गलवान में चीनी सेना के धोखे से किए गए वार के बाद से दुनिया के कई देश खुलकर भारत के साथ खड़े हुए हैं। जापान भी अब इन देशों में शामिल हो गया है।
भारत का समर्थन करते हुए उसने कहा है कि वह नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति को बदलने वाली किसी भी एकतरफा प्रयास का विरोध करता है। भारत की सराहना करते हुए मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद जताई है।
जापान के भारत में राजदूत सतोशी सुजुकी ने बताया कि उनकी भारत के विदेश सचिव हर्ष वी श्रृंगला से इस बारे में चर्चा हुई थी। सतोशी सुजुकी ने ट्वीट कर कहा, “मेरी विदेश सचिव श्रृंगला से अच्छी बातचीत हुई है। एलएसी पर श्रृंगला की ओर से दी गई जानकारी की और भारत सरकार के शांतिपूर्व समाधान के प्रयासों की मैं प्रशंसा करता हॅं। जापान आशा करता है कि इस विवाद का शांतिपूर्वक समाधान होगा। जापान यथास्थिति को बदलने की किसी भी कार्रवाई का विरोध करता है।”
Had a good talk with FS Shringla. Appreciated his briefing on the situation along LAC, including GOI’s policy to pursue peaceful resolution. Japan also hopes for peaceful resolution through dialogues. Japan opposes any unilateral attempts to change the status quo.
जापान की तरफ से यह प्रतिक्रिया तब आई है जब उसने एक विधेयक में संशोधन किया है। इसके बाद वह भारत, ऑस्ट्रेलिया और यूके के साथ भी डिफेन्स इंटेलिजेंस साझा कर पाएगा। इस विधेयक के लागू होने से पहले तक जापान केवल अमेरिका के साथ डिफेन्स इंटेलिजेंस साझा कर सकता था।
इसके अलावा जापान सरकार के विदेश मंत्रालय ने भी हाल ही में इस मामले पर अपना मत रखा था। मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि वह इस मामले पर शुरू से निगाह रखे हुए है, क्योंकि ऐसी घटनाओं का सीधा असर क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है।
इसके पहले 19 जून को भी सतोशी सुजुकी ने सीमा पर चीन और भारत की सेना के बीच हुई हिंसक झड़प में सैनिकों के बलिदान पर संवेदना जताई थी। उन्होंने कहा था, “हम भारत के नागरिकों और गलवान घाटी में अपने कर्त्तव्य का पालन करते हुए बलिदान होने वाले सैनिकों के परिजनों के लिए गहरी संवेदना जताते हैं।”
कुछ दिनों पहले किसी ने याद दिलाया था कि भौकाल का भी अपना महत्व है। ये कोरोना को लेकर दो देशों की तुलना थी, जिसमें दोनों का काम तो एक ही जैसा था, मगर एक देश ऐसा था जहाँ के लोग अपनी कामयाबी का जोर शोर से ढिंढोरा पीटते थे। दूसरे देश के लोग जरा कम बोलने वाले थे और उतना शोर नहीं मचाते थे। इसका नतीजा ये भी था कि एक देश के लोग अक्सर कंपनियों में सीईओ या ऐसे ऊँचे पदों पर दिखते, मगर जो कम बोलने वाले थे उनका दबदबा उतना नहीं दिखता था। ऐसा भारत के साथ भी होता है। आज जिस देश को इजराइल के नाम से जाना जाता है, उसके बनने में भारत का बड़ा योगदान है।
भारतीय घुड़सवार सैनिकों की मैसूर, हैदराबाद, और जोधपुर के घुड़सवारों की टुकड़ियों ने 1918 में हाइफा पर विजय का परचम फहराया था। उस दौर में ये आखिरी इस्लामिक खलीफा माने जाने वाले ओटोमन साम्राज्य का हिस्सा था। उनसे अगर ये इलाका छुड़ाया नहीं गया होता तो इजराइल कभी बनता ही नहीं। इस युद्ध में शौर्य के लिए कैप्टेन अमन सिंह बहादुर और वफादार जोर सिंह को इंडियन आर्डर ऑफ़ मेरिट, कैप्टेन अनूप सिंह और सेकंड लेफ्टिनेंट सगत सिंह को मिलिट्री क्रॉस से सम्मानित किया गया था। इस युद्ध में मेजर दलपत सिंह को भी उनकी वीरता के लिए मिलिट्री क्रॉस मिला था।
इस एक युद्ध के लिए भारतीय सेना अभी भी 23 सितंबर को हाइफा दिवस मनाती है। सिर्फ इस एक युद्ध में ही नहीं बल्कि शायद जितनी बार भारतीय सैनिक युद्धों में उतरे हैं, करीब-करीब हर बार दुनिया के नक़्शे पर एक नया देश उभरकर सामने आ गया है। अफ़सोस कि इनके बारे में याद दिलाने के बदले हम बताते क्या हैं? भारत तो गाँधी का देश है जी! ये तो बुद्ध की भूमि है जी! इसका नतीजा ये होता है कि जिन्हें भारतीय सेना के युद्ध में उतरने से आतंकित होना चाहिए, वो बेचारे मासूम ये मान लेते हैं कि इन्हें थप्पड़ मार दो तो ये तो दूसरा गाल आगे कर देंगे! जाहिर है ऐसे में बेचारे दुस्साहस कर भी बैठते हैं।
बीते दो चार दिनों में भारत-चीन विवाद के साथ ही कई चीज़ें बदल गई हैं। फ्राँस ने सीधे-सीधे सैन्य समर्थन देने की ही बात कर दी है। ऐसा माना जाता है कि इससे पहले विदेशी जमीन पर लड़ने के लिए वो मक्का पर कब्जे के वक्त उतरे थे। हालाँकि, आधिकारिक स्रोत इसकी पुष्टि नहीं करते लेकिन माना जाता है कि नवंबर 1979 में जब अल कह्ताबी ने मक्का पर कब्ज़ा जमा लिया था तो फ़्राँस की सैन्य मदद से ही उसे छुड़ाया गया था। फ़्राँस के ऐसा करने के साथ ही यूएनएचआरसी में भारत ने चीन को एक देश मानने की नीति में बदलाव दिखाते हुए सीधे-सीधे हांगकांग सेक्योरिटी लॉ की बात करके उसे अलग देश मान लिया है।
भारत को कराची पर हुए किसी आतंकी हमले का दोषी बताने की चीनी कोशिश को UNSC में अमेरिका और जर्मनी ने रोक दिया है। टिक-टॉक और दूसरे एप्प पर भारत के प्रतिबन्ध को जहाँ एक तरफ यूएस ने जायज बताया। वहीं दूसरी तरफ उन्होंने खुद भी चीनी कम्युनिस्टों की कठपुतली होने की वजह से हुवाई कंपनी पर प्रतिबन्ध लागू कर दिए हैं। यूके ने एक कदम और आगे जाकर हॉन्गकॉन्ग के लोगों को अपने यहाँ 5 साल शरण देने (जिसके बाद वो नागरिकता ले सकते हैं), की बात की है। यूके के इस कदम से बौखलाकर चीन के विदेश मंत्रालय ने यूके को नतीजे भुगतने की धमकियाँ देना भी शुरू कर दिया है।
परंपरागत रूप से चीन का करीबी माने जाने वाले रूस ने एस-400 मिसाइल डिफेन्स सिस्टम की आपूर्ति समय से पहले ही कर देने की बात की है। इसपर चीन की आपत्तियों को भी रूस ने दरकिनार कर दिया है। यानी शीत युद्ध के दौर से कहीं आगे निकलकर भारत अब फ्रंट फुट पर खेल रहा है। सिर्फ भारत के कंधे पर रखकर बन्दूक चलाने की कोई मंशा भी नहीं दिखती क्योंकि कई पश्चिमी देश अपने प्रतिबंधों और शरणार्थी प्रस्तावों के साथ खुद ही आगे आ गए हैं। अब इसे प्रधानमंत्री के लगातार के विदेश दौरों (जिनसे टुकड़ाखोरों को बड़ी समस्या थी), का नतीजा माना जाए या ना माना जाए, ये एक अलग बहस का मुद्दा हो सकता है।
इन सबके बीच यूएस ने नेशनल डिफेंस ऑथोराईजेशन एक्ट पास कर दिया है। इससे अब वो गाउम द्वीप पर भारतीय, ऑस्ट्रेलियाई और जापानी पायलटों को प्रशिक्षण दे सकेंगे। ये द्वीप ऐसी जगह है जहाँ से चीन नजदीक होता है। थोड़े दिन पहले जो ऑस्ट्रेलिया के प्रधान भारतीय प्रधान को ‘शाकाहारी’ समोसे खिलाने की बात करते ट्विटर पर नजर आए थे, वो सैन्य क्षेत्र में निवेश को 40 प्रतिशत बढ़ा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के साथ चीन के व्यापारिक रिश्तों में हाल में आई खटास कुछ अख़बारों के कोनों में दिखी थी। वो सीधा माल नहीं खरीद रहे होंगे तो जाहिर है वहाँ भारतीय निर्यातकों के लिए एक नया बाजार भी अपने आप तैयार हो गया है।
इस सारी उठापटक के बीच प्रधानमंत्री का लेह-लद्दाख पहुँच जाना सेना के लिए कैसा होगा इस बारे में कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है। जाहिर सी बात है जहाँ एक ओर इधर की सेना का मनोबल बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन का मारे गए सैनिकों की गिनती ना बताना काफी कुछ कहता है। अगर नुकसान कम हुआ होता तो सिर्फ एक सेना नायक रैंक के मारे जाने को स्वीकारकर वो नहीं छोड़ते। आराम से कहते कि हमारे तो इतने ही मरे, या एक भी नहीं मारा गया? ट्रेनिंग के लिए मार्शल आर्ट्स के प्रशिक्षकों को भेजा जाना भी काफी कुछ बताता है। पुराने दौर में “दिल्ली दूर, बीजिंग पास” कहने वाले तथाकथित नेता पता नहीं किस बिल में हैं। ऐसे मामलों पर उनकी टिप्पणी रोचक होती।
बाकी ये जो बाँके अपनी मूछों के नए स्टाइल के साथ सुबह से लेह-लद्दाख में होने की खबर के साथ टीवी पर नजर आ रहे हैं, उनसे ओनिडा टीवी के पुराने प्रचार जैसा “नेबर्स एनवी, ओनर्स प्राइड” वाली फीलिंग तो आ रही है। “जलने वाले चाहे जल जल मरेंगे” को पंचम सुर में गाइए, मुस्कुराइए, धुँआ उठता देखना मजेदार तो है ही!
कानपुर में गैंगस्टर विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस पर किए गए हमले में आठ पुलिसकर्मियों ने अपनी जान गॅंवाई। एक सीओ और दो एसओ समेत आठ पुलिसकमिर्यों पर हमला कर भागने में सफल रहे विकास दुबे को लेकर सोशल मीडिया पर कई भ्रामक दावे किए जा रहे हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि यह विकास दुबे भाजपा नेता है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई देने वाले एक भाजपा नेता की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है। इस तस्वीर में भी यह दावा किया गया है कि यह वही खूॅंखार गैंगस्टर और ‘भाजपा नेता’ विकास दुबे है, जिसके कारण 02 जुलाई 2020 को कानपुर में 8 यूपी पुलिसकर्मियों की जान गई।
इन तस्वीरों में लिखा गया है कि योगी जी के साथ कानपुर एनकाउन्टर का मुख्य अभियुक्त विकास दूबे है। वहीं एक अन्य ट्वीट में डीपी में लाल टोपी पहने एक युवक ने लिखा है – “रामराज्य है भैया कुछ भी हो सकता है 8 सिपाहियों का हत्यारा योगी जी का प्यारा।”
लेकिन वास्तविकता यह है कि तस्वीर में दिख रहे शख्स का नाम विकास दुबे जरूर है, लेकिन वह कानपुर के एक स्थानीय बीजेपी नेता हैं। यानी, कुछ लोग जान-बूझकर गैंगस्टर विकास दुबे को भाजपा नेता विकास दुबे साबित करने का प्रयास कर रहे हैं और कुछ लोग उनके इस भ्रामक दावे में फँस भी रहे हैं।
विरोधियों के एजेंडा को समझते हुए अंकुर सिंह ने ऐसे ही कुछ स्क्रीनशॉट ट्वीट करते हुए लिखा है, “कॉन्ग्रेस ‘डर्टी ट्रिक्स विभाग’ योगी आदित्यनाथ की एक तस्वीर साझा कर रही है, जिसमें दावा किया गया है कि यह तस्वीर गैंगस्टर विकास दुबे के साथ की है। हालाँकि, तस्वीर दूसरे विकास दुबे की है, जो BJYM में हैं।”
Congress Dirty Tricks department is sharing a pic of Yogi Adityanath claiming that the pic is with the gangster Vikas Dubey.
The pic is of different Vikas Dubey, who is in BJYM.
इन भ्रामक तस्वीरों के वायरल होने पर भाजपा नेता विकास दुबे ने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर एक अपील भी पोस्ट की, जिसमें उनके द्वारा लोगों से फर्जी खबरों के खिलाफ सतर्क रहने का अनुरोध किया गया है।
भाजपा नेता विकास दुबे ने लिखा है –
“अफवाहों से बचें। जो भी लोग आज पुलिस के साथ बदमाशों की हुई मुठभेड़ में उनकी शहादत को नमन करने की बजाय घटिया राजनीति करने का काम कर रहे हैं, सोशल मीडिया के माध्यम से मेरी फोटो डालकर मुझको आरोपी विकास दुबे बताकर संगठन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, किसी व्यक्ति का नाम एक हो जाने से उसका किरदार एक नहीं हो जाता। मेरे चरित्र से व मेरे व्यक्तिगत स्वभाव से आप सभी भलीभाँति परिचित होंगे। मैंने सदैव संगठन के लिए व राष्ट्र सेवा के लिए अपने कदम बढ़ाए हैं। आप सभी महानुभावों से मेरा निवेदन है कि गलत फोटो डाल कर लोगों को भ्रमित करने का कार्य ना करें। जिसने भी इस तरह की गलत पोस्ट की हैं तत्काल उसे डिलीट करने का कार्य करें।”
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश पुलिस के आठ कर्मियों की गुरुवार रात कानपुर के बिकरू गाँव में हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद से हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे चर्चा में है। पुलिस की टीम ने उसे गिरफ्तार करने के लिए आधी रात दबिश दी थी। लेकिन, विकास और उसके गुर्गों ने टीम पर अंधाधुंध फायरिंग की।
विकास पर कम से कम 60 मामले दर्ज हैं। इनमें 53 हत्या और हत्या के प्रयास से जुड़े हैं। उस पर राजनाथ सिह की सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा रखने वाले संतोष शुक्ला की थाने में घुसकर हत्या करने का भी आरोप है। हालॉंकि इस मामले में कोई गवाह नहीं मिलने पर उसे बरी कर दिया गया था।
विकास दुबे राजनीति में भी सक्रिय रहा है। सपा और बसपा के कई नेताओं से उसकी करीबी रही है। उसकी पत्नी सपा के टिकट पर पंचायत का चुनाव भी लड़ चुकी है।
पाकिस्तान के फरूकाबाद से बड़ी दुर्घटना की खबर है जिसमें लगभग 19 सिख तीर्थ यात्री मारे जा चुके हैंl यात्री जिस बस में सवार थे उसे एक तेज़ रफ़्तार ट्रेन ने टक्कर मार दी। मरने वाले सभी तीर्थ यात्री एक ही परिवार के थे। रिपोर्ट के मुताबिक़ घटना ठीक उस समय हुई जब सिख श्रद्धालुओं को ले जा रही है बस कराची लाहौर शाह हुसैन एक्सप्रेस से शेखुपुरा में टकरा गई।
— Ghulam Abbas Shah (@ghulamabbasshah) July 3, 2020
खबरों के मुताबिक़ तीर्थ यात्री ननकाना साहब से गुरुद्वारा सच्चा सौदा की तरफ लौट रहे थे। फिलहाल शवों को स्थानीय अस्पतालों में भेजा जा रहा है, घटना के दौरान बस में लगभग 25 लोग सवार थे। पुलिस के मौके पर पहुँचने की खबर है और वो घटनास्थल का मुआयना कर रही है। शुरूआती तस्वीरों में यह साफ़ था कि बस बहुत बुरी तरह टकराई है।
A bus carrying Sikh pilgrims was hit by a train in Sheikhupura district in Pakistan’s Punjab, 19 passengers killed, 8 injured: Local media pic.twitter.com/udx1E5Aqv7
तीर्थ यात्रियों से भरी बस रेलवे ट्रैक पार कर रही थी तभी कराची लाहौर शाह हुसैन एक्सप्रेस ने उसे टक्कर मार दी। जिसके बाद कुल 19 लोगों की मौत हो गई और कई बुरी तरह घायल हुए हैं। मरने वाले सभी लोग एक ही परिवार के थे और ननकाना साहब से लौट रहे थे।
नोट: यह एक डेवलपिंग स्टोरी है आगे और जानकारी आने पर अपडेट किया जाएगा।
कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनके घर पहुॅंचकर तीसरी बार पूछताछ की। मामला गुजरात की फार्मास्युटिकल कंपनी स्टर्लिंग बॉयोटेक के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जॉंच से जुड़ा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक 14,500 करोड़ रुपये के स्टर्लिंग बायोटेक बैंक धोखाधड़ी मामले में अहमद पटेल से ईडी के अधिकारियों ने तीन दिनों के अंदर 26 घंटे से अधिक पूछताछ की है। गुरुवार (02 जुलाई, 2020) को भी ईडी के अधिकारियों ने अहमद पटेल से उनके आवास पर जाकर आठ घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की थी।
इससे पहले मंगलवार को ईडी के अधिकारियों ने कम से कम दस घंटे तक उनसे पूछताछ की थी। 27 जून को अहमद पटेल से पहली बार साढ़े आठ घंटे तक पूछताछ की गई थी।
तीन दिनों के अंदर अहमद पटेल से की गई पूछताछ में ईडी के अधिकारियों ने गुजरात स्थित चेतन संदेसरा और नितिन संदेसरा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 128 सवाल पूछे हैं।
जानकारी के मुताबिक कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल को मामले में चश्मदीदों और संदिग्धों द्वारा दिए गए बयानों का सामना करना पड़ रहा है। अहमद पटेल से चेतन संदेसरा और नितिन संदेसरा के साथ उनके कथित संबंधों के बारे में पूछा गया। आरोप है कि संदेसरा बंधुओं ने उनके दिल्ली स्थित आवास पर कई बार नकद राशि का भुगतान किया था।
अहमद पटेल ने कहा है कि पूछताछ के दौरान उनसे जो भी सवाल पूछे गए हैं उनके उन्होंने जवाब दे दिए हैं। पटेल ने कहा कि सभी सवाल आरोपों पर आधारित थे और उनके (अधिकारियों के) पास मेरे खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है।
उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह मेरे खिलाफ राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। मुझे नहीं पता कि ईडी के अधिकारी किसके दबाव में काम कर रहे हैं।
अहमद पटेल का संदेसरा मामले से संबंध
कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल पर आरोप है कि चेतन संदेसरा और नितिन संदेसरा के साथ उनके संबंध थे, जो कि स्टर्लिंग बायोटेक घोटाले के प्रमुख अभियुक्त हैं। यह घोटाला नीरव मोदी और मेहुल चोकसी वाले पंजाब नेशनल बैंक घोटाले से भी बहुत बड़ा है।
बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संदेसरा बंधु अब भी फरार
कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल के संदेसरा मामले से संबंध का खुलासा पिछले साल हुआ था। जानकारी के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय द्वारा की जा रही जाँच में शामिल गवाहों ने अहमद पटेल, उनके बेटे फैसल पटेल और उनके दामाद इरफान सिद्दीकी का नाम लिया था।
सूत्रों के अनुसार गवाहों ने अहमद पटेल के घर को गड़बड़ी का मुख्यालय बताया था। गवाहों ने बताया था कि अहमद पटेल के बेटे फैसल पटेल और दामाद इरफान अहमद सिद्दीकी को संदेसरा से पैसे मिले थे।
पिछले साल अगस्त में प्रवर्तन निदेशालय ने स्टर्लिंग बायोटेक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अहमद पटेल के बेटे फैसल पटेल को तलब किया था। दवा कंपनी मालिक संदेसरा बंधुओं के साथ फैसल पटेल के संबंधों को लेकर ईडी द्वारा जाँच की जा रही है।
आपको बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल ने प्रवर्तन निदेशालय को एक पत्र लिखा था, जिसमें पटेल ने कोरोना वायरस महामारी का हवाला देते हुए प्रवर्तन निदेशालय से पूछताछ टालने को कहा था।
ईडी के सामने पेश होने के एक दिन पहले कॉन्ग्रेस नेता ने कोरोना वायरस महामारी का बहाना बनाते हुए खुद के 65 वर्ष से अधिक उम्र का होने की बात कही थी। इसके जवाब में ईडी ने कहा था कि वह उनके आवास पर आकर पूछताछ करेंगे।
अहमद पटेल अन्य कई विवादों में भी शामिल रहे हैं
अहमद पटेल का विवादों से पुराना नाता रहा है और उनसे अन्य कई मामलों में भी पूछताछ की जा रही है। अप्रैल 2019 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के ओएसडी के यहाँ छापेमारी के बाद रिपोर्ट सामने आई थी कि दिल्ली के तुगलक रोड स्थित एक प्रमुख राजनीतिक दल के मुख्य कार्यालय में 20 करोड़ रुपए भेजे गए थे, जिसे पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के माध्यम से भेजा गया था।
हालाँकि विभाग ने राजनीतिक दल और पदाधिकारी का नाम नहीं बताया था, लेकिन यह बताया गया था कि दिल्ली में कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी एसएम मोइन के निवास स्थान पर आयकर विभाग ने छापा मारा था। दरअसल जब आयकर विभाग के अधिकारी मोइन के आवास पर छापेमारी कर रहे थे, उस समय भी अहमद पटेल दिल्ली में मोइन के आवास पर पहुँचे थे।
अहमद पटेल का नाम यूपीए कार्यकाल के दौरान अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले की जाँच के दौरान भी सामने आया था। इस दौरान बिचौलिया मिशेल से बरामद एक डायरी में कुछ रिश्वत प्राप्तकर्ताओं के नामों की तरफ इशारा किया गया था, जो कि सौदे को पूरा करने के लिए दी गई थी। डायरी में कुछ कोडवर्ड जैसे कि “एपी”, “एफएएम”, “पीओएल”, “बीयूआर”, “डीजी एसीक्यू”, “एएफ” लिखे हुए थे।
कथित तौर पर उन लोगों के नाम डायरी में लिखे हुए थे, जिनको रिश्वत दी गई थी। अगस्ता के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को भारत में प्रत्यर्पित किए जाने के बाद हिरासत के दौरान उसने ईडी को कथित तौर पर बताया था कि एपी का मतलब अहमद पटेल है।
पाकिस्तान में गंभीर धार्मिक प्रताड़ना झेलने वाले हिंदुओं ने एक साहसिक निर्णय लिया है। उन्होंने इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर का निर्माण कार्य जारी रखने का फैसला किया है।
यह फैसला ऐसे वक्त में किया गया है जब वे पाकिस्तान की राजधानी में मंदिर निर्माण को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। यहॉं तक कि इसके खिलाफ लाहौर का एक मुफ्ती फतवा भी जारी कर चुका है।
इस्लामिक देश की राजधानी में अल्पसंख्यक होने के बावजूद हिंदुओं ने 20,000 वर्गफुट में कृष्ण मंदिर बनाने का निश्चय कर लिया है। यह जमीन उन्हें पाकिस्तान सरकार से आवंटित हुई है।
इस्लामाबाद के हिंदुओं ने यह फैसला उन हालातों में लिया है, जब उन्हें कृष्ण मंदिर को लेकर कट्टरपंथियों की लगातार धमकियाँ मिल रही हैं और इस्लामिक उलेमाओं से लेकर इस्लामिक नेता तक पाकिस्तान सरकार के इस फैसले के विरोध में आवाज बुलंद कर रहे हैं।
पिछले दिनों इस संबंध में इस्लामी शिक्षा देने वाले संस्थान जामिया अशर्फिया के मुफ्ती जियाउद्दीन ने कहा था कि गैर मुस्लिमों के लिए मंदिर या अन्य धार्मिक स्थल बनाने के लिए सरकारी धन खर्च नहीं किया जा सकता। इसी संस्था ने मंदिर निर्माण को लेकर फतवा जारी करते हुए कहा था कि अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) के लिए सरकारी धन से मंदिर निर्माण कई सवाल खड़े कर रहा है।
इस फतवे के अलावा इस्लामाबाद हाई कोर्ट में मंदिर निर्माण को लेकर एक याचिका भी डाली गई थी। याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा था कि यह योजना राष्ट्रीय राजधानी इस्लामाबाद के लिए तैयार मास्टर प्लान के तहत नहीं आती है।
याचिका में आग्रह किया गया था कि इस्लामाबाद के सेक्टर एच 9 में मंदिर निर्माण के लिए आवंटित भूमि को वापस लिया जाना चाहिए और मंदिर के लिए निर्माण धन भी वापस लेना चाहिए। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी (सीडीए) को नोटिस जारी किया था।
गौरतलब हो कि वैसे तो श्रीकृष्ण मंदिर इस्लामाबाद में पहला हिंदू मंदिर होगा। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे पहले वहाँ दो और मंदिर थे। लेकिन उनमें से एक को टूरिस्ट प्लेस बना दिया गया और दूसरा मुकदमेबाजी के चलते बंद पड़ा है।
अब इस श्रीकृष्ण मंदिर का निर्माण इस्लामाबाद के H-9 क्षेत्र में 20,000 वर्गफुट में किया जा रहा है। मंगलवार को पाकिस्तान के ह्यूमन राइट्स के संसदीय सचिव लाल चंद्र मल्ही ने ही इस मंदिर की आधारशिला रखी थी।
नींव रखे जाने के इस कार्यक्रम के दौरान वहाँ उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मल्ही ने जानकारी दी थी कि भारत और पाकिस्तान की आज़ादी से पहले इस्लामाबाद और उससे सटे हुए क्षेत्रों में कई हिंदू मंदिर हुआ करते थे।
इनमें सैदपुर गाँव और रावल झील के पास स्थित मंदिर शामिल है। हालाँकि, उन्होंने बताया कि इन मंदिरों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया और कभी इस्तेमाल नहीं किया गया। वो पड़े रहे और प्रयोग में आए ही नहीं।
कॉन्ग्रेस पार्टी और भारत को कमजोर करने वाली ताकतों के बीच के आपसी संबंध, देश के लिए अब चिंता का कारण बन गए हैं। हाल ही में खुलासा हुआ था कि यूपीए काल मे चीन ने राजीव गाँधी फाउंडेशन को 1 करोड़ से ज्यादा रुपया दान दिया। इसके अलावा यह भी पता चला कि RGF के संबंध भारत और विदेश में मौजूद संदिग्ध तत्वों से हैं।
पिछले दिनों ऑपइंडिया ने इस संबंध में एक रिपोर्ट भी की थी। रिपोर्ट में हमने कॉन्ग्रेस पार्टी और अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस के बीच संबंधों पर विस्तारपूर्वक बताया था। इन संबंधों से खुलासा हुआ था कि जॉर्ज का अपने एनजीओ नेटवर्क के माध्यम से कॉन्ग्रेस पार्टी पर बहुत गहरा प्रभाव था।
लेकिन अब यह ज्ञात हुआ है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बेटी अमृत सिंह भी सोरोस की एक पहल में उसके साथ जुड़ी हुई हैं। ओपन सोसाइटी फ़ाउंडेशन की वेबसाइट के अनुसार, अमृत सिंह (पूर्व पीएम की बेटी) ओपन सोसाइटी जस्टिस इनिशिएटिव में राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी परियोजना को डायरेक्ट कर रही है।
ओएसएफ वेबसाइट के अनुसार, अमृत सिंह कट्टरपंथ विरोधी गतिविधियों, अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश, हिरासत में हत्या, यातना जैसे मसलों पर पैरोकारी करती हैं। वेबसाइट के मुताबिक, वह इस परियोजना में आर्थिक न्याय, एंटीकरप्शन और सूचना-संघ-सभा की स्वतंत्रता की देखरेख भी करती हैं।
इतना ही नहीं, अमृत सिंह को मानवाधिकार कानून पर उनके काम के लिए पुरस्कार भी मिला है। साल 2012 में उन्हें उत्कृष्टता के लिए इंडिया एब्रोड पब्लिशर्स स्पेशल अवार्ड मिला था।
साल 2012 में ही अमृत सिंह की ओपन सोसायटी जस्टिस इनिशिएटिव द्वारा पब्लिश ‘Globalising Torture: CIA Secret Torture and Extraordinary Rendition’ शीर्षक की रिपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बहुत सराहना मिली थी।
गौरतलब है कि अमृत सिंह के अलावा, कॉन्ग्रेस पार्टी के जॉर्ज सोरोस के साथ कई अन्य लिंक भी हैं। उदाहरण के लिए, यूपीए शासन के दौरान भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिव शंकर मेनन जॉर्ज सोरोस के साथ एक एनजीओ के बोर्ड में बैठते हैं।
इसके अलावा, हर्ष मंदर, जो सोनिया गाँधी द्वारा गठित राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में थे, वह भी जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन के Human Rights Initiative Advisory Board के अध्यक्ष हैं।
यहाँ याद दिला दें कि राजीव गाँधी फाउंडेशन हाल ही में विदेशी संस्थाओं से डोनेशन लेने के कारण सुर्खियों में आया था। इस बीच यह भी पता चला था RGF ने हर्ष मंदर के एक गैर सरकारी संगठन ‘अमन बिरादरी ट्रस्ट’ के साथ साझेदारी भी की। इस तरह, राष्ट्रवाद व राष्ट्रवादियों के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा करने वाले जार्ज सोरोस के साथ कॉन्ग्रेस के अति घनिष्ठ संबंध निकले। जो वास्तविकता में भारत के लिए चिंता का कारण हैं।
चीन के साथ सीमा पर जारी तनाव के बीच विभिन्न क्षेत्रों में उसका दखल कम करने को लेकर मोदी सरकार लगातार फैसले कर रही है। इसी कड़ी में उसने चीन और पाकिस्तान से बिजली उपकरणों के आयात पर रोक लगाने का फैसला किया है।
उर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आरके सिंह ने शुक्रवार (3 जुलाई, 2020) को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को आर्थिक दृष्टि से मजबूत बनाना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर क्षेत्र व्यावहारिक नहीं रहेगा।
सिंह ने कहा, “2018-19 में हमने ऊर्जा क्षेत्र में 71,000 करोड़ रुपए का सामान आयात किया। इसमें से 21,000 करोड़ का आयात चीन से हुआ है। हम ऐसा नहीं होने दे सकते। एक देश जो हमारे जवानों पर जानलेवा हमले कर रहा है, जो देश हमारी जमीन हड़पने की कोशिश कर रहा है, हम उसके यहॉं रोजगार पैदा करें?”
Recently, I held a meeting with developers,industries&said that a country which transgresses into our territory&kills our soldiers, yet we create jobs in that country¬ in our country. So, we’ve decided to put China&Pakistan in list of prior reference countries: Union Power Min https://t.co/VSnAMNNMWN
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रायर रेफरेंस कंट्री (पूर्व संदर्भित देशों) से उपकरणों की आयात की अनुमति नहीं होगी। इसके तहत हम देशों की सूची तैयार कर रहे हैं लेकिन इसमें मुख्य रूप से चीन और पाकिस्तान शामिल हैं।
Today we manufacture everything which is required for the power system in our country. We have that manufacturing facility&capacity. In the year 2018-19, we’ve imported power equipment worth of Rs 71,000 crore of which Rs 21,000 crore was from China: Union Power Minister RK Singh pic.twitter.com/uBAcMOCt47
बता दें ‘प्रायर रेफरेंस कंट्री’ एक ऐसी श्रेणी है, जिससे उन देशों को चिन्हित किया जाता है जिनसे भारत को खतरा है या खतरे की आशंका है। खासतौर पर इनमें वो देश आते है जिनकी सीमाएँ भारत से सटी हुई होती है। जिसमें इस वक्त चीन और पाकिस्तान को मुख्य रूप से रखा गया है।
उन्होंने आगे कहा कि काफी कुछ हमारे देश में बनता है लेकिन इसके बावजूद हम भारी मात्रा में बिजली उपकरणों का आयात कर रहे हैं। यह अब नहीं चलेगा। देश में 2018-19 में 71,000 करोड़ रुपये का बिजली उपकरणों का आयात हुआ जिसमें चीन की हिस्सेदारी 21,000 करोड़ रुपये है।
मंत्री ने कहा, “दूसरे देशों से भी उपकरण आयात होंगे, उनका देश की प्रयोगशालाओं में गहन परीक्षण होगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं उसमें ‘मालवेयर’ और ‘ट्रोजन होर्स’ का उपयोग तो नहीं हुआ है। उसके बाद उपयोग की अनुमति होगी।”
चीन के 59 ऐप्स को भारत सरकार ने किया बैन
गौरतलब है कि चीन के साथ जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने सरकार ने 59 चीनी एप को बैन कर दिया है। इनमें टिकटॉक (TikTok) के अलावा यूसी ब्राउजर, कैम स्कैनर जैसे और भी कई एप है जिन्हें अब ब्लॉक कर दिया गया हैं। सरकार ने इन एप्स को सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक बताया था। सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अपने बयान में यह भी कहा है कि कई लोगों ने डेटा सुरक्षा को ले कर सरकार से शिकायत की थी।
NDTV की नगमा सहर और निधि कुलपति से ले कर ‘द हिन्दू’ तक अचानक से लगभग एक महीने पुरानी चार्ज शीट को ले कर इस तरह से माहौल बना रहे हैं जैसे कि वो कल ही आई हो। चार्ज शीट में दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में एक व्हाट्सएप्प ग्रुप की बात की गई है जिसकी जाँच हो रही है। साथ ही, दूसरे समुदाय के नौ लोगों की हत्या के संबंध में कुछ हिन्दुओं को गिरफ्तार भी किया गया है।
सबसे पहला सवाल यह उठता है कि आखिर एक महीने पुरानी चार्ज शीट पर आज चर्चा क्यों और किस लहजे में हो रही है? नगमा सहर के शो पर पूरे घटना क्रम को ऐसे दिखाया गया जैसे ये ब्रेकिंग न्यूज हो और यह चार्ज शीट तो कल ही इनके हाथ लगी हो, और बाकी दुनिया को कुछ पता ही नहीं है। आराम से, शब्दों को चबा-चबा कर बोला गया कि मरने वाले खास समुदाय के थे, मारने वाले हिन्दू और व्हाट्सएप्प ग्रुप का नाम ‘कट्टर हिन्दू एकता’ आदि था।
लक्ष्य क्या हो सकता है इसका?
अगर एक महीने पहले के माहौल को याद करेंगे तो लक्ष्य समझना बहुत ही सरल है। उस समय तीन चार्ज शीट के छोटे-छोटे हिस्से बाहर आए थे। जिसमें एक ताहिर हुसैन वाला था, एक बलिदानी रतन लाल जी की भीड़ हत्या से संबंधित था और एक अंकित शर्मा की क्रूर और निर्मम हत्या से। उसी समय दिलबर नेगी से ले कर दिल्ली पुलिस पर मजहबी भीड़ के हमले की प्लानिंग और फारूख फैजल के राजधानी स्कूल की छत आदि की भी चर्चा हो रही थी।
लेकिन इस समय अधिकतर चार्ज शीट या खबरों में समुदाय विशेष द्वारा पूर्वनिर्धारित योजना के अनुसार पत्थर, पेट्रोल बम, एसिड की बोतलें, रॉड, गुलेल, हथियार आदि की चर्चा हो रही थी। साथ ही, वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथियों के हिमायतियों का मीडिया समूह और तथाकथित बुद्धिजीवी लिबरल गिरोह, ये चिल्लाने में लगा हुआ था कि चार्ज शीट में तो कपिल मिश्रा का नाम है ही नहीं, ये तो बिकी हुई पुलिस है आदि।
तो इस समय, अगर गोकुलपुरी वाली चार्ज शीट पर भी वामपंथी-लिब्रांडू गिरोह चर्चा करने लग जाता तो उन्हें अपने ही कुतर्कों के कारण दूसरी चार्ज शीटों को भी सही मानना पड़ता। अगर वो यह कहते कि सफूरा जरगर, खालिद सैफी, ताहिर हुसैन, फारूख फैजल आदि की गिरफ्तारी गलत है, लेकिन गोकुलपुरी वाले हिन्दुओं की सही है, तो उनका दोगलापन बिलकुल ही नग्न हो कर सार्वजनिक हो जाता।
अतः, उन्होंने उस वक्त जी-जान लगा कर यह कहा कि दिल्ली पुलिस ने समुदाय विशेष को निशाना बनाया है और वो अमित शाह के निर्देशों पर विद्यार्थियों को सता रही है, उन्हें जेल में डाल रही है। ये माहौल खूब बनाया गया और केन्द्र सरकार ने सफूरा जरगर को मानवीय आधारों पर बेल देने की बात को सहमति दे दी। वामपंथियों ने इसे अपनी जीत की तरह देखा।
फिर ये कई दिनों तक शांत बैठे रहे। इन्होंने दिल्ली दंगों पर खास बात-चीत की नहीं। इसके बाद, सीधा कल, एक पुरानी चार्ज शीट को चुना गया और उसमें से हिन्दू नामों को हायलाइट करने की सामूहिक कोशिश हुई। ‘द हिन्दू’ में लम्बा लेख छपा कि कैसे हिन्दुओं ने लोगों से नाम पूछे, ‘जय श्री राम’ और ‘हर-हर महादेव’ बुलवाया और फिर उनकी हत्या की।
आज के ‘द हिन्दू’ की रिपोर्ट
इसे इस गिरोह के सदस्यों द्वारा घुमाया जा रहा है और शेयर किया जा रहा है क्योंकि अभी तक सिर्फ यही एक चार्ज शीट है जिसमें हिन्दू आरोपित हैं, और दूसरे मजहब वाले पीड़ित। एक महीने के बाद इसे चुनना और उसे किसी ‘हमने चार्ज शीट के हिस्सों को देखा है’ कह कर चलाना बताता है कि वामपंथी मीडिया का घाघपना अभी भी बाकी है।
13 जून को ही आ चुकी थी यह चार्ज शीट
आप यह सोचिए कि एक चार्ज शीट सूरज के पूरब में उगने जैसा सार्वभौमिक सत्य हो गया, जो उसी दिल्ली पुलिस से दाखिल किया है जिसने ताहिर हुसैन, सफूरा जरगर, खालिद सैफी, उमर खालिद से ले कर मौजपुर, जाफराबाद, चाँद बाग के दंगाइयों और साजिशकर्ताओं को नामित किया है। वहीं, बाकी सारी चार्ज शीट को पक्षपाती कहा गया और इसी दिल्ली पुलिस को डिस्क्रेडिट करने की कोशिश की गई। ऐसे कैसे चलेगा वामपंथी लम्पटों!
क्या हिन्दू समुदाय दंगाइयों के आने का इंतज़ार करता?
इस खबर का दूसरा पक्ष अब यह है कि क्या हिन्दू समुदाय के लोग दंगाइयों के इंतजार में बैठे रहते कि आओ और हमें उसी तरह से जला दो जैसे गोधरा में 59 कारसेवकों को कट्टरपंथियों ने ट्रेन में जला दिया था? अगर इन हिन्दुओं ने कुछ लोगों की हत्या की है तो न सिर्फ कानून उन्हें सजा देगा, बल्कि कोई भी हिन्दू यह कहने नहीं आएगा कि ‘अरे, वो तो छात्र है’, ‘अरे, वो तो गर्भवती है!’
हर व्यक्ति को यह ध्यान रहना चाहिए कि दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों की सुनियोजित योजना बनी थी। ताहिर हुसैन की चार्जशीट में उसने खुद ही कबूला है कि जनवरी में शाहीन बाग में उसकी मुलाकात तथाकथित छात्रों, उमर खालिद और खालिद सैफी, के साथ हुई और उन्होंने दंगों की योजना बनाई।
मजहब विशेष के लोगों के हर दस से पंद्रह लोगों के घरों की छत पर गुलेल लगे हुए थे। ऊँची बिल्डिंगों से गोलियाँ चलाई गईं थी। मजहबी दंगाइयों को पहले से पता था कि कहाँ हिन्दुओं का घर है, किधर उनकी दुकान है। बाजार में हिन्दू की दुकानें जला दी गई, बीच में खास समुदाय वाले की दुकान साबुत खड़ी मिली। मस्जिद की छत पर पत्थरों का ढेर मिला। ताहिर हुसैन और फारूक फैजल की बिल्डिंगों से हजारों एसिड की बोतलें और पेट्रोल बम हिन्दुओं के ऊपर फेंके गए, पत्थरों की बारिश हुई…
और ऐसे में हिन्दू क्या कर रहा था? उस इलाके का हिन्दू कहाँ जाता? क्या भागने का कोई रास्ता था? आप यह सोचिए कि मजहबी दंगाइयों ने दो महीने से इसकी प्लानिंग कर रखी थी। सवा करोड़ रुपए के हथियार आदि खरीदे गए थे, व्हाट्सएप्प पर महिलाओं को लिए संदेश घूम रहे थे कि उनको क्या करना है, और आप इस बात पर उछल रहे हैं कि हिन्दू ने भी ‘कट्टर हिन्दू एकता’ का व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाया था?
चार्ज शीट पर बात करनी है तो, सारे पर करो। व्हाट्सएप्प ग्रुप पर बात करनी है तो हर ग्रुप पर करो। जामिया कॉर्डिनेशन कमिटि पर भी बात करो, उनके पोस्टरों पर भी बात करो, ‘फक हिन्दुत्वा’ और ‘हिन्दुओं से आजादी’ पर भी बात करो, और बात करो AMU के ‘खिलाफत 2.0’ की, ‘हिन्दुओं कैलाश जाओ की’, ‘हिन्दुत्व की कबर खुदेगी, AMU की धरती पर’ की… बात करो कि शाहीन बाग में भारत का झंडे का हरा रंग उस हिजाब में ऊपर कैसे है, पोस्टरों में हरा रंग सत्तर प्रतिशत कैसे है, बुर्के में हिन्दू महिला की तस्वीर क्यों और स्वास्तिक के चिह्नों को टूटा और जलता हुआ कौन दिखा रहा था?
ये चाहते हैं कि हम इसका जवाब दें कि हिन्दुओं ने कट्टरपंथियों को क्यों मारा? दंगों में हर उस समुदाय का व्यक्ति मरता या घायल होता है जो उस इलाके में रहता है, या वहाँ से उस वक्त गुजरता है। दो महीने की प्लानिंग वाले खास समुदाय की हरकतों पर चर्चा क्यों नहीं हो रही? हिन्दू नामों को ले कर आँखों में चमक क्यों?
मजहबी दंगाइयों द्वारा पूर्वनियोजित दंगों के बीच एक हिन्दू के पास विकल्प क्या हैं?
एक हिन्दू जिसने कहीं भी धार्मिक दंगों की शुरुआत नहीं की, हमेशा झेला है और आत्मरक्षा में खड़ा हुआ है, उसके पास विकल्प क्या हैं? आपको लगता है कि चाँद बाग, गोकुलपुरी, जाफराबाद, भजनपुरा, मौजपुर आदि के हिन्दुओं को इसका आभास नहीं हुआ होगा कि योजना बन रही है? मैंने 23 फरवरी को उस इलाके में रह रहे हिन्दू से बात की थी। मुझे उसकी आवाज का डर बहुत अच्छे से याद है कि उसका परिवार राशन गिन रहा था कि बंद कमरे में कितने दिन बचे रहेंगे।
गोकुलपुरी के हिन्दुओं से क्या उम्मीद कर रहे हैं आप? कि दंगे होने वाले हों, और वहाँ के हिन्दू इंतजार करें कि कट्टरपंथियों का समूह आए और काट कर निकल जाए? क्योंकि दंगों में तो यही होता है। खास कर ऐसे दंगों में जहाँ दो महीने से प्लानिंग चल रही हो और हिन्दुओं के घरों, दुकानों और स्कूल तक को चिह्नित किया जा चुका हो… वहाँ अगर हिन्दुओं ने दंगों के बीच या उससे तुरंत पहले एक व्हाट्सएप्प ग्रुप बना लिया तो दंगों का सूत्रधार वही हो गया?
दोबारा, प्रश्न वही है कि निरीह हिन्दुओं के पास विकल्प क्या थे? सर झुका कर मर जाना,या फिर एक भीड़ का सामना करना और लड़ते हुए मरना? दूसरी बात, जब माहौल दंगों का होता है, जब पगलाई हुई मजहबी उन्माद से ओतप्रोत भीड़ बंदूक़, तलवार, रॉड, एसिड और पेट्रोल बम ले कर जमीन पर भी पीछे पड़ी हो और छतों से भी हमला कर रही हो, तो हिन्दुओं को पास विकल्प क्या रह जाते हैं?
दंगों में सोचने का वक्त नहीं होता। पूर्वनियोजित साजिश करने वाले जब आपका आना-जाना, घर-दुकान, बच्चों के स्कूल चिह्नित कर लेते हैं, तब आपके पास बचाव का क्या रास्ता है? जब दो स्कूल में से एक हिन्दू का हो, दूसरा फारूख फैजल का, एक से लोग अपने बच्चों को दोपहर में ही निकाल कर ले जाने लगते हैं, दूसरे की छत से ट्रेनिंग किए हुए लड़ाकों की तरह दंगाई उतरते हैं और हिन्दू स्कूल को फूँक देते हैं… तो हिन्दू के पास बचाव के विकल्प क्या हैं?
हत्या करना यही नहीं, लेकिन हत्यारों की भीड़ के सामने सर झुका कर कट जाना भी कायरता ही है। जिन्होंने हत्या की, उस पर कानून अपना काम करेगा लेकिन एक या दस चार्ज शीट भी आ जाएँ, जिसमें हिन्दुओं का नाम हो, तो भी हिन्दुओं के ऊपर दंगों का अपराध नहीं डाला जा सकता। हिन्दू इस देश में हर बार दंगाइयों का शिकार ही बना है। अगर उसकी जनसंख्या ज्यादा न होती तो सफाया हो चुका होता।
हर दंगे के बाद हिन्दू इसलिए जीवित बच जाता है कि सामने की उन्मादी भीड़ की योजना के बाद भी सिर्फ संख्या बल के कारण वो उनका सामना कर पाता है। अगर ऐसा न होता और हिन्दू ही उन्मादी होते तो हमारी बच्चियों को पाकिस्तान और बांग्लादेश में खींच कर जबरन निकाह न कराया जाता, बलात्कार न होते, जमीन नहीं हड़पी जाती, उनकी संख्या घट कर विलुप्तप्राय न हो रही होती!
इसलिए, ये ज्ञान तो कोई न ही दे कि हिन्दू दंगे कर रहे थे! हिन्दू दंगे करते नहीं, दंगाइयों से लड़ते हैं, क्योंकि हमने गंगा-जमुनी तहजीब की गंगा का सम्मान किया है और उन्होंने जमुना को अपनी मजहबी कालिमा से इतना प्रदूषित कर दिया है कि उसका बहाव ही खत्म हो चुका है। इसी सर्वसमावेशी नीति के कारण 59 कारसेवक जला दिए जाते हैं और इतिहास लिखा जाता है कि हिन्दुओं ने गोधरा किया!
अरे हिन्दुओं ने गोधरा नहीं किया, वो गोधरा से बच रहे थे। किसी की जान लेने पर उतारू एक भीड़ जब पागलों की तरह काफिरों की सामूहिक हत्या की प्लानिंग कर रही हो, उनके भगवा वस्त्र देख कर पूरी ट्रेन की बॉगी ही आग के हवाले कर दे, तब आप सोचते हैं कि एक पूरा समुदाय घुटनों पर बैठ जाए और कहे, ‘रघुपति राघव राजा राम’?
ध्यान रहे, और हर मजहबी दंगाई यह याद रखे कि सौ करोड़ हिन्दुओं की धरती है, हर देवता के हाथ में अस्त्र या शस्त्र हैं, रघुपति राघव राजा राम ने लंका में क्या किया ये सबको ठीक से याद रहना चाहिए और कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में क्या किया यह भी। नरसिंह ने लगभग असंभव मृत्यु कैसे दी थी हिरण्यकश्यपु को, वो भी याद रखो ताकि जब तुम गोली, बम, एसिड, पेट्रोल बम ले कर हिन्दुओं को मारने निकलो क्योंकि किसी किताब में काफिरों की हत्या वाजिब बताई गई है, तो दिमाग यह चलता रहे कि नाखून से भी पेट फाड़ा गया है राक्षसों का।
दंगाइयों की पूर्वनिर्धारित योजना बनाम सर्वाइवल के लिए बचता हिंदू
उस समय में जबकि संविधान के प्रस्तावना का पाठ करते हुए, भारत के नक्शे को सामने रख कर, छब्बीस जनवरी को तिरंगा लहरा कर, पूरी दुनिया को शाहीन बाग की हिन्दूघृणा में सनी भीड़ धोखा दे रही थी, और दूसरी तरफ हिन्दुओं को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटने के लिए ताहिर हुसैन और फारुख फैजल जैसे लोग मीटिंग कर रहे थे, हिन्दू समाचार चैनलों पर न्यूज देख रहा था कि महान पत्रकार रवीश जी ने आज मंगल ग्रह के किस क्रेटर पर ‘यहाँ भी बन गया शाहीन बाग’ देख कर स्खलित हो रहे थे!
हिन्दू समाचार ही देखता रहा। यहाँ दिसंबर में जामिया में दंगे कर के टेस्टिंग हुई, फिर जनवरी में जेएनयू में ABVP के बच्चों को वामपंथी गुंडों ने घेर-घेर कर मारा, AMU में भी उसी समय खिलाफत की बातें हो रही थीं… शाहीन बाग की आड़ में शरजील इमाम और सफूरा जैसे लोग खास मजहब को उकसा रहे थे। हर्ष मंदर कह रहा था कि मजहब विशेष को सुप्रीम कोर्ट से न्याय नहीं मिलेगा, उन्हें सड़कों पर आना होगा। सोनिया गाँधी इसे आर या पार की लड़ाई कह रही थी। अमानतुल्ला भीड़ को उकसा रहा था।
हिन्दू इन सारी बातों को समाचार में देख रहा था। क्योंकि हिन्दू अमूमन समाचार ही देखते रहते हैं और फारूख अपनी छत पर गुलेल बना रहा होता है। हिन्दू कभी भी दंगों के लिए तैयार नहीं रहता क्योंकि उसकी प्रवृत्ति दंगा करने की होती ही नहीं। वो तो मोहम्मद बिन कासिम के आगमन से आज तक दंगों को सिर्फ झेलता ही है।
ऐसे में गोकुलपुरी के कुछ नवयुवक क्या करते? आप इस स्थिति में क्या करेंगे जब आप शत-प्रतिशत जानते हों कि एक भीड़ आपके घरवालों को पहली नजर में हाथ काट कर, पैर काट कर दिलबर नेगी की तरह आग में जलने को फेंक देगी? आप उस समय क्या करेंगे जब आपकी गली में IB के कॉन्सटेबल अंकित को चार लोग सेकेंडों में खींच लें और चार घंटे तक चाकुओं से गोदते रहें? आप क्या कर लेंगे जब आपके पिता दूध लेने निकले हों और किसी की छत से उनके सर में गोली मार दी जाए?
गोकुलपुरी के हिन्दुओं ने बचाव के लिए, अपने परिवार, अपने समाज की सुरक्षा के लिए, किसी अनहोनी से बचने के लिए शायद एक ग्रुप बनाया कि बुरी स्थिति में क्या किया जाए। हाँ, उन्होंने अगर किसी की हत्या की है, और वो दंगाई नहीं था (या था भी) तो कोर्ट में केस चलेगा, सजा मिलेगी। हत्या को उचित नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन हत्या के पहले की घटनाओं का समुचित आकलन भी आवश्यक है ताकि उन्हें ही सूत्रधार न बना दिया जाए, जिनके ऊपर दो महीनों की प्लानिंग के बाद मजहबी हमले हुए हों।
हर बिंदु पर गौर कीजिए
जिस समय इस चार्ज शीट की बात हो रही है, और आँखों में जिस चमक के साथ इसकी चर्चा हो रही है, उस समय आपके पास इन लम्पटाधीशों, वामपंथी दोगलों और इस्लामी कट्टरपंथियों के समर्थकों के लिए उचित सवाल होने चाहिए। आप यह पूछिए कि रतन लाल जी को मारने की प्लानिंग में पचास लोग जो थे वो किस मजहब के थे? आप पूछिए कि सीसीटीवी तोड़ कर बुर्के वाली महिलाओं की भीड़ दिल्ली पुलिस के जवानों को कैसे खींच लेती है? उन बुर्के के भीतर किनकी अम्मा, दादी, बहन और जानें थीं?
सवाल यह होना चाहिए कि एक व्हाट्सएप ग्रुप पर एक महीने बाद जो नाच रहे हो, दूसरे व्हाट्सएप ग्रुप पर तुम्हारे बाप चर्चा करने आएँगे कि छतों पर एसिड की बोतले रखें, लोहे का गेट बनवाएँ और करेंट प्रवाहित करें? ये कौन बताएगा कि मस्जिद की छत पर रखे पत्थरों और ईंटों के टुकड़ों से दूसरा फ्लोर बनने जा रहा था या फिर हिन्दुओं की हत्या की नींव रखी जा रही थी?
हाँ, हम मानते हैं कि हिन्दुओं के हाथों से कुछ दूसरे मजहब वाले भी मारे गए होंगे, लेकिन मैं यह नहीं मानूँगा कि हिन्दुओं ने दंगा किया। हिन्दुओं के हाथों हो सकता है कि कुछ दूसरे मजहब वाले मारे गए होंगे, लेकिन वो आइसिस स्टाइल की क्रूरता तो सिर्फ़ हिन्दुओं की लाशों पर ही दिखी। विनोद कश्यप को किसने मारा? दिनेश, आलोक तिवारी, मुंशी जी की हत्या किसने की? राहुल ठाकुर, राहुल सोलंकी की हत्या कैसे हुई? शिवानी की शादी के मंडप पर पेट्रोल बमों से आग किसने लगाई? वीरभान को किसने मारा?
इसलिए, एक पुरानी चार्ज शीट को एक तय टाइमिंग के साथ, एक ही गिरोह के कुछ लोग सिर्फ इसलिए चर्चा में लाना चाह रहे हों क्योंकि उसमें हिन्दुओं का नाम है, तो वो नैरेटिव चलने ही नहीं देंगे। उन्हें तो फन उठाने से पहले ही कील वाले जूतों से मसल देंगे। इनसे प्रश्नों के उत्तर में दस प्रश्न पूछिए ताकि ये बिलबिलाएँ और चुप रहें क्योंकि सत्य यही है कि मजहबी दंगाइयों ने पूर्वनिर्धारित तरीके से हिन्दुओं को घेर कर मारने की योजना बनाई, और उस पर अमल भी किया।
ये दंगे मत भूलिए, और जब तक इस पर फैसले नहीं आते, हर सप्ताह कम से कम एक दिन इन खबरों को पढ़िए ताकि आपको याद रहे कि हिन्दुओं को किस तरह से शाहीन बाग की नौटंकी की आड़ में मूर्ख बना कर रखा गया और काफिरों के नरसंहार की तैयारी की गई थी। ये अगर भूल गए तो गोधरा की तरह यह हिन्दू-विरोधी दंगा भी हिन्दुओं के ही सर पर फेंका जाएगा, और ये मैं होने नहीं दूँगा।
पाकिस्तानी मूल के इवेंट मैनेजर रेहान सिद्दीकी पर भारत सरकार ने बैन लगा दिया है। वह बॉलीवुड कलाकारों का विदेश में शो आयोजित करवाता है।
रेहान पर टेरर फंडिंग का आरोप है। भारत विरोधी गतिविधियों में उसकी संलिप्तता पाई गई है। 17 फरवरी को शिवसेना सांसद राहुल शेवाले ने इस मसले पर प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था।
इसके जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने बताया है कि इस मुद्दे की जाँच और ह्यूस्टन के कांसुलेट जनरल की सलाह पर रेहान सिद्दीकी, राकेश कौशल और दर्शन मेहता को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि वॉशिंगटन डीसी में भारत के दूतावास और ह्यूस्टन में भारत के कांसुलेट जनरल से भी अनुरोध किया गया है कि वे प्रसिद्ध लोगों, कल्चरल बॉडीज, बॉलीवुड से संबद्ध’ स्थानीय संस्थाओं से भारतीय एक्टर और कलाकारों को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों दूर रहने का सन्देश दे।
कौन है रेहान सिद्दीकी
यह मुद्दा इस साल की शुरुआत में सामने आया जब रेहान सिद्दीकी का संबंध बॉलीवुड के इवेंट्स का आयोजन करने के साथ भारत विरोधी गतिविधियों के प्रचार-प्रसार करने और कश्मीर में आतंक बढ़ाने के लिए उसके द्वारा किए जा रहे फंडिंग का पता चला।
फरवरी में रेहान सिद्दीकी बॉलीवुड सेलेब्रिटी एवेंट्स के जरिये मिलने वाले राजस्व से कश्मीर में भारत विरोधी तत्वों को कथित रूप से सहायता करने को लेकर भारतीय अधिकारियों के रडार पर था।
रेहान सिद्दीक़ी पाकिस्तानी है। वह ह्यूस्टन में एक रेडियो चैनल का मालिक है। वह रेडियो चैनल का दुरुपयोग कर नियमित रूप से कश्मीर और भारत में आतंकवादी गतिविधियों की जासूसी करता है और पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देता है। रेहान सिद्दीकी के पास संगीत और रेडियो उद्योग में व्यापक अनुभव था। इसके साथ दक्षिण एशिया, विशेषकर बॉलीवुड के सितारों के साथ रेहान सिद्दीकी ने 400 से भी ज़्यादा कॉन्सर्ट्स का सफलतापूर्वक आयोजन कराया है।
ह्यूस्टन में एक भारतीय सदस्य ने बताया कि “वह एक रेडियो चैनल का मालिक है और भारतीय कलाकारों को ह्यूस्टन आमंत्रित कर बॉलीवुड सिंगिंग इवेंट्स का आयोजन करता है। अपने रेडियो चैनल का इस्तेमाल वो भारत विरोधी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देने के लिए करता है”।
संयुक्त राज्य अमेरिका में रहने वाले भारतीयों ने सिद्दीकी का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने भारत सरकार से आईएसआई (ISI) एजेंट द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में बॉलीवुड हस्तियों को भाग लेने से मना करने का आग्रह भी किया था। उन्होंने माँग की है कि सरकार को बॉलीवुड हस्तियों को शो में भाग लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा है कि सिद्दीकी और अन्य पाकिस्तानी नागरिक सीएए को लेकर ह्यूस्टन में इसका विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए काम कर रहे हैं। इसके साथ ही वे ह्यूस्टन के सिख समुदाय में खालिस्तानी विचारधारा के लिए हमदर्दी पैदा करने का काम भी करते हैं। सिद्दीकी के रेडियो चैनल पर पुलवामा हमले और उसके बाद हुए बालाकोट हमले के मद्देनजर भारत विरोधी प्रचार चलाने का भी आरोप है।
2019 में, FWICE ने गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ को पाकिस्तानी रेहान सिद्दीकी द्वारा प्रचारित शो में नहीं परफॉर्म करने के लिए कहा गया था। इसके बाद दोसांझ ने ट्विटर पर एक पोस्ट डाल कर यह जानकारी दी थी कि वह शो और किसी पाकिस्तानी नागरिक के बीच किसी भी लिंक से इनकार करते हुए अपने अमेरिकी दौरे को स्थगित कर देंगे। उन्होंने संदेश दिया, “मैं अपने देश से प्यार करता हूँ और राष्ट्र के हित के लिए हमेशा खड़ा रहूँगा।”
वहीं फरवरी 2020 में, बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने भी रेहान सिद्दीकी के खिलाफ लगाए गए आतंकी फंडिंग के आरोपों की वजह से अपने कार्यक्रम को रद्द कर दिया था।