राजदीप ने यहाँ तक कहा कि मोदी के यहाँ से चुनाव लड़ने की वजह से वाराणसी की सीट VVIP संसदीय सीट में बदल चुकी है। जिसका असर वहाँ पर हो रहे परिवर्तन के रूप में देखा जा सकता है।
"वीवीपैट और ईवीएम पर्चियों का मिलान मतगणना शुरू होने से पहले की जानी चाहिए। ट्रेंड्स जारी हो जाने के बाद ये प्रकिया निष्फल हो जाएगी। इसके कारण प्रभावित उम्मीदवार विरोध प्रदर्शन करेंगे, जिसके कारण क़ानून व्यवस्था बिगड़ सकती है।"
ख़बर के अनुसार, एजेंसी ने विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार के समक्ष श्री गुप्ता के ख़िलाफ़ पूरक आरोप पत्र दायर किया। उन्हें ED ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ़्तार किया गया था।
इस समय भाजपा और मोदी की ‘लहर’ किस कदर चल रही है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कॉन्ग्रेस के द्वारा कराया गया एग्जिट पोल भी कह रहा है, “आएगा तो मोदी ही!” और इतने के बावजूद राहुल गाँधी एग्जिट पोल्स को फर्जी बता कर अपने समर्थकों को अंतिम ढाँढ़स बँधा रहे हैं।
AAP के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी की एक वीडियो क्लिप ट्विटर पर शेयर की। इसमें अर्नब EVM हैकिंग को लेकर विपक्षी दलों पर तंज कसते नज़र आए। इसी वीडियो के जवाब में पागलखाने से लेकर डूब मरने तक की बात लिखी गई।
ऐसे नेताओं को ईवीएम का नट-बोल्ट खोलने के लिए पेचकस और पिलास दे देना चाहिए ताकि वे वोट देने के बाद ईवीएम को खोलें और अंदर झाँक कर देख सकें कि आख़िर उनका वोट गया कहाँ, किस पार्टी को गया? ये नेता वोट देने के बाद ईवीएम को खोलेंगे, झाँक कर देख लेंगे कि उनका वोट इच्छित पार्टी को गया है या नहीं और फिर उसे वापस पेचकस से कस सकते हैं।
मोदी विरोध में यह लोग दिमाग से इतने पैदल हो चुके हैं कि प्राइमरी स्कूल स्तर की गणित भी सर के ऊपर से उड़ रही है। इन्हें दिमाग का इलाज कराना चाहिए। ये लोग 2000 वोट को 20 लाख से गुणा भी नहीं कर पाते हैं और चले पत्रकारिता करने!
इससे पहले, चुनाव आयोग ने मतदान में इस्तेमाल की गई मशीनें, 23 मई को हो रही मतगणना से पहले नई मशीनों से बदलने के आरोपों और शिकायतों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताकर खारिज कर दिया था।
इन्होंने सीसीटीवी भी लगा रखे हैं। एक अतिरिक्त टेंट में मॉनिटर स्क्रीन लगाया गया है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज पर लगातार नज़र रखी जा रही है और हर आने-जाने वालों पर गौर किया जा रहा है। नाइट विजन टेक्नोलॉजी और दूरबीन का भी प्रयोग किया जा रहा है।
नीतीश कुमार, प्रकाश सिंह बादल और उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में सहयोगी दलों की बैठक हुई, जिसमें राजग सरकार की योजनाओं की प्रशंसा की गई। गठबंधन ने आगामी सरकार के दौरान 25 लाख करोड़ रुपए खेती को समर्पित करने का संकल्प लिया।
रालोसपा अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने धमकी भरे अंदाज़ में कहा था कि लोगों में इस समय आक्रोश है और ऐसे में अगर ‘रिजल्ट लूटने’ की घटना हुई तो सड़कों पर खून बहेगा। उन्होंने अपने समर्थकों से हथियार उठाने के लिए तैयार रहने को भी कहा है।
4 दिनों का भूख-प्यास जब हावी हुआ तो गुड़िया (1 साल की बच्ची) माँ की लाश का मोह छोड़ते हुए, रेंगते हुए, खेत से बाहर एक मंदिर के पास जा पहुँची। यहाँ कुछ भक्तों की नज़र इस पर गई। उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दी और गुड़िया को अस्पताल तक पहुँचाया।
बाजवा ने नवजोत सिंह सिद्धू से दो टूक कहा है कि अगर वह कैप्टन के अंतर्गत कार्य करने में असमर्थ हैं तो उन्हें मंत्रिमण्डल से इस्तीफा दे देना चाहिए। बाजवा ने कहा कि सिद्धू को जब पता ही नहीं है कि जहाज का कप्तान कौन है, तो उन्हें मंत्रिमंडल से निकाल बाहर किया जाए।
तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने बबलू नामक भाजपा कार्यकर्ता को निशाना बनाया। हमले में बबलू बाल-बाल बच गए। पड़ोसियों के पहुँचने के बाद हमलावर बाइक छोड़ भाग खड़े हुए। भाजपा कार्यकर्ता बबलू का अस्पताल में इलाज चल रहा है। ऐसी कई हिंसक वारदातें हुईं।
इस उपग्रह की खूबी है - सिंथेटिक अपर्चर रडार (synthetic aperture radar) - जिसके कारण यह किसी भी मौसम में काम करता रहेगा, निगरानी रखता रहेगा। RISAT-2B में पूर्णतः स्वदेशी विक्रम प्रोसेसर लगा हुआ है।
रवीश अब अपने दर्शकों से लगभग ब्रेकअप को उतारू प्रेमिका की तरह ब्लॉक करने लगे हैं, वो कहने लगे हैं कि तुम्हारी ही सब गलती थी, तुमने मुझे TRP नहीं दी, तुमने मेरे एजेंडा को प्राथमिकता नहीं माना। जब मुझे तुम्हारी जरूरत थी, तब तुम देशभक्त हो गए।
ऑपइंडिया के पास शुंगलू कमिटी का वह रिपोर्ट है जिसमें अशोक लवासा की बेटी और बेटे के अनुचित लाभ उठाने की बात कही गई है। शुंगलू कमिटी ने ये साफ बताया है कि सिलेक्शन कमिटी ने अन्वी लवासा के प्रोजेक्ट ऑफिसर (PO) के रूप में चयन में उन्हें उनके पॉवरफुल संबंधों की वजह से फेवर किया गया।
योजना ही नहीं, देश भी पहले से ही था, तो क्या काम ही न किया जाए? क्या योजना बना देने से ही काम हो जाता है? या फिर पुरानी योजना पर नए तरीके से काम करना और समाज को लाभ पहुँचाना कोई अपराध है? योजना का नाम ही नहीं, उसके क्रियान्वयन को भी मोदी सरकार ने पूरी तरह से बदला।
एंकर स्टूडियो के भीतर इस तरह का चेहरा लेकर आने लगा कि उसे स्टूडियो के बाहर कुछ हिंदुओं ने थप्पड़ मार कर चेहरा सुजा दिया है। एंकर इस तरह से मरा हुआ मुँह लेकर बैठने लगा, और भद्दे ग्राफ़िक्स की मदद से आपको बताने लगा कि हत्या तो बस समुदाय विशेष की ही हो रही है, और कैसे डर फैलाया जा रहा है।
एक घमंड है इन पार्टियों के समर्थकों और मोदी के विरोधियों के भीतर। वो घमंड यह है कि वो जो सोचते हैं, वो जिन्हें चाहते हैं, उन्हें अगर बहुमत नहीं मिल रहा तो जनता पागल है। ये अभिजात्य मानसिकता, ये निम्न स्तर का दंभ, उसी तरीके से दिमाग में चढ़ता है जैसे सत्ता में होने पर पावर का नशा।
कोर्ट ने इन तीनों को पेशी से छूट तो दी ही इसके अलावा आरोपियों के वकीलों को विस्फ़ोट वाली जगह पर जाने की अनुमति भी दी। ग़ौरतलब है कि मालेगाँव में 29 सितंबर 2008 को एक मस्जिद के पास विस्फोट में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे।
विपक्षी दलों ने मतगणना के समय किसी भी मतदान केंद्र पर गड़बड़ी पाए जाने की स्थिति में देशभर में सभी विधानसभा क्षेत्रों में EVM के आँकड़ों के साथ VVPAT मशीन की पर्चियों से मिलान की माँग की थी।
विपक्ष ने मुद्दे नहीं उठाए। विपक्ष ने सनसनी बनाने पर ज़्यादा ध्यान दिया। जस्टिस लोया की मौत को मुद्दा बनाया गया, गलत वित्तीय ज्ञान परोस कर अमित शाह के बेटे की कम्पनी को मुद्दा बनाया गया, अजित डोभाल के बेटों पर माहौल बनाने की कोशिशें हुई, नोटबंदी पर लाशें पैदा की गईं, जीएसटी पर उन व्यापारियों के नुकसान की बात हुई जो कहीं थे ही नहीं!
सोशल मीडिया से लेकर व्हाट्सएप्प पर चलने वाली फेक ख़बरों का बाजार जमकर बढ़ा है। इसी का फायदा उठाकर ये लोग फैक्ट चेक के नाम पर बेहद हास्यास्पद ख़बरों तक का फैक्ट चेक करते हुए देखे जा रहे हैं। यहाँ तक कि MEME और फोटोशॉप तस्वीरों तक का फैक्ट चेक करने वाले लोग खूब फलते-फूलते देखे जा रहे हैं।
ये कहानी है एक ऐसे नेता को अप्रासंगिक बना देने की, जिसके पीछे अमित शाह की रणनीति और योगी के कड़े तेवर थे। इस कहानी के तीन किरदार हैं, तीनों एक से बढ़ कर एक। जानिए कैसे भाजपा ने योजना बना कर, धीमे-धीमे अमल कर ओपी राजभर को निकाल बाहर किया।
सट्टा बाजार में इस बार नरेंद्र मोदी के पीएम बनने को लेकर, अमेठी में राहुल गाँधी को जीतने और यूपी में सपा-बसपा के गठबंधन पर भी खूब पैसे लगे हुए हैं। कुछ पंटर्स के अनुमान के मुताबिक इस बार दुगना पैसा सट्टा में लगा हुआ है।
एग्जिट पोल को ‘गप’ करार देने से शुरू हुआ विपक्ष का स्तर अब खुलेआम हिंसा करने और खून बहाने तक आ गया है। उपेंद्र कुशवाहा ने मतदान परिणाम मनमुताबिक न होने पर सड़कों पर खून बहा देने की धमकी दी है। इस संभावित हिंसा का ठीकरा वे नीतीश और केंद्र की मोदी सरकार के सर भी फोड़ा है।
मायावती ने अपनी संभावित हार के लिए बलि के बकरे तलाशने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्व ऊर्जा मंत्री और विधानसभा में पार्टी के विधायक दल के सचेतक (व्हिप - whip) रामवीर उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
अरुणाचल प्रदेश में नेशनल पिपल्स पार्टी के विधायक तिरोंग अबो और 6 अन्य लोगों की आतंकी हमले में मौत हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, संदिग्ध NSCN के आतंकियों का हाथ इस हमले के पीछे हो सकता है।
18 राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों में 2014 के मुकाबले अधिक मतदान प्रतिशत रहा, जबकि 16 राज्यों में यह 2014 से नीचे चला गया। यूपी, बिहार, महाराष्ट्र और दिल्ली सबसे कम मतदान वाले राज्य रहे जबकि सर्वाधिक मतदान प्रतिशत वाले राज्यों में...
इंडिया टुडे के अनुसार, तीन एग्जिट पोल्स का औसत निकालने पर पता चलता है कि 175 सीटों वाली राज्य की विधानसभा में टीडीपी को मात्र 65 सीटें आएँगी जबकि 106 सीटों के साथ रेड्डी की पार्टी पूर्ण बहुमत के लिए ज़रूरी न्यूनतम आँकड़े से काफ़ी आगे निकल जाएगी।
मनीष सिसोदिया की लीक पर चलते हुए स्वरा भास्कर ने भी ट्विटर पर निर्वाचन आयोग से जवाब माँगा है। उन्होंने पूछा है कि ये सब क्या हो रहा है। उनके मुताबिक बिहार से लेकर हरियाणा तक हर जगह ईवीएम की मशीनें मिल रही हैं।
हैवानियत पर उतारू रामबचन ने अपनी पत्नी को मारने के लिए फावड़े का इस्तेमाल किया। हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद वो तब तक लाश के पास खड़ा रहा जब तक कि मौक़े पर ग्रामीणों की भीड़ इकट्ठी नहीं हो गई।
कुछ दिनों पहले इरीना अकबर ने पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, गायकों, अभिनेताओं और क्रिकेटरों पर निशाना साधते हुए कहा था कि इन लोगों ने वर्षों अपने क्षेत्र में काम कर के जो इज्जत कमाई, उन्होंने पिछले पाँच वर्षों में एक 'हत्यारे' का समर्थन करते हुए ये इज्जत गँवा दी।
ऐसी पार्टी, जो सिर्फ़ 20 सीटों पर ही चुनाव लड़ रही है, उसे वाजपेयी ने 35 सीटें दे दी है। ऐसा कैसे संभव है? क्या डीएमके द्वारा जीती गई एक सीट को दो या डेढ़ गिना जाएगा? 20 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली पार्टी 35 सीटें कैसे जीत सकती है?
जब-जब राजीव गाँधी के हत्यारों को माफ़ करने की बात सामने आती है, तो उन 20 लोगों को क्यों भुला दिया जाता है जिनके नाम के आगे गाँधी नहीं लगा हुआ था? चाहे सोनिया हों या प्रियंका गाँधी वाड्रा, आखिर किस हैसियत से ये लोग उन हत्यारों को रिहा करने या उनकी सजा कम करने की बात करती हैं?
एक वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि कर्नाटक गठबंधन का पहला लक्ष्य अधिकतम लोकसभा सीट जीतने का था लेकिन अब यह लक्ष्य फेल होता दिख रहा है, ऐसे में गठबंधन को जारी रखने में कोई भलाई नहीं है। एग्जिट पोल्स के अनुसार, 28 लोकसभा सीटों में से भाजपा 25 जीत सकती है।
अगर पार्टी और व्यक्ति को विचारधारा से आँका और परखा जाता है तो कन्हैया तो कम्युनिस्ट हैं, हम कैसे मान लें कि कल को देश के उच्च पद पर आसीन होने के बाद कन्हैया इस बात पर जोर नहीं देंगे कि सबको कम्युनिस्ट होना पड़ेगा? कैसे मान लें कि वो 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' जैसे नारे कथित तौर पर दोबारा नहीं लगाएँगे!
Exit Polls से बौखलाई शमा मोहम्मद ने कपिल सिब्बल समर्थित हार्वेस्ट टीवी चैनल पर बरखा दत्त द्वारा एंकर किए जा रहे डिबेट शो में कहा कि उत्तर भारतीय मतदाता दक्षिण भारतीयों की तरह शिक्षित नहीं हैं और वे व्हाट्सप्प मैसेज पर विश्वास करते हैं, मीडिया पर विश्वास करते हैं और जल्दी प्रभावित हो जाते हैं।
"हमारे देश को एक ऐसी सरकार की ज़रूरत है जो सबको साथ लेकर चले और भाईचारा, शांति और समरसता को बढ़ावा दे। दुर्भाग्यपूर्ण रूप से, कुछ राजनीतिक पार्टियाँ ऐसी हैं जो धर्म के आधार पर राजनीति करती हैं। ये सही नहीं है और ऐसी पार्टियों को जाना पड़ेगा।"
इन चुनावों में राजीव गाँधी यकायक मुद्दा बन गए- चुनावी भी, चर्चा का भी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भ्रष्टाचारी कहा, शेखर गुप्ता ने ‘डैशिंग, बाल-बच्चों वाला, युवा प्रधानमंत्री’, और सैम पित्रोदा के अनुसार उनकी जिंदगी में अर्थ ही राजीव गाँधी के भारत में कंधे पर कम्प्यूटर ढो कर लाने से आया।
इससे भी ज्यादा बीबीसी ने प्रियंका की तारीफ़ों के पुल बांधे हैं। प्रियंका ने आज तक अपनी लोकप्रियता साबित नहीं की है, एक भी चुनाव नहीं जीता है, अपनी देखरेख में पार्टी को भी एक भी चुनाव नहीं जितवाया है, फिर भी बीबीसी उन्हें चमत्कारिक और लोकप्रिय बताता है।