फॉंसी से कुछ घंटे पहले वो वर्जिश कर रहे थे। जेल के एक अधिकारी ने पूछा- अब इसकी क्या जरूरत? जवाब मिला- हिन्दू हूॅं। पुनर्जन्म में विश्वास रखता हूॅं। अगले जन्म में भारत मॉं की सेवा के लिए और तंदरुस्त होकर लौटना चाहता हूॅं।
कॉन्ग्रेस के लोग जिस तरह से व्हाट्सप्प ग्रुप बना कर कॉलेज कैम्पस में उपद्रव की साज़िश रच रहे हैं, उसका पर्दाफाश होना ज़रूरी है। इन ग्रुप्स में कॉन्ग्रेस से जुड़ाव छिपा कर उपद्रव को न्यूट्रल प्रोटेस्ट साबित करने की कोशिश की जाती है। जानिए उस ग्रुप के एडमिन्स और मैसेजों के बारे में।
ममता ने इन वारदातों के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि उन्हें हिंसा फैलाने के लिए भाजपा से रुपए मिले थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 'राज्य की बाहरी ताक़तों' ने मुस्लिम समुदाय का हितैषी होने का दावा करते हुए ये तड़फोड़ मचाई।
"शनिवार को ही राहुल गाँधी की रीलॉन्चिंग के लिए रैली हुई थी और अगले ही दिन हिंसा भड़क गई। उनके मुताबिक विपक्ष नागरिकता कानून पर हिंदू-मुस्लिम कर विभाजनकारी नीति अपना रहा है और लोगों को गलत जानकारी दी जा रही है।"
मीडिया के कुछ बड़े नाम हैं, जो लदीदा और आयशा को वर्षों से तैयार कर रहे थे। एक 317 लोगों के कातिल याकूब की समर्थक है, दूसरी काफ़िरों के ख़िलाफ़ जिहाद की बात करती है। सूडानी आंदोलन की तर्ज पर इन्हें नायिकाओं की तरह पेश किया गया। जामिया के इस कमाल के स्क्रिप्ट का सूत्रधार कौन?
30 सितंबर को पीड़िता के घर पर मारपीट करने के मामले में उसने एसपी को प्रार्थना-पत्र दिया था। आरोपितों ने हाईकोर्ट से अग्रिम ज़मामत ले रखी थी, इसलिए उनकी गिरफ़्तारी नहीं की गई। इस मामले में मुक़दमा दर्ज करने के साथ पुलिस विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।
''उन्होंने मेरा मोबाइल फोन भी छीन लिया था क्योंकि मैंने उनके दुर्व्यवहार का वीडियो बना लिया था। ऐसा उन्होंने इसलिए किया जिससे वो सबूतों को मिटा सकें। इससे पहले सितंबर महीने में भारी बारिश के दौरान भी मुझे घर से निकाल दिया था पर अदालत के हस्तक्षेप के बाद वे अपने घर में वापस लौट पाई थीं।''
CAA का किसी भी सूरत में भारत के नागरिकों से सरोकार नहीं है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। बावजूद इसके हिंसा। लगता है नागरिकता संशोधन कानून तो महज बहाना है। साजिशें गहरी हैं। इन साजिशों का पता लगाया जाना वक्ती जरूरत है।
अपने ट्वीट में अपर्णा यादव ने जामिया मिलिया, NRC बिल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और 16 दिसंबर के हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए लिखा, “जो भारत का है उसे रजिस्टर में अंकित होने में क्या समस्या है?”
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केस को लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर किया गया था। 5 अगस्त से ही नियमित सुनवाई शुरू कर दी गई थी। सुनवाई बंद कमरे में हो रही थी। इस दौरान अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों और बचाव पक्ष के 9 गवाहों के बीच जिरह हुई।
इससे पहले भी जामिया में हिंसा को लेकर आप का दोहरा रवैया सामने आ चुका है। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ट्विटर पर दिल्ली पुलिस पर आग लगाने का इल्जाम लगाया था। वहीं, एक वीडियो में हिंसक भीड़ की अगुवाई करते पार्टी विधायक अमानतुल्लाह नजर आए थे।
छात्रों ने कैमरामैन के साथ भी धक्का-मुक्की की और कहा कि एबीपी न्यूज़ बिका हुआ है, वो कुछ भी सही नहीं दिखा रहा। इससे पहले जामिया के छात्रों ने ज़ी न्यूज़ की पत्रकार के साथ बदतमीजी की थी।
पायल को बूॅंदी पुलिस ने रविवार को अहमदाबाद स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था। उन पर नेहरू को लेकर सोशल मीडिया में आपत्तिजनक पोस्ट करने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थन में सोशल मीडिया में 'आई स्टैंड विथ पायल रोहतगी' ट्रेंड करने लगा था।
जामिया नगर में शूट किए गए इस वीडियो के छठे सेकंड में आप सुन सकते हैं कि एक व्यक्ति यह कहता दिखता है कि वो मोदी, अमित शाह और हिन्दुओं से 'आज़ादी' लेकर रहेंगे।
"अगर उनमें से 70% लोग अमित शाह का समर्थन करते हैं, तो बीजेपी यहाँ सत्ता में आ जाएगी। तब आप अपना सिर नहीं उठा सकेंगे, जैसा वे (बीजेपी) उत्तर प्रदेश में करते हैं। तब कोई भी सड़कों पर नहीं आएगा।"
सरिता और अनुज के अनुसार रविवार की सुबह वे दवाई लेने के लिए घर से निकलने वाले थे। तभी सरिता के मायके पक्ष से 20 लोगों ने उनपर हमला बोला और लाठी-डंडो से उनसे मारपीट की गई। उनपर पत्थर बरसाए गए।
अफवाहों को चारों तरफ़ से नकारे जाने के बाद भी सोशल मीडिया पर पुलिस की गोली से जामिया के छात्रों के मारे जाने की ख़बरें लगातार सर्कुलेट होती रहीं। न सिर्फ़ प्रोपेगेंडा पोर्टलों ने बल्कि कुछ पत्रकारों ने भी छात्रों को भड़काने के लिए झूठी ख़बरें शेयर की।
झारखंड की एक चुनावी सभा में राहुल गाँधी ने कहा था, “पहले 'मेक इन इंडिया' था, लेकिन अब यह 'रेप इन इंडिया' बन गया है।” इस बयान को लेकर उनकी काफी किरकिरी हुई थी। लोकसभा में भाजपा ने इसके लिए उनसे माफी की मॉंग भी की थी।
अब्दुल्ला रामपुर की स्वार विधानसभा सीट से 2017 में चुनाव जीते थे। नवाब काज़िम ने हाई कोर्ट में उनके निर्वाचन को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि 25 साल से कम उम्र होने के कारण अब्दुल्ला चुनाव लड़ने के योग्य नहीं थे।
पुलिस ने बताया कि देर रात छात्रों ने नारेबाजी की तो उन्हें शांत करा दिया गया। इसके बाद सुबह दोबारा करीब 150 छात्रों ने पत्थरबाजी की। लेकिन, हालात पर काबू पाने में पुलिस को ज्यादा देर नहीं लगी।
सावरकर को लेकर राहुल गॉंधी की टिप्पणी पर भाजपा और शिवसेना का आक्रामक रवैया बरकरार है। इसका असर आज से शुरू हुए विधानसभा के शीतकालीन सत्र पर भी दिखा। इस बीच, केंद्रीय मंत्री अठावले ने राज्य में सियासी भूकंप के संकेत दिए हैं।
"छात्र होने का मतलब यह नहीं है कि वे कानून-व्यवस्था अपने हाथ में ले सकते हैं। हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अधिकारों के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुॅंचाया जा सकता। ऐसे हालात में पुलिस को कदम उठाना ही होगा।"
तिहाड़ जेल में बंद निर्भया मामले के चारों दोषियों को इस हफ्ते फॉंसी दी जा सकती है। जल्लादों को वन टाइम मेहनताना मिलता है और यह रकम वह राज्य तय करता है जहॉं फॉंसी देने के लिए वे बुलाए जाते हैं।
बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने एनआरसी का भारत के साथ संबंधों पर विपरीत असर पड़ने की खबरों को किया खारिज। कहा, भारत के साथ संबंध काफी अच्छे हैं और एनआरसी से इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
मालदा, उत्तर दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जिले में इंटरनेट सेवा पर रोक लगाई गई है। नदिया, बीरभूम, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और हावड़ा जिलों में हिंसा, लूट और आगजनी की घटनाएँ सामने आई हैं।
यूनिवर्सिटी 5 जनवरी तक बंद कर दिया गया है। सुरक्षा लिहाज से अलीगढ़ में इंटरनेट सेवाएँ भी बंद कर दी गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 6 जिलों मेरठ, बुलंदशहर, कासगंज, बागपत, सहारनपुर एवं बरेली में एहतियातन धारा 144 लागू की गई है।
दिल्ली के जामिया नगर में जहॉं यह यूनिवर्सिटी स्थित है जिहादी नारे लगाए गए। कथित प्रदर्शनकारी 'हिंदुओ से लेंगे आजादी, छीन के लेंगे आजादी और लड़ के लेंगे आजादी' जैसे नारे लगा रहे थे। हिंसा भी हुई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 50 छात्रों को हिरासत में लिया। हालॉंकि देर रात उन्हें छोड़ दिया गया।
सिसोदिया ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने बसों में आग लगाई है। लेकिन जो फोटो शेयर की उसमें पुलिस आग बुझाती हुई दिख रही है। जहाँ यह घटना हुई वहाँ जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र प्रदर्शन कर रहे थे और आप विधायक अमनतुल्लाह ख़ान भी वहाँ देखे गए थे।
नूपुर ने सोशल मीडिया में एक कमेंट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि दुआ करनी चाहिए कि मोदी जिस नाव पर बैठें, वो नाव ही डूब जाए। इसके बाद उन्होंने दुआ करते हुए लिखा कि काश नदी में सुनामी आ जाए और मोदी की नाव डूब जाए।
जातिगत भेदभाव के आरोपों में घिरे प्रोफेसर दिलीप मंडल और मुकेश कुमार जॉंच पूरी होने तक माखनलाल यूनिवर्सिटी के कैंपस में प्रवेश नहीं कर पाएँगे। लेकिन, उससे पहले छात्रों के साथ जो कुछ हुआ वह हतप्रभ करने वाला था। पीड़ित छात्रों की जुबानी सुनिए उस रात की प्रताड़ना।
प्रदर्शन के दौरान जहाँ हिंसक घटना हुई, वहाँ AAP विधायक अमानतुल्लाह ख़ान भी मौजूद थे। एक तरफ केजरीवाल ऐसी घटना को अस्वीकार्य बता रहे हैं, दूसरी तरफ उनके MLA पर हिंसक भीड़ की अगुवाई करने के आरोप लग रहे हैं।
आठ दिसंबर को पीड़िता दादी के घर जाने के लिए हशमाबाद रोड पर खड़ी थी। इस दौरान ऑटो रिक्शा चालक आमिर उनके पास आया और दादी के घर तक लिफ़्ट देने की बात कही। लेकिन, दोनों बहनों को लेकर वह वाट्टेपल्ली चला गया और उन्हें बंधक बना लिया।
भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने आशंका जताई है कि ये दिल्ली में गोधरा दोहराने की साज़िश है। वहीं मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा है कि विरोध-प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए और इस तरह की हिंसा स्वीकार्य नहीं है।
"CAB में नागरिकता देने का प्रावधान है लेने का नहीं। गजवा-ए-हिंद के समर्थक केरल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी या अन्य जगह पर उपद्रव कर रहे हैं। यह गजवा-ए-हिंद के समर्थक हो सकते हैं, हिंदुस्तान के नहीं।"
ऐसा लगता है कि ममता ने विधानसभा चुनाव से पहले अपना वोट बैंक दॉंव पर लगा दिया है। मुस्लिम साथ बने ही रहेंगे, इसकी गारंटी नहीं है। ओवैसी सेंधमारी को तैयार हैं। इधर, मुस्लिम दंगाइयों के कारण हिन्दुओं में से अधिकतर भाजपा की तरफ रुख करते दिख रहे हैं।
गुरु यानी गुरु प्रसाद। सचिन तेंदुलकर उनसे 19 साल पहले मिले थे। अब एक वीडियो जारी कर उनकी तलाश करने में लोगों से मदद मॉंगी है। ऐसा क्या है गुरु में खास कि खुद तलाश रहे क्रिकेट के भगवान?
उनकी नज़र में हनुमान चालीसा का पाठ कर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने वाले छात्र 'धब्बा' हैं। लेकिन, स्टेशन पर लोगों को बंधक बना कर ट्रेन परिचालन ठप्प करने वालों से शांति की अपील करना भी उन्हें गॅंवारा नहीं। शायद इसलिए क्योंकि दंगाई अपने ही कौम के हैं।
"कॉन्ग्रेस द्वारा दुनिया में हिंदुस्तान में बदनाम करने का काम हो रहा है। जो काम लंदन में हमेशा पाकिस्तान करता रहता है, पाकिस्तान के पैसों से कुछ बिकाऊ लोग करते रहते हैं, पहली बार वह काम कॉन्ग्रेस ने किया है। इससे ज्यादा शर्म की बात क्या हो सकती है?"
पायल रोहतगी सोशल मीडिया में वीडियो के जरिए अपनी बात रखती रहती हैं। उन पर नेहरू को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप है। उनकी गिरफ्तारी के बाद से ट्रेंड हो रहा है 'आई स्टैंड विथ पायल रोहतगी'।
हिंसक प्रदर्शन का ठीकरा जामिया प्रशासन ने 'बाहरी' लोगों के सिर फोड़ा हो, लेकिन कैंपस की दीवारों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ख़िलाफ़ ख़ूब ज़हर उगला गया है।
"चारों को पहले पीछे की ओर (पीठ की तरफ) दोनों हाथ, फिर रस्सी से दोनों पाँव बाँध दूँगा। चारों को गले में फंदा डालकर खड़ा कर दूँगा। जैसे ही जेलर रुमाल हिलाकर इशारा करेगा, एक साथ चारों ही फंदों के तख्ते का लीवर खींच दूँगा।"
कथित कॉमेडिन कुणाल कमरा के फैन का जब बंगाल में असली दंगाइयों से पाला पड़ा तो क्या हुआ, पढ़िए एक वकील की आपबीती। दंगाइयों के बीच फॅंसने से कुछ वक्त पहले ही वकील साहब ने पीएम मोदी का मजाक उड़ाते हुए कमरा का एक जोक शेयर किया था।
एक 9 साल की बच्ची से बलात्कार का दोषी। दूसरे ने महिला का सिर धड़ से अलग किया। तीसरा अपने ही 6 सप्ताह के बेटे की हत्या का गुनहगार। सबको मिल गई माफी। जानें कैसे हुआ...
"शिवसेना अपने एजेंडे पर कायम है। उसने CAB पर केंद्र का साथ दिया और अब सावरकर पर भी उसे कॉन्ग्रेस का रवैया बर्दाश्त नहीं है। फिर भी कांग्रेस महाराष्ट्र सरकार में बनी हुई है। यह नाटकबाजी है।"