मारपीट की इस घटना से पूरे क्षेत्र में साम्प्रदायिक तनाव का माहौल बना हुआ है। घटनास्थल पर पुलिस के पहुँचने से पहले ही हमलावर वहाँ से भाग गए। सीओ कोतवाली दिनेशचंद्र मिश्रा ने बताया कि मामला दो पक्षों में आपसी विवाद का है।
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी संसदीय दल के नेता के रूप में नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव का राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी ने समर्थन किया।
टीएमसी पार्टी की आपात बैठक में ममता बनर्जी ने ये बातें कही। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बल ने उनके खिलाफ कार्रवाई की, एक आपात स्थिति पैदा की गई। साथ ही उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम के बीच भेदभाव किया गया साथ ही वोटों की हेराफेरी हुई। ममता दीदी ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग में शिकायत की, लेकिन कोई भी कदम नहीं उठाया गया।
जनता कॉन्ग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गाँधी को खदेड़कर भगा चुकी है, लेकिन लग ये रहा है कि जनता के सन्देश को कॉन्ग्रेस अभी भी स्वीकार कर पाने में असमर्थ है। इसीलिए अभी भी कॉन्ग्रेस की आई टी सेल और व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी अपने युवराज को मसीहा बनाने के कार्यक्रम में तत्परता से जुटी हुई है।
वर्तमान लोकसभा का कार्यकाल तीन 3 जून 2019 को समाप्त हो रहा है। इससे पहले केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार (मई 24, 2019) को 16वीं लोकसभा भंग करने की सिफारिश कर दी है। नए सदन का गठन 3 जून से पहले हो जाना चाहिए।
मैनाज़ बेगम ने अपने बच्चे का नाम PM मोदी के नाम पर रखने की वजह तमाम विकास कार्यों को बताया। मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक़ पर बनाए गए क़ानून से वो काफ़ी प्रभावित थीं।
एक बार फिर कॉन्ग्रेस में वर्ष 2014 की ही तरह इस्तीफ़ा देने और अस्वीकार कर दिए जाने का शिष्टाचार निभाया गया है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा कॉन्ग्रेस कार्यकारिणी समिति को इस्तीफ़ा को इस्तीफ़ा सौंपा गया और कमेटी द्वारा इसे नामंजूर कर दिया गया है।
हालाँकि, वोटों का ये अंतर 2019 में सबसे ज्यादा है, मगर भारत के चुनावी इतिहास में यह दूसरी सबसे बड़ी जीत है। पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की बेटी प्रीतम मुंडे ने अक्टूबर 2014 में उप चुनाव के दौरान महाराष्ट्र की बीड सीट पर 6.96 लाख वोटों से जीत हासिल की थी। पाटिल के जीत का आँकड़ा इससे थोड़ा सा ही कम है।
हैरान करने वाली बात ये है इन चुनावों में पश्चिम बंगाल में माकपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सलीम की भी जमानत जब्त हुई। सलीम 34 साल सत्ता में रहे हैं। सलीम को सिर्फ़ 14.25 वोट मिले हैं।
पूरे बिहार की बात करें, तो नोटा का बटन सर्वाधिक गोपालगंज लोकसभा क्षेत्र में 51,660 मतदाताओं ने दबाया, जो देश में सबसे ज्यादा है। इस सीट पर जदयू के अजय कुमार सुमन को जीत मिली, जिन्होंने राजद उम्मीदवार सुरेंद्र राम को 2.86 लाख वोटों से शिकस्त दी।
ख़बर है कि प्रधानमंत्री मोदी का बनारस में भव्य स्वागत किया जाएगा। उनका यह ऐतिहासिक स्वागत एक सांसद के रूप में नहीं बल्कि एक महानायक के रूप में किया जाएगा। पीएम मोदी 28 मई को विमान से बाबतपुर एयरपोर्ट आने के बाद जनता का आभार व्यक्त करने सड़कों पर निकलेंगे।
दलाई लामा ने भारत के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि भारत की उदारता और दयाशीलता की वजह से ही वो लोग निर्वासन के बावजूद अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को बचा कर रख पाए।
दिग्विजय सिंह को भोपाल सीट से विजयी बनाने के लिए महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद ने कुल 5 क्विंटल मिर्च डालकर एक विशाल हवन किया था और वहीं प्रतिज्ञा ली थी कि अगर कॉन्ग्रेस ये सीट हारती है, तो वह इसी हवनकुण्ड में समाधि ले लेंगे।
लोकसभा चुनाव में न केवल जातीय गणित फेल हुआ है, बल्कि वंशवादी राजनीति को भी भारी झटका लगा है। राजनीतिक परिवार से आने वाले अधिकांश उम्मीदवारों को इस बार हार का सामना करना पड़ा है।
इस बैठक में भी नरेंद्र मोदी को एनडीए का नेता चुना जाएगा। इसके बाद मंत्रिमंडल गठन और पोर्टफोलियो को लेकर अमित शाह कल और परसो अलग-अलग एनडीए सहयोगियों के साथ भी विचार विमर्श करेंगे।
एक आतंकवादी संगठन के सरगना को अलगाववादी नेता कहना न केवल भ्रम फैलाने जैसा है, बल्कि आतंकवादियों द्वारा मानवता पर किए गए क्रूर अत्याचारों पर पर्दा डालने के भी समान है, जो किसी अपराध से कम नहीं।
विस्फोट दोपहर को करीब 01:20 मिनट पर हुआ। पुलिस प्रवक्ता फिरदौस फरामर्ज ने रैहान के मारे जाने की पुष्टि की और कहा कि जाँचकर्ता विस्फोट की प्रकृति की जाँच कर रहे हैं।
"साध्वी प्रज्ञा की भाजपा से उम्मीदवारी ‘भगवा या हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा' के खिलाफ भाजपा का सत्याग्रह है।" लोकसभा उम्मीदवार घोषित होने के पहले साध्वी प्रज्ञा ने भी एक सवाल के जवाब में कहा था, ‘‘मैं धर्मयुद्ध के लिए तैयार हूँ।''
इस घटना को देखने के बाद गाँव में पुलिस तैनात कर दी गई है। खबर के अनुसार सीओ आलोक कुमार सिंह व थाना प्रभारी प्रेमचंद सिंह पुलिस फोर्स के साथ मौके पर मौजूद हैं।
भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर बिना किसी पुख्ता सबूत या तथ्य के निराधार आरोप लगाए जाने पर औंधे मुँह गिरे राहुल गाँधी को जनता ने मुँहतोड़ जवाब दिया है। वैसे इसकी संभावना भी कम ही है कि इतना कुछ होने के बाद भी वो इससे कुछ सीख ले पाएँगे।
यह कहना ग़लत नहीं होगा कि राहुल गाँधी हमेशा इसी फ़िराक में रहे कि मोदी कब कोई चूक करें और फिर उन्हें मुद्दा बनाकर जनता के समक्ष उनकी छवि को धूमिल किया जा सके।
"यूपी कांग्रेस के लिए परिणाम निराशाजनक हैं। अपनी ज़िम्मेदारी को सफ़ल तरीके से नहीं निभा पाने के लिए ख़ुद को दोषी पाता हूँ। नेतृत्व से मिलकर अपनी बात रखूँगा।"
रामचंद्र गुहा ने कहा, "राहुल गाँधी ने अपना आत्मसम्मान, राजनीतिक कद दोनों ही गँवा दिया है। मैं माँग करता हूँ कि कॉन्ग्रेस को अब एक नए नेतृत्व की जरूरत है, लेकिन कॉन्ग्रेस के पास वो भी नहीं है।”
"तुमने जिस ख़ून को मक़्तल में दबाना चाहा, आज वह कूचा-ओ-बाज़ार में आ निकला है। कहीं शोला, कहीं नारा, कहीं पत्थर बनकर" शायर साहिर लुधियानवी ने ये पंक्तियाँ 23 मई 2019 की सुबह को ध्यान में रखकर नहीं लिखी थीं। ये पंक्तियाँ लिखी जा चुकी हैं, ठीक उसी तरह जिस तरह नरेंद्र मोदी को एक बार फिर देश ने सर आँखों पर बिठा लिया है।
बसपा से गठबंधन होने के बाद सपा के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अपनी नाराज़गी जाहिर की थी। उनका कहना था कि उनके बेटे अखिलेश ने उनसे बिना पूछे ये कदम उठाया।
इससे पहले शारदा चिट फंड घोटाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के क़रीबी राजीव कुमार को तगड़ा झटका दिया था।
ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में रॉबर्ट वाड्रा की जमानत रद्द करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। गौरतलब है कि इस मामले में एक ट्रायल कोर्ट ने 1 अप्रैल को अग्रिम जमानत दी थी।
मायावती ने यूपी में कुछ सीटों पर गठबंधन को मिली जीत को भाजपा की सोची-समझी साजिश बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने ऐसा इसलिए किया है ताकि चुनाव पूरी तरह से प्रभावित नजर न आए और कोई सवाल न उठा सके।
प्रियंका गाँधी अक्सर ईरानी पर यह आरोप लगाती थी कि वो एक बाहरी व्यक्ति हैं और उन्हें अमेठी के मतदाताओं की कोई परवाह नहीं है। उनके इन बेबुनियादी आरोपों का जवाब, राहुल को न चुनकर स्मृति को चुनकर जनता ने ख़ुद ही दे दिया।
तस्वीर पूरी तरह साफ़ हो चुकी है और स्मृति ईरानी को हर जगह से जीत की बधाइयाँ मिल रही हैं, और राहुल गाँधी खुद अपनी हार स्वीकार चुके हैं तो सोशल मीडिया यूजर्स सिद्धू से उनसे इस्तीफे की माँग कर रहे हैं।
एएनआई के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में शनिवार (मई 25, 2019) को कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक होगी। जिसमें पार्टी की हार की वजहों पर चर्चा करने करने के साथ ही कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर किसी बड़े फैसले की भी उम्मीद की जा रही है।
एग्जिट पोल के दिन से ही नरेंद्र मोदी की यात्रा और गुफा वाली तस्वीरों को छोड़कर इस संक्रामक मीडिया गिरोह की एक टुटपुँजिया टुकड़ी को गोभी के पत्तों में कीड़े होने की जाँच करते हुए देखा गया है।
स्वरा भास्कर उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने भाजपा को सत्ता से हटाने से लिए विपक्षी नेताओ के लिए कैंपेनिंग की थी। लेकिन मोदी लहर के आगे उनका जलवा नहीं चल पाया। वो सभी कैंडिडेट्स रुझानों में भाजपा नेताओं से पिछड़ते नजर आए, जिनकी कैम्पेनिंग करने के लिए स्वरा ने...
कॉन्ग्रेस को अब राहुल गाँधी के आगे सोचना होगा, एक नेता और देश के नेतृत्त्व के लिए वे स्वयं को सर्वोत्तम प्रत्याशी साबित नहीं कर पाए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि वे स्वयं भी प्रधानमंत्री बनना नहीं चाहते हैं और उन्हें पार्टी जबरदस्ती नेता बना कर रखना चाहती है।
कुछ दुखद घटनाओं का स्मरण करें तो कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर में भाजपा कार्यकर्ता अपूर्बा चक्रवर्ती को तृणमूल के गुंडों ने बेरहमी से पीटा था।
कुछ ट्रोल करने वाले लिख रहे हैं कि प्रकाश राज के पास अभी भी टाइम है, मोदी से नफरत करना छोड़ दें। वहीं, कुछ ने तो उन्हें डूबकर मर जाने की भी सलाह दे डाली।
मुख्यमंत्री कुमारस्वामी अपने पद से त्यागपत्र दे सकते हैं। कर्नाटक में सत्ताधारी दल के 17 विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं। तृणमूल के 47 विधायक पार्टी छोड़ने का मूड बना रहे हैं।