विमर्शों का कोई अंतिम या लिखित निष्कर्ष निकले यह आवश्यक नहीं पर विमर्श हो यह आवश्यक है क्योंकि वर्तमान काल भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र की यात्रा के मूल्यांकन का काल है।
नए कृषि कानूनों की वापसी की प्रक्रिया भी शुरू हो गई, लेकिन MSP समेत दूसरी कई माँगों के नाम पर किसान नेता बॉर्डर और महापंचायत बुलाकर शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं।
हरिश्चंद्र श्रीवर्धनकर अब इस दुनिया में नहीं हैं। देविका रोतावन तंगहाली में जीवन गुजार रही हैं। इन दोनों को 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुआ हमला जोड़ता है।
'उनके घर एक कुत्ता भी नहीं जाता' - ये शब्द थे एक CPI(M) मुख्यमंत्री के, बलिदानी मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के परिवार के लिए। पढ़िए कैसे एक बहादुर जवान ने देश के लिए खुद को बलिदान कर दिया।
26/11 आतंकी हमले में 160 से ज्यादा लोग मारे गए, 300+ घायल हुए थे। इन आतंकियों से लोहा लेते हुए मुंबई पुलिस, होमगॉर्ड, ATS, NSG कमांडों सहित कुल 22 सुरक्षाबलों ने भी अपना बलिदान दिया था।