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भगोड़े गैंगस्टर एजाज लकड़ावाला की बेटी सोनिया शेख गिरफ़्तार, फर्जी पासपोर्ट पर बच्चे के साथ भाग रही थी विदेश

भगोड़े गैंगस्टर एजाज लकड़ावाला की बेटी सोनिया लकड़ावाला उर्फ सोनिया शेख को गिरफ्तार किया गया है। वह फर्जी पासपोर्ट पर ​अपनी बेटी के साथ विदेश भागने की फिराक में थी। मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने से पहले ही उसे हिरासत में ले लिया गया।

एक अधिकारी ने बताया कि सोनिया लकड़ावाला उर्फ़ सोनिया शेख शुक्रवार (27 दिसंबर) देर रात नेपाल जाने वाली एक उड़ान में सवार होने वाली थी, तभी पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। दस्तावेजों की जाँच के बाद उसे गिरफ़्तार कर लिया गया।

इस साल की शुरुआत में खार के एक बिल्डर ने एजाज लकड़ावाला और उसके भाई अकिल के खिलाफ जबरन उगाही का एक मामला दर्ज कराया था। अकिल को बाद में मार्च में गिरफ़्तार कर लिया गया था। उगाही निरोधक इकाई के अधिकारी ने कहा, “अकिल ने हमें बताया था कि सोनिया के पास एक फर्जी पासपोर्ट है और वह देश से भागने की कोशिश करेगी। शुक्रवार को हमें सूचना मिली कि वह अपने बच्ची के साथ मुंबई हवाई अड्डे पर है। उसके बाद एक टीम ने वहाँ के आव्रजन अधिकारियों को सतर्क किया और उसे हिरासत में ले लिया गया।”

उन्होंने कहा कि सोनिया को पिछले साल मुंबई से पासपोर्ट जारी किया गया था लेकिन इसके लिए जाली दस्तावेज पेश किए गए थे। उसके खिलाफ पासपोर्ट कानून और भारतीय दंड संहिता के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप है। यह पता लगाने के लिए जाँच की जा रही है कि क्या खार के बिल्डर द्वारा दर्ज कराए गए उगाही मामले से उसका कोई संबंध है। अधिकारी ने कहा कि उसे शनिवार को अदालत में पेश किया गया जहाँ से उसे 30 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

छोटा राजन गैंग का सदस्य रहा एजाज मुंबई और दिल्ली में 24 से ज्यादा मामलों में वांछित है। इसमें हत्या और फिरौती के कई मामले शामिल हैं। कभी जोगेश्वरी इलाके में रहने वाले लकड़ावाला ने बांद्रा के सेंट स्टेनीस्लूस स्कूल से पढ़ाई की है। सूत्रों के मुताबिक, वह फिलहाल कनाडा में रह रहा है। साल 2003 में छोटा शकील के साथ साँठगाँठ के आरोप में राजन ने एजाज पर बैंकॉक में हमला करवाया था। उस दौरान कहा गया कि वह हॉस्पिटल से भागकर दक्षिण अफ्रीका पहुँच गया था।

हालाँकि, बाद में साल 2004 में एजाज काे कनाडा की रॉयल पुलिस ने ओटावा में पकड़ा। यहाँ कुछ दिन जेल में रहने के बाद उसे रिहा कर दिया गया। इसके बाद वह कई साल तक लापता रहा। 2008 में पुलिस को फिरौती के एक मामले में एजाज के लिप्त होने की जानकारी मिली।

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यूपी की ‘मर्दानी’ जो कॉन्ग्रेस के गुंडों से नहीं डरी: वीडियो से खुली पोल तो प्रियंका गॉंधी ने मारी पलटी

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के नाम पर देश भर में हुई हिंसा में कॉन्ग्रेस के कई नेता नामजद हुए हैं। लगातार वे तथ्य भी सामने आ रहे हैं जिससे पता चलता है कि एनपीआर, एनआरसी और डिटेंशन सेंटर के नाम पर कॉन्ग्रेस लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रही। चौतरफा घिरी कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गॉंधी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक नया सियासी बवंडर खड़ा करने की कोशिश की। लेकिन, जब तथ्य सामने आए तो उनके दावों की पोल खुल गई।

प्रियंका ने दावा किया कि वे पूर्व आईपीएस एसआर दारापुरी के परिवारवालों से मिलने जा रही थीं। रास्ते में पुलिस ने उनके काफिले को रोक लिया। एक महिला अधिकारी ने उनका गला दबाया और धक्का देकर गिरा दिया। प्रियंका गॉंधी से कथित बदसलूकी को लेकर कॉन्ग्रेस ने एक वीडियो भी जारी किया। दिलचस्प यह है कि इस वीडियो में प्रियंका गॉंधी के साथ कोई जोर-जबर्दस्ती नहीं दिखाई पड़ती। एक महिला अधिकारी प्रियंका गॉंधी के पास जाती हैं और उनसे बात करने की कोशिश करती हैं। थोड़ी देर बातचीत होने के बाद प्रियंका के साथ खड़े ‘गुंडे’ महिला अधिकारी के साथ धक्का-मुक्की करते दिखाई पड़ते हैं। वीडियो में कहीं भी महिला अधिकारी प्रियंका गॉंधी का गला पकड़ते या प्रियंका जमीन पर गिरती नजर नहीं आतीं, जैसा उन्होंने दावा किया था। कॉन्ग्रेस के इस वीडियो से जाहिर है कि प्रियंका जान-बूझकर झूठ बोल रही थीं ताकि सुर्खियॉं बटोर सके। दिलचस्प यह है कि इसके लिए प्रियंका से सवाल करने की बजाए मीडिया गिरोह महिला अधिकारी पर ही टूट पड़ा।

कॉन्ग्रेस द्वारा जारी वीडियो का स्क्रीनशॉट

जिस महिला अधिकारी को निशाना बनाने की कोशिश की गई वें हैं सर्कल ऑफिसर डॉ. अर्चना सिंह। वे प्रियंका गाँधी की फ्लीट की प्रभारी थी। उन्होंने बताया, “इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। मैं उनकी (प्रियंका गाँधी) फ्लीट इंचार्ज थी। उनके साथ किसी ने भी अभद्रता नहीं की। मैंने सिर्फ अपनी ड्यूटी की। इस घटना के दौरान मेरे साथ धक्का-मुक्की की गई थी।” लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने भी प्रियंका के आरोपों को पूरी तरह नकार दिया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सीओ एमसीआर डॉ. अर्चना सिंह ने रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रियंका गाँधी पार्टी दफ्तर से गोखले मार्ग के लिए निकली थीं। उनकी फ्लीट तय रास्ते से न जाकर लोहिया पथ की तरफ जाने लगी। इस पर जब बातचीत की गई तो कोई सही जवाब नहीं मिला।

झूठ पकड़े जाने के बाद प्रियंका ने सफाई देते हुए कहा, “मैं दारापुरी के परिवार से मिलने जा रही थी। पुलिस ने बार-बार रोका। जब गाड़ी को रोका और मैंने पैदल जाने की कोशिश की तो मुझे घेर कर रोका और मेरे गले पर हाथ लगाया, मुझे गिरा भी दिया था एक बार।” हालॉंकि प्रियंका की सफाई में भी उनके दावे की तरह ही घालमेल है। पहले उन्होंने कहा था कि महिला अधिकारी ने गला दबाया। सफाई देते हुए कहा कि उनके गले पर हाथ लगाया। लेकिन, कॉन्ग्रेस की तरफ से जारी वीडियो में ऐसा कुछ नहीं दिखता।

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साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर के उपचार का विज्ञान है BHU का ‘भूत विद्या’, झाड़-फूँक नहीं

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने एक नया पाठ्यक्रम शुरू किया है। नाम है ‘भूत विद्या’। नाम सुनते ही पहला ख्याल आता है बचपन में सुनी भूत वाली कहानियों का। भूत छुड़ाने का दावा करने वाले ओझा-गुणी का। बीबीसी जैसे मीडिया संस्थान भी “Bhoot Vidya: India university to teach doctors Ghost Studies” जैसे हेडलाइन से इसी तरह का भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

लेकिन हकीकत कुछ और ही है। BHU का ‘भूत विद्या’ विशुद्ध विज्ञान है। इससे साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर का उपचार किया जाता है। ऑपइंडिया के संपादक अजीत भारती ने इस मसले पर बीएचयू के आयुर्वेद विभाग के डीन प्रोफ़ेसर यामिनी भूषण त्रिपाठी से लंबी बातचीत कर इसके अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की। आप इसे विस्तार से सुन सकते हैं।

इस दौरान प्रोफेसर त्रिपाठी ने बताया कि इसका भूत से कोई लेना-देना नहीं है। न ही यह ओझा-गुणी की पढ़ाई है। इसकी शिक्षा के लिए चिकित्सा का ज्ञान होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि पाठकों को आकर्षित करने के लिए मीडिया संस्थान इस तरह की हेडलाइन बना रहे हैं ताकि लोगों में भ्रम पैदा हो।

प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि सारा ज्ञान वेदों से आया है। चौथे वेद अथर्ववेद से आयुर्वेद निकला है। आयुर्वेद में आठ अंग होते हैं। शल्य, शालाक्य, काय चिकित्सा, कौमारभृत्य, अगदतंत्र, रसायन विज्ञान, वाजीकरण और भूत विद्या। इसे ही आष्टांग आयुर्वेद कहते हैं। बकौल प्रोफेसर त्रिपाठी इनमें से पॉंच को तो 15 भागों में विभाजित कर विकसित करने में कामयाबी मिल चुकी है। लेकिन, आयुर्वेद के आखिरी तीन भाग अभी तक पूरी तरह से विकसित नहीं हुए हैं। यही कारण है​ कि बीएचयू ने पहली बार इनकी पाठ्यक्रम की शुरुआत की है। जून में तीनों का यूनिट बनाया गया था। जो आगे चलकर विभाग में बदल जाएगा। छह महीने का ये पाठ्यक्रम होगा। भूत विद्या की शिक्षा लेने वाले साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर यानी मनोदैहिक विकार का उपचार करने में समर्थ होंगे। इस तरह के विकार मन में पैदा होकर शरीर को कष्ट देते हैं।

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केवल 900 मरे हैं, 6 साल में यह सबसे कम है: बच्चों की मौत पर अशोक गहलोत ने कहा- यह नई बात नहीं

3 दिन की रेखा, 2 दिन की कांता, 1 दिन की नरगिस सहित 6 बच्चे कोटा के जेकेलोन अस्पताल में 23 दिसंबर को मर गए। अगले दिन यानी 24 दिसंबर को इसी अस्पताल में 1 दिन के तोली सहित 4 और बच्चों की मौत हो गई। दो दिन में 10 बच्चे और एक महीने में 77 बच्चों की मौत हो चुकी है। आपके लिए भले ये बच्चे हों, लेकिन राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार के लिए महज नंबर हैं। यकीन नहीं होता तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बातों पर गौर कर लें। शनिवार को मीडिया से बात करते हुए गहलोत ने कहा कि राज्य के हर अस्पताल में रोजाना 3-4 मौतें होती हैं। यह कोई नई बात नहीं है। लगे हाथ उन्होंने यह भी दावा किया कि इस साल केवल 900 मौतें हुई हैं जो बीते 6 साल में सबसे कम है।

गहलोत ने इतनी असंवेदनशील बात तब कही जब पत्रकारों ने उनसे बच्चों की मौत की जिम्मेदारी को लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा, “6 साल में सबसे कम मौतें हुई हैं। एक भी बच्चे की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन 1500, 1300 मौतें भी बीते सालों के दौरान हुई है। इस साल यह आँकड़ा 900 है। देश और राज्य के हरेक अस्पताल में रोज कुछ मौतें होती ही हैं। कदम उठाए जाएँगे।”

मुख्यमंत्री गहलोत के मुताबिक उन्होंने इस मामले में जाँच कराई है और एक्शन भी लिया जा रहा है। उनके मुताबिक अपनी सरकार के पिछले टर्म में भी उन्होंने अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटर को लंबे अंतराल के बाद अपग्रेड करवाया था। इससे पहले शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ट्वीट कर बच्चों की असमय मौत की तरफ मुख्यमंत्री गहलोत का ध्यान खींचा था।

पत्रिका के कोटा संस्करण में प्रकाशित खबर

यहाँ बता दें कि मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री ने चिकित्सा शिक्षा सचिव वैभव गालरिया को कोटा पहुँचकर हालात देखने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद गालरिया ने वहाँ पहुँचकर जाँच कमेटी के साथ अपनी जाँच शुरू की और निरीक्षण करने के बाद अव्यवस्थाओं के लिए अधीक्षक डॉ. एच एल मीणा को जिम्मेदार मानते हुए पद से हटया गया। अब डॉ. सुरेश दुलारा इस अस्पताल के नए अधीक्षक होंगे।

आज भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी अस्पताल पहुँचकर हालात का जायजा लिया है। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी के वहाँ न पहुँचने पर सवाल उठाए। लोगों ने कहा कि प्रियंका और राहुल गाँधी को कॉन्ग्रेस शासित प्रदेशों में हो रही इस तरह की घटनाएँ नजर नहीं आती।

मौलाना आज़ाद का जिक्र सुन बौखलाए इरफान हबीब, केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान पर चीख पड़े

राम मंदिर मामले में अड़ंगा डाल चुके वामपंथी इतिहासकार इरफान हबीब को मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का नाम तक सुनना गॅंवारा नहीं है। शायद इसलिए क्योंकि राष्ट्रीयता और भारतीयता में मौलाना का यकीन गहरा था। धर्म के आधार पर भारत के विभाजन का उन्होंने विरोध किया था। पाकिस्तान परस्तों को चेताया था।

ताजा घटना केरल के कन्नूर की है। यहॉं भारतीय इतिहास कॉन्ग्रेस को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान संबोधित कर रहे थे। इस दौरान संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के विरोध में हुए प्रदर्शन पर चर्चा करते हुए उन्होंने मौलाना आजाद का हवाला दिया। फिर क्या था इरफान हबीब सीधे मंच पर पहुॅंच गए और राज्यपाल को बोलने से रोकने की कोशिश की। केरल गवर्नर के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से यह जानकारी दी गई है। ट्वीट कर बताया गया है कि जब राज्यपाल ने मौलाना आजाद का हवाला दिया तो इरफान हबीब मंच पर पहुॅंच गए। उन पर चिल्लाने लगे। राज्यपाल के सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का मुक्की की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कन्नूर विश्वविद्यालय में आयोजित इस समारोह में आरिफ मोहम्मद खान मुख्य अतिथि थे। उनसे पहले कॉन्ग्रेस को संबोधित करते हुए माकपा के राज्यसभा सदस्य केके रागेश और इतिहासकार इरफान हबीब ने नागरिकता संशोधन कानून का मुद्दा उठाया था। लेकिन जब आरिफ खान ने इस मुद्दे पर दोनों वक्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दे पर जवाब देना शुरू किया तो वहाँ बैठे कुछ प्रतिनिधियों और छात्रों ने उनका विरोध शुरू कर दिया और इसी बीच इरफान हबीब भी स्टेज पर चढ़ आए। बताया जा रहा है कि जैसे ही राज्यपाल ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुए प्रदर्शन के बारे में कार्यक्रम में बोलना शुरू किया, तभी इतिहासकार इरफान हबीब स्टेज पर पहुँचे और उन्होंने न केवल उनके भाषण को बाधित किया, बल्कि उन्हें बोलने से रोकने की कोशिश भी की। इसके बाद राज्यपाल ने कहा कि विरोध करने का हक सभी को है, लेकिन आप किसी को चुप नहीं करा सकते।

इरफान हबीब ने चिल्लाते हुए राज्यपाल से कहा, “तुम्हें तो गोडसे का उल्लेख करना चाहिए।” इतना ही नहीं, इस दौरान इतिहासकार इरफान हबीब अपना आपा खो बैठे और उन्होंने राज्यपाल के एडीसी और सुरक्षा अधिकारियों को भी धक्का दिया।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, कहा जा रहा है जिन छात्रों ने कार्यक्रम में केरल राज्यपाल का विरोध किया, उनमें दिल्ली के जामिया मिलिया, AMU, और जेएनयू के कुछ छात्र भी शामिल थे। जिन्होंने इस बीच राज्यपाल के खिलाफ कुछ प्रतिनिधियों ने नारे भी लगाए। जिसके कारण वहाँ मौजूद पुलिस को उन छात्रों को बाहर निकालना पड़ा।

इस घटना पर बात करते हुए आरिफ मोहम्मद खान ने पत्रकारों से कहा कि वह इस मुद्दे पर बोलना नहीं चाहते थे। लेकिन उनसे पहले कुछ वक्ताओं ने सीएए को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन का मुद्दा उठाया तो राज्यपाल के तौर पर उनकी संविधान की रक्षा करने की जिम्मेदारी है, इस नाते उन्हें उन लोगों द्वारा उठाए गए मुद्दे पर स्थिति साफ करने के लिए बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा।

बता दें कि भाजपा महासचिव एमटी रमेश ने राज्यपाल के विरोध को सरकार प्रायोजित करार दिया है। उन्होंने इस पूरी घटना की जाँच कराने की माँग की और साथ ही इसे राज्यपाल की सुरक्षा में चूक का मामला बताया। गौरतलब है कि बीते दिनों कॉन्ग्रेस ने भी आरिफ मोहम्मद खान को भेजा एक न्योता रद्द कर दिया था। खान ने सीएए का समर्थन करते हुए कहा था कि इसके जरिए मोदी सरकार ने महात्मा गॉंधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस द्वारा किए गए वादे को पूरा किया है।

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वे देश विरोधी नारे लगा रहे थे, आपत्तिजनक पर्चे बाँट रहे थे: ‘पाकिस्तान चले जाओ’ पर ADG

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ देशभर में विरोध-प्रदर्शनों का दौर जारी है। कई जगहों पर विरोध-प्रदर्शनों की आड़ में उपद्रवियों ने पुलिस को निशाना बनाया और उनपर जानलेवा हमले किए। इस बीच, उत्तर प्रदेश में मेरठ के एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह का एक वीडियो वायरल होने के बाद राजनीति तेज़ हो गई है। जहाँ, एक तरफ प्रियंका गाँधी ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए सवाल खड़ा किया, तो वहीं दूसरी तरफ़ एसपी सिटी डॉ. अखिलेश नारायण सिंह ने कहा है कि पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाने वाले उपद्रवियों को हमने वहाँ से भगाया।

इस मामले पर एडीजी प्रशांत कुमार का कहना है कि पुलिसकर्मियों की तरफ से कोई गोलीबारी नहीं हुई थी। उन्होंने एसपी का बचाव करते हुए कहा कि वायरल हुआ वीडियो बीते 20 दिसंबर को मेरठ शहर में हुए उपद्रव के बाद का है। उन्होंने बताया कि इसमें तथ्य यह है कि वहाँ भारत-विरोधी और पड़ोसी देश (पाकिस्तान) ज़िंदाबाद के नारे लगाए जा रहे थे और कुछ लोग पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) के आपत्त्तिजनक पर्चे बाँट रहे थे।

इस सूचना पर एसपी सिटी और एडीएम सिटी मौक़े पर पहुँचे। उन्होंने उपद्रवियों से कहा था आप जाना चाहते हैं तो कहीं भी जाए लेकिन यहाँ उपद्रव ना करें। उन्होंने कहा कि घटना के एक सप्ताह बाद इस तरह का वीडियो वायरल होना विशेषकर जब कल शुक्रवार (27 दिसंबर) को शांति का माहौल था, एक साज़िश का हिस्सा है, जिससे यहाँ के हालात सामान्य ना हो पाएँ।

इस मामले में मीडिया से एसपी सिटी ने कहा था कि जो कुछ भी वीडियो में सुना गया है वह प्रदर्शनकारियों के उस समूह को जवाब था जो पाकिस्तान के समर्थन में ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे। बता दें कि अब इस मामले ने तूल पकड़ लिया है और मेरठ के एडीजी ने कहा कि उक्त युवाओं के ख़िलाफ़ देशद्रोह की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है।

दरअसल, सोशल मीडिया पर 20 दिसंबर का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एडीएम सिटी अजय तिवारी और एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह हिंसा के दौरान गली के अंदर भाग रहे कुछ उपद्रवियों से कहा था कि जहाँ जाओगे, चले जाओ। हम ठीक कर देंगे। काली पट्टी बांधकर विरोध जता रहे हो, खाओगे यहाँ और गाओगे वहाँ का। एसपी का ये बयान वायरल होने के बाद मेरठ पुलिस ने दावा किया कि कुछ उपद्रवियों ने काली पट्टी बाँधकर पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए थे।

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J&K: अब शेख अब्दुल्ला की पैदाइश पर छुट्टी नहीं, भारत में विलय के 72 साल बाद 26 अक्टूबर को अवकाश

आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार (दिसंबर 27, 2019) को नए साल 2020 के लिए सरकारी छुट्टियों का कैलेंडर जारी किया। नए कैलेंडर में शहीदी दिवस (जुलाई 13) की छुट्टी खत्म कर दी गई है। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के अब्बा मरहूम शेख अब्दुल्ला के जन्मदिवस (दिसंबर 05) पर भी अब सरकारी छुट्टी नहीं होगी।

इसके अलावा प्रशासन ने नए कैलेंडर में 26 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विलय दिवस पर राजकीय अवकाश रखा है। लेकिन विलय पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले महाराजा हरि सिंह की जयंती पर छुट्टी का नहीं होगी।

ये सारी जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग के उपसचिव जीएल शर्मा की ओर से शुक्रवार देर रात सूची जारी कर दी गई। सूची के अनुसार, 2020 में जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में 27 सरकारी छुट्टियाँ होंगी। 2019 की तुलना में एक छुट्टी कम। नई सूची में सिर्फ़ विलय दिवस का अवकाश ही नया है।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर की तरह लद्दाख ने भी अपना कैलेंडर जारी करते हुए शहीदी दिवस और शेख अब्दुल्ला के जन्मदिवस पर अवकाश रद्द कर दिया है। इसके बाद अब लद्दाख में कुल छुट्टियों की संख्या 46 रह गई है। वर्ष 2019 में कुल 51 छुट्टियों की सूची जारी की गई थी। इसमें गजटेड छुट्टियाँ 28, कश्मीर संभाग की 4, जम्मू संभाग की 3, स्थानीय-12 तथा प्रतिबंधित छुट्टियाँ 4 थीं। वर्ष 2020 के लिए जारी सूची में गजटेड छुट्टियाँ 27, कश्मीर संभाग की 4, जम्मू संभाग की 3, स्थानीय-04 तथा प्रतिबंधित छुट्टियाँ 4 हैं।

यहाँ बता दें कि जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के लगभग 72 साल बाद विलय दिवस पर अवकाश का ऐलान हुआ है। भारतीय जनता पार्टी, पैंथर्स पार्टी समेत कई राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन बरसों से विलय दिवस पर अवकाश की माँग कर रहे थे। वहीं, जम्मू-कश्मीर में अब तक शहीदी दिवस की छुट्टी हुआ करती थी। यह अवकाश 13 जुलाई 1931 को कश्मीर में महाराजा के खिलाफ हुए एक विद्रोह में मारे गए लोगों की याद में मनाया जाता था। 13 जुलाई को हर साल जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्तर पर शहीदी दिवस मनाया जाता था।

आजम खान की जुबान बोले राहुल गॉंधी,‘रेप इन इंडिया’ के बाद चड्डी पर पहुँचे

उत्तर प्रदेश में 2017 में विधानसभा चुनाव हुए थे। कॉन्ग्रेस ने सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। चुनाव में औंधे मुॅंह गिरने के बाद यह गठजोड़ टूट गया। लेकिन, अब लगता है कि इस गठजोड़ ने राहुल गॉंधी पर गहरा असर छोड़ा था। यही कारण है कि सपा नेताओं की तरह ही विवादित बयान देने में वे महारत हासिल करते जा रहे हैं।

इस साल जब लोकसभा चुनाव हुए थे तो सपा नेता आजम खान ने अपनी प्रतिद्वंद्वी महिला उम्मीदवार पर निशाना साधते हुए कहा था कि उनकी अंडरवियर का रंग खाकी है। शनिवार (28 दिसंबर 2019) को उसी जुबान में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी भी चड्डी तक पहुॅंच गए। बीते दिनों ही राहुल ने ‘मेक इन इंडिया’ का माखौल उड़ाते हुए कहा था कि ‘रेप इन इंडिया’ बना दिया है।

गुवाहाटी में एक रैली को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने कहा, ”हम बीजेपी और RSS को असम की हिस्ट्री (इतिहास), भाषा, संस्कृति पर आक्रमण नहीं करने देंगे। असम को नागपुर नहीं चलाएगा, असम को RSS की चड्डी वाले नहीं चलाएँगे। असम को असम की जनता चलाएगी।”

उन्होंने कहा, ”असम समझौते की भावना को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए, जिस वजह से शांति आई है।” कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि उन्हें संदेह है कि बीजेपी की नीतियों के कारण असम हिंसा के रास्ते पर लौट रहा है। राहुल गाँधी ने कहा, ”बीजेपी जहाँ भी जाती है, नफ़रत फैलाती है। असम में युवा विरोध कर रहे हैं, अन्य राज्यों में भी विरोध हो रहा है। आप उन्हें क्यों मार रहे हैं? बीजेपी लोगों की आवाज़ नहीं सुनना चाहती।”

उन्होंने कहा,

”ये (NRC और NPR) नोटबन्दी नंबर 2 है। इससे हिन्दुस्तान के गरीबों को बहुत नुकसान होने जा रहा है। नोटबन्दी तो भूल जाइए, ये उससे दोगुना झटका होगा। इसमें हर गरीब आदमी से पूछा जाएगा कि वह हिन्दुस्तान का नागरिक है या नहीं। लेकिन, उनके जो 15 दोस्त हैं उनको कोई दस्तावेज़ दिखाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।”

राहुल गाँधी के इस विवादित बयान पर पलटवार करते हुए राज्यसंभा सांसद और RSS विचारक राकेश सिन्हा ने कहा, ”राहुल गाँधी देश की राजनीति के विमर्श और संस्कृति और भाषा को न्यूनतम स्तर पर ले जा रहे हैं। वे गाली-गलौज वाली भाषा का उपयोग कर राजनीति के स्तर को गिरा रहे हैं। RSS पर उनका बयान इसका ताज़ा उदाहरण है।”

एक ट्वीट में उन्होंने कहा है, “अब ‘चड्डी’ के बाद आगे और किस किस ‘पोशाक’ का नाम लेकर गाली देंगे? ध्यान रखिएगा देश की राजनीति को चाणक्य, चन्द्रगुप्त, गाँधी, लोहिया, दीनदयाल जी जैसे लोगो ने सींचा है।”

वहीं, दूसरी तरफ़ कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी ने लखनऊ में CAA के मुद्दे पर मोदी सरकार को कायर करार देते हुए कहा, “जिन्होंने देशभर में NRC की चर्चा शुरू की वे आज कहते हैं कि चर्चा ही नहीं हुई। यह देश उनको पहचान रहा है। उनकी कायरता को पहचान रहा है। उनके झूठ से उब चुका है।”

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तीन तलाक पीड़िताओं से योगी सरकार ने निभाया वादा, नए साल से 6000 रुपए पेंशन

उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रिपल तलाक पीड़िताओं को नए साल पर बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। योगी सरकार पीड़िताओं को सालाना 6000 रुपए पेंशन देगी।

बता दें मोदी सरकार ने कानून बनाकर ट्रिपल तलाक को गैर कानूनी कर दिया है। कानून बनने के बाद यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी थी। सीएम योगी ने तलाक पीड़िताओं से मुलाकात की थी और पेंशन देने का वादा किया था। हालाँकि, उस समय पीड़ित वर्ग के लिए पेंशन की राशि तय नहीं हुई थी। लेकिन अब वित्त मंत्रालय 6000 रुपए सालाना की राशि तय की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित महिलाओं को 6000 रुपए की सालाना राशि नए साल से मिलनी शुरू हो जाएगी। आँकड़ों के मुताबिक करीब दस हजार महिलाओं को पहले तीन महीने में ही पेंशन की राशि दी जाएगी।

बता दें, एक ओर तीन तलाक कानून पर मजहबी ठेकेदार जहाँ सवाल उठाकर इसे मजहब में हस्तक्षेप करार देने में जुटे हुए थे। वहीं जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में केवल एक साल में ही 270 से ज्यादा तीन तलाक मामले दर्ज हुए हैं। जिनकी पीड़ा को समझते हुए योगी सरकार ने ये फैसला 25 सितंबर को किया था।

उस समय योगी सरकार ने कहा था कि जिन पीड़ित महिलाओं के पास आवास नहीं हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास या फिर मुख्यमंत्री आवास से घर दिया जाएगा। इन परिवारों को प्रधानमंत्री की आयुष्मान योजना या फिर मुख्यमंत्री की आरोग्य योजना से स्वास्थ्य बीमा का लाभ भी दिया जाएगा। इसके अलावा वक्फ संपत्तियों में इन महिलाओं को हक दिलाने के लिए भी योजना बनाने का आश्वासन योगी सरकार ने महिलाओं को दिया था।

बता दें, इस दौरान सीएम योगी ने हिन्दू महिलाओं के अधिकारों को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही थी। उन्होंने कहा था कि शादी के बाद किसी दूसरी महिला से संबंध रखने वाले हिंदू पुरुषों पर भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही हिंदू परित्यक्ता महिलाओं को भी ऐसा ही न्याय दिलाया जाएगा।

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आरती की तरह हाथ घुमा रही थी बेटी तो तोड़ दी टीवी: शाहिद अफरीदी की कट्टरता पर पाकिस्तानी फ़िदा

हाल में ही दानिश कनेरिया के साथ हिंदू होने के कारण पाकिस्तानी क्रिकेट टीम में भेदभाव का मामला सामने आया था। अब पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इसमें अफरीदी हिंदू परंपराओं का अपमान करते नजर आ रहे हैं और वहाँ मौजूद लोग उनकी बातों पर ताली बजा रहे हैं।

वीडियो में शाहिद अफरीदी एक चैट शो में महिला होस्ट के सवालों का जवाब देते रहे हैं। महिला होस्ट उनसे पूछती हैं कि क्या उन्होंने कभी टीवी तोड़ा है? जिसका जवाब वो ‘हाँ’ में देते हैं और आगे कहते हैं कि उन्होंने ऐसा अपनी बेगम में कारण किया।

टीवी तोड़ने के वाकये के बारे में बताते हुए अफरीदी कहते हैं कि पहले स्टारप्लस के ड्रामे बहुत चला करते हैं, तो वे अपनी बेगम को मना करता था कि अगर उन्हें ये सब देखना हो तो वो अकेले में देख लिया करें। अपने साथ बच्चों को न बिठाया करें। वीडियो के शुरू होने के मात्र 30 सेकेंड में ही अफरीदी के हाव-भाव देखकर समझा जा सकता है कि उनकी दिक्कत ये नहीं है कि उनकी बेगम बच्चों के आगे ड्रामा/ सीरियल देख रही हैं। उनकी दिक्कत ये हैं कि वो बच्चों के आगे हिंदुस्तानी सीरियल देख रही हैं।

अफरीदी आगे बताते हैं कि एक बार वो अपने घर में आए, तो अक्शा या अंशा (उनकी बेटियाँ) में से कोई एक टीवी के आगे हाथ घुमाकर कुछ ‘यूँ-यूँ’ कर रही थीं और टीवी पर स्टार प्लस चल रहा था। अब शाहिद के शब्दों पर गौर कीजिए। वे जिसे ‘यूँ-यूँ’ बता रहे उसे हिंदू परंपराओं में ‘आरती’ कहा जाता है।

हैरानी की बात है कि एक देश जहाँ पर हिंदू भले संख्या में कम हों लेकिन रहते हैं और एक व्यक्ति जिसने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के लिए कई बार भारत का दौरा किया, भारतीय ख़िलाड़ियों के साथ रहा, भारतीय कार्यक्रमों में शिरकत की… क्या उसे ‘आरती’ शब्द वाकई नहीं पता होगा। या उसने केवल हिंदू परंपरा को हीन दिखाने के लिए ऐसा किया। वे चाहते अपनी बात को सरलता से भी कह सकते थे। लेकिन शायद उनके अंदर की कट्टरता उन पर हावी हो गई। जो चेहरे के साथ उनके शब्दों में भी दिखी। उन्होंने कहा, “एक तो पता नहीं इंडियन ड्रामे में क्या होता है…यूँ-यूँ…क्या कहते हैं उसे।”

कार्यक्रम में हिंदू परंपरा का मजाक उड़ने पर ताली बजाती पाकिस्तानी आवाम

खैर, बात सिर्फ़ उनके शब्दों की नहीं है। शाहिद अफरीदी ने इस चैट शो में खुद स्वीकारा कि अपनी बेटी को ‘हिंदू परंपरा’ का अनुसरण करता देख उन्हें इतना गुस्सा आया कि उन्होंने कोहनी मारकर अपने घर का टीवी ही तोड़ दिया। इसे सुन शो की होस्ट और वहाँ बैठे पाकिस्तानी दर्शक ताली पीट पीटकर हँसने लगे। इन्हें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि हिंदू परंपरा उनके लिए किसी मजाक से कम नहीं है और उसका ‘विरोधी’ किसी हीरो से।

बता दें , शाहिद अफरीदी और शोएब अख्तर एक ही समय में पाकिस्तानी टीम के दो बड़े नामी खिलाड़ी रह चुके हैं। लेकिन अब दोनों ने ही क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। ऐसे में एक शोएब हैं, जो खुलेआम इस बात को स्वीकारते हैं कि उनकी टीम ने हिंदू ख़िलाड़ियों के साथ बदसलूकी की। वहीं दूसरे अफरीदी हैं जो खुलेआम बताते हैं कि उन्होंने ‘हिंदू परंपरा’ से चिढ़कर अपनी टीवी तोड़ दी।