की गिरफ्तारी से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं के खून से लोकतंत्र के इतिहास का सबसे कलंकित अध्याय लिखा गया।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने इस साल अब तक 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। इनमें से 68 को 1 अप्रैल से 10 जून के बीच मार गिराया गया, जब कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लागू था।
बहुत ही बारीकी से कभी प्रतीकात्मक तस्वीर के नाम पर तो कभी सीधे खुल्ले में खेलते हैं कि कौन सी जनता जा रही है तहकीकात करने? अगर बाद में पता भी चला तो क्या हो जाएगा? क्योंकि आजतक कभी इन्हें अपनी इन हरकतों पर कोई बड़ा आउटरेज नहीं झेलना पड़ा।