शरजील इमाम दिवंगत जदयू नेता अकबर इमाम का बेटा है। हालाँकि, अभी उसका पूरा परिवार पटना रह रहा है। शारजील इमाम आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर साईंस में ग्रेजुएट है। उसके पिता अकबर इमाम जेडीयू की ओर से विधानसभा चुनाव में उतरे थे, लेकिन उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।
पुलिस ने गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रत्येक थाने के आगे भारत माता की पूजा करने की भाजपा की योजना में गतिरोध उत्पन्न किया। भाजपा का कहना है कि उन्होंने तय किया था कि 26 जनवरी के दिन वो पार्टी की ओर से शहर के सभी पुलिस थानों के आगे भारत माता की प्रतिमा रखकर पूजा-अर्चना करेंगे। इस संबंध में सभी थानों को चिट्ठी भेजकर...
तब भी ऐसा ही मजहबी उन्माद था। इसी तरह के नारे और ऐसी ही साजिशें थी। उस समय इसकी आग में कश्मीर के हिंदू जले थे। आज नहीं चेते तो अगला नंबर आपका हो सकता है।
यह देखना हास्यास्पद है कि जब इस CAA-NRC विरोध प्रदर्शन को शुरू करने वाला शाहीन बाग ही शरजील इमाम से पीछा छुड़ाना चाह रहा है, तब यहाँ जेएनयू में अपनी पहचान तलाश रहा BAPSA शरजील के मुस्लिम होने और सताए जाने की बात करते हुए इसमें ब्राह्मणवाद निकाल लाया है।
मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू ने बयान जारी कर बताया कि क्राइम ब्रांच ईटानगर ने शरजील के ख़िलाफ़ मामल दर्ज किया है। खांडू ने कहा कि इस तरह के भड़काऊ बयान देकर भारत की क्षेत्रीय अखंडता और सम्प्रभुता को खंडित करने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
"हिन्दू माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं क्योंकि मुस्लिम अपने बच्चों को जिहादी बना रहे हैं। दंगाई मुस्लिम भीड़ ने 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' का नारा लगाते हुए न सिर्फ़ ईंट-पत्थर फेंके बल्कि गोली चलाई और पेट्रोल बम भी दागे। मुस्लिम महिलाएँ मिर्ची पाउडर फेंक रही थीं।"
सवाल मुस्लिमों की अल्पसंख्यक बने रहने में रूचि को लेकर है। किसी देश में अल्पसंख्यक होना, उस देश की कृपा और मेहरबानी पर आश्रित होने जैसा भाव देता है। बावजूद इसके भारत में अल्पसंख्यक होना एक अवसर माना जाता रहा है। तो क्या अवसरवादिता के लिए...
इस वीडियो में आफरीन फातिमा देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए देखी जा रही है। वीडियो में आफरीन फातिमा सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर और अफजल गुरु की फाँसी के फैसलों पर संदेह जताते हुए...
'केशवानंद भारती बनाम केरल सरकार' वाले ऐतिहासिक केस ने संविधान की मर्यादा को पुनर्स्थापित किया। इसे भारतीय न्यायपालिका का सबसे 'लैंडमार्क फ़ैसला' कहा जाता है। एक ऐसा निर्णय, जिसने लोकतंत्र की मर्यादा और संविधान की अक्षुण्णता को बरक़रार रखा।
कॉन्ग्रेसी नेताओं के बीच मारपीट की यह दुखद घटना इंदौर में कॉन्ग्रेस कार्यालय में हुई। दरअसल, गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान ध्वजारोहण का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। तभी दो नेताओं के बीच झंडा फहराने को लेकर विवाद हो गया और वो एक-दूसरे से उलझ पड़े।
वे जितने ज्यादा जोर से 'इंकलाब ज़िंदाबाद' बोलेंगे, वामपंथी मीडिया उतना ही ज्यादा द्रवित होगा। कोई रवीश कुमार टीवी स्टूडियो में बैठ कर कहेगा- "क्या तिरंगा हाथ में लेकर राष्ट्रगान गाने वाले और संविधान का पाठ करने वाले देश के टुकड़े-टुकड़े गैंग के सदस्य हो सकते हैं? नहीं न।"
शरजील इमाम वामपंथियों के प्रोपेगंडा पोर्टल 'द वायर' में कॉलम भी लिखता है। प्रोपेगंडा पोर्टल न्यूजलॉन्ड्री के शरजील उस्मानी ने इमाम का समर्थन किया है। जेएनयू छात्र संघ की काउंसलर आफरीन फातिमा ने भी इमाम का समर्थन करते हुए लिखा कि सरकार उससे डर गई है।
"मैं तो इस तस्वीर में उमर अब्दुल्ला को पहचान ही नहीं पा रही हूँ। मुझे काफ़ी दुख महसूस हो रहा है। मैं उदास हूँ। ये काफ़ी दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे लोकतांत्रिक राष्ट्र में ऐसा हो रहा है। ये सब आख़िर कब थमेगा?"
पार्थसारथी ने ही पी चिदंबरम के बेटे कार्ति को भी गिरफ़्तार किया था। आईपीएस ऑफिसर धीरेन्द्र शुक्ला को भी प्रेसिडेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। उन्होंने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह ने जुड़े मामले में भी जाँच की थी।
ये धमाके तब हुए हैं, जब शाहीन बाग़ विरोध-प्रदर्शन के मुख्य साज़िशकर्ता शरजील इमाम ने असम को शेष भारत से काट कर अलग करने की धमकी दी थी। भारत के 'टुकड़े-टुकड़े' करने की बात करते हुए शरजील ने कहा था कि 'चिकेन्स नेक' वाले क्षेत्र को ब्लॉक कर के पूरे उत्तर-पूर्व को शेष भारत से अलग-थलग कर देने का लक्ष्य होना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रामलीला मैदान में हुई रैली और 40 लाख लोगों की कॉलनियों को पक्का किए जाने के कारण भाजपा को फायदा हुआ है। अमित शाह छोटी-छोटी सभाएँ कर रहे हैं। सीएए के ख़िलाफ़ हुई हिंसा में विरोधी पार्टियों के नेताओं का हाथ होने की बात से भी फ़र्क़ पड़ा है।
वो कुल मिला कर 220 किलोमीटर पैदल ही चले। वहाँ निराश होकर उन्होंने अलकनंदा नदी में कूद कर प्राण त्याग करने का निश्चय लिया, लेकिन अचानक से महेश्वर बाबाजी वहाँ आए और उन्हें अपने साथ ले गए।
संविधान का मसौदा तैयार करने में अहम किरदार निभाने वाली उन महिलाओं ने क्या सपना देखा था और शाहीन बाग की औरतें कैसी मिसाल पेश कर रही हैं। यह जानने के लिए 26 जनवरी से बेहतर दिन नहीं हो सकता।
हिरासत में लिए गए लोगों से उनका डाक्यूमेंट्स दिखाने को कहा गया था, लेकिन उनके पास भारतीय नागरिकता साबित करने वाले कोई दस्तावेज नहीं थे। पुलिस को शक है कि उनमें से कुछ आपराधिक गतिविधियों में भी संलग्न हैं।
19 जनवरी 1990 की भयावह घटनाएँ बस शुरुआत थी। अंतिम प्रहार 26 जनवरी को होना था, जो उस साल जुमे के दिन थी। 10 लाख लोग जुटते। आजादी के नारे लगते। गोलियॉं चलती। तिरंगा जलता और इस्लामिक झंडा लहराता। लेकिन...
उद्योगपति आनंद महिंद्रा और बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू सहित 16 को पद्म भूषण सम्मान के लिए चुना गया है। पद्म श्री पुरस्कारों में कई आम लोगों के नाम भी शामिल हैं।
शरजील इमाम ने अलीगढ़ में समुदाय विशेष से कहा कि वे रेलवे, सड़कों को अवरुद्ध करके असम को भारत से काट दें। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया में आया यूज़र्स ने बताया कि AAP नेता अमानतुल्लाह खान पहले दिन से ही शरजील के साथ दिखाई दे रहा था।
हसन फास्ट ट्रैक कोर्ट में अपनी जमानत कराने के लिए पहुॅंचे। कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत को भी खारिज करते हुए जेल भेजने के आदेश दिए। कोर्ट के आदेश के बाद पहुॅंचे पुलिस के आला अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में लिया और मुजफ्फरनगर की जेल भेज दिया।
वो संविधान से इस हद तक घृणा करता है कि उसे 'भारत' नाम से भी नफरत है। जेएनयू के ऐसे पूर्व छात्र के बारे में जानिए, जो कहता है कि उसका बस चले तो हैदराबाद को भी लाहौर में ले जाकर रख दे। उसकी साज़िश है कि पूरे अखंड भारत में 'खलीफा राज' स्थापित हो जाए।
जनता की भागीदारी के कारण ‘स्वच्छ भारत अभियान’ ने बहुत ही कम समय में प्रभावशाली सफलता हासिल की है। यही भावना अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों में भी दिखाई देती है। चाहे रसोई गैस की सब्सिडी को छोड़ना हो, या फिर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना।
"राज्य विधानसभा ने सीएए के खिलाफ संकल्प प्रस्ताव आज पारित किया। हम केंद्र सरकार से आग्रह करते हैं कि वह इस कानून को निरस्त करे, क्योंकि यह धार्मिक आधार पर लोगों से भेदभाव करता है जो हमारे संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है।"
"ग़ैर-मुस्लिम मुस्लिमों की शर्तों पर प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हों और नारा-ए-तक़बीर लगाएँ। अगर ग़ैर-मुस्लिम ऐसा नहीं करते हैं तो इसका अर्थ है कि वो मुस्लिमों के हमदर्द नहीं हैं, उनका इस्तेमाल कर रहे हैं।"
एक नन ने बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर रेप का आरोप लगाया था। सिस्टर लूसी ने उसका समर्थन किया था। बीते साल इसके कारण उन्हें FCC ने निष्कासित कर दिया था। हालॉंकि वायनाड की अदालत ने इस पर रोक लगा दी थी।
कौन हैं वो 'मसीहा पत्रकार', जिनकी पूर्ववर्ती सरकारों में अच्छी-ख़ासी मौज रहती थी? मोदी के आने से उन्हें दिक्कत क्यों हुई? 'इंडिया टीवी' के न्यूज़ एंकर सुशांत सिन्हा से समझिए कि अवार्ड-वापसी और 'लिंचिंग' की कैसे रची गई पूरी साज़िश। लुटियंस गैंग की तिलमिलाहट का पोस्टमॉर्टम।
इससे पहले 4 एफआईआर ठाकुरगंज पुलिस थाने में दर्ज किए गए थे। इन उपद्रवियों पर दंगा करने, प्रशासन की अवज्ञा करने, अवैध रूप से जुटान करने, स्थानीय लोगों के कामकाज में व्यवधान पैदा करने और ऑन-ड्यूटी अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है।
अलीगढ़ के SSP आकाश कुल्हारी के अनुसार, शरजील के खिलाफ IPC की धारा 124ए, 153ए, 153बी और 505 (2) के अंतर्गत FIR दर्ज की जा चुकी है और उनकी टीम जल्द ही शरजील को गिरफ्तार करेगी।
"यह कहते हैं सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है। इन गद्दारों की बात सुनकर कैसे मान लूँ कि इनका खून शामिल है, यहाँ की मिट्टी में? कह रहा है असम को काट कर हिंदुस्तान से अलग कर देंगे।"
विवादित नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि आज कुछ लोग महात्मा गाँधी के हत्यारों को राष्ट्रभक्त कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए गाँधी ने बहुत कुछ किया है लेकिन आज गाँधी को हिन्दू विरोधी साबित करने की कोशिश ही रही है।
राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की सक्रियता ने शिवसेना की नींद उड़ा दी है। पार्टी के मुखपत्र दोपहर का सामना के संपादकीय में कहा गया है, "देश में घुसे पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुस्लिमों को निकालो। उन्हें निकालना ही चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं।"
वामपंथी पत्रकार रोहिणी सिंह ने पत्रकार दीपक चौरसिया को लगभग लताड़ लगाते हुए कहा कि शाहीन बाग में मुस्लिम महिलाएँ विरोध-प्रदर्शन कर रही थीं और आप (दीपक चौरसिया) वहाँ अपनी आवाज़ बुलंद करने गए थे!
"ईसाई परिवार हमारे पानी का कनेक्शन काट देते हैं। धमकी देते हैं। उन्हें (ईसाई परिवारों को) सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि हिन्दू परिवार पूजा करते हैं। उन्हें पसंद नहीं है कि हम अपने देवी- देवता को पूजें।"
वास्तविकता आज बुरका पहनकर शाहीन बाग़ में अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते हुए पत्रकारों की सामूहिक लिंचिंग कर रही है। सेकुलर शाहीन बाग़ आज ला इलाहा इल्लल्लाह और अल्हम्दुलिल्लाह का स्वर बोल रहा है, और क्योंकि यह स्वर क्रांतिजीवों, JNU-मतावलम्बियों के श्रीमुख से निकला है, इसलिए प्रोग्रेसिव लिबरल भी उनकी हाँ में हाँ मिलाता नजर आ रहा है।
सरिता विहार के लोगों ने 2 फरवरी को प्रदर्शन की योजना बनाई है। यहॉं से शाहीन बाग तक मार्च निकाला जाएगा। इनका कहना है कि आम लोगों की सहूलियत देख बंद सड़क को खोल दिया जाए।
विवाद को देखते हुए कॉलेज ने बुर्का से जुड़ा निर्देश वापस ले लिया है। कॉलेज ने पहले ड्रेस कोड में आने का निर्देश देते हुए कहा था कि परिसर और क्लासरूम में बुर्का का प्रयोग वर्जित है। इसको लेकर कुछ छात्राओं ने आपत्ति जताई थी।
"अंग्रेज मुस्लिमों के कम दुश्मन थे। 1900 से लेकर 1950 तक अंग्रेजों ने मुस्लिमों के साथ कम पक्षपात किया। लेकिन न्यायपालिका 1950 के बाद से मुस्लिमों की दुश्मन बन गई है। 1950 के बाद मुस्लिमों को एक तरह की ग़ुलामी में डाल दिया गया।"
जहॉं हिंसा हुई वह इलाका सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कुछ लोग घरों की छतों से पथराव कर रहे थे। कुछ घरों को आग के हवाले कर दिया गया। अब हालात में काबू में बताए जा रहे।
"हीबा 2 बिल्लियों को लेकर नसबंदी के लिए आईं। कर्मचारियों ने उन्होंने 5 मिनट इंतजार करने के लिए कहा, क्योंकि क्लिनिक में सर्जरी चल रही थी। मगर 2-3 मिनट के बाद ही हीबा गुस्से में आ गई और कर्मचारियों को बुरा-भला कहने लगीं। दो महिला स्टाफ सदस्यों के साथ मारपीट की, उन्हें थप्पड़ मारा।"
“हम नॉर्थ ईस्ट और हिंदुस्तान को परमानेंटली काट कर सकते हैं। परमानेंटली नहीं तो कम से कम एक-आध महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से काट ही सकते हैं। मतलब इतना मवाद डालो पटरियों पर, रोड पर कि उनको हटाने में एक महीना लगे। जाना हो तो जाएँ एयरफोर्स से।”
गोदी मीडिया, सरकार मीडिया को धमका रही है, देश में आपातकाल आ गया है, लोग लिखने से डर रहे हैं... इन सारे जुमलों के बीच पत्रकारों पर हुए हमलों की ताजा लिस्ट देखिए। समझिए कि ये हमले कौन और कहाँ कर रहा है। कौन मीडिया को लिखने से रोक रहा है, कौन उन्हें धमका रहा है।
थाईलैंड, वियतनाम, सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, नेपाल, फ्राँस और संयुक्त राज्य अमेरिका में भी इस वायरस के होने की पुष्टि की गई है। थाईलैंड में पाँच, सिंगापुर और ताइवान तीन में तीन, जापान, वियतनाम, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका में दो-दो मामले सामने आए हैं।
अपनी प्रोफाइल में SFI से ताल्लुक बताने वाला हिमांशु सिंह और अभिराम, अगर कश्मीरी हिन्दुओं के साथ खड़े हैं तो वो फ्री कश्मीर के पोस्ट को ‘दिल’ क्यों दे रहे हैं? अगर वो दीपिका की श्रद्धांजलि सभा में शांति बना कर कुछ मिनट सुन लेते तो क्या वो खड़ा रहना नहीं कहलाता? दरअसल वामपंथी गुंडों का सारा अजेंडा बाहर आ चुका है और...
दीपक चौरसिया और रवीश कुमार दोनों ही वरिष्ठ पत्रकार हैं। अंतर सिर्फ इतना है कि दोनों की सैलरी अलग-अलग जगह से आती है। लेकिन हैं दोनों ही पत्रकार। शायद शाहीन बाग वाले इस बात को समझ नहीं पाए। तभी एक तरफ वो रवीश के साथ याराना रखते हैं जबकि दीपक चौरसिया के साथ मारपीट की जाती है।
पूरे शहर में धारा-144 और कर्फ़्यू लगने के बाद भी कई जगहों पर हिंसक झड़पें हुई। बरवा टोली स्थित एक खड़े ट्रक में रात 9:30 बजे उपद्रवियों ने आग लगा दी। पुलिस जब तक वहाँ पहुँची, तब तक ट्रक धू-धू कर जल चुका था। इस घटना के बाद उस इलाके के लोग दहशत में हैं।
“अब वक्त आ गया है कि हम गैर मुस्लिमों से बोलें कि अगर हमारे हमदर्द हो तो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हो। अगर वो हमारी शर्तों पर खड़े नहीं होते तो वो हमारे हमदर्द नहीं हैं। असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी ये हमारी बात सुनेंगे।"