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कोलकाता में RSS कार्यकर्ता को मारी गोली, TMC के मंत्री ने कहा था- ये मिनी पाकिस्तान है

पश्चिम बंगाल में भाजपा और संघ कार्यकर्ताओं पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। राजधानी कोलकाता स्थित मेटियाब्रुज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यकर्ता पर हमला हुआ। पीड़ित वीर बहादुर सिंह सरकारी शिक्षक हैं और आरएसएस से जुड़े हैं। सोमवार (दिसंबर 2, 2019) को जब वे स्कूल में पढ़ाने जा रहे थे, तब उन पर हमला किया गया। हमलवारों ने दिनदहाड़े उन पर गोली चलाई। ये गार्डन रीच क्षेत्र का हिस्सा है।

बता दें कि मेटियाब्रुज वही इलाक़ा है, जिसे तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक मंत्री ने ‘मिनी पाकिस्तान’ करार दिया था। एक पाकिस्तानी पत्रकार को मेटियाब्रुज के बारे में बताते समय ममता बनर्जी के मंत्री फरहाद हाकिम ने बताया था कि गार्डन रीच वाला इलाक़ा कोलकाता का ‘मिनी पाकिस्तान’ है। उन्होंने ‘द डॉन’ के पत्रकार से कहा था- “आइए, आपको मिनी पाकिस्तान की सैर कराता हूँ।” ये वही इलाक़ा है, जहाँ अवध के आखिरी नवाब वाज़िद अली शाह ने अपनी ज़िंदगी के अंतिम 30 वर्ष गुजारे थे।

आरएसएस कार्यकर्ता व शिक्षक वीर बहादुर सिंह गोली लगने से घायल हो गए हैं। गोली उनके पीठ पर लगी है, जिसके बाद वो अस्पताल में भर्ती हैं। चुनाव के दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी को वोट देने की अपील की थी। उनका ‘नमो टीशर्ट’ पहले हुए एक फोटो वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है कि भाजपा को समर्थन करने के कारण उन पर गुंडों ने हमला किया है। आक्रोशित भाजपा कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर रोष व्यक्त किया। गौरतलब है कि राजनीतिक हिंसा के लिए कुख्यात बंगाल में भाजपा समर्थकों को निशाने बनाने की कई घटनाएँ हाल में सामने आई है। ज्यादातर में आरोपित सत्ताधारी टीएमसी से जुड़े बताए जाते हैं।

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पाकिस्तानी फौज दो फाड़: आर्मी चीफ बाजवा के खिलाफ 7 लेफ्टिनेंट जनरल, सेवा विस्तार पर रोक का किया समर्थन

पाकिस्तान आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा के खिलाफ उनकी ही सेना के सात लेफ्टिनेंट जनरल ने मोर्चा खोल दिया है। इन लेफ्टिनेंट जनरलों ने बाजवा के सेवा विस्तार पर सुप्रीम कोर्ट के रोक का समर्थन किया है। इसके कारण पाकिस्तानी फ़ौज दो फाड़ होती दिख रही है। फ़ौज में विद्रोह के हालात बन गए हैं। इमरान खान की सरकार ने आर्मी चीफ जनरल बाजवा को तीन साल का सेवा विस्तार दिया था। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस आसिफ सईद खोसा ने इस पर रोक लगाते हुए फिलहाल महज 6 महीने के सेवा विस्तार की अनुमति दी है।

जिन अफसरों ने पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया है, उनमें मुल्तान कॉर्प्स के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल सरफराज सत्तार, लेफ्टिनेंट जनरल नदीम रजा, लेफ्टिनेंट जनरल हुमायूँ अजीज, लेफ्टिनेंट जनरल नईम अशरफ, लेफ्टिनेंट जनरल शेर अफगान और लेफ्टिनेंट जनरल काजी इकराम शामिल हैं।  

लेफ्टिनेंट जनरल सरफराज सत्तार को लेफ्टिनेंट जनरल बाजवा के रिटायर होने पर आर्मी चीफ का सबसे बड़ा दावेदार बताया जा रहा था। लेकिन पाकिस्तान सरकार द्वारा बाजवा को सेवा विस्तार देने के बाद कथित तौर पर उन्होंने इस्तीफा दे दिया। इस तरह वो पूरी तरह से आर्मी चीफ की रेस से बाहर हो गए हैं। बताया जाता है कि सत्तार की कुछ हफ्ते पहले बाजवा के साथ बहस भी हो गई थी। उन्होंने बाजवा पर पाकिस्तान आर्मी की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया था।

वहीं बाजवा को 3 साल सेवा विस्तार देने के फैसले का असर दूसरे जनरलों पर भी पड़ा है और यही कारण है कि अब इन अफसरों ने एकसाथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया है। बता दें कि सत्तार मिलिटरी इंटेलिजेंस चीफ, इन्फेंट्री स्यालकोट कमांडिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

जानकारी के मुताबिक जनरल (रिटायर्ड) राहिल शरीफ ने आर्मी चीफ के पद से रिटायरमेंट के पहले उनकी जगह लेने वालों में सत्तार का भी विकल्प दिया था। अगर बाजवा नियम के मुताबिक रिटायर हो जाते तो अभी उनकी जगह सत्तार पाकिस्तान के आर्मी चीफ होते, क्योंकि नियम के अनुसार  29 नवंबर को ही बाजवा को आर्मी चीफ के पद से रिटायर हो जाना चाहिए था। 

पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक अली सलमान अदानी ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, “यदि बाजवा को तीन साल का सेवा विस्तार मिल जाता है तो मौजूदा वरिष्ठ जनरलों के आर्मी चीफ बनने की संभावना खत्म हो जाएगी। अगले महीने रिटायर होने जा रहे जस्टिस खोशा ने जनरल बाजवा को छह महीने का विस्तार देकर गेंद को संसद के पाले में डाल दिया है।” उन्होंने बताया कि यकीनन जनरल बाजवा पाकिस्तान में सर्वशक्तिमान हैं, लेकिन ऐसे कई लोग और भी हैं।

‘अधीर रंजन चौधरी को माफी माँगनी ही पड़ेगी’: मोदी-शाह को बताया था घुसपैठिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को घुसपैठिया बताने वाले बयान को लेकर लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी की मुश्किले बढ़ गई है। संसदीय कार्य मंत्री प्रहृलाद जोशी ने कहा कि उन्हें बिना शर्त तत्काल माफी मॉंगनी पड़ेगी। बीजेपी ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है।

बता दें कि अधीर रंजन चौधरी ने एनआरसी मुद्दे को लेकर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था, “हिंदुस्तान सबके लिए है। ये हिंदुस्तान किसी की जागीर है क्या? सबका समान अधिकार है। अमित शाह, नरेंद्र मोदी खुद घुसपैठिए हैं। घर गुजरात है और दिल्ली आ गए। वे खुद माइग्रेंट हैं।” इससे पहले अमित शाह ने कहा था कि एनआरसी को पूरे देश में लागू किया जाएगा।

कॉन्ग्रेस नेता ने पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा था, “वे दिखाना चाहते हैं कि मुस्लिमों को भगाएँगे। मुस्लिम को भगाने की उनकी हिम्मत नहीं है। मुस्लिम हमारे देश का नागरिक है, भागेगा क्यों? हिंदुस्तान सबके लिए है, हिंदू के लिए है, मुस्लिम के लिए है। गंगा-जमुनी तहजीब का हिंदुस्तान है। हिंदुस्तान सबके सहयोग से बना है, लेकिन वे दिखाना चाहते हैं कि हम हिंदू को रखेंगे और मुस्लिमों को भगा देंगे।”

उल्लेखनीय है कि अधीर रंजन चौधरी इससे पहले भी कई विवादित बयान दे चुके हैं। हाल ही में जम्मू-कश्मीर का दौरा करने वाले यूरोपीय यूनियन के सदस्यों को उन्होंने “किराए का टट्टू” कहा था। कई सांसदों ने अधीर रंजन के इस बयान का विरोध किया था। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी अधीर रंजन के इस बयान को जाँचने की बात कहते हुए कहा था कि ज़रूरत पड़ी तो इसे लोकसभा कार्रवाई के रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा। इतना ही नहीं, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को लेकर लोकसभा में बहस के दौरान उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय मसला तक बता दिया था।

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BHU प्रशासन को दी गई मुहलत समाप्त: उच्च स्तरीय जाँच की माँग के साथ छात्रों ने लगाए ये आरोप

काशी हिन्दू विश्विद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति की उच्च स्तरीय जाँच ने परिसर में जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। धरना समाप्त होने के बाद भी छात्रों का आंदोलन अनवरत जारी है। इस बीच आज विश्विद्यालय प्रशासन द्वारा छात्रों से माँगी गई 10 दिन की समय सीमा भी समाप्त हो गई है। आज छात्र संकाय प्रमुख के पास अपनी माँगों के लिखित जवाब के लिए 12 बजे से संकाय का घेराव कर रहे हैं। प्रशासन क्या जवाब देता है ये अभी देखना बाकी है। एकतरफ समुचित जवाब न मिलने पर छात्र एक बड़े आंदोलन के लिए तैयार हैं तो वहीं प्रशासन भी इस पूरे मुद्दे को सुलझाने की तरफ लगा है लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट जवाब प्रशासन की तरफ से नहीं आया है।

लगातार धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए जागरूक शंकराचार्यों, पूर्व प्रोफेसरों, काशी विद्वत परिषद से लेकर तमाम विद्वानों, संतो-महंतों द्वारा इस नियुक्ति के खिलाफ और मालवीय मूल्यों के संरक्षण के लिए मुखर विरोध दर्ज कराते हुए सभी छात्रों के समर्थन और नियुक्ति रद्द करने से लेकर इस पूरे मामले के समाधान के लिए विश्विद्यालय के विजिटर महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को कई पत्र लिखे गए हैं। हाल ही में संकाय के छात्रों ने भी अपनी तरफ से प्रधानमंत्री मोदी और मानव संसाधन मंत्रालय को पत्र लिखा

ऐसे में बीएचयू में 7 दिसंबर को होने वाली कार्यकारिणी परिषद की बैठक को अहम माना जा रहा है। हालाँकि, अभी यह तय नहीं हो पाया है कि बैठक दिल्ली में होगी या बीएचयू परिसर में, लेकिन ऑपइंडिया सूत्रों के अनुसार बैठक में आगामी 23 दिसंबर को होने वाले विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पदक, उपाधि, मुख्य अतिथि के नाम सहित संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति पर चर्चा अहम एजेंडा है।

फिरोज खान नियुक्ति रद्द करने और इसकी उच्च स्तरीय जाँच लिए छात्रों ने चलाया हस्ताक्षर अभियान

BHU एक्ट व मालवीय मूल्यों के विपरीत संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में हुई ग़ैर हिन्दू की नियुक्ति को रद्द व उच्चस्तरीय जाँच कराने के लिए जारी आंदोलन के तहत कल (1 दिसंबर,2019) को दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक सिंह द्वार पर व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाया गया।

जिसकी शुरुआत दंडी स्वामी परमहंस देव जी के द्वारा की गई। धर्म विज्ञान संकाय के छात्रों के समर्थन में आंदोलन को गति देते हुए हस्ताक्षर अभियान का शुभारम्भ किया। दंडी स्वामी ने ऑपइंडिया से हुई बातचीत में कहा, “संविधान भी धर्म विशेष संस्थानों के लिए विशेष अधिकार प्रदान करता है और वह अधिकार सभी को मिलना चाहिए। संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय को भी विशेष अधिकार प्राप्त हैं किन्तु जानकारी के अभाव में प्रशासन द्वारा भूल हुई है इसलिए अपनी गलती स्वीकार करते हुए उसे सुधार करने का प्रयास करना चाहिए।”

परिसर स्थित मंदिरों में पूजा-अर्चना से विजय श्री का लिया आशीर्वाद

इससे पहले धर्म विज्ञान संकाय में हुई गैर हिन्दू की नियुक्ति के विरोध में चले 15 दिन तक धरने के बाद कार्यवाही के लिए माँगे गए 10 दिन के समय मे दसवें दिन के आंदोलन में मालवीय मूल्यों व धर्म की रक्षा के लिए SVDV के छात्रों द्वारा BHU परिसर स्थित ग्राम देवताओं का पूजन किया गया।

बता दें कि महामना मदन मोहन मालवीय जी का हिन्दू धर्म और सनातन पद्धतियों के संरक्षण के प्रति विशेष ध्यान था जिसका सबूत परिसर में एक विशेषीकृत संस्थान SVDV के साथ ही एक मुख्य मंदिर विश्वनाथ मंदिर के अलावा कई अन्य छोटे बड़े पचासों मंदिरों की स्थापना है। जिनमें पूजा का संचालन धर्म विज्ञान संकाय ही देखता आ रहा है। यहाँ एक और और बात बताना जरुरी है कि मालवीय जी के अंतिम समय में विश्वनाथ मंदिर का काम पूरा नहीं हुआ था तो कहते हैं कि अपने मृत्यु से पहले उन्होंने दानदाताओं खासतौर से बिरला जी से यह वादा लिया था कि उनके मरने के बाद भी किसी भी हालत में मंदिर का निर्माण न रुके। आज परिसर में एक भव्य मंदिर मौजूद है। एक और बात BHU स्थित विश्वनाथ मंदिर से पहले धर्म विज्ञान संकाय ही मंदिर था, उसकी संरचना भी मंदिर की तरह है और वहीं से पूरे विश्व में हिन्दू मत के हर विवादों का अंतिम समाधान भी निकलता है। वहाँ से निकलने वाला विश्व पञ्चाङ्ग तो धरोहर ही है। इसके अद्वितीय होने का एक प्रमाण ये भी है कि ऐसा पहला संस्थान भी है जिसके बाहर दानकर्ता बिरला की प्रणाम मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है जो सनातन धर्म की इस शिखरशाला को प्रणाम कर रहे हैं।

अपने इसी परंपरा के संरक्षण के लिए समर्पित यह छात्र सिर्फ संस्कृत साहित्य नहीं पढ़ते वे जिन पूजा पद्धतियों, मन्त्रों, कर्मकांडों, वेद, पुराण, उपनिषद आदि में पारंगत हैं इसकी बानगी उनके यज्ञ-हवन और मंत्रोच्चार प्रधान धरने के साथ ग्रामदेवता की पूजा में भी झलका। जिसे आप नीचे वीडियो में देख सकते हैं। ग्राम देवता के पूजा का आयोजन देवताओं से इस आंदोलन हेतु विजय श्री के आशीर्वाद के साथ ही परिसर की शांति और ऊर्जा पुनः बहाल करने के लिए भी थी।

पूजा का प्रारंभ रुइया छात्रावास स्थित रुइयेश्वर महादेव मंदिर से प्रारम्भ होकर आयुर्वेद संकाय के रसेश्वर महादेव, कला संकाय के अकेला बाबा, शॉपिंग सेंटर के देवी कोटमाता, त्यागराज कालोनी के बाल हनुमान, कृषि विज्ञान के बड़े करमन बाबा, छोटे करमन बाबा, राम दरबार, शिव जी व राधाकृष्ण, काशी विश्वनाथ मंदिर, सीर गेट स्थित चौरा माता, केंद्रीय कार्यालय के नवीन भवन स्थित बचाउ अखाड़ा बीर हनुमान मंदिर, 1871 में स्थपित गुल्लू बीर बाबा, नागार्जुन छात्रावास स्थित हनुमान मंदिर, मालवीय भवन में मेहमान, सर सुंदरलाल हॉस्पिटल स्थित हनुमान व राम मंदिर, हॉस्पिटल के छोटे गेट पर स्थित संकट हरण महादेव मंदिर, BHU ट्रामा सेंटर स्थित दैत्रा बीर बाबा व BHU स्थापना स्थल स्थित माता सरस्वती मंदिर में पूजन अर्चन के साथ समाप्त हुआ।

हालाँकि, अब वहाँ धर्म और इसकी मान्यताओं का किस कदर क्षरण हो रहा है इसकी बानगी BHU के स्थापना स्थल पर स्थित सरस्वती मंदिर बंद के होने से छात्रों को गेट पर ही पूजा करना पड़ा। छात्रों ने बताया कि मौके पर साइकिल स्टैंड के कर्मचारियों से जब पूछा गया तब उसने बताया कि सुबह पूजा होने के बाद हमेशा मंदिर बन्द ही रहता है। तो ये हाल हो चुका है वहाँ के कई मंदिरों में पूजा पाठ का, शायद ये सब इसलिए भी हो रहा है कि JNU के प्रोफ़ेसर कुलपति राकेश भटनागर का न हिन्दू धर्म से कोई लगाव है और न सनातन परम्पराओं से, धर्म विज्ञान के छात्रों सहित वहाँ के आचार्यों का भी कहना है कि कई बार बुलाने के बाद भी कुलपति अपने आवास के ठीक बगल में स्थित मालवीय भवन के किसी भी धार्मिक आयोजन में जाना उचित नहीं समझा। न कभी गीता पाठ में गए, कहीं गलती से या मजबूरी में नजर भी आए तो मन मारकर कोरम पूरा करते हुए।

SVDV के छात्रों का कहना है कि जिस समय छात्र स्थापना स्थल के मंदिर में पहुँचे उस समय शाम के 6 बज रहे थे और यह समय मंदिर में आरती का होता है। जब छात्रों ने चीफ प्रॉक्टर ओपी राय को फोन किया तो उन्होंने मीटिंग में होने की बात बोलकर टाल दिया। 1 घंटा रहने के बाद भी वहाँ कोई नहीं आया। छात्र इससे बहुत नाराज हुए लेकिन जहाँ सेक्युलर होने का भूत चढ़ा हो वहाँ ऐसी परम्पराओं और इन्हे जीने वाले छात्रों के लिए समय कहाँ है। शशिकांत मिश्र ने ऑपइंडिया से बात करते हुए, कई सवाल पूछे पर जवाब हमारे पास नहीं था जिसके पास है उसे इन मूल्यों-परम्पराओं से कोई लगाव नहीं तो उसके संरक्षण की बात ही दूर रही। जिसकी बानगी हम धर्म संकाय में डॉ. फिरोज की नियुक्ति की आड़ में देख चुके हैं। शशिकांत मिश्र ने प्रशासन से कई सवाल पूछा, “विद्या मंदिर में विद्या की देवी के साथ इस तरह से लापरवाह बना हुआ है प्रशासन। क्या इसी तरह अपने इतिहास को संरक्षित करेगा BHU? क्यों दिन भर नहीं खुलता मंदिर? कौन है इसका जिम्मेदार?? किसके ऊपर इनके रख रखाव की जिम्मेदारी है?” छात्र अभी भी जवाब के इंतजार में हैं पता नहीं उन्हें कब जवाब मिलेगा प्रशासन देगा भी या नहीं ये भी नहीं कहा जा सकता।

स्थापना स्थल स्थित मंदिर का गेट बंद होने से बाहर पूजा करते SVDV के छात्र

कार्यक्रम के समापन पर वहाँ पर उपस्थित पूर्व छात्र व छात्र परिषद के पूर्व सदस्य डॉ.मुनीश मिश्र ने पुनः अपनी बात रखते हुए इस बात को दोहराया, “अभी भी भ्रम फैलाया जा रहा है कि छात्र डॉ. फ़िरोज़ का विरोध कर रहे है। प्रशासन से नियुक्ति में धर्म विज्ञान संकाय के नियमों की जो अनदेखी की गई उसके सुधार हेतु प्रशासन का विरोध कर रहे हैं। जिसने दर-दर चंदा माँगकर इतने बड़े विश्वविद्यालय को बनवाया क्या उसके द्वारा बनाए गए नियमों का पालन प्रशासन को नहीं करना चाहिए? मालवीय जी ने कुछ सोच समझकर ही इस संकाय के लिए विशेष व्यवस्था बनाई होगी, अतः उसका हर हाल में पालन करना चाहिए। एक छोटी सी चूक की वजह से प्रशासन ने जो विश्विद्यालय की गरिमा व महामना के सम्मान को ठेस पहुँचाई है इतिहास कभी उन लोगों को माफ नहीं करेगा जो लोग इसके जिम्मेदार हैं। प्रशासन चाहता तो आसानी से इस समस्या का समाधान कर देता किन्तु झुकना नहीं चाहता था इसी वजह से इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया। हमें आंदोलन के लिए उतरना पड़ा। अभी भी समय है प्रशासन को जल्दी से सुधार कर लेना चाहिए। ताकि संकाय में सुचारु रूप से पठन-पाठन का आरम्भ हो।

हस्ताक्षर सहित ग्राम देवता पूजन में अभियान में प्रमुख भूमिका निभाने वाले शशिकांत मिश्र ने कहा, “सभी प्रपत्रों व हस्ताक्षरों को राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के पास उच्चस्तरीय जाँच कराने के लिए प्रधानमंत्री और मानव संसाधन मंत्रालय को के साथ ही राष्ट्रपति को भी भेजा जाएगा।” उक्त अवसर पर आनंद मोहन झा, शुभम तिवारी, चक्रपाणी ओझा, अभिषेक, प्रिंस, सहित बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

अभी डॉ. फिरोज खान के स्तर पर क्या चल रहा है BHU में

डॉ. फिरोज खान ने SVDV के छात्रों के विरोध के बीच आयुर्वेद संकाय में इंटरव्यू दिया था जिसमें ऑपइंडिया सूत्रों के अनुसार उनका चयन हो गया है लेकिन अभी आधिकारिक रूप से प्रशासन द्वारा कुछ नहीं कहा गया है। साथ ही कार्यकारिणी की बैठक से पहले डॉ. फिरोज खान का एक और इंटरव्यू कला संकाय के संस्कृत विभाग में है। जिसका इंटरव्यू 4 दिसंबर को होना है।

कला संकाय के संस्कृत विभाग में एक सीट पर 13 दावेदार

बीएचयू कला संकाय के संस्कृत विभाग में 4 दिसंबर को होने वाले साक्षात्कार में मौजूद अभ्यर्थियों की संख्या और मेरिट को देखते हुए यहाँ सफलता पाना फिरोज खान के लिए किसी बहुत बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा। ऐसा इसलिए कि ओबीसी के तीन पदों के लिए मेरिट सूची में 39 अभ्यर्थियों का नाम शामिल हैं। एक ही नंबर पर 12 से लेकर पाँच अभ्यर्थी हैं। लिहाजा, साक्षात्कार का परिणाम रोचक होगा। मेरिट सूची में डॉ. फिरोज खान का नाम भी 11वें स्थान पर शामिल हैं।

कला संकाय के संस्कृत विभाग में इंटरव्यू का लिस्ट

बता दें कि कला संकाय के संस्कृत विभाग के तीन ओबीसी और एक एसटी पद के लिए 216 लोगों ने आवेदन किया था। ओबीसी के तीन पदों के सापेक्ष सर्वाधिक 180, जबकि एसटी के एक पद पर 36 आवेदन आए थे। आवेदनों की जाँच और प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बाद साक्षात्कार के लिए जो मेरिट सूची तैयार की गई है, उसमें ओबीसी के लिए 39 और एसटी के लए 10 अभ्यर्थियों के नाम शामिल किए गए हैं।

खैर, इस पूरे आंदोलन के साथ ही BHU प्रशासन और कुलपति के निर्णय पर निगाहें सभी की टिकी हुई हैं। बेशक इस बीच डॉ. फिरोज खान की तरफ से एक बयान जारी कर प्रशासन ने अपील की कि उनके बारे में कोई झूठी बात न फैलाई जाए इससे वो हर सुबह आहत हो रहे हैं, उन्हें गहरा आघात लग रहा है। हालाँकि इस बीच जॉइंनिंग के बाद भी धर्म विज्ञान संकाय में उन्होंने प्रवेश की कोई कोशिश नहीं की है। छात्रों को आशंका थी कि शायद प्रशासन उन्हें शनिवार या आज सोमवार को SVDV ले आए लेकिन ऐसा नहीं हुआ अभी तक और ऐसे में अब सभी आगे की कदम की तरफ नजर बनाए हुए हैं।

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आप पत्रकार नहीं, दलाल हैं… वह सवाल जिसका जवाब सुन बरखा दत्त बगले झाँकने लगी

हाल ही में सम्पन्न हुए मंगलुरु लिट फेस्ट में न्यूज़ एजेंसी ANI की संपादक स्मिता प्रकाश से पूछे गए एक सवाल के जवाब ने वहाँ उपस्थित पत्रकार बरखा दत्त को असहज कर दिया।

कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों में से एक ने प्रभावशाली पत्रकारों और लॉबिस्टों के बीच नापाक गठजोड़ के बारे में एक सवाल पूछा, जो नीरा राडिया टेप प्रकरण की याद दिलाता है। इस टेप से मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान सक्रिय पत्रकारों और लॉबिस्टों के गिरोह की साँठगाँठ सामने आई थी। दर्शकों में से एक ने स्मिता प्रकाश से पूछा,

“हम मीडिया के झुकाव और नियोक्ताओं के बारे में बात कर रहे हैं। आप एक मीडिया हाउस की बॉस हैं। यदि आपका कोई पत्रकार या रिपोर्टर लॉबिस्टों से सॉंठगॉंठ कर सरकार में कौन से मंत्रालय किसे मिले, यह तय करने लगे तो आप क्या करेंगी? क्या आप उसे नौकरी से निकाल देंगी?”

इस सवाल के जवाब में स्मिता प्रकाश ने बताया कि कैसे बतौर संपादक किसी कर्मचारी को बर्खास्त करना अब आसान नहीं रहा। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी संस्था में इस तरह के लोग काम नहीं करते। उन्होंने कहा, “सबसे पहले तो मैं यह बात साफ़ कर देना चाहती हूँ कि हम फिक्सिंग, लॉबिंग, पोजिशनिंग… जैसे काम नहीं करते और मुझे नहीं लगता कि जो लोग मेरे साथ काम करते हैं, उनमें से कोई भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल है।” इस दौरान बरखा दत्त भी मंच पर मौजूद थीं।

स्मिता प्रकाश ने कहा, “अब आप देख सकते हैं कि पत्रकार किताबें लिख कर बता रहे हैं कि कैसे वे भारत-पाकिस्तान के वार्ता को प्रभावित कर रहे थे। वे बता रहे हैं कि मैंने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री से कहा कि आपको बस सेवा शुरू करनी चाहिए। मैंने पाकिस्तान के पूर्व जनरल से कहा कि आपको अब बातचीत शुरू करनी चाहिए। वास्तव में, अब वे खुलकर सामने में आ रहे हैं।”

उन्होंने कहा,

” जिन्हें पत्रकारिता में 40-50 साल का अनुभव प्राप्त है, उन्हें लगता है कि उन्होंने ऐसा देश की भलाई के लिए किया। लेकिन या तो आप पत्रकार होते हैं और घटना की रिपोर्ट कर रहे होते हैं या आप दलाल होते हैं, चाहे आप किस भी तरह से अपने काम को महिमामंडित करें। तथ्य यह है कि आप पत्रकार नहीं हैं, आप दलाल हैं।”

बता दें कि राडिया टेप सामने आने के बाद देश को पता चला था कि कैसे नैरेटिव सेट किया जाता है। कैसे कैबिनेट बर्थ के लिए बातचीत होती है। पत्रकारों और नेताओं के बीच का नापाक गठजोड़ कैसे काम करता है। साथ ही घोटाले को छिपाने के लिए कैसे राजनीतिक षड्यंत्र रचे जाते हैं। सब कुछ इस टेप से उजागर हो गया था।
इस मामले के जो मुख्य किरदार थे उनमें से कुछ चेहरे अचानक गायब हो गए। कुछ अन्य ने टेप के साथ छेड़छाड के आरोप लगा कर ख़ुद का बचाव किया।

2009 के आम चुनावों में कॉन्ग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे DMK के समर्थन की ज़रूरत थी। DMK ने इसके बदले कुछ खास मंत्रालय की मॉंग रखी। राडिया टेप में इस संदर्भ में लॉबिस्ट नीरा राडिया और पत्रकार बरखा दत्त के बीच हुई बातचीत दर्ज थी। इससे पता चला कि कैसे DMK के ए राजा को तब कॉन्ग्रेस ने आईटी और दूरसंचार मंत्रालय सौंपा था। बाद में ए राजा स्पेक्ट्रम को मनमाने ढंग से आवंटित करने के गंभीर आरोप लगे थे।

ऐसा पहली बार नहीं है जब बरखा दत्त को सार्वजनिक मंच पर अपना चेहरा छिपाना पड़ा। एनडीटीवी पर उनका एक शो आता था ‘द बक स्टॉप हियर’। कुछ साल पहले इसके एक एपिसोड में भ्रष्टाचार और लोकपाल पर बहस के दौरान बरखा ने स्वामी अग्निवेश से भ्रष्टाचार के आरोपित नेताओं के इस्तीफे को लेकर सवाल किए।

जवाब में स्वामी अग्निवेश ने कहा कि वह खुद इस तरह के मामलों में फॅंसी है। क्या कोई पत्रकार खुद को क्लीनचिट देकर शो की मेजबानी कर सकता है? उन्होंने बरखा से पूछा था कि क्या इस तरह के पत्रकार को इस्तीफा देना चाहिए?

उद्धव ठाकरे अब अर्बन नक्सलियों पर करेंगे मेहरबानी! एनसीपी नेता ने कहा, भीमा-कोरेगॉंव के केस बंद हो

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस की सरकार के अस्तित्व में आते ही विचराधारा का टकराव सामने आने लगा है। एनसीपी के एक नेता ने भीमा कोरेगॉंव हिंसा मामले में आरोपित लोगों के खिलाफ मामला बंद करने की मॉंग की है।

हाल ही में इस मामले में पुणे सेशंस कोर्ट ने 6 आरोपितों की जमानत याचिका खारिज की थी। ये हैं- रोना विल्सन, शोमा सेन, सुरेंद्र गडलिंग, महेश राउत, वरवारा राव और सुधीर धवले। अन्य तीन आरोपितों सुधा भारद्वाज, वर्नन गोंजाल्वेस और अरुण फरेरा की जमानत याचिका बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले ही ठुकरा दी थी।

एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड ने माँग की है कि भीमा कोरेगाँव मामले में दर्ज मामले वापस लिए जाए। उनका कहना है कि पिछली सरकार ने फर्जी मामले दर्ज किए थे। उन्होंने ट्वीट कर इसे वापस लेने को कहा है। अपने इस ट्वीट में एनसीपी नेता ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और कैबिनेट मंत्री जयंत पाटिल को भी टैग किया है।

इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रविवार (दिसंबर 01, 2019) शाम को बताया था कि उनकी सरकार ने मुंबई में आरे मेट्रो कार शेड निर्माण के खिलाफ आंदोलन करने वालों पर दर्ज मुकदमा को वापस लेने का फैसला किया है। उन्होंने पत्रकारों के साथ बातचीत में बताया कि मैंने आरे मेट्रो कार शेड के खिलाफ आंदोलन करने वाले कई लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने का आदेश दिया है। उद्धव ठाकरे के इस आदेश के बाद एनसीपी नेता ने ट्वीट करते हुए भीमा-कोरेगाँव हिंसा मामले में केस वापस लेने की माँग की है।

गौरतलब है कि भीमा-कोरेगाँव लड़ाई जनवरी 1818 को पुणे के पास हुई थी। ये लड़ाई ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना और पेशवाओं की फौज के बीच हुई थी। इस लड़ाई में अंग्रेज़ों की तरफ से महार जाति के लोगों ने लड़ाई की थी और इन्हीं लोगों की वजह से अंग्रेज़ों की सेना ने पेशवाओं को हरा दिया था। महार जाति के लोग इस युद्ध को अपनी जीत और स्वाभिमान के तौर पर देखते हैं और इस जीत का जश्न हर साल मनाते हैं।

जनवरी 2018 में पुणे के नजदीक भीमा-कोरेगाँव युद्ध के 200 साल पूरा होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भीमा-कोरेगाँव विजय स्तंभ पर जाने वाली गाड़ियों पर किसी ने हमला बोल दिया। इसके बाद हिंसा भड़क गई। इसके बाद भीमा-कोरेगाँव में दंगा भड़काने के आरोप में 21 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और पाँच लोगों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल किया जा चुका है। इसमें मानवाधिकार कार्यकर्ता और लेखक आनंद तेलतुम्बडे भी शामिल हैं।

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मुंबई की मर्दानी: टॉंगों के बीच हाथ डाल कर भाग रहे जावेद को चलती ट्रेन में चढ़ दबोचा

हैदराबाद में रेप के बाद डॉक्टर को जला देने की घटना के बाद से देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं। लेकिन, मुंबई में छेड़खानी करने वाले एक युवक को पकड़ने में किसी ने पीड़िता की मदद नहीं की। जान जोखिम में डाल महिला ने जब युवक को दबोच लिया तो पुलिस मामला दर्ज करने से आनाकानी करने लगी।

मिड डे की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार की सुबह 11 बजे के करीब दादर रेलवे स्टेशन पर एक युवक ने 24 वर्षीय महिला वकील के साथ छेड़खानी की। उसे पकड़ने के लिए महिला चलती ट्रेन में चढ़ गई। मनचले को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पीड़ित महिला वकील के अनुसार इस दौरान किसी ने उनकी मदद नहीं की। यहॉं तक कि कानूनी औपचारिकताओं का हवाला देकर पुलिस भी शिकायत दर्ज कराने को लेकर उन्हें चेताती रही।

आरोपित युवक की पहचान 32 वर्षीय जावेद जान शाह के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, वह नवी मुंबई के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। पीड़ित महिला ने बताया, “शनिवार को करीब 11 बजे मैं दादर स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर खड़ी ट्रेन के फर्स्ट क्लास लेडीज कंपार्टमेंट की ओर जा रही थी। इसी दौरान किसी ने पीछे से मेरी टॉंगों के बीच अपना हाथ रख दिया। मैंने तुरंत अपनी कोहनी से उसे मारा और फिर देखा कि वो भाग रहा था। मैंने उसका कॉलर पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह दूसरी ट्रेन में चढ़ने में कामयाब रहा जो वहाँ से जाने वाली था।”

महिला भी उसका पीछा करते हुए उसी ट्रेन में सवार हो गई। उन्होंने बताया कि मैं उसे जाने नहीं देना चाहती थी। मुझे पता था कि उसने यह हरकत जान बूझकर की थी। महिला के मुताबिक जब उन्होंने युवक का कॉलर पकड़ने की कोशिश की तो एक व्यक्ति उससे सहानुभूति दिखाने लगा। मैंने उस व्यक्ति से कहा कि अगर वो मेरी मदद नहीं कर सकता तो अपना मुँह बंद रखें। इसके बाद वह आदमी मेरे पैर छूकर माफी माँगने लगा।

आगे महिला वकील ने बताया, “मैं लोगों से मदद माँगती रही, लेकिन कोई आगे नहीं आया। मैं अगले स्टेशन (बांद्रा) में उतर नहीं पाई, क्योंकि प्लेटफॉर्म पर कोई पुलिस नहीं थी। अंधेरी पहुँचने पर, डिब्बे के दरवाज़े पर खड़े एक व्यक्ति ने कुछ अधिकारियों को देखा और मदद के लिए बुलाया। उनमें से एक महिला कॉन्स्टेबल थी, जिसने मुझसे बात की और मेरी काफी मदद की। लेकिन, अंधेरी रेलवे पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मी FIR दर्ज करना नहीं चाहते थे। क़ानूनी अड़चनें का हवाला देते हुए कहा कि मुझे काफ़ी दिक्कतें झेलनी पड़ेगी।”

महिला वकील ने जब यह बताया कि वो एक वकील हैं तब पुलिस ने उनका मामला दर्ज किया। बाद में, मेरे परिवार के कुछ लोग थाने आए और आरोपित के व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स को उसके फोन पर चेक किया, जिसके माध्यम से हमें पता चला कि वह एक मेडिकल छात्र है और एक अच्छे परिवार से है। लेकिन, उसके व्हाट्सएप चैट में कुछ अश्लील मैसेज भी दिखे जो उसने महिलाओं को परेशान करने करने के लिए उन्हें भेजे थे। उन्होंने कहा, “तभी मुझे एहसास हुआ कि मैंने उसे सज़ा दिलाने के लिए सही क़दम उठाया है।” यह मामला पहले अंधेरी रेलवे पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था और बाद में इसे मुंबई सेंट्रल गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) में ट्रांसफर कर दिया गया।

पुलिस की गिरफ़्त में 32 वर्षीय जावेद जान शाह (तस्वीर साभार: मिड-डे)

मुंबई सेंट्रल जीआरपी के वरिष्ठ पीआई शैलेंद्र धीवर ने बताया, “आरोपित को आईपीसी की धारा 354 (ए) के तहत गिरफ़्तार किया गया है। बांद्रा हॉलिडे कोर्ट में पेश किए जाने के बाद, उसे 14 दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। हमने पीड़ित का विस्तृत बयान दर्ज किया है। आगे की जाँच जारी है।”

डॉ. प्रीति रेड्डी का आखिरी फोन कॉल… पहचान हुई उस लॉरी की जहाँ मौत के बाद भी दरिंदों ने उन्हें नोचा था

हैदराबाद में महिला वेटनरी डॉक्टर को रेप के बाद जला देने के मामले में धीरे-धीरे साजिश की परतें खुल रही है। रिमांड रिपोर्ट से पता चला है कि डॉ. प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) की मौत के बाद भी आरोपितों ने एक लॉरी में उनके शव के साथ बारी-बारी से दुष्कर्म किया था। इस लॉरी तक पहुॅंचने में डॉ. रेड्डी का आखिरी फोन कॉल पुलिस के लिए मददगार साबित हुआ।

ख़बर के अनुसार, 26 वर्षीय डॉ. रेड्डी ने ने आखिरी कॉल मुख्य आरोपित मोहम्मद उर्फ आरिफ को की थी। आरिफ ने भरोसा जीतने के लिए उन्हें अपना मोबाइल नंबर दिया था। उनकी स्कूटी ठीक कराने गया आरिफ का साथी जब काफी देर तक नहीं लौटा तो उन्होंने इस नंबर पर कॉल किया। यह घटना बुधवार रात के करीब 9.20 की थी।

15 मिनट बाद डॉ. रेड्डी ने मोहम्मद आरिफ़ का कॉल किया। इसके बाद ही आरोपित उन्हें घसीटकर पास के खेत में ले गए जहॉं उनसे चारों ने बारी-बारी से दुष्कर्म किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरिफ को कॉल करने से पहले डॉ. रेड्डी ने अपनी बहन को फोन कर स्कूटी पंक्चर होने की जानकारी दी थी। इस दौरान उन्होंने लॉरी का भी जिक्र किया था। घटनास्थल के पास के एक प्रतिष्ठान के सीसीटीवी फुटेज में लॉरी नजर आई। यह बुधवार रात टोल प्लाजा से 300 मीटर की दूरी पर पार्क की गई थी। लेकिन, अंधेरे की वजह से पुलिस को उसका नंबर पता नहीं चल पाया।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि फोन कॉल और अन्य सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस लॉरी की पहचान करने में कामयाब रही। फिर लॉरी के मालिक श्रीनिवास रेड्डी तक पहुॅंची। उसने आरिफ के बारे में जानकारी दी जो लॉरी का ड्राइवर था। आरिफ के गिरफ्त में आने के बाद पुलिस उसके साथियों जोलू श्रीनी, जोलू नवीन और चेन्ना केशवलु तक पहुॅंची। पुलिस ने बताया कि चारों आरोपितों ने अपना अपराध क़बूल कर लिया है।

बता दें कि डॉ. रेड्डी की जली हुई लाश गुरुवार (28 नवंबर) की सुबह हैदराबाद के बाहरी इलाके में मिली थी। इसके बाद से ही देशभर में इस घटना के ख़िलाफ़ भारी ग़ुस्सा है और देश के हर कोने में विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इस मामले में पहली सफलता शुक्रवार की सुबह मिली थी, जब एक स्थानीय पेट्रोल पंप पर कर्मचारी ने पुलिस को बुलाया। उसने बताया कि बुधवार रात करीब 12.30 बजे, एक लाल रंग की स्कूटी पर दो लोग पेट्रोल लेने के लिए पहुँचे थे।

दरअसल, डॉक्टर रेड्डी के साथ हुई दरिंदगी की ख़बर जैसे ही सार्वजनिक हुई और मीडिया में इसे दिखाया गया, पुलिस के 100 नंबर पर किसी ने एक कॉल किया। फोन कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम लिंगाराम प्रवीण गौड़ था। लिंगाराम ने पुलिस को महत्वपूर्ण सूचना दी। उन्होंने पुलिस को बताया कि लाल रंग की स्कूटर पर आए दो लोगों ने पेट्रोल ख़रीदने की कोशिश की थी और प्लास्टिक की बोतल में डाल कर जाना चाह रहे थे। लिंगाराम उसी पेट्रोल पम्प पर कार्यरत हैं।

लिंगाराम ने बताया कि दोनों पहली नज़र में ही संदिग्ध प्रतीत हो रहे थे। उनकी गतिविधियाँ संदेहास्पद होने के कारण लिंगाराम ने उन्हें पेट्रोल बेचने से इनकार कर दिया। गवाह लिंगाराम ने पुलिस को यह भी बताया कि वो आरोपितों को सामने देखते ही पहचान सकते हैं।

बता दें कि डॉक्टर प्रीति रेड्डी रेप और हत्याकांड में पुलिस ने जो रिमांड कॉपी तैयार की है, उसकी एक कॉपी ऑपइंडिया ने भी एक्सेस की है। इस पूरी वारदात से लेकर उसकी जाँच और फिर आरोपितों की धर-पकड़ तक, इसमें पुलिस ने सभी जानकारियाँ एक जगह लिखी हैं। इसमें बताया गया है कि कैसे सूचना मिलने पर जब पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँचे तो उन्होंने पीड़िता की झुलस चुकी लाश बरामद की। पुलिस ने बताया है कि डॉक्टरों को घटनास्थल पर ही बुला कर ‘स्पॉट ऑटोप्सी’ कराई गई।

पुलिस की रिपोर्ट में आरोपितों के नाम एवं उम्र इस प्रकार हैं- मोहम्मद आरिफ़ (26), जोल्लू शिवा (20), जोल्लू नवीन कुमार (20) और चिन्ताकुट्टा चेन्ना केशवुलु (21)। पहले ख़बरों में सम्भावना जताई जा रही थी कि एक आरोपित नाबालिग है लेकिन पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, चारों बालिग़ हैं। 

मोहम्मद आरिफ़ ने पीड़िता के मुँह और नाक को तब तक दबाए रखा, जब तक उसकी मृत्यु नहीं हो गई। बाद में उसे चादर में लपेट कर ले जाया गया और जला दिया गया। मोहम्मद आरिफ़ ने डेड बॉडी पर पेट्रोल डाला, नवीन ने डीजल डाला और शिवा ने आग लगाई। सिम कार्ड और हैंडबैग को भी आग में फेंक दिया गया। इसके बाद आरोपितों ने स्कूटी को कोथूर बस स्टॉप के पास पार्क कर दिया। इसके बाद चारों आरोपित वहाँ से भाग निकले।

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अब मथुरा-काशी की बारी: बोले सुब्रह्मण्यम स्वामी, जमीन अधिग्रहित करे सरकार

राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद मथुरा और काशी की मुक्ति का मुद्दा भी जोर पकड़ने लगा है। प्रयागराज में शनिवार को विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष रहे अशोक सिंघल की पुण्यतिथि पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने दोनों जगहों पर जमीन अधिग्रहित करने की मॉंग केंद्र सरकार से की। इससे पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी रहे केके मुहम्मद ने कहा था कि मथुरा-काशी हिंदुओं के लिए मक्का-मदीना जैसा है। साथ ही उन्होंने दूसरे पक्ष से ये दोनों जगह हिंदुओं को सौंप देने की अपील की थी।

स्वामी ने केंद्र सरकार से कृष्ण जन्म स्थान और विश्वनाथ मंदिर के लिए जमीन अधिग्रहित करने की माँग करते हुए कहा कि संविधान में इसके लिए प्रावधान भी है। उनके इस वक्तव्य का पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने समर्थन किया। अरुंधति वशिष्ठ अनुसंधान पीठ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में जोशी और स्वामी के अलावा कई गणमान्य लोग मौजूद थे।

बता दें कि अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद विहिप की ओर से ‘घर वापसी’ अभियान की घोषणा की गई थी। अब उसके एजेंडे में दोनों स्थानों पर मंदिर निर्माण का मुद्दा भी शामिल हो गया है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि आस्था धर्म से जुड़ा है। बिना आस्था के धर्म नहीं हो सकता और अयोध्या की तरह काशी व मथुरा भी बड़े धार्मिक केंद्र हैं। मथुरा में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ और वहाँ दर्शन-पूजन हमारी आस्था है। इसी तरह विश्वनाथ मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिगों में से एक है, इसलिए वह भी आस्था का केंद्र है।


दैनिक जागरण के प्रयागराज संस्करण में छपी खबर

आगे उन्होंने कहा कि संविधान के मूलभूत ढाँचे की कल्पना 1980 के बाद साकार हो सकी। संविधान के मूल्य जो धर्म के साथ जुड़े हुए हैं, उनको आधारभूत ढाँचा कहा गया। इसलिए काशी और मथुरा में आस्था के आधार पर ही केंद्र सरकार को तेजी से आगे कदम बढ़ाना चाहिए और दोनों स्थानों पर मंदिर की कब्जे वाली जमीन को मुक्त कराना चाहिए।

इसके साथ ही सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 1951 में कानून बनाया था कि सरकार राष्ट्रहित में किसी भी जमीन का राष्ट्रीयकरण कर सकती है और किसी को दे सकती है। स्वामी ने आगे कहा कि राम मंदिर का आने के बाद लोग पूछ रहे हैं कि काशी विश्वनाथ और कृष्ण जन्मभूमि का क्या करेंगे। वैसे तो देश में बहुत से मंदिर तोड़े गए लेकिन अयोध्या, काशी, मथुरा बन जाए तो बाकी भूलने के लिए तैयार हैं।

इस दौरान डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि मुगलों से लेकर अंग्रेजों तक का हिंदुओं ने सामना किया। देश आजाद हुआ तो उन्होंने अलग देश की माँग की, जिस पर पाकिस्तान बना दिया गया। वहाँ भी वे एक नहीं रह सके और दो टुकड़े हो गए। अब पाकिस्तान के चार टुकड़े होने वाले हैं, यह उनकी करतूतों के चलते ही होने वाला है।

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यौन दुराचार के आरोप को प्रोफेसर ने बताया झूठा, कहा- बदनाम करने के लिए विरोधियों ने रची साजिश: IIT बीएचयू का छात्र है पीड़ित

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के ‘सामाजिक बहिष्करण केंद्र (Social Exclusion Centre)’ के प्रोफेसर अमरनाथ पासवान ने यौन दुराचार के आरोपों को झूठा बताया है। ऑपइंडिया को उन्होंने बताया कि उन्हें बदनाम करने के लिए विरोधियों ने यह साजिश रची थी। उनके खिलाफ एक छात्र ने गलत तरीके से छूने की जो शिकायत की थी, वह जाँच में फर्जी पाई गई है। प्रोफेसर अमरनाथ पासवान ने जाँच में क्लीनचिट मिलने के दस्तावेजी प्रमाण जल्द उपलब्ध कराने की बात भी कही है।

आईआईटी बीएचयू के एक छात्र ने आरोप लगाया था कि पासवान ने अपनी गाड़ी में ले जाकर उसके साथ अप्राकृतिक यौनाचार का प्रयास किया। उल्लेखनीय है कि अमरनाथ पासवान जन अधिकार पार्टी (JAP) से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। प्रोफेसर अमरनाथ पासवान ने 2019 लोकसभा चुनाव में मछली शहर लोकसभा क्षेत्र से जाप प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकी थी। उन्हें कॉन्ग्रेस का समर्थन हासिल था। कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने पासवान के लिए चुनाव प्रचार भी किया था और अपनी रैलियों में उनके लिए वोट माँगे थे। प्रियंका ने जौनपुर जिले में बदलापुर स्थित सरोखनपुर क्षेत्र में डाक बंगला रैली के दौरान लोगों से अमरनाथ पासवान को वोट देने की अपील की थी।

हालाँकि, उस चुनाव में पासवान को हार मिली थी। उन्हें महज 7622 मत ही प्राप्त हुए थे। कॉन्ग्रेस का छात्र संगठन NSUI भी उस चुनाव में अमरनाथ पासवान के पीछे मजबूती से खड़ा था। बीएचयू में भी एनएसयूआई संगठन ने प्रोफेसर पासवान का समर्थन किया था। यूपी ईस्ट एनएसयूआई के संयोजक मोहम्मद आमिद ने आम चुनाव से पहले 17 अप्रैल को ये ट्ववीट किया था, जिससे कई बातें साफ़ हो जाती हैं:

बीएचयू के आक्रोशित छात्रों ने ऑपइंडिया को बताया कि प्रोफेसर के इस कृत्य के ख़िलाफ़ आंदोलन चलाया जाएगा। ‘संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय’ में फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन पहले से ही विवादों में घिरा है। ऐसे में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र में स्थित ‘सर्वविद्या की राजधानी’ में एक प्रोफेसर पर ऐसे आरोप लगना चौंकाने वाला है। छात्रों ने कुलपति राकेश भटनागर से इस मामले की जाँच कराने और आरोपित पर कार्रवाई करने की माँग की है।

पीड़ित आईआईटी बीएचयू के बायो केमिकल इंजीनियरिंग का छात्र है। सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर आरपी पाठक ने बताया कि मामले को ग्रीवांस सेल के पास जाँच के लिए भेज दिया गया है। प्रोफेसर पाठक ने कहा कि जाँच रिपोर्ट कुलपति को सौंपी जाएगी। इंटरनल कंप्लेंट कमिटी की जाँच में क्या निकला, इस सम्बन्ध में अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुछ भी जानकारी नहीं दी है।

(नोट: आरोपित अमरनाथ पासवान से बात होने पर इस खबर में उनका पक्ष शामिल करते हुए आवश्यक सुधार किए गए हैं।)