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नाबालिग से बलात्कार के मामले में दो महीने में पूरी हो जाँच: कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने नाबालिगों के साथ यौन अपराधों के मामलों में गति पकड़ाने के लिए निजी प्रयास भी शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि वे सभी राज्य सरकारों के मुख्यमंत्रियों और राज्यों के उच्च न्यायालयों को पत्र लिखेंगे कि नाबालिगों के बलात्कार के मामले में जाँच दो महीने में पूरी कर दी जाए। उन्होंने इसके लिए अपने मंत्रालय में भी आवश्यक निर्देश जारी किए जाने की बात भी कही।

इसके पहले आज (शनिवार, 7 दिसंबर, 2019 को) खबर आई थी कि देश में बलात्कार के मामलों की बढ़ती संख्या और इनमें न्याय की धीमी प्रक्रिया को देखते हुए मोदी सरकार ने देश भर में 1023 फ़ास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का निर्णय लिया है। इनमें केवल पॉक्सो और बलात्कार के मामलों की सुनवाई होगी। बताया गया था कि इसके ज़रिए सरकार एक साल में लंबित 1,66,882 रेप और पॉक्सो मामलों का निपटारा कर देना चाहती है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सरकार ने हर एक राज्य और हाई कोर्ट से इनके गठन और संचालन के लिए हाँ या न इसी साल 31 दिसंबर तक कर देने के लिए कहा है। इनके लिए सुझाव अगले वित्त आयोग (2020-25) की रिपोर्ट में भी होने की उम्मीद है।

इस बाबत रविशंकर प्रसाद ने राज्य सभा में बताया था कि 16 राज्यों ने केंद्र सरकार को इसके लिए हाँ कर दिया है। इसके अलावा 704 फ़ास्ट -ट्रैक अदालतों का गठन हो चुका है और उनमें न्यायिक काम चल रहा है।

हैदराबाद एनकाउंटर: आरोपित की पत्‍नी ने पति का शव दफनाने से किया इनकार, रख दी ये बड़ी माँग

हैदराबाद में पशु चिकित्सक डॉ. ‘प्रीति’ (बदला हुआ नाम) रेड्डी के गैंगरेप और हत्या के आरोपितों में चेन्नाकेशवुलु की विधवा ने अपने पति के अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया है। कथित तौर पर पुलिस पर हमला करने और हिरासत से फ़रार होने की कोशिश में मारे गए अपने पति को दफ़नाने से मना करते हुए पत्नी ने माँग की है कि जैसे पहले उनके पति, जोल्लू नवीन, जोल्लू शिवा, और मो. आरिफ़ को पुलिस ने गोली मारी, वैसे ही जेलों में बंद सभी आरोपितों को गोली मारी जाए। “जेलों में ऐसे कितने ही बंद हैं जिन्होंने गलतियाँ की हैं। उन्हें भी उसी तरह गोली मारी जानी चाहिए जैसे इन्हें (डॉ. ‘प्रीति’ रेड्डी के गैंगरेप और हत्या के आरोपितों) को मारी गई। हम तब तक अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। हम वह तभी करेंगे जब पहले ऐसा कर दिया जाए।”

गर्भवती पत्नी कुछ अन्य के साथ नारायणपेट जिले स्थित अपने गाँव में इस माँग को लेकर धरने पर बैठी हुईं हैं। उनका आरोप है कि उनके पति के साथ अन्याय हुआ है। इसके पहले कल (शुक्रवार, 6 दिसंबर, 2019 को) इस हत्याकाण्ड की खबर आने पर उन्होंने कहा था कि उन्हें भी पुलिस “वहीं ले जाए जहाँ (उनके पति को) ले गई, और (उन्हें) भी गोली मार” दे।

इस बीच न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में चारों आरोपितों के गाँव के लोगों से बातचीत का हवाला देते हुए दावा किया है कि यह चारों वैसे तो बहुत ही गरीब और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए थे, बहुत पढ़े-लिखे भी नहीं थे, और इनकी ज्ञात आमदनी भी कम थी, लेकिन इनकी जीवनशैली इस आमदनी से बहुत ज़्यादा खर्चीली थी। इससे इनका एनकाउंटर करने वाली पुलिस टीम के इस दावे को बल मिलता है कि चारों किसी संगठित आपराधिक गिरोह का हिस्सा हो सकते हैं।

गौरतलब है कि कल सुबह-सुबह साइबराबाद पुलिस ने दावा किया था कि हैदराबाद में पशु चिकित्सक डॉ. ‘प्रीति’ (बदला हुआ नाम) रेड्डी के गैंगरेप और हत्या के चारों आरोपित पुलिस के साथ एनकाउंटर में मारे गए। अपनी ही हिरासत में पहले से मौजूद अभियुक्तों के एनकाउंटर के बारे में साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनर ने कहा कि मूल वारदात के घटनाक्रम को सूक्ष्मता से समझने के लिए पुलिस चारों आरोपितों को तड़के सुबह घटनास्थल पर लेकर गई थी। वहॉं उन्होंने पहले पुलिस पर लाठियों से हमला कर दिया और इसके बाद पुलिस के हथियार छीन उन पर फायरिंग की। पुलिस को आत्मरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई में उनको गोली मारनी पड़ी।

इसके पहले इन चारों के ख़िलाफ़ त्वरित और सख्त कार्रवाई करने के लिए जनाक्रोश उबल पड़ा था। न केवल कई स्थानीय अदालतों की बार काउंसिलों और एसोसिएशनों ने इनकी पैरवी न करने की हिदायत और अपील अपने सदस्यों से की थी, बल्कि इस भयावह हत्याकाण्ड से बिफ़री जनता इन्हें खुद मौत के घाट उतारने के लिए पुलिस थाने के बाहर इकठ्ठा हो गई थी, जिसके बाद पुलिस ने आक्रोशित भीड़ को भगाने के लिए लाठीचार्ज भी किया था।

ये हमारे कार्यकर्ता नहीं, माओवादी हैं: केरल के CM पिनराई विजयन ने एलन सुहैब, थाहा फज़ल से पल्ला झाड़ा

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने माओवाद फ़ैलाने के आरोपित एलन सुहैब और थाहा फज़ल से पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने इन दोनों को अपनी पार्टी माकपा के कार्यकर्ता मानने से इंकार कर दिया है। मीडिया से तिरुवनंतपुरम में बात करते हुए आज (शनिवार, 7 दिसंबर, 2019 को) मुख्यमंत्री ने कहा, “कौन पार्टी कार्यकर्ता?… वे माकपा के कार्यकर्ता नहीं हैं, बल्कि माओवादी हैं। इस बात की जाँच हुई है और यह बात (कि वे माकपा कार्यकर्ता नहीं हैं) सही साबित हुई है। सवालों का जवाब दे रहे थे जिनमें इन दोनों को उनकी पार्टी का कार्यकर्ता बताते हुए उन्हें अदालत से ज़मानत न मिलने के बारे में उनकी प्रतिक्रिया माँगी गई थी।

गौरतलब है कि माकपा के कार्यकर्ता बताए जा रहे एलन सुहैब और थाहा फज़ल को 1 नवंबर, 2019 को माओवाद का समर्थन करने वाले पर्चे रखने और बाँटने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था। इन दोनों की गिरफ़्तारी यूएपीए कानून के तहत हुई है, जिसमें हाल ही बदलाव कर मोदी सरकार ने संगठनों के साथ-साथ व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित किए जाने के प्रावधान जोड़े हैं। केरल के विपक्षी दलों (कॉन्ग्रेस विधानसभा में प्रमुख विपक्षी दल है) ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया था।

एलन सुहैब और थाहा फ़ज़ल को पंथीरनकवु से हिरासत में ले लिया गया था। उन पर सेक्शन-20 (एक आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होने की सज़ा), 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध) और 39 (ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों के लिए आतंकवादी संगठन को समर्थन देने से संबंधित अपराध) के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने ख़ुलासा किया था कि सुहैब और फ़ज़ल की तलाशी के दौरान उन्होंने माओवादी विचारधारा को बढ़ावा देने वाले पर्चे बरामद किए। साथ ही पुलिस ने उनके साथ मौजूद तीसरे ऐसे व्यक्ति की तलाश तेज़ करने की बात कही, जो पुलिस बल को देखकर मौके से भाग गया था।

एलन सुहैब और थाहा फ़ज़ल पर आरोप था कि वे अपनी गिरफ़्तारी के दो दिन पहले पलक्क्ड़ में अक्टूबर माह में मारे गए संदिग्ध माओवादियों के एनकाउंटर के विरोध के नाम पर माओवादी पर्चे बाँट रहे थे। इस एनकाउंटर के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केरल उच्च न्यायालय ने इसकी जाँच की अनुशंसा तो की, लेकिन इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जाँच की अनुशंसा भर को इस मुठभेड़ में कुछ संदेहास्पद या अवैध होने का सबूत न मान लिया जाए। अदालत अपना रुख मामले की जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही ज़ाहिर करेगी।

Sidhu के क़रीबी DSP ने मंत्री को कहा- ‘Dirty Dog’, पंजाब सरकार ने किया सस्पेंड

पंजाब सरकार ने शुक्रवार (6 दिसंबर) को लुधियाना के नगर निगम डीएसपी बलविंदर सिंह सेखों को निलंबित कर दिया। बताया जा रहा है कि डीएसपी ने पंजाब के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री भारत भूषण आशु को अपमानजनक मैसेज भेजे थे और फेसबुक पेज पर उनके लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए भद्दी टिप्पणी की थी।

दरअसल, आशु उन तीन मंत्रियों में शामिल थे, जिन्होंने अपनी शिक़ायतों के संबंध में सरकार की सुनवाई नहीं होने की कैबिनेट की बैठक में शिक़ायत की थी। डीएसपी ने एक मैसेज में, आशु को एक “Dirty Dog” कहा और दूसरे में, उन्होंने मंत्री को स्पष्ट रूप से गाली दी। आशु ने पिछली बैठक में अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को वो मैसेज भी दिखाए। पंजाब के मंत्री आशु ने बुधवार (4 दिसंबर) को कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे को उठाया था।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद भी, सेखों ने अपने फेसबुक पेज पर कुछ भद्दी टिप्पणियाँ पोस्ट की थी। आशु का कहना है कि डीएसपी पिछले तीन महीने से उन्हें गालियाँ दे रहे हैं, वह इस इंतज़ार में थे कि डीएसपी उन्हें गालियाँ देना कब बंद करेंगे, उनका यह सिलसिला रुका ही नहीं।

जानकारी के अनुसार, मंत्री ने इस बात का भी ख़ुलासा किया डीएसपी सेखों पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के क़रीबी थे। उन्होंने कहा, “सिद्धू ने उनसे मेरे ख़िलाफ़ जाँच कराने को कहा था। सरकार द्वारा सेखों के ख़िलाफ़ भी जाँच का आदेश दिया गया था। मुझे जानकारी नहीं है।”

नवजोत सिंह सिद्धू ने आशु पर आरोप लगाते हुए फरवरी में लुधियाना में कई करोड़ के ग्रैंड मैनर होम्स को भूमि उपयोग (CLU) में नियमों के उल्लंघन और अनुदान के मुद्दे की जाँच का आदेश दिया था।

सिद्धू को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए, सेखों ने दावा किया था कि उन्हें आशु और कॉन्ग्रेस नेता कमलजीत सिंह करवाल द्वारा ‘धमकी’ दी गई थी और उन्होंने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पास एक शिक़ायत सौंपी थी।

वहीं, डीएसपी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “अगर कोई ऐसे लोगों द्वारा परेशान किया जाता है, जो ख़ुद सत्ता में हों, तो उनके पास प्रतिक्रिया देने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचता।” उन्होंने कहा, मुझे तत्कालीन स्थानीय सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के निर्देश पर मामले की जाँच करने का भुक्तभोगी होना पड़ा है।

वो तो हमने जब्र कर रखा था, वरना युद्ध हो गया होता: पाकिस्तानी विदेश मंत्री कुरैशी की डींगें

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने यूरोपीय राजदूतों के सामने डींगें हाँकने के चक्कर में बेहद हास्यास्पद बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि वह तो पाकिस्तान ने खुद पर नियंत्रण जैसे तैसे कर रखा है, वरना 5 अगस्त को कश्मीर के भारत के साथ पूर्ण विलय और उसका विशेष दर्जा ख़त्म करने की भारत की ‘हरकतों’ के बाद तो दोनों देशों में जंग हो ही जानी थी। साथ ही उन्होंने घाटी में भारत के ‘अत्याचारों’ का प्रोपेगंडा भी दोहराया, जबकि सच्चाई यह है कि 5 अगस्त के बाद से जहाँ जिहादियों ने वहाँ 88 आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया है और कई हत्याएँ की हैं, वहीं सुरक्षा बलों के हाथों इसी कालखंड में अब तक एक भी नागरिक की जान नहीं गई है।

कुरैशी ने इस बैठक में झूठों की झड़ी ही लगा दी। उन्होंने राजनयिकों को भरमाने की कोशिश में यह भी दावा किया कि कश्मीर में अब तक कर्फ़्यू लगा है, जबकि सच्चाई यह है कि वहाँ से कर्फ़्यू बहुत दिन पहले ही हटाया जा चुका है। यह तो स्थानीय और पाकिस्तान-समर्थित जिहादियों की साठ-गाँठ है जो जनजीवन सामान्य नहीं होने दे रही है। यहाँ तक कि लोग अपने बच्चों को जिहादियों के डर से स्कूल भी नहीं भेज पा रहे हैं, और स्कूल वाले अखबारों में इश्तिहार छाप कर बच्चों को पाठ्यपुस्तकों से पढ़ाई के निर्देश भेज रहे हैं ताकि उनकी शिक्षा कुछ-न-कुछ जारी रहे।

अपने यूरोपीय मेहमानों को बरगलाने के लिए कुरैशी ने यह भी कहा कि भारत खुद ही कोई कार्रवाई (फॉल्स फ़्लैग ऑपरेशन) कर उसका ठीकरा पाक के सिर फोड़ सकता है, जिसके बाद वह पाक की सीमा का अतिक्रमण कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि “भारत के उठाए हुए कदमों से” कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति दीर्घकालिक रूप से खराब हो सकती है। यह भी पूरी तरह झूठ है, क्योंकि अब कश्मीर में केवल वही नेता नज़रबंद या जेल में हैं, जो यह सामान्य सा आश्वासन देने के लिए तैयार नहीं हैं कि वे कश्मीर में हिंसा फैलाने वाली या भड़काऊ बातें नहीं करेंगे। यह बात खुद 370 हटने की बात भर से अलगाववाद-समर्थक के तौर पर सामने आ चुकीं पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती की बेटी इल्तज़ा ने कही है।

छेड़छाड़ और गंदी वीडियो बना वायरल करने वाला जमानत पर बाहर आया, आते ही पीड़िता को हंसिये से काटा

छत्तीसगढ़ के कोरबा में छेड़खानी और अश्लील हरक़त करने के आरोपित ने जेल से बाहर आने के कुछ दिन बाद ही शुक्रवार (6 दिसंबर) को पीड़िता को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा और हंसिये से एक के बाद एक वार से उन्हें लहूलुहान कर दिया। यह मामला शहर के बुधवारी-खपराभट्‌टा मोहल्ला का है।

मौके पर वहाँ मौजूद लोगों ने आरोपित को पकड़कर उसे पुलिस के हवाले कर दिया। उधर पीड़िता की हालत बेहद गंभीर थी, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमलावर कुछ दिनों पहले ही जेल से ज़मानत पर बाहर आया था। उसके बारे में पता चला है कि उसने पीड़िता का आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उसे वायरल भी किया था। 

ख़बर के अनुसार, सीएसईबी चौकी क्षेत्र में बुधवारी के गाँधी चौक के पास कुछ महीने पहले मुंगेली के लोरमी क्षेत्र की एक महिला परिवार समेत किराए पर रहती थी। वहीं लोरमी का ही इंद्रपाल टोंडे (40) भी आकर किराए पर रहने लगा। महिला से एक तरफा प्यार के चक्कर में उसने नजदीकियाँ बढ़ानी शुरू कर दी।

महिला उसकी रोज़-रोज़ की हरक़तों से काफ़ी तंग आ चुकी थी। इसलिए परेशान वो अपने परिवार समेत बुधवारी के ही खपराभट्‌टा क्षेत्र में जाकर किराए पर रहने लगी। इसके बाद हुआ यह कि सितंबर के महीने में इंद्रपाल भी पास ही किराए का मकान लेकर रहने लगा और उसने फिर से अपनी पुरानी हरक़तों को दोहराना शुरू कर दिया। इससे वो महिला परेशान रहने लगी थी।

हद तो तब पार हो गई जब अक्टूबर में आरोपित इंद्रपाल ने अपने मोबाइल से महिला का उस समय वीडियो बना लिया जब वो अपने आंगन में नहा रही थी। वीडियो बनाने के बाद उसने बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए उसे सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया। इस बारे में जब महिला को पता चला तो उसने इंद्रपाल से उस वीडियो को हटाने के लिए कहा, लेकिन वो नहीं माना।

इसके बाद पीड़ित महिला ने इंद्रपाल के ख़िलाफ़ पुलिस में शिक़ायत दर्ज करा दी।  पुलिस ने आरोपित को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया। कुछ दिनों पहले ही वो ज़मानत पर बाहर आया था। लेकिन, वो बदले की भावना से अंदर ही अंदर जल रहा था और उसके मन में महिला के लिए ज़हर भरा हुआ था। इसलिए उसने शुक्रवार की सुबह जब महिला घर में अकेली थी, हंसिए से उस पर हमला कर दिया। महिला बचने के लिए मोहल्ले में भागी लेकिन इंद्रपाल उसके पीछे हंसिया लेकर दौड़ता रहा और मौक़ा पाते ही महिला पर ताबड़तोड़ वार करता रहा।

जानकारी के अनुसार, पुलिस ने आरोपित को गिरफ़्तार कर लिया था। उसे कोर्ट में पेश किया गया। यहाँ से मजिस्ट्रेट के आदेश पर जेल भेज दिया गया है। घायल महिला का बयान अभी दर्ज नहीं हुआ है। पुलिस का कहना है कि स्थिति में सुधार होते ही पीड़िता का बयान दर्ज किया जाएगा।

उन्नाव रेप पीड़िता के ऊपर केरोसिन तेल डालकर जिंदा जलाकर मारने वाले हैवानों के चेहरे आए सामने

मैं अपनी बहन को दफनाऊँगा क्योंकि जलाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है: उन्नाव पीड़िता का भाई

‘हैदराबाद के जैसा दौड़ा-दौड़ाकर गोली मारी जाए…’ – उन्नाव में जला कर मार दी गई बेटी के पिता का छलका दर्द

राहुल गाँधी ने युवाओं को सिखाए नशे से बचने के गुर, मानसिक रोगों के इलाज के सेंटर का किया उद्घाटन

पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी शनिवार (दिसंबर 7, 2019) को अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड पहुँचे। यहाँ उन्होंने सुल्तान बाथरी में नए ‘मानसिक रोग व व्यसन-निरोधी केंद्र’ का उद्घाटन किया। इस अवसर को राहुल ने मोदी सरकार पर निशाना साधने के लिए भी इस्तेमाल किया। एजम्पशन हॉस्पिटल में ‘साइकेट्री एन्ड डी-एडिक्शन डिपार्टमेंट ब्लॉक’ का उद्घाटन करने पहुँचे राहुल गाँधी ने कहा कि वो मानसिक रोगियों के लिए इस फैसिलिटी का उद्घाटन करते हुए काफ़ी ख़ुश हैं। उन्होंने उक्त हॉस्पिटल के कार्यों की सराहना करते हुए उससे जुड़े लोगों को बधाई दी।

राहुल गाँधी ने बताया कि ये व्यसन-निरोधी सेंटर है और यहाँ मानसिक रोगों का इलाज किया जाता है। राहुल गाँधी ने इस दौरान व्यसन अथवा एडिक्शन से जुड़ी बीमारियों से निपटने के गुर भी बताए। उन्होंने कहा कि युवाओं को तरह-तरह के खेल खेलने चाहिए, ताकि एडिक्शन की बीमारी दूर हो। उन्होंने कहा कि तरह-तरह के खेलों में संलिप्त रहने वाले युवा शराब इत्यादि के व्यसन में नहीं पड़ते क्योंकि उनके पास इन सबके लिए समय ही नहीं होता। वहाँ उपस्थित लोगों ने राहुल गाँधी के इस सुझाव का तालियाँ पीट कर स्वागत किया।

राहुल गाँधी ने माना कि वायनाड में मेडिकल सुविधाओं की स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि यहाँ एक मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाने की वर्षों से माँग चल रही है। वायनाड में साँप काटने के बाद एक छात्रा की मौत हो गई थी क्योंकि उसे समय पर मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं मिला। राहुल ने इस घटना पर दुःख जताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के मामलों में हमें आक्रामक रूप से आगे बढ़ने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के लिए ज़मीन की दिक्कत आ रही है, जिसे हल करने की वो कोशिश कर रहे हैं।

राहुल ने वायनाड में रेलवे के विस्तार को लेकर बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को संसद में उठाया है। उन्होंने भारत को सभी धर्मों का देश बताते हुए कहा कि कोई भी धर्म ऐसा नहीं है, जो घृणा, हिंसा और क्रोध को बढ़ावा देता हो। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में बैठे लोग इस देश को धर्म और संप्रदाय के आधार पर बाँटना चाह रहे हैं। अपने पिता राजीव गाँधी और दादी इंदिरा गाँधी की हत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वो पूरी ज़िंदगी हिंसा से पीड़ित रहे हैं, इसीलिए व्यक्तिगत तौर पर उनका मानना है कि हिंसा से समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि हिंसा को आधार बना कर देश नहीं चलाया जा सकता। राहुल गाँधी ने कहा कि देश में ‘डर का माहौल’ है। पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं के ख़िलाफ़ अत्याचार हो रहा है और रोज़ अख़बारों में लोगों के पिटे जाने की ख़बरें आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी 9% की दर से विश्व की सबसे ज्यादा तेज़ी से बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर आज मात्र 4% रह गई है। उन्होंने दावा किया कि जीडीपी की ये विकास दर भी कैलकुलेशन के नए मेथड के अनुसार है जबकि पुरानी प्रक्रिया के अनुसार देखा जाए तो यह मात्र 2% ही रह जाता है।

राहुल गाँधी ने इसे त्रासदी करार दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को आज की परिस्थिति में नौकरियाँ नहीं मिल रही। बकौल राहुल, देश आज विभाजित हो गया है और इसीलिए पिछले 45 सालों में बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा हो गई है। उन्होंने कहा कि देश आज एक साथ काम नहीं कर रहा है। राहुल ने कहा कि केरल इस बात का उदाहरण है कि विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ ख़ुशी से रह सकते हैं।

प्यारे टीपू सुल्तान के बारे में एक भी शब्द मत बदलो: ‘बुद्धिजीवी’ कमेटी मैसूर के हत्यारे शासक के पक्ष में

कर्नाटक की पाठ्यपुस्तक सोसाइटी (कर्नाटक टेक्सटबुक्स सोसाइटी) स्कूल पाठ्यपुस्तकों के बारे में अपनी रिपोर्ट को दबा कर बैठी हुई है। कारण? वह येदियुरप्पा सरकार की उन मंशा से इत्तेफाक नहीं रखती कि 8000 मंदिरों को ढहाने और लाखों हिन्दुओं और ईसाईयों को तलवार की नोंक पर इस्लाम कबूल करवाने बनाने वाले टीपू सुल्तान को कन्नड़ इतिहास के नायकों में से हटाए जाने के खिलाफ है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वह अपने द्वारा तैयार मसौदे में टीपू को बनाए रखने के लिए अड़ी हुई है।

बंगलुरु मिरर के मुताबिक राजनीतिक टकराव के अलावा हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा उपचुनावों में व्यस्तता भी सोसाइटी की रिपोर्ट में देरी का एक कारण है। लेकिन द हिन्दू का दावा है कि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि टीपू सुल्तान के बारे में “एक शब्द भी नहीं” हटाया जाना चाहिए, जबकि मुख्यमंत्री, मदिकेरी के भाजपा विधायक अपचू रंजन समेत कई नेता हिन्दू समाज की भावनाओं के अनुरूप टीपू से जुड़े अध्याय को हटाने की वकालत कर चुके हैं। इसके पहले येदियुरप्पा सरकार ने टीपू की जयंती भी इस साल मनाने से मना कर दिया था, और इस बारे में कोर्ट की ‘सलाह’ के बाद भी अपने रुख पर कायम रही।

जहाँ कमेटी टीपू को एक नायक के रूप में ज़िंदा रखने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार बैठी है, वहीं मुख्यमंत्री ने भी अक्टूबर में ही जनता से वादा कर लिया था कि किसी भी कीमत पर वे टीपू सुल्तान को हटवा कर रहेंगे। इस बारे में विधायक अपचू रंजन के पत्र लिखने पर प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री एस सुरेश कुमार ने उन्हें भी इस कमेटी का हिस्सा बनाने की बात कही थी।

यहाँ यह जान लेना ज़रूरी है कि हिन्दू समाज में टीपू को किताबों में बनाए रखने को लेकर दो तरह के विचार हैं। एक तरफ़ येदियुरप्पा समेत कुछ लोग पूरी तरह इस आततायी इस्लामी शासक के चिह्नों और स्मृतियों को मिटाए जाने के पक्ष में हैं, वहीं कुछ अन्य लोग इस मत के हैं कि पूरी तरह हटाए जाने की बजाय टीपू सुल्तान के शासन की असलियतें, जैसे कालीकट में बच्चों को अपनी माँओं के ही शव के गले में फंदे डालकर फाँसी पर लटकाना, नंगे ईसाईयों और हिन्दुओं को चलते-फिरते हाथियों के पैरों से बाँध कर दर्दनाक मौत मारना, इतिहास के पाठ्यक्रम में शामिल कर इस्लामी शासन की पोल खोली जाए। लेकिन कर्नाटक की वर्तमान इतिहास की किताबें, जिनमें यह कमेटी टीपू के बारे में “एक भी शब्द नहीं” बदलने की पैरवी कर रही है, इन पहलुओं को नज़रंदाज़ कर टीपू को किसी स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर पेश करतीं हैं।

‘पुलिस पर हमला’ का मामला दर्ज: ‘प्रीति रेड्डी’ मामले के चारों आरोपित एनकाउंटर के बाद भी कानून के शिकंजे में

हैदराबाद के बाहरी इलाके शादनगर में पशु चिकित्सक ‘प्रीति रेड्डी’ (बदला हुआ नाम) के साथ गैंगरेप कर निर्मम हत्या करने वाले चारों आरोपितों के ख़िलाफ़ ‘पुलिस पर हमला’ करने का मामला दर्ज कर लिया गया है। बता दें कि गुरुवार (दिसंबर 5, 2019) की देर रात इस मामले के चारो आरोपित पुलिस द्वारा एनकाउंटर में मारे गए थे। 

ख़बर के अनुसार, आरोपितो के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा-307 (हत्या का प्रयास), 176 (सूचना या इत्तिला देने के लिए क़ानूनी तौर पर आबद्ध व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को सूचना या इत्तिला देने का लोप) और भारतीय शस्त्र अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस टीम के प्रभारी द्वारा चार आरोपितों के साथ दायर एक शिक़ायत के आधार पर, शुक्रवार (6 दिसंबर) को FIR दर्ज की गई थी। इसके अलावा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम शनिवार को उस जगह का दौरा करेगी जहाँ यह एनकाउंटर हुआ था।

26 वर्षीय महिला पशु चिकित्सक के बलात्कार और हत्या के सभी चारों आरोपी शुक्रवार तड़के यहाँ चट्टनपल्ली में उस समय पुलिस की ‘जवाबी’ गोलीबारी में मारे गए जब उन्हें पीड़िता का फोन और मामले से जुड़े अन्य सामान बरामद करने के लिए घटनास्थल पर ले जाया गया था। साइबराबाद पुलिस ने बताया था कि दो आरोपियों ने उनके हथियार छीनकर उन पर गोलियाँ चलाई और बाकी के आरोपितों ने पत्थर और डंडों से हमला किया जिसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।

साइबरबाद के आयुक्त वीसी सज्जनर ने कहा, “वे गोलीबारी करते रहे। हमारे द्वारा आत्मसमर्पण करने के लिए कहने के बावजूद उन्होंने गोलीबारी और हमला करना जारी रखा।” पुलिस के मुताबिक, इस घटना में अरविंद गौड़ और वेंकटेश्वरुलु नाम के दो पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए, इस बीच उनके सिर पर भी गंभीर चोटें लगी।

चार आरोपितों का पोस्टमार्टम महबूबनगर ज़िले के सरकारी ज़िला अस्पताल में किया गया और इसकी वीडियो ग्राफी भी की गई। 20 और 26 साल की आयु के बीच के चारों आरोपितों को महिला का बलात्कार करने, उनकी गला घोंटकर हत्या और बाद में उनके शव को जलाने के आरोप में 29 नवंबर को गिरफ़्तार किया गया।

हैदराबाद एनकाउंटर: आरिफ ने पुलिस से छीने थे हथियार, कर्नाटक में भी अपराधों को अंजाम दे चुके थे प्रीति रेड्डी के गुनहगार

‘मेरी बेटी की आत्मा को अब शांति मिलेगी’ – ‘प्रीति रेड्डी’ के पिताजी ने कही ‘दिल की बात’

मारे गए सभी आरोपित: पुलिस ने वहीं किया एनकाउंटर, जहाँ ‘प्रीति रेड्डी’ के साथ किया था जघन्य अपराध

डॉ. प्रीति रेड्डी का आखिरी फोन कॉल… पहचान हुई उस लॉरी की जहाँ मौत के बाद भी दरिंदों ने उन्हें नोचा था

…वो पेट्रोल पम्प वर्कर, जिसकी मदद से ‘प्रीति रेड्डी’ के बलात्कारी-हत्यारे तक पहुँच पाई पुलिस

उन्नाव रेप पीड़िता के ऊपर केरोसिन तेल डालकर जिंदा जलाकर मारने वाले हैवानों के चेहरे आए सामने

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में रेप पीड़िता को 5 आरोपितों ने उस पर पेट्रोल डालकर जला दिया। अब पाँचों आरोपितों के चेहरे सामने आए है। आरोपितों में से एक शिवम त्रिवेदी पीड़िता के साथ हुए गैंगरेप का मुख्य आरोपित हैं। उन्नाव पीड़िता की मृत्यु पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, बालिका की मौत अत्यंत दुखद है। उन्होंने पीड़िता के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सभी अपराधी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाकर कड़ी सजा दिलाई जाएगी। हिन्दुस्तान ने अपनी रिपोर्ट में आरोपित शिवम त्रिवेदी, शुभम त्रिवेदी, उमेश बाजपेई, राजकिशोर और हरिशंकर की तस्वीर दी है।

बता दें कि गैंग रेप आरोपित शिवम त्रिवेदी ने पीड़िता के साथ जिंदगी भर साथ निभाने का वादा करके लगभग 2 साल तक शारीरिक शोषण करता रहा और फिर जब पीड़िता ने शादी की बात की तो आरोपित ने 3 लाख रुपए देकर उससे पीछा छुड़ाना चाहा। मगर जब पीड़ित परिवार इसके लिए नहीं माना तो आरोपित पक्ष ने बिहार थाने की पुलिस से भी दबाव बनवाया। इसके बाद भी पीड़िता नहीं डरी और आरोपितों को जेल भिजवा दिया। जेल से छूटने पर उसने पीड़िता के ऊपर केरोसिन तेल डालकर जलाकर जान से मारने की कोशिश की।

दरअसल 18 जनवरी 2018 को रायबरेली कोर्ट में पीड़िता और आरोपित शिवम त्रिवेदी ने शादी के अनुबंध पर हस्ताक्षर किया था। जिसमें कहा गया था कि पीड़िता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी शिवम की है। मगर शिवम कुछ ही दिन बाद उसे छोड़कर भाग गया। जिसके बाद पीड़िता ने शिवम के घर की बहू होने का दर्जा माँगा। आरोपित के परिवार को यह मंजूर नहीं था। उन्होंने पैसे देकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की। लेकिन पीड़िता ने उसे जेल पहुँचा दिया। और जेल से निकलने के बाद आरोपितों ने उसे जान से मारने के लिए घिनौनी वारदात को जन्म दिया।

12 दिसंबर 2018 को आरोपी शिवम त्रिवेदी ने अपने चचेरे भाई शुभम त्रिवेदी के साथ मिलकर गैंगरेप किया। कोर्ट के आदेश के बाद मार्च 2019 में एफआईआर दर्ज हुई और पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। 30 नवम्बर को इन्हें बेल मिली थी। पीड़िता ने मरने से कुछ देर पहले अपने भाई से कहा था- “भैया, बचा लो! मैं मरणा नहीं चाहती। जिन्होंने मेरे साथ ग़लत किया है, उन्हें मैं मौत की सज़ा पाते देखना चाहती हूँ।” 

23 वर्षीय पीड़िता के साथ ये घटना तब हुई, जब वह रायबरेली कोर्ट में सुनवाई के लिए जा रही थी। आरोपितों ने उसका पीछा कर के उस पर केरोसिन तेल डाला और आग लगा दी। आरोपितों से बचने के लिए पीड़िता 1 किलोमीटर तक बदहवास अवस्था में भागती रही। यहाँ तक कि उसने 112 नंबर पर पुलिस को भी कॉल किया था। जब पुलिस मौके पर पहुँची, तब तक वह 90 प्रतिशत जल चुकी थी। यूपी सरकार ने कहा था कि वो पीड़िता के इलाज का पूरा ख़र्च उठाएगी। परिजनों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें पैसे नहीं चाहिए बल्कि वो आरोपितों को मौत की सज़ा मिलते देखना चाहते हैं।