एक बात साफ है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले हुए विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इसके बाद आम चुनाव में जिस तरह मोदी लहर चली, उससे हर कोई वाकिफ है।
बीजद ने नब किशोर दास के निधन के बाद उनकी बेटी दीपाली दास पर भरोसा जताते हुए प्रत्याशी बनाया था। पार्टी के विश्वास पर खरा उतरते हुए दीपाली ने जीत के मामले में अपने पिता को भी पीछे छोड़ दिया।
कॉन्ग्रेस का वोट प्रतिशत लगभग 5% बढ़ा है, वहीं जेडीएस को 5% वोटों का नुकसान झेलना पड़ा है। यानी, जेडीएस का जितना नुकसान हुआ है कॉन्ग्रेस को उतना ही फायदा मिला है।
जालंधर लोकसभा उपचुनाव में AAP प्रत्याशी लगातार कॉन्ग्रेस उम्मीदवार से हजारों वोटों की लीड में रहे। ये सीट कॉन्ग्रेस सांसद संतोख सिंह के निधन के बाद खाली हुई थी।
रिपोर्ट बता रही हैं कि कर्नाटक में रुझान देखने के बाद कॉन्ग्रेस को MLA बिकने का डर सताने लगा। इसीलिए उन सबको फ्लाइट से बेंगलुरु में इकट्ठा किया जा रहा है। वहाँ उनके लिए रिजॉर्ट बुक है।
कर्नाटक चुनाव को लेकर जैसे दावे दिल्ली की मीडिया में रहे हैं, उसका समर्थन एग्जिट पोल्स के नंबर्स नहीं करते। क्या 13 मई को एक बार फिर पोल पंडित गलत साबित होंगे?
परमबीर सिंह पर जबरन वसूली और भ्रष्टाचार समेत कई आरोप लगे थे। उनके साथ 6 पुलिस अधिकारियों एवं अन्य के खिलाफ जुलाई 2021 में रंगदारी का मुकदमा भी दर्ज हुआ था।
आपने 'The Kerala Story' में 'आसिफा' को देखा? 2016 में गिरफ्तार यास्मीन मोहम्मद ज़ाहिद ने 6 महिलाओं और 3 बच्चों समेत केरल के 22 लोगों को ISIS में भर्ती कराया था।