2019 के लोकसभा चुनावों के रुझानों से पता चलता है कि एनडीए सरकार सत्ता में वापस आ रही है, कॉन्ग्रेस समर्थित मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र नरेंद्र मोदी के साथ तालमेल बिठाने का मौका खोजने की कोशिश में अपने पुराने आकाओं गिरोहों को छोड़ने का यह एक संकेत है। या इस बात का डर कि अब और कॉन्ग्रेसी या देश विरोधी एजेंडा चलाना संभव नहीं।
इंदिरा गाँधी वर्जन-2 की छवि गढ़ने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर चल ही रही थी कि अचानक एक दिन मुंगेरीलाल ने सपना देखते-देखते अपने एकमात्र दूध के घड़े पर भी लात दे मारी और उसे भी फोड़ दिया। इस तरह से मीडिया गिरोह से लेकर तमाम मोदी विरोधियों के सपने और अरमानों का शीघ्रपतन हो गया।
FIR दर्ज होने के बाद नारायण भूमिगत हो गया था और पुलिस से बचने के लिए बार-बार अपनी लोकेशन बदल रहा था। दिसंबर, 2013 में नारायण को हरियाणा-दिल्ली सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया था।
हिन्दुओं की धरती है, सर्वसमावेशी विचार के लोग हैं, सहिष्णुता के प्रवर्तक और स्नेह में डूबे हुए लोग कि इस्लामी आक्रमणकारियों, इस्लामी बलात्कारियों, इस्लामी और विदेशी हत्यारों को भी बसने की ज़मीन दी। और कितने उदाहरण चाहिए? ऐसे लोग किसी को क्या डराएँगे? हम तो स्वयं ही हर पर्व पर एक खास तरह के आतंक से डर जीते रहे हैं। अब तो तुम हमें, जीने दो, जीने दो!
गिरिरज सिंह ने प्रशासन को भी निशाने पर लिया और कहा कि जब उनके द्वारा कोई बयान दिया जाता है, तो उस पर चुनाव आयोग एवं प्रशासन द्वारा तुरंत संज्ञान लेता है। लेकिन जब शेहला रशीद द्वारा हिंदू भावनाओं को भड़काया गया तब सारे विरोधी लोग कहाँ हैं?
श्यामपुर में एक सभा को संबोधित करते हुए प्रज्ञा ठाकुर ने कॉन्ग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि वो साधु-संतों पर भगवा आतंकवाद का आरोप लगाकर उन्हें जेल भेजती है।
कॉन्ग्रेस नेता राधाकृष्णा विखे पाटिल ने विधानसभा के नेता विपक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक चव्हाण ने बताया कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने उनके इस्तीफे को मंजूर कर लिया है
यहाँ पर नक्सली पहले भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। गत वर्ष यहाँ सरकारी भवन को विस्फोटक से उड़ाने से लेकर थाने पर हमले की घटनाएँ हो चुकी हैं।
अपने देश में सुन्नी समुदाय से उत्पीड़न का सामना करते हुए, अहमदिया सम्प्रदाय के शरणार्थी पाँच साल पहले पाकिस्तान से भागकर यहाँ आए थे। इन शरणार्थियों को यहाँ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की मदद से बसाया गया है।
लखनऊ में लगभग 6,000 ट्रांसजेंडर रहते हैं, लेकिन उनमें से केवल 150 के पास ही उनके वोटर आईडी कार्ड हैं। लखनऊ किन्नर सोसाइटी की अध्यक्ष पायल का कहना है कि सिस्टम उनके खिलाफ धांधली करता है, जिससे उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन होता है।
मणिकर्णिका घाट पर स्थित अपने निवास स्थान पर ET को दिए साक्षात्कार में जगदीश कहते हैं कि जिस तरह नरेंद्र मोदी ने कार्य किया है उसे देखते हुए उनके आसपास कोई नहीं हैं।
वफ़ादार मीडिया को उम्मीद थी कि प्रियंका गाँधी वाड्रा उनकी रक्षक होंगी। और इसीलिए उन्होंने भाई-बहन की जोड़ी को मसीहा के रूप में प्रचारित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें यह एहसास हो चला है कि वो अब तक किसी हारने वाले घोड़े पर ही दाँव लगाते रहे।
विकास की योजनाओं का मूल्यांकन समय करेगा ही लेकिन नरेंद्र मोदी ने देश के जनमानस के मन पर एक छाप जरुर छोड़ी है। भविष्य में जब कभी नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे तब लोग इतना ज़रूर कहेंगे की शासन तंत्र के तंतुओं को अलग तरीके से बुनने वाला एक ऐसा नेता भी था।
अपूर्वा शुक्ला कॉन्ग्रेस पार्टी में करियर बनाना चाहती थी। वह रोहित की राजनीतिक पृष्ठभूमि को सीधी बनाकर विधानसभा का टिकट चाहती थी लेकिन रोहित ख़ुद स्वास्थ्य कारणों से राजनीति में संघर्ष कर रहे थे। अपूर्वा पहले भी कॉन्ग्रेस पार्टी में पद हैं।
घर संख्या 1 के निवासी ने भूपेंद्र चौबे को बताया कि ये घर 5 वर्ष पहले (मोदी के आने के बाद) सरकारी रुपयों से बना। इसमें कमरा, बाथरूम, किचन वगैरह सबकुछ है। स्थानीय निवासियों ने कहा कि पक्का घर मिलने से झोंपड़ियों में रहा करते थे।
"हम एक समय में कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन का सपना भी नहीं देख सकते थे। लेकिन देश में मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, हमने एक तरह के टाई-अप के लिए कॉन्ग्रेस से संपर्क किया। हमने कॉन्ग्रेस को समझाया कि मोदी-शाह को हराना क्यों महत्वपूर्ण है।"
कॉन्ग्रेस के मुख्यमंत्री पहले भी ऐसा कर चुके हैं। महत्वपूर्ण पदों पर करीबी अफसरों को बैठाने के लिए कॉन्ग्रेस सरकारों ने बड़े पैमाने पर तबादले किए थे। यह बात ज्यादा पुरानी भी नहीं, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान की है - पिछले साल की।
कोर्ट ने इस मामले में बड़ी साजिश का इशारा करते हुए कहा कि इसके पीछे बड़े और ताक़तवर लोग हो सकते हैं, लेकिन वे (साजिशकर्ता) जान लें कि वे आग से खेल रहे हैं।
Faking News के लेख में जातिगत नजरिया तलाश कर 'दी लल्लनटॉप' ने इसे फ़ौरन लपक लिया और इसके सम्पादक ने आम चुनावों के बीच में इस खबर को प्रकाशित करने का निर्णय लिया। इंडिया टुडे समूह के इस समाचार वेबसाइट ने अपने पाठकों को मारक मजा देने की मम्मी कसम खाई है। हो सकता है, इसी कारण अपने दैनिक ‘कट्टर पाठकों’ की सोचने की क्षमता को भाँपते हुए ही उन्होंने इस रिपोर्ट समझाने का एक प्रयास किया हो।
ख़ौफ़ ऐसा कि एक-एक कर इलाहाबाद हाईकोर्ट के 10 जजों ने उसका केस सुनने से इनकार कर दिया। यूपी का कोई भी जेल उसे रखना नहीं चाहता। वह व्यापारियों को उठवा कर जेल में ही पिटाई करता है। 5 बार विधायक और 1 बार सांसद रहा है खूँखार अतीक अहमद।
बुधवार को अभिभावकों और छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने उस समय ज़ोर पकड़ा जब जी नव्या (G Navya) नाम की एक छात्रा को तेलगू विषय में शून्य अंक प्राप्त हुए, लेकिन जब दोबारा मूल्याँकन किया गया तो उस छात्रा ने 99 अंक प्राप्त किए।
इससे पहले वो पीएम मोदी पर भी निशाना साध चुके हैं। उन्होंने कहा था, “मैं ऐलान करता हूँ कि मोदी से मेरी लड़ाई में जो मेरे सामने आएगा और मुझे रोकने की कोशिश करेगा वो गठबंधन का नाम ले या हाथी का नाम ले, मैं उसको वार करके चूर-चूर कर दूँगा।”
इस फर्जी पत्र का अर्थ यह निकाला जा रहा है कि सुरेश सोनी भाजपा से कह रहे हैं कि भोपाल से भाजपा की प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को बदल कर कोई दूसरा प्रत्याशी चुनाव में उतारा जाए। जबकि सत्य का इससे कोई लेना-देना नहीं है।
यह पहली बार नहीं है कि ममता ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में वोट की अपील की हो। इस महीने की शुरुआत में, दो बांग्लादेशी अभिनेताओं को पश्चिम बंगाल में ममता की TMC के लिए प्रचार करते हुए पाया गया था। बांग्लादेशी अभिनेता फिरदौस अहमद और गाज़ी अदबुन नूर बांग्लादेश के कुछ हिस्सों में TMC के लिए प्रचार कर रहे थे।
सोशल मीडिया पर लगातार फेक न्यूज़ चलाए जा रहे हैं कि इसमें बौद्धों का हाथ है। जबकि श्री लंका की सरकार इस मामले के पीछे नेशनल तौहीद जमात का हाथ देख रही है और खूँखार इस्लामिक आतंकी संगठन ISIS द्वारा इस हमले की ज़िम्मेदारी भी ले ली गई है।
भारतीय रिजर्व बैंक जल्द ही ₹500 और ₹200 के नए नोट जारी करने वाला है। इसकी जानकारी खुद आरबीआई ने ट्वीट के जरिए दी है। ये नए नोट महात्मा गाँधी की नई श्रृंखला में जारी किए जाएँगे।
इसके अलावा दो अन्य मरीज, शोएब और अमृता देवी के साथ भी पूर्व में ऐसा हो चुका है। राज्य स्वास्थ्य अभिकरण द्वारा जवाब तलब करने पर अस्पताल ने ग़लती स्वीकार की।
करीब दस साल पहले फलों की दुकान लगाने वाले मोहम्मद इकबाल अब अरबों की संपत्ति के मालिक हैं। इनकी सहारनपुर में सैंकड़ों एकड़ में फैली ग्लोकल यूनिवर्सिटी भी है।
घायल 38 वर्षीय महिला पुलिसकर्मी को जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया। स्थानीय कॉन्ग्रेस पदाधिकारियों ने कहा कि प्रियंका उसके स्वास्थ्य को लेकर 'पल-पल' की अपडेट भी ले रही हैं। महिला पुलिसकर्मी के पाँव में चोट आई है। उन्हें अस्पताल के ICU वार्ड में रखा गया है।
वो इंडिया के लोग भारत में आकर, किसी और माहौल, किसी और भाषा में, किसी और विषय की बात कर रहे हैं। बेगुसराय की जनता अपना मत देने के लिए बटन दबाती है। दुआ है कि इस 'दबाने' में भी कहीं उन्हें अपने प्रत्याशी के विरोध के स्वर को दबाया जाना न समझ आ जाए!
रवीश मुहल्ले की गली का वो लौंडा है जो किसी लड़की के नाम से हाथ काट लेता है, और लड़की को पता भी नहीं होता कि उसका नाम क्या है। रवीश के ऐसे प्रोग्रामों को देख कर मैं बस इसी इंतज़ार में हूँ कि वो किस दिन कलाई का नस काट कर कहेंगे कि उन्हें कुछ होगा तो ज़िम्मेदार मोदी ही होगा।
कृष्णा फोटोशॉप पर लोगों से हमेशा मसखरी करते हैं- खासकर नेताओं को तो वह बिलकुल नहीं बख्शते। यहाँ तक कि मोदी-शाह भी उनके फोटोशॉप के हमले से ‘महफूज’ नहीं रह पाए।
ऐसे राजनेताओं के लिए महिलाएँ आज भी ‘माल’ हैं। ऐसी गिरी मानसिकता पर जनता ने तो अपना आक्रोश व्यक्त किया ही। अब देखना है आगे चुनाव आयोग इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेता है। वैसे लोगों ने चुनाव आयोग से इस बात का संज्ञान लेने की अपील की है।
अमीषा यही चीज़ 5 साल पहले भी कर चुकीं हैं। 5 साल पहले भी वह कॉन्ग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में रोड शो करते हुए गुजरात में विकास की तारीफ़ करने लगीं थीं।
मतदान स्थल पर पहुँचे जाकिर पाशा को जिसने भी पैर से मतदान करते देखा, उनकी प्रशंसा किए बिना नहीं रह सकता। इस फोटो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर जाकिर लोगों के हीरो बन गए।
कैप्टन की इस घोषणा में उनके हार का डर साफ-साफ झलक रहा है। उन्हें लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के जीत पर संदेह है और शायद वो चुनाव के परिणाम को लेकर भी थोड़े से डरे हुए लग रहे हैं।
अब जनता इनके हर प्रोपेगेंडा का उतनी ही तत्परता से जवाब देती है। इनका हर झूठ इनकी मक्कारी का गवाही देता है। पकड़े जाने पर अक्सर अपना पोस्ट या ट्वीट डिलीट कर ये बचने की कोशिश करते हैं। लेकिन अपने गलतियों की माफ़ी ये पूरा गिरोह कभी नहीं माँगता।
जमीन पर मतदाताओं तक महागठबंधन की खबर पहुँचा पाने में बसपा कार्यकर्ता विफल रहे हैं। एक बड़ा मतदाता वर्ग हाथी न ढूँढ़ पाने के भ्रम में कमल का बटन दबा आ रहे हैं।
दबी जबान में चर्चा हो रही है कि बंद कमरे में कुछ लोगों ने मफ़लर वाले के साथ वो कर दिया है जो कम्बल उढ़ा कर किया जाता है। कविराज विष-वास सोशल मीडिया पर इसपर कटाक्ष भी करते दिखे। यकीन नहीं होता, इतिहास खुद को दोहराता है, ऐसा सुना था, मगर इतनी समानताएँ?
सुमित अपनी बेरोजगारी से काफी मानसिक तनाव में था। उसे नौकरी नहीं मिल रही थी, आर्थिक तंगी ने घेर लिया था। ऐसे में उसने चोरी करने की योजना बनाई। चोरी के बारे में उसने अपनी पत्नी से बात की। लेकिन पत्नी अंशुबाला ने ऐसी किसी हरकत में उसका साथ देने से इनकार कर दिया तो...
लोगों ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर एक राजनेता ख़ुद अपना जूता नहीं उतार सकता तो जनता की सेवा क्या करेगा? शत्रुघ्न सिन्हा पटना से सांसद हैं और इस बार उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी भाजपा छोड़ कॉन्ग्रेस का दामन थामा है।
यूएनपी सांसद आशु मारासिंघे ने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए श्रीलंका में बुर्के पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक निजी सदस्य विधेयक लाने की योजना बना रहे हैं।”