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NRC की आहट से सहमे घुसपैठिए, रात के अँधेरे में भाग रहे बांग्लादेश

नेशनल रजिस्टर आफ सिटिजन्स (NRC) अभी पूरे देश में लागू नहीं हुआ है। लेकिन, इसकी आहट से सालों से भारत में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों की नींद उड़ गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हर रोज रात को सैकड़ों बांग्लादेशी सीमा पार कर रहे हैं। इनमें से कई को सीमा में घुसते हुए बांग्लादेश बार्डर गार्ड्स (बीजीबी) ने दबोचा भी है।

बीजीबी के महानिदेशक मेजर जनरल मोहम्मद शफीनुल इस्लाम ने 2 जनवरी को बताया था कि नवंबर और दिसंबर में 445 बांग्लादेशी नागरिक वापस आए हैं। उन्होंने माना था कि जॉंच से यह बात सत्यापित हुई है कि ये सभी घुसपैठिए थे। दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार बीजीबी ने जितने लोगों को पकड़ा है, उससे कहीं ज्यादा सीमा पार कर घुसने में सफल रहे हैं।

रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के हवाले से बताया गया है कि रोजाना 300 से 400 लोग भारत से बांग्लादेश लौट रहे हैं। बांग्लादेश के झिनाइदा जिले से सटे सीमावर्ती महेशपुर उप जिला से ही नवंबर से अब तक हजारों लोगों ने रात के अँधेरे में बांग्लादेश में प्रवेश किया है। बांग्लादेशी बॉर्डर गॉ‌र्ड्स ने पिछले महीने करीब 300 लोगों को महेशपुर उप जिला से पकड़कर पुलिस को सौंपा था।

रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश में घुसने की कोशिश करते अधिकांश लोगों ने वहॉं की एजेसियों को बताया है कि वे काम के सिलसिले में अरसे से भारत में रह रहे थे। इनके पास से भारतीय पहचान पत्र भी बरामद हुए हैं। रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के बड़े इलाके में फेंसिंग और बिजली नहीं है। इलाका नदियों और घने जंगलों से घिरा है। इसका फायदा उठाकर लोग सीमा पार कर रहे हैं। इसे देखते हुए बांग्लादेश ने सीमावर्ती गॉंव के लोगों को साथ मिलकर सुरक्षा कमेटी बनाई है। बीएसएफ अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि असम में एनआरसी लागू होने के बाद से वहॉं से भी बांग्लादेशी अब अपने देश लौटने लगे हैं।

गौरतलब है कि एनआरसी को भारत का आंतरिक मामला बताते हुए बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन पहले ही अपने नागरिकों को वापस लेने की बात कह चुके हैं। उन्होंने कहा था, “हम बांग्लादेशी नागरिकों को वापस आने की अनुमति देंगे, क्योंकि उनके पास अपने देश में प्रवेश करने का अधिकार है।” मोमेन ने बताया था कि भारत से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों की सूची भी मुहैया कराने का अनुरोध किया गया है। बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना के अंतरराष्ट्रीय मामलों के सलाहकार गौहर रिजवी ने भी कहा था कि भारत में अवैध रूप से रह रहे लोग वापस लिए जाएँगे।

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तीसरी बार विधायक बना, फिर भी नहीं बनाया मंत्री: MLA कैलाश गोरंट्याल कॉन्ग्रेस से देंगे इस्तीफा

महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी की मुश्किलें खत्म होती नहीं दिख रही। कैबिनेट विस्तार के बाद साझेदार दलों शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। जालना से कॉन्ग्रेस विधायक कैलाश गोरंट्याल ने पार्टी से इस्तीफा देने की बात कही है। इससे पहले पुणे में विधायक संग्राम थोपटे को मंत्री नहीं बनाए जाने पर उनके समर्थकों ने कॉन्ग्रेस कार्यालय में तोड़फोड़ की थी।

कैबिनेट में जगह न मिलने से नाराज गोरंट्याल ने कहा कि अपने समर्थकों के साथ पार्टी से इस्तीफा देने का उन्होंने फैसला किया है। उन्होंने कहा, “मैंने और मेरे समर्थकों ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपने का फैसला किया गया। मैं तीसरी बार विधायक चुना गया हूॅं। मैंने अपने लोगों के लिए काम किया है। बावजूद मुझे मंत्री नहीं बनाया गया है।”

30 दिसंबर को कैबिनेट विस्तार किया गया था। 36 मंत्रियों ने शपथ ली थी। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने विभागों का बँटवारा कर दिया है। गृह और वित्त जैसे बड़े महकमे एनसीपी के हिस्से में गए हैं। अनिल देशमुख को गृह और उप मुख्यमंत्री अजित पवार को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को पर्यटन और पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण पीडब्ल्यूडी मंत्री बनाए गए हैं।

कैबिनेट विस्तार के बाद शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार की नाराजगी की खबरें भी आई थी। कहा जा रहा था कि कैबिनेट मंत्री नहीं बनाए जाने से नाखुश सत्तार ने इस्तीफा दे दिया है। हालॉंकि फिलहाल उन्हें मनाने में पार्टी कामयाब हो गई है। औरंगाबाद से विधायक सत्तार राजस्व, ग्रामीण विकास, बंदरगाह भूमि विकास महकमे में राज्य मंत्री बनाए गए हैं।

बता दें कि कैलाश गोरंट्याल जालना में शिवसेना के अर्जुन कोटकर को विधानसभा चुनाव में हराकर विधायक बने थे। जालना कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष शेख महमूद ने बताया कि गोरंट्याल तीन बार से विधायक हैं और उन्होंने ज़िले में कॉन्ग्रेस को मज़बूत करने के लिए बहुत काम किया है। उन्होंने गोरंट्याल का समर्थन करते हुए कहा, “हमने पार्टी नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंपने का फ़ैसला किया है।”

कॉन्ग्रेसी खेमें में नाराज़गी का पहला सुर पुणे में सुनने को मिला था, जब 1 जनवरी को पुणे के विधायक संग्राम थोपटे के समर्थकों ने इसलिए कॉन्ग्रेस कार्यालय में तोड़-फोड़ की क्योंकि थोपटे को मंत्री पद नहीं दिया गया था। थोपटे के अलावा, पूर्व गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की बेटी प्रणीति शिंदे को भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई थी। बता दें कि महाराष्ट्र कैबिनेट में कॉन्ग्रेस के 12 कॉन्ग्रेसी नेताओं को जगह मिली है। इसके अलावा, कैबिनेट विस्तार में एनसीपी विधायक प्रकाश सोलंके को जगह नहीं मिल सकी, महाराष्ट्र की मजलगाँव सीट से एनसीपी विधायक प्रकाश सोलंके का कहना था कि वो विधानसभा सदस्य के रूप में इस्तीफ़ा देंगे।

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जिस अस्पताल में मर गए 110 बच्चे, वहाँ कॉन्ग्रेसियों ने चलाए लात-घूँसे: नईमुद्दीन समर्थकों ने कपड़े फाड़े

कोटा के जेके लोन अस्पताल में दिसंबर से अब तक 110 बच्चों की मौत हो चुकी है। मौत के इस सिलसिले ने राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार के नकारेपन को उजागर कर दिया है। शनिवार (4 जनवरी 2020) को यह अस्पताल कोटा के कॉन्ग्रेसियों की गुटबाजी का भी शिकार बन गया। अस्पताल में ही कॉन्ग्रेस के दो गुट भिड़ गए। लात-घूॅंसों की बौछार के बीच कपड़े तक फाड़ डाले गए। जायजा लेने पहुॅंचे राज्य के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट भी धक्का-मुक्की से बच नहीं पाए।

राजस्थान पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक पायलट जैसे ही पहुॅंचे, अस्पताल के भीतर जाने के लिए कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता पुलिस के साथ धक्का-मुक्की करने लगे। रोके जाने पर कॉन्ग्रेसियों ने हंगामा किया। इस दौरान पायलट भी अपने ही पार्टी के कार्यकर्ताओं की धक्का-मुक्की की चपेट में आ गए। पायलट के जाने के बाद प्रदेश कॉन्ग्रेस सचिव नईमुद्दीन गुड्डु और उसके समर्थकों ने कॉन्ग्रेस नेता कुंदन यादव को अस्पताल परिसर में ही पीट डाला। कुंदन के कपड़े तक फाड़ डाले। किसी तरह पुलिस ने उन्हें बचाया। कॉन्ग्रेसियों के इस बवाल के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानी झेलनी पड़ी। काफी देर तक अस्पताल में अराजकता का माहौल रहा।

राजस्थान पत्रिका के कोटा संस्करण में 5 जनवरी 2020 को प्रकाशित खबर

वहीं, अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद पायलट ने अपनी ही सरकार के लोगों पर निशाना साधते हुए कहा कि हम सालभर से सरकार चला रहे है। ऐसे में पूर्ववर्ती सरकार पर इल्जाम लगाने का कोई तुक नहीं बनता है। बकौल पायलट, सबकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

पायलट से पहले प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने भी अस्पताल का दौरा किया था। इस दौरान उनके ही एक दावे की पोल खुल गई थी। शर्मा ने अस्पताल की खस्ताहालत का दोष पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर मढ़ने की कोशिश करते हुए कहा था कि कॉन्ग्रेस ने 2012 में इस अस्पताल के लिए 5 करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया गया था। लेकिन, सरकार बदलने के बाद 5 करोड़ के बदले 1.7 करोड़ रुपए ही जारी किए गए। अब पता चला है कि अस्पताल के पास 6 करोड़ रुपए पड़े थे। लेकिन, इनका इस्तेमाल उपकरण वगैरह को ठीक करने के लिए नहीं किया गया।

इससे पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोटा में बच्चों की मौत को नागरिकता संशोधन कानून से भी जोड़ चुके हैं। 2 जनवरी को उन्होंने कहा था, “सीएए के खिलाफ पूरे देश में जो माहौल बना हुआ है, उससे ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। मैं पहले ही कह चुका हूॅं इस साल शिशुओं की मौत के आँकड़ों में पिछले कुछ सालों की तुलना में काफी कमी आई है।”

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‘राफेल उड़ा रहे होते अभिनंदन तो नतीजा अलग होता, लेकिन फैसला लेने में 10 साल लगा दिए’

राफ़ेल लड़ाकू विमान ख़रीद सौदे को लेकर हुए विवाद का ज़िक्र करते हुए पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने शनिवार (4 जनवरी) को कहा कि इस तरह के विवाद रक्षा ख़रीदों को धीमा कर देते हैं। इससे सशस्त्र बलों की क्षमताओं पर असर पड़ता है। पूर्व एयर चीफ़ मार्शल ने आईआईटी बंबई द्वारा आयोजित ‘टेकफेस्ट कार्यक्रम’ में राफ़ेल विवाद का ज़िक्र किया और कहा,

“अगर अभिनंदन मिग-21 की जगह राफ़ेल उड़ा रहे होते, तो उस हवाई युद्ध (बालाकोट हवाई हमले के बाद भारत-पाकिस्तान गतिरोध के दौरान) का परिणाम अलग होता। वो राफ़ेल क्यों नहीं उड़ा रहे थे, क्योंकि आपको यह तय करने में दस साल लग गए कि आप कौन-सा विमान ख़रीदना चाहते हैं।” 

पूर्व वायुसेना प्रमुख ने इस बात का भी ज़िक्र किया कि बोफोर्स सौदा भी विवाद में रहा था, जबकि बोफोर्स तोप ‘अच्छे’ रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में ऐसी कई एजेंसियाँ हैं जो शिक़ायतें प्राप्त होने पर सौदों की जाँच करती है। उन्होंने कहा कि लोगों को विमानों की कीमतों के बारे में पूछने का अधिकार है, क्योंकि उसमें करदाताओं का पैसा लगा होता है।

पिछले साल सितंबर में सेवानिवृत्त हुए धनोआ ने कहा, “विवाद पैदा होने के चलते रक्षा (साजो सामान) के आधुनिकीकरण के धीमा पड़ने का बाद में आप पर असर पड़ता है।” उन्होंने कहा, “जैसा प्रधानमंत्री ने एक बयान दिया था। लोग इसे राजनीतिक (बयान) कह रहे हैं लेकिन सच्चाई यह है कि जो बयान उन्होंने दिया वह सही है। उन्होंने कहा, ”यदि हमारे पास राफ़ेल होता तो स्थिति पूरी तरह से अलग होती।”

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे (नरेंद्र मोदी सरकार को क्लिन चिट देने) पर एक उत्कृष्ट फ़ैसला दिया। उन्होंने कहा, “मैंने हमेशा ही व्यक्तिगत रूप से यह कहा है… जब राफ़ेल जैसा मुद्दा उछाला जाएगा, यदि आप रक्षा ख़रीद प्रणाली को राजनीतिक रंग देंगे तब पूरी प्रणाली पीछे छूट जाएगी। फिर अन्य सभी फाइलें भी धीमी गति से आगे बढ़ेंगी इससे बहुत से लोग सचेत होना शुरू हो जाएँगे।”

पीएम मोदी ने पिछले साल मार्च में कहा था कि पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक के दौरान यदि भारत के पास राफ़ेल लड़ाकू विमान होते तो परिणाम अलग होता। धनोआ ने पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस नीत यूपीए सरकार का नाम लिए बगैर कहा,

”100 प्रतिशत यह (परिणाम) अलग होता। वह (अभिनंदन) राफ़ेल क्यों नहीं उड़ा रहे थे? क्योंकि आपने यह फैसला करने में 10 साल लगाया कि कौन-सा विमान ख़रीदा जाए। इसलिए यह (विलंब) आपको प्रभावित करता है।”

अभिनंदन ने हवाई झड़प के दौरान एक पाकिस्तानी विमान को मार गिराया था, लेकिन अपने मिग-21 विमान के गिरने के बाद वह पकड़ लिए गए थे। हालाँकि बाद में पाकिस्तान ने उन्हें भारत भेज दिया। पूर्व वायुसेना प्रमुख ने यह भी दोहराया कि 26/11 मुंबई आतंकी हमले और इससे पहले 2001 में संसद पर हुए हमले के बाद तत्कालीन सरकारों ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमला करने के वायुसेना के प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया था।

उन्होंने कहा, ”लेकिन फ़ैसला, जैसा कि मैं कहता रहा हूँ, राजनीतिक फ़ैसले होते हैं। यह (प्रस्ताव) उस वक्त स्वीकार नहीं किया गया। इसलिए इसने आतंकवाद को समर्थन देने वाले देश के अंदर यह विश्वास जगाया कि भारत, आतंकवादी हमले का जवाब नहीं देगा।” धनोआ ने कहा कि पाकिस्तानी वायु सेना (पीएएफ) को बालाकोट में भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक की भनक तक नहीं थी।

पूर्व वायु सेना प्रमुख ने कहा कि 1971 के (बांग्लादेश) युद्ध और 1999 के करगिल युद्ध के समय भी पाकिस्तानी थल सेना और पाकिस्तानी वायु सेना (पीएएफ) के बीच समन्वय का अभाव था। उन्होंने कहा, ”जब बालाकोट हुआ, पीएएफ को कोई जानकारी (भारतीय वायुसेना के हमले के बारे में) नहीं थी। बालाकोट में कोई टर्मिनल हथियार नहीं थे। यहाँ तक हम भी आश्चर्यचकित हैं।”

ख़बर के अनुसार, धनोआ ने यह भी कहा कि पठानकोट, उरी और पुलवामा में हुए आतंकी हमले ये संकेत देते हैं कि भारत के परंपरागत प्रतिरोध दुश्मन को भारतीय सरज़मीं पर आतंकी गतिविधियाँ करने से नहीं रोक पा रहे हैं। हालाँकि, यह (भारत के परंपरागत प्रतिरोध) अपने दुश्मन से कहीं बेहतर हैं। उन्होंने कहा, ”इस तरह, बालाकोट एयर स्ट्राइक को सरकार ने पाकिस्तान को यह संदेश देने के लिए मंज़ूरी दी कि आगे से इस तरह की हरक़तों की भारी क़ीमत चुकानी पड़ेगी।”

अपनी बात को जारी रखते हुए उन्होंने कहा, ”इस तरह के रणनीतिक आश्चर्य की एक वजह यह रही कि उन्होंने (पाकिस्तान ने) हमेशा ही हमारे नेतृत्व को कमतर आँका है। उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि हमारा नेतृत्व बालाकोट एयर स्ट्राइक जैसी गतिविधि का आगे बढ़ कर जवाब देगा।”

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NDTV का टाउनहॉल: AAP नेताओं ने आम आदमी बन केजरीवाल की तारीफ़ों के बाँधे पुल

एनडीटीवी का कार्यक्रम टाउनहॉल। मौजूद थे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल। हालाँकि, ये इंटरव्यू कम और पीआर स्टंट ज्यादा लग रहा था। ऐसा इसीलिए, क्योंकि इंटरव्यू में जिन लोगों ने आम आदमी पार्टी की सरकार की तारीफों के पुल बाँधे, वो सभी आप के कार्यकर्ता ही थे। अभिषेक नामक एक व्यक्ति ने कहा कि पहले उसके इलाक़े में नशे करने वाले लड़के ख़ासी परेशानी पैदा किया करते थे। उसने दावा किया कि स्ट्रीट लाइट्स और सीसीटीवी के कारण ये सब ख़त्म हो गया है। उसने कहा कि अब महिलाएँ रात को बेख़ौफ़ होकर घूम सकती हैं। अभिषेक असल में आप का ही कार्यकर्ता है, जिसे आप इस वीडियो में देख सकते हैं:

इससे पहले भी राजेश गुप्ता नामक व्यक्ति ने एक सभा के दौरान केजरीवाल से कहा कि उसके इलाक़े में पहले पानी की काफ़ी दिक्कतें रहती थीं, जो अब सुधर गई हैं। उसने कहा कि अब घर-घर साफ़ पानी आ रहा है। राजेश के भी कई पोस्टर सामने आए, जिससे पता चलता है कि वो भी केजरीवाल की पार्टी का कार्यकर्ता है। इसी तरह प्रीति पुरी ने दावा किया कि उनके पिता ने मरते समय अपने बेटे से वादा लिया था कि वो केजरीवाल को ही वोट करेंगे, क्योंकि उन्होंने उन्हें तीर्थयात्रा कराया था। प्रीति भी पुरानी केजरीवाल समर्थक हैं और आम आदमी पार्टी की कार्यकर्ता भी। इसी तरह लोकेश नामक व्यक्ति ने भी सवाल पूछा, जो केजरीवाल की ही पार्टी का नेता है।

एनडीटीवी के कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के कई छोटे नेताओं ने ‘आम आदमी’ बन कर केजरीवाल की तारीफों के पुल बाँधे। साथ ही दिल्ली सरकार के कार्यों की भी तारीफ़ की। इससे पता चलता है कि अरविन्द केजरीवाल की जनसभाओं व इंटरव्यू में कुछ ऐसे लोगों फिक्स रखे जाते हैं, जो उनकी तारीफ करते हैं। चुनावी समय में अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए केजरीवाल यही तरीका अपना रहे हैं। एनडीटीवी के साथ इंटरव्यू में केजरीवाल ने सीएए को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना की।

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Pak की तरह भारत के भी टुकड़े हो जाएँगे: बच्चों की मौत पर घिरे गहलोत का CAA पर प्रलाप

कोटा के एक सरकारी अस्पताल में सौ से अधिक बच्चों की मौत को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) से जोड़ चुके राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने फिर से विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि CAA वापस नहीं लिया गया तो देश के टुकड़े हो जाएँगे। उन्होंने यह बात शुक्रवार (जनवरी 3, 2020) को अपने गृहनगर जोधपुर में कही। उसी दिन यहॉं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सीएए के समर्थन में एक रैली को संबोधित किया था।

एक ही दिन जिले में मुख्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के होने के कारण सियासी पारा वैसे ही गर्म था। इस दौरान नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर निशाना साधा। शाह ने आक्रामक रुख दिखाते हुए विपक्ष को चेताया। कहा कि विपक्षी पार्टियाँ एक साथ मिल कर जितनी अफवाहें फैलानी है फैला ले, भाजपा घर-घर जाकर लोगों को सीएए के फायदों के बारे में बताएगी। इससे एक इंच पीछे नहीं हटेगी।

वहीं गहलोत ने सीएए और एनआरसी को लेकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर बने मुल्क कभी भी एक नहीं रह पाते हैं। गहलोत ने केंद्र सरकार पर हिन्दू राष्ट्र की विचारधारा को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया और चेताया कि आगे चल कर ये काफ़ी घातक सिद्ध होगा। उन्होंने उदाहरण के रूप में पाकिस्तान और रूस का नाम गिनाया। मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि कुछ फिरकापरस्त लोगों ने पाकिस्तान तो बना लिया, लेकिन बाद में उसके दो टुकड़े हो गए।

गहलोत और शाह के बयान: ‘दैनिक भास्कर’ के जोधपुर संस्करण में प्रकाशित ख़बर

उधर, अमित शाह ने जोधपुर में राज्य की सत्ताधारी पार्टी कॉन्ग्रेस को घेरा। पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन दोनों को सीएए पढ़ना चाहिए। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि अगर उन दोनों को क़ानून समझ में नहीं आते है तो वो इसका इटालियन में अनुवाद कराने को भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भारत पर जितना उनका हक़ है, उतना ही पीड़ित शरणार्थियों का है। उन्होंने याद दिलाया कि 2005 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने राजस्थान में 13, 000 शरणार्थियों को नागरिकता दी थी।

इससे पहले गहलोत कोटा में बच्चों की मौत को भी नागरिकता संशोधन कानून से जोड़ चुके हैं। 2 जनवरी को उन्होंने कहा था, “सीएए के खिलाफ पूरे देश में जो माहौल बना हुआ है, उससे ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को उठाया जा रहा है। मैं पहले ही कह चुका हूॅं इस साल शिशुओं की मौत के आँकड़ों में पिछले कुछ सालों की तुलना में काफी कमी आई है।” राजस्थान के कोटा के जेके लोन अस्पताल में दिसंबर से अब तक 105 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस मामले में लगातार गहलोत सरकार की लापरवाही और असंवदेनशीलता सामने आ रही है। बजट की कमी का रोना रोने वाले राज्य के चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के उलट बयान देते हुए मंत्री प्रताप सिंह ने बताया कि 6 करोड़ रुपए जेके लोन अस्पताल के पास पड़े रह गए।

इस बीच, सोनिया गाँधी ने उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को हालात का जायजा लेने कोटा भेजा। वहाँ स्थिति देखने के पास पायलट ने कहा कि राज्य सरकार को कुछ और सहानुभूति के साथ कार्य करना चाहिए था। पायलट का मानना है कि गहलोत सरकार ने स्थिति के प्रति उतनी संवेदनशीलता नहीं दिखाई।

सचिन पायलट ने अपनी ही सरकार के लोगों पर निशाना साधते हुए कहा कि एक वर्ष से भी अधिक तक सत्ता में रहने के बाद पूर्ववर्ती सरकारों पर इल्जाम लगाने का कोई तुक नहीं बनता है। बकौल पायलट, सबकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उधर, गहलोत ने जोधपुर में बच्चों की मौत के अलावा हर विषय पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आज बिखरने की कगार पर है, उसी तरह भारत में हिन्दू राष्ट्र की विचारधारा को आगे बढ़ाना भी विनाशकारी सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह को सीएए को वापस लेने पर विचार करना चाहिए।

सचिन पायलट के बयान को कई लोग राजस्थान में कॉन्ग्रेस के आंतरिक कलह से जोड़ कर भी देख रहे हैं। उपमुख्यमंत्री पायलट राजस्थान कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी हैं। पिछले दिनों वो दिल्ली में थे, जहाँ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कोटा में बच्चों की मौत को लेकर नाराज़गी जताई। इसके बाद उन्होंने कोटा पहुँच कर पीड़ित परिजनों से मुलाक़ात की। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की पहल के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम भी सक्रिय है।

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मंदिर में तोड़फोड़, हिंदुओं के घरों को जलाया: मुस्लिमों की भीड़ का कहर, देखती रही पुलिस

पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले में मुस्लिमों की एक बड़ी भीड़ ने जमकर उत्पात मचाया। एक मुस्लिम दुकानदार की ‘अप्राकृतिक मृत्यु’ के बाद मुस्लिमों ने पूरे इलाक़े में आगजनी की और दंगे किए। मारा गया दुकानदार एक महिला के यौन शोषण का आरोपित था। आसपास के क्षेत्रों में इंटरनेट सर्विस सस्पेंड कर दिया गया। मुस्लिमों ने हिन्दू बहुल इलाक़े में तोड़फोड़ मचाई, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में धारा-144 लागू कर दिया गया। मृतक का नाम असदुल सलाम है, जो रोजमर्रा की चीजें बेचा करता था। इसी दौरान उसने एक हिन्दू महिला ग्राहक के साथ बदतमीजी की।

उसने उस महिला के साथ दुर्व्यवहार किया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में रेप की भी बात कही जा रही है, जिसकी पुष्टि नहीं हुई है। दत्तपुकुर के लोकल क्लब प्रगति संघ के मेले में सामान बेच रहे असदुल की शिकायत क्लब वालों से की गई। मुस्लिमों का आरोप है कि क्लब वालों ने पहले तो उसे खूब मारा-पीटा और उसके बाद उसका मृत शरीर लटकता हुआ मिला। क्लब का कहना है कि असदुल ने आत्महत्या की। मुस्लिम ये मानने को तैयार नहीं हैं। जैसे ही असदुल की मौत की ख़बर फैली, हज़ारों की संख्या में मुस्लिम भीड़ निकल आई और उन्होंने आगजनी शुरू कर दी।

सबसे पहले तो वो क्लब में घुस गए और चीजों को तहस-नहस कर डाला। उन्होंने अंदर रखे फर्नीचर और अन्य वस्तुओं को पटक कर तोड़ डाला। आधे दंगाई मुस्लिम क्लब के अंदर तोड़फोड़ मचाने में व्यस्त थे, वहीं बाकी के मुस्लिमों ने बाहर बैरिकेड बनाया हुआ था ताकि पुलिस को क्लब के अंदर घुसने से रोका जा सके। मुस्लिमों ने वहाँ कई दुकानों को तहस-नहस कर दिया। पश्चिम बंगाल पुलिस खड़े होकर ये सब तमाशा देखती रही। इतने पर भी मुस्लिमों का गुस्सा शांत नहीं हुआ तो वो हिन्दू बहुल इलाक़े में घुस गए।

हिन्दुओं के कई घरों व दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया। कई हिन्दुओं की गाड़ियों और अन्य सम्पत्तियों को आग के हवाले कर दिया गया। रास्ते में पड़ने वाले एटीएम, इलेक्ट्रिक पोस्ट्स और स्ट्रीट लाइट्स को भी तोड़ डाला गया। उत्पाती मुस्लिम भीड़ ने रास्ते में जैसे ही एक मंदिर को देखा, वो वहाँ घुस गए। उन्होंने मंदिर में जम कर तोड़फोड़ मचाई। इसके बाद उन्होंने रेल पटरियों को जाम कर दिया, जिससे इलाक़े में लोकल ट्रेनों के परिचालन में बाधा आई। हज़ारों रेलयात्री घटों तक फँसे रहे।

इतने पर भी मुस्लिम नहीं थमे। उन्होंने डंडे लेकर हिंसा शुरू कर दी। जम कर पत्थरबाजी की गई। वो अपने घरों में से बम लेकर भी आए थे। कई दिशाओं से आ रहे बमों का निशाना पुलिस अधिकारियों को भी बनाया गया। अंत में अतिरिक्त पुलिस बल बुला कर लाठीचार्ज किया गया और आँसू गैस के गोले छोड़े गए, जिसके बाद स्थिति नियंत्रित हुई। असदुल की लाश को क्लब से हटाया गया। मीडिया ने इस ख़बर को छिपा लिया लेकिन स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी पीड़ा बताई। इसी इलाक़े में सीएए के विरोध में भी दंगा हुआ था।

ममता के बंगाल में जुमे की नमाज के बाद मुसलमानों ने योजना बनाकर की जमकर हिंसा, पत्थरबाजी, आगजनी

ममता जी, अपराधी मुसलमानों को इसलिए मत बख़्श दीजिए क्योंकि वो मुस्लिम हैं: बंगाल के मुस्लिम

बंगाल में लगातार तीसरे दिन हिंसा: अकरा रेलवे स्टेशन पर दंगाइयों का उत्पात, टॉयलेट में छिप कर्मचारियों ने बचाई जान

ईरानी कमांडर मरा तो उबल पड़े ‘शांतिदूत’, ट्रंप ने बताया- दिल्ली में भी हमले की रची थी साजिश

जम्मू-कश्मीर में वहाँ के मुस्लिमों ने ईरान के जनरल सुलेमानी के मारे जाने के जाने ख़िलाफ़ रैली निकाली। बता दें कि सुलेमानी को अमेरिका ने बग़दाद में मार गिराया था। हज़ारों मुस्लिमों ने अमेरिका और इजरायल के ख़िलाफ़ भड़काऊ नारेबाजी करते हुए सुलेमानी के मारे जाने पर रोष जताया। शुक्रवार (जनवरी 3, 2020) को जुमे की नमाज के कारण घाटी में सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी थी। इसके बीच कई शिया बहुल इलाक़ों से लोग इस रैली में शिरकत करने पहुँचे। लद्दाख के कारगिल में हुए इस विरोध-प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित मुस्लिमों ने अमेरिका को भला-बुरा कहा।

जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में हज़ारों की संख्या में मुस्लिमों ने निकल कर जनरल सुलेमानी की मौत के ख़िलाफ़ अपना आक्रोश प्रदर्शित किया। मुस्लिमों ने ‘अल्लाहु अकबर’ जैसे नारे लगाए। वो सभी सुलेमानी के बड़े-बड़े पोस्टर्स अपने हाथों में लिए हुए थे। प्रदर्शनकारियों के नेता ने इस दौरान मुस्लिमों की भीड़ को सम्बोधित करते हुए कहा:

“हम यहाँ अपने महान नेता जनरल सुलेमानी को श्रद्धांजलि देने आए हैं। हम क़ासिम सुलेमानी के प्रति अपने प्यार से पूरी दुनिया को वाकिफ कराना चाहते हैं। इसीलिए, हम सड़कों पर उतरे हैं। क़ासिम सुलेमानी एक शहीद हैं। उन्हें जिस तरह से आतंकवादियों ने क्रूर तरीके से मार डाला, उसके लिए हम अमेरिका की निंदा करते हैं। हमारे दिलों का शहजादा चला गया, शहीद हो गया।”

ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि किस प्रकार से मुस्लिम भीड़ आक्रामक नारेबाजी करते हुए जनरल सुलेमानी की मौत के ख़िलाफ़ अपना आक्रोश दिखा रही है। उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया है कि सुलेमानी पर निर्दोष लोगों की मौत की सनक सवार थी और उसने दिल्ली में भी आतंकी साज़िश को अंजाम दिया था। फ्लोरिडा में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि दिल्ली में हुई आतंकी घटनाओं के पीछे भी सुलेमानी का हाथ रहा है। उसने लंदन में भी आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया था।

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CAA पर ‘पॉलिटिक्स’ करने पहुँचीं प्रियंका गाँधी, आपस में ही लड़ गए कॉन्ग्रेसी: देखें Video

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के विरोध के नाम पर देश के कई हिस्सों में हिंसा की गई। आगजनी, पत्थरबाज़ी, पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों पर जानलेवा हमले किए गए। मेरठ में तो पूरी की पूरी पुलिस टीम (30 पुलिसकर्मी) को एक दुकान में बँधक बनाकर ज़िंदा जला देने की ख़ौफनाक वारदात को अंजाम देने की कोशिश की गई। दंगाइयों ने तो दुकान के बाहर आग लगाकर पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलने के लिए छोड़ ही दिया था, वो तो पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी के चलते वे बाल-बाल बच गए।

इस हिंसक भीड़ में शामिल लोगों से लगाव दिखाने का कॉन्ग्रेस और उसकी महासचिव प्रियंका गाँधी कोई मौका नहीं छोड़ रहीं। इसी क्रम में वे शनिवार को हिंसा में जख्मी लोगों और मृतक के परिजन से मिलने पहुॅंचीं। वह परतापुर इलाके में गईं। यहॉं कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच पहले बहस हुई। बाद में धक्कामुक्की तक की नौबत आ गई। इस दौरान प्रियंका भी वहीं मौजूद थीं।

इससे पहले ऐसी ही अराजकता प्रियंका के लखनऊ दौरे के दौरान भी देखने को मिली थी। 28 दिसंबर 2019 को प्रियंका ने एक महिला अधिकारी पर गला दबाने का आरोप मढ़ दिया। लेकिन, अपने दावे के समर्थन में वह कोई सबूत नहीं पेश कर पाई। यहॉं तक कि कॉन्ग्रेस ने जो वीडियो शेयर किया उसमें भी प्रियंका के साथ खड़े लोग ही महिला अधिकारी के साथ धक्का-मुक्की करते नजर आए। बाद में प्रियंका गॉंधी भी गला दबाने की बात से पलट गई।

महि​ला अधिकारी अर्चना सिंह ने बाद में बताया कि कैसे प्रियंका पहले से तय रास्ते को छोड़कर दूसरे मार्ग से निकलने लगी तो अपनी ड्यूटी निभाते हुए उन्होंने उन्हें रोक कर इस संबंध में बात की। उन्होंने बताया, “इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। मैं उनकी (प्रियंका गाँधी) फ्लीट इंचार्ज थी। उनके साथ किसी ने भी अभद्रता नहीं की। मैंने सिर्फ अपनी ड्यूटी की। इस घटना के दौरान मेरे साथ धक्का-मुक्की की गई थी।”

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आतंकियों से जुड़े हो सकते हैं बंगाल पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट के तार, मालिक नूर मोहम्मद गिरफ़्तार

पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के नैहाटी में स्थित एक पटाखा फक्ट्री में आग लगने से 4 लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में फैक्ट्री के मालिक नूर हुसैन को गिरफ़्तार कर लिया है। उसके ख़िलाफ़ ‘एक्सीडेंटल मर्डर’ व अन्य धाराओं के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने काफ़ी देर तक नूर हुसैन से पूछताछ की। ब्लास्ट में मारे गए चारों व्यक्ति उस पटाखा फैक्ट्री में बतौर मजदूर कार्यरत थे। स्थानीय लोगों ने बताया कि धमाका इतना जबरदस्त था कि 3 किलोमीटर दूर तक आवाज सुनाई पड़ी। फैक्ट्री की छत का नामोनिशान तक मिट गया और दीवारें ढह गईं।

इतना बड़ा धमाका होने के कारण पुलिस को शक है कि फैक्ट्री में अवैध और प्रतिबंधित बम बनाए जा रहे थे। पटाखा फैक्ट्री के नाम पर बम बनाने की फैक्ट्री चलाई जा रही थी, स्थानीय लोगों ने ऐसा दावा किया है। भाजपा सांसद अर्जुन सिंह ने आशंका जताई कि इस फैक्ट्री का सम्बन्ध आईएसआई या अन्य आतंकी संगठनों से हो सकता है। उन्होंने कहा कि इलाक़े में कई ऐसी फैक्ट्रियाँ हैं, जहाँ पटाखों के नाम पर प्रतिबंधित बम बनाए जाते हैं। उन्होंने इन फैक्ट्रियों के टेरर लिंक की जाँच एनआईए से कराने की माँग की। फैक्ट्री में क्रूड बम बनाने जाने की सम्भावना राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी जताई है। उन्होंने इस मामले की जाँच किए जाने की बात कही।

पश्चिम बंगाल के अवैध बम फक्ट्री में भीषण ब्लास्ट

राज्यपाल ने कहा कि वो नैहाटी के मस्जिदपारा में हुए ब्लास्ट से हैरान हैं और 4 मौतों के कारण दुःखी हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए हर स्तर पर जो भी लोग जिम्मेदार हैं, उनकी पहचान होनी चाहिए। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सम्बोधित करते हुए ये बातें कही। पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के कारण आतंकी गतिविधियों में इजाफा हुआ है। कोलकाता से 100 किलोमीटर दूर बर्दवान में हुए एक ब्लास्ट में कई बांग्लादेशी जिहादियों के नाम सामने आए थे। इस घटना के बाद पता चला था कि बांग्लादेशी जिहादी राज्य को नए पनाहगार के रूप में प्रयोग कर रहे हैं।

उस ब्लास्ट में इंडियन मुजाहिद्दीन के 2 आतंकी मारे गए थे और एक व्यक्ति घायल हो गया था। इस ब्लास्ट के बाद तलाशी में भारी मात्रा में हथियार बरमाद किया गया था। मृतकों का नाम शकील अहमद और स्वप्न मंडल था। वहीं घायल की पहचान अब्दुल हामिद के रूप में हुई थी। इसके बाद एनआईए ने जाँच में कई ऐसे मदरसों को अपने रडार में लिया था, जहाँ आतंकियों को पनाह दी जा रही थी और आतंकी गतिविधियाँ खुलेआम संचालित की जा रही थी।

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