आज से छः साल पहले पकिस्तान में अवैध तरीके से घुसे भारतीय नागरिक हामिद निहाल अंसारी को मिली तीन साल की सजा 16 दिसम्बर को पूरी हो गई जिसके बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ़ हो गया है।
पकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों का बचाव करते हुए भारतीय सेना के खिलाफ जहर उगला है। हमारी ये रिपोर्ट इमरान खान और पाकिस्तान के दोहरे रवैये को उजागर करती है।
दिल्ली उच्च न्यायलय ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को 1984 सिख दंगों के मामले में दोषी करार दिया है। उन पर लगे दंगे भड़काने की साजिश रचने और भीड़ को उकसाने के आरोप को अदालत ने सही पाया।
थरूर ने कमल नाथ की तुलना प्रधानमंत्री से करते हुए कहा कि जैसे नरेन्द्र मोदी को 2002 दंगों में उनकी भूमिका को लेकर "संदेह का लाभ" मिला है वैसे ही कमल नाथ को भी 1984 दंगों को लेकर मिलना चाहिए।
सोनिया गाँधी के चेन्नई पहुँचने की खबर के फैलते ही तमिलनाडु में लोगों ने ट्विटर पर "गो बैक सोनिया" ट्रेंड कराना शुरू कर दिया। "गो बैक सोनिया" आज ट्विटर के पांच चोटी के राष्ट्रीय ट्रेंड्स में शामिल था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सोनिया गाँधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली को 1100 करोड़ रूपये के परियोजनाओं की सौगात दी। प्रधानमंत्री के तौर पर यह उनका पहला रैबरेली दौरा था।
ये उस विजय गाथा की दास्तान है जिसकी शुरुआत 3 दिसम्बर 1971 को हुई थी और जिसका अंत 16 दिसम्बर 1971 को पाकिस्तान की करारी हार के साथ हुआ। उस दिन के बाद से हर साल हम इस दिन को विजय दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं।
राफेल सौदे पर शीर्ष अदालत ने अपना फैसला देते हुए कहा है कि इस करार में नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है और इस मामले में अदालत द्वारा किसी भी प्रकार की छानबीन की जरूरत नहीं है।
एक अहम बयान देते हुए राफेल सौदे के वक्त फ्रांस के रक्षा मंत्री रहे ली ड्रायन ने ये साफ़ कर दिया है कि इस मामले में उनपर किसी भी प्रकार का कोई दबाव नहीं था।
अदालत ने कहा; "पकिस्तान ने खुद को एक इस्लामिक राष्ट्र घोषित किया लेकिन भारत, जिसे धर्म के आधार पर विभाजित होने के कारण एक हिन्दू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए था- एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना रहा।"
आज 2001 में भारत के संसद भवन पर हुए आत्मघाती हमलों की बरसी है। आज जब पूरा देश उस दिल दहला देने वाले हमले में जान गंवाने वाले जवानों की शहादत को याद कर रहा है, आइये जानते हैं उस दिन आखिर हुआ क्या था।
देश में पांच राज्यों के लिए हुए विधानसभा चुनावों और उसके ताजा परिणामों के बाद एक बार फिर से नोटा (उपर्युक्त में से कोई नहीं) को लेकर बहस छिड़ गई है। ऐसे में इस बात पर चर्चा होना लाजिमी है कि आखिर नोटा से जनता का फायदा है या नुकसान?
पाँचों राज्यों के आंकड़ों को मिला कर देखें तो कुल पंद्रह लाख लोगों ने किसी उम्मीदवार को वोट देने कि बजाय नोटा यानी "उपर्युक्त में से कोई नहीं" का विकल्प चुनना ज्यादा बेहतर समझा। पाँचों राज्यों में नोटा का वोट शेयर 6.3% के आसपास रहा।
चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार कांग्रेस को 114 सीटें आई तो वहीं भाजपा 109 सीटों को अपनी झोली में डालने में कामयाब रही। सपा को एक तो बसपा को दो सीटों से संतोष करना पड़ा।
119 सीटों वाले तेलंगाना विधानसभा में बहुमत के लिए 60 सीटों पर जीत चाहिए होती है लेकिन केसीआर की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति ने 88 सीटों पर जीत का परचम लहरा कर एकतरफा जीत दर्ज किया।
कांग्रेस 99 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाने की स्थिति में आ गई है। हलांकि राजस्थान में कुल 200 विधानसभा सीटें हैं लेकिन इनमे से 199 सीटों पर ही मतदान हुआ था।
कांग्रेस ने कुल 68 सीटों पर जीत का परचम लहराया है वहीं भाजपा के हाथ महज 15 सीटें ही आई। ताजा ख़बरों के अनुसार मुख्यमंत्री रमण सिंह ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है।