मृतका के परिजन भाजपा से जुड़े हैं। उसका शव स्थानीय लोगों ने एक पुलिए के नीचे देखा। शव को जानवरों ने नोंच डाला था। रेप के बाद धारदार हथियार से हत्या कर शव जलाए जाने की आशंका जताई जा रही है।
चीनी प्रशासन गर्भपात को मुस्लिमों के ख़िलाफ़ एक हथियार की तरह इस्तेमाल करता है। उनकी मुस्लिम होने की पहचान को समय से पहले ही मिटाया जा रहा है। उनके बच्चों को पैदा होने से पहले ही मारा जा रहा है।
111 पन्नों की उस रिपोर्ट के 6 पन्ने इतने भयावह दास्तानों से भरे पड़े थे कि पूरा देश उबल पड़ा। यौन शोषण, प्रताड़ना, जानवरों से भी बदतर हालात में रहने की मजबूरी। जिम्मेदार बताए गए 71 अधिकारियों पर गाज गिरेगी या फिर होगी लीपापोती?
पीड़ित छात्र राजनीति शास्त्र विभाग में स्नातक थर्ड इयर का छात्र है। उसे कुछ उपद्रवी छात्रों ने पकड़ लिया और गाली गलौज करने लगे। इसके बाद छात्र अमरेश की जमकर पिटाई कर दी। उसका गुनाह सिर्फ़ इतना था कि उसने सीएए के समर्थन में एक फेसबुक पोस्ट लिखा था।
प्रथमतया सर्दी का मौसम सड़क पर धरना प्रदर्शन के लिए अनुकूल नहीं होता है। सर्दियों का समय समाजवाद के शीतनिद्रा में जाने के लिए उपयुक्त होता है। समाजवादी सौंदर्यशास्त्र के साथ भी सर्दियाँ ठीक नहीं जाती। एक अच्छा वामपंथी कम नहाया हुआ, दाढ़ी बढ़ाया हुआ, महँगा कुर्ता पहन कर ग़रीबों के लिए व्यथित भाव लिए दिखता है।
रजिस्ट्रार ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि जो भी छात्र इन दंगों में शामिल थे और जिन्होंने भी जेएनयू की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया है, उन्हें चिन्हित कर के इस नुकसान की भरपाई की जाएगी। रजिस्ट्रार ने कहा कि दंगाई छात्रों से ही रुपए वसूल कर नुकसान की भरपाई की जाएगी।
अभिनव प्रकाश नाम के यूजर के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए प्रकाश जावड़ेकर ने व्यंगात्मक लहजे में कहा कि ऐसा लगता है न्यूयॉर्क टाइम्स में ही सबसे ज्यादा भक्त हैं। जो हर जगह राम को ढूँढ लेते हैं।
ईकाई अध्यक्ष ने कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा पर प्रदेश में हिंसा फैलाने के लिए वित्तीय मदद करने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि प्रियंका गाँधी प्रदेश में हिंसा भड़काने के लिए दूसरे प्रदेशों के दंगाइयों को ला रही हैं।
दीपिका पादुकोण ने अब तक इस मामले में चुप्पी साध रखी थी लेकिन अब विरोध प्रदर्शन में उन्होंने भाग लिया है। दीपिका पादुकोण की 'छपाक' रिलीज होने जा रही है, जिसमें उन्होंने एक एसिड अटैक पीड़िता का किरदार निभाया है।
बीबीसी की रिपोर्ट्स में हिंदू बनाम मुस्लिम ध्यान रखते हुए एकतरफा पत्रकारिता का फर्क़ पहली बार नहीं झलक रहा। बल्कि यदि बीबीसी की वेबसाइट पर जाकर सर्च बॉक्स में इन दोनों (घूँघट और बुर्का ) शब्दों को टाइप किया जाए तो इनके इस पूरे अजेंडे का खुलासा होता है।
‘लिबरल’ बुलियों ने जोहो के ग्राहकों और कर्मचारियों से कहा कि ‘वे वही करें जो उनका अंतरात्मा कहता है।’’ साथ ही वेम्बू को धमकी भी दी गई कि अगर वे इस लाइन से नहीं हटेंगे, तो उन्हें सोशल बायकॉट का भी सामना करना पड़ेगा।
एक अख़बार से अपनी तुलना किए जाने और ख़ुद को 'सस्ता' बताने के राज के ट्वीट से भड़की स्वरा ने गुस्से में उन्हें भला-बुरा सुनाया। उन्होंने कहा कि राज उन्हें रोल ऑफर करते हैं और अपनी फ़िल्म का ट्रेलर शेयर करने का निवेदन करते हैं। राज ने कहा कि अगली बार फिर रोल ऑफर करूँगा।
सर्वर डैमेज होने को लेकर जेएनयू प्रशासन ने एफआईआर भी दर्ज कराई थी। इसके अगले दिन गुंडे फिर से कम्युनिकेशन सेंटर में घुस गए थे और उन्होंने फिर से कर्मचारियों को भगा कर तकनिकी सिस्टम को तोड़फोड़ डाला था। जाँच में सीसीटीवी फुटेज की अहम भूमिका होगी।
“हमारी सरकार अब तक सत्ता में नहीं थी। लेकिन अब आ गई है। अब मैं मंत्री बन गई हूँ, लेकिन अभी हमें अपनी जेबें भरनी बाकी है।” इस बयान पर कॉन्ग्रेस की ओर से अभी तक कोई टिप्पणी सामने नहीं आई है। न ही सहयोगी पार्टी शिवसेना और एनसीपी की तरफ से कोई बयान सामने आया है।
जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या होने के बाद ईरान ने अमेरिका की सभी सेनाओं को आतंकी घोषित कर दिया है। इसके बाद अब ईरान अपने क्षेत्र के आसपास मौजूद अमेरिकी सेना पर कार्रवाई कर सकता है। ईरानी संसद के मुताबिक, अब पश्चिमी एशिया में.......
जब कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा घायल छात्रों से मिलने एम्स गईं थी, तो उनके समर्थकों ने सबसे पहले घायल छात्रों से यही पूछा कि उनका संबंध किस विचारधारा से है। एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रियंका गाँधी ने कुछ छात्रों को शॉल दी, लेकिन बाद में उनके कार्यकर्ताओं ने शॉल वापस ले ली।
मीना ने 7 जुलाई, 2018 को गुरुग्राम पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज करवाया था। इसमें कहा गया था कि पीटर ने अपनी शादी के बारे में उससे झूठ बोला था और फिर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। मीना ने आरोप लगाया कि पीटर ने शादी का वादा करके उसके साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाए थे।
फोर्ब्स की विश्व के टॉप-20 लोगों की सूची लीक होने के बाद लिबरल गिरोह में फूट पड़ चुकी है। खान मार्केट गैंग का कहना है कि मोदी-शाह ने साजिशन कन्हैया कुमार का नाम सूची में डलवाया है। जबकि रवीश (NDTV वाले) ने कन्हैया पर जात भाई को ही दगा देने का गंभीर आरोप लगाया।
आज सुनवाई के दौरान चारों आरोपितों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया। फ़ैसला आने के बाद दोषियों के वकील ने कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट में क्यूरिटिव याचिका दायर करेंगे। फाँसी का समय सुबह 7 बजे तय किया गया है।
अवॉर्ड वापसी गैंग के मार्गदर्शक मंडल में शामिल मुनव्वर राना को ख़ूब पता है कि दस्तारें बनाने वाले अब पत्थर चलाने लगे हैं। राना अब 'माँ' को छोड़ कर 'मर्दानगी' जाँचने पर उतर आए हैं। उनके अंदर का 'मुसलमान' बिलबिला रहा है। उनका लॉजिक है- मुस्लिम ज़्यादा वफ़ादार हैं क्योंकि उन्हें दफनाया जाता है।
कन्हैया को 22% वोट मिले, इसीलिए वो सूची में हैं। वो 34% वोट से हारे, ये क्यों छिपाया गया? फोर्ब्स की सूची में 8 भारतीयों में से 5 ऐसे हैं, जो पीएम मोदी के आलोचक हैं। इस सूची को किस आधार पर तैयार किया गया है, फोर्ब्स ने नहीं बताया। जो भी मोदी के ख़िलाफ़ बोले, ब्रांडिंग कर दो।
जेएनयू हिंसा को अंजाम देने की वास्तविक बातचीत का दिखावा तो खुद करते हैं और दोष ABVP पर डालते हैं। निश्चित रूप से इस हिंसा से एबीवीपी को तो कोई फायदा नहीं है। किसको है ये आप सभी को पता है? कौन है जो देश में अराजकता, हिंसा और दंगे की स्थिति पैदा करना चाहता है? अब देखना यह होगा कि भारत में अराजकता पैदा करने के लिए कॉन्ग्रेस और वामपंथियों का यह इकोसिस्टम कितनी दूर तक जाएगा?
JNU उपद्रव के बाद मीडिया द्वारा खुद को विक्टिम दिखाना। पुलिस-प्रशासन को विलेन बता, सोशल मीडिया पर लिखना। अगर यही सारे पत्रकार नक्सलियों द्वारा गला रेत लाश टाँगने की रिपोर्टिंग करने गए होते तो खबर गायब हो जाती और प्राइम टाइम होता अर्द्धसैनिक बल वाले सरदार की गाली और रिपोर्टरों की चाशनी में लिपटे प्रोपेगेंडा पर।
वित्तीय वर्ष 2015-16 में जूनियर चिदंबरम दम्पति ने अपनी कुल आय छिपाई थी और टैक्स देने से बचने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए थे। मुत्तुकादु में एक ज़मीन की बिक्री के बाद कार्ति को 6.38 करोड़ रुपए और उनकी पत्नी श्रीनिधि को 1.35 करोड़ रुपए कैश में प्राप्त हुए थे।
इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर एबीवीपी की ओर से हमले में घायल हुए शिवम की कुछ तस्वीरें भी शेयर की गईं। इनमें दावा किया गया कि वामपंथी गुंडों द्वारा किए गए हमले में शिवम के सिर पर, गले पर चोटें आई हैं।
“प्रधानमंत्री मोदी कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाते हैं कि हम पाकिस्तान की भाषा में बात कर रहे हैं, लेकिन यही वो शख्स हैं जिन्होंने खुद को पड़ोसी देश के स्तर तक गिरा लिया है। वह मोहम्मद अली जिन्ना के दो-राष्ट्र सिद्धांत का पालन कर रहे है और भारत के हिंदू जिन्ना के रूप में उभरे हैं।”
दिल्ली पुलिस ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से शिकायत मिलने के बाद 2 एफआईआर दर्ज की हैं। इन एफआईआर में जेएनयू छात्र संघ प्रेसिडेंट आइशी घोष के साथ ही 19 अन्य छात्रों के नाम शामिल हैं। पुलिस जल्द ही इन छात्रों को पूछताछ के लिए बुलाएगी।
"प्रदर्शनकारियों की वजह से सड़कें अवरुद्ध हो रही थीं और आम लोगों एवं पर्यटकों को परेशानी हो रही थी। हमने प्रदर्शनकारियों से बाहर निकलने के लिए कई बार अपील की थी। अब उन्हें आजाद मैदान में स्थानांतरित कर दिया है।"
FREE KASHMIR बैनर को लेकर उठे बवाल पर मुख्यमंत्री भले अब तक शांत हैं लेकिन उनके 'संजय' ने मुँह खोल दिया है। संजय राउत की सफाई यह है - "जिन्होंने यह बैनर थामा था, उनका मकसद कश्मीर में फ्री इंटरनेट, फ्री मोबाइल सर्विसेज और अन्य प्रतिबंधों से है।"
न्यूजलॉन्ड्री के एक पूर्व कर्मचारी ने CEO अभिनंदन सेखरी के बारे में कहा कि हिन्दुओं पर हुए अपराधों को दबाना, मुसलमानों पर हुए अपराधों में 'हिन्दू कनेक्शन' निकालना, सहकर्मियों को गाली देना, चिल्लाना और आम आदमी पार्टी के लिए अजेंडा चलाना, सेखरी का SoP है।
न्यूज़लांड्री ने जिस डॉक्टर के बयान के आधार पर दावा किया कि एबीवीपी वालों के चोट फ़र्ज़ी हैं, वो 'रावण' का डॉक्टर निकला। वो कॉन्ग्रेस का पदाधिकारी भी है। मोदी-शाह के ख़िलाफ़ ज़हर उगलता रहता है। उसके बयान को 'मेडिकल एक्सपर्ट' का बयान बना कर पेश किया गया।
गीता कुमारी और आइशी घोष- इन दो नामों को याद रखिए। महिला होकर इन दोनों के नकाबपोश गुंडों ने महिलाओं के साथ बदतमीजी की। यही वामपंथी महिलाधिकार का झंडा लेकर कैंडल मार्च निकालते हैं। जेएनयू हिंसा में दोनों वामपंथियों का अहम रोल दिख रहा है।
अकादमी क्रियाकलाप में हज़ारों छात्रों ने भाग लिया, इससे वामपंथी बौखला गए। सीएए पर BJP 3 करोड़ घरों में पहुँच रही है, इससे उन्हें तगड़ा झटका लगा। जेएनयू में हुई हिंसा के पीछे जितने भी फैक्टर्स हैं, उन सबके बारे में समझिए। देखिए लेफ्ट इकोसिस्टम ने कैसे अफवाहें फैलाई।
कॉन्ग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान दोनों एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि नरेंद्र मोदी और इमरान खान एक साथ हैं और यही कारण है कि यह सब हो रहा है।"
NDTV अब भले ही वामपंथियों को ख़ुश करने के लिए भाजपा व एबीवीपी को इस हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए 1000 लेख लिखे, डैमेज हो चुका है। वो कहते हैं न, सच छिपाए नहीं छिपता। शायद एनडीटीवी पर यही कहावत फिट बैठती है। वामपंथी 'अपने' ही चैनल से निराश हैं।
सोशल मीडिया यूजर्स ने भी इसी तरह फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्टिंग की आलोचना की है और इस तरह के लेखों को बरगलाने वाला बताया है। लोगों का कहना है कि फाइनेंशियल टाइम्स जैसे मीडिया सिर्फ़ आग में घी डालने का काम करते हैं, आखिर उन्हें कैसे पता कि नकाबपोश राष्ट्रवादी थे? ऐसे संस्थानों के ख़िलाफ़ एक्शन लिया जाना चाहिए।
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा मुखिया अखिलेश यादव ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की है। अखिलेश मारे गए मो. वकील अहमद के परिजनों से मिलने पहुँचे और संवेदना व्यक्त की।
शेफ अतुल कोचर को बर्खास्त किए जाने के बाद वामपंथियों का काम खत्म हो गया। वो इसे भूलकर अपने अगले टारगेट के लिए निकल पड़े, लेकिन यह घटना कोचर के लिए काफी मुश्किल भरा समय रहा। पिछले साल अगस्त में प्रकाशित एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें और उनके परिवार को उनके एक ट्वीट की वजह से मुश्किल हालातों का सामना करना पड़ा था।
मुंबई का गेटवे ऑफ इंडिया। रात के 2:15 बजे। विरोध-प्रदर्शन करती भीड़। और 18 सेकंड का विडियो। इसमें 'हिंदुओं से आजादी' का नारा लगा या नहीं - इस पर बवाल। आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा। पुलिस अब जाँच करेगी। लेकिन आप खुद भी सुन कर फैसला कर सकते हैं कि...
"इन हमलों की वजह से देश की छवि पूरी दुनिया में खराब हो रही है। इन गुंडों को आंतकवादी कहना चाहिए, क्योंकि वे भी मुँह छिपाकर ही आते हैं। इस पर तय समय के अंदर कार्रवाई होनी चाहिए, वरना विदेश के छात्र यहाँ पढ़ने नहीं आएँगे।"
मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि चुनाव सिंगल फेज में होगा और इसके लिए 14 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी होगा। नॉमिनेशन की अंतिम तिथि 21 जनवरी होगी और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 24 जनवरी रखी गई है।
रात में जितना भी बवाल होता है, जितनों को चोट लगती है - सबका आरोप ABVP के ऊपर मढ़ दिया जाता है। और खुद JNUSU प्रेसिडेंट की सर फटी तस्वीर से नैरेटिव फिट भी बैठ रहा था वामपंथियों का... लेकिन ट्विस्ट आता है 2 वीडियो के जरिए। एक में भीड़ द्वारा छात्र-छात्राओं को पीटा जाना, दूसरे में मास्क पहने या मुँह ढँकी भीड़ के साथ खुद JNUSU प्रेसिडेंट का होना।
पुलिस को पूरे मामले पर जानकारी दी गई। लेकिन पुलिस के घटनास्थल पर पहुँचने से पहले ही ये छात्रों का समूह अपना उत्पात मचा चुका था। कई शांत छात्रों को उनके कमरों में घुसकर मारा गया था और कई शिक्षकों पर भी हमले हुए थे। सुरक्षाकर्मियों के भी इस हमले में घायल होने की खबर है।
जब जामिया में पुलिस घुसी थी, तो इन्होने ही पुलिस की निंदा की थी। आज ये पूछ रहे हैं कि जेएनयू में पुलिस क्यों नहीं घुसी? कल जब वामपंथी दंगाइयों को गिरफ़्तार किया जाएगा, मीडिया उनके परिवार का इंटरव्यू लेगा और उन्हें निर्दोष बताएगा। दिल्ली पुलिस ही बलि का बकरा क्यों बने?
दिल्ली पुलिस ने जामिया मिलिया इस्लामिया मेट्रो स्टेशन से 34 वर्षीय आमिर हमजा खान नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि आमिर दिल्ली के जाकिर नगर का रहने वाला है। उसे सीआईएसएफ द्वारा जामिया मिलिया इस्लामिया मेट्रो स्टेशन के फ्रिस्किंग पॉइंट पर एक पिस्टल और 5 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया गया है।
इंटरनेशनल नंबरों से व्हाट्सप्प ग्रुप में घुस कर ABVP के नाम पर बातचीत की गई। छात्र-छात्राओं को कॉल कर के धमकियाँ और गालियाँ दी जा रही हैं। वेलेंटिना ने बताया कि शॉल के अंदर पत्थर छिपा कर आए उपद्रवियों ने डंडों से भी हमला किया। रजिस्ट्रेशन रोकने के लिए ऐसा किया गया।
यह हमला बगदाद में एयरपोर्ट पर अमेरिकी रॉकेट हमले में ईरान के कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत के बाद हुआ है। बगदाद स्थित ग्रीन ज़ोन में लगातार यह दूसरा हुआ हमला है। इससे पहले, शनिवार की रात को भी रॉकेट से अमेरिकी दूतावास और एयरबेस पर रॉकेट से हमला किया गया था।
सोशल मीडिया पर वामपंथी गिरोह के लोगों द्वारा रिपब्लिक टीवी को केंद्र सरकार का गुणगान करने वाले चैनल के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। ऐसे में इस चैनल के रिपोर्टर को देखकर जेएनयू प्रदर्शनकारी के द्वारा माँ की गाली देना वामपंथियों के विरोध से ज्यादा मोदी व हिंदू घृणा दर्शाती है।
क्या नकाबपोश गुंडी और शाम्भवी, दोनों एक ही हैं? सच जानने के लिए हमें दोनों तस्वीरों को बारीकी से देखना चाहिए। दोनों की शारीरिक बनावट एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है। शर्ट का चेक पैटर्न भी अलग। जूते से लेकर कलावा तक में अंतर - लेकिन प्रोपेगेंडा फैलाना ही एकमात्र काम हो तो कोई क्या करे!